दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा इस कहानी ग्यारहवाँ पार्ट लेकर हाजिर हूँ
बाबूजी ने उसे पलट के अपने उपर ले लिया और उसके इर्द गिर्द अपनी बाहें डाल दी. '' तू चिंता ना कर और उदास भी मत हो..अब से तेरी खुशियों के दिन शुरू ..बस एक बात का ध्यान रखना कि तू अपने पति को उतना खुश ज़रूर रखना कि कभी वो बाहर मूह ना मारे और ना ही तुझे रोके टोके..बाकी मैं संभाल लूँगा. कल तुझे कुच्छ बातें समझाउँगा और फिर तू मेरे अनुसार चलना और देखना कि तेरी चुदास चूत को मैं कैसे धन्य करता हूँ...'' बाबूजी ने कम्मो को गालों पे चूमा और फिर अपने सीने से लगा लिया.
कम्मो को मोटी मोटी चूचिया बाबूजी का सीने में धँस गई और दोनो बदन जैसे एक दूसरे में समा गए.
कम्मो इटहलाती मतकाती अपने घर को चल पड़ी. उसकी बगल में 2 कीमती सूट थे. उसकी चाल में एक नई रवानगी थी, एक नया उत्साह. उसकी ज़िंदगी अचानक से खूबसूरत दिखने लगी थी. बाबूजी ने जाते जाते उसकी माँग को चूमा था और उसने उनके पैर च्छुए थे. उसे अपने पति से कभी इतना सुख नही मिला था जितना की बाबूजी के लंड से ... क्या हो गया है मुझे...आअज तो मन कर रहा है हवा में उड़ जाउ..ऊओ बबुऊउ...मेरे प्रियतमम...कल तक कैसे इंतेज़ार करूँगी.....????
बाबूजी बिस्तर पे नंगे लेटे हुए कम्मो के ख़यालों में गुम थे. बहुओं की चुदाई में उन्हे मज़ा आता था पर कम्मो ने उनके दिल के किसी कोने में घर कर लिया था. बाबूजी को एक शाम में लगने लगा था कि बिना कम्मो की चूत पाए उन्हे कभी संतुष्टि नही होगी. उनके लंड को कम्मो की चूत से प्यार हो गया था. कम्मो की याद में बाबूजी कब सो गए उन्हे पता ही नही चला.
उधर पिक्निक पे सभी मस्ती में थे. 10 बजे रिज़ॉर्ट पहुँचने के बाद सब अपनी अपनी पत्निओ के साथ सैर पे चल दिए. सखी की मा रिज़ॉर्ट को देखने निकल पड़ी. उसे बहुत खुशी थी कि पिच्छले 5 महीनो से उसके कहे अनुसार सब मर्दों ने अपनी अपनी पत्निओ से संबंध नही बनाए. दरअसल सखी की मा अकेले रहते रहते बोर हो गई थी. उसका बड़ा बेटा और बहू काफ़ी समय से विदेश में बस गए थे. बेटा एक दुकान चलाता था और कमाई लिमिटेड थी. बहू भी काम करती थी. एक बार मुश्किल से सखी की मा वहाँ गई थी और माहौल नापसंद आने पे वापिस आ गई.
तब से बेटा कभी कभी पैसे भेज देता है और 2 - 3 साल में एक बार चक्कर मार जाता है. सखी की शादी पे बेटा, बहू और उनके 2 छ्होटे बच्चे आए थे. बच्चों को दादी से बहुत लगाव हो गया था. बच्चों की ज़िद्द पे उन्हे दादी के पास छोड़ के बेटा और बहू कुच्छ दिन घूमने चले गए. उन दिनो में बेटे को एक दोस्त से पार्ट्नरशिप बिज़्नेस की ऑफर भी मिली. सखी का भाई भी बच्चों की पढ़ाई की वजह से वापिस आना चाहता था और उसने अपने दोस्त की ऑफर पे विचार करना शुरू कर दिया. काम शुरू करने के प्लान बनाए और डिसिशन हुआ कि 1 साल में वो परिवार समेत वापिस आ जाएगा और काम शुरू करेगा. ये बात जब सखी की मा को पता चली तो वो बहुत खुश हुई. और जब सखी के घर से बुलावा आया तो वो और भी खुश हो गई. सखी के जाने के बाद घर सूना हो गया था. 6 महीने अकेले कैसे काटे ये तो वो ही जानती थी. हां सेक्स का आनंद बहुत मिला. कंचन के पति से खूब मज़े मिले. अब और 1 - 2 महीने तक बेटा वापिस आने वाला था सो उसकी खुशी अलग थी.
इन्ही सब बातों को सोचते हुए सखी की मा रिज़ॉर्ट में घूम रही थी कि उसे 35 - 40 की एक औरत नज़र आई और वो कुच्छ लोगों पे चिल्ला रही थी. वो लोग सिर झुकाए बात सुन रहे थे. बीच बीच में वो औरत उन्हे मा बहेन की गालियाँ भी निकाल रही थी. उसकी गालियाँ सुन के सखी की मा थोड़ी अचंभित रह गई. रिज़ॉर्ट में मेहमानो के होते हुए कोई ऐसे गालियाँ कैसे दे सकता है और वो भी एक औरत. सखी की मा वहीं खड़ी सब सुनती रही. बातों से वो औरत रिज़ॉर्ट की मॅनेजर या मालकिन लग रही थी. कुच्छ देर बाद वो सब लोग चले गए और वो औरत गुस्से में रिज़ॉर्ट के रिसेप्षन की तरफ जाने लगी. अचानक उसकी नज़र सखी की मा पे गई और वो रुक गई.
'' जी आप यहाँ पे गेस्ट हैं या किसी से मिलने आई हैं ?'' उसने पुछा.
''जी मैं यहाँ रुकी हुई हूँ. मेरी बेटी और उसका परिवार भी है यहाँ.'' सखी की मा ने कहा.
''ऊवू मांफ कीजिएगा मुझे पता नही था और मैने ध्यान भी नही दिया..नही तो ये सब जो आपने सुना ऐसा नही होता..''
''कोई बात नही ..आप यहाँ की मॅनेजर लगती हैं शायद..''
''जी मैं मॅनेजर नही मालकिन हूँ. दरअसल ये रिज़ॉर्ट मेरे पति और उनके पार्ट्नर का था. 5 महीने पहले दोनो की कार दुर्घटना में मौत हो गई. और ये सब काम का बोझ मुझपे आ गया. औरत हूँ ना तो ये सब नौकर बेवकूफ़ समझते हैं और मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाना चाहते हैं. तभी इन्पे चिल्लाना पड़ता है.''
'' ऑश तो आप भी मेरी तरह अकेली हैं. मैं भी विधवा हूँ.. मैं समझ सकती हूँ आपकी दिक्कत को '' सखी की मा ने कहा.
'' जी शुक्रिया..आप का नाम नही बताया आपने..?'' उस औरत ने पुछा.
'' जी मेरा नाम सरला है ..और आपका..?'' सखी की मा ने पुछा.
'' जी मैं किरण. आप कहीं जा रही थी ..मेरी वजह से रुक गई ..सॉरी ?'' किरण ने कहा.
'' जी बस मैं तो ऐसे ही रिज़ॉर्ट घूम रही थी. बच्चे अलग घूमने निकले हैं तो मैने सोचा कि मैं भी सैर कर लूँ.'' सरला (सखी की मा) ने जवाब दिया.
'' अर्रे तो ठीक है आइए मैं आपको रिज़ॉर्ट घुमा देती हूँ..इसमे मेरा काम भी हो जाएगा...मुझे तो वैसे भी दिन में 2 बार राउंड लेने पड़ते हैं.'' किरण ने कहा.
किरण और सरला साथ साथ रिज़ॉर्ट घूमने चली गई. रिज़ॉर्ट का इलाक़ा करीब 10 एकर ज़मीन में था. 30 हट्स बनी हुई थी जिनमे कुच्छ सिंगल कुच्छ डबल रूम वाली थी. एक जगह रेस्टोरेंट और पब बना हुआ था. पब में एक डिस्को भी था. किरण ने सरला को बताया कि रिज़ॉर्ट के साथ करीब 50 एकर ज़मीन भी उसके पति की थी. उस ज़मीन पे जंगल और छ्होटी सी एक पहाड़ी थी. उस एरिया को अभी तक उन्होने डेवेलप नही किया था. सरला ये सब देख के बहुत इंप्रेस हुई. बातें करते करते दोनो पब में चली गई और किरण ने वहाँ बियर का ऑर्डर दिया. सरला को दूसरा झटका लगा. उसने 2 बार छुप के कंचन और उसके पति के साथ शराब पी थी. पर किरण का बिंदास अंदाज़ देख के वो सर्प्राइज़्ड थी. सरला ने अपने लिए नींबू पानी मँगवाया.
''किरण एक बात पुच्छू बुरा तो नही मनोगी ..?''
''जी पुछिये.''
''तुम्हारी उमर कितनी है..?''
''जी मेरी उमर 38 की है '' किरण ने जवाब दिया.
''मुझे लगता है तुम्हे दोबारा शादी कर लेनी चाहिए ..अपने लिए और अपने बच्चों के लिए अगर हैं तो'' सरला बोली.
