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कांता की कामपिपासा

कांता दौड़ कर डॉक्टर. को फोन मिलाती है और उसे तुरंत हवेली पर आने को कहती है. फिर फोन रखकर वापस अपनी सास की ओर बढ़ जाती है.

कांता: (फूलवा से) अरे फूलवा ज़रा हाथ लगा माँ जी को बेड पर लेकर चलते है.

फिर दोनो मिलकर उसको जैसे तैसे बेड तक लेकर जाते है और बेड पर लिटा देते है. तभी कार के हॉर्न की आवाज़ आती है. फूलवा मेन गेट पर जाती है और कुछ देर बाद डॉक्टर. का फर्स्ट एड बॉक्स और साथ मे डॉक्टर. भी अंदर आता है.

डॉक्टर. : क्या बात है ............

कांता: डॉक्टर. साहब माजी का पैर अचानक सीढ़ियो से फिसल गया और वो गिर पड़ी.

(डॉक्टर. अंदर जाता है और उनके पैरो को देखता है, फिर अपने फर्स्ट एड को बॉक्स मे से कुछ दवाई निकालकर पैर मे लगा देता है, और गरम पट्टी बाँध देता है, फिर कुछ और खाने की दवाई कांता को देता है और उसे कैसे देना है ये कांता को समझाया)

डॉक्टर.: (अपने फर्स्ट एड के बॉक्स को बंद करते हुए) घबराने की कोई बात नही है, इनके पैर मे मोच आ गयी है. जिसके कारण इनके पैरो मे सूजन और दर्द है. अभी शाम तक इनका दर्द कम हो जायगा. हाँ ................ मगर इन्हे अब 4-5 दिन के कंप्लीट बेड रेस्ट की ज़रूरत है. अब इन्हे 4-5 दिनो तक बेड से मत उठने दीजिएगा. ....... ओके ....... अब मैं चलता हूँ.

कांता : थॅंक यू डॉक्टर. साहब ..........

डॉक्टर. अपना सामान लेकर कार स्टार्ट कर हवेली के बाहर की ओर चल पड़ता है. डॉक्टर. के जाने के बाद कांता वापस अपनी सास के पास गयी और उनसे बोली:

कांता: डॉक्टर. कह रहा था खि आपके पैर मे मोच आ गयी है अब आपको 4-5 दिन ता बेड रेस्ट करना पड़ेगा. (उसके बाद पानी का गिलास लेकर अपनी सास को खाने के लिए दवाई दी. दवाई खाने के बाद कांता की सास बेड पर लेट गयी)

सासू माँ: अरे बेटी अब मुझे ये समझ मे नही आ रहा है कि कल हवन कैसे होगा?

कांता: हवन तो बाद मे भी हो सकता है. अभी आपकी देखभाल ज़रूरी है.

सासू माँ: नाआआअ बेटा नाअ.... कल तो चलना ही पड़ेगा.

अगर हम नही गये तो स्वामी जी बुरा मान जायंगे. जानते हो कितने बड़े बड़े लोग उनका इंतज़ार करते है? और हमें स्वामी जी ने खुद बुलाया है. और अगर हम हवन के लिए नही गये तो स्वामी जी को बहुत बुरा लगेगा.

कांता : लेकिन इस हालत मे आप इतनी दूर का सफ़र कैसे कर सकती है?

सासू माँ: तुम तो कर सकती हो ना बहू! ऐसा करो तुम अकेले ही चली जाओ वहाँ पर ड्राइवर को लेकर.

कांता: मैं अकेले. नही माँ जी इतनी दूर अकेले. और पहली कभी मैं वहाँ गयी भी तो नही हूँ .

सासू माँ: तो क्या हुआ बहू ड्राइवर ने देखा है रास्ता.. वो ले जाएगा तुम्हे यहाँ. वैसे भी ये हवन तुम्हारे लिए है. सो मेरा जाना इतना ज़रूरी नही है लेकिन अगर तुम नाही गयी तो ये ठीक नही होगा.

कांता: ठीक है माजी आप इतना ज़िद कर रही है तो मैं कल चली जाउन्गी.

