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कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र

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गतान्क से आगे ......

उस शाम शर्मा जी को अपनी बेटी और उसकी सभी सहेलिओं की पॅंटीस के कयि बार दर्शन हुए. सभी ने सफेद रंग की पॅंटी पहन रखी थी. शर्मा जी सोचने लगे कि कहीं सफेद पॅंटी स्कूल की ड्रेस में तो नहीं है. लेकिन सबसे ज़्यादा सुन्दर और सेक्सी उन्हें अपनी बेटी कंचन ही लगी. प्रॅक्टीस ख़तम होने के बाद सभी लड़कियाँ अपने घर चली गयी और कंचन भी नहाने चली गयी. शर्मा जी भी नहाना चाहते थे क्योंकि उन्हें भी तो लड़कियो ने पटक दिया था. कंचन के बाथरूम से बाहर आते ही वो भी बाथरूम में नहाने के लिए घुस गये. अपने कपड़े उतार के जैसे ही उन्होने धोने के लिए डालने चाहे की उनकी नज़र एक पॅंटी पर पर गयी. ये तो वो ही पॅंटी थी जो कंचन ने अभी अभी पहन रखी थी. शर्मा जी से ना रहा गया. उन्होने अपनी बेटी की पॅंटी उठा ली. पॅंटी पसीने में भीगी हुई थी और मिट्टी लगने से मैली भी हो गयी थी. शर्मा जी अपनी बेटी की पॅंटी का निरीक्षण करने लगे. अब आपको ये बताने की ज़रूरत है की सबसे पहले उन्होने कहाँ का निरीक्षण किया होगा ? जी हां आपने ठीक सोचा, सबसे पहले शर्मा जी ने उस इलाक़े का निरीक्षण किया जो इलाक़ा उनकी बेटी की चूत पे लिपटा रहता था. ये इलाक़ा कुकच्छ ज़्यादा मैला लग रहा था. शर्मा जी जानते थे कि इस इलाक़े में सिर्फ़ मिट्टी का रंग ही नहीं बल्कि बिटिया के पेशाब और शायद उसकी चूत के रस का भी रंग शामिल था. वहाँ पे शर्मा जी को एक लंबा काला बाल भी फँसा हुआ नज़र आया. बाप रे ! जिस बेटी को वो अभी तक बच्ची ही समझते थे उसकी चूत पे इतने लंबे बॉल ! शर्मा जी ने तो सपने में भी कल्पना नहीं की थी की उनकी प्यारी सी बच्ची की चूत पे बॉल भी हो सकते हैं. शर्मा जी का लंड हरकत में आ गया. अब उनसे ना रहा गया और उत्सुकतावश उन्होने बेटी की पॅंटी के उस इलाक़े को सूंघ ही लिया. पसीने, पेशाब और 14 साल की कुँवारी चूत की मिली जुली खुश्बू ने शर्मा जी को मदहोश कर दिया. उनका लंड बुरी तरह फंफना गया था. अपनी पत्नी की पॅंटी तो वो कई बार सूंघ चुके थे लेकिन आज पहली बार उन्हें एहसास हुआ की एक कुँवारी चूत और कई बार चुदी हुई चूत की खुश्बू में कितना अंतर होता है. शर्मा जी का दिमाग़ घूम गया और उन्होने अपनी बेटी की पॅंटी को चूमते और उसकी चूत की खुश्बू सूंघते हुए मूठ मारी. जब तक झाड़ नहीं गये और ढेर सारा वीर्य नहीं निकल गया तब तक शर्मा जी को शांति नहीं मिली. झड़ने के बाद शर्मा जी को गिल्टी फील होने लगी. ये क्या किया. अपनी 14 साल की बच्ची के लिए वासना की ये आग! शर्मा जी अपने आप को कोसने लगे और उन्होने अपने आप से वादा किया की आगे से कभी वो ऐसी हरकत नहीं करेंगे. लेकिन उस रात अपनी पत्नी कविता को इतना जम के चोदा की उनकी पत्नी सोचने लगी आज पति देव को ना जाने इतना जोश कहाँ से आया हुआ है.

इस घटना के बाद शर्मा जी ने अपने ऊपर पूरा कंट्रोल रखने की कोशिश की. बेटी के बारे में जब भी ऐसे वैसे विचार मन में आते तो वो तुरंत उन विचारों को मन से निकाल देते. लेकिन उसके बाद भी शर्मा जी ने पाया की उन्हें बेटी के स्कूल से वापस आने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है. कारण . अब उन्हें स्कर्ट में बेटी की गोरी गोरी टाँगें बहुत अच्छी लगने लगी थी. जब कभी स्कर्ट थोड़ी ऊपर उठ जाती तो बेटी की गोरी गोरी मांसल जागें देख कर वो मदहोश हो जाते. कंचन थी भी बड़ी लापरवाह, इसलिए शर्मा जी को हफ्ते दो हफ्ते में एक आध बार बिटिया के टाँगों के बीच झाँकने का भी मौका मिल जाता था. लेकिन अभी तक शर्मा जी को बिटिया की पॅंटी की झलक आधे सेकेंड से ज़्यादा नहीं मिल पाई थी. ये झलक मात्र ही शर्मा जी को पागल किए जा रही थी और उनकी उत्सुकता को बढ़ा रही थी. शर्मा जी इस तरह बेटी की टाँगों और उसकी पॅंटी की झलक को आक्सिडेंटल मान कर अपने दिल को तसल्ली देते थे. उन्होने अपने दिल को ये सोच कर भी तसल्ली दे रखी थी कि आख़िर वो बेटी को बचपन में नंगी भी देख चुके हैं. अब अगर उसकी पॅंटी दिख भी गयी तो क्या हुआ? आख़िर है तो उनकी बेटी ही.

शर्मा जी जितना अपने आप को संभालने की कोशिश करते तब तब कोई ऐसी बात हो जाती की शर्मा जी अपना संकल्प नहीं रख पाते. एक दिन कंचन स्कूल से आई. भागती हुई घर में घुसी. उसने दो पोनी टेल्स बना रखी थी. बहुत ही चंचल लग रही थी. शर्मा जी सोफा पे बैठे हुए थे. उसे देखते ही खुश हो कर बोले,

“ आ गयी मेरी बेबी डॉल.”

“ जी, मेरे अच्छे पप्पू.” जल्दी से शर्मा जी के गाल पे किस करती हुई बोली, “ मैं अभी आई. मुझे जल्दी से बाथरूम जाना है. बहुत देर से रोक रखा है.” कंचन अपना स्कूल बॅग वहीं पटक कर बाथरूम की ओर भागी. जल्दी में बाथरूम का दरवाज़ा तक बंद नहीं किया. शर्मा जी भी बेटी के पीछे पीछे चल पड़े. लेकिन बाथरूम का दरवाज़ा खुला देख के रुक गये. फिर ना जाने उनके दिमाग़ में क्या आया, वो बाथरूम के दरवाज़े के बिकुल पास आ कर खड़े हो गये. उनकी बेबी डॉल को शायद बहुत ज़ोर का पेशाब आ रहा था. उसने बाथरूम में घुसते ही जल्दी से पॅंटी नीचे सर्काई और बैठ कर पेशाब करना शुरू कर दिया. प्सस्सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स की ज़ोरदार आवाज़ से पूरा बातरूम गुंज़्ने लगा. शर्मा जी मन्त्र मुग्ध से खड़े बेटी की चूत से निकलता मधुर संगीत सुन रहे थे. शर्मा जी को औरत की चूत से निकलती हुई ये सुरीली आवाज़ बहुत अच्छी लगती थी. बल्कि वो औरत की चूत से निकलती हुई पेशाब की धार को देख कर मदहोश हो जाते थे. बड़ी मुश्किल से उन्होने दो बार अपनी पत्नी कविता को अपने सामने बैठ कर मूतने के लिए राज़ी किया था. उनका मन तो करता था कि पत्नी को कहें की उनके ऊपर बैठ कर उनके मुँह पे ही मूत ले लेकिन शरम के मारे कभी कह ना पाए. अपनी बेटी की झांतों भरी चूत से निकलती पानी की धार की कल्पना करते करते उनका लंड तन गया था. काफ़ी देर से बिटिया ने पेशाब रोक रखा था. दो मिनिट तक प्सस्सस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………… का मधुर संगीत चलता रहा. जैसे ही प्सस्सस्स………… की आवाज़ आनी बंद हुई शर्मा जी जल्दी से वापस बाहर सोफा पे बैठ गये. इतने में कंचन भी आ गयी और फ्रिज में से बर्गर निकाल कर डाइनिंग टेबल पर खाने के लिए बैठ गयी. जहाँ शर्मा जी बैठे हुए थे वहाँ से डाइनिंग टेबल के नीचे से उन्हे कंचन की टाँगें नज़र आ रही थी.
 
कंचन अपनी दोनो टाँगें सटा के डाइनिंग चेर पे बैठी हुई थी, जैसा की लड़कियो को सिखाया जाता है. इतने में एक सेकेंड के लिए कंचन की टाँगें चौड़ी हुई और शर्मा जी को उसकी पॅंटी की झलक मिल गयी. चूत पे चिपकी हुई पॅंटी पर एक बड़ा सा गीला दाग था. शर्मा जी का लॉडा फिर से हुंकार उठा.. वो जानते थे कि बिटिया अभी अभी पेशाब कर के आई है और ये पेशाब का ही दाग था. एक बार फिर शर्मा जी के कसमे- वादे हवा हो गये. बेटी उनका जीना हराम करती जा रही थी.

एक दिन कंचन स्कूल से वापस आ कर बाहर लॉन में लगे झूले पे बैठे हुई थी. शर्मा जी भी ऑफीस से लंच के लिए घर आए. शर्मा जी को देखते ही बोली,

“ पापू, हमे थोड़ा झूला दो ना.”

“अरे गुड़िया अपने आप झूल लो. हमे जल्दी वापस ऑफीस जाना है.”

“ प्लीज़ पपूऊ..! सिर्फ़ एक बार !”

“ ठीक है. तुम तो बहुत ज़िद्दी हो.” शर्मा जी बेटी के पीछे खड़े हो कर उसे धक्का लगाने लगे. कंचन जैसे ही आगे को झूलती हुई जाती उसकी स्कर्ट हवा से फूल जाती. ये देख के शर्मा जी के दिमाग़ में आया कि अगर वो सामने की ओर जा के कुर्सी पे बैठ जाएँ तो बिटिया की टाँगों के बीच का नज़ारा देख सकेंगे. शर्मा जी ने ज़ोर से धक्का लगा कर कंचन से कहा,

“बेटी अब तुम अपने आप झूलो हम थोड़ी देर बैठ जाते हैं.”

“ठीक है पपाऊ.”

शर्मा जी सामने कुर्सी पे बैठ गये. कंचन अपने आप ही झूल रही थी. जैसे ही वो शर्मा जी की ओर झूलती हुई आती उसकी स्कर्ट हवा से फूल कर ऊपर की ओर उठ जाती. शर्मा जी को बेटी की स्कर्ट के नीचे से उसकी गोरी गोरी जांघों ऑर पॅंटी के दर्शन हो जाते. पहले तो शर्मा जी को कंचन की पॅंटी की झलक मात्र ही मिल पाती थी लेकिन आज तो काफ़ी देर तक उन्हें बिटिया की पॅंटी नज़र आ रही थी. शर्मा जी को समझते देर नहीं लगी कि बेटी की चूत भी अपनी मा की चूत की तरह खूब फूली हुई है. आज शर्मा जी ने काई बार बिटिया की पॅंटी के दर्शन किए.

इस तरह समय बीत रहा था. कई बार शर्मा जी निश्चय कर लेते कि अब वो कभी बेटी की टाँगों के बीच नहीं झाँकेंगे और फिर काई दिन तक अपने पर कंट्रोल रख के बिटिया की टाँगों के बीच झाँकने से अपने को रोकते थे. लेकिन अक्सर जब बाथरूम में बेटी की उतारी हुई पॅंटी नज़र आ जाती तो अपने ऊपर काबू खो बैठते और उसकी मादक खुश्बू सूँगते हुए मूठ मार लेते. कंचन थी तो बहुत ही चुलबुली. अक्सर जब शर्मा जी टीवी देख रहे होते तो वो उनकी गोद में आ कर बैठ जाती. कबड्डी वाली घटना के बाद से जब भी कंचन शर्मा जी की गोद में बैठती, उसकी मादक जांघों के स्पर्श से शर्मा जी का लंड खड़ा हो जाता. लेकिन शर्मा जी कभी भी अंडरवेर पहनना नहीं भूलते थे. अंडरवेर होने के कारण कंचन को कभी भी शर्मा जी के खड़े लंड का अहसास नहीं हुआ.

