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ससुर जी: बेटा..कुछ भी कहो...हमने तुम-दोनों जैसा प्यार नहीं देखा!!! तुम दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हो..और भगवान तुम्हारी जोड़ी बनाये रखे|
शाम को जाते-जाते उन्होंने हमें आशीर्वाद दिया और आने वाले मेहमान को भी अपना प्यार भरा आशीर्वाद देके जाने लगे| हाँ उन्होंने मुझे शगुन में कुछ पैसे दिए जिनहिं मेरे लाख मना करने पर भी वो नहीं माने|
15 दिसंबर को सतीश जी से मुझे हमारा Marriage Certificate मिल गया और मैं आयुष और नेहा के स्कूल पहुँच गया| Admin में जाके मैंने अपना marriage certificate की कॉपी और ओरिजिनल दिखा के दोनोंके Father's Name को change करा दिया| So now officially I'm their father!
So guys, here's a turn of events!
My Honeymoon just got canceled! क्योंकि आयुष और नेहा ने जिद्द पकड़ ली की हम भी जायेंगे|
सामान पैक था, tickets तैयार थीं और होटल booked था!
आयुष: पापा हम भी जायेंगे!
नेहा: पापा आप हमें छोड़ के चले जाओगे?
मैं: बेटा किसने कहा की हम आपको छोड़के जा रहे हैं? Come here ...
मैंने दोनों को गले लगा लिया अपना फोन निकला और होटल फोन करके एक एक्स्ट्रा कमरा बुक करने वाला था की संगीता नाराज हो गई;
संगीता: तुम दोनों बड़े हो गए हो! Just act like a grownup!
मैं: Hey ... Hey ... Hey .... मैं एक एक्स्ट्रा कमरा बुक कर रहा हूँ|
संगीता: Oh yeah ... और इन दोनों शैतानों का ध्यान कौन रखेगा?
मैं: okay ... बाबू calm down .... I'll figure out something! नेहा ... आयसुह ...बेटा आपका स्कूल है ना? तो आप हमारे साथ कैसे आ सकते हो?
आयुष: तो पापा आप हमें Winters holidays में हमें साथ ले चलो?
मैं दोनों के reason को सुन के हँस पड़ा|
मैं: clever हाँ...
संगीता: आपने देखा इन्हें?
मैं: okay done!
संगीता: Really? कभी-कभी लगता है मैं आपको कभी नहीं समझ पाऊँगी! बच्चों की ख़ुशी के लिए आप कुछ भी करते हो! हमारा Honeymoon तक cancel कर दिया?
मैं: बाबू cancel नहीं postpone. आप बताओ बच्चों का दिल तोड़के हम कैसे जा सकते हैं? उनका भी मन है घूमने का...
संगीता: और पिताजी से क्या कहोगे?
मैं: (लम्बी सांस छोड़ते हुए) देखते हैं...!
हम चारों बैठक में आये ... गाडी रात की थी ...या ये कहूँ की है ..... पर change of plans!
पिताजी: सारी तैयारी हो गई?
मैं: अ.......
संगीता: पिताजी हम नहीं जा रहे|
माँ: क्या? पर क्यों? मानु..क्या किया तूने?
मैं: नेहा और आयुष साथ आने की जिद्द कर रहे हैं| अब इनका दिल तोड़के कैसे जाउँ?
पिताजी: इधर आओ बेटा (उन्होंने नेहा और आयुष को अपने पास बुलाया और उन्हें समझाने लगे|) देखो बेटा ..आपके मम्मी-पापा को जाने दो...मैं और आपकी दादी जी आपको घुमाने इनसे अच्छी जगह ले जायेंगे| ये तो ठण्ड में अकड़ जायेंगे...हम आपको ताजमहल दिखाने ले जायेंगे|
आयुष: नहीं दादा जी... मैं पापा के साथ रहूँगा| (और वो आके मेरी कमर से हाथ लपेट के खड़ा हो गया|)
नेहा: हाँ दादा जी... मैं भी आयुष के साथ पापा के साथ ही जाऊँगी| (नेहा ने पिताजी को गले लगा लिया और सुबकने लगी|)
पिताजी: बेटा देखो जिद्द नहीं करते|
माँ: आप सब की कोशिश हो गई तो मैं कुछ कहूँ| बच्चों आप में से किस को गाजर का हलवा खाना है?
आयुष: मुझे! दीदी चलो .... (आयुष उठ के नेहा को चुप कराते हुए उसे माँ के पास ले जाने लगा|)
माँ: ऐसे नहीं...पहले मम्मी-पापा को जाने दो उसके बाद मैं रोज तुम्हें गाजर का हलवा खिलाऊँगी...!
आयुष: दादी जी ऐसा करते है की हम वापस आ के खाएंगे| (अब दोनों वापस मेरे पास आ गए|)
मैं: पिताजी ...कोई फायदा नहीं ये नहीं मानने वाले| मैं हम सब की टिकट्स बुक कराता हूँ| वैसे भी साल हो गए हमें Family Holiday पे गए हुए... आप लोग साथ होगे तो इन दोनों का भी ध्यान रख पाओगे!
पिताजी: बेटा तुझे पता है ना काम कितना फैला हुआ है? हम कैसे जा सकते हैं? तू ऐसा कर अपनी माँ को साथ ले जा|
माँ: वाह! तो यहाँ आपका ख्याल कौन रखेगा?
संगीता: पिताजी जायेंगे तो सारे नहीं तो कोई भी नहीं|
मैं: Agreed!
