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खानदानी चुदाई का सिलसिला compleet

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बाबूजी ने भी पिछे झुक के बैठते हुए अपना लास्ट पैंतरा चला.

''जिसकी भी बात तुम कर रही हो मेरी सम्धन जी....उसको तुम सोच भी नही सकती.....और रही बात तुम्हारी मदद की तो उसकी तो ज़रूरत ही नही पड़ेगी कभी......पर तुम्हारा भोग तो मैं लगा सकता हूँ.....आज अभी यहीं.........जब तुम ही बिच्छने को तैयार हो तो मैं क्यों पिछे हटु......पर एक बात है कि अगर आज मैने भोग लगा दिया तो ये कोई पक्का नही कि आगे कब होगा...'' बाबूजी ने भी सरला के गालों को सहलाते हुए जवाब दिया.

''आज भी होगा और आयेज भी.....आज अगर तुमने कर दिया तो ऐसे पागल हो जाओगे जैसे की कोई कुत्ता कुत्ति की सूंघ लेके हो जाता है......हमेशा मौका ढुंढोगे मुझे पकड़ने का.....ये बात मेरी तरफ से पक्की है...'' सरला ने उनकी जुड़ी हुई उंगली को मूह में दबोच के उसपे जीभ चालनी शुरू कर दी.

''अच्छा अगर ऐसी बात है तो फिर तुम्हे उसकी मदद की ज़रूरत पड़ेगी जो मेरे बिस्तर को रोशन करती है......अगर वो मान गई तो एक साथ तुम दोनो को बिस्तर पे रोशनी करने का मौका आए दिन मिलता रहेगा.......'' बाबूजी उंगली चुस्वाते हुए बोले.

''अच्छा अब वो छिनाल कम्मो मेरी मदद करेगी तुम्हारा लोड्‍ा लेने के लए......उस साली की क्या औकात है.......कल की छोकरी है वो और मैं हूँ पड़ी लिखी खेली खिलाई चूत......मेरे सामने उसकी क्या बिसात....'' सरला अचानक से उत्तेजित हो गई और गुस्से में बोली.

''छिनाल तो वो है और तुम भी हो .......पर एक बात समझ लो कि मेरे बिस्तर मे रोज़ आने के लए तुम्हे उसे पटाना ही पड़ेगा. हर दोपहर को जब बहुएँ सोती है तो बस वही एक है जो घर में जागती है.......और वही है जो मौका देख के मेरे नीचे आती है......अब अगर तुम्हे नीचे आना है तो पहले उसकी चूत को पटाओ......फिर उसकी चूत भी बंद रहेगी और उसके होंठ भी और तुम अपनी मर्ज़ी से कुत्ति बन के इस कुत्ते को रोज लेना.....समझी मेरी बुध्हु सम्धन...'' बाबूजी ने नज़दीक जाके प्यार से पुच्कार्ते हुए सरला की नंगी पीठ पे चुंबन लेते हुए कहा.

''ऊऊऊहह.....उम्म्म्ममम......राजपाल.......उम्म्म्ममम क्या जादू है तुम में.....छोड़ो उस छिनाल को...अभी जो छिनाल तुम्हारे सामने है उसको देखो मेरे बलमा........ऊओह हान्ं...उउम्म्म्म....उउंम्म स्ल्लुउर्र्रप्प...उउंम...पुच...पुच...उउम्म्म्म...स्ल्लुउर्रप्प्प......'' पीठ पे चुंबन पाते ही सरला पागल होने लगी. तैयार होते हुए ही उसकी चूत गिलगिला गई थी और अब तो कमाल ही हो गया. उसने अपना मूह मोड़ के बाबूजी को किस करना शुरू कर दिया. थूक से भरे हुए होंठों से लिपस्टिक बाबूजी के होठों पे लग गई. कम्मो का ये सब देख के बुरा हाल हो रहा था. सरला की बातो से उसके बदन में आग लग गई थी. सरला उसे गालियाँ दे रही थी तो गुस्सा आ रहा था पर अब उसके इस मादक अंदाज़ को देख के कम्मो की चूत में चीटियाँ रेंग रही थी. उसने तुरंत अपनी कछि उतार दी और घाघरे को उठा के चूत में उंगली डालने लगी.

उधर बाबूजी का लंड शॉर्ट्स में से बाहर आ चुका था और सरला की मुट्ठी में था. सरला की साड़ी उपर से उतर चुकी थी और ब्लाउस भी खुला पड़ा था. उपर से अब वो पूरी नंगी थी और बाबूजी उसके चूचे चूसने में व्यस्त थे.बाबूजी की जीभ के नीचे वो बुरी तरह से कराह रही थी. उसकी मोनिंग बढ़ती जा रही थी. जब भी बाबूजी उसका निपल काटते तो सरला की गान्ड कसमसाने लगती और मुट्ठी टाइट हो जाती. बाबूजी ने अपनी पूरी एक्सपर्टीस दिखाते हुए उसके मम्मे दबाना और चूसना चालू रखा. फिर एक झटके में उन्होने अपना सिर पिछे किया और नशीली आँखों से सरला को देखा. सरला ने भी नशीली आँखों से उनको देखा और दोनो एक साथ झटके से एक दूसरे पे टूट पड़े. बाबूजी और सरला एक दूसरे के गाल, कान होंठ, माथा और चेहरे के बाकी हिस्से और गर्दन को बेतहाशा चूमने लगे. उनका वहशिपन देख के कम्मो दंग रह गई और उत्तेजना में खड़े खड़े ही झाड़ गई. अपनी चीखो को दबाने के लए उसने मूह में हाथ रख लिया और ज़ोर से अपने को ही काट खाया.

अब बाबूजी और सरला का वहशिपन अगली सीमा पे पहुँच गया और अपने सामने खड़ा करके एक के बाद एक बाबूजी ने सरला के बाकी कपड़े उतार दिए. बाबूजी के सामने पूरी नंगी खड़ी सरला ने बस हाइ हील्स के सॅंडल पहने हुए थे. जैसे ही वो नंगी हुई उसने एक बार अपने बालों में हाथ फेरा और फिर बाबूजी को बालों से पकड़ के खड़ा कर दिया. आनन फानन में बाबूजी भी नंगे हो गए और दोनो खड़े खड़े एक दूसरे को सहलाने और चूसने लगे. हाइ हील्स में सरला का कद बाबूजी के बराबर हो गया था और दोनो एक दूसरे की गान्ड मसलते हुए रस्पान कर रहे थे. दोनो के मूह से लार टपक रही थी. फिर बाबूजी ने उसके निपल पाकर के खींच दिए और सरला दर्द से करहा उठी. मादरचोद की गाली उसके मूह से अपने आप ही निकल आई और बाबूजी ने उसके बदले में उसको घुमा के खड़े खड़े ही उसकी गान्ड पे 3 - 4 थप्पड़ धर दिए. सरला इससे पहले कि और कुच्छ कहती बाबूजी ने उसे वही कार्पेट पे कुतिया बना दिया और खुद उसकी चूत के नीचे सिर लगा दिया. सरला समझा गई कि पहले उसकी चूत का रस बाबूजी के मूह में जाएगा और उसने भी गान्ड घुमाते हुए चूत की फांके दोनो हाथों से खोली और धम्म से बाबूजी के मूह पे बैठ गई.

बाबूजी की लप्लपाति जीभ सरला की चूत के फांकों पे फिर रही थी. चिकनी चूत में से मस्त खुश्बू आ रही थी. बाबूजी उसकी चूत की फांकों पे लंबे लंबे स्ट्रोक्स लगा रहे थे. बीच बीच में उसके चुम्मे भी ले रहे थे. सरला हल्के हल्के गान्ड घुमा रही थी. इसी बीच वो अपने चूतर पकड़ के फांके खोल देती और गान्ड की दरार में उंगली चला रही थी. उसकी गान्ड में भी खुजली मची हुई थी. इसलिए छेद में थूक से भरी उंगली भी कर रही थी. बाबूजी का लंड उसकी आँखों के सामने था पर उसको मूह में लेने का मन नही था. वो बाबूजी को थोड़ा तरसाना चाहती थी.

उधर सरला की आहें सुन के कम्मो का हाल बुरा हो गया था. सोफे की वजह से वो ज़मीन पे होती हुई चीज़ें तो देख नही पा रही थी. पर सरला का सिर और उसके उरोजे बीच बीच में दिख रहे थे. बाबूजी की कोई आवाज़ नही आ रही थी इसलिए उसे पता था कि सरला उनके मूह पे चढ़ि हुई है.

''चूऊऊऊसस्स्सस्स हराअमिीईई ऊऊऊऊऊऊमाआआ............''' सरला का एक मिनी ऑर्गॅज़म हुआ और उसका सिर ज़ोर ज़ोर से हिलने लगा. अब कम्मो की चूत ने आग बरस दी और उसने वहीं दरवाज़े के पास खड़े खड़े अपने कपड़े उतारे और दौड़ते हुए कमरे में नंगी दाखिल हुई. उसकी पैरों में बँधी पाजेब और चूड़ियों की खनक से बाबूजी को उसके आने का पता चल गया. उनका ध्यान सरला की चूत से बहते हुए रस से हट गया और दिमाग़ में एक ही बात आई कि कम्मो ने सब गड़बड़ कर दी. {आर उन्हे क्या पता था कि आगे क्या होने वाला है.

कम्मो ने जैसे ही दौड़ना शुरू किया और उसकी आवाज़ सरला के कानो में पड़ी उसने अपनी मस्ती और नशे से भारी आँखें खोल दी और दरवाज़े की तरफ देखा. गठे हुए बदन की कम्मो के मोटे मोटे झूलते हुए चूचे देख के सरला को राखी की याद आ गई और माल का किस्सा याद आ गया. उसने झट से अपनी बाहें खोल दी जैसे कि कोई लवर अपने पार्ट्नर को बुलाता है. कम्मो के चेहरे पे खुशी आ गई और वो दौड़ते हुए सरला की बाहों में आ गई. उसके ऐसा करने से सरला का बॅलेन्स बिगड़ गया और दोनो एक दूसरे के बदन को बाहों में पकड़े हुए कार्पेट पे गिर गए. सरला कम्मो के नीचे थी और दोनो के चूचे आपस में घिस रहे थे और गर्मी का आदान प्रदान कर रहे थे. कम्मो पे भी वही वहशी पन सवार था जो कि बाबूजी और सरला पे थोड़ी देर पहले था और उसने भी तबड तोड़ सरला को चूमना शुरू कर दिया.

सरला उसके इस हमले से जितनी सर्प्राइज़्ड हुई उससे कहीं ज़्यादा वो गरम हो गई. कुच्छ सेकेंड के लिए उसने अपनी बहन खोल दी और बाजू सिर के पिछे लगा दी. कम्मो को ज़ुबान और होठों को उसने अपना पूरा बदन समर्पित कर दिया. कम्मो उसकी नंगी बॉडी को देख के किसी जवान लड़के की तरह पागल हो गई और उसके चेहरे, गर्दन, कान, आर्म्पाइट्स, मम्मो, नाभि, पेट, चूत, थाइस और पैरों की उंगलिओ तक उसको चूमती चाट्ती रही. उधर इतना सब कुच्छ अचानक हो जाने से बाबूजी सोफे का सहारा लिए बैठे हुए खुले मूह से सब कुच्छ होता हुआ देख रहे थे. सरला की मोनिंग ने ज़बरदस्त रूप ले लिया था. सिसकारियाँ और गालियाँ दोनो एक साथ उसके मूह से निकाल रही थी. कम्मो भी चुंबनो के बीच बीच में गालियाँ दे रही थी.

''ऊऊहह हराम की जनि कहाँ थी इतने दिन तू....खा जा मुझे कुत्ति.....तेरी मस्त चूची का दाना डाल मेरी भोस में ...उउम्म्म्मम रगड़ उसको मेरी चूत के दाने पे......ऊओ माआ.......साअली हरामज़ादी काट मत....बहेन की लौडि उपर आ ...तेरे होंठ चूसने दे.....तेरा ये गाँव की छोरी सा चोदु बदन मुझे बाहों में लेने दे........उउउम्म्म्म कम्मूऊ....मेरी छिनाल बन ...और मुझे तेरी रांड़ बना....उउम्म्म्ममममम....तेरी चूत से चूत मिलाने दे........'' सरला अब तड़प रही थी.

