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चढ़ती जवानी की अंगड़ाई

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मनोज के साथ साथ पूनम की भी रातों की नींद दिन का चैन खो चुका था। पूनम को भी सोते जागते उठते बैठते बस मनोज का ही चेहरा नजर आता था। जब से वह पैर फिसलने की वजह से मनोज के ऊपर गिरी है तब से तो वह उसके ख्यालों में पूरी तरह से खो चुकी है। उसे भी अब रास्ते में मनोज के खड़े रहने का बेसब्री से इंतजार रहने लगा,,, वह सामने से तो कुछ नहीं बोलती थी लेकिन उसके बोलने का इंतजार उसे हमेशा रहने लगा। बेला उसे बातों ही बातों में उसका नाम लेकर छेड़ देती थी,,,, लेकिन अब पूनम को भी मनोज का नाम लेकर एक छेड़खानी का मजा आने लगा था लेकिन वह बनावटी गुस्सा दिखाते हुए बोला को डांट. देती थी। पूनम के हृदय में भी मनोज के नाम का अंकुर अब अंकुरित होने लगा था। दूसरी तरफ मनोज की हालत और ज्यादा खराब होने लगी थी उसने तो अभी तक अपनी आंखों से ही पूनम के भजन का जायजा लेते हुए नापतोल किया था। लेकिन पूनम को गिरते-गिरते संभालने में जिस तरह से वह अपनी हथेलियों का उपयोग ऊसको उठाते समय उसके खूबसूरत बदन के उतार-चढ़ाव के रुपरेखा के अवलोकन करने में लगाया था तब से तो उसके सांसो की गति जब भी वह उसको याद करता तीव्र हो जाती थी।,,,, मनोज उसको अर्धनग्न अवस्था में उसके भरे हुए नितंब को तो देख लिया था और कपड़ों के ऊपर से उसे स्पर्श करने का सुख भी बहुत चुका था लेकिन इतने से दीवाना दिल कहां मानने वाला था वह तो उसको पूरी तरह से निर्वस्त्र देखना चाहता था और वह भी अपनी बाहों में,,,, यह उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना था। मनोज के मन में पूनम को लेकर उसके प्रति प्यार के साथ साथ वास्ना का गंदा मिश्रण भी था मनोज ज्यादातर उसे भागने की ही इच्छा रखता था। लेकिन पूनम के मन में उसके प्रति प्यार पनप रहा था।,,, यूं ही एक दूसरे को देखते देखते ही चार-पांच दिन और गुजर गए,,,,,

पूनम के घर पर गाय भैंसों का तबेला होने की वजह से कभी-कभी उसे भी गाय भैंस का दूध निकालना पड़ता था। उसे यह काम तो बिल्कुल पसंद नहीं था लेकिन फिर भी जब मजबूर हो जाती थी तो उसे करना ही पड़ता था उसी तरह से आज भी सभी को काम में व्यस्त होने की वजह से पूनम को ही दूध निकालना था और सुबह सुबह गांव के सभी लोग पूनम के घर दूध खरीदने आ जाया करते थे। पूनम अपने आप को दूसरे कामों में व्यस्त करने में लगी हुई थी ताकि कोई उसे दूध निकालने के लिए ना बोले और वैसे भी उसे आज कोई दिक्कत भी नहीं थी क्योंकि आज छुट्टी का दिन था लेकिन फिर भी वह दूध निकालना पसंद नहीं करती थी,,,, इसलिए वह घर के अंदर झाड़ू लगाने लगी,,,, तभी दूध लेने के लिए उधर सोहन आ गया,,,, सभी दिनों में उसकी मां भी दूध लेने आती थी लेकिन रविवार के दिन छुट्टी की वजह से वही घर पर दूध लेने आता था इसकी एक खास वजह थी। उसे मालूम था कि छुट्टी के दिन पुनम हीं दूध निकालती थी,,, और उसे आंख भर कर देखने का इससे अच्छा मौका दूसरे किसी भी दिन नहीं मिल पाता था,,,,, वह घर के आंगन में आकर आवाज लगाते हुए बोला,,,,,,

चाची,,,,,,,,, वो,,,,, चाची दूध लेना है,,,,, कब से खड़ा हूं कौन निकाल कर देगा,,,,,,,

अरे मुझे सुनाई दे रहा है बहरी नहीं हूं जो इतनी जोर से चिल्ला रहा है,,,,, ( पूनम की मम्मी सोहन को बोलते हुए उसकी तरफ घूम गई जो कि अभी तक रस्सियों पर धुले कपड़े डाल रही थी,,,, और कपड़े डालने की वजह से उसके भारी-भरकम नितंबों में गजब की धड़कन हो रही थी और उसी नितंबों की धड़कन को देखते हुए सोहन मस्त होता हुआ उन्हें आवाज लगाया था। )

अरे चाची गुस्सा कांहे रही हो,,,, दूध ही तो मांग रहे हैं थोड़ी ना तुम्हारी गाय भैंस मांग ले रहे हैं,,,,,,

अच्छा तू मांगेगा तो मिल जाएगा,,,,, दिन में सपना देख रहा है क्या,,,

अरे चाची मांगने से मिल गया होता तो अब तक ना जाने क्या क्या मांग लिया होता,,,,

क्या क्या मांग लिया होता,,,( पूनम की मम्मी गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

अरे कुछ नहीं चाहती मैं तो मजाक कर रहा हूं और वैसे भी मुझे बहुत देर हो रही है जल्दी से दूध निकाल कर दे दो,,,,( पूनम की मां का गुस्सा देखते हुए वह बोला,,,,।)

पूनम,,,, जा बेटा जाकर जल्दी से दूध निकाल कर दे,,दे,,,, देख नहीं रही है कितना उतावला हुआ है,,,, अंदर घर में झाड़ू लगाना बंद कर और जल्दी आ,,,,( इतना कहने के साथ हीवह फिर से कपड़ों को रस्सी पर डालने लगी,,,, उसकी आवाज सुनकर सुजाता जो की छत की सफाई कर रही थी वह छत के ऊपर खड़ी होकर उसको देख कर मुस्कुराने लगी,,,,, तो हिंदी जवाब में हाथ हिलाते हुए उसे हवा में ही चुंबन को गेंद बनाकर उसकी तरफ उछाल दिया,,,, वह भी नजरें बचाकर जैसे कि किसी गेंद को लपक रही हो इस तरह से लपकते हुए उसे अपनी कुर्ती में डाल दी,,, सुजाता की यह अदा देखकर सोहन खुश हो गया,,,, और वह अपने मन की इच्छा को इशारों से दर्शाता हुआ,,, एक हाथ के अंगूठे और उंगली को जोड़कर गोल बना लिया और दूसरे हाथ की एक लंबी वाली उंगली को,,, ऊस गोलाई मे डालकर अंदर बाहर करते हुए उसे चोदने की ईच्छा बता दिया,,, पूनम की बुआ तो सोहन की इस हरकत को देखकर पूरी तरह से गंनगना गई,,,, और उसके इस इशारे को कोई और भी ना देख ले इसलिए वह झट से पीछे कदम हटा ली,,,, कब तक घर में से संध्या बर्तनों का ढेर हाथों में लिए बाहर आने लगी तो सोहन की नजर सीधे उसके बड़े बड़े ब्लाऊज से झांक रहे चुचियों पर गई,,,, सोहन चूचियों को खा जाने वाली नजर से देख रहा था,,, जिस पर संध्या की नजर गई तो वह अपने बदन को उसकी नजरों से छुपाते हुए गुस्से में बोली,,,,

क्या काम है,,,,, ऐसे क्या उल्लुओं की तरह घूर रहा है।

दददद,,, दुध,,,, दुध,,,, चाहिए कब से इंतजार कर रहा हूं,,,,

( सोहन समझ गया कि संध्या उसकी चूचियों को घूरते हुए उसे देख लि है,,, इसलिए हकलाते हुए बोला,,,, और उन दोनों की आवाज सुनकर पूनम की मम्मी जौकी कपड़े रस्सी पर डाल चुकी थी वह उनकी तरफ घूमते हुए बोली,,

अरे तू अभी तक यहीं खड़ा है,,,,, पूनम कहां गई,,,

दीदी वह तो अंदर वाले कमरे में झाडू लगा रही है । (संध्या बर्तन मांजने के लिए नीचे बैठते हुए बोली,, और उसे देखते देखते सोहन अपनी नजरों को बेठती हुई संघ्या के भारी भरकम गद्देदार गांड को देखने लगा,,,,, और उसे देखते हुआ लंबी आहें भरने लगा,,,। )

यह लड़की देना इसे कब से आवाज लगा रही हूं लेकिन यह है कि कुछ सुनती ही नहीं,,,,

( उसका यह कहना था कि तभी अंदर के कमरे से पूनम दुपट्टे को अपनी कमर से बांधते हुए बाहर आई और बोली,,,,)

क्या मम्मी आप भी ना तुम्हें अच्छी तरह से मालूम है कि मुझे दूध निकालना अच्छा नहीं लगता फिर भी मुझे ही कहती हो,,

बेटा तुझे मालूम तो है की आज के दिन तेरे चाचा बाजार जाते हैं और वहां से घर के जरुरतों का सामान लेकर आते हैं।

और उन्हें आते आते ही दोपहर हो जाएगी,,,, इसलिए कह रही हूं जा बेटा जल्दी से दूध निकाल कर उन्हें चारा भी दे दे,,,

चाची मैं अब और कितनी देर तक इंतजार करूं,,,,( सोहन उन लोगों की बहुत सारी देखते हुए बीच मे हीं बोल पड़ा,,,, लेकिन उसकी नजर अब पूनम के बदन के उपर घूम रही थी,,,, और यही ताक-झांक करने के लिए तो वह आज के दिन दूध लेने आता था और उसे आंख सेंकने के लिए काफी कुछ नजर आ ही जाता था,,,, उसे इस बात से ही तसल्ली थी कि भले ही वह उन औरतो के नंगे बदन के दर्शन नहीं कर पाता था लेकिन वह उन औरतों के खूबसूरत बदन के उतार-चढ़ाव का जायजा कपड़ो के ऊपर से ही भली भांति ले लेता था। इतने से ही सप्ताह भर तक लंड हिलाने का काम चल जाता था। वह प्रतिदिन अपनी प्यास को अपने ही हाथों से मुठ मारकर बुझाता था,, हालांकि मुठ मारते समय उसकी कल्पना हो की अभिनेत्री रोज ही कोई ना कोई और होती थी कभी वह सुजाता को याद करके,,, मुट्ठ मारता था तो कभी संध्या के भरावदा़र गद्देदार नितंबों की थिरकन तो कभी उसकी बड़ी बड़ी चूचियां का सहारा लेता था,,,तो कभी रीतु के खूबसूरत दूरियां बदन को याद करके तो कभी पूनम की मां की गांड को याद करके मुट्ठ मारता था और जब कभी उसके बदन में कामोत्तेजना का असर अपना जलवा दिखाता तो वह पूनम के खूबसूरत बदन की कल्पना करके बहुत ही तीव्र गति से अपने लंड को हिलाते हुए पूनम की कल्पना में ही उसके साथ संभोग सुख का सपना देखते हुए अपना पानी निकाल देता था।,,,,)

आ रही हूं ऐसा लग रहा है कि दूध नहीं मिलेगा तो भूचाल आ जाएगा,,,,,,,,

( सोहन पूनम की जवानी के रस को अपनी आंखों से पीते हुए बोला,,,)

तो दे दो ना कितनी देर से तो खड़ा हूं,,,,,

( इतना कहने के साथ ही पूनम आगे आगे चलने लगी और सोहन भी उसके पीछे हो चला सोहन कोे जाते हुए देख रही

संध्या गुस्से में मन ही मन में बड़ बड़ाते हुए बोली,,,,)

निठ्ठल्ला कहीं का।,,,,

क्या हुआ किसे गाली दे रहीे हैं,,,,,

( पूनम की मां संध्या को बड़बड़ाते हुए देख कर बोली,,,)

अरे इसी सोहन को देखते ही नहीं हो इसे बात करने का ढंग बिल्कुल भी नहीं है जब देखो तब औरतों के बदन को घुरता रहता है।

जाने दे उसकी तो आदत ही ऐसी है,,,,( इतना कहकर दोनों फिर से अपने अपने काम में लग गए,,,, दूसरी तरफ पूनम आगे आगे चली जा रही थी दुपट्टे को कमर से बांधने की वजह से,,, कमर के नीचे वाला भाग जो कि अब काफी उभरा हुआ नजर आ रहा था पूनम के हर चाल के साथ-साथ वह बड़े ही उन्मादक अंदाज में मटक रहा था। जिसको देखते हुए सोहन बार-बार अपने लंड को पेंट के ऊपर से ही मसल दे रहा था। पूनम की गदराई जवानी सोहन के बदन में कड़कड़ाती ठंडी में भी गर्मी पैदा कर रही थी। पूनम की बलखाती कमर के साथ साथ उसकी मटकती हुई गांड कभी दांएं को लचकती तो कभी बांए को,,, और उसके साथ-साथ सोहन कि काम लोलुपता से भरी आंखें भी दाएं बाएं घूम रही थी।,,, तभी वह आगे चल रही पूनम से बात करने की कोशिश करते हुए बोला,,,,,।

