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जैसे ही हम बाहर निकले, राशि भाभी ने पूछा- “क्यों किशोर, कैसा रहा? मजा आया की नहीं? अगर ना आया हो तो बोलना और भी तरीके हैं हमारे पास…” बोलकर हँसने लगी।
मैं- “मजा तो आएगा ही ना भाभी। इतनी सारी मुनियों का प्यार जो मिल रहा है मेरे मुन्ने को…” और फिर ऐसे ही मजाक में बातें होती रहीं।
इस तरह तीन दिन में चार-चार भाभियों (राशि, प्रीति, सोनिया और राशि की सहेली रसीला) को चोदने के बाद मैं तो जैसे चोदने में मास्टर बन गया था। अब मैं अपने लण्ड को लंबे समय तक झड़ने से रोक सकता था, और सामने वाली के दो गोल हो जायें तब तक अपना एक शाट ही चालू रख सकता था।
दूसरे दिन सुबह में मुझे सोनिया भाभी ने जल्दी उठाया। चाचा और चाची दोनों आज बिल्कुल सबेरे ही शहर चले गये थे, रिश्तेदारों के यहाँ पर, कुछ बेचना था।
तभी सोनिया भाभी आकर मुझे बोली- “देवरजी, कैसी कटी रात? सपने में भी किसी को चोदा या नहीं?”
सुनकर सभी भाभियां हँसने लगी। मैं भी हँस दिया।
सोनिया बोली- चलो आप तैयार हो जाओ, आपको मेरे साथ मेरी माँ के घर जाना है।
मैंने पूछा- कहां है वो?
सोनिया बोली- “इधर ही आधे घंटे का रास्ता है, मैंने तुम्हारे भैया को बोल रखा था, इसलिए वो मोटरसाइकल छोड़ गये हैं, हमारे लिए…”
मैं- “लेकिन वो… आज तो भाभी आप मुझे वो…” बोलकर मैं रुक गया।
सोनिया समझ गई और बोली- “देवरजी, टेन्शन मत लो। आप सिर्फ मेरे साथ चलो। बाकी का काम मेरे ऊपर छोड़ दो…”
फिर मैं और भाभी साथ में नहाए। नहाते वक़्त भी बहुत मस्ती की। और मेरा पसंदीदा ब्रेकफास्ट (सीधा चूची का दूध) राशि भाभी और शोनिया भाभी से किया। और हम एक ही रूम में तैयार हो गये। उसने मेरे सामने ही कपड़े बदले। फिर हम बाइक पे उसकी माँ के गाँव जाने को निकले। रास्ते में वो मेरे से चिपक के बैठी थी, जिससे उसके भरी-भरी चूचियां मेरी पीठ पे दबती रहती थीं।
फाइनली जब हम वहां पहुँचे तो उनके घरवालों ने हमारा स्वागत किया। फिर जनरल बातें होती रही। थोड़ी देर बाद भाभी कहीं बाहर निकली और पीछे मुड़कर मेरे को स्माइल दिया। तो मुझे पता लग गया की मेरा काम करने ही जा रही है।
थोड़ी देर के बाद जब वो वापस आई तो मुझे अगूठा दिखाकर ‘काम हो गया’ बोला, जिसका मतलब था की मेरा काम होने वाला है।
दोपहर को खाना खाने के बाद हम आराम करने के लिए अलग कमरे में चले गये।
भाभी भी वहीं पे आ गई, और बोली- “देवरजी, लण्ड थाम के रखिये, उसकी तो आज फटने वाली है…”
मैं- “मैं तैयार ही हूँ भाभी, फाड़ने के लिए…”
तभी एक सुंदर सी छोटी सी लड़की ने कमरे में प्रवेश किया। भाभी ने मुझसे उसका परिचय करवाया की ये काजल है और 10 वीं कक्षा में पढ़ती है।
बाजू में ही रहती है और तुमसे कुछ पढ़ाई करना चाहती है। भाभी उसके सामने पढ़ाई बोली, क्योंकी वो शर्मा जाती। वैसे वो उससे सब बात करके ही आई थी।
मैं तो बस उसको देखता ही रह गया। क्या गजब का माल थी। एक अनछुई सी कली थी, जो की पहली बार किसी से चुदने वाली थी।
