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एक एक आहट "ज़िंदगी" की complete
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Thread starter
StoryPublisher
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Start date
अंकित के मन तो लड्डूओं का पहाड़ फूटने लगा...आख़िर ये भी कोई पूछने की बात है...
अंकित :- सॉरी....में तो कब से चाहता था मिलना..मतलब कि आर्नव से मिलना चाहता था..
रितिका :- ह्म्म ग्रेट...अच्छा आइ लिल बिजी नाउ..आइ विल्ल सेंड यू माइ अड्रेस्स..ओके..बाय..
अंकित :- ओके....बाय......
(फोन कट)
अंकित तो गहरी सोच में चला गया..उसे यकीन नही हो रहा था जो भी उसके साथ अभी हुआ..कहीं
वो सपना तो नही था...ये जाने के लिए उसने अपने हाथ पे हल्का सा नोचा..
ओउcच..नही नही सपना नही है...बिल्कुल सच है..कल..रितिका के घर..वाह....खुशी मे बोलता हुआ..
लेकिन फिर वो अपने सर पे हाथ मार देता है...
इस गुस्से में मेने क्या कर दिया यार...अंकिता मॅम से पहले रूडली बात करी और उसके बस उनका नंबर
भी फैंक दिया...शिट्स शिट्ससस्स..शिट्सस्स...(बोलता हुआ सर पे पिल्लो मारने लगा.)
ये क्या कर दिया मेने गुस्से में...सॉरी अंकिता मॅम...ग़लती हो गयी माफ़ कर दो....अब कोई ना कोई
चक्कर तो चलाना ही पड़ेगा....(फिर गहरी सोच में डूब जाता है)
तभी उसके फोन पे मसेज आता है...वो मसेज रितिका का ही होता है..
रितका मेसेज ...... अंकित दिस ईज़ माइ अड्रेस....********* ए ब्लॉक...कल 1 बजे आ जाना .. लंच साथ करेंगे.
ओक..मीट यू टूमारो..
1 बजे...लेकिन कॉलेज..टाइम चेंज करवा दूं..नही नही...कल कॉलेज से जल्दी आकर सीधे वहीं चला
ज़ाउन्गा...अंकित ने ये सोचा और ओके कर के रिप्लाइ कर दिया..
भाई साहब ने थोड़ी देर कुछ सोचा..और फिर फ्रेश होके मार्केट चले गये.....
उसके दिमाग़ में अंकिता को मनाने का प्लान चल रहा था..उसी की तैयारी में गया था...
आज तो अंकित भाई टाइम से पहले उठ गये...आँखों में एक अलग चमक लिए और चेहरे पे एक
अलग इरादा लेके कॉलेज की तरफ निकल पड़े....
ना किसी लड़की पे ध्यान ना कुछ...बस आज तो अपनी मंज़िल यानी कि कॉलेज की तरफ बढ़ते चले जा रहे
थी...इंपॉर्टेंट काम जो करना था उन्हे...
अंकिता से सॉरी जो बोलना था...
टाइम से पहले ही आज अंकित क्लास में पहुच गया...क्लास में सिर्फ़ एक दो ही स्टूडेंट बैठे
थी...अंकित सीधे जाके वही जहाँ रोज़ बैठता था लास्ट बेंच पे जाके बैठ गया.....
15 मिनट क्लास में विकी आया...और अंकित को वहाँ बैठा देख चौंक गया...
विकी :- बडी...आज तू इतनी जल्दी..
अंकित :- हाँ यार ब्रो..आज जल्दी उठा गया तो आ गया..
विकी अपने मन में सोचता है कि आज भाई साहब का मूड बड़े दिनो के बाद बेहतर है..
फिर दोनो बातें करने लगते हैं..धीरे धीरे क्लास में बच्चे आने लगे..और टाइम हो गया क्लास
का....
फिर क्लास में आई अंकिता.....हाथ में एक रिजिस्टर लिए..हाथों में स्टाइलिश बॅंगल सी पहने हुए
बाल खुले आगे की तरफ एक ही साइड में कर रखे थे...पिंक कलर की साड़ी में...
अंकित तो बस देखता ही रहा....
सबने विश करके गुड मॉर्निंग किया.....
अंकिता ने पढ़ाना शुरू किया......अंकित बस उसे देखने लगा...आज वो बुक में से कुछ समझा रही
थी.. लेकिन अंकित का ध्यान अपने प्लान पे था....
एक दो बार अंकिता ने नज़र उठा के अंकित की तरफ देखा लेकिन बड़े ही अजीब एक्सप्रेशन दिए जो
अंकित को अजीब लगे..
वो समझ गया कि अंकिता मॅम काफ़ी नाराज़ है उससे..लेकिन क्यूँ..कल तक तो ठीक थी..ऐसा क्या हो गया..
ये सब सोचते हुए..क्लास कब ओवर हुई पता नही..
अंकिता क्लास से बाहर चली गयी....अंकित बाहर जाता इतनी देर में दूसरा टीचर आ जाता है जिसकी वजह से
वो बाहर नही जा पाया..
बड़ी बेचनि से उसका दूसरा पीरियड ख़तम हुआ एक एक मिनट उसके लिए भारी हो रहा था ...
लेकिन क्लास ख़तम हुई और अंकित विकी से ये बोल के निकला कि उसे कुछ काम है..और बॅग उठा के निकल
गया....
सबसे पहले उसने टीचर्स रूम में देखा लेकिन वो वहाँ नही थी..फिर कॅंटीन में देखा लाइब्रेरी
में देखा उससे अंकिता कहीं नही मिली..गर्मी में पसीना पसीना हो गया था
अंकित :-(परेशान होते हुए) कहाँ गयी मॅम आप....आज मिल जाओ उसके बाद बात करो ना करो कोई
बात नही..पर जब तक आपको सॉरी नही बोलूँगा में चैन से बैठ नही पाउन्गा...
(फिर उसके दिमाग़ की लाइट ऑन हुई....उसने हर जाग देखा लेकिन कंप्यूटर लॅब में नही देखा...)
वो फ़ौरन भागता हुआ..एक के बाद एक लॅब में देखने लगा..और आख़िरकार लॅब 4 में एक कंप्यूटर
पे अंकिता बैठी हुई दिख गयी उसको..
पीठ थी अंकिता की अंकित के सामने.....स्टाइलिश ब्लाउस और वो सुंदर कमर कोई भी देख ले तो बस
उसका तो बॅंड ही बज जाए....
अंकित बिना पर्मिशन लिए अंदर घुस गया और अंकिता के पास पहुच के..
अंकित :- एक्सक्यूस मी मेम ?
अंकिता ने कंप्यूटर पे काम करना बंद नही किया और बिना मुड़े..
अंकिता :- यस ??
अंकित :- मॅम.. आइ आम सॉरी...
इस बार अंकिता ने कम छोड़ा...और अपनी गर्दन पीछे मोडी..उसने स्पेक्स लगा रहे थे...और वो उसमे
बहुत क्यूट लग रही थी..
अंकिता :- सॉरी ... व्हाई सॉरी?
अंकित :- मॅम कल मेने आपसे अच्छे से बात नही करी इसलिए..उसके लिए आइ आम सॉरी
अंकिता :- लुक अंकित...वी आर टीचर स्टूडेंट..तो ऐसी बातों का कोई मतलब नही है...
अंकित को सुन के शॉक लगा कि आख़िर ये क्या हुआ अचानक ...लेकिन फिर उसने बड़े ठंडे दिमाग़ से काम लिया..
अंकित :- आइ नो मॅम...में भी एक स्टूडेंट की हैसियत से ही बोल रहा हूँ...मुझे पता है मेने कल
बदतमीज़ी से बात करी इसलिए उसके लिए सॉरी बोल रहा हूँ..
अंकिता :- इट्स ओके..नाउ यू कॅन गो (स्ट्रेट फॉर्वर्ड आन्सर देते हुए)
अंकित को सुन के थोड़ा दुख हुआ और अजीब भी लगा....
फिर उसने अपना बॅग खोला और उसमे से कुछ निकाल के...अंकिता की कंप्यूटर की टेबल की साइड में रख
दिया....
अंकिता ने उन चीज़ों को देखा और फिर अंकित से पूछने ही वाली थी..कि अंकित बोल पड़ा..
अंकित :- मॅम कल जो अपने नंबर दिया था वो मेने बिना पढ़े...ही यहीं लब के बाहर फैंक
दिया था.....बहुत ग़लत किया था मेने..आइ आम रियली वेरी सॉरी...और अब में कभी भी पढ़ाई के अलावा
कोई दूसरी बात नही करूँगा....हॅव आ नाइस डे मॅम..
