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कमसिन बहन की चुदाई

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Guest
कमसिन बहन की चुदाई

मैं एक नॉर्मल फैमिली का मेंबर हूँ. मेरे माता-पिता एक भाई और मैं ही हूँ. मैं हमेशा एक बहन चाहता था ताकि चुदाई का सामान घर में ही मिल जाए और बाहर मुँह ना मारना पड़े.

मगर अफ़सोस कि मुझे बहन नहीं मिली है वरना आज ये सब लिख ना रहा होता बल्कि इस वक़्त उसे चोद रहा होता. खैर.. कोशिश करने वालों की हार नहीं होती. मुझे मेरी ना सही मेरी कज़िन कामिनी मिल गई. मैं पूरी ज़िंदगी उसे याद रखूंगा क्योंकि मेरी देखी और फील की हुई पहली चुत कामिनी की थी.

वो मेरे चाचा की लड़की है. चाचा को दो बेटियाँ हैं.. बड़ी वाली कुछ काम की नहीं है. वो साली मानती ही नहीं है, मगर कामिनी मुझे बड़ा प्यार करती थी. वो अभी जवानी की दहलीज पर आई है, मगर उसका जिस्म बहुत ही गरम है. वो बेहद खूबसूरत, गोरी चिट्टी, बेहद दिलकश है जिसके जिस्म को मैंने काफ़ी चाहा था. उसके थन अभी उगने शुरू ही हुए थे. पर उसके निप्पल बड़े मस्त हैं.

कामिनी के निपल्लों पर मेरी नजर एक फैमिली फंक्शन में पड़ी. उसकी हाइट 5 फीट से ज़रा ही ऊपर है, उसके बाल औसत लड़कियों के जितने ही हैं. पहली सबसे नशीली चीज उसकी आँखें मेरे दिल में बैठ गई थीं और मैं ये बात भी काफी पहले ही समझ गया था कि अगर मैंने मेरी किसी कज़िन को चोदा तो वो यही होगी. क्योंकि वो जिस नजर से मेरी तरफ देखती है (आज भी देखती है) उससे मैं समझ गया था.

उसका वो होंठों को चबा कर बात करना, नजरें मटकाना. उसके बाद उसकी रसीली गांड हिलाना. हय… देख कर ऐसा लगता कि जैसे 2 लीटर वाले गुब्बारे पानी से भरे हिल रहे हों. उनको छूकर ही लंड झड़ जाए.

कामिनी एक खाते-पीते घर की है. उसकी माँ साली रांड जैसी, बहुत खेलती है और दूसरों का खून पीती है.. खैर अभी उसकी मां को माँ चुदाने दीजिए, हम लोग कामिनी की जवानी से ही खेलते हैं.

तो उस फैमिली फंक्शन में मैंने उसको बड़े करीब से देखा और मन बना लिया था कि इसकी गांड तो मेरी ही होगी. मैं ही उसे चोदूँगा. भले कुछ समय लग जाए लेकिन उसकी जवानी पूरी निखरने के बाद ही गांड मारी जाएगी. लेकिन इसके लिए अभी से तैयारी करनी होगी.

अब मैं हर ऐसे वक़्त और मौके की तलाश में होता था कि कैसे इससे अकेला पाऊं और काम शुरू करूँ.

मेरा घर दिन में खाली ही होता है क्योंकि मम्मी-पापा काम पे जाते हैं. मैंने अपनी कामक्रीड़ा का प्लान बना लिया था. मैं कामिनी के घर गया और उसे खेलते-खेलते बातों में फुसला कर अपने घर ले आया.

अब सब कुछ इतना भी आसान नहीं था. डर था कि साली ने कहीं मुँह खोल दिया तो गांड की वाट लग जाती. मैंने सोचा इसके मुँह में लंड घुसा दूँगा तो चुप रहेगी क्योंकि वैसे भी मैं इसे अभी तो चोदने वाला था भी नहीं, बस फिलहाल ओरल सेक्स ही ठीक लग रहा था.

काफ़ी देर तक उसके साथ खेल खेलने के बाद मैंने धीरे-धीरे उसके जिस्म को टच करना स्टार्ट किया. मजाक करते हुए अपनी उंगलियों से उसके पेट के ऊपरी हिस्सों को छूने लगा. फिर मैंने उसे अपनी बांहों में लिया और उसके गालों पे किस करने लगा. फिर अपनी जीभ को कभी मैं उसके गाल तो कभी उसके गर्दन पे ले आता.

इससे वो शरमाने लगी और बोली- मुझे घर जाने दो..

मैं डर गया.. मैंने सोचा कहीं प्लान फ्लॉप न हो जाए. मैंने उससे चूमना बंद कर दिया, पर अपनी बांहों में थामे रखा और उससे बातें करने लगा, मैंने उससे कहा- तुम बहुत सुंदर और सेक्सी हो.

वो शर्मा गई और बोली- ये सेक्सी क्या होता है?

मुझे कुछ आसार दिखने लगे. मैंने उसे बड़े प्यार से अपनी बांहों में उठाया और अपनी गोद में इस तरह बैठाया कि उसकी नाज़ुक गांड मेरे पैरों पर आ जाए. मैं सब्र से काम लेना चाहता था, सो उसे अभी अपने लंड के स्पर्श से दूर ही रखा. अब उसकी गांड मेरे पैर पर, हाथ मेरे हाथ में और नजर मेरे चेहरे पर थी. मेरे और उसके होंठों में कुछ इंच की दूरी थी.

मैंने उससे कहा- क्या तू जानती है कि बच्चे कैसे पैदा होते हैं?

हर बच्चे की तरह उसे भी बकवास बातें बताई गई थीं. वही सब उसने मुझे बताईं.

मैंने उससे कहा- ये सब झूठ है.

तो बोली- फिर कैसे?

मैंने उससे कहा- मैं तुम्हें बताऊंगा जरूर मगर जैसा मैं कहूँगा, तुम्हें वैसे करना होगा.

वो बोली- क्या?

मैंने उस पर जोर दिया कि पहले ‘हाँ’ बोल. वो ‘हां’ करके मान गई.

मैंने अब उसे धीरे-धीरे अपनी बांहों में उठाना स्टार्ट किया और अपने लंड की तरफ उससे खींचा. फाइनली उसकी सॉफ्ट गांड मेरे लंड पर आ टिकी. मैंने उसे उठा कर बिस्तर पर रखा और रूम में जाकर अपनी अंडरवियर निकाल कर सिर्फ़ पेंट पहन कर आ गया ताकि बिना अंडरवियर के मेरा लंड उसे अपनी गांड पे साफ महसूस हो.

जब मैंने उससे अपनी बांहों में उठाने की कोशिश की, तो बोली कि मैं यहीं बैठूंगी. मैंने सोचा साली नाटक कर रही है, ऐसे तो ये गांड छूने ही नहीं देगी.

मैं फिर खेल-खेल में उससे पकड़ने लगा और जितना हो सका, उसका जिस्म अपने जिस्म से दबाने लगा.

मैंने उसके हाथों को उसके सिर के ऊपर कर दिया और मेरे हाथों से उसे दबा दिया. इसी के साथ मैं मिशनरी पोज़िशन में आ गया.

वो पैर झटक रही थी. मैंने उसकी आँखों में देखा.

वो बोली- राजा, छोड़ो मुझे!

मैंने भी कहा- तुझे चोदना ही चाहता हूँ कामिनी!

बोली- मतलब?

तब मैंने उसके टॉप की ओर देखा और फिर उसकी आँखों में देखते हुए उसे होंठों पर किस किया. मुझे सॉल्टी टेस्ट आया. वो शरम से तड़पने लगी, पर मैंने उसे दबाए रखा था.

मैंने उससे उसका प्रॉमिस याद दिलाया. उससे कहा- बच्चे जिस तरह नंगे होते हैं उसी तरह उन्हें पैदा करने वाले भी नंगे ही होने चाहिए.

फिर सीधा बता दिया कि जब लंड चुत में जाता है.. तो बच्चा पैदा होता है.

उससे लंड चुत कुछ समझ नहीं आया और पूछने लगी कि इसका मतलब क्या हुआ?

मैंने कहा- जानना चाहती हो?

वो ‘हाँ’ बोली.

उसने एक टी-शर्ट पहनी थी और नीचे स्कर्ट थी. मुझे स्कर्ट्स बहुत पसंद हैं.. क्योंकि आसानी से खेल हो जाता था.

मैंने उसे खड़ी किया और उसे नंगी करने लगा. उसकी चड्डी निकालने के बाद तो मानो मेरी साँसें ही रुक गईं. दुनिया की सबसे कीमती, सुंदर चीज पहली बार मेरे सामने थी. उसकी पिंक, सफाचट चिकनी चुत मेरी सामने थी.

मेरा जी तो किया कि अभी इसी वक़्त उसे चोद डालूँ. उसकी चुत पर एक भी झांट का बाल नहीं था. बिल्कुल कुँवारी चुत थी. और जिस बात की खुशी मुझे हुई, वो ये कि वो गीली थी.. मतलब जो भी उसके जिस्म से मैं खेल रहा था, वो खेल उसकी चुत पर असर कर रहा था.

अभी तो मैंने सिर्फ़ उसकी चड्डी निकाली थी, लेकिन वो तो भागने लगी. मैंने फिर उसे अपनी बांहों में जकड़ा और बिस्तर पर पटक दिया. उसकी शक्ल रोने जैसी हो गई थी.

मैंने फिर उसे किस किया. इस बार उसने भी किस का जवाब दिया.

अब मैं उसके सामने खड़ा हो गया. मेरा लंड पेंट में टेंट बनाए हुए था. मैंने उसे मेरा लंड पकड़ने को कहा. वो ‘ना’ कहने लगी और खुद की नंगी चुत छुपाने लगी.

मैंने उससे कहा- तूने प्रॉमिस किया था.

वो मुस्कुराई तो मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रखवा कर घुमवाने लगा. वो शर्म से अपना हाथ पीछे लेने लगी.

मैंने उससे कहा- तू जानती है ये क्या है?

उसने बड़ी मासूमियत से कहा- गोल-गुंडा..

मैंने ये नाम पहली बार सुना था. मैंने उससे कहा- नहीं.. इससे लंड कहते हैं और ये जो तेरे पैर के बीच में है, इसे चुत कहते हैं.

‘अच्छा..!’

मैंने उससे आगे कहा- देखेगी लंड?

वो ‘ना’ कहने लगी मगर उसकी वो आँखें मेरे लंड की ओर ही देखने लगी थीं. मैं समझ गया और मैंने अपने लंड को आजाद कर दिया. उसने एक झलक देख कर अपनी आँखें बंद कर लीं.

अब उसके दोनों हाथ उसके चेहरे पर थे. उसका स्कर्ट घुटनों तक आ गया था. मैंने एक ही झटके में उसका स्कर्ट निकाल दिया. अब वो नीचे से नंगी हो गई थी.

आह.. क्या नजारा था.. उफ़फ्फ़.. मेरे लंड से तो प्रीकम निकल गया. फिर वो खड़ी हो गई और उसने अपनी टांगों को दबा कर बिस्तर पे खड़ी हो गई. मैंने उसे फिर से पकड़ा और अपने पास को लाया.

वो विरोध करने लगी. काफ़ी सब्र करने के बाद मेरी हवस जवाब दे गई. मैंने उसे खींच कर बिस्तर पर पटक दिया तो वो थोड़ा घबराई सी रोने लगी.

मैंने कहा- नंगी हो पूरी..

कामिनी- मुझे घर जाना हैं.

मैं- जरूर जाना.. मगर पहले नंगी हो. साली नखरे कर रही.. आज तो तेरी चुत चूस के ही रहूँगा.

कामिनी- मतलब?

मैं- तुझे जैसा कहता हूँ वैसा कर.. तुझे बहुत मजा आएगा.

कामिनी- क्या करूँ?

मैं- नंगी हो.. पूरी तरह से.

कामिनी- क्यों?

मैं- मैं तुझे नंगी देखना चाहता हूँ.

वो धीरे-धीरे अपनी टी-शर्ट निकालने लगी. मैंने उसकी टी-शर्ट जल्द से निकल के फेंक दी. वो शर्म से छुपने लगी. मैं भी पूरा नंगा हो गया. उसकी आँखें बंद ही थीं. मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और अपने लंड पे रख दिया. तो उसने हाथ हटा लिया.

मैं- अगर तू जैसा मैं कहता हूँ वैसा नहीं करेगी तो मैं तुझसे कभी बात नहीं करूँगा.

वो सहम गई.

कामिनी- मुझे शर्म आती है.

मैं- शर्म क्यों? मैं तेरा भाई हूँ. पहले तू आँखें खोल ना.

कामिनी- नहीं.

मैं- प्लीज़..

उसने आँखें खोलीं और मेरे जिस्म पे नजर डाल कर सीधा लंड को देखने लगी.

मैंने कहा- देख इसे.. टच कर.

कामिनी- ना..

मैं- जितना कहता हूँ उतना कर ना.

वो मान नहीं रही थी. मैंने काफ़ी समझाया उसे लेकिन मानी ही नहीं. मैंने उसके सामने एक बार मुठ भी मारी.

पहली बार किसी लड़की के सामने मैंने मुठ मारी और माल भी गिराया. वो मेरे लंड को देखने लगी.
 
करीब दस मिनट से मैं उसके सामने नंगा खड़ा था तो उसे भी अब शर्म नहीं आ रही थी. फिर भी वो अपनी चुत छुपा रही थी. मैं झड़ गया तो थोड़ा शांत हुआ.