''जी शायद आप ठीक कह रही हैं..अपने लिए कर लेनी चाहिए..बच्चे तो हैं नही और ना ही होंगे..''
''क्यों होंगे क्यो नही कोई दिक्कत है क्या ?'' सरला ने पुच्छा.
'' जी हां .. दरअसल मुझे मेडिकल प्राब्लम है..मेरे हार्ट को लेके. जब बच्चा करने की सोची तो डॉक्टर ने सलाह दी की मत करो. जान का ख़तरा हो सकता है. तब मैने सोचा की कर लेती हूँ देखा जाएगा जो होगा. पर मेरे पति नही माने. उन्होने ज़िद्द करके मेरी नसबंदी करवा दी, मुझे बुरा तो बहुत लगा पर अपने पति के लए मान गई. वो मुझे बहुत प्यार करते थे..हमारी लोवे मॅरेज थी'' किरण बियर का घूँट लेते हुए थोड़ी उदास हो गई.
''ऑश..पर तुम अडॉप्ट कर सकती थी..पैसा वागरह तो सब है तुम्हारे पास..'' सरला ने कहा.
''जी क़ानूनी तौर पे मेरे जेठ की लड़की को मैने अपनी वारिस बनाया है...वो अभी कॉलेज में है ...मुझे मा कहती तो नही पर प्यार बहुत करती है.. बाकी ये सब है जो आप देख रही हैं. इसमे इतना बिज़ी रहती हूँ कि पुछो मत ..और उपर से ये हरामी साले ..मुझे चूतिया बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं..'' किरण थोड़े गुस्से में आ गई.
''अर्रे किरण ये मर्द जात है ही ऐसी अगर कोई प्यार भी करता है तो मतलब से..खैर दुनियादारी है सो निभानी पड़ेगी... वैसे मेरी एक सलाह है तुम किसी को अपने साथ यहाँ पार्ट्नर या मदद के लिए रख लो..आख़िर एक से दो भले..काम आसान हो जाएगा.''
'जी सोचती तो हूँ कि अपनी भतीजी को कॉलेज के बाद बुला लूँगी पर अभी 3 साल हैं उसके. तब तक पता नही कैसे ना कैसे मॅनेज करूँगी. अच्छे लोग मिलते भी कहाँ हैं. और वैसे भी ये जगह काफ़ी दूर है शहेर से. कोई यहाँ रुकना पसंद नही करता..'' किरण बोली.
''भाई मुझे तो ये जगह पसंद आई...शांति है..अच्छी हवा पानी सब है और जो आएगा वो काम में बिज़ी रहेगा..'' सरला ने कहा.
'' सरला जी बुरा ना माने तो एक बात कहूँ...क्या आप यहाँ आना चाहेंगी..मेरी मदद के लिए..मैं आपको सॅलरी दूँगी और रहने की जगह. किचन हम लोग शेर कर लेंगे. आप भी अकेली हैं और काफ़ी सुलझी और संभ्रांत औरत हैं. मुझे सहारा हो जाएगा..'' किरण ने अचानक से प्रस्ताव रखा.
उसकी बात सुन के सरला चौंक गई. पर फिर अपने को संभालते हुए बोली. उसने सखी और उसके परिवार के बारे में बताया. अपने बेटे के फ्यूचर प्लॅन्स के बारे में. ये सब के बीच वो किरण की ऑफर कैसे ले सकती थी. पर उसने प्रॉमिस किया की वो किसी अच्छे आदमी या औरत को तलाश करेगी और किरण के पास भेजेगी.
ये सब बातें करते हुए लंच का समय हो गया था और किरण उसे रेस्टोरेंट में ले आई. सरला के लिए उसने सॉफ्ट ड्रिंक मँगवाया. सरला टेबल पे बैठी किरण को देख रही थी. किरण एक अमीर घर की औरत थी ये उसके कपड़ों से पता चलता था. बदन पे कसा हुआ सूट. घथीला शरीर. गोरा रंग. तीखे नैन नक्श. बस बदन पे कहीं कहीं एक्सट्रा वेट था. पर ओवरॉल वो अच्छी दिखती थी. उसकी कद काठी सरला से मिलती जुलती थी. फरक सिर्फ़ इतना था कि सरला की उमर की वजह से उसकी बॉडी का कसाव थोड़े कम हो गया था. दोनो को अगर साथ खड़ा करे तो बड़ी और छ्होटी बहेन लगेंगी. उसको देखते हुए सरला को उसपे तरस आ गया. इतनी छ्होटी एज में विधवा होना. पर फिर वो अपने बारे में सोचने लगी कि वो भी काफ़ी जल्दी अकेली हो गई थी. सोचते सोचते सरला को अपने पति की याद आने लगी और फिर पति के साथ गुज़ारी रंग रलियाँ. ये सोचते हुए उसके मन में चुदाई की इच्छा जागृत हो गई. पर उसके लिए उसे वेट करना था. बाबूजी का लंड मिलने में अभी वक़्त था. जब से वो आई थी बाबूजी ने उसे चोदा नही था. अभी तक घर में उसे बाबूजी के साथ अकेले रहने का मौका नही मिला था.
इतने में सखी और बाकी सब भी रेस्टोरेंट में आ गए. सरला ने किरण से सबकी इंट्रोडक्षन करवाई. सरला ने बड़े अच्छे से सबको खाने के लए आमंत्रित किया. कुच्छ देर बाद कुच्छ और गेस्ट भी आ गए. रिज़ॉर्ट में उस दिन करीब 8 फॅमिलीस और 2 - 3 नए शादीशुदा जोड़े थे. किरण काम में बिज़ी हो गई और सरला अपने परिवार के साथ. 3 बजे के करीब खाना ख़तम करके सब सुस्ताने चले गए. रिज़ॉर्ट में उन्होने 2 डबल रूम के कॉटेज बुक करवाए थे. सरला के कहे अनुसार एक कॉटेज में सब मर्द थे और एक में सब औरतें. तीनो भाई बिना चूत के 4 महीने गुज़ार चुके थे. रिज़ॉर्ट में बाकी गेस्ट्स को देख के उनमे सेक्स की इच्छा जागृत हो रही थी.
दोपहर को करीब 2 घंटा सोने के बाद सब चाइ के लिए लॉन में आ गए. गप्पें मारते हुए चाइ पीते हुए समय कैसे निकल गया पता ही नही चला. करीब 7 बजे सब नहाने चले गए. तैयार होके सब 8 बजे पब में पहुँच गए. 3नो भाईओं ने अपने लिए ड्रिंक्स ऑर्डर किए. सरला और 3नो बहुओं ने सॉफ्ट ड्रिंक्स लिए. कुच्छ देर में सबने खाना ऑर्डर किया और ड्रिंक्स लेते हुए खाना भी फिनिश हो गया. इस समय तक पब में सब फॅमिलीस आ चुकी थी और एक अच्छा माहौल बना हुआ था. इतने में किरण वहाँ आई और सबसे मिली. उसने एक हल्के रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो कि कमर से नीचे बँधी हुई थी. उसकी नाभि सॉफ सॉफ दिख रही थी. ब्लाउस भी स्लीवलेशस था. उसने सरला और उसके परिवार से कुच्छ देर बात की और फिर अपनी ड्रिंक लेके पब का काम देखने लगी. डीजे को कह के उसने एक तदकता फड़कता गाना लगवाया और वहाँ बैठे लोगों को एक एक करके डॅन्स के लिए बुलाने लगी. थोरी ही देर में तकरीबन सभी लोग स्टेज पे पहुँच गए. सरला, सखी और संजय टेबल पे बैठे थे. सखी को दिन में ज़ियादा सैर की वजह से पीठ में दर्द था. इसलिए वो नही जाना चाहती थी. उसके चक्कर में संजय भी नही जा पा रहा था. संजय का 5वाँ पेग चल रहा था जब किरण उन लोगों के पास आई.
''अर्रे सरला जी आप सब यहाँ क्या कर रहे हो..चलिए स्टेज पे थोड़ा डॅन्स कर लीजिए.'' किरण ने कहा.
'' अर्रे नही किरण ..मेरी बेटी की पीठ में दर्द है तो इसलिए ..ये नही कर पाएगी और मैं इसके साथ ही रहूं तो अच्छा है.''
''अच्छा तो आप अपने दामाद को तो भेजिए.. आप तो चलिए दामाद जी..''किरण को खुद भी थोड़ा सुरूर था और उसने संजय को छेड़ते हुए कहा.
''जी मैं आपका दामाद नही हूँ..'' संजय एंजाय ना कर पाने की वजह से थोड़े गुस्से में था.
''अर्रे ये मेरी सहेली हैं और आप इनके दामाद हैं तो उस नाते आप मेरे भी दामाद हुए...गुस्सा क्यों करते हैं..मैं मज़ाक कर रही थी..आप चलिए एंजाय कीजिए ये बैठी हैं सखी के साथ''
''हां संजय तुम जाओ मैं बैठी हूँ..तुम्हे तो डॅन्स का शौक है..जाओ ना..'' सखी ने कहा.
''तुम्हे पता है मैं अकेले डॅन्स नही करता..मुझे पार्ट्नर चाहिए..'' संजय ने उसे घूरते हुए कहा.
