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Guest
हम दोनों इस वक़्त एक जिस्म और दो जान लग रहे थे। हम दोनों को देख कर ऐसा लग रहा था की हम कब के बिछडे आज कहाँ आ के मिले। माँ अपने बेटे के लंड को अपनी गण्ड में जड़ तक कसा हुआ मेहसुस कर के खुद को बेहद शर्मिदा और बेबस मेहसुस कर रही थी। लेकिन
कॉन्स्टिपेशन की वजह से उठ रहे दर्द की वजह से वो इस इन्सेस्ट हरकत को ख़ामोशी से बर्दाश्त कर रही थी। उन्होंने मुझे कुछ देर यूँ ही रहने का इशारा किया।
मैन कुछ देर तक अपने ८ इंच को उनकी गण्ड में जड़ तक घुसाये यूँ ही रुका रह, लेकिन उनकी चुत से निकल रही गर्मी को अपने गोटे पे मेहसुस कर के मेरे सबर का बांध टूटने लगा और में उनके चुत्तड़ को अपने दोनों हाथों से फ़ैलाये धीरे धीरे अपने लंड उनकी गण्ड में अंडर बहार करने लाग। मैं धीरे धीरे माँ की गण्ड में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। माँ चुप छाप लेटी मेरे लंड को अपनी टाइट गण्ड में अंडर बाहर होते मेहसुस कर रही थी। माँ को खामोश देख मैंने उनकी गण्ड में अपने लंड की स्पीड बढा दि। अब मेरा लंड तेज़ी से अंडर बहार होते हुए मुझे जन्नत का मज़ा दे रहा था। मैं मस्ती में माँ की गण्ड मार रहा था। माँ की चुत अब गीली हो ने लगी थी। उनकी चुत से रस बहने लगा था,
ओर उनके मुह से सिसकारी निकलने लगी थी।
मा ने अपना चेहरा तकिये में छुपाया हुआ था, वो इस कोशिश में लगी हुई थी की उसके मुह से सिसकारी न निकले लेकिन वो चाह कर भी खुद को मस्ती में सिसकने से रोक नहीं पा रही थी। मेरा लंड माँ की गण्ड में अंडर बहार होते हुए उनको जन्नत का मज़ा दे रहा था।
मै मस्ती में अपना ८ इंच का लंड माँ की गण्ड में से ६ इंच बाहर निकालते और फिर उसे एक ही झटके में जड़ तक अंडर कर देता। मेरे ऐसा करने से मस्ती में माँ के मुह से चीख़ निकल जाती।
मैन धका धक् माँ की गण्ड में अपना लंड अंडर बहार कर रहा था। हम दोनों न चाहते हुए भी मस्ती के समुन्दर में गोते लगा रहे थे।
हम दोनों को आज किस्मत ने इस मज़े को मेहसुस करने को मजबूर कर दिया था।
मैन माँ के दोनों चुत्तड़ को मसलते हुए उनकी गण्ड मार रहा था। मेरी मस्ती अब सातवे आसमान में पहुँच गई थी। हम दोनों माँ बेटे झड़ने के करीब पहुच गए द। मेरा लंड किसी भी वक़्त माँ की टाइट गण्ड में अपना पानी निकालने वाला था।
मैने अब राजधानी की स्पीड में माँ की गण्ड मार रहा था। मेरे गोटो तेज़ी से माँ की चुत से टकरा रहे थे। माँ की चुत मेरे गोटे की मार खा खा के अपना रस छोडने लगी थी। पूरा कमरा हमारी मस्ती भरी सिसकारी से गूँज रहा था।
