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“तुम तो सीक्रेट सेल के बारे में वहुत कुछ जानते हो ।" बलवंत राव सख्त हैरानी से बोला ।
"इसमे हैरानी की क्या बात है सर! यह खुलासा तो वहुत पहले ही विकीलीक्स के द्वारा किया जा चुका है, जो दुनिया के सभी देशों के ऐसे छुपे सीक्रेटस को सामने लाने के लिए जानी जाती है । आपने मुझसे पूछा कि स्रीक्रेट सेल के बारे में मैं क्या जानता हूं मैंने बता दिया । अब मेहरबानी करके अगर आप मेरे सवाल का जवाब दे दें तो आपका उपकार होगा ।"
"सवाल पूछो ।"
"सवाल धनंजय को लेकर है । सीक्रेट सेल के चीफ़ को कत्ल करने के बाद उसका क्या हुआ ?"
" होना क्या था! उसने अपने एक उच्चाधिकारी का कत्ल किया था । इस इल्जाम में गिरफ्तार कर लिया गया । अदालत ने उसे पंद्रह साल कैद की सजा सुनाई और वह तिडाड़ चला गया ।"
"यह तो सरासर नाइंसाफी हुई सर । दिनेश सिंह गद्दार था । देशद्रोही था । उसका जुर्म माफी के लायक नहीं था । उस अकेले इंसान की वजह से सीक्रेट सेल जैसी संस्था इतिहास बन गई थी । धनंजय की जगह मैं होता तो शायद मैंने भी यहीं किया होता ।"
“बेवकूफों वाली बातें मत करो, कानून यह नहीं देखता कि जिसे तुमने मारा हैं वह राम था या रावण । उसकी नजर में कत्ल सिर्फ कत्ल है और वह कोई आम आदमी हो या खास । कानून कातिल को वही सजा देता है, जो उसकी होती है ।"
"तो धनंजय इस वक्त तिहाड़ जेल में है!"
"नहीं !"
''क्यों ?" होलकर की आंखें बलवंत राव पर टिक गई…“क्या वह जेल से फरार हो गया!''
"ऐसा कुछ भी नहीं है ।"
"फिर? "
"धनंजय वह सदमा बर्दाश्त न कर सका था । उपर से जेल की यातना उस पर बहुत भारी गुजरी थी । परिणामस्वरूप वह अपना दिमागी संतुलन खो बैठा और एक रोज तिहाड़ जेल के अपने बैरक में ही फांसी लगाकर खुद को खत्म का लिया !"
"मतलब धनंजय मर चुका है?"
“दुर्भाग्य से यह सच है ।"
होलकर अपलक बलवंत राव को देखने लगा ।
उसकी आंखों में उस वक्त ऐसे भाव थे कि बलवंत राव न चाहते हुए भी अाशंकित हो उठा । बोला…“तुम मेरी तरफ़ इस तरह देख रहे हो होलकर?"
होलकर बलवंत को उसी तरह देखता हुआ बोला-"क्या अपको यकीन है सर कि सीक्रेट कमांडो जैसे हाहाकारी लड़ाके तैयार करने वाला शख्स इतना कमजोर हो सकता है, जो जेल की मामूली-सी यातना से अपना दिमागी संतुलन खो बैठा और खुद को खत्म कर लिया?"
"तुम्हारा सवाल मुनासिब है होलकर ।' बलवंत राव भावहीन स्वर में बोला-'"धनंज़य की सुसाइड के वक्त भी या सवाल जोरों से उठा था और उसके सुसाइड केस की बाकायदा जांच भी हुई थी । उसमे धनंजय के सुसाइड किए जाने की पुष्टि हुई थी लेकिन ये सब गुजरी बाते है । यह अध्याय अब पूरी तरह बंद हो चुका है फिर तुम गड़े मुर्दे क्यों उखाड़ रहे हो?"
" क्योंकि मुझे पूरा यकीन है कि अाप झूठ बोल रहे है ।" होलकर मुकम्मल दृढता से बोला ।
"क्या?" बलवंत राव ने बेहद सख्त नजरों से होलकर को घूरा था-----“मैं झूठ बोल रहा हूं ? क्या झूठ बोला है मैंने?"
