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कांता दौड़ कर डॉक्टर. को फोन मिलाती है और उसे तुरंत हवेली पर आने को कहती है. फिर फोन रखकर वापस अपनी सास की ओर बढ़ जाती है.
कांता: (फूलवा से) अरे फूलवा ज़रा हाथ लगा माँ जी को बेड पर लेकर चलते है.
फिर दोनो मिलकर उसको जैसे तैसे बेड तक लेकर जाते है और बेड पर लिटा देते है. तभी कार के हॉर्न की आवाज़ आती है. फूलवा मेन गेट पर जाती है और कुछ देर बाद डॉक्टर. का फर्स्ट एड बॉक्स और साथ मे डॉक्टर. भी अंदर आता है.
डॉक्टर. : क्या बात है ............
कांता: डॉक्टर. साहब माजी का पैर अचानक सीढ़ियो से फिसल गया और वो गिर पड़ी.
(डॉक्टर. अंदर जाता है और उनके पैरो को देखता है, फिर अपने फर्स्ट एड को बॉक्स मे से कुछ दवाई निकालकर पैर मे लगा देता है, और गरम पट्टी बाँध देता है, फिर कुछ और खाने की दवाई कांता को देता है और उसे कैसे देना है ये कांता को समझाया)
डॉक्टर.: (अपने फर्स्ट एड के बॉक्स को बंद करते हुए) घबराने की कोई बात नही है, इनके पैर मे मोच आ गयी है. जिसके कारण इनके पैरो मे सूजन और दर्द है. अभी शाम तक इनका दर्द कम हो जायगा. हाँ ................ मगर इन्हे अब 4-5 दिन के कंप्लीट बेड रेस्ट की ज़रूरत है. अब इन्हे 4-5 दिनो तक बेड से मत उठने दीजिएगा. ....... ओके ....... अब मैं चलता हूँ.
कांता : थॅंक यू डॉक्टर. साहब ..........
डॉक्टर. अपना सामान लेकर कार स्टार्ट कर हवेली के बाहर की ओर चल पड़ता है. डॉक्टर. के जाने के बाद कांता वापस अपनी सास के पास गयी और उनसे बोली:
कांता: डॉक्टर. कह रहा था खि आपके पैर मे मोच आ गयी है अब आपको 4-5 दिन ता बेड रेस्ट करना पड़ेगा. (उसके बाद पानी का गिलास लेकर अपनी सास को खाने के लिए दवाई दी. दवाई खाने के बाद कांता की सास बेड पर लेट गयी)
सासू माँ: अरे बेटी अब मुझे ये समझ मे नही आ रहा है कि कल हवन कैसे होगा?
कांता: हवन तो बाद मे भी हो सकता है. अभी आपकी देखभाल ज़रूरी है.
सासू माँ: नाआआअ बेटा नाअ.... कल तो चलना ही पड़ेगा.
अगर हम नही गये तो स्वामी जी बुरा मान जायंगे. जानते हो कितने बड़े बड़े लोग उनका इंतज़ार करते है? और हमें स्वामी जी ने खुद बुलाया है. और अगर हम हवन के लिए नही गये तो स्वामी जी को बहुत बुरा लगेगा.
कांता : लेकिन इस हालत मे आप इतनी दूर का सफ़र कैसे कर सकती है?
सासू माँ: तुम तो कर सकती हो ना बहू! ऐसा करो तुम अकेले ही चली जाओ वहाँ पर ड्राइवर को लेकर.
कांता: मैं अकेले. नही माँ जी इतनी दूर अकेले. और पहली कभी मैं वहाँ गयी भी तो नही हूँ .
सासू माँ: तो क्या हुआ बहू ड्राइवर ने देखा है रास्ता.. वो ले जाएगा तुम्हे यहाँ. वैसे भी ये हवन तुम्हारे लिए है. सो मेरा जाना इतना ज़रूरी नही है लेकिन अगर तुम नाही गयी तो ये ठीक नही होगा.
कांता: ठीक है माजी आप इतना ज़िद कर रही है तो मैं कल चली जाउन्गी.
