• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

गदरायी मदमस्त जवानियाँ complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
S

StoryPublisher

Guest
गदरायी मदमस्त जवानियाँ

मेरा नाम राज हैं और मैं २८ वर्ष का हट्टा कट्टा जवान हूँ, रंग सांवला और दिखने में भी ठीकठाक हूँ. मैं मुंबई शहर के अँधेरी इलाके में एक निजी बैंक में अच्छी नौकरी पर हूँ. तीन साल पहले मेरी शादी २४ साल की सुन्दर सांवले रंग की प्यारी सी लड़की सुनीता के साथ हुई.

सुनीता एक छोटे गांव के गरीब और पुराने विचारोंवाले घर से आयी थी इसलिए उसे चुदाई के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं था. दस दिन के हमारे हनीमून पर मैंने उसे चुदाई के सारे पाठ पढ़ा दिए थे. उस दौरान मेरा लंड चूसना , सिक्स्टीनाइन करना , घोड़ी बनकर चुदाई, मेरा उसकी चूत चाटना, ब्लू फिल्म देखकर उत्तेजित होना और फिर चुदाई करना सुनीता ने सब अच्छे से एन्जॉय करना सीख लिया. शुरू शुरू में उसे मेरे वीर्य की एक बूँद चाटना भी अच्छा नहीं लगता था. जब उसने देखा की मैं उसकी योनि से बहता हुआ कामरस पूरी तरह मजे से चाट लेता हूँ तबसे उसने मेरे लंड के वीर्यको चाटना, पीना और निगल जाना शुरू कर दिया.

उसकी गदरायी हुई मदमस्त जवानी का मैं एकदम कायल हूँ और वो भी मुझे बिस्तर में पूरा मज़ा देती हैं . कुछ पति सिर्फ अपने सुख के बारे में ही सोंचते हैं मगर मैं जोरदार चुदाई के साथ साथ सुनीता की प्यारी और मीठी चुत का दाना चाटकर उसे बहुत आनंद दिया करता हूँ. चुत चाटने के बाद तो वह एकदम मदमस्त हो जाती हैं.

जैसे कपडेमें लपेटकर रसगुल्ले खाने का का मजा नहीं आता वैसे ही कंडोम लगाकर चुदाई करने में कोई मजा नहीं आता. जैसे ही हमारी मंगनी हुई, अगले ही दिन मैंने उसे कॉपर-टी लगवाने को कहा. जब वो शादीकी खरीदारी के लिए मुंबई आयी तभी उसने कॉपर-टी लगवा ली. इसलिए हम एकदम बिनधास्त होकर बिना कंडोम के दिन रात चुदाई कर लेते हैं.

हम एक दूसरे के साथ खुल्लम खुल्ला सेक्सी बाते भी करते है. हम जब सिक्स्टीनाइन में एक दूजे को चाट और चूस कर मज़ा देते हैं तब मैं उसकी चुत का सारा पानी बड़े प्यार से चाटता हूँ और वह भी मेरा गाढ़ा वीर्य ख़ुशी ख़ुशी से निगल जाती हैं. हम सेक्सी मैगज़ीन पढ़कर और कभी कभी ब्लू फिल्में देखकर पूरी रात चुदाई करते हैं. मेरे साढ़े छे इंच के लंड से मैं मेरी सुनीता को बहुत मस्ती से चोदता हूँ और वह भी अपनी पतली कमर और मस्त गांड उठा उठा कर मस्त चुदवाती हैं. उसके ३८ इंच के भरे हुए और कठोर वक्ष सहलाने में, मसलने में और उसके निप्पल चूसने में उसे भी बड़ा मजा आता हैं. इतने बड़े होने के बावजूद भी उसके वक्ष बिलकुल उन्नत रहते है. चुदवाने के समय कभी कभी मैं उसकी गांड की छेद में ऊँगली कर उसे और भी मस्त कर देता हूँ. मगर आज तक मैं उसकी गांड को चोदने में सफल नहीं रहा क्योंकि सुनीता को गांड की चुदाई पसंद नहीं हैं. इसलिए मैंने भी कभी इस मामले में जबरदस्ती नहीं की.

समय के साथ चुदाई में आयी हुई बोरियत को दूर करेने के लिए हमने कालोनी के दुसरे जोडियोंके बारे में सेक्सी बाते करना शुरू कर दिया. कोई एकदम माल लड़की दिखी तो रात को उसके बारे में बाते करते हुए चुदाई होती हैं और कभी कोई बाक़ा जवान मेरी सुनीता रानी को पसंद आया तो वह उसके बारे में गन्दी गन्दी बाते करते हुए मुझसे चुदती हैं.

"वो शाम को पार्क में दिखी नीले टॉप वाली लड़की की चूचियां कितनी मस्त थी न डार्लिंग?"

"हां मेरे राजा, उसके निप्पल चूसने में तुम्हे बड़ा मज़ा आयेगा."

"उसके साथ जो लड़का था वो तुम्हे बहुत अच्छे से चोदेगा सुनीता रानी!"

"आह, एक ही बिस्तर पर चारों चुदेँगे तो क्या मज़ा आएगा, हैं न?"

सिर्फ मैं किसी लड़की के साथ या सिर्फ वो किसी आदमी के साथ चक्कर चलाकर सम्भोग का आनंद नहीं लेना चाहते थे. हम ऐसा शादीशुदा जोड़ा (कपल) खोजने लगे जिनके साथ मौज मस्ती की जाए और बात बन गयी तो आगे चलकर अदलाबदली करते हुए भरपूर चुदाई भी हो जाए. मगर ऐसा कोई जोड़ा हमें पसंद नहीं आ रहा था. हमारे पडोसी तो बिलकुल ही हमारी पसंद के विपरीत थे. उनका तबादला हुआ और वह देहली चले गए. कुछ दिनों तक तो बाजू वाला घर खाली रहा.

रविवार के दिन एक सुबह के समय बड़ी सी ट्रक हमारे बिल्डिंग के सामने आकर खड़ी हो गयी. उसमे से ड्राइवर के साथ एक हसीन २५-२६ वर्षीय युवक बाहर आया. यही हमारे नए पडोसी थे, उसका नाम नीरज था। उसका रंग काफी गोरा था, चौड़ा सीना और लगभग छे फ़ीट की ऊंचाई होगी. उसने बताया की उसकी पत्नी निकिता अपने मइके गयी थी और कुछ दिनोंके बाद आने वाली थी. उनका फर्नीचर बहुत ज्यादा था. मैंने उससे बातचीत की और फिर सामान लगवाने के लिए मजदूरोंका बंदोबस्त किया. तबतक सुनीता ने बढ़िया सा खाना बनाया और हम तीनों ने साथ मिलकर भोजन किया. वह बड़ा ही मिलनसार और अच्छे स्वभाव का लग रहा था.

सुनीता ने आँखों आँखों में मुझे बताया की नीरज उसे पसंद आया है. मैं भी मन ही मन में सोच रहा था की इसकी पत्नी भी सुन्दर और सेक्सी हो तो इस नए पडोसी जोड़े के साथ मौज मस्ती करने के बारे में सोचा जा सकता हैं.

"नीरज, शाम के भोजन के लिए भी हमारे घर पर ही आ जाओ," मैंने कहा.

नीरज ने कहा, "नहीं यार राज, हम तीनो मिलकर किसी अच्छे से रेस्टारेंट में चले जाएंगे।"
 
जाहिर था की वो सुनीता को और कष्ट नहीं देना चाहता. सुनीता रानी तो एकदम खुश हो गयी. उसने नीले रंग की एकदम टाइट जीन्स और लाल रंग का स्लीवलेस टॉप पहना. उसका टॉप काफी लो कट था और उनमेसे उसके भरे हुए वक्ष उभर कर दिखाई दे रहे थे. रेस्टारेंट घर से थोड़ा दूर था इसलिए हम तीनो मेरी मोटरसाइकिल पर चल दिए. चलानेवाला मैं , मेरे पीछे नीरज और उसके पीछे सुनीता रानी. तीन सवारी होने के कारण सबको नजदीक एकदम चिपक कर बैठना पड़ गया और सुनीता के मम्मे नीरज की पीठ पर गढ़ गए.

डिनर के समय भी वह जान बुझ कर नीरज के सामने बैठ गयी और नीरज उसके उभारोंको छुप छुप कर देख रहा था।

"राज और सुनीता, यह देखो मेरी पत्नी की फोटो," कहते हुए उसने अपने बटवे में से निकिता की दो-तीन फोटो हमें दिखाई.

निकिता तो बहुत ही सुन्दर गोरी और प्यारी लग रही थी. उसके भरे हुए स्तनों का आकार भी फोटो में साफ़ दिखाई दे रहा था.

उसके फोटो देखते ही मैं और सुनीता ने आँखों आँखों में कह दिया की अब किसी भी हाल पर इस दम्पति को पटाकर अदलाबदली की चुदाई का मजा लेना ही चाहिए . रेस्टारेंट से वापिस आने के समय मैंने जान बूझ के नीरज को सुनीता के और करीब लाने की तरकीब चलाई.

मैंने कहा, "नीरज, इतना अच्छा खाना खानेके बाद हम तीनों एक मोटरसाइकिल पर घर तक वापिस नहीं जा सकते. आप को तो घर का रास्ता मालूम नहीं इसलिए आप और सुनीता ऑटो रिक्शा में बैठ कर घर आ जाओ. मैं अकेला ही मोटरसाइकिल पर निकलता हूँ."

कोई भी मर्द मेरी सुन्दर और सेक्सी बीवी के साथ का मजा कैसे छोड़ देता?

उसने फट से कहा, "हाँ, राज बात तो आप की सच हैं."

हम दोनोने सुनीता की तरफ देखा. उसके तो मन ही मन लड्डू फूट रहे थे. मैं उन दोनोको एक ऑटो रिक्शा में बिठाकर घर चला आया.