''हां बीबी जी आज से तू मेरी रांड़ और मैं तेरी.....उउफफफफ्फ़ बीबीजी तेरी उमर को देख के सोचा भी नही था कि इतनी बढ़िया चूत होगी तेरी....इसे तो मैं रोज़ खाउन्गि.....उउम्म्म्मम कुत्ति की चूत है ...कितना रस छोड़ती है.....हाअए.....पच..पुच...पुच...उउम्म्म्मम.....स्लूउर्र्ररप्प्प....उूउउफफफ्फ़...इसको चाट के तो मेरे जोबन में भी आग लग गई...........उउउम्म्म्ममम....ले मेरे होंठ चूस मेरी हरामी मालकिन......और देख ले तेरे यार का लोड्‍ा कैसे हम दोनो को देख के टाइट हो रखा है....इसका भी कुच्छ कर दे...मेरी चूत में लगवा दे.....उउम्म्म्म मेरी प्यारी रंडी सहेली....दिलवा दे प्लीज़.........तेरी चूत को भिगो भिगो के पीउंगी......'' कम्मो चूत रस से भीगे होंठ लेके वापिस सरला के उपर आ गई और उसको चुंबन देने के लिए अपना मूह खोल दिया.

 


Babuji ne bhi pichhe jhuk ke baithte hue apna last paintraa chala.

''Jiski bhi baat tum kar rahi ho meri samdhan ji....usko tum soch bhi nahi sakti.....aur rahi baat tumhari madad ki to uski to zaroorat hi nahi paregi kabhi......par tumhara bhog to main laga sakta hoon.....aaj abhi yahin.........jab tum hi bichhne ko taiyaar ho to main kyon pichhe hatun......par ek baat hai ki agar aaj maine bhog laga dia to ye koi pakka nahi ki aage kab hoga...'' Babuji ne bhi Sarla ke gaalon ko sehlaate hue jawaab dia.

''Aaj bhi hoga aur aage bhi.....aaj agar tumne kar dia to aise paagal ho jaoge jase ki koi kutta kutti ki soongh leke ho jata hai......hamesha mauka dhoondhoge mujhe pakarne ka.....ye baat meri taraf se pakki hai...'' Sarla ne unki judi hui ungli ko muh men daboch ke uspe jeebh chaalani shuru kar di.

''Achha agar aisi baat hai to phir tumhe uski madad ki zaroorat paregi jo mere bistar ko roshan karti hai......agar woh maan gai to ek sath tum dono ko bistar pe roshni karne ka mauka aae din milta rahega.......'' Babuji ungli chuswaate hue bole.

''Achha ab woh chhinaal Kammo meri madad karegi tumhara loda lene ke lie......uss saali ki kya aukaat hai.......kal ki chhokri hai woh aur main hoon padi likhi kheli khilaai choot......mere saamne uski kya bisaat....'' Sarla achanak se uttejit ho gai aur gusse men boli.

''Chhinaal to woh hai aur tum bhi ho .......par ek baat samjh lo ki mere bistar me roz aane ke lie tumhe use patana hi parega. Har dopahar ko jab bahuen soti hai to bas wahi ek hai jo ghar men jaagti hai.......aur wahi hai jo mauka dekh ke mere niche aati hai......ab agar tumhe niche aana hai to pehle uski choot ko patao......phir uski choot bhi band rahegi aur uske honth bhi aur tum apni marzi se kutti bann ke iss kutte ko roj lena.....samjhi meri budhhu samdhan...'' Babuji ne nazdeek jaake pyaar se puchkaarte hue Sarla ki nangi peeth pe chumban lete hue kaha.

''oooooohhhh.....ummmmmm......Rajpaal.......ummmmmm kya jaadooo hai tum men.....chhoro uss chhinaal ko...abhi jo chhinaal tumhare saamne hai usko dekho mere balmaaa........ooohh haann...uummmm....uummm slluurrrpp...uumm...pucchh...puchhh...uummmm...slluurrppp......'' peeth pe chumban paate hi Sarla paagal hone lagi. Taiyaar hote hue hi uski choot gilgila gai thi aur ab to kamaal hi ho gaya. Usne apna muh mod ke Babuji ko kiss karna shuru kar dia. Thook se bhare hue honthon se lipstick Babuji ke hothon pe lag gai. Kammo ka ye sab dekh ke bura haal ho raha tha. Sarla ki ibaaton se uske badan men aag lag gai thi. Sarla use gaalian de rahi thi to gussa aa raha tha par ab uske iss maadak andaaz ko dekh ke Kammo ki choot men cheetian reng rahi thi. Usne turant apni kachhi utaar di aur ghaghre ko utha ke choot men ungli daalne lagi.

Udhar Babuji ka lund shorts men se bahar aa chuka tha aur Sarla ki mutthi men tha. Sarla ki Sarri upar se utar chuiki thi aur blouse bhi khula pada tha. Upar se ab woh poori nangi thi aur Babuji uske chooche choosne men vyast the.Babuji ki jeebh ke niche woh buri tarah se karah rahi thi. Uski moaning badti jaa rahi thi. Jab bhi babuji uska nipple kaatte to Sarla ki gaand kasmasaane lagti aur muthhi tight ho jaati. Babuji ne apni poori expertise dikhaate hue uske mummen dabana aur choosna chaalu rakha. Phir ek jhatke men unhone apna sir pichhe kia aur nasheeli aankhon se Sarla ko dekha. Sarla ne bhi nasheeli aankhon se unko dekha aur dono ek sath jhatke se ek doosre pe toot pade. Babuji aur Sarla ek doosre ke gaal, kaan honth, maatha aur chehre ke baaki hisse aur gardan ko betahasha choomne lage. Unka wehshipan dekh ke Kammo dang reh gai aur uttejna men khade khade hi jhad gai. Apni chhekhon ko dabaane ke lie usne muh men hath rakh lia aur jor se apne ko hi kaat khaya.

Ab Babuji aur Sarla ka vehshipan agli seema pe pahunch gaya aur apne saamne khada karke ek ke baad ek Babuji ne Sarla ke baaki kapde utaar die. Babuji ke saamne poori nangi khadi sarla ne bas high heels ke sandal pehne hue the. Jaise hi woh nangi hui usne ek baar apne baalon men hath phera aur phir Babuji ko baalon se pakad ke khada kar dia. Aanan faanan men babuji bhi nange ho gae aur dono khade khade ek doosre ko sehlaane aur choosne lage. High heels men Sarla ka kad Babuji ke barabar ho gaya tha aur dono ek doosre ki gaand maslate hue raspaan kar rahe the. Dono ke muh se laar tapak rahi thi. Phir Babuji ne uske nipple pakar ke kheench die aur Sarla dard se karha uthi. Maadarchod ki gaali uske muh se apne aap hi nikal aai aur Babuji ne uske badle men usko ghuma ke khade khade hi uski gaand pe 3 - 4 thappad dhar die. Sarla isse pehle ki aur kuchh kehti Babuji ne use wahi carpet pe kutiya bana dia aur khud uski choot ke niche sir laga dia. Sarla samjha gai ki pehle uski choot ka ras Babuji ke muh men jaega aur usne bhi gaand ghumaate hue choot ki phaanke dono hathon se kholi aur dhamm se Babuji ke muh pe baith gai.

Babuji ki laplapaati jeebh Sarla ki choot ke phaankon pe phir rahi thi. Chikni choot men se masst khushboo aa rahi thi. Babuji uski choot ki phaankon pe lambe lambe strokes laga rahe the. Beech beech men uske puchhe bhi le rahe the. Sarla halke halke gaand ghuma rahi thi. Isi beech woh apne chootar pakar ke phaanke khol deti aur gaand ki daraar men ungli chala rahi thi. Uski gaand men bhi khujli machi hui thi. Islie chhed men thook se bhari ungli bhi kar rahi thi. Babuji ka lund uski aankhon ke saamne tha par usko muh men lene ka mann nahi tha. Woh Babuji ko thora tarsaana chahti thi.

Udhar Sarla ki aahen sunn ke Kammo ka haal bura ho gaya tha. Sofe ki wajah se woh jameen pe hoti hui cheezen to dekh nahi paa rahi thi. Par Sarla ka sir aur uske uroje beech beech men dikh rahe the. Babuji ki koi awaaz nahi aa rahi thi islie use pata tha ki Sarla unke muh pe chadi hui hai.

''Choooooooossssss haraaamiiiiii oooooooooooomaaaaaa............''' Sarla ka ek mini orgasm hua aur uska sir jor jor se hilne laga. Ab Kammo ki choot ne aag baras di aur usne wahin darwaaze ke paas khade khade apne kapde utaare aur daurte hue kamre men nangi daakhil hui. Uski pairon men bandhi pajeb aur choorion ki khanak se Babuji ko uske aane ka pata chal gaya. Unka dhyaan Sarla ki choot se behte hue ras se hat gaya aur dimaag men ek hi baat aai ki Kammo ne sab gadbad kar di. {ar unhe kya pata tha ki aage kya hone wala hai.

Kammo ne jaise hi daurna shuru kia aur uski awaaz Sarla ke kaano men padi usne apni masti aur nashe se bhari aankhen khol di aur darwaaze ki taraf dekha. Gathe hue badan ki Kammo ke mote mote jhoolte hue chooche dekh ke Sarla ko Rakhi ki yaad aa gai aur mall ka kissa yaad aa gaya. Usne jhat se apni baahen khol di jaise ki koi lover apne partner ko bulata hai. Kammo ke chehre pe khushi aa gai aur woh daurate hue Sarla ki baahon men aa gai. Uske aisa karne se Sarla ka balance bigad gaya aur dono ek doosre ke badan ko bahon men pakre hue carpet pe gir gae. Sarla Kammo ke niche thi aur dono ke chooche aapas men ghis rahe the aur garmi ka adaan pradaan kar rahe the. Kammo pe bhi wahi vehshi pan sawaar tha jo ki Babuji aur Sarla pe thori der pehle tha aur usne bhi tabad tod Sarla ko choomna shuru kar dia.

Sarla uske iss hamle se jitni surprised hui usse kahin jiada woh garam ho gai. Kuchh second ke lie usne apni baahen khol di aur bajuen sir ke pichhe laga di. Kammo ko jubaan aur hothon ko usne apna poora badan samarpit kar dia. Kammo uski nangi body ko dekh ke kisi jawaan ladke ki tarah paagal ho gai aur uske chehre, gardan, kaan, armpits, mummon, naabhi, pet, choot, thighs aur pairon ki unglion tak usko choomti chaatti rahi. Udhar itna sab kuchh achanak ho jaane se Babuji sofe ka sahara lie baithe hue khule muh se sab kuchh hota hua dekh rahe the. Sarla ki moaning ne zabardast roop le lia tha. Siskaarian aur gaalian dono ek sath uske muh se nikal rahi thi. Kammo bhi chumbano ke beech beech men gaalian de rahi thi.

''oooohhhhhhh haraam ki jani kahan thi itne din tu....kha ja mujhe kutti.....teri mast choochi ka dana daal meri bhos men ...uummmmm ragar usko mere choot ke daane pe......ooohhh maaaa.......saaali haraamzaadi kaat mat....behen ki lodi upar aa ...tere honth choosne de.....tere ye gaanv ki chhori sa chodu badan mujhe bahon men lene de........uuummmm Kammoooo....meri chhinaal ban ...aur mujhe teri raand bana....uummmmmmmm....teri choot se choot milaane de........'' Sarla ab tarap rahi thi.

''Haan bibi ji aaj se tu meri raand aur main teri.....uufffff bibiji teri umar ko dekh ke socha bhi nahi tha ki itni badiya choot hogi teri....ise to main roz khaungi.....uummmmm kutti ki choot hai ...kitna ras chhorti hai.....haaaye.....puchh..puchh...puchh...uummmmm.....sluurrrrppp....uuuuffff...isko chaat ke to mere joban men bhi aag lag gai...........uuummmmmm....le mere honth choos meri haraami maalkin......aur dekh le tere yaar ka loda kaise hum dono ko dekh ke tight ho rakha hai....iska bhi kuchh kar de...meri choot men lagwa de.....uummmm meri pyaari randi saheli....dilwa de pleaaseee.........teri choot ko bhigo bhigo ke piungi......'' Kammo choot ras se bheege honth leke waapis Sarla ke upar aa gai aur usko chumban dene ke lie apna muh khol dia.

 
सरला ने उसके सिर को पकड़ के कस के अपने और उसके होंठ मिला दिए और दोनो फ्रैंच किस करने लगी. हल्क हल्के दोनो एक दूसरे के होंठों को काट रही थी. दोनो के कड़क निपल एक दूसरे की छाती में धँस रहे थे और चूत से चूत के उपर के हिस्से का मिलन हुआ पड़ा था. जहाँ सरला की चूत बिल्कुल चिकनी थी वहीं उसके उपर पड़ी हल्की झान्टो से भरी कम्मो की चूत बहुत हसीन लग रही थी. किस करते करते सरला इतनी गरम हो गई कि उसने पलटी मारी और कम्मो को कार्पेट पे लिटा दिया. फिर उसने भी वही किया जो कम्मो ने उसके साथ किया था. कम्मो के निपल चूस्ते हुए उसके बाकी बदन से खेलते हुए उसने कम्मो की चूत में उंगलियाँ डाली और निकाल के चूसने लगी. कम्मो का चूतरस भी बहुत स्वादिष्ट था और फिर से एक बार सरला उसके उपर लेट के उसको चुंबन देने लगी. कम्मो ने अपनी मजबूत बाहों में उसे कस के पकड़ लिया और उसके होठों को ज़बरदस्त तरीके से काटने लगी.

