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चमकता सितारा compleet

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अंत में सब ठीक होने पर दोनों लड़कियाँ उसके साथ रहने लगती हैं और लड़का आखिर में कहता है- ‘एक साथ दो को झेलने से भला तो मैं पागल ही रहता।’

मैं- चेतन जी इस कहानी को आपने लिखा है क्या?

चेतन जी- हाँ।

मैं उठा और उनके गले लग गया।

‘मैं जैसी कहानी चाहता था.. बिल्कुल वैसी ही कहानी है यह..’ मैंने कहा।

चेतन जी- तो कहानी फाइनल न?

मैं- बिल्कुल फाइनल। अब चलिए मुझे भूख लगी है। सुबह से कुछ खाया नहीं है, मैं सीधा यहीं आ गया।

फिर मैं और चेतन जी पास के ही एक रेस्तरां में आ गए। छोटे शहरों में तो ऐसी जगहें देखने को भी नहीं मिलती हैं। चेतन जी शायद वहाँ अक्सर आते जाते रहते थे। वहाँ के मैंनेजर हमें चेतन जी की पसंदीदा टेबल तक ले गए। फिर हमने लंच आर्डर किया और आपस में बातें करने लग गए।

चेतन जी- कैसे महसूस हो रहा है?

मैं- किस बात के लिए?

चेतन जी- तुमने अपनी जिंदगी में काफी संघर्ष के बाद जो मुकाम हासिल किया है.. उस बात के लिए कैसा फील कर रहे हो?

मैं- संघर्ष वो करते हैं.. जिनकी कोई मंजिल होती है। मैं तो बिना किसी मंजिल के ही अपने कदम आगे बढ़ाए जा रहा था।

चेतन जी- मैं कुछ समझा नहीं।

मैं- मैं वहाँ किस लिए आया था, आपको पता है?

चेतन जी- ऑडिशन के लिए।

मैं- जी नहीं.. मैं अपनी एक दोस्त की फाइल आप तक पहुँचाने आया था। गेट कीपर ने कहा कि अन्दर आने के लिए ऑडिशन देना होगा.. सो मैंने दे दिया। अब यह तो मेरी किस्मत थी कि बाकी किसी को एक्टिंग आती ही नहीं थी।

चेतन जी- किसी भी काम का हुनर दो वजहों से किसी के अन्दर होता है। पहला.. या तो उसने जी जान से उस हुनर को सीखा हो या तो उसमें कुदरती भगवान् की देन हो और जहाँ तक तुम्हारी बात है.. तुमसे बेहतर एक्टर सच में.. पूरी मुंबई में नहीं होगा। वैसे किसकी फाइल लेकर आए थे तुम?

मैं- कोमल जो कोलकाता की रहने वाली है। उनकी एक डॉक्यूमेंट्री देख कर आपने कॉल किया था।

चेतन जी- हाँ हाँ याद आया.. परसों रात को उनसे मेल पर बात हुई थी। आप जैसे जानते हो उसे?

मैं- मैं अभी उन्हीं के साथ रह रहा हूँ।

चेतन जी- लिव इन रिलेशन में!

मैं- नहीं सर.. हम दोनों अलग-अलग कमरे में रहते हैं।

अब खाना आ चुका था।

चेतन जी ने खाना शुरू करते हुए कहा- मैं सच में कोमल के काम से बहुत इम्प्रेस हूँ.. और उसने तो काफी सारे अवार्ड्स भी जीते हैं।

यह बात मुझे नहीं पता थी।

मैं- इस फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर की जगह वो नहीं आ सकती है क्या?

चेतन जी- मैं बात करूँगा। उसकी जैसी काबिलियत है.. मुझे नहीं लगता कि उसे इस पोजीशन पर आने में ज्यादा दिक्कत होगी।

मैं- ठीक है.. सर आप देख लेना। अगर आप कल की मीटिंग करवा दें तो बढ़िया होगा।

चेतन जी- मैं कॉल करके देखता हूँ।

फिर उन्होंने फोन पर किसी से बात की और मीटिंग होना कन्फर्म कर लिया।

मैं- थैंक यू सर।

चेतन जी- अरे थैंक यू मत कहो। अब आप यशराज बैनर के स्टार हो। इतना तो हम कर ही सकते हैं। यहाँ आज हम आपकी ज़रूरत को समझेंगे.. तभी तो कल आप हमारे लिए वक़्त निकाल सकेंगे।

मैं उनकी बातों का मतलब समझ चुका था।

खाना ख़त्म हुआ और फिर हम वापिस स्टूडियो पहुँच गए।

चेतन जी- अरे हाँ.. याद आया आज हमारे पिछली फिल्म की सक्सेस पार्टी है। मैं तुम्हें पता भेज दूँगा.. आज आ जाना। वहाँ तुम्हें फिल्म के बाकी स्टार्स से भी मिलवा दूँगा।

मैं- ठीक है सर.. वैसे मैं अपने दोस्तों को साथ ला सकता हूँ न?

चेतन जी- क्यों नहीं.. वैसे कितने पास बनवा दूँ?

मैं- जी.. मेरे अलावा तीन पास बनवा दीजिएगा..

चेतन जी- ठीक है।

मैं वहाँ से निकला और अपने फ्लैट पर आ गया। लगभग दोपहर के तीन बजे थे और घर में सब लंच में व्यस्त थीं।

पायल- आ गए एक्टर बाबू।

मैं- हाँ जी.. वैसे मेरे पास आप सबके लिए एक खुशखबरी है।

मेरा कहना था कि सब लंच छोड़ कर मुझे घेर कर बैठ गईं।

मैं- यार आप सब ऐसे मत देखो मुझे.. मुझे घबराहट होने लगती है।

ललिता- मेरे हुजूर.. अब इसकी आदत डाल लो। अब से हर रोज़ सब तुम्हें ऐसे ही देखेंगे।

मैं- ठीक है देखो फिर।

मैंने कोमल की ओर देखते हुए कहा- कोमल तुम अपनी तैयारी पूरी कर लो। तुम्हारी कल यशराज फिल्म्स में मीटिंग है। हो सकता है तुम्हें मेरी फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर बनाया जाए।

 
कोमल अपनी आँखें बड़ी करती हुई बोल पड़ी- क्या सच में?

मैं- हाँ यार, अभी तक मैंने झूठ कहना अच्छी तरह सीखा नहीं है।

पायल- और मेरे लिए क्या खुशखबरी है?

मैं- आप सब को तैयार होकर.. मेरे साथ पार्टी में चलना है। यशराज की पिछली फिल्म की सक्सेस पार्टी है। रात आठ बजे वहाँ पहुँच जाना है। वहाँ जाओ सब से मिलो। हो सकता है तुम लोगों का काम भी बन जाए।

मेरा इतना कहना ही था कि सब मेरे गले लग कर मेरे बालों की ऐसी-तैसी करने लग गईं और सबने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया और तेज़ आवाज़ में गाने बजा कर मुझे पकड़ कर डांस करने करने लग गईं।

आज मुझे अपने घर की बहुत याद आ रही थी। अगर वो सब भी मेरे साथ होते तो कितना अच्छा होता।

फिर सब तैयार होने चली गईं।

वैसे भी मुझे पता था कि इन सबको तैयार होने में कितना वक़्त लगने वाला है। इसीलिए मैं थोड़ी देर के लिए सोने चला गया।

पायल की आवाज़ से मेरी नींद खुली। सात बजने वाला था और अब तक सब मेकअप को फाइनल टच ही दे रही थीं। पायल तैयार हो चुकी थी।

पायल- अरे उठो भी.. तुम्हें इतनी नींद कैसे आती है..? फिल्म मिल गई है, सुपरस्टार बनने जा रहे हो.. और तो और.. आज पहली बार जिन्हें अब परदे पर देखा है.. उनसे मिलने जा रहे हो। मुझे तो सोच-सोच कर ही रोमांच आ रहा है।

मैं- मुझे मेरी नींद सबसे प्यारी है। बाकी सब जाए भाड़ में।

मैं भी नहा धोकर कपड़े पहन कर तैयार हो गया।

ललिता- हो गए तैयार.. बस दस मिनट में!

मैं- और नहीं तो क्या.. अब तुम्हारा पूरा मेकअप किट खुद पर लगा लूँ क्या?

पायल- अरे कुछ तो मेन्टेन करो.. इधर बैठो.. मैं तैयार करती हूँ।

मेरे चेहरे, हाथ और गले पर पता नहीं क्या-क्या लगा रही थी। खैर अब मैं भी तैयार हो गया था।

तभी ललिता आई और उसने अपना लेडीज परफ्यूम मुझ पर स्प्रे कर दिया।

मैं- यह क्या किया तुमने..? लेडीज परफ्यूम क्यूँ स्प्रे किया तुमने?

ललिता- ओह..! सॉरी यार, मैं तो तुम्हें तैयार करने में भूल ही गई कि ये लेडीज परफ्यूम है।

तभी चेतन जी का कॉल आया।

चेतन जी- मैंने पता भेज दिया है और अब जल्दी आ जाओ। पार्टी शुरू हो चुकी है।

मैंने गुस्से से ललिता को देखते हुए कहा- ठीक है चेतन जी.. मैं आ रहा हूँ..