हम फिर बिस्तर पर बैठ गए. इस बार इसने अपनी टांगें खोल ली थीं.. और नंगी होने की वजह से उसकी खूबसूरत चुत मेरे आँखों के सामने थी. मैंने उससे बात करनी शुरू की. मेरी बातों में गंदी बातें सेक्स की और चुदाई की ज्यादा थीं.

मैं- एक बात बता.

कामिनी- क्या?

मैं- तू सुसू कैसे करती है?

कामिनी- बैठ के.. जैसे सब लड़कियां करती हैं.

मैं- मगर.. लड़कियों के पास लंड कहाँ होता है.

कामिनी- तो हम यहाँ से करते हैं ना!

उसने अपनी राइट हैंड की उंगली अपनी चुत पर रखी और बताने लगी.

मैं- मगर वो यहाँ पर कहाँ से निकलता है?

अभी तक वो भूल गई थी कि हम दोनों पूरी तरह नंगे हैं. उसने अपनी दोनों टांगें पूरी तरह खोल दी थीं और उसकी चुत के होंठ मेरे सामने थे. दुनिया में सबसे सुंदर चीज मेरे सामने थी. उसकी वर्जिन टाइट चुत.. जिस पर एक भी झांट नहीं थी और वो थोड़ी चमक भी रही थी. मतलब उसकी चुत भीग रही थी. उसे सेक्स चढ़ रहा था. कसम से अगर वो पूरी जवान होती तो मैं उसकी इतनी चुदाई करता कि उसकी चुत लाल हो जाती. उसके निपल्स चूस-चूस कर उनको लाल कर देता. तभी मुझे याद आया कि मैं निप्पल तो चूस ही सकता हूँ.

मैं- कामिनी, लेट जा बिस्तर पर.

कामिनी- क्यों?

मैं- बस लेट जा.

वो अपनी जगह से उठी और पीछे चली गई. मैंने उसका हाथ पकड़ा और जबरदस्ती उसे बिस्तर पर लेटा दिया. वो हंसने लगी. मैंने उसकी जाँघों को पकड़ा.. और उन्हें फैला दिया और उसकी चुत को नजरों से पीने लगा. मैं धीरे-धीरे उसके नंगे जिस्म पे चढ़ता गया और फाइनली उसके होंठों पर मैंने अपने होंठ रखे. उस पोजीशन में मैं उसके जिस्म पे पूरी तरह चढ़ गया था. हम दोनों के नंगे जिस्म एक-दूसरे से भिड़ रहे थे.

वो मेरी आँखों में देख रही थी. उसकी वो नशीली आँखें.. आह.. उन आँखों को देख कर मेरा लंड दोबारा खड़ा हो गया.

ऐसा कभी भी नहीं हुआ था कि मैंने मुठ मारी हो और 5 मिनट बाद फिर खड़ा हुआ हो. ये उसके जिस्म का जादू ही था कि मेरा लंड पत्थर सा हो गया.

मैंने उसको किस करना स्टार्ट किया. वो नहीं जानती थी कि किस कैसे करते हैं मगर वो मेरी कॉपी करने लगी. उसने मेरे होंठों को चूसना स्टार्ट किया.

मैं- कैसा लग रहा है?

कामिनी- उम्म्म..

मैं समझ गया कि ये लड़की चुदने को रेडी हो गई. मैंने धीरे-धीरे उसके होंठों से नीचे आकर उसकी गर्दन को किस किया और उससे पूछा- मैं नीचे जाऊं?

कामिनी- हाँ.

मैंने उसके राइट निप्पल को टच किया. उसके छोटे से लाइट ब्राउन निप्पल बिल्कुल सख़्त थे. मैंने उसका निप्पल चूसना शुरू किया और राइट हैंड से उसके लेफ्ट निप्पल को मसलने लगा.

मैं बारी-बारी से उसके निप्पल चूस रहा था. अब वो ‘आआअह आआअह.. उम्मह..’ करने लगी थी.

मैं- क्या हुआ? और चूसूं तेरे निप्पल.. कैसा लग रहा है?

कामिनी- अच्छा लग रहा है.. और चूसो.

मैं- इसी तरह मैं तेरी चुत भी चूसने वाला हूँ.. चलेगा ना?

कामिनी- हाँ..

मैंने सोचा कि मौका अच्छा है.

मैं- अपने हाथ से मेरा लंड पकड़.

जैसे कहने भर की देर थी.. उसने तुरंत अपने नाज़ुक हाथों से लंड को पकड़ लिया.

मैं- महसूस कर इसे..

कामिनी- राजा बाद में करूँगी.. आह.. अभी मुझे कुछ हो रहा हैं.. मेरा सुसू निकल रहा है.. आआअह..

मैंने तुरंत उससे उठाया और बाथरूम में ले गया. उससे कमोड पर बैठा कर मैं भी उस पे बैठ गया. अब इस पोज़िशन में वो मेरे सामने थी और मेरा लंड और उसकी चुत ऑलमोस्ट टच कर रहे थे.

मैंने उससे कहा- कर सुसू..

कामिनी- तुम गंदे हो जाओगे..

मैं- तू बस मूत.. मैं भी तेरी चुत पे मूतूंगा.

कामिनी- नहीं..

मैं- मजा आएगा.. मैं देखना चाहता हूँ कि तू कैसे पेशाब करती है.

कामिनी- ठीक है.

मेरी बहन ने मूतना स्टार्ट किया और सेम टाइम पर मैंने भी स्टार्ट कर दिया. मेरा मूत उसकी चुत पे गिरने लगा और उसने ‘अया..’ की. हम दोनों एक-दूसरे पे मूतने लगे और उसे मजा आने लगा. मैंने उसकी चुत पूरी गीली कर दी. जब पेशाब करना खत्म हो गया तो हम साफ़ करने गए.

मैंने कहा- चल एक-दूसरे को साफ करते हैं.

अब उसे कोई चिंता नहीं थी. जैसा मैं कहने लगा वैसा वो करने लगी. मैंने हैंडशावर लिया और पर पानी डालने लगा. वो खड़ी थी, गरम मूत पर ठंडा पानी.. उसकी चुत भीग गई थी.

मैं- साफ कर ना.

कामिनी- क्या?

मैं- तेरी चुत.

कामिनी- साफ कैसे करूँ?

मैं- मैं कर दूँ?

कामिनी- हाँ.

मैंने अपना हाथ उसकी चुत पे ले गया और पहली बार किसी चुत को फील किया. बिल्कुल भीगी थी और गरम भी. मैंने धीरे-धीरे हाथ फेर कर उसकी कमसिन चुत को साफ करता गया. मौका अच्छा देख कर मैंने उससे कहा- तू भी मेरे लंड को हाथ में ले ना.

उसने तुरंत हाथ में लंड ले लिया.

मैं- अब हिला इसे.

वो लंड को शेक करने लगी.

मैं- ऐसे नहीं.

मैंने उसका हाथ पकड़ा और लंड को ऊपर-नीचे करवाने लगा.

कामिनी- ऐसे?

मैं- हाँ ऐसे..

अब वो मेरे लंड को हिला रही थी और मैं उसकी चुत को साफ कर रहा था. हम दोनों चरम पे पहुँच गए.. मैंने अचानक उसका रिएक्शन देखने के लिए अपना हाथ रोक दिया और खड़ा हो गया.

कामिनी- क्या हुआ.. रुक क्यों गए? करो ना.

मैं- क्या करूँ?

कामिनी- वो ही जो कर रहे थे.

मैं- बता तो.. क्या कर रहा था?

कामिनी- मुझे शर्म आती है.

मैं- बोल.. बोल ना.

कामिनी- मेरी चुत को साफ करो ना.

मैं- ठीक है, अगर तू चाहती है कि मैं वो करूँ तो तुझे भी मेरे लंड से कुछ करना होगा!

कामिनी- हिला तो रही हूँ.. अब क्या करूँ?

मैं- इसे चूस..

कामिनी- नहीं..

मैं- ठीक हैं.. मैं भी नहीं करता.

मैं उसके दिमाग़ से खेल रहा था. अगर ये आज लंड चूसती है, तो ज़िंदगी भर लंड चूसने से मना नहीं करेगी.

कामिनी- मैं तुम्हारा लंड क्यों चूसूं? तुमने तो मेरी चुत नहीं चूसी?

मैं- तू बोली ही नहीं.. मैं तो तुझे चोदने तक को रेडी हूँ.

कामिनी- चोदने को? मतलब?

मैं- बताऊंगा.. पहले लंड चूस.

कामिनी- और मेरी चुत का क्या?

मैं- एक काम करते हैं.. तू मेरा लंड चूस मैं तेरी चुत चूसता हूँ. एक साथ करेंगे.

कामिनी- वो कैसे?

मैं- आ जा बिस्तर पे चल.. बताता हूँ.

हम बिस्तर पे आ गए.

मैं- मैं बिस्तर पे लेटता हूँ और तू मेरे ऊपर लंड की तरफ मुँह करके लेट जा.

वो मेरे ऊपर चढ़ गई और उल्टी लेट गई. इसी दौरान जब वो चढ़ रही थी तो उसकी चुत मेरे लंड के ऊपर आ गई. और वो चीख पड़ी.

मैं- क्या हुआ?

कामिनी- तुम्हारा लंड ने मुझे काटा!

मैं- काटा नहीं.. किस किया.. और जब ये अन्दर जाता हैं ना.. तो उसे चोदना कहते हैं.. वो भी सीखेगी क्या?

कामिनी- नहीं.. दर्द होगा.

मैं- मजा भी उतना ही आता है.

कामिनी- अब क्या करूँ?

मैं- तू उल्टी तरह से चढ़ी है. अपनी गांड मेरे मुँह के पास रख और अपने मुँह को मेरे लंड पर रख कर लेट.

उसने पोजीशन चेंज कर ली और हम 69 में आ गए. अब उसकी गांड मेरे सामने थी.

मैंने उससे कहा- अब तू लंड चूस.

मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था. उसकी चुत मेरे आँखों के सामने थी, मगर उसके पैर आपस में बंधे हुए थे. मैंने उसकी जाँघों को किस किया और उसकी गांड पे हाथ रखा. उसकी गांड बिल्कुल सॉफ्ट थी.

मैं- तेरी गांड बहुत ही सुंदर है कामिनी.

मैंने उसकी गांड को मसलना स्टार्ट किया.. उसकी दूध जैसी गोरी गांड पे मेरे उंगलियों के निशान बन गए. मैंने उसकी गांड को उस तरह मसला जैसे रोटी बनाते वक़्त आटा मसलते हैं. वो दर्द से कराह रही थी, पर उससे मजा भी आ रहा था.

मैं रुक गया.. अब मेरी नजर उसकी तरफ गई. वो सिर्फ़ लेटी थी और मेरे लंड को देख रही थी.

मैं- क्या कर रही है? मैंने तुझसे लंड चूसने को कहा.

कामिनी- मुझे शरम आती है भाई.. मैं नहीं चूसूंगी.

मैंने अपने राइट हैंड से उसकी गांड पे जोर से एक चपत मारी तो उसकी गांड सुर्ख लाल हो गई.

कामिनी- आआहह.. राजाया.. मार क्यों रहे हो.. दर्द होता है.

मैं- साली रंडी बहन .. मैं तबसे तेरे गांड चाट रहा और तू मेरा लंड नहीं चूसेगी.. तब से गांड मेरे सामने खोल के लेटी है तो शर्म नहीं आ रही और अब शर्म आती.

कामिनी- राजा मारो मत.. प्लीज़..अया.. दुख रहा..

मैं- तो जैसा कहता वैसा कर ना!

वो छटपटाने लगी.. मैंने उससे पकड़ लिया. उसकी गांड को अपने हाथों से दबाए रखा, जिससे वो उठ ना पाए.

मैं- मुँह खोल.. आज तो तू चूसेगी मेरा लंड..

कामिनी- नहीं राजा जाने दो.

मैं- तू ऐसे नहीं मानेगी.

मैं- अगर तूने मेरा लंड नहीं चूसा तो ये उंगली तेरी गांड में डालूँगा.
 
वो तड़पने लगी.. मैंने अपनी उंगली उसकी गांड में डाली बिल्कुल टाइट गांड थी.. बड़ी मुश्किल से मेरी उंगली एक सेंटीमीटर अन्दर गई होगी.

कामिनी- आअहह.. नहींईई.. आआहाआह.. भाई.. दर्द हो रहा है.

मैं- और घुसाऊं?

कामिनी- नहीं.. रुक जाओ.. आआहा.. आहा..

ऐसा करते वक़्त अचानक मुझे मेरी गर्दन पर कुछ गीला-गीला सा महसूस हुआ. मैंने हाथ लगा कर देखा तो चिपचिपा सा महसूस हुआ. मैं समझ गया.. उसकी चुत पूरी तरह भीग गई थी और ड्रिप कर रही थी.

मेरी बहन की चुत से उसका जूस टपक रहा था. मैंने उस रस को चूस लिया. अब वो मछली सी तड़प रही थी. मेरी उंगली अब भी उसकी गांड में ही थी.

कामिनी- राजा.. आह.. बाहर निकालो उसको.. प्लीज़.. आआहह.. उम्म्म..

मैं- एक ही शर्त पे.. लंड को चूस.. अभी..

कामिनी- ठीक है.. चूसती हूँ.

उसने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ा, उसके गोरे हाथ मेरे ब्लैक लंड पर सेक्सी लग रहे थे. मैंने उंगली को थोड़ा उसकी गांड में हिलाया. अब वो समझ गई और धीरे-धीरे लंड हिलाने लगी.

मैं- मैंने तुझे चूसने को कहा..

कामिनी- मुझे नहीं आता चूसना.!

मैं- तूने कभी लॉलीपॉप खाई है?