पूनम तुम हमेशा छुट्टी के दिन ही क्यों दूध निकालती है बाकी के दिन क्यों नहीं निकालती,,,,

क्यों तुम्हें कोई तकलीफ है क्या,,,( पूनम सोहन की तरफ बिना देखे ही बोली,,,)

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन वह क्या है कि तुम दूध अच्छा दिखाती हो मेरा मतलब है कि दूध अच्छी तरह से निकालती हो,,,( सोहन झट से अपनी कही बात को संभालते हुए बोला वैसे उसका इरादा दूसरा ही था,,,, पूनम उसके कहने का मतलब अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए वह गुस्से से उसकी तरफ देखने लगी तो वहां लुच्चे भरी मुस्कुराहट से उसे देखने लगा,,,)

वैसे सुना है पूनम की तुम पढ़ने में काफी होशियार हो,,,,

किसने कहा,,,,

गांव वालों ने और किसने कहा,,,,, गांव वाले बता रहे थे कि तुम इंग्लिश में काफी तेज हो,,,, और हमें तो ठीक से ABCD भी नहीं आती,,,,,

( इस बार पूनम उस पर गुस्सा नहीं हुई लेकिन चेहरे का एक्सप्रेशन गुस्से वाला ही था उसे अंदर ही अंदर सोहन कि इस बात पर खुशी होने लगी,,, लेकिन वह आगे से कुछ भी नहीं बोली)

कभी जरुरत पड़े तो हमें भी कुछ बता देना,,, हमें इंग्लिश बिल्कुल भी पढ़नी नहीं आती,,,

ठीक है,,, ठीक है,,, ( पूनम आंखें तैरते हुए बोली,,,, तब तक वह तबेले के अंदर आ गई और भैंस को पूचकारते हुए बाल्टी लेकर उसके थन के नीचे लगाते हुए बैठ गई,,,, सोहन ठीक उसके करीब ऐसे खड़े हो गया जहां से भैंस के दूध के साथ-साथ पूनम के भी दूध अच्छी तरह से नजर आने लगे,,,, पूनम इस तरह से बैठी हुई थी की कुर्ती में से झांक रहे दोनों दूध सोहन को साफ साफ नजर आ रहे थे,,, शायद सोहन की किस्मत भी बड़े जोरों पर थी क्योंकि पूनम ब्रा नहीं पहनी हुई थी वह रात को सोते समय,, तंग होने की वजह से उसे रात को ही निकाल दी थी,,, जैसे-जैसे पूनम भैंस के थन को पकड़ कर खींच खींच कर दूध निकालती वैसे वैसे बदन में जलन जलन की वजह से उसके दोनों नारंगीया भी कुर्ती के अंदर उच्छल कूद मचाने लगती,,, और उन दोनों कबूतरों को फड़फड़ाता हुआ देखकर सोहन का अंडर वियर तंग होने लगा था। पूनम बड़े मजे से बाल्टी के अंदर दूध का धार छोड़ते हुए थन में से दूध निकाल रही थी,,, और सोहन उसकी कुर्ती में झांकता हुआ बोला,,,,

लगता नहीं है कि इसमें ज्यादा दूध होगा,,,,,( सोहन उत्तेजना के मारे थूक को गले में निगलता हुआ बोला,,)

यह तो देखने वाली बात है देखना में धीरे धीरे करके पुरी बाल्टी भर दूंगी,,,( पूनम,, सोहन की बात का मतलब समझे बिना ही बड़े ही औपचारिक ढंग से बोल रही थी,,)

भगवान करे जैसा तुम कह रही हो ठीक वैसा ही हो तभी तो मजा आएगा,,,( मजा वाली बात सुनकर पूनम सोहन की तरफ आश्चर्य से देखें तो सोहन बात को बदलते हुए बोला,,,)

मतलब कि अच्छा लगेगा कि तुम्हारे कहने से बाल्टी भर गई,,,

( पूनम फिर से उसकी बात पर गौर ना करते हुए दूध निकालने लगी धीरे धीरे करके आधी बाल्टी भर गई थी,,, सोहन लगातार अपनी नजरें कुर्ती के अंदर गड़ाए हुए था नजरों को तेज कर के वह बड़े गौर से कुर्ती के अंदर के खजाने को निहारने में लगा हुआ था,,,, कुर्ती में छिपा यह एक अनमोल और अमूल्य खजाना था जिसका मोल दुनिया की किसी भी कीमती चीज से चुकाकर हासिल नहीं किया जा सकता था,,,, यह अनमोल खजाना किस्मत और प्यार की बदौलत ही पाया जा सकता था और उस खजाने को सोहन अपनी नजरों से चुरा रहा था। नजरों को काफी जोर देने पर उसे पूनम की भूरे रंग की निप्पल नजर आने लगी,,,, जिस पर नजर पड़ते ही सोहन की तो हालत खराब होने लगी उसके बदन में उत्तेजना के सुरसुराहट दौड़ने लगी,,,, उसके पैंट में तंबू सा बन गया उसकी अंडरवियर काफी तंग होने लगी,,

पूनम के संतरो की निप्पल किसी स्ट्रो की तरह लग रही थी,,,

जिसको मुंह में भरकर दूधीया रंग के संतरो के स्वादिष्ट रस को पिया जा सके,,, सोहन की तो इच्छा कर रही थी कि यही पकड़ कर उसकी चूची को मुंह में भर कर पीना शुरु कर दे,,

लेकिन मन में एक कसक उठकर शांत हो जाती थी क्योंकि वह जानता था कि ऐसा होने वाला नहीं है। पूनम ऐसी लड़की नहीं थी हां अगर पूनम की जगह उसकी बुआ होती तो सोहन जरूर अपनी मनमानी कर सकता था। उसके मन में इस बात को लेकर भी काफी उत्तेजना थी कि पूनम के घर में जितनी भी औरतें थी सब का बदन एकदम मदमस्त था। सब की सब गदराई जवानी की मालकिन थी। चाहे उनके पास छोटी-छोटी संतरे जैसी चूचियां हो या फिर खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी मजा सब में भरा हुआ था। सोहन मन ही मन में सोच रहा था कि अगर पूनम की छोटी-छोटी संतरे जैसी चूचियों को मुंह में भरकर पीना हो तो किस्मत बन जाए,,, यह सब सोचकर उसका अंडरवीयर ऐसा लग रहा था मानो लंड के भार से अभी फट जाएगा,,, पैंट के अंदर ग़दर मचाया हुआ था। पेंट में पूरी तरह से तंबू बन चुका था। धीरे-धीरे करके पूनम ने दूध से पूरी बाल्टी लबालब भर दी,,, भरी हुई बाल्टी देखकर पूनम बहुत खुश हुई,,,, और खुश होते हुए बोली,,

देखा कहती थी ना कि मैं यह पूरी बाल्टी दूध से भर दूंगी,,,,

( वह सोहन से बोल रही थी लेकिन सोहन का ध्यान तो कहीं और लगा हुआ था वह पूनम की छोटी-छोटी चूचियों को देखने में व्यस्त था,,, तभी तो वह पूनम की बात पर ध्यान दिए बिना ही जवाब देते हुए बोला,,,,।)

हां लेकिन बहुत छोटी छोटी हैं,,,

छोटी छोटी है,,,, क्या छोटी छोटी है,,,,, (इतना कहने के साथ ही वह नजरें उठाकर सोहन की तरफ देखीे तो उसे अपनी कुर्ती में झांकता हुआ पाकर एकदम से सकपका गई और शर्म के मारे अपने कपड़े को ठीक करने लगी,,,, और सोहन हड़बड़ाकर अपनी बात बदलते हुए बोला,,,,)

ममममम,,,, मेरा बर्तन छोटा,,,,,,, छोटा है,,,, वरना एकाद लीटर और ले लिया होता,,,,

( पूनम समझ गई थी कि उसकी नजर किस पर थी और उसकी किस्मत खराब थी कि आज उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी जिसकी वजह से उसे इतना तो मालूम ही था कि सोहन को कुर्ती कें अंदर बिना ब्रा के उसकी नंगी चूचियां बहुत साफ नजर आती होंगी इस बारे में सोच करवा एकदम से शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी,,, वह समझ गई थी कि सोहन इन चुचीयों के बारे में ही कब से बातें किए जा रहा था और वह बुद्धू की तरह समझ नहीं पा रही थी।,, वह गुस्से से बोली,,,)

लाओ अपना बर्तन,,,,

मे तो कबसे देने को तैयार हूं लेकिन तुम ही टाइम लगा रही हो,,,, ( इतना कहते हुए वह बर्तन पूनम को दबाने लगा जिससे वह अपनी पेंट में बने तंबू को छिपा रखा था उस जगह से बर्तन हटाकर पूनम को थमाते समय सोहन बिल्कुल भी अपने तंबू को छिपाने की कोशिश नहीं कर रहा था बल्कि वह मन ही मन किया जा रहा था कि पूनम की नजर उस तंबू पर पड़ जाए और ऐसा हुआ भी,,, सोहन के हाथ से बर्तन थामते समय अचानक ही पुनम की नजर उसके पैंट में बने तंबू पर चली गई,,,, और पूनम पेंट में बने उस तंबू को देखकर एकदम से सिहर गई,,, सोहन जान गया था कि पूनम की नजर उसके पेंट में बने तंबू पर पड़ चुकी है इसलिए वह दांत दिखाते हुए हंस रहा था,,,, और पूनम मन ही मन गुस्सा कर रही थी,,,, उसे शर्म भी बेहद महसूस हो रही थी लेकिन सोहन को कुछ बोल सकने की स्थिति में वह बिल्कुल भी नहीं थी उससे कहती थी तो क्या कहती,,,, क्योंकि पूनम उस तरह की लड़की नहीं थी कि इस बारे में भले ही गुस्से में ही सही उससे कुछ कह सके,,, वह जल्दी जल्दी बाल्टी से दूध उसके बर्तन में निकाल कर उसे थमा दी,, वह कुटिल हंसी हंसते हुए चला गया पूनम वहीं खडी सोहन को जाते हुए क्रोध और लज्जा के साथ देखती रही। पूनम के सामने पहली बार किसी ने इस हद तक अश्लील हरकत की थी जिसकी वजह से पूनम का पूरा बदन गनगना गया था। पूनम भी उम्र के ऐसे दौर से गुजर रही थी कि सोहन के पेंट में बने तंबू के अंदर के अंग के बारे में सोच कर उस की उत्सुकता बढ़ने लगी थी।

 
मनोज पूनम का पूरी तरह से दीवाना हो चुका था। जब भी उसे समय मिलता तो वहां पूनम की दी हुई नोट्स को अपने बैग में से बाहर निकाल कर घंटो उसे देखता ही रहता उसकी लिखावट पर अपनी उंगलियों का स्पर्श करके एक अद्भुत सुख की अनुभूति करता रहता,,, कभी-कभी तो वह उसके लिखावट को अपने होठों पर रखकर चूम लेता,,, कुछ दिनों से यही चल रहा था हालांकि उसे तो उस नोट्स में से अपना अधूरा काम पूरा करना नहीं था बस उसे अपने पास रख कर ऐसा प्रतीत होता था कि उसके पास पूनम की नोट ना हो करके पूनम खुद उसके करीब है।,,,, पूनम को दिया गया दो-तीन दिन का वक़्त भी मनोज ने यूं ही बिता दिया आखिरकार उसे उस नोट्स को तो लौटाना ही था,,, मनोज को पूनम से अपनी प्रेम का इजहार भी करना था लेकिन उसे किस तरह से अपने प्रेम का इजहार करना है समझ में नहीं आ रहा था।

उसने बहुत सी लड़कियों को प्रेम का इजहार करके अपने प्रेम के जाल में फंसा रखा था। लेकिन पूनम को किन शब्दों में वह अपने दिल की बात बयां करें इस बारे में उसे बिल्कुल भी नहीं सूझ रहा था। वह अपने कमरे में बैठकर पूनम की दी हुई नोट के पन्ने पलट रहा था कि तभी उसके दिमाग में एक युक्ति सूझी,,,, और वह,, इस बार अपने मुंह से नहीं बल्कि अपने प्रेम का इजहार को अपने शब्दों में डालकर कागज पर लिखने की ठान लीया,,, और अपने मन की बात को उस कागज पर उतार दिया,,,, और कागज के नीचे अंत में अपना नाम लिखकर साथ में पूनम का भी नाम लिख कर अपना मोबाइल नंबर भी लिख दिया,,,,,, उसे अपने ऊपर विश्वास था कि पूनम जरूर उसके लिए प्रेम पत्र को पढ़कर उसके प्यार को स्वीकार कर लेगी लेकिन उसे डर भी लग रहा था कि कहीं अगर पूनम ने उसके लिए प्रेम पत्र को पढ़कर फाड़ दी तो सारे अरमान धरे के धरे रह जाएंगे,,,,, वह इस खत को इंग्लिश की नोट में आखरी पन्नों के बीच रख कर अपने बैग में रख दिया क्योंकि उसे कल नोट्स को वापस लौटाना था।

