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सब लोग एक दूसरे के गले मिल रहे थे. थोरी देर के बाद डॉक्टर बोला की वो लोग जया को घर ले जा सकते हैं. सब लोग घर वापस चले आए और घर पर सबने जया की बच्ची को स्वागत किया. शाम होते होते ससुर जी और उनके भाई घर वापस चले गये. शाम तक घर मे आने जाने वालों का ताँता बना हुआ था. उनके सारे परोसी जया और उसकी बच्ची को देखने के लिए उनके घर आ जा रहे थे. जया डेलिवरी के बाद बहुत सुस्त पर गयी थी और उसको इस समय बहुत नीद लग रही थी और देवकी जो की दो रातों से ठीक से सो नही पाई थी सोने चली गयी.
जगन बीवी और बच्चे से बहुत खुश था और वो भी बीवी के कमरे मे चला गया. अब सिर्फ़ देव और छ्हम्मो ही जाग रहे थे. वो लोग वारंडे मे बैठ कर इधर उधर की बातें कर रहे थे और थोरी देर के बाद उनकी बात सेक्स की तरफ मूर गयी. देव सास से कहा कि कैसे उसका लंड सिर्फ़ दूसरे की चुदाई देखने के बाद खरा होता है. सास उसकी बात सुन कर बोली,
"तुम्हे या तो अपने आप पर भरोसा नही है या तुम्हे कोई अन्द्रुनि बीमारी है, लेकिन कोई बात नही, मैं जब तक इन्हा हूँ तुम्हे ठीक करने की कोशिश करूँगी. लेकिन सबसे पहले मुझे तुमको टेस्ट करना है."
तबसासू ने देव की धोती खींच कर उतार दिया और देव का मुरझाया हुआ लंड को देखने लगी. वो उस लंड को हाथों मे लेकर खेलने लगी और देव से बताना शुरू किया कैसे उसका ससुर और चाचिया ससुर उनको एक मिहीना के बाद उनके घर जाने के बाद एक के बाद दूसरा उनको उलट पलट कर चोदेन्गे और कैसे वो उनकी चुदाई का मज़ा लूटेंगी, सिर्फ़ महीना दिन को छ्होर्के. महीने के दीनो मे भी वो पती और देवर का लंड चूस चूस कर उनको झारेगी और उनके लंड से निकला वीर्या को पीएगी. इन सब चुदाई की बातों को सुन कर भी देव का लंड खरा नही हुआ. फिर छ्हम्मो ने दामाद का लंड को चूसना शुरू किया लेकिन थोरी देर के बाद हार कर चुप पर गयी.
देव भी अपनी उंगलेओं से अपनी सास की चूत को उनके सारी के अंदर हाथ डाल कर खोद रहा था फिर भी उसका लंड नही खरा हुआ. आख़िर मे छ्हम्मो हार कर अपनी सारी अपनी कमर तक उठा कर लेट गयी और देव से चूत को चाटने के लिए बोली. देव खुशी खुशी सास के कहने के अनुसार उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया और मन भर कर उनकी चूत को चटा और तब तक चटा जब तक की उसकी सास के चूत से मीठा मीठा रस ना निकलने लगा. फिर भी देव का लंड खरा नही हुआ. छ्हम्मो को इस'से बहुत तकलीफ़ हुई और अपनी बेटी की भाग्या पर अफ़सोस करने लगी.
अगले कुच्छ दिन बहुत जल्दी जल्दी बीत गये. छ्हम्मो और देवकी बहुत ब्यस्त थी दोनो को जया और उसकी बची की देख भाल करनी पर रही थी. छ्हम्मो को खाना भी पकना पर रहा था. शानिबार और इतबार को घर के दोनो मर्द लोग भी बीवी और सास की मदद कर रहे थे. अब जया का नहाने का समय आ पहुँचा. वह अब पहली बार बचा पैदा होने के बाद नहाने वाली थी और इसके लिए उसको तेल लगाना ज़रूरी था और नहाने के बाद उसको जरी बूटी के धुंवा से सेकई भी करनी थी.
छ्हम्मो पिच्छ'ले रात जया के लिए जरी बूटी वाला तेल बना चुकी थी. उस दिन सुबह जब सूरज काफ़ी उपर चढ़ आया तो छ्हम्मो जया को बुलाई और तेल लगवाने को तैइय्यार होने के लिए बोली. छ्हम्मो हॉल के अंदर ज़मीन पर चटाई बीच्छा रखी थी और जब जया अप'ने कमरे से बाहर निकली तो उसको ज़मीन पर बीछे चटाई पर कपरे उतार के लेटने के लिए बोली.
जया ने वैसे ही किया और उसकी मा घर के मर्दों को बुला कर मालीश मे मदद करने के लिए बोली. जगन और देव बहुत खुशी खुशी जया की मालीश के लिए तैइय्यार हो गये. जब वो दोनो कमरे मे आए तो छ्हम्मो उनसे धोती और शर्ट उतार करके सिर्फ़ ताओलिया पहनने के लिए बोली, क्योंकी तेल लगाते समय धोती और शर्ट गंदी हो जाएगी. जया को ज़मीन पर पेट के बल लेटने के लिए बोली.