कामिनी- हाँ..

मैं- तो उसे जैसा चूसती, वैसा चूस..

कामिनी- वो खाने के लिए उसे पूरा मुँह में डालना पड़ता है.

मैं- वही करना है तुझे, ऐसा चूस जैसे लॉलीपॉप हो.

उसने मेरे लंड को देखा.. लंबा.. ब्लैक और मेरा लंड चमक रहा था.. उसने आगे बढ़ कर अपनी जीभ निकाली और लंड को चाटना स्टार्ट किया. कुछ पल उसने मुँह बनाया और फिर लंड को जीभ से चाटना शुरू किया तो काफी देर तक तक चाटती रही. उसकी जीभ मेरे लंड पर बराबर चल रही थी और मेरी उंगली उसकी गांड में काम में लगी थी.

मैं- मुँह में ले..

कामिनी- नहीं.. उम्म्म्मह..

अब मेरा सब्र टूट गया. मैंने अपनी उंगली पूरी उसकी गांड में घुसा दी..

कामिनी- आआहाहह.. नहींईई.. राजाअ.. आआआ.. निकाल लो उसको..

मैं- साली जब से लंड को चूसने को कह रहा था तो नाटक कर रही है.

वो मेरे जिस्म से अलग होने के लिए तड़फ रही थी. मैंने उसको दबाया था तो उठ नहीं पा रही थी. वो जितना हिल रही थी मेरी उंगली उतनी ही उसकी गांड में जा रही थी.

कामिनी- एयेए.. राजाअ.. प्लीज़.. निकालो उसको.. आअहम्महाहहाः..

मैं- शांत हो जा.. तू जितना हिलेगी, उतनी ही ये अन्दर घुसेगी. शांत हो जा.

कामिनी- आअहह.. नहींईई.. ठीक है..

वो शांत होने लगी..

मैं- मुँह खोल.. और जैसा कहता हूँ वैसा कर.

उसने अपना मुँह खोला.

मैं- लंड को पकड़ और अपने होंठों से किस कर.

उसके वो सॉफ्ट लाल होंठ मेरे लंड पे टिके और मेरा प्रीकम निकल गया.

कामिनी- ये क्या है?

मैं- दूध है.. चूस उसे..

और याद दिलाने के लिए मैंने अपनी उंगली उसके गांड में थोड़ी सी मूव की. उसने अपनी जीभ मेरे लंड पे रखी और चाटने लगी.

मैं- आईसीई.. अया.. अब मुँह खोल और इससे अन्दर ले. चूस लंड को जैसे लॉलीपॉप चूसती है.. अपने टीथ दूर रखना.. अगर मेरे लंड को तेरे दांत ने छुआ भी तो और एक उंगली तेरी गांड में डालूँगा.. समझी!

कामिनी- आहह.. उहम्म्म्म..

मैंने उसके गांड पे थप्पड़ मारा- समझी??

कामिनी- आआअहह.. हाँ समझी राजा.. मारो मत प्लीज़.. मैं बहन हूँ तुम्हारी..

मैं- जानता हूँ.. और इसी वजह से मैं तुझे हमेशा प्यार करूँगा अगर तू मेरा कहा मानेगी तो.. मानेगी ना?

कामिनी- हाँ राजा मानूंगी.. तुम जो कहोगे मानूँगी.

मैंने उसकी गांड में से उंगली निकाल ली.. वो मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसकी गांड मसलने लगा.

मैं- कामिनी, इस लंड को तू हमेशा प्यार करना.. क्योंकि ये तेरे भाई का है.. तू इससे प्यार कर और मैं तुझे प्यार करूँगा.

कामिनी- हाँ राजा.. मैं इसे हमेशा चूसूंगी.

मैं- कैसा लग रहा है लंड?

कामिनी- बड़ा है बहुत..

मैं- इसकी आदत डाल ले कामिनी.. अब ये लंड कभी ना कभी तेरे गांड और चुत में जाएगा और तू इससे बहुत प्यार करेगी.

कामिनी- नहीं राजा..

मैं- मैंने कहा ना तू सिर्फ़ मेरा कहा मानेगी.

कामिनी- राजा.. वहां उंगली से ही दुख़ता है.

मैं- कहाँ?

कामिनी- गांड में.

मैं- जैसा मैं कहता हूँ वैसा करेगी तो तुझे दर्द नहीं दूँगा.. तू खूद मेरा लंड माँगने लगेगी.. ठीक है!

कामिनी- ओके राजा..

और अब वो लंड छूने लगी.

मैं- अब मुझे अपनी चुत दिखा जरा..

उसने अपने पैरों फैला दिए.

मैं- तेरी चुत बहुत सुंदर है कामिनी! अब मैं इसे चूसूं?

कामिनी- हाँ राजा..

मैंने अपने हाथों से उसके पैरों को और फैलाया और अपनी जीभ निकाल कर उसकी चुत के होंठों को धीरे-धीरे किस करने लगा. जीभ को मैं धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगा और अपने हाथों से उसकी गांड मसलने लगा. अब उसका गीला गरम मुँह मेरे लंड को चूस रहा था.

मैं- अया.. ऐसे ही.. अपनी जीभ से खेल उससे.. चूस.. मुँह में ले.. अन्दर.. आह..

कामिनी- उंह.ह..

मैं उसके चुत के होंठों को किस करने लगा. किस करते हुए मैंने उसकी चुत के होंठों स्प्रेड किया और अपनी जीभ को धीरे-धीरे घुमाने लगा.

मैं- कैसा लग रहा है?

कामिनी- आहह.. बहुत अच्छा.. आअहमम्म्म.. उमुमूंम्म्म..

वो अब धीरे से अपनी गांड ऊपर-नीचे करने लगी. मैं उसकी चुत को चूसने लगा. उसकी चुत से बहुत ज़्यादा जूस बह रहा था. टेस्ट में सॉल्टी और मस्की स्मेल आ रही थी.. थोड़ी-थोड़ी फिश जैसी. मगर मेरे दिमाग़ पे हवस चढ़ी थी और अब उसके भी.

हम दोनों भाई-बहन एक-दूसरे को चूसने लगे. रूम में आह.. उऊहह.. की आवाजें आने लगीं.. और अचानक कामिनी चीख पड़ी- आआहह.. राजाअ..छोड़ो मुझे.. सूसू आ रही..छोड़ो..

मैं- ये मूत नहीं है.. तू झड़ रही है.

कामिनी- जाने दो मुझेए प्लीज़. आआहहह.. आआहा आहा तेजी से आ रहा है.. अह..

वो अपनी गांड को जोर-जोर से हिलाने लगी और मेरा लंड और जोर से चूसने लगी. मुझे अपने बॉल्स में प्रेशर महसूस हुआ.. मैं समझ गया कि हम दोनों झड़ रहे हैं. मैंने उसे बिस्तर पर से उठाया और बाथरूम में ले गया. मैंने सोचा कि अति उत्तेजना में कहीं इसने सच में मूत दिया तो गड़बड़ हो जाएगी.

अब हम दोनों बाथरूम में थे.. वो मेरे सामने थी. अब जैसा कि उसकी हाइट मुझसे कम थी तो मेरा लंड उसके निप्पल तक आ रहा था. मैंने उससे फिर लंड चूसने को कहा- लंड चूस..

कामिनी- हाँ.. पर मेरी चुत का क्या??

मैं खुश हो गया.. मेरी मेहनत रंग ले आई थी.. अब तो ये मस्त हो गई थी- हाँ चुत को भी खुश करता हूँ.. और मैं सारी ज़िंदगी तुझे चोदूँगा अब.. चुदेगी ना मुझसे?

कामिनी- हाँ राजा.. तुम जो कहोगे मैं करूँगी.

मैं- तो बोल कि मेरी चुत चाटो.

कामिनी- मेरी चुत चाटो राजा प्लीज़..

मैं उसे बांहों से उठाया और खुद दीवार से सट गया. मैंने उसे खड़े-खड़े ही 69 में कर दिया. वो फूल सी हल्की थी. अब वो बहुत ही अच्छे से मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसकी चुत चाट रहा था. ज़्यादा से ज़्यादा हम 3-4 मिनट तक कंट्रोल कर पाए.. और फिर मेरे लंड ने उसके मुँह में पिचकारी छोड़ दी. मैं जानता था कि वो मुँह निकाल लेगी, तो मैंने पहले ही उसका मुँह अपने लंड पर दबाकर रखा था. मैंने पूरा माल उसके मुँह में छोड़ दिया और उसकी चुत से जूस पीता रहा. वो जोर-जोर से आहआहा.. करती रही. मगर मैं उसकी चुत को चूसता ही रहा. वो भी मुझे चूसती रही. उस वजह से मेरा पेशाब छूट गया और उसकी चुत ने भी मूत दिया.

कुछ वक़्त पहले उसने मेरा कम पिया था तो उसे लगा कि यह भी वो ही है, तो उसने खुद ही मुँह नहीं हटाया मेरा और ना मैंने मुँह हटाया. हम दोनों का मूत निकल गया. उसकी चुत ने मेरे मुँह पर पेशाब कर दी. मुझसे जितना हुआ मैंने पिया और बाकी बहने दिया.. मगर आश्चर्य था कि उसने मेरा पूरा मूत मुँह में ले लिया और जब तक मैंने जबरदस्ती नहीं किया.. लंड मुँह में ही लिए रही.
 
मैं- अरे इतना प्यारा लगा मेरा लंड.. निकाल अब..

कामिनी- अया.. हाँ.. तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है.

मैं- अगर पसंद आ गया तो इसका हमेशा ख्याल रखेगी ना.. जहाँ मैं इसे डालूँ.. ले लेगी?

कामिनी- हाँ राजा.. मैं हमेशा ख्याल करूँगी.. और तुम भी मेरी चुत चूसना.. मुझे बहुत अच्छा लगा राजा.

मैं- सिर्फ़ मैं चूसूंगा ही नहीं.. चुत को चोदूँगा भी.. मगर फिर कभी.. जब तुझे खूब मजा आने लगेगा.

कामिनी ने मेरी गोटियों को हाथ में लिया और कहा- इन्हें क्या कहते हैं?

मैं- इन्हें बाल्स या आँड कहते हैं.. खेल उनसे मगर धीरे से..

वो मेरे बाल्स से खेलने लगी.

कामिनी- सॉफ्ट बहुत हैं.

मैं- हम्म.. अब ये तेरे हैं.. जब चाहे तू मेरे लंड से खेल सकती है.. मगर ये सिर्फ़ हमारा सीक्रेट होना चाहिए. किसी को मत बताना.. अपनी रंडी माँ को भी नहीं.

मैं- मैं थक गया हूँ.. चल नहा लेते हैं.

फिर हम दोनों ने बाथ लिया, उस दौरान फिर एक बार ओरल सेक्स किया. कामिनी अब बहुत ज़्यादा एग्ज़ाइट होने लगी.. जैसा कहता वैसा बेहिचक करती थी. फिर हम नंगे ही टीवी देखने लगे. उस दिन वो मेरे साथ सिर्फ़ 3 घंटे रही थी मगर उस दौरान 4 बार हम दोनों ने ओरल सेक्स किया. मुझे याद है वो नीचे बैठ जाती थी और मेरे लंड को लॉलीपॉप जैसा चूसने लगती थी.

लास्ट टाइम सेक्स के बाद मैं बिस्तर पर लेटा था और वो मेरे ऊपर थी. मैंने उसे सीधा किया और उसे किस करने लगा. हम दोनों एक गर्म चुम्बन करने लगे. मैं उसकी गांड मसलने लगा, कभी उसके निप्पलों को मसलता. उसकी नारंगियों को पूरे जोर से दबाता तो वो तड़प उठती. हम बेतहाशा एक-दूसरे को चूमने लगे.

मैं- कामिनी!

कामिनी- हम्म?

मैं- आई लव यू.

कामिनी- आई लव यू टू राजा.

वो कहने को छोटी थी मगर उसका जिस्म बहुत ही कमाल का था. थोड़ी मोटी होने के कारण उसका जिस्म बिल्कुल सॉफ्ट था. मैंने उसके जिस्म के हर अंग को चाटा.. उसकी गांड, उसके निप्पल, जाँघों को, चुत को.. आख़िर में तो उसकी चुत बिल्कुल चुदने को तैयार हो गई थी और मेरा लंड शेर हो गया था.

मैं- कामिनी, एक प्रॉमिस करेगी?

कामिनी- क्या?

मैं- तू ज़िंदगी भर मेरी रांड बन के रहेगी?

कामिनी- मतलब?

मैं- मतलब, मैं जब चाहूँ तुझे चोद सकूं, चुत चूस सकूं.. मैं जो कहूँ तू मानेगी हमेशा?

कामिनी- हाँ राजा.. मैं बन जाऊंगी तुम्हारी रांड.. हर काम करूँगी.

मैं- प्रॉमिस..! क्योंकि अगर तूने नाटक किया तो अगली बार तेरी गांड में पूरा हाथ डाल दूँगा.

कामिनी- नहीं राजा.. ऐसा मत करना. मैं तुम्हारा कहा मानूँगी.. प्रॉमिस.

मैं- और ये बात कभी तेरी रांड माँ को मत बताना न ही अपनी बहन कल्याणी को.

कामिनी- मम्मी को क्यों रांड कह रहे हो.. क्या मम्मी भी आपका लंड चूसती हैं?

मैं- हाँ वे लंड चूसती हैं, मगर मेरा नहीं.. दूसरों का.. वो सब जाने दे.. बस तू बताना मत.

कामिनी- हाँ राजा.. तुम जो कहो.

