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खानदान में रंगरेलियाँ

अब राधा ने ताश का छठा हाथ बनाया और छठा गेम शुरू हुआ।

इस बार, मैं फिर जीत गया.!

मैं – मैं जीत गया… बोलो, तुम को क्या डेयर दूं…

राधा – कुछ भी दे दो… मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ… पूरी नंगी तो हूँ ही… अब कुछ भी करवा लो…

मैं – हुम्म्म: सोच रहा हूँ क्या करूँ… क्या डेयर दूँ…

राधा – तुम भी पूरे नंगे हो और मैं भी पूरी नंगी हूँ… चाहो तो, अपना लण्ड मुझ से चूसवा लो… मुझे भी मज़ा आएगा…

मैं – हाँ, आ जाओ ना… चूस लो ना, मेरा लण्ड… ये कब से बेताब है… और राधा सोफे से उठी और मेरे सोफे के सामने, अपने घुटने पर बैठ कर मेरी कमर पकड़ कर मेरा लण्ड चूसने लगी।

थोड़ी देर चूसने के बाद, राधा ने लण्ड मुंह से निकाला.!

राधा – चलो ना, अब बेड पर चलते हैं… गेम बंद करो और मुझे बेड पर ले चलो… कब से मैं तुम्हारे लण्ड की भूखी हूँ… प्लीज़, मुझे अब बेड पे ले जा के चोद दो ना, विजय…

मैं – मैं भी कब से, तुम को चोदना चाहता हूँ… चलो उठो… बेड पर चलते हैं…

मैंने राधा को उठाया और हम दोनों, बेड पर आ गए।

मैं राधा के बूब्स चूसने लगा और वो बेड पर मचलने लगी।

थोड़ी देर बाद, मैं उसकी चूत चाटने लगा।

राधा – उंहमहम: आअहह… विजय, बहुत मज़ा आ रहा है… जीभ अंदर डाल के, लीक करो ना…

और मैं उसकी चूत के अंदर, जीभ फिराने लगा और वो और ज़ोर से बेड पर तड़पने लगी।

राधा – आअहह… मैं एक दम तैयार हूँ, अब और इंतेज़ार नहीं होता… प्लीज़, अब लण्ड डालो ना…

फिर, मैंने राधा को सीधा बेड पर लिटाया और उसके उपर चढ़ गया।

अपना लण्ड हाथ में पकड़ कर, एक ही झटके में पूरा अंदर घुसा दिया।

राधा के मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी और मैं उसे धीरे धीरे लण्ड अंदर बाहर करते हुए, चोदने लगा।

धीरे धीरे, मैं अपनी स्पीड बड़ा रहा था और साथ ही राधा की सिसकारियाँ भी तेज़ होती जा रही थी.!

राधा – आ आ अहह… आ आ आह… ओह… ऐसे ही, ज़ोर से… चोदो… मेरी ले लो… मैं रंडी हूँ… मेरी मार लो… आ आ हह… मस्त लण्ड है तेरा… कुतिया की तरह, चोद मुझे… आ आहह… फाड़ डाल, मेरी चूत… मैं झड़ रही हूँ… करते रहो… ऐसे ही… आ आ आ आ आ आ आ आ ह ह ह ह ह ह ह ह…

मैं – साली, रंडी… कुतिया… ले और ले… आह अहहा… और फिर हम दोनों ने एक साथ चरम आनंद का अनुभव किया और मैंने राधा की चूत के अंदर ही निकाल दिया।

 
चुदाई के बाद, राधा ने विस्की का थर्ड पेग बनाया और हम दोनों सोफे पर नंगे ही, आमने सामने बैठ कर, विस्की सीप करने लगे।

राधा – बहुत मज़ा आया, आज चुदाई में… मैं कब से, तुम्हारे लण्ड की भूखी थी… आज तुम्हारे लण्ड का मज़ा मिल ही गया… अब हम दोनों जब तक यहाँ हैं, रोज़ चुदाई करेंगें और खूब ऐश करेंगें… बड़ा मज़ा आएगा…

मैं – हाँ, सच में मज़ा आएगा… मैं भी कब से, तुम को चोदने के लिए तड़प रहा था… जब भी तुम को देखता था, लण्ड टाइट हो जाता था…

राधा – काश, मुझे कभी नमन का लण्ड भी मिल जाए… मुझे उसका भी चाहिए और क्या मस्त बॉडी है, उसकी…

