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मेरे हाथ ताई के बोबो पर रेंग रहे थे और ताई लगातार अपने मोटे मोटे कुलहो को पीछे रगड़ रही थी उस गर्मी के मौसम में भी अब मजा आ रहा था ताई अब निचेबैठ गयी और मेरे लंड को चूसने लगी मैंने अपने दोनों हाथ उसके सर पर रख दिए और ताई के होंठो का मजा अपने लंड पर लेने लगा
ऊऊऊउ ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊउ ताई की नाक से ऐसी आवाज आ रही थी और मेरा लंड ताई के मुह में बार बार अन्दर बाहर हो रहा था ताई ने अपने दोनों हाथ मेरे कुलहो पर रखे हुए थे और जितना हो सके लंड को अपने मुह में ले जा रही थी
पर जो मजा चूत में मिलता है वो मुह में कहा तो मैंने ताई को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और थोडा सा थूक ताई की चूत पर लगाया ताई ने अपने पैर को मेरी कमर पर लगाया और खड़े खड़े ही मैं ताई की चूत मारने लगा मेरे दोनों हाथ उसकी कमर पर थे और होंठो में होंठ दबे हुए थे
ताई की सिस्कारिया मेरे मुह में ही घुल रही थी उसकी पूरी लिपस्टिक मेरे मुह में पिघल गयी थी पसीने से तप रहा था बदन पर नसों में ताप बढ़ रहा था ताई की गरम चूत मेरे लंड को निचोड़ देना चाहती थी जैसे की और फिर ताई बिस्तर पर लेट गयी मैं उसके ऊपर वो मेरे निचे हमारी सांसे तो खामोश थी पर छत पर ठप्प ठप्प की आवाजे गूंज रही थी
उसके पैर हवा में उठे हुए थे और गप गैप मेरे लंड ने चूत की रेल बनाई हुई थी ताई की चूत का छला जो रगड़ खा रहा था मेरे लंड से चुदाई का आनंद दुगना हो गया था उसके रसीले होंठ गोरे गाल सब पर मेरे दांतों के निशान अपनी छाप छोड़ गए थे
बहुत देर तक हम दोनों के जिस्म एक दुसरे से उठा पटक करते रहे और फिर हम झदते जले गए समा गए एक दुसरे की बाहों में हसरतो के आगे जिस्मो की हद ने पनाह मांग ली थी पसीने से टार हम दोनों एक दुसरे की बाहों में लिपटे लिपटे ही सो गए
भोर ने जब दस्तक दी तो आँख खुली, मैंने देखा मेरी बगल में ही ताई सो रही थी जैसे सुबह की पहली किरण ने चुम्बन लिया हो उसका इतनी खुबसूरत लग रही थी कौन कह सकता था की उम्र के 35 के फेर में ऐसी ताजगी जैसे की किसी चमन में वो अकेला गुलाब हो
उसके होंठो को हल्ल्के से चूमा मैंने और फिर उसे जगाया अंगड़ाई लेते हुए वो जागी तो कसम से उसकी चुचिया हवा में तन गयी दिल तो किया की अभी के अभी पेल दू उसको पर कण्ट्रोल किया हमने बिस्तर समेटा और निचे आये
मैं सीधा बाथरूम में घुस गया और नाहा धोके करीब आधे घंटे बाद आया तो नानी ने नाश्ते के लिए बोला पर इधर का ट्रेडिशनल खाना मेरे को थोडा जम नहीं रहा था बस खा ही रहा था जैसे तैसे करके खैर, आज नानी को हॉस्पिटल ले जाना था तो नाना ने ऑटो घर ही बुला लिया था
तो हम सब तैयार होकर चले हॉस्पिटल के लिए मैं कोने में ताई बीच में और दूसरी तरफ नानी बैठ गयी ऑटो चल पड़ा ताई के पैर मेरे पैरो से रगड़ खा रहे थे तो मुझ पर गर्मी चढ़ने लगी ताई ने अपनी नशीली आँखों से मेरी तरफ देखा तो मैं मुस्कुरा दिया
मैंने इधर उधर देखा और फिर अपनी कोहनी से ताई के चूचो को सहलाने लगा तो ताई के चेहरे का रंग बदलने लगा पर वो भी शायद मजे लेने के मूड में थी तो उसने मुझे मना नहीं किया तभी ऑटो ने झटका सा खाया तो ताई ने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया
और उस एक पल में ही उसे दबा दिया दरअसल वो भी दिखा रही थी की वो कम नहीं है हमारी आपस में छेडछाड चालू थी और मेरा लंड पेंट से बाहर आने को मचल रहा था पर यहाँ किया कुछ नहीं जा सकता था तो अपने जज्बातों को किया काबू में और पहुच गए हॉस्पिटल में