(निराशा भरे स्वर में बोल के वो वहाँ से निकल गया)
कहानी जारी है ............................
गतान्क आगे.....................
अंकिता ने अंकित की रखी हुई चीज़ों को देखा..जो कि एक कार्ड था और एक रोज़ था..
अंकिता ने वो कार्ड उठाया .... उसे खोला ... वो एक सॉरी कार्ड था...और उसमे एक छोटा सा नोट था..
अंकिता उसे पढ़ने लगी...
वैसी तो एक स्टूडेंट को टीचर के लिए ये सब करना शायद ही पसंद आए किसी को..
क्या लिखूं..कुछ समझ नही आ रहा...पर इतना ही कहना कहूँगा कि आइ आम वेरी सॉरी..में कभी किसी
को हर्ट नही करना चाहता और उनको तो बिल्कुल नही जिन्हे में पसंद करता हूँ..अजीब लगता है पढ़ना
ये..लेकिन क्या एक स्टूडेंट और टीचर फ़्रेंड नही बन सकते..क्यूँ नही बन सकते..में आपको एक फ़्रेंड के
नाते ये कार्ड और साथ में रोज़ दिया..जैसे कल आपने मुझे फ़्रेंड के नाते अपना नंबर दिया था
और में बेवकूफ़ उसे फैंक दिया...बहुत बड़ा पगल हूँ में..
इसीलिए अंकिता मॅम प्लीज़ हो सके तो इस कबाड़ी स्टूडेंट को आप माफ़ कर देंगी...सॉरी...
अंकिता के चेहरे पे एक मुस्कुराहट आ गयी ये पढ़ कर..
अंकिता :- पगल कहीं का..एक नंबर का नौटंकी है ये लड़का.....(फिर उस कार्ड को और रोज़ को बॅग में
डाल देती है)
अंकित मूह लटका के कॉलेज से बाहर निकल गया ... अंकिता के चेहरे पे उसके लिए एक अलग ही एक्सप्रेशन
देख के वो थोड़ा दुखी हो गया था....अब उसका मन नही कर रहा था रितिका के घर जाने का..
तभी उसने सोचा कि आज के लिए फोन कर के मना कर देता हूँ रितिका को...और फोन निकाल के
कॉंटॅक्ट्स में से रितिका को कॉल करने ही जा रहा था कि तभी उसके फोन पे कॉल आ गया...
अंकित :- अन नोन नंबर..... किसका होगा....
(सोचते हुए पिक करता है)
अंकित :- हेलो..
दूसरी तरफ से.....हेलो अंकित..थॅंक यू सो मच..
अंकित सोच में पड़ गया थॅंक यू..लेकिन ये आवाज़ जानी पहचानी सी क्यूँ लग रही है...
अरे..इतना मत सोचो...तुम्हारे कार्ड और फ्लवर के लिए थॅंक्स वैसे तो इसकी ज़रूरत नही थी लेकिन तुमने
एक टीचर और स्टूडेंट के बीच में एक फ्रेंड्स का रिलेशन रखा वो पसंद आया मुझे....
ओ तेरी की अंकिता मॅम का फोन.....अंकित अंदर ही अंदर इतना खुश हो गया कि उसे कुछ समझ नही
आ रहा था कि बोले क्या....
अंकिता :- क्या हुआ...यू आर देअर ?
अंकित :- हाँ..आहा...हूँ..हूँ...(हकलाते हुए)
अंकिता :- ऐसे हकला क्यूँ रहे हो?
अंकित :- नही..नही..कुछ नही...वो ..बस ये सोच रहा था मॅम आपको मेरा नंबर कहाँ से मिला...
अंकिता :- ओफो...सब्जेक्ट में स्मार्ट हो लेकिन हो बुधु...ये भूल गये कि तुम कॉलेज में पढ़ते हो
और तुम्हारे सारे कॉंटॅक्ट्स यहाँ हैं मेरे पास...वहीं से मिला...
अंकित अपने सर पे हाथ मारते हुए....ओ तेरी की...कसम से ये बहुत चालू है..मन में बोलता है..
अंकित :- ओह्ह..हाँ ये तो में भूल गया था....
अंकिता :- अच्छा मिस्टर. मूड मत सडाना में तुमसे कोई नाराज़ नही थी...लेकिन मुझे खुशी मिली कि तुमने
मुझसे सच बोला..
अंकित :- सच कैसा सच?
अंकिता :- यही कि तुमने मेरा नंबर फैंक दिया था...
अंकित :- ओह..उसके लिए आइ आम वेरी सॉरी मॅम..वैसे में बिल्कुल ऐसा नही करना कहता था लेकिन जब
मुझे गुस्सा आता है ना..तो बस पता नही इधर उधर का कुछ नही देखता..दिमाग़ खराब हो जाता है
मेरा..
अंकिता :- रिलॅक्स....रेलकष्कशकश.....में समझ सकती हूँ..इस एज में ऐसा होता है...चलो यार क्लास लेनी है
मुझे और तुम्हारी क्लास का भी टाइम हो गया है..बाद में बात करेंगे...
अंकित :- ओके मॅम थॅंक यू सो मच..
अंकिता :- नो नीड ... बाबयए..
अंकित :- बाबयए.....
(फोन कट)
और एक बार फिर हमारा लोन्डा खुशम खुश.....हंसते हसते...खुशी से पागल दिल में बड़े बड़े
लड्डू दिल में फोड़ता हुआ चल पड़ा अपनी मज़िल की ओर यानी कि रितिका के घर...
1 बजने में 5 मिनट थी...और अंकित जी..टाइम से पहले ही इस वक़्त घर के गेट के बाहर खड़े थे..
थोड़े से नर्वस फील कर रहे थे जो की नॉर्मल था ...
फिर अंकित ने बेल बजाई...2 मिनट बाद गेट खुला....
अंकित :- अरे आर्नव हाउ आर यू क्या हाल हैं आपके.. (गेट आर्नव ने खोला )
अरणाव :- में बिल्कुल ठीक...आप कैसे हो..
अंकित :- में भी बढ़िया..अच्छा देखो में आपके लिए क्या लाया हूँ..
(और फिर अंकित ढेर सारी चॉकलेट निकालता है)
अरणाव फट से वो चॉकलेट डालता है..और अंदर भाग जाता है...मामा मामा चिल्लाते हुए...
अंकित वहीं गेट पे खड़ा रहता है.....
तभी एक आध मिनट के बाद रितिका वहाँ आती है....
रितिका :- अरे अंकित वहाँ क्यूँ खड़े हो अंदर आओ.......(अंकित को देखते ही बोलती है..)
अंकित को एक झटका लगा....आज उसे रितिका का तीसरा रूप देखने को मिला..
बाल उपर की तरफ बाँध रखे थे और पता नही अजीब सा स्टाइल बना रखा था...
नीचे एक ढीला ढाला सा कुर्ता..वाइट डिज़ाइन दार था..और उसके नीचे छोटी सी शोर्ट्सस....ब्लू कलर
की....
एक बार तो अंकित का बुरा हाल हो गया रितिका को ऐसे देख कर...बहुत ही ब्यूटिफुल लग रही थी...
लेकिन फिर अंकित ने अपना ध्यान सही जगह लगाया...
वो अंदर एंटर हुआ....रितिका ने गेट बंद कर दिया..
रितिका :- तुम बैठो में पानी लाती हूँ...
अंकित वहीं सोफ्फे पे बैठ जाता है...उसके दिल की धड़कन ज़ोरों से चल रही थी..
रितिका पानी लाती है..
रितिका :- ये लो....बहुत गर्मी है..रूको में ए/सी ऑन करती हूँ..
अंकित :- नही नही..ठीक है..
रितिका :- अरे क्या ठीक है अपनी हालत देखो पसीने से भरे हो..कॉलेज से आ रहे हो क्या..
(ए/सी ऑन करते हुए बोलती है)
अंकित :- जी..कॉलेज से ही आ रहा हूँ..
रितिका :- यार फिर जी...मेने मना किया है ना..तुमने तो मुझे बुढ़िया ही बना दिया है..
(और फिर हंस देती है)
अंकित भी हल्का सा मुस्कुरा देता है...तभी हॉल में आर्नव आ जाता है..
अरणाव :- ममा..ये देखो अंकित भैया ने मुझे कितनी सारी चॉकलेट दी है...