" आपने धनंजय की खुदकुशी बारे में झूठ बोला है सर?" होलकर अपने एक---एक शब्द पर जोर देता बोला------"सच यह है कि धनंजय मरा नहीं बल्कि जिंदा है और वह इसी शहर में है ।"
होलकर के उस रहस्योंदूघाटन पर बलवंत राव बुरी तरह चौंका था--"धनंजय जिंदा है! यह कैसे हो सकता है?"
"मुझे नहीं पता यह कैसे हुआ लेकिन यह सच है कि धनंजय जिंदा है और सही सलामत है ।"
"नामुमकिन !" बलवंत राव के जबड़े कस गए-------"ऐसा हरगिज नहीं हो सकता । धनंजय को मरे पूरा एक साल हो गया है । उसकी लाश मैंने खुद अपनी आंखों से देखी थी ।"
"मेरे पास सबूत हैं ।" होलकर ने एक और 'धमाका' किया ।
‘बलवंत ने चिहुंककर उसे देखा…“धनंजय के जिंदा होने के?”
"हां ।"
''दिखाओ ।"
होलकर ने एक लिफाफा बलवंत की मेज पर सरका दिया ।
”क्या है इसमें?"
" खोलकर देखिए ।"
गहरे सस्पेंस में फंसे बलवंत राव ने लिफाफा खोला ।
उसके हाथों में फिगर प्रिंट के कई सैंपल आ गए ।
वे एक से ज्यादा लोगों के थे ।
हर प्रिंट के सैंपल पर एबीसीडी के रूप में कोडवर्ड दर्ज थे ।
उनके अलावा लिफाफे में और कुछ भी नहीं था ।
"यह सब क्या है होलकर?” बलवंत राव का सस्पेंस वाकी बढ़ गया था-"किसके फिगर प्रिंटस है ये?”
"कई अलग-अलग लोंगों के है सर ।” होलकर पुख्ता स्वर में बोला-------"जिनमें से एक फिगर प्रिंट धनंजय का है । उस पर धनंजय के नाम का पहला अक्षर ही अंकित है ।"
“धनंजय के फिगर प्रिंट तुम्हारे पास कहां से आए?"
"तिहाड़ से ।"
"तुम दिल्ली गये थे ?"
" ऐसा कैसे हो सकता है सर, आपके द्वारा लगाई गई पाबंदी के मुताबिक मैं तो मुम्बई से बाहर ही नहीं जा सकता ।"
"फिर ये फिंगर प्रिंट्स?"
" पेड़ गिनकर क्या करेगे! आम खाइए न ।"
"हूं । ये दूसरा फिगर प्रिंट किसका है, जिस पर एन लिखा है?"
“वह नवाब का फिगर प्रिंट है ।"
"नवाब? वह माफिया डॉन?"
"जी ।"
बलवंत का कौतूहल बढ़ता ही जा रहा था-------------खैर, ये तीसरा किसका है, 'एन' को रिमार्क के साथ रिपीट किया गया है ।"
"वह भी नवाब का ही है?"
“तुम्हारा मतलब है कि इसमें नवाब के दो-दो फिंगर प्रिंट हैं?"
"बच्चा भी जानता है सर कि एक इंसान के दो अलग----अलग फिंगर प्रिंटस नहीं हो सकते ।"
"इसका मतलब ये दोनों प्रिंट नवाब के नहीं हैं । तो फिर ये किसके फिगर प्रिंटूस हैं? और देखो, मुझें किश्तों में मत बताओ, न ही सस्पेंस क्रिएट करने की कोशिश करों । जो भी कहना है बगैर किसी भूमिका के साफ़-साफ कहो ।"
"वही कर रहा हूं सर ।" होलकर सहमति में सिर हिलाता हुआ बोला……""कल मेरी मुलाकात नवाब से हुई थी ।"
" तुम उससे क्यो मिले थे?"
"क्योंकि मिशन मुस्तफा में मुझे नवाब का हाथ होने के स्पष्ट संकेत मिले थे ।"
“कैसे संकेत?"
“जिन दो हैलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल दहशतगर्दों ने किया था नवाब के ही थे ।"
"आई सी! इस मामले की जांच कर रही टीम ने तो अभी तक ऐसा कुछ भी जाहिर नहीं किया?"
