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कुसुम रोते हुए बोली- मुन्नी मेरी अच्छी सहेली है। कल बेचारी ने पति से छुप कर हज़ार के दो नोट दिए थे, बोली थी ‘अपने घर भेज देना, तेरे मम्मी पापा मुश्किल में हैं।’ आप उसे कुछ मत बताना।
कुसुम बोली- मैं पच्चीस हजार उसके डिब्बे में वापस रख दूँगी, कम से कम मुन्नी को पैसे तो मिल जाएँगे।
दो दिन बाद मुन्नी का फ़ोन आया, वो मुझसे मिलना चाह रही थी। हम लोग अपने चुदाई अड्डे पर मिले। साड़ी उतारकर मुझसे चिपकते हुए मुन्नी बोली- चोर ने मेरे पैसे वापस उसी डिब्बे में रख दिए। ये देखो पूरे पच्चीस हजार हैं। उसने एक माफ़ी मांगने का पत्र भी लिखा है।
मुन्नी ने मेरे बचे हुए पैसे वापस कर दिए। मुन्नी थोड़ी उदास सी दिख रही थी, मैंने मुन्नी की पप्पी लेते हुए कहा- तुम उदास क्यों हो?
मुन्नी रोते हुए बोली- मेरे पैसे कुसुम ने चुराए थे।
मैंने अनजान बनते हुए पूछा- तुम्हें कैसे पता?
मुन्नी बोली- दो दिन पहले दया करके मैंने दो हज़ार के नोट उसे दिए थे, उसमें से एक के ऊपर मुन्नी लिखा था, जब भी मेरी डोक्टरनी मुझे पैसे देती है तो सबसे ऊपर वाले नोट पर मेरा नाम लिखा होता है। चोर ने जो पच्चीस हजार के नोट वापस रखे थे उनमें से एक नोट वो भी है जो मैंने कुसुम को दिया था।
मुन्नी गुस्से से बोली- कुतिया रंडी ने मेरे पैसे चुराए थे। कुसुम के लिए मैंने अपनी प्यारी सहेली गीता को चाल से निकलवाया, कुतिया ने मुझे धोखा दिया है। हरामिन को कुतिया की तरह चुदना पड़ेगा मेरे और गीता के सामने।
मुन्नी मुझसे बोली- तुम उसकी गांड मारोगे न, जैसे तुमने मेरी मारी थी, वैसे ही उसकी चोदना।
मैंने मुन्नी से कहा- कुसुम को तेरे सामने सजा देंगे और सब झगड़े की जड़ तो यही है, इसकी जवानी तो मैं तीन तीन लण्डों से चुदवाऊँगा। तेरे से भी ज्यादा इसकी चोदी जाएगी।
मुन्नी मुझसे चिपकी रही, उसकी आँखों में आँसू थे। मैंने उसका पल्लू हटाया और कान में बोला- दूध तो पिला दो !
मुन्नी ने ब्लाउज के बटन खोलकर दोनों स्तन बाहर निकाल दिए, मैंने बारी बारी उसकी दोनों निप्पल चूसीं और बोला- मुन्नी की मुन्नी मुझसे गुस्सा है क्या?
मुन्नी मुझे देखकर मुस्कराई और मुझसे चिपकते हुए बोली- मुन्नी की मुन्नी तो तुम्हारी गुलाम है, रोज़ तुम्हारे लण्ड की राह देखती है। मुन्नी ने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और अपनी टांगें फ़ैला कर चूत का दरवाज़ा मेरे लण्ड के लिए खोल दिया।
इसके बाद एक घंटे तक हम दोनों ने चुदाई का खेल खेला, अब मुन्नी सामान्य थी, मैंने मुन्नी से कहा- कुसुम को माफ़ कर दो ! अगर वो पैसे नहीं रखती, तो तुम्हें पता भी नहीं चलता।
मुन्नी बोली मैं उसे माफ़ कर देती लेकिन जब गीता ने मुझे चुदवाया तब मुझे पता चला कि दूसरे की चुदती देखना कितनी बुरी बात है। मुझे कुसुम को यह अहसास करवाना ही पड़ेगा कि दूसरे की चुदती देखने का मज़ा लोगी तो एक दिन अपनी भी चुदवानी पड़ेगी। तुम मेरे साथ हो न? कुसुम की चोदोगे न?