''उम्म्म्ममम साली होंठ खा जाएगी तो तेरी चूत को क्या मिलेगा.........उउफफफ्फ़ चूचे मत मरोड़ ऐसे हरम्जादि.....उउउइंाआआ..............तेरी मोटी उंगलियाँ चूत मे इतनी भली लगती हैं.......'' सरला उसके उपर पड़े पड़े कसमसा रही थी.

बाबूजी का हाल बुरा हुआ पड़ा था. 5 मिनट में ही इतना कुच्छ हो गया. कहाँ उन्हे लगा कि कम्मो की एंट्री से सब गड़बड़ हो जाएगी पर यहाँ तो सब उल्टा ही चल रहा था. दोनो रंडिया कैसे एक दूसरे से भिड़ी पड़ी थी जैसे कि कोई बरसों के बाद अपने यार से मिलता है. उनकी बहती हुई चूतो में बारी बारी लंड डालने को उनका मन व्याकुल हुआ पड़ा था पर वो दोनो तो एक दूसरे को छोड़ने का नाम ही नही ले रही थी.

बाबूजी सोफे से पीठ लगाए दोनो को देख रहे थे. उनका लंड लगातार तने रहने से दुखने लगता. इतने मे सरला कम्मो के उपर हो गई ओर उसे चूमने चाटने लगी. दोनो रंडियों की तरह एक दूसरे की जीभ चाटने में मगन थी.

बाबूजी ने आगे बाद के दोनोकी चूत में अपनी जुड़ी हुई उंगलियाँ डालनी शुरू कर दी. पहले तो दोनो ने कुच्छ नही कहा. पर कुच्छ देर बाद सरला ने बाबूजी का हाथ झटक दिया.

''साअले बेहेन्चोद....हट...आज ये माल मेरा है....क्यों कम्मो मेरे होते हुए आज तुझे इसके लौडे की ज़रूरत है क्या ??? बोल रांड़.....मेरी चूत ....मेरे चूचे और मेरी गान्ड के होते हुए क्या तुझे इसके लौडे की ज़रूरत है ?? बोल मेरी कामुक रंडी...आज बस तू और मैं. इसको लोड्‍ा हिलाने दे.....साला हरामी हमेशा चूत गान्ड के छेद देखता फिरता है..आज मूठ मार भोसड़ी के......उम्म्म्मम...कम्मो तेरी ज़ुबान कितनी नमकीन है री....उफ़फ्फ़ तेरे चूचे भी....उम्म्म्मसलुर्र्रप्प्प्प.......'' सरला बुरी तरीके से कम्मो के चूचे मसल रही थी औरुस्की जीभ चाट रही. फिर उसके चूचे चूस्ते हुए वो उसकी चूत में उंगली करने लगी.

''ऊऊऊहह.......सरलाजी......आज तो बस चूत चूत खेलूँगी....आज लौडे की क्या ज़रूरत ....माफकरना बाबूजी पर आज आपको मेरी चूत नही मिलेगी. आज सिर्फ़ सरला जी और मैं और हमारी रस भरी चूते.......उउम्म्म्ममम.......बहेन की लौडि बहुत बढ़िया चूस्ति है तू......ऊऊऊओ आअरर्ग्घह माफ़ करना सरला जी..आपकी जीभ और उंगलिओ ने जादू कर दिया है इसलिए मूह से गालियाँ भी निकल गई.......उम्म्म्म.....उफफफफफफांणन्न्...चूस ले मुझे...येस्स्स्स्स.....ऊऊऊहह...'' कम्मो अब तेज तेज हाँफने लगी थी. उसके चूचे और बदन एग्ज़ाइट्मेंट से काँप रहे थे.

''हाआँ मेरी कुत्ति ये मेरी उमर का एक्सपीरियेन्स है मेरी जान....आज तेरी ऐसी हालत करूँगी की तू रोज मेरे से मज़े करेगी. इसको भूल जाएगी....क्यों मेरे ठर्कि समधी....2 - 2 रॅंडियो के होते हुए भी तुझे लंड हाथ से हिलना पड़ रहा है...कैसा लग रहा है.....अब देख मैं इस छिनाल की कैसे चूत चाट्ती हूँ और कैसे इससे चूतचुस्वाति हूँ....है ना मेरी रानी मेरी चूत चुसेगी ना....और गाली दे दे मुझे .....कोई फरक नही पड़ता........तेरे मूह से गाली सुन के मेरी चूत और लिसलिसि गई है. चल अब इसे चूसने को रेडी हो जा.....आजा.......69 करेंगे''सरला अब कुत्ति बन गई और गान्ड हिला हिला के कम्मो को अपने नीचे लेटने का इशारा करने लगी.

कम्मो ने आगे बाद के पहले तो सरला के चूचे नीचे से पकड़े और उन्हे मसल्ने लगी.

''मादरचोद...इस उमर में भी तेरे थन कितने मस्त हैं....कितने नरम और भरे भरे....पहले नंगी देख लेती तो अब तक तो इनको एक साइज़ बड़ा कर देती दबा दबा के. उम्म्म्मम गांदभी मस्त है तेरी......साली...एक बात बोलूं......तेरी गान्ड चाटने का मान कर रहा है.....उम्म्म्मम.......थोड़ा चाट लूँ ??'' कम्मो सरला के भूरे छेदो मे उंगली करने की कोशिश कर रही थी.

''हां कर ना ....बहेन की लौडि...देर ना कर ...जीभ लगा हराम जादि....उफफफफ्फ़....येस्स्स्स....ऐसी हिकर....ऊऊहहमाआअ.....थोड़ा जीभ अच्छे से डाल जान.......उम्म्म्मम....''सरला की गान्ड थिरक रही थी. कम्मो की जीभ का जादू उसकी गान्ड के छेद पे चल रहा था.

गान्ड चटवाते हुए सरलाने जान भूज के बाबूजी की जाँघ पे हाथ फेरना शुरू कर दिया. अब तक बाबू जी मारने में व्यस्त हो चुके थे. उन्हे यकीन हो गया था कि ये दोनो औरतें लौडे को आराम नही देगी और उन्हे आज कई साल बाद अपने हाथों से गुज़ारा पडेगा. इस समय उन्हे अपनी बहुओं की बहुत याद आ रही थी. उनकी आँखों के सामने दोनो मस्ती में एक दूसरे की चूत चाटने को रेडी हो गई थी. नीचे कम्मो लेटी हुई थी और उपर सरला कुत्ति बनी पड़ी थी. बाबूजी लंड हिलाते हुए अपनी किस्मेत को कोस रहे थे. किस घड़ी में ये प्लान बनाया. बहुओं के आने तक उन्हे चूत से वंचित रहना पड़ेगा. सामने खाना पड़ा हुआ था, भूख भी लगी हुई थी पर खाना खाने को नही मिल रहा था.......ऐसी सी सिचुयेशन बाबूजी के साथ पहली बार हुई थी.

''आअररर्रघह बीबीजी अच्छे से कुरेद के चाटो मुझे.........हां बीबीजी कई दिन हो गए चूत चटवाए....बाबूजी तो इसको बस लौडे के लिए इस्तेमाल करते हैं....तुम इसकी जीभ से पूजा कर दो......हाआआए........तुम्हारी चूत तो बहुत पानी वाली है बीबीजी......उम्म्म्मम...स्लुउउर्र्रप...मज़ा आ गया........'' कम्मो मस्ती में थी. उसे दीन दुनिया का कोई होश नही था.

बाबूजी ने दोनो को मस्ती लेते हुए देखा आज पहली बार सेक्स के मामले में हू अपने को इतना आशाए फील कर रहे थे. आज उन्हे एहसास हो रहा था कि अगर औरत अपने रांड़पन पे उतर आए तो क्या क्या कर सकती है. मूठ मारने की कोशिश अभी भी जारी थी पर चूत का सच को चूत ही दे सकती है. गीली लिसलिसाती चूत जब गरम लौडे को अपनी आगोश में लेती है तो वो फीलिंग वो मज़ा कुच्छ और ही होता है. बाबूजी ने हिम्मत करते हुए अपनी जुड़ी हुई उंगलियाँ कम्मो की चूत की तरफ बढ़ाई. कम्मो की वो चूत जिसपे कल तक उनके लौडे का हक था आई हुई चूत सरला की जीभ के हमलो से पनियाई पड़ी थी. नदी के धारे की तरह बहती हुई चूत की महक बार बार सरला को पागल कर रही थी. चूत से मूह सटाये वो कभी जीभ से उसे कुरेद देती कभी चूस लेती तो कभी चाटने लगती. सरला की हालत एक पागल कुत्ते के जैसी थी जिसको कि बहुत दिन बाद बोटी मिली हो. ऐसे में बाबूजी की उंगलियाँ उसकी ज़ुबान से टकराई तो वो खुंदक में आ गई और उसने उन्हे ज़ोर से काट खाया.

बाबूजी दर्द के मारे तिलमिला उठे और गुस्से में आ गए. उनके मूह से सरला के लिए मा बहेन की गालियाँ निकल आई. पर सरला और कम्मो पे इस सब का कोई असर नही हुआ और दोनो चूत चूसने में मगन रही. बाबूजी खुंदक में उठे और वहाँ से अपने कमरे की ओर चल दिए. 4 - 5 कदम ही चले थे कि पिछे से सरला की आवाज़ आई.

''अबे भडवे कहाँ चल दिया.....क्या हुआ चूत चूत का खेल पसंद नही आया क्या...?? अबे देख के जा कि एक औरत दूसरी औरत को कितना मज़ा दे सकती है. साले हरामी चूत नही मिली तो छोटे बच्चे की तरह रोता क्यों है.....आजा इधर आके खड़ा हो जा....चूत चाटते हुए फ़ुर्सत मिली तो तेरी लुल्ली को भी सहला दूँगी...इधर आ और यहाँ हमें देख के मूठ मार ले.....चूत तो आज तेरे नसीब में है नही.....देख के गुज़ारा कर......अगर मुझे तरस आया तो तेरी लुल्ली चूस दूँगी....आजा आजा मेरे चूतिए समधी........चल आ इधर...'' सरला तेज़ी से कम्मो की चूत में उंगली के घस्से मारते हुए बोली. उसकी आवाज़ में कदकपन के साथ तीखापन भी था. उसको बाबूजी की बेइज़्ज़ती करने में मज़ा आ रहा था.
 
Sarla ne uske sir ko pakar ke kas ke apne aur uske honth mila die aur dono frnch kiss karne lagi. Halk halke dono ek doosre ke honthon ko kaat rahi thi. Dono ke kadak nipple ek doosre ki chhati men dhans rahe the aur choot se choot ke upar ke hisse ka milan hua pada tha. Jahan Sarla ki choot bilkul chikni thi wahin uske upar padi halki jhaanton se bhari Kammo ki choot bahut haseen lag rahi thi. Kiss karte karte Sarla itni garam ho gai ki usne palti maari aur Kammo ko carpet pe lita dia. Phir usne bhi wahi kia jo Kammo ne uske sath kia tha. Kammo ke nipple chooste hue uske baaki badan se khelte hue usne Kammo ki choot men unglian daali aur nikaal ke choosne lagi. Kammo ka chootras bhi bahut swadisht tha aur phir se ek baar Sarla uske upar let ke usko chumban dene lagi. Kammo ne apni majboot baahon men use kass ke pakar lia aur uske hothon ko zabardast tarike se kaatne lagi.

''ummmmmm saali honth kha jaegi to teri choot ko kya milega.........uuffff chooche mat marod aise haramjaadi.....uuuiimaaaaaa..............teri moti unglian choot me itni bhali lagti hain.......'' Sarla uske upar pade pade kasmasa rahi thi.

Babuji ka haal bura hua pada tha. 5 min men hi itna kuchh ho gaya. kahan unhe laga ki Kammo ki entry se sab gadbad ho jaegi par yahan to sab ulta hi chal raha tha. Dono randian kaise ek doosre se bhidi padi thi jaise ki koi barson ke baad apne yaar se milta hai. Unki behti hui chooton men baari baari lund daalne ko unka mann vyakul hua pada tha par woh dono to ek doosre ko chhoren ka naam hi nahi le rahi thi.

Babuji sofe se peeth lagayedono ko dekh rahe the. Unka lund lagataar tane rehne se dukhne lagatha. Itne me Sarla Kammo ke upar ho gai or use choomne chaatne lagi. Donorandion ki tarah ek doosre ki jeebh chaatne men magan thi.

Babuji ne aage bad ke donoki choot men apni judi hui unglian daalni shuru kar di. Pehle to dono ne kuchhnahi kaha. Par kuchh der baad Sarla ne babuji ka hath jhatak dia.

