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Guest
अब ये सुनके मेरे अंदर आग भड़क उठी और मैं गुस्से से चिलाते हुआ बोला;
मैं: बस! अब और नहीं सुनूँगा मैं... आयुष मेरे बेटा है और इसे कोई नहीं जुठला सकता| गलती आपकी है दादा ...आपने सब कुछ जानते हुए इस (चन्दर) की शादी संगीता से की| आपको पता था की शादी से पहले आपका बेटा क्या गुल खिलता है और शादी के बाद भी इसने क्या गुल खिलाये वो भी आप जानते हो| आपने एक ऐसी लड़की की जिंदगी बर्बाद कर दी जिसने आपका कुछ नहीं बिगाड़ा| कह दीजिये की ये मामा जी के घर बार-बार क्यों जाता है आपको नहीं पता? वहाँ जाके ये क्या-क्या करता है? कह दीजिये? शादी की रात ही संगीता को इसके चरित्र का पता लग चूका था इसलिए उसने इसे खुद को छूने नहीं दिया| अब ऐसे में अगर संगीता को मुझसे प्यार हो गया तो क्या गलत किया हमने? शादी की ना कोई गलत रिश्ते तो नहीं बनाये हमने? पूरे रीती रिवाजों से शादी की है कोई पाप नहीं किया!
चन्दर गुस्से में उठ खड़ा हुआ और चिल्लाते हुए बोला;
चन्दर: ओये? बहुत सुन लिया तेरा? बकवास ना कर ....
मैं तो पहले ही गुस्से में जल रहा था और उसकी हरकत ने आग में घी का काम किया और मन भी गुस्से में उठ खड़ा हुआ और चिल्लाते हुए बोला;
मैं: Oyeeeee! भूल गया उस दिन कैसे ठुकाई की थी तेरी? दुबारा करूँ...यहीं पे सब के सामने? साले तुझे भागा-भगा के मारूंगा और यहाँ तो कोई police station भी नहीं है कोई complaint करेगा? उस दिन तो तुझे जिन्दा छोड़ दिया था पर इस बार नहीं छोड़ूंगा!
मेरी गर्जन सुन के उसकी फ़ट गई और वो चुप बैठ गया| उसका डर उसके चेहरे से झलक रहा था और किसी हद्द तक बड़के दादा भी डर चुके थे!
पंच: शांत हो जाओ तुम दोनों! लड़ाई-झगडे से कभी कोई हल नहीं निकला|
मैं: आप बस इससे कह दीजिये की अगर आज के बाद ये मेरे परिवार के आस-पास भी भटका तो मैं इसे जिन्दा नहीं छोड़ूंगा|
बड़के दादा: (आँखें चुराते हुए कहा) बेटा! मैं तुम्हें वचन देता हूँ आज के बाद ये हम आयुष के लिए कभी भी कोई .........
उन्होंने बात छोड़ दी पर पंचों ने जोर दे के बात पूरी कराई|
बड़के दादा: बेटा आज के बाद हम या हमारे परिवार का कोई भी इंसान तुम या तुम्हारे परिवार के रास्ते में नहीं आयगी| हम आयुष को भूल जायेंगे और कभी उसकी हिरासत के लिए कोई दावा नहीं करेंगे!
पंच: तो ये तय रहा की तुम्हारे बड़के दादा की तरफ से कभी भी कोई दावा नहीं किया जायेगा| भविष्य में ऐसी कोई हरकत दुबारा नहीं होगी और भगवान न चाहे ऐसा कुछ हुआ तो हम तुम्हारा (बड़के दादा का) भी हुक्का-पानी बंद कर देंगे और मानु तुम्हें पूरा हक़ है पुलिस में FIR दर्ज करने का और अगर तुमने नहीं की तो हम कर देंगे!
और ये फैसला सुना के पंच उठ खड़े हुए पर मैं उनसे एक बात करना चाहता था;
मैं: पंचों मैं आप सब से कुछ पूछना चाहता हूँ?
पंच: हाँ पूछो?