मुझे माँ की गांड की सवारी में बड़ा मज़ा आ रहा था। मेरे लंड के झटके की वजह से माँ का पूरा जिस्म हिल रहा त। अब माँ भी मस्ती में आ के अपनी गण्ड मेरे लंड पे ढ़केल रही थी। तभी अचानक माँ का जिस्म काम्पने लगा और वो सिसकारी लेके झड़ने लागी।
आह
मा की चुत से रस का सैलाब सा बहने लगा।
मैन भी खुद को रोक नहीं पाया और मेरे लंड से वार्य का सैलाब सा निकल के माँ की गण्ड में जाने लगा।
झडते वक़्त मेरे मुह से मस्ती भरी आहें निकलने लगी।
मैन अपना ८ इंच का लंड माँ की गण्ड में जड़ तक घुसाये झड रहा था।
झडते वक़्त मेरा लंड माँ की गण्ड में किसी सखत चीज़ से तकरा रहा था।
मै आज पहली बार इतना झडा था, मुझे लगा की जैसे मेरे लंड से आज कम से कम आधा लीटर वीर्य निकला था।
झडने के बाद माँ शांत हो गई।
मै भी थक के माँ की पीठ पे गिर पडा, जिस की वजह से मेरा लंड माँ की टाइट गण्ड में कस गया था।
मा की गण्ड में मेरे लंड ने अपना काम कर दिया था। मेरे लंड की ठोकर ने माँ की गण्ड के अंदर पथ्थर बने लेट्रिन को टुकड़ो में बदल दिया था।
मा को इस वक़्त बड़ी शिद्दत से लेट्रिन मेहसुस हो रही थी।
मुझे अपने ८ इंच के लंड पे ये मेहसुस हो रहा था की माँ की लेट्रिन उनकी गण्ड से निकलने के लिए मेरे लंड पे प्रेशर बना रही है।
मा : संजू मुझे बहुत ज़ोर की लेट्रिन आ रही है। मैं उसे निकलने से रोक नहीं पा रही हूण। मुझे लेट्रिन जाना है।
मैन : ठीक है मा।
मेरा लंड झड़ने बाद भी माँ के गण्ड की गर्मी की वजह से तन के उनकी गण्ड में घूसा हुआ था।
जैसे ही मैंने अपने ८ इंच के खडे लंड को उनकी गण्ड से निकालने की कोशिश कि, उनकी गण्ड से मेरे लंड के साथ गन्दा पानी निकल के बेड पे गिरने लगा जिसे देख के माँ ने फ़ौरन मुझे रुक्ने को कहा।
मा : संजू.....रुक जाव.......तुम्हारे लंड ने मेरी टाइट गण्ड के छेद को पूरी तरहा से फैला दिया है, तुम्हारा लंड इस वक़्त मेरी गण्ड में बोतल पे कॉर्क की तरहा टाइट फिट है, उसे निकाल ते ही मेरी गण्ड खुल जायेगी और गंदे पानी के साथ लेट्रिन और तुम्हारा वार्य भी मेरी गण्ड से निकल के बेड पे फैल जाएगा।
माँ : तुम्हारा लंड मेरी गण्ड में होने की वजह से ये सब मेरी गण्ड में रुका हुआ है। प्लीज तुम अपना लंड मेरी गण्ड में ही रहने दो, इसे अभी मत निकलो।
मैन : लेकिन माँ अगर में अपना लंड तुम्हारी गण्ड से नहीं निकालूँगा तो तुम लेट्रिन कैसे करोगी। तुम्हे लेट्रिन करने के लिए मेरे लंड को तुम्हारी गण्ड से निकलना ही होगा।
मा : संजू जो तुम केह रहे हो वो बिलकुल ठीक है, लेकिन में बेड पे तो लेट्रिन नहीं कर सकती न।
मैन : ये तो प्रॉब्लम हो गई म, अब क्या करें?
मा ने अपना सर झुका के शरमाते हुए कहा।
मा : एक आईडिया है, अगर तुम कर सको तो......
मैन : क्या आईडिया है माँ?