अब आप आराम कीजिए. (अगले दिन सुबह कांता जल्दी ही उठ जाती है और नहा धोकर तैयार हो जाती है. उसने आज लाल कलर की साड़ी पहनी हुई थी. उसी को मेच करता हुआ ब्लाउस. जो कि काफ़ी डीप गले का था उसके स्तनों का उपर का पूरा हिस्सा दिख रहा था उसके ब्लाउस से. उसके ब्लाउस की बनावट कुछ ऐसी थी कि उसकी दोनो चूचिया उभर कर सामने की तरफ बाहर की ओर निकलती हुई प्रतीत हो रही थी. उसने साड़ी का आँचल अपने सीने पर इस तरह रखा कि जब तक आँचल नही हटे तब तक उसका समान किसी को नज़र नही आ सकता था. होंठो पर हल्की इस लिस्पस्टिक लगी हुई थी. जो उसके कामुक होंठो को और कामुक बना रही थी. उसने ऊँचे हील की सॅंडल पहनी हुई थी जिस से उसकी गान्ड काफ़ी बाहर निकल गयी थी..

सासू माँ: हाँ बेटी तुम जाओ. जितनी जल्दी तुम जाओगी उतनी जल्दी ही वापस आओगी. जाओ. बेटी ..जाओ..

कांता फूलवा को बुलाई और उस से कहा कि वो माँ जी का ध्यान रखे... और खुद बाहर की ओर बढ़ चली..... मेन गेट पर ड्राइवर गाड़ी के साथ कांता का इंतज़ार कर रहा था. कांता को देखते ही वो दौड़कर पीछे वाले गेट को खोला और अदब से खड़ा हो गयी. कांता बिना कुछ कहे कार मे बैठ गयी. उसके बाद ड्राइवर ने कार का गेट बंद किया और ड्राइवर सीट पर आकर गाड़ी स्टार्ट कर दी और गाड़ी को बाहर की तरफ बढ़ा दिया. कुछ ही देर बाद कार एक सुनसान सड़क पर दौड़ रही थी. बॅक मिरर पर ड्राइवर को कांता का चेहरा दिखाई दे रहा था. ड्राइवर नज़रे बचा कर कांता के कामुक होंठो का अपनी नज़रो से ऱस्पान कर रहा था. उसकी नज़रे चुपके चुपके उसके गदराए जिस्म का जायज़ा ले रही थी.

 
कांता फूलवा को बुलाई और उस से कहा कि वो माँ जी का ध्यान रखे... और खुद बाहर की ओर बढ़ चली..... मेन गेट पर ड्राइवर गाड़ी के साथ कांता का इंतज़ार कर रहा था. कांता को देखते ही वो दौड़कर पीछे वाले गेट को खोला और अदब से खड़ा हो गयी. कांता बिना कुछ कहे कार मे बैठ गयी. उसके बाद ड्राइवर ने कार का गेट बंद किया और ड्राइवर सीट पर आकर गाड़ी स्टार्ट कर दी और गाड़ी को बाहर की तरफ बढ़ा दिया. कुछ ही देर बाद कार एक सुनसान सड़क पर दौड़ रही थी. बॅक मिरर पर ड्राइवर को कांता का चेहरा दिखाई दे रहा था. ड्राइवर नज़रे बचा कर कांता के कामुक होंठो का अपनी नज़रो से ऱस्पान कर रहा था. उसकी नज़रे चुपके चुपके उसके गदराए जिस्म का जायज़ा ले रही थी.

शायद कांता को भी इसका अहसास हो गया था कि वो बॅक मिरर से उसको देख रहा था लेकिन कांता ने इसे इग्नोर करना उचित समझा. कोई 20 मिनिट की ड्राइविंग के बाद ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी. और खुद उतर कर एक लंबे चौड़े गेट की तरफ पैदल ही चल पड़ा. और गेट के पास जाकर दो आदमियो से कुछ बात करने लगा जो देखने मे साधु जैसे दिख रहे थे. कांता को समझते देर नाही लगी कि ये मठ का प्रवेश द्वार है. क्योकि उसे फूलवा ने जैसा बताया था सब कुछ वैसा ही था. कुछ देर बाद उसे ड्राइवर वापस गाड़ी की तरफ आते हुए दिखाई दिया. ड्राइवर गाड़ी को स्टार्ट कर उसे प्रवेश द्वार से अंदर की ओर बढ़ाने लगा.

