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Guest
उनके साथ इस तरह पिक्चर के लिए बैठे हुए पुरानी यादें ताजा होने लगीं| पुरानी यादों से मेरा मतलब ये नहीं की बहुत साल बाद हम पिक्चर देखने आये थे...पर वो एहसास याद आया जब मैं इनके साथ पिक्चर देखने आया करती थी और हमेशा इनके कन्धों पे सर रख के पिक्चर enjoy किया करती थी| आज जब मैं इनसे दूर बैठ रही हूँ तो मुझे बहुत बुरा लग रहा था| इनका मेरे कंधे पे हाथ रखना इशारा था की मैं इनमें सिमट जाऊँ पर ......दर रही थी की कहीं ये मेरा मन पढ़ लेंगे तो depressed हो जायेंगे| इसलिए मैं इनसे दूर रही! और believe me when I say it was not easy! इनके लिए मेरे मन में प्यार कम नहीं हुआ था पर मैं उसे जतानहीं पा रही थी| बिना किसी गलती के उनको सजा दे रही थी!
हमने पिक्चर देखि.... पता नहीं बच्चों के समझ में आई या नहीं पर वो खुश लग रहे थे| चलो कोई तो खुश था! पिक्चर के बाद हम घर पहुँचे पर पूरे रास्ते वो चुप बैठी रही| मेरे पास extra चाभी थी, जब हम अंदर पहुँचे तो माँ और पिताजी दोनों जाग रहे थे और टी.वी. देख रहे थे|
मैं: आप सोये नहीं?
पिताजी: नहीं बेटा... तेरी माँ को CID देखना था तो मैंने सोचा की आज मैं भी देखूं की ACP प्रदुमन "कुछ तो गड़बड़ है" कैसे बोलता है? पर देखो सीरियल खत्म होने को आया पर अभी तक इसने कुछ भी नहीं किया!
बच्चे हँसने लगे पर हम दोनों के चेहरों पर कोई भाव नहीं था|
मैं: चलिए अब सो जाते हैं|
आयुष: पापा मैं आपके पास सोऊँगा|
मैं: हम्म्म्म...
पिताजी: क्यों भई आज दादा की कहानी सुननी नहीं?
आयुष: कल सुनूंगा...वो भी दो!
पिताजी: पर बेटा जगह कम पड़ेगी?
मैं: कोई बात नहीं पिताजी manage हो जायेगा|
पिताजी: कल carpenter को बुला के तुम्हारा Bed बड़ा करवा देते हैं..हा..हा..हा...हा...
मैं: जी यही ठीक होगा|
हमने बारी-बारी से कपडे बदले और रजाई में घुस गए|आयुष और नेहा बीच में सोये थे| आयुष मेरी तरफ था और नेहा संगीता की तरफ| पर दोनों बच्चों ने करवाय मेरी तरफ ले रखी थी| और मेरी करवट भी उनकी तरफ थी| संगीता ने नजाने क्यों दूसरी तरफ करवट ले रखी थी| बच्चे कहानी सुनते-सुनते सो गए पर मेरी नींद उड़ चुकी थी| सारी रात बस बच्चों की पीठ सहलाता रहा ताकि वो इत्मीनान से सोते रहे|हालाँकि संगीता मेरे हाथ की पहुँच से दूर थी पर मैं मन ही मन कह रहा था की वो चैन से सो जाये| एक गाना याद आता है;
"राम करे ऐसा हो जाये ...
मेरी नींदिया तोहे मिल जाये
मैं जागूँ तू सो जाए....
मैं जागूँ तू सो जाये!!!
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हमने पिक्चर देखि.... पता नहीं बच्चों के समझ में आई या नहीं पर वो खुश लग रहे थे| चलो कोई तो खुश था! पिक्चर के बाद हम घर पहुँचे पर पूरे रास्ते वो चुप बैठी रही| मेरे पास extra चाभी थी, जब हम अंदर पहुँचे तो माँ और पिताजी दोनों जाग रहे थे और टी.वी. देख रहे थे|
मैं: आप सोये नहीं?
पिताजी: नहीं बेटा... तेरी माँ को CID देखना था तो मैंने सोचा की आज मैं भी देखूं की ACP प्रदुमन "कुछ तो गड़बड़ है" कैसे बोलता है? पर देखो सीरियल खत्म होने को आया पर अभी तक इसने कुछ भी नहीं किया!
बच्चे हँसने लगे पर हम दोनों के चेहरों पर कोई भाव नहीं था|
मैं: चलिए अब सो जाते हैं|
आयुष: पापा मैं आपके पास सोऊँगा|
मैं: हम्म्म्म...
पिताजी: क्यों भई आज दादा की कहानी सुननी नहीं?
आयुष: कल सुनूंगा...वो भी दो!
पिताजी: पर बेटा जगह कम पड़ेगी?
मैं: कोई बात नहीं पिताजी manage हो जायेगा|
पिताजी: कल carpenter को बुला के तुम्हारा Bed बड़ा करवा देते हैं..हा..हा..हा...हा...
मैं: जी यही ठीक होगा|
हमने बारी-बारी से कपडे बदले और रजाई में घुस गए|आयुष और नेहा बीच में सोये थे| आयुष मेरी तरफ था और नेहा संगीता की तरफ| पर दोनों बच्चों ने करवाय मेरी तरफ ले रखी थी| और मेरी करवट भी उनकी तरफ थी| संगीता ने नजाने क्यों दूसरी तरफ करवट ले रखी थी| बच्चे कहानी सुनते-सुनते सो गए पर मेरी नींद उड़ चुकी थी| सारी रात बस बच्चों की पीठ सहलाता रहा ताकि वो इत्मीनान से सोते रहे|हालाँकि संगीता मेरे हाथ की पहुँच से दूर थी पर मैं मन ही मन कह रहा था की वो चैन से सो जाये| एक गाना याद आता है;
"राम करे ऐसा हो जाये ...
मेरी नींदिया तोहे मिल जाये
मैं जागूँ तू सो जाए....
मैं जागूँ तू सो जाये!!!
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