मा ने शर्माते हुए कहा।
मा : तुम एक काम करो अपना खड़ा लंड मेरी गण्ड में ही रख कर मुझे अपनी गोद में उठा के टॉयलेट में ले चलो। माँ की बात मुझे ठीक लगि, मैंने अपना खड़ा लंड उनकी गण्ड में रहने दिया और उनकी कमर में हाथ दाल के उनको अपनी गोद में उठा के टॉयलेट की तरफ जाने लगा।
ये नज़ारा बहुत ही उत्तेजक था। मैं अपनी नंगी माँ की टाइट गण्ड में अपना ८ इंच का लंड डाले उन्हें अपनी बाँहों में उठाये टॉयलेट में लेट्रिन करवाने ले जा रहा हूण।
मेरा लंड ये सोच सोच कर माँ की टाइट गण्ड में उछाल कूद मचाने लगा।
मेरे लंड की हलचल अपनी गण्ड में मेहसुस करके माँ अपनी आँखें बंद किये सिसक उठि।
हर कदम पे मेरा लंड माँ की गण्ड में अंडर बहार होने लगा जिसकी वजह से माँ की चुत फिर से गीली होने लागी।
मा को एक बार फिर मस्ती चड़ने लगी।
मैन धीरे धीरे माँ की टाइट गण्ड में अपना लंड अंडर बाहर करते हुए टॉयलेट की तरफ बडने लगा।
मा के मुह से रेह रेह के सिसकारी निकल रही थी।
मेरे लंड ने एक बार फिर से माँ को झड़ने के करीब पहुंचा दिया था। वो अपनी पूरी ज़िन्दगी में आज दूसरी बार अपनी चुत को छुए बिना झड रही थी।
कुछ ही देर में हम टॉयलेट में पहुँच गये।
मैं टॉयलेट में पहुँच कर माँ को अपनी गॉड में लिए टॉयलेट सीट पे बैठ गया। मेरे बैठते ही मेरा ८ इंच का खड़ा लुंड माँ की गण्ड में जड़ तक अंडर तक घुस गया और तभी माँ का जिस्म तेज़ी से काम्पने लगा और वो मेरे सीने से लिपट गई और झड़ने लागी। उन की चुत से रास का सैलाब बेह के मेरे जिस्म से होते हुए मेरे जूते को भिगोने लाग। माँ की चुत से बेह रहे गरम और मादक रास को अपने जूते पे मेहसुस करके मैंने भी मस्ती में माँ को अपनी बाँहों में कस लिया। माँ मस्ती के सागर में गोटे लगा रही थी।
कुछ देर में माँ शांत हो गै।
पहिर मैंने माँ की कमर को पकड़ा और धीरे धीरे खुद को माँ से पीछे की तरफ खींच ने लाग। जिस से मेरा लुंड उनकी टाइट गण्ड में से धीरे धीरे बहार आने लाग। अब उनकी गण्ड में मेरे लुंड का सुपडा अतका हुआ ठ।
पहिर एक “पाक” की आवाज़ के साथ मेरा सुपडा उनकी टाइट गण्ड से बहार आ गया।
ओर फिर तो जैसे कोई बाँध टूट गया और माँ की गण्ड में से लॉरिन, पानी और मेरा वार्य तेज़ी से बहार निकलने लाग। जिस के साथ साथ उनकी सखत लेट्रिन जो उनकी गण्ड मारते वक़्त टुकड़े में बदल गए थे वो निकल ने लाग। पूरा टॉयलेट उनकी लेट्रिन की महक से भर गया।
मैन उठ के माँ के सामने खड़ा हो गया। माँ की आँखें बंद थि, वो अपनी गण्ड में भरा कचरा निकालने में मगन थी।
मेरा लुंड माँ के लेट्रिन से पूरी तरहा से साना हुआ लग रहा त। वो पीले रंग का दिखाइ दे रहा त।
मेरे सामने माँ आँखे बंद किये अपना पैट खली करने में लगी हुई थी। कुछ ही देर में माँ की गण्ड से लेट्रिन पानी और मेरे वार्य का मिक्सचर निकलना बंद हो गया।
