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गतान्क से आगे…………………………………..
और जब मे बाहर निकली तैयार होके तो दरवाजे पे खाट खाट की आवाज़. रीमा ही थी. उसने मुझे गले लगा लिया. मेने पूछा हे संजय और सोनू कहाँ हैं तो वो आँख नचा के बोली,
अपनी हेरोइनो के साथ...
अरे संजय की हेरोइन तो मालूम है लेकिन सोनू...
अरे वो आपकी जेठानी जी की जो भतीजी है ना...गुड्डी उससे लेज़ हैं. दोनो ऐसे चिपकी हैं...लेकिन जीजा जी कहाँ है. रीमा ने चारो ओर देखते हुए पूछा.
वो तुम से चिपक ने के लिए आज ज़रा ज़्यादा ही तैयार हो रहे हैं... मे बोली. तब तक वो आफ्टर शेव, कोलोन, लगा के निकले और ...वो और रीमा चिपक गये.
रीमा...चेहरे पे अभी भी उसके बचपन का भोलापन...कच्ची हँसी लेकिन ...मे उनको नही ब्लेम कर सकती...ज़रा सा निगाह नीचे ले जाए तो उसके टाप से छलकते, टेन्निस बॉल साइज़ के बूब्स जवानी की दस्तक दे रहे थे ( महीने भर हुए थे उसे सोलहवां लगे) और मे रीमा को भी ब्लेम नही कर सकती थी...वो इतने हॅंडसम लग रहे थे... ती शर्ट से छल्कति उनकी बीसेप्स. दोनो एक दम चुपके हुए...और कोई उनसे इस तरह चिपकता तो मे बुरा ही मान जाती...जल भुन जाती...लेकिन वो मेरी छोटी बेहन थी.
रीमा ने भाभी की चिट्ठी मुझे दी थी. और भाभी की चिट्ठी...उनकी लिखने की भाषा भी वही थी जो बोलने की थी. हनिमून के लिए अनेक इन्स्ट्रक्षन दिए गये थे, और सबसे अंत में लिखा था कि वो हनिमून के लिए एक गिफ्ट बॉक्स भेज रही हैं, उसमे हनिमून की ज़रूरत की सारी चीज़ें हैं और उसके बारे में इन्स्ट्रक्षन उसी में दिए गये हैं, लेकिन मे उसे हनिमून के होटेल में पहुँच के ही खोलूं. उन्होने ये भी लिखा था कि वो उनकी और मेरी मम्मी की जॉइंट गिफ्ट है और मे अगर हनिमून में कुछ भी ना ले गयी सिर्फ़ वो बॉक्स ही ले गयी तो भी काम चल जाएगा.
मेने चारों ओर देखा वो बॉक्स था नही. मेने रीमा की ओर देखा, दोनो कबूतर गुटरगूं कर रहे थे.
रीमा ने बताया कि वो बॉक्स संजय के पास है और वो ला रहा होगा. तब तक दरवाजे पे हंगामा हुआ, धड़ से दरवाजा खुला और संजय और सोनू एक साथ दाखिल हुए और अंजलि और गुड्डी कैसे अलग रहती, पीछे पीछे वो भी. अंजलि एक हल्के पीले सेक्सी टाइट सलवार सूट में, नहा धो के तो वो सुबह से ही तैयार थी, हल्का मेकप भी...और इतने चहकते हुए मेने उसे कभी नही देखा था. और जब मेरी निगाह गुड्डी पे गयी...वो भी सलवार कुर्ते में थी, गुलाबी लेकिन खूब खुश और मस्त. पहले तो एकदम प्लेन जाना लगती थी लेकिन आज लग रहा था कि उसके भी गजब की जवानी चढ़ि हो. दुपट्टा अंजलि ने तो ओढ़ा नही था और गुड्डी ने ओढ़ा तो था लेकिन गर्दन से एकदम चिपका के. दोनो के छोटे छोटे कबूतर, न सिर्फ़ कुर्ते से सर उठाए हुए थे बल्कि उनकी चोन्चे भी सॉफ सॉफ...
फिर मेरी नज़र बॉक्स पे पड़ी. एक बहुत बड़ी सी ची...संजय ने बोला ये भाभी ने भेजी है. साथ में एक और छ्होटा सा सूटकेस...मेरे पूछ्ने से पहले ही वो बोला ये रीमा की है. उसने कहा था मेरा समान इसी कमरे में रख देना.
दीदी...तुम इतने दिन बाद मिली हो मेने सोचा तुम्हारे पास ही रहू. चाहक के रीमा बोली.
दीदी के पास ...या जीजा के पास... अंजलि ने छेड़ा.
