• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

कामान्ध नही कामुक सोनी

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
S

StoryPublisher

Guest
लेखक:-सिद्धांत सेन

आज आप सब के लिए जो रचना मैं ले कर आया हूँ वह मेरे एक अति प्रिय मित्र सिद्धांत सेन की है जिसे मैं लगभग पिछले चार वर्षों से जानता हूँ.

सीड एक बहुत ही सुशील एवं संस्कारी तथा सामान्य स्वभाव का पुरुष है जो अपने काम के अलावा किसी और चीज़ से कोई वास्ता नहीं रखता. वह पुणे में स्थित एक बहुत बड़ी कम्पनी में नौकरी करता है और अपनी पत्नी सोनाली उर्फ़ सोनी के साथ उसी कम्पनी की आवास कॉलोनी में रहता है.

इस वर्ष के फरवरी माह की 6 तारीख को जब सीड मुझे मिलने आया तब मैंने उसके ही चेहरे पर कुछ चिंता की रेखाएं देखीं.

बातों ही बातों में जब मैंने उससे पूछा- सीड क्या बात है तुम्हारे चेहरे पर बारह क्यों बजे हुए हैं? तुम कुछ चिंतित दिखाई दे रहे हो?

फिर मैंने हँसते हुए कहा- मुझे लगता है की सुबह सुबह तुम्हारा और भाभी का झगड़ा हुआ है और तुम उनसे मार खाकर आ रहे हो.

मेरी बात सुन कर वह थोड़ा मुस्कराया और बोला- नहीं सतीश, ऐसी कोई बात नहीं है और तुम्हारा अनुमान बिल्कुल गलत है. मुझे एक विषय पर तुमसे कुछ परामर्श करना है और उसके बारे में बात कैसे शुरू करूँ इसी उलझन में हूँ.

मैंने उत्तर में कहा- सीड, अगर तुम मुझे अपना मित्र मानते हो तो फिर तुम्हें मेरे साथ कोई भी बात साझा करने में कोई उलझन नहीं होनी चाहिए. जिस विषय पर तुम परामर्श करना चाहते हो उस बात को एक मित्र से सीधा सीधा बोलने में तुम्हें कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए.

मेरी बात सुन कर वह कुछ पल के लिए चुप रहा और फिर मेरे पास आ कर बोला- मैं तुमसे जिस विषय में चर्चा करना चाहता हूँ उसका सम्बन्ध मेरी पत्नी के साथ है इसलिए थोड़ी दुविधा में हूँ.

मैंने कहा- तुम जो चर्चा करना चाहते हो वह निश्चिन्त हो करो और मुझसे जो अपेक्षा है वह भी खुल कर बोल दो.

मेरी बात सुन कर जब सीड थोड़ा आश्वस्त हुआ तब वह बोला- मेरे घर पर मेरा एक निजी कंप्यूटर है जिसे अधिकतर मेरी पत्नी ही प्रयोग करती है. लगभग चार दिन पहले उसमे वायरस आ जाने के कारण उसने कार्य करना बंद कर दिया था.

उसने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा- जब मैंने कंप्यूटर में से वायरस निकाला तथा उस वायरस का कंप्यूटर में प्रवेश करने के मूल स्रोत की खोज करी. तब पता चला की वह इन्टरनेट पर सेक्स सम्बन्धी विज्ञापन से आया था.

मैंने उसकी बात सुन कर उससे पूछा- हाँ, ऐसी साइटों से अक्सर कंप्यूटर में वायरस घुस आता है. क्या तुम सेक्स साइट्स पर जाते हो?

उसने तुरंत उत्तर दिया- नहीं, ऐसी साइटों पर जाने के लिए मेरे पास अतिरिक्त समय नहीं होता. लेकिन मेरी पत्नी अवश्य ऐसी साइटों पर जाती है.

मैंने अपनी उत्सुकता को छुपाते हुए बोला- तुम यह कैसे कह सकते हो? बिना प्रमाण के तुम भाभी पर ऐसा आरोप नहीं लगा सकते.

मेरी बात सुन कर उसने कहा- मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा हूँ लेकिन जो कुछ मैंने कंप्यूटर की हिस्टरी की फ़ाइलों से ज्ञात किया है उसके आधार पर ही मैं यह कह रहा हूँ.

मैंने ऊँचे स्वर में कहा- अरे, भाभी दिन भर घर पर अकेली रहती है इसलिए अपना समय व्यतीत करने के लिए वह ऐसी साइटस देख लेती होंगी. वह विवाहित है और यौन संसर्ग एवं सम्बन्धों के बारे में सब कुछ जानती हैं इसलिए अपना मन बहलाने के लिए उनके ऐसा करने पर तुम्हें कोई आपत्ति है?

सीड ने धीरे से कहा- नहीं, मुझे अपनी पत्नी द्वारा ऐसी रचनाएं पढ़ने पर कोई आपति नहीं कर रहा हूँ क्योंकि शादी के चार वर्ष बाद भी वह माँ नहीं बन सकी इसलिए मैं उसके ऐसे व्यवहार को भली भांति समझ सकता हूँ.

दोस्त की बात सुन कर मैं बोला- मित्र, तुमसे ऐसे ऊँचे स्वर में बोलने के लिए माफ़ करना. मैं कुछ अधिक आवेश में आ गया था. मुझे आशा है कि तुम मेरी बात का बुरा नहीं मानोगे. लेकिन तुम यह सब मुझे क्यों बता रहे हो?

तब सीड बोला- कंप्यूटर से वायरस साफ़ करने के बाद कौतुहल वश मैंने मेरी पत्नी द्वारा राजशर्मास्टोरीज के कई लेखिकाओं एवं लेखकों से करी गई अनगिनित ई-मेल वार्ताएं पढ़ीं. उन वार्ताओं एवं राजशर्मास्टोरीज पर उनसे सम्बंधित रचनाओं को पढ़ने के बाद मुझे कुछ विस्मय हुआ. लेकिन मैं सब से अधिक अचम्भित तब हुआ जब मैंने राजशर्मास्टोरीज पर जनवरी 2019 में प्रकाशित एक रचना

कामान्ध सोनी कि वासना की चाहत

को पढ़ा.

सीड की बात सुन कर मैंने उससे पूछा- ऐसा क्या था उस रचना में जिससे तुम अचम्भित हो गए?

उसने उत्तर दिया- वह रचना मेरी पत्नी के नाम से प्रकाशित हुई और उसमें वह खुद ही उसकी नायिका भी है.