मैं – रश्मि भी, कोई कम नहीं है…

राधा – हाँ, रश्मि भी कोई कम रंडी नहीं है… उसकी आँखों में भी मैंने तुम्हारे और राहुल के लण्ड के लिए, भूख देखी है… राहुल और रश्मि, पिछले 2 हफ्ते घर पे अकेले थे… मुझे पूरा यकीन है की रश्मि ने राहुल को सिड्यूस कर के, उसका लण्ड ले लिया होगा और अब डॉली भी वहाँ पहुँच चुकी है… राहुल ने कई बार, मुझे चोदते हुए डॉली का नाम लिया है… राहुल डॉली की भी चूत मारना चाहते हैं… हो सकता है, रश्मि उनकी मदद कर दे तो तीनों मिल के, खूब चुदाई कर रहे होंगे…

मैं – मुझे तुम तो मिल ही गई हो… डॉली, अगर पापा और नमन से चुदती है तो मुझे कोई प्राब्लम नहीं… पर, मुझे रश्मि की भी चाहिए… उसकी स्कर्ट में मोटी मोटी मस्त जांघें और बड़े बड़े बूब्स देख कर, मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है…

राधा – ठीक है, आगे जब भी मौका लगेगा, मैं तुम को रश्मि की दिलवाने की कोशिश करूँगी… पर तुम भी कोशिश करना की मुझे कभी नमन के साथ अकेले रहने का मौका मिले… सिड्यूस तो, मैं उसे खुद ही कर लूँगी…

मैं – ठीक है… वादा रहा…

जब मैं ऊटी से सिंगापुर के लिए निकला, उसके एक दिन पहले डॉली ऊटी से घर आ गई थी क्यों की उन दिनों सिर्फ़ पापा ऑफीस जा रहे थे.! इसलिए, रश्मि फ्री थी और रश्मि डॉली को लेने एयरपोर्ट आ गई थी.!

रश्मि ने एयरपोर्ट से डॉली को लिया और दोनों घर के लिए निकले, गाड़ी में।

रश्मि – तो कैसा रहा, तेरा हनिमून विजय के साथ… 2 हफ्ते, बहुत मज़ा किया होगा, तुम दोनों ने ऊटी में…

डॉली – अरे नहीं, हनिमून कहाँ यार… शादी के बाद में, ये मेरा और विजय का चौथा विकेशन था… अब वो पहले हनिमून जैसी बात अब कहाँ रही… पर, हाँ विकेशन में मज़ा बहुत आया…

रश्मि – तो क्या तू विजय के लण्ड से संतुष्ट नहीं है… ज़यादा चोदता नहीं क्या, तुझे वो…

डॉली – अरे!! नहीं नहीं… ऐसी बात नहीं है… विजय, बहुत पक्का और असली मर्द है और उसका लण्ड भी लंबा और मोटा है… फाड़ के रख देता है, मेरी… विकेशन पे एक दिन में, कई कई बार ले लेता है… मेरा मतलब था की फर्स्ट हनिमून में जो नयापन का मज़ा था, वो अब नहीं बचा क्यों की वही सब कुछ हम कई बार कर चुके हैं…

रश्मि – तो तू पटा ले ना, किसी को… विजय के लण्ड के मज़े के साथ साथ, तुझे नयापन भी मिल जायगा…

डॉली – हाँ यार!! ऐसा ही कुछ सोच रही हूँ… देखती हूँ… कुछ ना कुछ तो करूँगी…

रश्मि – मेरे पास एक आइडिया है…

डॉली – बता…

रश्मि – मुझे भी विजय पसंद है… तू मेरे लिए, मुझे तेरे पति विजय को पाटने में मेरी मदद कर दियो और तू मेरे पति नमन को पटा ले… मैं तेरी मदद कर दूँगी…

डॉली – वाउ!! एक्सचेंज ऑफर… हाहहाहा… तुम सीरीयस हो… कहीं तू मज़ाक तो नहीं कर रही…

रश्मि – अरे, नहीं यार… मेरा भी हाल, कुछ तेरी तरह ही है… कुछ नयापन हो लाइफ में, तो मज़ा आ जायगा…

डॉली – चल, बाद में सोचते हैं इस बारे में… अभी आज कल तो नमन मॉरिशस में है और विजय सिंगापुर में और यहाँ पर तो सिर्फ़ ससुर जी ही हैं।

दोनों घर पहुँचते हैं और अपने अपने रूम में, चले जाते हैं।

 
डॉली नहा के फ्रेश हो जाती है और सो जाती है।

रश्मि भी अपने रूम में, रेस्ट करने लगती है।

शाम को, पापा ऑफीस से घर आते हैं।

रश्मि, दरवाज़ा खोलती है।

पापा अंदर आते ही, रश्मि को पकड़ कर किस करने लगते हैं, तो रश्मि उनको दूर हटाते हुए बोलती है की अभी नहीं… डॉली घर पर है… 8 बजे, डिन्नर पर मिलते हैं… फिर रात में, डॉली के सोने के बाद… मैं आप के कमरे में आ जाउंगी…