मैंने हामी भरते हुए कहा- मुझे तो कुसुम से गीता भाभी और भैया की भी बेइज्ज़ती का बदला लेना है, उसकी चुदाई तो करवानी पड़ेगी ही। मैंने मुन्नी के कान में कुसुम की चुदाई का प्लान बताया। मेरा प्लान सुनकर मुन्नी बहुत खुश हुई, इसके बाद हम लोग अलग हो गए।
रात को जब मैं घर पहुँचा तो भाभी ने दरवाज़ा बंद किया और मेरे गालों पर पप्पी की बारिश करते हुए बोलीं- मज़ा आ गया। आज मुन्नी आई थी कह रही थी उसके पैसे कुसुम कुतिया ने ही चुराए हैं, उसको वो अब वैसे ही चुदवाएगी जैसे खुद चुदी थी। मुझसे कह रही थी उसी फ्लैट में कुसुम की गांड और चूत बजाएंगे। सच तुम्हारे कारण ही मैं बदला लेने मैं सफल हुई।
मैंने भाभी से कहा- मोहन भैया के थप्पड़ का भी बदला लेना है, कुसुम की चूत मोहन भैया से भी चुदवानी है। भाभी को पता नहीं था कि कुसुम ने मोहन को थप्पड़ मारा था। मैंने उन्हें पूरी बात बता दी। भाभी उत्साह से चिपकती हुई बोलीं- आह, बड़ा मज़ा आएगा जब मोहन का लण्ड उसकी चूत में घुसेगा, अपने सामने मोहन से चुदवाऊँगी कुतिया को।
भाभी के होंट चूसते हुए मैंने कहा- अब जरा प्यार वाला दूधू पिलाओ !
भाभी ने अपना ब्लाउज उठाया और अपने दोनों गोल संतरे बाहर निकाल दिए। मैंने के एक एक बार दोनों को दबाते हुए जी भरकर चूसा। शाम को मोहन भैया को भाभी ने बता दिया कि कुसुम उन्हीं हाथों से पकड़ कर प्यार से उनका लण्ड अपनी चूत में लगाएगी जिससे उसने आपको थप्पड़ मारा था, साथ ही साथ यह भी बताया ये सब मेरे कारण संभव हुआ है।
मोहन भैया कुसुम की चुदाई गीता के सामने की बात सुनकर बहुत खुश और उत्तेजित थे। अगले दिन मोहन भैया के जाने के बाद सुबह भाभी और मैं साथ साथ नहाए और खुशी ख़ुशी मैं भाभी ने मुझसे अपनी चूत का मर्दन दो बार करवाया।
कुसुम बोली- मैं पच्चीस हजार उसके डिब्बे में वापस रख दूँगी, कम से कम मुन्नी को पैसे तो मिल जाएँगे।
दो दिन बाद मुन्नी का फ़ोन आया, वो मुझसे मिलना चाह रही थी। हम लोग अपने चुदाई अड्डे पर मिले। साड़ी उतारकर मुझसे चिपकते हुए मुन्नी बोली- चोर ने मेरे पैसे वापस उसी डिब्बे में रख दिए। ये देखो पूरे पच्चीस हजार हैं। उसने एक माफ़ी मांगने का पत्र भी लिखा है।
मुन्नी ने मेरे बचे हुए पैसे वापस कर दिए। मुन्नी थोड़ी उदास सी दिख रही थी, मैंने मुन्नी की पप्पी लेते हुए कहा- तुम उदास क्यों हो?
मुन्नी रोते हुए बोली- मेरे पैसे कुसुम ने चुराए थे।
मैंने अनजान बनते हुए पूछा- तुम्हें कैसे पता?
मुन्नी बोली- दो दिन पहले दया करके मैंने दो हज़ार के नोट उसे दिए थे, उसमें से एक के ऊपर मुन्नी लिखा था, जब भी मेरी डोक्टरनी मुझे पैसे देती है तो सबसे ऊपर वाले नोट पर मेरा नाम लिखा होता है। चोर ने जो पच्चीस हजार के नोट वापस रखे थे उनमें से एक नोट वो भी है जो मैंने कुसुम को दिया था।
मुन्नी गुस्से से बोली- कुतिया रंडी ने मेरे पैसे चुराए थे। कुसुम के लिए मैंने अपनी प्यारी सहेली गीता को चाल से निकलवाया, कुतिया ने मुझे धोखा दिया है। हरामिन को कुतिया की तरह चुदना पड़ेगा मेरे और गीता के सामने।
मुन्नी मुझसे बोली- तुम उसकी गांड मारोगे न, जैसे तुमने मेरी मारी थी, वैसे ही उसकी चोदना।
मैंने मुन्नी से कहा- कुसुम को तेरे सामने सजा देंगे और सब झगड़े की जड़ तो यही है, इसकी जवानी तो मैं तीन तीन लण्डों से चुदवाऊँगा। तेरे से भी ज्यादा इसकी चोदी जाएगी।
मुन्नी मुझसे चिपकी रही, उसकी आँखों में आँसू थे। मैंने उसका पल्लू हटाया और कान में बोला- दूध तो पिला दो !
