S
StoryPublisher
Guest
कांता कह भी क्या सकती थी, बस सहमति मे सिर हिला दिया. स्वामी जी ने दीपक जालाया और फिर कांता को पास बिछे हुए कंबल पर बैठने का इशारा किया. जब कांता उनके पास बैठ गयी तो स्वामी जी ने कहा:
स्वामी जी: बेटी कांता..... हम जो ये हवन करने जा रहे ये बिल्कुल विशुद्ध हवन है. वैसे तो इसमे वस्त्र भी तुम्हे बदलना चाहिए मगर मैं तुम्हे इसके लिए फोर्स नही करूँगा. हाँ लेकिन मुझे तुम्हारे हाथ पाँव को शुद्ध जल से धोना होगा. तभी तुम हवन कर पाओगी. ठीक है.
कांता ने हामी भरी. तब स्वामी जी ने एक पत्ते पर कांता के पैर रखवाए और एक पत्ते से उसके पैर पर जल गिराने लगे. फिर कुछ देर बाद वो कांता के पैरो को अपने हाथ से धोने लगे. कांता उनकी छुअन से सिहर सी गयी, मगर बोली कुछ नही,
कुछ देर बाद स्वामी जी कांता के पैरो के तलवों को धोने के बहाने सहलाने लगे. कांता को अपने पैरो मे एक मीठी गुदगुदी महसूस होने लगी. कुछ देर बाद वो खड़े हो गये और कांता के पीछे आ गये. और कांता को अपने दोनो हाथ आगे करने के लिए बोले. और फिर कांता के पीछे झुक कर वो उसके हाथ पर पानी गिराने लगे. जब उसका हाथ पूरा गीला हो गया तो स्वामी जी अपने पैरो के पंजो के बल बैठते हुए अपने दोनो घुटनो को इस तरह फैलाया कि कांता उनके दोनो पैरो के बीच आ गयी और फिर पीछे से हाथ आगे ले जाकर वो कांता का हाथ अपने हाथ मे लेकर हल्के हल्के मसलने लगे. उन्होने कांता की दोनो हाथो की हथेलिया अपने दोनो हाथो मे लेकर उसे रगार्डने लगे. हाथ रगर्ते वक़्त स्वामी जी की विशाल जांघे कांता के विशाल चुतड़ों से साड़ी के उपर से ही रगड़ खा रही थी. इसे रगड़ा रगड़ी मे कांता का आँचल फिसल कर गिर गया और उसके दोनो कबूतर ब्लाउस नुमा जाल मे फड़फड़ाने लगे.
पीछे से स्वामी जी को उसके ब्लाउज के कबूतरो के दर्शन हो रहे थे. कांता के दोनो हाथ स्वामी जी के हाथ मे थे इसलिए वो पल्लू को उठा भी नही सकती थी. स्वामी जी कांता के जोबन का रस्पान करते हुए कांता के कान के पास अपने कान को ले जाकर फुसफुसा कर बोले
स्वामी जी: कांता बेटी... भगवान ने तुम्हे बहुत सुन्दर बनाया है. (कांता समझ गयी कि स्वामी जी अभी कहाँ की सुंदरता देख रहे है.)
फिर स्वामी जी ने बात ना बिगड़े ये सोच कर बोले:
स्वामीजी: लेकिन एक बात है बेटी भगवान ने तुम्हे जितना ज़्यादा सुंदर बनाया है उतना ज़्यादा ही दिमाग़ भी दिया है. तुम जितनी सुंदर हो उतनी ही समझदार भी हो. तुम एक गुडवाँन स्त्री हो. इतनी सारी विशेषता बहुत ही कम स्त्रियो मे दिखाई देती है. (ये कहकर स्वामी जी ने कांता का हाथ छोड़ दिया और पानी लेकर कांता के हाथ पर गिराने लगे. हाथ धोने के बाद कांता ने भी बड़ी ही सहजता के साथ अपना पल्लू उठाया और उसे अपने दोनो अनमोल रतनों पर डाल लिया. स्वामी जी भी अपने पूजा के कार्य मे व्यस्त हो गाए.
