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एक दिन अचानक Ek din achaanak
फ्रेंड्स एक और नई कहानी आपके लिए लेकर आया हूँ जैसा की आप सभी जानते हैं की मैं कोई लेखक नही हूँ मुझे जो कहानी पसंद आती है उसे आपके लिए ले आता हूँ फ्रेंड्स इस कहानी को रवि ने लिखा है और इसका सारा क्रेडिट रवि को
ही जाना चाहिए मैं तो सिर्फ़ इसे हिन्दी फ़ॉन्ट मे आपके लिए लेकर आया हूँ और आशा करता हूँ मेरी पहली दो कहानियो की तरह इस कहानी को भी आपका प्यार मिलेगा .
आज कॉलेज में फ्रेशर डे है. मैं और मेरे दोस्त बस तय्यार हो रहे हैं कॉलेज जाने के लिए. यूँ तो हम कॉलेज कभी टाइम से नहीं जाते लेकिन फ्रेशर डे पर सबकी रॅगिंग करने ज़रूर वक़्त से पहले पहुचना होता है चाहे धरती यहाँ से वहाँ क्यूँ ना हो जाए.
घरवाले भी मुझे देखकर हैरान हो गये कि रवि आज सूरज कहाँ से उग गया, रोज़ 10-11 बजे उठने वाला तू आज 7 बजे ही उठ गया. तो मैने कहाँ मम्मी आज एक दोस्त के साथ बाहर जाना है (यूँ तो कह नहीं सकता था कि कॉलेज जल्दी जाना है क्लास के लिए क्यूंकी उसे सुनके तो उनके होश ही उड़ जाते). उन्होने भी कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया और मेरा नाश्ता टेबल पर लगा दिया.
नाश्ता करके मैने अपने दोस्तों को फोन लगाया और जल्दी कॉलेज पहुचने के लिए कहा और अपनी मोटरसाइकल पर निकल पड़ा कॉलेज के लिए. कॉलेज हमारा 9 बजे शुरू होता था और मैं 15 मिनिट्स पहले वहाँ पहुँच चुका था. इतने में मैने देखा कि मेरे दोस्त ज़य, पवन और संजू तीनो एक साथ दो मोटरसाइकल पर आ रहे हैं. बस फिर क्या था हम लोग तय्यार हो गये फ्रेशर्ज़ की रॅगिंग के लिए.
फ्रेंड्स एक और नई कहानी आपके लिए लेकर आया हूँ जैसा की आप सभी जानते हैं की मैं कोई लेखक नही हूँ मुझे जो कहानी पसंद आती है उसे आपके लिए ले आता हूँ फ्रेंड्स इस कहानी को रवि ने लिखा है और इसका सारा क्रेडिट रवि को
ही जाना चाहिए मैं तो सिर्फ़ इसे हिन्दी फ़ॉन्ट मे आपके लिए लेकर आया हूँ और आशा करता हूँ मेरी पहली दो कहानियो की तरह इस कहानी को भी आपका प्यार मिलेगा .
आज कॉलेज में फ्रेशर डे है. मैं और मेरे दोस्त बस तय्यार हो रहे हैं कॉलेज जाने के लिए. यूँ तो हम कॉलेज कभी टाइम से नहीं जाते लेकिन फ्रेशर डे पर सबकी रॅगिंग करने ज़रूर वक़्त से पहले पहुचना होता है चाहे धरती यहाँ से वहाँ क्यूँ ना हो जाए.
घरवाले भी मुझे देखकर हैरान हो गये कि रवि आज सूरज कहाँ से उग गया, रोज़ 10-11 बजे उठने वाला तू आज 7 बजे ही उठ गया. तो मैने कहाँ मम्मी आज एक दोस्त के साथ बाहर जाना है (यूँ तो कह नहीं सकता था कि कॉलेज जल्दी जाना है क्लास के लिए क्यूंकी उसे सुनके तो उनके होश ही उड़ जाते). उन्होने भी कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया और मेरा नाश्ता टेबल पर लगा दिया.
नाश्ता करके मैने अपने दोस्तों को फोन लगाया और जल्दी कॉलेज पहुचने के लिए कहा और अपनी मोटरसाइकल पर निकल पड़ा कॉलेज के लिए. कॉलेज हमारा 9 बजे शुरू होता था और मैं 15 मिनिट्स पहले वहाँ पहुँच चुका था. इतने में मैने देखा कि मेरे दोस्त ज़य, पवन और संजू तीनो एक साथ दो मोटरसाइकल पर आ रहे हैं. बस फिर क्या था हम लोग तय्यार हो गये फ्रेशर्ज़ की रॅगिंग के लिए.