देखते ही देखते कंचन 18 साल की हो गयी और अब वो 12थ में आ गयी थी. चुचियो का साइज़ 38 हो चला था. चूटर भी भारी हो गये थे और बहुत फैलते जा रहे थे. बिटिया की छ्होटी सी पॅंटी के बस में अब उसके भारी भारी चूतेर संभालना नहीं रहा था. आधे से ज़्यादा चूतेर तो पॅंटी के बाहर ही रहते थे. जैसे जैसे दिन गुज़रता जाता, कंचन की पॅंटी उन आधे ढके हुए चूतरो पर से भी सिमट कर दोनो चूतरो की दरार में घुसने की कोशिश करती. अब तो बेटी के चूतेर फैल कर बिल्कुल उतने चौड़े हो गये थे जितने उनकी पत्नी के शादी के वक़्त थे. चलती भी चूतरो को मटका के थी. शर्मा जी के दिल पे च्छूरियाँ चल जाती थी. जैसे जैसे बिटिया बड़ी हो रही थी, थोड़ा चुलबुलापन कम हो गया था और उठने बैठने में सावधान हो गयी थी. अब शर्मा जी को उसकी पॅंटी के दर्शन बहुत ही मुश्किल से तीन चार महीने में एक आध बार ही होने लगे. अब तो बेटी अपनी उतारी हुई पॅंटी भी बाथरूम में नहीं छोड़ती थी. बेटी की चूत की सुगंध लिए तो अब शर्मा जी को महीनों बीत गये थे. लकिन अब भी वो उनकी गोद में अक्सर बैठ जाती थी.

फिर एक दिन कुच्छ ऐसी घटना हुई कि कंचन के लिए सब बदल गया. गर्मियों की छुट्टिया चल रही थी. नीलम, कंचन के घर तीन चार दिन रहने आई थी. दोनो सहेलिओं ने खूब मज़ा किया ओर दुनिया भर की गप्पें मारी. रात को नीलम, कंचन के कमरे में ही सोई. अचानक रात को नीलम ने कंचन को जगाया ओर बोली,

“ सुन कंचन, ये करहाने की आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं?”

“ ओह हो सो जा नीलम. ये तो मेरी मम्मी की आवाज़ें हैं. बेचारी के पेट में बहुत दर्द रहता है.अक्सर तो सारी रात कहराती रहती है.”

“ कंचन तू सुचमुच बहुत भोली है. ये पेट के दर्द की आवाज़ें नहीं है. ऐसी आवाज़ें तो औरत के मुँह से तब निकलती है जब उसकी चुदाई होती है.” कंचन एकदम गुस्से में बोली,

“ क्या बकवास कर रही है तू मेरी मम्मी ओर पापा के बारे में. मम्मी ने मेरे पूच्छने पर खुद बताया था कि उनके पैट में बहुत दर्द रहता है.”

“ ठीक है तो शर्त लगा ले 50 रुपये की.”

“ लगा ले शर्त, लेकिन मेरे पास 50 रुपये नहीं हैं.”

“ कोई बात नहीं अगर तू हार गयी तो जो मैं कहूँगी वो करना पड़ेगा. बोल मंज़ूर है?”

“ मंज़ूर है. हमारे और मम्मी पापा के कमरे के बीच जो खिरकी है उस पर उनके कमरे की ओर से परदा पड़ा है. कल मैं रात को वो परदा साइड में कर दूँगी और वरामदे की लाइट भी ऑन कर दूँगी जिससे हमे उस कमरे में सब कुच्छ नज़र आएगा. खिड़की से लग के खड़े रहेंगे तो आवाज़ें भी सॉफ सुनाई देंगी. सिर्फ़ कल ही का दिन है हमारे पास क्योंकि परसों मम्मी मैके जा रही है.”

“ वाह! कंचन तेरा दिमाग़ तो बहुत चलता है.”
 
कंचन को पूरा विश्वास था कि शर्त तो वोही जीतेगी. अगले दिन बड़ी बेसब्री से रात होने का इंतज़ार किया. रात होते ही कंचन ने मम्मी पापा के कमरे का परदा हटा दिया और वरामदे की लाइट ऑन कर दी. फिर उन्होने अपने कमरे की लाइट ऑफ कर दी. अब मम्मी पापा के कमरे में सब कुच्छ सॉफ दिख रहा था.थोरी देर में मम्मी पापा अपने कमरे में आए. उसके बाद जो कुकच्छ हुआ वो देख कर कंचन की आँखें फटी की फटी रह गयीं. पापा मम्मी की बातें सॉफ सुनाई दे रहीं थी. मम्मी बोली,

“ लगता है कंचन और उसकी दोस्त सो गयी. सारा दिन मटर गस्ति करती है.”

“ बच्चे हैं मज़ा करने दो. तो श्रीमती जी हमे अकेला छोड़ कर मैके जा रही हैं. इतने दिन हमारा क्या हाल होगा ये नहीं सोचा.”

“ क्या करूँ जाना तो नहीं चाहती, पर मा बीमार है.”

“ और हमारी बीमारी का इलाज कब करोगी?” पापा मम्मी को अपनी बाहों में खींचते हुए बोले. कंचन के दिल की धड़कन तेज हो गयी. नीलम भी मुस्कुरा रही थी.

“ आपकी बीमारी का इलाज तो रोज़ ही करती हूँ.”

पापा मम्मी को चूमते हुए बोले,

“ आज ऐसी दवाई देती जाओ की अगले 15 दिन दवाई की ज़रूरत ना पड़े.”

“ कॉन सी दवाई चाहिए आपको?” मम्मी मुस्कुराते हुए बोली.

“ ये वाली.” पापा मम्मी की चूत सलवार के ऊपर से दबाते हुए बोले.

“ ओई मा इसस्सस्स….! ले लीजिए ना. किसने रोका है. आज कमरे में लाइट कुच्छ ज़्यादा आ रही है. ठहरिए मैं वरामदे की लाइट बंद करके आती हूँ..”

“ नहीं मेरी जान, रहने दो. बहुत दिनों से तुम्हें ठीक से नंगी भी नहीं देखा.”

“ अच्छा जी! रोज़ रात को तो नंगी करते हैं.”

“ नंगी कर के तो चोदता हूँ मेरी जान लेकिन तुम्हारे नंगे बदन के दर्शन कहाँ हो पाते हैं.” ये कहते हुए पापा ने मम्मी की कमीज़ उतार दी, और सलवार का नाडा भी खींच दिया. नाडा खींचते ही सलवार नीचे गिर पड़ी. अब मम्मी सिर्फ़ पिंक ब्रा और पॅंटी में थी.

“ नहीं नाअ! प्लीईआसए……लाइट बंद कर दीजिए. मुझे शरम आ रही है. अब मैं बहुत मोटी हो गयी हूँ.”

“ नहीं मेरी रानी तुम अब भी बहुत सेक्सी हो. तुम्हें देख कर तो मेरा लंड सारा दिन खड़ा रहता है.” पापा मम्मी के होंठ चूस रहे थे और दोनो हाथों से मोटे मोटे चूतरो को सहला रहे थे. मम्मी की पॅंटी उनके विशाल चूतरो के बीच में धँसी जा रही थी.

“ ये तो पागल है” मम्मी प्यार से पापा के लंड को लूँगी के ऊपर से मुसलते हुए बोली.

नीलम, कंचन की चूत पर चुटकी काटते हुए बोली “ला मेरे 50 रुपये.”

“ शट अप अभी कुच्छ हुआ तो नहीं ना. जब कुच्छ होगा तो बोलना.” कंचन का इतना कहना ही था कि पापा ने मम्मी की ब्रा उतार दी और पनटी नीचे खिसका दी. मम्मी बिल्कुल नंगी थी. 36 साल की उम्र में भी बहुत ही सेक्सी लग रही थी. बड़ी बड़ी चूचियाँ बहुत टाइट तो नहीं लेकिन ढीली भी नहीं थी. गोरी गोरी मोटी मोटी जंघें ओर फैले हुए भारी विशाल चूतर बहुत ही सेक्सी लग रहे थे. इतने मोटे चूतरो के ऊपर कमर काफ़ी पतली लग रही थी. चूत पर बहुत ही घने काले बॉल थे.

“ ऊफ़ ! मेरी जान तुम तो बला की सेक्सी लग रही हो. कोई कह नहीं सकता की दो जवान बच्चों की मा हो. मेरा लंड तो काबू में नहीं आ रहा”

“ किसने कहा है आपको काबू में करने के लिए. आज़ाद कर दीजिए बेचारे को.” ये कह कर मम्मी ने पापा की लूँगी खींच दी. कंचन तो बेहोश होते होते बची. नीलम के पसीने छ्छूट गये. पापा का लंबा मोटा लंड तना हुआ था. कंचन तो पहली बार किसी मरद का खड़ा हुआ लंड देख रही थी. साधु महाराज के मुक़ाबले का लंड था. काला मोटा तना हुआ लंड बहुत ही भयानक लग रहा था. मम्मी नीचे बैठ गयी और पापा का लंड अब बिल्कुल उसके होंठों के सामने था.

“ मुझे भी आपके इस 9 इंच के कॅप्सुल की बहुत ज़रूरत है.” ये कह कर मम्मी ने पापा के लंड को मुँह में डाल लिया और चूसने लगी. लंड इतना मोटा था की मम्मी के होंठों में बड़ी मुश्किल से आ रहा था. मम्मी कभी पूरे लंड पर जीभ फेर के चाटती और कभी लंड के नीच लटकते हुए बॉल्स को. पापा ने मम्मी का सिर दोनो हाथों में पकड़ कर धक्के लगाने शुरू कर दिए. उनका मूसल मम्मी के मुँह में अंदर बाहर होने लगा. बेचारी 4 या 5 इंच ही मुँह में ले पा रही थी. थोरी देर बाद पापा ने मम्मी को बिस्तेर पर लिटा दिया और बोले,

“ कविता, अपनी टाँगें खोल कर एक बार अपनी प्यारी चूत के दर्शन तो करा दो.”

“ हाई राम, रोज़ ही तो देखते हैं. पहले लाइट बंद कीजिए.” मम्मी अपनी टाँगों को चिपका कर बोली.

“ अब मैं नंगा तो बाहर जा नहीं सकता. दिखा भी दो मेरी जान. जो चीज़ रोज़ चुदवाती हो उसे दिखाने में कैसी शरम.” ये कह कर पापा ने मम्मी की टाँगें फैला दी. मम्मी ने मारे शरम के दोनो हाथों से अपना मुँह ढक लिया. मोटी मोटी गोरी जांघों के बीच में काले घने बालों से भरी चूत सॉफ नज़र आ रही थी. क्या फूली हुई चूत थी!

“ कविता तुम्हारी चूत बहुत ही सेक्सी है. तभी तो मैं इसका इतना दीवाना हूँ. कितनी फूली हुई है.” कंचन सोचने लगी मेरी भी चूत काफ़ी फूली हुई है लेकिन मम्मी की तो बहुत ही ज़्यादा फूली हुई थी.

“ इस 9 इंच के मूसल से रोज़ चुदवाने के बाद फूलेगी नहीं तो और क्या होगा. मैं बहुत भाग्यशाली हूँ जो इस उम्र में भी आपको मेरी चूत इतनी अच्छी लगती है. वरना इस उम्र में कौन मर्द अपनी बीवी को रोज़ चोदता है.”

पापा ने मम्मी की टाँगें और चौड़ी कर दी और जीभ निकाल कर चूत चाटने लगे.

“ आआआः ..आ.एयेए..ऊवू! बहुत अक्च्छा लग रहा है. बाल आपके मुँह में तो नहीं जा रहे.?” मम्मी चूतर उच्छाल कर अपनी चूत पापा के मुँह पर रगड़ रही थी. पापा कभी मम्मी की चूत चाटते और कभी बड़ी बड़ी चूचिओ को चूस्ते. थोरी देर बाद 69 की मुद्रा में आ गये. अब मम्मी की चूत पापा के मुँह पर थी और पापा का मोटा लंड मम्मी के मुँह में. काफ़ी देर तक चूमा चॅटी का खेल चलता रहा. फिर पापा ने मम्मी को बिस्तेर पर लिटा कर उनकी मोटी जांघों को चौड़ा किया और लंड का सुपरा उनकी चूत के मुँह पर रख कर रगड़ने लगे.

क्रमशः.........
 
गतान्क से आगे ......

