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कांता की कामपिपासा

अब तक प्लेयर मे लता मंगेशर का एक दूसरा गाना चलने लगा था. दूरी ना रहे कोई.. तुम इतने करीब आओ… मैं तुम मे समा जाउ. तुम मुझमे समा जाओ……

प्रोफेसर: पर मैं क्यो चाहूँगा आपका सॅंपल टेस्ट करना?

कांता: क्यो कि इस से आपको भी फ़ायदा होगा.. आपको भी कमिशन मिलेगा इसमे..

प्रोफेसर: कमिशन तो मुझे मिलना ही चाहिए मुझे आपकी कंपनी दे या कोई दोसरी कंपनी दे. प्रोफेसर ने लापरवाही से कहा..

कांता समझ चुकी थी कि प्रोफेसर को शीशे मे उतारना ज़रूरी है.. वरना बात बिगड़ जाएगी.. ये सोचकर वो बड़ी नरमी से प्रोफेसर से बोली.

कांता: आप जो चाहेंगे आपको वो मिलेगा… आप मेरे माल को पास कर दे बस….

प्रोफेसर: वो तो है. लेकिन मैं बिना टेस्टिंग के माल को पास नही कर सकता…

कांता: तो टेस्ट करलीजिए मेरे माल को ……

प्रोफेसर: वो तो लॅब मे ही हो पाएगा….

कांता: तो बस यू समझ लीजये कि आप लॅब मे ही है.. कांता ने मुस्कुराते हुए कहा..

प्रोफेसर: तो ठीक है कांता जी आप अपना माल दिखाएँ… माल शब पर ज़ोर देने से माल का अर्थ बदल गया..

कांता: आपके सामने ही तो माल है…. जैसे देखना है देख लीजिए.. ये कहते हुए कांता ने तिरछी नज़र से अपने उभारो को देखा… जो कि प्रोफेसर के लिए एक निमंत्रण था…

कांता की इस बात ने प्रोफेसर के हथेलियो के दबाव को फिर से एक बार बढ़ा दिया.. और एक बार फिर से प्रोफेसर की आखे कांता के दूधिया उभारो से चिपक गयी… बस फ़र्क इतना था कि पहले प्रोफ़ेसर कांता की चूचियो को देख रहा था और उस बार कांता प्रोफेसर को अपनी चूचिया दिखा रही थी… प्रोफेसर ने अपनी हथेलियों का दबाव कांता की चुचियों पर और बढ़ा दिया जिससे कि दोनो के जिस्म चिपक गये.. जिस्म चिपकने से कांता की चूचियाँ प्रोफेसर की छाती से दब गयी.. जिस से उसकी चूचिया और भर गयी.. प्रोफ़ेसर की गरम सासे कांता अपने चेहरे और छातियों पर महसूस कर रही थी..

कांता: कैसा लगा मेरा माल प्रोफेसर साहब…

प्रोफेसर: माल तो तुम्हारा देखने मे अच्छा है…..

कांता: आपको तो बड़े दाने वाले माल चाहिए थे ना… इसलिए मैं बड़े बड़े दाने वाले माल के साथ ही आपके पास आई हूँ..

प्रोफेसर: हाँ कांता जी… आप सही कह रही है आपके दाने काफ़ी बड़े बड़े है.. और दमदार भी … बड़े ही सुडोल और ठोस दाने लग रहे है आपके… प्रोफेसर कांता की चूचियो को घूरते हुए बोला….

कांता: ठोस लग रहे है से क्या मतलब है आपका? ये तो ठोस ही है…….

प्रोफेसर: अब ये तो मैं कैसे कह सकता हूँ..

कांता: क्यो???????????????

 
कांता: आपको तो बड़े दाने वाले माल चाहिए थे ना… इसलिए मैं बड़े बड़े दाने वाले माल के साथ ही आपके पास आई हूँ..

प्रोफेसर: हाँ कांता जी… आप सही कह रही है आपके दाने काफ़ी बड़े बड़े है.. और दमदार भी … बड़े ही सुडोल और ठोस दाने लग रहे है आपके… प्रोफेसर कांता की चूचियो को घूरते हुए बोला….