जब तीनों भी घर पर मिले तब नीरज बोला, "राज, आप दोनोने मेरी इतनी सहायता पूरे अपनेपन से की हैं, जैसे की हम आज नहीं, कई सालोंके मित्र हैं.

मैं एक छोटे शहर से मुंबई आया हूँ, मुझे थोड़ा डर लग रहा था. अब ऐसा लगता हैं की मैं और निकिता आप दोनों के सबसे अच्छे दोस्त बन कर रहेंगे. आप कितने अच्छे हो और ख़ास कर सुनीता जी ने तो मेरा बहुत अच्छा ख़याल रखा हैं. आज से आप लोग हमारे लिए सिर्फ पडोसी नहीं बल्कि एकदम अपने घरवाले है।"

इसके बाद वह अपने घर चला गया.

मैंने सुनीता को बाहों में भरते हुए पूंछा, "सुनीता रानी, ऑटो रिक्शा का सफर कैसा रहा?"

उसने कहा, " बस हम दोनों चिपक चिपक कर बैठे थे और निकिता के बारे में बाते कर रहे थे."

मुझे लगा चलो अच्छा हैं, नीरज अच्छा सभ्यतापूर्वक और समझदार इंसान हैं. हम दोनों ने साथ में शावर किया और बैडरूम में घुस गए.

रात में मैं जब सुनीता के मम्मे चूस रहा था तब सुनीता ने कहा, "राज, लगता हैं की अपनी सेक्सुअल फैंटसी पूरी होने की उम्मीद हैं. नीरज तो बहुत ही हैंडसम हैं और फोटो देख कर ऐसा लगता हैं की उसकी पत्नी निकिता बिलकुल तुम्हारी ड्रीम गर्ल हैं, गोरी, सुन्दर और एकदम सेक्सी।"

मैंने कहा, "हाँ मेरी जान, मुझे भी ऐसा ही लग रहा हैं. तुम नीरज को अच्छे से अपनी सुंदरता से लुभा दो. फिर वह दोनों भी हम दोनों के साथ वासना का खेल खेलने के लिए तैयार हो जाएंगे।"

उस रात को मैं सुनीता को निकिता के नाम से पुकारता रहा और वह मुझे नीरज के नाम से! हमने पूरी रात में चार बार चुदाई का लुत्फ़ उठाया. सुनीता इतनी ज्यादा एक्साइट हो गयी की जब मैं उसे डॉगी पोज़ में चोद रहा था तब उसने खुद अपने मुंहसे कहा, "नीरज डार्लिंग, चुदाई के साथ साथ तुम्हारी ऊँगली भी मेरी गांड में अंदर बाहर करो."

मैं भी निकिता का नाम लेकर उसको चोदता रहा और उसकी गांड में ऊँगली करता रहा. नीरज के नामसे सुनीता काफी उत्तेजित हुई थी. आज पहली बार हम दोनों किसी कपल के लेकर जबरदस्त फैंटसी सेक्स कर रहे थे.

अचानक सुनीता चढ़ गई मेरे लंड के ऊपर और जोर जोर से चिल्लाने लगी, "उम्म्ह... अहह... हय... याह..." और जोर जोर से चुदाई करने लगी.

मैं भी नीचे से धक्के लगा रहा था और फिर आवेश में आकर मैंने सुनीता को पागलपने की हद जैसा नीचे पलटा और लगा चोदने!

"हाय मेरी निकिता रानी तेरी गोरी गोरी जवानी चोदने में क्या मजा आ रहा हैं. आह आह," मैं पागलोंकी तरह उसके वक्ष मसलते हुए कहता गया.

जैसे की नए पार्टनर के साथ चुदने के स्वप्न का वहशीपन सा छा रहा था हम दोनों पर. अब मैंने सुनीता की गांड के नीचे एक तकिया लगा दिया और उसकी चूत ऊपर उठ गई. ऐसी भरपूर चुदाई हो रही थी.

सुनीता बोल रही थी, "मेरे हैंडसम नीरज डार्लिंग, आ मेरी इस साफ़ और मुलायम चूत को अपने मोटे लौड़े से चोद कर पूरा खोल डाल."

इस घमासान लंड - चुत की लड़ाई में न सुनीता थक रही थी और मैं भी अपनी लंड की पिचकारी छोड़ने को तैयार न था.

"निकिता डार्लिंग तेरी चुत, गोरी जाँघे, भरी हुई गांड और बड़े बड़े बूब्स को सारा खा जानेवाला हूँ," मैं उसे चोदते हुए कह रहा था.

पांच मिनट के बाद अब मेरे लंड से वीर्य छुटने को तैयार था. मैंने सुनीता को नीचे लिटाया और उसकी मांसल टांग ऊपर अपने कंधे पर रखी और पूरा लौड़ा अंदर करके आखरी के चार जोरदार धक्के लगाये और सारा वीर्य उसके मुँह में डाल दिया.

उस रात को मदहोशी की तरह हम दोनों एक दुसरे को नीरज और निकिता के बारे सोचकर प्यार करते रहे. कई महीनोंके बाद ऐसी धुआंधार चुदाई हुई थी.

 
जबतक निकिता उसके मैके से नहीं आयी तबतक रोज शाम का भोजन नीरज ने हमारे साथ ही किया. सुनीता रानी ने नीरज को उसकी पसंद के अनेक व्यंजन बनाकर खिलाये. भोजन परोसते समय सुनीता कई बार अपना पल्लू गिराकर ध्यान से अपने सुडौल मम्मोंका उसे दर्शन कराती रही. इन दो हफ़्तों में हम तीनो एकदम ख़ास दोस्त बन गए. मेरा हंसी मजाक करना और एकदम साफ़ दिल से रहना उसे भी अच्छा लगा होगा. अगर मुझे उसकी बीवी को पटाना हैं तो मुझे पहले नीरज को भी तो इम्प्रेस करना था ना!

सुनीता के भरे हुए वक्ष ज्यादा समय तक देखने के लिए वो कुछ न कुछ बहाना रहता और मैं भी उसे हमारे घर पर देर रात तक रुकने के लिए बार बार मजबूर करता था. रोज रात को वो जब हमारे दरवाजे से निकलता तब मैं उससे हाथ मिलाता और सुनीता उसे बड़े प्यारसे गले लगाकर अपने बूब्स उसकी चौड़ी छाती पर दबाकर बाय बाय करती रहती. मुझे लगता हैं हर रात को उसने सुनीता रानी के नाम की मूंठ जरूर मारी होगी.

जिस दिन निकिता आने वाली थी उस दिन हम तीनो भी उसे लेने बोरीबन्दर स्टेशन पर गए. पिछले दिनोंमे निकिता को नीरज ने हम दोनोके बारेमें काफी कुछ बताया होगा।

जब निकिता प्लेटफार्म पर उतरी तो जन्नत की हूर लग रही थी. सचमुच नीरज बड़ा ही किस्मतवाला था की उसे इतनी सुन्दर और मादक पत्नी मिली थी. उसने नीरज को गले लगाया और दोनों एकदम जबरदस्त आलिंगन में जुड़ गए. नीरज ने एक हल्का सा चुम्बन भी उसके गाल पर भी जुड़ दिया.

फिर निकिता मेरी सुनीता रानी के गले मिली.

"पिछले दो हफ्तोंसे नीरज के मुँह से तुम्हारी बहुत तारीफे सुन रही हूँ," निकिता ने कहा.

"अरे, मैं तो बस एकदम सीधी साधी लड़की हूँ, नीरज ही इतने अच्छे हैं की उन्हें हर कोई अच्छा लगता हैं. अब तुम आ गयी हो तो हम दोनों एकदम प्यारी सहेलिया बनकर रहेंगे," सुनीता हंसकर बोली.

लग रहा था की निकिता सचमुच बहुत खुश थी की उसे सुनीता जैसी अच्छी सहेली एकदम पड़ोस में ही मिल गयी नहीं तो पूरा दिन वह कैसे बिताती. जब दोनों सेक्सी लड़किया एक दुसरे से अलग हुई तब आखिर में निकिता ने मुझसे हाथ मिलाया. वह, क्या मस्त और मुलायम हाथ था उसका!

"चलो, आखिर आप से भी मुलाक़ात हो ही गयी राज। नीरज ने आप के बारे में भी बहुत सारी बाते कही हैं," निकिता ने कहा.

मैंने हँसते हँसते कहा, "अच्छा! उम्मीद हैं की कमसे काम थोड़ी तो अच्छी बाते कही होंगी। और एक बात, आज से मेरा कैमरे के ऊपर से विश्वास पूरी तरह से उठ गया हैं."

निकिता ने पूंछा, "आप ऐसा क्यों कह रहे हैं?"

मैंने कहा, "फोटो में देखा तो आप एक सुन्दर लड़की दिख रही थी मगर आज वास्तविक में देखा तो आप तो जैसे स्वर्ग की अप्सरा हो."

अपनी अचानक इतनी प्रशंसा सुनकर निकिता एकदमसे झैंप गयी.

नीरज हँसते हुए बोला, "अरे यार, राज को तो ऐसे ही मजाक करने की आदत हैं. मैं पिछले कई दिनों से देख रहा हूँ."

हम चारो हंस दिए और सामान लेकर लोकल प्लेटफार्म की और चल पड़े. मैंने अपने बलिष्ठ हांथोसे दो बड़े बड़े सूटकेस ले लिए. पांच मिनट में लोकल आ गयी और उसमे बैठकर हम दादर उतर गए. नीरज काफी पैसेवाला था इसलिए उसने दादर से ही टैक्सी कर ली. टैक्सी में हमने सामान रखा और मैं जानबूझकर सामने ड्राइवर के बाजू मैं बैठ गया. नीरज दोनों लड़कियों के बीच बैठ गया. मैं पूरी सोच समझ के साथ नीरज को मेरी सुनीता रानी के नजदीक लाने के सारे उपाय आजमा रहा था. बाद में सुनीता ने बताया की सीट पर भी कुछ सामान होने के कारण वह भी नीरज से एकदम चिपट कर बैठी थी और नीरज भी उसकी मांसल जांघोंके स्पर्श का मजे ले रहा था.