मैंने फ़ोन काट दिया।

अब मैं फिर से नहाने भी नहीं जा सकता था और नए कपड़ों में यही आखिरी था। सो मैंने ज्यादा वक़्त ना लेते हुए सबसे चलने को कहा और बाहर आ गए।

टैक्सी बुक करके हम दिए हुए पते पर पहुँच गए। वर्ली में एक होटल में ये पार्टी दी गई थी। हम सबने एक-दूसरे का हाथ थामा और होटल के अन्दर आ गए। पार्टी में जाने वालों की लिफ्ट ही अलग थी। नीचे स्टाफ के पास एक लिस्ट थी।

मैंने कहा- विजय और मेरे साथ तीन गेस्ट की एँट्री भी होगी।

स्टाफ ने लिफ्ट में जाने को कहा।

अब हम सब अपने सपने को देखने से कुछ पलों की ही दूरी पर थे। मैं तो काफी हद तक नार्मल था.. पर बाकी तीनों को देख ऐसा लग रहा था मानो तीनों जोर-जोर से चिल्लाने वाली हों।

कोमल और पायल ने अब तक मेरे हाथ पकड़े हुए थे और अब इतनी जोर से हाथ दबा रही थीं कि अब हल्का-हल्का दर्द सा भी होने लगा था।

खैर.. हम अपनी मंजिल पर पहुँच गए थे.. सामने एक बड़ा सा दरवाज़ा था। गाने की धुन और लोगों के चिल्लाने का शोर इतना था कि दरवाज़े बंद होने के बावजूद भी मैं सुन सकता था। हम सबने एक गहरी सांस ली और दरवाज़े को धक्का दे अन्दर आ गए।

यहाँ इतना धुँआ था कि मैं बर्दास्त नहीं कर पाया और खांसते हुए बाहर आ गया। मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं दुबारा अन्दर जाने की कोशिश करता। मैं दीवार से टिक कर आँखें बंद कर खड़ा हो गया। एक बेहद मीठी आवाज़ से मेरा ध्यान टूटा।

किसी बेहतरीन कारीगर की तराशी हुई संगमरमर की मूर्ति की तरह थी वो.. उसकी आँखें गहरे भूरे रंग की और भरा पूरा संगमरमर सा बदन..

वो- ऐसी जगह.. पहली बार आए हो क्या..?

मैं- हाँ.. पर लगता नहीं ज्यादा देर यहाँ टिक पाऊँगा।

फिर कोई दरवाज़े को खोल कर बाहर निकला और उसके साथ निकले धुएँ से फिर से मैं खांसने लग गया।

वो मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए बोली- आप छत पर चलो.. लगता है ये जगह आपको सूट नहीं करने वाली है।

मैं (उसके साथ छत पे जाते हुए)- अब तो जो भी हो.. इसकी आदत तो डालनी ही होगी मुझे। अब मैं खाली हाथ वापस जा भी नहीं सकता।

वो- मतलब..?

मैं- माफ़ कीजिएगा.. मैं अपने बारे में बताना भूल गया। मेरा नाम विजय है और कल ही यशराज फिल्म्स ने मुझे अपनी तीन फिल्मों के लिए साइन किया है।

वो किलकारी सी भरती हुई बोली- तो हम बैठे थे जिनके इंतज़ार में.. वो खुद ही हमारी बांहों में आ गिरे।

मैं- मतलब?

वो- मैं आपकी फिल्म की दो हिरोइन में से एक हूँ..

फिर उसने अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा- मेरा नाम कांता खान।

मैं उसके गले लगते हुए बोला- हाथ मिलाना दूसरों से.. मुझसे अब गले लगने की आदत डाल लो.. मैं नहीं चाहता कि हमारी फिल्म में हमारे बीच प्यार की कोई कमी दिखे।

जब मैं अलग होने लगा तो कांता ने मुझे खींच कर फिर से गले लगा लिया और मेरे कानों के पास आ कर बोल उठी- अब तसल्ली तो होने दो.. ऐसे कहाँ मुझे छोड़ कर जा रहे हो।

हम दोनों गले लगे ही हुए थे कि चेतन जी वहाँ आ गए, उनके साथ में एक लड़की भी थी।

चेतन जी (हल्के नशे में)- तो आप कांता से मिल चुके हो.. ये रहीं आपकी दूसरी हीरोइन.. ‘डॉली श्रीवास्तव’

मेरा दिल इस नाम के साथ ही ज़ोरों से धड़क उठा।

‘इस फिल्म में तुम्हें इन दोनों के साथ ऐसी केमिस्ट्री बनानी है कि परदे पर आग लग जाए बस..’

उसे वहीं छोड़ कर वो फिर से नीचे हॉल में चले गए।

 
डॉली ने मेरे पास आते हुए कहा- आपकी परफ्यूम की पसंद बड़ी अच्छी है।

मैं तो जैसे इस नाम को सुनने के साथ उससे जुड़ सा गया था। मेरे अन्दर का ज्वार जैसे फूटने को हो आया था, मुझे अब उसके चेहरे में अपनी डॉली दिख रही थी।

मैंने उसे खींच कर गले से लगा लिया और कस कर बांहों में भरते हुए मैंने कहा- कहाँ चली गई थीं.. मुझे छोड़ कर.. जाने से पहले एक बार भी मेरा ख्याल तक नहीं आया तुम्हें..? कम से कम एक बार तो सोच लिया होता तुमने.. कि मैं तुम्हारे बिना जिंदा भी रह पाऊँगा या नहीं..

इतना कहते-कहते मेरी आँखें भर आईं।

तभी तालियों की आवाज़ से मैं नींद से जगा जैसे। कांता और कुछ लोग तालियाँ बजा रहे थे।

‘क्या फील के साथ एक्टिंग की है यार तुमने।’

यह कहते हुए कांता ताली बजा रही थी।

मैंने डॉली को खुद से अलग किया, वो भी थोड़ी शॉक्ड थी।

तभी कांता के फ़ोन पर एक कॉल आया और वो चली गई, मैं अब डॉली से दूर जाना चाह रहा था तो मैंने डॉली से काम का बहाना किया और होटल के बाहर आ गया।

मेरा दिल बेचैन सा हो गया था.. मैंने एक टैक्सी बुलाई और रात को ही समंदर के किनारे पर आ गया। अब इन लहरों का शोर मेरे अन्दर की वादियों में गूंज रहा था.. समंदर की तेज़ हवाएँ जैसे मेरे अन्दर लगी.. इस आग को बुझाने की जगह और भड़का रही थीं।

मैं वहीं रेत पर घुटनों के बल गिर पड़ा और जोर-जोर से चिल्लाने लगा, इतने दिनों से मैं खुद को ही भूल बैठा था, आज जैसे हर वो याद मेरे आँखों के सामने घूम रही थी। थोड़ी देर बाद मैं किसी तरह खुद को काबू में करने की कोशिश करने लगा।

तभी किसी ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया… मैंने मुड़ कर देखा तो डॉली श्रीवास्तव थी।

डॉली- कोई कितना भी बड़ा एक्टर क्यूँ न हो, उसका जिस्म तो एक्टिंग कर सकता है.. पर उसका दिल नहीं। तुम्हारी धड़कने मैंने महसूस की हैं.. ये झूठ नहीं कह रही थी। क्या है तुम्हारा सच..? मैंने सुना था कभी कि बांटने से दर्द हल्का होता होता है।

मैंने उससे कहा- कभी मैंने भी किसी को चाहा था.. पर इस दुनिया ने उसे मुझसे जुदा कर दिया.. वो अब इस दुनिया में भी नहीं है।

डॉली- तुमने एक्टिंग को ही क्यूँ चुना।

मैं- मैं अपने आप को भूल जाना चाहता था.. मुझे ये यादें बस दर्द देती हैं।

डॉली- इस दुनिया में जितना अपने दर्द में तड़पोगे.. उतनी ही तालियाँ तुम्हें मिलेंगी। ये फिल्मों की दुनिया ही ऐसी है.. जो जितना बड़ा कलाकार यहाँ है.. उसने उतने ही बड़े ग़मों को समेट रखा है..

मैं- क्या इस दर्द का कोई इलाज नहीं?

डॉली ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा- है न.. जैसे-जैसे वक़्त बीतेगा.. तुम इस दर्द में भी मुस्कुराना सीख जाओगे।

फिर वो मेरे पास आ कर बैठ गई और कहने लगी-

‘मैंने भी कभी किसी से बेइन्तेहाँ मोहब्बत की थी.. पर शायद उसे मेरे दिल की धड़कन कभी सुनाई ही नहीं दी। इस जिस्म के अन्दर जो दिल था उसे वो कभी समझ ही नहीं पाया.. या शायद वो मेरे प्यार के काबिल ही नहीं था। आज तुम्हें ऐसे तड़फता देख कर मेरे दिल में दबी हुई वो आग.. फिर से जल उठी। हर किसी के दिल में ऐसी ही कोई बात दबी होती है। जब-जब हम परदे पर अपने दर्द में रोते हैं.. तब-तब उनके जज़्बात भी बाहर आ जाते हैं।

इस दुनिया में हर लड़की को किसी ऐसे की ज़रूरत होती है.. जो उसे सच्चे दिल से चाहे। मुझे अपनी दुनिया में तो वो प्यार मिल न सका.. पर अब इस सपनों की दुनिया में ही तुम्हारे सच्चे प्यार को जी सकूँगी। तुम ये समझ लेना कि तुम्हारी डॉली मेरे चेहरे में तुम्हारे सामने है।

मैंने उसे खुद से दूर कर अलग करते हुए कहा- मेरे करीब मत ही आओ तो बेहतर होगा। मेरे दिल की आग में जल जाओगी।

डॉली- मैंने आग के समंदर को पार किया है.. बहुत जली हूँ खुद की आग में.. तुम्हारी चाहत की तपिश भी झेल जाऊँगी।

मैं- क्यूँ खेल रही हो मुझसे.. मैं टूट चुका हूँ।

डॉली- टूटे हुए दिल को समझने के लिए दर्द भरे दिल की ज़रूरत होती है। तुम्हें मैं ही संभाल सकती हूँ। खुद से लड़ना बंद करो और मेरे पास आ जाओ।

मैंने उसकी तरफ घूर कर देखा।

‘यूँ समझ लो कि इस जिंदगी ने तुम्हें फिर से मौक़ा दिया है अपनी डॉली के प्यार को पाने का’

उसने मेरी तरफ अपनी बाँहें फैला दीं।

मेरी आँखें भर आई थीं। अब सब कुछ मुझे धुंधला-धुंधला सा दिख रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे सच में डॉली मेरे सामने बाँहें फैलाए हो।

 
अब तो ये धोखा ही सही.. पर मैं डॉली को फिर से बांहों में भरना चाहता था।

मैं आगे बढ़ा.. पर मेरे कदम लड़खड़ा गए, जैसे ही मैं गिरने को हुआ.. डॉली ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया।

मैं- मुझे कभी छोड़ कर तो नहीं जाओगी न..?