अरे जलती क्यों हो, मे छोटी साली हूँ और मेरे प्यारे जीजू हैं उनके पास भी रह सकती हूँ. लेकिन तुम दोनो के लिए ये मेरे मुश्टंडे भाई लाई तो हूँ, अगर मे और दीदी तुम्हारे भाई के पास रहेंगे तो तुम दोनो, हमारे भाइयों के पास रहो, हिसाब बराबर. रीमा ने बराबर का जवाब दिया.
अरे जलती क्यों हो...देख लेंगे तुम्हारे भाइयों को भी. हंस के अंजलि बोली.
मे देख रही थी, गुड्डी एक दम सोनू से चिपकी हुई थी और सोनू की निगाहे भी उसके किशोर उभारो पे.
तब तक नीचे से बुलावा आया ब्रेकफास्ट का और हम सब लोग चल दिए.
ब्रेकफास्ट टेबल पे भी, रीमा अपने जीजा के बगल वाली चेर पे बैठी और सामने की ओर अंजलि संजय के साथ, गुड्डी सोनू के एक ओर और उसके दूसरी ओर की सीट खाली थी. मे जेठानी जी और बाकी ननदों के साथ. तभी रजनी नेहा के साथ आई, खुले बाल, सफेद फ्रॉक एक दम देह से चिपकी. दो लटे उसके गोरे चेहरे पे खेलती, पानी की एक बूँद उसकी लट से निकल के चेहरे पे आ गिरी. सोनू के बगल में खाली चेर को देख के उसने पूछा,
भाभी ये चेर खाली है...
सोनू और संजय, खास कर सोनू तो उसको देख के...बस देखते रह गये.
अरे जिसके बगल में बैठना है उससे पूछो ना...लेकिन पहले मे तुमको इंट्रोड्यूस तो करवा दूं ये हैं सोनू और संजय मेरे भाई और ये है रजनी....मेरी सबसे छोटी और सबसे सेक्सी ननद. सोनू उसे देख के खड़ा हो गया था और उसने हाथ बढ़ाया मिलने के लिए. रजनी ने हंस के हाथ मिला लिया और उस के बगल में बैठ गयी.
देखा, मेरी बेहन को देख के आपका भाई खड़ा हो गया. अंजलि ने छेड़ा. मे ने जवाब दिया,
अरे मेरी ननद है ही ऐसी सेक्सी. मेरे भाई की क्या मज़ाल, उसके अपने भाई का उसे देख के खड़ा हो जाता है. बेचारी अंजलि झेंप गयी. संजय ने और आग लगाई, रजनी को देख के बोला,
बी.एच.एम.बी. लगती है.
नही ऑलरेडी म है. मे मुस्कारके बोली.
"भाभी बेहन भाई, आप लोग क्या फुसुर फुसुर कर रहे हैं. रजनी बोली,
तुम्हारे बारे में ही बात कर रहे हैं, ये कह रहा है बड़ा होके माल बनेगी और मे कह रही हूँ, ऑलरेडी मस्त माल है. मेने प्लेन फेस हो के कहा उसके कच्चे उभारो की ओर देखते हुए. उसने शर्मा के नीचे देखा, लग रहा था किसी ने ना रूई के फाहे ऐसे बादलों को उसकी ब्रा में ठूंस के भर दिया हो. सोनू की निगाहे भी वही पे चिपकी थीं . उसे अपनी ओर देखते हुए देख वो और शर्मा गयी और सिर्फ़ बोली,
भाभी...आप भी.
तक तक दुलारी हलवा ले के अगयि और अंजलि और गुड्डी ने सबको कटोरी में गरम गरम हलवा परोस के आगे बढ़ाया.
खाओ ना, मेने अपने हाथ से बनाया है. अंजलि ने बड़ी अदा से संजय से कहा.
हां बड़ा अच्छा है, संजय ने चख के बोला, लेकिन मीठा खूब है, लगता है तूने अपनी उंगली से चलाया है,
अंजलि शर्मा गयी लेकिन बोली मे हलवा अच्छा बनाती हूँ ना.
अरे इसे भी मौका दे के देखो ना मेरा भाई भी हलवा बहुत अच्छा बनाएगा, तुम्हारा. मेने छेड़ा.
वो झेंप गयी.
जैसे मेरा भाई हर रात को तुम्हारा हलवा बनाता है, है ना. मांझली ननद बोली.
अब मेरी झेंपने की बारी थी.
मेने रजनी की ओर देखा. वो इसरार करके सोनू की प्लेट में कुछ डाल रही थी, लेकिन सोनू की निगाहे उसके गुलाबी गालों को छेड़ती लट्टों पे था और फिर ...झुकने से उसकी फ्रॉक में उसके छोटे छोटे जोबन और कस गये थे, और वो किशोर उभार सॉफ सॉफ दिख रहे थे. तब तक उसने प्लेट में ढेर लगा दिया. वो अचानक बोला हे क्या करती हो कितना दे दिया.