जब वो अंदर की तरफ गयी तो कांता ने एक नज़र चारो तरफ दौड़ाई. उसने देखा कि मठ बहुत लंबा चौड़ा था. दूर दूर तक फैला हुए. एक तरफ बहुत ही बड़ा पार्क बना हुआ था, जिसमे हरी हरी घास उगी हुई थी. और उसमे फूलो के कुछ पेड़ पौधे भी लगे हुए थे. दूसरी तरफ देखने पे उसे एक बहुत बड़े मंदिर का ऊपरी हिस्सा नज़र आया. कांता ने अनुमान लगाया कि ये मंदिर भगवान शिव का है! क्योंकि मंदिर के उपरी हिस्से पर एक बड़ा त्रिशूल लगा हुआ था. जिसमे एक बड़ा सा डमरू बँधा हुआ था. कुछ और आगे चलने पर उसने छोटे छोटे आश्रम टाइप बड़े हुए झोपड़ीनुमा घर देखे. जिसमे कुछ साधु अपने अपने कामो मे व्यस्त हो रहे थे. तभी उसको आगे घना जंगल सा दिखा. जब गाड़ी इसमे से गुजरने लगी तो कांता ने देखा कि ये सब फलो के पेड़ है. मगर सबसे ज़्यादा पेड़ आँवले के थे. जिसमे हल्के रंग के गोल गोल आँवले लटके हुए थे.

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अब तक वो लगभग प्रवेश द्वार से 1 किमी अंदर आ चुके थे. कोई 100 कदम की दूरी और तय करने के बाद कांता को एक बड़ा सा बांग्ला सा नज़र आया. उस बंगले के चारो तरफ बाउंड्री की हुई थी. ड्राइवर ने बंगले के पास बनी हुई पार्किंग मे गाड़ी खड़ी कर दी.

ड्राइवर: मालकिन स्वामी जी ने आपको अंदर बुलाया है.

कांता उसकी बात सुनकर कार से नीचे उतरी और मेन गेट की तरफ बढ़ चली. ड्राइवर वही बने हाल की तरफ बढ़ गया. मेन गेट पर पहुँचते ही अंदर वाले आदमी ने गेट खोल दिया, और कांता को अपने पीछे आने का इशारा किया. कांता उसके पीछे पीछे चल पड़ी.

आप यहाँ बैठ जाए. स्वामी जी अभी आते ही होंगे.ये कहकर वो वापस बाहर की तरफ चला गया. कुछ देर बाद ही उसे किसी के कदमो की आहट सुनाई दी.
 
आप यहाँ बैठ जाए. स्वामी जी अभी आते ही होंगे.ये कहकर वो वापस बाहर की तरफ चला गया. कुछ देर बाद ही उसे किसी के कदमो की आहट सुनाई दी.

पलट पर उसने देखा कि सामने से स्वामी जी आ रहे है. उनके शरीर पर केवल कमर के नीचे धोती लिपटी हुई थी. ऊपर के अंग पर उन्होने कुछ नही पहेन रखा था. एक जनेऊ था जो क़ि उनके सीने पर क्रॉस बनाता हुआ उनके शरीर से लिपटा हुआ था. उनके सीने पर काफ़ी बाल थे जो कि लगभग सफेद हो चुके थे. उनकी छाती काफ़ी चौड़ी थी. उनका पेट हल्का सा आगे की तरफ निकल गया था. कांता उनके आते ही उठ खड़ी हुई और आगे बढ़कर उसने स्वामी जी के पैर छुए.

स्वामी जी ने उसको अपने हाथों से पकड़ कर उठाया और बोले

स्वामी जी: बैठो बेटी.....

कांता वही उनके सामने बैठ गयी स्वामी जी भी उसके सामने दूसरी गद्दी पर बैठ गये.