मैं अचम्भित होते हुए बोला- अच्छा! इसका अर्थ है कि भाभी एक लेखिका भी हैं. क्या तुमने भाभी से बात करी और उन्हें बधाई दी?तुमने तो वह रचना पढ़ी तो होगी

 
सीड ने कहा- नहीं, अभी मैंने अपनी पत्नी से ना तो कुछ कहा और ना ही कुछ पूछा है क्योंकि उसने अभी तक इस बारे में मुझसे अपनी ओर से कोई भी बात नहीं करी है. अगर मैं उससे से कुछ पूछता हूँ तो वह समझेगी कि मैं उसके चरित्र पर संदेह करता हूँ इसलिए उसकी जासूसी करी है.

थोड़ा रुक कर सीड ने आगे कहा- मैंने वह रचना पढ़ी और जब उसका विश्लेषण किया तो वह भाषा एवं विवरण के हिसाब से बहुत अच्छी लगी. उसकी हिंदी भाषा इतनी अच्छी है इसका मुझे ज्ञान नहीं था. उसके लेखन में उस लेखक का हाथ भी होगा जिसने उस रचना को सम्पादित किया है. मैं मेरी पत्नी सोनाली उर्फ़ सोनी को बहुत ही अच्छे से जानता हूँ क्योंकि हमारी जान पहचान लगभग आठ वर्ष पहले हुई थी और पिछले चार वर्ष से हम पति पत्नी हैं. उस रचना में मेरी पत्नी ने अपने आप को बहुत ही अधिक कामुक एवं कामान्ध दिखाया है जबकि वास्तविक में वह ऐसी नहीं है. पिछले चार वर्ष के विवाहित जीवन में मैंने उसे कभी भी इतना आतुर नहीं देखा जितना कि उसने रचना में लिखा है.

मैंने सीड से पूछा- क्या तुमने अपनी पत्नी से यौन संसर्ग के बाद कभी आनन्द एवं संतुष्टि के बारे में पूछा या कोई बात की?

सीड बोला- हाँ, मैंने हर संसर्ग के बाद उससे यौन आनन्द एवं संतुष्टि के बारे में पूछा और कई बार इस बारे में खुल कर बात भी करी लेकिन उसने कभी भी शिकायत नहीं की है.

उसकी बात सुन कर मैं बोला- फिर तुम चिंतित किस बात पर हो? तुम्हें तो ख़ुशी होनी चाहिए की तुम्हारी पत्नी एक लेखिका बन गई है.

मेरी बात से सीड के चेहरे के भाव में कोई अंतर नहीं आया और वह गम्भीर स्वर में बोला- अगर सोनी ने उस काल्पनिक रचना में अपने स्थान पर किसी युवती को नायिका बनाया होता तो मैं उसके लेखन से बिल्कुल भी चिंतित नहीं होता. उसकी काल्पनिक रचना पढ़ने के बाद राजशर्मास्टोरीज के कई पाठकों ने बहुत ही अभद्र सन्देश भेजें हैं. उनमें से 90% पाठकों के संदेशों की भाषा से तो ऐसा प्रतीत होता था कि वे सब सोनी को एक पेशेवर वेश्या समझते हैं.

मैंने सीड को समझाने की कोशिश करते हुए कहा- अगर वह पाठक ऐसा समझते हैं तो उनकी अभद्र सोच का तुम क्या कर सकते हो? क्या तुम्हारा उनसे झगड़ा करने का इरादा तो नहीं है?

सीड ने तुरंत उत्तर दिया- मैं झगड़ा तो अवश्य करूँगा लेकिन दूसरी तरह का. मैं सोनी के जीवन में घटी एक सत्य घटना पर आधारित रचना लिख कर उन पाठकों के मन में सोनी के प्रति गलत धारणा को बदल दूँगा. मुझे विश्वास है कि मेरी रचना पढ़ने के बाद पाठक मेरी पत्नी को कामान्ध सोनी नहीं बल्कि सिर्फ कामुक सोनी की तरह जानेगें.

सीड के इरादे को जान कर मैंने कहा- क्या तुमने पहले कभी कोई रचना लिखी है? क्या तुम अपनी व्यस्त दिनचर्या में से ऐसी रचना लिखने के लिए समय निकल पाओगे?

वह बोला- कॉलेज की मासिक पत्रिका के कभी कभी कुछ लिखता था लेकिन उसे पत्रिका का संपादक ठीक कर के प्रकाशित करता था. मैं घटना के विवरण को तो ऑफिस में शाम को एक घंटा अतिरिक्त रुक कर लिख दूंगा. तुमने एक बार बताया था कि तुम कुछ रचना लिख कर प्रकाशित कर चुके हो तो क्या तुम मेरे रचना को सम्पादित करके प्रकाशित करवा दोगे?

सीड का अनुरोध सुन कर मैंने कहा- तुम ऑफिस में रुकने के बजाये जब भी समय हो मेरे घर पर मेरे कंप्यूटर पर उस रचना को लिख देना. मुझे जब भी समय मिलेगा मैं उसे अंश को सम्पादित कर दिया करूंगा.

मेरा सुझाव सुन कर सीड खुश हो गया और अगले दिन से उसने अपनी रचना लिखनी तथा मैंने सम्पादित करनी शुरू कर दी. तीन दिन के परिश्रम से सीड द्वारा लिखित एवं मेरे द्वारा सम्पादित उस रचना विवरण आप सब के लिए सीड के ही शब्दों में नीचे प्रस्तुत कर रहा हूँ:

 
राजशर्मास्टोरीज के आदरणीय पाठकों एवं पाठिकाओं को सदर प्रणाम!

मेरा नाम सिद्धांत सेन है, मेरी उम्र सताईस वर्ष है, मेरा कद पांच फुट दस इंच है, मैं दिखने मैं आकर्षक हूँ और एक हृष्ट-पुष्ट शरीर का मालिक भी हूँ.

मैं पुणे में स्थित एक बहुत बड़ी कम्पनी में नौकरी करता हूँ और अपनी पत्नी सोनाली, जिसे मैं सोनी कहता हूँ और आप सब उसे सोनी के नाम से जानते होंगे, के साथ उसी कम्पनी की आवास कॉलोनी में रहता हूँ.

आज से आठ वर्ष पहले मैं अपने जीवन के उस मुकाम पर था जब वह लड़कियां जो अपनी जवानी की देहलीज पर होती थी मुझे हमेशा बहुत आकर्षित करती थी.

उनका अल्हड़पन तथा कामुकता मुझे अनायास ही उनकी ओर खींच लेती थी क्योंकि उन लड़कियों के शरीर मैं आते हुए भराव के साथ साथ उनकी हर अदा प्राकृतिक होती थी और मैं उसे ही लड़की की असली जवानी मानता था.