मुन्नी ने ब्लाउज के बटन खोलकर दोनों स्तन बाहर निकाल दिए, मैंने बारी बारी उसकी दोनों निप्पल चूसीं और बोला- मुन्नी की मुन्नी मुझसे गुस्सा है क्या?
मुन्नी मुझे देखकर मुस्कराई और मुझसे चिपकते हुए बोली- मुन्नी की मुन्नी तो तुम्हारी गुलाम है, रोज़ तुम्हारे लण्ड की राह देखती है। मुन्नी ने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और अपनी टांगें फ़ैला कर चूत का दरवाज़ा मेरे लण्ड के लिए खोल दिया।
इसके बाद एक घंटे तक हम दोनों ने चुदाई का खेल खेला, अब मुन्नी सामान्य थी, मैंने मुन्नी से कहा- कुसुम को माफ़ कर दो ! अगर वो पैसे नहीं रखती, तो तुम्हें पता भी नहीं चलता।
मुन्नी बोली मैं उसे माफ़ कर देती लेकिन जब गीता ने मुझे चुदवाया तब मुझे पता चला कि दूसरे की चुदती देखना कितनी बुरी बात है। मुझे कुसुम को यह अहसास करवाना ही पड़ेगा कि दूसरे की चुदती देखने का मज़ा लोगी तो एक दिन अपनी भी चुदवानी पड़ेगी। तुम मेरे साथ हो न? कुसुम की चोदोगे न?
मैंने हामी भरते हुए कहा- मुझे तो कुसुम से गीता भाभी और भैया की भी बेइज्ज़ती का बदला लेना है, उसकी चुदाई तो करवानी पड़ेगी ही। मैंने मुन्नी के कान में कुसुम की चुदाई का प्लान बताया। मेरा प्लान सुनकर मुन्नी बहुत खुश हुई, इसके बाद हम लोग अलग हो गए।
रात को जब मैं घर पहुँचा तो भाभी ने दरवाज़ा बंद किया और मेरे गालों पर पप्पी की बारिश करते हुए बोलीं- मज़ा आ गया। आज मुन्नी आई थी कह रही थी उसके पैसे कुसुम कुतिया ने ही चुराए हैं, उसको वो अब वैसे ही चुदवाएगी जैसे खुद चुदी थी। मुझसे कह रही थी उसी फ्लैट में कुसुम की गांड और चूत बजाएंगे। सच तुम्हारे कारण ही मैं बदला लेने मैं सफल हुई।
मैंने भाभी से कहा- मोहन भैया के थप्पड़ का भी बदला लेना है, कुसुम की चूत मोहन भैया से भी चुदवानी है। भाभी को पता नहीं था कि कुसुम ने मोहन को थप्पड़ मारा था। मैंने उन्हें पूरी बात बता दी। भाभी उत्साह से चिपकती हुई बोलीं- आह, बड़ा मज़ा आएगा जब मोहन का लण्ड उसकी चूत में घुसेगा, अपने सामने मोहन से चुदवाऊँगी कुतिया को।
भाभी के होंट चूसते हुए मैंने कहा- अब जरा प्यार वाला दूधू पिलाओ !
भाभी ने अपना ब्लाउज उठाया और अपने दोनों गोल संतरे बाहर निकाल दिए। मैंने के एक एक बार दोनों को दबाते हुए जी भरकर चूसा। शाम को मोहन भैया को भाभी ने बता दिया कि कुसुम उन्हीं हाथों से पकड़ कर प्यार से उनका लण्ड अपनी चूत में लगाएगी जिससे उसने आपको थप्पड़ मारा था, साथ ही साथ यह भी बताया ये सब मेरे कारण संभव हुआ है।
मोहन भैया कुसुम की चुदाई गीता के सामने की बात सुनकर बहुत खुश और उत्तेजित थे। अगले दिन मोहन भैया के जाने के बाद सुबह भाभी और मैं साथ साथ नहाए और खुशी ख़ुशी मैं भाभी ने मुझसे अपनी चूत का मर्दन दो बार करवाया।