"आपकी जांच टीम क्या कर रही है, और क्या नहीं, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता सर, लेकिन मेरी तफ्तीश में नवाब का नाम सबसे अहम सस्पेक्ट के तौर पर सामने आया है । भले ही मेरी तपत्तीश की अधिकारिक तौर पर कोई अहमियत नहीं है लेकिन उससे निकले अहम नतीजे को दरकिनार नहीं किया जा सकता ।"
"आगे बोलो । फिर क्या हुआ ?"
"नवाब से मैं पहले से वाकिफ़ था । जब मैं सस्पेंड नहीं हुआ था, तो किसी केस में मेरी उससे कई मुलाकातें हुई थी । विदेशी कम्यूटर हैकरों के कल वाले मामले में उसका नाम सामने आया था । मतलब यह कि नवाब से मैं बखूबी वाकिफ धा । उसके हाव भाव , उसके बात करने के लहजे वगैेरह को मैं खूब अच्छी तरह पहचानता था !
"नवाब से मैं पहले से वाकिफ़ था । जब मैं सस्पेंड नहीं हुआ था, तो किसी केस में मेरी उससे कई मुलाकातें हुई थी । विदेशी कम्यूटर हैकरों के कल वाले मामले में उसका नाम सामने आया था । मतलब यह कि नवाब से मैं बखूबी वाकिफ धा । उसके हाव भाव , उसके बात करने के लहजे वगैेरह को मैं खूब अच्छी तरह पहचानता था !-----! मगर इस बार जब मैं नवाब से मिला तो वहाँ मुझें वह नवाब नजर नहीं आया, जिससे पहले भी मिल चुका था ।"
"इसका क्या मतलब हुआ ?"
"मुझे यकीन करना पड़ा कि वह नवाब का वहुत उम्दा अभिनय कर रहा था । उसका यह अभिनय सारी दुनिया को धोखा दे सकता था लेकिन मुझे धोखा नहीं दे सका । मेरी नजरों में नवाब का किरदार पहले ही संदिग्ध था, अब और ज्यादा संदिग्ध हो उठा । लेकिन मैंने अपना संदेह उस पर जाहिर नहीं किया और पूछताछ की फारमेलिटी पूरी करके वहां से चला अाया ।"
"इसमे हैरानी की क्या बात है सर! यह खुलासा तो वहुत पहले ही विकीलीक्स के द्वारा किया जा चुका है, जो दुनिया के सभी देशों के ऐसे छुपे सीक्रेटस को सामने लाने के लिए जानी जाती है । आपने मुझसे पूछा कि स्रीक्रेट सेल के बारे में मैं क्या जानता हूं मैंने बता दिया । अब मेहरबानी करके अगर आप मेरे सवाल का जवाब दे दें तो आपका उपकार होगा ।"
"सवाल पूछो ।"
"सवाल धनंजय को लेकर है । सीक्रेट सेल के चीफ़ को कत्ल करने के बाद उसका क्या हुआ ?"
" होना क्या था! उसने अपने एक उच्चाधिकारी का कत्ल किया था । इस इल्जाम में गिरफ्तार कर लिया गया । अदालत ने उसे पंद्रह साल कैद की सजा सुनाई और वह तिडाड़ चला गया ।"
"यह तो सरासर नाइंसाफी हुई सर । दिनेश सिंह गद्दार था । देशद्रोही था । उसका जुर्म माफी के लायक नहीं था । उस अकेले इंसान की वजह से सीक्रेट सेल जैसी संस्था इतिहास बन गई थी । धनंजय की जगह मैं होता तो शायद मैंने भी यहीं किया होता ।"
“बेवकूफों वाली बातें मत करो, कानून यह नहीं देखता कि जिसे तुमने मारा हैं वह राम था या रावण । उसकी नजर में कत्ल सिर्फ कत्ल है और वह कोई आम आदमी हो या खास । कानून कातिल को वही सजा देता है, जो उसकी होती है ।"
"तो धनंजय इस वक्त तिहाड़ जेल में है!"
"नहीं !"
''क्यों ?" होलकर की आंखें बलवंत राव पर टिक गई…“क्या वह जेल से फरार हो गया!''