स्वामी जी: बेटी कांता..... हम जो ये हवन करने जा रहे ये बिल्कुल विशुद्ध हवन है. वैसे तो इसमे वस्त्र भी तुम्हे बदलना चाहिए मगर मैं तुम्हे इसके लिए फोर्स नही करूँगा. हाँ लेकिन मुझे तुम्हारे हाथ पाँव को शुद्ध जल से धोना होगा. तभी तुम हवन कर पाओगी. ठीक है.
कांता ने हामी भरी. तब स्वामी जी ने एक पत्ते पर कांता के पैर रखवाए और एक पत्ते से उसके पैर पर जल गिराने लगे. फिर कुछ देर बाद वो कांता के पैरो को अपने हाथ से धोने लगे. कांता उनकी छुअन से सिहर सी गयी, मगर बोली कुछ नही,
कुछ देर बाद स्वामी जी कांता के पैरो के तलवों को धोने के बहाने सहलाने लगे. कांता को अपने पैरो मे एक मीठी गुदगुदी महसूस होने लगी. कुछ देर बाद वो खड़े हो गये और कांता के पीछे आ गये. और कांता को अपने दोनो हाथ आगे करने के लिए बोले. और फिर कांता के पीछे झुक कर वो उसके हाथ पर पानी गिराने लगे. जब उसका हाथ पूरा गीला हो गया तो स्वामी जी अपने पैरो के पंजो के बल बैठते हुए अपने दोनो घुटनो को इस तरह फैलाया कि कांता उनके दोनो पैरो के बीच आ गयी और फिर पीछे से हाथ आगे ले जाकर वो कांता का हाथ अपने हाथ मे लेकर हल्के हल्के मसलने लगे. उन्होने कांता की दोनो हाथो की हथेलिया अपने दोनो हाथो मे लेकर उसे रगार्डने लगे. हाथ रगर्ते वक़्त स्वामी जी की विशाल जांघे कांता के विशाल चुतड़ों से साड़ी के उपर से ही रगड़ खा रही थी. इसे रगड़ा रगड़ी मे कांता का आँचल फिसल कर गिर गया और उसके दोनो कबूतर ब्लाउस नुमा जाल मे फड़फड़ाने लगे.
पीछे से स्वामी जी को उसके ब्लाउज के कबूतरो के दर्शन हो रहे थे. कांता के दोनो हाथ स्वामी जी के हाथ मे थे इसलिए वो पल्लू को उठा भी नही सकती थी. स्वामी जी कांता के जोबन का रस्पान करते हुए कांता के कान के पास अपने कान को ले जाकर फुसफुसा कर बोले
स्वामी जी: कांता बेटी... भगवान ने तुम्हे बहुत सुन्दर बनाया है. (कांता समझ गयी कि स्वामी जी अभी कहाँ की सुंदरता देख रहे है.)
फिर स्वामी जी ने बात ना बिगड़े ये सोच कर बोले:
स्वामीजी: लेकिन एक बात है बेटी भगवान ने तुम्हे जितना ज़्यादा सुंदर बनाया है उतना ज़्यादा ही दिमाग़ भी दिया है. तुम जितनी सुंदर हो उतनी ही समझदार भी हो. तुम एक गुडवाँन स्त्री हो. इतनी सारी विशेषता बहुत ही कम स्त्रियो मे दिखाई देती है. (ये कहकर स्वामी जी ने कांता का हाथ छोड़ दिया और पानी लेकर कांता के हाथ पर गिराने लगे. हाथ धोने के बाद कांता ने भी बड़ी ही सहजता के साथ अपना पल्लू उठाया और उसे अपने दोनो अनमोल रतनों पर डाल लिया. स्वामी जी भी अपने पूजा के कार्य मे व्यस्त हो गाए.