''Saaale behenchod....hathhata...aaj ye maal mera hai....kyon kammo mere hote hue aaj tujhe iske lode kizaroorat hai kya ??? bol raand.....meri choot ....mere chooche aur meri gaandke hote hue kya tujhe iske lode ki zaroorat hai ?? Bol meri kaamuk Randi...aajbas tu aur main. Isko loda hilaane de.....saala haraami hamesh choot gaand kechhed dekhta phirta hai..aaj muthh maar bhosdi ke......ummmmm...kammo terijubaan kitni namkeen hai ri....ufff tere chooche bhi....ummmmslurrrpppp.......'' Sarla buri tarike se kammo ke chooche masal rahi thi auruski jeebh chaat rahi. Phir uske chooche chooste hue who uski choot men unglikarne lagi.

''oooooohhhhh.......sarlajiii......aaj to bas choot choot khelungi....aaj lode ki kya zaroorat ....maafkarna babuji par aaj aapko meri choot nahi milegi. Aaj sirf Sarla ji aur mainaur hamari ras bhari chooten.......uummmmmm.......behen ki lodi bahut badiya choostihai tu......ooooooohhh aaarrgghhh maaf karna sarla ji..aapki jeebh aur unglionne jaadu kar dia hai islie muh se gaalian bhi nikal gai.......ummmm.....uffffffhaannnn...choose le mujhe...yesssss.....oooooohhhh...'' kammo ab tej tejhaanfne lagi thi. Uske chooche aur badan excitement se kaamp rahe the.

''Haaan meri kutti ye meriumar ka experience hai meri jaan....aaj teri aisi haalat karungi ki tu roj merese maje karegi. Isko bhool jaegi....kyon mere tharki samdhi....2 - 2 randion kehote hue bhi tujhe lund hath se hilana pad raha hai...kaisa lag raha hai.....abdekh main iss chhinaal ki kaise choot chaatti hun aur kaise isse chootchuswaati hoon....hai na meri raani meri choot chusegi na....aur gaali de demujhe .....koi farak nahi padta........tere muh se gaali sunn ke meri choot aurlislisa gai hai. Chal ab ise choosne ko ready ho ja.....aaja.......69 karenge''Sarla ab kutti ban gai aur gaand hila hila ke kammo ko apne niche letne kaishara karne lagi.

Kammo ne aage bad ke pehleto Sarla ke chooche niche se pakde aur unhe masalne lagi.

''Maadarchod...iss umar menbhi tere thann kitne mast hain....kitne naram aur bhare bhare....pehle nangidekh leti to ab tak to inko ek size bada kar deti daba daba ke. Ummmmm gaandbhi masst hai teri......saali...ek baat bolun......teri gaand chaatne ka mannkar raha hai.....ummmmm.......thora chaat loon ??'' Kammo sarla ke bhoore chhedmen ungli karne ki koshish kar rahi thi.

''Haan kar na ....behen kilodi...der na ...jeebh laga haram jaadi....ufffff....yessss....aisi hikar....oooohhhmaaaaa.....thora jeebh ache se daal jaan.......ummmmm....''Sarlaki gaand thirak rahi thi. Kammo ki jeebh ka jaadooo uski gaand ke chhed pe chalraha tha.

Gaand chatwaate hue Sarlane jaan bhooj ke babuji ki jaangh pe hath pherna shuru kar dia. Ab tak Babujimuthh maarne men vyast ho chuke the. Unhe yakeen ho gaya tha ki ye dono auratenunke lode ko araam nahi degi aur unhe aaj kai saal baad apne hathon se gujarakarna parega. Iss samay unhe apni bahuon ki bahut yaad aa rahi thi. Unki aankhon ke saamne dono masti men ek doosre ki choot chaatne ko ready ho gai thi. Niche kammo leti hui thi aur upar Sarla kutti bani padi thi. Babuji lund hilaate hue apni kismet ko kos rahe the. Kis ghari men ye plan banaya. Bahuon ke aane tak unhe choot se wanchit rehna parega. Saamne khana pada hua tha, bhookh bhi lagi hui thi par khana khaane ko nahi mil raha tha.......aisi si situation Babuji ke sath pehli baar hui thi.

''Aaarrrrghhhh bibiji ache se kured ke chaato mujhe.........haan bibiji kai din ho gae choot chatwae....Babuji to isko bas lode ke lie istemaal karte hain....tum iski jeebh se pooja kar do......haaaaaaye........tumhari choot to bahut paani waali hai bibiji......ummmmm...sluuurrrp...maza aa gaya........'' kammo masti men thi. Use deen duniya ka koi hosh nahi tha.

Babuji ne dono ko masti lete hue dekha Aaj pehli baar sex ke maamle men who apne ko itna ashaaye feel kar rahe the. Aaj unhe ehsaas ho raha tha ki agar aurat apne raandpan pe utar aaye to kya kya kar sakti hai. Muthh maarne ki koshish abhi bhi jaari thi par choot ka such ko choot hi de sakti hai. Geeli lislisaati choot jab garam lode ko apni aagosh men leti hai to who feeling who maza kuchh aur hi hota hai. Babuji ne himmat karte hue apni judi hui unglian Kammo ki choot ki taraf badai. kammo ki who choot jispe kal tak unke lode ka hak tha aai hui choot j Sarla ki jeebh ke hamlo se paniyaai padi thi. Nadi ke dhaare ki tarah behti hui choot ki mehak baar baar Sarla ko paagal kar rahi thi. choot se muh sataye who kabhi jeebh se use kured deti kabhi choos leti to kabhi chaatne lagti. Sarla ki haalat ek paagal kutte ke jaisi thi jisko ki bahut din baad boti mili ho. Aise men babuji ki unglian uski jubaan se takraai to who khundak men aa gai aur usne unhe jor se kaat khaya.

Babuji dard ke maare tilmila uthe aur gusse men aa gae. Unke muh se Sarla ke lie maa behen ki gaalian nikal aai. Par Sarla aur kammo pe iss sab ka koi asar nahi hua aur dono choot choosne men magan rahi. Babuji khundak men uthe aur waha se apne kamre ki aur chal die. 4 - 5 kadam hi chale the ki pichhe se Sarla ki awaaz aai.

''Abe bhadwe kahan chal dia.....kya hua choot choot ka khel pasand nahi aaya kya...?? abe dekh ke ja ki ek aurat doosri aurat ko kitna maza de sakti hai. Saale haraami choot nahi mili to chhote bachhe ki tarah rota kyon hai.....aaja idhar aake khada ho ja....choot chaatte hue fursat mili to teri lulli ko bhi sehla doongi...idhar aa aur yahan hamen dekh ke muthh maar le.....choot to aaj tere naseeb men hai nahi.....dekh ke gujara kar......agar mujhe taras aaya to teri lulli choos doongi....aaja aaja mere chootiye samdhi........chal aa idhar...'' sarla teji se Kammo ki choot men ungli ke ghasse maarte hue boli. uski awaaz men kadakpan ke sath teekhapan bhi tha. Usko Babuji ki beizzati karne men maza aa raha tha.

 


बाबूजी उसकी बातों से जितना अंदर से तिलमिला रहे थे वही दोनो रॅंडियो की हरकतें देख के उनके लौडे में खून उबल रहा था. उनसे रहा नही गया और एक बार फिर उनके कदम वापिस हो लिए. सरला के झुके हुए सिर के सामने खड़े खड़े उन्होने लंड के टोपे को मसला और ज़ोर से दबाया. सरला ने सिर उपर करके उनकी तरफ देखा और ज़ोर से हँसी.

''चल रे चूतिये मूठ मार और दिखा तेरे लौडे में कितना ज़ोर है......तेरे मूठ की धार मेरी गान्ड तक पहुँची तो इनाम में तुझे दूसरे राउंड में कम्मो की चूत दूँगी. देखती हूँ तेरे मूठ की धार कम्मो मेरे चूतड़ो से चाट पाती है कि नही. चल बहेन के लौडे मूठ मारनी शुरू कर.'' सरला ने एक बार फिर से अपनी तीखी ज़ुबान का प्रदर्शन किया और झुक के मूह कम्मो की चूत से सटा दिया.

''बाबूजीइइईईईईईईईई.........खबरदार.....आपको कसम है मेरी......और मेरी चूत की ......खबरदार जो आपने लंड को हिलाने की कोशिश की........मेरे होते हुए अगर ऐसा हुआ तो लानत है मेरी जवानी पे और आपकी बहू होने पे.......मा तुम कितनी भी बड़ी छिनाल हो जाओ पर मेरे बाबूजी से चूत का सुख कभी नही छीन सकती.......तुम नही दोगि या ये कुतिया नही देगी तो क्या मेरे बाबूजी बिना चूत के रहेंगे.......तुम्हारी जैसी हज़ारों चूते मिल जाएँगी इन्हे.......पर इनके सरीखा लोड्‍ा किसी किसी को मिलता है........बाबूजी आप चिंता ना करो मैं आ गई.....''सखी की तीखी चीख और आवाज़ ने तीनो के होश उड़ा दिए. कम्मो का मूह जो कि सरला की चूत से जुड़ा हुआ था अब खुला का खुला रह गया. उसके मूह होंठ और गले में सरला का इतना रस गया था पर फिर भी उसका गला सूख गया. सरला सिर उठाए फटी आँखों से सखी को साड़ी उतारते हुए और अपनी तरफ बढ़ते हुए देख रही थी. बाबूजी का हाथ अपने लौडे पे जम गया था और उनका भी मूह खुला पड़ा था.

कम्मो की फटी हुई आँखों के सामने सखी अपनी साड़ी उतारते हुए उनके नज़दीक पहुँच चुकी थी. उसने अपना ब्लाउस खोलने की कोशिश की और जब हुक नही खुले तो उसने ज़ोर लगा के हुक तोड़ दिए. फ्रंट ओपनिंग ब्रा का हुक भी खींच के तोड़ दिया और उसी हालत में उसने अपना पेटिकोट उतार फेंका. ऐसा लग रहा था जैसे कि कोई भूखी शेरनी अपने शिकार पे टूटने वाली है. पैंटी तो उसने पहनी ही नही थी और खुले हुए ब्लाउस और ब्रा के साथ वो तेज़ी से बाबूजी के नज़दीक पहुँची और उनके गले में बाहें डाल के उन्हे चूमने लगी. बाबूजी जो अब तक हैरान थे उन्होने खुशी से उसको चूमते हुए अपनी बाहों में उठा लिया और ससुर बहू खड़े खड़े एक दूसरे से लिपट गए. जैसे ही सखी की चूचियाँ बाबूजी की छाती से रगड़ी उसके निपल्स में तनाव आ गया और उसने अपनी एक टाँग बाबूजी की कमर की तरफ उठा दी. बाबूजी इशारा समझ गए और उसकी दोनो टाँगों को पकड़ के खड़े खड़े उन्होने गोद में उठा लिया. बाबूजी की गोद में चढ़ते ही सखी ने अपनी चूत को अड्जस्ट किया और सट से उनके लौडे पे बैठ गई और अपनी दोनो टांगे उनकी कमर के पिछे टाइट कर दी. 5 सेकेंड में ही नंगी बहू खड़े खड़े अपने ससुर के लौडे पे चढ़ के चुदने को तैयार हो गई. दोनो के ताबड तोड़ चुम्मों के बीच सखी ने गान्ड हिला के उछल्ना शुरू किया तो बाबूजी के मजबूत हाथों ने उसके चूतड़ो को थाम लिया.

''ओओओओओओओह्ह्ह्ह्ह्ह मेरी प्यारी बहू........उम्म्म्म तू कहाँ थी.....तेरी कितनी कमी महसूस हो रही थी..........ऊऊहह हाआँ तेरी छिनाल मा कुच्छ भी कर ले पर तू मेरी लाडली है मेरा ख़याल रखने के लिए........उउम्म्म्म....पुच पुच पुच पुच......उउम्म्म्मम....'' बाबूजी उसे बेतहाशा चूमे जा रहे थे और सखी भी पागल हुई पड़ी थी.