रितिका :- आर्नव .. इतनी चॉकलेट नही खाते बॅड हॅबिट्स..ममा ने बोला है ना...टीथ्स खराब हो जाएँगे
आर्नव को इतनी चॉकलेट्स देने की क्या ज़रूरत थी...
अंकित :- ह्म्म अब पहली बार आया था..और पता नही था क्या दूं..तो में आर्नव के लिए चॉकलेट
ले आया...
रितिका :- उसकी कोई ज़रूरत नही थी...बिना गिफ्ट के भी आ सकते थे..
अंकित :- तो फिर आपने भी तो इतना एक्सपेन्सिव गिफ्ट दिया था..जिसकी ज़रूरत नही थी..
रितिका :- वो तो खुशी से दिया था..
अंकित :- तो ये भी खुशी से दिया है और वैसे भी मेने आर्नव को दिया है..आपको थोड़ी ही क्यूँ आर्नव
आर्नव :- हाँ....
फिर थोड़ी देर ऐसे ही बातें चलने लगती है...2 बज जाते हैं....
रितिका :- भूक लगी है लंच करें....
अंकित अपनी गर्दन हाँ में हिला देता है..
फिर तीनो लंच करने लगते हैं..लंच करते हुए..
रितिका :- कॉलेज कैसा चल रहा है अंकित?
अंकित :- बढ़िया चल रहा है..अभी तक तो..
रितिका :- कोई प्राब्लम आए तो ज़रूर बताना...
अंकित :- बिल्कुल..बताऊगा..आपकी हेल्प की ज़रूरत पड़ेगी...जब प्रॉजेक्ट बनाने का टाइम आएगा...
रितिका :- ह्म्म..वैसे कौन से सब्जेक्ट में इंटरेस्ट है..?
अंकित :- जावा में..
रितिका :- ह्म्म गुड..
अंकित :- रितिका जी एक बात पूछूँ?
रितिका :- नही...नही पूछ सकते...
अंकित अपना सर झुका लेता है और फिर खाने लगता है..
रितिका :- तब तक नही पूछ सकते जब तक ये जी नही हट जाता..
अंकित :- हहा..क्या करूँ आदत है ना..अच्छा कॉसिश करता हूँ..रितिका क्या में कुछ पूछ सकता हूँ..
रितिका :- नाउ साउंड्स गुड..पूछो..
अंकित :- आर्नव के डॅड यानी आपके हज़्बेंड कहाँ है?
रितिका ये सुन लंच करना बंद कर देती है....और फिर...वो एक्सक्यूस मी उठ के बोल के चली जाती है
किचन में....
अंकित थोड़ा शॉक हो जाता है...वो सोचने लगता है कि ऐसा क्या ग़लत बोल दिया उसने....फिर वो भी
लंच की टेबल से उठ जाता है....
फिर रितिका 5 मिनट बाद वापिस आ जाती है...
रितिका :- अरे क्या हुआ तुमने लंच कर लिया.. (अब बिल्कुल ठीक नज़र आ रही थी)
अंकित अपनी गर्दन हाँ में हिला देता है...
अंकित :- सॉरी ....
रितिका प्लेट उठाते हुए....सॉरी..पर सॉरी क्यूँ
अंकित :- वो..मेने आपसे..
रितिका :- तुम बैठो में आती हूँ....
5 मिनट बाद.
रितिका :- आर्नव के डॅड यानी मयंक...उनकी डेथ हो चुकी है...5 साल हो गये...
अंकित को सुन के तगड़ा झटका लगता है......
अंकित :- आइ आम वेरी सॉरी..
रितिका :- अरे तुम क्यूँ सॉरी बोल रहे हो...जो होना था वो हो चुका.
अंकित :- पर कैसे हुआ ये सब?
रितिका :- 18 साल की एक ब्रिलियेंट लड़की...जिसके डॅड ने उसे उस भेज दिया पढ़ने के लिए ..
लेकिन जब कॉलेज में थी..तब मुझे मयंक मिला....बस दोस्ती से कब प्यार हुआ पता नही चला....
कॉलेज पूरा हुआ .. तब तक में 21 की हो गयी थी..और साथ ही साथ प्रेग्नेंट भी....
जॉब मिल चुकी थी....तभी मयंक ने मुझे शादी के लिए प्रपोज़ किया....में तो कब से इंतजार
कर रही थी..आख़िर कार 3 साल तक हम दोनो एक साथ ही थे..बस फ़र्क इतना था कि शादी नही की थी..
फिर हमारी शादी हो गयी...में बहुत खुश थी..एक तरफ में माँ बाने वाली थी और दूसरी तरफ अब
मयंक फाइनली मेरा हज़्बेंड था...लेकिन उस रात को...
उस रात उस में काफ़ी स्नोफॉल हो रही थी...मयंक ऑफीस से घर आ रहे थे...में घर पे ही थी..
मेरी डेलिएवरी की डेट पास थी इसलिए ऑफीस से छुट्टी ले रखी थी...
तभी एक फोन आया....जिसने मेरी दुनिया बदल के रख दी....
मयंक का आक्सिडेंट हो गया...हेवी स्नोफॉल की वजह से विषन सॉफ नही था जिसकी वजह से
एक ट्रक ने उनकी कार पे......(बस रितिका बोलते हुए वहीं रुक गयी)
उसकी आँखें थोड़ी सी नम थी..उसने अपनी उंगलियों से उन आँसू को नीचे आने से पहले ही सॉफ कर
दिया..अंकित की आँखें भी हल्की सी नम थी..लेकिन उसने शो नही होने दिया...
2 मिनट रितिका चुप रही और फिर बोली...
रितिका :- बस उसके कुछ दिन बाद ही आर्नव का जन्म हो गया..लेकिन मेरे लिए दुबारा यूएस में रहना
मुश्किल हो गया था..इसलिए कंपनी से रिक्वेस्ट कर के वापिस इंडिया आ गयी..और यहाँ आर्नव के
साथ अपनी बाकी की ज़िंदगी खुशी खुशी बिता रही हूँ...और अब मेरी ज़िंदगी यही है..जिसकी तुमने मदद की..
तभी तुम्हारा बहुत बड़ा एहसान है मुझ पर...
अंकित :- मेने कोई एहसान नही किया...शायद मेरी किस्मत में आपका आना लिखा था इसलिए आर्नव की हेल्प
करी मेने...
वैसे रितिका आपने दुबारा मेरिज के बारे में कभी..
रितिका :- नही...दुबारा कभी हिम्मत नही हुई...मोम आंड डॅड ने बहुत ट्राइ किया...लेकिन मेने हमेशा
मना कर दिया...मन नही माना कभी....
अंकित :- लेकिन आप पिछले 5 साल से अकेली है...आपको नही लगता कि आपको ज़रूरत है एक पार्ट्नर की..
रितिका :- ह्म्म कभी कभी लगता है..लेकिन फिर भी जब भी मेरिज के लिए सोचती हूँ..हमेशा मयंक
याद आ जाता है...
अंकित :- ह्म्म्म...मेरी वजह से आज फिर से याद आ गयी..आइ आम सो सॉरी...
रितिका :- नो नीड टू से सॉरी....मुझे भी आज बहुत रिलॅक्स फील हुआ तुमसे बात करके...यू नो..बहुत दिन से
ये बात बताने का मन था..और आज तुम्हे बता दी...
बस फिर अंकित वहाँ से वापिस आ गया .. पूरे रास्ते सोचते हुए...कि ऐसा क्यूँ हुआ इसका साथ इतनी प्यारी
लड़की है...मेरी एज की होती तो इसी को अपनी गर्लफ्रेंड बनाता....कई बार किस्मत भी ऐसा धोका देती है जिसका
भुगतान पूरी ज़िंदगी भर पूरा नही हो पाता....
अंकित रात में आज दिन की बातों को सोचते हुए नींद की आगोश में चला जाता है.....
अगले दिन से...अंकित के चेहरे पे वही खुशी और उसका वही कमिनता पन वापिस आ गया....अब एक तर्क
अंकिता की क्लासस नही मिस करता था..दूसरी तरफ रितिका के बारे में सोचता रहता था..
और कॉलेज जाते हुए...बस इसी फिराक में रहता था कि काश कोई मिल जाए...देखने के लिए..
जिससे रास्ता कट जाए....
बस अब दिन ऐसे ही कटने लगे....अंकिता के साथ पढ़ाई में और फ्रेंड्शिप में क्लोज़ होता जा
रहा था..अब दोनो टीचर स्टूडेंट तो थे ही..पर साथ साथ में एक अच्छे दोस्त भी बन गये
थी..काफ़ी बातें शेअर करते थे....