डॉली- नहीं.. हमेशा तुम्हारी बांहों में ऐसे ही रहूँगी।

मैं- हमेशा ऐसे ही प्यार करोगी मुझे?

डॉली- नहीं इससे बहुत बहुत ज्यादा।

मेरी आँखें अब तक बंद थीं.. तभी डॉली के होंठ मेरे होंठों से मिल गए।

हम दोनों ही आँखों में आंसुओं का सैलाब लिए एक-दूसरे को चूम रहे थे।

जहाँ तक नज़रें जाती.. वहाँ बस अँधेरी रात का सन्नाटा पसरा हुआ था। अगर कोई शोर था तो वो शोर समंदर की लहरों का था।

समंदर की ठंडी नमकीन हवाओं ने जैसे उसके होंठों पर भी नमक की परत चढ़ा दी हो.. मैं उसके होंठों को चूमता हुआ उसमें खोने लगा।

डॉली ने मुझे अपने नीचे कर लिया और मेरे कपड़े उतारने लग गई।

मैंने भी उसके तन से कपड़ों को अलग किया, वो चाँद की रोशनी में डूबी और समंदर के पानी से नहाई हुई परी लग रही थी।

मैं उसके जिस्म को बस निहार रहा था.. पर शायद डॉली को शर्म आ गई, वो अपने हाथों से अपने जिस्म को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लग गई।

मैं उसके जिस्म पर जहाँ-जहाँ भी खाली जगह थी.. वहीं उसे चूमने लग गया। डॉली ने अब अपने हाथ हटा लिए थे, अब उसकी आवाज़ में सिसकियाँ ज्यादा थीं।

मैंने उसे पलटा और रेत लगे उसके जिस्म को.. समंदर के पानी से धोने लग गया।

उसके रेत से सने हुए जिस्म को धोते हुए हर उस जगह को भी चूमता जा रहा था। फिर उसके कूल्हों को चूमता हुआ मैंने उसके पीछे के रास्ते में अपनी ऊँगली फंसा दी।

मेरी इस हरकत से वो चिहुंक कर बैठ गई और मुझे लिटा कर मेरे लिंग को अपने हाथों से सहलाते हुए मेरे जिस्म को जोर-जोर से चूमने लग गई।

थोड़ी देर में मेरा लिंग उसके मुँह के अन्दर था। उत्तेजना की वजह से मैंने भीगी रेत को मुठियों से ही निचोड़ दिया और उस रेत से उसके स्तनों की मालिश करने लग गया।

अब हम 69 की अवस्था में आ गए.. मैं उसकी योनि को चूमता हुआ नमकीन पानी से भीगी हुई उँगलियाँ उसकी गांड में घुसाने लग गया।

कभी-कभी जो नमकीन स्वाद मुझे मिलता.. उससे ये तय नहीं कर पा रहा था कि ये समंदर के पानी का असर है या उसकी योनि का नमकीन पानी है।

अब मैंने उसे सीधा किया और अपने लिंग को एक जोरदार झटके से उसकी योनि में समाहित कर दिया। थोड़ी देर इसी आसन में अन्दर-बाहर करने के बाद उसे घोड़ी वाले आसन में लाया और पीछे से जोर-जोर से अपने लिंग को अन्दर-बाहर करने लग गया।

आखिरकार हम दोनों एक साथ अपने प्यार की पराकाष्ठा पर पहुँच गए। हमारे कपड़े भीगते हुए संमदर के साथ किनारे पर तैर रहे थे।

अब कहीं वो समंदर में ना चली जाए.. इस वजह से डॉली उठी और वैसे ही कपड़ों को इकठ्ठा करने लग गई। उसे देख कर ऐसा लग रहा था.. मानो कोई जल-परी जल-क्रीड़ा कर रही हो।

मैं बस दौड़ कर उसके पास गया और उसे पीछे से पकड़ कर अपनी बांहों में भर लिया।

डॉली ने खुद को मुझसे अलग किया और वही भीगे कपड़े पहन लिए। मैंने भी अपने कपड़े डाले और डॉली के साथ उसकी कार तक आ गया। उसने कार में रखी हुई मुझे शराब कि बोतल बढ़ा दी।

थोड़ी देर में हम सामान्य हुए तो डॉली मुझे अपने साथ अपनी कार में घर पर ले गई। घर पर कोई भी नहीं था। कमरे में बेहद हल्की रोशनी थी.. इतना प्रकाश भर था कि हम बस एक-दूसरे को महसूस कर सकते थे।

रास्ते में मैं उसकी कार में शराब ख़त्म कर चुका था.. सो अब मुझे नशा भी छाने लगा था। मैं बिस्तर के पास जाते ही बिस्तर पर गिर पड़ा और डॉली मेरे ऊपर आ गई।

हम एक-दूसरे में डूबते चले गए। जितनी नाराजगी.. जितना भी प्यार मेरे अन्दर डॉली के लिए था.. वो आज मैंने इस पर न्यौछावर कर दिया।

मेरी आँख लग गई।

सुबह-सुबह डॉली की आवाज़ से मैं नींद से जागा।

डॉली अपने भीगे बालों का पानी मेरे गालों पर गिराते हुए बोली- जानेमन जाग भी जाओ।

वो अभी-अभी नहा कर आई थी और अब तक तौलिया में ही थी।

मैंने उसके हाथ को पकड़ बिस्तर पर गिरा दिया और उसके ऊपर आ कर उसके होंठों को चूमने लगा। फिर मैं उसके कानों के पास बोला- नाश्ता बहुत अच्छा था… लंच में क्या दे रही हो?

वो मुझे धकेलते हुए बोली- बदमाश.. जाओ यहाँ से.. आज नाश्ते से ही काम चला लो.. आज कुछ नहीं मिलने वाला।

मैं- कुछ भी कहो.. मैं नहीं छोड़ने वाला हूँ!

फिर मैंने उसके तौलिए को खींच कर अलग कर दिया।

डॉली-नहीं.. प्लीज भगवान् के लिए मुझे छोड़ दो।

मैं-अरे जानेमन.. तुम्हारी चूत में से कितना भी रस ले लूँ.. फिर भी बच ही जाएगा।

यह कहता हुआ मैं उसकी चूत में ऊँगली करने लग गया।

अब डॉली भी बेकाबू हो रही थी। मैंने अपने लिंग को निकाल कर उसके मुँह में दे दिया। वो भी भी तसल्ली से इसे चूसने लग गई.. पर सुबह-सुबह का वक़्त था.. सो मुझे जोर से पेशाब लगी थी।

मैंने डॉली के बालों को पकड़ कर उसे फर्श पर बिठाया और उसके चेहरे पर अपने लिंग को रगड़ता हुआ पेशाब करने लग गया।

डॉली भागने की कोशिश कर रही थी.. पर मैंने उसके बालों को जोर से पकड़ा हुआ था।

जब मैं खाली हुआ तो फिर से अपने लिंग को उसके मुँह में दे दिया। फिर मैं उसे फर्श पर बिखरे हुए उसी पेशाब पर उसे लिटा दिया और उसकी गांड में अपने लिंग को एक ज़ोरदार झटके से घुसा दिया।

उसका पूरा बदन लाल हो गया था। वो जोर से चीखना चाह रही थी.. पर मैंने कोई मौक़ा ना देते हुए उसके मुँह में अपनी चारों उँगलियाँ डाल दी।

मैं जोर-जोर से उसे धक्के लगा रहा था। थोड़ी-थोड़ी देर में मैं लिंग को उसकी गांड से निकाल कर चूत में डालता और फिर से उसे उसकी गांड में डाल देता।

 
मेरी इस छेड़छाड़ से वो झड़ गई और थोड़ी देर में जब मैं झड़ने को हुआ तो फिर से उसकी मुँह में लंड डाल कर अपना सारा रस निकाल दिया।

अब फिर से उसे नहाना पड़ा.. पर इस बार मैं भी उसके साथ था।

वहाँ भी एक शॉट लगा कर उसे शांत किया और फिर हम बाहर आ गए।

मैं- अपने घर में अकेली रहती हो..? मम्मी पापा?

