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बिना किसी के और कुच्छ कहे सरला ही आँखें बंद हो गई और पिछे होते हुए उसकी टांगे खुल गई. संजय की आँखों के सामने अब सबसे बढ़िया नज़ारा था. उसकी सास की हल्की झांतों से भरी हल्की काली हल्की भूरी चूत के मोटे मोटे लिप्स चूतरस से चमक रहे थे. बिना कुच्छ कहे उसके होंठ सास की टाँगों के बीच पड़े होठों से जुड़ गए और अगले 3 - 4 मिनिट तक वो लंड पे नाचती हुई गांद से जुड़ी चूत को अलग अलग ढंग से चूमता और चूस्ता रहा. सरला गांद मत्काति रही और सिसकियाँ लेती रही. सुजीत गाल, होंठ चूस्ता रहा और मम्मे मसलता रहा. उसके लंड का उतावलापन भी बढ़ता रहा.
जब चूत की महक और स्वाद नाक और मूह को लग गया तो शरीर का लोड्ा कैसे पिछे रहता..आख़िर कार उसे भी इस चूत की चाहत थी. सत्त्त की आवाज़ के साथ के साथ एक ही झटके में लंड अंदर घुसता चला गया. सरला की हल्के दर्द और हल्के मज़े की आहें गले में ही घुट के रह गई आस अब उसके मम्मो में 4 हाथ घूम रहे थे और साथ ही उसकी चूत में दर्द और सुकून का मिला जुला एहसास होने लगा था.
''उफफफफ्फ़ क्या लंड पाया है दामाद जी ने और उपर से क्या गोल भरे भरे टटटे हैं...मेरे हाथ में कितने अच्छे लग रहे है...हाए सखी तेरी शादी तो बड़े नाज़ से हुई है...एक क्या इस घर के तो सारे मर्द चोदु हैं...काश ये तेरी चूत भी बजाते होते...तू नही जानती तू क्या मिस कर रही है...उउउम्म्म्मम साला बहुत चोदु है...उउंम और दामाद तो दामाद ये इसका भाई भी कॅम नही है वैसे ही जैसे इसकी बीवी...साली की ज़ुबान ऐसा लगता है कि अभी भी चूचों पे फिर रही है. उम्म्म्ममम..हे भगवान इसको शक्ति दो कि मुझे प्यार से और काफ़ी देर तक चोद सके...उउउंम्म'' सरला मंन ही मंन सोच रही थी.
संजय तो जैसे पागल हुआ जा रहा था. सरला की ज़ुबान से ज़ुबान लड़ाए हुए वो अब झटके मारने लगा. उसके मूह मे सरला पूरी उसके साथ लड़ाई कर रही थी. उसके मम्मे इतनी ज़बरदस्ती से निच्चोरे जा रहे थे कि पुछो नही. उपर से उसकी गंद में सुजीत का लोड्ा फुडकियाँ मार रहा था. इतने में संजय ने अपने सिर को झुकाया और उसके मम्मो पे पहली बार मूह मारा. इतने में सुजीत ने उसकी चुद्ती हुई चूत की फांके खोल दी और उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा. इतने में संजय ने सरला के दोनो चूचों को साइड से दबाया और इकट्ठे करते हुए दोनो निपल एक साथ मूह में भर लिए.
संजय को अपनी सास और सखी के स्वाद में कोई फरक नही लगा और वो उसके मम्मे चूस्ते हुए और उसकी चूत बजाते हुए बड़बड़ाया. '' भैया....सखी इसकी ही औलाआद. इसके निपल का स्वाद और सखी का एक जैसा है.
''हां संजय सही कहा ...सखी के मम्मे...उफफफफ्फ़.....उम्म्म्म... मुझे लगता है कि यह वाकई में सखी की मा है.....उफ़फ्फ़ वैसे भी चुदाई में भी उससे नही डरती.
फिर वो चाहे तेरा हो या मेरा या बाबूजी का.'' सुजीत झूम रहा था. उसकी हवस सॉफ थी. उसका एक ही मकसद था. सरला की गांद में घुसा.
देखते ही देखते सरला फुल मस्ती में आ गई. फहुच्छ फुच की आवाज़ के साथ सब झूमने लगे. विदिन ए फ्यू मिनिट्स..सरला एक जवान लड़की की तरह झूमने लगी. सनजी की चुदाई अब चरम सीमा पे थी. रह रह के वो झटके बढ़ा रहा था. सरला की चूत रस से भीगी हुई उसके हर हमले का मज़ा ले रही थी.
''ऊओह जाअँ जानन्न.....दोपहर से तेरी इस टाइट गांद की हसरत थी और अब पूरी हो गई ...जाअंन मैं निकाल दूं तेरी गांद में...ऊओह संजया अब तू संभाल मेरा तो ह्म गायाअ..ऊऊऊहह आअरर्रघह.....'''' सुजीत झरने लगा और उसका बदन झटके खाने लगा.
गंद में उबलते हुए लंड का असर सरला पे भी पूरा पूरा हुआ और वो भी मादक आवाज़ें निकालते हुए संजय के लंड पे झरने लगी..उसकी सिसकियाँ और आवाज़ें बहुत तेज़ थी. वैसे भी पूरी चुदाई में उसने कोई ख़ास उँची आवाज़ नही निकाली थी और अब ये सब उसकी सहन के परे था. सहन शक्ति ख़तम होते ही सरला ज़ोर से गुर्र्रई और चटपटाते हुए झरने लगी. संजय उसके मम्मे चूस्ते हुए सब महसूस करता रहा और फिर उसने अपना लंड चूत से निकाला और ज़ोर ज़ोर से मूठ मारने लगा. 2 मीं में ही उसने अपने लंड की बौछार सीधे सरला के मोटे चूचो और पेट पे कर दी. फिर मूठ मारते हुए ही दूसरे हाथ से पेट पे पड़ा वीर्य उंगली से उठाया और सरला के होठों पे रगड़ना शुरू कर दिया. करवा चौथ के व्रत के बाद जैसे एक शादी शुदा औरत पानी पीते हुए होठों को जीभ से गीला करती है ठीक उसी तरह से सरला ने भी किया और फिर देखते ही देखते संजय की उंगलिओ में लगाते हुए वीर्य को पीती रही. करीब 10 - 12 बार वीर्य चूस लेने के बाद सरला ने लंड को मुठियाते हुए फिर मूह में भर लिया और नीचे से उपर तक चूस्ति रही.