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एक एक आहट "ज़िंदगी" की complete
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52 minutes ago
गतान्क से आगे..............
दोनो की नज़रे गेट पे चिपक गयी...बेल बजे जा रही थी.....अचानक रितिका को होश आया उसने अंकित
को अपने हाथ से पीछे की तरफ प्रेस किया...अंकित रितिका की तरफ देखता हुआ एक दम से हड़बड़ाता हुआ
खड़ा हो गया....और उसने अपनी जीन्स को फटाफट से उपर चढ़ा के ठीक करने लगा..
उधर रितिका भी एक दम से उठी अपना पल्लू जो ज़मीन पे गिरा हुआ था उसे जल्दी से उठा के डालने
लगी और बाल ठीक करने लगी...तब तक अंकित रेडी हो गया था और उसने सोचा कि वही खोल दे
गेट...वो आगे बढ़ा और उसने धीरे धीरे करके गेट खोलने लगा..(उसका दिल ज़ोरों से धड़कने
लगा) और जब उसने गेट खोल दिया और सामने देखा तो उसने शांति मिली..सामने आर्नव खड़ा था
और उसी को देख के मुस्कुरा रहा था..
अंकित भी मुस्कुरा पढ़ा..और पूरा गेट खोल दिया और साइड हट गया.....
रितिका की नज़र सामने आर्नव पर पड़ी..तो उसके चेहरे पे स्माइल की जगह गंभीर भाव बन गये
वो किसी सोच में डूब गयी...
अंकित :- आर्नव कैसे हो?
आर्नव :- ठीक हूँ आप कैसे हो...(मासूमियत से पूछता हुआ)
अंकित :- ओह्ह..ह्म्म कहाँ से आ रहे हो..
आर्नव कुछ बोलता उससे पहले रितिका बोल पड़ी..
रितिका :- आर्नव गो टू युवर रूम नाउ..
आर्नव :- पर मुझे अंकित भैया से बात करनी है...
रितिका :- आइ सेड गो टू युवर रूम नाउ..अंकित वहीं आएगा...(थोड़ा उँची आवाज़ में)
अंकित उसे देखता रह गया कि इतना गुस्सा अचानक से कैसे आ गया रितिका को..
आर्नव अपनी मम्मी की बात को सुनता हुआ कमरे में चला गया...तभी अंकित रितिका के पास आके
कुछ बोले उससे पहले..
रितिका :- अंकित प्लीज़ यू गो नाउ टू...
अंकित चौंक के उसे देखने लगा...मानो पूछ रहा हो कि क्या हुआ..
रितिका :- आइ साइड प्लीज़ गो...
अंकित उसके करीब आके उसके हाथ पकड़ते हुए बोला..
अंकित :- लेकिन हुआ क्या...अभी तो..
रितिका ने अंकित के हाथ को झटकते हुए..
रितिका :- में वो सब कुछ नही कर सकती...जो भी अभी हुआ..मेरा एक बच्चा है डोंट यू सी..में तुमसे
कितनी बड़ी हूँ..और तुम्हारे साथ ये सब करते हुए..नही..में नही कर सकती...मेने सिर्फ़ तुमसे सारे गिले
शिकवे दूर करने के लिए बुलाया था पर ये सब इतना कुछ हो जाएगा...मेने नही सोचा था..प्लीज़
यू गो (वो थोड़ा झल्लाती हुए बोल रही थी)
अंकित :- पर रितिका मेरी बात तो..
रितिका :- (बीच में रोकते हुए) मुझे कुछ नही सुनना..तुम क्यूँ नही समझते..मेरा ये सब करना ग़लत
है...में अपने बच्चे से बहुत प्यार करती हूँ..और उसे ये धोका नही दे सकती...यू प्लीज़ गो..
(बोलते हुए वो सर अपना सर पकड़ के वहीं उसी सोफे पे बैठ जाती है)
अंकित 2 मिनट तक खड़ा रहता है...और फिर कुछ सोच के वो मूड के चला जाता है....
इधर रितिका अपने आप को समेटते हुए उसी सोफे पे लेट जाती है...और अपनी आँखें बंद कर लेती है....
उधर अंकित बड़बड़ाता हुआ घर की बजाए बाज़ार की तरफ निकल गया...
पता नही अपने आप को क्या समझती है..पहले तो खुद ही बुलाती है फिर खुद ही शुरू करती है
और जब इतना सब कुछ हो गया तो ये सब नाटक ... कमाल है...मेने कहा था कि वो बुकेट और
कार्ड भेजने के लिए..तब समझ नही आई कि एक बेटा है...तब तो सब कुछ ठीक था..जब सब कुछ चल
रहा था..पता नही क्या चलता रहता है उसके दिमाग़ में..गुस्सा दिला रखा है....
(बड़बड़ाते हुए मार्केट की तरफ बढ़ रहा था जहाँ काफ़ी भीड़ थी..और उस भीड़ में काफ़ी सारी
सुंदर सुंदर लड़कियाँ और लॅडीस भी घूम रही थी)
अंकित :- छी..साला अच्छा भला मूड खराब कर दिया.....(बोलता हुआ अपनी गर्दन छटकता है तो
उसकी नज़र वहीं ज़म जाती है)
सामने एक टाइट जीन्स में लड़की थोड़ा उचक के कुछ समान लेने की कॉसिश कर रही थी...जिसकी वजह
से उसका पहना हुआ वाइट कलर का टॉप थोड़ा उपर हो गया जिसकी वजह से उसकी गोरी गोरी कमर का
साइड वाला हिस्सा उजागर हो गय्या..और जीन्स में फँसी टाइट गान्ड की शेप और अच्छे से उजागर हो
गयी....
एक पल के लिए अंकित की नज़रे वहीं चिपक गयी...लेकिन फिर उसके अपनी नज़रे हटा ली..
अंकित :- (अपने आप से) मत देख..साले मत देख..वैसे ही ज़िंदगी ने पोपट करने का फ़ैसला कर रखा
है...साला..जब कभी लगता है कि ये लड़की मिल जाएगी उसी वक़्त इस खड़े लंड को छुरी चला देता है..
हाए रे किस्मत...
रोते हुए वो एक शॉप में घुस जाता है...वो कुछ कपड़े खरीदने की सोचता है...और जाके जीन्स
देखने लगता है....
तभी उसे साइड में एक लड़की खड़ी दिखती है....वो उसे घूर्ने लगता है...अचानक वो लड़की अपनी गर्दन
इस तरफ घुमाती है और वो भी अंकित को घूर्ने लगती है दोनो एक दूसरे को घूर्ने लगते है...
और फिर कुछ ही मिनट में...अंकित के चेहरे पे स्माइल आ जाती है...और उस लड़की के भी...
दिशा.......तू यहाँ....(अंकित चलता हुआ वहाँ जाता है)
अंकित्त.....व्हाट आ प्लीज़ेंट सर्प्राइज़......(और वो आगे बढ़ के अंकित को एक हग देने लगती है)
उफ़फ्फ़ अंकित का तो बॅंड पहले से ही बजा हुआ था और इसे गले लगाते ही उसका तो ढोल बज गया..
वो अपने मन में..साला इसको भी आज ही गले लगना था....अगर इसे मेरे खड़े लंड का आभास हो
गया तो मेरी तो सॉलिड लग जाएगी...
लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ..दिशा उससे अलग हुई और मुस्कुरा के देखने लगी अंकित को...पर अंकित तो
उसे नीचे से उपर तक घूर्ने लगा...टाइट ब्लॅक जीन्स...जिसके अंदर मस्त थाइस्स घुसी हुई थी...
थोड़ा उपर आके...एक दम सपाट पेट.और थोड़ा उपर उसके 34 साइज़ के टाइट और बेहद सेक्सी शेप्ड
के चुचे जो कि उस पर्पल थिन टॉप में छुपे हुए थे....
दिशा :- तेरी चेकिंग आउट की बीमारी अभी तक नही गयी ना....
अंकित दिशा की इस बात को सुन के हड़बड़ा गया...और वो हड़बड़ाते हुए बोल पड़ा..
अंकित :- आ.आ...रे नही न..आह..इ यार..वो तो तू इतनी बदल गयी है..ना कि में तो बस देखता ही रह
गया....
दिशा :- ओह्ह फ्लर्ट करने की कॉसिश इतने सालों के बाद पहली मुलाक़ात में..