''तो चलो आप मेरे साथ डॅन्स करो...मैने भी बहुत दिन से डॅन्स नही किया है..चलिए..अर्रे सखी को क्या देख रहे हैं...मैं इसकी मा की सहेली हूँ..इसकी मा जैसी ..चलिए उठिए ..ये मेरा ऑर्डर है..'' किरण ने खिलखिलाते हुए संजय का हाथ पकड़ा और उसे डॅन्स फ्लोर पे ले गई.
Babuji ne use palat ke apne upar le lia aur uske ird gird apni baahen daal di. '' Tuu chinta na kar aur udaas bhi mat ho..ab se teri khushiyon ke din shuru ..bas ek baat ka dhyaan rakhna ki tu apne pati ko utna khush zaroor rakhna ki kabhi wo bahar muh na maare aur na hi tujhe roke toke..baaki main sambhaal loonga. Kal tujhe kuchh baaten samjhaunga aur phir tu mere anusaar chalna aur dekhna ki teri chudaas choot ko main kaise dhanya karta hoon...'' Babuji ne Kammo ko gaalon pe chooma aur phir apne seene se laga lia.
Kammo ko motti motti choochia Babuji ka seene men dhans gai aur dono badan jaise ek doosre men samaa gae.
Kammo ithhlaati matkaati apne ghar ko chal padi. Uski bagal men 2 keemati suit the. Uski chaal men ek nai rawaangi thi, ek naya utsaah. Uski zindagi achanak se khoobsoorat dikhne lagi thi. Babuji ne jaate jaate uski maang ko chooma tha aur usne unke pair chhue the. Use apne pati se kabhi itna sukh nahi mila tha jitna ki Babuji ke lund se ... kya ho gaya hai mujhe...aaaj to man kar raha hai hawaa men udd jaun..ooohhh Babuuu...mere priyatamm...kal tak kaise intezaar karungi.....????
Babuji bistar pe nange lete hue Kammo ke khayalon men gum the. Bahuon ki chudaai men unhe mazaa aata tha par Kammo ne unke dil ke kissi kone men ghar kar lia tha. Babuji ko ek shaam men lagne laga tha ki bina Kammo ki choot paae unhe kabhi santushti nahi hogi. Unke lund ko Kammo ki choot se pyaar ho gaya tha. Kammo ki yaad men Babuji kab so gae unhe pata hi nahi chala.
Udhar picnic pe sabhi masti men the. 10 baje resort pahunchane ke baad sab apni apni patnion ke sath sair pe chal die. Sakhi ki maa resort ko dekhne nikal padi. Usse bahut khushi thi ki pichhle 5 mahino se uske kahe anusaar sab mardon ne apni apni patnion se sambandh nahi banae. Darasal Sakhi ki maa akele rehte rehte bore ho gai thi. Uska bada beta aur bahu kaafi samay se videsh men bas gae the. Beta ek dukaan chalata tha aur kamai limited thi. Bahu bhi kaam karti thi. Ek baar mushkil se Sakhi ki maa wahan gai thi aur mahaul napasand aane pe waapis aa gai.
Tab se beta kabhi kabhi paise bhej deta hai aur 2 - 3 saal men ek baar chakkar maar jaata hai. Sakhi ki shaadi pe beta, bahu aur unke 2 chhote bachhe aae the. Bachhon ko daadi se bahut lagaw ho gaya tha. Bachhon ki zidd pe unhe daadi ke paas chod ke beta aur bahu kuchh din ghoomne chale gae. Un dino men bete ko ek dost se partnership business ki offer bhi mili. Sakhi ka bhai bhi bachhon ki padai ki wajah se waapis aana chahta tha aur usne apne dost ki offer pe vichaar karna shuru kar dia. Kaam shuru karne ke plan banae aur decision hua ki 1 saal men wo pariwaar samet waapis aa jaega aur kaam shuru karega. Ye baat jab Sakhi ki ma ko pata chali to wo bahut khush hui. Aur jab Sakhi ke ghar se bulawa aaya to wo aur bhi khush ho gai. Sakhi ke jaane ke baad ghar soona ho gaya tha. 6 mahine akele kaise kaate ye to wo hi jaanti thi. Haan sex ka anand bahut mila. Kanchan ke pati se khoob maje mile. Ab aur 1 - 2 mahine tak beta waapis aane wala tha so uski khushi alag thi.
Inhi sab baaton ko sochte hue Sakhi ki maa resort men ghoom rahi thi ki use 35 - 40 ki ek aurat nazar aai aur wo kuchh logon pe chilla rahi thi. Wo log sir jhukae baat sunn rahe the. Beech beech men wo aurat unhe maa behen ki gaalian bhi nikaal rahi thi. Uski gaalian sunn ke Sakhi ki maa thori achambhit reh gai. Resort men mehmaano ke hote hue koi aise gaalian kaise de sakta hai aur wo bhi ek aurat. Sakhi ki maa wahin khadi sab sunti rahi. Baaton se wo aurat resort ki manager ya maalkin lag rahi thi. Kuchh der baad wo sab log chale gae aur wo aurat gusse men resort ke reception ki taraf jaane lagi. Achanak uski nazar Sakhi ki maa pe gai aur wo ruk gai.
'' Ji aap yahan pe guest hain ya kisi se milne aai hain ?'' Usne puchha.
''Ji main yahan ruki hui hoon. Meri beti aur uska pariwaar bhi hai yahan.'' Sakhi ki maa ne kaha.
''oooh maanf kijiega mujhe pata nahi tha aur maine dhyaan bhi nahi dia..nahi to ye sab jo aapne suna aisa nahi hota..''
''Koi baat nahi ..aap yahan ki manager lagti hain shayad..''
''Ji main manager nahi maalkin hoon. Darasal ye resort mere pati aur unke partner ka tha. 5 mahine pehle dono ki car durghatna men maut ho gai. Aur ye sab kaam ka bhoj mujhpe aa gaya. Aurat hoon na to ye sab naukar bewkoof samjhte hain aur meri majboori ka fayada uthana chahte hain. Tabhi inpe chillana padta hai.''
'' Ohhh to aap bhi meri tarah akeli hain. Main bhi widhwa hoon.. amin samjh sakti hoon aapki dikkat ko '' Sakhi ki maa ne kaha.
'' Ji shukriya..aap ka naam nahi bataya aapne..?'' Us aurat ne puchha.
'' Ji mera naam Sarla hai ..aur aapka..?'' Sakhi ki maa ne puchha.
'' Ji main Kiran. Aap kahin ja rahi thi ..meri wajah se ruk gai ..sorry ?'' Kiran ne kaha.
'' Ji bas main to aise hi resort ghoom rahi thi. Bachhe alag ghoomne nikle hain to maine socha ki main bhi sair kar loon.'' Sarla (Sakhi ki maa) ne jawab dia.
'' Arre to theek hai aaiye main aapko resort ghuma deti hoon..isme mera kaam bhi ho jaega...mujhe to waise bhi din men 2 baar round lene padte hain.'' Kiran ne kaha.
Kiran aur Sarla sath sath resort ghoomne chali gai. Resort ka ilaka kareeb 10 acre zameen men tha. 30 huts bani hui thi jinme kuchh single kuchh double room wali thi. Ek jagah restaurant aur pub bana hua tha. Pub men ek disco bhi tha. Kiran ne Sarla ko bataya ki resort ke sath kareeb 50 acre zameen bhi uske pati ki thi. Us zameen pe jungle aur chhoti si ek pahadi thi. Us area ko abhi tak unhone develop nehi kia tha. Sarla ye sab dekh ke bahut impress hui. Baaten karte karte dono pub men chali gai aur Kiran ne wahan beer ka order dia. Sarla ko doosra jhatka laga. Usne 2 baar chhup ke Kanchan aur uske pati ke sath sharaab pi thi. Par Kiran ka bindaas andaaz dekh ke wo surprised thi. Sarla ne apne lie nimbu paani mangwaya.
''Kiran ek baat puchhoon bura to nahi manogi ..?''
''Ji puchhiye.''
''Tumhari umar kitni hai..?''
''Ji meri umar 38 ki hai '' Kiran ne jawab dia.
''Mujhe lagta hai tumhe dobara shaadi kar leni chahie ..apne lie aur apne bachhon ke lie agar hain to'' Sarla boli.
''Ji shayad aap theek keh rahi hain..apne lie kar leni chahie..bachhe to hain nahi aur na hi honge..''
''Kyon honge kyo nahi koi dikkat hai kya ?'' Sarla ne puchha.
'' Ji haan .. darasal mujhe medical problem hai..mere heart ko leke. Jab bachha karne ki sochi to doctor ne salah di ki mat karo. Jaan ka khatra ho sakta hai. Tab maine socha ki kar leti hoon dekha jaega jo hoga. Par mere pati nahi maane. Unhone zidd karke meri nasbandi karwa di, mujhe bura to bahut laga par apne pati ke lie maan gai. Wo mujhe bahut pyaar karte the..hamaari love marriage thi'' Kiran beer ka ghoont lete hue thori udaas ho gai.
''ohhh..par tum adopt kar sakti thi..paisa wagarah to sab hai tumhare pass..'' Sarla ne kaha.