जिसमे अंकित को भी पता चला कि अंकिता साउत दिल्ली में एक घर पे किराए पे रहती है वो भी
अकेले....
अंकित ज़्यादातर अंकिता को घूरता रहता था....उसे अंकिता इतनी पसंद थी कि अगर वो उसकी एज की होती
तो अभी तक वो कितनी ही बार उसकी बजा चुका होता .....
दिन कटते गये...रितिका के साथ भी कभी कभी ही मसेज पे बात हो जाती....अंकित को कम से कम
ये था कि रितिका इतनी फ्रेंड्ली है उसके साथ..जबकि ऐसा बहुत कम ही होता है...
अब अंकित के इंटर्नल बहुत नज़दीक थे...इसलिए आज कल उसका ध्यान पढ़ाई में था और सबसे ज़्यादा
मेहनत वो तो अंकिता मॅम के सब्जेक्ट में ही कर रहा था...क्यूँ कि वो अंकिता को नाराज़ नही
करना कहता था....
लेकिन इंटर्नल के फर्स्ट एग्ज़ॅम से पहले एक फ़ोन आया अंकित के पास.....(और ये फोन अब अंकित की किस्मत
को एक दूसरी तरफ मोड़ने वाला था..जिससे कुछ ज़िंदगियाँ बदलने वाली थी..)
अंकित :- हाई रितिका हाउ आर यू?
रितिका :- आइ आम वेरी फाइन यू टेल?
अंकित :- ह्म्म बॅस ठीक..
रितिका :- बस ठीक क्यूँ..गुड क्यूँ नही हो?
अंकित :- अरे गुड कैसे हो सकता हूँ..कल से एग्ज़ॅम जो स्टार्ट है..
रीतितका :- हहेहहे....कोई नही एग्ज़ॅम तो होते ही रहते हैं...
अंकित :- ह्म्म..और बताइए कैसे याद किया आपने इस नलायक को?
रितिका :- हहे..वेल काफ़ी दिन हो गये..तुम तो गायब ही हो गये उस दिन के बाद घर आए ही
नही..
अंकित अपने मन में...अरे बुलाएगी तो आउन्गा की ऐसे घुस जाउ रोज़ रोज़..
अंकित :- अरे बस...ऐसे ही..
रितिका :- आर्नव तुम्हे बहुत याद कर रहा था..कि अंकित भैया कब आएँगे..
अंकित :- ओह्ह..नही आउन्गा पक्का...
रितिका :- अच्छा अंकित कॅन यू डू मी आ फेवर?
अंकित :- फेवर..कैसा फेवर (थोड़ा कन्फ्यूज़ होते हुए)
रितिका :- आक्च्युयली में आज कल ऑफीस का वर्ड लोड काफ़ी बढ़ गया है...और उसकी वजह से में आर्नव
पर ध्यान नही दे पा रही हूँ....तो क्या तुम आर्नव को ट्यूशंस दे सकते हो?
अंकित :- ट्यूशन....और में...(चौंकते हुए)
रितिका :- क्यूँ नही दे सकते?
अंकित :- लेकिन रितिका मेने आज तक ट्यूशन कभी नही दी किसी को
रितिका :- उसमे कोई प्रॉब्लम्स नही है....वैसे तो में उसकी ट्यूशन कहीं और भी लगवा सकती हूँ..लेकिन
वो ढंग से नही पढ़ेगा...और मुझे लगता है तुमसे उसकी अच्छी जमती है..इसलिए में कहती हूँ तुम
पढ़ा दो..
अंकित कुछ सोचने लगता है....
रितिका :- प्लीज़ अंकित कॅन यू डू दिस फॉर मी?
अंकित :- प्लीज़ मत बोलिए...वो ऐसा है कि...
रितिका :- तो क्या तुम्हारी मोम से बात करनी पड़ेगी.?
अंकित :- नही नही..वो बात नही है..आक्च्युयली में मेरे एग्ज़ॅम्स हैं..जैसा कि बताया मेने आपको..तो..
रितिका :- आहा..कोई नही..एग्ज़ॅम्स के बाद जाय्न कर लेना..ज़्यादा नही 1 अवर भी एनफ है उसके लिए..
अंकित :- (सोचते हुए) ह्म्म ओक आइ विल...
रितिका :- थॅंक यू सो मच..कि तुमने हाँ कर दी..
अंकित :- इट्स ओके....थॅंक यू की ज़रूरत नही है....
रितिका :- ओक तो फिर...मिलते हैं जिस दिन तुम्हारे एग्ज़ॅम्स ख़तम हो जाएँगे..उस दिन बता देना...
बाए..
अंकित :- श्योर..बाय....
(फोन कट)
अगले दिन अंकित का एग्ज़ॅम था......
शायद आज कल उसकी किस्मत साथ दे रही थी.....क्यूँ कि क्लास में ड्यूटी भी अंकिता की ही लगी थी...
अब हमारे अंकित मियाँ को तो जानते ही हैं..पेपर पे कम और अंकिता पे ज़्यादा ध्यान था उनका..
कहानी जारी है ............................
गतान्क आगे.....................
अंकिता ने लाइट ब्लर कलर की साड़ी पहन रखी थी....सारे एक तरफ से थोड़ी साइड थी जिसकी वजह से अंदर
ब्लाउज में वो बैठे मोटे मॉट शैतान दिख रहे थे...और अंकित की नज़र वहीं ही ज़म गयी.
और वहाँ से होते हुए..अंकिता के उस गोरे गोरे सुंदर पेट पे पड़ी....
अंकिता इधर उधर बच्चों को देख रही थी...और जैसे ही उसकी नज़र अंकित पर पड़ी..और जब उसने ये
नोटीस किया कि वो उसकी तरफ ही देख रहा है...
तो अंकिता ने गुस्से भरी मुस्कान भरी..और पहले तो थप्पड़ का इशारा किया..और फिर कहा की
पेपर पे ध्यान दो....
अंकित ने भी हल्की सी स्माइल पास की और पेपर में लग गया..
आख़िर कर टाइम ओवर हो गया..पेपर कलेक्ट किए गये...और जब सब जाने लगे तो अंकिता ने अंकित
को रोका..
अंकिता :- कैसा हुआ?
अंकित :- ठीक ठाक था..(ड्रामा करते हुए)
अंकिता :- ठीक ठाक..अगर एक नंबर. से ज़्यादा कटा तो तुम्हे तो में बताऊगी...
अंकित :- अरे..ऐसा थोड़ी होता है..
अंकिता :- ऐसा ही होता है...पेपर के टाइम भी तुम्हारा ध्यान तो पेपर पे नही था..और इधर उधर
देखा जा रहा था..
अंकित :- में कहाँ इधर उधर देख रहा था.. (ड्रामा करते हुए)
अंकिता :- अच्छा.....तुम फिर कहाँ देखा जा रहा था..
अंकित :- आपकी तरफ देख रहा था में तो बस.. (स्माइल देते हुए लाइन मारने लगा )
अंकिता ने थप्पड़ का इशारा किया....
अंकिता :- मार खाएगा...
अंकित वहाँ से हंसता हुआ भाग जाता है..
अंकिता :- बदमाश कहीं का...(और मुस्कुरा देती है..)
अंकित बाहर जाके विकी से मिलता है
अंकित :- और भाई कैसा हुआ?
विकी :- बस यार...तूने जो बताया था वो ही कर के आया था यार...उनमे से 4 क्वेस्चन फँस गये
नही कर पाया..
अंकित :- चल बढ़िया है..चल यार बहुत भूक लग रही है चलते हैं..
विकी :- हाँ हाँ..आज मेरी तरफ से पार्टी..तेरी वजह से पास हो जाउन्गा..
अंकित :- काहे का मेरी वजह से....सब तेरी ही मेहनत है..चल अब छोड़ और पार्टी दे फटा फट..
विकी :- चल....
फिर दोनो निकल जाते हैं..ठूँसने....
ऐसे करते करते 4 दिन तक इंट्नल्स चलते हैं...और आख़िरकार ख़तम हो जाते हैं....
अंकित चैन की साँस लेता है..(एग्ज़ॅम तो एग्ज़ॅम हैं इंट्नल्स या फिर मैं यूनिवर्सिटी एग्ज़ॅम)
शाम को 6 बजे अंकित रितिका को मसेज करता है..कि उसके एग्ज़ॅम ख़तम हो गये वो कल आ जाए?
रितिका का 5 मिनट बाद ही रिप्लाइ आता है..कि तुम अगर अभी आ सकते हो तो आओ जाओ...कुछ बाते
कर लेंगे और टाइम डिसाइड कर लेंगे..