वो एकदम गोरी-गोरी, हाइट 5’4” और रंग एकदम गोरा दूध जैसा था, पानी पिए तो वो भी गले से उतरता दिखे।
उसके होंठ एकदम कोमल, फूल की पंखुड़ी जैसे। अगर जोर से चूसो तो खून बह जाए। स्तन मीडियम साइज 32” के जो की उसकी जवानी का सबूत दे रहे थे। इतने टाइट और उठे हुए की बस दिल करे की उसे हाथों में ही थामे रखे।
कमर एकदम पतली सी, सिर्फ 26” की, दो हाथों को घेर लो तो उसमें समा जाए। नितंब (कूल्हे) इतने सुंदर 34” के साइज के, जो की अभी-अभी जवानी चढ़ने से हुए हों। टाँगें गोरी-गोरी और बीच में जांघों से एकदम जुड़ी जुई, जो की उसकी कुवारेपन का सबूत हैं।
चलती तो कूल्हे ऐसे मटकते, जो बताते थे की अभी मुझे चोदना बाकी है। पूरा वर्णन करें तो एक सुंदर सी परी जैसी। मुझे यकीन नहीं आता था की वो चुदने को तैयार है, वो भी किसी अंजाने के साथ। मैं तो अपने आपको बहुत भाग्यषाली मान रहा था।
बाकी तो सभी को पत्नी ही मिलती है, और वो भी शायद ही कुँवारी हो। लेकिन मुझे आज यहां एक छोटी सी कुँवारी लड़की जो की अभी ही जवानी में कदम रख रही है, वो मिल रही थी।
भाभी उसे हमारे कमरे में लाई और हमने साथ में थोड़ी जनरल बात की। फिर भाभी बोली- “देवरजी, अभी नहीं, आप रात का इंतजार करो…”
मैं रात का इंतजार करने लगा। हमारे सोने की व्यवस्था गर्मियों की वजह से भाभी ने जानबूझ के छत पे की थी। वो लड़की भी पड़ोस में ही रहती थी तो उसे भी भाभी ने छत पे सोने का बोल दिया था। रात होते ही मैं बिस्तर में चला गया। आज मैं कंडोम साथ में ही लाया था। मैं नहीं चाहता था की कोई लड़की मेरे वीर्य से माँ बन जाए।
तभी भाभी थोड़े काम निपटा के ऊपर आई। उसने पारदर्शी सी नाइटी पहन रखी थी। मुझे तो हुआ की मैं उसकी अभी ही एक गोल ले लूं, लेकिन फिर सोचा कि पहला हक वो बिचारी का है जो उपना कुँवारापन मुझे दे रही है। मैंने भाभी से थोड़ी मस्ती की और थोड़ा दूध भी पिया।
तभी वो लड़की ऊपर आ गई।
भाभी बोली- “अभी रात के 8:00 ही बजे हैं तो एक-दो घन्टा सो जाओ, ताकि घर के सारे लोग भी सो जाएं…” और ऐसा ही वो लड़की को भी बताया।
मैं भाभी से चिपक के सो गया। दो घंटे बाद मेरी आँख खुली, मैंने भाभी को जगाया और बोला- “आप उसको बुला लो…”
तभी वो लड़की चुपके से छत पे कूद के हमरी छत पे आ गई। उसने पतला सा टी-शर्ट पहना था और नीचे एक बरमूडा। वो अभी छोटी थी इसलिए रात में ऐसे ही कपड़े पहनती थी। आते ही वो भाभी के साथ बैठ गई।
भाभी ने उसका हाथ मेरे हाथों में दिया और बोला- “लो, संभलो अपने माल को…” और स्माइल दी।
वो लड़की जिसका नाम काजल था वो भी शर्मा गई।
मैं पहली बार किसी हम-उम्र लड़की को छू रहा था, तो मेरे पूरे शरीर में एक करेंट सा दौड़ गया। वो क्या गरम थी। इतनी तो वो तीनों भाभियां भी नहीं थीं, क्योंकी वो सब चूसे हुए फूल थीं और ये काजल अनछुआ फूल थी।