अंकित :- (अपने मन में) अबे कुतरी पहली मुलाक़ात में लोग गान्ड और चूत ले जाते हैं और तू फ्लर्ट की
बात कर रही है..
दिशा :- (चुटकी बजाते हुए) क्या सोच रहा है...तेरी ये सोचने की आदत नही गयी ना...
अंकित :- अरे नही यार दिशा..सॉरी सॉरी...दिशा.. ऐसा नही है..वो इतने सालों के बाद मिली..और वो भी इस
तरह...तू बिल्कुल चेंज हो गयी है सच में....
दिशा :- दिशा जी.. हहेहेहेः....रहने दे..दिशा ही बोल....वैसे भी सिर्फ़ 23 साल की हुई हूँ और तुझसे 2 साल
ही बड़ी हूँ...
अंकित :- (अपने मन में) हाँ साली वैसे तो 23 साल की है लेकिन काम तो तू 30 साल की औरतों वाले
कर चुकी है....
दिशा :- ओये फिर किस सोच में डूब गया...
अंकित :- नही यार कुछ नही..बस वही स्कूल की याद जब हम मिले थे उस ट्रिप पे..में 8थ में था तू 10थ
में...वही मिले थे..नही तो उससे पहले तो कभी स्कूल में एक दूसरे को जानते भी नही थे...
दिशा :- हाँ यार सही कहा तूने...वो ट्रिप सच में आज भी याद है मुझे...जब तू उस गोरी मेम पे
लाइन मार रहा था और उससे थप्पड़ खाते खाते बचा था हहेहेहेहेहहे...
अंकित :- ऊओ ऐसा कुछ नही था...वो मुझे थप्पड़ नही मारती.....
दिशा :- रहने दे....अगर में ना आती और ना बचाती तो सच में पड़ जाता तुझे थप्पड़...
अंकित :- ओह्ह अच्छा जी..आज तक ऐसा कोई पैदा नही हुआ है..जो हमे थप्पड़ मार दे..(और फिर अपने मन में
साला थप्पड़ तो खा चुका हूँ..पर इसको क्या पता और थोड़ा फैंकने में चलता है)
दिशा :- ह्म्म सब पता है मुझे..वैसी थप्पड़ पड़ना भी चाहिए था तुझे 8थ स्टॅंडर्ड में था
तू..और बाते बहुत बड़ी बड़ी थी तेरी...
अंकित :- (साली अब क्या कहती है वही बात तुझसे भी पूछूँ अपने मन में सोचता हुआ)
लेकिन फिर उसने बात को बदलते हुए..
अंकित :- छोड़ यार...तू ये बता..उसके बाद स्कूल क्यूँ छोड़ दिया..तू दिखी नही उस गोआ ट्रिप के बाद..
दिशा :- अरे यार क्या बताऊ...डॅड का ट्रान्स्फर हो गया अचनाक..इसलिए ड्रॉप करना पड़ा..और तुझसे उस
वक़्त सिर्फ़ एक छोटी सी फ्रेंड्शिप हुई थी..इसलिए कोई कॉंटॅक्ट नही था..तो नही बता पाई..
अंकित :- ह्म्म हाँ भाई..हम से क्यूँ फ्रेंड्शिप करोगी..हुम्म तुम्हारे लेवेल के थोड़े ही है...
(एमोशनल अत्याचार करना शुरू कर दिया)
दिशा :- ओये ऐसी बात नही है...एक ट्रिप में हम मिले थे उसके बाद अब मिल रहे हैं तो कैसे
करती तुझसे फ्रेंड्शिप...
अंकित :- हाँ ये बात भी सही है...वैसे तू यहाँ वापिस कब आई..
दिशा :- लास्ट मंथ ही आई हूँ यार...
अंकित :- तेरी शादी हो गयी..
दिशा :- (थप्पड़ का इशारा करते हुए) मार खाएगा क्या....में तुझे शादी शुदा लग रही हूँ..
अंकित :- अरे यार 23 की हो गयी है तू..तो मुझे लगा शादी हो गयी होगी तेरी..
दिशा :- रहने दे...में सब समझ रही हूँ..कि तेरे कहने का मतलब क्या है....
अंकित :- हाहहहः तो समझ गयी है तो फिर क्यूँ बोल रही है..हाँ (छेड़ते हुए)
दिशा :- तू बिल्कुल नही बदला वैसा का वैसा ही है....चीप हहेहेहेहेः
अंकित :- अच्छा में चीप हूँ तो बात क्यूँ कर रही है फिर....मत कर...
दिशा :- क्या करूँ..तुझसे इंप्रेस बहुत हो गयी थी ना..लास्ट टाइम..तू थोड़ा अलग किसम का बंदा है..
अंकित :- (मन में सोचता हुआ) अच्छा..अलग किसम का..तो फिर अपनी ये कमसिन जवानी दे एक बार
फिर तुझे अच्छी तरह पता चलेगा कितना अलग हूँ में ....
दिशा :- मत सोच ज़्यादा....(दिशा मुस्कुराते हुए बोली)
अंकित झेप गया..उसने अपनी जीभ दिखा दी...
अंकित :- बिल्कुल अनएक्सपेक्टेड था यार तुझसे मिलना....सच में बहुत खुशी हुई तुझसे मिल के..
दिशा :- ओहो..लड़के में समझदारी आ गई क्या बात है...हहेहेः जोक्स अपार्ट...मुझे भी बहुत खुशी
हुई यार तुझसे मिल के...वैसे जब गोआ में मिले थे ना..उसके बाद मुझे लगा कि तू एक अच्छा
लड़का है बात करने में..पर चान्स नही मिला कभी..
अंकित :- हाँ यार..मेरी किस्मत में कोई ढंग की लड़की है नही..साला किस्मत और लड़की का 36 का आकड़ा है..
अच्छा ये बता कोई बाय्फ्रेंड तो होगा..
दिशा :- ना यार ये बाय्फ्रेंड वग़ैरह सब इल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल बकवास लगता है.....में किसी एक के साथ सेनटी नही होना चाहती..
वो रोने धोने की बाते वो रोज का झगड़ा...
हाहहहहहह अंकित हँसने लगता है.....
दिशा :- हाँ सही बोल रही हूँ..यू गाइस अरे सच में बड़े ही डंबो होते हो...
अंकित :- रहने दे बहाने ना मार...तुझे कोई मिला ही नही होगा..
दिशा :- ओह्ह हेलो लड़कों की तो लाइन लगा सकती हूँ में..किसी भी लड़के को लट्टू बना सकती हूँ अपने
इशारों पे....लड़के तो हर वक़्त मुझपे मिटने के लिए तैयार रहते हैं..
अंकित :-( अपने मन में) हाँ साली तुझे तो मिटाने के लिए कोई भी खड़ा हो जाएगा...साली इतनी मस्त
माल है तो तू वैसे भी किसी की लुल्ली भी लंड बन जाए....
अच्छा तू अकेली आई है यहाँ..मतलब डॅड और मोम के साथ रहती है..
दिशा :- नही यार..मोम डॅड तो अभी भी वहीं हैं मुंबई में...में तो आंटी के साथ रहती हूँ
अपनी...
अंकित :- मतलब उनकी फॅमिली के साथ..
दिशा :- ना ना..वो आंटी अकेली रहती है...उन्होने शादी नही की
अंकित :- ओह्ह..मतलब की आंटी की जवानी चली गयी और शादी नही की..
दिशा :- तू नही सुधरेगा...उनकी एज सिर्फ़ 31 है...और वो ****** में काम करती है...
अंकित तो सुन के खुश हो जात्ता है....
अंकित :- अच्छा...कहाँ रहती है तू अब.?
दिशा :- (आँखें मतकाते हुए) क्यूँ..घर आएगा मेरे....हैं..
अंकित :- हाँ हाँ आ जाउन्गा जब तू अकेली होगी (कॉलेज जाके धीरे से बोलता है)
दिशा :- (उसके कंधे पे ज़ोर का थप्पड़ मारते हुए) कमिने...सुधर जा तू..हहेहेहहे..
अंकित अपने हाथ से कंधे को सहलाते हुए...
अंकित :- अगर हम सुधर गये तो तेरा क्या होगा ..... (आँखें मटकाते हुए)
दिशा :- और मार खाएगा क्या...
अंकित :- हाहहाहा..नही यार..वैसे ही एक पड़ गया है....