लेकिन फिर जो हुआ वो बेहद ही सेक्सी और कामुक त।
चानक माँ की रसीली चुत से शहहहहहह…………।। की आवाज़ के साथ पिशाब की तेज़ धार निकलने लागी। मैं सामने खड़ा गौर से उनकी रसीली चुत से निकल रहे पिशाब को निकलते हुए देख रहा था। मैं अपने आप को बहुत खुशनसीब मान रहा था जो मुझे अपनी माँ की गांड मारने को मिली और अब आगे भी मिलने वाली थी।
समाप्त
कॉन्स्टिपेशन की वजह से उठ रहे दर्द की वजह से वो इस इन्सेस्ट हरकत को ख़ामोशी से बर्दाश्त कर रही थी। उन्होंने मुझे कुछ देर यूँ ही रहने का इशारा किया।
मैन कुछ देर तक अपने ८ इंच को उनकी गण्ड में जड़ तक घुसाये यूँ ही रुका रह, लेकिन उनकी चुत से निकल रही गर्मी को अपने गोटे पे मेहसुस कर के मेरे सबर का बांध टूटने लगा और में उनके चुत्तड़ को अपने दोनों हाथों से फ़ैलाये धीरे धीरे अपने लंड उनकी गण्ड में अंडर बहार करने लाग। मैं धीरे धीरे माँ की गण्ड में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। माँ चुप छाप लेटी मेरे लंड को अपनी टाइट गण्ड में अंडर बाहर होते मेहसुस कर रही थी। माँ को खामोश देख मैंने उनकी गण्ड में अपने लंड की स्पीड बढा दि। अब मेरा लंड तेज़ी से अंडर बहार होते हुए मुझे जन्नत का मज़ा दे रहा था। मैं मस्ती में माँ की गण्ड मार रहा था। माँ की चुत अब गीली हो ने लगी थी। उनकी चुत से रस बहने लगा था,
ओर उनके मुह से सिसकारी निकलने लगी थी।
मा ने अपना चेहरा तकिये में छुपाया हुआ था, वो इस कोशिश में लगी हुई थी की उसके मुह से सिसकारी न निकले लेकिन वो चाह कर भी खुद को मस्ती में सिसकने से रोक नहीं पा रही थी। मेरा लंड माँ की गण्ड में अंडर बहार होते हुए उनको जन्नत का मज़ा दे रहा था।
मै मस्ती में अपना ८ इंच का लंड माँ की गण्ड में से ६ इंच बाहर निकालते और फिर उसे एक ही झटके में जड़ तक अंडर कर देता। मेरे ऐसा करने से मस्ती में माँ के मुह से चीख़ निकल जाती।
मैन धका धक् माँ की गण्ड में अपना लंड अंडर बहार कर रहा था। हम दोनों न चाहते हुए भी मस्ती के समुन्दर में गोते लगा रहे थे।
हम दोनों को आज किस्मत ने इस मज़े को मेहसुस करने को मजबूर कर दिया था।
मैन माँ के दोनों चुत्तड़ को मसलते हुए उनकी गण्ड मार रहा था। मेरी मस्ती अब सातवे आसमान में पहुँच गई थी। हम दोनों माँ बेटे झड़ने के करीब पहुच गए द। मेरा लंड किसी भी वक़्त माँ की टाइट गण्ड में अपना पानी निकालने वाला था।
मैने अब राजधानी की स्पीड में माँ की गण्ड मार रहा था। मेरे गोटो तेज़ी से माँ की चुत से टकरा रहे थे। माँ की चुत मेरे गोटे की मार खा खा के अपना रस छोडने लगी थी। पूरा कमरा हमारी मस्ती भरी सिसकारी से गूँज रहा था।
