S
StoryPublisher
Guest
खानदानी चुदाई का सिलसिला--9
गतान्क से आगे..............
उसके बाद हम चारों के बीच जो घमासान चला वो याद रखने वाला था. सखी की मा ने मेरी और तुम्हारे फूफा की इज़्ज़त लूट ली उस रात..साली ने कम से कम भी 3 - 3 बार हमें चोदा. एक समय तो मैं और तुम्हारे फूफा दोनो इसकी मा की चूत और गांद में घुसे पड़े थे और तुम्हारी कंचन बुआ अपनी चूत सटाये हुए थी उसके मूह से. सच में बड़ा मुश्किल टेस्ट था हमारे लिए. पर बड़ा मज़ा भी आया. सुबह पूरे बेड पे जगह जगह वीर्य ही वीर्य था. इन दोनो रॅंडियो की चूते सूजी हुई थी और हमारे लंड छिले पड़े थे. पर जो इंपॉर्टेंट चीज़ थी वो था इस एग्ज़ॅम का रिज़ल्ट. जब हम लोग सुबह 6 बजे उठे और तैयार हुए तो उस समय सखी सोई पड़ी थी. हमारी चुदाई रात 3 बजे तक चली थी. सखी की मा को हमने रात में ही सखी के रिश्ते के लिए मना लिया था. उसे ये कहा कि अगर ये रिश्ता हो जाता है तो बिना झिझक के उसके और हम तीनो के सेक्स संबंध बने रह सकते हैं. इसी बात पे वो छिनाल खुशी खुशी तैयार भी हो गई. तब हमने उससे अगले ही दिन सगाई की तैयारी के लिए कहा और सुबह जल्दी उठा के घर जाने को कहा.
जान भूज के कंचन ने सखी के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया. जब वो नही उठी तो कंचन ने उसको उठाने के बहाने से खिड़की से जाके उसको आवाज़ लगाई. वहाँ से कमरे का नज़ारा देख के कंचन को आइडिया हो गया कि रात में खीरे से सखी ने अपनी प्यास भुज़ाई थी. नंगी हालत में ये खीरे को चूत के नज़दीक रख के सोई पड़ी थी. जब फाइनली ये कमरे से बाहर निकली तो 7 बज चुके थे और मैं, तुम्हारे फूफा और सखी की मा सगाई की तैयारी के लिए निकल गए थे. कंचन ने बाद में हमें बताया कि सखी की आँखें सुर्ख लाल थी जैसे वो रात को बहुत लेट सोई. इसने बहाना बनाया कि रात को ये लेट तक मूवी देख रही थी. तब कंचन ने इससे पुछा कि ऐसी कौन सी मूवी देखी जो खीरे की ज़रूरत पड़ी. तब ये झेंप गई. उस समय कंचन को यकीन हो गया कि इसने रात भर हमारी चुदाई देखी है. तब कंचन ने इससे बताया कि अब तेरे खीरे वाले दिन गए और असली डंडे की पिटाई के लिए तैयार हो जा.
उस शाम को इसकी और संजय की मँगनी हुई और फिर 4 महीने बाद शादी. मुझे तभी से पता था कि इससे हमारी योग्य बहू बनने में कोई वक़्त नही लगेगा और हुआ भी वैसा ही.''
ये कहते हुए बाबूजी ने अपनी कहानी ख़तम की और सखी को गोद से उठा के सामने खड़ा कर दिया. 2 मिनट में नंगी सखी उनके लंड के चुस्के ले रही थी और कमरे में एक तरफ कपड़ो का ढेर लगना शुरू हो गया.
बाबूजी के कहे अनुसार तीनो भाइयों ने मिल के तीनो औरतों को रेग्युलर्ली चोद्ना शुरू कर दिया. हर रोज़ शाम को बाबूजी की सूपरविषन में 2 भाई तीनो का चोदन करते. तीसरा भाई लंड हिलाता और औरतों की चूते चाट के या उनके मम्मे दबा के उन्हे तैयार रखता. बाबूजी अपना मूसल कभी किसी की गांद में देते तो कभी चुस्वा लेते. चूत से दूर रहते थे हमेशा. पर ये भी बड़ा कठिन समय था बाबूजी के लिए. उनके जैसा थर्कि चोदु आख़िर कितने दिन तक चूत से वंचित रहता. बाबूजी दिन में कम्मो पे कड़ी नज़र रखते थे. उन्होने कम्मो के हाव भाव पढ़ने शुरू कर दिए. कम्मो किस समय क्या करती है और क्या नही, कैसे मटकती है, घर के सदस्यों से कैसे बात करती है ये सब बाबूजी ने नोटीस करना शुरू कर दिया. ऐसे ही दिन हफ्तों और हफ्ते महीनो में बदल गए. बाबूजी समझ चुके थे कि कम्मो भी कामुक है और लंड की भूखी है.