मैं- और तू कभी किसी और का लंड नहीं चूसेगी.. सिर्फ़ मेरा..

कामिनी- ठीक है भाई.. अब मैं थक गई हूँ… गोदी?

मैं- आजा…

मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया और हम नंगे ही लेट गए. उसने अपनी टांगें मेरी कमर से लपेट लीं. उसकी सॉफ्ट गांड मेरे लंड को टच करने लगी तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. उसे भी महसूस हुआ. वो मेरी आँखों में देखने लगी. मैंने उससे किस किया और बांहों में लपेट लिया. फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और उसे घर छोड़ने गया.

मैं घर आ गया और फिर एक बार मुठ मारी और सो गया. मैं बहुत खुश था. मुझे एक सेक्स डॉल मिल गई थी और मैं जानता था कि वो एक दिन सेक्स क्वीन बनेगी और वो मेरी होगी.

अगले दिन जब वो स्कूल से घर आई तो मैं पहले से उसका इंतजार कर रहा था. मुझे देख और उसकी आँखें चमक गईं. मगर उससे याद था हमारा सीक्रेट, तो कुछ नहीं बोली.

मैं फिर से उस घर ले जाने की कोशिश करने लगा. मगर उसकी माँ बीच में आ गई, बोली- उसने अभी खाना नहीं खाया.. चेंज तो कर लेने दे पहले.. वगैरह वगैरह..

मुझे बहुत गुस्सा आया.. मगर मैं जानता था कि जब तक ये रांड नहीं मानेगी, मैं मेरी डॉल को नहीं ले जा पाऊंगा.

मैं- चाची, तुम इसके खाने पीने का क्यों इतना सोचती हो? ये तो वैसे ही मोटी है..

कामिनी- चुप करो राजा..

मैं- घर पे खाना है चाची.. और मैंने भी नहीं खाया अभी तक.

चाची- तो यहीं खा लो..

मैं- हम दोनों घर पर ही खाना खा लेंगे.

इससे पहले वो रांड कुछ कहती, मैंने कामिनी को बाइक पर बिठाया और हम भाग निकले.

चाची ने हम दोनों को जाते-जाते ही बोला- इसकी बहन आई तो उसे भी भेज दूँगी.

मैंने सोचा टाइम लिमिटेड है.. वो आ गई तो कुछ नहीं होगा. हम मेरे घर में आ गए.

अब आज मजा लेने का समय कम मिलने की स्थिति थी.

मेरे मम्मी-पापा आज आउट ऑफ स्टेशन गए थे और अगली सुबह आने वाले थे तो मैं तो फ्री था मगर कल्याणी आ गई तो प्राब्लम हो जाती. मैंने वो सब सोचने में ज़्यादा टाइम नहीं वेस्ट किया. मैंने घर लॉक किया और कामिनी को बांहों में उठा कर सीधा बेडरूम में ले आया. वो नाटक करने लग गई. बहाने बनाने लग गई. उसने स्कूल ड्रेस पहना थी. स्कर्ट्स मेरी पसंद की ड्रेस, जिसमें से चुत का जल्दी काम लग जाता है.

कामिनी- आज नहीं मूड राजा…

मैं- नखरे मत कर रांड…

कामिनी- ना…

वो मुझे छेड़ कर भागने लगी.

मैं- ओह.. तो लगता है जबरदस्ती करनी ही होगी.

वो हंस पड़ी, मैंने उसे पकड़ा और सीधा बिस्तर पे उल्टा पटक दिया.

कामिनी- अऔच.. राजा धीरे…

मैं- तो काम शुरू कर!

कामिनी- मुझे भूख लगी है.

मैं- हाँ तो मेरा लंड है ना.. जितना चाहे चूस.. थोड़ी देर बाद उसमें से दूध तो निकलेगा ही.

कामिनी- नहीं राजा मुझे कुछ खाना खाना है.

मैं- चुप कर.. तू मेरी रांड है.. मैं जो कहूँ तू करेगी.. प्रॉमिस याद है ना?

कामिनी- हाँ राजा याद है.. मगर कुछ खा लूँ तो सब करूँगी.

मैं- हम्म.. चल नंगी हो.

कामिनी- अभी? पहले खाना खाती हूँ ना.. प्लीज़ राजा.

मैं- हाँ खा लेना जो खाना है..पहले जैसा कहता हूँ वैसा कर.. नंगी हो जा.

कामिनी- ठीक है.

मैं- रुक.. रहने दे.

कामिनी- क्यों? क्या हुआ राजा?

मैं- मैं खुद तुझे नंगी करूँगा!

मैं बिस्तर पे आ गया, वो मेरे सामने ही बैठी थी अपने घुटने मोड़ कर, जिस वजह से उसका स्कर्ट थोड़ा ऊपर हो गया था. मैं बिस्तर के सामने खड़ा हो गया और उसके पैरों को पकड़ कर उसे बिस्तर के किनारे तक खींचा. अब वो मेरे सामने लेटी थी. मैंने उससे उल्टा किया.

मैं- कुत्ता देखा है?

कामिनी- हाँ…

मैं- कुत्ते जैसी बैठ.

कामिनी- मतलब?

मैं- अरे जैसा कुत्ता खड़ा रहता है ना, उस तरह से बन जा.

कामिनी- मैं कुछ समझी नहीं.

मैं उसको पेट से पकड़ कर उठाया और उल्टा कर दिया.. तो वो पेट के बल लेटी हो गई थी.. फिर मैंने उसके हेयर पकड़े और उन्हें खींचा.

कामिनी- आअहह.. दर्द हो रहा..बाल क्यों खींच रहे हो?

इस दौरान वो अपने आप ही डॉगी स्टाइल में आ गई.

मैं- देख तू किस तरह बैठी है.

उसने अपनी नजरें पीछे घुमाईं और समझ गई कि डॉगी स्टाइल क्या होता है.

मैं- समझी? अब जब भी डॉगी स्टाइल कहूँ तो तू ऐसे ही बैठ जाना.

कामिनी- ओके राजा.. अब खाना खाते हैं ना?

मैं- मैंने क्या कहा था तुझे.. तू क्या है मेरी?

कामिनी- रंडी..

मैं- हाँ.. तो मुँह बंद रख और जितना कहता हूँ वैसा कर..समझी?

कामिनी- ओके राजा.

अब उसकी गांड मेरे सामने थी.. मैंने उसकी स्कर्ट को धीरे-धीरे उठाना स्टार्ट किया. उसने वाइट कलर की पैंटी पहनी थी. मैंने उसकी स्कर्ट को उसकी गांड पे रखा और अपने अंगूठे से उसकी चुत को ऊपर से सहलाने लगा.

कामिनी- उम्म्ह… अहह… हय… याह…

और फिर वैसा करते ही मैंने उसकी स्कर्ट को खींच कर उसके जिस्म से अलग कर दिया. अब वो सिर्फ़ पैंटी और शर्ट में थी. मैंने उससे सीधा किया और घुटने के बल बैठा दिया.

अब वो समझ गई और खुद ही अपनी शर्ट निकालने लगी. उसने नीचे सिर्फ़ वाइट कलर की चड्डी पहनी थी.. वो पैंटी उतारने लगी तो मैंने उसे रोक दिया.

कामिनी- क्या हुआ? नहीं निकालूँ!

मैंने उसके मासूम शक्ल को देखा.. और उससे बांहों में जकड़ कर फ्रेंच किस करने लगा. वो भी मेरी कॉपी करने लगी.

मैं- मेरा लंड पकड़..

कामिनी- तुमने तो निकाला ही नहीं.. कहाँ से पकड़ लूँ..!

मैं- तो तू निकाल ले ना..

वो खड़ी हो गई और अपने हाथों से मेरी जीन्स निकालने लगी और मेरी अंडरवियर भी एक झटके में निकाल दी.. मेरा लंड स्प्रिंग जैसा उछल कर उसके सामने आ गया. उसे अब कोई शर्म नहीं आ रही थी. जैसे ही उसने मेरा लंड देखा वो उससे खेलने लगी.

मैं- अभी मत कर कुछ.. रहने दे.. डॉगी स्टाइल में आ जा.

वो फिर डॉगी स्टाइल में बैठ गई.. मैंने उसकी चड्डी की ओर देखा..और उसकी चुत को मसलने लगा, उसकी गांड पे किस करने लगा.

मैं- आज तेरी चुत ज़्यादा गीली नहीं लग रही है.

कामिनी- क्यों?

मैं- मैं चाहता हूँ कि तेरी चुत इतनी गीली हो जाए कि तेरी पैंटी पूरी तरह भीग जाए.

कामिनी- मगर कैसे राजा?? मैं सूसू करूँ क्या?

मैं- नहीं.. अपने आप ही गीली हो जाएगी.

इतना कह कर मैंने उसकी चड्डी निकाल दी और वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी. मैंने उसके निप्पलों को पिंच किया तो कराह उठी. मेरे लंड से प्रीकम निकल रहा था.. जो उसने देखा.

कामिनी- राजा दूध..

मैं- हाँ पता है.. तेरे लिए ही है.. लेकिन अभी नहीं..

मैं अपनी रूम में गया और एक तौलिया ले आया.

मैं- अब तेरी चुत को गीला करेंगे.

कामिनी- कैसे?

मैं- बिस्तर पे खड़ी हो जा.
 
वो बिस्तर पे खड़ी हो गई. मैं उसके पीछे आया और घुटनों पर बैठ गया. अब मेरा लंड उसकी गांड को छू रहा था.

कामिनी- क्या कर रहे हो?

मैं- तेरी गांड में लंड घुसा रहा हूँ.

कामिनी- नहीं राजा.. दुख़ता है. प्लीज़ मत करो.

मैं- अन्दर नहीं घुसा रहा. चुप से खड़ी रह..

मैंने उसकी गांड को मसलना स्टार्ट किया और उससे कहा- जरा पैरों को फैला.

उसने अपने पैर फैला दिए और मैंने उसके पैरों के बीच ठीक चुत के नीचे अपना लंड लगा दिया.

मैं- अब पैरों को बंद कर.

कामिनी- लंड तो बाहर निकालो.

मैंने उसकी गांड पे एक स्लॅप किया

कामिनी- आअहह.. सॉरी समझ गई..

उसने अपने पैरों को बंद किया. अब मेरा लंड उसकी चुत के होंठों को टच कर रहा था और उसकी जाँघों में फंसा हुआ था. मैंने तौलिया कमर के चारों तरफ बाँध दिया. अब वो मुझसे बँधी थी, मेरा लंड उसकी चुत पर रगड़ खा रहा था. उसने नीचे देखा और बोली.

कामिनी- क्या इसे चोदना कहते हैं?

मैं- नहीं.. अभी लंड तेरी चुत के बाहर है.. जब वो चुत के अन्दर जाता है तो उससे चोदना कहते हैं. तू बस यूं ही खड़ी रह. मैं तुझे अब गोदी में उठाऊंगा. तू जैसी खड़ी है वैसी ही रहना.

मैंने उसके अंडरआर्म्स के बीच हाथ डाला और उसे उठा कर किचन की ओर चलने लगा. जैसे-जैसे मैं चलने लगा मेरा लंड उसकी चुत पर घिसने लगा.

कामिनी- आहा.. राजा लंड अन्दर जैसा जा रहा है.

मैं- हाँ लेकिन अन्दर नहीं जा रहा.. सिर्फ़ बाहर से घिस रहा है.. जैसे मैं हिलूँगा, तेरी चुत मेरे लंड पे घिसेगी.

इसके बाद इसी अवस्था में हम दोनों ने किचन से खाना लिया और चेयर पे बैठ गए. मेरा लंड अब भी उसके पैरों में फंसा था. हम खाना खाने लगे मगर कामिनी की साँसें तेज होने लगीं.

मैंने अपनी बहन से पूछा- कैसा लग रहा है?

मैं महसूस कर रहा था कि निप्पल सख्त हो गए थे और उसकी चुत बहुत अधिक भीग गई थी, उसके रस से मेरी झांट तक गीली हो गई थीं.

कामिनी- आह.. राजा बहुत अच्छा लग रहा है.. ओह..

मैं- तू अपनी चुत तो देख!

उसने अपनी चुत को टच की और बोली- ये तो पूरी तरह से भीग गई है और तुम्हारा लंड भी गीला हो गया है.

मैं- हाँ… और मेरा लंड इसलिए गीला हो गया है क्योंकि ये तेरी चुत को बहुत प्यार करता है ना.

हम खाना खाने लगे और मैं बीच-बीच में उसकी चूत में उंगली से उसका जूस निकाल कर चटनी के जैसे चाटने लगा. वो मेरी गोद में बैठी थी और लंड को देख रही थी.

कामिनी- ऐसा लग रहा है जैसे ये मेरा ही लंड हो.

मैं- तेरा ही तो है.. जो चाहे कर ले.

खाना खाने के बाद फिर मेरा लंड मेरी बहन की चुत के होंठों में जाने लगा और वो आ उउह.. करने लगी.

मैंने उससे कहा- जा.. जाके पैंटी पहन ले.. और दिखा कि कितनी गीली होती है तब तक मैं आता हूँ.

वो बेडरूम में गई और उसने अपनी पैंटी पहन ली.. तब तक मैं किचन में से कुछ सामान ले रहा था. मैंने हनी और मिल्क ले लिया. आज मैं उसकी चुत से दूध पीने वाला था.

मैं बेडरूम में गया तो वो बिस्तर पे पैंटी पहन कर बैठी थी. मैंने उसकी ओर देखा तो वो जिस तरह बैठी थी, उससे उसकी पैंटी पर निशान सा बन गया था. मैंने अपनी बहन को नंगी होने को कहा तो वो झट से नंगी हो गई और मुझे पैंटी दिखाने लगी. उसकी पेंटी के चुत वाली जगह में (क्रॉच में) एक गीला धब्बा बन गया था.

