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Guest
हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम मीनू है, में दिल्ली की रहने वाली हूँ और में पिछले कुछ सालों से आरएसएस पर सेक्सी कहानियों के मज़े लेती आ रही हूँ, जिसको पढ़कर मेरी चूत की आग हमेशा बढ़ जाती है और चूत में लंड लिए बिना नहीं सकती। दोस्तों में बचपन से ही दिखने में बहुत ही सेक्सी और मेरी चूत बड़ी ही कामुक थी और मेरी बचपन से ही अपने भाई के साथ लिपटकर सोने की आदत है, इसलिए में हमेशा ऐसे ही सो जाती थी। दोस्तों पहले तो कुछ सालों तक जब तक में अपनी चूत को अपनी ऊँगली से या किसी भी चीज से शांत करती थी, तब तक सब कुछ ठीक था, लेकिन इस बार जब मेरा भाई घर आया, तब में पूरी तरह से बदल चुकी थी, क्योंकि में अपने मामा से अपनी चूत की चुदाई करवा चुकी थी और वो बाहर दूसरे शहर में एक होस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई करता है और पूरे दो साल बाद अब आया है।
अब मेरे मामा की उस दमदार चुदाई ने मेरी चढ़ती जवानी को पहले से ज्यादा अब और निखार दिया था, जिसकी वजह से 18 साल की उम्र में ही में बड़ी ही गदराए बदन की मस्त लड़की हो गयी। उस पहली चुदाई के बाद ही मेरे शरीर में बहुत परिवर्तन आ गया था और अब मेरा वो कमसिन कुँवारा बदन पूरी तरह से भर गया था, मेरे शरीर का हर एक अंग आकार में पहले से ज्यादा बड़ा हो गया था और अब में अपने भाई के साथ भी अपनी चुदाई का विचार अपने मन में लाकर सोचने लगी थी, क्योंकि मेरी चूत अब अपनी वैसी ही चुदाई के लिए दोबारा तरस रही थी, वो अपनी चुदाई के सपने मेरे भाई के लंड से देख रही थी। दोस्तों जब में पहली रात को अपने भाई के साथ ठीक वैसे ही सोई, में भाई से एकदम चिपक गयी और में अपनी तरफ से बस यही कोशिश करती रही कि मेरे भाई के लंड से मेरी चूत पूरी रात बस ऐसे ही चिपकती रहे और मेरे उभरते हुए गोलमटोल बड़े आकार के मुलायम स्तन भाई को बड़ा मज़ा देते रहे, में अपने मामा की आख़िरी चुदाई के बाद अब अपनी चुदाई करवाने के लिए बहुत तड़प रही थी और मेरी चूत बार बार अपने अंदर कुछ लेकर चुदाई के मज़े लेना चाहती थी और मेरा वो मचलता हुआ यौवन प्यासा था, इसलिए में भाई से चिपक चिपककर उसको बहकाने लगी और उसको अपनी चुदाई के लिए तैयार कर रही थी और मुझे पूरी उम्मीद तो बस यही थी कि मेरा सोचना और करना बस एक बार सफल हो जाए। उसके बाद तो मेरी चांदी हो जाएगी और यह विचार अपने मन में लेकर में बड़ी खुश थी और कुछ भी कर जाने के लिए एकदम तैयार थी और मुझे अपनी चुदाई के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था।
अब मेरा भाई भी मेरे गुदगुदे रसभरे जवान होते हुए जिस्म का सुख भोगने लगा था और धीरे धीरे मेरी चढ़ती मादक जवानी का असर उस पर भी उसी पहली रात को हो गया और इसलिए उसने भी कुछ देर बाद जानबूझ कर मेरे सामने अंजान बनकर मुझे अपने से चिपका लिया, जिसकी वजह से अब उसका लंड एकदम कड़क हो गया था और में भी उसको ज्यादा जोश में लाने के लिए बार बार अपनी चूत को उसके लंड पर जानबूझ कर दबा दबाकर उसके साथ बातें करते हुए ना जाने कब ऐसे ही सो गयी। दोस्तों उन दिनों मेरी छाती पर मेरी उम्र का उठान साफ दिखाई देता था, क्योंकि दूसरी लड़कियों के मुक़ाबले मेरी शर्ट मेरी छाती वाले हिस्से से कुछ ज़्यादा ही उठी हुई और नुकीली थी और मेरे निप्पल भी बड़े ही नुकीले थे, इसलिए मेरी शर्ट पर हमेशा सभी की नज़रे रहती थी, जहाँ मेरा यौवन उभरकर इतरा रहा था, वहीं दूसरी तरफ मेरी स्कर्ट छोटी होती थी, जिसकी वजह से मेरी दूध जैसी गोरी और चिकनी चिकनी जांघे एक बार देखते ही सभी का दिल धड़का देती थी और मुझ पर हर किसी की नजर हमेशा रहती थी और ठीक वैसा ही हाल अब मेरे घर में मेरे भाई का भी हो रहा था, वो चुप जरुर था, लेकिन उसके मन में मेरे लिए क्या विचार थे, में उनको अच्छी तरह से समझ चुकी थी और में बड़ी खुश भी थी।