दूसरी तरफ पूनम रात को अपने कमरे में सोते हुए मनोज के बारे में ही सोच रही थी बार-बार उसकी आंखों के सामने मनोज का चेहरा नजर आ जा रहा था उसका हंसता हुआ उसकी बोली भाषा उसका स्टाइल सब कुछ पूनम को अच्छा लगने लगा था। कड़ाके की ठंडी में रजाई ओढ़ कर मनोज के ख्यालों की गर्माहट से उसका बदन सुकून अनुभव कर रहा था। कभी उसे जांघों के बीच खुजली सी महसूस हुई तो वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर सलवार के ऊपर से ही,,, बुर के उपसे हुए भाग पर खुजलाने लगी,,,,,,की तुरंत उसके जेहन में सोहन का ख्याल आ गया,,, और सोहन का ख्याल आते ही उसकी आंखों के सामने उसके पैंट में बना जबरदस्त तंबू नजर आने लगा,,,, उस नजारे को याद करके पूनम के बदन में उत्सुकता के कारण सुरसुराहट सी दौड़ने लगी,,,, इतना तो उसे पता ही था की सोहन के पेंट में जिस वजह से तंबू बना हुआ है उसके पीछे उसकी जांघों के बीच के हथियार ही जिम्मेदार था,, उस हथियार को सामान्य भाषा में लंड के उपनाम से जाना जाता है यह भी,,, उसे अच्छी तरह से पता था,,,, लेकिन उन शब्दों का उच्चारण वह अभी तक मन से ही जानती थी कभी भी वह उन शब्दों को अपनी जुबान पर आने नहीं दी थी,,,,। उसे इस बात से हैरानी हो रही थी क्या उस अंग में इतनी ज्यादा ताकत होती है कि वह पेंट के आगे वाले भाग को इतना उठा देता है कि तंबू जैसा दिखने लगता है,,,, उस बारे में सोच कर उसके बदन की सुरसुराहट बढ़ने लगी थी,,,। उसके मन में इस बात को लेकर उत्सुकता होना लाजमी ही था क्योंकि उसने अभी तक किसी बड़े लड़के या एक संपूर्णता मर्द के लंड को कभी भी अपनी आंखों से नहीं देख पाई थी। उसने अभी तक सिर्फ बच्चों के ही लंड को देखी थी जिनके छोटे छोटे लंड को लंड नहीं बल्की नुनु जेसे शब्दों से जाना जाता था,,, इसलिए वह मर्दों के लंडके आकार लंबाई और उसकी मोटाई के बारे में बिल्कुल ही अनजान थी। उसे यह भी नहीं पता था कि मर्दों का लंड सुषुप्तावस्था में एकदम बच्चे की तरह हो जाता है और उसमें रक्त के तेज परिभ्रमण के कारण उसकी लंबाई में वृद्धि होने के कारण वह पूरी तरह से लंड में तब्दील हो जाता है और तब जाकर के,,, औरत की बुर में प्रवेश करने लायक बन जाता है। लेकिन पूनम इन सब बातों से बिल्कुल भी अनजान थी,, इसलिए तो वहां सोहन के तंबू के बारे में इतना कुछ सोच रही थी लेकिन उसके बारे में सोचते हुए उसे अपनी बुर के अंदर से कुछ चिपचिपा सा रिसाव होता महसूस होने लगा तो वहां उत्सुकतावश अपने हाथ को बुर. ़ के ऊपरी सतह पर रख कर,,, जानना चाहि कि ऐसा क्यों हो रहा है तो ऊसे कुछ समझ में नहीं आया कि यह गीला गीला क्यों हो गया है उसे बस ऐसा लगने लगा कि शायद तेज पेशाब लगने की वजह से पेशाब की बूंदे अपने आप ही बुर से बाहर आने लगी हैं,,,,, और उसे तेज पेशाब का एहसास भी हो रहा था और वैसे भी प्राकृतिक रूप से उत्तेजनात्मक परिस्थिति में पेशाब लग ही जाती है। सुबह जल्दी से अपने बिस्तर पर से ऊठी कड़ाके की ठंडी पड़ रही थी,,, वह अपने बदन पर गर्म साल लपेट कर जल्दी से कमरे से बाहर आ गई,,, वह घर का मुख्य दरवाजा खोलने चली ही थी की,,,, उसे पीछे से बर्तन गिरने की आवाज आई और वह तुरंत पीछे मुड़कर देखी तो उसकी ऋतु चाची अपने कमरे से बाहर चली आ रही थी। उन्हें देखते ही वह बोली,,,,

क्या हुआ चाची अभी तक आप सोई नहीं,,?

( पूनम बहुत धीमे से बोली थी जो कि सिर्फ उसकी चाची को ही सुनाई दे ताकि उसकी आवाज सुनकर दूसरा कोई न जग जाए,,,, तभी उसकी चाची कुछ बोलती से पहले ही उसके कमरे से उसके चाचा की आवाज आई,,,,।)

जल्दी आना ज्यादा देर मत लगा देना,,,

आ जल्दी आ रही हूं वहां कोई मैं सोने नहीं जा रही हूं जरा सा भी सब्र नहीं हो रहा है,,,,,( रितु यह बात फुसफुसाते हुए बोली थी लेकिन उसकी कहीं बात पूनम के कानों तक पहुंच गई अपने चाचा की बात सुनकर और चाची का जवाब सुनकर उसे समझते देर नहीं लगी कि सारा माजरा क्या है,,,, इसका साफ-साफ मतलब था कि उसके चाचा और चाची चुदाई का खेल खेल रहे थे,,,, जो कि आगे भी खेला जाना बाकी था इसलिए वहां पूनम की चाची को जल्द ही आने के लिए बोल रहे थे पूनम को सब कुछ समझते ही उसके चेहरे पर मुस्कुान फैल गई। उसकी चाची उसे मुस्कुराते हुए देख ली।,,,,

और थोड़ा चिढ़ते हुए बोली,,,,

तू क्यों हंस रही है,,,,

कुछ नहीं चाची बस ऐसे ही हंसी आ गई,,,

मैं सब जानती हूं कि तुझे हंसी क्यों आ गई तू जहां दांत निकाल कर हंस रही है पर तेरे चाचा इतनी कड़ाके की ठंडी में भी शांति से नहीं सोते,,,,,,( इतना कहते हुए वह खुद ही घर का मुख्य दरवाजा खोलकर बाहर आ गई और साथ ही पूनम भी,,,, चांदनी रात होने के कारण सब कुछ साफ साफ नजर आ रहा था हां लेकिन चारों तरफ कोहरा छाया हुआ था बाहर ठंडी कुछ ज्यादा हीं थी,,,, दोनों को जोरों से पेशाब लगी हुई थी पूनम घर के पीछे की तरफ जाने लगी तभी ऋतु उसे रोकते हुए बोली,,,,

अरे वहां कहां जा रही है।

अरे वही जो करने आए हैं,,,,

लेकिन तू घर के पीछे इतनी रात गए क्यों जा रही है पागल तो नहीं हो गई है,,, सब साथ में रहे तभी वहां जाया कर,,,

क्यों चाची,,,?

अब यह भी तुझे बताना पड़ेगा कितने आवारा लफंगे घूमते रहते हैं ऐसे अकेले पाकर कोई कुछ भी कर सकता है,,,, चल ऊधर सामने कर लेते हैं,,,,( इतना कहकर वह आगे आगे चलने लगी और पूनम उनके पीछे पुनम मन में सोच रही थी कि उसकी चाची सच ही कह रही है,,, इस तरह से अकेले घर के पीछे और वहां भी पेशाब करने जाना मतलब मुसीबत मोल लेने के बराबर है,,,, तभी उसके मन में सुबह वाली बात याद आ गई जब सोहन अपने पैंट में बना तंबू बिना किसी शर्म के उसे दिखाते हुए हंस रहा था ऐसे लोगों से बचकर रहने में ही भलाई है,,, वह मन मे यही सोच रही थी कि तब तक उसकी चाची रुक गई,,, और एक बार मन में तसल्ली करते हुए अपने चारों तरफ नजर दौड़ा कर देखने लगे कि कहीं कोई छुप कर उन्हें देख तो नहीं रहा है चारों तरफ कोहरे का धुंध फैला हुआ था इतनी दूर तक देख पाना मुश्किल ही था।

फिर भी आदत अनुसार निश्चिंत कर लेना चाहती थी और सब को निश्चित कर लेने के पश्चात वहां धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी ठीक उसके पीछे पूनम खड़ी होकर के इधर-उधर नजरे घुमाते हुए अपनी चाची को देख ले रही थी,,,, जो की उसके सामने अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी और यह कोई नई बात नहीं थी अक्सर वह लोग साथ में ही बातें करने के पश्चात घर के पीछे पेशाब करने जाया करते थे और वहां इसी तरह का दृश्य हमेशा ही देखने को मिलता था। धीरे-धीरे करके उसकी ऋतु चाची ने अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी,,, कमर तक साड़ी के उठते ही

रितु चाची के पिछवाड़े का सारा भूगोल पूनम के सामने खुली किताब की तरह नजर आने लगा,,,, घर में रितु चाची का रंग सबसे ज्यादा गोरा था इस वजह से कोेहरा होने के बावजूद भी,,, उसकी मदमस्त भरावदार बड़ी बड़ी गांड किसी बल्ब की तरह चमक रही थी,,,, पूनम पहली बार अपनी चाची की मदमस्त गोरी गांड को नहीं देख रही थी वह काफी बार देख चुकी है लेकिन इस कड़ाके की सर्दी में और कोहरे से छाई धुंध में भी जिस तरह से,,, उसकी गांड बल्ब की तरह चमक रही थी यह देखकर पूनम की आंखें भी चमक गई वह टिकटिकी लगाए,, अपनी चाची की गांड को ही देखे जा रही थी जो कि वह अब नीचे बैठ कर पेशाब करना शुरू कर दी थी,,, तभी पूनम का ध्यान गया कि उसकी चाची नहीं आज पैंटी नहीं पहन रखी थी और पहेली भी होंगी तो वह शायद कमरे में चाचा के साथ मस्ती करते समय उतारकर आई है यह सब ख्याल उसके दिमाग में आने लगा था एक पल के लिए तो यह सब सोचकर उसके बदन में भी उत्तेजना की सुरसुरी फैल गई,,,, मन में तो आया कि वह अपनी चाची से पूछ ही ले कि तुम्हारी पैंटी कहां है तब देखे कि वह क्या बोलती है। लेकिन शर्म के मारे वह पूछ ना सकी लेकिन अपनी चाची को पेशाब करते हुए देखकर उनकी मदमस्त गांड पर नजरें गड़ाए हुए वह बोली,,,,

चाची तुम्हारी गांड बहुत खूबसूरत है ।(गांड शब्द पूनम के मुंह से पहली बार निकला था इसलिए उसके बदन में रोमांच सा फ़ैल गया,,, पूनम की बात सुनकर पेशाब करते हुए ही रितु मुस्कुरा कर बोली,,,)

देखना नजर मत लगा देना ईसी के तो तेरे चाचा दीवाने हैं अगर नजर लगा दी तो शायद वह मुझ पर इतना ध्यान भी नहीं देंगे,,,,

तब तो चाची उस पर नींबू मरचा लटका कर घूमा करो क्योंकि इस तरह से कोई देखेगा तो उसकी नजर लगेगी ही लगेगी,,,,( इतना कहकर वह हंसने लगी तब तक उसकी चाची के साथ कर चुकी थी वह खड़ी होते हुए साड़ी को ठीक से झाड़ते हुए अपने कपड़ों को दुरुस्त कर ली और उससे बोली,,,)

अगर ऐसा है तो फिर घर में सब को ही लिंबू मरचा लटका कर घूमना पड़ेगा,,,, क्योंकि अपने घर में तो सभी औरतों की गांड बेहद खूबसूरत है । (इतना कहकर वह भी हंसने लगी और हंसते हुए बोली)