अब आप आराम कीजिए. (अगले दिन सुबह कांता जल्दी ही उठ जाती है और नहा धोकर तैयार हो जाती है. उसने आज लाल कलर की साड़ी पहनी हुई थी. उसी को मेच करता हुआ ब्लाउस. जो कि काफ़ी डीप गले का था उसके स्तनों का उपर का पूरा हिस्सा दिख रहा था उसके ब्लाउस से. उसके ब्लाउस की बनावट कुछ ऐसी थी कि उसकी दोनो चूचिया उभर कर सामने की तरफ बाहर की ओर निकलती हुई प्रतीत हो रही थी. उसने साड़ी का आँचल अपने सीने पर इस तरह रखा कि जब तक आँचल नही हटे तब तक उसका समान किसी को नज़र नही आ सकता था. होंठो पर हल्की इस लिस्पस्टिक लगी हुई थी. जो उसके कामुक होंठो को और कामुक बना रही थी. उसने ऊँचे हील की सॅंडल पहनी हुई थी जिस से उसकी गान्ड काफ़ी बाहर निकल गयी थी..
सासू माँ: हाँ बेटी तुम जाओ. जितनी जल्दी तुम जाओगी उतनी जल्दी ही वापस आओगी. जाओ. बेटी ..जाओ..
कांता फूलवा को बुलाई और उस से कहा कि वो माँ जी का ध्यान रखे... और खुद बाहर की ओर बढ़ चली..... मेन गेट पर ड्राइवर गाड़ी के साथ कांता का इंतज़ार कर रहा था. कांता को देखते ही वो दौड़कर पीछे वाले गेट को खोला और अदब से खड़ा हो गयी. कांता बिना कुछ कहे कार मे बैठ गयी. उसके बाद ड्राइवर ने कार का गेट बंद किया और ड्राइवर सीट पर आकर गाड़ी स्टार्ट कर दी और गाड़ी को बाहर की तरफ बढ़ा दिया. कुछ ही देर बाद कार एक सुनसान सड़क पर दौड़ रही थी. बॅक मिरर पर ड्राइवर को कांता का चेहरा दिखाई दे रहा था. ड्राइवर नज़रे बचा कर कांता के कामुक होंठो का अपनी नज़रो से ऱस्पान कर रहा था. उसकी नज़रे चुपके चुपके उसके गदराए जिस्म का जायज़ा ले रही थी.
कांता: (फूलवा से) अरे फूलवा ज़रा हाथ लगा माँ जी को बेड पर लेकर चलते है.
फिर दोनो मिलकर उसको जैसे तैसे बेड तक लेकर जाते है और बेड पर लिटा देते है. तभी कार के हॉर्न की आवाज़ आती है. फूलवा मेन गेट पर जाती है और कुछ देर बाद डॉक्टर. का फर्स्ट एड बॉक्स और साथ मे डॉक्टर. भी अंदर आता है.
डॉक्टर. : क्या बात है ............
कांता: डॉक्टर. साहब माजी का पैर अचानक सीढ़ियो से फिसल गया और वो गिर पड़ी.
(डॉक्टर. अंदर जाता है और उनके पैरो को देखता है, फिर अपने फर्स्ट एड को बॉक्स मे से कुछ दवाई निकालकर पैर मे लगा देता है, और गरम पट्टी बाँध देता है, फिर कुछ और खाने की दवाई कांता को देता है और उसे कैसे देना है ये कांता को समझाया)
डॉक्टर.: (अपने फर्स्ट एड के बॉक्स को बंद करते हुए) घबराने की कोई बात नही है, इनके पैर मे मोच आ गयी है. जिसके कारण इनके पैरो मे सूजन और दर्द है. अभी शाम तक इनका दर्द कम हो जायगा. हाँ ................ मगर इन्हे अब 4-5 दिन के कंप्लीट बेड रेस्ट की ज़रूरत है. अब इन्हे 4-5 दिनो तक बेड से मत उठने दीजिएगा. ....... ओके ....... अब मैं चलता हूँ.
कांता : थॅंक यू डॉक्टर. साहब ..........