डॉली- मम्मी लन्दन में.. और पापा न्यूयॉर्क में.. दोनों का तलाक हो चुका है, यहाँ मैं अकेली ही रहती हूँ।

तभी मेरे फ़ोन की घंटी बजी। मैं अपने कपड़े पहन रहा था.. सो मैंने फ़ोन को स्पीकर पर कर दिया।

कोमल- मैंने सुना है कि तुम्हें तुम्हारी डॉली मिल गई?

मैं- तुम्हें कैसे पता?

कोमल- वो आपकी दूसरी वाली… क्या नाम था उसका.. हाँ कांता खान.. वो बता रही थी कि आप और डॉली एक साथ बाहर गए हो। वैसे जनाब नाश्ता और लंच यहीं करोगे या परमानेंटली उसी के घर पर शिफ्ट हो रहे हो.?

मैं- नहीं यार… मैं अभी आता हूँ. वैसे भी अब बिस्तर पर नींद नहीं आती, मैं सोफे को बहुत मिस कर रहा हूँ।

कोमल- ताने मारना बंद करो। मैंने बिस्तर मंगवा दिया है और कम से कम जाकर अपने लिए शॉपिंग वगैरह तो कर लो.. हीरो बन गए हो और विलेन से भी बुरे हालत में रहते हो।

मैं- ठीक है मेम साब.. आपका हुकुम सर आँखों पर..

मैंने फ़ोन काट दिया।

डॉली- यह वही है न.. जिनके बारे में तुमने बताया था?

मैं- हाँ..

डॉली- तुम यहीं मेरे साथ क्यूँ नहीं रहते हो.. वैसे ये भी ठीक है हमें थोड़ी दूरी बना कर रहना चाहिए वरना ये मीडिया वाले छोड़ते नहीं हैं।

मैं- क्या करते हैं वो?

डॉली- अभी आपकी यह पहली फिल्म है.. मेरी ये दूसरी फिल्म है.. तो मुझे अनुभव थोड़ा ज्यादा है। आपकी फिल्म एक बार हिट हो जाने दो फिर देखना कि ये क्या-क्या करते हैं।

मैं- तुम्हारी कौन सी फिल्म आई है। मैंने तो नहीं देखी है।

डॉली- कैसे देखोगे अभी पंद्रह दिन पहले ही तो रिलीज़ हुई है.. कल जिसकी सक्सेस पार्टी में गए थे.. उस फिल्म के लीड रोल में मैं ही थी।

मैं- ह्म्म्म… चलो थोड़ी शॉपिंग करते हैं। मेरे पास अभी तक ढंग के कपड़े भी नहीं हैं।

डॉली- हाँ मैं डिज़ाइनर अपॉइंटमेंट ले लेती हूँ.. फिर हम दोनों काम पर चलेंगे।

मैं- जानेमन.. अभी मैं सुपरस्टार बना नहीं हूँ। ऐसा करो कि मुझे खुद ही जाने दो.. मैं अपने लेवल के कपड़े खरीद लूँगा.. तुम बस अपनी कार में ही रहना और हाँ.. अभी मैं आपसे पैसे लेने वाला नहीं हूँ.. सो कुछ और मत कहना।

डॉली- मैं भी साथ चलूंगी। मैं भी एक्ट्रेस हूँ.. ऐसे तैयार हो जाऊँगी कि कोई भी मुझे नहीं पहचान पाएगा।

मैं- उसके लिए तो जो पहना है उसे उतारना भी होगा न !

मैं फिर से उसके कपड़े उतारने लग गया।

डॉली- नहीं… प्लीज छोड़ दो मुझे।

फिर कुछ देर बाद हम दोनों एक साथ शॉपिंग पर गए। वो पूरा दिन हमने खूब मज़ा किया। रात को थक कर आ कर सो गए।

दूसरे दिन सुबह सुबह कोमल का कॉल

कोमल- जनाब बिस्तर उदघाटन की राह देख रहा है.. कब आयेंगे आप?

मैंने डॉली को सुनाते हुए कहा- पहले यहाँ वाला बिस्तर तो तोड़ दूँ।

फिर मैं और कोमल जोर-जोर से हंसने लग गए।

इधर डॉली ने तकिए को मेरे चेहरे पर मारना शुरू कर दिया। जैसे-तैसे हालात को काबू में किया।

कोमल-तुम्हें हंसते हुए देख कर अच्छा लगता है.. ऐसे ही रहना और जल्दी से घर आओ.. मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बना रही हूँ और हाँ.. डॉली को भी साथ ले आना।

हम दोनों तैयार हुए। मैंने कल जो शॉपिंग की थी.. उसमें से आधे कपड़े यहीं छोड़ कर बाकी कपड़े अपने साथ फ्लैट में ले आया।

 


मैं घर में अन्दर आया तो सबने डॉली को दरवाज़े पर ही रोक दिया।

‘अरे रुको थोड़ी देर’

यह कहते हुए पायल ने एक गिलास में चावल डाल कर दरवाज़े पर रख दिया।

पायल- भाभी जी, गृह प्रवेश करो।

डॉली ने हंसते हुए कहा- लात किसको मारनी है..? गिलास को या विजय को?

ललिता- विजय को तो हर रोज़ ही मारोगी। फिलहाल गिलास को ही लात मार कर अन्दर आ जाओ।

फिर हम सबने एक साथ नाश्ता किया और वो पूरा दिन डॉली की कार में हम सब पूरे शहर में धमाल मचाते रहे।

ऐसे ही हमारे कुछ दिन मज़े में बीते। मेरी फिल्म की मुहूर्त शॉट का वक़्त आ चुका था। आज मैं अच्छे से तैयार हो कर लोकेशन पर चला गया। मेरे लिए वहाँ एक वैन थी। मैं वहीं चला गया और एक मेकअप मैन ने मुझे तैयार किया।

तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई.. कोमल थी। उसे वहाँ असिस्टेंट डायरेक्टर बना दिया गया था।

कोमल- शॉट रेडी है सर…

मैं- अब तुम तो मुझे ‘सर’ मत कहो।

बारिश का सीन था.. डॉली (इस फिल्म में भी उसका नाम डॉली ही था.. शायद यह कोमल ने ही किया हो। क्यूंकि बस वो ही मेरी एक्टिंग के बारे में जानती थी।)

डॉली सड़क पर खड़ी थी और टैक्सी ढूंढ रही थी। मेरा एक पहलू.. जो आवारा किस्म का था.. वो उसे सड़क के बीचों-बीच ट्रैफिक रुकवा कर.. प्रपोज करता है।

लाइट … कैमरा … एक्शन

डॉली.. जो मेरे मुस्कान की वजह बन चुकी थी.. उसे देखते ही मेरे चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गई।

मैं उसके पास जा कर।

मैं- मैडम.. एक बात कहूँ?

डॉली- मैं आवारा लोगों के मुँह नहीं लगती।

मैंने अपनी शर्ट के बटन खोलते हुए कहा- तो फिर मेरे सीने से लग जाओ.. मैंने कब रोका है।

डॉली (गुस्से में)- तुम्हें बात करने की तमीज नहीं है.. लड़कियों से ऐसे बात करते हैं..?

मैंने अपनी पैंट को ऊपर करते हुए कहा- जी तमीज़ तो है.. पर यूँ भीगता देख कर ज़ज्बात काबू से बाहर हो रहे हैं।

कट.. कट.. मैंने डायरेक्टर को सॉरी कहा.. वो मैंने आखिरी वाला डायलॉग कुछ और ही कह दिया था।

फिर से डॉली ने अपनी बात दोहराई और..

मैं उसके हाथ को पकड़ कर घुटनों पर आ गया और मैंने डायलॉग बोला- मुझे नहीं पता.. लड़कियों से कैसे बात करते हैं.. क्यूंकि मुझे आज तक किसी ने प्यार से सिखाया ही नहीं है.. मैं हर बात सीख लूँगा.. जो तुम्हें अच्छी लगे। तुम बस मेरी हो जाओ.. आई लव यू..

कट… परफेक्ट शॉट..!

डॉली ने मेरे गले से लग कर मुझे बधाई दी और फिर मैं पास रखी कुर्सी पर बैठ गया.. और डॉली के मम्मों को महसूस करने लगा.. मेरा लौड़ा खड़ा होने लगा था।

इसके बाद का सीन था कि मैं अभी तक उसका हाथ थामे ज़मीन पर देख रहा हूँ.. तभी एक कार आती है और डॉली को धक्का मार कर आगे निकल जाती है। जिस सीन को डायरेक्टर ने हमारे बॉडी डबल के साथ पूरा किया।

मैं अब अपने केबिन में कपड़े बदल कर तैयार हुआ और बाहर हॉस्पिटल का सैट लग चुका था।

फिर से कोमल अन्दर आई।

मैं- हाँ जी.. मैं तैयार बैठा हूँ। शॉट रेडी है न..?

कोमल- ह्म्म्म… तुम्हारा पहला शॉट बहुत अच्छा था। कैसे किया तुमने ये..?

मैं- तुम तो जानती ही हो.. डॉली को प्रपोज करने के लिए भी भला मुझे एक्टिंग सीखने की ज़रूरत है क्या?

कोमल- देखती हूँ आगे इस किरदार को कैसे निभाते ह?

मैं- देख लेना।

मैं उसके साथ केबिन के बाहर आ गया।

अगला सीन था कि मैं हॉस्पिटल में घायल लेटा हुआ हूँ। उस एक्सीडेंट में थोड़ी चोट मुझे भी आई थी।

डॉली मेरे पास के ही एक कमरे में है और वो बहुत ही सीरियस हालत में है।

लाइट… कैमरा… एक्शन !