दिशा :- ह्म्म...(वो कुछ बोलती इससे पहले उसका फोन बज पड़ा वो फोन उठा के देखती है..)
अंकित एक्सक्यूस मी....(और फिर थोड़ा साइड में चली जाती है)
अंकित उसको देखने लगता है..और अपने मन में..
हाए क्या गान्ड हो गयी है इसकी...साली जीन्स में अंदर पसीने छोड़ रही होगी..बोल रही होगी कोई बाहर
निकालो मुझे.....
अरे हाँ ये तो में बताना भूल ही गया इसके बारे में...अरे अपने अपने पकड़ के रखो
कहीं हिलते हिलाते इधर उधर नही खिसक जाए क्यूँ कि ये दिखती ही ऐसी है..एक दम सेक्सबॉम्ब है ये..
इन मेडम का नाम है दिशा शेनाए पता नही इसका लास्ट नेम आज तक नही समझ आया मुझे...
ये एक टिपिकल पंजाबन है..और आप सब समझ सकते हो कि पंजाबी कुड़ी कैसी होती है...
चेहरा ऐसा कि साला इसके आगे दूध भी काला नज़र आए...इतना गोरा और इतना सुंदर....छोटी छोटी
आँखें बेहद खूबसूरत और थोड़े मोटे लिप्स ... बीच में छोटी सी नाक..जो उसकी सुंदरता को और
बढ़ाती है....चेहरे पे हमेशा ऐसा रहता है कि ये कितनी बड़ी सेडक्टिव गर्ल है..लेकिन सच में
किसी भी आक्ट्रेस को फैल कर्दे सिवाय कटरीना कॅफ के इतना सुंदर चेहरा है इसका..जब भी हँसती है नाक और
गाल दोनो लाल हो जाते हैं..उस वक़्त तो मानो कोई परी उतर के आ गयी हो ऐसी लगती है...
अब ज़रा इसके असेट्स के बारे में बता दूं..जिसकी वजह से जैसे कि मेने पहले भी कहा कि कोई भी लड़का
इस्पे मिट जाए....बिल्कुल ऐसा है इसका शरीर..
साली के 34 साइज़ की एक दम गोल गोल कड़क चुचियाँ जिन्हे हाथ से दबाते रह जाओ ज़िंदगी भर पर फिर
भी मन ना भरे...कमर तो साली है ही नही..बिल्कुल पतली सपाट पेट..और उसके नीचे उसकी 30
की गान्ड....साइज़ भले ही ना बड़ा हो पर शेप इतनी शानदार है कि बस एक बार हाथ रख दो तो
बस उसे सहलाने के अलावा और कुछ भी मन ना करे........
मेरी और इसकी मुलाक़ात स्कूल की गोआ ट्रिप में हुई थी जब में 8थ में था जैसा बताया हम ने...
और मेने उस गोरी से पूछा था कि तेरा साइज़ कितना है उसपे वो भड़क गयी थी..वहाँ आके इसने
बचाया था....और बात को घुमा दिया था..तब से हमारी बात हुई उस ट्रिप पे...लेकिन वो बात
और आगे जब बढ़ी..जब वो बीच पे एक सेक्सी हॉट टू पीस ब्लू क्लो की बिकनी में आई...
बस वहाँ खड़ा इसकी कसमिनट जवानी उस वक़्त 10थ में थी..को देख कर बेहोश सा हो गया...
साली उस वक़्त भी 4 लंड को अंदर ले ले..ऐसा शरीर था....किसी भी लड़के की हिम्मत नही थी उसके पास जाने
की....लेकिन में तो में हूँ...चल पड़ा..और उससे फ्लर्ट करना शुरू हो गया..
ये काम मेने स्कूल टाइम से ही शुरू कर दिया था.....मेरी बातों से ये बहुत अट्रॅक्ट हुई और सीनियर
होने के नाते हमारी अच्छी बात हुई..बाकी सभी लड़कों की तो झान्टे जल गयी थी मुझे उसके साथ
देख के....और.
अंकित अंकित........तभी अंकित अपनी ख्यालों की दुनिया से बाहर आया...
दिशा :- कहाँ खो जाता है तू?
अंकित :- बस किसी को कुछ बता रहा था..
दिशा :- हैं...की बोल रहा है तू...
अंकित :- नही नही कुछ नही..वो.
दिशा :- अच्छा..यार मुझे जाना है..बाकी की बातें बाद में करेंगे...और टेंशन मत ले..इस
बार कॉंटॅक्ट रखूँगी तुझसे....मेरा नंबर. नोट कर ले..
और फिर वो नंबर बोलती है अंकित फटाफट से नंबर फोन पे लेता है और उसे मिस कॉल मार देता
है..दोनो एक दूसरे का नंबर सेव कर लेते हैं....
दिशा :- अच्छा चल बाए... (और फिर आगे आके..एक हग करती है)
इस बार अंकित भी पूरे मज़े से हग लेता है और देता है..और अपने हाथों से दिशा की पीठ को सहलाने
लगता है...पतली सी टॉप की वजह से अंदर पहनी हुई ब्रा हाथ पे महसूस हो रही थी...
क्रमशः......................
गतान्क से आगे..............
दिशा उसे पीठ पे थप्पड़ मारती है..और अलग होती है....
दिशा :- बाइ गॉड तुझसे तो गले लगना भी बड़ा ही मुश्किल है...तू नही सुधरेगा...
(बोलते हुए एक कातिलाना स्माइल देती है..)
अंकित भी एक स्माइल दे देता है.....और फिर दिशा भी जाने लगती है..और पीछे मूड के एक बार फिर हाथ
हिला के बाइ करती है....अंकित भी बाए करता है..लेकिन उसे कुछ अजीब लगता है..
अंकित :- दिशा की नाक इतनी लाल क्यूँ हुई थी....(वो अपना मुँह बनाता है जैसे पता नही क्यूँ है)
और फिर सोचते हुए जीन्स लेने लगता है....और एक अच्छी जीन्स कबाड़ के वापिस आने लगता है..
रितिका के साथ हुई घटना को दिशा की मुलाक़ात ने भुला दिया था.....
लेकिन वो ये नही जानता कि अभी तो सिर्फ़ लहरे उठनी शुरू हुई है...किनारे तक आते आते बहाव बहुत तेज
होने वाला है....
रितिका के साथ हुई घटना को दिशा की मुलाक़ात ने भुला दिया था.....
अंकित को रात में नींद नही आ रही थी...वो पलंग पर आँखें खोल के कुछ सोचने लगा.....
काफ़ी टाइम पहले स्कूल टाइम में....गोआ ट्रिप....दिशा एक सेक्सी बिकनी में आके बीच पे खड़ी थी
और सभी लड़के उसे ताड़ रहे थे...पर किसी की हिम्मत नही थी की कोई उससे कुछ जाके बात करे..सिवाय
अंकित के और वो पहुच गया उससे बात करने...
अंकित :- हेलो..
दिशा उसकी तरफ घूरती है और फिर सामने समुंदर की तरफ देखने लगती है..
अंकित :- हेलो मेने कहा है..समुंदर ने नही...
दिशा इस बात को सुन के अंकित की तरफ फिर से देखने लगती है...
दिशा :- मे आइ नो यू
अंकित :- नो..यू डोंट...
दिशा :- देन व्हाट यू वान्ट?
अंकित :- बस कुछ नही..वैसे तो में भी आपको नही जानता...लेकिन वहाँ खड़े जितने लड़के हैं सब आप
को ही ताड़ रहे हैं (वो उंगली लड़कों की तरफ करता है )
जिसे दिशा वहाँ देखने लगती है..तो सभी लड़के इधर उधर देखने लगते हैं...
फिर दिशा अंकित की तरफ नज़र करके...मानो पूछ रही हो तो?
अंकित :- किसी की हिम्मत नही है आपसे बोलने की...सब शायद डरते हैं फट्टू साले...
दिशा :- (मन ही मन थोड़ा मुस्कुराती है पर शो नही करती ) अच्छा तुम नही डरते..
अंकित :- में..अरे क्यूँ डरूँ..कोई ग़लत कम थोड़े ही कर रहा हूँ..जो सच है वही बोलूँगा इसमे
डरना कैसा..
दिशा :- सच कैसा सच...