Us shaam Sharma ji ko apni beti aur uski sabhi sahelion ki panties ke kayi baar darshan hue. Sabhi ne safed rang ki panty pahan rakhi thi. Sharma ji sochne lage ki kahin safed panty school ki dress mein to nahin hai. Lekin sabse zyada sunder aur sexy unhen apni beti Kanchan hi lagi. Practice khatam hone ke baad sabhi ladkian apne ghar chali gayi aur Kanchan bhi nahaane chali gayi. Sharma ji bhi nahaana chaahte the kyonki unhen bhi to ladkion ne patak diya tha. Kanchan ke bathroom se baahar aate hi vo bhi bathroom mein nahaane ke liye ghus gaye. Apne kapre utaar ke jaise hi unhone dhone ke liye daalne chaahe ki unki nazar ek panty par par gayi. Ye to vo hi panty thi jo Kanchan ne abhi abhi pahan rakhi thi. Sharma ji se na raha gaya. Unhone apni beti ki panty utha lee. Panty paseene mein bhigi hui thi aur mitti lagne se maili bhi ho gayi thi. Sharma ji apni beti ki panty ka nirikshan karne lage. Ab aapko ye bataane ki zaroorat hai ki sabse pahle unhone kahaan ka nirikshan kiya hoga ? jee haan aapne theek socha, sabse pahle Sharma ji ne us ilaake ka nirikshan kiya jo ilaaka unki beti ki choot pe lipta rahta tha. Ye ilaaka kucchh zyada maila lug raha tha. Sharma ji jaante the ki is ilaake mein sirf mitti ka rang hi nahin balki bitiya ke peshaab aur shaayad uski choot ke rus ka bhi rang shaamil tha. Vahaan pe Sharma ji ko ek lumba kaala baal bhi phansa hua nazar aaya. Baap Re ! jis beti ko vo abhi tak bacchhi hi samjhate the uski choot pe itne lumbe baal ! Sharma ji ne to sapne mein bhi kalpna nahin kit hi ki unki pyaari si bacchhi ki choot pe baal bhi ho sakte hain. Sharma ji ka lund harkat mein aa gaya. Ab unse na raha gaya aur utsuktavash unhone beti ki panty ke us ilaake ko soongh hi liya. Paseene, peshaab aur 14 saal ki kunwaari choot ki mili juli khushboo ne Sharma ji ko madhosh kar diya. Unka lund buri tarah phanphana gaya tha. Apni patni ki panty to vo kai baar soongh chuke the lekin aaj pahli baar unhen ehsaas hua ki ek kunwaari choot aur kai baar chudi hui choot ki khushboo mein kitna unter hota hai. Sharma ji ka dimaag ghoom gaya aur unhone apni beti ki panty ko choomte aur uski choot ki khushboo soonghte hue muth maari. Jub tak jhad nahin gaye aur dher sara veerya nahin nikal gaya tub tak Sharma ji ko shanti nahin mili. Jhadne ke baad sharma ji ko guilty feel hone laga. Ye kya kiya. Apni 14 saal ki bacchhi ke liye vaasna ki ye aag! Sharma ji apne aap ko kosne lage aur unhone apne aap se vada kiya ki aage se kabhi vo aisi harkat nahin karenge. Lekin us raat apni patni Kavita ko itna jum ke choda ki unki patni sochne lagi aaj pati dev ko na jaane itna josh kahaan se aaya hua hai.

Is ghatna ke baad Sharma ji ne apne oopar poora control rakhne ki koshish ki. Beti ke bare mein jub bhi aise vaise vichaar mun mein aate to vo turant un vichaaron ko mun se nikaal dete. Lekin uske baad bhi sharma ji ne paya ki unhen beti ke school se waapas aane ka besabri se intzaar rahta hai. Kaaran . Ab unhen skirt mein beti ki gori gori taangen bahut acchhi lagne lagi thi. Jub kabhi skirt thori oopar uth jaati to beti ki gori gori maansal jaaghen dekh kar vo madhosh ho jaate. Kanchan thi bhi bari laaparwaah, isliye Sharma ji ko Hafte do hafte mein ek aadh baar bitiya ke taangon ke beech jhaankne ka bhi mauka mil jata tha. Lekin abhi tak Sharma ji ko bitiya ki panty ki jhalak aadhe second se zyada nahin mil paayi thi. Ye jhalak maatr hi Sharma ji ko paagal kiye jaa rahi thi aur unki utsukta ko barhaa rahi thi. Sharma ji is tarah beti ki taangon aur uski panty ki jhalak ko accidental maan kar apne dil ko tasalli dete the. Unhone apne dil ko ye soch kar bhi tasalli de rakhi thi ki aakhir vo beti ko bachpan mein nangi bhi dekh chuke hain. Ab agar uski panty dikh bhi gayi to kya hua? Aakhir hai to unki beti hi.

Sharma ji jitna apne aap ko sambhalne ki koshish karte tub tub koi aisi baat ho jaati ki Sharma ji apna sankalp nahin rakh paate. Ek din Kanchan school se aayi. Bhaagti hui ghar mein ghusi. Usne do pony tails bana rakhi thi. Bahut hi chanchal lug rahi thi. Sharma ji sofa pe baithe hue the. Use dekhte hi khush ho kar bole,

“ Aa gayi meri baby doll.”

“ Jee, mere acchhe pappoo.” Jaldi se Sharma ji ke gaal pe kiss karti hui boli, “ Main abhi aayi. Mujhe jaldi se bathroom jana hai. Bahut der se rok rakha hai.” Kanchan apna school bag vahin patak kar bathroom ki or bhaagi. Jaldi mein bathroom ka darwaaza tak bund nahin kiya. Sharma ji bhi beti ke peechhe peechhe chal pare. Lekin bathroom ka darwaaza khula dekh ke ruk gaye. Phir na jaane unke dimaag mein kya aaya, vo bathroom ke darwaaze ke bikul paas aa kar khade ho gaye. Unki baby doll ko shaayad bahut zor ka peshaab aa raha tha. Usne bathroom mein ghuste hi jaldi se panty neeche sarkai aur baith kar peshaab karma shuru kar diya. Pssssssssssssssssssssssss………ssssssssssssssss ki zordaar awaaz se poora bathroom gunzne laga. Sharma ji mantra mugdh se khare beti ki choot se nikalta madhur sangeet sun rahe the. Sharma ji ko aurat ki choot se nikalti hui ye surili awaaz bahut acchhi lagti thi. Balki vo aurat ki choot se nikalti hui peshaab ki dhaar ko dekh kar madhosh ho jaate the. Bari mushkil se unhone do baar apni patni Kavita ko apne saamne baith kar mootne ke liye raazi kiya tha. Unka mun to karta tha ki patni ko kahen ki unke oopar baith kar unke munh pe hi moot le lekin sharam ke mare kabhi kah na paaye. Apni beti ki jhaanton bhari choot se niklti paani ki dhaar ki kalpna karte karte unka lund tun gaya tha. Kaafi der se bitiya ne peshaab rok rakha tha. Do minute tak pssssssssssssss………… ka madhur sangeet chalta raha. Jaise hi psssss………… ki awaaz aani bund hui Sharma ji jaldi se waapas baahar sofa pe baith gaye. Itne mein Kanchan bhi aa gayi aur frig mein se burger nikaal kar dining table par khaane ke liye baith gayi. Jahaan Sharma ji baithe hue the vahaan se dining table ke neeche se unhaen Kanchan ki taangen nazar aa rahi thi. Kanchan apni dono taangen sataa ke dining chair pe baithi hui thi, jaisa ki ladkion ko sikhaya jata hai. Itne mein ek second ke liye Kanchan ki taangen chauri hui aur Sharma ji ko uski panty ki jhalak mil gayi. Choot pe chipki hui panty par ek bara sa geela daag tha. Sharma ji ka lauda phir se hunkaar utha.. Vo jaante the ki bitiya abhi abhi peshaab kar ke aayi hai aur ye peshaab ka hi daag tha. Ek baar phir Sharma ji ke kasme- vaade hawa ho gaye. Beti unka jeena haraam karti jaa rahi thi.

Ek din Kanchan school se waapas aa kar baahar lawn mein lage jhoole pe baithe hui thi. Sharma ji bhi office se lunch ke liye ghar aaye. Sharma ji ko dekhte hi boli,

“ Papoo, humen thora jhula do na.”

“Are gudia apne aap jhool lo. Humen jaldi waapas office jana hai.”

“ Please papoooo..! sirf ek baar !”

“ Theek hai. Tum to bahut ziddi ho.” Sharma ji beti ke peechhe khare ho kar use dhakka lagane lage. Kanchan jaise hi aage ko jhoolti hui jaati uski skirt hawaa se phool jaati. Ye dekh ke Sharma ji ke dimaag mein aaya ki agar vo saamne ki or jaa ke kursi pe baith jaaen to bitiya ki taangon ke beech ka nazaara dekh sakenge. Sharma ji ne zor se dhakka laga kar Kanchan se kaha,

“Beti ab tum apne aap jhoolo hum thori der baith jaate hain.”

“Theek hai papaoo.”

Sharma ji saamne kursi pe baith gaye. Kanchan apne aap hi jhool rahi thi. Jaise hi vo Sharma ji ki or jhoolti hui aati uski skirt hawaa se phool kar oopar ki or uth jaati. Sharma ji ko beti ki skirt ke neeche se uski gori gori jaanghon or panty ke darshan ho jaate. Pahle to Sharma ji ko Kanchan ki panty ki jhalak maatr hi mil paati thi lekin aaj to kaafi der tak unhen bitiya ki panty nazar aa rahi thi. Sharma ji ko samajhte der nahin lagi ki beti ki choot bhi apni maa ki choot ki ratah khoob phuli hui hai. Aaj Sharma ji ne kayi baar bitiya ki panty ke darshan kiye.

Is tarah samay beet raha tha. Kai baar Sharma ji nishchay kar lete ki ab vo kabhi beti ki taangon ke beech nahin jhaankenge aur phir kayi din tak apne par control rakh ke bitiya ki taangon ke beech jhaankne se apne ko rokte the. Lekin aksar jub bathroom mein beti ki utaari hui panty nazar aa jaati to apne oopar kaaboo kho baithate aur uski maadak khushboo soongte hue muth maar lete. Kanchan thi to bahut hi chulbuli. Aksar jub Sharma ji TV dekh rahe hote to vo unki god mein aa kar baith jaati. Kabaddi wali ghatna ke baad se jub bhi Kanchan Sharma ji ki god mein baithati, uski maadak jaanghon ke sparsh se Sharma ji ka lund khara ho jata. Lekin Sharma ji kabhi bhi underwear pahanana nahin bhoolte the. Underwear hone ke kaaran Kanchan ko kabhi bhi Sharma ji ke khare lund ka ahsaas nahin hua.

Dekhte hi dekhte Kanchan 18 saal ki ho gayi aur ab vo 12th mein aa gayi thi. Choochion ka size 38 ho chala tha. Chooter bhi bhaari ho gaye the aur bahut phailte jaa rahe the. Bitiya ki chhoti si panty ke bus mein ab uske bhaari bhaari chooter sambhalna nahin raha tha. Aadhe se zyada chooter to panty ke baahar hi rahte the. Jaise jaise din guzarta jata, Kanchan ki panty un aadhe dhake hue chootron par se bhi simat kar dono chootron ki daraar mein ghusne ki koshish karti. Ab to beti ke chooter phail kar bilkul utne chaure ho gaye the jitney unki patni ke shaadi ke waqt the. Chalti bhi chootron ko matka ke thi. Sharma ji ke dil pe chhurian chal jaati thi. Jaise jaise bitiya bari ho rahi thi, thora chulbulapan kum ho gaya tha aur uthane baithne mein savdhaan ho gayi thi. Ab Sharma ji ko uski panty ke darshan bahut hi mushkil se teen chaar maheene mein ek aadh baar hi hone lage. Ab to beti apni utaari hui panty bhi bathroom mein nahin chhorti thi. Beti ki choot ki sugandh liye to ab Sharma ji ko maheenon beet gaye the. Lakin ab bhi vo unki god mein aksar baith jaati thi.

Phir ek din kuchh aisi ghatna hui ki Kanchan ke liye sub badal gaya. Garmiyon ki chhuttian chal rahi thi. Neelam, Kanchan ke ghar teen chaar din rahne aayi thi. Dono sahelion ne khoob maza kiya or duniya bhar ki gappen mari. Raat ko Neelam, Kanchan ke kamre mein hi soyi. Achanak raat ko Neelam ne Kanchan ko jagaaya or boli,

“ Sun Kanchan, ye karhaane ki aawazen kahan se aa rahi hain?”

“ Oh ho so jaa Neelam. Ye to meri mummy ki aawazen hain. Bechaari ke pait mein bahut dard rahta hai.Aksar to saari raat kahrati rahti hai.”

“ Kanchan tu suchmuch bahut bholi hai. Ye pait ke dard ki awaazen nahin hai. Aisi awaazen to aurat ke munh se tub nikalti hai jab uski chudai hoti hai.” Kanchan ekdum gusse mein boli,

“ Kya bakwaas kar rahi hai tu meri mummy or papa ke bare mein. Mummy ne mere poochhne par khud bataya tha ki unke pait mein bahut dard rahta hai.”

“ Theek hai to shart laga le 50 rupaye ki.”

“ Laga le shart, lekin mere paas 50 rupaye nahin hain.”

“ Koi baat nahin agar tu haar gayi to jo main kahungi vo karna parega. Bol manzoor hai?”

“ Manzoor hai. Hamaare aur mummy papa ke kamre ke beech jo khirki hai us par unke kamre ki or se parda para hai. Kal main raat ko vo parda side mein kar dungi aur varandah ki light bhi on kar dungi jisse humen us kamre mein sub kuchh nazar aaega. Khirki se lug ke khare rahenge to awaazen bhi saaf sunai dengi. Sirf kal hi ka din hai hamaare paas kyonki parson mummy maike jaa rahi hai.”