'' बाबूजी आप चिंता ना करो ......सिर्फ़ सखी ही नही हम भी हैं आपके लिए....और अभी इस छिनाल आंटी जी को बताते हैं की चूत चूत और लंड चूत के खेल में क्या फरक है. भैया आप सब बच्चों को सुला के आओ तब तक हम इन दोनो को देख लें. '' राखी ने राजू को अंबोधित करते हुए कहा और अपने कपड़े उतारने लगी. उसको देखते हुए मिन्नी ने भी नंगी होना शुरू कर दिया. उधर बाबूजी के लंड पे कूदती सखी की आहें उसकी मा के कानो में गूंजने लगी. सरला उसको देख के वापिस कम्मो की चूत चूसने में लग गई. पर कम्मो को तो ये चुद्दक्कर परिवार का रूप देख के जैसे साँप ही सूंघ गया था. उसके हाथ पावं, जीभ वागरह सब चलने बंद हो गए थे. वो कभी सखी को देखने की कोशिश कर रही थी तो कभी मिन्नी और राखी को नंगी होते हुए देख रही थी. राखी पहले नंगी हुई और उसने अपने मम्मो को ज़ोर ज़ोर से सहलाया और उपर करके बारी बारी अपने निपल चूसे. उसके बाद वो धाम्म से कम्मो के मूह पे बैठ गई और अपनी चूत उसके मूह पे रगड़ने लगी. कुच्छ ही देर में उसकी 3 उंगलियाँ सरला की चूत में अंदर बाहर होने लगी. इतने में मिन्नी ने कम्मो की टाँगों के बीच अपनी जगह बनाई और उसकी चूत से अपनी चूत को सटा दिया. दोनो की टांगे सिसर्स की तरह थी और चूतो के होंठ आपस में रगड़ने लगे. तब आगे बढ़ के मिन्नी ने सरला के बालों को पकड़ा और झटके से उसके होंठ दोनो चूतो के मिलन द्वार पे लगा दिए.

बच्चों को सुलाने के बाद जब तीनो भाई कमरे में पहुँचे तो नज़ारा देखते ही बनता था. सोफा पे बाबूजी सखी की टाँगों के बीच घुसे हुए उसके माममे दबोच के घस्से पे घस्सा मारे जा रहे थे. सखी का सिर इधर से उधर घूम रहा था और उसके मूह से बाबूजी के लिए प्यार भरी ऊओह आह और सिसकारियाँ निकल रही थी. सखी की टांगे जिस तरीके से खुली हुई थी उस तरीके से बाबूजी का लंड उसकी चूत से अंदर बाहर होता हुआ सॉफ दिख रहा था. अचानक से संजय को अपनी बीवी को अपने मूह बोले बाप से चुद्ते हुए देखते हुए इतनी थरक चढ़ि कि उससे रहा नही गया और वहीं खड़े खड़े उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए. कुच्छ ही सेकेंड में वो नंगा हो गया और अपना 11 इंच का लोड्‍ा लिए सोफा की तरफ बढ़ गया. सखी ने उसे आते हुए देखा तो बाबूजी का हाथ जिसमे जुड़ी हुई उंगलियाँ थी उसे पकड़ के अपने मूह की तरफ खींचा और जुड़ी हुई उंगली को चूसने लगी. जब तक संजय अपने विशाल लंड को मसल्ते हुए अपनी बीवी के नज़दीक पहुँचा तब तक सखी ने बाबूजी की उंगलिओ को अच्छे से थूक से गीला कर दिया था.

 


Babuji uski baton se jitna andar se tilmila rahe the wahi dono randion ki harkaten dekh ke unke lode men khoon ubal raha tha. Unse raha nahi gaya aur ek baar phir unke kadam waapis ho lie. Sarla ke jhuke hue sir ke saamne khade khade unhone lund ke tope ko masla aur jor se dabaya. Sarla ne sir upar karke unki taraf dekha aur jor se hansi.

''Chal re chootye muthh maar aur dikha tere lode men kitna jor hai......tere muth ki dhaar meri gaand tak pahunchi to inaam men tujhe doosre round men kammo ki choot doongi. Dekhti hun tere muthh ki dhaar kammo mere chootron se chaat paati hai ki nahi. Chal behen ke lode muthh maarni shuru kar.'' Sarla ne ek baar phir se apni teekhi jubaan ka pradarshan kia aur jhuk ke muh kammo ki choot se sata dia.

''Babujiiiiiiiiiiii.........khabardaar.....aapko kasam hai meri......aur meri choot ki ......khabardaar jo aapne lund ko hilaane ki koshish ki........mere hote hue agar aisa hua to laanat hai meri jawaani pe aur aapki bahu hone pe.......maa tum kitni bhi badi chhinaal ho jao par mere Babuji se choot ka such kabhi nahi chheen sakti.......tum nahi dogi ya ye kutiya nahi degi to kya mere Babuji bina choot ke rahenge.......tumhari jaisi hajaaron chooten mil jaengi inhe.......par inke sareekha loda kisi kisi ko milta hai........babuji aap chinta na karo main aa gai.....''Sakhi ki teekhi cheekh aur awaaz ne teeno ke hosh uda die. Kammo ka muh jo ki Sarla ki choot se juda hua tha ab khula ka khula reh gaya. Uske muh honth aur gale men Sarla ka itna ras gaya tha par phir bhi uska gala sookh gaya. Sarla sir uthaye phati aankhon se Sakhi ko saari utaarte hue aur apni taraf badte hue dekh rahi thi. Babuji ka hath apne lode pe jamm gaya tha aur unka bhi muh khula pada tha.

Kammo ki phati hui aankhon ke saamne Sakhi apni saari utarte hue unke nazdeek pahunch chuki thi. Usne apna blouse kholne ki koshishh ki aur jab hook nahi khule to usne jor laga ke hook tod die. Front opening bra ka hook bhi kheench ke tod dia aur usi haalat men usne apna petticoat utaar phenka. Aisa lagg raha tha jaise ki koi bhookhi sherni apne shikaar pe tootne waali hai. Panty to usne pehni hi nahi thi aur khule hue blouse aur bra ke sath who teji se Babuji ke nazdeek pahunchi aur unke gale men baahen daal ke unhe choomne lagi. Babuji jo ab tak hairaan the unhone khushi se usko choomte hue apni baahon men utha lia aur sasur bahu khade khade ek doosre se lipat gae. Jaise hi Sakhi ki choochian Babuji ki chhati se ragri uske nipples men tanaav aa gaya aur usne apni ek taang babuji ki kamar ki taraf utha di. Babuji ishara samjh gae aur uski dono taangon ko pakar ke khade khade unhone gode men utha lia. Babuji ki gode men chadte hi Sakhi ne apni choot ko adjust kia aur satt se unke lode pe baith gai aur apni dono taange unki kamar ke pichhe tight kar di. 5 second men hi nangi bahu khade khade apne sasur ke lode pe chad ke chudne ko taiyaar ho gai. Dono ke taabad tod chummon ke beech Sakhi ne gaand hila ke uchhalna shuru kia to Babuji ke majboot hathon ne uske chootron ko thaam lia.

''OOOOOOOhhhhhh meri pyaari bahu........ummmm tu kahan thi.....teri kitni kami mehsoos ho rahi thi..........oooohhhhhhh haaan teri chhinaal maa kuchh bhi kar le par tu meri laadli hai mera khayaal rakhne ke lie........uummmm....puch puch puch puch......uummmmm....'' Babuji use betahasha choome ja rahe the aur Sakhi bhi paagal hui padi thi.

'' Babuji aap chinta na karo ......sirf Sakhi hi nahi ham bhi hain aapke lie....aur abhi iss chhinaal aunty ji ko batate hain ki choot choot aur lund choot ke khel men kya farak hai. Bhaiya aap sab bachhon ko sula ke aaotab tak ham in dono ko dekh len. '' Rakhi ne Raju ko ambodhit karte hue kaha aur apne kapde utaarne lagi. usko dekhte hue Minni ne bhi nangi hona shuru kar dia. Udhar Babuji ke lund pe koodti Sakhi ki aahen uski maa ke kaano men goonjne lagi. Sarla usko dekh ke waapis Kammo ki choot choosne men lagg gai. Par Kammo ko to ye chuddakkar pariwaar ka roop dekh ke jaise saanp hi soongh gaya tha. Uske hath paon, jeebh wagarah sab chalne band ho gae the. Woh kabhi Sakhi ko dekhne ki koshish kar rahi thi to kabhi Minni aur rakhi ko nangi hote hue dekh rahi thi. Rakhi pehle nangi hui aur usne apne mummon ko jor jor se sehlaya aur upar karke baari baari apne nipple choose. uske baad woh dhaam se Kammo ke muh pe baith gai aur apni choot uske muh pe r agarne lagi. Kuchh hi der men uski 3 unglian Sarla ki choot men andar bahar hone lagi. Itne men Minni ne kammo ki taangon ke beech apni jagah banai aur uski choot se apni choot ko sataa dia. Dono ki taange scissors ki tarah thi aur chooton ke honth apas men ragarne lage. Tab aage bad ke Minni ne Sarla ke baalon ko pakra aur jhatke se uske honth dono chooton ke Milan dwar pe laga die.

Bachhon ko sulaane ke baad jab teeno bhai kamre men pahunche to nazara dekhte hi banta tha. Sofa pe Babuji Sakhi ki taangon ke beech ghuse hue uske mummen daboch ke ghasse pe ghassa maare jaa rahe the. Sakhi ka sir idhar se udhar ghoom raha tha aur uske muh se Babuji ke lie pyaar bhari oooh aah aur siskaarian nikal rahi thi. Sakhi ki taange jis tarike se khuli hui thi uss tarike se Babuji ka lund uski choot se andar bahar hota hua saaf dikh raha tha. Achanak se Sanjay ko apni biwi ko apne muh bole baap se chudte hue dekhte hue itni tharak chadi ke usse raha nahi gaya aur wahin khare khare usne apne kapde utaarne shuru kar die. Kuchh hi second men woh nanga ho gaya aur apna 11 inch ka loda lie sofa ki taraf bad gaya. Sakhi ne use aate hue dekha to Babuji ka hath jisme judi hui unglian thi use pakar ke apne muh ki taraf khincha aur judi hui ungli ko choosne lagi. Jab tak Sanjay apne vishaal lund ko masalte hue apni biwi ke nazdeek pahuncha tab tak Sakhi ne Babuji ki unglion ko achhe se thook se geela kar dia tha.

 


''बाबूजी ये उंगलियाँ मेरे दूसरे छेद में डालो......प्लीज़....आज थोड़ी देर के लिए तीनो छेद भरवाने का मन कर रहा है........उम्म्म्मम...'' सखी ने सेक्सी चेहरा बनाते हुए बाबूजी को कुच्छ पल के लए रोका और कहा.

''जैसा तू कहे मेरी बहूरानी.......तेरे लिए जल्दी ही नए लोड़ों का इंतज़ाम करवाउंगा. फिर तेरे तीनो छेद नए नए लंड से भरवा दूँगा. तूने तो सिर्फ़ एक माँगा था मैं तुझे कई लाके दूँगा....तब तक मेरी जुड़ी हुई उंगलिओ से अपनी गान्ड खुल्वाति रह.....आआआअहह कितनी नरम है .....'' बाबूजी ने सखी की गान्ड में अपनी गीली जुड़ी हुई उंगलियाँ धीरे धीरे घुसेड दी. जब तक वो ये कर रहे थे तब तक संजय अपनी बीवी के मूह में अपना सूपड़ा ठूंस चुका था और बगल में कार्पेट का नज़ारा देखने में मगन था.

अभी भी कपड़े पहने हुए राजू और सुजीत कार्पेट का नज़ारा देखने में मगन थे. राखी बहुत बुरी तरीके से सरला की चूत में उंगली पेल रही थी और अपनी गान्ड मटका के कम्मो से अपनी चूत चटवा रही थी. उधर कम्मो और मिन्नी की चूत के मिलन द्वार पर सरला वहशियों की तरह अपनी जीभ चला रही थी. अपनी चूत में राखी की उंगलिओ का घर्षण और मूह के सामने चूत रस से महकती हुई 2 - 2 चूतो का स्वाद सरला के लिए बहुत ज़ियादा साबित हो रहा था. कम्मो की हालत भी कुच्छ कम नही थी. उसकी चूत से इतना कामरस पहली बार निकला था. उसकी सिसकिओं की आवाज़ें राखी की चूत में गूँज रही थी. कम्मो के चूतर रह रह के उपर को उठ रहे थे. सरला की जीभ का स्पर्श उसे जब भी मिलता तो उसे लगता कि वो छोड़ने वाली है. फिर अचानक से उसकी चूत सूनी पड़ जाती थी. जब सरला मिन्नी की चूत चाटने लगती तो कम्मो की चूत कुच्छ शांत होने लगती. ऐसा लग रहा था जैसे कि कितना टाइम बीत गया ये सब करते हुए. पर असल में सब कुच्छ 15 मिनट के भीतर भीतर हो गया था.

''भाभी आप और राखी चुदास आंटी के साथ चूत चूत खेलो तब तक हम दोनो कम्मो को लंड चूत खिलवा लेते हैं. वैसे भी इसकी चूत मारने का बहुत मन था इतने दिन से. अब जब आज ये रांड़ खुद ही नंगी हुई पड़ी है तो मौका देख के इसको अपने लौडे पे कूदवा लूँ थोड़ा.....मिन्नी अपनी चूत इसके मूह से हटाओ और इसे हमारे हवाले कर दो.....'' संजय ने पहले मिन्नी और फिर राखी को संबोधित करते हुए कहा.