मेरे संपर्क में आई अनेक लड़कियों में से सोनी ही ऐसी लड़की थी जो उन दिनों मेरे बहुत करीब होते हुए भी अपनी बुद्धिमत्ता के कारण मुझसे बहुत दूर हो गई थी.

आज मैं आप सबको सोनी एवं मेरे जीवन में घटी एक सच्ची घटना पर आधारित वह विवरण बताने जा रहा हूँ जो आठ वर्ष पहले घटा था.

उस समय मैं उन्नीस वर्ष का हुआ था तथा ग्रीष्म ऋतु की छुट्टियाँ थी, मैं इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था.

तब एक दिन जब मैं अपने कमरे मैं बैठा पढ़ाई कर रहा था तभी बाहर के दरवाजे की घंटी बजी और एक व्यक्ति ने पापा का नाम ले कर पुकारा.

मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा की बाहर पापा के एक बहुत ही पुराने मित्र राहुल जी खड़े थे और उनके साथ काले रंग की तंग जीन्स तथा सफ़ेद रंग की तंग टी-शर्ट पहने एक दुबली पतली लड़की थी.

मैंने उन दोनों का अभिनन्दन किया तथा उन्हें घर के अन्दर आने के लिए कहा, तब वह दोनों मेरे साथ बैठक में आ गए. मैंने उन्हें वहाँ बिठा कर अपनी मम्मी को उनके आने की सूचना दी तथा उनके लिए पानी लेने चला गया.

जब मैं पानी ले कर आया और उनको दिया तब राहुल जी मम्मी को बता रहे थे कि उनका स्थानांतरण भी हमारे ही शहर में हो गया था.

फिर राहुल जी ने बताया कि दो माह के बाद वह वहां के कार्य से भार-मुक्त हो कर पूरे परिवार सहित इसी शहर में आ जाएँगे इसीलिए अभी वह अपनी बेटी सोनी को कॉलेज में प्रवेश दिलाने के लिए आये थे.

राहुल जी और मम्मी के बीच में तो बातें चल रही थी और मैं मम्मी के पीछे खड़ा सोनी की ओर मुख किये उसे निहारता रहा.

सोनी का टी-शर्ट इतना तंग था कि उसके सीने के सामने का कपड़ा पूरा खिंचा जा रहा था और वक्ष पर वह एक सीधी रेखा की तरह नज़र आ रहा था.

मैंने जब सोनी के चेहरे को गौर से देखा तो पाया की वह हरे रंग की आँखों तथा एक लम्बे चेहरे वाली, बहुत ही गोरी रंग की, पतले शरीर की बहुत ही सुंदर लड़की थी., उसका वक्ष उभरा हुआ था लेकिन उसकी कमर बहुत ही पतली थी तथा कूल्हे सामान्य ही थे.

मेरे अनुमान से उस अठारह वर्ष की कामुकता से भरी लड़की के शरीर का आकार 34-26-34 था.

उसका बदन उसकी उम्र की लड़कियों के मुकाबले कुछ अधिक तंदरुस्त लग रहा था तथा उसकी टाँगें पतली और जांघें काफी सुडौल एवं शक्तिशाली लग रही थी.

उसकी चूचियां उठी हुई और बाहर की ओर उभरी हुई थी तथा इतनी मस्त लग रही थी कि मैं चाह कर भी अपनी नज़रें उनसे नहीं हटा पा रहा था.

उसकी प्यारी सी चूचियों को देख कर मेरा मन कह कर रहा था कि मैं उसके पास जा कर उसकी टी-शर्ट खींच कर उतार दूँ और उसके आमों का रस अच्छी तरह से चूस लूँ.

उसके नितम्ब थोड़े से बाहर को निकले हुए थे जो उसके शरीर की कामुकता को और भी अधिक प्रदर्शित कर रहे थे.

क्योंकि वे दोपहर के बाद आये थे इसलिए थोड़ी देर बाद राहुल जी तो आराम करने के लिए आतिथि कक्ष में जा कर सो गये लेकिन सोनी मेरी बहन साक्षी के साथ बातें करने लगी.

जून माह का प्रथम सप्ताह था और काफी गर्मी थी तथा मुझे भी नींद आ रही थी इसलिए मैं भी अपने कमरे में सोने चला गया.

शाम को जब सोकर उठा तब मैंने देखा की सोनी साक्षी के शयनकक्ष में बैठी अपने कॉलेज का प्रवेश पत्र भर रही थी लेकिन साक्षी अपने कक्ष में नहीं थी.

उस समय सोनी के सिर के बाल खुले हुए थे और उसके गीले बालों को देख कर मैंने अनुमान लगाया की की वह अभी अभी नहा कर आई थी.

उसके बाल बहुत लम्बे लग रहे थे लेकिन क्योंकि वह बैठी हुई थी इसलिए यह मेरा केवल अनुमान ही था.

अगर वह खड़ी होती तो बालों की लम्बाई का सही में पता लगता लेकिन अनुमान के हिसाब से सोनी के बाल उसके नितम्बों तक तो ज़रूर आते होंगे.

क्योंकि उस समय कक्ष का वातानुकूलक चल रहा था और उसे ठंडक महसूस हो रही होगी इसलिए उसने एक चादर ओढ़ी हुई थी.

मैंने उसकी ओर देखा और बाथरूम की तरफ चलने को मुड़ा ही था तभी उसने अपनी चादर हटाई और मैंने तब देखा कि उसने एक सफ़ेद रंग की स्कर्ट पहनी हुई थी. वह स्कर्ट उसके घुटनों तक ही आ रही थी और जैसे ही वह बैड से उठने लगी तब उसकी स्कर्ट खिंच कर उसकी जाँघों तक उठ गई थी.

इतनी गोरी जांघें तो मैंने उस दिन तक किसी की भी नहीं देखी थी इसलिए मेरी तो हालत खराब होने लगी उम्म्ह… अहह… हय… याह… और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था.

उसकी बाईं जांघ पर एक तिल भी था जो उसकी जाँघों की खूबसूरती पर चार चाँद लगा रहा था.

 
उस समय मेरा दिल तेज़ी से धड़क कर रहा था और मेरा मन कह रहा था कि मैं उसकी जाँघों पर शहद गिरा कर उन्हें चाटना शुरू कर दूँ.

स्कर्ट के ऊपर उसने गुलाबी रंग का एक ढीला सा टॉप पहन रखा था और वह कुछ सोच रही थी.

थोड़ी देर खड़े रह कर कुछ सोचते हुए वह फिर बैड पर बैठ गई और अपने सिर को पीछे की ओर करते हुए आँखें बंद कर ली तथा अपने पैरों को लटका कर बैड पर लेट गई.