“ Wah! Kanchan tera dimaag to bahut chalta hai.”

Kanchan ko poora vishwaas tha ki shart to vohi jeetegi. Agle din bari besabri se raat hone ka intzaar kiya. Raat hote hi Kanchan ne mummy papa ke kamre ka parda hata diya or varandah ki light on kar dee. Phir unhone apne kamre ki light off kar dee. Ab mummy papa ke kamre mein sub kuchh saaf dikh raha tha.Thori der mein mummy papa apne kamre mein aaye. Uske baad jo kucchh hua vo dekh kar Kanchan ki aankhen phati ki phati rah gayin. Papa mummy ki baaten saaf sunai de rahin thi. Mummy boli,

“ lagta hai Kanchan or uski dost so gayi. Saara din matar gasti karti hai.”

“ Bacche hain maza karne do. To shrimati ji humen akela chhor kar maike jaa rahi hain. Itne din hamara kya haal hoga ye nahin socha.”

“ Kya karoon jaana to nahin chaahti, par maa beemaar hai.”

“ Aur hamari beemaari ka ilaaj kub karogi?” Papa mummy ko apni bahon mein kheenchte hue bole. Kanchan ke dil ki dhadkan tej ho gayi. Neelam bhi muskura rahi thi.

“ Aapki beemaari ka ilaaj to roz hi karti hun.”

Papa mummy ko choomte hue bole,

“ Aaj aisi dawaai deti jaao ki agle 15 din dawaai ki zaroorat na pare.”

“ Kon si dawaai chahiye aapko?” mummy muskuraate hue boli.

“ ye waali.” Papa mummy ki choot salwar ke oopar se dabaate hue bole.

“ oui maa isssss….! Le lijiye na. kisne roka hai. Aaj kamre mein light kuchh zyada aa rahi hai. Thahriye Main varandah ki light bund karke aati hun..”

“ Nahin meri jaan, rahne do. Bahut dinon se tumhen theek se nangi bhi nahin dekha.”

“ Achha ji! Roz raat ko to nangi karte hain.”

“ Nangi kar ke to chodata hun meri jaan lekin tumhare nange badan ke darshan kahan ho paate hain.” Ye kahate hue papa ne mummy ki kameez utar dee, aur salwar ka nara bhi kheench diya. Nara kheenchte hi salwar neeche gir pari. Ab mummy sirf pink bra aur panty mein thi.

“ Nahin naaa! Pleeeeeease……light bund kar dijiye. Mujhe sharam aa rahi hai. Ab main bahut moti ho gayi hun.”

“ Nahin meri rani tum ab bhi bahut sexy ho. Tumhen dekh kar to mera lund sara din khara rahta hai.” Papa mummy ke honth choos rahe the aur dono haathon se mote mote chootron ko sahala rahe the. Mummy ki panty unke vishaal chootron ke beech mein dhansi jaa rahi thi.

“ ye to paagal hai” mummy pyar se papa ke lund ko lungi ke oopar se musalte hue boli.

Neelam, Kanchan ki choot par chutki kaatate hue boli “Laa mere 50 rupaye.”

“ Shut up abhi kuchh hua to nahin na. Jab kuchh hoga to bolna.” Kanchan ka itna kahna hi tha ki papa ne mummy ki bra utar dee aur panty neeche khiska dee. Mummy bilkul nangi thi. 36 saal ki umr mein bhi bahut hi sexy lag rahi thi. Bari bari choochiyan bahut tight to nahin lekin dheelee bhi nahin thi. Gori gori moti moti janghen or phaile hue bhaari vishaal chootar bahut hi sexy lag rahe the. Itne mote chootron ke oopar kamar kaafi patli lag rahi thi. Choot par bahut hi ghane kaale baal the.

“ ooph ! meri jaan tum to bala ki sexy lag rahi ho. Koi kah nahin sakta ki do jawaan bachhon ki maa ho. Mera lund to kaaboo mein nahin aa raha”

“ Kisne kaha hai aapko kaaboo mein karne ke liye. Azad kar dijiye bechare ko.” Ye kah kar mummy ne papa ki lungi kheench dee. Kanchan to behosh hote hote bachi. Neelam ke paseene chhoot gaye. Papa ka lumba mota lund tana hua tha. Kanchan to pahli baar kisi marad ka khada hua lund dekh rahi thi. Sadhu maharaj ke mukable ka lund tha. Kala mota tana hua lund bahut hi bhayanak lag raha tha. Mummy neeche baith gayi aur papa ka lund ab bilkul uske honthon ke saamne tha.

“ Mujhe bhi aapke is 9 inch ke capsule ki bahut zaroorat hai.” Ye kah kar mummy ne papa ke lund ko munh mein daal liya aur choosne lagi. Lund itna mota tha ki mummy ke honthon mein bari mushkil se aa raha tha. Mummy kabhi Poore lund par jeebh pher ke chaatati aur kabhi lund ke neech latakte hue balls ko. Papa ne mummy ka sir dono haathon mein pakar kar dhakke lagaane shuru kar diye. Unka moosal mummy ke munh mein ander baahar hone laga. Bechaari 4 ya 5 inch hi munh mein le pa rahi thi. Thori der baad papa ne mummy ko bister par lita diya aur bole,

“ Kavita, apni tangen khol kar ek baar apni pyari choot ke darshan to kara do.”

“ Hai Ram, roz hi to dekhte hain. Pahle light bund kijiye.” Mummy apni tangon ko chipka kar boli.

“ Ab main nanga to baahar ja nahin sakta. Dikha bhi do meri jaan. Jo cheese roz chudwati ho use dikhane mein kaisi sharam.” Ye kah kar papa ne mummy ki tangen phaila dee. Mummy ne mare sharam ke dono haathon se apna munh dhak liya. Moti moti gori janghon ke beech mein kaale ghane baalon se bhari choot saaf nazar aa rahi thi. Kya phooli hui choot thi!

“ Kavita tumhari choot bahut hi sexy hai. Tabhi to main iska itna deewana hun. Kitni phooli hui hai.” Kanchan sochne lagi meri bhi choot kaafi phooli hui hai lekin mummy ki to bahut hi zyada phooli hui thi.

“ Is 9 inch ke moosal se roz chudne ke baad phoolegi nahin to aur kya hoga. Main bahut bhagyashali hun jo is umr mein bhi apko meri choot itni achhi lagti hai. Varna is umr mein kaun mard apni biwi ko roz chodata hai.”

Papa ne mummy ki tangen aur chauri kar dee aur jeebh nikal kar choot chaatne lage.

“ aaaaah ..aa.aaa..oooh! bahut acchha lag raha hai. Baal aapke munh mein to nahin jaa rahe.?” Mummy chootar uchhal kar apni choot papa ke munh par ragar rahi thi. Papa kabhi mummy ki choot chaatate aur kabhi bari bari choochion ko chooste. Thori der baad 69 ki mudra mein aa gaye. Ab mummy ki choot papa ke munh par thi aur papa ka mota lund mummy ke munh mein. Kaafi der tak chooma chaati ka khel chalta raha. Phir papa ne mummy ko bister per laita kar unki moti janghon ko chaura kiya aur lund ka supara unki choot ke munh par rakh kar ragarne lage.

क्रमशः.........

 
गतान्क से आगे ......

“ ऊऊऊः, अब तंग मत करिए. पेल दीजिए पूरा लंड.” मम्मी छूटरो को उचका कर लंड चूत में डालने की कोशिश करती हुई बोली. पापा अपना लंड चूत के कटाव पर रगड़ते रहे और मम्मी को उत्तेजित करते रहे.

“ बस भी कीजिए.! अब और नहीं सहा जा रहा. आपको तो ये दवाई चाहिए थी ना. ले भी लीजिए.”

“ लूँगा मेरी जान, आज तो सारी रात लूँगा.” ये कह कर पापा ने एक ज़ोर का धक्का लगाया. पापा का लंबा मोटा लंड आधा मम्मी की चूत में समा गया.

“ एयाया….आआआः. ऊऊऊऊः….ओई माआअ…….” पापा ने लंड को बाहर खींच कर फिर एक ज़ोर का धक्का लगाया. इस बार तो पूरा लंड मम्मी की चूत को चीरता हुआ जड़ तक अंडर घुस गया. अब पापा के बॉल्स मम्मी की गांद के छेद से रगड़ रहे थे.

“ वी माआअ…..आआआआ, आआआहह! धीरे मेरे राजा धीरे. इतने उतावले क्यों हो रहें हैं. एयेए…..आआआः कहीं भागी तो नहीं जा रही. अभी तो सारी रात बाकी है.”

“सच! सारी रात दोगि?” पापा ने धक्के लगाते हुए पूछा.

“आप लेंगे तो क्यों नहीं दूँगी. आज रात आआआअ…..आआआः….. इतना…. आआ…..आह चोदिए की 15 दिन चोदने की ज़रूरत ना परे.”

“ कविता आज पूरी रात चोद के तुम्हारी चूत फाड़ डालूँगा. बोलो मेरी जान मंज़ूर है?” पापा ने भयंकर धक्के मारते हुए कहा.

“ ओईईई, माआआ….अयाया..ऊऊओ… फाड़ तो आपने सुहाग रात को ही दी थी मेरे रजाआाअ…अयाया ..अब और कैसे फाड़ोगे?”

“ कविता, बीस साल से करीब रोज़ चोद रहा हूँ लेकिन तुम्हारी चूत अभी तक टाइट है. ऐसा लगता है जैसे 16 साल की लड़की की चूत हो”

“ आपका लॉडा है ही इतना मोटा की कोई भी चूत टाइट लगेगी. मैं ही जानती हूँ आपके मूसल ने मेरी चूत का क्या हाल कर दिया है. बीस साल से चोद चोद के इतनी चौड़ी कर दी है की किसी नॉर्मल आदमी का लंड ऐसा लगेगा जैसे कूए में डाल दिया हो”

“ कभी दूसरे आदमी से चुदवाने का दिल नहीं करता तुम्हारा?” पापा ने पूरा लंड बाहर निकाल कर दो तीन ज़ोरदार धक्के मारते हुए पूछा.

“ आआआआहह…..ऊऊओघ…ईइसस्स्स्सस्स…..मार डाला आपने किसी दूसरे के लायक छोड़ी भी है? ऐसा मज़ाक करते आपको शर्म नहीं आती? आपके सिवा मैने आज तक किसी दूसरे मर्द के बारे में कभी सपने में भी नहीं सोचा.”मम्मी गुस्सा करते हुए बोली.मम्मी को मनाने के लिए पापा ने उनके होठों को चूमते हुए कहा,

“ गुस्सा ना करो मेरी जान, मैं तो मज़ाक कर रहा था. हम तुमको अभी खुश कर देते हैं.” ये कह कर पापा ने अपना लॉडा मम्मी की चूत से बाहर खींच लिया. उस मोटे लंबे मम्मी की चूत के रूस में चमकते हुए काले नाग को देख कर तो कंचन की चीख ही निकल गयी. मम्मी की चूत के रस में गीला लॉडा एकदम भयानक लग रहा था. पापा ने फिर से मम्मी की झांतों भरी चूत में मुँह दे दिया और जीभ निकाल कर चाटने लगे. मम्मी की सिसकारियाँ तेज होती जा रही थी. वो चूतर उच्छाल उच्छाल कर अपनी चूत पापा के मुँह पर रगड़ रही थी. आख़िर जब मम्मी से नहीं रहा गया तो बोली,

“ बस करो मेरे राजा. अब चोद कर मेरी चूत की आग ठंडी करो.” पापा ने मम्मी की चूत में से मुँह निकाला और लंड का सुपरा मम्मी की चूत पे रख कर ज़ोरदार धक्का मारा. पूरा 9 इंच का मूसल मम्मी की चूत को चीरता हुआ जड़ तक घुस गया.

“आआआआआ…….आआआआआअ….आआआः, ऊऊ……फ. चोदो मेरे राजा और ज़ोर से चोदो. फाड़ डालो अपनी प्यारी बीवी की चूत.अया ओई माआ……बहुत अच्छा लग रहा है.”