''Ji kanooni taur pe mere Jeth ki ladki ko maine apni waaris banaya hai...wo abhi college men hai ...mujhe maa kehti to nahi par pyaar bahut karti hai.. baaki ye sab hai jo aap dekh rahi hain. Isme itna busy rehti hoon ki puchho mat ..aur upar se ye haraami saale ..mujhe chootiya banane ki koshish men lage rehte hain..'' Kiran thode gusse men aa gai.[/font]
''Arre Kiran ye mard jaat hai hi aisi agar koi pyaar bhi karta hai to matlab se..khair duniyadaari hai so nibhani padegi... waise meri ek salah hai tum kisi ko apne sath yahan partner ya madad ke lie rakh lo..aakhir ek se do bhale..kaam asaan ho jaega.''
'Ji sochti to hoon ki apni bhatiji ko college ke baad bula loongi par abhi 3 saal hain uske. Tab tak pata nahi kaise na kaise manage karungi. Achhe log milte bhi kahan hain. Aur waise bhi ye jagah kaafi door hai sheher se. Koi yahan rukna pasand nahi karta..'' Kiran boli.
''Bhai mujhe to ye jagah pasand aai...shaanti hai..achhi hawa paani sab hai aur jo aaega wo kaam men busy rahega..'' Sarla ne kaha.
'' Sarla ji bura na maane to ek baat kahun...kya aap yahan aana chahengi..meri madad ke lie..main aapko salary doongi aur rahane ki jagah. Kitchen hum log share kar lenge. Aap bhi akeli hain aur kaafi suljhi aur sambhraant aurat hain. Mujhe sahara ho jaega..'' Kiran ne achanak se prastaav rakha.
Uski baat sunn ke Sarla chaunk gai. Par phir apne ko sambhalte hue boli. Usne Sakhi aur uske pariwaar ke baare men bataya. Apne bete ke future plans ke baare men. Ye sab ke beech wo Kiran ki offer kaise le sakti thi. Par usne promise kia ki wo kisi achhe aadmi ya aurat ko talaash karegi aur Kiran ke pass bhejegi.
Ye sab baaten karte hue lunch ka samay ho gaya tha aur Kiran usse restaurant men le aai. Sarla ke lie usne soft drink mangwaya. Sarla table pe baithi Kiran ko dekh rahi thi. Kiran ek ameer ghar ki aurat thi ye uske kapdon se pata chalta tha. Badan pe kasa hua suit. Gatheela shareer. Gora rang. Teekhe nain naksh. Bas badan pe kahin kahin extra weight tha. Par overall wo achhi dikhti thi. Uski kad kaathi Sarla se milti julti thi. Farak sirf itna tha ki Sarla ki umar ki wajah se uski body ka kasaav thode kam ho gaya tha. Dono ko agar sath khada kar to badi aur chhoti behen lagengi. Usko dekhte hue Sarla ko uspe taras aa gaya. Itni chhoti age men widhwa hona. Par phir wo apne baare men sochne lagi ki wo bhi kaafi jaldi akeli ho gai thi. Sochte sochte Sarla ko apne pati ki yaad aane lagi aur phir pati ke sath guzaari rang raliaan. Ye sochte hue uske man men chudaai ki ichha jaagrit ho gai. Par uske lie use wait karna tha. Babuji ka lund milne men abhi waqt tha. jab se wo aai thi Babuji ne use choda nahi tha. Abhi tak ghar men usse Babuji ke sath akele rahane ka mauka nahi mila tha.
Itne men Sakhi aur baaki sab bhi restaurant men aa gae. Sarla ne Kiran se sabki introduction karwaai. Sarla ne bade achhe se sabko khaane ke lie aamantrit kia. Kuchh der baad kuchh aur guest bhi aa gae. Resort men uss din kareeb 8 families aur 2 - 3 nae shaadishuda jode the. Kiran kaam men busy ho gai aur Sarla apne pariwaar ke sath. 3 baje ke kareeb khana khatam karke sab sustaane chale gae. Resort men unhone 2 double room ke cottege book karwae the. Sarla ke kahe anusaar ek cottege men sab mard the aur ek men sab auraten. Teeno bhai bina choot ke 4 mahine guzaar chuke the. Resort men baaki guests ko dekh ke unme sex ki ichha jaagrit ho rahi thi.
Dopahar ko kareeb 2 ghanta sone ke baad sab chai ke lie lawn men aa gae. Gappen maarte hue chai pite hue samay kaise nikal gaya pata hi nahi chala. kareeb 7 baje sab nahane chale gae. Taiyaar hoke sab 8 baje pub men pahunch gae. 3no bhaion ne apne lie drinks order kie. Sarla aur 3no bahuon ne soft drinks lie. Kuchh der men sabne khana order kia aur drinks lete hue khana bhi finish ho gaya. Is samay tak pub men sab families aa chuki thi aur ek achha mahaul bana hua tha. Itne men Kiran wahan aai aur sabse mili. Usne ek halke rang ki saari pehni hui thi jo ki kamar se niche bandhi hui thi. Uski naabhi saaf saaf dikh rahi thi. Blouse bhi sleevless tha. Usne sarla aur uske pariwaar se kuchh der baat ki aur phir apni drink leke pub ka kaam dekhne lagi. DJ ko keh ke usne ek tadakta fadkata gaana lagwaya aur wahan baithe logon ko ek ek karke dance ke lie bulaane lagi. Thori hi der men takreeban sabhi log stage pe pahunch gae. Sarla, Sakhi aur Sanjay table pe baithe the. Sakhi ko din men ziada sair ki wajah se peeth men dard tha. Islie wo nahi jaana chahti thi. Uske chakkar men Sanjay bhi nahi ja paa raha tha. Sanjay ka 5waan peg chal raha tha jab Kiran un logon ke paas aai.
''Arre Sarla ji aap sab yahan kya kar rahe ho..chalie stage pe thode dance kar lijie.'' Kiran ne kaha.
'' Arre nahi Kiran ..meri beti ki peeth men dard hai to islie ..ye nahi kar paegi aur main iske sath hi rahun to achha hai.''
''Achha to aap apne damaad ko to bhejie.. Aap to chalie damaad ji..''Kiran ko khud bhi thode suroor tha aur usne Sanjay ko chherte hue kaha.
''Ji main aapka damad nahi hoon..'' Sanjay enjoy na kar paane ki wajah se thode gusse men tha.
''Arre ye meri saheli hain aur aap inke damad to uss naate aap mere bhi damaad hue...gussa kyon karte hain..main mazaak kar rahi thi..aap chalie enjoy kijie ye baithi hain Sakhi ke sath''
''Haan Sanjay tum jao main baithi hoon..tumhe to dance ka shauk hai..jaao naa..'' Sakhi ne kaha.
''Tumhe pata hai main akele dance nahi karta..mujhe partner chahie..'' Sanjay ne use ghoorte hue kaha.
''To chalo aap mere sath dance karo...main bhi bahut din se dance nahi kia hai..chalie..arre Sakhi ko kya dekh rahe hain...main iski maa ki saheli hoon..iski maa jaisi ..chalie uthiye ..ye mera order hai..'' Kiran ne khilkhilaate hue Sanjay ka hath pakra aur use dance floor pe le gai.
दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा इस कहानी बारहवां पार्ट लेकर हाजिर हूँ
कुच्छ ही देर में संजय मूड में आ गया. अपने कॉलेज का डॅन्स चॅंपियन अपनी मूव्स दिखाने लगा. देखते ही देखते स्टेज के आस पास लोगों ने घेरा बना लिया और संजय और किरण की जोड़ी को जगह दे दी. उस समय चान्स पे डॅन्स करले गाना चल रहा था और संजय ने किरण को अनुष्का सहर्मा की तरह नचाना शुरू कर दिया. उसकी हर मूव गाने की बीट से मिल रही थी. किरण उसकी बाहों में झूल रही थी और हँसे जा रही थी. सब लोग तालियाँ बजा बजा के उसे उत्साहित कर रहे थे. इसी तरह से एक और गाने पे दोनो ने एक साथ डॅन्स किया. किरण भी अच्छी डॅन्सर थी और हर तरीके से उसने संजय का साथ दिया. डॅन्स करते हुए संजय काफ़ी अलग अलग जगह किरण को छ्छू रहा था. किरण को उसके टच से काफ़ी सुखद एहसास हो रहा था. उसके मन में भी पुरुष के स्पर्श की इच्छा जागृत हो रही थी. उसकी पीठ, कमर और बाजुओं पे जब संजय का हाथ लगता तो उसका रोम रोम खिल उठता. इतने में डीजे ने एक स्लो रोमॅंटिक सॉंग लगा दिया और सब लोग अपने अपने पार्ट्नर के साथ क्लोज़ डॅन्स करने लगे.