अब हम चारो मिलकर अक्सर एकसाथ समय बिताने लगे. बाहर डिनर पर जाना, एक दुसरे के घर पर भोजन पर आना जाना , साथ में पिकनिक पर जाना भी शुरू हुआ। निकिता काफी शर्मीली लड़की थी इसलिए उसे सेक्सी कपडे पहनने की आदत नहीं थी. अब सुनीता को भी नीरज से चुदवाने की आग लगी हुई थी. इस लिए उसने निकिता से सेक्स की बाते करना, नंगी फोटोवाली मैगज़ीन साथ में देखना और चुदाई के अनुभव एक दुसरे को बताना शुरू किया.

बस कुछ ही दिनों में सुनीता के साथ साथ निकिता भी लो कट के ब्लाउज पहनकर अपनी मस्त चूचियोंका प्रदर्शन करने लगी। जब हम चारों साथ में होते तब बिना किसी शर्म के नीरज मेरी सुनीता रानी की गोलाईयोंको ताकता रहता और मैं उसकी हुस्न की परी निकिता के मम्मोंको देखता रहता. दोनों लडकियोंको पता था की एक दूसरे के पति उनके यौवन से अपनी आँखे सेकते है. यह एक दोनों आदमियोंके बीच का जैसे एक अलिखित समझौता था.

निकिता आज तक सिर्फ साडी और अब लो कट ब्लाउज ही पहनती थी मगर कुछ दिनों बाद सुनीता ने उससे अलग अलग प्रकार के कपडे मतलब टी शर्ट और स्कर्ट जैसे पहननेकी बात कही. एक रविवार के दिन हम चारों एक वेस्टर्न ड्रेस की अच्छी दूकान पर गए और दोनों लड़कियोंके लिए एक से एक आधुनिक वेस्टर्न कपडे लेकर आ गए. अब घुट्नोंतक के स्कर्ट में और एकदम कसे हुए टॉप में दोनों एकदम गज़ब ढाने लगी.

गर्मी ज्यादा होने के बहाने दोनों स्लीवलेस और लो कट वाले टॉप्स ज्यादा पहने रहती थी. सुनीता के साथ साथ निकिता को भी इस खेल का मज़ा आने लग गया था. मेरा उसकी चूचियोंको निहारना और उन्हें देख कर मेरा लंड खड़ा होते हुए देखना उसे अच्छा लगने लगा.

मैं भी हमेशा निकिता की सुन्दरता, उसकी मीठी आवाज की और अच्छे स्वभाव की तारीफ़ करता रहता.

"वाह निकिता, तुम्हारी कपडोंके मामलेमे चॉइस बहुत ही बढ़िया रहती हैं!"

"निकिता, तुमपर यह काले रंग का स्कर्ट बहुत ही अच्छा दिख रहा है. इतनी गोरी और सुन्दर हो आप!"

"यार निकिता, तुम्हारी आवाज़ सुनो तो ऐसा लगता हैं की बस सुनते ही जाओ."

अपनी तारीफ़ सुनना कौनसी लड़की को अच्छा नहीं लगता? वैसे तो नीरज को भी मेरी सुनीता रानी की भरपूर मदमस्त जवानी पसंद आ गयी थी। इसलिए वह भी कभी मेरे मुँह से बार बार निकिता की तारीफ करने से ऐतराज़ नहीं करता था.

नीरज को खुश रखने के लिए सुनीता रानी रोज कसरत करके अपने हसीं हुस्न को और भी कस रही थी. उसके ३८ इंच के वक्ष बिलकुल कसे हुए और कठोर थे. जभी भी नीरज निकिता से मिलने का मौका हो तब सुनीता बढ़िया सा मेकअप जरूर करती थी. ऐसा लग रहा था की आग चारों में एक जैसी लगी थी.

कुछ दिनोंके बाद सुनीता रानी ने बताया की नीरज और निकिता भी रात में हमारे बारे बाते करते हुए चुदाई करते हैं. यह सुनकर तो मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. अब रात भर हम दोनों में धमासान चुदाई हुई.

अगले दिन सुनीता ने निकिता से एक दुसरे की वैक्सिंग और मालिश करने की बात की. पहले तो वह ना - नुकूर करती रही फिर शर्माते हुए मान गयी. एक दिन सुबह सुनीता उसके घर चली गयी. वैक्सिंग और मालिश का सारा सामन निकिता ने तैयार रखा था.

दोनों सिर्फ ब्रा और पैंटी पर आ गयी और एक दुसरे की वैक्सिंग करने के बाद पहले तो बेबी आयल से हल्का हल्का एक दुसरे के अंगो को सहलाया. इस दौरान सुनीता ने एक से एक सेक्सी बाते कहके और निकिता की तारीफ़ करके उसे गर्म कर दिया. दोनों ने एक दुसरे के अच्छे से मालिश करने के बाद सुनीता एकदम निकिता से लिपट गयी. दोनों भी कामसीमा से असीम चरण पर आ चुकी थी. फिर भी निकिता शर्मा रही थी.

अब सुनीता ने सोचा की मौके पे चौका मारना ही चाहिए. उसने निकिता के मधुर होंठोंपर चुम्बन जड़ दिया , धीरे धीरे निकिता भी जवाब देने लगी. जल्द ही दोनों ने होंठ चूसते हुए जीभ से खेलना शुरू किया. निकिता को फिर भी शर्म आ रही थी इसलिए कमरे की बत्ती बंद कर दोनों फिर आलिंगन और चुम्बन में जुड़ गयी. ब्रा और पैंटी कब उतर गए इसका पता ही नहीं चला. निकिता के मम्मे मसल कर और निप्पल चूसकर सुनीता ने उसे दीवाना बना दिया, और फिर निकिता की ऊँगली सुनीता की गीली चुत में घुस गयी. दो घंटे तक दोनों लगी रही और दोनों को कई बार एक नए सुख का अनुभव मिला.

अब दिन में जभी भी समय मिले तब दोनों सहेलिया मिलकर एक दुसरे से मस्त लेस्बियन सेक्स का आनंद लेने लगी. दोनों के लिए यह पहली बार थी मगर ब्लू फिल्मे देख देख कर सुनीता को सारी जानकारी थी. अपने अपने पतियों से अब तक यह बात छुपाई हुई थी (जो मुझे सुनीता ने बाद में बतायी) . मगर इस बात का मेरे लिए फायदा यह हुआ की अब निकिता की शर्म काफी हद तक ख़त्म हो गयी और वह भी सेक्सी ड्रेस पहनना , एडल्ट जोक्स बोलना और हम चारोंके बीच सेक्स की बाते करने में मजे लेने लग गयी. लंड , चुत , मम्मे , चाटना, चूसना और चोदना यह सब हमारे लिए आम शब्द हो गए.

एक दिन सुनीता का जन्मदिन था और स्वाभाविक रूपसे नीरज और निकिता ने हमें ख़ास दावत पे बुलाया.

मैंने सुनीता से कहा, "मेरी जान आज तुम सबसे सेक्सी ड्रेस पहनो और हो सके तो निकिता को भी सेक्सी ड्रेस पहनने को कहो."

अब मुझे क्या पता था की अब दोनों लड़किया हमबिस्तर हो चुकी हैं और निकिता मेरी सुनीता रानी की यह बात आराम से मान जायेगी.

सुनीता सफ़ेद रंग का स्लीवलेस और लो कट टॉप और लाल रंग की शार्ट स्कर्ट में सेक्स बम लग रही थी. जैसे ही हम उनके दरवाजे पर पहुंचे नीरज और निकिता ने हमारा स्वागत किया. निकिता नेवी ब्लू रंग का गाउन पहनी हुई थी जिसमे उसकी कठोर चूँचिया मस्त झलक रही थी. गाउन का गला काफी खुला हुआ था और उस को दोनों तरफ से लगभग कमर तक एक लम्बी स्लिट थी जिसमे से उसकी गोरी मांसल जाँघे दिख रही थी. नीरज ने सुनीता को गले लगाकर जन्मदिन की बधाई दी. मैंने भी निकिता को बाहोंमे ले लिया।

अब हम चारोंमें एक दुसरे की पत्नी को गले लगाना और उनकी गांड पर हाथ फेरना आम हो गया था. सुनीता के लिए तोहफे में एक बड़ा सा गुलदस्ता, एक कीमती ड्रेस, और बढ़िया सा परफ्यूम लाया हुआ था. बाते और हंसी मजाक के बाद वाइन के साथ भोजन हो गया. मैं और नीरज एक दुसरे की पत्नियो की ताऱीफोंके पूल बाँध रहे थे. आधे घंटे बाद नीरज ने हॉल का फर्नीचर थोड़ा बीचमें से हटाया और चार मोमबत्ती जलाई. हॉल की लाइट बंद हुई और धीमे संगीत के स्वर शुरू हुए.

नीरज ने कहा, "राज, क्या मैं आज बर्थडे गर्ल के साथ डांस कर सकता हूँ?"

मैंने कहा, "हां ख़ुशी से, मगर पहले निकिता से पूंछ लो की वह मेरे साथ डांस करेगी क्या?"

अब निकिता ने फट से कहा, "ओह राज, यह लो मैं आ गयी तुम्हारे साथ डांस करने."

फिर क्या था, एक दुसरे की पत्नियोंके कमर में हाथ डाल कर हम संगीत की ताल पर झूमने लगे.

वैसे डांस करना न मुझे आता था न नीरज को, हम तो सिर्फ एक दुसरे की सुन्दर और सेक्सी पत्नियोंके अंगो को छू रहे थे. मेरे हाथ निकिता की कमर और उसके सुडौल नितम्बोँको सेहला रहे थे, वहां नीरज सुनीता को चिपककर उसके गर्दन पर हलके से किस कर रहा था. उनका हॉल काफी बड़ा था और नाचते नाचते मैं जान बूझ कर निकिता को उन दोनोंसे दूर लेकर आ गया.