जगन और देव दोनो तरफ़ घुटने के बल बैठ गये और जया के सर से पावं तक गरम गरम तेल लगाना शुरू किया. फिर वो दोनो जया की गर्दन, कंधों, पीठ, चूतर, जांघों और पैरों को धीरे धीरे मालीश करना शुरू कर दिया. जया मालीश से बहुत खुश हो रही थी क्योंकी मालीश से उसकी बदन की हर जोरों का दर्द निकल रहा था. फिर उन लोगों ने जया को चित लेटा दिया और फिर से सर से पावं तक तेल लगा करके मालीश करनी शुरू कर दिया. जैसे ही उंदोनों का हाथ चूंचों पर परा जया खुशी से उच्छाल परी. जगन ने एक चूंची दबा कर थोरा सा दूध निकल दिया. फिर दोनो मिल कर जया की पेट, पेरू, जानहघों और पैर की भी मालीश किए. अब तक जगन का लंड खरा हो गया था और जया उस खरे लंड को पकर कर हाथों से उसको सहलाने लगी.
"ओह! मैं कब से इस खरे लंड को नही देखी, कब से इस को मैने अंदर नही लिया है बेचारा कब से यह भूखा है," जया जगन के लंड को हाथों से टोटालते हुए बोली.
"छोटी तू बिल्कुल चिंता ना कर, हम लोग इनका ठीक से ख़याल रख रहे हैं." जया की मा बोली, और उनकी बातों को सुन कर सब के सब हंस परे. देवकी एक गमले मे गरम पानी लेकर आई और साथ तौलिया भी. छ्हम्मो तौलिया को गरम पानी मे भेगो करके जया के सारे शरीर को पोंच्छना शुरू कर दिया. फिर इसके बाद जया को देवकी और छ्हम्मो दोनो पकर कर बाथरूम ले गयी और उसको नहलाया गया. फिर उसके शरीर को पोंच्छ करके उसको कमरे मे बैठा करके कुच्छ जरी बूटी का धुआँ किया गया. छ्हम्मो अपनी बेटी के गुप्तांगों को सहलाती रही. छ्हम्मो एक गमले मे आग ला करके उसमे जरी बूटी डाल के उसका धुआँ से जया की चूत को सेंक लगाई.
"यह धुआँ जितना तेरी चूत पर जाएगा, तेरी चूत फिर से पुरानी शकल मे आ जाएगी और फिर से तेरी चूत टाइट हो जाएगी," छ्हम्मो अपनी बेटी को समझती रही और जरी बूटी की धुआँ जया की चूत पर लगाती रही. छ्हम्मो अपनी बेटी से कहती रही,
"यह जरी बूटी के धुआँ से सेंक की बात मेरे को मेरी मा बतलाई थी." इस सब के बाद देवकी और छ्हम्मो भी नहा धो लिए.
जगन बीवी और बच्चे से बहुत खुश था और वो भी बीवी के कमरे मे चला गया. अब सिर्फ़ देव और छ्हम्मो ही जाग रहे थे. वो लोग वारंडे मे बैठ कर इधर उधर की बातें कर रहे थे और थोरी देर के बाद उनकी बात सेक्स की तरफ मूर गयी. देव सास से कहा कि कैसे उसका लंड सिर्फ़ दूसरे की चुदाई देखने के बाद खरा होता है. सास उसकी बात सुन कर बोली,
"तुम्हे या तो अपने आप पर भरोसा नही है या तुम्हे कोई अन्द्रुनि बीमारी है, लेकिन कोई बात नही, मैं जब तक इन्हा हूँ तुम्हे ठीक करने की कोशिश करूँगी. लेकिन सबसे पहले मुझे तुमको टेस्ट करना है."
तबसासू ने देव की धोती खींच कर उतार दिया और देव का मुरझाया हुआ लंड को देखने लगी. वो उस लंड को हाथों मे लेकर खेलने लगी और देव से बताना शुरू किया कैसे उसका ससुर और चाचिया ससुर उनको एक मिहीना के बाद उनके घर जाने के बाद एक के बाद दूसरा उनको उलट पलट कर चोदेन्गे और कैसे वो उनकी चुदाई का मज़ा लूटेंगी, सिर्फ़ महीना दिन को छ्होर्के. महीने के दीनो मे भी वो पती और देवर का लंड चूस चूस कर उनको झारेगी और उनके लंड से निकला वीर्या को पीएगी. इन सब चुदाई की बातों को सुन कर भी देव का लंड खरा नही हुआ. फिर छ्हम्मो ने दामाद का लंड को चूसना शुरू किया लेकिन थोरी देर के बाद हार कर चुप पर गयी.
