• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

कुंवारी लडकी का शील भंग

S

StoryPublisher

Guest
उसका नाम फूलवंती था,काफी नटखट और मस्तीबाज लडकी थी|साथ ही काफी बातूनी भी थी|मेरे साथ इस प्रकार बाते करती थी जैसे मै उसका हमउम्र या दोस्त हूं|

वो मेरे पास ट्यूशन पढने आती थी|लेकिन पढने से ज्यादा बाते करना पसंद करती थी|वो काफी मिलनसार हो गयी थी मेरे साथ|मेरी और इस तरह आंखे चुराकर देखती थी कि जैसे मै उसका पति या बॉयफ्रेंड हूं|

उस दिन बारिश हो रही थी|वो मेरे पास आते आते भीग चुकी थी|आज उसका भीगा बदन काफी आकर्षक लग रहा था|वो थोडे सांवले रंग की थी लेकिन दिखने मे बहुत आकर्षक थी|

वो भीगी हुई मेरे पास आकर बैठ गयी और कॉपी पेन और किताब टेबल पर रखकर उसने अपने भीगे बालो को इस तरह झटका दिया जैसे ये उसका अपना घर हो|बालो से उडे पानी के ठंडे छींटे मेरे जिस्म पर भी लगे लेकिन मैने उसकी लापरवाही का बुरा नही माना|मै उसके भीगे हुए मोहक बदन को देखकर कामुक तो पहले ही हो गया था उसके बालो के छींटे मेरे जिस्म पर लगने के बाद तो मेरी कामाग्नि और भी भडक गयी थी|अब मै प्यासी नजरो से उसके जिस्म का जायजा लेने लगा|सांवली रंगत वाला पानी से भीगा हुआ उसका बदन बहुत ही सेक्सी लग रहा था|
 
उसके भीगे बदन से पानी टपक रहा था जिससे मेरी फर्श गीली हो रही थी|

उसने मेरी तरफ देखकर कहा-सर,तौलिया मिलेगा?

मैने कहा-हाँ क्यो नही|वो रहा तौलिया,तुम बाथरूम मे जाकर अपने आप को सुखा लो|

वो तौलिया लेकर बाथरूम मे चली गयी|

मै बेसब्री से उसका इंतजार करने लगा|

थोडी देर बाद वो बाहर आयी और मेरे पास आकर बैठ गयी|

मैने उसे इंग्लिश ग्रामर पढानी शुरू की|

लेकिन मेरा ध्यान बार बार उसके फिगर पर जा रहा था|वो भी आज बडे मूड मे लग रही थी|मुझसे बिल्कुल सटकर बैठी थी और इस तरह मुस्करा रही थी जैसे मेरे पास बैठने पर उसे विशेष आनंद मिलता हो|मैने इसे ग्रीन सिग्नल समझा और अपना पैर उसके पैर से टच कर दिया|उसने कोई विरोध नही किया तो मेरा हौसला बढा और मैने उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया|अब भी उसने कोई विरोध नही जताया तो मै उसके हाथ को अपने हाथ मे लेकर मसलने लगा|
 
फिर मैने उसे अपनी ओर खींचा और उसके गालो पर एक चुम्बन दिया|वो लरजकर मेरी बाँहो मे सिमट गयी और मै उस अल्हड नवयौवना के होंठो का रसपान करते हुए उसकी पीठ मसलने लगा|धीरे धीरे मै हाथ नीचे ले गया और उसके कूल्हो को सहलाने लगा|उसकी सांसे गर्म हो रही थी और वो मुझे अपने सीने मे भींच रही थी|मै उसके दोनो गालो को पकडकर बेतहाशा होंठो को चूसने लगा|वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और आंखे बंद करके मेरे साथ वासना का आनंद लूट रही थी|

तभी मैने उसे खडा किया और मैने कुर्सी पर बैठे बैठे ही अपनी दोनो टांगे चौडी कर दी|फिर फूलवंती को अपनी गोद मे इस तरह बिठाया मेरा लंड उसकी गांड की दरार पर फिट हो गया|मेरा लंड तो पहले ही टाइट हो चुका था लेकिन उसकी गांड का गर्म स्पर्श पाते ही और भी तगडा और लंबा हो गया|

मै नीचे से उसकी गांड पर धक्के लगाते हुए उसके बूब्स दबाने लगा|और उसकी गर्दन और गालो को बेसब्री से चूमते हुए उस कच्ची कली को फूल बनाने की कोशिश करने लगा|वो भी पीछे मुंह करके मेरे होंठो और गालो को चूमने लगी|
 
Back
Top