• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

चली थी यार से चुदने अंकल ने चोद दिया complete

अब वो बड़े प्यार से सुपारा मेरी चूत में अन्दर करने लगे। सुपारे के चूत में अन्दर जाते ही मुझे फिर से दर्द होने लगा.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैं दर्द से कराहने लगी।

जीजू ने बड़े प्यार से एक तेज झटका मारा और पूरा लंड एक बार में मेरी चूत में अन्दर कर दिया।

अब दर्द असहनीय हो रहा था मगर चिल्ला भी नहीं सकती थी। जीजू मेरे होंठों को अपने होंठों से लॉक किए हुए थे और मेरी चूचियों को बेदर्दी से मसल रहे थे। साथ ही वो अपने भीमकाय लंड को मेरी चूत में आगे-पीछे किए जा रहे थे।

थोड़ी देर बाद दर्द कम हुआ और धीरे-धीरे मुझे मजा आने लगा।

अब जीजू ने अपनी स्पीड बढ़ा दी, मैं भी चुदाई की मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी और जीजू का जमकर साथ दे रही थी।

मुझे काफी मजा आने लगा था, मेरे मुँह से अपने आप कामुक आवाजें निकलने लगी थीं ‘आहह.. आओहहह..’

मैं सातवें आसमान पर थी। पहली बार मुझे चुदाई में इतनी ज्यादा मजा आ रहा था।

मैं जीजू से बोली- आह्ह.. फाड़ दो मेरी चूत को.. आह्ह.. भोसड़ा बना दो।

जीजू हचक कर मेरी चूत का भुरता बनाते रहे।

कुछ देर बाद मैं झड़ने को आ गई तो मैंने जीजू से बोला- और तेज जान.. और तेज.. अपनी साली को अपनी रंडी बना लो.. आह्ह.. मैं गई..।

यह बोलते-बोलते ही मैं झड़ गई।

मैंने झड़ते ही जीजू से बोला- आह्ह.. जीजू बस भी करो.. कितना चोदोगे।

उन्होंने मेरी बात को अनसुना करते हुए अपनी स्पीड और बढा़ दी।

अब मेरी चूत में जलन होने लगी थी। लेकिन जीजू रूक ही नहीं रहे थे। करीब 10-15 मिनट बाद उन्होंने मेरी चूत में गर्मा-गर्म ज्वालामुखी छोड़ दिया और मेरे ऊपर ऐसे ढेर हो गए जैसे मानो पड़ोसी देश की माँ चोद कर आए हों।

कुछ पल बाद मैंने जीजू को उठाया और अपने-आप को देखा, अभी भी मेरी चूत से वीर्य गिर रहा था।

मैं सोचने लगी कि अभी 12 घंटे पहले तक मैं अनछुई कन्या थी और अभी तक 3 अलग-अलग लंड ले चुकी हूँ। मैं पिछले 12 घंटों में पक्की चुदक्कड़ बन गई थी या यूँ कहें कि एक चालू रण्डी बन चुकी थी।

अब मैं उठी.. अपनी चूत साफ करके कपड़े पहन लिए। फिर जीजू उठे और बोले- सॉरी डार्लिंग.. मैं तुम्हारी चूत में ही झड़ गया.. लेकिन मैं भी क्या करता.. तुम हो ही इतनी हॉट कि मैं अपने आपको संभाल नहीं पाया और तुम्हारी चूत में ही झड़ गया।

फिर जीजू मुझे एक टैबलेट का पैकेट दिया और बोले- यह रात को खा लेना कुछ नहीं होगा।

मैं बोली- अब मैं जा रही हूँ.. नहीं तो मॉम टेंशन में आ जाएंगी।

जीजू नंगे ही खड़े हो गए और मुझे गले से लगाकर बोले- यार तुम्हारा ये अहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूँगा.. तुमने इस सुहागसेज को खाली न रहने दिया और मुझे तुम जैसी हॉट लड़की के साथ सुहागदिन मनाने का मौका मिला।