अब मेरे मामा की उस दमदार चुदाई ने मेरी चढ़ती जवानी को पहले से ज्यादा अब और निखार दिया था, जिसकी वजह से 18 साल की उम्र में ही में बड़ी ही गदराए बदन की मस्त लड़की हो गयी। उस पहली चुदाई के बाद ही मेरे शरीर में बहुत परिवर्तन आ गया था और अब मेरा वो कमसिन कुँवारा बदन पूरी तरह से भर गया था, मेरे शरीर का हर एक अंग आकार में पहले से ज्यादा बड़ा हो गया था और अब में अपने भाई के साथ भी अपनी चुदाई का विचार अपने मन में लाकर सोचने लगी थी, क्योंकि मेरी चूत अब अपनी वैसी ही चुदाई के लिए दोबारा तरस रही थी, वो अपनी चुदाई के सपने मेरे भाई के लंड से देख रही थी। दोस्तों जब में पहली रात को अपने भाई के साथ ठीक वैसे ही सोई, में भाई से एकदम चिपक गयी और में अपनी तरफ से बस यही कोशिश करती रही कि मेरे भाई के लंड से मेरी चूत पूरी रात बस ऐसे ही चिपकती रहे और मेरे उभरते हुए गोलमटोल बड़े आकार के मुलायम स्तन भाई को बड़ा मज़ा देते रहे, में अपने मामा की आख़िरी चुदाई के बाद अब अपनी चुदाई करवाने के लिए बहुत तड़प रही थी और मेरी चूत बार बार अपने अंदर कुछ लेकर चुदाई के मज़े लेना चाहती थी और मेरा वो मचलता हुआ यौवन प्यासा था, इसलिए में भाई से चिपक चिपककर उसको बहकाने लगी और उसको अपनी चुदाई के लिए तैयार कर रही थी और मुझे पूरी उम्मीद तो बस यही थी कि मेरा सोचना और करना बस एक बार सफल हो जाए। उसके बाद तो मेरी चांदी हो जाएगी और यह विचार अपने मन में लेकर में बड़ी खुश थी और कुछ भी कर जाने के लिए एकदम तैयार थी और मुझे अपनी चुदाई के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था।
अब मेरा भाई भी मेरे गुदगुदे रसभरे जवान होते हुए जिस्म का सुख भोगने लगा था और धीरे धीरे मेरी चढ़ती मादक जवानी का असर उस पर भी उसी पहली रात को हो गया और इसलिए उसने भी कुछ देर बाद जानबूझ कर मेरे सामने अंजान बनकर मुझे अपने से चिपका लिया, जिसकी वजह से अब उसका लंड एकदम कड़क हो गया था और में भी उसको ज्यादा जोश में लाने के लिए बार बार अपनी चूत को उसके लंड पर जानबूझ कर दबा दबाकर उसके साथ बातें करते हुए ना जाने कब ऐसे ही सो गयी। दोस्तों उन दिनों मेरी छाती पर मेरी उम्र का उठान साफ दिखाई देता था, क्योंकि दूसरी लड़कियों के मुक़ाबले मेरी शर्ट मेरी छाती वाले हिस्से से कुछ ज़्यादा ही उठी हुई और नुकीली थी और मेरे निप्पल भी बड़े ही नुकीले थे, इसलिए मेरी शर्ट पर हमेशा सभी की नज़रे रहती थी, जहाँ मेरा यौवन उभरकर इतरा रहा था, वहीं दूसरी तरफ मेरी स्कर्ट छोटी होती थी, जिसकी वजह से मेरी दूध जैसी गोरी और चिकनी चिकनी जांघे एक बार देखते ही सभी का दिल धड़का देती थी और मुझ पर हर किसी की नजर हमेशा रहती थी और ठीक वैसा ही हाल अब मेरे घर में मेरे भाई का भी हो रहा था, वो चुप जरुर था, लेकिन उसके मन में मेरे लिए क्या विचार थे, में उनको अच्छी तरह से समझ चुकी थी और में बड़ी खुश भी थी।