अब अंकित को तो लड्डू बिन माँगे मिल रहा था वो क्यूँ भला मना करेगा..उसने हाँ कर दिया
और फटाफट रेडी हो के...मस्त पर्फ्यूम लगा के..(जो रितिका ने ही गिफ्ट की थी) निकल गया...
5 मिनट बाद...रितिका के घर की डोर बेल बजती है...
रितिका :- आ रही हूँ...(बोलते हुए गेट खोलती है)
सामने अंकित खड़ा होता है...और वो फिर रितिका को आज दूसरे ही ड्रेस अप में देखता है..
बाल तो नॉर्मली उपर की तरफ बँधे हुए थे जैसे अक्सर लड़कियाँ बाँधती है..फ़ौन्टेन सा बना
देती है..नीचे लूस पाजामा..और उपर एक पिंक कलर का टॉप..जिसकी लेंग्थ भी ज़्यादा नही थी...
रितिका :- अंकित आओ अंदर आओ..बाहर ही खड़े रहोगे..
फिर अंकित स्माइल देते हुए अंदर आ जाता है.....
रितिका :- तो कैसे हुए एग्ज़ॅम
अंकित :- जी बढ़िया ही हुए..
रितिका :- हे भगवान इस लड़के का क्या करूँ..फिर से जी..
अंकित :- ओह्ह सॉरी...एक दम मस्त हुए यार..(इस बार पूरे अपने अंदाज़ में)
रितिका :- हहेहेहेः..हाँ अब ठीक है..तो बताओ क्या लोगे..कॉफी कोल्ड ड्रिंक
अंकित :- नही कुछ..नही..आप . ये बता दीजिए..कब से आउ आर्नव को ट्यूशन देने..और कब से आउ..
रितिका :- ह्म्म..कल से आ जाओ...नॉर्मली आर्नव आफ्टरनून में 2 बजे तक आ जाता है स्कूल से..
अंकित :- तो क्या आर्नव घर में अकेले रहता है और उसके पास चाबी कहाँ से आती है..
रितिका :- अरे अरे बता रही हूँ...दरअसल अकेले रहने की वजह से मेरी एक चाबी पड़ोस में दे रखी है..
..........
आर्नव सीधे वहीं जाता है..वहीं पे खाना ख़ाता है...फिर में शाम को उसे वहाँ से ले लेती हूँ..
काफ़ी अच्छे लोग है...तो कल से अब ये तुम्हारी ड्यूटी...
अंकित :- समझ गया..तो में 5 बजे तक आता हूँ...आर्नव को वहाँ से लेके घर खोल के यहाँ उसे
पढ़ा दूँगा.
रितिका :- कोरेक्ट...बिल्कुल सही...
अंकित :- ओके...वैसे आपके ये पड़ोसी काफ़ी अच्छे हैं..बड़े मुश्किल से मिलते हैं..
रितिका :- हाँ सही कहा तुमने...तभी तो में बेफिकर होके ऑफीस चली जाती हूँ...काम करने वाली
भी अच्छी मिली है मुझे..सुबह सुबह 8 बजे आ जाती है...सारा काम करके निकल जाती है...मेरे ऑफीस जाने
से पहले इसलिए कोई दिक्कत नही है..
फिर दोनो आपस में 10 मिनट कुछ और बाते करते हैं....आर्नव आभी घर पे नही था..वो पड़ोस
के घर में था वहाँ अब उसका मन काफ़ी लगता है...
अंकित :- अच्छा अब में चलता हूँ..नही तो मेरी माँ मुझे सवाल कर के परेशान कर देगी..
रितिका :- हहेहेः...अच्छा ओके..
फिर अंकित खड़ा होके जाने लगता है...
रितिका :- अंकित रूको..मेन बात करनी तो रह ही गयी
अंकित :- (मुस्कुराते हुए) क्या.?
रितिका :- फीस... तुम्हारी फीस के बारे में..
अंकित :- फीस कैसी फीस..आर्नव को पढ़ाने की कोई फीस नही लूँगा में...
रितिका :- ऐसा नही हो सकता..में फ्री में थोड़ी पढ़वाउंगी..
अंकित :- रितिका आप एक तरफ तो मुझे अपना फ़्रेंड बोलते हो..और दूसरी तरफ ट्यूशन वाला बना के पराया
कर रहे हो..ये तो ग़लत बात है..
रितिका को अंकित की बात बहुत अच्छी लगती है...
रितिका :- ह्म्म चलो लेकिन फिर में जो तुम्हे दूँगी..वो तुम्हे रखना पड़ेगा..
अंकित कुछ सोचता है..और हाँ में गर्दन हिला देता है और निकल जाता है...
रितिका उसके जाने का बाद अपने आप से बोलती है...बहुत अच्छा लड़का है ये...
फिर अगले दिन से वही हुआ जो डिसाइड हुआ था....
अंकित शाम को 5 बजे तक आ जाता आर्नव को पढ़ाने..आर्नव उसके साथ बहुत कोफोर्टबल था...उसे काफ़ी
मज़ा आता था अंकित के साथ..अंकित का पढ़ने का तरीका काफ़ी अच्छा था...हंसते हुए बड़ी ही
अच्छी तरह से पढ़ाता था.....
और जब तक पढ़ता था जब तक रितिका वापिस नही आ जाती थी..जैसे ही रितिका आती थी वापिस वो बाइ कर
के निकल जाता था..
रितिका काफ़ी रोकने की कॉसिश करती..लेकिन अंकित कभी नही रुकता था....शायद उसके पीछे उसकी कोई वजह थी...
लेकिन कभी पता नही चली...
और फिर एक दिन.....वो दिन आ ही गया जिससे अंकित ने और उसकी सोच ने एक अलग ही दिशा पकड़ ली....
अंकित कॉलेज से आने के बाद मज़े से सो गया और फिर 4:30 बजे उठा आर्नव के पास जाने के
लिए.....
वो उठ के तैयार होने लगता है कि तभी उसका फोन बजता है..
अंकित :- हेलू रितिका
रितिका :- हेलू अंकित हाउ आर यू?
अंकित :- आइ आम टोटली फाइन जी..बस आर्नव के पास ही जा रहा हूँ
रितिका :- मत जाओ..
अंकित :- क्या?
रितिका :- वो आक्च्युयली अंकित में आज आर्नव को बाहर घुमाने लेके चली गयी..काफ़ी दिन हो गये थे
ऑफीस की वजह से में आर्नव को कहीं ले जा नही पा रही थी तो आज ऑफीस से जल्दी आके आज आर्नव को
बाहर लेके चली गयी घुमाने के लिए वो बहुत ज़िद्द कर रहा था..
अंकित :- ओह्ह..सीसी..आज मम्मी बेटा घूमने निकले हैं...बढ़िया है कोई नही .. में कल आ जाउन्गा
नो प्राब्लम
रितिकिया :- अरे नही नही...तुम आज ही आना...पर 7 बजे तक अगर तुम्हे कोई प्राब्लम ना हो तो..?
अंकित :- 7 बजे..ह्म..ओके कोई नही..में आ जाउन्गा ..
रितिका :- ओह्ह थॅंक यू सो मच....
अंकित :- नो प्राब्लम मॅम...
रितिका :- हहहे..ओके बाबयए..
अंकित :- बाबयए..
(फोन कट)
अंकित अपने आप से...साला..बेकार उठा में .. इतनी मस्त नींद आ रही थी...चलो कोई नही अब जब तक
चुनमुनियाडॉटकॉम पे कोई स्टोरी ही पढ़ लेता हूँ..जिससे मूड फ्रेश हो जाएगा....
कुछ देर स्टोरी पढ़ने के बाद....वो घर के बाहर चला जाता है...और 7 बजने का इंतजार करता रहता
है.....
7 बजने से ठीक 10 मिनट घर से निकल जाता है.....और 7 बजे वो ठीक रितिका के घर के बाहर ही
खड़ा होता है..
बेल बजाता है..
आ रही हूँ..बोल के रितिका गेट खोलती है...और सामने खड़े अंकित को देख के मुस्कुरा देती है...
बस अंकित का तो मूह खुल गया जब उसने सामने रितिका को ऐसे हंसते हुए देखा....वो तो एक पल
के लिए फ्लॅट ही हो गया था....
कहानी जारी रहेगी.............................
गतान्क आगे.....................
क्या कमाल की लग रही है...वो खूबसूरत चेहरे पे मुस्कान चेहरे की रोनक को और ज़्यादा बढ़ा रही थी...