डॉक्टर. अपना सामान लेकर कार स्टार्ट कर हवेली के बाहर की ओर चल पड़ता है. डॉक्टर. के जाने के बाद कांता वापस अपनी सास के पास गयी और उनसे बोली:
कांता: डॉक्टर. कह रहा था खि आपके पैर मे मोच आ गयी है अब आपको 4-5 दिन ता बेड रेस्ट करना पड़ेगा. (उसके बाद पानी का गिलास लेकर अपनी सास को खाने के लिए दवाई दी. दवाई खाने के बाद कांता की सास बेड पर लेट गयी)
सासू माँ: अरे बेटी अब मुझे ये समझ मे नही आ रहा है कि कल हवन कैसे होगा?
कांता: हवन तो बाद मे भी हो सकता है. अभी आपकी देखभाल ज़रूरी है.
सासू माँ: नाआआअ बेटा नाअ.... कल तो चलना ही पड़ेगा.
अगर हम नही गये तो स्वामी जी बुरा मान जायंगे. जानते हो कितने बड़े बड़े लोग उनका इंतज़ार करते है? और हमें स्वामी जी ने खुद बुलाया है. और अगर हम हवन के लिए नही गये तो स्वामी जी को बहुत बुरा लगेगा.
कांता : लेकिन इस हालत मे आप इतनी दूर का सफ़र कैसे कर सकती है?
सासू माँ: तुम तो कर सकती हो ना बहू! ऐसा करो तुम अकेले ही चली जाओ वहाँ पर ड्राइवर को लेकर.
कांता: मैं अकेले. नही माँ जी इतनी दूर अकेले. और पहली कभी मैं वहाँ गयी भी तो नही हूँ .
सासू माँ: तो क्या हुआ बहू ड्राइवर ने देखा है रास्ता.. वो ले जाएगा तुम्हे यहाँ. वैसे भी ये हवन तुम्हारे लिए है. सो मेरा जाना इतना ज़रूरी नही है लेकिन अगर तुम नाही गयी तो ये ठीक नही होगा.
कांता: ठीक है माजी आप इतना ज़िद कर रही है तो मैं कल चली जाउन्गी.
अब आप आराम कीजिए. (अगले दिन सुबह कांता जल्दी ही उठ जाती है और नहा धोकर तैयार हो जाती है. उसने आज लाल कलर की साड़ी पहनी हुई थी. उसी को मेच करता हुआ ब्लाउस. जो कि काफ़ी डीप गले का था उसके स्तनों का उपर का पूरा हिस्सा दिख रहा था उसके ब्लाउस से. उसके ब्लाउस की बनावट कुछ ऐसी थी कि उसकी दोनो चूचिया उभर कर सामने की तरफ बाहर की ओर निकलती हुई प्रतीत हो रही थी. उसने साड़ी का आँचल अपने सीने पर इस तरह रखा कि जब तक आँचल नही हटे तब तक उसका समान किसी को नज़र नही आ सकता था. होंठो पर हल्की इस लिस्पस्टिक लगी हुई थी. जो उसके कामुक होंठो को और कामुक बना रही थी. उसने ऊँचे हील की सॅंडल पहनी हुई थी जिस से उसकी गान्ड काफ़ी बाहर निकल गयी थी..
सासू माँ: हाँ बेटी तुम जाओ. जितनी जल्दी तुम जाओगी उतनी जल्दी ही वापस आओगी. जाओ. बेटी ..जाओ..
कांता फूलवा को बुलाई और उस से कहा कि वो माँ जी का ध्यान रखे... और खुद बाहर की ओर बढ़ चली..... मेन गेट पर ड्राइवर गाड़ी के साथ कांता का इंतज़ार कर रहा था. कांता को देखते ही वो दौड़कर पीछे वाले गेट को खोला और अदब से खड़ा हो गयी. कांता बिना कुछ कहे कार मे बैठ गयी. उसके बाद ड्राइवर ने कार का गेट बंद किया और ड्राइवर सीट पर आकर गाड़ी स्टार्ट कर दी और गाड़ी को बाहर की तरफ बढ़ा दिया. कुछ ही देर बाद कार एक सुनसान सड़क पर दौड़ रही थी. बॅक मिरर पर ड्राइवर को कांता का चेहरा दिखाई दे रहा था. ड्राइवर नज़रे बचा कर कांता के कामुक होंठो का अपनी नज़रो से ऱस्पान कर रहा था. उसकी नज़रे चुपके चुपके उसके गदराए जिस्म का जायज़ा ले रही थी.