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पूनम धीरे से पीछे पलटी तो बंटी मुस्कुराता हुआ बैठा हुआ था और उसे देखते ही किस उछालता हुआ आँख मार दिया। पूनम धीरे से उसके हाथ को हटाई, लेकिन तुरंत पूनम के हाथ हटते ही फिर से बंटी का हाथ पूनम की चिकनी नंगी कमर पर था। बंटी धीरे से पूनम के कान में बोला "चलो न बाहर।" पूनम कुछ नहीं बोली। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इसका क्या करे वो। उसे डर भी लग रहा था कि लोग उसे देख भी रहे होंगे। अब बंटी उसकी पीठ भी सहला रहा था। वो फिर से बोला तो पूनम ना में सर हिला दी।
पूनम समझ रही थी की बंटी बाहर जाने क्यों बोल रहा था। इस रात के अंधेरे में वो उसकी भी जवानी का मज़ा लूटना चाहता था। फिर से पूनम की नज़रों में ज्योति की दुल्हन वाली चुदाई का दृश्य घूम गया। उसे बंटी का लण्ड भी दिख गया और ज्योति की चुत में पड़ने वाले धक्के भी दिख गए। उसे लगा की वो बाहर गयी तो बंटी का लण्ड उसकी चुत में भी उसी तरह धक्के लगा रहा होगा। पूनम का मन ललच गया। उसकी चुत गीली हो गयी। गुड्डू का सिखाया पढ़ाया सब याद आ गया। लेकिन अगले ही पल उसे डर लगने लगा।
उसे लगा की 'कोई देख लेगा, मेरी कोई बहन तो है नहीं पहरेदारी करने के लिए। और मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ की किसी के साथ भी करवा लूँ। तो गुड्डू के साथ क्या करवा रही थी? और विक्की के साथ क्या करवाने वाली है? वो लोग कौन हैं? वो लोग भी तो वही करेंगे। चोदेंगे, मस्ती करेंगे और बस, काम खत्म। ठीक तो बोली है ज्योति, ये भी ओके टेस्टेड माल है। इसका लण्ड भी तो देखी ही। फिर क्या परेशानी है। .... लेकिन फिर गुड्डू? उसके साथ नहीं करवाई और इससे करवा लूँ? अरे तो उसके साथ तो करवाऊँगी ही न। यहाँ से जाते ही गुड्डू से चुदवाऊँगी। दोनों से। तो क्या बंटी से चुदवा लूँ? चुदवा ले यार, फिर कहाँ ऐसी मस्ती होने वाली है।..... नाह... ये ठीक नहीं है।'
पूनम अपनी सोच में मगन थी और बंटी आराम से उसकी नंगी पीठ और बगल को सहला रहा था। उसे लग रहा था कि पूनम रेडी हो गयी है। वो फिर से बोला "चल न बाहर।" पूनम फिर से न में सर हिलायी। उसे लगा की बंटी यहाँ पे उसे परेशान करता रहेगा तो वो कुर्सी से उठने लगी। अचानक से पूनम को लगा की बंटी ने उसकी चोली का हुक और बँधा हुआ डोरी खोल दिया है। पूनम शॉक्ड हो गयी। वो पीछे पलटी तो बंटी हॉल के बाहर जा रहा था। पूनम हड़बड़ा गयी। उसे समझ नहीं आया की क्या करे, किसे बोले इसे बाँधने। सभी शादी में व्यस्त थे और वो उन अंटियों को नहीं बोलना चाहती थी जो उस से 10 सवाल करती और फिर बाद में पता नहीं क्या क्या बातें करती।
पूनम अपने दुपट्टे से खुद को अच्छे से ढँकी और हॉल से बाहर आ गयी। दुपट्टा ट्रांसपेरेंट ही था, लेकिन अभी बहुत कम लोग थे जो जगे हुए थे। हॉल में जो बाथरूम था, उसमे जाने के लिए उसे सबको पार करके जाना पड़ता और सबको उसकी खुली हुई चोली दिख जाती, इसलिए पूनम दूसरे ब्लॉक में बने बाथरूम की तरफ चल पड़ी।
बंटी बाथरूम के पास ही खड़ा था और पूनम को मुस्कुराता हुआ देख रहा था। उसे देखकर पूनम गुस्सा होती हुई बोली "तुम पागल हो क्या? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ऐसा करने की। बोली हूँ न की जो करना है ज्योति दी कि साथ करो, मुझसे दूर ....." पूनम की बात पूरी भी नहीं हुई थी की बंटी आगे बढ़ा और पूनम को गले से लगा लिया।