लेटे लेटे वह अपनी टांगों को हवा मैं ऊपर नीचे कर रही थी और यह सब मैं दरवाज़े की ओट से चुपचाप देख रहा था.

जब भी वह टाँगे ऊपर करती तब उसकी स्कर्ट टांगों से थोड़ी ऊपर की ओर सरक जाती और मुझे उसकी ब्लैक पैंटी और उसके गोल गोल नितम्ब दिख जाते.

उसकी त्वचा एक बच्ची की त्वचा जैसी मुलायम दिख रही थी और उसके नितम्ब एकदम गुलाबी थे.

इस मनमोहक दृश्य को देख कर मेरा लिंग पूरे तनाव में आ गया था और मुझे ऐसा लगने लगा था की अगर मैं कुछ देर और सोनी को देखता रहा तो अत्यधिक तनाव तथा उत्तेजना के कारण मेरे लिंग की नसें फट जायेंगी.

मेरी इस उत्तेजना को उसने तब और बढ़ा दिया जब उसने करवट ली तथा दरवाज़े की ओर अपने नितम्ब करके पेट के बल पट होकर लेट गई.

अब उसकी स्कर्ट उसके आधे नितम्बों को ही ढक पाने में ही सक्षम थी इसलिए उसके बाकी के आधे नितम्ब मेरे दर्शन के लिए आज़ाद हो गये थे.

यह नज़ारा देख कर मैं पागल हो उठा और मुझसे सीधा खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था.

मेरा मन तो कर रहा था कि मैं दरवाजा खोल कर कमरे में घुस जाऊं और अपने लिंग को अपनी पैंट में निकाल कर उसके पीछे से ही उसकी योनि में घुसेड़ दूं.

मैंने जैसे तैसे अपने आप को नियंत्रण में किया क्योंकि मेरा यह मानना है कि जब तक दोनों तरफ से बराबर की आग न लगी हो तब तक यौन संसर्ग में कुछ भी आनन्द नहीं आता है.

इसलिए मैंने अपनी उत्तेजित वासना की शांति के लिए बाथरूम में जाकर हस्तमैथुन किया और लालसा की पूर्ति के लिए एक योजना बनाने एवं उसे कार्यान्वित करने के बारे में सोचने लगा.

रात को खाना खाने के बाद राहुल जी और पापा बैठक में बैठे बातें कर रहे थे तथा सोनी दीदी के कमरे में चली गई थी. मुझे पूरा विश्वास था कि उस समय साक्षी कमरे में नहीं होगी क्योंकि रात के समय वह छत पर अपनी सहेलीयोसे फ़ोन पर घंटों बातें किया करती थी.

मैंने कमरे के दरवाजे की ओट से छुप कर देखा कि सोनी दीदी के साथ वाले बैड पर कुछ पढ़ने में व्यस्त थी.

अच्छा अवसर देख कर मैं कमरे में एक बहाने से घुसा और घुसते ही बोला- दीदी, आपने मेरी नीले रंग की कमीज़ देखी है क्या? मुझे कल कोचिंग क्लास में पहन कर जानी है.

क्योंकि दरवाज़ा भिड़ा हुआ था इसलिए मैंने उसे खोलते वक़्त ही जल्दी से ऐसा बोला था ताकि सोनी को लगे कि मुझे मालूम नहीं था कि दीदी शयनकक्ष मैं है या नहीं.

मेरी आवाज़ सुन कर सोनी उठ कर बैठ गई और उसने मेरी ओर देखते हुए बोली- दीदी तो कहीं गई हुई हैं, शायद ऊपर छत पर गई होगी.

मैं जब ओके कह कर मुड़ा और अपने कमरे की ओर जाने लगा तभी सोनी ने मुझसे पूछा- आप कौन से स्कूल में पढ़ते हैं?

मुझे तो ऐसे ही मौके की तलाश थी जिससे मुझे उसके साथ बात करने का मौका मिले इसलिए मैं वहीं रुक गया और उसे उत्तर दिया- मैंने स्कूल की पढ़ाई समाप्त कर ली है और अब मैं इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा हूँ.

उस समय सोनी दीदी के बैड के साथ वाले बिस्तर पर आलथी-पालथी मार कर बैठी कोई पत्रिका पढ़ रही थी.

उसने हलके गुलाबी रंग की नाइटी पहने हुए थी जिस के किनारों पर बहुत ही खूबसूरत फूलों की बेल की कढ़ाई की हुई थी.

उस बैड के बगल में ही दीदी की पढ़ने की मेज एवं कुर्सी थी जिस पर कुछ और पत्रिकाएं भी पड़ी थी.

क्योंकि मेरे मन में सोनी से कुछ देर बात करने की मंशा थी इसलिए मैंने उन पत्रिकाओं को उठाते हुए उससे पूछा- क्या तुमने ये सब पढ़ ली हैं?

सोनी ने मेरी ओर देखते हुए कहा- नहीं, मैंने तो अभी इनको हाथ भी नहीं लगाया है, दीदी इन्हें मेरे पढ़ने के लिए अभी अभी यहाँ पर रख कर गई है.

तब मैंने उन पत्रिकाओं को मेज पर कुछ इस तरह से पटका कि वह मेज पर रखे पेन-स्टैंड से टकरा गई और उसे गिरा दिया तथा उसमें रखे सभी पेन-पेंसिल नीचे फर्श पर बिखर गए.

इससे पहले कि मैं उनको उठाने के लिए झुकता, सोनी फुर्ती से आगे झुकी और उन पेन-पेंसिलों को बटोरने लगी.

क्योंकि उसकी नाइटी का गला काफी ढीला था इसलिए उसके आगे झुकने के कारण नाइटी का गला नीचे की ओर लटक गया और मुझे उसमे से उसके शरीर की सुन्दरता का एक अदभुत दृश्य देखने को मिला.

कमरे में लगी टयूब-लाईट की दूधिया रोशनी में मुझे उसकी नाइटी के लटके हुए गले में से उसकी दोनों उभरी हुई, कोमल लेकिन दृढ़ और सख्त चूचियां तथा उन पर लगी बादामी रंग की नुकीली एवं कड़क चूचुक दिखाई दी.

सोनी उस समय नाइटी के नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी इसलिए मुझे उसकी चूचियों के खुले दर्शन हो गए थे. उन चूचियों को और भी नज़दीक से देखने के लिए मैं भी उसके पास नीचे फर्श पर बैठ कर पेन पेंसिलें बटोरने में मदद करने लगा. मेरा ध्यान सामान बटोरने में कम था और सोनी की बहुत ही गोरी चूचियों को देखने में अधिक केन्द्रित था, इसलिए बार बार मेरा हाथ उसके हाथ से टकरा जाता था.