मेरे हाथ में सामान देख कर वो पूछने लगी- ये क्या है?

मैं- आज तुझे चुदाई दिखाऊंगा.

मैंने पीसी में एक हार्डकोर क्सक्सक्स ब्लू फिल्म स्टार्ट कर दी. मैं बिस्तर पे बैठा था और वो मेरी गोद में बैठी थी. हम एक-दूसरे से खेलने लगे. उसने बड़े ध्यान से मूवी देखी और बीच-बीच में लंड से भी खेलती रही.

मैंने उसे गोद से उठा कर कहा- ऐसी होती है चुदाई.. अब बोल चुदेगी मुझसे?

कामिनी- तुम जो कहोगे राजा..

उसने इतना कहा तो मैंने उसके मुँह में लंड घुसा दिया.. वो चूसने लगी. मैंने उसके हाथ मेरे बाल्स पे रखा तो वो मेरी गोटियों से खेलने लगी.

xxx ब्लू फिल्म देख कर उसे थोड़ा-थोड़ा ब्लोजॉब करने का तरीका समझ में आ गया था. अब वो मेरे लंड को चूसने लगी.. जीभ से चाटने लगी. इससे मेरा स्खलन नजदीक आ रहा था.

मैं- अया.. अया.. मेरा रस निकल रहा है.. आहह.. आह..

वो लंड चूसती रही और मैंने उसके मुँह में अपना रस छोड़ दिया. मैं उसके बाल खींचने लगा और अपने लंड को धीरे-धीरे घुसाने लगा.

मैं- अया.. कामिनी.. तू बहुत ही सेक्सी है.. आह इधर आ अब मैं तेरी चुत को प्यार करता हूँ.. बिस्तर पर लेट जा और पैर फैला ले.

वो लेट गई.. मैंने उससे आँखें बंद करने को कहा. उसने आँखें बंद की, इसके बाद मैंने हनी की बोतल उठाई और धीरे-धीरे उसके जिस्म पर हनी डालता गया. उसने आँखें खोलीं और पूछने लगी- भाई, क्या कर रहे हो? हनी क्यों डाला?

मैं- तू स्वीट डिश है मेरी.. अब मैं तुझे खाऊंगा.

मैंने उसके जिस्म पर लगा हुआ हनी लिक करना स्टार्ट किया.. उसके निप्पल को चूसता रहा. मुझे उसका जिस्म बहुत ही स्वीट लग रहा था. वो भी आ उउहह कर रही थी और बदन को ऐंठते हुए मादक अंगड़ाई लेने लगी- आअहह.. ऊहह..राजाया..

मैं कभी उसके निप्पलों को पिंच करता, कभी चूसता कभी मींजता.. वो बहुत गर्म हो गई थी. मैं उसकी चुत को सहलाने लगा. फिर मैं रुक गया.

तो उसने आँखें खोल दीं. ग्लास में जो दूध था, मैंने उसका सिप लिया और उसे अपने मुँह में रखा कर उसके पैरों को पकड़ कर मैंने अपने होंठ बिल्कुल उसकी चुत से चिपका दिए. उसकी चुत में दूध की पिचकारी छोड़ दी. वो सिहरन से चिल्ला उठी. मैंने उसे पकड़ के रखा था. फिर मैंने उसके पैर पकड़ के उल्टा खड़ा किया. अब उसका सिर जमीन पर और चुत ऊपर हवा में थी. मैंने उसकी आँखों में देखा और स्माइल करके उसकी चुत की ओर देखा. मेरा थूका हुआ दूध उसकी चुत में भर था और रिस रहा था. मैं फिर से उसकी चुत को बिल्कुल करीब से चूसना स्टार्ट किया.

कामिनी- अया.. राजायआअ.. गुदगुदीईई हो रही है.. अया.. उउह.. राजा आह..

मैं- मजा आ रहा है?

कामिनी- आआआअहह..

वो चीखने लगी और उसकी चुत से दूध का फव्वारा सा निकाल पड़ा. उसकी साँसें बहुत तेज हो गई थीं और उसे बहुत तेज स्खलन हुआ था. वो हाँफने लगी और आँखें बंद करके उसी पोजीशन में बनी रही.

मैंने उसे छोड़ा तो वो मेरी तरफ देखने लगी- भाई… मैं हमेशा तुम्हारी रंडी बनी रहूँगी, बस मुझे चूसते रहना.

मगर मेरा लंड अब भी कड़क था, खड़ा था, मेरी आग अभी बुझी नहीं थी. मैं उसकी ओर देखने लगा. वो मेरे लंड को देख रही थी. मेरे लंड से प्रीकम टपक रहा था.. वो समझ गई थी. वो अपनी पीठ के बल लेटी थी.. उसकी नंगी टांगें फैली हुई थीं. दूध अब भी उसकी चुत से टपक रहा था. मैंने उसके चुत को उंगली से टच किया और उसका जूस अपने लंड पे लगा दिया. उसकी चुत चमक रही थी.

मैं- अब मेरे लंड का क्या होगा??

कामिनी इतराते हुए बोली- लंड तुम्हारा है.. खुद ही कुछ कर लो.. मैं क्या करूँ?

वो अब बहुत उत्तेजित लग रही थी. मेरा लंड अब एकदम लाल होने लगा था. मैं बोला- नाटक मत कर और चुपचाप कुछ कर इसका..

उससे मस्ती सूझने लगी और वो नखरे करने लगी- मैं अब थक गई हूँ.. और मेरी चुत भी दुख रही है. आज तुम ही कुछ कर लो.

मैं- अच्छा?? मैं ही कुछ करूँ.. ठीक है.

मैंने उसकी टांगें पकड़ीं और उसे अपनी ओर खींचा.. तो वो हंसने लगी.

मैं- अब अपने लंड के लिए मैं ही कुछ करता हूँ.

मैंने उसके हाथों को बिस्तर पर दोनों साइड खींचा.. वो बिल्कुल नंगी मेरे सामने एकदम खुली हुई लेटी थी. मैं उसके ऊपर चढ़ गया और अपनी गांड उसके निप्पलों पर टिका दी. वो मेरे वजन से छटपटाने लगी और अपने आपको फ्री करवाने की कोशिश करने लगी.

मैंने अपना वजन उस पर रखा हुआ था तो वो उठ ही नहीं पा रही थी. इस पोजीशन में मेरा लंड उसकी गर्दन को टच कर रहा था.

कामिनी- राजा.. क्या कर रहे हो?? छोड़ो मुझे.. जाने दो.

मैंने अपने राइट हैड से उसकी एक टांग को ऊपर किया और साइड से उसकी गांड पे जोर का थप्पड़ मारा- साली.. जब मैंने कहा कि कुछ कर तो नाटक कर रही थी. तूने ही तो कहा था कि खुद ही कुछ कर लूँ. अब कर तो रहा हूँ, मैं जो चाहूँ करूँगा. कसम से अगर तू छोटी न होती तो तुझे अभी तो चोद डालता.

कामिनी- अया.. राजा.. मारो मत.. मैं चूसती हूँ तुम्हारा लंड.. मुझ पर से उठो.

मैं- अब तो मैं नहीं उठने वाला. अब जैसा मैं चाहूँगा तू वो ही करेगी.
 
इतना कह कर मैंने साइड में रखी हनी की बॉटल को हाथ में लिया.

मैं- हनी पसंद है ना तुझे?

कामिनी- हाँ..

मैं- आज तू स्वीट लंड लेगी मेरा.. हाथ आगे कर.

कामिनी- क्यों?

मैंने इस बार उसका निप्पल पिंच किया..

कामिनी- आहह.. लगती है राजा.

मैं- तो जैसा कहा, वैसा कर.. ठीक है?

कामिनी- ओके राजा..

मैं- हाथ सामने कर और इस बॉटल से हनी अपने हाथ पे लेकर मेरे लंड पर लगा.

मैंने बॉटल उसके हाथों में दी और वो हनी हाथ में लेने लगी. मैं थोड़ा और आगे हो गया. अब मेरा लंड उसके चेहरे पर था. उसके गाल को टच कर रहा था. वो मेरे लंड पर हनी लगाने लगी.

कामिनी- हो गया अब?

मैं- अब मुँह खोल.. इसी पोज़िशन में मैं ये लंड तेरे मुँह में डालूँगा.. और तू इसे चूसेगी.

मैं अपने घुटनों के बल आ गया और लंड उसके होंठों पे टिका दिया. उसने अपना गरम मुँह खोला और मैंने लंड उसके मुँह में अन्दर तक घुसा दिया- आअहह.. अब ये लंड तभी तेरे मुँह से निकलेगा जब मेरा दूध निकलेगा.. चूस.

वो अपना मुँह आगे-पीछे करके लंड चूसने लगी और मैं अपनी कमर हिलाने लगा. उसके सॉफ्ट होंठ मेरे लंड पर मुझे टाइट लगने लगे थे. हनी की वजह से लंड आसानी से आगे-पीछे हो रहा था.

मैं- आअहह.. ऐसे.. हाँ आह.. ले मुँह में पूरा लंड.. साली रंडी मेरा लंड चूस.. आह और अन्दर ले.. आह!

अब मैं जोर-जोर से आगे-पीछे होने लगा और अपनी गोटियां उसके चेहरे पे पटकने लगा.

मैं- अच्छा लग रहा है ना मेरा लंड? अगर हाँ तो अपनी एक उंगली तेरी चुत में डाल.. मैं समझ जाऊंगा. बोल मत.. मुँह से लंड की चुसाई चालू रख.

उसने अपनी उंगली चुत पे लगा दी, मतलब मेरा स्वीट लंड वो बड़े प्यार से चूस रही थी.

मैं- आह.. आह कामिनी.. रुक मत.. आ मैं माल छोड़ रहा हूँ.

मैं उसके मुँह में झड़ गया और थक कर उसकी साइड में लेट गया. मेरी साँसें बहुत तेज थीं और उसके मुँह से मेरा माल थोड़ा थोड़ा निकल रहा था. मैंने उसे उंगली से साफ किया और वो ही उंगली उसकी चुत पर घिसने लगा. उसकी गीली गीली चुत पर मैं अपनी उंगली को घिसता रहा और उसे एक और स्खलन हुआ.

मैं- कामिनी?

वो हाँफने लगी.

कामिनी- क्या?

मैं- तुझे अभी चोदूँ?

कामिनी- हाँ भाई… चोदो मुझे अभी चोद दो.. मैं तुम्हारी रंडी हूँ.

हम किस करने लगे.

मैं- आज नहीं मगर मैं ही तुझे सबसे पहले चोदूँगा, ये प्रॉमिस है मेरा.. तब तक ऐसे ही चलने दो. जिस दिन तेरी चुत पर झांट उग गई, उस दिन मैं तेरी गांड मारूंगा, तेरे निप्पल चूसता हुआ तेरी चुत में ये मोटा लंड डाल दूँगा.

हम दोनों थक गए थे.. हमने थोड़ा रेस्ट किया और फिर बाथ लिया. वहां भी एक बार ओरल सेक्स किया और फिर मैंने उसे घर छोड़ आया.

इस बात को आज काफ़ी साल हो गए. मैं पढ़ाई करने के लिए दूसरी सिटी में चला गया. कामिनी को देखे काफी समय बीत गया, ना मैंने उससे देखा था, ना बात की थी.

फिर एक बार मौक़ा आया, मेरी बुआ के लड़के की शादी थी तो मुझे घर जाना था. तब से पहले हमारे बीच जो कुछ हुआ था, उस सबको याद करके मैं बहुत एग्ज़ाइटेड था. मैं जानता था कि इस बार अब कामिनी मुझसे पक्का चुदेगी. शादी भले ही किसी और की हो मगर सुहागरात तो मैं ही मनाऊंगा.

मैंने अपना बैग पैक किया और उसी रात की गाड़ी से निकल गया. अगले दिन जब मैं वहां पहुँचा तो मेरी आँखें सिर्फ़ कामिनी को ही तलाश रही थीं. मगर उसका कोई अता-पता नहीं था.

फिर अब काफ़ी समय के बाद मिलने की वजह से सारे रिश्तेदार भी दिमाग़ खाने लगे थे और मैं बेसब्री से कामिनी को ढूँढ रहा था. शादी में आई सभी लड़कियों को मैंने देख लिया और एक-दो लौंडियां तो बहुत ही पटाखा आइटम थीं. मगर मैं मेरी बहन को ढूँढ रहा था.

अब शादी के घर में ना जाने कितने लोग होते है और काम तो हजारों.. मैं काम में बिज़ी हो गया. कामिनी अब भी मुझे नहीं दिखी थी. दरअसल उसकी बहन दिख गई.. उसे सॉरायसिस हो गया था. वो बड़ी ही अजीब दिख रही थी. मैंने उससे कामिनी के बारे में पूछा भी.. तो बोली- आई तो है मगर पता नहीं कहाँ गई.

मेरा सब्र टूट रहा था कि तभी पीछ से मुझे सुनाई दिया- कामिनी, जाकर लड़की वालों को लंच के लिए बुला ला.

मैंने तुरंत पीछे देखा और मेरी नजर उस लड़की पर गई, जिसे मैंने सुबह आते से ही देखा था. दूध जैसी गोरी-चिट्टी, बार्बी डॉल जैसी क्यूट, लगभग 5 फुट 2 इंच लम्बी.. कंधों तक लहराते बाल और सबसे अच्छी उसकी वही नशीली आँखें. मुझे याद आ गया कि मैंने जिस लड़की को सुबह देखते से ही हॉट समझा था वो कामिनी ही थी. मेरा लंड खड़ा हो गया था. मैं बहुत खुश हो गया. मैंने उसकी और देखा और स्माइल करने लगा और वो भी जान गई थी कि मैंने उसे पहचान लिया है.