मैंने निकिता के कानो में कहा, "आप के साथ ऐसा रोमांटिक डांस करने के मेरी कबसे इच्छा थी, जो आज पूरी हो गयी. आज तो तुम सचमुच की मेनका लग रही हो."

 
अब मैंने उसके गर्दन पर चूमना शुरू किया. अब वह भी गर्म हो चुकी थी. अब निकिता उसके तने हुए मम्मे मेरी छातीपर दबाने लगी. मैंने आँखों के किनारे से देखा तो नीरज सुनीता के स्कर्ट के अंदर से उसके कुल्होंको सेहला रहा था, और मेरी सुनीता रानी उसका चेहरा अपने बड़े वक्षोंके क्लीवेज में दबा रही थी. फिर अचानक संगीत ख़त्म हुआ और हम अपने अपने पार्टनर के पास आ गए.

सुनीता ने मुझे बाहों में लेकर मीठा चुम्बन दिया और बोली, "राज, इतना अच्छा जन्मदिन मुझे हमेशा यादगार रहेगा."

वहां नीरज और निकिता भी मस्ती से किसिंग कर रहे थे. वाइन पीने का एक दौर और हो गया. मैंने सोचा की बहुत दिन से जो प्लान मेरे दिमाग में चल रहा हैं उसे सच्चाई में लाने का इससे अच्छा मौका नहीं आएगा.

मैंने कहा, "चलो सब लोग मिलके स्पिन द बोतल का खेल खेलते हैं."

हम चारों जमीन पर बैठ गए और उस चक्कर में मुझे और नीरज को दोनों लड़कियोंके जांघोंके दर्शन हो रहे थे.

पहले राउंड में घूम कर बोतल सुनीता पर रुकी।

मैंने कहा, "चलो, बर्थडे गर्ल से ही शुरुआत हो गयी."

अब रूल के अनुसार निकिता उसे पनिशमेंट देने वाली थी.

"मेरे नीरज को अच्छे से एक मिनट तक आलिंगन दो," उसने कहा.

"अरे यह भी कोई पनिशमेंट हैं?" हँसते हँसते सुनीता बोली और जाकर नीरज से लिपट गयी.

अब सुनीता ने अपने मम्मे उसपर दबा दिए.

अगली बार बोतल मेरे ऊपर रुकी, तो नीरज बोला, "चल, तू भी निकिता को अच्छे से हग करले।"

जैसे ही निकिता मेरी बाहों में आयी मैंने उसकी कमर और कूल्हों को सहलाया और गाल पर चुम्बन किया. मेरा खड़ा लंड उसे जरूर चुभा होगा.

अगले दो राउंड में आलिंगन और चुम्बन होने के बाद मैंने नीरज से कहा, "नीरज, अब सुनीता की स्कर्ट उठाकर उसकी जाँघे सेहलाओ।"

अब वाइन के नशे में सुनीता भी बिनधास्त होकर सोफे पर लेट गयी. नीरज ने उसकी लाल स्कर्ट उठाई और जाँघे सहलाकर उन्हें चूमने भी लगा. अब मैं भी बहुत उत्तेजित हुआ और मैंने निकिता को पीछे से बाहोंमें ले लिया। मेरा लंड उसकी गांड पर टक्कर मार रहा था और मेरे हाथ उसके वक्षों को उसके गाउन के ऊपर से ही दबा रहे थे.

अब लग रहा था की हमारा बरसो का पार्टनर स्वैपिंग का सपना आज पूरा होने वाला हैं. इतने में निकिता ने मेरे हांथों को रोक दिया और नीरज से भी सुनीता के ऊपर से उठने के लिए कहा. मैं समझ गया की निकिता से इस के आगे बढ़ने के लिए अभी इस समय तैयार नहीं हैं. वैसे सुनीता को भी सबके सामने थोड़ी शर्म आ रही थी.

मैंने ऐसे जताया की कुछ हुआ ही नहीं और कहा, "चलो, बड़ा मजा आया आज की इस पार्टी में, इतनी बढ़िया पार्टी तो मैंने भी आज तक सुनीता को दी नहीं."

सुनीता ने भी हां में हां मिलाई और हम दोनों उनसे गले मिलकर उनका फिरसे धन्यवाद करते उनके घर से निकल गए. निकिता ने अपनी सहेली को उसके तोहफ़ोंके बारे में याद दिलाया और फिर हम गिफ्ट्स लेकर अपने घर पहुंचे.

कुछ मिनट पहले तक जो हुआ था उसके कारण हम दोनों भी पूरी तरह से हॉर्नी हो गए थे, मैने सुनीता के कपडे लगभग फाड़कर उतार दिए और उसे हॉल में ही चोदने लगा.

"आओ मेरे नीरज राजा, चोदो मुझे, मेरी चुत को फाड़ डालो, अपने लौड़े से मुझे सारी रात चोदते रहो," सुनीता चिल्लाकर बोली.

"हां मेरी निकिता रानी, ले मेरा लंड ले, क्या तेरी मस्त गांड हैं. आज नाचते वक़्त तेरी चूँचिया दबाने में क्या मजा आया था.. आह.. तू कितनी गोरी कितनी माल हैं, तेरी गुलाबी चूत कितनी टाइट है मेरी जान!" मैं कह रहा था.

ऐसी उन दोनों की बाते करते करते सारी रात चुदाई और ६९ की पोज़ में सुख लेते और देते हुई निकली.

अगली बार हमने उन दोनोंको अपने घर पर बुलाया, वाइन , डांस और आलिंगन चुम्बन भी हुआ, मगर इसके आगे बात बढ़ नहीं रही थी. मुझे पता था की अगर निकिता मुझसे चुदने के लिए राजी हुई तो सुनीता उसी क्षण नीरज से चुदने को तैयार थी.

मैंने और एक ज़बरदस्त पासा फेंका।

"यार नीरज और निकिता, अब यह बताने की जरुरत नहीं की इस दुनिया में आप दोनोसे बढ़कर हमारा कोई जिगरी यार दोस्त नहीं हैं. मेरी और सुनीता की काफी दिनोंकी एक स्पेशल फोटोशूट करने की तमन्ना हैं. क्या आप दोनों इसमें हमारी मदत करोगे?" मैंने पूंछा.

नीरज बोला, "यार राज, नेकी और पूंछ पूंछ, बोलो कब और क्या करना हैं. आप दोनोके लिए तो जान हाज़िर हैं."

स्पेशल फोटोशूट के नाम से निकिता और सुनीता दोनोकी आँखें नशीली हो गयी थी. नीरज को भी लगा की चलो इसी बहाने सुनीता के सेक्सी अंगोको और अच्छी तरह से देखने को मिल जाएगा. मेरी तो बस यही उम्मीद थी की निकिता की शर्म और कम हो जाए और हो सके तो उसकी नग्न जवानी भी मुझे देखने मिल जाए.

मैं बैडरूम में से एक ख़ास कैमरा और चार लाइट्स लेके आया.

"देखो नीरज, आप दोनोंको मेरी और सुनीता की एकदम कम कपडोंमे सेक्सी पोज़ेस में फोटो लेनी हैं."

नीरज का प्रश्न आया, "तुम इस एल्बम को धुलवाने के लिए दोगे तो कोई और देखेगा नहीं?"

मैंने कहा, "एक फोटो स्टूडियो में किसी लड़की के साथ मेरी पहचान हैं, वह रात को चुपचाप रील को धुलवाके फोटो बनाके मुझे अगले दिन देती हैं.

मैंने सिर्फ सुनीता के कुछ ख़ास फोटो ऐसे खींच कर लाये हैं. मगर हम दोनोके साथ में खींचना मुझ अकेले से संभव नहीं, इसलिए तुम्हारी मदत ले रहा हूँ. मैं उस स्टूडियो वाली लड़की को दुगने पैसे देता हूँ इस ख़ास काम के लिए."

नीरज बोल उठा, "वाह यार, तुम तो बड़े ही उस्ताद हो..कुछ न कुछ तरकीब निकाल ही लेते हो."

निकिता और सुनीता तब तक बैडरूम में चली गयी और कुछ ही क्षण में सुनीता एक गाउन डाल कर आयी. तबतक मैंने और नीरज ने लाइट्स सेटिंग करके कैमरा तैयार कर लिया. फिर मैं सुनीता को लेकर सोफे पर गया, और अपने टी-शर्ट और जीन्स उतार दी. सुनीता ने भी अपना गाउन खोल दिया।

अब मैं सिर्फ काले रंग की फ्रेंची में और सुनीता गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी में थे. अलग अलग पोजेस में हमारी फोटो ली जा रही थी. निकिता भी काफी गर्म हो गयी ऐसा लग रहा था. नीरज तो अपने आप पर कैसे काबू कर रह था उसे ही मालूम. उसका उभरा हुआ लंड उसकी पैंट से साफ़ दिखाई दे रहा था.

 


अब मैंने सुनीता की पीठ कैमरे की तरफ की, उसका किस लिया और उसकी ब्रा का हुक खोल दिया. वह शर्म के मारे मुझे लिपट गयी. उसकी पीठ पर से ब्रा हटाकर नीरज को और फोटो लेने को कहा. अब सुनीता से रहा नहीं गया और उसने फोटोशूट को वही रोकने को कहा.

मैं बोला, "क्या शर्मा रही हो मेरी जान, यह दोनों हमारे सबसे ख़ास दोस्त हैं, इनसे क्या शर्माना."

उसपर सुनीता ने कहा, "मेरे राजा, पूरे कमरे में मैं ही अकेली लड़की इतने कम कपड़ों में हूँ, इसीलिए मुझे ज्यादा शर्म आ रही हैं."