उन कुंवारी गोरी चूचियों को इतने नज़दीक से देख कर मेरा मन डोलने लगा था और मेरी इच्छा हुई की मैं उसी समय उन्हें पकड़ कर मसल दूँ तथा उनका सारा रस चूस लूँ.

लेकिन किसी तरह मैं अपने को नियंत्रण में रखते हुए वहां से उठ खड़ा हुआ और मन ही मन दृढ निश्चय कर लिया था कि मैं जल्द ही उन चूचियों को चूस चूस कर उनका सारा रस निचोड़ कर अवश्य ही पियूँगा.

इधर मेरा लिंग एक झंडे के खम्बे की तरह खड़ा हो कर मेरे पजामे को तम्बू की तरह बना दिया था.

अब मेरे उस सात इंच लम्बे और ढाई इंच मोटे खम्बे को सोनी की उस गुफा की तलाश थी जिसमें वह अपना झंडा गाड़ सके.

 
मैं उस उत्तेजित हालत में अपने कड़क लिंग को छुपाता हुआ वहां से तुरंत अपने कक्ष की ओर भागा और गुसलखाने में जा कर ही सांस ली.

वहाँ मैंने आँखें बंद करके सोनी के उरोजों की छवि को देखते हुए अपने लिंग को शांत करने के लिए हस्त-मैथुन किया.

जब मैं गुसलखाने से बाहर निकला तब मैंने सोनी को अपने कक्ष से बाहर जाते हुए देखा तो मैं अपने कक्ष में बैठ कर उसके वापिस आने की प्रतीक्षा करने लगा.

काफी देर हो जाने पर जब सोनी नहीं लौटी तब मैंने सोचा कि उसे देख कर आता हूँ कि वह कहाँ चली गई थी.

मैंने बाहर गलियारे में देखा लेकिन वहां पर कोई भी दिखाई नहीं दिया, तब मुझे लगा कि शायद वह छत पर चली गईं होगी.

क्योंकि दीदी पहले से ही छत पर थी इसलिए मैंने ऊपर जाना ठीक नहीं समझा और सोनी की तलाश छोड़ कर अपने कमरे में सोने चला गया.

मुझे कोचिंग क्लास के लिए जाना था इसलिए मैं सुबह सात बजे उठ कर तैयार हुआ और कोचिंग सेंटर चला गया.

दोपहर एक बजे जब घर वापिस आया तब मुझे सोनी की याद आई और मैंने उसे पूरे घर में घूम कर ढूंढा पर वह कहीं भी दिखाई नहीं दी.

जब मुझे घर में राहुल जी भी दिखाई नहीं दिए तब मैंने अनुमान लगाया की शायद वह दोनों कॉलेज में सोनी के प्रवेश की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए गए हुए होंगे.

क्योंकि माँ और दीदी से सोनी के बारे कुछ भी पूछना मुझे ठीक नहीं लगा इसलिए मैं चुपचाप अपने कमरे में जा कर बैठ गया.

दो बजे बाहर के दरवाज़े की घंटी बजी तब मैंने दौड़ कर दरवाज़ा खोला तो वहां राहुल जी और सोनी को खड़े पाया.

वे दोनों अन्दर आये और सीधा अतिथि-कक्ष में चले गए और मैं मम्मी को उनके आने की सूचना देने चला गया.

मम्मी ने तुरंत उठ कर उन दोनों को पानी पिलाया और फिर उन्हें खाने के लिए भोजनकक्ष में आने के लिए कह कर रसोई में चली गई.

जब मैं उन दोनों को खाने के लिए बुलाने के लिए अतिथि-कक्ष में गया तब देखा की राहुल जी अपना सामान बाँध रहे थे.

मेरे पूछने पर उन्होंने बताया की जिस काम के लिए आये थे वह तो हो गया था अब बाकी की सारी प्रक्रिया के लिए उनकी आवश्यकता नहीं थी तथा उसे सोनी खुद पूरी कर लेगी.

मैंने मम्मी की सहायता के लिए खाने की मेज़ पर प्लेटें सजा दी तथा हम सब ने साथ बैठ कर खाना खाया.

खाना खाते समय राहुल जी ने बताया कि वे शाम की साढ़े पांच बजे की गाड़ी से वापिस अपने घर चले जायेंगे. उन्होंने यह भी बताया कि सोनी को कुछ दिनों के लिए हमारे घर पर ही छोड़ जायेंगे क्योंकि उसके कॉलेज के प्रवेश का परिणाम एक सप्ताह बाद ही पता चलेगा.

उन्होंने कहा- भाभी जी, मैंने भाई साहिब से बात करी थी की सोनी को जिस किसी कॉलेज में प्रवेश मिलेगा उसके दाखिले की सभी प्रक्रिया पूरी करने तक तो उसे आपके घर रहना पड़ेगा. मुझे आशा है कि इसमें आपको कोई आपत्ति नहीं होगी. दाखिले की प्रक्रिया समाप्ति के बाद मैं आ कर उसे वापिस अपने घर ले जाऊँगा.

माँ ने तुरंत उत्तर दिया- नहीं भाई साहब, इसमें परेशानी की क्या बात है. मेरे लिए जैसी साक्षी है, वैसी ही सोनी है.

रमण जी के मुख से यह सुखद समाचार सुन कर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई क्योंकि मुझे पूरी आशा थी कि इन कुछ दिनों में मुझे सोनी के कामुक जिस्म के खुले दर्शन का मौका ज़रूर मिल जाएगा.

शाम पांच बजे मैं राहुल जी को अपनी बाईक पर बैठा कर स्टेशन ले गया और उन्हें साढ़े पांच बजे की गाड़ी पर चढ़ा कर वापिस घर आया.

कहानी जारी रहेगी.

 
शाम को मैं सोनाली के पापा को बाईक से स्टेशन ले गया और गाड़ी पर चढ़ा कर घर आया. वापिस आने के बाद मैंने देखा कि दीदी तैयार होकर अपनी सहेली से मिलने के लिए बाहर चली गई थी और माँ रसोई में काम कर रही थी.

मैंने सोनी को दीदी के कमरे में बैठे देखा तो काफी देर तक उसके साथ बातें करता रहा और फिर वहां से उठ कर ऊपर छत पर चला गया.

मुझे छत पर आये दस मिनट ही हुए थे कि सोनी भी छत पर आ कर एक छोर से दूसरे छोर तक टहलने लगी और मैं मुंडेर पर बैठा उसे निहारता रहा.

जब वह मेरे सामने की ओर से आ रही होती थी तब उसकी चूचियों की और जब वह वापिस जा रही होती थी तब उसके नितम्बों की बनावट निहारने को मिल जाती थी.