मैं मन ही मन सोच रही थी कि शायद यह सुहागसेज मेरी चूत के लिए ही सजाई गई थी। इसलिए सुहागरात अंकल के साथ और सुहागसेज अपनी दोस्त के पति के साथ साझा कर ली।

जीजू ने मुझे लम्बा किस किया और मैं वहाँ से चल दी।

दोस्तो, मुझे उम्मीद है कि आप को मेरी यह सत्य कथा अच्छी लगी होगी।

अब आगे मैं किस-किस के साथ चुदी.. यह मैं अगली कहानी में बताऊँगी। आप लोगों को यह कहानी कैसी लगी.. जरूर बताएं।
 


ये दिवाली आपके जीवन

में खुशियों की बरसात

लाए,

धन और शौहरत की

बौछार करे,

दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं!
 
मैं सीधे कहानी पर आती हूँ। जैसा आप लोगों ने मेरी पिछली कहानियों में मेरी चुदाई के बारे में पढ़ा कि कैसे मैंने 24 घंटे के अंदर जाने अनजाने में तीन लंडों को अपने अंदर समाहित कर लिया। अब आगे कितनों के लंडों की मालकिन बनी, यह मैं आपको बताती जाऊँगी।

बार बार चूत चुदाई के बाद जैसे मैं और खिल सी गई, पहले से और ज्यादा हॉट हो गई, मेरी चुची पहले से ज्यादा फूल गई थी जैसे

किसी पेड़ पर दो रस भरे आम लगे हों और जिसे देखो वो चूसना चाहते हैं। जब चलती तो गांड ऐसे मटकती जैसे की गांड न हो दो बड़े तरबूज़ किसी ने बांध दिए हों।

पहले मैं यह बात नहीं मानती थी लेकिन एक बार मेरे बॉयफ्रेंड ने मेरी मटकती हुई गांड की वीडियो रिकॉर्ड करके दिखाई, उसे देख कर मैं खुद उत्तेजित हो गई।

तो आप लोग ही बताओ कि मेरी चाल देखकर लोगों पर क्या बीतती होगी। इसलिए मैं अपनी हॉट जवानी का पूरा उपयोग लोगों में आग लगाने में करती हूँ।

मैं ज्यादातर कसी हुई टॉप और छोटी सी स्कर्ट या बिल्कुल छोटी सी लोअर पहन कर चलती हूँ, मैं हमेशा कोशिश करती हूँ कि ब्रा पेंटी न पहनूँ जिससे मेरी चुची और गांड बहुत ज्यादा लचकती हैं और लोग देखकर बिल्कुल गर्म हो जाते हैं, मुझ पर गन्दे गन्दे कमेन्ट करते जिन्हें सुन कर मुझे काफी मजा आता है।

कोई कहता ‘काश एक रात के लिए मिल जाती…’

तो कोई कहता ‘सिर्फ एक बार इन नंगी जांघों पर एक चुम्मी लेने दे…’

तो कोई कहता ‘यार जब ये बाहर इतने छोटे कपड़े पहनती है तो घर में तो नंगी ही रहती होगी! पता नहीं इसका बाप और भाई कैसे बर्दाश्त करते होंगे।’

तभी उन्हीं में से एक आदमी बोला- बर्दाश्त क्या करते होंगे भाई, वो लोग तो खुद चोदते होंगे।

ऐसी बाते सुनकर मैं उत्तेजित हो जाती हूँ।

वैसे मैं आप लोगों को बता दूँ कि मैं घर में एकदम संस्कारी लड़की बनकर रहती हूँ। घर में सलवार सूट या जीन्स कुर्ती पहनती हूँ और यही सब पहनकर घर से निकलती हूँ।

कॉलेज जाते वक्त मैं रास्ते में दोस्त के यहाँ या पब्लिक टॉयलेट में जाकर कपड़े चेंज कर लेती थी और कॉलेज एकदम हॉट मॉल बनकर पहुँचती थी। मुझ पे कॉलेज के लड़के, स्टाफ यहाँ तक कि सारे टीचर भी मुझ पर फुल लाइन मारते थे और मैं सारे टीचरों के लाइन का जवाब स्माइल कर के देती थी।