अब सबकी आँखें निकिता के ऊपर थी. यह मौके की घडी थी. अगर निकिता अपने कपडे उतारने को राजी न होती तो आगे का सारा प्लान चौपट हो सकता था. निकिता ने नीरज तरफ देखा और उसकी हाँ देखकर अपना टॉप और स्कर्ट उतार दी. काले रंग की ब्रा और पैंटी में निकिता दुनिया की सबसे सेक्सी लड़की लग रही थी.

अब सुनीता ने अपनी ब्रा अलग कर दी और नीरज मेरी और सुनीता की बैकलेस पोज़ में फोटो ले रहा था. मेरा लंड कड़क हुआ और दिल जोरोंसे धड़क रहा था. सुनीता अब अपने आधे मम्मोंको हाथोसे छुपाकर नीचे लेट गयी और मैं उसकी मांसल जांघोंको चाट रहा था.

अब नीरज से भी रहा नहीं गया और अपने कपडे उतारकर वो भी सिर्फ अंडरवियर पर आ गया. उसका खड़ा लंड सुनीता की अधनंगी जवानी को जैसे सलाम कर रह था. जबरदस्ती सुनीता का एक हाथ हटाकर मैं उसका दाया स्तन चूसने लगा। अब ऐसा लगा रहा था की चारो सेक्स की आग में जल रहे थे.

नीरज भी कैमरा बाजू में रखकर बिलकुल हमारे पास आकर सुनीता की भरपूर छतियोंके दर्शन कर रहा था. निकिता ब्रा के ऊपर से ही अपने बूब्स मसलते हुए नीरज के लंड को फ्रेंची के ऊपर से ही सेहला रही थी.

मैंने सुनीता को दोनों हाथ हटाकर उसके मम्मोंको पूरा उजागर कर दिया और सुनीता आँखे मींचकर जोर जोर से आँहे भरने लगी. निकिता ने घुटनोपर बैठकर नीरज की फ्रेंची खींचकर निकाल दी और उसके तने हुए लौडेको मुँहमे लेके चूसने लगी.

मैंने भी अपनी फ्रेंची निकाल दी और सिक्स्टीनाइन को पोज़ में आ गया. सुनीता की पैंटी एक झटकेमें उतार कर उसकी चुत को चाटने लगा. नीरज ने भी निकिता को हमारे बाजुमें लिटाकर उसकी ब्रा खोल दी. उसके गोरी गोरी कबूतर की जैसी छातियाँ खुल गयी. अब नीरज मम्मे चूसकर निकिता को दीवाना बना रहा था. बचे हुए कपडे भी उतर गए और पूरा कमरा चुदाई की आवाजोंसे गूंजने लगा.

फोटोशूट के लिए कमरे में भरपूर रौशनी होने के कारण मुझे निकिता को और नीरज को सुनीता को पूरा नंगा देखने मिल रहा था. जिस निकिता के बारे में पिछले कई महीनोंसे मैं फैंटसी कर रहा था वो आज मेरी आंखोके सामने बिलकुल नजदीक नंगी होकर अपने पतिसे चुद रही थी. एक बार झड़ने के बाद हम दोनों लड़कों के लंड फिर खड़े हो गए और अब हम दोनों अपनी अपनी पत्नियोंको घोड़ी बनाकर चोदने लग गए.

सुनीता आह आह ओह ओह करती सिसकारियाँ भर रही थी। मैंने फिर पलटकर उसकी क्लिटोरिस को चूसते हुए उसकी योनि में उंगली घुसा दी। अंदर योनि इतनी गीली थी कि मैंने आसानी से दूसरी उंगली भी उसमें डाल दी। दोनों उंगलियों से योनि की दीवारों को सहलाते हुए मैं उंगलियाँ अंदर बाहर करने लगा।मैं उसको आलिंगन में पकड़े रहा और नीचे कमर जोर-जोर से चलाकर लिंग को उसकी योनि में कूटना शुरु कर दिया।
हम दोनों ही बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गए थे इसलिए थोड़ी देर में दोनों स्खलित हो गए।

वहाँ नीरज और निकिता अभी भी डॉगी पोज में लगे हुए थे. नीरज चोदते हुए उसके लटकते हुए बड़े बड़े स्तन मसल रहा था और उसकी गांडपर प्यार से चांटे भी मार रहा था.

आखिर नीरज ने बात शुरू की.

उत्तेजित स्वर में नीरज बोला, "यार राज, साथ में चुदाई करने में कितना अजीब मजा आ रहा है यार!"

मैंने भी हाँफते हुए कहा, "हां नीरज, ऐसा लग रहा हैं की इतने दिनोंतक हमने यह काम क्यों नहीं किया. सच कहूँ तो निकिता और सुनीता दोनों भी ज़बरदस्त माल हैं और साली एकदम चुड़क्कड़ भी."

"राज, सच्ची बताऊँ तो जिस दिन मैं यहाँ आया था तबसे सुनीता को नंगा देखने के लिए मर रहा था. आज तुम्हारे स्पेशल फोटोशूट के बहाने मेरा सपना पूरा हो गया. और साले तुमको भी मेरी सुन्दर और सेक्सी निकिता को नंगा देखने को मिला," नीरज ने अपने दिल की बात कह दी.

अब सुनीता उठकर बोली, "तुम दोनोंको मेरा सबसे बड़ा थैंक्स बोलना चाहिए, जो मैं अपनी ब्रा उतारनेको तैयार हुई. वर्ना निकिता कपडे उतारकर सबके सामने यूँ चुदने को कभी राजी नहीं होती थी."

नीरज ने कहा, "हां सुनीता, तुमने एकदम लाख रुपये की बात की हैं. मेरी शर्मीली निकिता को कली से फूल बनाना और खुले आम नंगे होकर चुदने के लिए मनाना इसमें तुम्हारा ही सबसे बड़ा योगदान हैं."

निकिता ने हँसते हुए कहा, "अच्छा, तो यह आप तीनो की चाल थी मुझे नंगा कर ऐसी भरपूर चुदाई करवाने की. लेकिन मुझे भी राज और सुनीता की चुदाई देखकर बहुत सुख मिला. जीवन में पहली बार इतना सुख एक रात में मिला ऐसा लग रहा हैं."

सुनीता निकिता के साथ बैडरूम में चली गयी. हम दोनों लड़कों ने अपने अपने कपडे पहने।

मैंने नीरज का धन्यवाद किया और हँसते हँसते कहा, "अगर तुम दोनोको भी ऐसी स्पेशल फोटोशूट करानी हैं, तो बता दो. मेरे पास और दो रील हैं और एल्बम की डिलीवरी लेने तुम ही चले जाना।"

नीरज बोला, "अब तो साथ साथ चुदाई होगी, फोटोशूट के बहाने की क्या जरूरत है."

उन दोनोके चले जाने के बाद मेरी और सुनीता की उस रात को भी घमासान चुदाई हुई. आज पहली बार मैंने निकिता को नजदीकसे पूरा नंगा और मस्तीसे चुदवाते हुए देखा था, इसलिए उसको याद करते करते मैंने फिर से सुनीता को मस्ती से चोदा। नीरज के सामने लगभग नंगी होने के कारण और उसका तगड़ा लौड़ा देखने से सुनीता भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी. तीसरी बार जब मैंने उसे घोड़ी बनाया और मम्मे सहलाते हुए अपना फनफनाता हुआ लंड उसकी गीली चुत में रफ़्तार से अंदर बाहर कर रहा था तब शादी के बाद पहली बार उसकी योनि से फव्वारा निकला. इसका मतलब उसे आजतक का सबसे बड़ा ऑर्गैज़म मिला था.

जब इतनी शर्म खुल गयी थी तब मैंने अगले ही दिन शाम नीरज निकिता को घर पर बुलाया और पार्टनर स्वैपिंग के बारे में पूंछ लिया.

नीरज बोला, "जितना कल रात को हुआ उसके आगे बढ़ने के लिए निकिता अभी तैयार नहीं हैं. मैं भी खुल्लम खुल्ला बोल रहा हूँ की मैं सुनीता को चोदने के लिए बेकरार हूँ. हो सकता है की सुनीता भी मुझसे चुदने राजी हो जाए, मगर जबतक निकिता की हां न हो तबतक हम फुल स्वैपिंग नहीं कर सकते."

यह सुनकर मेरे ऊपर तो जैसे बिजली गिर गयी. कल रात के बाद मुझे शत प्रतिशत लग रहा था की अब निकिता रानी की चुत और मेरा लौड़ा एक हो जाएंगे.

फिर भी अपने आप को संभालते हुए मैंने कहा, "चलो कोई बात नहीं, हम तीनो मिलकर निकिता के राजी होने का इंतज़ार करेंगे."

 
अब आगे की कहानी सुनिए सुनीता की जुबानी.

अब नीरज और निकिता को पटाने के लिए आगे क्या किया जाए इस सोच में मैं और राज थे तभी मेरी छोटी बहन के परिवार पर एक विपत्ति आ गयी.

मेरी छोटी बहन का नाम सारिका था. वह भी मेरी तरह बड़ी सुन्दर और जवानी से भरपूर थी. सारिका दिखने में मुझसे थोड़ी ज्यादा गोरी थी, बस कद से थोड़ी सी नाटी थी. उसकी शादी महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव के एक गरीब परिवार में रूपेश के साथ हुई थी. रूपेश देखने में गौरवर्णीय, बहुत हैंडसम और एकदम फुर्तीला था. उस की अपनी मेडिकल की दूकान थी जिससे उनका घर चलता था. एक दिन अचानक उसकी दुकान में आग लग गयी. बीमा नहीं होने के कारण बहुत भारी आर्थिक नुकसान भी हो गया और आमदनी का एकमात्र जरिया खत्म हुआ.

जैसे ही हमें पता चला, मैं फूट फूट कर रोने लगी. मुझे शांत करके राज तुरंत रूपेश के गांव पहुंचा और उससे बात की.