मैंने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं। पास ही खड़ी एक नर्स ने मुझसे कहा- वो दूसरी पेशेंट.. आपके साथ है क्या?

मैं- हाँ.. वो ठीक तो है न?

नर्स- जल्दी जाओ… पता नहीं वो ज़िंदा बचेगी भी या नहीं।

मेरे ज़ज्बातों का समंदर अब सुनामी का रूप ले चुका था। मैं भाग कर उस तक पहुँचना चाह रहा था.. पर मेरे दिल की धड़कनों ने जैसे मेरे पाँव में कोई डोर बाँध दी हो.. हर दो कदम पर लड़खड़ाए जा रहा था। मेरे आंसू बेकाबू हो चले थे। मैं डॉली के कमरे तक पहुँचा। मेरी आँखें भर जाने की वजह से हर चीज़ अब धुंधली सी दिखने लगी थी।

मेरे कानों में बस उसकी हिचकियों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

 


मैं उसके हाथ पकड़ कर लगभग चिल्लाते हुए बोला- कहाँ जा रही हो.. मुझे यूँ अकेला छोड़ कर.. मैं तुम्हें कहीं नहीं जाने दूँगा..

तभी हिचकियाँ लेती हुई वो शांत हो गई। मैं गुम सा हो गया। मैंने उसके दिल के पास अपने कान ले जा उसकी धड़कन सुनने की कोशिश करने लगा।

फिर मैं वहीं सर रख कर लेट गया और कहने लगा- सुना था कि प्यार में बहुत ताकत होती है.. सच्चे प्यार को ले जाने की हिम्मत खुद उस भगवान में भी नहीं होती.. मैंने जब से तुम्हें देखा था तब से बस तुम्हारी ही चाहत की है। अगर मेरे प्यार में सच्चाई है तो तुम्हें लौट कर आना ही होगा (इस बार मैं जोर से चीखते हुए) तुम्हें मेरे पास आना ही होगा..

मैंने उसके सीने को हाथों से प्रेशर दिया।

फिर एकदम से एक लम्बी सांस खींचते हुए वो बैठ गई। पास की एक नर्स अपने आंसू पोंछते हुए उससे कहती है- भगवान तुम दोनों की जोड़ी हमेशा सलामत रखे और बेटी तुम्हें इससे अच्छा जीवन साथी नहीं मिल सकता।

‘कट इट.. ब्रिलिएँट शॉट।’

डायरेक्टर के इतना बोलते ही पूरा स्टूडियो तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

मैं अब तक लम्बी-लम्बी साँसें ले कर किरदार से बाहर आने की कोशिश कर रहा था।

तभी डॉली मेरे कान के पास आ कर बुदबुदाई- मैंने जो बात कही थी याद है तुम्हें? जब-जब तुम अपने दर्द में चिल्लाओगे.. हर तरफ बस तालियों का शोर सुनाई देगा।

फिर कोमल आई और मुझे मेरे केबिन तक ले गई।

कोमल- कमाल है यार… अब तो मुझे भी शक होने लगा है कि तुम में किसी महान एक्टर की आत्मा तो नहीं है। बिना रीटेक लिए हर शॉट को पूरा कर रहे हो। वैसे अब तुम अगले शॉट की तैयारी करो.. मैं तुम्हारे लिए लंच भिजवाती हूँ।

ये कहते हुए वो बाहर निकल गई, मैंने स्क्रिप्ट को पढ़ना शुरू किया।

अगला शॉट जन्नत (इस फिल्म में उसका नाम पूजा था) के साथ था। तभी दरवाजे पर खटखटाने की आवाज़ आई। मैंने सोचा लंच आ गया होगा और मैंने दरवाज़े को खोल दिया। सामने कांता थी.. वह मुस्कुराते हुए अन्दर आई और उसने दरवाज़ा बंद कर दिया।

मैंने बैठते हुए कहा- ये दरवाज़ा क्यूँ बंद कर दिया तुमने?

वैसे मुझे थोड़ी घबराहट सी होने लगी थी।

कांता ने मेरी गोद में बैठते हुए कहा- तुम्हारे शॉट ने तो मुझमें आग लगा दी है।

मैं- जी.. वो.. शॉ..ट मतलब?

कांता- जान… सच में इतने भोले हो या फिर अभी भी एक्टिंग ही कर रहे हो.. मेरा तो मन हो रहा है कि तुम्हें कच्चा चबा जाऊँ।

फिर उसने मेरे गालों पर अपने दांत गड़ा दिए।

मैंने उसे खुद से दूर धकेलते हुए कहा- ये क्या कर रही हो? मैं किसी और को चाहता हूँ.. और प्लीज तुम मुझसे दूर ही रहो।

कांता- ऐसी भी क्या बात है उसमें.. जो मुझमें नहीं?

मैं- वो मेरे दर्द की दवा है।

तभी दरवाज़े पर लंच लेकर एक स्पॉट ब्वॉय आ गया।

कांता ने उससे खाना लिया और दरवाज़े को फिर से लॉक कर दिया।

‘देखो मुझे भूख नहीं है.. या तो खुद चली जाओ या मुझे बाहर जाने दो।’

कांता- ऐसे कैसे जाने दे सनम.. हमें तो आपने अपना दीवाना बना लिया है, अब तो बिना हमारी ख्वाहिश पूरी हुए हम कहीं नहीं जा रहे हैं।

मैं- कैसी ख्वाहिश?

कांता- आपको अपने हाथों से खिलाने की।

वो खुद बैठ गई और उसने मुझे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया।

सच कहूँ तो इतना डर मुझे कभी नहीं लगा था। मैं तो एक अबल पुरुष की भाँति बड़ी ही दयनीय दृष्टि से उसे देख रहा था। वो मुझे खिला रही थी और मैंने खुद को इतना बेसहारा कभी भी महसूस नहीं किया था।

एक हाथ से निवाला मेरे मुँह में डालती तो दूसरे हाथ से मुझे कभी यहाँ तो कभी वहाँ सहलाती जाती।

जैसे-तैसे खाना ख़त्म हुआ और वो बाहर गई। मेरी हालत अब तक खराब ही थी।

तभी कोमल आई और उसने कहा- शॉट रेडी है।

मैं बाहर आया तो देखा वो हंसे जा रही थी। मैंने पूछा तो उसने कोई जवाब नहीं दिया।

इस बार सीन था.. मैं हॉस्पिटल से वापस आया हूँ और थक कर सो गया। सुबह उठते ही मुझे डॉली की याद आने लगी और मेरी आँखें फिर से भर आईं। मैंने उसके पास जाने का फैसला किया.. पर जैसे ही मैं अपने चेहरे को साफ़ करने वाशरूम जाता हूँ, मेरी नज़र शीशे पर पड़ती है। खुद की आंखों में आंसू देख मेरी दूसरी शख्शियत बाहर आ जाती है और मैं सब भूल अपने ऑफिस के लिए निकल जाता हूँ। जहाँ पूजा (कांता) मेरी बॉस है।

लाइट… कैमरा… एक्शन !

मैं अपने एक बेडरूम का फ्लैट का दरवाज़ा खोलता हूँ। मैं अब तक उसकी यादों में उदास था। चाभियाँ वहीं टेबल पर फेंक कर मैं बिस्तर पर लगभग गिरते हुए लेट जाता हूँ और मेरी आँख लग जाती है।

डायरेक्टर की आवाज़, ‘सीन चेंज.. लाइट.. एक्शन’

तभी एक अलार्म की आवाज़ से मैं जागता हूँ। वैसे ही उदास सा मैं वाशरूम में जा कर अपने चेहरे पर पानी की छींटें मारता हूँ और जब मैं शीशे में अपने चेहरे को देखता हूँ तो पानी की बूंदों के साथ बहते मेरे आंसू मुझे दिख जाते हैं। इन आंसुओं को देख कर मुझे गुस्सा आने लगता है और मैं वहीं ज़मीन पर गिर जाता हूँ।

कट ..कट.. एक और टेक लो। लगभग दस टेक के बाद ये सीन पूरा हो पाया। सीन फिर से आगे बढ़ता है।

मैं अब उठा तो जैसे किसी नींद से जागा हूँ। मैंने अंगड़ाई ली और तैयार हो कर ऑफिस के लिए निकल गया।

यहाँ पूजा के पब्लिशिंग हाउस में मैं एक लेखक था।

डायरेक्टर- सीन चेंज .. लाइट.. कैमरा… एक्शन

मैं ऑफिस के अन्दर था। सबको ‘गुड मॉर्निंग’ बोलता हुआ मैं अपने केबिन में चला गया.. तभी ऑफिस की एक लड़की मुझे आकर कहती है- सर पूजा मैडम आपको बुला रही हैं।

 


इस नाम को सुनते ही मेरे चेहरे पर डर के भाव आ गए। मुझे थोड़ी देर पहले की बात याद आ रही थी। मैं यूँ ही डरता हुआ पूजा के कमरे में दाखिल हुआ।

पूजा- हमारी कब से दर पे आँखें लगी थीं.. हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी।

उसने मिनी स्कर्ट पहनी थी.. वो एक कुर्सी ले मेरे सामने बैठ गई। एक मादक अंगड़ाई लेते हुए उसने सिगरेट सुलगाई और उसका धुआं मुझ पर छोड़ते हुए बोली।

पूजा- किताबें ही लिखोगे या हमारी कहानी आगे बढ़ेगी?