मैं- वाउ.. हाय कामिनी.. मैंने तो पहचाना ही नहीं तुझे!

कामिनी- हाँ जानती हूँ.. सुबह ही मैं समझ गई थी कि तुम अपनी बहना को भूल गए.

मैं- नहीं कामिनी.. मैं तुझे ही ढूँढ रहा था.. दरअसल मैंने सुबह तुझे देखा भी, मगर मैं नहीं समझ पाया कि ये तू है.. तू इतनी सुंदर हो गई अब.. बिल्कुल हॉट मॉडल जैसी..

मैंने उसे गौर से देखा. उसने ब्लू कलर का कुर्ता और रेड प्लाजो पहना था. मैंने उसके फिगर को करीब से देखा. उसके चूचे इस एज में ही ऑलमोस्ट 32 सी के हो गए थे. उसकी कमर बिल्कुल पतली थी. जितनी भी चर्बी थी, सब चली गई थी, जैसे कमर का सब फ़ैट उसके हिप्स में आ गया हो.. उसके चूतड़ इतने पर्फेक्ट और टाइट दिख रहे थे कि मेरा लंड एकदम से तुनकी मारने लगा था.

लाल प्लाजो में से मैं उसके चूतड़ों को साफ महसूस कर पा रहा था और चूतड़ों के मटकने से उसकी गांड की दरार भी मजा आ रहा था. उसके सी-कप चूचे बिल्कुल खड़े, सख़्त और चूसने के लिए एकदम तैयार दिख रहे थे.

इन शॉर्ट.. मैंने उसको देख कर पक्का कर लिया कि आज तो पक्के में इसके साथ ही सुहागरात मनाऊंगा.

कामिनी- ठीक है राजा.. मैं जाती हूँ मुझे काम है.

मैं- अरे.. कहाँ जा रही है. मैं इतनी बेसब्री से तुझे ढूँढ रहा था और तू है कि ना मुझसे गले मिली.. ना किस दी.

इतने में मैंने ही उससे कसके हग किया और आजू-बाजू कोई को ना देख कर उसके गांड को फील किया. आज भी उसकी गांड उतनी ही सॉफ्ट, स्मूद मगर बड़ी और टाइट थी और आगे से उसके चूचे मैंने अपनी चेस्ट से दबा लिए थे.

मैं धीरे-धीरे उसकी बैक पे हाथ घुमाने लगा और उससे कहा.

मैं- आई रियली मिस्ड यू अलॉट डार्लिंग.

मेरा हाथ अपनी गांड पे महसूस करके वो पीछे हट गई और अजीब सी नजरों से मुझे देखने लगी.

कामिनी- राजा मुझे जाने दो.. काम है.

इतना कह के वो चली गई. मैं उसकी को देखने लगा. सेक्सीयेस्ट गांड एवर… उसके हर कदम पे उसकी गांड हिलती थी और बाउन्स होती थी. मगर उसने बड़े अजीब तरीके से मुझे देखा. मुझे लगा काम में बिजी होगी और सबके सामने डर रही होगी, सो मैंने भी जाने दिया और अपने काम में लग गया.

शाम की शादी थी. सब रेडी हो गए और बारात निकाल चुकी थी. मैं जानता था कि इस वक़्त घर में शायद ही कोई होगा. लड़की वाले भी बिजी थे. उनके लिए गेस्ट रूम में इंतजाम किया गया था, जो घर से थोड़ा अलग था.

मैं सुबह से काम करके थक चुका था तो थोड़ी रेस्ट करने के लिए बिस्तर पर लेट गया. तभी मैंने देखा कि कामिनी नहाने जा रही थी. मैं तुरंत उठ गया और उसे बाथरूम की ओर फॉलो करने लगा. उसके हाथ में एक छोटा बैग था, जिसमें कॉसमेटिक्स और उसके कंधे पर उसके कपड़े थे. मेरी नजर उसकी ब्लैक ब्रा पर गई और मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया. जैसे ही हम दोनों बाथरूम के पास पहुँचे, मैंने कामिनी को पीछे से कमर के सहारे उठा लिया.

कामिनी- अया.. छोड़ो.. छोड़ मुझे.. कौन है कुत्ते.. छोड़ मुझे..

अंधेरे में उसने मेरी शक्ल नहीं देखी और डर के मारे चिल्लाने लगी. मैंने उसे नीचे रखा और दीवार से सटा दिया कर उसका मुँह हाथ से बंद कर दिया. मैं- चिल्ला क्यों रही है? मैं हूँ..

कामिनी- राजा, छोड़ो मुझे.. मुझे जाना है.

मैं- ऐसे नहीं.. एक किस तो देनी ही पड़ेगी. आख़िरकार हम इतने साल बाद मिले हैं.. और तू इतनी सुंदर हो गई है कि जी चाहता है कि अभी तुझसे प्यार करूँ.

कामिनी- नहीं राजा.. जाने दो मैं चीखूँगी.. मैं यह सब नहीं करना चाहती. जाने दो राजा..प्लीज़..

मैं- क्या हुआ तुझे? लगता है तुझे याद दिलाना पड़ेगा तेरा प्रॉमिस?

इतना कह कर मैंने राइट हैंड से उसकी चूची को दबाया तो वो छटपटा के दूर हट गई.

कामिनी- मैंने कहा ना कि मुझे जाने दो.. नहीं तो मैं मम्मी को सब बता दूँगी.

मुझे गुस्सा आने लगा.. मैंने उसका हाथ पकड़ा और उससे दीवार से सटा दिया.

मैं- चुपचाप रह और नाटक मत कर.. क्या हुआ है तुझे?

उसने मेरा हाथ झटका और एक जोरदार मुक्का मेरी छाती पर मार कर चली गई. मेरी कुछ समझ में आता, इससे पहले उसने बाथरूम लॉक कर लिया था.

मैंने एक-दो बार नॉक किया- खोल खोल!

मगर वो बोली- जाओ राजा यहाँ से…

मैं बहुत गुस्से में था.. मैं वहां से चला गया और रेडी होकर शादी में पहुँच गया. उस दिन ना मैं कामिनी के सामने गया, ना वो मेरे सामने आई.

अगले दिन हम अपने-अपने घर जाने के लिए निकल पड़े. मैंने अपना सामान पैक करके कार में रखा और तभी मेरी नजर कामिनी पे पड़ी.

वो मेरी तरफ देख रही थी. मैंने उसकी और गुस्से से देखा और अपना मुँह फेर कर अपनी कार में बैठ गया. दो घंटे में हम घर पहुँच गए. वो अपने घर चली गई थी और मैं अपने घर पर था. उस दिन के बाद मैं ना उससे मिलने गया और ना ही वो मुझसे मिली.

मेरी छुट्टियां ख़त्म होने को आई थीं. मैंने डिपार्चर की टिकट कन्फर्म की. मुझे दो दिन बाद की टिकट मिली थी. मैं घर आ गया और अपने बेडरूम में लेट गया. दस मिनट बाद किसी ने मेरे कमरे का डोर नॉक किया और मुझे एहसास हुआ जैसे ये कामिनी हो. मैंने डोर ओपन किया तो सामने मम्मी खड़ी थीं.

मम्मी- क्या हुआ तुझे?? तबियत ठीक नहीं क्या तेरी?

मैं- ठीक हूँ मैं.. बस थोड़ी थकान है.

मम्मी- ठीक है, सोजा.. हाँ वैसे शाम को हम लोग आउट ऑफ़ स्टेशन जा रहे हैं. तेरे पापा का कुछ आफीशियल फंक्शन है और हमें इन्वाइट किया गया है. हो सका तो रात तक आ जाएंगे या कल दोपहर तक आ जाएंगे. गवर्नमेंट ने रहने का सब वहीं अरेंज्मेंट किया गया है. ज्यादातर तो कल ही आएँगे, तू चल रहा ना?

मैं- नहीं. आप लोग जाओ.. मैं ऐसी जगहों पर बोर हो जाता हूँ.

मम्मी- लेकिन अकेले क्या करेगा तू? चल ना..

मैं- नो.. और मेरे फ्रेंड्स भी तो हैं, आप लोग जाइए.

मम्मी- ठीक है.. फिर रात का डिनर बनाकर जाऊंगी.

मैं- अरे.. मैं देख लूँगा.. मत बनाओ.

मम्मी- ठीक है.

मैं फिर थोड़ी देर बाद सो गया.. शाम को उठा तो मम्मी-पापा जाने वाले थे. मम्मी ने कुछ निर्देश दिए, जो मैंने सुने ही नहीं. मैं उन्हें सी ऑफ करके फिर सो गया. बीस मिनट बाद उठा और नहाने जाने लगा. मैंने अपने कपड़े लिए और बाथरूम की ओर जाने लगा, इतने में ही डोर बेल बजी. अब मुझे नंगा रहना पसंद है तो जब भी अकेले होता हूँ न्यूड रहता हूँ. मैंने तुरंत तौलिया लपेटा और वेस्ट पहन ली.

मैं ऐसे मौके पर अगर कोई डोर पे होता है तो ज़्यादातर खिड़की में से ही बात करता हूँ. मैंने साइड विंडो से देखा और सर्प्राइज हो गया.. ये कामिनी थी.

मैंने अपना तौलिया ठीक किया और डोर ओपन किया. कामिनी सामने खड़ी थी.. मैं अब भी उस पर नाराज था. मैंने उससे अन्दर ना बुलाते हुए ही पूछा- क्या हुआ? क्या काम है..मम्मी नहीं हैं.

कामिनी- हाँ पता है.. मैं तो ऐसे ही आई हूँ.. बहुत दिनों से तुम नहीं मिले तो सोचा मैं ही मिल लूँ.

मैं- मिल कर क्या करना है.. तू क्या मेरी गर्लफ्रेंड है, जो मैं तुझसे मिलने आऊं?

कामिनी- अन्दर आ जाऊं मैं?

मैंने दरवाजा पूरा ओपन किया और साइड में हट गया.. वो घर में चली गई. मैंने किचन में से उसके लिए पानी ला दिया और सीधा बेडरूम में चला गया. वो हॉल में बैठी थी, मुझे जाता देख कर उसने अपनी आँखें नीचे झुका लीं. मैं अपने रूम में आ गया और नहाने जाने के लिए अपने कपड़े कलेक्ट करने लगा. वो मेरे रूम में आई और मुझे देखने लगी.

कामिनी- क्या कर रहे हो राजा?

मैं- अंडे दे रहा हूँ.. दिखता नहीं क्या कि नहाने जा रहा हूँ तो कपड़े ले रहा हूँ.. और तुझे क्या लेना-देना कि मैं क्या कर रहा हूँ, क्या चाहता हूँ? तू तेरा काम कर.. नहीं तो घर जा.

कामिनी- ऐसा क्यों बोल रहे हो राजा?

मैं- मेरी जो मर्ज़ी मैं कहूँ या करूँ..!

और वो अचानक रोने लगी.. पहले मुझे लगा कि नाटक कर रही है. मैंने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया और बाथरूम की ओर जाने लगा. वो अचानक मेरे सामने आ गई और मुझे हग करके रोने लगी. मैंने देखा कि वो सीरियस्ली रो रही थी.
 
कामिनी- राजा.. मुझे पता है कि तुम उस रात के लिए मुझ पर गुस्सा हो.

मैं- किस रात के लिए?

कामिनी- उस दिन जब तुम किस करना चाहते थे और मैंने तुम्हें मार कर भाग गई थी. आई एम रियली सॉरी राजा.. माफ़ कर दो. मैं उस वक़्त डर गई थी और मुझे लगा कि हमारा वो सब करना ग़लत है. मैं बहुत डर गई थी, उस वक़्त तो मेरा हाथ उठ गया. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. तुम मेरे बड़े भाई हो.. तुम जो कहोगे, मैं करूँगी. बस मुझसे नाराज मत रहो राजा प्लीज़.. आई एम सो सॉरी..

मेरी प्यारी बहन बहुत रो रही थी.. मेरा दिल पिघलने लगा. मैंने उसे अपने से अलग किया तो उसे लगा कि मैं वहां से जाना चाहता हूँ. वो मुझे रोकने के लिए मेरे कदमों में बैठ गई और रोते हुए मुझे रोकने लगी- आई एम सॉरी राजा… मत जाओ… गुस्सा मत करो राजा… प्लीज़… मैं कभी ऐसा नहीं करूँगी… अब तुम जो चाहो वो मैं करूँगी. प्लीज़ राजा!

मैं पसीजने लगा था और वो मेरे घुटनों से सट कर रो रही थी. उस वजह से मेरा तौलिया काफ़ी लूज हो गया, जिसका मुझे ख्याल ही नहीं रहा. मैंने उसको देखा और उसे उसके कंधों से उठा कर ऊपर उठाया और कस के गले लगा लिया.

वो बहुत रो रही थी.. बार-बार सॉरी कह रही थी.

मैं- अरे बस बस कामिनी.. इतना ड्रामा कहाँ से सीखा तूने? बस हुआ… मैं नाराज नहीं हूँ तुझसे..

कामिनी- मुझसे नाराज मत होना… नहीं तो मैं मर जाऊंगी राजा… तुम जो कहोगे मैं करूँगी.. तुम मुझे किस करो, नंगी करो… जो करना है करो, मगर कभी नाराज मत होना.. मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ राजा.