संगीता: आप कल से काम संभाल लो ..और जल्दी से काम निपटा लो...या कम से कम काम तो कम हो जायेगा तो संतोष भैया भी संभाल लेंगे|
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शाम को जाते-जाते उन्होंने हमें आशीर्वाद दिया और आने वाले मेहमान को भी अपना प्यार भरा आशीर्वाद देके जाने लगे| हाँ उन्होंने मुझे शगुन में कुछ पैसे दिए जिनहिं मेरे लाख मना करने पर भी वो नहीं माने|
15 दिसंबर को सतीश जी से मुझे हमारा Marriage Certificate मिल गया और मैं आयुष और नेहा के स्कूल पहुँच गया| Admin में जाके मैंने अपना marriage certificate की कॉपी और ओरिजिनल दिखा के दोनोंके Father's Name को change करा दिया| So now officially I'm their father!
So guys, here's a turn of events!
My Honeymoon just got canceled! क्योंकि आयुष और नेहा ने जिद्द पकड़ ली की हम भी जायेंगे|
सामान पैक था, tickets तैयार थीं और होटल booked था!
आयुष: पापा हम भी जायेंगे!
नेहा: पापा आप हमें छोड़ के चले जाओगे?
मैं: बेटा किसने कहा की हम आपको छोड़के जा रहे हैं? Come here ...
मैंने दोनों को गले लगा लिया अपना फोन निकला और होटल फोन करके एक एक्स्ट्रा कमरा बुक करने वाला था की संगीता नाराज हो गई;
संगीता: तुम दोनों बड़े हो गए हो! Just act like a grownup!
मैं: Hey ... Hey ... Hey .... मैं एक एक्स्ट्रा कमरा बुक कर रहा हूँ|
संगीता: Oh yeah ... और इन दोनों शैतानों का ध्यान कौन रखेगा?
मैं: okay ... बाबू calm down .... I'll figure out something! नेहा ... आयसुह ...बेटा आपका स्कूल है ना? तो आप हमारे साथ कैसे आ सकते हो?
आयुष: तो पापा आप हमें Winters holidays में हमें साथ ले चलो?
मैं दोनों के reason को सुन के हँस पड़ा|
मैं: clever हाँ...
संगीता: आपने देखा इन्हें?
मैं: okay done!
संगीता: Really? कभी-कभी लगता है मैं आपको कभी नहीं समझ पाऊँगी! बच्चों की ख़ुशी के लिए आप कुछ भी करते हो! हमारा Honeymoon तक cancel कर दिया?
मैं: बाबू cancel नहीं postpone. आप बताओ बच्चों का दिल तोड़के हम कैसे जा सकते हैं? उनका भी मन है घूमने का...
संगीता: और पिताजी से क्या कहोगे?
मैं: (लम्बी सांस छोड़ते हुए) देखते हैं...!
हम चारों बैठक में आये ... गाडी रात की थी ...या ये कहूँ की है ..... पर change of plans!
पिताजी: सारी तैयारी हो गई?
मैं: अ.......
संगीता: पिताजी हम नहीं जा रहे|
माँ: क्या? पर क्यों? मानु..क्या किया तूने?
मैं: नेहा और आयुष साथ आने की जिद्द कर रहे हैं| अब इनका दिल तोड़के कैसे जाउँ?
पिताजी: इधर आओ बेटा (उन्होंने नेहा और आयुष को अपने पास बुलाया और उन्हें समझाने लगे|) देखो बेटा ..आपके मम्मी-पापा को जाने दो...मैं और आपकी दादी जी आपको घुमाने इनसे अच्छी जगह ले जायेंगे| ये तो ठण्ड में अकड़ जायेंगे...हम आपको ताजमहल दिखाने ले जायेंगे|
आयुष: नहीं दादा जी... मैं पापा के साथ रहूँगा| (और वो आके मेरी कमर से हाथ लपेट के खड़ा हो गया|)
नेहा: हाँ दादा जी... मैं भी आयुष के साथ पापा के साथ ही जाऊँगी| (नेहा ने पिताजी को गले लगा लिया और सुबकने लगी|)
पिताजी: बेटा देखो जिद्द नहीं करते|
माँ: आप सब की कोशिश हो गई तो मैं कुछ कहूँ| बच्चों आप में से किस को गाजर का हलवा खाना है?
आयुष: मुझे! दीदी चलो .... (आयुष उठ के नेहा को चुप कराते हुए उसे माँ के पास ले जाने लगा|)
माँ: ऐसे नहीं...पहले मम्मी-पापा को जाने दो उसके बाद मैं रोज तुम्हें गाजर का हलवा खिलाऊँगी...!
आयुष: दादी जी ऐसा करते है की हम वापस आ के खाएंगे| (अब दोनों वापस मेरे पास आ गए|)
मैं: पिताजी ...कोई फायदा नहीं ये नहीं मानने वाले| मैं हम सब की टिकट्स बुक कराता हूँ| वैसे भी साल हो गए हमें Family Holiday पे गए हुए... आप लोग साथ होगे तो इन दोनों का भी ध्यान रख पाओगे!
पिताजी: बेटा तुझे पता है ना काम कितना फैला हुआ है? हम कैसे जा सकते हैं? तू ऐसा कर अपनी माँ को साथ ले जा|
माँ: वाह! तो यहाँ आपका ख्याल कौन रखेगा?
संगीता: पिताजी जायेंगे तो सारे नहीं तो कोई भी नहीं|
मैं: Agreed!
संगीता: आप कल से काम संभाल लो ..और जल्दी से काम निपटा लो...या कम से कम काम तो कम हो जायेगा तो संतोष भैया भी संभाल लेंगे|
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