किरण संजय के कंधों के लेवेल तक आ रही थी. उपर देखते हुए उसने संजय की आँखों में झाँका. आँखों आँखों में बहुत सी बातें दोनो एक दूसरे से कह गए. करीब 20 सेकेंड तक दोनो एक दूसरे को देखते रहे और इसी दौरान उनके जिस्म भी काफ़ी करीब आ गए. संजय का लंड उसकी पॅंट में हलचल करने लगा था. उस एहसास ने उसको जगाया और उसने सखी की तरफ देखा. सखी टेबल पे सिर रखे सोई हुई थी और सरला उसके सिर पे हाथ फेर रही थी. सरला की नज़रें किरण और संजय पे थी. अपनी सास को देखते हुए संजय सकपका गया. उसने किरण से एक्सक्यूस लिया और टेबल की तरफ गया. किरण थोड़ी मायूस हुई पर फिर अपने को संभालते हुए वापिस काम में लग गई.
संजय टेबल पे पहुँचा तो सखी ने उससे कहा कि वो रूम में जाना चाहती है. सरला, सखी और संजय रूम की तरफ चल दिए. सरला संजय को गौर से देख रही थी. उसको यकीन हो गया था कि किरण संजय पे लट्तू हो गई है. संजय भी आख़िर एक मर्द था और 4 महीने से अपनी पत्नी से वंचित था. आने वाले 8 - 9 महीने उसे स्त्री सुख से वंचित रहना था. इससे पहले कि बात किसी ग़लत दिशा में चली जाए सरला ने एक डिसिशन लिया. संजय और सखी को कमरे में छोड़ के सरला वापिस पब चली गई. किरण को ढूँढ के उसने किरण से कुच्छ बात कही. उसकी बात सुन के किरण दंग रह गई. करीब 15 मिनिट तक दोनो में बाते और बहस होती रही और उसके बाद सरला वहाँ से चली गई. सरला ने रूम में पहुँच के संजय को वापिस पब जाके सरला का पर्स लाने को कहा जो वहाँ छ्छूट गया था. संजय उत्साहित मन से वापिस चल दिया और सरला उसकी चाल में आई रवानगी देख के मुस्कुरा दी.
जब तक संजय पब में पहुँचा तब तक उसके दोनो बड़े भाई और भाभियाँ वहाँ से जाने के लए निकल रहे थे. मिन्नी और राखी भी थक चुकी थी. राजू और सुजीत ने संजय से पुछा कि वो कहाँ जा रहा है. संजय ने पर्स वाली बात बताई. ये कह के वो लोग रूम्स की तरफ चल दिए और संजय पब की तरफ. पब में अब भीड़ थोड़ी कम थी पर लोग अभी भी नाच रहे थे. यंग कपल्स और कुछ मिड्ल एज कपल्स स्टेज पे ''छमॅक छल्लो'' पे डॅन्स कर रहे थे. संजय को बहुत ज़ोर से पेशाब लगा था तो वो पहले टाय्लेट गया. कहते हैं जब कुच्छ होना होता है तो किस्मत भी इशारे करती है. जेंट्स टाय्लेट के गेट के पास एक कोने में एक जवान जोड़ा मस्ती में लगा हुआ था. लड़की का एक मम्मा शर्ट के बाहर लटका हुआ था और उसका ब्फ या हज़्बेंड उसको भींच भींच के चूस रहा था. लड़की पूरे नशे में थी और उसको संजय के वहाँ होने से कोई फरक नही पड़ा. संजय उसको कुच्छ सेकेंड देखता रहा और फटाफट टाय्लेट में गया. पेशाब करते करते उसका लंड पूरा खड़ा हो गया. 11 इंच के लंड को संभालना भी दिक्कत वाला काम था. खैर जैसे तैसे संजय ने उसे सुलाया और वापिस निकलने लगा. बाहर निकलते ही संजय का नज़ारा देख के होश उड़ गए. लड़की का मम्मा तो बाहर था ही साथ में उसकी पॅंटी पैरों में गिरी पड़ी थी और लड़का उसकी चूत की रगदाई कर रहा था. लड़की के चेहरे पे सेक्स की गर्मी थी और बहुत मस्त भाव थे. लड़के ने उसे दीवार के साथ चिपकाया हुआ था और उसकी एक टाँग अपने हाथ में पकड़ी हुई थी, दूसरे हाथ से उसकी स्कर्ट में फिंगरिंग कर रहा था. इस बार लड़की ने संजय को देखा और अपने मूह में उंगली डाल के उसे चूसा.
इशारा सॉफ था पर संजय को अभी काफ़ी होश था. सब तरफ नज़र दौड़ाते हुए उसने आगे बढ़ के लड़की के मम्मे पे हमला बोल दिया. मम्मा मीडियम साइज़ का था और बड़ी आसानी से संजय के मूह में समा गया. पूरे मम्मे को मूह में रखते हुए संजय ने लड़की का हाथ पकड़ के अपने लंड पे रखवाया. पहले से आधा तना लंड अब पूरा तन गया और लड़की के मूह से एक मोन निकल आई. शायद ये लड़की कोई प्रोफेशनल थी और शायद इसी लिए उसके पार्ट्नर को भी कोई फरक नही पड़ रहा था कि उसका माल कोई और भी लूट रहा है. इतने में कन्खिओ से देखते हुए संजय की नज़र किरण पे पड़ी. वो हॉल में किसी को ढूँढ रही थी. लड़की के मम्मे को एक आख़िरी चूम्मा देके संजय किरण की तरफ बढ़ा. अचानक उसे कुच्छ सूझा और बार पे जाके उसने 2 लार्ज विस्की के ऑर्डर किए. एक कोने में खड़े होके वो किरण को देखता रहा. किरण काफ़ी परेशान और उत्तेजित लग रही थी जैसे किसी को भीड़ में ढूँढ रही हो. जिस तरीके से वो गेस्ट्स की भीड़ को देख रही थी उससे संजय को अंदाज़ा हो गया कि वो किसी नौकर या एंप्लायी को नही बल्कि किसी गेस्ट को ही ढूँढ रही है. 5 मिनिट में 2 लार्ज विस्की पीने के बाद संजय पिछे से किरण की तरफ बढ़ा. किरण बार के साथ बने स्टोररूम में जा रही थी और अपने आप से बड़बड़ाये जा रही थी. स्टोररूम खुला था और किरण उसमे एंटर होते ही एक टेबल की तरफ बड़ी. उसपे सरला का पर्स पड़ा था. संजय ने मौका देख के स्टोर रूम में एंट्री ली और दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया. उसने ध्यान रखा कि दरवाज़े को अभी कुण्डी ना लगाए.
''लगता है कुच्छ बहुत कीमती था जो खो गया है...काफ़ी परेशान दिख रही हैं आप...'' 1 फुट की दूरी पे किरण के पिछे खड़े खड़े संजय ने कहा. उसकी 6 फिट की हाइट से किरण काफ़ी छ्होटी दिख रही थी. अब संजय पे दारू का सुरूर भी हो गया था.
''ऊूउउइ माआ...ऊहह गाआवद्ड़...तुमने तो मुझे डरा ही दिया....ऊओ माआ..'' किरण चौंक के मूडी और उसके मूह से हल्की सी चीख निकल गई.
''ह्म्म्म पहले जिसे ढूँढ रही थी ..और जब वो सामने है तो डर रही हो... बात कुच्छ जमी नही..'' संजय मुस्कुराता हुआ बोला.
'' मैं क्या ढूँढ रही थी और क्या मतलब है तुम्हारा ..सामने तो तुम हो...मैं क्या तुम्हे ढूँढ रही थी ??'' किरण ने गुस्से और अचंभित होने के भाव दिखाए.
'' पिच्छले 10 मीं में जिस हिसाब से आपने सब लोगों पे नज़रे घुमाई और फिर जिस तरह से बड़बड़ाते हुए आप यहाँ पे आई ..ये सब ...क्या है...'' संजय अब थोड़ा कन्फ्यूज़्ड सा था. उससे पहले लगा था कि किरण उसपे लट्तू हुई है पर अब शायद बात कुच्छ और ही ना हो.
'' मैं तुम्हे नही ढूँढ रही थी...मैं सरला जी को ढूँढ रही थी..वो अभी थोड़ी देर पहले आई थी और उनका पर्स यहाँ रह गया था..मुझे लगा कि वो टाय्लेट गई होंगी ..पर जब वो नही आई तो मैं उन्हे देखने लगी...तुम क्या अपने को बहुत वीआइपी समझते हो जो मैं तुम्हे ढूंढूंगी.'' किरण का गुस्सा देखते ही बनता था.
अब बारी संजय के सकपकाने की थी. वो घबरा गया कि कहीं जोश में आके उसने कुच्छ ग़लत तो नही कह दिया. बात सखी तक पहुँचेगी तो क्या सोचेगी. भाभी को चोद्ना उनसे मज़े लेना घर की परंपरा का हिस्सा था, बाबूजी का आदेश था...पर पराई स्त्री पे डोरे डालना शायद ये किसी को भी मंज़ूर ना होगा.
'' जी मैं तो मज़ाक कर रहा था..आक्च्युयली मुझे सासू मा ने ही भेजा था आपसे पर्स लाने के लिए...मैं आपको ढूँढ रहा था तो आपको परेशान देखा ..सोचा आपसे थोड़ी चुहहाल कर लूँ..आफ्टर ऑल आप भी तो मेरी सास जैसी है...'' संजय ने अपनी सबसे अच्छी स्माइल देते हुए बात को संभालने की कोशिश की.