"ऐसा कुछ भी नहीं है ।"
"फिर? "
"धनंजय वह सदमा बर्दाश्त न कर सका था । उपर से जेल की यातना उस पर बहुत भारी गुजरी थी । परिणामस्वरूप वह अपना दिमागी संतुलन खो बैठा और एक रोज तिहाड़ जेल के अपने बैरक में ही फांसी लगाकर खुद को खत्म का लिया !"
"मतलब धनंजय मर चुका है?"
“दुर्भाग्य से यह सच है ।"
होलकर अपलक बलवंत राव को देखने लगा ।
उसकी आंखों में उस वक्त ऐसे भाव थे कि बलवंत राव न चाहते हुए भी अाशंकित हो उठा । बोला…“तुम मेरी तरफ़ इस तरह देख रहे हो होलकर?"
होलकर बलवंत को उसी तरह देखता हुआ बोला-"क्या अपको यकीन है सर कि सीक्रेट कमांडो जैसे हाहाकारी लड़ाके तैयार करने वाला शख्स इतना कमजोर हो सकता है, जो जेल की मामूली-सी यातना से अपना दिमागी संतुलन खो बैठा और खुद को खत्म कर लिया?"
"तुम्हारा सवाल मुनासिब है होलकर ।' बलवंत राव भावहीन स्वर में बोला-'"धनंज़य की सुसाइड के वक्त भी या सवाल जोरों से उठा था और उसके सुसाइड केस की बाकायदा जांच भी हुई थी । उसमे धनंजय के सुसाइड किए जाने की पुष्टि हुई थी लेकिन ये सब गुजरी बाते है । यह अध्याय अब पूरी तरह बंद हो चुका है फिर तुम गड़े मुर्दे क्यों उखाड़ रहे हो?"
" क्योंकि मुझे पूरा यकीन है कि अाप झूठ बोल रहे है ।" होलकर मुकम्मल दृढता से बोला ।
"क्या?" बलवंत राव ने बेहद सख्त नजरों से होलकर को घूरा था-----“मैं झूठ बोल रहा हूं ? क्या झूठ बोला है मैंने?"
" आपने धनंजय की खुदकुशी बारे में झूठ बोला है सर?" होलकर अपने एक---एक शब्द पर जोर देता बोला------"सच यह है कि धनंजय मरा नहीं बल्कि जिंदा है और वह इसी शहर में है ।"
होलकर के उस रहस्योंदूघाटन पर बलवंत राव बुरी तरह चौंका था--"धनंजय जिंदा है! यह कैसे हो सकता है?"
"मुझे नहीं पता यह कैसे हुआ लेकिन यह सच है कि धनंजय जिंदा है और सही सलामत है ।"
"नामुमकिन !" बलवंत राव के जबड़े कस गए-------"ऐसा हरगिज नहीं हो सकता । धनंजय को मरे पूरा एक साल हो गया है । उसकी लाश मैंने खुद अपनी आंखों से देखी थी ।"
"मेरे पास सबूत हैं ।" होलकर ने एक और 'धमाका' किया ।
‘बलवंत ने चिहुंककर उसे देखा…“धनंजय के जिंदा होने के?”
"हां ।"
''दिखाओ ।"
होलकर ने एक लिफाफा बलवंत की मेज पर सरका दिया ।
”क्या है इसमें?"
" खोलकर देखिए ।"
गहरे सस्पेंस में फंसे बलवंत राव ने लिफाफा खोला ।
उसके हाथों में फिगर प्रिंट के कई सैंपल आ गए ।
वे एक से ज्यादा लोगों के थे ।
हर प्रिंट के सैंपल पर एबीसीडी के रूप में कोडवर्ड दर्ज थे ।
उनके अलावा लिफाफे में और कुछ भी नहीं था ।
"यह सब क्या है होलकर?” बलवंत राव का सस्पेंस वाकी बढ़ गया था-"किसके फिगर प्रिंटस है ये?”
"कई अलग-अलग लोंगों के है सर ।” होलकर पुख्ता स्वर में बोला-------"जिनमें से एक फिगर प्रिंट धनंजय का है । उस पर धनंजय के नाम का पहला अक्षर ही अंकित है ।"
“धनंजय के फिगर प्रिंट तुम्हारे पास कहां से आए?"
"तिहाड़ से ।"
"तुम दिल्ली गये थे ?"