''ले जाओ देवेर्जी मैने कब रोका है....इसकी चूत को अपने 9 इंच मूसल के मज़े दो और अच्छे से चोदो. और हां थोड़ा मौका मेरे मा जी को भी दे देना...वैसे भी बहुत दिन बाद इन्हे कम्मो का काम रस मिलेगा. चलो आंटी अब मैं और राखी मिल के आपकी चूत चूत की काम वासना को शांत करते हैं.'' मिन्नी नीचे से उठते हुए बोली.

''राखी उंगली मत निकालना बेटा ....मैं बस . वाली हूँ.....जाने से पहले थोड़ा चूत रस पीला दे री कम्मो......उउउम्म्म्मम पुच पुच....स्लुउउर्र्रप्प्प्प......'' सरला अपने मूह से मिन्नी की चूत के हटते ही कम्मो की चूत पे टूट पड़ी.

''पी लो सब में साब......पता नही ये चोदु भैया लोग कहाँ से आ गए...आज तो आपके साथ चूत . खेलने का ही मन था......आआअररर्ग्घह.....उम्म्म्म और राखी दीदी की चूत से जो मज़ा मिला है वो भी जन्न्नत से कॅम नही था.....ऊऊहह अब मेरी निगोडी चूत को लौडे खाने ............'' कम्मो नीचे से सिसकते हुए बोली.

'' बाबूजी ......आप भी जाओ......और इन्हे भी लेके जाओ ...मुझे थोड़ी देर के लिए छोड़ दो ...आज इस छिनाल कम्मो को एक साथ 4 लंड दे दो.......उउंम्म मेरा मन नही है आपका लोड्‍ा बाहर करवाने का पर आज इस छिनाल को सबक सिखाना ज़रूरी है..... भाभी आप दोनो मेरी चुदास मम्मी को यहाँ सोफा पे ले आओ और कम्मो को हमारे घर के भेडियोन के लिए छोड़ दो....साले सब नोचेंगे इसे आज तो पता चलेगा कुत्ति को.'' सखी अचानक से हुकुम चलाने के मूड में आ गई. उसकी बातें सुनते ही कम्मो की तो जान ही निकल गई. एक साथ 4 मर्द उसका भोग करेंगे सोच के उसके जिस्म में जैसे खून ही नही रहा.

'' नही छ्होटी दीदी ऐसा नही करो....मुझे घर जाना है...घर पे सब बच्चे अकेले हैं...उन्हे कौन देखेगा...आज जाने दो...फिर कभी कर लूँगी सबके साथ...'' कम्मो अब खड़ी हो चुकी थी और पूरी तरह से घबराई हुई थी. सरला की चूत में उंगलियाँ फँसाए हुए राखी उसे सोफा पे ले गई थी और नंगी सरला अपनी नंगी बेटी के बगल में लेटी हुई टांगे खोल के चूत में उंगली करवा रही थी. मिन्नी जो कि अभी भी कम्मो के नज़दीक खड़ी थी उसने आगे बढ़ के कम्मो के दोनो निपल कटोच दिए.

''चुप कर हराम की जनि....चुप चाप मेरे बाबूजी का और बाकी मर्दों के लोड़ों को शांत कर और घर चली जाना....अगर नही तो एक काम कर..मुन्नी को फोन लगा और बोल कि तेरे बच्चों को घर ले जाए... कहना कि आंटी की तबीयत ठीक नही है और तुझे आज उनकी देखभाल के लिए यहीं रुकना है...वैसे भी तू यही करना चाहती थी ना....हे हे हे...हे...'' मिन्नी ने दोनो मोटे मोटे मम्मो को अपनी हथेलिओं में भींच लिया और फिर बारी बारी से दोनो निपल भी चूस लिए.

'' मत कर बेचारिके साथ ऐसे....उसका क्या कसूर है जो 4 लोड्‍े दोगि उसे.....मैने ही उसकी चूत पे हाथ फेरा था पहले.....छोड़ दो उउउन्न्नज्ग्घ बेच्छाआअरर्रीि को...उूउउऊहह रखिईीईईई.........दाना मत छेड़ ऐसे.....'' सरला ने कम्मो की साइड लेते हुए कहा और मज़े लेते हुए सिसकियाँ भरते हुए आँखें बंद कर ली.

''मा तुम बीच में मत पाडो नही तो इन चारों को तुमपे छोड़ दूँगी. तुम बस भाभी से चूत . और मिन्नी भाभी की चूत चॅटो तब तक मैं इस रंडी का इंतज़ाम करके आती हूँ.'' सखी अपनी जगह से खड़ी हो गई. थोड़ा मुस्कुराते हुए वो कम्मो के पास पहुँची. उसके नज़दीक पहुँच के उसने कम्मो के मम्मे पकड़े और बारी बारी उन्हे चूस लिया. कम्मो एक बार फिर से उत्तेजित होने लगी. उसने सखी के सिर के पिछे हाथ रख दिया और उसकी चुसाइ का मज़ा लेने लगी.

''कम्मो तेरे चूचे तो बहुत बड़े हैं. कितने मज़ेदार हैं...शायद तभी मम्मी को तेरे से प्यार करने का इतना मन कर रहा था. और तेरी चूत भी काफ़ी प्यारी है. इसमे मेरे जेठ का लोड्‍ा जाएगा तो अच्छा लगेगा. बता पहले किसका लेगी. सुजीत भैया ने अभी तक तेरी चूत नही भोगी है तो पहले उन्हे दे दे. फिर इनको देना. बाबूजी आज आप कम्मो की गान्ड का उधघाटन करो. '' ये सब कहते हुए एक बार फिर से सखी ने अपने दाँत हल्के से कम्मो के चूचों में दबा दिए.

''उफ़फ्फ़ छोटी दीदी क्या चूस्ति हो आप.......उम्म्म....मुझे मज़ा आ गया. हां मेरे को सबके लौडे दिलवा दो. आज रात यहीं रंडी खेल खेलने दो. पर पहले मुन्नी को फोन करवा दो. मेरे बच्चे अकेले हैं.'' कम्मो ने कराहते हुए कहा.

 


''Babuji ye unglian mere doosre chhed men daalo......please....aaj thori der ke lie teeno chhed bharwaane ka mann kar raha hai........ummmmm...'' Sakhi ne sexy chehra banate hue Babuji ko kuchh pal ke lie roka aur kaha.

''Jaisa tu kahe meri bahurani.......tere lie jaldi hi nae lodon ka intezaam karwaunga. Phir tere teeno chhed nae nae lund se bharwa doonga. Tune to sirf ek maanga tha main tujhe kai laake doonga....tab tak meri judi hui unglion se apni gaand khulwaati reh.....aaaaaaahhhhh kitni naram hai .....'' Babuji ne Sakhi ki gaand men apni geeli judi hui unglian dhire dhire ghused di. Jab tak woh ye kar rahe the tab tak Sanjay apni biwi ke muh men apna supada thoons chuka tha aur bagal men carpet ka nazara dekhne men magan tha.

Abhi bhi kapde pehne hue Raju aur Sujit carpet ke nazara dekhne men magan the. Rakhi bahut buri tarike se Sarla ki choot men ungli pel rahi thi aur apni gaand matka ke Kammo se apni choot chatwa rahi thi. Udhar Kammo aur Minni ki choot ke milan dwaar par Sarla vehashion ki tarah apni jeebh chala rahi thi. Apni choot men Rakhi ki unglion ka gharshan aur muh ke saamne chootras se mehakti hui 2 - 2 chooton ka swaad Sarla ke lie bahut ziada saabit ho raha tha. Kammo ki haalat bhi kuchh kamm nahi thi. Uski choot se itna kaamras pehli baar nikla tha. Uski siskion ki awaazen Rakhi ki choot men goonj rahi thi. Kammo ke chootar reh reh ke upar ko uth rahe the. Sarla ki jeebh ka sparsh use jab bhi milta to use lagta ki woh chhootne wali hai. phir achanak se uski choot sooni pad jaati thi. Jab Sarla minni ki choot chaatne lagti to Kammo ki choot kuchh shaant hone lagti. Aisa lagg raha tha jaise ki kitna time beet gaya ye sab karte hue. Par asal men sab kuchh 15 min ke bheetar bheetar ho gaya tha.

''Bhabhi aap aur Rakhi chudaas aunty ke sath choot choot khelo tab tak hum dono Kammo ko lund choot khilwa lete hain. Waise bhi iski choot maarne ka bahut mann tha itne din se. Ab jab aaj ye raand khud hi nangi hui padi hai to mauka dekh ke isko apne lode pe kudwa loon thora.....Minni apni choot iske muh se hatao aur ise hamare hawaale kar do.....'' Sanjay ne pehle Minni aur phir Rakhi ko sambodhit karte hue kaha.

''Le jao deverji maine kab roka hai....iski choot ko apne 9 inch moosal ke maje do aur achhe se chodo. Aur haan thora mauka mere mian ji ko bhi de dena...waise bhi bahut din baad inhe Kammo ka kaam ras milega. Chalo Aunty ab main aur rakhi mil ke aapki choot choot ki kaam vasna ko shaant karte hain.'' Minni niche se uthte hue boli.

''Rakhi ungli mat nikalna beta ....main bas jharne waali hoon.....jaane se pehle thora choot ras pila de ri Kammo......uuummmmm puch puch....sluuurrrpppp......'' Sarla apne muh se Minni ki choot ke hatte hi kammo ki choot pe toot padi.

''Pi lo sab mem saab......pata nahi ye chodu bhaiya log kahan se aa gae...aaj to aapke sath choot chhot khelne ka hi mann tha......aaaaarrrgghhh.....ummmm aur Rakhi didi ki choot se jo maza mila hai woh bhi jannnat se kamm nahi tha.....oooohhhh ab meri nigodi choot ko lode khaane parenge...........'' Kammo niche se siskate hue boli.

'' Babuji ......aap bhi jao......aur inhe bhi leke jao ...mujhe thori der ke lie chhor do ...aaj iss chhinaal Kammo ko ek sath 4 lund de do.......uummm mera mann nahi hai apka loda bahar karwaane ka par aaj iss chhinaal ko sabak sikhana jaroori hai..... Bhabhi aap dono meri chudaas mummy ko yahan sofa pe le aao aur Kammo ko hamare ghar ke bhedion ke lie chhor do....saale sab nochenge ise aaj to pata chalega kutti ko.'' Sakhi achanak se hukum chalaane ke mood men aa gai. Uski baaten sunate hi Kammo ki to jaan hi nikal gai. Ek sath 4 mard uska bhog karenge soch ke uske jism men jaise khoon hi nahi raha.

'' Nahi chhoti didi aisa nahi karo....mujhe ghar jana hai...ghar pe sab bachhe akele hain...unhe kaun dekhega...aaj jaane do...phir kabhi kar loongi sabke sath...'' Kammo ab khadi ho chuki thi aur poori tarah se ghabraai hui thi. Sarla ki choot men unglian fansaae hue Rakhi use sofa pe le gai thi aur nangi Sarla apni nangi beti ke bagal men leti hui taange khool ke choot men ungli karwa rahi thi. Minni jo ki abhi bhi Kammo ke nazdeek khadi thi usne aage bad ke Kammo ke dono nipple katoch die.

''Chuup kar haraam ki jani....chup chaap mere Babuji ka aur baaki mardon ke lodon ko shaant kar aur ghar chali jaana....agar nahi to ek kaam kar..Munni ko phone laga aur bol ki tere bachhon ko ghar le jae... kehna ki Aunty ki tabiyat theek nahi hai aur tujhe aaj unki dekhbhaal ke lie yahin rukna hai...waise bhi tu yahi karna chahti thi na....he he he...he...'' Minni ne dono motte motte mummon ko apni hathelion men bheench lia aur phir baari baari se dono nipple bhi choos lie.

'' Mat kar bechaarike sath aise....uska kya kasoor hai jo 4 lode dogi use.....maine hi uski choot pe hath phera tha pehle.....chhor do uuunnnggghh bechhaaaaarrriii kooo...uuuuoohhh Rakhiiiiiii.........daana mat chher aise.....'' Sarla ne Kammo ki side lete hue kaha aur maze lete hue siskian bharte hue aankhen band kar li.

''Maa tum beech men mat pado nahi to in charon ko tumpe chhor doongi. Tum bas bhabhi se choot chatwao aur Minni bhabhi ki choot chaato tab tak main is randi ka intezaam karke aati hoon.'' Sakhi apni jagah se khari ho gai. Thora muskurate hue woh Kammo ke pass pahunchi. Uske nazdeek pahunch ke usne Kammo ke mummen pakde aur baari baari unhe choos lia. Kammo ek baat phir se uttejit hone lagi. Usne Sakhi ke sir ke pichhe hath rakh dia auski chusaai ka maza lene lagi.