कांता: ठोस लग रहे है से क्या मतलब है आपका? ये तो ठोस ही है…….

प्रोफेसर: अब ये तो मैं कैसे कह सकता हूँ..

कांता: क्यो???????????????

प्रोफेसर: क्यो क्या.. ये कितने ठोस है ये जानने के लिए.. मुझे इस छूना… होगा…. अपने हाथो मे लेना.. होगा…. और फिर इन्हे दबाना होगा… तभी आपके माल के बारे मे ठीक से जान पाउन्गा मैं….

कांता: अब मुझे टेस्टिंग करवानी है तो अपना माल आपके हाथो मे तो देना ही पड़ेगा ना…

प्रोफेसर: तो आप टेस्टिंग के लिए तैयार है… तो फिर टेस्टिंग शुरू करते है.. ये कहते हुए प्रोफेसर कांता की पीठ अपनी तरफ कर दिया… इस दौरान कांता का आँचल नीचे ज़मीन पर गिर चुका था .. जिसे उठाने की ज़रूरत भी अब नही थी.. प्रोफेसर कांता के दोनो बगलो मे हाथ डालकर धीरे धीरे सहलाते हुए अपनी बाहो का घेरा बनानाकर उसे अपने बाहों मे भर लिया..

कांता ने भी अपना सिर उसके कंधो पर टिका दिया… उसके बाद धीरे धीरे उसके हाथ कांता के स्तनों की तरफ सरकने लगे… प्रोफेसर ने अपनी उंगलियों को कांता की चूचियो की गहराई और गहरी घाटी मे घुसा दिया… प्रोफेसर की उंगलिया कांता की चूचियो की गर्मी महसूस कर रही थी फिर वो अपनी दूसरी हथेली से कांता के उभारो की विशालता का जायजा लेने लगा.. कांता भी अपने चूची स्पर्श से आनंदित हो रही थी..

कांता: कैसा है मेरा माल… ठोस है कि नही? कांता ने पूछा…

प्रोफेसर: अभी तो मैं इसे सिर्फ़ छू ही रहा है… इसकी कठोरता का पता तो इसे दबाने के बाद ही चलेगा….

कांता: तो दबाइए ना प्रोफेसर सहाब… इंतज़ार क्यो कर रहे है…

कांता की बात सुनकर प्रोफेसर ने अपनी दोनो हथेलयो मे कांता की चूचियो को पकड़कर इतनी ज़ोर से मसला कि कांता के मुँह से आह निकल गयी….. कांता ने सिसकारी लेते हुए प्रोफेसर से कहा..

कांता: क्यो प्रोफेसर सहाब .. माल ठोस है कि नही………….

प्रोफेसर कांता की चूचियो को मीसाते हुए बोला… वाकई.. कांता जी.. आपका माल तो बहुत ठोस है… अब मुझे इसकी वाइटनेस तो दिखाएँ ज़रा….

कांता: अभी तक क्या.. आपने मेरे माल की वाइटनेस नही देखी है क्या…

प्रोफेसर: अभी माल आपने पूरा खोला ही कहाँ है.. पूरा खोल के दिखाएँगी तभी तो वाइटनेस का पता पड़ेगा मुझे…

कांता: तो खोल दीजिए ना मेरे माल को.. आपकी तरफ ही तो इसकी गाँठ है…

कांता का ब्लाउस लेस वाला था इसलिए उसने उसके अंदर ब्रा नही पहनी हुई थी.. प्रोफेसर की उंगलिया कांता के ब्लाउस की लेस मे उलझ गयी और कुछ ही देर मे कांता के ब्लाउस ने कांता के जिस्म का साथ छोड़ दिया… कांता के जिस्म से ब्लाउस के अलग होते ही कांता की मांसल चूचिया क़ैद से आज़ाद होकर खुली हवा मे उछल पड़ी.. प्रोफेसर कांता की दोनो चूचियो को अपनी हथेलियों मे पकड़कर उसके दोनो कबूतरों को दबोचने लगा….कांता के चेहरे पर दर्द और आनंद दोनो की रेखाए उभरने लगी…

 
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