अब तू भी जल्दी से कर ले वरना मैं चली जाऊंगी,,,, तेरे चाचा इंतजार कर रहे हैं,,,,।

( अपनी चाची की बात सुनकर पूनम भी आगे बढ़ी और धीरे-धीरे अपने सलवार की डोरी को खोल दी उसकी चाची की भी नजर उसके ऊपर टिकी हुई थी,,,, डोरी के खुलते ही पूनम पेंटी सहित अपनी सलवार को पकड़ कर नीचे जांघो तक कर दी,,, सलवार को नीचे सरका आते ही उसकी उजली उजली गौरी गांड वातावरण में गर्माहट फैलाने लगी,, पूनम की खूबसूरत गांड पर अभी तक किसी मर्द के हाथों का स्पर्श नहीं हुआ था इसलिए उसकी गांड का घेराव सीमित मर्यादित रूप में ही था। जिसकी वजह से पूनम की गांड हल्की-हल्की कठोर लगती थी लेकिन ऐसी थी नहीं वह एकदम रुई की तरह नरम नरम थी तभी तो कमर पर हल्की सी बलखाहट आते ही उसमें इतनी लचक अा जाती थी कि,,, गांड के बीच की फांक रबड़ की तरह इधर उधर फैलने लगती थी ऋतु के देखते ही देखते पूनम नीचे बैठ कर पेशाब करना शुरू कर दी और वातावरण को अपने बुर के अंदर से आ रही मधुर आवाज की ध्वनि से,,, शुमधुर कर दी,,,, पूनम की खूबसूरत मदमस्त गांड को देखते हुए उसकी ऋतु चाची बोली,,,,

पूनम तुमको तो दो दो मिर्ची और नींबू लटकाने पड़ेंगे,,,

ऐसा क्यों चाची (वह पेशाब करते हुए ही बोली,,,,)

हम लोगों से भी ज्यादा खूबसूरत तुम्हारी गांड है इसलिए,,,,

क्या चाची तुम भी बस,,,,

अरे सच पूनम मैं सच कह रही हूं,,,,, बहुत ही किस्मत वाला होगा जिसे तुम मिलोगी और तुम्हारी यह खूबसूरत गांड,,,

धत्त,,,, चाची कैसी बातें करती हो,,,,( इतना कहने के साथ ही वह जल्दी से खड़ी होकर के,,, अपनी सलवार की डोरी बांधने लगी और खूबसूरत नज़ारे पर पर्दा डाल दी,,, लेकिन किस्मत वाले अपनी चाची की बात को सुनते ही उसके जेहन में मनोज का ख्याल आ गया था जिसका ख्याल आते ही उसके बदन में एक बार फिर से उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी।

बाहर ठंड ज्यादा थी इसलिए बाहर रुकने का कोई मतलब नहीं था वह दोनों जल्दी से घर में प्रवेश कर गई,,,

सुबह उठकर पूनम जल्दी जल्दी नहाकर स्कूल जाने के लिए तैयार हो गई उसकी दोनों सहेलियां भी आ गई दूसरी तरफ मनोज अपने लिखे प्रेम पत्र को उसकी इंग्लिश के नोट्स में रखकर उसे देने के लिए उसी मोड़ पर खड़ा होकर उसका इंतजार करने लगा,,,, पूनम के मन में भी बेचैनी छाई हुई थी वह भी मनोज से मिलने के लिए आतुर थी इसलिए अपनी सहेलियों के साथ वह स्कूल जाने के लिए निकल गई।

 


मनोज उसी मोड़ पर खड़ा होकर पूनम का इंतजार कर रहा था आज वह अपने दिल की बात कहने के इरादे से उधर खड़ा था। लेकिन जुबान से नहीं बल्कि प्रेम पत्र से उसे अपने ऊपर पूरा भरोसा था कि उसका प्रेम पत्र पढ़कर पूनम जरूर उसके प्यार को स्वीकार करेगी,,,, दूर से आ रही पूनम भी काफी बेचैन और बेसब्र लग रही थी,,, उसकी नजर मोड़ पर खड़े मनोज कर जैसे ही पड़ी उसके मन का मयूर नाचने लगा उसके चेहरे पर तुरंत प्रसन्नता झलकने लगी। उसकी दोनों सहेलियां भी मनोज को वहीं खड़ा देखकर पूनम के चेहरे की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी और उन दोनों को मुस्कुराता हुआ देखकर पूनम बोली,,,,

तुम दोनों ऐसे क्यों मुस्कुरा रहे हो,,,

देख रहे हैं कि आज भी तेरा आशिक इतनी ठंडी में भी वहीं खड़ा होकर तेरा इंतजार कर रहा है,,,,( बेला इतराते हुए बोली

आशिक होगा तुम्हारा मेरा व कुछ भी नहीं है पर ज्यादा दांत निकाल कर हंसने की जरूरत नहीं है,,,, वह कोई हीरो नहीं है कि उसे देखते ही मैं खुश हो जाऊंगी बल्कि उसे देखती हूं तो मुझे गुस्सा आने लगता है,,,,( पूनम बात बनाते हुए बोली)

गुस्सा,,,,, लेकिन क्यों,,,,,( बेला आश्चर्य के साथ बोली)

ववव,,, वो,,,,, वह है इतना कमीना,,,, अब देखना इतनी सिफारिश किया तो मैंने उसे अपनी इंग्लिश के नोट्स दे दी और उसे नोट्स दिए हुए आज सप्ताह से भी ऊपर हो गए लेकिन वह मेरे नोट्स अभी तक लौटाया नहीं है आज तो मैं उससे अपनी नोट्स मांग कर ही रहूंगी भले उसका काम पूरा हुआ हो कि ना हुआ हो,,,,,,( पूनम बनावटी गुस्सा दिखाते हुए बोली)

अच्छा यह बात है हम भी देखते है कि एक आशिक से भला तुम सच में अपनी दी हुई अमानत मांग लेती हो या बस यूं ही बना वटी गुस्सा कर रही हो,,,,

यह बात है मैं भी दिखाती हूं कि मैं सच कह रही हूं या झूठ,,,

( इतना कहते हुए तीनों तेजी से मनोज की तरफ जाने लगे लेकिन पूनम मन में यही सोच रही थी कि वहां कैसे मनोज से गुस्से में बात करेगी,,, पहले की बात कुछ और थी वाह मनोज को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी लेकिन अब बात कुछ और है मनोज को पसंद करने लगी थी मन में यही सब सोचते होंगे वह कब उसके करीब पहुंच गई उसे पता ही नहीं चला उसकी दोनों से बजाओ उसको ही देख रही थी कि वह कैसी मनोज से अपनी नोट्स मांगती है,,,, । मनोज के करीब पहुंच कर बात उसी से वोट मांगने की बजाए उसको भी देखे जा रही थी मनोज भी पूनम के चेहरे को नजर भर कर देख रहा था और उसकी दोनों सहेलियां पूनम को देखती तो कभी मनोज को,,,,, तभी बेला पूनम के हाथ में चुटकी काटते हुए बोली,,,।)

अरे यूं खामोश होकर बस देखे ही जाएगी कुछ बोलेगी भी,,,

( उसे चुटकी काटने से जैसे वह होश में आई हो इस तरह से हड़ बड़ाते हुए बोली,,,)

हहहहहहह,,, हां,,, बोल रही हूं ना,,,

क्या बोलना चाहती हो बोलो,,,पुनम,,,,, ( मनोज अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट लाते हुए बोला और उसकी यह मुस्कुराहट देखकर पूनम उसकी दीवानी हो गई वह ऊसकी आंखों में ही झांके जा रही थी।,,,)

वो,,, वो,,,, वो,,,,,

क्या वह वह लगा रखी है जो कहना चाहती है वह बोल दे,,,,

( बेला उसकी बात को बीच में ही काटते हुए बोली,,,,)

क्या हुआ पुनम जो बोलना चाहती हो बोल दो अच्छा रुको (इतना कहकर वह अपने बैग खोलने लगा,,,, और उसमें से इंग्लिश की नोट निकालकर पूनम को थमाते हुए) यह लो तुम्हारी इंग्लिश की नोट मैं अपना काम पूरा करता हूं और हां इतने दिन तक अपनी नोट मुझे देने के लिए शुक्रिया,,,,,।

( मनोज की बातें सुन कर तो पूनम कुछ बोल ही नहीं पाई मनोज ने अपना काम कर दिया था वह उसकी मौत ने अपने लिखे हुए प्रेम पत्र को रखकर अपना मोबाइल नंबर भी लिख दिया था वह खोल कर देख ना ले इसलिए वह इतना कहकर जल्दी से वहां से चला गया,,,, क्योंकि मुझे इस बात का डर भी था कि कहीं उसकी सहेलियों के सामने उसे उस का दिया हुआ प्रेम पत्र अच्छा ना लगे और वह गुस्से में कुछ बोल दे अगर वह अकेले में उसके प्रेम पत्र को देखेगी तो उसके बारे में जरूर सोचेगी,,, पूनम भी अपनी इंग्लिश की नोट लेकर उसे जाते हुए देखती रही,,,, मनोज जब चला गया तो उसकी दोनों सहेलियां उसके चेहरे की तरफ गुस्से से देखते हुए बॉली,,,

क्या हुआ मेरी पूनम रानी कहां गया तुम्हारा गुस्सा बातें तो बहुत बड़ी-बड़ी करती थी यह कह दूंगी वह कह दूंगी और ऊसके सामने आते ही एकदम भीगी बिल्ली बन गई,,,,, तुम जानती हो इसका मतलब क्या होता है।,,,,

अरे इसका मतलब क्या होता है जो मैं उससे मांगना चाहती थी वह खुद ही सामने से दे दिया तो मैं उससे क्या कहती।,,,,

तुम भला उसे क्यों कहने लगी इसी को तो प्यार कहते हैं मैं कहती थीैं ना एक ना एक दिन,,, तुम्हें भी उससे प्यार हो जाएगा और आखिरकार हो ही गया,,,,

फिर बेवकूफ वाली बात करना शुरू कर दी अब चलो स्कूल देर हो रही है,,,

( पूनम बात को उधर ही दबाते हुए स्कूल चलीे गई,,,,

मनोज मन ही मन में खयाली पुलाव बनाने लगा था। वह बस इंतजार कर रहा था कि कब पूनम इंग्लिश के नोट्स खोलें और उसके लिए प्रेम पत्र को पढ़कर उसका जवाब दे,,,,

लेकिन दो-चार दिन बीत जाने के बाद भी पूनम की तरफ से कोई जवाब नहीं आया वह जानबूझकर पूनम के सामने नहीं जा रहा था उसे यह लग रहा था कि अगर पूनम उसके प्रेम पत्र को पड़ेगी तो नीचे लिखे नंबर पर जरूर कॉल करेगी,,,, लेकिन ना तो पत्रकार जवाब आया और ना ही कोई कॉल आई,,,,

पूनम इस बात से बिल्कुल भी खबर थी कि मनोज ने उसे लव लेटर लिखा हुआ है और वह लेटर उसकी इंग्लिश की नोट्स में ही रखी हुई है। लेकिन मन ही मन में वह भी मनोज को लेकर के,, ढेर सारे सपने बुनने लगी थी। यह उम्र बड़ी ही फिसलन भरी होती है चाहे जितनी भी,,,, बंदिशों की बेड़ियों में जकड़ आने की कोशिश करो यह उतनी ही ज्यादा फीसलती है। और यही पूनम के साथ भी हो रहा था अपने आप उस का झुकाव मनोज की तरफ बढ़ता ही जा रहा था।

लेकिन इस बात का डर भी उसे बराबर लगा रहता था कि इस बारे में कहीं उसके घरवालों को कुछ भी पता ना चल जाए इसलिए वह बड़ा ही ख्याल रखती थी। इस बात से वह बिलकुल बेखबर थी कि मनोज ने उसे प्रेम पत्र भेजा है।

ऐसे ही रात को खाना खाने के बाद वह अपनी संध्या चाची के पास जाने लगी क्योंकि उसके चाचा 2 दिन के लिए बाहर गए हुए थे,,, वजह से ही अपनी चाची के कमरे के करीब पहुंची की अंदर से हंसने की आवाज आने लगी पूनम को समझ में नहीं आया की चाची अकेली है तो वह अकेले हंस क्यों रही हैं वह उत्सुकतावश खिड़की के पास खड़ी हो गई खिड़की हल्की सी खुली हुई थी वह अंदर अपनी नजर दौड़ा कर देखी तो उसकी संध्या चाची,,, बिस्तर पर लेटी हुई थी और वह हंस-हंसकर मोबाइल पर बातें कर रही थी। पूनम उत्सुकतावश कहां लगा कर उनकी बातों को सुनने की कोशिश करने लगी क्योंकि हल्की-हल्की उसके कानों में पड़ रही थी।

तुम कैसी रात गुजारोगे यह तो मुझे नहीं मालूम लेकिन तुम्हारे बिना मेरी रात बिल्कुल भी नहीं कटेगी,,,,, ( संध्या फोन पर अपने पति से बात करते हुए बोली पूनम भी समझ गई कि उसके चाचा से ही वह बातें कर रही है।,,, वह बार-बार मुस्कुरा दे रही थी और उसके हाथ उसके खुद के बदन पर चारों तरफ घूम रहे थे,,,,, पूनम को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार वह बात करते हुए अपने बदन पर हाथ क्यों घुमा रही हैं,,, अगर सामान्य तरीके से संध्या का हाथ बदन पर घूमता तो उसे आश्चर्य नहीं होता लेकिन कुछ अजीब प्रकार से ही संध्या का हाथ उसके बदन पर घूम रहा था इसलिए पूनम को यह बात थोड़ी अजीब लग रही थी कि तभी संध्या का हाथ,,, उसकी चूची पर आ कर रुक गई और वह उसे जोर जोर से दबाते हुए बोली,,,,,