राज ने रूपेश से कहा, "रूपेश, मैं अँधेरी में कुछ दवाई की दूकान मालिकोंको अच्छे से जानता हूँ. मैं तुम्हारे लिए नौकरी की बात करके सारा मामला ठीक कर दूंगा. रूपेश और सारिका, तुम दोनों भी हमारे अँधेरी वाले घर पर हमारे साथ रह सकते हैं. फिर तुम्हे किसी भी प्रकार के खर्चे के बारे में सोचना नहीं पडेगा. कुछ पूँजी जमा होने के बाद हम लोग अपनी खुद की मेडिकल की दूकान खोलने के बारे में भी सोच सकते हैं."

उसकी बात सुनकर रूपेश ने राज को गले लगाया और रोने लग गया.

उसने भावुक होकर कहा, "राज भैया, मैं आप का एहसान पूरी जिंदगी नहीं भूलूंगा. समझ लो की आज से मैं आप का गुलाम हो गया."

राज ने कहा, "रूपेश, हिम्मत मत हारो और रोना बंद करो. जल्द से जल्द यहाँ का मामला निपटाकर आप दोनों मुंबई पहुँच जाओ."

जैसे ही सारिका ने यह बात सुनतेही उसके भी आँखों में आँसू छलक गए. राज ने दोनोंको बड़े प्यार से गले लगाया और हिम्मत बँधायी. बाद में राज ने मुझे बताया की इस समय तक उसके मन में अपनी सुन्दर और सुडौल साली सारिका के बारे में कोई सेक्सी विचार नहीं आये थे. वो तो बस उनकी सचमुच अपनेपन से मदद करना चाहता था.

राज अपनी बैंक में अच्छे पद पर था और उस पर काम की काफी जिम्मेदारी भी थी. इसलिए वो तुरंत अगले ही दिन मुंबई वापिस चला आया. एक हफ्ते के बाद रूपेश और सारिका अपने गावसे बस में बैठकर मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर आ गए. राज और मैं उन्हें लेने के लिए पहले से ही प्लेटफार्म पर खड़े थे. अपना सामान लेकर दोनों नीचे उतर गए.

हमें देखकर दोनोंके चेहरों पर अपार प्रसन्नता छा गयी. पहले रूपेश राज के गले लगा और सारिका मेरे. फिर राज ने आगे बढ़ कर सारिका को बाहों में भर लिया और रूपेश ने अपनी मजबूत बाहों में मुझे ले लिया. सारिका फिर से रोने लग गयी, फिर राज ने उसे कसकर बाहोंमे जकड़ा और उसके सर पर बड़े प्यार से हाथ फेरते हुए उसके आंसू पोंछ दिए.

वहाँ मैंने भी रूपेश को कहा "रूपेश, आज से हम चारों सबसे अच्छे दोस्त बनकर साथ साथ रहेंगे." उसका मुझे अपनी बाहों में लेना अच्छा लगा था.

अँधेरी जाने के लिए हम लोकल में चढ़ गए. उन दोनोंका मुंबई मायानगरी में यह पहला ही दिन था. साथ में काफी सामान भी था और वह लोग कहीं खो न जाए इसलिए राज और सारिका एक डब्बे में चढ़ गए और मैं और रूपेश दुसरे डब्बे में!

लोकल में हमेशा की तरह खचाखच भीड़ थी. बड़ी मुश्किल से सामान जमाकर राज और सारिका बैठ गए.

जैसे ही वो दोनों बैठे, खड़े हुए लोगों में से एक आदमी ने कहा, "भाई, भीड़ बहुत ज्यादा हैं. अपनी लुगाई को गोदी में बिठा दो ताकि मैं बची हुई जगह पर बैठ जाऊं."

मुंबई की लोकल में यह एकदम सामान्य बात थी. सारिका झटसे आकर राज की गोदी में बैठ गयी. उसने नीले रंग का कमीज और गुलाबी रंग की सलवार पहनी थी. भीड़ में आजु बाजू के लोग उसके जिस्म को धक्के न मार सके इसलिए राज ने अपने हाथोसे उसकी कमर को लपेट लिया। पहली बार वो सारिका के बदन से इतना नज़दीक था. उसकी भरी हुई गांड और मांसल जाँघे राज को उत्तेजित करने लगी.

फिर दोनों यहाँ वहां की बाते करने लगा, भीड़ ज्यादा होने के कारण सारिका राज के और पास आकर उसकी बाते सुनने और बाते करने लगी. उसके बदन की खुशबू, उसकी गर्म साँसे, उसकी गांड और मांसल जाँघे सबकुछ मिलकर राज को पागल करने लगी. राज ने बताया की उसका लंड भी तन गया था. अब इतनी भीड़ में इधर उधर हिलकर उसे एडजस्ट करना भी संभव नहीं था. शायद सारिका को भी उसकी चुभन महसूस हो रही थी मगर वह भी कुछ न बोली. लोकल रस्ते में दो बार रूक गयी और उससे राज की हालत और भी खराब हो गयी.

 


दुसरे डब्बे में मैं और रूपेश भी अजब हालात में थे. हम दोनों को तो बैठने की जगह मिली ही नहीं इसलिए एक कोने में मैं खड़ी रही और रूपेश अपने मजबूत शरीर से मुझे दुसरे मर्दोंके स्पर्श से रोकने के लिए बाहोंसे जकड लिया था. इस पूरे सफर में अनजाने में मुझे भी बड़ा मजा आया और मैंने भी रूपेश के खड़े लंड का मजा लिया। मैंने भी अपने कठोर वक्ष उसकी चौड़ी छाती पर दबा दिए थे. कुल मिलाकर राजकी और मेरी अंदर की वासना की आग उस लोकल में ही चालू हो गयी थी.

जैसे ही हम लोग घर पहुंचे सब लोग बारी बारी नहाये और फिर भोजन किया. थोड़ा आराम करने के बाद रूपेश की नौकरी के बारे में आगे क्या करना इसकी रूपरेखा बनायीं गयी. उन दोनोका सामान ठीक ठाक जगह लगाया और उनके सोने के लिए हॉल में बेड का इंतज़ाम किया.

मैं राजसे बहुत खुश थी की उसने मेरी बहन और बहनोई की मुश्किल घडी में उनकी सहायता का कदम उठाया था. उस रात को हमने एक दुसरे को प्यार करते समय लोकल वाली बात शेयर की. हम कभी भी कोई बात एक दुसरे से छुपाते नहीं थे.

"रानी, तुम्हे छूने के बाद तो किसी भी मर्द का लंड खड़ा होगा. बड़ी ख़ुशी की बात हैं की मुझे और रूपेश को एक दुसरे की पत्नियोंको स्पर्श करने का मौका मिल गया," राज बोल रहा था.

"हां मेरी जान, उसके सीने पर दबने के बाद मेरे निप्पल तक एकदम कठोर हो गए थे. सचमुच बड़ा मजा आया," मैं बोली.

कुछ दिनोंके बाद रूपेश को एक दवाई की दूकान में काम मिल गया. सुबह वह अपना लंच लेकर जाता और शाम को देरी से आता. जब कभी लंच तैयार न हो तो मैं ही अपनी लूना चलाकर उसे भोजन का डब्बा देकर आती थी. सारिका अब तक लूना चलाना सीखी नहीं थी. दोपहर के समय दूकान पर ज़्यादा भीड़ नहीं होती थी, इसलिए मैं वही रूककर उससे बाते करके फिर खाली डब्बा लेकर आ जाती थी. अब परिवार में दो सदस्य और होने के कारण हमारा नीरज और निकिता के साथ मिलना जुलना कम हो गया, मगर मित्रता में कोई अंतर नहीं आया था. बस मेरी और राज की प्राथमिकताएं कुछ दिनों के लिए बदल गयी थी.

रूपेशकी दूकान काफी दूरीपर थी, देर रात तक रुकना पड़ता था और वेतन भी कुछ ख़ास नहीं था, इसलिए दोनों पति पत्नी काफी परेशान थे. वह सब देखकर मैंने फिर राज से उनकी कुछ और सहाय्यता करने के लिए कहना शुरू किया. अब शायद राज को भी मन ही मन लगा की रूपेश और सारिका परेशान रहेंगे तो उसका सारिका को चोदने का सपना शायद ही पूरा होगा।

कुछ दिन बाद राज ने उसके बैंक मैनेजर से बात की और उसे ५००० रुपये की घूस देकर अपने नामपर ४ लाख रुपयोंका लोन बहुत काम ब्याजदर पर मंजूर करा लिया. दो हफ्ते पहले से ही रूपेश घर के आसपास कोई मेडिकल दूकान बेचनेमें हैं क्या इसकी तलाश कर रहा था. लोन मिलने के तीसरे दिन ही साडेतीन लाख में एक दुकान मिल गयी और पचास हज़ार की दवाईयोंका स्टॉक ख़रीदा गया. दुकान का नाम राज ने सुनीता मेडिकल स्टोर्स रखकर मुझे और भी ज्यादा खुश कर दिया. ओपनिंग सेरेमनी सादगीसे किया और अब दूकान भी अच्छे से चलने लगी.

दोपहर के समय ज्यादा ग्राहक न होने कारण कुछ घंटोंके लिए रूपेश घर पर आता तब हम दोनों बहनोंमे से कोई भी दूकान संभाल लेती. सारिका की सुंदरता और सेक्सी ब्लाउज से मम्मोंकी झलक देखने से आया हुआ ग्राहक दो - चार चीज़े और लेके जाता था. इसके कारण सारिका ज्यादा दूकान पर रहती थी और मुझे रूपेश के साथ अच्छा समय बिताने को मिलता था. रूपेश भी मेरी की सुंदरता और सेक्स अपील से घायल हो रहा था. मौका पाकर मैं भी अपने जवानी के जलवे दिखाकर उसे एक्साइट करती रहती थी. नीरज जैसा बांका जवान हाथ न लगा तो अब मैं रूपेश पर डोरे डालने लगी।

रूपेश और सारिका अब मुझे और राज को इतनी ज्यादा इज़्ज़त और प्यार करने लगे की उनके लिए हम दोनों जैसे भगवान् का रूप हो गये. दोनों भी हमारी हर बात मान जाते थे.