मम्मी पापा के धक्कों का जबाब चूतर उछाल उछाल कर दे रही थी. चूत बुरी तरह गीली थी. मम्मी की चूत से फ़च..फ़च…फ़च ओर मुँह से आआआआ…..ऊओ…ऊऊओफ़ की आवाज़ से पूरा कमरा गूँज़ रहा था. एक घंटे से चुदाई का मादक खेल चल रहा था. फिर पापा के धक्के तेज़ होने लगे और अचानक ही वो मम्मी के ऊपर गिर गये. पापा के लंड ने ढेर सारा वीर्य मम्मी की चूत में उंड़ेल दिया. दो मिनिट के बाद पापा ने मम्मी की चूत के रस और अपने वीर्य में सना लंड बाहर निकाला और मम्मी के होंठों पे रख दिया. काले मोटे लंड पे सफेद सफेद रंग का मम्मी की चूत का रस और उनका अपना वीर्य चिपका हुआ था. मम्मी पापा के 9 इंच लंबे लॉड को जड़ से सुपरे तक चाटने और मुँह में डाल कर चूसने लगी. मम्मी की चूत में से वीर्य निकल कर उनकी गांद के छेद की ओर बह रहा था चूत बुरी तरह से फूल गयी थी और झाँटें गीली हो कर चमक रही थी. मम्मी ने चाट चाट के पापा का लंड साफ कर दिया. मम्मी बोली,

“ आइए, लेट कर थोड़ा आराम कर लीजिए. दवाई मीठी थी ना?”

“ बहुत मीठी थी. अब तो और भी दवाई लेने का मन कर रहा है.” पापा ने मम्मी के बगल में लेटते हुए कहा.

नीलम जो अभी तक चुदाई का नज़ारा देखने में मस्त थी, बोली,

“ कंचन ला मेरे 50 रुपये. देख लिया तेरी मम्मी के पेट का दर्द?”

“ मेरे पास 50 रुपये नहीं हैं.” कंचन शर्त हार के भी बहुत खुश थी क्योंकि शर्त के कारण ही पापा मम्मी की रास लीला देखने को मिली थी.

“ 50 रुपये नहीं हैं तो मैं जैसा कहूँगी वैसा करना पड़ेगा.” नीलम मेरी चूत को सलवार के ऊपर से ही मुट्ठी में भरते हुए बोली.

“ नीलम ये क्या कर रही है ?छोड़ मुझे.” कंचन ने बनावटी गुस्सा करते हुए कहा. किसी ने पहली बार कंचन की चूत पर इस तरह हाथ रखा था. उसे बहुत अच्छा लग रहा था. इतने में नीलम ने कंचन की सलवार का नाडा खोल दिया और सलवार को नीचे खिसका दिया.

“ देख कंचन, 50 रुपये के बदले में मैं तेरी चूत देखना चाहती हूँ और तुझे भी अपनी चूत दिखाउंगी.”

“ प्रॉमिस कर की उसके बाद कुछ नहीं करेगी.” कंचन बोली.

“ उसके बाद क्या कर सकती हूँ ? मेरे पास लंड तो है नहीं जो तुझे चोद सकूँ.” ये कह कर उसने अपनी सलवार भी उतार दी. उसके बाद नीलम ने पहले कंचन का कुर्ता और ब्रा उतार के नंगी कर दिया और फिर खुद भी नंगी हो गयी.
 
“ हाई राम कंचन ! क्या बड़ी बड़ी चूचियाँ हैं. अरे बाप रे ये झांटें हैं या जंगल? लगता है कभी झाँटें नहीं शेव की. और ये चूतर! सच मैं लड़का होती तो तेरी गांद ज़रूर लेती.” नीलम कंचन की चूत के जंगल में हाथ फेरने लगी. कंचन की चूत तो पहले से ही बहुत गीली थी. नीलम के चूत मसल्ने से कंचन का बुरा हाल था. उसकी चूत का रस उसकी झांतों और नीलम के हाथों को गीला कर रहा था. नीलम की चूचियाँ छ्होटी थी. चूत पर एक भी बाल नहीं था. लगता था शेव करती थी. उसने कंचन का हाथ पकड़ के अपनी चूत पर रख दिया. ज़िंदगी में पहली बार किसी लड़की की चूत को हाथ लगाया था कंचन ने. कंचन को अच्छा लग रहा था. नीलम उसकी चूत और कंचन, नीलम की चूत सहला रहे थे.

“ कसम से कंचन, तेरे पापा सच्चे मर्द हैं. क्या फौलादी लॉडा है. तेरी मम्मी की प्यास तो अच्छी तरह बुझा देंगे. कितने प्यार से तेरी मम्मी को पूरा मज़ा दे कर चोद्ते हैं. और तेरी मम्मी भी काम कला में माहिर है. कितनी प्यार और अदा से चुदवाती है. सच, दोनो की बहुत अच्छी जोड़ी है.” नीलम ने ये कहते हुए कंचन के होंठों को चूम लिया. कंचन का बदन तो पहले ही वासना की आग में जल रहा था. अंडर से पापा मम्मी के बातों की आवाज़ आ रही थी. पापा मम्मी की चूत और मम्मी पापा का लॉडा सहला रही थी. लंड सिकुड चुक्का था फिर भी 6 इंच से कम नहीं था. अचानक नीलम बोली,

“ सुन, सुन, तेरी ही बातें हो रही हैं.” दोनो कान लगा के सुनने लगे. मम्मी कह रही थी,

“ कंचन अब जवान हो रही है. दो तीन साल में उसके लिए लड़का ढूंदना पड़ेगा.”

“ जवान हो रही है कि जवान हो चुकी है.” पापा बोले.

“ लड़कियाँ अपनी उम्र से थोड़ी बड़ी लगती हैं.”

“ लेकिन कविता, कंचन की छातिया देखी हैं तुमने ? और चूटर ? कितने भारी हो गये हैं और फैलते जा रहे हैं. कोई कह सकता है कि अभी स्कूल में ही पढ़ती होगी?”

“ आपकी बात सच है. अभी कुच्छ दिन पहले ही मैने 36 साइज़ की ब्रा ला कर दी है. पॅंटी तो खुद ही खरीद लाई थी. इतनी छ्होटी पॅंटी लाई है कि पता नहीं क्या धकति होगी. आधे बाल तो बाहर ही निकले रहते होंगे.”

“क्यों उसकी चूत पे भी तुम्हारी तरह बाल हैं?” पापा के मुँह से अपनी चूत का जिकर सुन कर कंचन शरम से लाल हो गयी. हलाकी शर्मा जी अच्छी तरह जानते थे कि उनकी बिटिया की झांटें कितनी लंबी हैं. कई बार वो उसकी पॅंटी पे चिपके हुए बाल देख चुके थे. मम्मी बोली,

“ वो तो मुझ से भी दो कदम आगे है. उसके बाल तो नाभि के थोड़ा नीचे शुरू हो जाते हैं और उसके नीचे तो पूरा जंगल है.”

“ ये सब तुमने कैसे देख लिया?”

“ अरे ये कंचन है भी तो बड़ी लापरवाह. एक दिन नाइटी में लेटी हुई नॉवेल पढ़ रही थी. नाइटी बिल्कुल ऊपर चढ़ि हुई थी क्योंकि उसने टाँगें मोड़ रखी थी. पॅंटी पहनी ही नही थी. एकदम घने काले बालों से पूरी चूत धकि हुई थी.”

“ आख़िर बेटी तो तुम्हारी ही है. लेकिन अक्च्छा है, जैसे हम तुम्हारी झांतों में खोए रहते हैं वैसे ही उसका पति भी उसकी झांतों में खोया रहेगा. कहीं तुम्हारी तरह उसे भी चुदाई का शौक हुआ तो बहुत ध्यान रखना पड़ेगा.”

“मैने उसे समझा तो दिया है की शादी से पहले कोई गड़बड़ ना हो.”

“ सिर्फ़ समझाने से काम नहीं चलेगा. उसे बताना पड़ेगा की मरद औरत से क्या चाहता है और उसे कैसे चोदता है ताकि उसे पता रहे कि मर्दों की किन हरकतों से सावधान रहना चाहिए.”

“जी, आपकी बात सही है.”

“ हां मेरी जान, तुम्हारी बेटी बिल्कुल तुम पर गयी है. उसके फैलते हुए चूतेर देख कर तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाए.”

“ लगता है आपको अपनी बिटिया के चूतेर बहुत पसंद आ गये हैं. कहीं आपका लंड भी तो नहीं खड़ा होने लगा है अपनी बेटी के चूतेर देख के ?” मम्मी पापा के बॉल्स को दबाती हुई शरारत से मुस्कुराते हुए बोली.

“तुम तो सुचमुच पागल हो गयी हो कविता. अरे घर में आँख बंद करके तो नहीं रह सकते ना. और फिर कंचन तो हमारी बेटी है.”

“मैं तो मज़ाक कर रही थी. आपकी बात सही है. लेकिन स्कूल की ड्रेस भी तो ऐसी है. 18 साल की लड़कियो को कोई स्कर्ट पहनाई जाती है ? स्कूल में लड़के और मास्टर लोग लड़कियो की टाँगों के बीच झाँकने की ताक में रहते होंगे. मर्दों को तो मौका मिलना चाहिए लड़कियो की टाँगों के बीच में झाँकने का.”

“ तभी तो कह रहा हूँ, ऐसी अल्हड़ जवानी का फ़ायदा स्कूल में लड़कों से ज़्यादा तो मास्टर लोग उठाते है. मुझे तो डर है कि कहीं कोई मुश्टंडा मास्टर जी तुम्हारी फूल सी बेटी को चोद ना दे. ज़रा सोचो बेचारी ने अभी तक किसी मरद का लंड तक नहीं देखा होगा.”

“जी समझा दूँगी उसे. लेकिन विकी भी तो बिल्कुल आप पर गया है. उसका क्या होगा?”

“क्या मतलब? हां लंबा तगड़ा जवान है. वो तो लड़कों को होना ही चाहिए.”

“ नहीं मेरे राजा, मैं तो उसके लंड की बात कर रही हूँ. अपपके लंड से भी कहीं बड़ा और मोटा है. बिल्कुल बिजली का खंबा लगता है.” मम्मी ने पापा के लंड को सहलाते हुए कहा.

“ बाप रे कविता ! तुमने विकी का लंड कैसे देख लिया?”

“ मा हूँ ना. बच्चों के बारे में सब कुच्छ जानती हूँ. एक दिन विकी देर तक सो रहा था. मैं उसे उठाने के लिए उसके कमरे में गयी. विकी की लूँगी कमर तक चढ़ि हुई थी और लंड जाँघो पर पड़ा हुआ था. सिकुड़ी हुई हालत में भी 8 इंच लंबा तो ज़रूर रहा होगा. मैं तो घबरा के बाहर चली गयी. फिर एक दिन मैं कपड़े सुखाने जा रही थी. विकी के कमरे की खीरकी खुली हुई थी. अंडर झाँक के देखा तो मेरे होश उड़ गये. विकी शायद कोई गंदा नॉवेल पढ़ रहा था ओर अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था. लंड पूरी तरह तना हुआ था. क्या भयानक लॉडा था. दूर से ठीक से नज़र तो नहीं आया पर कम से कम एक फुट लंबा तो होगा ही. बाप रे! बिजली का खंबा लग रहा था. इतना मोटा और लंबा लंड तो किसी पिक्चर में भी नहीं देखा. आदमी का तो लगता ही नहीं था.”

“ कविता, कहीं बेटे का तो पसंद नहीं आ गया तुम्हें?”

“ कुच्छ तो शर्म करिए. जो मुँह में आता है बोलते रहते हैं. मैं उसकी मा हूँ.”

“ओ हो तुम तो नाराज़ हो गयी. देखो कविता तुम्हारे बेटे ने किसी लड़की को चोद भी दिया तो कोई बात नहीं लेकिन तुम्हारी बेटी को किसी ने चोद दिया तो अनर्थ हो जाएगा. उसे बता दो की हर हालत में उसे शादी तक अपनी चूत बचा के रखनी है.”
 
पापा के मुँह से अपने बदन और अपनी चुदाई की बातें सुन के कंचन शरम से पानी पानी हो रही थी लेकिन उसे एक अजीब सा मज़ा भी आ रहा था. अपने छ्होटे भाई के लंड के बारे में सुन कर कंचन तो दंग रह गयी. लोगों के छोटे भद्दे पेशाब करते लंड देख कर मूड खराब हो जाता था. यहाँ तो मोटे तगड़े लंड घर में ही मौज़ूद थे. नीलम भी पापा मम्मी की बातें सुन कर उत्तेजित थी. एक उंगली हल्के से कंचन की लार टपकाती चूत में सरकाते हुए बोली,

“हाई कंचन अपने भाई से तो दोस्ती करवा दे.”

“हट पागल, सुधीर को धोका देगी?”

पापा का लंड फिर से तन गया था.

“ अरे आपका तो फिर से खड़ा हो गया. क्या इरादा है.”

“ जिसकी बीवी की इतनी खूबसूरत चूत हो उसका और क्या इरादा हो सकता है?” ये कहते हुए पापा ने मम्मी को चूमना शुरू कर दिया. लगता था चुदाई का एक और दौर होने वाला था. इतने में मम्मी बोली,

“ एक मिनिट रुकिये, ज़रा बाथरूम हो आउ.” मम्मी ने बाथरूम का दरवाज़ा खुला ही छोड़ दिया. मम्मी की चूत से पेशाब करने की प्सस्ससस्स की आवाज़ आ रही थी. इतने में नीलम बोली,

“कंचन एक बात कहूँ बुरा तो नहीं मानेगी?”

