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मोना चौधरी के चाकू फेंकते हीं भवतारा चाकू की तरफ जाने लगा कि मोना चौधरी ने उसकी टागं पकड़ी और पूरी ताकत से झटका दिया । भवतारा के पैर उखड गए औऱ वो सीधा नीचें जा गिरा ।।
मोना चौधरी जानती थी कि ये खेल ज्यादा लम्बा चलने वाला नहीं है , शैतान के बेटे का कोई भी वार, उस पर कामयाब हो सकता है ।
सतपाल सलामत होता तो कुछ वचाब हो जाता, परंतु इस वत्त भवतारा के मुकाबले पर वो अकेली थी ।
मोना चौधरी ने मंगलू की तरफ देखा कि शायद वो कोई सहायता कर सके, परंतु उधर निगाह पड़ते ही मोना चौधरी चौकी ।
मंगलू सहमा सा खड़ा इधर ही देख रहा था और उसके पीछे तांत्रिक मोहम्मद खडा था । एकाएक मोना चौधरी ने तांत्रिक मोहम्मद के शरीर को धुएं में परिवर्तित होते देखा ।
उसके देखते-ही-देखते पलो में वो धूंएं की लकीर वन गया और वो लकीर मंगलू के सिर में प्रवेश करती चली गई । मोना चौधरी ने अगले ही पल मंगलू को उस तरफ भागते देखा, जिधर उसने चाकू फेका था ।
वो समझ गई कि तांत्रिक मोहम्मद उसकी सहायता को आ पहुंचा है ।
मगंलू के माध्यम से वो सहायता करने जा रहा है । ये बात महसूस करते ही मोधा चौधरी की हिम्मत कई गुणा बढ गई ।
अब इस दरिन्दे का मुकाबला करने के लिए बो अकेली न थी ।
भवतारा गिरते ही गुर्राकर पलटा । दोनों की नजरे मिली, परंतु इस वार मोना चौधरी हिम्मत से मुस्कराई ।
उसकी मुस्कान ने भवतारा को बूरी तरह तड़पा दिया और उठते ही मोना पर झपटा ।
उसे अपने से दूर करने के लिए मोना चौधरी ने जूते की ठोकर उसकी छाती पर मारी ।
ठोकर का कोई खास फर्क न पडा शैतान के बेटे पर । इतना ही हुआ कि उस पर गिरते-गिरते उसकी बगल में आ गिरा वो, परं फौरन ही करवट ली और अगले ही पल उसके हाथ मोना चौधरी की गर्दन पर जा टिके ।
मोना चौधरी ने अपनी गर्दन आजाद करानी चाही, परंतु असफल रही । उसके उपर शैतान का बेटा, उसका गता दबाता जा रहा था । उसका दम घुटने लगा ।
चेहरा लाल-सा होने लगा था । चंद पलों बाद ही आंखों के सामने अंधेरा-सा छाने लगा ।
अपने ऊपर झुके भवतारा का वहशी चेहरा उसे चार-चार चेहरों में नजर आने लगा । उसी पल मोना चौधरी को चार-चार चाकू दिखे और तो चारों चाकू अपने ऊपर शैतान के बेटे के चारों सिरों में प्रवेश करते दिखे ।
सब कुछ धुंधला अस्पष्ट-सा दिखाई दे रहा था उसे । चाकू सिर में प्रवेश करते ही भवतारा तड़प उठा ।
मंगलू ने चाकू तीव्र से उसके सिर से निकाला और पागलों की तरह उसके जिस्म के जरें-जरें पर वार करने लगा ।
इस बीच उसने जोरदार ठोकर मारी भवतारा को तो भवतारा नीचे लुढक गया । मोना चौधरी की गर्दन बची और वो पस्त-सी नीचे पडी लम्बी-लम्बी सांसे लेने लगी ।