मैं उस नज़ारे को देखने में मग्न था, जब माँ की आवाज़ आई- सोनी, ताज़ा पानी आ गया है और बाथरूम भी खाली है इसलिए तुम जल्दी से जा कर नहा लो.

माँ की आवाज़ सुन कर सोनी नीचे चली गई और मैं छत की मुंडेर पर बैठा कुछ देर पहले के बीते लम्हों को याद करने लगा.

लगभग पांच मिनट के बाद माँ ने मुझे आवाज़ दे कर कहा- सीड, मैं तरकारी भाजी लेने के लिए बाज़ार जा रही हूँ, तुम बाहर का दरवाज़ा बंद का लो.

‘अच्छा माँ… कहता हुआ मैं भाग कर नीचे गया और बाहर का दरवाज़ा बंद कर के नहाती हुई सोनी को देखने के लिए सीधा बाथरूम के बाहर पहुँचा.

शायद उस दिन मेरा भाग्य बहुत ही बलवान था क्योंकि मैंने देखा बाथरूम का दरवाज़ा आधा खुला हुआ था. हमारे बाथरूम के दरवाज़े को चिटकनी बहुत सख्त होने के कारण शायद सोनी उसे ठीक से लगा नहीं सकी होगी इसलिए वह खुला रह गया था.

मैंने थोड़ा ओट में होकर बाथरूम में झाँका तो देखा कि उस आधे खुले दरवाज़े से अनभिज्ञ नग्न सोनी आँखें बंद किये एक हाथ से अपने स्तनों को मसल एवं दूसरे हाथ से अपने योनि की भगनासा को सहला रही थी.

मैंने तुरंत अपना मोबाइल फ़ोन निकाला और उस आनन्दायक, आकर्षक तथा महत्वपूर्ण दृश्य की वीडियो बनाने लगा. वीडियो बनाते हुए मैं मन्त्रमुग्ध सोनी के नग्न शरीर की सुन्दरता एवं उसके द्वारा की जा रही क्रिया को देख रहा था, तभी उसके मुहं से एक सिसकारी निकली ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

URL]


उसने अपनी टांगें आगे की ओर फैलाते एवं अकड़ाते हुए अपने हाथ को बहुत तीव्रता से हिलाते हुए अपनी भगनासा को सहलाने लगी.

दो मिनट की इस क्रिया के बाद उसके मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकली और उसने अपनी टाँगें भींच कर कुछ क्षणों के लिए स्थिर हो गई.

उसका शरीर पसीने से भीग गया और टांगें निढाल हो कर फ़ैल गई तथा उसकी योनि में से उसके रस की बूँदें बाथरूम के फर्श पर टपकने लगी.

जैसे ही उसके शरीर में जान आई तब उसने जल्दी से एक मग में पानी ले कर अपनी योनि को अच्छे से मल कर धोया और बाथरूम के फर्श पर गिरे रस पर पानी डाल कर नाली में बहा दिया.

फिर सोनी ने अपने बाल समेट का सिर के ऊपर जूड़ा बना दिया और उठ कर शावर चला कर नहाने लगी.

URL]


बाथरूम की दूधिया रोशनी में उसका पानी से भीगा शरीर बिल्कुल एक सफ़ेद संगमरमर की तराशी हुई मूरत की तरह चमक रहा था.

मैं नग्न सोनी को देखने एवं वीडियो बनाने में इतना मग्न हो गया था कि मुझे पता ही नहीं लगा कि मैं कब बाथरूम के दरवाज़े की ओट से निकल कर उसके सामने पहुँच गया था.

नहाने के बाद सोनी शावर बंद कर के दरवाजे के पीछे टंगे तौलिये को लेने के लिए जैसे ही घूमी और मुझे देखा तो एक चीख मार कर अपने गुप्तांगों को छुपाती हुई फर्श पर बैठ गई.

सोनी की चीख सुन कर मैंने चौंकते हुए तुरंत अपना मोबाइल फ़ोन अपनी जेब में छुपा लिया और दरवाज़े के पीछे टंगे तौलिये को उतार कर उसके शरीर पर डाल कर बाथरूम से बाहर निकल गया.

बाथरूम से निकल कर मैं सीधा अपने कमरे में गया और अपने मोबाइल को अपने लैपटॉप से जोड़ कर सोनी के उस वीडियो को उस पर स्थानांतरित कर के अपने मोबाइल फ़ोन को खाली कर दिया.

मुझे आशा थी कि उस घटना के बाद सोनी कपड़े बदल कर मुझसे झगड़ा करने के लिए मेरे कमरे में आएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि कुछ देर के बाद ही माँ तरकारी ले कर वापिस आ गई थी.

उसके बाद घर में सब समान्य ही चलता रहा और रात दस बजे घर के सभी सदस्य तो घोड़े बेच कर सो गए लेकिन मैं सो नहीं सका क्योंकि नग्न सोनी के दृश्य मेरी आँखों के आगे घूम रहे थे.

 
मैं सुबह देर से उठ कर बैठक में गया तो देखा कि पापा और दीदी काम पर जा चुके थे और सोनी रसोई के काम में माँ का हाथ बटा रही थी.

मैं माँ को पुकारता हुआ जब रसोई में घुसा तब मुझे देखते ही सोनी चुपचाप रसोई से बाहर चली गई.

मुझे रसोई में देखते ही माँ बोली- बेटा, क्या बात है तबियत तो ठीक है? आज बहुत देर से उठा है.

मैंने कहा- मैं ठीक हूँ माँ, रात नींद देर से आई थी इसलिए उठने में थोड़ी देर हो गई.

मेरी बात सुन कर माँ ने कहा- चल जल्दी से मुहं हाथ धो ले और दांत साफ़ कर के आजा. मैं तब तक तुम्हारे लिए चाय नाश्ता बना देती हूँ.

मैं उन्हें ‘अच्छा’ कह कर रसोई से बाहर आया और बाथरूम से जा कर दांत साफ़ किये, हाथ मुंह धोकर तरोताज़ा होकर जब बैठक में आया तो सोनी को बैठक में खड़े देखा.

मेरे डाइनिंग टेबल पर बैठते ही माँ चाय नाश्ता दे गई और जब मैं नाश्ता कर रहा था तब मुझे महसूस हुआ कि शायद सोनी मुझ से कुछ कहना चाहती है.

इस जिज्ञासा से की वह मुझे क्या कहती है, मैंने उसकी ओर देखा लेकिन वह हल्का सा मुस्करा कर बैठक से बाहर दीदी के कमरे में चली गई.

मैं असमंजस में चाय नाश्ता करके जब अपने कमरे में जाने लगा तब देखा कि माँ कपड़े धोने और नहाने के लिए बाथरूम में जा रही थी.