उधर कम्मो को जब भी मौका मिलता वो रमेश को बुलवा लेती. रमेश भी धीरे धीरे माँझा खिलाड़ी बन रहा था. उसे कम्मो से अच्छी सीख मिल रही थी और फ्री की चूत को कौन मना करेगा. वो मौका ढूंढता रहता था कि कब कम्मो का पति बाहर जाए. मौके भी बढ़ रहे थे क्योंकि रमेश का बाप कम्मो के पति को शादी के कामों में उलझाए रखता था. दिक्कत बस बच्चों की थी. रमेश की चुदाई का असर कम्मो पे दिखने लगा था. अब वो खिली खिली रहती थी और बाबूजी के घर के सदस्यों से चुटकी करती रहती थी. कभी कभी वो बाबूजी को भी छेड़ देती थी. बाबूजी ने भी मन बनाना शुरू कर दिया कि वो कम्मो की चूत को अपने वीर्य से भाव विभोर ज़रूर करेंगे. पर ऐसा कब और कैसे करना है ये उन्होने डिसाइड नही किया था.
3 महीने के अंतराल में मिन्नी, राखी और सखी तीनो पेट से हो गई. घर में कोई बड़ी औरत नही थी सो इसलिए बाबूजी ने सखी की मा के लिए बुलावा भेजा कि कुच्छ महीनो के लिए वो उनके साथ आके रुक जाएँ. राखी और मिन्नी ने अपने अपने मैके जाने से मना कर दिया. बाबूजी ने डिसाइड किया कि 3नो बहुओं के बच्चे ससुराल में ही होंगे. सखी की मा के घर में आते ही माहौल एक बार फिर बदल गया. सखी की मा को घर के राज़ के बारे में कुच्छ नही पता था. सो इसलिए सबको अपनी अपनी पत्निओ के साथ सोना पड़ता था. सखी की मा ने सब मर्दों को निर्देश दिया कि पहले 3 महीने वो लोग अपनी बिवीओ के साथ कुच्छ ना करें. उसके हिसाब से पहले 3 महीने में किसी एग्ज़ाइट्मेंट की वजह से बच्चा गिरने का डर हो सकता था. साथ ही साथ सखी की मा ने अपने डोरे फिर से बाबूजी पे डालने शुरू कर दिए. सखी की शादी और अब तक वो बाबूजी से सिर्फ़ 3 बार और चुदी थी. पहली रात के बाद शादी से कुच्छ दिन पहले वो और बाबूजी उसके घर पे दिन में अकेले रहे थे. उसके बाद जब सखी को मिलने 2 दिन आके रुकी थी तो उसने बाबूजी का बिस्तर शाम की तरफ गरम किया था. इन दिनो में उसने कंचन के पति के साथ खूब मज़े लिए थे. कंचा का पति उसे रेग्युलर्ली अपने या उसके घर में पेलता था.
पर जब से वो सखी की ससुराल में आई थी तब से उसको कंचन के घर जाने का मौका नही मिला था. इधर 3नो लड़के भी अपनी अपनी बिवीओ की चूतो से वंचित थे. बस लंड चुस्वा के गुज़ारा कर रहे थे. घर के ये हालत देखते हुए बाबूजी ने एक प्लान बनाया और एक दिन उन्होने अनाउन्स किया की तीनो जोड़े एक सॅटर्डे को एक पिक्निक स्पॉट पे रात रुकने के लिए जाएँगे. इससे सभी लोगों का मनोरंजन हो जाएगा और हवा पानी बदल जाएगा. सखी की मा ने कहा कि वो भी साथ जाएगी. बाबूजी को इस बात की उम्मीद थी कि वो ऐसी बात कह सकती है. सो उन्होने सखी की मा को भी साथ जाने की अनुमति दे दी.