मैं- ज..जी… कौन सी कहानी?

पूजा ने मेरे हाथ पकड़ कर अपने गालों पर सहलाते हुए कहा- अरे मेरे भोले सनम.. हमारी कहानी… इस हुस्न की बेचैनी की कहानी.. जो बस तुम्हारे प्यार की एक बूंद पाने को तड़प रही है।

मेरा तो डर के मारे गला सूखने को हो आया था।

मैं हाथ छुड़ा कर उठते हुए बोला- जी मैं वो कोशिश करूँगा..

मैं उठ कर केबिन से बाहर भाग आया।

कट.. परफेक्ट शॉट..

मैं जब अपनी वैन के पास पहुँचा तो देखा.. डॉली और कोमल दोनों ही मुझे देख देख कर हँसे जा रही हैं।

मैं- क्या हो गया है तुम दोनों को?

डॉली- पूजा मैडम तुम्हें ढूंढ रही हैं।

मैं- वो एक्टिंग थी.. वरना मैं किसी से नहीं डरता।

डॉली- अच्छा जी.. तो वो जो थोड़ी देर पहले वैन में हो रहा था.. तब भी डर नहीं लगा था क्या?

मैं- तुम्हें कैसे पता?

कोमल- मैंने और डॉली ने ही कांता को वो सब करने भेजा था.. ताकि तुम्हारी एक्टिंग निखर कर सामने आए।

मैं- अभी बताता हूँ तुम दोनों को..

उस पूरे सैट पर मैं उन दोनों को भगाने लगा और पूरे सैट पर सब लोग हंस-हंस कर लोट-पोट हो रहे थे।

हमारी आज की शूटिंग ख़त्म हो चुकी थी। सो अब वापस घर जाने का वक़्त था। मैं डॉली की कार में बैठ गया और डॉली ड्राइव करने लग गई।

डॉली- तुम्हें ड्राइव करना नहीं आता है?

मैं- आता है।

डॉली- तो फिर ड्राइव क्यूँ नहीं करते हो?

मैं- वो मेरे दोनों हाथ फ्री रहते हैं न..

यह कहते हुए मैं उसके गालों को सहलाने लगा।

डॉली- छोड़ो भी… क्या कर रहे हो?

मैं- मतलब और पास आने को कह रही हो.. ठीक है.. कहते हुए उसे बांहों में भरने लगा।

डॉली- छोड़ो मुझे.. नहीं तो गाड़ी कहीं ठोक दूँगी।

अब मुझे उसे छोड़ना पड़ा। वैसे भी सड़क पर भीड़ थोड़ी ज्यादा थी और साथ में फिल्म स्टार भी बैठी थी। मुझे तो कोई अब तक नहीं जानता था.. पर उसकी ख़बरें अब अक्सर सुर्ख़ियों में रहने लगी थीं तो मैंने अलग बैठना ही ठीक समझा।

मैं- जानेमन.. आज पीने का मन हो रहा है।

डॉली- ठीक है। यही पास एक रेस्ट्रोबार है। हम वहीं चलते हैं।

मैं- मैं तो तुम्हारी निगाहों के जाम की बात कर रहा था और तुम यह समझ बैठी। खैर.. अब इतना कह रही हो तो मैं पी लूँगा।

डॉली ने मेरे कान खींचते हुए कहा- तो मैं फ़ोर्स कर रही हूँ जनाब को.. ठीक है नहीं जाते हैं। अरे याद आया आज तो एक सेलेब्रिटी पार्टी है।

उसने अपनी घड़ी देखते हुए कहा- पार्टी शुरू हो चुकी होगी और हमें ट्रैफिक से निकल कर वहाँ पहुँचने में भी एक घंटा लग ही जाएगा। तो क्या कहते हो?

मैं- जहाँ तुम, वहाँ मैं।

डॉली- सो.. स्वीट।

लगभग एक घंटे में हम खंडाला के फार्म हाउस पर पहुँचे। बाहर पत्रकारों की पूरी फ़ौज खड़ी थी। एक से बढ़कर एक गाड़ियाँ लगती जा रही थीं और हर बार जब कोई बड़ा सेलेब्रिटी कार से उतर कर अन्दर जाता तो सब एक साथ चीखने लग जाते।

मेरे लिए ये सब जैसे एक नया अनुभव था। अब हमारी कार भी दरवाज़े तक आ चुकी थी। डॉली का चेहरा यहाँ किसी के लिए भी अनजाना नहीं था तो वहाँ के एक स्टाफ ने डॉली से चाभी ली। डॉली ने मुझे साथ आने को कहा। मुझे अब तक डर ही लग रहा था।

सामने डॉली को बॉडीगार्ड्स ने घेरा हुआ था और तमाम पत्रकार उसकी तस्वीर के लिए कार पर गिर रहे थे.. जोर-जोर से चिल्ला रहे थे। फिर भी हिम्मत कर के मैं नीचे उतरा और बिना किसी की ओर देखे डॉली के साथ हो लिया। सब चिल्ला-चिल्ला कर सवाल पूछ रहे थे और इतने शोर में तो अपने मन की आवाज़ तक सुन पाना मुमकिन नहीं था, उनके सवाल कहाँ समझ आते भला।

मैं डॉली के साथ अन्दर फार्म हाउस में दाखिल हुआ।

यह कमाल की जगह थी.. ऐसा लग रहा था मानो खुद स्वर्ग के कारीगर ने आ कर इसे सजाया हो। कम से कम मैंने तो ऐसी जगह पहले कभी नहीं देखी थी। यहाँ मुंबई के लगभग तमाम नामचीन चेहरे थे। मैं तो जैसे यहाँ खो गया था।

डॉली- तुम एन्जॉय करो.. मैं कुछ लोगों से मिल कर आती हूँ।

जब गर्लफ्रेंड इस तरह कहती है तो अगर कोई लड़का मस्ती कर भी रहा हो तो भी एक बार देखता ज़रूर है कि आखिर गई कहाँ..

मैंने भी उसकी नज़रों से बचते हुए उसे देखा, बॉलीवुड के एक बड़े सुपरस्टार का बेटा था। मैंने मन को समझाया कि बेटा अब छोटे शहरों वाली सोच छोड़ दे। यहाँ अक्सर ऐसा ही देखने को मिलेगा। पर अभी-अभी तो आया था यहाँ माहौल में ढलने में वक़्त लगेगा। वे दोनों काफी हंस-हंस कर बातें कर रहे थे और जितना वो उससे प्यार से बातें कर रही थी.. मुझे उतना ही गुस्सा आ रहा था।

आखिरकार मैं उन पर से नज़रें हटा शराब ढूँढने लग गया। यही वो चीज़ थी जो मुझे सुकून दे सकती थी।

पास में ही शराब का काउंटर लगा था। मैं वहाँ गया और जल्दी-जल्दी में जितनी शराब गले से उतर सकती थी उतारने लग गया। तभी किसी ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा। मैंने पलट कर देखा तो वहाँ चेतन जी थे।

मैं- कैसे हैं चेतन जी..? आज आप शूटिंग पर नहीं आए थे..

चेतन जी- मेरा काम स्टूडियो तक ही होता है। उससे बाहर के काम के लिए अलग से टीम है.. पर आज मैंने आपके काम की बड़ी तारीफ़ सुनी.. ऐसे ही काम करते रहो.. मंजिल ज़रूर मिलेगी।

मैं चेतन जी से बातें करते हुए भी डॉली को ही देख रहा था और मेरी शराब पीने की रफ़्तार अब तक कम नहीं हुई थी।

 


चेतन जी ने स्थिति को भांप लिया था, उन्होंने मेरे गिलास को मुझसे लेकर वहीं रख दिया और मुझे पार्क से फार्म हाउस की छत पर ले गए, वहाँ से हर कोई दिख रहा था। फिर उन्होंने मुझसे कहा- मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ। बड़ा एक्टर वही होता है जिसके जज़्बात कोई पढ़ ना सके। जिसे अपने दर्द में मुस्कुराना और मुस्कुराते हुए रोना आता हो। मैं तुम्हें यहाँ इसलिए लेकर आया हूँ कि तुम तसल्ली से इस भीड़ को देख सको। ये सब यहाँ किसी न किसी मुखौटे में हैं और यही इनकी शोहरत की वजह है। तुम भी कोई अच्छा सा मुखौटा डाल लो अपने चेहरे पर.. अच्छा रहेगा।

मैं उनके इशारे को समझ गया था। वो मुझे वहीं छोड़ वापस उसी भीड़ के साथ हो लिए। अब शराब भी अपना असर दिखाने लगी थी। तभी वहाँ हाथों में जाम लिए.. लगभग पैंतीस साल की एक महिला छत पर आई।

वो मेरे पास आ कर नशे में झूमते हुए बोली- आपको कभी देखा नहीं है मैंने..

मैं- मुझे तो खुद भी नहीं मालूम कि मैं किसी को दिखता भी हूँ या नहीं।

मैं अब तक डॉली को ही देख रहा था।

वो मेरी नज़रों को भांपते हुए बोली- आशिक लगते हो।

मैं- मुझे तो खुद नहीं पता कि मैं क्या हूँ.. लगता है कि हर शब्द के साथ बदलती तस्वीर हूँ मैं.. अब तो मुझे भी लगने लगा है कि मैं एक एक्टर ही हूँ..