राज कभी भी किसी काम से घरके बाहर निकलने की बात करता की तुरंत सारिका उसकी मोटरसाइकिल पर उसके पीछे बैठ जाती थी खरीदारी में सहायता के लिए. अब राज को भी उसके मम्मे अपनी पीठपर दबते हुए अच्छा लगता था. जानबूझकर वो खचाखच ब्रेक मारकर उसे पीछे से लिपटने पर मजबूर कर देता था. सारिका को भी अब इसमें मज़ा आने लगा था. रूपेश के सामने भी सारिका अक्सर राज को गालों पर किस कर देती थी और मैं भी रूपेश को बाहोंमे भरने का एक भी मौका गंवाती नहीं थी. सारिका को भी इसका बुरा नहीं लगता था.

 


आने वाले रविवार को अब हम दोनों रूपेश और सारिका को लेकर बोरीबन्दर स्टेशन के पास वाले फैशन स्ट्रीट गए और सारिका के लिए कुछ सेक्सी ड्रेस लेकर आ गए. अब मैंने सारिका को ऐसे वेस्टर्न कपडे पहनकर अपनी पति को लुभाने की अदा सिखाई. अब तो मैं और सारिका दोनों भी बहने शार्ट स्कर्ट और लूज़ टॉप घर में पहनने लग गयी. अब घर में राज और सारिका / और मेरा और रूपेश का हंसी मजाक काफी सेक्सी होने लगा.

पहले तो रूपेश को मेरे बारे में सेक्सी बाते बोलने में शर्म आयी मगर राज ने और खुद मैंने ही उसे बिनधास्त रहने के लिए कहा तो वो भी खुले आम मेरे सेक्सी के अंगोंकी तारीफ़ करने लगा.

"सुनीता दीदी, आप इस मिनी स्कर्ट में बिलकुल कॉलेज क्वीन लग रही हो. ख़ास कर आपकी मुलायम जाँघे बहुत सुन्दर लग रही है."

"ओह दीदी, आपका आज का टॉप तो बड़ा ही ख़ास हैं. आप ऐसे लो नेक ड्रेस में किसी सेक्सी फिल्म की हिरोइन से भी ज्यादा हॉट लग रही हो. क्या बढ़िया चूचियां हैं आप की."

"सुनीता दीदी, आज आप इस स्कर्ट के साथ वो लाल रंग का टॉप पहनोगी तो और भी ज्यादा प्यारी लगोगी. उस टॉप का गला कुछ ज्यादा ही खुला हैं, जिससे आप का क्लीवेज देखन मुझे बड़ा अच्छा लगता हैं."

"दीदी, क्या बढ़िया मिनी स्कर्ट हैं, मुझे तो आपकी गुलाबी पैंटी भी नज़र आ रही हैं. बहुत ही परफेक्ट आकार हैं आप के नितम्बोंका!"

इतना हैंडसम जवान मेरी तारीफ करे और जब मौका मिले तब यहाँ वहाँ हाथ लगाए इससे मैं भी अपने आप को ज्यादा सेक्सी फील करने लगी थी.

छुट्टी के दिन हम चारों साथ में बैठकर ऐसे ही गपशप कर रहे थे की हमारी स्पेशल फोटोशूट वाली एक एल्बम सारिका के हाथ लगी. जैसे ही वो खोलकर देखने लगी, मैंने सारिका के हाथ से खींच कर एल्बम ले ली.

रूपेशने हँसते हुए पूछा, "अरे जरा हमें भी दिखाओ, क्या ख़ास हैं इसमें!"

बेशर्म होकर राज ने कहा, "मेरी और सुनीता की हॉट पोजेस की फोटो हैं."

अब मैं झूठ मूठ के गुस्से से राज को कोसने लगी, "तुम्हे कोई भी शर्म नहीं है कुछ भी बता देते हो."

हालांकि मेरे मन में भी लड्डू फूट रहे थे. मेरी सेक्सी तस्वीरें देखकर रूपेश पर क्या असर होगा यह सोच कर मेरी चूत गीली होना शुरू हो गया.

राज ने हँसते हुए कह दिया, "रूपेश, तुम्हारी और सारिका की भी ऐसी पोजेस की एल्बम बनाना हैं तो मुझे बता दो. कैमरा, लाइट्स और रील सबका इंतज़ाम हैं मेरे पास."

"अब ज़रा फोटो देखेंगे तो पता चलेगा न राज भाई," रूपेश ने कहा.

राज ने मुझसे पूछा, "सुनीता रानी, क्या कहती हो? अब हम चारों एकदम गहरे दोस्त बन कर साथ में ही रह रहे है. सारिका ने तो थोड़े देख भी लिए हैं, चलो रूपेश को भी देखने दो. फिर उनका फोटोशूट करेंगे तो हमको भी मजा आएगा."

आखिर झूठ मूठ का दिखावा करने के बाद मैं भी मान गयी और चारो मिलकर उस एल्बम को देखने लगे. मेरी सिर्फ ब्रा और पैंटी में तस्वीरें देखकर कोई नामर्द का लंड भी खड़ा हो जाता, रूपेश तो फिर भी असली मर्द था. कुछ फोटो बैकलेस भी थी और कुछ में तो मेरी गांड भी दिख रही थी.

रूपेश: "अरे वा, सुनीता दीदी आप तो बहुत ही ज्यादा सुन्दर, सेक्सी और हॉट लग रही हैं. ए सारिका चल, हम भी ऐसी ही फोटो खिचायेंगे."

सारिका रूपेश की बात को टाल न सकी और बोली, "अच्छा, ठीक हैं रूपेश. चलो हम दोनों बैडरूम में जाकर कपडे बदलकर आते हैं."

लगता हैं रूपेश फोटो खिंचवाने के लिए काफी उतावला हो रहा था, इसलिए दो मिनट के अंदर ही दोनों भी बैडरूम के बाहर आ गए. दोनोंके बदन के ऊपर से एक पतली चादर ओढ़ी हुई थी.

जैसे ही दोनों लाइट्स के बीच में आये, राज ने कहा, "चलो, अब घूंघट उतारो और अपनी जवानी के जलवे दिखाओ."

सारिका और रूपेश ने एक दुसरे की और देखा और चादर उतार दी. सारिका के गोरे गोरे बदन पर भड़कीले लाल रंग की ब्रा और पैंटी थी.

उसको अधनंगी देखकर राज उत्तेजित हो गया था. मैं भी रूपेश को सिर्फ नीले रंग की फ्रेंची में देखकर खुश हो गयी.

राज उन दोनोंको एक एक पोज लेने और फोटो खींचने लगा.

 
उनके पोज एडजस्ट करने के बहाने राज ने कई बार सारिका के बदन को हाथ लगा लिया. सारिका की मांसल जाँघे, गोलाईदार नितम्ब और पुष्ट स्तन देखकर राज बहुत उत्तेजित हो गया और अच्छी सेक्सी पोज देने के बहाने उसके अंगोंको छू लिया.

अब मौका पाकर जान बूझ कर मैं बोली, "राज, कुछ ज्यादा गर्मी हो रही हैं," और मैंने अपना टॉप उतार दिया.

अब मेरे काले रंग की ब्रा में कैसे हुए कठोर वक्ष देखकर रूपेश का लौड़ा और भी कड़क हुआ ऐसा लग रहा था.

"अरे रूपेश, तुम थोड़ा इस तरफ से सारिका को पकड़ो ताकि फोटो और भी अच्छा आएगा," यह कहते हुए मैं जाकर उसका पोज एडजस्ट करती रही और उसे छूने का मजा भी लेती रही.

मेरे ३८ इंच के बड़े बड़े वक्ष सिर्फ ब्रा में देखकर उसका कड़क लंड और भी तन रहा था.

अब तो रूपेश अपनी छोटी से अंडरवियर में उसका खड़ा हुआ लंड छुपाने की कोशिश भी नहीं कर रहा था. उसका वह तगड़ा लौड़ा देख कर तो मेरी चुतसे कामरस की हलकी धरा निकली.

करीब एक घंटे तक मैं रूपेश के और राज सुनीता के अंगोंको छूने का मजा लेते रहे.

जैसे ही फोटोशूट पूरी हुई, सारिका को गोदी में उठाकर रूपेश हमारे बैडरूम में चला गया. दो घंटे तक बैडरूम बंद रहा और जबरदस्त चुदाई के आवाज़े अंदर से आ रही थी. मैं और राज बहार सोफे पर और बेड पर अलग अलग पोजेस में चुदाई कर रहे थे. माहौल एकदम गर्म हो गया था और हम दोनों पति पत्नी पूरी तरह से कामवासना की आग में झुलस रहे थे.

उस रात मुझे घोड़ी बनाकर चोदते हुए राज ने आखिर अपने दिल की बात पूंछ ही डाली, "सुनीता रानी, क्या तुम हमारी अधूरी कहानी पूरी करना चाहोगी?"

मैंने जानबूझ कर नादान बनते हुए पूंछा, "कैसे करेंगे मेरे राजा?"

मेरी गीली चुत में एक और झटका लगाते हुए राज ने बिना हिचकिचाते हुए कह दिया, "नीरज और निकिता की जगह रूपेश और सारिका।"

वैसे गोरा चिट्टा और हैंडसम रूपेश मुझे भी बेहद पसंद था मगर अपने पति से खुद की बेहेन को चुदवाने के बारे में मैं थोड़ी सोच में पड गयी.

मैंने राज से कहा, "ठीक हैं मेरे राजा, मैं सारिका से धीरे धीरे इन डायरेक्टली बात छेड़कर देखती हूँ."