मंगलू का हाथ था कि रुक न रहा था । शैतान के बेटे भवतारा का शरीर क्षत…बिक्षिप्त सा होता जा रहा था ।
इतने वारों के पश्चात भी इस शैतान के जिस्म से खून की एक बूंद न निकली थी । खून निकलता भी कैसे ।
उसके अपने शरीर मे खून था ही नही ।।
उसका शरीर खून से नहीं, शैतानी ताकतों से चलता था ।
तभी मोना चौधरी के कानों सतपाल की आवाज पड़ने लगी , मोना चौधरी ने कठिनता से आंखें खोलकर सतपाल को देखा, जो आत्नथी-षालथी मारे बैठा, मंत्र का उच्चारण कर रहा था ।
फिर मंगलू पर निगाह गई, जो कि भवतारा को संभलने का मोका दिए बिना वार-पर-वार करता जा रहा था ।
उसके वारों से शैतान का बेटा खुद को संभाल न पा रह्य था।
" मगंलू.......!" भवतारा के होंठों से थका-सा स्वर निकला ।
मंगलू ठिठका और गुर्राकर बोला ।
" मैं मंगलू नही हूं शैतान के बेटे?" मंगलू के होंठों से तांत्रिक मोहम्मद, की आवाज निकली ।
"ओह.....तू.... .मोहम्मद ।।" भवतारा गहरी-गहरी सांस लेता बोला ।
" हां …मैं।।"
" तू क्यों बीच में आया है तेरी-मेरी क्या दुश्मनी थी, जौ. ..?"
" मेरा धागा तोड़कर मेरी शक्तियों से भरे धागे को तोडने का अंजाम भी अब तेरे को भुगतना पडेगा ।"
"जंगला ने तोड़ा था वो ?"
"एक ही बात है । वो तेरा ही सेवक है । क्या तूने उसको मेरा धागा तोड़ने की सजा दी ? नहीं दी । अपंनी करनी तो तेरे को भुगतनी पडेगी ! बेशक ज्यादा ताकतवर सही, पर तू बेवकूफ़ है, धरती पर आने केलिए ये वक्त उचित था ही नही , इंसानों का खून पीने की लालसा की वजह से तू धरती पर मौजूद शरीर में आ बसा तेरे को वापस जाना ही होगा । मंगलू को माध्यम बनाकर तेरी जिंदगी खत्म कर रहा हूं । तुझे वापस जाना ही होगा । मैं तेरे को वापस भेजे बिना मानूंगा नही शैतान के बेटे!"
इसके साथ ही मंगलू ने नृशंस तरीके से भवतारा के शरीर पर वार करने शुरू कर दिए ।
शैतान के बेटे का शरीर इस हद तक कट चुका था चाकू के वारों से कि उसके शरीर के भीतरी अंग भी नजर आने लगे थे ।।
मंगलू का हाथ रुक नहीं रहा था ।
भवतारा नीचे पड़ा अब कराहने लगा था ।
उधर सतप्रालं के होंठों से निकलने वाले मंत्र बराबर वातावरण में गूंज रहे थे । उसकी गूजती आबाज … जैसे वातावरण का हिस्सा बन गई हो । मोना चौधरी संभल चुकी थी ।
उसकी सांसें अब संयत थी । उठकर वो पीछे को हो गई थी मंगलू को मशीनी गति से शैतान के बेटे पर वार करते देख रही थी । भवतारा का शरीर अब कट-फटकर टुकडों के रूप में इधर-उधर लटकने लगा था । भवतारा की हिम्मत अब खत्म होती जा रही थी । ,,
एकाएक सतपाल की मंत्रों से भरी आबाज ठहर गई ।।
उसने अपना काम पूरा कर दिया था । इसी पल कोई काली-सी परछाईं, भवतारा के शरीर मर'आ ठहरी ।
चाकू का वार करते करते मंगलू का हाथ रुका और वो पीछे हटता चला गया । साथ ही बोला ।