जैसा कि पहले बताया था कि संजय दारू पीने के बाद बाकी लोगों जैसा नही रहता. वो मस्ती में आ जाता है और कभी होश नही खोता. दारू उसके लिए नशे का काम ज़रूर करती है पर जैसे कि टॉनिक हो. उसके कॉलेज में लड़कियाँ उसे दारू पी के देखने को तरसती थी. उसकी हरकतें, चाल और मुस्कान इतनी नशीली होती थी कि लड़कियाँ उसपे लट्तू हो जाती थी. और अभी वो स्माइल देख के किरण की धरकने डबल हो चुकी थी. '' हाए क्या कातिल मुस्कान है...मन करता है कि इस मुस्कान से अपनी मुस्कान मिला दूं...किस कर लूँ इसे...उफफफ्फ़...मेरी चूत ..इतनी गीली कैसे हो गई...मैं गिर जाउन्गि...'' किरण के दिमाग़ में ये सब बातें चल रही थी.
पर उसे अपने पे कंट्रोल रखना था. उससे सिचुयेशन को संभालना था. जो बातें सरला ने उससे कही थी वो सच थी. उसके दामाद सा हॅंडसम वहाँ कोई नही था. अब देखना ये था कि जो बात उसने संजय के लंड के बारे में कही थी क्या वो बात सच है. पर उसमे अभी वक़्त था.
''ठीक है मैं तुम्हारी बात मान लेती हूँ दामाद जी..ये लो अपनी शैतानी का फल ..और ये लो अपनी सासू मा का पर्स ..इसे लेके जाओ और उनसे कहना कि मैं 1 घंटे में आउन्गि उनके कमरे पे कुच्छ ज़रूरी बातें करने. समझे मेरे मूह बोले नटखट दामाद जी..'' किरण ने आगे बढ़ के संजय का कान मरोड़ दिया और उसके गालों पे एक हल्की सी चपत दी. उसके इस आक्षन से संजय थोड़ा तिलमिला गया और उसके अहंकार को चोट पहुँची.
''ठीक है मेरी मूह बोली सासू जी..कह दूँगा अपनी सासू मा को आपकी बात ..चलिए अब आग्या दीजिए ..प्रणाम और शुभ रात्रि'' संजय अचानक झुका और एक हाथ से किरण के पैर च्छुए. पैर च्छुने के बहाने उसने पैरों को अच्छे से सहलाया और उठ खड़ा हुआ. उसके पैर सहलाने से किरण रोमांचित हो उठी. उसके रोम रोम में आग लग गई. संजय ने एक बार उसकी आँखों में झाँका और फिर मूड के स्टोर रूम से बाहर चला गया. किरण उसके जवान लंबे जिस्म को पिछे से देखती रही. उसकी साँसे काबू में नही थी. उसके होंठ काँप रहे थे. बदन में झूरी झूरी दौड़ रही थी. अपने को संभालने के लिए उसने टेबल का सहारा लिया और सिर झुका के अपने पे कंट्रोल करने लगी.
संजय गुस्से में अपने कॉटेज की तरफ जाने लगा. बार से उसने एक विस्की की बॉटल और ले ली थी. पहले वो अपने कॉटेज मे गया जहाँ उसके दोनो भाई सोने की तैयारी कर रहे थे. बॉटल रखते हुए उन्होने देखा तो पुछा कि ये किस लए. संजय ने कहा कि आज मस्ती का दिन है तो वो थोड़ी और पीना चाहता है. बार बंद हो रहा था सो इसलिए बॉटल ले आया. अगर वो पीना चाहे तो पी सकते हैं. 3नो भाईओं ने एक एक पेग बनाया और पीने लगे. पेग 3/4 हुए थे कि संजय को सास के पर्स की याद आई और वो देने चला गया. राजू और सुजीत सेक्सी बातें करते हुए पेग ख़तम करके सोने चले गए. जिस कमरे में कॉटेज का मेन एंट्रेन्स था उसमे संजय ने सोना था और दोनो भाईओं ने पिच्छले कमरे में. उन्होने अपने रूम का दरवाज़ा बंद किया और सोने चल दिए. जब तक संजय सखी का हाल पुच्छ के वापिस आया तब तक सुजीत और राजू सो चुके थे. संजय ने आते ही अपने कपड़े उतार दिए और सिर्फ़ अंडरवेर में लेट गया. किरण का कान खींचना, चपत लगाना और उसके पैरों का एहसास उसके दिमाग़ में घूम रहे थे. गुस्से में उसने एक पेग और बनाया. ये शाम से उसका 7थ पेग था. उसकी केपॅसिटी 1 बॉटल से उपर की थी.
पेग लेते लेते उसे किरण के साथ डॅन्स की याद आ गई. पेग ख़तम हुआ किरण की कमर के एहसास से. लंड अब अंडरवेर में हिचकोले खा रहा था. संजय ने घड़ी देखी तो 11 बज चुके थे. एक पेग और बनाया और फिर से किरण की कमर पे ध्यान चला गया. साड़ी में क्या लग रही थी. उसके चेहरे पे अब स्माइल थी. हाथ में पेग और दूसरे हाथ में अंडरवेर से बाहर निकाला हुआ लंड. ''लगता है आज भी मूठ मार के गुज़ारा करना होगा..पता नही चूत कब मिलेगी..ये साली सासू मा ने भी सब गड़बड़ किया हुआ है..साली खुद अपनी ज़िंदगी के मज़े ले चुकी है और हमें रोकती है.....पर है गदराई हुई ..इतनी उमर में भी ..उफ्फ क्या सोच रहा है संजय..तेरी सास है वो...सास है तो क्या हुआ...है तो खेली खिलाई घोड़ी. अगर मौका मिला तो इस्पे भी चढ़ जाउन्गा....उउम्म्म्म...सोच के ही लंड में नई जान आ जाती है....सरला....किरण....उम्म्म्ममम'' संजय के दिल पे साँप लोटे रहे थे..उसके लंड का उफान उसके दिमाग़ को कंट्रोल कर रहा था.
इतना सोचते हुए उसका ध्यान अचानक उस लड़की पे गया...क्या चूचा था उसका..एक दम सखी जैसा. छ्होटा पर सुडोल. क्या स्वाद था. जीभ अनायास ही होंठो पे फिरने लगी. लंड को सहलाते हुए संजय ने ड्रिंक ख़तम किया. एक और ड्रिंक बनाने के लिए उठने लगा तो लंड को उपर की तरफ सीधा करके अंडरवेर में डाल लिया. करीब 4 इंच लंड अंडरवेर के एलास्टिक के बाहर था. ''शांत रह बच्चे..अभी तुझे इतनी जल्दी चूत नसीब नही होगी..सब्र रख..'' लंड को समझाते हुए संजय ने लंड के टोपे को पूचकारा और एक ड्रिंक और बनाई. पहला सिप लेने ही लगा था कि डोर पे नॉक हुआ.
''सरला जी दरवाज़ा खोलिए..सो गई क्या..मैं हूँ किरण..'' वो आवाज़ वो चेहरा वो बदन जिसने शाम से संजय के दिमाग़ पे जादू किया हुआ था बस डोर के दूसरी तरफ थी.
बिना कुच्छ सोचे समझे हाथ में ड्रिंक लिए संजय ने तपाक से दरवाज़ा खोल दिया.
''तुम ..?? यहाँ..?? सरला जी के रूम में..?? ऊहह माइ गॉड ये क्या है....?? इस हालत्त्त्त्त्त्त्त मेन्न्न्न...ऊओह माइ....गॉड...?? '' किरण के हाथ उसके मूह पे थे. आँखें फटी हुई थी. संजय के लंड पे नज़र पड़ते ही किरण लरखरा गई और एक कदम पिछे हटी. चाँदनी में लंड और भी निखर के दिख रहा था. पर्पल कलर का सुपाड़ा चाँदनी में चमक रहा था. चॅम्डी पिछे को खींची पड़ी थी. सरला ने सच कहा था. उसका दामाद आदमी नही घोड़ा था. अंदर से किरण का रोम रोम जागृत हो गया था. उसकी चूत पे जैसे चीटीओ का हमला हो गया था. चूचे आन्यास ही कड़क हो गए. निपल तो जैसे ब्लाउस फाड़ के बाहर आना चाहते थे.
संजय ने उसकी ये हाल को देख के अपनी कातिल मुस्कुराहट दी और पेग को मूह से लगाया. किरण पिघलने लगी. कभी उसके चेहरे को देखती और कभी उसके लंड को. 8 महीने से विधवा किरण की उत्तेजना शायद सिर्फ़ सरला समझ सकती थी. इसीलिए उसने किरण को अपने कमरे का नही बल्कि अपने दामाद के कमरे का पता दिया था. एक आख़िरी बार किरण ने संजय के चेहरे को देखा और वो अपने होश खोने लगी. दिमाग़ और दिल साथ नही दे रहे थे. सब तरफ कन्फ्यूषन थी. उसकी कन्फ्यूषन संजय ने दूर की. किरण का हाथ पकड़ के रूम में खींच लिया और डोर बंद कर दिया. एसी की ठंडक में भी किरण का बदन भट्टी बना हुआ था. बिना कुच्छ बोले संजय ने पेग किरण के होंठो से लगा दिया. किरण उसकी आखों में देखते देखते पेग पी गई. पेग स्ट्रॉंग था पर शायद उससे भी स्ट्रॉंग थी उसके बदन की महक. जो कि कमरे में फैलने लगी थी.