रात 8 बजे, रश्मि पापा और डॉली तीनों डिन्नर टेबल पर थे।

रश्मि ने काली स्कर्ट और काला टॉप पहना था।

टॉप में से उसकी क्लीवेज मस्त लग रही थी, जो किसी को भी पागल बना दे।

डॉली ने अपने सिग्नेचर स्टाइल में, पर्पल कलर की सादी और पारदर्शी साड़ी, मिलते रंग के बिकनी ब्लाउज के साथ पहनी थी।

साड़ी उसने नेवेल से, बहुत नीचे बँधी थी।

पापा उसकी नेवेल, क्लीवेज और पीठ ललचाई नज़रों से बस घूरे जा रहे थे।

पापा सिर्फ़ अपने गाउन में थे और उन्होने, अंदर कुछ नहीं पहना था।

रश्मि – हमारा डिन्नर टाइम तो हो गया पर आज कुछ ज़यादा भूख नहीं है…

डॉली – हाँ, मैंने भी लेट खाया था फ्लाइट में…

ससुरजी – मेरा तो एक दो ड्रिंक्स लेने का मन है, अभी…

रश्मि – तो चलिए, फिर हम तीनों लिविंग रूम में बार के पास चलते हैं और कुछ देर वहीं बैठ के 2 या 3 ड्रिंक्स लेते हैं… पहले, डॉली तुम पिओगी ना…

डॉली – ओह!! हाँ हाँ क्यूँ नहीं… चलो…

रश्मि और डॉली, लिविंग रूम में जा के एक 3 सीटर सोफे पे जा के आस पास बैठ गई और पापा बार के सामने खड़े हो कर ड्रिंक्स बनाने लगे।

ससुरजी – डॉली, तुम क्या लोगी…

डॉली – पापा, मैं वाइट वाइन…

ससुरजी – और रश्मि, तुम…

रश्मि – मुझे तो कुछ भी चलेगा… आप जो अपने लिए बना रहे हो, वही मुझे भी डाल डो… (पापा को देख कर, हंसते हुए)

ससुरजी – मैं विस्की ले रहा हूँ… विस्की चलेगी…

रश्मि – हाँ हाँ… क्यूँ नहीं…

पापा ने रश्मि और डॉली को उनका ड्रिंक दिया और अपना ड्रिंक ले के, उनके सामने वाले सोफे पे बैठ गई।

 


तीनों, अपना अपना ड्रिंक सीप कर रहे थे।

अपना ड्रिंक सीप करते हुए पापा, फिर डॉली के अधनंगे जिस्म को निहारने लगे।

रश्मि ने पापा को डॉली की तरफ घूरते हुए देखा तो उसने चुपके से डॉली का आँचल पकड़ कर, उसकी साड़ी का पल्ला धीरे धीरे खींच कर ढलका दिया।

जब डॉली का पल्ला ढलका तो उसने रश्मि की ये हरकत नोटीस की और डॉली ने रश्मि की तरफ देखा तो रश्मि ने डॉली को चुपके से आँख मार कर, इशारा किया और पापा की तरफ देखा।

डॉली ने भी रश्मि की नज़रों का पीछा करते हुए, पापा की तरफ देखा तो सारी बात समझ गई।

पापा को उसने, अपनी तरफ घूरता पाया और उनके गाउन में लण्ड का काफ़ी उँचा टेंट भी बन रहा था।

डॉली ने वापस, रश्मि की तरफ देखा।

दोनों की नज़रें मिली और दोनों के होठों पर स्माइल थी।

डॉली, समझ गई थी की पापा की सिड्यूस करना है।

अब डॉली के सिने से, साड़ी का आँचल ढलाक चुका था।

वो, थोड़ा सीधा हो कर बैठ गईं।

पापा अपना ड्रिंक सीप करते हुए, डॉली को देख रहे थे।

डॉली को देखते हुए और ड्रिंक सीप करते हुए अंजाने में, पापा का दूसरा हाथ उनके लण्ड की तरफ चला गया और वो अपना खड़ा लण्ड गाउन के ऊपर से सहलाने लगे।