मैंने धीरे से उसके हाथ को पकड़ा और सहलाया। फिर बोला- “काजल, शर्माओ मत। मैं तुम्हें थोड़ा सा भी दुख नहीं पहुँचाऊँगा, और एकदम आराम से प्यार करूँगा। क्योंकी तुम इतनी नाजुक हो की जैसे गुलाब का फूल…”
काजल अपनी तारीफ सुनकर शर्मा गई।
मैंने उसके चेहरे को उठाया। और आँखों में आँखें डालकर उसे देखने लगा। मैं कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता था। क्योंकी मैं उससे अपनी सुहागरात मना रहा हूँ वैसा ही लग रहा था। और एकदम प्यार से उसे औरत बनाना चाहता था।
भाभी हमें बात करते हुए देख रही थी, और मुझे सलाह देती हुई बोली- “शायद मुझे नींद आ जाए तो ध्यान रखना, उसकी चीख से नीचे कोई जाग ना जाए। वरना लेने के देने पड़ जाएंगे और बदनामी भी होगी। अगर एक रात में नहीं होता है तो बाकी का कल करना…”
मैंने बोला- “भाभी, आप बे-फिक्र रहें, मैं इस नाजुक कली को आराम से फूल बनाऊँगा। और इतना प्यार से करूँगा जैसे की मेरी सुहागरात हो और काजल मेरी बीवी हो…”
भाभी हमें देखती जा रही थी।
उधर मैंने काजल के चेहरे को हाथों में लिया, और उसके नरम गालों को सहलाने लगा। उसकी आँखें अभी भी नीचे झुकी हुई थीं।
मैं थोड़ा और नजदीक गया, उसके चेहरे को हाथों में भर लिया और उसके माथे पे एक चुम्मी लिया, फिर गालों पे, फिर कानों पे, फिर गले पे, फिर नाक पे, और फिर मेरे तपते होंठ उसके होंठों पे रख दिए।
मैंने दोनों हाथों से उसे कंधे से पकड़ रखा था। मैं काजल के होंठों को चूमते हुए एक हाथ को उसकी पीठ पे ले गया और दूसरे हाथ से कंधे पर उसकी ब्रा की पट्टी से खेलने लगा।
फिर मैंने उसके होंठों को चूसना चालू किया। उसके होंठ एकदम छोटे-छोटे और नरम-नरम थे। दूसरे हाथ को कंधे से नीचे लेता हुआ ड्रेस के गले के पास उसकी चूचियों के उपरी हिस्से पे लाया, और उसकी चूचियों की नरमाई महसूस करने लगा।
फिर हाथ थोड़ा और नीचे लेकर उसकी पूरी चूचियों को मेरी हथेली में भर लिया, और सहलाने लगा। मैं उसकी गोलाईयों पे पूरा हाथ फेर रहा था।
उसकी चूचियां 32” की साइज की होंगी लेकिन उसके पतले शरीर में वो भी बहुत बड़ी-बड़ी दिखती थीं।
मैं- “मजा तो आएगा ही ना भाभी। इतनी सारी मुनियों का प्यार जो मिल रहा है मेरे मुन्ने को…” और फिर ऐसे ही मजाक में बातें होती रहीं।
इस तरह तीन दिन में चार-चार भाभियों (राशि, प्रीति, सोनिया और राशि की सहेली रसीला) को चोदने के बाद मैं तो जैसे चोदने में मास्टर बन गया था। अब मैं अपने लण्ड को लंबे समय तक झड़ने से रोक सकता था, और सामने वाली के दो गोल हो जायें तब तक अपना एक शाट ही चालू रख सकता था।
दूसरे दिन सुबह में मुझे सोनिया भाभी ने जल्दी उठाया। चाचा और चाची दोनों आज बिल्कुल सबेरे ही शहर चले गये थे, रिश्तेदारों के यहाँ पर, कुछ बेचना था।
तभी सोनिया भाभी आकर मुझे बोली- “देवरजी, कैसी कटी रात? सपने में भी किसी को चोदा या नहीं?”
सुनकर सभी भाभियां हँसने लगी। मैं भी हँस दिया।
सोनिया बोली- चलो आप तैयार हो जाओ, आपको मेरे साथ मेरी माँ के घर जाना है।
मैंने पूछा- कहां है वो?