संजय ने पेग के ख़तम होते ही एक और लाइट पेग बनाया और बिस्तर पे सिर झुकाए बैठी किरण के होंठो से लगा दिया. ये भी जल्द ही उसके गले से उतर गया. पर कुच्छ बूँदें होंठो के किनारों से होती हुई गर्दन और फिर संजय के होंठो पे चली गई. किरण अब होश खो चुकी थी. बदन की आग अब भड़क चुकी थी और उस आग को शांत करने का सिर्फ़ एक तरीका था. संजय का होज़पाइप जब तक उसके बदन के अंदर फुहार नही छोड़ेगा तब तक उसकी आग भुजने वाली नही थी. कपड़े उतरने लगे और देखते ही देखते किरण विधवा से नंगी विधवा हो गई थी. 8 महीने का सब्र का बाँध टूट गया और सैलाब आ गया.
संजय बिस्तर पे लेटा हुआ था और किरण उसके बदन से अपने बदन को रगड़ रही थी. 38सी की मोटी मोटी चूचियाँ और उनपे कड़े भूरे निपल संजय के बदन को रगड़ रहे थे. पर रगड़ पूरी नही हो पा रही थी. बीच में एक दीवार थी ..संजय का अंडरवेर. अपने चूचो को संजय के मूह से रगर्ते हुए उसकी छाती पे पहुँची और वहाँ से शुरू हुआ अंडरवेर तक पहुँचने का सफ़र. संजय के बदन के बाल टूट टूट के किरण के बदन से चिपक रहे थे. जहाँ जहाँ भी उसके होंठ चलते वहाँ थूक के निशान छोड़ जाते. अंडरवेर के एलास्टिक को दाँतों में फँसा के किरण एक जंगली बिल्ली की तरह गुर्राई. इशारा सॉफ था...गांद उठा के अंडरवेर उतरवा लो नही तो फाड़ दूँगी. संजय ने मुस्कुराते हुए एक आह भारी और गांद उठा दी. देखते ही देखते अंडरवेर पैरों में था. और लंड उसका ...तो मत पुछिये. उसपे तो जैसे भूखी शेरनी का अटॅक हुआ था. लंड का सूपड़ा दाँतों के बीच लाल होने लगा. जीभ रह रह के लंड के सुराख को कुरेद रही थी...होंठ लंड की साइड पे उपर से नीचे तक चल रहे थे. 5 - 6 इंच से ज़ियादा मूह में दाखिल नही हो रहा था पर शेरनी की भूख थी कि बढ़ती जा रही थी. लंड के बेस को पकड़ के सिर को उपर उठाती और फिर वापिस नीचे ले जाती. हर स्ट्रोक के साथ लंड थोड़ा और अंदर जाता.
पर हर स्ट्रोक को लगाने के लिए जो मेहनत किरण कर रही थी वो सॉफ दिख रहा था. 7 इंच के बाद लंड गले की बॅकसाइड को कुरेदने लगा था. थूक की जैसे बाढ़ आ गई थी. लंड और टट्टों का कोई भी हिस्सा उस बाढ़ से बच नही पा रहा था. बिस्तर गीला हो चुका था. गले तक लंड लेने पर कुच्छ सेकेंड के लए मूह बंद रहता और फिर साँस लेने के लए खुलता. नातुने भी उसी हिसाब से खुल और बंद हो रहे थे, आँखों से आँसू बहे जा रहे थे पर प्यास भुज नही रही थी. संजय ये नज़ारा देख के खुद भी मदहोश हुआ पड़ा था. एक नई सनसनी उसके बदन में घर कर गई थी. इतना उतावला पन उसने आज तक नही देखा था. राखी भाभी जो कि लंड चूसने में निपुण थी उन्होने ने भी कभी इतना एफर्ट नही दिखाया था. वो करीब 10 इंच तक आसानी से ले लेती थी पर शायद इसलिए कि उन्होने बहुत प्रॅक्टीस की थी. पर ये बात कुच्छ और थी. ये भूख और ये चुम्मे आज तक संजय ने एक्सपीरियेन्स नही किए थे.
''ऊओह मेरी मूह बोली सासू मा...मैं झरने वाला हूओन ज़ाआआन्णन्न्...मेरा होने वाला है...रुक्क्क ..जा...नही तो मूह भर दूँगा....ऊओह ...प्ल्लसस....रुक्ककक...''' संजय कराह रहा था.
पर मूह बोली सास नही रुकी और संजय भी नही. मौसम से पहले ही होली आ गई और पिचकारी से सफेद रंग निकलने लगा. पर यहाँ बदन का कोई बाहरी हिस्सा गीला नही हुआ. गीला हुआ तो मूह बोली सास का गला...उसकी तृप्ति हो गई..ऐसा रंग जो अब ज़िंदगी भर नही छूटने वाला था. किरण गटक गटक के पीने लगी. आक्सिडेंट से 2 महीने पहले पति का पीया था. आज उस बात को करीब 10 महीने हो गए. अमृत पिए बिना गति नही और आज उसे अमृत मिल गया.......
पर बात यहाँ नही रुकी ...अमृत के धारे बहते हुए संजय का बदन ऐंठने लगा. उसका मूह खुल गया और जीभ बाहर निकल आई. अमृत ख़तम हो गया पर मूह वैसे ही खुला था. इस मूह को अमृत की ज़रूरत थी और वो उसको मिला किरण के होंठो से. बदन से बदन मिल गया और होंठ एक दूसरे से. जीभें आपस में बातें करने लगी. वीर्य का स्वाद मूह में जाते ही संजय को होश आ गया. बाहें फैला के उसने किरण के बदन को जाकड़ लिया. लंड अभी भी तना हुआ था. बुर के छेद पे दस्तक दे रहा था. बुर लिसलिसाई हुई आग बरसा रही थी. होज़ पाइप डालो मेरे में...ऐसी आवाज़ दे रही थी. होज़ पाइप ने जगह ले ली और धीरे धीरे 4 इंच अंदर चला गया. चूत का कसाव अब उसे रोक रहा था. पर शेरनी को लंड चाहिए था.....आज उसे कोई नही रोक सकता था. संजय के कंधों पे किरण नाम की शेरनी के पंजे थे और फिर वो हुआ जिसकी उम्मीद संजय ने कभी नही की थी. आज से पहले ऐसा सिर्फ़ मिन्नी भाभी के साथ हुआ था. शेरनी ने अपने चूतर उपर किए और लंड खिसक के बाहर आया. जब सुपादे का सिर्फ़ 1 इंच का हिस्सा अंदर बचा तो शेरनी ने अपने बदन को ज़ोर से नीचे दबाया.
एक ही झटके में बचा हुआ 10 इंच सब हदें तोड़ता हुआ जड़ तक समा गया और शेरनी की एक तेज़ दहाड़ सुनाई पड़ी.
Kuchh hi der men Sanjay mood men aa gaya. Apne college ka dance champion apni moves dikhaane laga. Dekhte hi dekhte stage ke aas paas logon ne ghera bana lia aur Sanjay aur kiran ki jodi ko jagah de di. Uss samay Chance pe dance karle gana chal rha tha aur Sanjay ne Kiran ko Anushka Sahrma ki tarah nachana shuru kar dia. Uski har move gaane ki beat se mil rahi thi. Kiran uski bahon men jhool rahi thi aur hanse jaa rahi thi. Sab log taalian baja baja ke use utsaahit kar rahe the. Isi tarah se ek aur gaane pe dono ne ek sath dance kia. Kiran bhi achhi dancer thi aur har tarike se usne Sanjay ka sath dia. Dance karte hue Sanjay kaafi alag alag jagah Kiran ko chhoo raha tha. Kiran ko uske touch se kaafi sukhad ehsaas ho raha tha. uske man men bhi purush ke sprash ki ichha jaagrit ho rahi thi. Uski peeth, kamar aur bajuon pe jab Sanjay ka hath lagta to uska rom rom khil uthta. Itne men DJ ne ek slow romantic song laga dia aur sab log apne apne partner ke sath close dance karne lage.
Kiran Sanjay ke kandhon ke level tak aa rahi thi. Upar dekhte hue usne Sanjay ki aankhon men jhanka. Ankhon aankhon men bahut si baaten dono ek doosre se keh gae. Kareeb 20 second tak dono ek doosre ko dkhte rahe aur isi dauraan unke jism bhi kaafi kareeb a gae. Sanjay ka lund uski pant men halchal karne laga tha. Us ehsaas ne usko jagaya aur usne Sakhi ki taraf dekha. Sakhi table pe sir rakhe soi hui thi aur Sarla uske sir pe hath pher rahi thi. Sarla ki nazren Kiran aur Sanjay pe thi. Apni saas ko dekhte hue Sanjay sakpaka gaya. Usne Kiran se excuse lia aur table ki taraf gaya. Kiran thori mayoos hui par phir apne ko sambhalte hue waapis kaam men lag gai.
