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कविता के साथ डेट

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Desi kahani, antarvasna: कोलकाता से मैं फ्लाइट में वापस मुंबई लौट रहा था। मैं अपने मामा जी से मिलने के लिए कोलकाता गया हुआ था क्योंकि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए मां ने मुझे कहा बेटा तुम मामा जी से मिल आओ। मैं उनसे मिलने के लिए कोलकाता चला गया था मैं जब वापस मुंबई लौटा तो उस वक्त सुबह के 10:00 बज रहे थे क्योंकि मैं सुबह की फ्लाइट से कोलकाता से मुंबई लौट आया था। मैं जब घर लौटा तो उस वक्त पापा ऑफिस के लिए निकल चुके थे। मां ने मुझे कहा सुधीर बेटा मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बना लेती हूं मैंने मां से कहा ठीक है मां आप मेरे लिए नाश्ता बना दीजिए। मां ने मेरे लिए नाश्ता बनाना शुरू किया मैं नहाने के लिए चला गया था। जब मैं नहाकर वापस लौटा तो मैं मां के साथ बैठा हुआ बातें कर रहा था।

वह अब नाश्ता बना चुकी थी। मैंने नाश्ता किया नाश्ता करने के बाद मैं घर पर ही था। मैंने सोचा मैं आराम कर लेता हूं और मैं अब अपने रूम में आराम कर रहा था। मैं अपने रूम में लेटा हुआ था और मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी आंख लग गई और मुझे नींद आ गई थी। मैं सो चुका था मैं जब शाम के वक्त उठा तो उस वक्त शाम के 5:00 बज रहे थे। मां ने मुझसे कहा बेटा तुमने दोपहर में लंच भी नहीं किया। मैंने मां से कहा नहीं मां मेरा मन नहीं था और मुझे काफी थकान महसूस हो रही थी इसलिए मैं सो गया था। मैं अपनी कॉलोनी के पार्क में चला गया। जब मैं पार्क में गया तो उस दिन मेरे मुलाकात कविता के साथ हुई।

कविता जो कि हमारी कॉलोनी में ही रहती है लेकिन उस से काफी दिनों से मैं मिल नहीं पाया था। कविता से उस दिन मेरी बात हुई तो कविता ने मुझे बताया वह कोलकाता अपनी सहेली के घर जा रही है। मैंने कविता से कहा मैं तो आज ही कोलकाता से लौटा हूं कविता ने मुझे कहा अगर तुमने मुझे पहले बता दिया होता कि तुम कोलकाता जा रहे हो तो हो सकता है मैं तुम्हारे साथ ही चल लेती। मैंने कविता से कहा क्या तुम्हारी सहेली कोलकाता में ही रहती है? कविता मुझे कहने लगी हां वह कोलकाता में ही रहती है और मुझे उसकी शादी में जाना है। मैंने कविता से कहा चलो यह तो अच्छा है कि तुम्हें इस बहाने कुछ दिन घूमने का मौका तो मिल जाएगा। कविता अपने ऑफिस के चलते काफी बिजी रहती है। मैं कविता को काफी समय से जानता हूं इसलिए हम दोनों की मुलाकात तो हो जाया करती थी। मैं घर वापस लौट आया था और कविता भी कुछ दिनों के लिए कोलकाता चली गई थी इसलिए उस से काफी दिनों तक मे मिल नहीं पाया था।

जब वह कोलकाता से वापस लौटी तो उस दिन कविता का मुझे फोन आया और वह मुझे कहने लगी मैं तुमसे मिलना चाहती हूं। मैंने कविता से कहा ठीक है मैं तुम्हें अभी मिलता हूं क्योंकि उस दिन मैं घर पर ही था इसलिए मैं कविता को मिला। जब मैंने कविता से मुलाकात की तो मुझे काफी अच्छा लगा और उसे भी बहुत अच्छा लगा जिस तरीके से हम दोनों की मुलाकात हुई क्योंकि काफी दिनों बाद हम लोग एक दूसरे को मिले थे। मैंने कविता से पूछा तुम्हारा कोलकाता का टूर कैसा रहा तो कविता ने मुझे कहा मेरा कोलकाता का टूर तो अच्छा रहा लेकिन मुझे तुमसे यह जानना था कि क्या तुम्हारी अभी भी सरिता से बात होती है। मैंने कविता को कहां लेकिन तुम मुझसे सरिता के बारे में क्यों पूछ रही हो? कविता ने मुझे इस बारे में कुछ नहीं बताया लेकिन जब मैंने कविता से कहा कि मैं सरिता से संपर्क में नहीं हूं।

सरिता मेरी गर्लफ्रेंड थी लेकिन अब हम दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है क्योंकि हम दोनों के बीच अब बिल्कुल भी नहीं बनती थी इसलिए हम दोनों ने एक दूसरे से अलग होने का फैसला किया। यह ठीक ही रहा कि हम दोनों एक दूसरे से अलग हो गए। सरिता के बारे में मुझे कविता ने बताया और कहा मुझे वह मिली थी और मुझे लगा तुम दोनों के बीच अभी भी शायद रिलेशन है। मैंने कविता से कहा नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है हम दोनों एक दूसरे से अलग हो चुके हैं और मेरी सरिता से कोई भी बातचीत नहीं है। कविता को लगा था शायद सरिता और मेरे बीच अभी भी रिलेशन है। कविता ने मुझे बताया उसने सरिता को किसी लड़के के साथ देखा था इसीलिए उसने मुझे फोन किया था।