उसके आंसू मेरे सीने को भिगो रहे थे. मैंने उसका चेहरा ऊपर किया. उसकी सुंदर आँखें लाल हो गई थीं. मैंने उसकी ओर देखा और कहा- ग़लती मेरी है कामिनी.. आई एम सॉरी.. मुझे तुझ पर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए थी. अगर तू नहीं चाहती तो मैं कभी तुझे टच भी नहीं करूँगा.

कामिनी- नहीं राजा.. मैं वो सब चाहती हूँ. मैं बस उस दिन डर गई थी. आई लव यू राजा… मैं तुम्हें हर तरीके से प्यार करना चाहती हूँ. लेकिन प्रॉमिस कभी मुझसे नाराज मत होना.

मैं- आई प्रॉमिस.. आई लव यू कामिनी.. और तुझे डरने की क्या जरूरत है पगली? मैं तुझे कभी तक़लीफ़ नहीं पहुँचाऊंगा.. आई प्रॉमिस.

कामिनी- मैं जानती हूँ कि तुम कभी मुझे हर्ट नहीं करोगे. तुम भाई हो मेरे और आई लव यू टू.

मैंने उससे अपनी बांहों में जकड़ लिया.. दो मिनट बाद उसका रोना बंद हुआ. वो मुझसे बिल्कुल चिपक कर खड़ी थी. मैं उसके बाल सहला रहा था और उसके माथे को किस कर रहा था और जैसे ही वो मुझसे अलग हुई, उसकी जीन्स के बेल्ट का लूज पार्ट मेरे तौलिये में फंस गया और मेरा तौलिया नीचे गिर गया.

अब मैं नीचे बिल्कुल नंगा था और ऊपर सिर्फ वेस्ट थी. वो अपने आंसू पोंछने लगी थी. उसे चोदने का ख्याल मेरे दिमाग़ से निकल गया था और जैसे ही तौलिया निकला, मैं डर के मारे उससे फिर से लिपट गया ताकि उससे पता ना चले. अब उसकी जाँघों का स्पर्श मेरे लंड से हो रहा था.. और आज पहली बार मुझे मेरे लंड पर गुस्सा आया कि आख़िर ये इतनी जल्दी क्यों खड़ा हो रहा है.

कामिनी ने अपनी आँखें बंद रखी थीं और मेरी बांहों में थी. मगर उसे उसकी जाँघों में कुछ चुभने लगा. उसने नीचे देखने के लिए अपनी गर्दन झुकाई तो मैंने उसे रोक दिया.

मैं- नहीं कामिनी.. नीचे मत देख प्लीज़..

कामिनी- क्यों राजा क्या हुआ?

मैं- आई एम सॉरी कामिनी.. लेकिन मेरा तौलिया निकल गया तो तेरी जाँघों के टच से मेरा लंड खड़ा हो गया.

कामिनी- ही ही.. तो देखने दो ना..!

मैं- नहीं रहने दे कामिनी.. मैं नहीं चाहता कि ऐसा कुछ करे जो तू नहीं चाहती.

कामिनी- राजा, आई लव यू और मैं ये चाहती हूँ.. और वैसे भी शायद तुम्हें याद नहीं लेकिन तुमने कहा था कि ये लंड मेरा है और मैं जब चाहूँ इसे प्यार कर सकती हूँ. मैं अब प्यार करना चाहती हूँ राजा.. मैं तुमसे बहुत प्यार करना चाहती हूँ.

मैं- ओह आई लव यू कामिनी.

इतना कह कर मैंने उसे फिर से हग किया और उसे किस करने लगा. अब हम जी भर के बेताबी से किस कर रहे थे.. फ्रेंच किस कर रहे थे. मेरे हाथ उसके जिस्म पे घूम रहे थे.. मैं उसे महसूस कर रहा था.. उसके जिस्म के हर हिस्से पर मेरा हाथ चलने लगा था. वो अपनी उंगली धीरे-धीरे मेरे सीने, पेट और फिर मेरे लंड पे घुमाने लगी. उसने मेरा लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी.

कामिनी- उहम्म.. ये तो और बड़ा हो गया है.

मैंने कामिनी के मम्मे दबाते हुए कहा- तेरे भी तो ये बड़े हो गए है ना.

कामिनी- तुम्हारे लिए ही बड़े हुए है ये राजा.. ताकि तुम इनसे खेल सको. मेरा जिस्म तुम्हारा ही है राजा.. मैं रांड हूँ तुम्हारी..

उसकी बातों से मेरा लंड पत्थर सा हो गया.. मैं कंट्रोल खो चुका था. मैं उसे हर जगह किस कर रहा था.. उसके पिंक होंठों, गोरे-गोरे हाथ, गर्दन, कान.. सभी जगह मेरे होंठ चल रहे थे.

मैंने उसे उठाया और उसने मेरी कमर के चारों तरफ अपने पैरों को क्रॉस करके लपेट लिए. उसने जो कुर्ती पहनी थी, मैंने वो एक झटके में ही निकाल दी.. और हम धीरे-धीरे बाथरूम की ओर जाने लगे थे. उसके गोरे जिस्म पे उसकी ऑफ वाइट कलर की ब्रा बहुत सूट कर रही थी. मगर मुझे उस वक़्त पसंद नहीं आई तो मैंने अपनी बहन की ब्रा का हुक खोलने लगा. मैं उसके मम्मों को ऊपर से ही किस करने लगा. उसके बिल्कुल वाइट मम्मे अब पत्थर से सख़्त हो गए थे.

फाइनली उसकी ब्रा मैंने निकाल दी और मुझे आज तक याद है वो दुनिया के सबसे पर्फेक्ट ब्रेस्ट्स थे.. दूध से सफ़ेद दूध लाइट ब्राउन निपल्स के साथ एकदम तने हुए थे और बिल्कुल सख़्त हो गए थे.

मैं उसके मम्मों को चूसने लगा. उसके निपल्स को दांत से बाईट करने लगा.

कामिनी- अया… अया… आअहह उम्म भाई!

अचानक मेरी नजर उसके अंडरआर्म्स पे गई, मिल्की वाइट उसके आर्म पिट्स और उस में ब्राउनिश हेयर. मैं उसके आर्म्पाइट्स को किस करने लगा और नाक लगा कर सूंघा.

आह.. उसमें से बहुत ही एरॉटिक और मस्की स्मेल आ रही थी.

मैं उसे हर जगह चूस रहा था… उसने भी मेरी वेस्ट निकाल दी थी. अब मैं पूरी तरह नंगा था.. मेरा लंड मेरी के नीचे झूल रहा था और वो मेरे निपल्स को चूस रही थी… मैं तो जैसे जन्नत में था.

हम फाइनली बाथरूम में पहुँचे.. उसकी जीन्स अब भी खुली थी. मैंने उसका बेल्ट ढीला किया और अगले ही पल वो जमीन पर खड़ी हो कर अपनी जीन्स उतारने लगी. उसके मिल्की वाइट, टोंड जाँघें, जिनके नीचे उसके पैरों पर एक भी बाल नहीं था. बिल्कुल चिकनी और सॉफ्ट स्किन थी. मैं उसके अंगूठे के नाखून से ऊपर उसके जिस्म को चूमता जा रहा था. मैंने उसकी जाँघों को बाईट भी किया.. वो आ उहह.. कर रही थी. मैं खड़ा हो गया तो वो समझ गई और तुरंत नीचे घुटनों के बल बैठ कर मेरा लंड चूसने लगी.

मैं- आअहह.. अन्न्न्नुऊऊ.. अओउऊँ.. हह..

इतने सालों बाद उसके सुंदर हॉट होंठों ने मेरा लंड चूसा.. मेरी बहन अपने भाई का मैंने उसे रोका, मैं अभी झड़ना नहीं चाहता था. कुछ पल रुक कर अपने आपको ठंडा करने के लिए मैंने फव्वारा स्टार्ट किया. अब ठंडा पानी हमारे नंगे शरीरों पर गिरने लगा. उसकी क्रीम कलर की पैंटी पूरी तरह ट्रांसपेरेंट हो गई थी और मुझे उसकी झांटें साफ़ दिख रही थीं

कामिनी- राजा..

मैं- हाँ कामिनी..

कामिनी- अब मुझे भी झांट भी आ गई हैं.. आज चोदोगे ना अपनी बहन को?

मैं- हाँ कामिनी.. आज और अब तो तुझे हमेशा ही चोदूँगा.

हम फिर किस करने लगे और मैंने फिर उसे उठा लिया और बहन की पैंटी निकालने लगा. जैसे ही उसकी पैंटी उसके जिस्म से अलग हुई, बहन की खूबसूरत चुत मेरे सामने आ गई. एकदम पिंक कलर के उसकी चुत की फांकें और उन पर सुनहले ब्राउन कलर की झांटें उगी थीं. वो खड़ी थी.. मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसकी चुत को देखने लगा.

मैं- काफ़ी टाइम के बाद मिले हैं आज हम!

कामिनी हंसने लगी.. वो मेरी तरफ देख रही थी, उसके होंठों पे मुस्कान थी और आँखों में एक चमक थी, जो सिर्फ़ प्यार में होने वाले इंसान में ही होती है. मैं समझ गया कि ये मेरी बहन मुझसे कितना प्यार करती है और मैं भी अपनी सिस्टर को प्यार करता था. मैं उसकी चुत को निहार रहा था.. फाइनली मैंने अपनी उंगली से उसके चुत के होंठों को फैलाया और अपनी जीभ उसकी चुत से टिका दी.

मैं अब उसकी क्लिट को चूसने लगा. वो अपनी गांड धीमे-धीमे हिला रही थी.. और मेरे बालों में उंगली घुमा रही थी. मैं एक हाथ से उसके मम्मों को मसलने लगा और साथ ही साथ अपनी बहन की चुत चूसने लगा.

कामिनी- आह.. आह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… उउम्म्म्म.. भाईई.. याह.. अह..

मेरी बहन कामिनी का शरीर एकदम से ऐंठ गया और उसकी कुंवारी चूत से रस का ढेर सारा स्खलन हुआ, वो आनन्द से चीखने लगी, अपनी गांड को जोर-जोर से हिलाने लगी. उसके पैर अब थिरकने लगे थे और उसे खड़े रहने में मुश्किल हो रही थी. वो निढाल होकर नीचे बैठ गई, मैंने उसे सहारा दिया और किस करने लगा.

मैंने अपनी छोटी बहन से पूछा- कैसा लगा कामिनी बहना??

कामिनी बड़े प्यार से बोली- आई लव यू राजा! बहुत मजा दिया आपने!

उसकी इस बात से मुझे उस पे प्यार आ गया और हम दोनों ने किस करना शुरू कर दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी थी… हम दोनों बाथटब में सट कर बैठे थे.

कामिनी- राजा… बाथटब में लेट जाओ…

मैं- क्यों?

कामिनी- प्लीज़… मानो मेरी बात!

मैं अपनी बहना का कहना टाल ना सका, मैं बाथटब में लेट गया… वो किसी तरह खड़ी हुई मेरा हाथ पकड़ कर और वो भी बाथटब में आ गई. मैं लेटा था, मेरा लंड पत्थर की तरह हार्ड था और वो मेरे ऊपर खड़ी थी. मैं समझ गया कि वो क्या करने जा रही है.

मैं- कामिनी… ऐसे मत कर… इस तरह से तुझे बहुत दर्द होगा.

कामिनी- नहीं होगा… मैं जानती हूँ, तुम होने नहीं दोगे राजा.

मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और वो मेरे लंड के बिल्कुल आगे बैठ गई… मैंने उसे कमर से पकड़ कर उठाया और अपने लंड को उसकी चूत के होंठों पे ले गया.

मैं- देख कामिनी… तुझे पहले थोड़ा दर्द तो होगा ही और ब्लीडिंग भी हो सकती है. घबराना नहीं तुम!

कामिनी- होने दो राजा… कभी ना कभी तो होना ही है तो आज ही सही… मैं सिर्फ़ तुम्हारे साथ ही ये करना चाहती हूँ.

मैं- लव यू कामिनी… एक बार मेरा लंड चूस ताकि वो बिल्कुल चिकना हो जाए और आसानी से घुस सके.

कामिनी- चला जाएगा राजा… मेरी चूत ऑलरेडी बहुत गीली है… बस तुम डालो…

मैंने अपने लंड को अपनी बहन की चूत में डालना शुरू किया आर एक हाथ से उसके कमर पकड़ कर उसे धीरे-धीरे अपने लंड पर बैठाने लगा. साथ ही मैं दूसरे हाथ से उसका हाथ थामे हुए था. उसकी चूत वाकयी में बहुत गीली थी और एकदम टाइट भी थी.

मुझे बड़ी मुश्किल हो रही थी… मेरा लंड जा नहीं रहा था और उसे भी काफ़ी दर्द हो रहा था.

अचानक वो रुक गई… उसने मेरी आँखों में देखा और झटके से मेरे लंड पे बैठ गई. करीब 4 इंच तक लंड अन्दर चला गया.

कामिनी- आआआहह… इसिसस्स्सी इसस्स्स स्स… आअहह… राजाअ.आआ… आआ आअहह आ आहाआहहह…

उसकी चूत से ब्लीडिंग होने लगी. उसने मेरे हाथों को जकड़ लिया था और आँखें बंद कर ली थीं. उसकी आँखों से आंसू आने लगे और उससे दर्द होने लगा.

मैं- सॉरी… कामिनी…

कामिनी- नहीं राजा… थैंक्यू…

हम 5 मिनट उसी पोज़िशन में रुके रहे थे ताकि उसकी चूत मेरे लंड को अड्जस्ट कर ले. उसका ब्लड मेरी जाँघों पर था.