मेरे अनुभव के अनुसार माँ एक घंटे के बाद ही बाथरूम से नहा कर ही निकलेगी इसलिए अपने कमरे में जाने के बजाये दीदी के कमरे में चला गया.

वहां एक बिस्तर पर सोनी आधी लेटी तथा आधी बैठी कुछ सोच रही थी और मुझे कमरे में प्रवेश करते देख कर वह उठ कर बैठ गई.

मुझे उसके चेहरे पर संकोच का आभास हो रहा था क्योंकि शर्म से चेहरा लाल हो रहा था लेकिन उसकी झुकी हुई नज़रें मुझे कुछ कहने की कोशिश कर रही थी.

मैंने दूसरे बिस्तर पर बैठते हुए उससे पूछा- तुम यहाँ कमरे में अकेले बैठे क्या कर रही हो? मुझे तुम कुछ चिंतित दिख रही हो, क्या बात है?

उसने बहुत ही दबी आवाज़ में मुझसे कहा- कृपया कल वाली घटना किसी को बताना नहीं और आपने जो वीडियो बनाई है वह अपने फ़ोन से मिटा दीजिये.

मैंने बिना उसके ओर देखे कहा- किसी भी मूल्यवान वस्तु या दस्तावेज़ को नष्ट नहीं किया जाता बल्कि उसे सुरक्षित रखने के लिए उसे बैंक के लॉकर में रखते है. मेरा सुझाव है कि तुम्हें भी तुम्हारी कल शाम की बाथरूम में क्रिया की मूल्यवान यादें एवं उनकी छवि को नष्ट नहीं करना चाहिए तथा उसे सुरक्षित रखना चाहिए.

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मैंने कहा- मैं तुम्हारी उन मूल्यवान यादों एवं उनकी छवि को नष्ट नहीं करके अपने बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखने के लिए तैयार हूँ. इस के एवज में जैसे बैंक हर सुरक्षित लॉकर के लिए थोड़ा किराया लेता है मुझे भी उसी प्रकार तुमसे कुछ किराया मिलने की आशा है.

मेरी बात सुन कर सोनी कुछ देर के लिए चुप रही और फिर बोली- तुम कैसी बात कर रहे हो? अभी तो मेरी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई है और ना ही मैं कोई नौकरी करती हूँ. इन हालत में मैं तुम्हें किराया कैसे दे सकती हूँ?

सोनी की बात सुन कर मैंने कहा- बैंक के लॉकर का तो मैंने सिर्फ तुम्हें एक उद्धारण दिया था. मैंने तुम्हें किराया चुकाने के लिए धन देने के लिए नहीं कह रहा हूँ.

मेरा उत्तर सुन कर सोनी ने असमंजस में पूछा- तो फिर तुम क्या कहना चाहते हो? अगर किराया धन में नहीं तो मैं तुम्हें किराए में क्या चाहिए?

मैंने झट से कह दिया- मैं तुम्हें एक बार फिर से उसी रूप में पूर्णतः निर्वस्त्र देखना चाहता हूँ जैसी तुम बाथरूम में थी. क्या तुम किराये में मेरी यह इच्छा पूर्ण करोगी?

मेरी बात सुन कर सोनी कुछ क्षणों के लिए स्तब्ध हो गई और फिर अपने को नियंत्रण में करती हुई कहा- तुम यह क्या कह रहे हो? क्या तुम मुझे ब्लैक मेल कर रहे हो?

मैंने तुरंत उत्तर दिया- मैं तुम्हें ब्लैक मेल नहीं कर रहा हूँ. ना ही मैंने तुमसे पैसों की मांग करी है और ना ही कोई जोर ज़बरदस्ती की है तथा ना ही कोई धमकी दी है. तुम्हें मेरी आवशयकता है इसीलिए तुमने मुझसे उस मूल्यवान वस्तु को नष्ट करने की मांग करी है.

मेरी बात सुन कर वह चुप हो गई और आँखें निकाल कर मुझे घूर कर देखने लगी, तब मैंने उससे पूछा- क्या मैं जान सकता हूँ कि जिस बात को तुम गुप्त रखने के लिए कह रही हो वह क्रिया तुम बाथरूम में क्यों कर रही थी?

 
मेरा प्रश्न सुन कर सोनी सकपका गई और बोली- तुम्हें उस बारे में कुछ भी जानने की ज़रुरत नहीं है. तुम सिर्फ इतना बताओ कि मेरे राज़ को गुप्त रखने और उस वीडियो को मिटाने के लिए तुम्हें क्या चाहिए?

मैंने फिर अपनी मांग दोहरा दी- मैं तुम्हें एक बार फिर से उसी रूप में पूर्णतः निर्वस्त्र देखना चाहता हूँ जैसी की तुम बाथरूम में थी. क्या तुम किराये में मेरी यह इच्छा पूर्ण करोगी?

images


इस बार सोनी बोली- इस बारे में सोच कर ही उत्तर दूंगी लेकिन आशा रखती हूँ कि जब तक मैं उत्तर नहीं दे देती तब तक तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे जिससे मेरे लिए कोई दुविधा खड़ी हो जाए.

मैंने उत्तर में कहा- ठीक है, मैं आश्वासन देता हूँ कि मेरे अनुरोध का तुम्हारे द्वारा उत्तर देने तक मैं इस बारे में किसी से भी बात नहीं करूँगा.

अगले दो दिनों तक घर में जब भी मेरा सामना सोनी से होता तो वह कन्नी काट कर माँ के पास या दीदी के पास भाग जाती.

तीसरे दिन सुबह सोनी को कॉलेज में दाखिले के परिणाम के बारे में पता करने जाना था तब माँ ने मुझे उसके साथ जाने के लिए कहा.

मैं माँ के आदेश सुन कर बहुत ही आनन्दित हो उठा और सोनी को अपनी बाइक पर बिठा कर कॉलेजों में गया.

सोनी को तीनों कॉलेज में दाखिला मिल गया था इसलिए वह बहुत खुश थी और उस ख़ुशी को मनाने के लिए मैंने उसे यूनिवर्सिटी के कॉफ़ी हाउस चलने के लिए कहा तो वह मान गई.

कॉफ़ी हाउस के एक कोने की मेज़ पर बैठ कर हम दोनों जब कॉफ़ी का मजा ले रहे थे, तब मैंने सोनी की आँखों में आँखें डाल कर पूछा– सोनी, दो दिन से ऊपर हो गए है लकिन तुमने अभी तक मेरे अनुरोध का कोई उत्तर नहीं दिया?