सोनिया बोली- “इधर ही आधे घंटे का रास्ता है, मैंने तुम्हारे भैया को बोल रखा था, इसलिए वो मोटरसाइकल छोड़ गये हैं, हमारे लिए…”
मैं- “लेकिन वो… आज तो भाभी आप मुझे वो…” बोलकर मैं रुक गया।
सोनिया समझ गई और बोली- “देवरजी, टेन्शन मत लो। आप सिर्फ मेरे साथ चलो। बाकी का काम मेरे ऊपर छोड़ दो…”
फिर मैं और भाभी साथ में नहाए। नहाते वक़्त भी बहुत मस्ती की। और मेरा पसंदीदा ब्रेकफास्ट (सीधा चूची का दूध) राशि भाभी और शोनिया भाभी से किया। और हम एक ही रूम में तैयार हो गये। उसने मेरे सामने ही कपड़े बदले। फिर हम बाइक पे उसकी माँ के गाँव जाने को निकले। रास्ते में वो मेरे से चिपक के बैठी थी, जिससे उसके भरी-भरी चूचियां मेरी पीठ पे दबती रहती थीं।
फाइनली जब हम वहां पहुँचे तो उनके घरवालों ने हमारा स्वागत किया। फिर जनरल बातें होती रही। थोड़ी देर बाद भाभी कहीं बाहर निकली और पीछे मुड़कर मेरे को स्माइल दिया। तो मुझे पता लग गया की मेरा काम करने ही जा रही है।
थोड़ी देर के बाद जब वो वापस आई तो मुझे अगूठा दिखाकर ‘काम हो गया’ बोला, जिसका मतलब था की मेरा काम होने वाला है।
दोपहर को खाना खाने के बाद हम आराम करने के लिए अलग कमरे में चले गये।
भाभी भी वहीं पे आ गई, और बोली- “देवरजी, लण्ड थाम के रखिये, उसकी तो आज फटने वाली है…”
मैं- “मैं तैयार ही हूँ भाभी, फाड़ने के लिए…”
तभी एक सुंदर सी छोटी सी लड़की ने कमरे में प्रवेश किया। भाभी ने मुझसे उसका परिचय करवाया की ये काजल है और 10 वीं कक्षा में पढ़ती है।
बाजू में ही रहती है और तुमसे कुछ पढ़ाई करना चाहती है। भाभी उसके सामने पढ़ाई बोली, क्योंकी वो शर्मा जाती। वैसे वो उससे सब बात करके ही आई थी।
मैं तो बस उसको देखता ही रह गया। क्या गजब का माल थी। एक अनछुई सी कली थी, जो की पहली बार किसी से चुदने वाली थी।
वो एकदम गोरी-गोरी, हाइट 5’4” और रंग एकदम गोरा दूध जैसा था, पानी पिए तो वो भी गले से उतरता दिखे।
उसके होंठ एकदम कोमल, फूल की पंखुड़ी जैसे। अगर जोर से चूसो तो खून बह जाए। स्तन मीडियम साइज 32” के जो की उसकी जवानी का सबूत दे रहे थे। इतने टाइट और उठे हुए की बस दिल करे की उसे हाथों में ही थामे रखे।
कमर एकदम पतली सी, सिर्फ 26” की, दो हाथों को घेर लो तो उसमें समा जाए। नितंब (कूल्हे) इतने सुंदर 34” के साइज के, जो की अभी-अभी जवानी चढ़ने से हुए हों। टाँगें गोरी-गोरी और बीच में जांघों से एकदम जुड़ी जुई, जो की उसकी कुवारेपन का सबूत हैं।
चलती तो कूल्हे ऐसे मटकते, जो बताते थे की अभी मुझे चोदना बाकी है। पूरा वर्णन करें तो एक सुंदर सी परी जैसी। मुझे यकीन नहीं आता था की वो चुदने को तैयार है, वो भी किसी अंजाने के साथ। मैं तो अपने आपको बहुत भाग्यषाली मान रहा था।
बाकी तो सभी को पत्नी ही मिलती है, और वो भी शायद ही कुँवारी हो। लेकिन मुझे आज यहां एक छोटी सी कुँवारी लड़की जो की अभी ही जवानी में कदम रख रही है, वो मिल रही थी।
भाभी उसे हमारे कमरे में लाई और हमने साथ में थोड़ी जनरल बात की। फिर भाभी बोली- “देवरजी, अभी नहीं, आप रात का इंतजार करो…”
मैं रात का इंतजार करने लगा। हमारे सोने की व्यवस्था गर्मियों की वजह से भाभी ने जानबूझ के छत पे की थी। वो लड़की भी पड़ोस में ही रहती थी तो उसे भी भाभी ने छत पे सोने का बोल दिया था। रात होते ही मैं बिस्तर में चला गया। आज मैं कंडोम साथ में ही लाया था। मैं नहीं चाहता था की कोई लड़की मेरे वीर्य से माँ बन जाए।