“नहीं बोल ना.”

“ इस बार तेरे पापा का लंड तेरी याद करके खड़ा हुआ है.”

“ तेरा तो दिमाग़ बिल्कुल खराब हो गया है. मम्मी को सिकुदे हुए लंड से तो नहीं चोद सकते ना. उनका लंड खड़ा है मम्मी को चोदने के लिए.”

“तू फिर एक बार शर्त लगा ले. हार जाएगी. मैं प्रूव कर दूँगी की तेरे पापा तेरी जवानी पे फिदा होते जा रहे हैं. मैं मर्दों को बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ.”

“ठीक है. प्रूव करके दिखा.” कंचन बोली.

“अगर मैं हार गयी तो मैं तुझे एक हज़ार रुपये दूँगी और अगर तू हार गयी तो तू अपने भाई से मेरी दोस्ती करवाएगी. बोल मंज़ूर है ?”

“मंज़ूर है.”

इतने में मम्मी बाथरूम से आ गयी और बोली,

“ कहिए मेरे राजा अब किस मुद्रा में लेंगे ?”

“हाई मेरी रानी ये ही अदा तो हमे मार डालती है. पहले तुम हमारे ऊपर खड़ी हो जाओ. ज़रा अपनी प्यारी बीवी की चूत तो देख लें.”

“हटिए भी आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे पहले कभी देखी ना हो.” लेकिन मम्मी पापा के बदन के दोनो तरफ टाँगें करके खड़ी हो गयी. पापा पीठ के बल लेटे हुए मम्मी की फैली टाँगों के बीच झांतों से धकि हुई चूत को निहार रहे थे. उनका लंड बुरी तरह तना हुआ था. फिर बोले,

“ आओ हमारे ऊपर बैठ जाओ. मम्मी पापा के तने हुए लंड पे बैठने लगी कि पापा बोले,

“वहाँ नहीं मेरी जान, थोडा आगे आ जाओ.” मम्मी थोड़ा और आगे हो गयी.

“और थोड़ा आगे आ जाओ.” मम्मी समझ गयी पापा उनकी चूत चाटना चाहते हैं.

“ छ्ची ! आप नहीं सुधरेंगे. मैं अभी अभी पेशाब करके आई हूँ और आप वहीं मुँह लगाना चाहते हैं. अभी तो मेरी झाँटें तक गीली हैं.” इस वक़्त मम्मी पापा की छाती के दोनो ओर टाँगें करके ऐसे बैठी हुई थी जैसे पेशाब करने की मुद्रा में बैठी हो. इस मुद्रा में मम्मी की चूत पापा की नज़रों के सामने बिकुल खुली हुई थी. घनी काली झांतों के बीच में से अभी अभी पापा के मोटे लॉड से चुदने के कारण मम्मी की चूत का छेद खुला हुआ नज़र आ रहा था. झाँटें चूत के रस और पेशाब से गीली थी. पापा ने मम्मी की विशाल चूतरो को पकड़ के उन्हें अपने मुँह पे खींच लिया. अब पापा का मुँह मम्मी की चूत के जंगल में खो गया था. धीरे धीरे मम्मी के मुँह से इश्स ..आआआ…..ईीइसस्सस्स….आईईइ…आहह की आवाज़ें आने लगी. मम्मी भी पापा के मुँह पे अपनी चूत रगड़ने लगी थी. पापा का मुँह मम्मी की मोटी मोटी जांघों के बीच मम्मी की चूत और झांतों पे लगा पेशाब और उनकी चूत का रस चाट रहा था. मम्मी सिसकारियाँ भरती हुई बोली,

क्रमशः.........
 
गतान्क से आगे ......

“ Ooooooh, ab tung mat kariye. Pel dijiye poora lund.” Mummy chootron ko uchka kar lund choot mein daalne ki koshish karti hui boli. Papa apna lund choot ke kataav par ragarte rahe aur muumy ko uttejit karte rahe.

“ Bus bhi kijiye.! Ab aur nahin saha ja raha. Aapko to ye dawaai chaahiye thi na. Le bhi lijiye.”

“ Loonga meri jaan, aaj to saari raat loonga.” Ye kah kar papa ne ek zor ka dhakka lagaya. Papa ka lumba mota lund aadha mummy ki choot mein sama gaya.

“ aaaaa….aaaaaah. ooooooooh….oui maaaaa…….” Papa ne lund ko baahar kheench kar phir ek zor ka dhakka lagaya. Is baar to poora lund mummy ki choot ko cheerta hua jar tak under ghus gaya. Ab papa ke balls mummy ki gaand ke chhed se ragar rahe the.

“ Oui maaaaa…..aaaaaaaa, aaaaaahhh! Dheere mere raja dheere. Itne utavale kyon ho rahen hain. Aaa…..aaaaah kahin bhagi to nahin jaa rahi. Abhi to saari raat baaki hai.”

“Such! saari raat dogi?” Papa ne dhakke lagate hue poocha.

“Aap lenge to kyon nahin doongi. Aaj raat aaaaaaa…..aaaaah….. itna…. aaaa…..ah chodiye ki 15 din chodne ki zaroorat na pare.”

“ Kavita aaj poori raat chod ke tumhari choot phaad daalunga. Bolo meri jaan manzoor hai?” Papa ne bhayankar dhakke marte hue kaha.

“ ouiiiiii, maaaaaa….aaaah..oooooh… Phaad to aapne suhaag raat ko hi dee thi mere rajaaaaaaa…aaaah ..ab aur kaise phaadiyega?”

“ Kavita, bees saal se kareeb roz chod raha hun lekin tumhari choot abhi tak tight hai. Aisa lagta hai jaise 16 saal ki ladki ki choot ho”

“ Aapka lauda hai hee itna mota ki koi bhi choot tight lagegi. Main hi jaanti hun aapke moosal ne meri choot ka kya haal kar diya hai. Bees saal se chod chod ke itni chaudi kar dee hai ki kisi normal aadmi ka lund aisa lagega jaise kooen mein daal diya ho”

“ Kabhi doosre aadmi se chudwaane ka dil nahin karta tumhara?” Papa ne poora lund baahar nikaal kar do teen zordaar dhakke maarte hue poocha.

“ Aaaaaaaahhhh…..ooooogh…iisssssss…..mar dala aapne kisi doosre ke layak chhori bhi hai? Aisa mazaak karte aapko sharm nahin aati? Aapke siwa maine aaj tak kisi doosre mard ke bare mein kabhi sapne mein bhi nahin socha.”Mummy gussa karte hue boli.Mummy ko manane ke liye papa ne unke hothon ko choomte hue kaha,

“ gussa na karo meri jaan, main to mazaak kar raha tha. Hum tumko abhi khush kar dete hain.” Ye kah kar papa ne apna lauda mummy ki choot se baahar kheench liya. Us mote lumbe mummy ki choot ke rus mein chamkte hue kaale naag ko dekh kar to Kanchan ki cheekh hi nikal gayi. Mummy ki choot ke ras mein geela lauda ekdum bhayanak lag raha tha. Papa ne phir se mummy ki jhanton bhari choot mein munh de diya aur jeebh nikal kar chaatne lage. Mummy ki siskaarian jez hoti jaa rahi thi. Vo chootar uchhaal uchhaal kar apni choot papa ke munh par ragar rahi thi. Aakhir jab mummy se nahin raha gaya to boli,

“ Bus karo mere raja. Ab chod kar meri choot ki aag thandi karo.” Papa ne mummy ki choot mein se munh nikala aur lund ka supara mummy ki choot pe rakh kar zordar dhakka mara. Poora 9 inch ka moosal mumy ki choot ko cheerta hua jar tak ghus gaya.

“Aaaaaaaaaa…….aaaaaaaaaaa….aaaaah, oooo……ph. Chodo mere raja aur zor se chodo. Phaar dalo apni pyari biwi ki choot.aaah oui maaa……Bahut achha lag raha hai.”

Mummy papa ke dhakkon ka jabaab chootar uchhal uchhal kar de rahi thi. Choot buri tarah geeli thi. Mummy ki choot se Phach..phach…phach or munh se aaaaaaaa…..ooohhh…oooooph ki awaaz se poora kamra goonz raha tha. Ek ghante se chudai ka maadak khel chal raha tha. Phir papa ke dhakke tez hone lage aur achanak hi vo mummy ke oopar gir gaye. Papa ke lund ne dher sara veerya mummy ki choot mein undel diya. Do minute ke baad papa ne mummy ki choot ke ras aur apne veerya mein sana lund baahar nikala aur mummy ke honthon pe rakh diya. Kaale mote lund pe safed safed rung ka mummy ki choot ka rus aur unka apna veerya chipka hua tha. Mummy papa ke 9 inch lumbe laude ko jar se supare tak chaatne aur munh mein daal kar choosne lagi. Mummy ki choot mein se veerya nikal kar unki gaand ke chhed ki or bah raha tha Choot buri tarah se phool gayi thi aur jhaanten geeli ho kar chamak rahi thi. Mummy ne chaat chaat ke papa ka lund saaf kar diya. Mummy boli,

“ Aaiye, lait kar thora aaraam kar lijiye. Dawai meethee thi na?”

“ Bahut meethee thi. Ab to aur bhi dawai lene ka man kar raha hai.” Papa ne mummy ke bagal mein laitate hue kaha.

Neelam Jo abhi tak chudai ka nazara dekhne mein mast thi, boli,

“ Kanchan laa mere 50 rupaye. Dekh liya teri mummy ke pait ka dard?”

“ Mere paas 50 rupaye nahin hain.” Kanchan shart haar ke bhi bahut khush thi kyonki shart ke karan hi Papa Mummy ki raas leela dekhne ko mili thi.

“ 50 Rupaye nahin hain to main jaisa kahungi vaisa karna parega.” Neelam meri choot ko salwar ke oopar se hi mutthi mein bharte hue boli.

“ Neelam ye kya kar rahi hai ?chhor mujhe.” Kanchan ne banawati gussa karte hue kaha. Kisi ne pahli baar Kanchan ki choot par is tarah haath rakha tha. Use bahut achha lag raha tha. Itne mein Neelam ne Kanchan ki salwar ka nara khol diya aur salwar ko neeche khiska diya.

“ Dekh Kanchan, 50 rupaye ke badle mein main teri choot dekhana chaahti hun aur tujhe bhi apni choot dikhaungi.”

“ Promise kar ki uske baad kuch nahin karegi.” Kanchan boli.

“ Uske baad kya kar sakti hun ? Mere paas lund to hai nahin jo tujhe chod sakun.” Ye kah kar usne apni salwar bhi utar dee. Uske baad Neelam ne pahle Kanchan ka kurta aur bra utaar ke nangi kar diya aur phir khud bhi nangi hi gayi.

“ Hai Ram Kanchan ! kya bari bari choochian hain. Are baap re ye jhanten hain ya jungle? Lagta hai kabhi jhaanten nahin shave kee. Aur ye chootar! Such main ladka hoti to teri gaand zaroor leti.” Neelam Kanchan ki choot ke jungle mein haath pherne lagi. Kanchan ki choot to pahle se hi bahut geeli thi. Neelam ke choot masalne se Kanchan ka bura haal tha. Uski choot ka ras uski jhaanton aur Neelam ke haathon ko geela kar raha tha. Neelam ki choochian chhoti thi. Choot par ek bhi baal nahin tha. Lagta tha shave karti thi. Usne Kanchan ka haath pakar ke apni choot par rakh diya. Zindagi mein pahli baar kisi ladki ki choot ko haath lagaya tha Kanchan ne. Kanchan ko achha lag raha tha. Neelam uski choot aur Kanchan, Neelam ki choot sahala rahe the.

“ Kasam se Kanchan, tere papa sachhe mard hain. Kya phauladi lauda hai. Teri mummy ki pyas to achhi tarah bujha denge. Kitne pyar se teri mummy ko poora maza de kar chodte hain. Aur teri mummy bhi kaam kala mein maahir hai. Kitni pyaar aur adaa se chudwati hai. Such, dono ki bahut achhi jodi hai.” Neelam ne ye kahate hue Kanchan ke honthon ko choom liya. Kanchan ka badan to pahle hi vaasna ki aag mein jal raha tha. Under se papa mummy ke baaton ki awaz aa rahi thi. Papa mummy ki choot aur mummy papa ka lauda sahala rahi thi. Luada sikud chukka tha phir bhi 6 inch se kam nahin tha. Achanak Neelam boli,

“ Sun, sun, teri hi baaten ho rahi hain.” Dono kaan laga ke sunane lage. Mummy kah rahi thi,

“ Kanchan ab jawan ho rahi hai. Do teen saal mein uske liye ladka dhoondna parega.”

“ Jawan ho rahi hai ki jawan ho chuki hai.” Papa bole.

“ Ladkian apni umr se thodi bari lagti hain.”

“ Lekin Kavita, Kanchan ki chhatian dekhi hain tumne ? Aur Chootar ? kitne bhaari ho gaye hain aur phailte jaa rahe hain. Koi kaha sakta hai ki abhi school mein hi parhti hogi?”