गतान्क से आगे..............
उसके बाद हम चारों के बीच जो घमासान चला वो याद रखने वाला था. सखी की मा ने मेरी और तुम्हारे फूफा की इज़्ज़त लूट ली उस रात..साली ने कम से कम भी 3 - 3 बार हमें चोदा. एक समय तो मैं और तुम्हारे फूफा दोनो इसकी मा की चूत और गांद में घुसे पड़े थे और तुम्हारी कंचन बुआ अपनी चूत सटाये हुए थी उसके मूह से. सच में बड़ा मुश्किल टेस्ट था हमारे लिए. पर बड़ा मज़ा भी आया. सुबह पूरे बेड पे जगह जगह वीर्य ही वीर्य था. इन दोनो रॅंडियो की चूते सूजी हुई थी और हमारे लंड छिले पड़े थे. पर जो इंपॉर्टेंट चीज़ थी वो था इस एग्ज़ॅम का रिज़ल्ट. जब हम लोग सुबह 6 बजे उठे और तैयार हुए तो उस समय सखी सोई पड़ी थी. हमारी चुदाई रात 3 बजे तक चली थी. सखी की मा को हमने रात में ही सखी के रिश्ते के लिए मना लिया था. उसे ये कहा कि अगर ये रिश्ता हो जाता है तो बिना झिझक के उसके और हम तीनो के सेक्स संबंध बने रह सकते हैं. इसी बात पे वो छिनाल खुशी खुशी तैयार भी हो गई. तब हमने उससे अगले ही दिन सगाई की तैयारी के लिए कहा और सुबह जल्दी उठा के घर जाने को कहा.
जान भूज के कंचन ने सखी के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया. जब वो नही उठी तो कंचन ने उसको उठाने के बहाने से खिड़की से जाके उसको आवाज़ लगाई. वहाँ से कमरे का नज़ारा देख के कंचन को आइडिया हो गया कि रात में खीरे से सखी ने अपनी प्यास भुज़ाई थी. नंगी हालत में ये खीरे को चूत के नज़दीक रख के सोई पड़ी थी. जब फाइनली ये कमरे से बाहर निकली तो 7 बज चुके थे और मैं, तुम्हारे फूफा और सखी की मा सगाई की तैयारी के लिए निकल गए थे. कंचन ने बाद में हमें बताया कि सखी की आँखें सुर्ख लाल थी जैसे वो रात को बहुत लेट सोई. इसने बहाना बनाया कि रात को ये लेट तक मूवी देख रही थी. तब कंचन ने इससे पुछा कि ऐसी कौन सी मूवी देखी जो खीरे की ज़रूरत पड़ी. तब ये झेंप गई. उस समय कंचन को यकीन हो गया कि इसने रात भर हमारी चुदाई देखी है. तब कंचन ने इससे बताया कि अब तेरे खीरे वाले दिन गए और असली डंडे की पिटाई के लिए तैयार हो जा.
उस शाम को इसकी और संजय की मँगनी हुई और फिर 4 महीने बाद शादी. मुझे तभी से पता था कि इससे हमारी योग्य बहू बनने में कोई वक़्त नही लगेगा और हुआ भी वैसा ही.''
ये कहते हुए बाबूजी ने अपनी कहानी ख़तम की और सखी को गोद से उठा के सामने खड़ा कर दिया. 2 मिनट में नंगी सखी उनके लंड के चुस्के ले रही थी और कमरे में एक तरफ कपड़ो का ढेर लगना शुरू हो गया.
बाबूजी के कहे अनुसार तीनो भाइयों ने मिल के तीनो औरतों को रेग्युलर्ली चोद्ना शुरू कर दिया. हर रोज़ शाम को बाबूजी की सूपरविषन में 2 भाई तीनो का चोदन करते. तीसरा भाई लंड हिलाता और औरतों की चूते चाट के या उनके मम्मे दबा के उन्हे तैयार रखता. बाबूजी अपना मूसल कभी किसी की गांद में देते तो कभी चुस्वा लेते. चूत से दूर रहते थे हमेशा. पर ये भी बड़ा कठिन समय था बाबूजी के लिए. उनके जैसा थर्कि चोदु आख़िर कितने दिन तक चूत से वंचित रहता. बाबूजी दिन में कम्मो पे कड़ी नज़र रखते थे. उन्होने कम्मो के हाव भाव पढ़ने शुरू कर दिए. कम्मो किस समय क्या करती है और क्या नही, कैसे मटकती है, घर के सदस्यों से कैसे बात करती है ये सब बाबूजी ने नोटीस करना शुरू कर दिया. ऐसे ही दिन हफ्तों और हफ्ते महीनो में बदल गए. बाबूजी समझ चुके थे कि कम्मो भी कामुक है और लंड की भूखी है.