मुझे माँ की गांड की सवारी में बड़ा मज़ा आ रहा था। मेरे लंड के झटके की वजह से माँ का पूरा जिस्म हिल रहा त। अब माँ भी मस्ती में आ के अपनी गण्ड मेरे लंड पे ढ़केल रही थी। तभी अचानक माँ का जिस्म काम्पने लगा और वो सिसकारी लेके झड़ने लागी।
आह
मा की चुत से रस का सैलाब सा बहने लगा।
मैन भी खुद को रोक नहीं पाया और मेरे लंड से वार्य का सैलाब सा निकल के माँ की गण्ड में जाने लगा।
झडते वक़्त मेरे मुह से मस्ती भरी आहें निकलने लगी।
मैन अपना ८ इंच का लंड माँ की गण्ड में जड़ तक घुसाये झड रहा था।
झडते वक़्त मेरा लंड माँ की गण्ड में किसी सखत चीज़ से तकरा रहा था।
मै आज पहली बार इतना झडा था, मुझे लगा की जैसे मेरे लंड से आज कम से कम आधा लीटर वीर्य निकला था।
झडने के बाद माँ शांत हो गई।
मै भी थक के माँ की पीठ पे गिर पडा, जिस की वजह से मेरा लंड माँ की टाइट गण्ड में कस गया था।
मा की गण्ड में मेरे लंड ने अपना काम कर दिया था। मेरे लंड की ठोकर ने माँ की गण्ड के अंदर पथ्थर बने लेट्रिन को टुकड़ो में बदल दिया था।
मा को इस वक़्त बड़ी शिद्दत से लेट्रिन मेहसुस हो रही थी।
मुझे अपने ८ इंच के लंड पे ये मेहसुस हो रहा था की माँ की लेट्रिन उनकी गण्ड से निकलने के लिए मेरे लंड पे प्रेशर बना रही है।
मा : संजू मुझे बहुत ज़ोर की लेट्रिन आ रही है। मैं उसे निकलने से रोक नहीं पा रही हूण। मुझे लेट्रिन जाना है।
मैन : ठीक है मा।
मेरा लंड झड़ने बाद भी माँ के गण्ड की गर्मी की वजह से तन के उनकी गण्ड में घूसा हुआ था।
जैसे ही मैंने अपने ८ इंच के खडे लंड को उनकी गण्ड से निकालने की कोशिश कि, उनकी गण्ड से मेरे लंड के साथ गन्दा पानी निकल के बेड पे गिरने लगा जिसे देख के माँ ने फ़ौरन मुझे रुक्ने को कहा।
मा : संजू.....रुक जाव.......तुम्हारे लंड ने मेरी टाइट गण्ड के छेद को पूरी तरहा से फैला दिया है, तुम्हारा लंड इस वक़्त मेरी गण्ड में बोतल पे कॉर्क की तरहा टाइट फिट है, उसे निकाल ते ही मेरी गण्ड खुल जायेगी और गंदे पानी के साथ लेट्रिन और तुम्हारा वार्य भी मेरी गण्ड से निकल के बेड पे फैल जाएगा।
माँ : तुम्हारा लंड मेरी गण्ड में होने की वजह से ये सब मेरी गण्ड में रुका हुआ है। प्लीज तुम अपना लंड मेरी गण्ड में ही रहने दो, इसे अभी मत निकलो।
मैन : लेकिन माँ अगर में अपना लंड तुम्हारी गण्ड से नहीं निकालूँगा तो तुम लेट्रिन कैसे करोगी। तुम्हे लेट्रिन करने के लिए मेरे लंड को तुम्हारी गण्ड से निकलना ही होगा।
मा : संजू जो तुम केह रहे हो वो बिलकुल ठीक है, लेकिन में बेड पे तो लेट्रिन नहीं कर सकती न।
मैन : ये तो प्रॉब्लम हो गई म, अब क्या करें?
मा ने अपना सर झुका के शरमाते हुए कहा।
मा : एक आईडिया है, अगर तुम कर सको तो......
मैन : क्या आईडिया है माँ?