अब मैंने उसकी कमर पकड़ी और धीरे-धीरे झटके मारने लगा. वो भी अब मेरा साथ देने लगी थी और ऊपर-नीचे हो रही थी. अपने हर मूव के साथ उसके चूचे उछल रहे थे. अब वो संभल गई थी और मस्त चुदाई कर रही थी. मैं कभी उसके निपल्स पिंच करता, कभी किस करता.

मैं- आआहाआह… जोर से… स्पीड से…

कामिनी- आअहह…आअहह… उम्म्म्म… मेरा निकल रहा है.

उसके इतना कहने पर मैंने भी उसकी चूत में रस छोड़ दिया और हम दोनों का एक साथ स्खलन हुआ. इसी के साथ उसकी पेशाब भी छूट गई. हम दोनों हाँफने लगे थे… हमारे जिस्म बिल्कुल निढाल हो गए थे.

वो कुछ वक़्त ऐसे ही बैठी रही और जब मेरा लंड पूरा सिकुड़ गया तो मेरे ऊपर गिर गई. उसके चूचे मेरे सीने में दब रहे थे. मैंने उसके चेहरे पर से बाल हटाए और उसे किस किया.

मैं- मैं तुझे हमेशा प्यार करूँगा कामिनी… आई रियली लव यू…

कामिनी- लव यू टू राजा…

हम किस करने लगे… मैंने हाथ बढ़ा कर उसकी गांड मसलना स्टार्ट किया मगर मैं जानता था कि वो थक गई है. हम दोनों फव्वारा चला कर के वहां यूं ही लेटे रहे. मैंने उसकी चूत को साफ किया. हम काफ़ी देर तक एक-दूसरे के साथ टब में लेटे रहे और पानी हमारे जिस्म से बह रहा था.

मैं नीचे था और वो मेरे ऊपर लेटी थी. उसकी गांड मेरे लंड पर थी, सो अब तक लंड बिल्कुल सख़्त हो गया था. मैं उसके बालों को किस कर रहा था. हमारे हाथ एक-दूसरे के हाथों में जकड़े थे और बाँहें एक-दूसरे से लिपटी थीं.

हम वैसे ही लेटे थे. अब तक कामिनी की चूत काफ़ी ठीक हो गई थी और उसमें उतनी ताक़त भी आ गई थी. उसकी नजर मेरे लंड पे गई.

कामिनी- क्या राजा? ये कभी सॉफ्ट होता है भी या नहीं.

मैं- जब तक हम साथ रहेंगे, यह सॉफ्ट नहीं होगा. तुझे खुद ही इसका कुछ करना होगा.

कामिनी एकदम से घूमी और अब वो मेरी आँखों में देखने लगी. वो मेरी आँखों में देखने लगी और धीरे-धीरे नीचे सरकने लगी. आख़िर वो मेरे लंड तक पहुँच ही गई और उसने अपनी जीभ निकाल कर मेरे लंड का टोपा चाटना शुरू कर दिया और फिर पूरे लंड को लिक करती रही. उसकी आँखें अब भी मेरी आँखों में झाँक रही थीं. हमारी नजरें तब ही अलग होतीं, जब मुझे एकदम से सिहरन सी होती.
 
आख़िर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लिया और उससे बेतहाशा चूसने लगी. कभी मेरे बाल्स को भी किस करती और अपने उंगलियां मेरे निपल्स पे गोल-गोल घुमाने लगी. मेरी गांड अपने आप ही हिलने लगी, जिससे वो समझ गई कि मेरा झड़ने ही वाला है.

मैं- आअहह… कामिनी … डोंट स्टॉप… आ आह…

मेरे बाल्स में प्रेशर बनने लगा था और जैसे ही मुझे लगा कि अब मेरा रस भी निकल जाएगा, तभी उसने मेरा लंड मुँह में से निकाल लिया और मेरे लंड को छोड़ दिया.

कामिनी- इतनी आसानी से नहीं राजा… अभी तो शुरूआत है… तुम्हें मेरे लिए भी कुछ करना होगा. तभी तुम्हें राहत मिलेगी.

मैं- हाँ…कर दूँगा… मगर पहले मेरे लंड का तो कुछ कर.

कामिनी- उम्म्म आहह… नहीं…लेडीज फर्स्ट… नहीं पता क्या?

इतना कह कर ही उसने फिर मेरे लंड को मुँह में ले लिया और दो बार चूस के ही निकाल लिया. वो मुझे तड़पा रही थी और मैं बेताब था.

कामिनी- सोच लो.

उसकी आँखों में शरारत और शैतानी दोनों थे. मैं समझ गया कि या तो मैं जैसा यह कहती है वैसा करूँ, या फिर मुठ मार लूँ.

मैंने कामिनी की बात मानना ठीक समझा, मैं बोला- ठीक है… क्या चाहती है तू मुझसे?

वो कुछ नहीं बोली… वो बाथटब की रिम पर बैठ गई और सिर्फ़ नजरें नीचे झुकाकर अपनी झांटों की ओर इशारा किया. मैं समझ गया कि ये अपनी चूत लिक करवाना चाहती है. मैंने उसे अपनी ओर खींचा और टब की रिम पर बैठे-बैठे ही उसके पैरों को फैला दिया. जैसे ही मैं उसकी चूत को मेरी जुबान से लिक करने ही वाला था, उसने मुझे फिर रोक दिया- क्या कर रहे हो?

मैं- दुनिया की सबसे सुंदर चूत को चूसने जा रहा हूँ… यही चाहती है ना तू? तो पैरों को फैला ले और मजा ले…

कामिनी- नहीं… ये नहीं… मैं इन बालों को हटाना चाहती हूँ.

मैं- कामिनी, तू चाहती है कि मैं तेरी झांटें शेव करूँ?

कामिनी- सिर्फ चूत के ऊपर ही नहीं… मैं चाहती हूँ कि तुम यहाँ से लेकर वहां तक के सारे बाल शेव करो.

उसने अपनी उंगली से अपनी कमर से लेकर गांड के होल तक इशारा किया. मैं खुश हो गया. मैंने उससे अपनी बांहों में उठाया और किस किया.

मैं- वेट डार्लिंग…

मैं टब से निकला और मॉम की शेविंग किट लेकर आया. तब तक वो टब में लेट गई थी और उसने अपने पैरों टब के वॉल पर रख दिए थे. उसके पैर पूरी तरह से फैले हुए थे. मैंने उसकी ओर देखा… उसकी साँसें तेज चल रही थीं. हर सांस के साथ उसके चूचे ऊपर-नीचे हो रहे थे. उसके ब्राउन निपल्स जो सख़्त हो चुके थे और उसकी चूत चमक रही थी.

दरअसल वो रज छोड़ रही थी. उसकी चूत में से जूस निकल कर उसकी जाँघों पर आ गया था और उसकी चूत में से एक मस्की स्मेल आ रही थी.

मुझे मेरे लंड को उसकी चूत में घुसने से रोकने में बहुत ज़्यादा मुश्किल हो रही थी क्योंकि उसका दूध सा गोरा जिस्म, उसके एक बड़े ऑरेंज जितने बड़े चूचे, उसकी आर्म्पाइट्स में हेयर जो कामुक महक से भीगे थे, उसका भीगा जिस्म चमक रहा था और उसने अपने पैर इस तरह फैला कर रखे हुए थे कि उसका भगनासा भी दिख रहा था.

मैं टब में उतरा और उसके पैरों के बीच बैठ गया. उसने अपने पैर नीचे कर लिए और मेरे दोनों तरफ रख दिए. मैंने उसकी चूत को उंगली से सहलाया तो उसकी मादक सिसकारियां निकलने लगीं. वो बहुत तेज सांस ले रही थी और मेरी उंगली को देख रही थी. मैं उसकी चूत को चीर रहा था.

कामिनी- हरी अप प्लीज़…

मैंने हाथ वाले फव्वारे से उसकी चूत पे गर्म पानी डाला.

कामिनी- इसस्सस्स…स… आअहह… उफफ्फ़…

गर्म पानी उसकी चूत में से होता हुआ उसकी गांड से टपकने लगा. मैंने शेविंग क्रीम ली और अपने हाथ से उसके पेल्विस पर लगाने लगा. मेरी उंगलियाँ उसकी चूत पर सांप जैसे घूम रही थी… बस छूकर निकल जातीं. उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थीं और वो धीरे-धीरे अपने चूतड़ों को हिला रही थी. मैंने उसके पेल्विस से लेकर उसकी गांड के छेद तक क्रीम लगाई और फिर धीरे-धीरे उसकी चूत की हर झाँट को मैं शेव करने लगा. बड़े ही ध्यान से मैं शेव कर रहा था और जहाँ से रेजर पास होता, वो जगह बिल्कुल सिल्की स्मूद हो जाती.

मैंने उसकी चूत की फांकों दोनों पंखों को पकड़ कर फैलाया और उसके साइड में शेव करने लगा… अचानक मुझे महसूस हुआ कि कामिनी की गांड बहुत ज़्यादा हिल रही है. मैं समझ गया कि उसकी चूत पानी छोड़ने वाली है. मैं जानबूझ कर उसकी चूत के आस-पास हल्के से रेजर घुमाने लगा.

अब उसकी गांड जोर से हिल रही थी और अचानक ‘आअह्ह्ह्ह्ह… भाई…ईई… मैं गई… अह…’ कामिनी झड़ गई.

एक मिनट बाद उसने अपनी आँखें खोलीं. उसकी सांसें अब भी तेज चल रही थीं और उसके पैर मेरी कमर को जकड़े हुए थे.

मैं- अभी और भी बाकी है… शेव करूँ या!

कामिनी- करो…

मैं- डॉगी स्टाइल में आजा…

कामिनी- पहले शेव तो कर लो…

मैं- उसी के लिए कह रहा हूँ मैं… तेरी गांड के आस-पास भी झांटें हैं, उन्हें भी शेव करनी हैं.

वो तुरंत डॉगी स्टाइल में आ गई. अब उसकी गांड बिल्कुल मेरे सामने थी. पर्फेक्ट हार्ट शेप की उसकी गांड और उसके बीचों-बीच उसकी सुंदर चूत दबी थी. मैंने उसकी गांड को किस किया और मसलना स्टार्ट किया. अपने हाथ से उसकी गांड को मैंने फैलाया और फिर उसके चूत के नीचे के झांटें शेव करने लगा. उसी दौरान मैंने उसकी गांड में उंगली डाली तो वो चिहुंक गई- ऊऊउककचह… राजा… नहीं…

मैं- देख… तेरी चूत अब बिल्कुल स्मूद एंड सॉफ्ट हो गई है.

उसने अपने हाथ से चैक की- वाउ…

मैं- अब मेरी बारी…

मैंने उसकी गांड के सहारे घुटनों के बाल खड़ा हुआ और उसकी चूत में से उसका जूस अपने हाथों से निकाला और अपने लंड पर लगाया ताकि स्मूद हो जाए…

मैं- आज ये लंड तेरी गांड में जाएगा…

इतना कह कर ही मैंने लंड को उसकी गांड पे टिका दिया और धीरे-धीरे धक्के मारने लगा.

कामिनी- आअहह… आह उउफ़फ्फ़ उफ़फ्फ़… उफ…धीरेए… ईईई… आअहह आअह मरर गई…

मेरे हर धक्के में लंड उसकी गांड में घुसता जाता. हर झटके से उसकी आवाजें बढ़ती जा रही थीं. उसके चूचे नीचे झूल रहे थे और मैं उन्हें मसल रहा था. मैंने स्पीड बढ़ा दिया…

कामिनी- आहहाआह आह… आहाहा… आह… और… जोर से एयेए… उहह… उउफ्फ़… डाल दे… अया… रांड हूँ मैं तेरी… अया…डाल्लो… पूराआ… आहा आहा…

मैं उसकी गांड चोदता रहा- आआआहह… अया… तेरी गांड बहुत टाइट हैई… तेरी गांड में हो छोड़ रहा हूँ…

मैंने उसकी गांड में अपना रस छोड़ दिया और उसकी चूत भी रो पड़ी, उससे नहीं सहा गया तो वो चीख पड़ी और टब में गिर गई. मैं उसकी गांड के ऊपर गिर गया.

मेरा लंड अब भी उसकी गांड में ही था… हम दोनों बहुत ज़्यादा थक गए थे. कामिनी की आँखों में आंसू आ गए थे मगर होंठों पर स्माइल भी थी. वो मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर लेटा था. उसमें ताक़त नहीं बची थी कि वो उठ पाए, तो मैंने उसे कमर से पकड़ कर उठाया और दीवार से सटा के खड़ा करके फव्वारा स्टार्ट कर दिया… हम अब भी हाँफ़ रहे थे… क़िसी तरह हम दोनों ने फव्वारा का मजा लिया और बिस्तर पर आकर नंगे ही गिर गए.

कुछ मिनट बाद जब जान में जान आई तो वो बोली- राजा, एक बात कहूँ?

मैं- हाँ बोल…

कामिनी- तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाओगे?

मैंने हंस के उसे अपनी बांहों में भर लिया और हम सो गए. फिर वो घर चली गई और सुबह 8 बजे आ गई. मेरे मम्मी-पापा तब भी नहीं आए थे सो हम दोनों ने फिर से दो बार सेक्स का मजा लिया.

उस दिन मैं अपनी सिटी जाने के लिए निकल गया. मेरे साथ वो यादें थीं, जो मैंने अपनी बहन कामिनी के साथ बिताई थीं. पहले मैं सिर्फ़ उसके जिस्म से प्यार करता था, मगर अब मैं सचमुच उससे प्यार करने लगा हूँ.
 
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