सारे टीचर मौका मिलते ही मुझे कोई भी बहाने से टच करते रहते थे और मैं उन लोगों को फुल ओपन लाइन देती थी।

मेरी हॉट और कातिल अदा को देखकर मेरे इंस्टीट्यूट में मुझे रेस्पेशनिस्ट का जॉब ऑफर हुआ लेकिन मैंने मना कर दिया क्योंकि मुझे उस टाइम पैसों में कोई इंटरेस्ट नहीं था, मुझे तो बस अपनी जवानी को एन्जॉय करना था किसी भी कीमत पर!

आप लोगों को पता ही है कि मैं अपने बॉयफ्रेंड से कैसे बीच सड़क चुदी, उसके बाद हम एकदम खुल से गए थे, जब भी मौका मिलता, वो मेरी जबरदस्त चुदाई करता था। हमारी चुदाई के किस्से पूरे कॉलेज में मशहूर थे।

मेरा एक ग्रुप था जिसमें कुल 4 लड़के और 4 लड़कियां थी, यानि 4 कपल, ग्रुप के सारे लोग अपने बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड से खुश थे, सब एक दूसरे को बहुत ज्यादा कॉपरेट करते थे और खुल कर चुदते चुदवाते थे।

हम लोगों ने कितनी बार अपनी इंस्टीट्यूट में चुदाई करवाई है, इंस्टीट्यूट की छत पर एक कमरा था जिसमें कोई आता जाता नहीं था, कभी कभार कुछ लड़के स्मोक करने चले जाते थे।

वहीं पर हम लोग मौका देख कर शुरू हो जाते थे। जब एक कपल रूम में होता तो तीन कपल रूम के बाहर अपनी बारी की इंतज़ार करते। या यूँ कहें कि उसकी निगरानी करते कि कोई आ न जाये! क्योंकि जिस रूम में हम चुदाई करते थे उसकी खिड़की बाहर की ओर थी जो बीच छत पर खुलती थी। खिड़की में सिर्फ पारदर्शी काँच लगे थे जिससे अंदर का सारा नज़ारा साफ साफ दिखाई देता था।

इसलिए एक कपल अंदर चुदाई करता और बाकी तीन कपल बाहर निगरानी करते!

ऐसे ही मस्ती भरी हमारी लाइफ चल रही थी। मैं लगभग रोज चुदाई करवाती थी, कभी कभी तो दिन में 2-3 बार भी चुद लेती थी, जब भी मौका मिलता, हम शुरू हो जाते थे।

एक बार मैं और मेरा बॉयफ्रेंड संतोष इंस्टिट्यूट जल्दी पहुँच गये। उस दिन मैं पिंक टॉप और छोटी सी व्हाइट कलर की लोअर बिना ब्रा पेंटी के पहने थी।

हम लोग के पहुँचते ही बहुत तेज बारिश शुरू हो गई। इंस्टिट्यूट में कोई भी नहीं आया था सिवाय सफाई कर्मचारी के!

मैं और संतोष क्लास में अकेले बैठ गए या यूँ कहें कि बोर रहे थे। आप लोगों को पता है जब दो विपरीत सेक्स के जवान जिस्म अकेले हों तो क्या होता है। हम एक दूसरे को छेड़ने लगे, छेड़ते छेड़ते पता नहीं कब मैं संतोष के गोद में चली गई।

हम दोनों एकदम गर्म हो गए थे।

संतोष बोला- मेरी जान, छत पर चलो, आगे का काम वहीं करेंगे।

मैं इतराते हुए बोली- आगे का कौन सा काम बेबी?

तो संतोष मेरी चूत को मसलते हुए बोला- रानी आज इसकी अच्छे से सर्विसिंग करूँगा।

 
मैं बोली- अच्छा इसकी सर्विसिंग कैसे करोगे?

संतोष ने मेरा हाथ पकड़ा, अपने जीन्स में घुसा कर बोला- इस औज़ार से!