''Kammo tere chooche to bahut bade hain. Kitne mazedaar hain...shayad tabhi mummy ko tere se pyaar karne ka itna mann kar raha tha. Aur teri choot bhi kaafi pyaari hai. Isme mere jethji ka loda jaega to achha lagega. Bata pehle kiska legi. Sujit bhiya ne abhi tak teri choot nahi bhogi hai to pehle unhe de de. Phir inko dena. Babuji aaj aap Kammo ki gaand ka udhghatan karo. '' ye sab kehte hue ek baar phir se Sakhi ne apne daant halke se Kammo ke choochon men daba die.

''Ufff chhoti didi kya choosti ho aap.......ummm....mujhe maza aa gaya. Haan mere ko sabke lode dilwa do. Aaj raat yahin randi khel khelne do. Par pehle Munni ko phone karwa do. Mere bachhe akele hain.'' Kammo ne karahate hue kaha.

 
कम्मो की चूत से जितना रस बह रहा था उस हिसाब से मोटे से मोटा लंड भी बहुत आसानी से अंदर चला जाता. पर सुजीत का 9 इंच का मोटा हथियार आज इतना फूला हुआ था कि 4 इंच अंदर घुसते ही कम्मो की चीखें निकलनी शुरू हो गई. दर्द के एहसास के बावजूद वो इतनी उत्तेजित थी कि उसने अपने चूतरो का ज़ोर लगाते हुए नीचे बैठना जारी रखा. उसके चेहरे के भाव सॉफ बता रहे थे कि उसे कितना दर्द हो रहा है. और शायद इसी वजह से सखी को उसपे तरस आ गया और उसने कम्मो के झूलते हुए मम्मो को पकड़ के सुजीत के मूह से लगा दिया. कुच्छ देर के लिए कम्मो के शरीर से जैसे जान ही निकल गई. फिर धीरे धीरे सुजीत की जीभ से उसके निपल्स में जान आनी शुरू हुई और बदन में खून ने उबाल लेना शुरू किया. देखते ही देखते निपल्स की गर्मी एक बार फिर चूत को गरम करने लगी. कम्मो का रोम रोम काँप रहा था. सुजीत के मोटे लौडे से जो सच उसे मिल रहा था हू किसी जन्नत से कम नही था. इतने में बाबूजी ने अपना 7 इंची उसके होठों पे फेराया. कम्मो का मूह लार से भर गया और उसने बाबूजी के लौडे पे थूका. फिर एक हाथ से अपना राइट मम्मा दबा के सुजीत के मूह में ठूँसा और दूसरे हाथ से बाबूजी का हस्त मैथुन करने लगी.

उसके बगल में आधी झुकी हुई खड़ी सखी अपने पति संजय का लंड चूस रही थी और पिछे से उसके जेठ राजू ने उसकी चूत में आधा लंड पेला हुआ था. सखी की चोटी पकड़ के राजू धीरे धीरे उसकी चूत में धक्के लगा रहा था. आधी खुली आँखों से सखी को एक साथ अपने पति और जेठ से मज़े लेते हुए देखते हुए कम्मो एक दम उत्तेजित हो गई. उसने सुजीत के लंड पे चूत घुमानी शुरू कर दी और साथ ही साथ बाबूजी के लंड के गीले गीले और गहरे गहरे चुम्मे लेने शुरू कर दिए. उसकी इस हरकत से बाबूजी का बदन काँपने लगा और उन्हे लगा कि हू जल्दी ही झर जाएँगे. बाबूजी ने कम्मो के चूतड़ो पे ज़ोर ज़ोर से 3 – 4 थप्पड़ रसीद दिए और अपना लोड्‍ा उसके मूह से निकाल के उसके गालों पे मारा.

‘’मुझे पता होता कि तू इतनी बड़ी छिनाल है और ऐसा लोड्‍ा चूस्ति है तो कभी का अपने बेटों के लंड तुझे दिलवा देता. सखी ये हरामज़ादी तुझे देख के पागल हो रही है. एक काम कर ज़रा थोड़ी देर के लिए अपनी चूत इसके मूह पे लगा दे….. मेरी प्यारी बहू……आज मैं इसकी गान्ड की सील खोलूँगा. क्यों री रंडी डाल दूं लोड्‍ा तेरी गान्ड में …..?? या फिर संजय का 11 इंच लेना है वहाँ ….??’’ बाबूजी ने कम्मो के मूह से अपना मूह लड़ाया और उसके होंठ चूस्ते हुए पुछा.

‘’उउम्म्म्मम……..ईइसस्स्शह……..उूुऊउगगघह बाबूजी अब जब रंडी बनना ही है तो पहले तुम्हारी बनती हूँ फिर भैया जी की. वैसे भी तुम्हारा तो भैया जी के मुक़ाबले लुल्ली है. पहले लुल्ली से छेद खुलवा लेती हूँ फिर लंड भी ले लूँगी. वैसे जो लंड चूत में है हू भी शानदार है. सच कहूँ बाबूजी इतने खूबसूरत लौडे एक खानदान में हों तो घर के बाहर चुदने की ज़रूरत नही. अब मैं समझ रही हूँ कि सब दिदिआ और आंटी इतने दिन से इतनी खुश कैसे रह रही थी. हायईए…….मेरा तो मन करता है बाबूजी कि कल से सारा दिन इस घर में नंगी घूमती रहूं और कभी किसी लौडे से तो कभी किसी चूत से खेलती रहूं…….उउम्म्म्मम बाबूजी अब तो गान्ड पेट हुक भी लग लिया….अब तो भोग लो इसे……2 – 2 लंड से चुदने की तम्मन्ना किसी किसी औरत की पूरी होती है……आज तो मैं धन्य हो जाउन्गि……….आरर्रघह धीरे धीरे बाबूजी अभी तो कुँवारी हूँ गान्ड से…………उउम्म्म्म…..ऊओह….ऊऊऊओमाा……घुस्स गयाआ……….ऊऊहह ……..भैया जी थोड़ा अपनी तरफ खींच लो मुझे….बाबूजी को पिछे से धक्का लगाने दो………..’’ कम्मो अब पूरी तरह से भर चुकी थी. बाबूजी का लोड्‍ा करीब करीब पूरा गान्ड में दाखिल हो चुका था. दोनो छेदो में इतना गीला पन था कि दोनो लंड कुच्छ कुच्छ फिसल रहे थे. पर अपने मॅन की मुराद पूरी करके कम्मो को आज जैसे सब कुच्छ मिल गया. इतनी सारी नंगी छूटेन और लंड एक साथ उसके नसीब में होंगे उसने कभी सोचा भी नही था. उसकी बरसों की प्यास जैसे एक ही बार में भुज रही थी. पर उसे क्या पता था कि ये तो सिर्फ़ शुरुआत थी……

‘’2 – 2 लंड क्यों तुझे तो आज एक साथ 4 – 4 मिलेंगे. अपने हाथ खोल और बाकी दोनो के पकड़ ले. सखी बहू आजा बेटा इसके खुले मूह में थोड़ा अपना कामरस भर दे ताकि तेरा पति और जेठ बाद में इसके होंठों से उसे पी के अपनी प्यास भुजा लें….तब तक कम्मो इनके लंड हिला देगी….’’ बाबूजी ने अपनी रफ़्तार बढ़ाते हुए कहा.

‘’छोटी दीदी पहले मुन्नी को फोन लगा दो….घर से बच्चों को ले जाएगी………आआ ..एयेए…एयेए…उम्म्म्म भैया जी आज तो मज़ा दे दिया आपके लंड ने……उउम्म्म्म……अर्रे दीदी आप ही बात कर लो मैं कहाँ से करूँगी……..उउंम…..हाआँ मुन्नी …मैं बोल रही हूँ…….सुन एक काम कार……..ऊहह…..तू ना घर जाके बच्चों को ले आ ….रात तेरे पास ही रुकेंगे……..ऊओह भैया जी………..उउंम…..अररी आज आंटी की तबीयत ठीक नही है तो मुझे उनको देखना है….हां हां हराम की जनि…….चुस्वा रही हूँ मम्मे भैया जी से……….तूने भी चुस्वाए थे….साअली मौका मिला है तो छोड़ूँगी नही……..सेवा करूँगी तो मेवा भी लूँगी नाअ……………चल कल बताती हूँ………. अभी तो केला खाने दे…..उउउर्र्घह …जल नही तुझे भी दिलवाउंगी…..क्यों भैया जी मुन्नी के छेद में दोगे ना केला……हां कह रहे हैं…….कहते हैं तेरे सब छेद भरेंगे………तू कल आएगी तो सब ………ऊहह….हां……उफफफ्फ़ काटो नही भैया जी…तुम्हारे ही हैं……’’ कम्मो ने कुच्छ जान भूज के कुच्छ मस्ती में मुन्नी को चिड़ाया और हल्के हल्के चूत उठाने लगी. बाबूजी का लंड उसके छेद में इतना बढ़िया से सेट हुआ था कि वो अब कभी भी झर सकती थी. फोन बंद करके उसने भूखी शेरनी की तरह राजू और संजय के लौडे पकड़ लिए और गान्ड मतकाते हुए नीचे के छेदो में दोनो लंड घीस्वाने लगी.

सखी उसके और सुजीत के बीच में जगह बनाते हुए सुजीत की छाती पे गान्ड टिका के लेट गई और चूत की फांके खोल दी. कम्मो ने दोनो हाथों में पकड़े लोड़ों का सहारा लेते हुए अपना मूह आगे झुकाया और सखी की चूत से मूह लगा दिया. कम्मो की जीभ और होंठ जैसे जैसे अपना काम करते रहे वैसे वैसे बाबूजी अपनी रफ़्तार बढ़ाने लगे. बाबूजी के धक्के अब तेज़ी के साथ लंबे लंबे होते जा रहे थे. उनका इस खेल में टिक पाना मुश्किल लाग्ग रहा था. उधर नीचे सुजीत भी चरम सच की तरफ बढ़ना चाहता था. कम्मो की चूत घर की बाकी औरतों से थोड़ी जीयादा टाइट थी. उसको चूत में रस बरसाने का मन कर रहा था.

बाबूजी की हुंकार से सब लोग एक दम रुक से गए. किसी को भी उमीद नही थी कि बाबूजी इतनी जल्दी और ऐसे झरेंगे. उनकी आवाज़ पूरे कमरे में गूँज गई. कम्मो का नाम लेते हुए उन्होने ज़ोर का एक झटका लगाया और कम्मो की गान्ड पकड़ ली. उनके हाथों से कम्मो की गान्ड पे उनकी एक एक उंगली छाप गई. रखी और मिन्नी जो की एक साथ सरला की चूत में जीभ डालने के लिए लड़ाई कर रही थी एक दम से रुक गई. सखी ने आगे बाद के राजू और संजय की जांघें पकड़ ली. कम्मो का मूह सखी की चूत से सटा रह गया. और फाटती हुई आँखों से सुजीत बाबूजी के लंड के झटके कम्मो की गान्ड में महसूस करने लगा.

1 2 3 4 5 ओउउर्र्र्ररर 6 और फिर कुच्छ सेकेंड बाद 7थ........बाबूजी का लंड लावा उगल रहा था, उन्हे ऐसे ऑर्गॅज़म बार बार नही होते थे, ये सब सिर्फ़ स्पेशल अकॅस्षन्स पे होता था. कम्मो की गान्ड का उधघाटन आज एक स्पेशल अकॅशन बन गया था. इतनी पिचकारियाँ और वो भी हर पिचकारी में बच्चा पैदा करने की ताक़त रखने वाला वीर्य...... काश ये मेरी चूत में उगलता तो मैं एक बार फिर से मा बंन जाती...........सोचते हुए सखी की चूत की फुवारें कम्मो के मूह में फूट पड़े.

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दोस्तो आगे की कहानी मुन्नी की जवानी

मैं हू मुन्नी

........ जी हां इस घर की दूसरी नौकरानी और अब से इस कहानी की सूत्रधार..... शायद कुच्छ अजीब सा लग रहा होगा आपको.......पर शायद ये मेरे नसीब का खेल है.......या शायद ये इसलिए हुआ क्योंकि मैं हूँ तो ग़रीब और नौकरानी पर शायद बीए की 1स्ट एअर तक की की गई पढ़ाई मुझे यहाँ लिखने के काबिल बना पाई है. खैर अब मैं मुद्दे पे आती हूँ.

