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लेखिका:-सोनाली सोनी
मेरा परिचय बहुत संक्षिप्त सा है, सोनाली… जिसे प्यार से सभी सोनी कहते हैं.
मैं 26 वर्षीया सामान्य कद की, रंग गेहुँआ, कजरारी आँखों वाली, मझोले आकार के स्तन और उभरे नितम्ब वाली शादीशुदा गृहणी हूँ. मेरे पति सिद्धांत अच्छी नौकरी में हैं.उन्हें सब, मैं भी सीड कहते है.
हम लोग शहर में किराये के फ्लैट में रहते हैं, शादी को तीन साल हो चुके हैं, अभी कोई बच्चा नहीं चाहते हैं.
मेरा ससुराल पास ही के गांव में है.
मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते और भरपूर यौन संतुष्टि भी देते हैं.
पति के नौकरी पर जाने के बाद सभी गृहकार्यों से निवृत होकर कम्प्यूटर पर नेट चलाती और समय व्यतीत करती रहती हूँ.
झाड़ू, पौंछा, बर्तन और कपड़े धोने के लिए बाई आती है.
मैं राजशर्मास्टोरीज की सेक्स कहानियाँ नियमित पढ़ती हूँ और इनको पढ़कर उत्तेजित और आनन्दित होती रहती हूँ.
कहानियों को पढ़ते समय मेरी योनि हमेशा तर हो जाती है, लगता है कि जैसे मेरी योनि से ख़ुशी के आंसू बह रहे हों.
इन कहानियों को पढ़ कर हमेशा मेरे मन में यह लालसा उत्पन्न होती कि कैसे एक पुरुष या महिला कई कई लोगों से यौन सम्बन्ध बनाकर विभिन्न तरीकों से मजे लूटते हैं.
कभी सोचती कि मैं भी ऐसा ही कुछ कर लूँ और मेरी भी कोई कहानी राजशर्मास्टोरीज पर आ जाये!
मैं राजशर्मास्टोरीज के कुछ लेखक व लेखिकाओं की कहानियों से बहुत प्रभावित हुई, उनकी बड़ी प्रशंसक हूँ, उनकी कहानियों ने मुझे बहुत उत्तेजित किया.
कुछ कहानियों के शीर्षक तो ऐसे हैं जो अपने आप में उत्तेजक हैं, और फिर उस कहानी को बिना पढ़े रहा नहीं गया.
मैंने उन कहानियों के सभी भागों को बड़े इत्मीनान से पढ़ा.
घर में अकेली होने की वजह से कहानी पढ़ते हुए पेंटी में हाथ डाल लेती हूँ.
कहानी लिखवाने के लिए मेरी लालसा बढ़ती जा रही थी, कभी सोचती कि किसी मर्द को फंसा कर उसके साथ खुलकर चुदवा लूँ और उस कहानी को राजशर्मास्टोरीज पर भेज दूँ.
इसी दौरान एक लेखिका से भी मेरा मेल पर और मेस्सेंजर पर वार्तालाप हुआ.
जब मैंने अपने वासनामयी कुविचार उन्हें बताये तो उन्होंने मुझे समझाया कि कहानियों को पढ़कर अपना संयम खोना बहुत अहितकारी हो सकता है! क्यों अपना जीवन बर्बाद करने पर तुली हो!
परन्तु मुझे कहानी तो लिखनी ही थी तो सोचा अपना अनुभव भी तो एक कहानी ही है जो आप सभी से साझा कर रही हूँ.
सेक्स और सम्भोग के बारे में कोई भी लेख या गुप्त जानकारी चोरी छिपे पढ़ने में मेरी रूचि हमेशा से ही रही है और अब तो अक्सर
राजशर्मास्टोरीज की कहानियाँ अकेली और बेफिक्र होकर पढ़ती हूँ.
इन कहानियों को पढ़ते हुए मैं अपने आप को कहानी की नायिका समझने लगती हूँ जैसे कि ये सब मेरे साथ ही हो रहा हो.
कई बार इन कहानियों को पढ़ते हुए मैं अपनी योनि में अंगुली अन्दर बाहर करती रहती और मटर जैसी शिश्निका को सहलाती रहती. जब कहानी का क्लाइमेक्स आता और नायक नायिका का स्खलन होने लगता, तब मेरी योनि भी संकुचन के साथ रसवर्षा कर देती है.
राजशर्मास्टोरीज की कहानियां पढ़ते मुसीबत तो तब हो जाती है जब किसी कहानी के नायक का लंड नौ से दस इंच लम्बा होता है, तब मेरी योनि की फड़कन बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और अँगुलियों का तो जैसे मेरी योनि में कोई अस्तित्व सा नहीं रह जाता है और इस सोनी, जिसके नसीब में पति का लंड जो सात इंच से बड़ा लंड नहीं है, की तड़फ इस कदर बढ़ जाती है, जिसका मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती.
एक बार राजशर्मास्टोरीज की बहुत ही सेक्सी रुचिकर और आनन्दित कर देने वाली कहानी में नायक के 9 इंच लम्बे और मोटे तगड़े लंड की
कहानी को पढ़ते पढ़ते इतना उत्तेजित हो गई कि उस समय यदि पेपर वाला, दूध वाला या कोई सफाई कामगार भी मेरे घर आ जाता तो शायद उसकी खैर नहीं रहती… अपनी जवानी लुटाने के लिए आमादा हो चली थी काम वासना से दहकते हुए!
मैंने अच्छा बुरा सोचे बगैर ही वो मोटी और लम्बी मोमबत्ती, जिसे कभी कभी केंडल डिनर के लिए इस्तेमाल करते हैं, को हाथ में ले लिया, अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर समेट लिया, अपनी गीली हो चुकी पेंटी को निकाल फेंका, जिस कुर्सी पर बैठकर कहानी पढ़ रही थी, उसी पर अपने दोनों पैर भी ऊपर रख लिए और जांघों को फैला दिया.
मेरी गीली योनि उजागर होकर खुल सी गई, योनि द्वार पर हवा की ठंडक महसूस होने लगी.