फिर बोला- पसंद आया औज़ार? इसी से सर्विसिंग करूँगा रानी!

मैं बोली- इस औज़ार से तो मैं पूरे दिन सर्विसिंग करवा सकती हूँ लेकिन एक दिक्कत है।

संतोष बोला- क्या दिक्कत है?

मैं संतोष को चुम्मी लेते हुए बोली- आज मैं पीरियड में हूँ। तुम अपने औज़ार को आज थोड़ा आराम दो। कल मेरी इस प्यारी सी चूत की ढंग से सर्विसिंग करना!

यह बात सुनते ही वो बोला- यार कितने दिनों से नहीं चोद रहा हूँ इस पीरियड के चक्कर में… तुम बोली थी कि आज ख़त्म हो जायेगी। इसलिए आज इंस्टिट्यूट जल्दी आया कि आज तुम्हारी जबर्दस्त चुदाई करूँगा। और तुम्हारा रोज पीरियड हो जाता है।

यह बात सुनकर मैं गुस्सा हो गई, बोली- क्या मैं जान बूझ कर पीरियड बुलाती हूँ। यकीन नहीं है तो लोअर खोलकर देख लो।

फिर वो प्यार से बोला- नहीं मेरी जान, मुझे तुम पर विश्वास है।

और मेरे गले लग गया, मेरी गालों को चूमने लगा, मेरे लिप्स चूसने लगा और मेरी चूचियों को कस कर मसलने लगा।

मैं भी धीरे-धीरे गर्माने लगी, वो मेरी गांड मसलने लगा और बोला- बेबी, आज मूड है, एक बार करने दो ना?

मैं बोली- यार पीरियड में हूँ।

तो संतोष बोला- मैं चूत की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं तो इसकी बात कर रहा हूँ।

वो मेरी गांड को दबाते हुए बोला।

मैं बोली- बिल्कुल नहीं, गांड के बारे में सोचना भी मत… मेरी इतनी प्यारी गांड लहू लुहान हो जाती है।

हालांकि मैं भी गर्म हो गई थी, मैं भी चुदना चाहती थी लेकिन गांड में बहुत ज्यादा दर्द होता है इसलिए डर रही थी।

फिर वो मेरे होठों को धीरे-धीरे खा रहा था और मुझे गांड मरवाने के लिए मनाने लगा, कहने लगा- मैं आराम से चोदूँगा, दर्द नहीं होने दूँगा, अगर दर्द हुआ भी तो थोड़ा ही होगा। मेरे लिए तुम थोड़ा दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकती?

मैं भी कुछ देर में मान गई, बोली- ठीक है, बर्दाश्त तो कर लूँगी लेकिन चोदोगे कहाँ?

यह बात सुनते ही उसने मुझे कसकर गले से लगा लिया, बोला- वहीं जहाँ हम रोज दिन में सुहागरात मनाते हैं।

मैं बोली- छत पर?

वो बोला- बिल्कुल!

मैं बोली- यार, आज तो कोई निगरानी करने के लिए भी नहीं है। अगर कोई आ गया तो?

संतोष बोला- यार, इतनी तेज बारिश में कोई पढ़ने आया ही नहीं तो हमें कौन देखेगा।

मैंने सोचा कि यह सही कह रहा है और मैं उसके साथ ऊपर चली गई।

ऊपर जाते ही जैसे वो पागल हो गया, मेरी चुची को टॉप पर से ही खाने लगा।

मैं बोली- आराम से… मैं कहीं भागी नहीं जा रही!

फिर उसने मेरा टॉप उतार कर एक साइड रखा। टॉप निकलते ही मेरी दोनों रसभरी चुची बाहर निकल आई जिन्हें देख कर वो चूमने, काटने लगा।

मुझे दर्द हो रहा था लेकिन मजा भी आ रहा था, मेरे मुंह से ‘आआआहह आअहह…’ की आवाज़ निकल रही थी, मैं भी उसका जमकर साथ दे रही थी।

15-20 मिनट ऐसे ही चलता रहा। फिर मैं बोली- आगे भी कुछ करना है या नहीं?