तभी भाभी थोड़े काम निपटा के ऊपर आई। उसने पारदर्शी सी नाइटी पहन रखी थी। मुझे तो हुआ की मैं उसकी अभी ही एक गोल ले लूं, लेकिन फिर सोचा कि पहला हक वो बिचारी का है जो उपना कुँवारापन मुझे दे रही है। मैंने भाभी से थोड़ी मस्ती की और थोड़ा दूध भी पिया।
तभी वो लड़की ऊपर आ गई।
भाभी बोली- “अभी रात के 8:00 ही बजे हैं तो एक-दो घन्टा सो जाओ, ताकि घर के सारे लोग भी सो जाएं…” और ऐसा ही वो लड़की को भी बताया।
मैं भाभी से चिपक के सो गया। दो घंटे बाद मेरी आँख खुली, मैंने भाभी को जगाया और बोला- “आप उसको बुला लो…”
तभी वो लड़की चुपके से छत पे कूद के हमरी छत पे आ गई। उसने पतला सा टी-शर्ट पहना था और नीचे एक बरमूडा। वो अभी छोटी थी इसलिए रात में ऐसे ही कपड़े पहनती थी। आते ही वो भाभी के साथ बैठ गई।
भाभी ने उसका हाथ मेरे हाथों में दिया और बोला- “लो, संभलो अपने माल को…” और स्माइल दी।
वो लड़की जिसका नाम काजल था वो भी शर्मा गई।
मैं पहली बार किसी हम-उम्र लड़की को छू रहा था, तो मेरे पूरे शरीर में एक करेंट सा दौड़ गया। वो क्या गरम थी। इतनी तो वो तीनों भाभियां भी नहीं थीं, क्योंकी वो सब चूसे हुए फूल थीं और ये काजल अनछुआ फूल थी।
मैंने धीरे से उसके हाथ को पकड़ा और सहलाया। फिर बोला- “काजल, शर्माओ मत। मैं तुम्हें थोड़ा सा भी दुख नहीं पहुँचाऊँगा, और एकदम आराम से प्यार करूँगा। क्योंकी तुम इतनी नाजुक हो की जैसे गुलाब का फूल…”
काजल अपनी तारीफ सुनकर शर्मा गई।
मैंने उसके चेहरे को उठाया। और आँखों में आँखें डालकर उसे देखने लगा। मैं कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता था। क्योंकी मैं उससे अपनी सुहागरात मना रहा हूँ वैसा ही लग रहा था। और एकदम प्यार से उसे औरत बनाना चाहता था।
भाभी हमें बात करते हुए देख रही थी, और मुझे सलाह देती हुई बोली- “शायद मुझे नींद आ जाए तो ध्यान रखना, उसकी चीख से नीचे कोई जाग ना जाए। वरना लेने के देने पड़ जाएंगे और बदनामी भी होगी। अगर एक रात में नहीं होता है तो बाकी का कल करना…”
मैंने बोला- “भाभी, आप बे-फिक्र रहें, मैं इस नाजुक कली को आराम से फूल बनाऊँगा। और इतना प्यार से करूँगा जैसे की मेरी सुहागरात हो और काजल मेरी बीवी हो…”
भाभी हमें देखती जा रही थी।
उधर मैंने काजल के चेहरे को हाथों में लिया, और उसके नरम गालों को सहलाने लगा। उसकी आँखें अभी भी नीचे झुकी हुई थीं।
मैं थोड़ा और नजदीक गया, उसके चेहरे को हाथों में भर लिया और उसके माथे पे एक चुम्मी लिया, फिर गालों पे, फिर कानों पे, फिर गले पे, फिर नाक पे, और फिर मेरे तपते होंठ उसके होंठों पे रख दिए।
मैंने दोनों हाथों से उसे कंधे से पकड़ रखा था। मैं काजल के होंठों को चूमते हुए एक हाथ को उसकी पीठ पे ले गया और दूसरे हाथ से कंधे पर उसकी ब्रा की पट्टी से खेलने लगा।
फिर मैंने उसके होंठों को चूसना चालू किया। उसके होंठ एकदम छोटे-छोटे और नरम-नरम थे। दूसरे हाथ को कंधे से नीचे लेता हुआ ड्रेस के गले के पास उसकी चूचियों के उपरी हिस्से पे लाया, और उसकी चूचियों की नरमाई महसूस करने लगा।
फिर हाथ थोड़ा और नीचे लेकर उसकी पूरी चूचियों को मेरी हथेली में भर लिया, और सहलाने लगा। मैं उसकी गोलाईयों पे पूरा हाथ फेर रहा था।
उसकी चूचियां 32” की साइज की होंगी लेकिन उसके पतले शरीर में वो भी बहुत बड़ी-बड़ी दिखती थीं।