अंकित :- ओ तेरी (माथे पे हाथ मार के) साला इन अलुंडों के चक्कर में वो बात तो बोलना भूल गया
जिसके लिए आया था....आक्च्युयली आप इस बिकनी में...सूपर हॉट ह्म्म एक दम मस्त लग रही हैं..यहाँ जितनी
भी गोरी मेम है ना..वो तो कुछ भी नही है आपके सामने...यू आर लुकिंग डॅम हॉट...
दिशा अंकित की बात सुन के उसे अपनी आँखों से घूर्ने लगती है....अंकित के फेस पे कोई टेन्षन नही था..
अंकित :- अच्छा चलो बाए..यही बोलने आया था में तो...(और फिर मूड के जाने लगता है)
रूको....तभी उसके कानो में आवाज़ पड़ती है..वो मुड़ता है..
दिशा :- थॅंक यू सो मच....
अंकित के चेहरे पे कमीनी वाली स्माइल आ जाती है..
दिशा :- वैसे कौन सी क्लास में हो
अंकित :- 8थ में..
दिशा :- 8थ में...बाते तो बहुत बड़ी है तुम्हारी..
अंकित :- ह्म्म अच्छा..तो आप कौन सी क्लास में हो..
दिशा :- 10 थ में..
अंकित :- क्लास के हिसाब से तो आपका भी सब कुछ बड़ा है.....(और अपने दाँत दिखा देता है)
दिशा उसे अपनी आँखें बड़ी करके घूर्ने लगती...लेकिन फिर एक कातिलाना स्माइल देती है..
दिशा :- तुम तो बड़े ही कमीनी हो...
अंकित :- हाँ...शायद...लेकिन जो सच है वो बोल देता हूँ..आप 10थ की नही लगती इसलिए बोला..जैसे
आपको मेरी बाते बड़ों वाली लगती है..वैसे मुझे आपका सब कुछ बड़ों जैसा लगता है..
इस बार दिशा अपनी हँसी कंट्रोल नही कर पाई.....और हँसने लगी...
उधर खड़े लड़कों का तो सब कुछ जल गया साले घूर घूर के देखने लगी..
अंकित :- अच्छा..बाए..आप एंजाय करो...
दिशा :- रूको..कहाँ जा रहे हो...
अंकित :- ह्म्म बोलो
दिशा :- आक्च्युयली मुझे सी के अंदर जाना है..पर कोई है नही..क्या तुम मेरे साथ चलोगे थोड़ी
मस्ती हो जाएगी...
(अपनी बॉडी को हिलाती हुई बोलती है)
अंकित के तो पैर काँपने लगते हैं उस सीन को देखने में...वो नीचे से दिशा को घूर्ने लगता
है...हाई गोरे गोरे एक़ दम पर्फेक्ट थिग्स...उपर एक छोटी सी कच्छि जिसके पीछे छुपी उसकी
छोटी सी इंसानो वाली कच्छि....उपर सपाट पेट..और उस ब्रा में क़ैद वो चुचे जिनकी दरार दिख
रही थी..मानो बस फॉरमॅलिटी के लिए धक दिया हो उसे ब्रा से......
दिशा :- बोलो..चलोगे..
अंकित होश में आते हुए..
अंकित :- यॅ श्योर...
और फिर दिशा के साथ अंकित चल पड़ा..सी के अंदर...और फिर जो हुआ थोड़ा बहुत उससे तो वहाँ कहदा एक एक लड़का बेचारा यही सोच रहा होगा कि अपना अपना लंड काट के फेंक दूं साला..किसी काम
का नही है....
उधर पानी के अंदर दोनो हंसते हुए खेल कूद रहे थे दोनो एक दूसरे के उपर पानी डाल रहे थे
कभी कभी दिशा फिसल जाती तो अंकित उसे उठाने के चक्कर में उसकी सॉफ्ट बॉडी पे हाथ लगाता
कभी कभी उसकी गान्ड तो कभी उसके चुचों पे हाथ लग जाता...उसका तो 8थ स्टॅंडर्ड में कच्छे
के अंदर बंबू बन गया था...
यही सोचते हुए अंकित के चेहरे पे बत्तीसी फट जाती है..और उसके हाथ धीरे धीरे खिसकते हुए
अपने लंड पे चले गये...जो पहले से ही राक सॉलिड की तरह आसमान छू रहा था......
पर..
क्रमशः...........................
गतान्क से आगे..............
जैसे ही उसने अपना लंड हल्का सा मसला..उसे सबसे पहला चेहरा रितिका का याद आ गया..उसके
साथ बिताया हुआ आज का वो लम्हा याद आ गया...
बस यही सोचते हुए वो पलंग पे उठ बैठा.....
अंकित :- उफ़फ्फ़....चाहे जितनी भी हॉट लड़कियाँ आ जाए ज़िंदगी में..पर में शायद ही रितिका को भूल
पाउन्गा..मुझे फोन करना चाहिए उसे.....नही नही..इतनी रात नही..
पर...कर लेना चाहिए...क्या पता कुछ बात हो जाए..(वो अपने आप से बात करने लगा)
उधर
रितिका हॉल में बैठी थी..और अपने लॅपटॉप पे कुछ कर रही थी...रात के 12 बज रहे थे..लेकिन रितिका काम
मे लगी हुई थी...लेकिन हर 2 मिनट में वो रुक जाती कुछ सोचने लगती..और फिर से काम में लग जाती
शायद सुबह हुई घटना के बारे में ही सोच रही थी...अचानक उसके फोन पे रिंग बजी...
उसने नंबर देखा...
अंकित.....इतनी रात को......(रितिका बोलती है और फोन कट कर देती है)
1 मिनट बाद फिर से फोन आता है....वो फिर से कट कर देती है..
रितिका :- आइ कॅंट टेक युवर कॉल में जानती हूँ तुम क्या पुछोगे और मेरे पास उसका कोई जवाब नही है...
लेकिन फोन पे फोन बजने लगता है अंकित.....आख़िर कार रितिका फोन उठा ही लेती है..
रितिका :- अंकित इतनी रात में क्यूँ फोन कर रहे हो...
अंकित :- मेरा फोन क्यूँ कट कर रही थी आप..
रितिका :- इतनी रात को में कैसे बात करूँ..में सो रही थी..
अंकित :- झूठ आप सो नही रही थी.....
रितिका :- तुम्हे कैसे पता..
अंकित :- अब इतना तो जान ही जाता हूँ...मगर मुझे तो बस ये पूछना था कि ऐसा क्या हुआ सुबह
जो आप इतना गुस्सा हो गयी..हमने जो भी किया उसमे दोनो की सहमति थी..
रितिका :- (अपनी जगह से खड़ी होती हुई) हाँ थी...लेकिन उस समय में बहक गयी थी...मेरे दिमाग़ पर
मेरे शरीर ने क़ब्ज़ा कर लिया था..लेकिन में ऐसा नही कर सकती..मेरा एक बेटा है अंकित..में उससे
चीट नही कर सकती...बिल्कुल नही..
अंकित :- चीट...कैसा चीट..आपने कोई ग़लत थोड़ी किया है..क्या दिल की बात सुनना ग़लत बात है..
रितिका :- ये दिल नही शरीर की भूक थी..जो में पूरा करने चली गयी..
अंकित :- ये शरीर की भूक नही थी मेडम ये आपके दिल में खो गया प्यार उभर के आया था..
जो इतने सालों से अंदर दफ़न है..और अगर आप उस प्यार को शरीर के साथ बाँटना चाहती है तो वो
ग़लत नही है....
रितिका :- नही अंकित...ऐसा नही है..मेरे दिल में ऐ...सा....कुछ नही है.. (अटकते हुए बोली)
अंकित :- अच्छा...तो जब सुबह आपको मेरे दिए गये दर्द से तकलीफ़ हो रही थी..तब अपने मुझे क्यूँ
नही हटाया..जब आपको साँस लेने में तकलीफ़ हो रही थी तब क्यूँ नही मना किया..बोलो..
रितिका साइलेंट हो गयी इस बात को सुन के..
अंकित :- रितिका... में जानता हूँ हम दोनो एक दूसरे को प्यार नही कर सकते..ये सिर्फ़ एक अट्रॅक्षन है
और वो ऐसा अट्रॅक्षन जिससे हम पीछा नही छुड़वा सकते..इसका तो सिर्फ़ एक ही सल्यूशन है..कि सब कुछ
भूल जाओ और सिर्फ़ अपने दिल की सुनो.. नीड इट .. नही तो आप भी खुश नही रह पाएँगी और ना ही
हेलो हेलो....