पूनम अपने दुप्पट्टे से खुद को ढँकी हुई थी तो वो ज्यादा विरोध नहीं कर पाई। जब तक वो दुप्पटे से अपने हाथ को बाहर निकाली तब तक बंटी उसके होठों को चूमता हुआ उसके पीठ को सहला रहा था और खुद से चिपका लिया था। पूनम को उम्मीद नहीं थी की बंटी कुछ ऐसा भी करेगा, लेकिन यहाँ कोई नहीं था जो उन्हें देखता।
पूनम समझ रही थी की बंटी बाहर जाने क्यों बोल रहा था। इस रात के अंधेरे में वो उसकी भी जवानी का मज़ा लूटना चाहता था। फिर से पूनम की नज़रों में ज्योति की दुल्हन वाली चुदाई का दृश्य घूम गया। उसे बंटी का लण्ड भी दिख गया और ज्योति की चुत में पड़ने वाले धक्के भी दिख गए। उसे लगा की वो बाहर गयी तो बंटी का लण्ड उसकी चुत में भी उसी तरह धक्के लगा रहा होगा। पूनम का मन ललच गया। उसकी चुत गीली हो गयी। गुड्डू का सिखाया पढ़ाया सब याद आ गया। लेकिन अगले ही पल उसे डर लगने लगा।
उसे लगा की 'कोई देख लेगा, मेरी कोई बहन तो है नहीं पहरेदारी करने के लिए। और मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ की किसी के साथ भी करवा लूँ। तो गुड्डू के साथ क्या करवा रही थी? और विक्की के साथ क्या करवाने वाली है? वो लोग कौन हैं? वो लोग भी तो वही करेंगे। चोदेंगे, मस्ती करेंगे और बस, काम खत्म। ठीक तो बोली है ज्योति, ये भी ओके टेस्टेड माल है। इसका लण्ड भी तो देखी ही। फिर क्या परेशानी है। .... लेकिन फिर गुड्डू? उसके साथ नहीं करवाई और इससे करवा लूँ? अरे तो उसके साथ तो करवाऊँगी ही न। यहाँ से जाते ही गुड्डू से चुदवाऊँगी। दोनों से। तो क्या बंटी से चुदवा लूँ? चुदवा ले यार, फिर कहाँ ऐसी मस्ती होने वाली है।..... नाह... ये ठीक नहीं है।'
पूनम अपनी सोच में मगन थी और बंटी आराम से उसकी नंगी पीठ और बगल को सहला रहा था। उसे लग रहा था कि पूनम रेडी हो गयी है। वो फिर से बोला "चल न बाहर।" पूनम फिर से न में सर हिलायी। उसे लगा की बंटी यहाँ पे उसे परेशान करता रहेगा तो वो कुर्सी से उठने लगी। अचानक से पूनम को लगा की बंटी ने उसकी चोली का हुक और बँधा हुआ डोरी खोल दिया है। पूनम शॉक्ड हो गयी। वो पीछे पलटी तो बंटी हॉल के बाहर जा रहा था। पूनम हड़बड़ा गयी। उसे समझ नहीं आया की क्या करे, किसे बोले इसे बाँधने। सभी शादी में व्यस्त थे और वो उन अंटियों को नहीं बोलना चाहती थी जो उस से 10 सवाल करती और फिर बाद में पता नहीं क्या क्या बातें करती।
पूनम अपने दुपट्टे से खुद को अच्छे से ढँकी और हॉल से बाहर आ गयी। दुपट्टा ट्रांसपेरेंट ही था, लेकिन अभी बहुत कम लोग थे जो जगे हुए थे। हॉल में जो बाथरूम था, उसमे जाने के लिए उसे सबको पार करके जाना पड़ता और सबको उसकी खुली हुई चोली दिख जाती, इसलिए पूनम दूसरे ब्लॉक में बने बाथरूम की तरफ चल पड़ी।
बंटी बाथरूम के पास ही खड़ा था और पूनम को मुस्कुराता हुआ देख रहा था। उसे देखकर पूनम गुस्सा होती हुई बोली "तुम पागल हो क्या? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ऐसा करने की। बोली हूँ न की जो करना है ज्योति दी कि साथ करो, मुझसे दूर ....." पूनम की बात पूरी भी नहीं हुई थी की बंटी आगे बढ़ा और पूनम को गले से लगा लिया।
पूनम अपने दुप्पट्टे से खुद को ढँकी हुई थी तो वो ज्यादा विरोध नहीं कर पाई। जब तक वो दुप्पटे से अपने हाथ को बाहर निकाली तब तक बंटी उसके होठों को चूमता हुआ उसके पीठ को सहला रहा था और खुद से चिपका लिया था। पूनम को उम्मीद नहीं थी की बंटी कुछ ऐसा भी करेगा, लेकिन यहाँ कोई नहीं था जो उन्हें देखता।