बेमिसाल लग रही है....उपर से लाइट ब्लू कलर की साड़ी उसके नीचे कट स्लेवी ब्लाउस..इससे ज़्यादा
ब्यूटिफुल लड़की मेने नही देखी आज तक....(अंकित अपने मन में खड़े खड़े बोल पड़ा)
रितिका :- क्या सोच रहे हो..अंदर नही आना..
अंकित :- (होश में आता हुआ) हाँ...हन्न...
और फिर अंदर आ जाता है.....दोनो सोफ्फे पे जा के बैठ जाते है..
रितिका :- और बताओ अंकित कैसे हो..काफ़ी दिन हो गये तुमसे ढंग से बात नही हुई..अब तुम बिज़ी जो
हो गये हो
अंकित :- हाहाहा..अरे नही ऐसी बात नही है...वो बस अब एग्ज़ॅम आने वाले हैं ना तो कॉलेज वालों ने
बॅंड बाज रखी है..
रितिका :- ह्म्म..अच्छा क्या लोगे...कोल्ड कोफ़ी..या फिर सॉफ्ट ड्रिंक
अंकित :- अरे नही नही..कुछ नही..
रितिका :- क्या कुछ नही....तुम तो बोलोगे नही में खुद ही ले आती हूँ .. (खड़ी होती हुई बोलती है)
और फिर मूड के जाने लगती है.....ना जाने क्यूँ पहली बार आज अंकित की नज़र वहाँ गयी जहाँ तक
आज तक नही गयी थी रितिका के उपर..
अंकित की नज़र रितिका की उस जगह गयी जिसके बारे में आज तक आप को भी पता नही चला है...
जी हाँ रितिका की उस गान्ड पर..जिसके बारे में लिखना मेरे लिए भी मुश्किल है..एक दम पर्फेक्ट साइज़
जो होता है..बिल्कुल वैसी ही थी..और वो उस साड़ी में ऐसी लग रही थी..क़ी ये गान्ड बनाई ही गयी है
ऐसे कपड़ों के लिए..अलग से चमकती हुई....
अंकित ने कुछ सेकेंड देखा फिर आँखें फेर ली......
अंकित अपने आप से..अरे अरे ये क्या कर रहा हूँ...साला...चुनमुनिया की वजह से हो रहा है..अभी अभी स्टोरी
पढ़ी है ना तो सब जगह वैसा ही दिख रहा है..(और फिर अपने सर पे हाथ मारता है) सुधर जा
साले.कम से कम यहाँ तो सुधर जा.....
इतना सोच ही रहा होता है कि रितिका सॉफ्ट ड्रिंक और कुछ स्नॅक्स लेके आती है..ट्रे में....
और फिर.....
वो हल्का सा झुक की ट्रे में से समान सेंटर टेबल पे रखने लगती है..अब जैसे ही वो झुकी
उसकी साड़ी का पल्लू..उसके शोल्डर से खिसक गया...और काफ़ी हद तक नीचे आ गया....
अंकित की नज़र सामने जाके गढ़ गयी...बॅस वो भी क्या करे सामने जो नज़ारा था उसे देख कर
तो कोई भी वहीं आँखे गढ़ा दे....
साड़ी का पल्लू नीचे होने की वजह से अंदर पहनी हुई लाइट ब्लू कलर की ब्लाउज जो कि काफ़ी
डीप कट की थी....जिसकी वजह से अंकित की आँखों के सामने रितिका के वो बूब्स ब्लाउज के उपर से
सामने आ गये..गोरा रंग दूध जैसी वो चुची....अंकित की तो बॅंड बज गयी जीन्स के अंदर
से उसके लंड ने अपना काम करना शुरू कर दिया और वो नींद से जागने लगा...
रितिका को तो ध्यान ही नही थी...वो तो झुक के अपने काम में लग गयी थी..
और फिर अंकित ने बड़ी मुश्किल से अपनी नज़री वहाँ से हटाई और उसरी तरफ कर दी..उसका दिल ज़ोरों से
धड़क रहा था..लंड भी धीरे धीरे उठने लगा था....
जैसे रितिका ने ग्लास टेबल पे रखा उसका ना जाने कैसे हाथ ग्लास पे लग गया और वो गिर गया
रितिका :- ओह्ह शिट...
अंकित ने भी ध्यान दिया .. टेबल पे सॉफ्ट ड्रिंक फैल गयी थी...
रितिका :- आइ आम सॉरी..
अंकित :- नो इट्स ओके..
रितिका :- रूको में कपड़ा लाती हूँ..क्लीन करने के लिए..(फिर रितिका चली जाती है)
अंकित के नज़रों के सामने बस वही साड़ी के पल्लू का गिरना और रितिका के वो चुचे उस हालत में
दिखना बस यही दिख रहा था......
फिर रितिका आई...और झुक कर क्लीन करने लगी....इस बार भी वही हुआ....साड़ी का पल्लू फिर से सरक गया
और नीचे गिर गया...इस बार कुछ ज़्यादा गिर गया...
और जो नज़ारा अब अंकित के सामने था उसने उसके दिमाग़ की बत्ती बंद कर दी अब वो सिर्फ़ लंड
से सोचने लगा......
साड़ी का पल्लू गिरने की वजह सी रितिका की वो चुची इस बार दोनो काफ़ी हद तक सामने थी..
चुचों की वो दरार जो ब्लाउस के बाहर थी काफ़ी हद तक...उस पर अंकित की नज़र चिपक गयी...
हाथ से सफाई करने की वजह सी वो बूब्स इधर उधर हिल रहे थे...जिससे अंकित का हाल और बुरा
होता जा रहा था...इस बार उसने अपनी नज़रे हटाई ही नही....वो बस उनही चुचों को देखता रहा
और अब तो ये अंदाज़ा लगाने लगा कि इसका साइज़ क्या होगा......
क्या चुचें हैं यार....बिल्कुल कसे हुए गोरे चिट दूध से भरे 36 से कम क्या होंगे
अंकित अपने मन में सोचने लगा...
रितिका :- में दूसरी लेके आती हूँ...
इस आवाज़ से अंकित होश में आ गया....
रितिका ने ध्यान ही नही दिया कि कैसे उसका पल्लू इतना नीचे था वो भी एक जवान लड़के के सामने
उसने सफाई की नॉर्मली अपना पल्लू ठीक किया और चली गयी किचन में...
कहीं रितिका ने देख तो नही लिया उससे इस हालत में घूरते हुए...नही नही अगर
देख लिया होता तो बिल्कुल बोलती...या कोई रिएक्ट करती...शायद उसने नोटीस नही किया है....अंकित बड़बड़ा
रहा था
तभी रितिका दूसरी ड्रिंक लेके आई.......रितिका उसकी बगल में आके बैठ गयी और बाते करने लगी..
अंकित की नज़रे अब उसके फेस पर नही..उसके उन चुचों पे जा अटकी थी....उन चुचों पे जिससे उसके
लंड का बुरा हाल हो गया था..सिर्फ़ एक झलक से इसका इतना बुरा हाल था अगर ये पूरी............
रितिका :- अंकित आर्नव आते ही सो गया है और अब उठ ही नही रहा मेने बेकार में तुम्हे
अंकित :- नही नही..कोई नही....उसे सोने दो..अच्छा है...(वो बोल तो रहा था लेकिन उसकी आँखें तो अटकी
पड़ी थी उसके चुचों पे)
रितिका ने ज़रा भी नोटीस नही किया कि अंकित कहाँ देख रहा है..शायद उसे कभी ये नही उम्मीद थी कि
अंकित उस नज़र से कभी देखा...
बड़ी मुश्किल से अंकित के लिए वो पल कटा...और अपने घर आया..पूरे रास्ते पास रितिका के वो साड़ी का पल्लू
गिरने वाला सीन और वो चुचें सामने आ रहे थे...
रात को खाना खाने के बाद वो बेड पे लेट गया आज तो सच में उसकी आँखों से नींद गायब
थी.....और आज अंकिता की वजह से नही..बल्कि रितिका की वजह से...
उसकी आँखों के सामने वो सीन आ गया एक बार फिर...और उसके हाथ खुद ब खुद नीचे चले
गये अपने पाजामे पे...पाजामा नीचे किया...और शुरू हो गया.....
जो भी कुछ हुआ उसकी आँखों के सामने आ गया..रितिका के वो शानदार चुचें जिन्हे पकड़ने
और चोआसने के लिए कोई भी आदमी तड़प जाए......(सोचते सोचते हिलाने लगा)
और फाइनली उसका वो लोड बाहर आ ही गया..