मैं: मैंने देखा है की माँ-बाप के किये की सजा बच्चों को मिलती है| पर ये कभी नहीं देखा की बच्चों के किये की गलती माँ-बाप को दी जाती हो! तो मेरे किये की गलती आप मेरे माँ-बाप को क्यों दे रहे हो? मेरे अनुसार मैंने कोई गलती नहीं की ...प्यार किया है और अगर आप लोगों को ये गलती लगती है तो गलती सही पर इसके लिए आप मेरे माता-पिता का हुक्का-पानी क्यों बंद कर रहे हैं? करना है तो मेरा करिये ...मैं आपसे वादा करता हूँ की ना मैं, न मेरी पत्नी और ना मेरे बच्चे...कोई भी इस गाँव में कदम नहीं रखेगा| पर मेरे पिता वो तो इसी गाँव में पैदा हुए हैं...ये उनकी जन्म भूमि है और उन्हें गर्व है की वो इस मिटटी में जन्में और इसी में मिलना चाहेंगे पर आपका एक फैसला उनके लिए कितना दुखदाई है ये आप शायद नहीं समझते| यहाँ उनके पिता सामान भाई हैं, माँ सामान भाभी हैं ...कृपया उन्हें अपने ही परिवार से दूर न रखें! मेरी बस आपसे एक ही गुजारिश है की आप उन्हें यहाँ रहने की इज्जाजत दें, और ये उनकी तरफ से नहीं है बल्कि मेरी तरफ से गुजारिश है| (मैंने उनके आगे अपने हाथ जोड़े)
पंच: देखो मानु ....तुम्हारे बड़के दादा ही उनसे कोई सरोकार नहीं रखना चाहते! चलो हम तुम्हारी बात मान भी ले तो.... वो यहाँ रह सकते हैं पर उन्हें तुम से अपने सारे रिश्ते-नाते तोड़ने होंगे?
मैं: कोई माँ-बाप अपने ही खून से रिश्ता कैसे तोड़ सकते हैं? आपने अभी खुद देखा ना की बड़के दादा अपने बेटे के गलत होने पर भी उसका साथ दे रहे थे और मैं तो बिलकुल सही था तो भला मेरे माँ-पिताजी मेरा पक्ष क्यों नहीं लेंगे? रही बात बड़के दादा के गुस्से की तो किसी भी इंसान का गुस्सा उसकी उम्र से लम्बा नहीं होता|
पंच: हम इसमें कुछ नहीं कर सकते|
और वो चले गए! अब मेरा यहाँ रुकने का point नहीं बचा था तो मैं ने अपना बैग उठाया और जाने लगा| चौराहे पे मुझे अजय भैया और रसिका भाभी मिले और वरुण भी उनके साथ था|
मैं: बस! अब और नहीं सुनूँगा मैं... आयुष मेरे बेटा है और इसे कोई नहीं जुठला सकता| गलती आपकी है दादा ...आपने सब कुछ जानते हुए इस (चन्दर) की शादी संगीता से की| आपको पता था की शादी से पहले आपका बेटा क्या गुल खिलता है और शादी के बाद भी इसने क्या गुल खिलाये वो भी आप जानते हो| आपने एक ऐसी लड़की की जिंदगी बर्बाद कर दी जिसने आपका कुछ नहीं बिगाड़ा| कह दीजिये की ये मामा जी के घर बार-बार क्यों जाता है आपको नहीं पता? वहाँ जाके ये क्या-क्या करता है? कह दीजिये? शादी की रात ही संगीता को इसके चरित्र का पता लग चूका था इसलिए उसने इसे खुद को छूने नहीं दिया| अब ऐसे में अगर संगीता को मुझसे प्यार हो गया तो क्या गलत किया हमने? शादी की ना कोई गलत रिश्ते तो नहीं बनाये हमने? पूरे रीती रिवाजों से शादी की है कोई पाप नहीं किया!
चन्दर गुस्से में उठ खड़ा हुआ और चिल्लाते हुए बोला;
चन्दर: ओये? बहुत सुन लिया तेरा? बकवास ना कर ....
मैं तो पहले ही गुस्से में जल रहा था और उसकी हरकत ने आग में घी का काम किया और मन भी गुस्से में उठ खड़ा हुआ और चिल्लाते हुए बोला;
मैं: Oyeeeee! भूल गया उस दिन कैसे ठुकाई की थी तेरी? दुबारा करूँ...यहीं पे सब के सामने? साले तुझे भागा-भगा के मारूंगा और यहाँ तो कोई police station भी नहीं है कोई complaint करेगा? उस दिन तो तुझे जिन्दा छोड़ दिया था पर इस बार नहीं छोड़ूंगा!
मेरी गर्जन सुन के उसकी फ़ट गई और वो चुप बैठ गया| उसका डर उसके चेहरे से झलक रहा था और किसी हद्द तक बड़के दादा भी डर चुके थे!