नानी को डॉक्टर को दिखाने में बहुत टाइम निकल गया पर वो ठीक हो रही थी तो राहत की बात थी मैं नानी के पास ही रुक गया और ताई दवाइया लाने गयी जब वो मटक के चल रही थी तो मेरी निगाह ताई की मस्तानी गांड पर ही थी मेरा तो बुरा हाल हो रहा था की क्या करू अब
खुद पर काबू करना मुश्किल हो रहा था खैर घर आये नानी अपनी गोली लेकर सो गयी और मैंने ताई को पकड़ लिया
मैं- कब से तडपा रही हो अब जल्दी से मेरे लंड को शांत करो
ताई- तूने मुझे कितना गरम कर रखा है देख जरा
ताई ने मेरा हाथ अपनी चूत पर रख दिया तो मैं उसे मसलने लगा साड़ी के ऊपर से ही ताई मेरे होंठो को चूसने लगी मैंने ताई की साड़ी को ऊपर उठाया और कच्छी को घुटनों तक सरका दिया किस करते करते मैंने ताई की चूत में ऊँगली डाल दी और उसको अन्दर बाहर करने लगा
ताई का निचला होंठ मेरे मुह में था और ताई का हाथ मेरे लंड पर चल रहा था बस कुछ ही देर में हम दोनों एक दुसरे में खो जाने वाले थे पर शायद किस्मत को ये मंजूर नहीं था हमारा काम शुरू हुआ ही था की किसी ने घंटी बजा दी
तो हमने अपने अपने कपडे सही किये ताई ने दरवाजा खोला तो पड़ोसन आंटी आई थी और आई तो ऐसी आई की दो ढाई घंटे पहले गयी ही नहीं पर हम क्या कर सकते थे अब हर चीज़ हमारे हिसाब से तो नहीं हो सकती थी ना तो बस दिल को रोक लिया की मौका मिले तो बात बने
आंटी के जाने के बाद हम सब तैयार हुए जल्दी से क्योंकि आज नाना के बॉस के घर पार्टी थी तो नाना के आते ही हम चल दिए काफी शानदार आयोजन किया गया था काफी लोग आये हुए थे ऐसे ही करीब १२-1 बज गया नाना ने वैसे तो टैक्सी बुक की हुई थी पर वो साला पता नहीं कहा पार हो गया था अब इस टाइम दूसरा साधन मिलने का भी थोडा दिक्कत था
क्योंकि बॉस का घर थोडा बाहरी इलाके में था नाना के सहकर्मी ने हमे छोड़ने को कहा पर दिक्कत ये थी की गाड़ी में दो लोगो की जगह थी और हम थे चार तो क्या किया जाये मैंने कहा आप और नानी जाइये क्योंकि नानी बहुत थक भी गयी थी और उनकी तबियत का भी इशू था
कुछ ना नुकुर के बाद वो लोग चले गए तो हमने भी सोचा की कुछ जुगाड़ करते है कोई बीस मिनट के बाद उधर से एक टैक्सी वाला आया तो मैंने उसे हाथ दिया उसने गाड़ी रोकी पर वो नशे में झूम रहा था
ताई- पिए हुए है जाने दे इसको
मैं- पर और कोई साधन आये ना आये रुको मैं देखता हु
मैंने टैक्सी वाले को एड्रेस दिया तो उसने कहा की रात का टाइम है इसलिए डबल किराया लेगा तो मैंने हां कह दिया और उसको थोडा सेफ्टी से चलने को कहा
ताई का मन नहीं था पर मैं साथ था तो हम बैठ गए उसने गाड़ी चलाई पूरी गाडी शराब की बदबू से महक रही थी पर जल्दी ही मुझे लगा की ये तो दूसरा रास्ता है तो मैंने पुछा
ड्राईवर- ये शॉर्टकट है जल्दी पहुचेंगे
मैं चुप हो गया करीब आधा घंटा हो गया आबादी कम कम होती जा रही थी और जंगल घना तो मेरे दिमाग में डाउट हुआ
मैं- अबे कहा ले जा रहा है
वो- कहा न पंहुचा दूंगा
रात का वक़्त ऊपर से ताई मेरे साथ तो अब मैं भी घबराने लगा कुछ मिनट और बीती कायदे से हमे शहर के अन्दर की तरफ होना चाहिए था पर हम और दूर निकल आये थे तो मेरा दिमाग घुमने लगा
मैं- कहा ले जा रहा है
वो- सही तो जा रह है
मैं- गाड़ी रोक
तो उसने बराक मारा,
मैं- शहर तो दूर रह गया तू कहा ले आया हमे
वो- मुझे नहीं पता
बहनचोद ये क्या बोल रहा है
मैं- नहीं पता का क्या मतलब
वो साला कुछ ना बोला शायद अब दारू पूरी तरह से चढ़ गयी थी उसके सर में अँधेरी रात में साला पता नहीं कहा ले आया था अब साला तूफानी बन रहा था मुझे भी गुस्सा आने लगा तो हमारी थोड़ी बोल चल हो गयी और वो हमे वही छोड़ के भाग गया
मैंने अपना माथा पीट लिया
ताई- अब कहा फसवा दिया
मैं- पता नहीं