मुझे आज भी वो दिन याद है जब मैं कम्मो के बच्चों को अपने घर लेके गई थी. कम्मो की बातों से सॉफ था कि वो मस्त चुदाई के खेल मे मगन थी. उसकी बातों कोसुन्‍न के मेरा तन बदन जल उठा था. आख़िर 33 साल की उमर मे मैं सिर्फ़ हफ्ते 10 दिन मे 1 बार चुदति थी. चूत की खलिश क्या होती है ये मेरे से बेटर कौन जान सकता था और मेरी कमीनी सहेली ने उस आग को बढ़ावा देने मे कोई कसर नही छोड़ी थी. उसकी कामुक दर्द भरी सिसकारियो से सॉफ पता चल गया था कि राजू भैया ने उस रात जमकर उसका भोग लगाने का प्लान बनाया था. मैने भी मन मे सोच लिया था कि सनडे होने के बावजूद मैं बाबूजी के घर काम के बहाने से जाउन्गि और राजू भैया को कैसे ना कैसे अपने उपर चढ़ाउंगी. ऐसे मे अगर बाबूजी भी मिल गए तो सोने पे सुहागा हो जाएगा. खैर वो रात तो जैसे ख़तम होने का नाम ही नही ले रही थी और चूत में रेंगती हुई चीटियो की वजह से मैं सुबह 4 बजे तक सो नही पाई.

नींद खुली तो देखा 9 बज गए थे. पति अपना, बच्चों का और कम्मो के बच्चों का नाश्ता बना के उन्हे खिला रहा था. मैने आव ना देखा ताव और जल्दी जल्दी नहा के थोड़ा सा बन सवर के बाबूजी के घर को चलने लगी. पति ने पुछा तो कहा कि आंटी की तबीयत ठीक नही थी सो रात कम्मो वहाँ रुकी थी और अब वो घर जाएगी और मैं रात वहाँ रुकूंगी. 10.30 बजे जब मैने घंटी बजाई तो बड़ी भाभी ने दरवाजा खोला. मुझे अच्छे से याद है कि वो उस समय भी नींद मे थी. भाभी दरवाज़ा खोल के वापिस अपने रूम मे चली गई. मैं किचन मे गई तो खाने पीने का समान बिखरा पड़ा था. किचन समेट रही थी और दिमाग़ चल रहा था. पूरे घर में कहीं से कोई आवाज़ नही आ रही थी. दिमाग़ मे ज़बारर्दस्त उथल पुथल थी पर कहीं से भी कोई आइडिया दिमाग़ मे नही आ रहा था. किचन का काम ख़तम करके 12 बजे निकली तो देखा संजय भैया फ्रिड्ज से पानी निकाल के पी रहे हैं. पानी पी के वो भी अपने कमरे मे चले गए. मैने ड्रॉयिंग रूम और बाकी जगह सॉफ सफाई की. किसी के भी बेडरूम मे जाना संभव नही था. कम्मो का भी कहीं नामो निशान नही था. सब करके किचन मे सुस्ताने के लिए बैठी और ना जाने कब आँख लग गई.

राखी भाभी ने झखझोर के मुझे उठाया तो देखा कि मैं ज़मीन पे पसरी हुई थी और दोपहर के 2 बज रहे थे. भाभी के कहने पे फटाफट मैने खाना बनाना शुरू किया. 4 बजे सबने खाना खाया और फिर से सोने चले गए. मैं हैरान थी कि ऐसा क्या हुआ था जो सब इतनी खुमारी मे लग रहे थे. मुझसे रहा नही गया और मैने कम्मो को फोन किया. उसके बेटे ने बताया कि कम्मो दोपहर 1 बजे घर आई थी और तब से सो रही थी. एक बार को मन मे ख़याल आया कि आंटी की तबीयत वाकई मे खराब थी क्योंकि उनको खाना भी उसके कमरे मे ही दिया था. खैर मैं इंतेज़ार करने लगी. 6 बजे बाबूजी किचन मे आए तो मैं चाइ बना रही थी. कुच्छ बोले नही. पीछे पिछे 3नो भाभियाँ भी आ गई. मिन्नी भाभी ने चाइ ली और पुछा कि मैं गई क्यो नही. मैने जवाब दिया कि कम्मो ने बताया था कि आंटी की तबीयत ठीक नही सो इस वजह से रात रुकने का बोल के आई हूँ. भाभी कुच्छ नही बोली और बाबूजी को चाइ देने चल दी. फिर उनके बीच कुच्छ बात हुई और दोनो हंस दिए.

कहते हैं औरत अपनी पहली चुदाई कभी नही भूलती. पर मैं शायद अलग थी. बाबूजी का लंड मेरे जीवन का दूसरा था और उसे मैं नही भूली थी. और उस शाम भी वही सरीखा लंड मेरे नसीब मे फिर से आया. बाबूजी के कमरे से चाइ का कप लेने गई तो उन्होने मुझे बाहों मे भर लिया. जिस औरत की चुदास बढ़ जाती है उसे नंगी होने मे देर नही लगती. शाम के ढलते सूरज के साथ मेरे कपड़े भी उतर गए. बाबूजी की उंगलिओ का जादू चूत पे था और उनका मूह मेरे निपल पे. बेड का सहारा लिए हुए मैं उनके लंड को अपनी मुट्ठी मे समेटने की कोशिश कर रही थी कि इतने मे दरवाज़ा खुला और राजू भैया मदरजात नंगे कमरे मे दाखिल हुए और मेरे मूह से रास्पान करने लगे. फटी हुई आँखें, गरम चूत और कड़क चून्चो के साथ उनके मूह में सिसकारियाँ भरते हुए मैने उनका 10 इंच भी पकड़ लिया. बाबूजी अब तक बिस्तर के किनारे पे लेट चुके थे और मैं बेसब्री से उनके टोपे पर चूत रस फैला रही थी. उनके लंड पे बैठते हुए राजू भैया का लंड मेरे मूह मे समाने लगा. भैया का एक हाथ मेरे उरोजो पे था और दूसरा मेरे सिर के पिछे. नीचे से बाबूजी के हल्के झटके मेरी चूत को पनिया पनिया के आने वाली चुदाई के लिए तैयार कर रहे थे. मेरा दिमाग़ सुन्न पड़ गया था.ये कैसे हो गया कि बाप बेटा दोनो एक साथ मेरे पे चढ़ गए. पर आश्चर्य की सीमाएँ बहुत लंबी होती हैं.

लंड पेगून गून की आवाज़ें करते हुए और फूली हुई चूत मे लंड पिलवाते हुए किसी ने मेरी छाती को मसलना शुरू किया. फिर अचानक से मेरी पीठ पे नरम नरम पर बहुत ही गरम एहसास होने लगा. वही एहसास जो कम्मो की चुचियों से हुआ था. पर जो हाथ थे वो बहुत नरम थे. कम्मो के हाथों जैसे कठोर नही थे.

''बाबूजी ठीक से चाटो नाआआ..........गान्ड हिलाने के चक्कर मे जीभ हिलना क्यों छोड़ देते हो........उउउहह माआ............भाभी तुम क्यो वहाँ खड़ी हो.... आओ आज तुम्हे नया दूध पिल्वाति हूँ......देखो इसे ये कितनी पतली है ....साअली की एक एक हड्डी दिखती है ...पर चूचे देखो ....पूरे तुम्हारे साइज़ के हैं................हााआअँ....बाबूजी सही जगह पकड़ी है.....थोड़ा और कर दो मैं झर जाउन्गि......भाभी जल्दी आओ..........इसके चुचे चूसो देखो कितने टाइट हैं इसके निपल........उईईईइमाआआ.........'' ये आवाज़ तो सखी भाभी की थी और ये क्या.....राखी भाभी अपने बड़े बड़े मम्मे झुलाती हुई राजू भैया के पिछे खड़े होके उनकी गोतियाँ क्यों सहला रही हैं....

मेरे दिमाग़ की नसे फटने वाली थी. ये सब मेरे साथ या हो रहा था....कोई सपना जैसा था....सखी भाभी बाबूजी से चूत चटवा रही थी. राखी भाभी राजू भैया से जीभ लड़ा रही थी. मेरी चूत मे बाबूजी थे और मूह मे राजू भैया....उफ़फ्फ़ क्या ये पूरा खानदान एक साथ चुदाई करता है......?? अगर हां तो बाकी सब कहाँ थे. दिमाग़ सुन्न था और चूत गीली. ठसा ठस्स गान्ड अपने आप लंड पे थिरक रही थी. रह रह के एक नई उमंग और चुदास सिर से पाँव तक दौड़ रही थी. सखी भाभी के नरम चूचों का एहसास रह रह के असलियत की याद दिला रहे थे. और उसपे गजब तो तब हुआ जब संजय भैया आंटी को गोद मे उठाए कमरे मे लेके आए. आंटी आधी नंगी थी. उपर सिर्फ़ ब्रा थी और उसमे से भी एक चूचा बाहर छल्का हुआ था. संजय भैया भी मदरजात नंगे थे. आंटी को बेड पे लिटाया और राजू भैया को थोड़ा साइड मे करके उन्होने अपना लंड मेरे मूह मे पेला.

''बाबूजी आपका कितनी देर मे होगा..?? आप जल्दी कर लो फिर मुझे मुन्नी की चूत मे लंड पेलना है...सासू मा तो सिर्फ़ चुसाइ लायक रह गई हैं. कहती हैं रात को मिन्नी भाभी और राखी भाभी ने इनके दाने को इतना चाटा और चूसा है कि अब 3 दिन तक सूजा रहेगा और दर्द करेगा. अर्रे वाह बाबूजी....आपकी चाय्स तो वाकई में मान गए....कम्मो का दाना भी बड़ा था और इसका भी.....इसको आगे से चोदने मे मज़ा आएगा.......अर्ररे भाभी आंटी को छोड़ो ज़रा मेरी गोटिओं को गीला कर दो ..... देख मुन्नी कैसे राखी भाभी मेरा ख़याल रखती है...आगेसे तू भी मेरी गोटिओं को ऐसे ही चूसना.'' संजय भैया मेरे मुँह मे धक्कम पेल कर रहे थे और रह रह के मेरी, सखी और राखी भाभी की चूचिओ को अपने बड़े हाथों से तौल रहे थे.

''सुनो जी......आआर्र्घघ मैं बाबूजी पे झरने वाली हूँ....ज़रा सहारा दे दो बहुत ज़बरदस्त काम होने वाला है मेरा........उउउहह मम्मी......हाआंन्‍णणन्....उूुुुउऊहह ऊऊओ माआअ.....बाबूजीइइईईई...दनाआआ....नही ......संजय मैं गई जान............ऊऊऊऊऊओ.......'''''' भाभी ससुर के मूह पे झर रही थी. रखी भाभी संजय भैया के लंड के पिच्छले हिस्से पे जीभ चला रही थी और मैं बाबूजी के अगले धक्के का इंतेज़ार कर रही थी. 5 सेकेंड मे इंतेज़ार ख़तम हुआ और बाबूजी ने मुझे घोड़ी बना दिया. बेड पे मेरे सामने आंटी के मम्मे थे. राखी भाभी उन्हे निचोड़ रही थी. आंटी सिसकियाँ ले रही थी. बगलमे उनकी बेटी स्खलित होके टांगे खोले लेटी हुई गहरी गहरी साँसे ले रही थी. मेरा बदन भी अकड़ने को तैयार था कि अचानक मेरे अंदर बाबूजी का बीज निकलने लगा. गरम गरम लावे के जैसे बाबूजी मेरी गान्ड को पकड़ के हल्के हल्के झटके मार रहे थे.

''अर्रे आप लोग मेरे बगैर ही शुरू हो गए. घर की बड़ी बहू का किसी को भी लिहाज नही है. बाबूजी अभी लंड ना निकालना. वहीं रहने देना ...मैं निकालूंगी अपने होठों से.....ऊहूऊऊ ये कपड़े भी मैने ऐसे ही पहेन लिए. पता होता कि मुन्नी ने बाबूजी के बिस्तर पे बिछना है आज तो दरवाज़ा भी बिना कपड़ो के ही खोलती.......सुजीत भैयाअ....ऊऊ सुजीत भैया......जल्दी आओ........मैं घोड़ी बॅन रही हूँ.....जब तक मैं बाबूजी का चूस लेती हूँ आप अपना खड़ा कर लो.......बाबूजी आपको पता है भैया ने कम्मो की चूत मार के कल से ही अपना लंड नही धोया है. कह रहे थे कि किसी एक भाभी को इसका स्वाद चखवाना है फिर धोउंगा.....'' स्लूऊर्रप स्लूऊर्रप की आवाज़ केसाथ भाभी बाबूजी के टटटे चाट रही थी और फिर प्लॉप की आवाज़ के साथ बाबूजी का मुरझाया लंड जैसे ही मेरी चूत से बाहर निकला कि भाभी ने उसे मूह मे भर लिया.

''आ गया भाभी....ये लो मेरा लंड भी तैयार है और मैं भी. जल्दी कुत्ति बनो तो मैं डालूं...भाभी इसके बगल में बनना कुत्ति. संजय आराम से बजाना इसकी मुझे भी करना है बाद मे....'' सुजीत भैया मेरे चूतड़ निचोड़ रहे थे और मेरी करीब करीब तैयार चूत संजय भैया का विशाल लंड अंदर ले रही थी.

 
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