Sanjay table pe pahuncha to Sakhi ne usse kaha ki wo room men jana chahti hai. Sarla, Sakhi aur Sanjay room ki taraf chal die. Sarla Sanjay ko gaur se dekh rahi thi. Usko yakeen ho gaya tha ki Kiran Sanjay pe lattooo ho gai hai. Sanjay bhi aakhir ek mard tha aur 4 mahine se apni patni se wanchit tha. Aane waale 8 - 9 mahine usse stree sukh se wanchit rehna tha. Isse pehle ki baat kisi galat disha men chale jae Sarla ne ek decision lia. Sanjay aur Sakhi ko kamre men chod ke Sarla waapis pub chali gai. Kiran ko dhoondh ke usne Kiran se kuchh baat kahi. Uski baat sunn ke Kiran dang reh gai. Kareeb 15 minute tak dono men baaen aur behas hoti rahi aur uske baad Sarla wahan se chali gai. Sarla ne room men pahunch ke Sanjay ko waapis pub jaake Sarla ka purse laane ko kaha jo wahan chhoot gaya tha. Sanjay utsaahit man se waapis chal dia aur Sarla uski chaal men aai rawaangi dekh ke muskura di.
Jab tak Sanjay pub men pahuncha tab tak uske dono bade bhai aur bhabhian wahan se jaane ke lie nikal rahe the. Minni aur rakhi bhi thak chuki thi. Raju aur Sujit ne Sanjay se puchha ki wo kahan jaa raha hai. Sanjay ne purse wali baat batai. Ye keh ke wo log rooms ki taraf chal die aur Sanjay pub ki taraf. Pub men ab bheed thori kam thi par log abhi bhi naach rahe the. Young couples aur kucch middle age couples stage pe ''Chhamak Chhalo'' pe dance kar rahe the. Sanjay ko bahut zor se peshaab laga tha to wo pehle toilet gaya. Kehte hain jab kuchch hona hota hai to kismat bhi ishaare karti hai. Gents toilet ke gate ke pass ek kone men ek jawaan joda masti men laga hua tha. Ladki ka ek mumman shirt ke bahar latka hua tha aur uska BF ya husband usko bheench bheench ke choose raha tha. Ladki poore nashe men thi aur usko Sanjay ke wahan hone se koi farak nahi pada. Sanjay usko kuchh second dekhta raha aur fatafat toilet men gaya. Peshaab karte karte uska lund poora khada ho gaya. 11 inch ke lund ko sambhalna bhi dikkat wala kaam tha. Khair jaise taise Sanjay ne usse sulaya aur waapis nikalne laga. Bahar nikalte hi Sanjay ka nazara dekh ke hosh udd gae. Ladki ka mumman to bahar tha hi sath men uski panty pairon men giri padi thi aur ladka uski choot ki ragraai kar raha tha. Ladki ke chehre pe sex ki garmi thi aur bahut mast bhaav the. Ladke ne use deewaar ke sath chipkaya hua tha aur uski ek taang apne hath men pakdi hui thi, doosre hath se uski skirt men fingering kar raha tha. Iss baar ladki ne Sanjay ko dekha aur apne muh men ungli daal ke usse choosa.
Ishara saaf tha par Sanjay ko abhi kaafi hosh tha. Sab taraf nazar dauaate hue usne aage bad ke ladki ke mamme pe hamla bol dia. Mumman medium size ka tha aur badi asaani se Sanjay ke muh men samaa gaya. Poore mamme ko muh men rakhte hue Sanjay ne ladki ka hath pakad ke apne lund pe rakhwaya. Pehle se adhaa tanaa lund ab poora tan gaya aur ladki ke muh se ek moan nikal aai. Shayad ye ladki koi professional thi aur shayad isi lie uske partner ko bhi koi farak nahi pad raha tha ki uska maal koi aur bhi loot raha hai. itne men kankhion se dekhte hue Sanjay ki nazar Kiran pe padi. Wo hall men kisi ko dhoondh rahi thi. Ladki ke mamme ko ek aakhiri choopa deke Sanjay Kiran ki taraf bada. Achanak usse kuchh soojha aur bar pe jake usne 2 large whiskey ke order kie. Ek kone men khade hoke wo Kiran ko dekhta raha. Kiran kaafi pareshaan aur uttejit lag rahi thi jaise kisi ko bheed men dhoondh rahi ho. Jis tarike se wo guests ki bheed ko dekh rahi thi usse Sanjay ko andaaza ho gaya ki wo kisi naukar ya employee ko nahi balki kisi guest ko hi dhoondh rahi hai. 5 minute men 2 large whiskey pine ke baad Sanjay pichhe se Kiran ki taraf bada. Kiran bar ke sath bane storeroom men ja rahi thi aur apne aap se badbade ja rahi thi. Storeroom khula tha aur Kiran usme enter hote hi ek table ki taraf badi. Uspe Sarla ka purse pada tha. Sanjay ne mauka dekh ke store room men entry li aur darwaza andar se band kar dia. Usne dhyaan rakha ki darwaaze ko abhi kundi na lagae.
''Lagata hai kuchh bahut keemati tha jo kho gaya hai...kaafi pareshaan dikh rahi hain aap...'' 1 ft ki doori pe Kiran ke pichhe khare khare Sanjay ne kaha. Uski 6 ft ki height se Kiran kaafi chhoti dikh rahi thi. Ab Sanjay pe daaru ka suroor bhi ho gaya tha.
''oouuuiii maaa...oohhh gaaawdd...tumne to mujhe daraa hi dia....ooohhh maaaa..'' Kiran chaunk ke mudi aur uske muh se halki si cheekh nikal gai.
''Hmmm pehle jise dhoondh rahi thi ..aur jab wo saamne hai to darr rahi ho... baat kuchh jami nahi..'' Sanjay muskurata hua bola.
'' Main kya dhoondh rahi thi aur kya matlab hai tumhara ..saamne to tum ho...main kya tumhe dhoondh rahi thi ??'' Kiran ne gusse aur achambhit hone ke bhav dikhae.
'' Pichhe 10 min men jis hisaab se aapne sab logon pe nazre ghumaai aur phir jis tarah se badbadaate hue aap yahan pe aai ..ye sab ...kya hai...'' Sanjay ab thode confused sa tha. Usse pehle laga tha ki Kiran uspe lattoo hui hai par ab shayad baat kuchh aur hi na ho.
'' Main tumhe nahi dhoondh rahi thi...main Sarla ji ko dhoondh rahi thi..wo abhi thori der pehle aai thi aur unka purse yahan reh gaya tha..mujhe laga ki wo toilet gai hongi ..par jab wo nahi aai to main unhe dekhne lagi...tum kya apne ko bahut VIP samjhate ho jo main tumhe dhoondhungi.'' Kiran ka gussa dekhte hi banta tha.
Ab baari Sanjay ke sakpakaane ki thi. Wo ghabra gaya ki kahin josh men aake usne kuchh galat to nahi keh dia. Baat Sakhi tak pahunchegi to kya sochegi. Bhabhion ko chodna unse maze lena ghar ki parampara ka hissa tha, Babuji ka aadesh tha...par parai stree pe dore daalna shayad ye kisi ko bhi manzoor na hoga.
'' Ji main to mazaak kar raha tha..actually mujhe Saasu maa ne hi bheja tha aapse purse laane ke lie...main aapko dhoondh raha tha to aapko pareshaan dekha ..socha aapse thori chuhhal kar loon..after all aap bhi to meri saas jaisi hai...'' Sanjay ne apni sabse achhi smile dete hue baat ko sambhalne ki koshish ki.
Jaisa ki pehle bataya tha ki Sanjay daaru peene ke baad baaki logon jaisa nahi rehta. Wo masti men aa jaata hai aur kabhi hosh nahi khota. Daaru uske lie nashe ka kaam zaroor karti hai par jaise ki tonic ho. Uske college men ladkian use daaru pi ke dekhne ko tarasti thi. Uski harkaten, chaal aur muskaan itni nasheeli hoti thi ki ladkian uspe lattoo ho jaati thi. Aur abhi wo smile dekh ke Kiran ki dharkane double ho chuki thi. '' Haaye kya kaatil muskaan hai...man karta hai ki is muskaan se apni muskaan milaa doon...kiss kar loon isse...uffff...meri choot ..itni geeli kaise ho gai...main gir jaungi...'' Kiran ke dimaag men ye sab baaten chal rahi thi.
Par usse apne pe control rakhna tha. Usse situation ko sambhalna tha. Jo baaten Sarla ne usse kahi thi wo sach thi. Uske damaad sa handsome wahan koi nahi tha. Ab dekhna ye the ki jo baat usne Sanjay ke lund ke baare men kahi thi kya wo baat sach hai. Par usme abhi waqt tha.
''Theek hai main tumhari baat maan leti hoon damaad ji..ye lo apni shaitaani ka phal ..aur ye lo apni saasu maa ka purse ..isse leke jao aur unse kehna ki main 1 ghante men aaungi unke kamre pe kuchh zaroori baaten karne. samjhe mere muh bole natkhat damaad ji..'' Kiran ne aage bad ke Sanjay ka kaan maror dia aur uske gaalon pe ek halki si chapat di. Uske iss action se Sanjay thode tilmila gaya aur uske ahankaar ko chot pahunchi.