अंकित गहरी गहरी साँसें भरने लगा......
क्या रितिका ने जान बुझ के मुझे वो सब दिखाया और दिखा के कुछ नही बोली...क्या वो
मेरे साथ सेक्स करना कहती है.....क्या ये एक इंडियियेशन है .. पर कैसे पता चलेगा...में कैसे
पूछूँ डाइरेक्ट्ली तो नही पूछ सकता.... फिर करूँ तो क्या करूँ अब तो रितिका की बिना मारे में चैन
से नही रह पाउन्गा... (अंकित अपने आप से बोलने लगा)
आज एक दृश्य ने एक लड़के की नियत एक औरत के प्रति बदल दी.....अब क्या करेगा अंकित रितिका के साथ
क्या कुछ होगा इन दोनो के बीच में...आज का ये दिन एक फोन ने अंकित की किस्मत को बदल दिया...
वो रात तो जैसे तैसे उसने गुज़ार दी......अगले दिन..
कॉलेज में क्लास चल रही थी.....चाहे वो अंकिता पढ़ाए या कोई और आज तो बिल्कुल ध्यान नही था
अंकित का..
उसकी आँखों के सामने कल का ही सीन बार बार घूम रहा था वो ना चाहते हुए भी रितिका के
उन भारी भरकम चुचों को नही भुला पा रहा था सोचते सोचते बार बार उसका लंड अपनी
औकात पे आ जाता...काफ़ी परेशानी हो रही थी उसे....समझ नही पा रहा था कि करे तो क्या
करे.....
कॉलेज का दिन बड़ा फ्रस्टरेटेड रहा उसके लिए.....वो अपने घर आया फ्रेश हुआ.आज घर पे अकेला
था......
बस रिलॅक्स होने के लिए आज इंटरनेट पे पॉर्न देखा..और अपने आप को रिलॅक्स कर लिया.....
नीचे का हिस्सा तो रिलॅक्स हो गया था लेकिन अभी भी उपर का हिस्सा यानी कि उसका दिमाग़ वो रिलॅक्स
नही कर पा रहा था..और बिना लंच करे ही वो सो गया....
हम तेरे बिन अब रह नही सकते तेरे बिना क्या वजूद मेरा...तुझ से जुदा अगर हो जाएँगे तो
खुद से ही हो जाएँगे जुदा.....
(काफ़ी देर तक रिंगटोन बजती रही)
फिर अंकित ने फोन उठाया और बिना देखे किसका फोन है..नींद में..
अंकित :- ह..एलो.....
सो रहे थे क्या??
जब उसके कानो में लड़की की आवाज़ पड़ी तो भाईसहाब ने नाम देखा.....
अंकित :- ओह्ह रितिका हाँ यार सो रहा था..
रितिका :- आज आना नही है..आर्नव वेट कर रहा है?
अंकित :- लेकिन अभी 5 कहाँ बजे हैं...में पहुच जाउन्गा टाइम पे..
रितिका :- लगता है तुम अभी भी नींद में हो....6:30 बज रहे हैं..जनाब
अंकित :- क्याआअ...(बेड से खड़ा होके लाइट ऑन करता है तो टाइम उसके सामने आता है)
व्हाट दा फक..आज इतनी देर तक कैसे सोता रहा...(भाई साहब ने ध्यान ही नही दिया कि फोन चालू
है और गाली बक दी बाद में याद आया) ओह्ह शिट्सस....(धीरे से बोला और फिर फोन को कान पे लगा लिया)
सॉरी....(उसने रितिका को बोला)
रितिका :- अरे सॉरी क्यूँ...लेट हो गये हो जाता है चलो अब आ जाओ...
अंकित :- हाँ बस 15 मिनट में.....ओके
रितिका :- ह्म्म ओके..और हाँ मेने कुछ भी नही सुना....(और हंसते हुए फोन कट कर देती है)
अंकित फोन रखते हुए...अपने आप से...हाँ हाँ तू क्यूँ कुछ भी बुरा मानेगी .. समझ रहा हूँ
धीरे धीरे..(और कुछ सोचने लगता है)
फिर पहुच जाता है थोड़ी देर में रितिका के घर....जब घर पहुचता है तो आर्नव गेट खोलता है
अंकित आर्नव से रितिका के बारे में पूछता है तो वो बोलता है कि रितिका तो अभी बाथरूम में
है फ्रेश होने गयी है.....
फिर अंकित आर्नव को पढ़ाने लगता है..लेकिन इस वक़्त भी भाई साहब का ध्यान तो रितिका पर ही
था..वो तो इमॅजिनेशन में डूबा पड़ा था कि आख़िर नहाते वक़्त रितिका कैसी लग रही होगी...
उसका लंड एक बार फिर खड़ा होने लगा.....(कहाँ पहले रितिका के फेस से अंकित की नज़र नही फिसलती थी
अब फेस को छोड़ कर सब कुछ देखने का मन करता है उसका)
कहानी जारी रहेगी...................................
गतान्क आगे.....................
उसका हाथ अपने लंड पे चला जाता है और रितिका के उन चुचों को याद करते हुए मसल्ने लगता
है जीन्स के उपर से...तभी कमरे का दरवाजा खुलता है तब वो होश में आता है और अपना
हाथ हटा लेता है अपने लंड से...और अपनी गर्दन उधर करके देखता है..
सामने रितिका अपने बलॉन को टवल से पोछते हुए बाहर निकलती है...
उफफफ्फ़ क्या कातिलाना नज़राना है ये...गीले बालों को पोछते हुए ... पहनी हुई एक ब्लू कलर की
पतली सी नाइटी....जिस्म पे रेशम की तरह लग रही थी.
हाए ब्रा तक दिख रही है नाइटी में.....और उसके अंदर वो क़ैद दुनिया के सबसे खूबसूरत चुचें
खा जाने का मन कर रहा है.......क्या सेक्सी हॉट माल लग रही है...(अंकित अपने मन में सोचने
लगा)
रितिका :- हेलो अंकित...
अंकित होश में आता हुआ
अंकित :- हेलो....
रितिका :- तो..कैसा चल रहा है आर्नव पढ़ाई में..आज कल तो में इस्पे ध्यान ही नही दे पा रही
हूँ.....
अंकित :- हाँ हाँ..बिल्कुल बढ़िया एक दम मस्त चल रहा है सब कुछ..(बोल तो रहा था लेकिन
नज़र नाइटी कभी वो उभरते हुए बाहर आते चुचों पर तो कभी सपाट पेट...और कभी वो
पतली और सेक्सी हॉट लेग्स पे पड़ती)
रितिका :- इतनी गर्मी है दिल्ली में..मुझे नही पता था..मुझसे तो रहा नही जाता
अंकित :- हाँ आपको तो गर्मी की आदत नही है ना...यूएस में कहाँ इतनी गर्मी होती है...
(और अपने मन में..हाँ हाँ गर्मी तो लगेगी ही..जब शरीर के अंदर इतने सारे गरम पुर्ज़े
छुपा के रख रखे हैं...अरे खोल दो उन्हे तब देखना कैसे ठंडा कर दूँगा)
रितिका :- ह्म्म .. में तुम्हारे लिए कुछ लेके आती हूँ..
(और मूड के जाने लगती है)
अंकित के मूह से तो लार टपक जाती है..जब वो रितिका की गान्ड को देखता है..हाए वो रेशमी नाइटी
में रितिका की मतकती गान्ड क्या कमाल की लग रही थी.....गोल गोल फुटबॉल जैसे...मखमली जैसी गान्ड
कोई भी उस गान्ड को बुरी तरह सी मसल मसल के निचोड़ना चाहे....
अंकित उधर देख ही रहा होता है..की तभी अरणाव उसको बुलाता है..
अरणाव :- भैया हो गया..
अंकित को एक बार गुस्सा आता है लेकिन फिर वो शांत होकर..
अंकित :- ह्म्म वेरी गुड....अच्छा अब ये करो..इसके बाद छुट्टी...
बेचारा बच्चा हाँ में गर्दन हिलाता है..और फिर अपने काम में लग जाता है .. उधर अंकित
की नज़री रितिका के आने का इंतजार कर रही थी..
तभी अंकिता चलते हुए ट्रे में कोल्ड ड्रिंक लेके आती दिखाई दी.....