अब स्वामी जी की नज़र कांता के चेहरे पर गयी. और सबसे पहले स्वामी जी को कांता के रसीले और कामुक होंठ नज़र आए. लाल रंग के उसके होंठ ऐसे लग रहे थे जैसे उनमे से रस टपक रहा हो.

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उसके होंठो को अपनी नज़रो से ऱस्पान करने के बाद स्वामी जी बोले:

स्वामी जी: बेटी तुम हवन के लिए अकेली आई हो... जानकी लाल और तुम्हारी सास नही आई बेटी ?

कांता: नही ...... वो क्या है कि अचनाक बाबूजी को किसी ज़रूरी काम से देल्ही जाना पड़ा, और कल माँ जी सीढ़ी से फिसल गयी जिस से उनके पैर मे मोच आ गयी. डॉक्टर. ने उनको कंप्लीट बेड रेस्ट बता रखा है. इसी वजह से मुझे हवन के लिया अकेले आना पड़ा.

स्वामी जी: कोई बात नही बेटी... वैसे भी हवन मे तो बस तुम्हे ही बैठना था. (और स्वामी जी उसकी आँखो की तरफ देखने लगे. उसकी आँखे काफ़ी बड़ी बड़ी और मोटी थी. उसमे लगा काजल उसकी आँखो को और भी खूबसूरत बना रहा था. उसकी आँखो मे एक अजीब सी ख्वाइश नज़र आ रही थी

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कांता चुप चाप बैठी रही उसने कोई जवाब नही दिया. अब स्वामी जी ने किसी भोला नाम के आदमी को आवाज़ दी. कुछ ही देर मे एक साधु जिसकी उमर लगभग 50 साल की होगी, आया और एक तरफ खड़ा हो गया. स्वामी जी ने उसकी ओर देखा और आदेश दिया:

स्वामी जी: भोला, तुम जाकर हवन की तैयारी करो. सभी हवन का समान मंदिर मे पहुचा दो, तत्काल प्रभाव से.

स्वामी जी की बात पूरी होते ही भोला नाम का वो साधु वापस बंगले के अंदर चला गया.

स्वामी जी (कांता से मुखातिब होते हुए बोले) अरे बेटी तुमने कुछ खाया तो नही है ना..........

कांता: नही स्वामी जी ........ हवन जो करना था.

स्वामी जी: बहुत अच्छे बेटी.... बड़ी समझदार हो तुम......... अच्छा एक बात बताओ ये बिज़्नेस तुम क्यो संभाल रही हो तुम्हारा पति विजय क्यो नही संभाल रहा ....

कांता: आप तो जानते है उन्हे अपने आम के बागानो मे कोई इंटरेस्ट ही नही है. वो तो बस अपनी जॉब मे ही लगे रहते है. सेलरी पॅकेज तो बहुत अच्छा है मगर प्राइवेट जॉब सेक्यूर नही होती, और अगर वो चाहे तो अपने बिज़्नेस मे भी बहुत अच्छा पैसा कमा सकते है, मगर कहते है कि ये बिज़्नेस मुझे पसंद ही नही है.

स्वामी जी: वो तो ठीक है मगर तुम इतने बड़े बिज़्नेस को कैसे हॅंडल करोगी?

 
कांता: स्वामी जी मैने एमबीए किया हुआ है, और पापा के बिज़्नेस मे ज़्यादा तो नही मगर थोड़ा बहुत हाथ बटाती थी. इसलिए थोड़ी तो समझ है बिज़्नेस की. और अगर आपका आशीर्वाद रहा तो मैं इसे ज़रूर संभाल लूँगी और बहुत अच्छी तरह से संभाल लूँगी.

स्वामी जी: काफ़ी विश्वास है तुम्हे अपने उपर.. हूंम्म्मममममम.... अच्छी बात है, इसका मतलब तुम्हे अपने बिज़्नेस को संभालने का ज़ज़्बा है.