सससससहहहह,,,, मेरे राजा खुद के हाथ से इतना मजा नहीं आता चूची दबाने में जितना कि तुम्हारे दबाने से आता है।,,

( अपनी संध्या चाची की यह बात सुनते ही उसे सारा माजरा समझ में आ गया पर फोन पर अपने चाचा के साथ गंदी बातें कर रही थी और यह बात सुनकर उसके बदन में भी सुरसुरी सी दौड़ने लगी,,,, उसका एक मन कहा कि वह वहां से चली जाए और वह वहां से जाने ही वाली थी कि तभी वह मन में सोचा की देखो तो सही चाची फोन पर बातें करते हुए क्या-क्या करती हैं इसलिए वह खिड़की पर खड़ी रही,,,, तभी उसके अंदर से आवाज आई जो कि उसकी चाची फोन पर अपने पति से बोल रही थी,,,,।

हां हां उतारतीे हूं तुम तो इतने उतावले हुए हो कि जैसे मुझसे दूर नही मेरे पास में ही बैठे हो,,,,,

( यह बात सुनकर पूनम को समझ में नहीं आया कि उसकी चाची क्या उतारने की बात कर रही है कि तभी वह खिड़की में से साफ-साफ देख पा रहीे थीे कि उसकी चाची एक हाथ से अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी और वह समझ गए कि फोन पर उसके चाचा उसे ब्लाऊज ऊतारने के लिए बोल रहे थे। यह नजारा देखकर तो एकदम से सन्न रह गई,,, अगले ही पल उसकी चाची ने ब्लाउज के सारे बटन खोलकर अपनी बड़ी बड़ी चूचियां को नंगी कर दी और खुद ही एक हाथ से बारी-बारी से दोनों चूचियों को दबाने लगी,,,, अपनी चाची की बड़ी बड़ी चूची को देखते ही पूनम की जांघों के बीच खलबली सी मचनें लगी,,, ऐसा नहीं था कि वह अपनी चाची की बड़ी बड़ी चूची और को संपूर्ण नंगी पहली बार देख रही हो वह पहले भी अपनी चाची की नंगी चूचियों के दर्शन कर चुकी थी लेकिन आज माहौल कुछ और था इसलिए उन चुचियों को देखकर उसके बदन में गंनगनी सी छाने लगी,,,,,

उसकी चाची सिसकारी लेते हुए अपनी चुचियों को दबा दबा कर अपने पति से बातें कर रही थी,,,,,

अगर तुम इस समय मेरे पास होते तो मजा आता है क्योंकि तुम मेरी चूचियों को अपने मुंह में भरकर जोर-जोर से चुसते हुए इसे पीते,,,,

( संध्या अपने पति से एकदम गंदी बातें कर रही थी जिसे सुनकर पूनम की हालत खराब होने लगी थी वह जिंदगी में पहली बार इस तरह की बातें सुन रही थी और वह भी अपनी चाची के मुंह से,,, वह बार-बार यही सोच रही थी कि यहां से चली जाए लेकिन कमरे का अंदर का नजारा एकदम गर्माहट भरा था जो कि जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी पूनम के लिए,,,, यह नजारा का दर्शन करना,,

इस नजारे का दर्शन करना एकदम अद्भुत और आनंद से भरपूर था। उत्तेजना के मारे पूनम का गला सूखने लगा था अपनी चाची का यह रूप पहली बार देख रही थी शायद एक औरत अपने पति से दूर रहकर रात को उसकी हालत क्या होती है आज पहली बार पूनम को इस बात का पता भी चल रहा था।,,,,, पूनम धड़कते दिल के साथ अपनी नजरें खिड़की से सटाकर अंदर का नजारा देख रही थी तभी उसके कानों में अगले शब्द जो पड़े उसे सुनते ही,,,, उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया उसे समझ में नहीं आया कि उसकी चाची क्या बोल रही है वह अपने पति से थोड़ा सा रूठने वाले अंदाज में बोली,,,,

नहीं बिल्कुल भी नहीं बेगन से मुझे बिल्कुल भी मजा नहीं आता बल्कि उससे मेरी प्यास और ज्यादा बढ़ जाती है,,,, जब तक तुम्हारा मोटा लंबा लंड मेरी बुर में नहीं जाता तब तक मुझे चैन नहीं मिलता,,,,,

( लंड बुर जैसे अश्लील शब्दों को अपनी चाची के मुंह से सुनकर पूनम एकदम से सन्न रह गई,,,, उसे अपनी आंखों पर और अपने कानों पर बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि वह जो देख रही है वह सच है और जो सुन रही है वह बिल्कुल सही है उसे बार-बार यही लगता था कि जैसे वह कोई सपना देख रही है क्योंकि वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि उसकी संध्या चाची लंड बुर जैसे शब्दों का उपयोग खुले तौर पर बिना झिझक के कर सकती है। लेकिन यह बिल्कुल सत्य था जो वह देख रही थी वह सपना नहीं हकीकत है और जो बात सुन रही थी वह बिल्कुल सही सुन रही थी। पूनम की उत्तेजना बढ़ने लगी थी उसकी सांसो की गति बढ़ती जा रही थी सांसो के साथ-साथ उसके दोनों नौरंगिया उपर नीचे हो रहे थे। उसके मन में तो आया कि वह वहां से चली जाए लेकिन ना जाने कैसा कसक था कि उसे जाने नहीं दे रहा था एक गुरुत्वाकर्षण का बल उस कमरे में पैदा हो रहा था जहां से उसकी नजरें हटाने पर भी नहीं हट रही थी। उसके मन में उत्सुकता थी कि आखिर चाची बैगन की चर्चा क्यों कर रहे हैं वह बेदम जैसे सब्जी का उपयोग बातों के दौरान क्यों कर रहे हैं और यही देखने के लिए वह वहीं रुकी रही,,,,

नहीं आज नहीं बिल्कुल भी नहीं तुम जानते हो कि तुमसे चुदवाए बिना मुझे चैन नहीं मिलता भले ही मैं अपनी बुर में फिर बेगन डाल लु या फीर ककड़ी इससे कोई भी फर्क नहीं पड़ता,,,,( संध्या चाची के कहे गए यह शब्द पूनम के लिए किसी प्रहार से कम नहीं था पूनम इस तरह के शब्दों को आज ही सुन रही थी और यह शब्द उसके बदन में उत्तेजना का रस घोल रहा था जो कि यह रस उसकी जांघों के बीच से टपकता हुआ उसे साफ तौर पर महसूस हो रहा था,,,, वह झट से अपने हाथ को अपनी जांघो के बीच ले जाकर बुर पर स्पर्श कराई तो उसे वह स्थान गिला गिला सा महसूस होने लगा,,,, उसे बिल्कुल भी समझ में नहीं आया कि यह क्या है।

वह वहां से चली जाना चाहती थी लेकिन ना जाने उसके दिमाग में क्या चल रहा था की वह वहां से एक कदम भी हिला नहीं पा रही थी,,,, कि तभी उसके कानों में उसकी चाची की आवाज आई,,,,,

अरे यार तुम इतना उतावला क्यों हो जा रहे हो,,,, वैसे भी मैंने आज पेंटी नहीं पहनी हुं ( इतना कहते हुए वह अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी,,,, पुनम यह नजारा देखकर और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगी,, उसका चेहरा लाल सुर्ख होने लगा

सांसों की गति और ज्यादा बढ़ गई,,,,, बार-बार उसकी इच्छा हो रही थी कि वह अपना हाथ जांघो के बीच ले जा कर के जोर जोर से दबाए लेकिन उसे ऐसा करने में कुछ अजीब सा लग रहा था इसलिए वह अपने आप को इस तरह की स्थिति में भी संभाले हुए थी,,,, पूनम की नजर उसकी चाची की जांघों के बीच ही टिकी हुई थी संध्या की गोरी चिकनी जांघे केले के तने की तरह मोटी मोटी औरत चमक रही थी,,, बुर पर हल्के हल्के बाल पूनम को साफ नजर आ रहे थे।,,, तभी वह हम जोर-जोर से अपनी नंगी बुर को अपनी हथेली से रगड़ते हुए गर्म सिसकारी छोड़ने लगी,,,,

सससससहहहहहह,,,,, मेरे राजा मेरे बलम चले आओ और मेरी बुर में अपना लंड डालकर मुझे चोदो,,,,,

( संध्या चाची की यह बात पूनम के तन-बदन में आग लगा रहे थे जो शब्द वह कभी कभार रास्ते में आते जाते आवारा छोकरो को एक दूसरे को गाली देते सुनी थी वही शब्द उसकी चाची बड़े मजे ले कर बोल रही थी,,,, जिस तरह से वह अपनी बुर को अपनी हथेली से रगड़ रही थी ऐसा कभी पूनम में सपने में भी नहीं सोची थी,,,, या तो पूनम की सोच थी ऐसे बहुत से नजारे थे जो अभी तक पूनम नै ना सोची थी और ना ही देखी थी।,,,, कभी उसकी चाची ने बिस्तर के नीचे से एक मोटा तगड़ा बेगन निकाल कर हाथ में ले ली,,, यह देखकर पूनम के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार उसकी चाची बैगन ले कर क्या करेंगी,,,

अरे डाल रही हूं ना तुमसे बिल्कुल भी सब्र नहीं होता,,,

( तभी फॉन पर संध्या बोली और यह बात सुनकर पूनम को समझते देर नहीं लगी की उसके चाचा जी उसे कुछ डालने के लिए निर्देश कर रहे हैं। पूनम उत्तेजना के मारे सर से पांव तक पसीने से लथपथ हो गई सांसो की गति किसी रेलवे इंजन की तरह धक धक धक धक करके चलने लगी थी,,,, उसकी आंखों में ऐसा नजारा कभी नहीं देखी थी,,, कमरे के अंदर चल रही संध्या के क्रियाकलापों का उसके कोमल मन पर गहरा प्रभाव पड़ रहा था।,,, आगे उसकी जाति कौन सी हरकत करती है इस उत्सुकता से वह,,,खिड़की से अंदर झांक रही थी कि तभी उसकी आंखों के सामने ही उसकी चाची एक मोटी बैगन को अपनी बुर के मुहाने पर रख कर धीरे-धीरे करके उसे अंदर की तरफ सरकाने लगी,,,, यह देख कर तो पूनम की आंखें आश्चर्य से फटी की फटी रह गई,,,, जय हो वहां क्या देख रही है इस बात को तो कुछ पल के लिए वह भी समझ नहीं पाई,,,,, उसके देखते ही देखते उसकी चाची ने पूरा बेगन अपनी बूर के अंदर उतार ली,,,, और फोन पर गरमा गरम सिसकारी की आवाज ऊसके चाचा को सुनाने लगी पूनम की हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी। उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन वह जो देख रही थी वह सनातन सत्य था। पूनम की आंखें खुली की खुली थी और उसकी चाची मोटे ताजे बेगन को जल्दी-जल्दी अपनी बुर के अंदर बाहर कर रही थी। पूनम से यह नजारा देखकर बिल्कुल भी रहा नहीं गया और उसके हाथ खुद ब खुद जांगो के बीच पहुंच गया,,, और वहां सलवार के ऊपर से ही अनजाने में अपनी बुर को हथेली से दबाने लगी,,, कमरे के अंदर का कामोत्तेजना से भरपूर नजारा और उसके बदन की गर्मी की जवानी की तपन से एकदम से पिघल गई,, और अगले ही पल उसकी बुर से मदन रस का फुहारा छूट पड़ा,,,

उसके बदन में इस तरह की स्थिति पहली बार उत्पन्न हुई थी इसलिए वह,,, अपनी बुर क्यों हो रही मदन रस के बहाव को समझ नहीं पाई और वह एकदम से घबरा गई,,, वह जल्दी से भागते हुए अपने कमरे में आई और दरवाजे को बंद करके तुरंत अपनी सलवार उतार कर पैंटी के अंदर देखने लगी,,,, बुर की ऊपरी सतह पर ढेर सारा चिपचिपा पानी लगा हुआ था जिसकी वजह से उसकी पेंटी भी गीली हो चुकी थी,,,,

उसने कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि यह चिपचिपा सा निकला पदार्थ है क्या,,, उसे बड़ा अजीब सा लग रहा था वह जल्दी से अपने कपड़े बदल कर बिस्तर पर लेट गई,,,, पर सोने की कोशिश करने लगी लेकीन नींद ऊसकी आंखो से कोसो दुर थी। रात भर वह बिस्तर पर करवट बदलते हुए अपनी चाची के कमरे के नजारैं को याद करती रही,, और खुद के अंग से हुए स्खलन की वजह से ऊसके मन मे ढेर सारी शंकाए जन्म लेती रही,,, यही सब सोचते हुए कब उसे नींद आई उसे भी पता नहीं चला।