" देख ले शैतान । अपने बेटे का हाल देख़ ले । तूने इसको ठीक से शैतानी धर्म का पाठ पढाया नहीं ।"
ज़वाब में खामोशी छाई रही ।
मोना चौधरी जानती थी कि ये खेल ज्यादा लम्बा चलने वाला नहीं है , शैतान के बेटे का कोई भी वार, उस पर कामयाब हो सकता है ।
सतपाल सलामत होता तो कुछ वचाब हो जाता, परंतु इस वत्त भवतारा के मुकाबले पर वो अकेली थी ।
मोना चौधरी ने मंगलू की तरफ देखा कि शायद वो कोई सहायता कर सके, परंतु उधर निगाह पड़ते ही मोना चौधरी चौकी ।
मंगलू सहमा सा खड़ा इधर ही देख रहा था और उसके पीछे तांत्रिक मोहम्मद खडा था । एकाएक मोना चौधरी ने तांत्रिक मोहम्मद के शरीर को धुएं में परिवर्तित होते देखा ।
उसके देखते-ही-देखते पलो में वो धूंएं की लकीर वन गया और वो लकीर मंगलू के सिर में प्रवेश करती चली गई । मोना चौधरी ने अगले ही पल मंगलू को उस तरफ भागते देखा, जिधर उसने चाकू फेका था ।
वो समझ गई कि तांत्रिक मोहम्मद उसकी सहायता को आ पहुंचा है ।
मगंलू के माध्यम से वो सहायता करने जा रहा है । ये बात महसूस करते ही मोधा चौधरी की हिम्मत कई गुणा बढ गई ।
अब इस दरिन्दे का मुकाबला करने के लिए बो अकेली न थी ।
भवतारा गिरते ही गुर्राकर पलटा । दोनों की नजरे मिली, परंतु इस वार मोना चौधरी हिम्मत से मुस्कराई ।
उसकी मुस्कान ने भवतारा को बूरी तरह तड़पा दिया और उठते ही मोना पर झपटा ।
उसे अपने से दूर करने के लिए मोना चौधरी ने जूते की ठोकर उसकी छाती पर मारी ।
ठोकर का कोई खास फर्क न पडा शैतान के बेटे पर । इतना ही हुआ कि उस पर गिरते-गिरते उसकी बगल में आ गिरा वो, परं फौरन ही करवट ली और अगले ही पल उसके हाथ मोना चौधरी की गर्दन पर जा टिके ।
मोना चौधरी ने अपनी गर्दन आजाद करानी चाही, परंतु असफल रही । उसके उपर शैतान का बेटा, उसका गता दबाता जा रहा था । उसका दम घुटने लगा ।
चेहरा लाल-सा होने लगा था । चंद पलों बाद ही आंखों के सामने अंधेरा-सा छाने लगा ।
अपने ऊपर झुके भवतारा का वहशी चेहरा उसे चार-चार चेहरों में नजर आने लगा । उसी पल मोना चौधरी को चार-चार चाकू दिखे और तो चारों चाकू अपने ऊपर शैतान के बेटे के चारों सिरों में प्रवेश करते दिखे ।
सब कुछ धुंधला अस्पष्ट-सा दिखाई दे रहा था उसे । चाकू सिर में प्रवेश करते ही भवतारा तड़प उठा ।
मंगलू ने चाकू तीव्र से उसके सिर से निकाला और पागलों की तरह उसके जिस्म के जरें-जरें पर वार करने लगा ।
इस बीच उसने जोरदार ठोकर मारी भवतारा को तो भवतारा नीचे लुढक गया । मोना चौधरी की गर्दन बची और वो पस्त-सी नीचे पडी लम्बी-लम्बी सांसे लेने लगी ।
मंगलू का हाथ था कि रुक न रहा था । शैतान के बेटे भवतारा का शरीर क्षत…बिक्षिप्त सा होता जा रहा था ।