कांता: जी बिल्कुल स्वामी जी,

स्वामी जी: देखो बेटी.............. पूजा पाठ, मंत्र, साधना ये सब ऐसी चीज़ है कि इसको किसी से बताया नही जाता है. बताने पर इस इसका असर नही रहता. इसलिए हवन कैसे हुआ इसका ज़िकरा किसी से नही करना है तुम्हे. अगर ये बात तुम्हे मंजूर हो तो ही हवन करना, वरना ....... रहने दो . ......

कांता: नही स्वामी जी मैं ये बात समझती हूँ..........

स्वामी जी: बेटी केवल समझने से कुछ नही होगा..... ये हवन कुछ अलग प्रकार का होगा, जिसके लिए तुम्हे मानसिक और शारीरिक तौर पर दोनो से ही तैयार होना पड़ेगा... समझी.

कांता: स्वांजी जी मैं बिल्कुल तैयार हूँ....

स्वामी जी: देखो बेटी........ तुम तो खुद ही समझदार हो... फिर भी तुम्हे बता दूं कि पूजा, हवन, साधना आदि करने के कई तरीके होते है. जो तरीका जितना सिंपल होता है उसका महत्व उतना ही कम होता है, और जो तरीका कठिन और कुछ प्रतिकूल होता है उसका महत्व उतना ही ज़्यादा होता है... ये सब बाते वेदो मे भी लिखी है. तुमने भी सुना ही होगा.

कांता : जी स्वामी जी सुना है.....

स्वामी जी: इसलिए बता रहा हूँ बेटी कि मैं भी तुम्हारी सफलता के लिए कुछ अलग सा हवन कर रहा हूँ. इस हवन मे केवल हम दोनो ही बैठेंगे.... तुम्हे कोई ऐतराज़ तो नही है ना बेटी ............?

कांता : नही स्वामी जी आप जो करेंगे मेरे भले के लिए ही करेंगे...

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स्वामी जी: इसलिए बता रहा हूँ बेटी कि मैं भी तुम्हारी सफलता के लिए कुछ अलग सा हवन कर रहा हूँ. इस हवन मे केवल हम दोनो ही बैठेंगे.... तुम्हे कोई ऐतराज़ तो नही है ना बेटी ............?

कांता : नही स्वामी जी आप जो करेंगे मेरे भले के लिए ही करेंगे...

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स्वामी जी: हाँ बेटी बिल्कुल ठीक समझ रही हो तुम...... ये हवन थोड़ा सा अजीब ज़रूर लगेगा तुम्हे मगर यही करो बेटा अगर तुमने ये हवन मेरे कहे अनुसार कर लिया तो तुम्हारे बिज़्नेस के आड़े आ रही सारी बाधा दूर हो जाएगी. और फिर तुम अपने बिज़्नेस को एकाधिकार के साथ आगे बढ़ाओगी. घर मे तुम्हारी बात कोई नही टालेगा.. वैसा ही होगा जैसा तुम चाहोगी (इतना कहकर स्वामी जी कांता के चेहरे को गौर से देखने लगे. उन्हे ऐसा प्रतीत हुया जैसे कांता के चेहरे पर इस बात से एक बड़ी सी आशा की चमक आ गाई है उसकी आँखो मे)

कांता: आप जैसा कहेंगे मैं वैसा ही करूँगी इस हवन की सफलता के लिए.

स्वामी जी: ठीक है बेटी................ अगर अब तुम तैयार हो तो हम हवन शुरू कर सकते है. मेरी तरफ से कोई दबाव नही है. अगर तुम्हे हवन के दौरान ऐसा लगे कि ये नही होना चाहिए तो मुझे रोक देना. मैं उस विधि को नही करूँगा.... लेकिन हाँ जैसा कि मैने तुम्हे पहले ही कहा है जो विधि जितनी कठीन होती है उतनी असरदार भी होती है. और हवन के दौरान हम जो कुछ भी अर्पित करते है, जैसे कि फल, पैसा, फूल, कपड़े ये हम भगवान को अर्पित करते है.. समझी बेटी

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कांता ने सहमति से सिर हिलाया. तभी भोला वहाँ आ गया और बड़े ही विनम्र भाव मे बोला:

भोला: महाराज हवन की सारी तैयारी हो चुकी है. मंदिर मे मैने सारा समान पहुचा दिया है.