 
दूसरे दिन जब पूनम की आंख खुली तो काफी उजाला हो चुका था वह जल्दी से बिस्तर से उठकर सीधे बाथरूम में घुस गई और नहा धोकर,,,, अपना बैग लेकर स्कूल जाने के लिए तैयार हो गई रात वाली बात वह बिल्कुल भूल चुकी थी,, जैसे ही कमरे के बाहर वो जाने लगी फिर से पीछे से उसकी संध्या जाती उसे आवाज़ देते हुए दूध का गिलास लेकर उसके पास आ गई,,,

इतनी बड़ी हो गई है लेकिन क्या मैं तुझे हमेशा बच्चों की तरह अपने हाथ से ही दूध पिलाऊ,,,( संध्या गिलास का दूध पूनम को थमाते हुए बोली,,, संध्या को देखते ही पूनम को रात वाली सारी बातें याद आने लगी और उसकी आंखों के सामने वो नजारा किसी पिक्चर की तरह घूमने लगा जब संध्या खुद अपने ही हाथों से अपनी चूची को दबा रही थी और बेगन को अपने बुर में अंदर बाहर कर रही थी,,, पूनम अपनी चाची के हाथों से दूध का गिलास मुस्कुराते हुए लेली,,

थैंक यू चाची तुम मेरा कितना ख्याल रखती हो,,,,( इतना कहकर पूनम दूध पीने लगी संध्या वापस अपने काम में लग गई अपनी चाची को देखकर पूनम समझ में नहीं पा रही थी कि चाची का यह कैसा रूप है दिन के उजाले में वह किस तरह के चरित्र में पेश आती हैं और रात को उनका चरित्र किस हद तक सारी हदें पार कर देता है,,,। दूध पीते हुए पूनम यही सब सोच रही थी लेकिन उसके सोचने का ढंग कुछ अलग था क्योंकि यदि वह दुनिया के समाज के अंदर के चेहरे से बिल्कुल भी अनजान थी,,, औरत का चरित्र हर पल सामाजिक रीति रिवाजों और संबंधों के हिसाब से बदलता ही रहता है। औरतों में बहन भी होती है मां भी होती है एक पत्नी भी होती है एक प्रेमिका भी होती है जो कि समय-समय पर अपने चरित्र को बदलती रहती हैं,। दिन में औरत अपने संबंधों के हिसाब से अपने चरित्र को जीती है। दिन भर सुबह अपने भाई के साथ बहन का अपने पिता के साथ बेटी का और अपने बच्चे के साथ मां का फर्ज निभाती है और रात को अपने पति के साथ एक पत्नी धर्म निभाते हुए अपनी सारी शर्म मर्यादा को छोड़कर,, अपने पति की सेवा में अपना तन मन सब कुछ समर्पण कर देती है और यही कार्य पिछली रात को संध्या भी अपनी पति की खुशी की खातिर फोन कर अश्लील बातें करते हो अपने बदन के साथ कामुक हरकत कर रही थी,, जिससे उसे भी उतना ही सुख प्राप्त हो रहा था जितना कि फोन पर सिर्फ उसकी अश्लील हरकतों के बारे में सुनकर उसके पति को हो रहा था,,, पूनम इन सब बातों से बिल्कुल अनजान थी इसलिए उसे यह सब बिल्कुल अजीब लग रहा था लेकिन रात के नजारे की बात याद आते ही उसके बदन में सुरसुराहट दौड़ने लगी,,,, वह अपना दूध का गिलास खत्म कर पाती इससे पहले ही घर के बाहर उसकी सहेलियों ने उसे आवाज़ लगा दी और वह जल्दी से दूध का गिलास खत्म करके गिलास वहीं ही रख कर बाहर की तरफ भाग गई,,,,।

क्या यार तुम तू हमसे पहले कभी भी पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाती जब देखो तब हमारे आने के बाद ही तू आती है,,,

( बेला पूनम को डांटने के अंदाज में बोली।)

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो कब से तैयार होकर बैठी थी बस तुम दोनों के आने का ही इंतजार कर रही थी,,,( पूनम बातें बनाते हुए बोली,,,।)

हां हां बस रहने की बातें बनाने को हम जानते हैं कि तु तैयार होकर ही बैठी रहती हैं,,,,

बस बस बहुत हो गया थोड़ा सा इंतजार क्या कर लेती है ऐसा लगता है कि मुझे अपने सर पर बिठा कर ले जाती है।

( पूनम उन दोनों को गुस्सा करते हुए बोली,,,। इसके बाद उन दोनों में से किसी ने कुछ भी नहीं कहा वह तीनों स्कूल की तरफ जाने लगे ठंडी बड़े जोरों से पड़ रही थी,,, इसलिए पूनम अपनी हथेलियों को आपस में रगड़ते हुए बदन में गर्माहट पैदा करते हुए जा रही थी,,,, यह देखकर बेला चुटकी लेते हुए बोली,,,।)

पूनम तेरे शरीर में ठंडक कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है तुझे गर्मी की जरूरत है,।

हारे देखना ठंड कितनी ज्यादा है,,,,

तू एक काम कर दो ना एक ही तरीके से तेरी ठंडी पूरी तरह से गायब हो जाएगी,।

कैसे जरा जल्दी बता मुझे ज्यादा ही ठंड लग रही है,,,,,

किसी मस्त छोकरे के साथ जाकर चिपक जा,,, वह तुझे अपनी हरकतों से इतना गर्म कर देगा कि तू इतनी कड़कड़ाती ठंडी में भी अपने सारे कपड़े उतार कर उस से चिपक जाएगी।

( बेला की बात सुनते ही पूनम गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए बोली,।)

इस कड़कड़ाती ठंडी की वजह से मैं मजबूर हूं वरना ईसी हाथ से तेरे गाल पर एक तमाचा मारती थी तो तु पूरी तरह से पसीने से तरबतर हो जाती,,,

अरे यार तुझसे तो मजाक भी नहीं कर सकते जब देखो तब गुस्सा हो जाती है।( उसका इतना कहना था कि उसकी नजर उस मोड़ पर ही इंतजार कर रहे मनोज पर पड़ी) ले देख ले तेरा आशिक भी तेरा इंतजार कर,,, रहा है जाकर चिपक जा वह तुझे पूरी तरह से गर्म कर देगा,,, ।

( बेला की बात सुनते ही पूनम की नजर उस मोड़ पर खड़े मनोज पर पड़ी तो उसे देखते ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव उमड़ पड़े लेकिन वह जल्द ही अपने चेहरे पर गुस्से का भाव लाते हुए बोली,,,।)

इसे भी कोई काम नहीं है जब देखो तब यही खड़ा होकर के इंतजार करता रहता है,,,, दोखना आज तो यह मुझसे कितनी भी बात करने की कोशिश करे लकीन मैं इससे बिल्कुल भी बात नहीं करूंगी,,,

क्यों कोई नाराजगी है क्या (बेला तपाक से बोली)

तू अपनी बकवास बंद रख,,,

( दूसरी तरफ मनोज उसका बेसब्री से इंतजार कर रहा था वह आज अपने मन की बात बोल देना चाहता था और उससे पूछना भी चाहता था कि वह उसके प्रेम पत्र का जवाब क्यों नहीं दे रही है,,,, लेकिन उसके दिमाग में आया कि ऐसा भी तो हो सकता है कि पूनम ने उसके दिए लेटर को पढ़ा ही ना हो,,

यही सब सोचकर उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था पूनम एकदम करीब आते जा रही थी वह समझ नहीं पा रहा था कि वह उससे बोले या ना बोले,,,, तभी उसंने सोचा कि सबके सामने बोलना ठीक नहीं है क्योंकि पूनम दूसरी लड़कियों की तरह नही हैं। उसके यह सोचते ही सोचते पूनम बिल्कुल उसके करीब आ गई पूनम भी यही सोच रही थी कि मनोज से कुछ बोलें लेकिन इसी कशमकश में मनोज कुछ बोल नहीं पाया हालांकि पूनम उसे करीब पहुंचते ही उसके कदम धीरे-धीरे पड़ने लगे थे,, लेकिन बोले कि ना बोले की कशमकश में मनोज रह गया और पूनम आगे निकल गई,,,, पूनम के लिए कान तरस रहे थे मनोज की आवाज सुनने के लिए उससे बात करने के लिए लेकिन बेला और सुलेखा की होते हुए यह होना मुमकिन नहीं था,,,,, हाथ में आया हुआ मौका मनोज के हाथ से निकल गया था मनोज को यह लगने लगा कि वास्तव में पूनम ने उसका दिया लेटर पढ़ा ही नहीं है,,, वरना वह उसे देखकर कुछ ना कुछ प्रतिक्रिया जरूर करती,,,

क्लास में बैठा-बैठा मनोज तय कर लिया कि कुछ भी हो वह पूनम से पूछ ही लेगा उसके लिए प्रेम पत्र के बारे में लेकिन ना जाने क्यों मनोज हिम्मत नहीं कर पा रहा था आज पहली बार उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसे भी लड़कियों से डर लगता है यह सभी लड़कियों के बारे में नहीं था या फिर पूनम के ही बारे में था क्योंकि इससे पहले उसने जिसको चाहा उस लड़की से अपने मन की बात बोल दिया लेकिन पूनम से बोलने में उसे ना जाने किस बात का डर लगता था। फिर भी वह स्कूल छूटने का इंतजार करने लगा,

स्कुल छुट़ चुकी थी छूटने की घंटी बजते ही वह जल्दी से अपने क्लास से बाहर निकल कर गेट पर खड़ा होकर पूनम का इंतजार करने लगा,,,, पूनम उसे अकेले ही आती नजर आई उसे अकेला देखकर वह खुश हो गया। पूनम की भी नजर मनोज पर पड़ गई मनोज पर नजर पड़ते ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव साफ नजर आने लगे वह जल्दी से अपने अगल बगल देखी बेला और सुलेखा कहीं भी नजर नहीं आ रही थी। वह भी जल्दी से मनोज के करीब पहुंची लेकिन वह इस तरह से गई थी मनोज को यहां पर बिल्कुल भी ना हो कि वह खुद उसके पास चल कर आई है,,, पूनम को देखते ही मौका पाकर मनोज बोला,,,,।

पुनम मुझे तुमसे कुछ बात करनी है,,,

मुझसे लेकिन मुझसे क्या बात करनी है,,,,

ऊसी लेटर के बारे में,,,

लेटर कौन सा लेटर,,, कीस लेटर के बारे मे बात कर रहे हो तुम,,,( पूनम आश्चर्य के साथ बोली,,,।)

वही लेटर जो मैंने लिख कर तुम्हारी इंग्लिश की नोट में तुम्हें दिया था।

पर मुझे तो ऐसा कोई लेटर नहीं मिला,,,,,

तुम अपनी इंग्लिश की नोट खोलकर देखना उसमे जरूर मेरा लिखा हुआ लेटर भी है और मेरा मोबाइल नंबर भी है,,,,।

पर ऐसा क्या लिखा है उस लेटर में जिसके लिए तुम इतने बेताब नजर आ रहे हो,,, ( पूनम मनोज के चेहरे के बदलते हावभाव को देखते हुए बोली)

पूनम वह तो मैं इस समय तुम्हें नहीं बता सकता हूं वह तुम अपने आप ं पढ़ोगी तो तुम्हें खुद ही पता चल जाएगा कि मैं तुम्हें क्या कहना चाहता हूं,,,,( तभी उसकी नजर बेला और सुलेखा पर पड़ी जो कि ईसी तरफ चली आ रही थी लेकिन उन लोगों का ध्यान इधर बिल्कुल भी नहीं था,,,) देखो तुम्हारी दोनों सहेलियां भी आ रही है मैं उन लोगों के सामने कुछ नहीं कहना चाहता बस तुम मेरा दिया हुआ लेटर एक बार पढ़ लेना,,, मैंने तो अपने मन की बात उस लेटर में लिख दिया हूं तुम्हारे मन में क्या है यह तो मैं नहीं जानता लेकिन जो भी हो मुझे बता जरुर देना,,,, बस मैं चलता हूं बाय,,,,,,