" ऐसा कैसे हो सकता है सर, आपके द्वारा लगाई गई पाबंदी के मुताबिक मैं तो मुम्बई से बाहर ही नहीं जा सकता ।"
"फिर ये फिंगर प्रिंट्स?"
" पेड़ गिनकर क्या करेगे! आम खाइए न ।"
"हूं । ये दूसरा फिगर प्रिंट किसका है, जिस पर एन लिखा है?"
“वह नवाब का फिगर प्रिंट है ।"
"नवाब? वह माफिया डॉन?"
"जी ।"
बलवंत का कौतूहल बढ़ता ही जा रहा था-------------खैर, ये तीसरा किसका है, 'एन' को रिमार्क के साथ रिपीट किया गया है ।"
"वह भी नवाब का ही है?"
“तुम्हारा मतलब है कि इसमें नवाब के दो-दो फिंगर प्रिंट हैं?"
"बच्चा भी जानता है सर कि एक इंसान के दो अलग----अलग फिंगर प्रिंटस नहीं हो सकते ।"
"इसका मतलब ये दोनों प्रिंट नवाब के नहीं हैं । तो फिर ये किसके फिगर प्रिंटूस हैं? और देखो, मुझें किश्तों में मत बताओ, न ही सस्पेंस क्रिएट करने की कोशिश करों । जो भी कहना है बगैर किसी भूमिका के साफ़-साफ कहो ।"
"वही कर रहा हूं सर ।" होलकर सहमति में सिर हिलाता हुआ बोला……""कल मेरी मुलाकात नवाब से हुई थी ।"
" तुम उससे क्यो मिले थे?"
"क्योंकि मिशन मुस्तफा में मुझे नवाब का हाथ होने के स्पष्ट संकेत मिले थे ।"
“कैसे संकेत?"
“जिन दो हैलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल दहशतगर्दों ने किया था नवाब के ही थे ।"
"आई सी! इस मामले की जांच कर रही टीम ने तो अभी तक ऐसा कुछ भी जाहिर नहीं किया?"
"आपकी जांच टीम क्या कर रही है, और क्या नहीं, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता सर, लेकिन मेरी तफ्तीश में नवाब का नाम सबसे अहम सस्पेक्ट के तौर पर सामने आया है । भले ही मेरी तपत्तीश की अधिकारिक तौर पर कोई अहमियत नहीं है लेकिन उससे निकले अहम नतीजे को दरकिनार नहीं किया जा सकता ।"
"आगे बोलो । फिर क्या हुआ ?"
"नवाब से मैं पहले से वाकिफ़ था । जब मैं सस्पेंड नहीं हुआ था, तो किसी केस में मेरी उससे कई मुलाकातें हुई थी । विदेशी कम्यूटर हैकरों के कल वाले मामले में उसका नाम सामने आया था । मतलब यह कि नवाब से मैं बखूबी वाकिफ धा । उसके हाव भाव , उसके बात करने के लहजे वगैेरह को मैं खूब अच्छी तरह पहचानता था !
"नवाब से मैं पहले से वाकिफ़ था । जब मैं सस्पेंड नहीं हुआ था, तो किसी केस में मेरी उससे कई मुलाकातें हुई थी । विदेशी कम्यूटर हैकरों के कल वाले मामले में उसका नाम सामने आया था । मतलब यह कि नवाब से मैं बखूबी वाकिफ धा । उसके हाव भाव , उसके बात करने के लहजे वगैेरह को मैं खूब अच्छी तरह पहचानता था !-----! मगर इस बार जब मैं नवाब से मिला तो वहाँ मुझें वह नवाब नजर नहीं आया, जिससे पहले भी मिल चुका था ।"
"इसका क्या मतलब हुआ ?"
"मुझे यकीन करना पड़ा कि वह नवाब का वहुत उम्दा अभिनय कर रहा था । उसका यह अभिनय सारी दुनिया को धोखा दे सकता था लेकिन मुझे धोखा नहीं दे सका । मेरी नजरों में नवाब का किरदार पहले ही संदिग्ध था, अब और ज्यादा संदिग्ध हो उठा । लेकिन मैंने अपना संदेह उस पर जाहिर नहीं किया और पूछताछ की फारमेलिटी पूरी करके वहां से चला अाया ।"