वो मुझसे हाथ मिलाते हुए बोली- वैसे इस पार्टी की होस्ट मैं ही हूँ… आपसे मिलकर अच्छा लगा कि इस उबाऊ भीड़ से अलग कोई तो है यहाँ..

मैं- इस भीड़ को खुद से अलग लोगों की आदत नहीं है। सुना है यहाँ टिकने के लिए इसी भीड़ का हिस्सा बनना पड़ता है।

वो- बातें आप बहुत अच्छी कर लेते हो।

मैं- आपको मेरी बातें अच्छी लगती है और यहाँ कुछ लोग ऐसे भी हैं.. जो मेरी बातों से परेशान होकर इस दुनिया को अलविदा कह जाते हैं।

वो हंसते हुए बोली- मुझे ऐसी कोई ख्वाहिश नहीं है.. मैं जाती हूँ और आपके हर सवाल के जवाब को आपके पास भेज देती हूँ।

अब मुझ पर शराब थोड़ी हावी हो गई थी और नीचे डीजे अपने पूरे शवाब पर आ चुका था।

मैं लड़खड़ाता हुआ सीढ़ियों के पास पहुँचा और जैसे ही लड़खड़ाने लगा कि डॉली ने मुझे अपनी बांहों में थाम लिया।

डॉली- जब कण्ट्रोल नहीं कर पाते.. तो इतनी क्यूँ पीते हो।

मैं- इस पैमाने को दोष ना दो.. मेरे लड़खड़ाने का… बात कुछ और भी तो हो सकती है।

डॉली- पता नहीं.. क्या-क्या कहे जा रहे हो। वैसे तुम काजल जी को कैसे जानते हो?

मैं- कौन काजल?

डॉली- वही.. जो थोड़ी देर पहले तुम्हारे साथ थीं।

मैं- तो यह उनका नाम है.. बात तो हुई.. पर मैंने उनसे नाम नहीं पूछा था।

डॉली- उनका बहुत बड़ा बिज़नेस एम्पायर है और वो तुम्हें नीचे बुला रही हैं।

मैं- पर मैं तो तुम्हारे साथ कुछ वक़्त बिताना चाहता हूँ।

डॉली मुझे धक्का देते हुए बोली- नहीं.. अभी नीचे चलो.. बाद में वक़्त बिता लेना।

मैं नीचे आ गया। डॉली मुझे काजल जी के पास ले जाकर बोली- लीजिए.. आपके मेहमान को मैं यहाँ ले आई।

मैंने काजल जी को देखते हुए बोला- पता नहीं था.. कि मेरे इस दोस्त के पास ही मेरे मर्ज़ की दवा है। वरना हम खुद ही ज़िक्र कर देते।

काजल जी- वो दोस्त ही क्या.. जिसे दोस्त के हाल ए दिल जानने को ज़िक्र की ज़रूरत हो। हम तो आँखों से दोस्तों की नब्ज़ पहचान लेते हैं।

फिर वो मेरा हाथ पकड़ कर स्टेज पर ले जाते हुए मुझसे बोली- आईए इस भीड़ से आपकी पहचान करवा दें।

बीच में एक स्टेज बना हुआ था.. वहाँ खड़े होकर डीजे से माइक लेते हुए, वो माइक पर कहने लगी- दोस्तों आज मैं आपसे अपने एक ख़ास दोस्त को मिलवाना चाहती हूँ।

फिर मुझे अपने करीब खींचते हुए उसने आगे कहा- ये हैं विजय.. इस इंडस्ट्री के अगले सुपरस्टार..

फिर माइक उन्होंने मेरे हाथों में दे दिया। शराब कॉन्फिडेंस भी बढ़ा देती है, इस बात का पता मुझे आज ही चला था। मैं माइक अपने हाथ में लेते हुए बोलने लगा।

‘एक बार एक चींटा अपनी गर्लफ्रेंड चींटीको लॉन्ग ड्राइव पे ले जा रहा था। तभी रास्ते में एक हाथी अपनी मदमस्त चाल में चलता हुआ सामने आया और उस चींटे की गर्लफ्रेंड चींटी उसे छोड़ हाथी के साथ चली गई। (मैं मुस्कुराते हुए) और जाते-जाते कह गई ‘साइज़ मैटर्स।’ (काजल की ओर देखते हुए) थैंक्स काजल उस चींटी से दोस्ती कराने के लिए।’

डीजे ने म्यूजिक फिर से शुरू कर दिया और फिर से सब झूमने लग गए। डॉली की आँखें बता रही थीं कि उसने मेरे इशारे को समझ लिया है.. पर चेहरे के मुखौटे ने उसे ज़ाहिर न होने दिया। मुझे अब यहाँ घुटन सी हो रही थी.. सो मैं वहाँ से बाहर आ गया।

मैंने टैक्सी की.. और सीधा घर पहुँच गया।

ललिता दरवाज़ा खोलते हुए ‘क्या बात है जी.. बड़ी पार्टी-शार्टी हो रही हैं आजकल..

मैं कुछ भी जवाब देने की हालत में नहीं था.. सो मैं बिस्तर पे गया और सो गया।

अलार्म की तेज़ आवाज़ और सर में दर्द से बेहाल होता हुआ सुबह मेरी आँखें खुलीं। सामने टेबल पर एक गिलास पानी और एक सर दर्द की गोली रखी थी।

मैं बेड पर बैठ गया और उस टेबलेट को खा लिया। थोड़ी देर में सर दर्द से राहत मिली।

पायल ने मेरे पास बैठते हुए कहा- तो शूटिंग पर नहीं जाना है क्या?

मैं- ना.. आज तो जाने का मन बिल्कुल भी नहीं है।

पायल- डॉली आएगी तो क्या कहोगे?

मैं तो भूल ही गया था कि डॉली मुझे अपने साथ ले जाने के लिए मेरे फ्लैट पर आएगी। मुझे उस पर कल के लिए गुस्सा अब तक था और मैं इतनी जल्दी उससे मानने वाला नहीं था।

रूठने का भी अलग ही मज़ा है।

मैं जल्दी से तैयार हुआ और टैक्सी से शूटिंग लोकेशन पर चला आया। सैट लगा हुआ था और मेरी वैन भी वहीं थी.. सो मैंने मेकअप वाले को बुलाया और वैन में आराम से बैठ गया।

स्क्रिप्ट पढ़ते हुए मैंने मेकअप वाले से कहा- जब तक मुझे शॉट के लिए बुलाया न जाए तुम यहाँ से हिलोगे नहीं और जो भी आए उससे बाद में आने को कह देना।

लगभग दो घंटे बीत गए और डॉली ने भी कई बार मुझसे बात करने की कोशिश की.. पर मैंने लगातार मेकअप वाले को बिठाए रखा।

कोमल आई- शॉट रेडी है सर.. अब तो मेकअप हो गया आपका?

मैं- बस दो मिनट दे.. मैं अभी आता हूँ।

मैं शॉट देने आ गया।

आज का सीन था- बस स्टैंड पर डॉली बैठी है और मेरा इंतज़ार कर रही है। मैं भी ऑफिस के लिए यहीं से बस पकड़ता हूँ।

मेरी आवारा शख्सियत जब तक किसी लड़की को लाल कपड़े में ना देख ले तब तक बाहर नहीं आती है तो मैं उसे पहचानूँगा तक नहीं।

लाइट.. कैमरा.. एक्शन..

 


बहुत ही सुहाना मौसम था और हल्की तेज़ हवाएँ चल रही थी।

बस स्टैंड पर डॉली शायद मेरे ही इंतज़ार में थी। वहाँ फिलहाल और कोई भी नहीं था। मैं डरा.. सहमा सा.. हल्के क़दमों से बस स्टैंड पर पहुँचा। डॉली एक छोर पर बैठी थी और मैं दूसरे छोर पर जाकर बैठ गया।

डॉली सरकते हुए मेरे एकदम करीब आ जाती है।

मैंने डरते हुए कहा- जी अभी काफी जगह खाली है.. आप वहाँ पर बैठ जाएँ।

डॉली- कुछ दिन पहले तक तो मुझे बांहों में भरने को बेकरार थे। आज जब मैं खुद तुम्हारे पास आई हूँ.. तो दूर जा रहे हो।

मैं- देखिए आपको कोई गलतफ़हमी हुई है। मैं वो नहीं हूँ.. जिसे आप ढूंढ रही हैं।

डॉली ने मेरे चेहरे को अपनी ओर करते हुए कहा- ह्म्म्म… ठीक कह रहे हो आप.. वो होता तो अब तक मेरे गले मिल चुका होता।

मैंने उससे दूर जाते हुए कहा- इस तरह से किसी को परेशान करके आपको क्या मिलेगा। मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है।

मैं आवाज़ तेज़ करते हुए बोलने लगा- और मैंने कहा न.. मैं आपको नहीं जानता हूँ.. फिर क्यूँ मेरे पीछे पड़ी हैं?