फिर राज भी ख़ुशी ख़ुशी मुझे लम्बे समय तक चोदता रहा और फिर अपने खड़े लौड़े का सारा वीर्य उसने मेरे मुँह में डाल दिया। मुझे वीर्य पीना बड़ा अच्छा लगता हैं और फिर मैं भी तो रूपेश से चुदवाने के ख़याल से काफी नशीली हो गयी थी. उस रात राजने दो बार और मुझे चोदा और दोनों बार हम सारिका और रूपेश का नाम लेकर एक दुसरे को और भी ज्यादा उत्तेजित करते रहे.

गर्मी के मौसम में एक रात को अचानक बिजली चली गयी. हमारे बैडरूम का एयर कंडीशनर और बाहर के रूम का पंखा सब बंद. किसी को भी अब नींद नहीं आ रही थी. हम दोनों भी बाहर आ गए, राज सिर्फ लुंगी में और मैंने सिर्फ घुटने तक की पतली सी स्लीवलेस नाइटी पहनी थी. बाहर आकर देखा तो रूपेश सिर्फ शॉर्ट्स में और सारिका भी पतली से स्लीवलेस नाइटी में थी. कुछ देर बाते करके, हाथ से पंखा करके भी हो गया. अब हॉल की सारी खिड़किया खोल दी और हम दोनों जोड़े जमीन पर सिर्फ चटाई बिछा कर पास पास सो गए.

लेटते ही राज की हरकते चालू हो गयी, और मैंने थोड़ी देर तक उसे रोकने का असफल प्रयास किया। उसके बाद हम दोनों अँधेरे में चालु हो गए, फिर लगा की बाजु की चटाई भर धामधूम हो रही है. अब तो मेरा सब्र का बांध टूट गया और राज भी जोर शोरोसे मेरी चुत में अपना लौड़ा डालकर चोदने लगा. पूरे हॉल में मम्मे चूसने की, लंड पेलने की और चुत चाटने की सेक्सी आवाजे गूँज रही थी.

इस रात के बाद हम चारो एक दुसरे से पूरी तरह खुल गए. अब बिनधास्त एडल्ट जोक्स बोलना, सेक्स के बारे बाते करना और एक दुसरे के पार्टनर को छेड़ना आम हो गया. हम दोनों लड़किया चूचियोंके क्लीवेज और टाँगे दिखाकर दोनों लडकोंको दीवाना करती थी. सारिका के लिए यह सब नया था मगर मैं तो इस खेलको पहले नीरज के साथ खेल चुकी थी. बस निकिता के न मानने से नीरज का लंड नहीं मिला था.

अब ऐसा चलने लगा की दिन में जब सारिका दुकान पर होती तब रूपेश मेरे साथ छेड़छाड़ करता रहता और कभी कभी चूमा चाटी भी करता। शाम को जब रूपेश दुकान पर रहता था तब मेरा सेक्सी पति सारिका के साथ छेड़छाड़ करता था. कभी कभी शामको रूपेश का हाँथ बटाने के बहाने मैं दूकान पर चली जाती ताकि राज को सारिका के साथ और भी ज्यादा छूट मिल जाए.

एक दो बार तो राज ने मेरे और सारिका साथ में बैठ कर वाइन पीते हुए हॉट सेक्सी फिल्म लगाई और बारी बारी हम दोनोंको आलिंगन चुम्बन करते रहता. मैंने देखा था की सारिका अब राज से पूरी तरहसे खुल गयी थी और उसके सामने अपने मम्मोंका और मांसल जांघोंका प्रदर्शन बिनधास्त करती. रात में चुदाई के समय मैं मेरी और रूपेश की दोपहर की हरक़तोंके बारे में बताके राज को और भी ज्यादा उत्तेजित करती और फिर वो भी बड़े प्यारसे मुझे चोदता था.

एक रात को जब राज मेरी गीली चुत और चुत का दाना चाट रहा था तब मैंने उस दिन दोपहर वाला किस्सा बताया.

मैंने कहा, "आह मेरे राजा, आज मैं रूपेश को कोल्ड कॉफी का ग्लास दे रही थी और मस्ती मस्ती में वो उसकी शर्ट पे गिर गया. मैंने तुरंत उसका शर्ट और बनियान उतारकर उसकी बालोंसे भरी छाती को साफ़ किया. पानीसे साफ़ करने के बाद थोड़ी देरतक सहलाया और उसके दोनों निप्पल को भी उँगलियों में लेकर रगड़ा."

"अरे वाह, उसका तो लंड बिलकुल खड़ा हो गया होगा मेरी जान," एकदम सेक्सी आवाज में राज बोल दिया.

मेरी यह सेक्सी बात सुनते हुए उसका खुदका लंड एकदम कड़क हो गया था.

मैं: "हाँ, मैंने उसकी जीन्सपर से महसूस किया. मैं चाहती हूँ की हम चारों और भी खुल जाए और नजदीक आये, ताकि तुम्हे सारिका की गोरी चुत और मुझे रूपेश का गर्म कड़क लौड़ा मिल जाए.. आह ऐसी ही चाटते रहो डार्लिंग"

राज: "मेरे खयाल से, रूपेश तो राजी हो जायेगा। तुम दिनके समय जब सरिकाके साथ होती हो तब उसके सामने मेरी खुलके तारीफ़ करो. ताकि वो भी इस अदलाबदली के खेलमें आ जाए."

मैं: "कर रही हूँ मेरे राजा, पूरी कोशिश कर रही हूँ. मुझे भी तो रूपेश से चुदना है मेरी जान!"

अब इतना सब सुनने के बाद राज से और रहा नहीं गया और उसने घोड़ी बनाकर मुझे जबरदस्त चोद दिया. दस मिनट बाद उसने पूरा वीर्य मेरी योनि में छोड़ दिया.

 
अगले ही दिन धुआंधार चुदाई के बाद मैं बेहोशी में सो गयी थी. तब राज आधी रातको उठकर रसोईघर से पानी पीकर बैडरूम की तरफ वापिस आ रहा था. तभी उसने देखा की रूपेश गहरी नींद सोया हुआ था और सारिका सोफेपर बैठकर टीवी के रिमोट से चैनल बदल कर कुछ देख रही थी. अपनेआप उसके कदम मेरी सुन्दर और सेक्सी बहन की तरफ बढे.

राज: "क्या हुआ सारिका, लगता हैं नींद नहीं आ रही हैं."

सारिका: "हाँ राज भैया, मैं आज दिन में थोड़ा सो गयी थी इसलिए अब रात काली हो रही है. और आप?"

सोफेपर उसके बाजू बैठते हुए उसने कहा, "कुछ नहीं यार, सुनीता भी गहरी नींदमें हैं और मैं पानी पीने आ गया था."

उसकी काली स्लीवलेस नाइटी में गोरी बाहे, उन्नत उभार और पैर चमक रहे थे.

वैसे भी राज गोरी निकिता को नंगा देखकर गोरी लड़की को चोदने के लिए उतावला था ही.

"क्या देख रही हो टीवी पर?"

"कुछ नहीं ऐसे ही बोर हो गयी इसलिए टाइमपास कर रही थी."

"चलो टाइमपास ही करना हैं तो कुछ गेम खेलते हैं, मजा भी आएगा और वक़्त भी काट जाएगा।"

"कैसा गेम भैया?"

राज ने ताश के पत्ते निकालते हुए कहा, "चार चार पत्ते बाटेंगे, जिसके पास छोटे पत्ते आये वो हार गया. फिर उसे जीतने वाले की एक बात मानना पड़ेगा।"

सारिका: "बढ़िया है राज भैया, आप के पास तो एक से एक बढ़िया तरीके रहते हैं!"

"सारिका, तुम इतनी प्यारी हो की तुम्हें मेरी हर बात अच्छी लगती हैं," राज ने उसके गाल को चूमते हुए कहा.

राज को पहली चाल में आठ, तीन, पांच और दो आये. सारिका को एक्का, रानी, आठ और तीन मिले.

अब राजने सारिका से पूंछा, "चलो तुम जीत गयी, बोलो मेरे लिए क्या पनिशमेंट हैं?"

सारिका बोली, "राज भैया, मेरे पैरों की मालिश करो."

राज किचन से बादाम का तेल कटोरी में लेकर आया और उसकी नाइटी को घुटनोंके ऊपर उठाकर उसके पैरोंकी मालिश करने लगा. राज अपने मजबूत पँजोंकी ताकतसे उसके मुलायम गोरे पैर सहलाने लगा और उसे भी अच्छा लगने लगा.

सारिका: "वा राज भैया, आप तो अच्छी खासी मालिश भी कर लेते हो!"

दो मिनट के बाद अगली चाल चली. अब राज को नौ, गुलाम, एक्का और चार आये. सारिका को दो, सात, रानी और दो मिले.

उसकी आंखोंमे आँखें डालकर सारिका अपनी मीठी आवाज में बोली, "अब आप जीत गए. बोलो मेरे लिए क्या हुकुम हैं?"

राज: "मेरी छाती और पीठ को सेहलाओ।"

सारिका राज के नजदीक आकर उसकी पीठपर अपने मुलायम हाँथोंसे सहलाने लगी. मेरे पति के बदन की खुशबू से वह भी शायद गर्म हो रही थी. एक दो बार उस नंगी पीठपर उसने हलके चुम्बन भी जड़ दिए.

सारिकाने कहा, "अब मेरी तरफ पलटो राज भैया।"

जैसे ही राज पलटा सारिका के हाथ राज की चौड़ी छाती से खेलने लगे. अब बेताब राज ने धीरे से उसे पास खींचा और वो धीरे से छाती को और दोनों निप्पल को किस करने लगी.

सारिका: "आह कितनी अच्छी परफ्यूम लगाते हो राज भैया, अभी तक महक रहे हो.. आह!"

जैसे ही राज ने उसके सर पर हाथ रखा और उसे और नजदीक खींचना चाहा, वो थोड़ा शर्माके पीछे हटी.

 
Back
Top