मा ने शर्माते हुए कहा।
मा : तुम एक काम करो अपना खड़ा लंड मेरी गण्ड में ही रख कर मुझे अपनी गोद में उठा के टॉयलेट में ले चलो। माँ की बात मुझे ठीक लगि, मैंने अपना खड़ा लंड उनकी गण्ड में रहने दिया और उनकी कमर में हाथ दाल के उनको अपनी गोद में उठा के टॉयलेट की तरफ जाने लगा।
ये नज़ारा बहुत ही उत्तेजक था। मैं अपनी नंगी माँ की टाइट गण्ड में अपना ८ इंच का लंड डाले उन्हें अपनी बाँहों में उठाये टॉयलेट में लेट्रिन करवाने ले जा रहा हूण।
मेरा लंड ये सोच सोच कर माँ की टाइट गण्ड में उछाल कूद मचाने लगा।
मेरे लंड की हलचल अपनी गण्ड में मेहसुस करके माँ अपनी आँखें बंद किये सिसक उठि।
हर कदम पे मेरा लंड माँ की गण्ड में अंडर बहार होने लगा जिसकी वजह से माँ की चुत फिर से गीली होने लागी।
मा को एक बार फिर मस्ती चड़ने लगी।
मैन धीरे धीरे माँ की टाइट गण्ड में अपना लंड अंडर बाहर करते हुए टॉयलेट की तरफ बडने लगा।
मा के मुह से रेह रेह के सिसकारी निकल रही थी।
मेरे लंड ने एक बार फिर से माँ को झड़ने के करीब पहुंचा दिया था। वो अपनी पूरी ज़िन्दगी में आज दूसरी बार अपनी चुत को छुए बिना झड रही थी।
कुछ ही देर में हम टॉयलेट में पहुँच गये।
मैं टॉयलेट में पहुँच कर माँ को अपनी गॉड में लिए टॉयलेट सीट पे बैठ गया। मेरे बैठते ही मेरा ८ इंच का खड़ा लुंड माँ की गण्ड में जड़ तक अंडर तक घुस गया और तभी माँ का जिस्म तेज़ी से काम्पने लगा और वो मेरे सीने से लिपट गई और झड़ने लागी। उन की चुत से रास का सैलाब बेह के मेरे जिस्म से होते हुए मेरे जूते को भिगोने लाग। माँ की चुत से बेह रहे गरम और मादक रास को अपने जूते पे मेहसुस करके मैंने भी मस्ती में माँ को अपनी बाँहों में कस लिया। माँ मस्ती के सागर में गोटे लगा रही थी।
कुछ देर में माँ शांत हो गै।
पहिर मैंने माँ की कमर को पकड़ा और धीरे धीरे खुद को माँ से पीछे की तरफ खींच ने लाग। जिस से मेरा लुंड उनकी टाइट गण्ड में से धीरे धीरे बहार आने लाग। अब उनकी गण्ड में मेरे लुंड का सुपडा अतका हुआ ठ।
पहिर एक “पाक” की आवाज़ के साथ मेरा सुपडा उनकी टाइट गण्ड से बहार आ गया।
ओर फिर तो जैसे कोई बाँध टूट गया और माँ की गण्ड में से लॉरिन, पानी और मेरा वार्य तेज़ी से बहार निकलने लाग। जिस के साथ साथ उनकी सखत लेट्रिन जो उनकी गण्ड मारते वक़्त टुकड़े में बदल गए थे वो निकल ने लाग। पूरा टॉयलेट उनकी लेट्रिन की महक से भर गया।
मैन उठ के माँ के सामने खड़ा हो गया। माँ की आँखें बंद थि, वो अपनी गण्ड में भरा कचरा निकालने में मगन थी।
मेरा लुंड माँ के लेट्रिन से पूरी तरहा से साना हुआ लग रहा त। वो पीले रंग का दिखाइ दे रहा त।
मेरे सामने माँ आँखे बंद किये अपना पैट खली करने में लगी हुई थी। कुछ ही देर में माँ की गण्ड से लेट्रिन पानी और मेरे वार्य का मिक्सचर निकलना बंद हो गया।
लेकिन फिर जो हुआ वो बेहद ही सेक्सी और कामुक त।
चानक माँ की रसीली चुत से शहहहहहह…………।। की आवाज़ के साथ पिशाब की तेज़ धार निकलने लागी। मैं सामने खड़ा गौर से उनकी रसीली चुत से निकल रहे पिशाब को निकलते हुए देख रहा था। मैं अपने आप को बहुत खुशनसीब मान रहा था जो मुझे अपनी माँ की गांड मारने को मिली और अब आगे भी मिलने वाली थी।
समाप्त