अंकित पूरा बोलता उससे पहले रितिका ने फोन कट कर दिया.....
वो अपने चेहरे को अपने हाथों से ढक के..भावुक हो गयी..और कमरे के अंदर चल पड़ी...
इधर अंकित..
कल ज़ाउन्गा मिलने इनसे..हर कीमत पे...ये ऐसा नही कर सकती...बिल्कुल नही..मेरे भी कुछ जज़्बात हैं..
और में जानता हूँ वो भी चाहती है..पर किसी तरह अपने दिल को मार रही है...
और पलंग पे लेट जाता है....
टाइम निकलता गया रात गहराती गयी...2 बज गये..लेकिन अंकित करवट बदल रहा था...और कल के
बारे में सोच रहा था..उसकी आँखों से नींद गायब थी...
इधर रितिका का भी यही हाल था...उसकी आँखों में भी नींद गायब थी....उसकी आँखों के सामने
सुबह हुए अंकित और उसके बीच जो इतना प्यार का सागर फूटा था वो याद आ रहा था...
जिसकी वजह से वो बार बार करवट बदल रही थी..
ये क्या किया अंकित आज...तुमने मेरे साथ..दिमाग़ से ही नही निकल रहा..ये सब ग़लत है..में अपने
शरीर के लिए अपने बेटे को धोका नही दे सकती..पर क्या करूँ तुम्हारे दिए गये उस छोटे से पल
में इतना कुछ था..की मेरा दिमाग़ मेरे शरीर के आगे हर मान रहा है..
और फिर से वही सुबह की घटना सोचने लगती है....कि कैसे अंकित उसके शरीर पे अपने होंठो से प्यार भरी
मालिश कर रहा था....
बस यही सोचते सोचते उसका हाथ नीचे चला गया अपनी चूत पे..और उसे एक झटका लगा...
चूत के उपर से उसका पाजामा गीला था...
उसकी आँखें पूरी खुल गयी....और उसके मुँह से हल्का सा निकला..नही......
और फिर शरम में उसने अपनी आँखों पे अपने हाथों की पट्टी बाँध ली......
अगली सुबह...
आज अंकित काफ़ी देर तक सोता रहा..कौलेज तो जाना नही था इसलिए मज़े में सो रहा था..
10 से 11 बज गये लेकिन वो भाई साहब नही उठे..
वो तो जब उसकी माँ ने कान के पास आके चिल्लाना शुरू किया तब जाके भाई साहब की आँखें
खुली..
अंकित अंकित..उठ जा..कितना सोएगा...कामवाली सफाई करने आ जाएगी और तू सोता रहिओ...फिर खुद
करियो सफाई..
बस अब काम की बाते सुन के आँखें कैसे ना खुलती.भाई साहब अचानक उठ के बैठ गये...
अंकित :- (अंगड़ाया लेते हुए) हाँ हाँ उठ रहा हूँ ना...यार.....(और पीछे तकिये लगा के उसपे
टैक लगा के बैठ गया)
उसकी मम्मी बाहर चली गयी कमरे से....
उठते ही जनाब नी फोन चेक किया..
अंकित :- ऊ तेरी.... 11 मिस...किसके हैं देखूं तो...ओह्ह्ह सारे दिशा के हैं....
(और फिर पढ़ने लगा)
हाहाहा...हल्की हँसी हँसने लगा...साले कैसे ब्रा पेंटी के मसेज भेज रही है...सच में बहुत ही
ज़्यादा कंटक और कमीनी लड़की है ये...एक ही दिन में 11 नों-वेज मेसेज...साली..हाहाहा..
(अंकित पढ़ते हुए बोला और मुस्कुरा रहा था)
तभी उसकी मम्मी अंदर कमरे में आई और बेड के सामने पड़े कुछ कपड़े उठाते हुए बड़बड़ाने
लगी..
सारे काम तो मुझे ही करने पड़ते हैं घर पे...महाराज को देर तक सुल्वा लो..उसके बाद तफ़री
करवा लो ये नही कि अपनी मम्मी की मदद कर दे..नही वो तो करनी नही है...सारा दिन निथल्ले की तरफ
पड़े रहो...(बोलते हुए कमरे के बाहर चली गयी
अंकित :- (अपने आप से) बिना सुने तो मेरा दिन कहाँ शुरू होता है.....
और फिर उठ के बाथरूम में घुस जाता है..
और फ्रेश होते टाइम सोचने लगता है...कि साला आज जो भी हो जाए रितिका की तो बॅंड बजानी ही है..
बहुत हो गया.....अब मुझसे और कंट्रोल नही होता...सही टाइम देख के जाउन्गा...और आज आर या
पार वाला काम कर ही दूँगा...(उसकी आँखों में एक अलग ही रिक्षन और चमक थी)
दोफर को पलंग पे लेटा रहा और फिर थोड़ी देर बाद चुनमुनियाडॉटकॉम खोल के बैठ गया.....
अंकित :- आज क्या पढ़ुँ...क्या पढ़ु..साला अब कोई अच्छा रायटर का बच्चा नही क्या...सब की स्टोरी तो पढ़ ली
(स्क्रोल करते हुए नीचे आने लगा) ओ तेरी की..अबे इस्पे भी स्टोरी लिखने का नही छोड़ा हाहहा..
साले बड़े कमिने लोग है...किस ने लिखी है..
और फिर खोल के पढ़ने लगता है....
3 से 4 से 5 से 6 बाज जाते हैं लेकिन अंकित स्क्रीन से नही हटता....आख़िर कर वो लॅपटॉप की स्क्रीन बंद करता
है..उसकी आँखें बड़ी हो गयी थी...
अंकित :- थर्कि ये नही है साला हम है..बुरा हाल कर दिया इसने तो...कसम से...लाजवाब लिखा हुआ था..
अब तो मेरा दिमाग़ काम करना बंद कर चुका है.....मेरे दिमाग़ में से तो वो गोआ वाला सीन
नही निकल रहा (बोलते हुए वो टाइम देखता है 6:05 हो गये थे) ओ तेरी की..जल्दी करना चाहिए ये टाइम
ही सही है मेरे लिए......
बोलते हुए वो उठ जाता है और फ्रेश होके रितिका के घर के लिए निकल जाता है...
सही 6:20 पे वो गेट के बाहर खड़ा होता है..वो सामने पार्क में नज़र गढ़ाता है आर्नव वहाँ नही
था....उसे थोड़ी चिंता होती है...
लेकिन..
अंकित :- आज तो कुछ भी हो जाए आर्नव हो या तार्नव .. आज तो काम ख़तम कर के ही जाउन्गा..
वो आगे बढ़ाता है और डोर बेल बजाता है.....एक बार बजता है कोई आवाज़ नही आती..दूसरी बार बजाता
है...तब भी नही आती..उसके बाद वो इकट्ठी तीन चार बार बजा देता है...
तब जाके अंदर से उसे रितिका की मीठी आवाज़ आती है..
कमिंग..........
बोलते हुए रितिका गेट खोलती है..और बाहर खड़े अंकित को देख के उसका चेहरा गंभीर बन जाता है..
इसे पहले अंकित कुछ बोले..
रितिका :- आर्नव घर पे नही है...वो आंटी के साथ घूमने गया है..और में इस वक़्त बिज़ी हूँ..
(अंकित रितिका को पूरा नही देख पा रहा था क्यूँ कि उसने अपना चेहरा ही गेट के बाहर निकाल रखा था)
रितिका और अंकित ने कुछ एक आध मिनट के लिए आँखों ही आँखों में देखा..और रितिका गेट बंद कर
ने लगी...पर उसे ये उम्मीद नही थी..कि अंकित ऐसा कुछ करेगा....
उसने दरवाजी पे हाथ लगा के उससे बंद करने से रोक दिया...
रितिका उसे घूर्ने लगी...
अंकित :- मुझे काम है..
रितिका :- मेने कहा ना मुझे कुछ काम है..तुम जाओ प्लीज़...(सॉफ्ट टोन में बोलते हुए)
अंकित :- नही मुझे भी कुछ कम है..(हर्ष टोन में बोलते हुए)
रितिका :- अंकित प्लीज़ जाओ..(वो दरवाजे को बंद करने के लिए पुश करती रही...)