गतान्क से आगे…………………………………..
और जब मे बाहर निकली तैयार होके तो दरवाजे पे खाट खाट की आवाज़. रीमा ही थी. उसने मुझे गले लगा लिया. मेने पूछा हे संजय और सोनू कहाँ हैं तो वो आँख नचा के बोली,
अपनी हेरोइनो के साथ...
अरे संजय की हेरोइन तो मालूम है लेकिन सोनू...
अरे वो आपकी जेठानी जी की जो भतीजी है ना...गुड्डी उससे लेज़ हैं. दोनो ऐसे चिपकी हैं...लेकिन जीजा जी कहाँ है. रीमा ने चारो ओर देखते हुए पूछा.
वो तुम से चिपक ने के लिए आज ज़रा ज़्यादा ही तैयार हो रहे हैं... मे बोली. तब तक वो आफ्टर शेव, कोलोन, लगा के निकले और ...वो और रीमा चिपक गये.
रीमा...चेहरे पे अभी भी उसके बचपन का भोलापन...कच्ची हँसी लेकिन ...मे उनको नही ब्लेम कर सकती...ज़रा सा निगाह नीचे ले जाए तो उसके टाप से छलकते, टेन्निस बॉल साइज़ के बूब्स जवानी की दस्तक दे रहे थे ( महीने भर हुए थे उसे सोलहवां लगे) और मे रीमा को भी ब्लेम नही कर सकती थी...वो इतने हॅंडसम लग रहे थे... ती शर्ट से छल्कति उनकी बीसेप्स. दोनो एक दम चुपके हुए...और कोई उनसे इस तरह चिपकता तो मे बुरा ही मान जाती...जल भुन जाती...लेकिन वो मेरी छोटी बेहन थी.
रीमा ने भाभी की चिट्ठी मुझे दी थी. और भाभी की चिट्ठी...उनकी लिखने की भाषा भी वही थी जो बोलने की थी. हनिमून के लिए अनेक इन्स्ट्रक्षन दिए गये थे, और सबसे अंत में लिखा था कि वो हनिमून के लिए एक गिफ्ट बॉक्स भेज रही हैं, उसमे हनिमून की ज़रूरत की सारी चीज़ें हैं और उसके बारे में इन्स्ट्रक्षन उसी में दिए गये हैं, लेकिन मे उसे हनिमून के होटेल में पहुँच के ही खोलूं. उन्होने ये भी लिखा था कि वो उनकी और मेरी मम्मी की जॉइंट गिफ्ट है और मे अगर हनिमून में कुछ भी ना ले गयी सिर्फ़ वो बॉक्स ही ले गयी तो भी काम चल जाएगा.
मेने चारों ओर देखा वो बॉक्स था नही. मेने रीमा की ओर देखा, दोनो कबूतर गुटरगूं कर रहे थे.
रीमा ने बताया कि वो बॉक्स संजय के पास है और वो ला रहा होगा. तब तक दरवाजे पे हंगामा हुआ, धड़ से दरवाजा खुला और संजय और सोनू एक साथ दाखिल हुए और अंजलि और गुड्डी कैसे अलग रहती, पीछे पीछे वो भी. अंजलि एक हल्के पीले सेक्सी टाइट सलवार सूट में, नहा धो के तो वो सुबह से ही तैयार थी, हल्का मेकप भी...और इतने चहकते हुए मेने उसे कभी नही देखा था. और जब मेरी निगाह गुड्डी पे गयी...वो भी सलवार कुर्ते में थी, गुलाबी लेकिन खूब खुश और मस्त. पहले तो एकदम प्लेन जाना लगती थी लेकिन आज लग रहा था कि उसके भी गजब की जवानी चढ़ि हो. दुपट्टा अंजलि ने तो ओढ़ा नही था और गुड्डी ने ओढ़ा तो था लेकिन गर्दन से एकदम चिपका के. दोनो के छोटे छोटे कबूतर, न सिर्फ़ कुर्ते से सर उठाए हुए थे बल्कि उनकी चोन्चे भी सॉफ सॉफ...
फिर मेरी नज़र बॉक्स पे पड़ी. एक बहुत बड़ी सी ची...संजय ने बोला ये भाभी ने भेजी है. साथ में एक और छ्होटा सा सूटकेस...मेरे पूछ्ने से पहले ही वो बोला ये रीमा की है. उसने कहा था मेरा समान इसी कमरे में रख देना.
दीदी...तुम इतने दिन बाद मिली हो मेने सोचा तुम्हारे पास ही रहू. चाहक के रीमा बोली.
दीदी के पास ...या जीजा के पास... अंजलि ने छेड़ा.