देव भी अपनी उंगलेओं से अपनी सास की चूत को उनके सारी के अंदर हाथ डाल कर खोद रहा था फिर भी उसका लंड नही खरा हुआ. आख़िर मे छ्हम्मो हार कर अपनी सारी अपनी कमर तक उठा कर लेट गयी और देव से चूत को चाटने के लिए बोली. देव खुशी खुशी सास के कहने के अनुसार उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया और मन भर कर उनकी चूत को चटा और तब तक चटा जब तक की उसकी सास के चूत से मीठा मीठा रस ना निकलने लगा. फिर भी देव का लंड खरा नही हुआ. छ्हम्मो को इस'से बहुत तकलीफ़ हुई और अपनी बेटी की भाग्या पर अफ़सोस करने लगी.
अगले कुच्छ दिन बहुत जल्दी जल्दी बीत गये. छ्हम्मो और देवकी बहुत ब्यस्त थी दोनो को जया और उसकी बची की देख भाल करनी पर रही थी. छ्हम्मो को खाना भी पकना पर रहा था. शानिबार और इतबार को घर के दोनो मर्द लोग भी बीवी और सास की मदद कर रहे थे. अब जया का नहाने का समय आ पहुँचा. वह अब पहली बार बचा पैदा होने के बाद नहाने वाली थी और इसके लिए उसको तेल लगाना ज़रूरी था और नहाने के बाद उसको जरी बूटी के धुंवा से सेकई भी करनी थी.
छ्हम्मो पिच्छ'ले रात जया के लिए जरी बूटी वाला तेल बना चुकी थी. उस दिन सुबह जब सूरज काफ़ी उपर चढ़ आया तो छ्हम्मो जया को बुलाई और तेल लगवाने को तैइय्यार होने के लिए बोली. छ्हम्मो हॉल के अंदर ज़मीन पर चटाई बीच्छा रखी थी और जब जया अप'ने कमरे से बाहर निकली तो उसको ज़मीन पर बीछे चटाई पर कपरे उतार के लेटने के लिए बोली.
जया ने वैसे ही किया और उसकी मा घर के मर्दों को बुला कर मालीश मे मदद करने के लिए बोली. जगन और देव बहुत खुशी खुशी जया की मालीश के लिए तैइय्यार हो गये. जब वो दोनो कमरे मे आए तो छ्हम्मो उनसे धोती और शर्ट उतार करके सिर्फ़ ताओलिया पहनने के लिए बोली, क्योंकी तेल लगाते समय धोती और शर्ट गंदी हो जाएगी. जया को ज़मीन पर पेट के बल लेटने के लिए बोली.
जगन और देव दोनो तरफ़ घुटने के बल बैठ गये और जया के सर से पावं तक गरम गरम तेल लगाना शुरू किया. फिर वो दोनो जया की गर्दन, कंधों, पीठ, चूतर, जांघों और पैरों को धीरे धीरे मालीश करना शुरू कर दिया. जया मालीश से बहुत खुश हो रही थी क्योंकी मालीश से उसकी बदन की हर जोरों का दर्द निकल रहा था. फिर उन लोगों ने जया को चित लेटा दिया और फिर से सर से पावं तक तेल लगा करके मालीश करनी शुरू कर दिया. जैसे ही उंदोनों का हाथ चूंचों पर परा जया खुशी से उच्छाल परी. जगन ने एक चूंची दबा कर थोरा सा दूध निकल दिया. फिर दोनो मिल कर जया की पेट, पेरू, जानहघों और पैर की भी मालीश किए. अब तक जगन का लंड खरा हो गया था और जया उस खरे लंड को पकर कर हाथों से उसको सहलाने लगी.
"ओह! मैं कब से इस खरे लंड को नही देखी, कब से इस को मैने अंदर नही लिया है बेचारा कब से यह भूखा है," जया जगन के लंड को हाथों से टोटालते हुए बोली.
"छोटी तू बिल्कुल चिंता ना कर, हम लोग इनका ठीक से ख़याल रख रहे हैं." जया की मा बोली, और उनकी बातों को सुन कर सब के सब हंस परे. देवकी एक गमले मे गरम पानी लेकर आई और साथ तौलिया भी. छ्हम्मो तौलिया को गरम पानी मे भेगो करके जया के सारे शरीर को पोंच्छना शुरू कर दिया. फिर इसके बाद जया को देवकी और छ्हम्मो दोनो पकर कर बाथरूम ले गयी और उसको नहलाया गया. फिर उसके शरीर को पोंच्छ करके उसको कमरे मे बैठा करके कुच्छ जरी बूटी का धुआँ किया गया. छ्हम्मो अपनी बेटी के गुप्तांगों को सहलाती रही. छ्हम्मो एक गमले मे आग ला करके उसमे जरी बूटी डाल के उसका धुआँ से जया की चूत को सेंक लगाई.
"यह धुआँ जितना तेरी चूत पर जाएगा, तेरी चूत फिर से पुरानी शकल मे आ जाएगी और फिर से तेरी चूत टाइट हो जाएगी," छ्हम्मो अपनी बेटी को समझती रही और जरी बूटी की धुआँ जया की चूत पर लगाती रही. छ्हम्मो अपनी बेटी से कहती रही,
"यह जरी बूटी के धुआँ से सेंक की बात मेरे को मेरी मा बतलाई थी." इस सब के बाद देवकी और छ्हम्मो भी नहा धो लिए.