( इतना कहकर मनोज चला गया तभी उसकी सहेलियां उसके करीब आ गई और तीनों अपने घर की तरफ जाने लगी रास्ते भर पूनम सोचती रही कि आखिर वह इंग्लिश के नोट्स में उसे लेटर क्यों दिया,,, वह मुझसे क्या कहना चाहता है और अपनी मन की बात क्या है उसके मन की बात यह सब सोच कर उसका दिमाग चकरा जा रहा था उसका एक बुनियादी कह रहा था कि कहीं वह उसे प्रेम पत्र तों नहीं लिख कर दिया है।,,, अजीब से असमंजस में पड़ गई थी वह लेटर की बात से उसके बदन में सुरसुराहट सीहोने लगी थी।,, वह लेटर उसके स्कूल बैग में ही था,,, जिसे पढ़ने के लिए अब वह बेताब नजर आ रही थी।,,, वह घर पर पहुंचते ही उस लेटर को पढ़ना चाहती थी लेकिन जैसे ही वह घर पर पहुंची उसकी मम्मी ने उसे काम पर लगा दी घर पर वैसे भी सारा काम पड़ा हुआ था मन मार कर वह काम में जुट गई,,,,

इधर-उधर करने में ही कब शाम हो गई उसे पता ही नहीं चला,,, अब उसके पास अपना बैग खोलकर उस लेटर को पढ़ने का टाइम बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह सोची की रात को सोते समय अपने कमरे में ही ईत्मिनान से उस लेटर को पढ़ेगी तब तक वह घर के कामकाज को करती रही,,,

 
पूनम खाना खा चुकी थी रात के करीब 11:00 बज रहे थे वह सारे काम काज कर के एक दम खाली हो चुकी थी सब अपने अपने कमरे में चले गए थे सब के जाने के बाद पूनम भी धड़कते दिल के साथ अपने कमरे में प्रवेश की,,, उसके मन में मनोज के लिए लेटर के बारे में सोच-सोच कर पूरे बदन में सुरसुराहट की लहर दौड़ रही थी। पूनम को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि उसके लिए लेटर में क्या लिखा होगा वह बस उत्सुकतावश उसे जल्द से जल्द पढ़ना चाहती थी।

वह अपने कमरे में प्रवेश करते ही जल्दी से दरवाजा बंद करके कुंडी चढ़ा दी,,,, कड़कड़ाती की ठंडी में भी उसके पसीने छूट रहे थे। एक अजीब सी हलचल उसके मन में मच रही थी जिसकी वजह से उसका गला सूख रहा था। वह टेबल पर रखा अपना बैग लेकर बिस्तर पर आराम से बैठ गई और बैग को खोलकर अपनी इंग्लिश की नोट्स को बाहर निकाल ली,,, पूनम को उत्सुकता के साथ-साथ थोड़ा डर भी लग रहा था कि पता नहीं उसने उस लेटर में क्या लिखा होगा। वह इंग्लिश की नोट्स को बैग पर रखकर उसके पन्नों को पलटने लगी,,, वह जल्दी-जल्दी पन्नों को पलट रही थी लेकिन उसका लिखा एकभी लेकर उस नोट्स में दिखाई नहीं दे रहा था,,,, वह पन्नों को पलट भी रही थी और साथ में यह भी सोच रही थी कि कहीं मनोज ने उसके साथ मजाक तो नहीं किया,,,,,, एक पल के लिए तो उसे मनोज पर गुस्सा आने लगा और मैंने सोचने लगी कि अगर यह सच में उसने मजाक किया है तो आज के बाद उसके लाख बोलने के बावजूद भी उससे बात तक नहीं करेगी,,,, यह सब वह मन में सोच ही रही थी कि तभी इंग्लिश के नोट्स में से उसका लिखा लेटर नजर आया,,,, उसका गला सूखने लगा, वह लेटर को अपने हाथ में लेकर पढ़ना शुरू की,,,

मेरी प्रिय पूनम,,,

तुम मुझे बहुत खूबसूरत लगती हो लगती हो क्या तुम सच में बहुत खूबसूरत हो इस धरती पर तुमसे ज्यादा खूबसूरत है मैंने आज तक किसी और लड़की को नहीं देखा,,, जबसे मैंने तुमको देखा हूं ना जाने मुझे क्या हो गया है कि हर जगह बस तुम ही तुम दिखाई देती हो,, सोते जागते उठते बैठते बस मुझे तुम्हारा ही ख्याल रहता है,,, तुम्हे देखे बिना मेरे दिल को जरा भी करार नहीं आता,, यहां तक की सपनों में भी मुझे तुम ही तुम नजर आती हो,, पूनम सच कहूं तो मुझे तुमसे प्यार हो गया है मैं तुम्हारे बगैर जी नहीं पाऊंगा तुम्हारे मन में क्या है यह मैं बिल्कुल भी नहीं जानता इसलिए तो मैं इस लेटर के जरिए तुम्हें अपने मन की बात बता रहा हूं। तुम्हें देखकर मेरे दिल में कुछ-कुछ होता है अगर तुम्हें भी मुझे देख कर कुछ कुछ होता हो,, तो मेरे इस लेटर का जवाब जरुर देना अगर लिख ना पाओ तो नीचे लिखा मोबाइल नंबर मेरा ही है मुझे बस एक मिस कॉल मार देना मैं समझ जाऊंगा कि तुम्हारे दिल में भी मेरे लिए कुछ कुछ होता है।

आई लव यू,,,,,

पूरा लेटर पढ़ने के बाद पूनम के बदन से ऐसी कड़ाके की ठंड में भी पसीना टपक रहा था,,,, कुछ पल के लिए तो उसे समझ में ही नहीं आया कि वह क्या पढ़ रही है। क्योंकि मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कोई उसे भी लेटर लिख सकता है। उसने आज तक किसी भी लड़के की तरह मुस्कुरा कर नहीं देखी थी ना ही किसी से बात की थी और ना ही कभी भी, किसी लड़के को अपनी बातों की वजह से गलतफहमी पैदा होने दी थी,,, इसलिए उसे आज तक किसी ने भी इस तरह से अपने प्यार का इजहार करने की हिम्मत भी नहीं की थी लेकिन मनोज के साथ बस थोड़ा बहुत बात जरूर करी थी जिसका परिणाम यह आ रहा था कि वह उसे प्रेम पत्र लिखकर देभी चुका था,,,, पूनम का बदन कांप रहा था। वह यह सोचकर पूरी तरह से घबरा गई कि वहां तीन-चार दिनों से उसके दिए लेटर को अपने बैग में रखे हुए थी,,, जिसकी खबर उसे बिल्कुल भी नहीं थी अगर कहीं यह लेटर उसके घर वालों को मिल जाता तब उसका क्या हाल होता यह सोचकर पूनम का पूरा वजूद का कांप गया,,,,

पूनम मनोज के लिए लेटर को देखकर और उसे पढ़कर परेशान सी हो गई,,, वह बिस्तर पर लेट कर सोना चाहती थी लेकिन नींद उस से कोसों दूर थी। अब वह क्या करें कैसे करें क्या कहें मनोज से इन सब के बारे में सोच कर हैरान हुए जा रही थी क्योंकि मनोज ने उससे उसके पत्र का जवाब मांगा था लेकिन उसके दिए पत्र का जवाब देने की हिम्मत पुनंम में बिल्कुल भी नहीं थी। उसे मनोज के बारे में सोच कर उसकी हरकत के बारे में सोच कर उसे गुस्सा आने लगा वह सोचने लगी कि अगर कहीं जाने पर उसके घरवालों के हाथ लग जाता तब उसका क्या होता क्या सोचते,, उसके घर वाले उसके बारे में,,, क्योंकि वह जानती थी कि उसके घर वाले उस पर बहुत भरोसा करते थे वह जानते थे कि पूनम कभी भी इस तरह की हरकत नहीं करेगी जिसकी वजह से परिवार की बदनामी हो,,, इसलिए वह मन में ठान ले कि आप मनोज से वह बात ही नहीं करेगी ना ही उसकी तरफ देखेगी इसी ने उसकी और उसके परिवार की भलाई है यह सोचकर वह कब नींद की आगोश में चली गई उसे पता नहीं चला,,,,

जैसा वह मन में सोची थी ठीक उसी तरह से बर्ताव करने लगी अब आते जाते वह मनोज की तरफ देखती भी नहीं थी वह कुछ बोलना चाहता था,,,, तो उसके बोलने से पहले ही वहां से चल देती थी,,,, पूनम के इस तरह के व्यवहार के कारण मनोज काफी परेशान हो गया था उसे लगने लगा था कि उसका प्यार शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गया था उसे इस बात का बेहद पछतावा भी होता था कि उसने पूनम को पत्र लिखकर दिया है क्यों क्योंकि जब तक उसने उसे पत्र लिखकर नहीं दिया था तब तक तो पूनम उससे बातें तो करती थी लेकिन अब तो वह उसकी तरफ देखती भी नहीं थी। पूनम भी कब तक इस तरह से मनोज को धिक्कारने का दिखावा करती रहती,,, उसे यह सब बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि मनोज को पूनम के लिए कुछ कुछ होता था तो पूनम को भी मनोज के लिए कुछ कुछ जरूर होता था बस उसे डर था तो समाज और उसके परिवार का इसलिए वह अपने मन की बात उसे बता नहीं पा रही थी लेकिन जितना बेचैन मनोज था उससे ज्यादा पूनम तड़प रही थी।

दूसरी तरफ उसकी बुआ सुजाता की बुर में पूरी तरह से खलबली मची हुई थी,,,, उसकी जवानी का जोश उबाल मार रहा था,,, बुर की खुजली उसके बर्दाश्त के बाहर थी,,, वह अपनीे बुर में सोहन के मोटे लंड को लेकर चुदना चाहती थी।। लेकिन ना तो उसे मौका मिल रहा था और ना ही वह इस तरह के कदम उठाने की हिम्मत दिखा पा रही थी,,,,, क्योंकि उसे भी अपने परिवार वालों का डर था,,, लेकिन जवानी का जोश उबाल मार कर सारी मर्यादा को तोड़ ही देती है,, ऐसे ही 1 दिन शाम को वह अपने खेतों में टहल रही थी सब्जी तोड़कर घर ले जाने के बहाने,,,, वह जानबूझकर देर कर रही थी,,, क्योंकि ऊसे सौहन का इंतजार था। वह अच्छी तरह से जानती थी कि उससे मिलने के बहाने वह खेतों के चक्कर जरूर मारता था,,,, शाम ढल रही थी अंधेरा छाने लगा था और यही सही मौका भी था उससे मिलने का,,,

खेतों में चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था वह सब्जियां तोड़ भी रही थी और इधर-उधर चकर पकर नजरें दौड़ाकर सोहन को देखभी ले रही थी कि कहीं वह आ तो नहीं रहा है,,,

वह सब्जियां झुक कर तोड़ ही रही थी कि तभी सोहन ने उसे पीछे से आकर उसकी पतली कमर में अपने दोनों हाथ डालकर पकड़ लिया,,,,,

ओहहहहहहह,,,,,, मां,,,, ( इस तरह से एकाएक पीछे से पकड़े जाने की वजह से सुजाता एकदम से डर गई,, और उसके मुंह से चीख निकल गई लेकिन तुरंत सोहन उसके मुंह पर अपना हाथ रखकर दबाते हुए बोला,,।)

डरो मत मैं हूं जानेमन,,,

सोहन तू,, तू तो मुझे डरा ही दिया था,,,

तू सच में डर गई,,,,,

तो क्या ईस तरह से पकड़ेगा तो डर तो लगेगा ही,,,,

अरे मेरी जान मैं तो समझा कि तू बहुत बहादुर है,,,,,

( सोहन अभी भी उसे पीछे से पकड़े हुए था कि गोल-गोल गांड का स्पर्श पाकर उसको पूरी तरह से खड़ा हो गया सुजाता की गांड के बीचो-बीच सलवार सहीत धंसे जा रहा था। जिसका एहसास सुजाता को भी अच्छी तरह से हो रहा था और वह इस स्पर्श की वजह से उत्तेजित हुए जा रही थी। सोहन आव देखा ना ताव कमर में डाले हुए हाथ को ऊपर की तरफ ले जाकर कुर्ती के ऊपर से ही उसकी गोल-गोल चूचियों को दबोच लिया,,,, और उसे ऊपर से ही दबाते हुए बोला।

मेरी रानी एक चुम्मा तो दे दो कब से मैं तड़प रहा हूं तुम्हारे गुलाबी होंठ को चूमने के लिए,,,

( सोहन की यह बात सुनकर उसके बदन में सुरसुराहट होने लगी,,, उसका भी बहुत मन कर रहा है कि सोहन उससे जो चाहता है वह सब कुछ करें लेकिन फिर भी वह यह नहीं जताना चाहती थी कि उसे भी यही सब करना है इसलिए सोहन से बोली,,,।)

धत्त,,,, तू पागल हो गया है क्या,,,,,

हां मैं पागल हो गया हूं रानी तुम्हारी खूबसूरती तुम्हारी खूबसूरत बदन को देखकर,,, अब तो तुम्हें चुमे बिना मेरा मन नहीं मानेगा,,,,( इतना कहते हुए सोहन उसकी गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूमने लगा सोहन की इस हरकत की वजह से सुजाता का पूरा बदन कामोत्तेजना से भर गया वैसे भी अगर औरतों को उनकी गर्दन के ऊपर के हिस्से पर चुंबन किया जाए तो उनकी उत्तेजना कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगती है और यही सुजाता के साथ भी हो रहा था। सुजाता उत्तेजना के मारे अपने नितंबों को और पीछे की तरफ ठेलने लगी क्योंकि सोहन का खड़ाा लंड उसकी गांड के बीचो-बीच ठोकर लगा रहा था। सुजाता सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनते हुए बोली,,,।