स्वामी जी: ठीक है तुम बाहर खड़े रहो.... अभी बिटिया बाहर जाएगी तो इसे मंदिर मे ले जाना.

इतना सुनकर भोला बाहर चला गया. तब स्वामी जी ने कांता से कहा.

स्वामी जी: बेटी.... तुम बाहर जो मंदिर बना है उसमे भोला के साथ चलो. हम वही आते है......... और हाँ बेटी वैसे तो तुम नहा कर आई हो फिर भी अपने हाथ पैर धो लेना और अगर तुमने अपने कपड़ो मे कोई लोहे की वस्तु जैसे पिन या क्लिप लगा रखी हो तो उसे निकाल देना... क्योकि ये सब हवन मे वर्जीत होता है... अब जाओ बेटी बाहर भोला खड़ा है वो तुम्हे मंदिर तक छोड़ देगा....

कांता हाथ जोड़कर बाहर की तरफ चली गयी. पीछे से स्वामी जी उसके बड़े बड़े विशाल चुतड़ों को थिरकते हुए देख रहे है. ऐसा लग रहा था जैसे दो बड़ी बड़ी रबर की बोल आपस मे टकरा रही थी.

कांता के जाने के बाद स्वामी जी भी बंगले के अंदर चले गये. कांता को बंगले के पास ही बने मंदिर के पास ले जाकर भोला ने मंदिर की तरफ इशारा करते हुए उस से बोला:

भोला: आप यही पर बैठिए, स्वामी जी अभी तैयार होकर आते है. तब तक आप भी हाथ मूह धो लीजिए.

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कांता पास के ही एक छोटे से कृतिम जलाशय की तरफ बढ़ चली. तालाब का पानी बिल्कुल सॉफ था. तालाब की सीढ़ियाँ उतरने से पहले कांता ने अपनी ऊँचे हील की सॅंडल निकाली और वही रख दी. फिर उसने कमर के पास साड़ी मे लगी हुई आल्पिन भी निकाल दी. फिर उसने अपने कंधे पर ब्लाउस मे लगी आल्पिन जिससे उसने अपने पल्लू को पंच कर रखा था उसे भी निकाल दिया. और अपना हाथ मूह धोने के लिए सीढ़ियो से नीचे उतरी. कांता झुक कर अपनी अंजुलि मे पानी भरकर अपने मूह को धो रही थी जिस कारण उसका आँचल खिसक कर नीचे गिर गया था. और उसके दो बड़े सामान बाहर आते आते रह जाते थे. उसके ब्लाउस का गला डीप होने के कारण उसके विशाल जोबन की दोनो नुकीली पहाड़ियो के बीच की घाटी सॉफ नज़र आ रही थी. उसकी घाटी ऐसी लग रही थी जैसे दो पहाड़ो के बीच कोई सकरी गहेरी गली हो. उसके बड़े बड़े स्तन उसके हाथो की हरकत के साथ हिल रहे थे. मुँह धोने के बाद कांता तालाब की तरफ मूह के खड़ी थी. उसका आँचल अभी भी नीचे ही गिरा हुआ था. तभी उसके कानो मे एक आवाज़ आई ......

बेटी . काांन्न्नताआआआ ...................

 
आवाज़ सुनकर कांता पीछे मूड गयी.... पीछे स्वामी जी खड़े थे. कांता के दोनो उठे स्तन मानो स्वामी जी से ऊँचाई के मामले मे उँचे हों. स्वामी जी की आँखो के आगे कांता के दोनो बड़े स्तन लगभग नंगे थे. स्वामी जी ने जितना अनुमान लगाया था उससे बड़े जोबन थे कांता के. स्वामी जैसे कांता की चूचियों को देख कर मदहोश हो गये हो. इस समय कांता की दोनो चूचिया स्वामी जी को दो जहाँ से भी कीमती लग रही थी. कांता समझ गयी कि स्वामी जी क्या देख रहे है. कांता ने बड़ी ही समझदारी के साथ अपना पल्लू उठाया और अपने दोनो कबूतरो को छुपा लिया. तब जाकर स्वामी जी को होश आया. स्वामी जी अपनी ग़लती पकड़े जाने से थोड़े अपसेट हो गये और हड़बड़ाकार बोले.