लेकिन अंकित ने अपने हाथ की ताक़त से उसे पीछे ढकलने लगा...और आख़िर वो उसमे सफल भी हुआ..
रितिका पीछे की तरफ हो गयी..उसके नाज़ुक हाथों में इतनी जान कहाँ थी..अंकित अंदर घुसा और
उसने दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया..
क्रमशः...........................
गतान्क से आगे..............
लेकिन अंकित ने अपने हाथ की ताक़त से उसे पीछे ढकलने लगा...और आख़िर वो उसमे सफल भी हुआ..
रितिका पीछे की तरफ हो गयी..उसके नाज़ुक हाथों में इतनी जान कहाँ थी..अंकित अंदर घुसा और
उसने दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया..
रितिका :- ये क्या कर रहे हो अंकित.....
इस बात पर अंकित मुद्दा और उसने रितिका को देखा...शायद अभी ही आई थी ऑफीस सी...
सारे पहन रखी थी लाइट रेड महरून टाइप कि ट्रांसपेरेंट थी हल्की सी...और एक ग़ज़ब की सेक्सी लग रही थी..
अंकित तो वैसी भी आज बहुत ज़्यादा उत्तेजित था..और रितिका को ऐसे देख के वो तो और ज़्यादा भड़क गया
आग में घी का काम हो गया ये तो..
रितिका ने अंकित को अपनी तरफ घूरते हुए देख लिया..और उसने अपने आप को समेटती वो घूम गयी..
रितिका :- प्लीज़ जाओ यहाँ से...क्या चाहते हो...
अंकित :- वही जो आप भी चाहती हो..
रितिका :- में कुछ नही कहती..ये सिर्फ़ तुम्हारी सोच है...
अंकित :- अच्छा...सिर्फ़ मेरी सोच है....(बोलता हुआ वो धीरे धीरे कदम आगे बढ़ा रहा था)
इधर रितिका उसके कदमो को अपने करीब आते सुन उसकी दिल की धड़कने तेज चल रही थी....
अंकित की नज़र रितिका के उस न्यूड बॅक पे थी जो पीछे से काफ़ी खुली हुई थी..ब्लाउस ही ऐसा था कि
बॅक तो हद से ज़्यादा खुला हुआ था और बस एक पतली सी स्ट्रॅप्स से बंद था.....
अंकित ने करीब आते ही रितिका की बॅक को अपने हाथ से सहला दिया......
बस इससे तो रितिका की पूरी आँखें खुल गयी और उसका पूरा बदन काँपने लगा....वो कुछ बोल
पाती या कुछ कर पाती....
अंकित ने शोल्डर पे से हल्की सी साड़ी हटा के रितिका के कूल्हो पे अपने तपते होंठ रख दिए...
अंकित.त.........हल्की सी आवाज़ मुँह से निकली और फिर उसकी आँखें बंद हो गयी....
फिर अंकित अपने होंठ नीचे करते हुए आने लगा और बड़ी तेज़ी से उसने पीठ पे अपने होंठो की
बरसात कर दी......
रितिका की आँखें बंद हो गयी...दिल और दिमाग़ इस शरीर के सामने हारने लगी....रितिका मदहोशी में
अपनी गर्दन हिलाने लगी..उसका चेहरा लाल हो गया था वो बहुत गहरी साँसें ले रही थी...
उसके चेहरे को देख के कोई नही कह सकता था कि वो नही चाहती कि ऐसा हो...उसके चेहरे पे एक
नशा चढ़ चुका था......
उधर अंकित ने तो पीठ पे चुंबनों की बौछार करनी बंद नही करी..वो तो मन बना के आया
था कि आज तो सब कुछ लूट लेगा इस हसीना का....
अचानक उसने अपने हाथ आगे बढ़ाए और उस ब्लाउस की स्ट्रिप्स जो हुक से बंद थी..उसे खोल दिया.
कत्तिथल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल अजीब सी आवाज़ करके वो खुल गया....
और ये आवाज़ रितिका के कानो में बखूबी पड़ गयी..और जैसे ही पड़ी..उसने अपनी आँखें खोल ली..
मानो जैसे अभी अभी एक कड़वे सपने से जागी हो...और एक दम से आगे होके मूड गयी और अपनी
बूब्स के आगे हाथ लगा लिए...उसकी साड़ी हल्की सी साइड से गिरी हुई थी...हल्का सा क्लीवेज दिखाई दे
रहा था....ब्लाउस के हुक खुलने की वजह से वो ढीली हो गयी थी...पर रितिका ने आगे हाथ लगा रखा
था जिसकी वजह से वो नही गिरी पूरी...
रितिका की आँखों में पानी भर गया था और वो अंकित को घूर रही थी...
अंकित का फेस रियेक्शन चेंज नही हुआ वो रितिका को देखते हुए आगे बढ़ा...और अपने हाथ आगे
बढ़ा के उसे कमर से पकड़ लिया.....
रितिका अपने एक हाथ से उसे हटाने की कॉसिश करने लगी..लेकिन पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो नही हट
रही थी...
रितिका :- तुम...ऐइस..आ.आ....की....उ.न....कर..रही ह.हो... (अटकती हुई)
अंकित :- आपके लिए.....(इतना बोलता है)
और अपने होंठ आगे बढ़ा के रितिका की नेक पे रख देता है..और वहाँ बेइन्तिहा चूमने लगता है..
बिल्कुल पागलों की तरह...
आहह...रितका के मुँह से हल्की सी आवाज़ निकलती है....एक हाथ जो अंकित के हाथ को कमर से हटाने में
लगा था..वो तो ढीला पड़ता जा रहा था..बस नाम का हटा रही थी वो...
और जो दूसरे हाथ से उसने पल्लू पकड़ रखा था...वहाँ से भी वो हट गया..और अंकित के सर के पीछे
आ गया...
रितिका :- अंकित...आ.आ.ह..प्लीस..ए...मत.टीटी.त.. करूऊ (बोलते बोलते उसकी आँखें मदहोशी में बंद हो रही
थी) और वो अंकित के बालों को पकड़ के पीछे खिचने में लगी हुई थी..
प्लीज़..ए.ए..ए.ए... मत करो...ये सब ठीक नही हाइयैई........
अंकित ने अपनी होंठ हटा लिए और रितिका की आँखों देखने लगा..
अंकित :- अगर ये ठीक नही है...तो फिर क्यूँ भेजा मुझे वो लेटर क्यूँ वो सब किया क्या वो ग़लत नही
था...और अभी...खुद से क्यूँ बताया कि आर्नव घर पे नही है....इससे सिर्फ़ यही मतलब निकलता है कि
आपके दिल में भी वही है जो मेरे दिल में है..हम दोनो को अपनी अपनी परेशानी बतानी है...
और आप भी यही चाहती है...पर आपको एक अजीब सी डोर ने बाँध रखा है जो आज में तोड़ के
रहूँगा..क्यूँ कि ना तो में आपको परेशानी में देख सकता हूँ..और ना ही खुद परेशान
हो सकता हू....
(इतनी बाते उसने आँखों में आँखें डाल के बोली)
और रितिका को कमर से पकड़ की पीछे दीवार से सटा दिया..और अपने हाथ आगे करके...
उसके शानदार बूब्स के सामने से उसकी साड़ी का पल्लू हटा दिया जो सीधी जाके फर्श पर गिर गया
और फिर आगे बदः के उसके सीने से चिपक गया जिस्शे अंकित की चेस्ट में रितिका के बूब्स घुस गये
और फिर से..
पागलों की तरह कभी गालों तो कभी नेक और कभी ब्लाउस को शोल्डर पे से हटा के वहाँ
होंठो केए बरसात करने लगा...
रितिका ना कहते हुए भी हार चुकी थी..उसके हाथ अपने आप अप अंकित के सर के पीछे चले गये
और उसकी आँखें बंद हो गयी....और उसके मुँह से हल्की हल्की आह..निकलने लगी...
उसके शरीर ने उसके दिल और दिमाग़ पे आख़िर कर क़ब्ज़ा कर ही लिया...(इसमे अंकित की बातों का बहुत असर
था कि वो अब हार मान चुकी थी...)
अंकित का एक हाथ शरीर को सहलाता हुआ उसके पेट पे पहुच गया और उसकी उस न्यूड पेट की नाभि
पे रख वहाँ अपनी उंगलियों से ट्विस्ट करने लगा...