डॉली की आँखों में अब आंसू आ गए थे।

‘तुम्हारा नाराज़ होना जायज़ है। तुमने मुझसे इतना प्यार किया और मैंने हमेशा तुम्हारे साथ बुरा बर्ताव किया.. पर मैं तुम्हें जान गई हूँ.. अब प्लीज मुझे माफ़ कर दो। अब कभी तुम्हारा दिल नहीं दुखाऊँगी।

वो यह कहते हुए मुझसे कस कर लिपट गई।

मेरा तो मन हो रहा था कि अभी इसे कस कर बांहों में भर लूँ और जी भर के प्यार करूँ.. पर स्क्रिप्ट के मुताबिक़ मुझे सड़क पर से एक लाल साड़ी में महिला के गुजरने का इंतज़ार करना था और उसके गुज़रते ही डायरेक्टर मुझे इशारे से पकड़ने को कहता.. तब मैं उसे बांहों में भर सकता था। मेरी बेचैनी अब मेरे चेहरे पर दिखने लग गई थी। मैं साँसें रोक कर और अपनी मुट्ठियाँ भींच कर इशारे का इंतज़ार कर रहा था। तभी सामने से लहराती हुई लाल साड़ी दिखी और डायरेक्टर ने इशारा कर दिया। इस बेचैनी ने मेरी आँखों में आंसू ला दिए थे और मेरा चेहरा लाल हो गया था। मैं उस इशारे के बाद कस कर डॉली को पकड़ लेता हूँ और हमारे होंठ मिल जाते हैं।

कट…

मैंने तो जैसे इस आवाज़ को सुना ही नहीं। अब तक मैं उसे चूमता ही रहता हूँ।

‘कट इट..’

इस बार थोड़ी तेज़ आवाज़ में थी।

मैं अलग हो जाता हूँ, कोमल आकर मेरे गले मिल कर मुझे बधाई देती है।

‘क्या शॉट दिया है तुमने यार.. सच में मज़ा आ गया।’

मैं अब भी डॉली को ही देख रहा था। वो अब तक तेज़-तेज़ साँसें ले रही थी।

शायद यह चुम्बन कुछ ज्यादा ही लम्बा हो गया था।

हम बातें ही कर रहे थे कि बारिश आ गई। सो मैं अपने वैन में आ गया। डॉली अब तक हमारे शॉट को स्क्रीन पर देख रही थी। थोड़ी देर में वैन का दरवाज़ा खुलता है और डॉली अन्दर आ जाती है।

सडॉली- तुम कमाल के एक्टर हो.. आज का शॉट सच में जबरदस्त था।

मैं- कमाल की अदाकारा तो आप हैं। कब इस दिल में खंज़र उतार देती हैं और कब इस पर मरहम लगाती हैं.. पता ही नहीं चलता।

डॉली- मतलब क्या है.. इस बात का?

मैंने बात बदलते हुए कहा- वो मैं आपके हुस्न की तारीफ़ कर रहा था। तुम्हें क्या लगा?

डॉली- कुछ नहीं।

पर उसकी आँखें कह रही थीं कि वो मेरे इशारे समझ गई है।

‘तुम्हें अपनी नई दोस्त से मिलने नहीं जाना है क्या?’

मैं उसे अपनी ओर खींचते हुए कहने लगा- क्यूँ.. कोई परेशानी है उनसे आपको..

डॉली- नहीं.. बस यह जानना था कि अब आपके दोस्तों की लिस्ट में इतनी बड़ी शख्शियतें हैं.. तो हमारे लिए वक़्त निकाल पाओगे?

मैंने उसके लबों को चूमते हुए कहा- अब यह हुस्न मुझे किसी और के लिए वक़्त निकालने की इजाजत दे… तब न..

तभी कोमल आई- आज पैक अप हो गया है। ये बारिस रात तक भी नहीं रुकने वाली है.. सो घर चलो.. जब बरसात थमेगी.. तब ही शूटिंग शुरू हो पाएगी।

मैं- ठीक है.. मैं जाता हूँ।

कोमल- कहाँ चल दिए आप..? अपना पता कहीं भूल तो नहीं गए?

मैं- किसी की प्यार भरी आँखें मुझे कुछ याद रहने दे तब न.. तुम चलो.. मैं आता हूँ। अब यह मत पूछना कि कब आओगे?

कोमल- ठीक है जी.. जैसा आप कहें।

मैं डॉली की कार में बैठ गया.. आज मैं ड्राइव कर रहा था।

डॉली- क्या हुआ? आज ड्राइव कर रहे हो।

मैं- तुम्हारे साथ दोनों हाथ फ्री रहने का भी फायदा नहीं है। वैसे भी मुझे अखबारों की सुर्खियाँ बनने का शौक नहीं है।

डॉली- तो एक्टिंग में क्यूँ आए। कुछ और बन जाते.. क्यूंकि यहाँ तो आपकी छींक भी.. सुर्खियाँ बनाने के लिए काफी है।

मैंने हंसते हुए कहा- अब कल की कल देखेंगे।

बरसात तेज़ हो रही थी और शीशे पर ओस की बूंदें जमनी शुरू हो गई थीं। मैंने गाड़ी को साइड में रोक दिया। क्यूंकि सामने कुछ दिख ही नहीं रहा था।

डॉली- गाड़ी क्यूँ रोक दी है.. आपके इरादे मुझे ठीक नहीं लग रहे हैं।

मैंने अपने होंठों पर हाथ फिराते हुए कहा- कुछ कहने की ज़रुरत है क्या? अब समझ भी जाओ।

फिर से हम गले मिल चुके थे.. हमारी साँसें अब तेज़ हो चली थीं।

मैंने खिड़की को थोड़ा सा खोल लिया। अब बारिश की बूंदें छिटक कर हमारे जिस्म पर पड़ रही थीं। हर बूंद हमारे अन्दर की आग में घी का काम कर रही थी। आज डॉली घर से भी लाल रंग की साड़ी में आई थी और यही लाल रंग मुझे तो पागल किए जा रहा था।

मैंने गाड़ी की पिछली सीट पर उसकी साड़ी को उतारना शुरू कर दिया। मैंने उसके बदन को चूमते हुए उसके हर कपड़े को अलग कर दिया और उन कपड़ों को आगे की सीट पर रख दिया। फिर मैंने साड़ी को रस्सी की तरह पकड़ा और डॉली को पलट के उसके हाथ बाँध दिए फिर साड़ी को उसकी गांड से ले जाते हुए उसकी गर्दन तक ले आया।

अब मैंने एक दरवाज़ा खोला और डॉली के सर को थोड़ा पीछे की ओर लटका दिया।

फिर मैंने अपने लण्ड को उसके मुँह में अन्दर तक घुसा दिया। अब जब जब वो हिलती.. तो साड़ी उसकी गांड और चूत दोनों पर रगड़ खाती।

अब हम जैसे एक सगीत की लय में बंध गए थे। मैं हाथों से साड़ी को कसता फिर ढीला छोड़ता.. उसी लय में डॉली अपनी कमर को हिला रही थी। फिर मैं अपने लंड को उसके एकदम गले तक पहुँचा देता।

आज बारिश की बूंदें भी अलग ही मज़ा दे रही थीं।

फिर मैंने उसकी गांड को अपनी ओर किया और साड़ी को उसकी कमर में लपेट दिया। अब मैं उसी को पकड़ कर उसकी गांड में अपना लंड अन्दर-बाहर कर रहा था।

मैंने साड़ी को कमर से खोल कर उसकी गर्दन में फंसा दिया और उसे सीधा करके चोदने लगा।

उसकी मखमली स्तनों पर अपने दांत गड़ाता और जब वो चिल्लाती तो उसके गर्दन के फंदे को कस देता।

ऐसे ही चोदता हुआ थोड़ी देर में मैं उसके ऊपर गिर पड़ा। अब मैं पूरी तरह से स्खलित हो चुका था। साड़ी तो गन्दी हो ही चुकी थी.. पर डॉली के पास अब उसे पहनने के अलावा और कोई चारा भी तो नहीं था।

फिर हम दोनों घर पहुँच गए और एक-दूसरे की बांहों में बाँहें डाल कर सो गए।

धीरे-धीरे वक़्त बीतता चला गया और मैं उसके प्यार में खोता चला गया। अब धीरे-धीरे मेरे दिल के हर ज़ख्म भी लगभग भरने लगे थे। जब भी मैं उसके साथ होता तो मैं हर पल को शिद्दत से जीता।

जब भी वो मुझसे दूर होती.. तो ऐसा लगता कि मैं उसके बिना कितना अधूरा हूँ।

उसने मुझे एक्टिंग की तमाम बारीकियाँ सिखाईं.. प्यार के एहसास को जीना सिखाया और शायद वो अपने होने का मुझे एहसास करा गई।

फिल्म धीरे-धीरे पूरी होती जा रही थी। अब मेरी एक्टिंग में भी ठहराव सा आ गया था। डॉली के साथ जुड़े मेरे दिल के रिश्ते ने हमारी ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री को भी दमदार बना दिया था। जो थोड़ी बहुत दिक्कत कांता के साथ के सीन्स में आती.. उसे भी डॉली की दी हुई ट्रेनिंग की वजह से मैंने बेहतर तरीके से निभाया।

अब तो बॉलीवुड के गलियारों में भी मेरी एक्टिंग के चर्चे हो रहे थे और साथ ही डॉली के साथ मेरे सम्बन्ध मुंबई के अखबारों में थोड़ी-थोड़ी जगह बनाने लग गए थे।

रोज की तरह आज भी मैं शूटिंग ख़त्म कर के डॉली के साथ घर को निकला।

मुझे अभी घर जाने का मन नहीं था। सो मैं डॉली के साथ समंदर किनारे चला गया। डॉली ने अपने चेहरे को ढक लिया और मैं तो अब तक सब के लिए अनजान ही था।

सो हम दोनों एक-दूसरे की बांहों में बांहें डाले समंदर किनारे पैदल चलने लगे।

 
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