“ Aapki baat such hai. Abhi kuchh din pahle hi maine 36 size ki bra laa kar di hai. Panty to khud hi khareed laayi thi. Itni chhoti panty lai hai ki pata nahin kya dhakti hogi. Aadhe baal to baahar hi nikle rahate honge.”

“Kyon uski choot pe bhi tumhari tarah baal hain?” Papa ke munh se apni choot ka zikar sun kar Kanchan sharam se laal ho gayi. Halaaki Sharma ji achhi tarah jaante the ki unki bitiya ki jhanten kitni lumbi hain. Kai baar vo uski panty pe chipke hue baal dekh chuke the. Mummy boli,

“ Vo to mujh se bhi do kadam age hai. Uske baal to nabhi ke thora neeche shuru ho Jaate hain aur uske neeche to poora jungle hai.”

“ Ye sub tumne kaise dekh liya?”

“ Are ye Kanchan hai bhi to bari laaparwah. Ek din nightie mein leti hui novel parh rahi thi. Nightie bilkul oopar charhi hui thi kyonki usne tangen mor rakhi thi. Panty pahani hi nahi thi. Ekdum ghane kaale baalon se poori choot dhaki hui thi.”

“ Aakhir beti to tumhaari hi hai. Lekin acchha hai, jaise hum tumhaari jhaanton mein khoye rahte hain vaise hi uska pati bhi uski jhaanton mein khoya rahega. Kahin tumhari tarah use bhi chudai ka shauk hua to bahut dhyan rakhna parega.”

“Maine use samjha to diya hai ki shaadi se pahle koi garbar na ho.”

“ Sirf samjhaane se kaam nahin chalega. Use bataana parega ki marad aurat se kya chaahta hai aur use kaise chodata hai taaki use pata rahe ki mardon ki kin harkaton se saavdhaan rahna chaahiye.”

“Jee, aapki baat sahi hai.”

“ Haan meri jaan, tumhaari beti bilkul tum par gayi hai. Uske phailte hue chooter dekh kar to kisi ka bhi lund khara ho jaae.”

“ Lagta hai aapko apni bitiya ke chooter bahut pasand aa gaye hain. Kahin aapka lund bhi to nahin khara hone laga hai apni beti ke chooter dekh ke ?” Mummy papa ke balls ko dabaati hui sharaarat se muskuraate hue boli.

“Tum to suchmuch paagal ho gayi ho Kavita. Are ghar mein aankh bund karke to nahin rah sakte na. Aur phir Kanchan to humaari beti hai.”

“Main to mazaak kar rahi thi. Aapki baat sahi hai. Lekin school ki dress bhi to aisi hai. 18 saal ki ladkion ko koi skirt pahnaai jaati hai ? School mein ladke aur master log ladkion ki taangon ke beech jhankne ki taak mein rahte honge. Mardon ko to mauka milna chaahiye ladkion ki taangon ke beech mein jhaankne ka.”

“ Tabhi to kah raha hun, aisi alharh jawaani ka phaayada school mein ladkon se zyada to master log uthate hai. Mujhe to darr hai ki kahin koi mushtanda master ji tumhaari phool si beti ko chod na de. Zara socho bechaari ne abhi tak kisi marad ka lund tak nahin dekha hoga.”

“Jee samjha dungi use. Lekin Viki bhi to bilkul aap par gaya hai. Uska kya hoga?”

“Kya matlab? Haan lumba tagra jawan hai. Vo to ladkon ko hona hi chaahiye.”

“ Nahin mere raja, main to uske lund ki baat kar rahi hun. Appke lund se bhi kahin bara aur mota hai. Bilkul bijli ka khamba lagata hai.” Mummy ne papa ke lund ko sahalate hue kaha.

“ Baap re Kavita ! tumne Viki ka lund kaise dekh liya?”

“ Maa hun naa. Bachhon ke bare mein sub kuchh jaanti hun. Ek din Viki der tak so raha tha. Main use uthane ke liye uske kamre mein gayi. Viki ki lungi kamar tak chari hui thi aur lund janhgon par para hua tha. Sikudi hui halat mein bhi 8 inch lumba to zaroor raha hoga. Main to ghabra ke baahar chali gayi. Phir ek din main kapre sukhane jaa rahi thi. Viki ke kamre ki khirki khuli hui thi. Under jhank ke dekha to Mere hosh ur gaye. Viki shayad koi ganda novel parh raha tha or apne lund ko zor zor se hila raha tha. Lund poori tarah tana hua tha. Kya bhayanak lauda tha. Door se theek se nazar to nahin aaya par kum se kum ek foot lumba to hoga hi. Baap Re! Bijli ka khamba lag raha tha. Itna mota aur lumba lund to kisi picture mein bhi nahin dekha. Aadmi ka to lagta hi nahin tha.”

“ Kavita, kahin bete ka to pasand nahin aa gaya tumhen?”

“ Kuchh to sharm kariye. Jo munh mein aata hai bolte rahate hain. Main uski maa hun.”

“O ho tum to naraaz ho gayi. Dekho Kavita tumhaare bete ne kisi ladki ko chod bhi diya to koi baat nahin lekin tumhaari beti ko kisi ne chod diya to anarth ho jaaega. Use bata do ki her haalat mein use shaadi tak apni choot bachaa ke rakhni hai.”

Papa ke munh se apne badan aur apni chudai ki baaten sun ke Kanchan sharam se pani pani ho rahi thi lekin use ek ajeeb sa mazaa bhi aa raha tha. Apne chhote bhai ke lund ke bare mein sun kar Kanchan to dung rah gayi. Logon ke chote bhadde peshaab karte lund dekh kar mood kharaab ho jata tha. Yehan to mote tagre lund ghar mein hi mauzood the. Neelam bhi papa mummy ki baaten sun kar uttejit thi. Ek ungli halke se Kanchan ki laar tapkati choot mein sarkate hue boli,

“Hai Kanchan apne bhai se to dosti karwa de.”

“Hut paagal, Sudhir ko dhoka degi?”

Papa ka lund phir se tun gaya tha.

“ Are aapka to phir se khara ho gaya. Kya iraada hai.”

“ Jiski biwi ki itni khoobsoorat choot ho uska aur kya irada ho sakta hai?” Ye kahate hue papa ne mummy ko choomna shuru kar diya. Lagta tha chudai ka ek aur daur hone wala tha. Itne mein mummy boli,

“ ek minute rukiye, Zara bathroom ho aaun.” Mummy ne bathroom ka darwaaza khula hi chhor diya. Mummy ki choot se peshab karne ki pssssss ki awaz aa rahi thi. Itne mein Neelam boli,

“Kanchan ek baat kahun bura to nahin maanegi?”

“Nahin bol na.”

“ Is baar tere papa ka lund teri yaad karke khada hua hai.”

“ Tera to dimaag bilkul kharaab ho gaya hai. Mummy ko sikude hue lund se to nahin chod sakte na. Unka lund khara hai mummy ko chodne ke liye.”

“Too phir ek baar shart laga le. Haar jaaegi. Main prove kar dungi ki tere papa teri jawaani pe phida hote jaa rahe hain. Main mardon ko bahut acchhi tarah se jaanti hun.”

“Theek hai. Prove karke dikha.” Kanchan boli.

“Agar main haar gayi to main tujhe ek hazaar rupaye dungi aur agar too haar gayi to too apne bhai se meri dosti karwaegi. Bol manzoor hai ?”

“Manzoor hai.”

Itne mein mummy bathrrom se aa gayi aur boli,

“ Kahiye mere raja ab kis mudra mein lenge ?”

“Hai meri Rani ye hi ada to humen maar dalti hai. Pahle tum humaare oopar khari ho jaao. Zara apni pyaari biwi ki choot to dekh len.”

“Hatiye bhi aap to aise kah rahe hain jaise pahle kabhi dekhi naa ho.” Lekin mummy papa ke badan ke dono taraf taangen karke khari ho gayi. Papa peeth ke bal lete hue mummy ki phaili taangon ke beech jhaanton se dhaki hui choot ko nihaar rahe the. Unka lund buri tarah tana hua tha. Phir bole,

“ Aao humaare oopar baith jaao. Mummy papa ke tane hue lund pe baithne lagi ki papa bole,

“Vahaan nahin meri jaan, thora aage aa jaao.” Mummy thora aur age ho gayi.

“Aur thora aage aa jaao.” Mummy samajh gayi papa unki choot chaatna chaahte hain.

“ chhee ! aap nahin sudhrenge. Main abhi abhi peshaab karke aai hun aur aap vahin munh lagaana chaahte hain. Abhi to meri jhaanten tak gili hain.” Is waqt mummy papa ki chhati ke dono or taangen karke aise baithi hui thi jaise peshaab karne ki mudra mein baithi ho. Is mudra mein mummy ki choot papa ki nazaron ke saamne bikul khuli hui thi. Ghani kaali jhanton ke beech mein se abhi abhi papa ke mote laude se chudne ke kaaran mummy ki choot ka chhed khula hua nazar aa raha tha. Jhaanten choot ke rus aur peshaab se geeli thi. Papa ne mummy ki vishaal chootron ko pakar ke unhen apne munh pe kheench liya. Ab papa ka munh mummy ki choot ke jungle mein kho gaya tha. Dheere dheere mummy ke munh se iss ..aaaaaa…..iiisssss….aiiii…aahhhh ki awaazen aane lagi. Mummy bhi papa ke munh pe apni choot ragrne lagi thi. Papa ka munh mummy ki moti moti jaanghon ke beech mummy ki choot aur jhaanton pe laga peshaab aur unki choot ka ras chaat raha tha. Mummy siskarian bharti hui boli,

क्रमशः.........

 
गतान्क से आगे ......

“हाई राम आप तो सुचमुच बहुत गंदे हैं..इसस्स ..” अच्छी तरह चूत साफ करने के बाद पापा बोले,

“ हाई मेरी जान तुम्हारी चूत रस के सामने तो अमृत भी कुच्छ नहीं. आओ अब तुम्हें कुतिया बना कर चोदेन्गे.” मम्मी बिस्तेर पर कुतिया बन कर लेट गयी. उनकी छाति बिस्तेर पर और चूतर हवा में थे. इस मुद्रा में उनकी मोटी मोटी झंघों के बीच में से बालों भरी चूत सॉफ दिखाई दे रही थी. एक घंटे से चल रही चुदाई के कारण चूत बहुत ही फूली और सूजी हुई लग रही थी. चूत का छेद भी मुँह खोले हुए था. ये पापा के मोटे लॉड का कमाल था.

“ लो राजा मैं तो कुतिया बन गयी लेकिन कुतिया को तो कुत्ता ही चोद्ता है पर अभी तो इस कुतिया के ऊपर सांड चढ़ेगा और अपने घोड़े जैसे लंड से चोदेगा.” पापा मम्मी के चूतरो के पीछे बैठ कर उनके फैले हुए विशाल चूतरो और उनके बीच से झाँकति हुई फूली हुई चूत को निहारने लगे.

“ऐसे क्या देख रहे हैं मेरे राजा ?”

“ सच कविता तुम्हारे जैसे चूतेर तो इस दुनिया में किसी औरत के नहीं हैं. हमे तो इन्होने पागल कर दिया है.”

“सभी औरतों के ऐसे ही तो होते हैं.”

“तुम क्या जानो मेरी जान तुम्हारे चूतेर कितने जान लेवा हैं. सभी औरतों के तो ऐसे नहीं होते, हां अब तुम्हारी बिटिया के ज़रूर ऐसे होते जा रहे हैं.”

“हाई राम ! लगता है आप अपनी बेटी के चूतरो पे फिदा हो गये हैं.”

“अरे नहीं. फिर वही बात कर रही हो. देखो ना तुम्हारे इन चूतरो ने हमारे लॉड का क्या हाल कर रखा है.”

“तो ले लीजिए ना. किसने रोका है. आज हमे भी तो दिखाइए आपको ये कितने अच्छे लगते हैं.” मम्मी अपने विशाल चूतरो को और ज़्यादा उचकाती हुई बोली. अब तो चूतरो के बीच मम्मी की गांद का वो भूरे रंग का छेद भी नज़र आने लगा था. पापा ने मम्मी के विशाल चूतरो को फैला कर उनके बीच अपना मुँह दे दिया और कुत्ते की तरह उनकी चूत चाटने लगे. उनकी नाक मम्मी की गांद के छेद पे टिकी हुई थी. बीच बीच में मम्मी के चूतरो को और ज़्यादा फैला कर उनकी गांद के छेद को भी चाटते. मम्मी के मुँह से अया. ऊवू…..इसस्सस्स. की आवाज़ें आने लगीं. थोरी देर चूत और गांद चाटने के बाद पापा उठे और अपने लंड का सुपरा मम्मी की चूत के खुले हुए मुँह पर रख कर धक्का लगा दिया. चूत बहुत गीली थी और घंटे भर की चुदाई से चौड़ी हो गयी थी इसलिए एक ही धक्के में पूरा 9 इंच का लॉडा मम्मी की चूत में समा गया.