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स्वामी जी: वो...... मैने सोचा तुम्हे बुला लूँ क्योकि हवन का समय हो रहा है बेटी. तुम हाथ मूह धोकर तैयार हो ना ?

कांता: हाँ स्वामी जी चलिए, मैं बिल्कुल तैयार हूँ.

स्वामी जी के पीछे पीछे कांता मंदिर के साइड मे बने एक बरामदे नुमा हाल मे आ गयी. वहाँ पर कांता ने देखा कि पूजा का सारा समान वहाँ रखा है. फल मे केला, अंगूर, और संतरे थे. वही पर हवन के लिए कुंड भी बना हुआ था, हवन सामग्री भी वही पर रखी हुई थी. हवन कुंड के पास साइड मे दो बड़े बड़े और गद्देदार कंबल बिछे हुए थे. जो कि शायद भोला बिछा कर गया था. एक कलश भी रखा हुआ था. एक मिट्टी का दिया, अगरबत्ती और वो सारे सामान जो पूजा मे होने चाहिए वो वहाँ रखे हुए थी. स्वामी ने कांता से कहा:

स्वामी जी: बेटी ये सारा सामान तुम्हारा है, जो कि तुम्हारी तरफ से हवन मे भगवान शिव को अर्पित किया जाएगा. अब तुम अपने इस कलश को जल से भर लो. (उसके हाथ मे कलश देते हुए)

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कांता: लेकिन यहाँ तो जल है ही नही...

स्वामी जी: (मजाकिया लहजे मे) तो मेरे कुंड से भर लो पानी अपने इस कलश मे. मेरा मतलब है कि तालाब से भर लाओ इसे.

(कांता कलश लेकर हॉल के बाहर निकल गयी और कोई 5 मिनिट बाद वापस कलश को अपनी कमर पर टिका भर कर ले आई. ऐसा लग रहा था वो इस से काफ़ी थक गयी हो. अंदर कलश रख कर थकि हुई मुद्रा मे खड़ी हो गयी.

स्वामी जी: क्या हुआ बेटी... थक गयी क्या..... मैने तो पहले ही कहा था कि हवन कठिन होगा.

कांता: वो पानी ज़्यादा था कलश मे इसलिए भारी हो गया.

स्वामी जी: जब तुम्हारा कलश ही बड़ा है तो भारी तो होगा ही ना .

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(ये द्विअर्थी संवाद सुनकर कांता अंदर से चौंक गयी, वो समझ गयी कि अगर मैं कुछ बोलूँगी तो भी स्वामी जी यही कहेंगे कि मैं ग़लत मतलब निकाल रही हूँ, इसलिए वो कुछ नही बोली)

अब स्वामी जी एक कंबल पर स्वयं बैठ गये और पूजा की तैयारी करने लगे. उन्होने आटे से ज़मीन पर आडी तिरछी रेखाए खींची. और फिर उसपर सिंदूर, रोली, आदि पदार्थ भी गिराया. उसके बाद एक अंजुलि जो उसके बीचो बीच डाल कर उस पर मिट्टी का दिया रख दिया. और फिर कांता से बोले:

स्वामी जी: लाओ बेटी तुम्हारे दिए मे मैं तेल डाल देता हूँ. और उसमे वो तेल डालने लगे. दिया थोड़े बड़े साइज़ का था इसलिए उसमे तेल ज़्यादा आया, स्वामी जी फिर से कांता से रूई की बत्ती बनाते हुए बोले:

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स्वामी जी: एक बात तो है बेटी........... तुम्हारे सारे सामान बड़े बड़े है.... (कांता सामान का मतलब समझ रही थी, पर स्वामी जी के कहने का अंदाज़ ही ऐसा था कि उसपर ओब्जेक्शन नही किया जा सकता था)... ये कलश भी कितना पानी पी गया....... और इसे देखो जैसे ये दीपक नही तेल का कुआँ हो... हा.... .हहहहहहहा है ना बेटी.

 
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