इस हालात पे, रश्मि चुटकी लेते हुए बोली।

रश्मि – क्या पापा, जब से डॉली आई है… आप तो मेरी तरफ देख भी नहीं रहे…

ससुरजी (सकपका कर लण्ड से, हाथ हटाते हुए) – अरे नहीं, रश्मि ऐसी कोई बात नहीं है…

रश्मि – अच्छा, आप को मेरे और डॉली में से कौन ज़यादा पसंद है…

ससुरजी – तुम दोनों ही, मुझे अज़ीज़ हो…

पहली ड्रिंक ख़तम हो गई थी, पापा सोफे से उठ कर खड़े हुए।

ससुरजी – लाओ, अपना अपना ग्लास दो… मैं अगला ड्रिंक बनाता हूँ…

ये कहते हुए, पापा पहले रश्मि की तरफ बड़े और उसका ग्लास ले कर डॉली की तरफ मुड़े।

डॉली के सामने झुक कर, पापा ने उसके बिकनी ब्लाउज की डीप क्लीवेज में अंदर तक झाँकते हुए, उसे से ग्लास लिया।

डॉली ने अभी भी, अपना ढलका हुआ आँचल नहीं उठाया था और उसका उठाने का कोई इरादा भी नहीं था.!

पापा ने दोनों को एक एक ड्रिंक और बनाया और पहले, रश्मि का ड्रिंक उसकी तरफ बड़ाया।

फिर, पापा डॉली के पास जा कर थोड़ा झुक कर फिर से डॉली के बिकनी ब्लाउज की डीप क्लीवेज में, अंदर तक झाँकते हुए उसे ड्रिंक देने लगे।

 
डॉली – अरे!! कहाँ देख रहे हो, पापा… यहाँ देखो, नहीं तो ड्रिंक गिर जाएगी…

ससुरजी – ओह सॉरी… ये लो तुम्हारे ड्रिंक…

डॉली (ड्रिंक लेते हुए) – धन्यवाद पापा…

पापा, वापस अपने सोफे पे जा कर बैठ गये।

तीनों, अपना दूसरा ड्रिंक सीप करने लगे।

पापा अभी भी, डॉली की निहार रहे थे।

डॉली – पापा, आज क्या बात है… आज तो आप, मुझे कुछ ज़यादा ही प्यार से देख रहे हो…

रश्मि – हाँ, मुझे भी जलन हो रही है…

ससुरजी – ऐसा कुछ नहीं है, बेटा…

डॉली – पापा, आप उतनी दूर वहाँ क्यों बैठे हो… आप भी इसी सोफे पे आ जाओ ना… जो देखना है, पास से देख लेना… अच्छा लगेगा…

ससुरजी – डॉली, तुम को कुछ बुरा तो नहीं लगा…

डॉली – नहीं नहीं… बिल्कुल भी नहीं… आप आ जाओ ना, यहाँ…

ससुरजी – ठीक है… फिर, मैं वहीं आता हूँ…

और पापा उसी थ्री सीटर सोफे पर रश्मि और डॉली के बीच में बैठ गये और पापा फिर चोरी चोरी, डॉली का जिस्म देखने लगे।

रश्मि – पापा, मैं भी तो सेक्सी हूँ और मैंने भी कम कपड़े पहने है… लेकिन, आप तो बस, डॉली को ही देखे जा रहे हो…

डॉली – हा हा हा…

ससुरजी – तुम दोनों ही बहुत सेक्सी हो… पर डॉली, आज इतने दिनों बाद आई है तो…

रश्मि – तो क्या आप, आज डॉली को पूरी नंगी देखना चाहते हो…

डॉली – पापा, आप मुझे नंगी देखना चाहते हो तो बता दो… मुझे कोई प्राब्लम नहीं है… मैं अभी आप के सामने नंगी हो जाउंगी.!

रश्मि – चलो, एक काम करते हैं… हम सभी नंगे हो जाते हैं… मज़ा आएगा…

डॉली – चलो, तो फिर ठीक है…

रश्मि ने फिर पापा के जवाब का इंतेज़ार नहीं किया और उनका गाउन खोल कर, कंधों पर से खिसका कर उतार कर एक तरफ फेंक दिया।

पापा, अब पूरे नंगे हो गये थे और अपना लण्ड पकड़ कर बैठे थे और हिलाते हुए अभी भी डॉली के बूब्स देख रहे थे।

पापा का गाउन उतारने के बाद, रश्मि ने अपना टॉप स्कर्ट और पैंटी भी उतार दी और पलक झपकते ही, पूरी नंगी हो गई और पापा के सामने सेंटर टेबल पर खड़ी हो कर, पोज़ कर कर के पापा को दिखाने लगी।

पापा, थोड़ी देर देखते रहे और अपना लण्ड पकड़ कर हिलाते रहे।

 
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