“ आाआईयईईईईईई…….इसस्स्स्स्स्स्सस्स……. ओईईई माआआअ……आआअहह.”

पापा मम्मी की चूचिओ को पकड़ कर अब पूरा लंड अंडर बाहर कर रहे थे. पापा के बारे बारे बॉल्स आगे पीछे होने के कारण पेंडुलम की तरह झूल रहे थे. फ़च फ़च….फ़च….फ़च का संगीत फिर शुरू हो गया था.

“ कविता चुदवाते हुए जितनी आवाज़ तुम करती हो उतनी ही आवाज़ तुम्हारी ये प्यारी चूत भी करती है.”

“ क्या करूँ, सब आपके मूसल का कमाल है. एक दिन तो कंचन ने भी ये आवाज़ें सुन ली थी. मैने उसे बता दिया कि मेरे पेट में दर्द रहता है.”

पापा हस्ते हुए बोले

“ कितनी नादान है हमारी बिटिया. लेकिन तुम्हारी ये चूत जो फ़च फ़च कर रही है इसके बारे में क्या कहा?”

“ हटिए भी, इसकी आवाज़ थोड़ी बाहर जाती है.”

पापा पूरा लंड बाहर निकाल कर जड़ तक पेल रहे थे. मम्मी भी चूतर पीछे की ओर उचका उचका कर चुदवा रही थी. फिर पापा ने पास में पड़ी वॅसलीन की बॉटल खोली, ढेर सारा वॅसलीन अपनी उंगली पे लगाया और मम्मी की गांद के छेद में लगाने लगे.

“आआहह……क्या इरादा है मेरे राजा?” मम्मी गांद उचकाती हुई बोली.“ कविता मेरी जान कयि दिनों से तुम्हारी खूबसूरत गांद नहीं ली. आज मेरा लॉडा तुम्हारी गांद में जाने को उतावला हो रहा है. आज तो अपनी गांद भी देती जाओ.”

“ले लीजिए ना, मैने कब रोका है. आपकी ही चीज़ है. मैं तो आपको इतना तृप्त कर देना चाहती हूँ कि आपको 15 दिन तक मेरी ज़रूरत महसूस ना हो “ अब पापा ने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाल लिया और ढेर सारा वॅसलीन अपने लंड पर भी लगा लिया. नीलम कंचन की चूत में उंगली डालते हुए बोली,

“ देख कंचन, उस दिन वो लड़का तेरी गांद मारने की बात कर रहा था तो तू नाराज़ हो रही थी, अब देख तेरे पापा का मूसल कैसे तेरी मम्मी की गांद में जाता है. अच्छी तरह देख ले क्योंकि तेरा पति भी इसी तरह तेरी गांद मारेगा.” उधेर पापा ने लंड का सुपरा मम्मी की गांद के छेद पर टीका कर दबाव डालना शुरू कर दिया था. धीरे धीरे लंड का मोटा सुपरा मम्मी की गांद के टाइट छेद को फैला के अंडर सरक गया. पापा ने थोड़ा और दबाव डाला और करीब 1 इंच लंड मम्मी की गांद में घुस गया.

“ आआआहह….ऊऊऊघ…..क्या मोटा लंड है आपका.” पापा ने आधा इंच लंड बाहर खींच कर इस बार एक ज़ोर का धक्का मारा. 6 इंच लंड अंडर जा घुसा
 
“आआआआआआआआआआअ……………आआआहह……..मार गाइिईईई…….ऊऊओफ़ धीरे प्प्प्प्प्प्लेआसए…… औइ माआआअ फॅट जाएगी.” पापा ने मम्मी के चूतर पकड़ के पूरा लंड बाहर खींच कर एक बार फिर करारा धक्का लगाया . इस बार लंड जड़ तक मम्मी की गांद में समा गया. अब पापा के बॉल्स मम्मी की चूत पर टीके हुए थे. “ ओईईईईईईईईईईईईईईईई……….ऊऊऊऊऊऊओह……आआ आआआाअघ…उूउउम्म्म्मम, कितने बेरहम हैं ! अपनी प्यारी बीवी की गांद फाड़ देना चाहते हैं? लगता है आपका लॉडा और भी बड़ा हो गया है. इतना दर्द पहले कभी नहीं हुआ.”

“ दर्द हो रहा है तो निकाल लूँ?”

“ नहीं मेरे राजा, ये तो मीठा मीठा दर्द है, बहुत दिनों बाद आपने मेरी गांद चोदि है ना. चोदिए ना, जी भर के चोदिए. फाड़ दीजिए अपनी कविता की गांद.” मम्मी चूतर उचकाते हुए बोली. पापा मम्मी की बातें सुन कर जोश में उनकी कमर पकड़ के ज़बरदस्त धक्के मार मार के पूरा लंड मम्मी की गांद में पेलने लगे. थोरी देर धक्के मारने के बाद बोले,

“ कविता अब मैं तुम्हारे तीनों छेद चोदुन्गा.” ये कह कर पापा ने अपना लंड मम्मी की गांद में से निकाल के उनके मुँह में दे दिया. मम्मी ने अच्छी तरह लंड को चॅटा और चूसा. फिर पापा ने मुँह से लंड निकाल के मम्मी की चूत में पेल दिया. अब वो बारी बारी से मम्मी की चूत , गांद और मुँह में लंड पेलने लगे. चूत के रस में सना हुआ लंड मम्मी की गांद में पेलते और फिर मम्मी गांद से निकाले लंड को चॅट कर सॉफ करती. आधा घंटे ये खेल चलता रहा, फिर अचानक पापा बोले,

“ कविता मेरी जान झरने वाला हूँ, बोलो कहाँ निकालु?”

“ गांद में निकाल दीजिए. केयी दिन हो गये गांद में आपका रस निकले हुए.”

पापा ने मम्मी की गांद में अपना मूसल पेल दिया और कमर पकड़ के भयंकर धक्के लगाने लगे. मम्मी के मुँह से ऊवू….ऊऊहह…. आआआः… ओईइ….की आवाज़ें आने लगीं.15-20 धक्के लगाने के बाद पापा ने ढेर सारा वीर्य मम्मी की गांद में निकाल दिया. जब पापा ने लंड बाहर निकाला तो मम्मी की गांद का छेद बहुत चौड़ा हो गया था और उसमें से वीर्य निकल के उनकी चूत की तरफ बहने लगा. मम्मी ने चाट चाट के पापा का लंड सॉफ किया. आज से पहले कंचन को विश्वास ही नहीं होता था कि आदमी का इतना मोटा लंड औरत की गांद के छ्होटे से छेद में भी जा सकता है, पर आज तो उसने अपनी आँखों से देख लिया. मर्द लोग वाकाई में औरत की गंद भी मारते हैं. पापा ने मम्मी को पूरी रात करीब 6 बार हर मुद्रा में चोदा. सुबह तक मम्मी की चूत बुरी तरह सूज गयी थी और पापा का लंड भी मम्मी की चूत का रस पी कर काफ़ी मोटा लग रहा था. उजाला हो गया था. मम्मी पापा थोड़ी देर के लिए सो गये. नीलम कंचन की गीली चूत में उंगली डालती हुई बोली,

“ कंचन, पसंद आया अपने पापा का लॉडा?”

“चुप, क्या बकवास कर रही है.” कंचन बनावटी गुस्सा करते हुए बोली.

“ हाई राम! क्या मोटा लॉडा है. तुझे पसंद आया कि नहीं ये तो मुझे नहीं पता लेकिन हमें तो बहुत पसंद आया. सच तेरी मम्मी बहुत भाग्यशाली है. कितने प्यार से चोदा है तेरी मम्मी को. कितने दीवाने हैं तेरी मम्मी की गांद के. वैसे तो तेरे इन कातिलाना चूतरो पे भी फिदा हैं तेरे पापा. किसी दिन मौका लगा तो कहीं तेरी गांद भी….. ” नीलम, कंचन के चूतरो पे हाथ फेरते हुए बोली.

“ हट पागल, तेरा तो दिमाग़ खराब हो गया है.”

“कंचन, तू शर्त लगा ले. तेरे पापा को अब तेरी जवानी तंग करने लगी है. मैं इस बात को प्रूव कर सकती हूँ.”

“ तेरी शर्त मंज़ूर है. प्रूव कर के दिखा. जो माँगेगी दूँगी.”

“ठीक है, एक शर्त तो तू हार ही चुकी है. ये भी हार जाएगी. कल तेरी मम्मी माएके जा रही है. हमारे पास 15 दिन का टाइम है. जैसा मैं कहूँ करना, फिर देखना मेरी बात सच है या नहीं.”

कंचन का दिल में पापा के मुँह से अपने बारे में सुन कर और नीलम की बात सुन कर गुदगुदी होने लगी थी. उसने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके पापा अपनी बेटी के जवान होते हुए बदन को ऐसी नज़रों से देखते हैं. मन ही मन सोच रही थी कि शायद नीलम की बात सच हो. लेकिन विश्वास नहीं हो रहा था.

अगले दिन नीलम ने एक प्लान बनाया. वो अपने घर से एक मूवी कॅमरा ले आई. दोनो सहेलियाँ स्कूल से जल्दी घर वापस आ गयी. नीलम , कंचन से बोली,

“तेरे पापा लंच के लिए आते ही होंगे. तू बाहर लॉन में पैर के नीचे उसके तने के साथ पीठ टीका के बैठ जा और अपनी टाँगें मोड़ के सिर अपने घुटनों पे टीका कर सोने का नाटक कर. जब तेरे पापा आएँगे तो उन्हें तेरे चूतरो से ले के पूरी टाँगें नंगी नज़र आएँगी और तेरी पॅंटी के भी खूब अच्छी तरह दर्शन हो जाएँगे. मैं झाड़ी के पीछे से मूवी कॅमरा में उनके पूरे हाव भाव क़ैद कर लूँगी. उसके बाद तू खुद ही देख लेना मेरी बात सही थी या नहीं.”

“ठीक है,जल्दी कर, बस पापा आने ही वाले हैं.” ये कह कर कंचन पेड़ के नीचे टाँगें मोड़ के बैठ गयी. नीलम ने उसकी स्कूल की स्कर्ट इस तरह से अड्जस्ट कर दी कि शर्मा जी को बिना रुकावट के कंचन की पूरी टाँगें नज़र आ जाएँ. उसके बाद नीलम ने कंचन की पॅंटी को भी उसकी चूत पे इस प्रकार अड्जस्ट किया कि पॅंटी के दोनो तरफ से उसकी काली काली झाँटें सॉफ नज़र आ जाएँ और उसकी फूली हुई चूत पॅंटी में और भी ज़्यादा उभरी हुई लगे. फिर उसने हल्के से कंचन की चूत की दोनो फांकों के कटाव में उंगली फेर के उसकी पॅंटी को चूत की दोनो फांकों के बीच में फसा दिया. इतने में शर्मा जी के आने की आवाज़ हुई. नीलम जल्दी से कॅमरा ले कर झाड़ी के पीछे छुप गयी. उधेर शर्मा जी बेटी को ढूड़ने लगे,

“ कंचन ! अरी ओ कंचन ! कहाँ हो? अरे बिटिया चलो खाना खा लें.” शर्मा जी बेटी को ढूँढते हुए लॉन में आ गये. अचानक उनकी नज़र कंचन पे पड़ी और वो एकदम रुक गये. सामने का नज़ारा देख कर उनका दिल धक धक करने लगा. अपनी 18 साल की जवान बेटी की गोरी गोरी मांसल जांघें नंगी देख कर उनका लॉडा हरकत करने लगा. जैसे ही उनकी नज़रें बिटिया की जांघों के बीच में गयी तो उनके होश ही उड़ गये. छ्होटी सी सफेद पॅंटी मुश्किल से बिटिया रानी की चूत को ढकने की कोशिश कर रही थी. लंबी काली काली झाँटें तो दोनो तरफ से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी. ऊफ़ ! क्या फूली हुई चूत थी बिटिया की… जवान बेटी की कुँवारी चूत की फांकों के बीच फसि हुई पॅंटी ने मानो शर्मा जी पे बिजली गिरा दी. उनका लॉडा अंडरवेर फाड़ के बाहर आने की कोशिश कर रहा था. शर्मा जी बेटी की टाँगों के बीच देख के अपने लॉड को पॅंट के ऊपेर से ही सहलाने लगे. शर्मा जी को जी भर के अपनी नंगी टाँगों और पॅंटी के दर्शन कराने के बाद कंचन ऐसे उठी जैसे नींद से उठी हो,

“ अरे पापू, आप! आप कब आए? हमे तो नींद ही आ गयी आपका इंतज़ार करते करते. चलिए खाना खा लेते हैं.” कंचन जल्दी से अपनी स्कर्ट ठीक करती हुई बोली.

“ हाँ बेटी चलो. हम तो कब से तुम्हें ढूंड रहे हैं.”
 
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