सोहन मुझे कुछ चुभ रहा है मुझे छोड़ो,,,,

मैं जानता हूं मेरी जान कि तुम्हें क्या चुभ रहा है। और तुम भी जानती हो कि क्या चुभ रहा है।,,,

मुझे नहीं मालूम सोहन कि क्या चुभ रहा है तुम ही बता दो क्या चुभ रहा है,,,,( सुजाता शरारती अंदाज में बोली।)

अच्छा मेरी रानी ज्यादा नादान बनने की कोशिश मत करो,,

( सोहन अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए सुजाता को जैसे कि चोद रहा हो इस तरह से करते हुए) पूरा का पूरा लंड बिना आवाज कीए बुर में निगल जाओगी और मुझ से पूछ रही हो कि क्या चुभ रहा है,,,, सुजाता अब तो तुम्हारी बात सुनकर मुझे तुम्हें चोदने का मन करने लगा है। चलो ना अपनी सलवार उतारो,,, मेरा लंड तुम्हारी बुर में जाने के लिए तड़प रहा है।

सोहन की तो ऐसी खुली बातें सुनकर सुजाता की बुर से पानी टपकने लगा उसका भी मन हो गया कि सोहन के लंड को अपनी बुर में डलवा कर चुदवा ले,,,, लेकिन उसे डर भी लग रहा था कि कहीं किसी ने देख लिया तो गजब हो जाएगा सोहन बेहद उत्तेजित नजर आ रहा था वह जोर जोर से कुर्ती के ऊपर से ही सुजाता की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था रह रह कर सुजाता के मुंह से सिसकारी की आवाज़ आ रही थी वह डर के मारे इधर-उधर नजरें घुमा कर देख भी ले रही थी कि कहीं को आ तो नहीं रहा,,, सुजाता पूरी तरह से चुदवाने का मन बना ली थी लेकिन यह अपने मुंह से कहने में शर्म आ रही थी,,,, सोहन लगातार उसे अपनी सलवार उतारने के लिए बोल रहा था क्योंकि वह पूरा उत्तेजित होकर के भरा पड़ा था। वह उसे समझाते हुए बोला,,,।

सुजाता यही सही मौका है आज तुम्हें चोदने का पूरा मौका हम दोनों के पास है देख लो चारों तरफ कोई नजर नहीं आ रहा है और वैसे भी पर बड़ी-बड़ी झाड़ियो और खेतों के बीच हमें कोई भी नहीं देख पाएगा,,,,( सोहन की बात सुनकर सुजाता भी इधर उधर देख कर पूरा इत्मीनान कर ली थी लेकिन फिर भी उसे डर लग रहा था कि कहीं कोई देख ना ले एक तो उसके मन में समाज का डर भी था और जवानी की उमंगे भी थी,, जवानी के जोश से भरी हुई सुजाता पर बदन की जरूरत,, तन का साथ भारी पड़ने लगा,,,, समाज के डर और परिवार के डर को वह कुछ देर के लिए एक तरफ रख दी,,, सोहन बार-बार उस पर दबाव डाल रहा था सलवार की डोरी खोल कर उसके लिए रास्ता बनाने के लिए,, सुजाता भी पूरी तरह से मन बना ली थी अब खुलकर तो वह उसी से नहीं बोल सकती थी कि हां मैं तुमसे चुदवाना चाहती हूं इसलिए वहां बात को दूसरे शब्दों में बोली,,

सोहन मुझे डर लग रहा है कहीं कोई देख लिया तो,,,

( कहीं कोई देख लिया तो,,, औरतों के मुंह से कही गई यह बात हमेशा औरतों की संमति की मोहर लगाती है। खेला खाया सोहन सुजाता के मन की बात समझ गया,,,। और वह बोला,,,

अरे कोई नहीं देखेगा तो ज्यादा अंधेरा पूरी तरह से छा चुका है। जल्दी से सलवार उतार दो,,,,

( सुजाता को फिर भी मन में डर बना हुआ था,,, दो कदम की दूरी पर ही सूखे घासों का ढेर लगा हुआ था,,, सुजाता उस तरफ देखते हुए बोली,,,।)

सोहन यहां नहीं उस घास के पीछे वहां कोई नहीं देख पाएगा,,,,

तुम्हारी जैसी मर्जी चलो जल्दी चलो,,,,

मैं पहले वहां जाती हूं तुम तब तक खड़े होकर नजर रखना मैं तुम्हें जल्दी ही बुलाऊंगी,,,,( ऐसा कह कर सुजाता उस घास के ढेर के करीब जाने लगी,,, सोहन को तो गुस्सा आ रहा था लेकिन क्या करता आज उसे सुजाता कि बुर चोदने को मिल रही थी इसलिए वह शांति से सुजाता के नखरे सहता रहा,, सुजाता घास के ढेर के पीछे पहुंचते ही एक बार फिर से चारों तरफ नजर दौड़ा ली,,, पूरी तरह से इत्मीनान कर लेने के बाद वह अपनी सलवार की डोरी को खोलकर पेंटी सहित जांघो तक नीचे सरका दी,,,, सुजाता पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी उसकी बुर से मदन रस की बूंदें टपक रही थी वह पीछे नजरें घुमा कर सोहन की तरफ देखते हुए बोली,,,

जल्दी आओ मेरे पास समय नहीं है,,,,

( सोहन तो उसकी आवाज सुनते ही जल्दी से घास के पीछे पहुंच गया जहां पर सुजाता पहले से ही अपनी सलवार को घुटने तक सरकाकर खड़ी थी,,,, यह नजारा देखते ही सोहन जोश से भर गया,,, वह जल्दी से सुजाता को झुक़ने के लिए बोला,,,, लेकिन सुजाता को कुछ समझ में नहीं आया क्योंकि यह उसके लिए पहली ही बाहर था और तो हम तो पहले से ही खिला खाया था उसे सब मालूम था कि क्या करना है इसलिए वह खुद ही सुजाता की पीठ पर अपना हाथ रखकर उसे आगे की तरफ झुकाते हुए उसे उसकी गांड को थोड़ा सा उठाने के लिए बोला मुझे आता नहीं सोहन के कहे अनुसार ही अपनी गांड को थोड़ा सा बाहर की तरफ निकालकर हवा में उठा दी,,,, सुजाता की कुंवारी बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी सुजाता की यह अदा देख कर किसी का भी लंड पानी छोड़ दे,,, सोहन तो कई औरतों के मदन रस से अपनी प्यास बुझा चुका था इसलिए वह संभल गया जल्दी से वह भी अपने पजामे को नीचे सरका कर अपने मोटे लंड को बाहर निकाल लिया,,, और अंधेरे में भी अपने लंड को पकड़कर उसके सुपाड़े को लंड की सुपाड़े से ही टटोलकर सुजाता की बुर से सटा दिया,, सुपाड़ा का स्पर्श बुर पर होते ही सुजाता का पूरा बदन गनगना गया उसकी तो सांसे ही अटक गई,,,

सोहन अपने लंड के सुपाड़े को बुर के अंदर धीरे-धीरे सरकाते हुए बोला,,,

ओह मेरी रानी तुम तो बहुत पानी छोड़ रही हो,,,

जल्दी करो सोहन मुझे देर हो रही है घर जाने के लिए,,,,,

तुम चिंता मत करो मेरी जान( इतना कहने के साथ ही उसने आधा लंड सुजाता की बुर में घुसा दिया,,, दर्द के मारे सुजाता के मुंह से कहरने की आवाज़ आ रही थी,,, यह तो भला हो उस मोटे ताजे बैगन और ककड़ी का जिसे तू चाहता अपनी बुर में डाल डाल कर मोटे लंड को अंदर जाने के लिए जगह बना चुकी थी वरना इस समय वह चिल्ला चिल्ला कर पूरे गांव को इकट्ठा कर ली होती,, सोहन सुजाता की गोल-गोल गांड को सहलाते हुए अगले ही पल जोर का धक्का लगाया कि पूरा लंड उसकी बुर में समा गया,,, सोहन को मालूम था कि उसकी इस हरकत पर सुजाता जोर से चिल्ला देगी इसलिए वह धक्के के साथ ही अपना एक हाथ आगे ले जाकर उसके मुंह को बंद कर दिया और उसकी चीख़ गले में ही अटक गई,,,,, सुजाता को बहुत दर्द हो रहा था वह उसे निकालने के लिए बोलना चाहती थी,,, लेकिन सोहन जानता था कि एक बार बड़ी तेजी से लंड बुर में चला जाए तो लड़कियों को ज्यादा दर्द होता है और वह उसे निकालने के लिए जरूर बोलती है इसलिए वह उसके मुंह को वैसे ही दबाए रहा और धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया,,, थोड़ी ही देर बाद सुजाता को भी मज़ा आने लगा और उसके मुंह से सिसकारी की आवाज आने लगी तो सोहन अपना हाथ उसके मुंह से हटा लिया और उसे चोदने का मजा लूटने लगा,,, थोड़ी देर बाद दोनों एक साथ अपना पानी छोड़ दिए सुजाता जल्दी से अपने कपड़े पहन कर खेतों से भाग गई,,,, घर पर पहुंचने पर जब उसे पूछने लगे कि देर किस लिए हुई तो वह सहेली से बातें कर रही थी ऐसा बहाना बनाकर असली बात को छुपा ले गई,, सुजाता बहुत खूब थी क्योंकि आज पहली बार उसकी बुर में किसी लंड का प्रवेश हुआ था। ऊसकी बुर का इस तरह से उद्घाटन होगा उसने कभी सोची भी नहीं थी,, लेकिन अपनी बुर की धमाकेदार उद्घाटन से वह बेहद खुश थी।

रात को खाना खाने के बाद पूनम अपने कमरे में काफी बेचैन नजर आ रही थी। मनोज को लेकर उसके दिल में अलग अलग से ख्याल आ रहे थे और इंसानों की वजह से उसकी आंखों में नींद नहीं थी। अपनी चाची से वह मोबाइल मांग कर लाई थी, क्योंकि मोबाइल की उनको अभी जरूरत नहीं थी उसके चाचा जो वापस लौट आए थे।,,, मनोज के लिए पूनम की बेचैनी और कड़क बढ़ती जा रही थी वह मोबाइल पर गाने सुन रही थी। गाना गा रही हीरोइन की तरह ही उसका भी हाल हो गया था,,,, वह कान में हैंड्स फ्री लगाकर आंखों में नींदे ना दिल में करार मोहब्बत भी क्या चीज होती है यार,,,

इस गाने को बार-बार लगाकर सुन रही थी लेकिन इस गाने में पूनम की बेचैनी को और भी ज्यादा बढ़ा दिया था।

उससे रहा नहीं जा रहा था और वहां टेबल पर रखा अपना स्कूल बैग लेकर आई और उसमें से अपनी इंग्लिश की नोट निकाल ली जिसने की आखिरी पन्ने पर नंबर लिखा हुआ था और यह नंबर मनोज का ही था। पूनम किसी के हाथ ना पड़ जाए इसलिए उसके दिए लेटर को तो वह फाड़ कर फेंक दी थी लेकिन उसमें लिखा नंबर अपनी नोटबुक में लिख ली थी

उसके मन में उथल पुथल मची हुई थी वह मन ही मन में सोच रही थी कि वह नोटबुक में लिखे नंबर को वह डायल करें कि ना करें,,, दिल कह रहा था कि वह नंबर डायल करें और दिमाग से रोक रहा था आखिरकार दिमाग हार गया और दिल जीत गया वह दिल की सुनी और कांपते उंगलियों से मोबाइल की कीपैड पर नोटबुक में लिखे नंबर को डायल करने लगी।

जैसे ही नंबर डायल करके वह मोबाइल को कान पर लगाई तो सामने मोबाइल की घंटी बज रही थी,,,, वह फोन कट करने के बारे में सोच ही रही थी कि सामने से फोन उठ गया,,,

और जैसे ही सामने से आवाज आई,,,,

हेलो कौन,,,,

इतना सुनते ही, पूनम का बदन कांपने लगा और वह झट से फोन काट दी,,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था ना जाने उसके बदनन में अजीब प्रकार की हलचल महसूस हो रही थी।,,, कुछ देर तक वह ऐसे ही बैठी रही,,, उसका मन थोड़ा शांत हुआ कि तभी मोबाइल की घंटी बजने लगी वह स्क्रीन पर नंबर देखी तो उस नंबर को देख कर एक बार फिर से उसके बदन में कपकपी से मच गई,,,, और वह झट से मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया।

 
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