रितिका के पेट ने तो नाचना शुरू कर दिया इस प्रहार से...गहरी गहरी साँसे चल रही थी उसकी..
अंकित तो पागलों की तरह चुम्मा चाटी कर रहा था पूरी गर्दन पे...मानो कोई अनोखी चीज़
मिल गयी हो..(वैसे उसके लिए अनोखी ही है)
दूसरे हाथ से अंकित रितिका के चेहरे को सहला रहा था और रितका भी उसके हाथों पे अपना चेहरा घिस रही
थी...अब उसने अपने दिमाग़ की बाते सुननी बंद कर दी...
दिल और शरीर की बातों में खो गयी....और इस सुख का आनंद लेने लगी...
अंकित ने अपना हाथ रितिका के चेहरे से हटाया और ब्लाउज की तरफ बढ़ा के उसे शोल्डर पे से गिरा
दिया अब पीछे से तो खुला हुआ ही था...शोल्डर से गिरने की वजह से वो लटक सा गया मगर
अंकित की चेस्ट रितिका से चिपकने की वजह से वो पूरा नही गिरा..
अंकित ने वहाँ जीभ निकाली और शोल्डर पर अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी.
आहह..रितिका सिसकती हुई उसके बालों में हाथ फैरने लगी..उसके शरीर में गुलगुली होने
लगी....
कुछ सेकेंड तक ऐसे ही रितिका को गुलगुली करने के बाद उसने अपना चेहरा उठाया और रितिका की आँखों
में देखने लगा..रितिका के हाथ बराबर अंकित के बालों में चल रहे थे...
रितिका भी उसकी आँखों में देख रही थी...
दोनो की आँखों में एक ही बात मुझे नज़र आ रही है..
कि अब बस और नही.....और नही....इंतजार होता इस पल को ज़िने दो...
बस देखते ही देखती अंकित के होंठ आगे बढ़ने लगे...और करीब बढ़ते चले गये..
और आख़िर कर रितिका के उन रसीले होंठो पे पड़ गये..और उन्हे चूसने लगी....
बड़ी ही बहरामी से अंकित रितिका के होंठ चूस रहा था..तो रितिका भी पीछे नही हाटी..और वो
भी उसी जोश के साथ किस करने लगी...
सर का नशा अब सर चढ़ चुका था...और वो पूरी ढोल बजाते हुए आगे बढ़ रहा था..
क्रमशः...........................
गतान्क से आगे..............
अंकित के हाथ आगे बढ़ते हुए रितिका के उन आधे क़ैद बूब्स पर आ रहे थे....और कुछ ही सेकेंड
में जब दोनो की जीभ एक दूसरे से लड़ाई लड़ रही थी..तो उसने उन बूब्स पर हाथ रख दिए और
उन्हे कस कस्स के दबाने लगा...
अपने हाथों से जितना मसल सकता था मसल्ने लगा..मानो कोई फॉर्म की बॉल हो...बड़ी ही
बुरी तरह से....
किस में भी वही जुनून दिखाई दे रहा था......
रितिका का ब्लाउज ऐसे बुरी तरह निचोड़ दिए जाने से बूब्स के कुछ हिसों के उपर से हट गया था
जिसे रितिका के वो सुंदर या यूँ कहें बेहद सुंदर बूब्स उजागर होने लगे थे..
पर..
अंकित के ऐसा करने पर रितिका को दर्द हो रहा था..और इस बार अंकित को ये पता चल गया..
क्यूँ कि रितिका के हाथों में उसके बाल काफ़ी ज़्यादा कस गये थे...
अंकित ने अपना चेहरा अलग किया...और अपने हाथों से उसके बूब्स दबाना बंद कर दिया..और उसकी
आँखों में देखने लगा...
रितिका की साँसे बहुत तेज़ी से चल रही थी...यूँ कही उखड़ चुकी थी....
रितिका :- (उखड़ी साँसों में) क्या..इसे प्यार...से करना....कहते..आ.आ.. हैं.....
अंकित को रितिका की ये बात दिल को छू गयी...उसे समझ आ गया कि वो क्या कर रहा था..वो अभी जो
कर रहा था वो उसकी वासना था...उसे एहसास हुआ कि लड़की कोई खिलोना नही कि उससे जबर्जस्ती किसी भी
तरह मोड़ दिया...
उसे ये भी समझ आया..कि ये लड़कियाँ सिर्फ़ 2 बूँद प्यार की प्यासी होती है अगर वो दे दिया तो ये सब कुछ
देने को तैयार हो जाती है...
अंकित को समझने में देर ना लगी..वो आगे बढ़ा और रितके के कान के पास जाके उसके कान के
नीचे वाले हिस्से को अपने होंठों में दबा के उसे बड़े प्यार से चूसने लगा...
ह्म्म्म्मममममममममममममममम.....एक आवाज़ रितका के मुँह से निकली..
अंकित ने होंठ हटाए और फिर वो बोला...सॉरी......
और फिर कान में अंदर अपनी जीभ डाल के उसे चाटने लगा...रितिका को गुलगुली होने लगी लेकिन
उससे इस एहसास का मज़ा बहुत आ रहा था...
फिर अंकित अपना चेहरा वहाँ से हटा नीचे झुक गया और अपनी जीभ नाभि में डाल के वहाँ ट्विस्ट
करने लगा....
आहह रितिका के हाथ सिसकी लेते हुए अंकित के सर के पीछे आ गये...
उसने एक हाथ से अपना ब्लाउज आगे लगाए रखा था...जिससे वो ना गिरे...
पर एक साइड से उसके आधे बूब्स तो क्लियर्ली दिख रहे थे..शोल्डर पे से ब्लाउज गिरने की वजह से वो
हवा में झूल रहा था आधी जगह से..
रितिका की आँखें बंद हो गयी थी..अंकित उसके तपते हुए पेट अपने गीले ठंडे होंठो की बरसात
जो कर रहा था..उसका पेट कांप रहा था...और पैर भी साथ साथ हिल रहे थे...उसके लिए खड़ा होना
काफ़ी मुश्किल था....
फिर अंकित उपर उठा रितिका को ऐसी ही देखता रहा...उसकी आँखें बंद थी...तेज तेज साँसे ले रही थी..
फिर अचानक...
अंकित ने अपने हाथ आग बढ़ाए और उसे अपनी गोदी में उठा लिया..रितिका एक पल के लिए चौंक
गयी...लेकिन फिर आँखों खोल के अंकित को देखने लगी...
अंकित भी उसकी आँखों में देखने लगा...और चल पड़ा उसे उठाए बेडरूम की तरफ....
साड़ी का पल्लू नीचे गिरा हुआ ज़मीन को सॉफ कर रहा था लेकिन इस वक़्त साड़ी इतनी ज़रूरी नही थी
ज़रूरी था तो इन दोनो का आपस में मिलन होना..जो दोनो के लिए ही बेहद ज़रूरी था..
कमरे में पहुच के अंकित ने बड़े प्यार से रितिका को बेड पे रखा..और उसके हाथ को अपने
हाथ में पकड़ लिया..और हथेली के उपर अपने होंठ फिराने लगा..और किस करने लगा..और वहाँ
से किस करते हुए वो आगे बढ़ता चला गया और अपनी जीभ निकाल के अपने रस से रितिका के
हाथ को भिगो दिया और शोल्डर पे पहुच के वहाँ अपने होंठ रख के उन्हे चुस्सने लगा...
रितिका को इस सेंसुअल भरे खेल में बड़ा ही मज़ा आ रहा था हल्की हल्की बहुत हल्की सिसकी लेते
हुए आँखें बंद कर ली थी...
अंकित वहाँ से हटा और कुछ सेकेंड तक इस कमसिन जवानी को देखने लगा...पता नही कैसे काबू कर
रखा था इसने..नही तो इस बाला को ऐसी हालत में पलंग पर देख ले तो कोई भी राक्षस की तरह टूट
पड़े और पूरा खा जाए..हड्डी तक ना छोड़े....
पलंग पर लेटी उपर से आधा नंग शरीर चेहरा इतना खूबसूरत पानी से भरा चेहरा उसपर आधी
खुली ब्लाउज जिसमे से वो सुंदर चुचियाँ खिड़की में से झक रही थी..और नीचे सपाट सुंदर
पेट...जिसके बीच में एक सुंदर होके...और नीचे आगे देखो तो घुटनो तक चढ़ि हुई साड़ी....