सोनी ने मेरे प्रश्न के उत्तर में कहा- देखो मैं अभी अपने दाखिले को ले कर बहुत चिंचित थी इसलिए तुम्हारे किसी भी अनुरोध पर कोई विचार ही नहीं किया है. अब क्योंकि मेरी चिंता दूर हो गई है इसलिए अब मैं घर चल कर विचार करके तुम्हें उत्तर दे दूंगी.

मैंने उत्सुकता से पूछा- तुम्हारा उत्तर कब मिलेगा?

सोनी ने भोला सा चेहरा बनाते हुए कहा- मैं रास्ते में सोच कर निर्णय ले लूंगी और घर पहुँचते ही तुम्हें बता दूंगी.

उसकी बात सुनते ही मेरे मुहं से निकला- क्यों मज़ाक कर रही हो?

लेकिन सोनी ने मेरी बात का कोई उत्तर नहीं दिया और मुस्कराते हुए अपनी कॉफ़ी समाप्त करके घर चलने के लिए उठ खड़ी हुई.

images


घर पहुँचने पर बाहर के दरवाज़े पर ताला लटका देख कर सोनी परेशान हो गई लेकिन मैंने तुरंत बाइक की चाबियों के गुच्छे में उस ताले की अतिरिक्त चाबी से द्वार खोल दिया.

घर के अंदर जाकर जब मैंने माँ से फोन पर बात करी तब उन्होंने बताया कि उन्हें अचानक ही साथ के घर वाली आंटी के साथ हॉस्पिटल में आना पड़ा था.

माँ ने यह भी बताया कि उन्होंने मुझे फोन किया था पर उन्हें मेरा फोन बंद मिला इसलिए बात नहीं हो सकी और उन्हें वापिस आने में लगभग दो घंटे लग सकते हैं.

मैं उस सुनहरे अवसर का एक क्षण भी व्यर्थ नहीं करना चाहते था इसलिए तुरंत दीदी के कमरे में पहुँच गया. वहाँ देखा कि सोनी कपड़े बदल कर हलके नीले रंग की टी-शर्ट और गहरे नीले रंग के लोवर पहने बिस्तर पर लेटी कॉलेज से मिले परिणामों के बारे में अपने पापा को बता रही थी.

मैंने कुछ देर तक प्रतीक्षा की और जैसे ही सोनी ने फ़ोन बंद किया मैं उसके पास जा कर बैठ गया और उसकी आँखों में आँखें डाल कर पूछा- सोनी, मुझे आशा है कि रास्ते में तुमने मेरे अनुरोध पर विचार कर लिया होगा. तो बताओ तुम्हारा उत्तर क्या है?

सोनी ने मेरे प्रश्न का उत्तर देने के बजाय अपना फ़ोन उठा कर उसमे कुछ देर बटन दबाती रही और फिर मुझे थमा दिया.

मैंने जब उसके फ़ोन में देखा तो भौंचक्का सा रह गया क्योंकि उसमें एक वीडियो चल रहा था जिसमें मैं बाथरूम में नग्न खड़ा माँ, दीदी एवं सोनी की ब्रा और पैंटी को बारी बारी से सूंघ रहा था.

कुछ देर उन कपड़ों को सूंघने के बाद मैंने दीदी और सोनी की ब्रा पहनने की कोशिश करी लेकिन छोटी होने के कारण उतार कर एक ओर रख दी.

फिर मैंने माँ की ब्रा को पहना जो मुझे फिट आ गई और तब उसी अवस्था में हस्तमैथुन करते हुए अपने वीर्य को तीनों की पेंटी में गिरा दिया.

URL]


उसके बाद मैं माँ की ब्रा को उतार दिया और अपने लिंग पर लगे वीर्य को दीदी एवं सोनी तथा माँ की ब्रा से पौंछ कर नहाने लगा.

वीडियो के समाप्त होते ही मैंने विस्मय से सोनी को देखा और पूछा- यह क्या है?

इससे पहले कि मैं उस वीडियो को फ़ोन से मिटाता, सोनी ने शेरनी की तरह झपटा मारते हुए मेरे हाथ से अपना फ़ोन छीन लिया और बोली- यह तुम्हारे अनुरोध का उत्तर है.

मैंने फिर प्रश्न किया- तुम कहना क्या चाहती हो?

सोनी ने उत्तर दिया- मैं तुम्हारी किस भी बात को मानने को तैयार नहीं हूँ और तुम्हारे अनुरोध को एक सिरे से ठुकराती हूँ. मैं तुम्हें चेतावनी भी देती हूँ कि अगर तुमने मेरी वीडियो का कोई गलत प्रयोग किया तो मैं तुम्हारी यह वीडियो तुम्हारी माँ, पापा और दीदी को दिखा दूंगी.

सोनी की चेतावनी सुनने के बाद मैं उसे बिना कुछ कहे वहां से सिर झुकाए अपनी हार पर झल्लाता हुआ अपने कमरे में चला गया.

अगले दिन राहुल जी आये और कॉलेज में दाखिले की प्रक्रिया को पूरा करके सोनी को अपने साथ ले कर चले गए और मैं अपने खाली हाथ मलता रह गया.

मेरे प्रिय राजशर्मास्टोरीज के पाठको, यह थी मेरे एवं सोनी के जीवन में घटी वह सत्य घटना जिसे मैंने आपके इसलिए साझा करी है ताकि सोनी के बारे में बनी आपकी धारणा बदल सकूँ.

मेरी सोनी कामुक अवश्य है लेकिन कामान्ध सोनी बिल्कुल नहीं है और उसकी कामुकता मुझे बहुत प्यारी लगती है तथा मुझे उसकी बुद्धिमता एवं साहस पर बहुत गर्व भी है.

ऊपर लिखी घटना घटने के चार वर्ष बाद जब सीड इंजीनियरिंग की परीक्षा पास करके पुणे में नौकरी करने लगा तब उसके मम्मी पापा ने सोनाली के माता पिता के आग्रह एवं अनुरोध पर उसकी शादी सोनाली से कर दी.जिसमे खुद सोनाली की भी इच्छा थी क्यों कि उसके बाद भी वह दोनो बहुत सारे फैमिली फंक्शन में मिले थे और वहां सीड की शराफत देखकर वह उससे प्रभावित हुई थी और सीड ने कोई भी हल्की हरकत नही की थी.

मैं पिछले चार वर्ष से उन दोनों के संपर्क में हूँ और दावे के साथ कह सकता हूँ कि सोनाली भाभी कामुक ज़रूर हैं लेकिन वह कामान्ध सोनी तो बिल्कुल नहीं है.

उन दोनों की जोड़ी एक आदर्श जोड़ी है और वे दोनों एक दूसरे के प्रति वफादार एवं निष्ठावान भी हैं.

 
Back
Top