मैंने कविता को कहा नहीं अब मैं सरिता से किसी भी तरीके से संपर्क नहीं हूं और हम दोनों एक दूसरे से अलग हो चुके हैं। सरिता और मेरा रिलेशन पिछले 3 वर्षों से चल रहा था लेकिन अब हम दोनों एक दूसरे से अलग हो चुके हैं और मैं अपनी जिंदगी मैं काफी खुश हूं क्योंकि मुझे लगता है शायद सरिता मुझे कभी समझ ही नहीं पाई थी। हम दोनों ने एक दूसरे को 3 साल तक डेट किया लेकिन हम दोनों के बीच अक्सर किसी न किसी बात को लेकर झगड़े हो जाया करते थे तब मुझे भी लगने लगा मुझे सरिता से अलग हो जाना चाहिए। जब मैंने उससे इस बारे में बात की तो वह भी यही सोचती थी कि हम दोनों को एक दूसरे से अलग हो जाना चाहिए और हम दोनों ने एक दूसरे से ब्रेकअप करने का फैसला कर लिया था। हम दोनों जब एक दूसरे से अलग हुए तो उसके बाद मैं अपने काम पर पूरी तरीके से ध्यान देने लगा था और जिस तरीके से मेरा काम चल रहा है उस से मैं काफी खुश हूं। मैं काफी देर तक कविता के साथ बैठा रहा और फिर मैंने कविता से कहा अब मैं चलता हूं।

कविता ने मुझे कहा ठीक है और हम दोनों अपने घर लौट आए थे। कविता से मेरी मुलाकात तो हमेशा ही होती रहती थी और उस से जब भी मैं मिलता तो मुझे अच्छा लगता क्योंकि हम दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती है इसलिए मुझे कविता से मिलना अच्छा लगता है। कविता भी मुझे काफी अच्छे से समझती है हम दोनों एक दूसरे को काफी बरसों से जानते हैं लेकिन अब कहीं ना कहीं मुझे कविता का साथ बहुत ही अच्छा लगने लगा था क्योंकि जिस तरीके से कविता और मैं एक दूसरे के साथ होते हैं उससे हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता है। मुझे कविता के साथ समय बिताना बहुत ही अच्छा लगने लगा था इसलिए हम दोनों साथ में काफी समय बिताते। मुझे और कविता को साथ में समय बिताना बहुत ही अच्छा लगता है और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं जिस तरीके से हम दोनों की दोस्ती अब कहीं ना कहीं प्यार में बदलने लगी थी।

मैं कविता के साथ डेट करने लगा था उस से हम दोनों को इस बात की खुशी है कि हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे थे और एक दूसरे के साथ हमें काफी अच्छा लगता है। कविता का गोरा और सुडौल बदन मुझे हमेशा ही अपनी और खीचता है। एक रात हम दोनो की फोन पर गरम बाते हो रही थी और हम दोनो तडप रहे थे। मैंने उस रात कविता की चूत से पानी निकाल दिया था और हम लोग अगले दिन एक दूसरे से सेक्स के लिए तडप रहे थे। मैंने अगले दिन उसे अपने साथ चलने को कहा तो वह मेरी बात मान गई और हम लोग उस दिन साथ मे रुकने को तैयार हो चुके थे। अब हम दोनो तडप रहे थे। मैंने कविता के होंठो को गरम करना शुरु किया। मैं उसके होंठो को अच्छे से चूसा और वह भी गरम हो रही थी। कविता की चूत से निकलता पानी अब बढ रहा था वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी।

हम दोनो तडप रहे थे। मैंने कविता के गोरे स्तनो को चूसना शुरु किया। उसकी चूत से पानी बाहर निकल रहा था। वह अब मचल रही थी। मैंने उसके स्तनो को बहुत देर तक चूसा और उसकी आग को दोगुना कर दिया था। जब मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को लगाया तो लह बोली मेरी चूत को चाट लो। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरु किया। मैं उसकी चूत को अच्छे से चाट रहा था और वह तडप रही थी। कविता की चूत पर एक भी बाल नहीं था और वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी। उसकी चूत से मैंने पानी बाहर निकल दिया था। अब हम दोनो रह ना सके और मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला। वह जोर से चिल्ला कर बोली मेरी चूत मे दर्द हो रहा है। उसकी चूत से खून निकल रहा था। हम दोनो रह नहीं पा रहे थे। मैं कविता के पैरो को ऊपर उठाकर उसे चोदने लगा। हम दोनो को मजा आ रहा था और हम दोनो रह नहीं पा रहे थे। जब हम दोनो एक दूसरे के साथ सेक्स के मजे ले रहे थे तो उसकी सिसकारियां बढ रही थी।

हम दोनो रह ना सके और मैंने अपने माल को कविता के गोरे स्तनो पर गिरा दिया। हम दोनो बहुत खुश थे। कविता के गोरे बदन को मैं दोबारा से चोदना चाहता था। हम दोनो रह नहीं पा रहे थे और मेरा लंड कविता की चूत मे जाने को बेताब था। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मेरा लंड आसानी से उसकी चूत मे चला गया था। वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी। मुझे मजा आ रहा था कविता की टाइट चूत मे जब मैं अपने मोटे लंड को घुसा रहा था। हम दोनो रह नहीं पा रहे थे और मैं उसे तेजी से चोदे जा रहा था। जब मैं कविता की चूत के अंदर बाहर लंड को करता तो वह बोलती मुझे तेजी से चोदो। मैंने कविता को तेजी से चोदा और उसकी टाइट चूत का मजा लेकर मे खुश था। उसकी चूत के ऊपर अपने वीर्य को गिराकर मुझे मजा आया।
 
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