उधर कम्मो को जब भी मौका मिलता वो रमेश को बुलवा लेती. रमेश भी धीरे धीरे माँझा खिलाड़ी बन रहा था. उसे कम्मो से अच्छी सीख मिल रही थी और फ्री की चूत को कौन मना करेगा. वो मौका ढूंढता रहता था कि कब कम्मो का पति बाहर जाए. मौके भी बढ़ रहे थे क्योंकि रमेश का बाप कम्मो के पति को शादी के कामों में उलझाए रखता था. दिक्कत बस बच्चों की थी. रमेश की चुदाई का असर कम्मो पे दिखने लगा था. अब वो खिली खिली रहती थी और बाबूजी के घर के सदस्यों से चुटकी करती रहती थी. कभी कभी वो बाबूजी को भी छेड़ देती थी. बाबूजी ने भी मन बनाना शुरू कर दिया कि वो कम्मो की चूत को अपने वीर्य से भाव विभोर ज़रूर करेंगे. पर ऐसा कब और कैसे करना है ये उन्होने डिसाइड नही किया था.
3 महीने के अंतराल में मिन्नी, राखी और सखी तीनो पेट से हो गई. घर में कोई बड़ी औरत नही थी सो इसलिए बाबूजी ने सखी की मा के लिए बुलावा भेजा कि कुच्छ महीनो के लिए वो उनके साथ आके रुक जाएँ. राखी और मिन्नी ने अपने अपने मैके जाने से मना कर दिया. बाबूजी ने डिसाइड किया कि 3नो बहुओं के बच्चे ससुराल में ही होंगे. सखी की मा के घर में आते ही माहौल एक बार फिर बदल गया. सखी की मा को घर के राज़ के बारे में कुच्छ नही पता था. सो इसलिए सबको अपनी अपनी पत्निओ के साथ सोना पड़ता था. सखी की मा ने सब मर्दों को निर्देश दिया कि पहले 3 महीने वो लोग अपनी बिवीओ के साथ कुच्छ ना करें. उसके हिसाब से पहले 3 महीने में किसी एग्ज़ाइट्मेंट की वजह से बच्चा गिरने का डर हो सकता था. साथ ही साथ सखी की मा ने अपने डोरे फिर से बाबूजी पे डालने शुरू कर दिए. सखी की शादी और अब तक वो बाबूजी से सिर्फ़ 3 बार और चुदी थी. पहली रात के बाद शादी से कुच्छ दिन पहले वो और बाबूजी उसके घर पे दिन में अकेले रहे थे. उसके बाद जब सखी को मिलने 2 दिन आके रुकी थी तो उसने बाबूजी का बिस्तर शाम की तरफ गरम किया था. इन दिनो में उसने कंचन के पति के साथ खूब मज़े लिए थे. कंचा का पति उसे रेग्युलर्ली अपने या उसके घर में पेलता था.
पर जब से वो सखी की ससुराल में आई थी तब से उसको कंचन के घर जाने का मौका नही मिला था. इधर 3नो लड़के भी अपनी अपनी बिवीओ की चूतो से वंचित थे. बस लंड चुस्वा के गुज़ारा कर रहे थे. घर के ये हालत देखते हुए बाबूजी ने एक प्लान बनाया और एक दिन उन्होने अनाउन्स किया की तीनो जोड़े एक सॅटर्डे को एक पिक्निक स्पॉट पे रात रुकने के लिए जाएँगे. इससे सभी लोगों का मनोरंजन हो जाएगा और हवा पानी बदल जाएगा. सखी की मा ने कहा कि वो भी साथ जाएगी. बाबूजी को इस बात की उम्मीद थी कि वो ऐसी बात कह सकती है. सो उन्होने सखी की मा को भी साथ जाने की अनुमति दे दी.