अरे जलती क्यों हो, मे छोटी साली हूँ और मेरे प्यारे जीजू हैं उनके पास भी रह सकती हूँ. लेकिन तुम दोनो के लिए ये मेरे मुश्टंडे भाई लाई तो हूँ, अगर मे और दीदी तुम्हारे भाई के पास रहेंगे तो तुम दोनो, हमारे भाइयों के पास रहो, हिसाब बराबर. रीमा ने बराबर का जवाब दिया.
अरे जलती क्यों हो...देख लेंगे तुम्हारे भाइयों को भी. हंस के अंजलि बोली.
मे देख रही थी, गुड्डी एक दम सोनू से चिपकी हुई थी और सोनू की निगाहे भी उसके किशोर उभारो पे.
तब तक नीचे से बुलावा आया ब्रेकफास्ट का और हम सब लोग चल दिए.
ब्रेकफास्ट टेबल पे भी, रीमा अपने जीजा के बगल वाली चेर पे बैठी और सामने की ओर अंजलि संजय के साथ, गुड्डी सोनू के एक ओर और उसके दूसरी ओर की सीट खाली थी. मे जेठानी जी और बाकी ननदों के साथ. तभी रजनी नेहा के साथ आई, खुले बाल, सफेद फ्रॉक एक दम देह से चिपकी. दो लटे उसके गोरे चेहरे पे खेलती, पानी की एक बूँद उसकी लट से निकल के चेहरे पे आ गिरी. सोनू के बगल में खाली चेर को देख के उसने पूछा,
भाभी ये चेर खाली है...
सोनू और संजय, खास कर सोनू तो उसको देख के...बस देखते रह गये.
अरे जिसके बगल में बैठना है उससे पूछो ना...लेकिन पहले मे तुमको इंट्रोड्यूस तो करवा दूं ये हैं सोनू और संजय मेरे भाई और ये है रजनी....मेरी सबसे छोटी और सबसे सेक्सी ननद. सोनू उसे देख के खड़ा हो गया था और उसने हाथ बढ़ाया मिलने के लिए. रजनी ने हंस के हाथ मिला लिया और उस के बगल में बैठ गयी.
देखा, मेरी बेहन को देख के आपका भाई खड़ा हो गया. अंजलि ने छेड़ा. मे ने जवाब दिया,
अरे मेरी ननद है ही ऐसी सेक्सी. मेरे भाई की क्या मज़ाल, उसके अपने भाई का उसे देख के खड़ा हो जाता है. बेचारी अंजलि झेंप गयी. संजय ने और आग लगाई, रजनी को देख के बोला,
बी.एच.एम.बी. लगती है.
नही ऑलरेडी म है. मे मुस्कारके बोली.
"भाभी बेहन भाई, आप लोग क्या फुसुर फुसुर कर रहे हैं. रजनी बोली,
तुम्हारे बारे में ही बात कर रहे हैं, ये कह रहा है बड़ा होके माल बनेगी और मे कह रही हूँ, ऑलरेडी मस्त माल है. मेने प्लेन फेस हो के कहा उसके कच्चे उभारो की ओर देखते हुए. उसने शर्मा के नीचे देखा, लग रहा था किसी ने ना रूई के फाहे ऐसे बादलों को उसकी ब्रा में ठूंस के भर दिया हो. सोनू की निगाहे भी वही पे चिपकी थीं . उसे अपनी ओर देखते हुए देख वो और शर्मा गयी और सिर्फ़ बोली,
भाभी...आप भी.
तक तक दुलारी हलवा ले के अगयि और अंजलि और गुड्डी ने सबको कटोरी में गरम गरम हलवा परोस के आगे बढ़ाया.
खाओ ना, मेने अपने हाथ से बनाया है. अंजलि ने बड़ी अदा से संजय से कहा.
हां बड़ा अच्छा है, संजय ने चख के बोला, लेकिन मीठा खूब है, लगता है तूने अपनी उंगली से चलाया है,
अंजलि शर्मा गयी लेकिन बोली मे हलवा अच्छा बनाती हूँ ना.
अरे इसे भी मौका दे के देखो ना मेरा भाई भी हलवा बहुत अच्छा बनाएगा, तुम्हारा. मेने छेड़ा.
वो झेंप गयी.
जैसे मेरा भाई हर रात को तुम्हारा हलवा बनाता है, है ना. मांझली ननद बोली.
अब मेरी झेंपने की बारी थी.
मेने रजनी की ओर देखा. वो इसरार करके सोनू की प्लेट में कुछ डाल रही थी, लेकिन सोनू की निगाहे उसके गुलाबी गालों को छेड़ती लट्टों पे था और फिर ...झुकने से उसकी फ्रॉक में उसके छोटे छोटे जोबन और कस गये थे, और वो किशोर उभार सॉफ सॉफ दिख रहे थे. तब तक उसने प्लेट में ढेर लगा दिया. वो अचानक बोला हे क्या करती हो कितना दे दिया.