इतने वारों के पश्चात भी इस शैतान के जिस्म से खून की एक बूंद न निकली थी । खून निकलता भी कैसे ।
उसके अपने शरीर मे खून था ही नही ।।
उसका शरीर खून से नहीं, शैतानी ताकतों से चलता था ।
तभी मोना चौधरी के कानों सतपाल की आवाज पड़ने लगी , मोना चौधरी ने कठिनता से आंखें खोलकर सतपाल को देखा, जो आत्नथी-षालथी मारे बैठा, मंत्र का उच्चारण कर रहा था ।
फिर मंगलू पर निगाह गई, जो कि भवतारा को संभलने का मोका दिए बिना वार-पर-वार करता जा रहा था ।
उसके वारों से शैतान का बेटा खुद को संभाल न पा रह्य था।
" मगंलू.......!" भवतारा के होंठों से थका-सा स्वर निकला ।
मंगलू ठिठका और गुर्राकर बोला ।
" मैं मंगलू नही हूं शैतान के बेटे?" मंगलू के होंठों से तांत्रिक मोहम्मद, की आवाज निकली ।
"ओह.....तू.... .मोहम्मद ।।" भवतारा गहरी-गहरी सांस लेता बोला ।
" हां …मैं।।"
" तू क्यों बीच में आया है तेरी-मेरी क्या दुश्मनी थी, जौ. ..?"
" मेरा धागा तोड़कर मेरी शक्तियों से भरे धागे को तोडने का अंजाम भी अब तेरे को भुगतना पडेगा ।"
"जंगला ने तोड़ा था वो ?"
"एक ही बात है । वो तेरा ही सेवक है । क्या तूने उसको मेरा धागा तोड़ने की सजा दी ? नहीं दी । अपंनी करनी तो तेरे को भुगतनी पडेगी ! बेशक ज्यादा ताकतवर सही, पर तू बेवकूफ़ है, धरती पर आने केलिए ये वक्त उचित था ही नही , इंसानों का खून पीने की लालसा की वजह से तू धरती पर मौजूद शरीर में आ बसा तेरे को वापस जाना ही होगा । मंगलू को माध्यम बनाकर तेरी जिंदगी खत्म कर रहा हूं । तुझे वापस जाना ही होगा । मैं तेरे को वापस भेजे बिना मानूंगा नही शैतान के बेटे!"
इसके साथ ही मंगलू ने नृशंस तरीके से भवतारा के शरीर पर वार करने शुरू कर दिए ।
शैतान के बेटे का शरीर इस हद तक कट चुका था चाकू के वारों से कि उसके शरीर के भीतरी अंग भी नजर आने लगे थे ।।
मंगलू का हाथ रुक नहीं रहा था ।
भवतारा नीचे पड़ा अब कराहने लगा था ।
उधर सतप्रालं के होंठों से निकलने वाले मंत्र बराबर वातावरण में गूंज रहे थे । उसकी गूजती आबाज … जैसे वातावरण का हिस्सा बन गई हो । मोना चौधरी संभल चुकी थी ।
उसकी सांसें अब संयत थी । उठकर वो पीछे को हो गई थी मंगलू को मशीनी गति से शैतान के बेटे पर वार करते देख रही थी । भवतारा का शरीर अब कट-फटकर टुकडों के रूप में इधर-उधर लटकने लगा था । भवतारा की हिम्मत अब खत्म होती जा रही थी । ,,
एकाएक सतपाल की मंत्रों से भरी आबाज ठहर गई ।।
उसने अपना काम पूरा कर दिया था । इसी पल कोई काली-सी परछाईं, भवतारा के शरीर मर'आ ठहरी ।
चाकू का वार करते करते मंगलू का हाथ रुका और वो पीछे हटता चला गया । साथ ही बोला ।
" देख ले शैतान । अपने बेटे का हाल देख़ ले । तूने इसको ठीक से शैतानी धर्म का पाठ पढाया नहीं ।"
ज़वाब में खामोशी छाई रही ।