कोई भी लड़का दीवाना हो जाए....और पागल होके टूट पड़े...
लेकिन अंकित को पता था कि उसे क्या करना है.....
वो आगे बढ़ा और अपनी एक उंगली को पेट के कोने से फिराते हुए दूसरे कोने तक आया...और साथ
साथ पेटिकोट में धँसी साड़ी को भी खोल लिया.....
रितिका की कमर अपने आप ही हवा में उठ गयी....और अंकित ने फुर्ती दिखाते हुई नीचे फँसी साड़ी
भी खीच ली...और अब पूरी साड़ी शरीर पे से हट चुकी थी...उसने उस साड़ी को वहीं ज़मीन पे छोड़ दिया
और रितिका की टाँगो पे अपनी उंगलियाँ चलाते हुए अपने होंठो की रगड़ मारते हुए धीरे धीरे
पेटिकोट के उपर आने लगा और उपर आकर उसका नाडा भी खोल दिया.......और उसे हल्का सा
नीचे कर दिया....
रितिका का शरीर बुरी तरह से हिल रहा था....उसने अपनी एक उंगली अपने दाँत के बीच में दबा रखी थी..
हल्का सा नीचे होने की वजह से उसकी पेंटी की लाइन दिखनी शुरू हो गयी...
अंकित ने होंठ आगे बढ़ा के ठीक जहाँ पेंटी की लाइन थी उसपे उपर रख दिए और वहाँ चाटने
लगा...
आ..न.न...क......आअहह सिसकी लेती हुई रितिका उछल सी गयी....
क्रमशः...........................
गतान्क से आगे..............
अंकित धीरे धीरे साँप की तरह रेंगता हुआ रितिका के शरीर के उपर चढ़ने लगा..और अपनी गर्दन
नीचे कर के...होंठो को पेट के उपर से चिपकाता हुआ उपर आने लगा और अपनी जीभ निकाल
कर साइड में से मम्मो से होते हुए उपर जाने लगा मानो कोई क्लीनिंग कर रहा हो....
रितिका तो पागल सी हो गयी..उसकी शरीर में झुनझुनी सी फैलने लगी..हालत बुरी होती जा रही थी..
अंकित ने सेम आइस ही दूसरी तरफ भी किया अपनी जीभ से.....
और हाथ आगे बढ़ाकर ब्लाउज को उस तरफ से भी शोल्डर से गिरा दिया था....
अब बस रितिका के मम्मो के उपर एक मात्र कपड़ा सा पड़ा हो...मानो किसी फल या सब्ज़ी के उपर
कपड़ा रख दिया हो .....
अंकित उस नज़ारे को देखने लगा उसका हथियार तो ऐसे सख़्त हो गया था मानो कोई पोल रोड
के साइड में सीधा खड़ा हो...
रितिका को अपने पेट के उपर उस भारी चीज़ का आभास बखूबी हो रहा था जिससे उसकी जान और बुरी
तरह से निकल रही थी...उसकी चुनमुनिया ने अंदर अंदर ही अपनी पानी की सेना बाहर निकालनी शुरू कर दी थी..
जिससे उसका टाट यानी कि उसकी पेंटी उस पानी की सेना में सनती जा रही थी....
फिर अंकित ने बड़े ही मज़ेदार अंदाज़ में ब्लाउज को रितिका के मम्मो पे से हटाया जिसे
देख कर रितिका को भी एक बार को कामुकता भरी मुस्कान देनी पड़ी....
वो अंकित ने किया ऐसा था ... कि उसने अपना चेहरा आगे बढ़ाया और अपने दाँतों से पकड़ के उसके
ब्लाउज को खीच लिया वो भी बहुत धीरे धीरे..जिससे कि उसकी चुची धीरे धीरे उसकी आँखों के
सामने आने लगी....और जब उन चुचो के निपल सामने आए तो अंकित का मुँह खुल गया
और ब्लाउज वहीं पेट पे रितिका के गिर गया..
वाहह क्या बनाया है इतने सुंदर और गोल गोल मक्खन जैसे खरबूज़ पर ये बहुत ही
लाइट कलर के पिंक पिंक निपल्स.....मानो इसकी सुंदरता को और बढ़ा रहे हों.....
अंकित के मुँह से लार टपकने लगी....
रितिका ने जब अंकित को उसके मम्मो पे ऐसे घूरते पाया तो वो शरमा गयी..उसके गाल और उसकी
नाक एक दम लाल सुर्ख हो गयी..उसने अपने हाथों से उसे ढक लिया और अपनी आँखें बंद कर ली..
रितिका :- प्लीज़..डोंट सी देम लाइक दिस....
अंकित की उस कामुकता से भरी आवाज़ को सुन के और भी ज़्यादा गरम हो गया उसके चेहरे पे एक कातिलाना
स्माइल आ गयी...
अब और नही बसका हो रहा था उसके कि कुछ और करे..अब तो वो बस वो कर देना कहता था जिसके
लिए दोनो कब से सूखे पड़े हैं..आज वो यहाँ पानी का तसमा ले आना चाहता था...जिसमे दोनो
ही डूब जाए....और परम सुख का अनुभव लेते रहे....
अंकित ने अपने हाथ धीरे धीरे आगे बढ़ाए और रितिका के हाथों को उसकी चुचियों से हटाने
लगा...रितिका ने भी देरी नही की और ना ही उसे रोकने का कोई दम लगाया.....और उसके हाथ पीछे
की तरफ होते चले गये....और कुछ ही सेकेंड में दोनो हाथ पीछे की तरफ फैल गये...जिसकी वजह
से...
सामने वो उभरी हुई चुचियाँ जिसके निपल ऐसे खड़े हो रहे थे मानो जंग में लड़ने जा रहे
सिपाही खड़े हो सामने एक अद्भुत तरीके से उजागर हो गये...जिसे देख कर अंकित की आँखें
फटी की फटी रह गयी...
उसने तो सपने में भी नही सोचा होगा कि वो ऐसी चुचियाँ ज़िंदगी में देखेगा कभी....
अंकित ने धीरे धीरे हाथ आगे बढ़ाने शुरू करे..उसके दिल की धड़कन तेज चल रही थी...रितिका ने
जब आँखें खोल के देखा कि अंकित अपने हाथ आगे बढ़ा रहा है तो उसके भी दिल की धड़कन तेज़ी
से चलने लगी..और उसकी वजह से उसकी चुचियाँ उपर नीचे तेज़ी से हो रही थी...
अंकित का हाथ बेहद करीब आके रुक गया.....उसने रितिका की आँखों में देखा और कुछ सेकेंड तक
ऐसे ही देखते रही..
और फिर....आख़िर कर हाथों का शरीर का एक असली मिलन हुआ...
अंकित के हाथ रितिका के मम्मो पे पड़ड़ ही गये और उन्हे हल्का सा दबा दिया...
आआआआहह...रितिका ने अपनी गर्दन उपर की तरफ करते
हुए एक लंबी सी सिसकी ली..
आअहह जब ठंडे हाथों के स्पर्श में वो सॉफ्ट मक्खन जैसे चुचें और कड़क निपल
हाथ में चुबहे तो अंकित के मुँह से भी आह निकल ही गाइिईई...........
अंकित के हाथ रितिका के मम्मो पे पद ही गये और उन्हे हल्का सा दबा दिया...
आआआआहह...रितिका ने अपनी गर्दन उपर की तरफ करते
हुए एक लंबी सी सिसकी ली..
अंकित ने अपने हाथ उन मम्मो पे चलाने शुरू किए...जिससे वो चुची हाथों के नीचे दब के
इधर उधर होने लगी और घूमने लगी...
जैसी गोल गोल चक्की चल रही हू.....अंकित की हथेली में वो तने हुए थोड़े मोटे निपल्स
चुभ रहे थे..
फिर अंकित ने हाथ हटाया और उंगली से निपल्स के साथ खेलने लगता...
कभी इधर से मारता तो कभी उधर से उन पर उंगली से मारता ... मानो बॉल लटकी हो रस्सी से और
उसे बॅट से मार रहा हो...
आह उूुुुुुुउउ उफफफफफफफफफफफ्फ़...अंकित.........रितिका के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी.....