पंच: शांत हो जाओ तुम दोनों! लड़ाई-झगडे से कभी कोई हल नहीं निकला|
मैं: आप बस इससे कह दीजिये की अगर आज के बाद ये मेरे परिवार के आस-पास भी भटका तो मैं इसे जिन्दा नहीं छोड़ूंगा|
बड़के दादा: (आँखें चुराते हुए कहा) बेटा! मैं तुम्हें वचन देता हूँ आज के बाद ये हम आयुष के लिए कभी भी कोई .........
उन्होंने बात छोड़ दी पर पंचों ने जोर दे के बात पूरी कराई|
बड़के दादा: बेटा आज के बाद हम या हमारे परिवार का कोई भी इंसान तुम या तुम्हारे परिवार के रास्ते में नहीं आयगी| हम आयुष को भूल जायेंगे और कभी उसकी हिरासत के लिए कोई दावा नहीं करेंगे!
पंच: तो ये तय रहा की तुम्हारे बड़के दादा की तरफ से कभी भी कोई दावा नहीं किया जायेगा| भविष्य में ऐसी कोई हरकत दुबारा नहीं होगी और भगवान न चाहे ऐसा कुछ हुआ तो हम तुम्हारा (बड़के दादा का) भी हुक्का-पानी बंद कर देंगे और मानु तुम्हें पूरा हक़ है पुलिस में FIR दर्ज करने का और अगर तुमने नहीं की तो हम कर देंगे!
और ये फैसला सुना के पंच उठ खड़े हुए पर मैं उनसे एक बात करना चाहता था;
मैं: पंचों मैं आप सब से कुछ पूछना चाहता हूँ?
पंच: हाँ पूछो?
मैं: मैंने देखा है की माँ-बाप के किये की सजा बच्चों को मिलती है| पर ये कभी नहीं देखा की बच्चों के किये की गलती माँ-बाप को दी जाती हो! तो मेरे किये की गलती आप मेरे माँ-बाप को क्यों दे रहे हो? मेरे अनुसार मैंने कोई गलती नहीं की ...प्यार किया है और अगर आप लोगों को ये गलती लगती है तो गलती सही पर इसके लिए आप मेरे माता-पिता का हुक्का-पानी क्यों बंद कर रहे हैं? करना है तो मेरा करिये ...मैं आपसे वादा करता हूँ की ना मैं, न मेरी पत्नी और ना मेरे बच्चे...कोई भी इस गाँव में कदम नहीं रखेगा| पर मेरे पिता वो तो इसी गाँव में पैदा हुए हैं...ये उनकी जन्म भूमि है और उन्हें गर्व है की वो इस मिटटी में जन्में और इसी में मिलना चाहेंगे पर आपका एक फैसला उनके लिए कितना दुखदाई है ये आप शायद नहीं समझते| यहाँ उनके पिता सामान भाई हैं, माँ सामान भाभी हैं ...कृपया उन्हें अपने ही परिवार से दूर न रखें! मेरी बस आपसे एक ही गुजारिश है की आप उन्हें यहाँ रहने की इज्जाजत दें, और ये उनकी तरफ से नहीं है बल्कि मेरी तरफ से गुजारिश है| (मैंने उनके आगे अपने हाथ जोड़े)
पंच: देखो मानु ....तुम्हारे बड़के दादा ही उनसे कोई सरोकार नहीं रखना चाहते! चलो हम तुम्हारी बात मान भी ले तो.... वो यहाँ रह सकते हैं पर उन्हें तुम से अपने सारे रिश्ते-नाते तोड़ने होंगे?
मैं: कोई माँ-बाप अपने ही खून से रिश्ता कैसे तोड़ सकते हैं? आपने अभी खुद देखा ना की बड़के दादा अपने बेटे के गलत होने पर भी उसका साथ दे रहे थे और मैं तो बिलकुल सही था तो भला मेरे माँ-पिताजी मेरा पक्ष क्यों नहीं लेंगे? रही बात बड़के दादा के गुस्से की तो किसी भी इंसान का गुस्सा उसकी उम्र से लम्बा नहीं होता|
पंच: हम इसमें कुछ नहीं कर सकते|
और वो चले गए! अब मेरा यहाँ रुकने का point नहीं बचा था तो मैं ने अपना बैग उठाया और जाने लगा| चौराहे पे मुझे अजय भैया और रसिका भाभी मिले और वरुण भी उनके साथ था|