अंकित की नज़र तो उस पतली ठुमकती हुई कमर और हिलते हुए चुचें जो उस नाइटी में टिकने का
नाम नही ले रहे थे..हलाकी ब्रा के अंदर थे..लेकिन फिर भी हिल रहे थे..उपर नीचे..शायद
ढीली ब्रा पहनी हुई थी... (अंकित ने मन में सोचा)
आख़िर कार अंकित ने बड़ी मुश्किलों से वो पल गुज़ारा...और चल पड़ा घर..रात को सोचते हुए
क्या रितिका जान बुझ के ऐसी नाइटी पहेन के आई थी मेरे सामने..क्या वो सच में मेरे साथ करना
चाहती है..अगर चाहती है तो साली बोलती क्यूँ नही..बेकार में क्यूँ तड़पा रही है..अरे बहुत अच्छे
मज़े दूँगा उसे..(अपना पाजामा नीचे कर के दुबारा हिलाने लगता है)
और बस रितिका के चुचों और गान्ड और उसकी चूत मारने के बारे में सोचते हुए अपना
निकाल देता है....और फिर आख़िर कर सो जाता है....
कुछ दिनो तक ये सब चलता रहा...अंकित फ्रस्ट्रेशन की तरफ बढ़ता जा रहा था..ये एक ऐसी बात थी
कि किसी से शेअर भी नही कर सकता था..और वो जानता था रोज़ रोज़ मूठ मारना भी ठीक नही है...
उसको कोई रास्ता भी सूझ रहा था....दिमाग़ खराब होता जा रहा था..ना तो पढ़ाई में मन
लगता ना किसी काम में...छोटी छोटी बातों में गुस्सा हो जाता था.....
काफ़ी मुश्किलों से उसके दिन गुज़र रहे थे.........एग्ज़ॅम्स भी करीब आ रहे थे..लेकिन पढ़ाई में
मन तो लग ही नही रहा था....
अंकिता ने नोटीस किया...लेकिन वो कुछ नही बोली..क्यूँ कि वो अंकित से चाहती थी कि अगर उसे कोई प्राब्लम
हो तो सामने आके बोले..लेकिन अंकित ने कुछ कभी किसी को नही बताया..
फिर आया वो दिन.....सनडे था...नॉर्मली हर सनडे की तरह अंकित गुज़ारने की कॉसिश कर रहा था
लेकिन नही कर पा रहा था.....फिर शाम को 5 बजे खुद बिना रितिका को बोले कि वो आ रहा है
चल पड़ा उसके घर....(नॉर्मली सनडे छुट्टी होती है ट्यूशन की लेकिन फिर भी वो चला गया)
रितका ने गेट खोला...और सामने अंकित को देख के थोड़ा सा चौंक गयी..
रितिका :- अरे अंकित तुम..
अंकित :- क्यूँ आपको अच्छा नही लगा कि में आज भी आ गया....
रितिका :- ओफ्फ़ॉकूर्स नोट...कैसी बात कर रहे हो मुझे तो बहुत अच्छा लगा..इनफॅक्ट मुझे खुशी है कि तुम
यहाँ आज भी आए..कम इन..
अंकित अपने मन में..हाँ साली तू क्यूँ मना करेगी.....(आँखों में एक अलग ही इरादा था आज)
दोनो सोफे पे बैठ जाते हैं.....
अंकित :- आर्नव कहाँ है..
रितिका :- वो...खेलने गया है पार्क में....वैसी आज तुम उसे पढ़ाने आए थे..
अंकित :- नही नही...में तो बस उसके साथ ऐसे थोड़ी सी मस्ती के लिए आया था......
रितिका :- ह्म्म ओके..अच्छा किया तुम आ गये..वो आता ही होगा...
अंकित :- रितिका ऐसा नही लग रहा है कुछ जल रहा है..
रितिका :- ओह्ह तुमसे बात करने के चक्कर में भूल गयी कि गॅस पे कुछ रखा हुआ है मेने..
में अभी आई...
अंकित रितिका को देख रहा था उसने ढीला सा पाजामा पहना हुआ था जिसमे उसकी गान्ड हिलती हुई इतनी
मस्त लग रही थी कि अंकित का बुरा हाल हो गया उसका लंड अकड़न लेने लगा.....
टीशर्ट तो ऐसी पहनी है कि उसमे कुछ दिख ही नही रहा है आज तो..लेकिन क्या मस्त गान्ड लग रही है
(बोलता हुआ अंकित ने अपने लंड को पकड़ लिया)
और कुछ सोचते हुए किचन की तरफ चल दिया....रितिका किचन में काम कर रही थी....
अंकित धीरे धीरे बढ़ता हुआ..रितिका की साइड में जाके खड़ा हो गया..
एक दम अचानक से ऐसे अंकित का वहाँ आना अनएक्सपेक्टेड था रितिका के लिए..इसीलिए वो घबरा गयी...
रितिका :- ओह्ह्ह्ह डरा दिया तुमने तो..
अंकित बस ज़रा सा मुस्कुरा दिया..
रितिका :- तुम यहाँ गर्मी में क्यूँ खड़े हो बाहर बैठो..आराम से में आती हूँ..
अंकित :- आप भी तो हो गर्मी में...
रितिका :- ह्म्म्म...कुछ काम था..मुझसे..
अंकित :- क्यूँ बिना काम के नही आ सकता क्या यहाँ आपके पास..
रितिका :- हहेः..नही नही बिल्कुल आ सकते हो..पर आज तुम कुछ अलग साउंड कर रहे हो...
अंकित :- अच्छा....
बोलता हुआ रितिका के नज़दीक आने लगता है....उसका लंड अपने पूरे ताव में खड़ा था इस वक़्त
अंकित का दिमाग़ बंद पड़ा था..दिल तो बहुत पहले ही खो चुका था वो अपना....
उसने एक दम से रितिका का हाथ पकड़ा और उसे अपने सामने कर दिया..रितिका कुछ समझ पाती इससे
पहले अंकित ने आगे बढ़ के अपने होंठ रितिका के होंठो से चिपका दिए..और उन्हे चूसने लगा
पागलों की तरह नही...बहुत ही गेंट्ली वे में....रितिका की आँखें पूरी खुल गयी..उसे कुछ समझ नही
आ रहा था कि अचानक क्या हुआ उसके साथ..सपने जैसा लग रह था....अंकित तो अपने होंटो से
रितिका के होंठो को चूसने में लगा था..लेकिन रितिका का कोई रेस्पॉन्स नही था...
फिर रितिका भी सपने से बाहर आई..वो समझ गयी कि ये सपना नही हक़ीकत है...उसने अपना पूरा ज़ोर
लगा के अंकित को अपने हाथो के ज़ोर से पीछे धकेला..जिसे अंकित दूर हो गया..रितिका से..इससे पहले
कोई भी कुछ बोलता ..
रितिका ने एक चाँटा अंकित के गाल पे ज़ोर से दे मारा....चटाअक्कक...वो आवाज़ पूरी किचन
में गूँज उठी.......अंकित अपना गाल पकड़ के खड़ा था...
अंकित ने अपना हाथ अपने गाल पे रखा हुआ था..और वो नीची ज़मीन की तरफ देख रहा था...
रितिका सामने खड़े होके उसे घूर रही थी.....वो इतनी ज़्यादा कन्फ्यूज़ थी कि उसे कुछ समझ नही आ रहा
था कि आख़िर ये हुआ क्या...
फिर अंकित ने रितिका की तरफ देखा...उसकी आँखों में जबरदस्त गुस्सा दिख रहा था....
रितिका को भी अंकित का वो गुस्सा दिख रहा था...
रितिका :- व्हाट यू डिड..यू कनव ट्त्ट...हाउ डेर यू
अंकित ने रितिका को बोलने नही दिया वो इस वक़्त फुल गुस्से में था...
अंकित :- ये इंग्लीश अपने पास रख...तो ज़्यादा अच्छा है...एक तो थप्पड़ मारा और उपर से अकड़ दिखा
रही है...(गुस्से में उसने सारी इज़्ज़त की ऐसी तैसी कर दी )
रितिका :- वॉट डिड यू से? (रितिका ने सवालिया नज़रो से पूछा)
अंकित :- क्या व्हाट...क्या व्हाट...ऐसा क्या ग़लत किया मेने कि तुमने थप्पड़ मार दिया...
रितिका :- तुमने कुछ नही किया...तुम नही जानते क्या किया है तुमने अभी...
अंकित :- एक किस ही तो करी है..उसमे कौन सा बड़ा पाप कर दिया है मेने...पहले तो खुद ही
अपने अंग प्रदर्शन कर के जान बुझ के मेरा बुरा हाल कर दिया और अब जब मेने कुछ किया तो
भोली बन रही है....
क्रमशः........