वो बोला- क्यों नहीं रानी, आज तो तेरी गांड में अच्छे से मोबिल ऑयल डालूँगा।

मैं सुनकर चौंक गई कि ये क्या बोल रहा है। फिर समझ गई कि यह लंड के मोबिल ऑयल की बात कर रहा है।

वो अपने घुटनों पर बैठ गया और मेरी लोअर खोलने लगा।

मैं बोली- पूरा मत खोलना, चूतरों से थोड़ी सी नीचे सरका कर चोद लो।

वो मान गया और धीरे से मेरी लोअर को खोलकर घुटनों तक सरका दिया।

लोअर खुलते ही मेरी संगमरमरी अमानत नंगी हो गई, वो बोला- यार तुम्हारे कपड़े उतारने में मजा आ जाता है। और वो भी बिना ब्रा पेंटी के!

यह कहकर वो मेरी फूली हुई गांड को अपने दांतों से जख्मी करने लगा।

मैंने भी उसके लंड को बाहर निकाल लिया, मैं उसका साथ खुलकर दे रही थी, उसके लंड को ऐसे बेरहमी से मसल रही थी जैसे वो बेरहम होकर मेरी चुची मसलता है।

मैं लंड को जितना मसलती, उतना ही उसका लंड कड़क और लंबा हो रहा था। मैं बोली- यार ये तो लंबा होता जा रहा है। मैं गांड में इतना बड़ा नहीं लूँगी। मेरी गांड फट जायेगी, आज छोड़ दो। कल तुम मेरी चूत ही मर लेना!

लेकिन वो माना नहीं और मेरी बातों को अनसुना करते हुए मुझे हर तरीके से मसल रहा था।

मैं भी एकदम गर्म हो गई थी, मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी जो असहनीय हो रही थी, मैं बोली- जो करना है, जल्दी करो न बेबी, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

मेरे इतना बोलते ही वो अपना लंड मेरी गांड पर रखकर सहलाने लगा और अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। मेरी तो डर के मारे हालत खराब थी और अन्दर से चुदने का जोश भी था।

तभी वो मुझे टेबल पे झुकने को बोला और अपने लंड को मेरी गांड के छेद के पास रखकर धक्का मारा। गांड टाइट होने की वजह से लंड अंदर नहीं गया।

मैं बोली- यार मेरी गांड फाड़ने पे क्यूँ लगे हो, पहले अपने लंड पर कुछ लगा लो,

 
फिर डालना!

तब संतोष बोला- यार, अभी कहाँ से क्रीम लाऊँ? आज ऐसे ही चुद लो।

मैंने मना कर दिया, मैं बोली- ऐसे नहीं यार, मेरी गांड फट जायेगी।

तो वो बोला- यार इस बारिश में क्रीम कहाँ से लाऊँ?

फिर मुझे याद आया कि मेरे पर्स में क्रीम होगी, उसे कहा तो उसने मेरा पर्स को खोलकर ढूंढना शुरू कर दिया लेकिन क्रीम थी ही नहीं।

तभी उसे लिप गार्ड मिल गया, और बोला- आज इस को लगाता हूँ।

मैं बोली- यार इससे मेरी गांड चिकनी नही होगी।

तो संतोष बोला- हो जायेगी मेरी जान, मैं सब सम्भाल लूँगा।

मैं बोली- तुम क्या सम्भाल लोगे गांड तो मेरी फटेगी ना!

इतने में उसने लिप गार्ड की पूरी ट्यूब मेरी गांड पर निकाल दी और लंड डालने की कोशिश करने लगा, मेरी कमर को पकड़ कर जोरदार धक्का मारा, लंड आधा अन्दर चली गया, मेरी तो दर्द से आवाज़ निकलनी बंद हो गई।

फिर मैं जोर से चिल्लाई- ओह्ह हहहह माँ उम्म्ह… अहह… हय… याह… मेरी गांड!

इतना कह कर जोर से रोने लगी और बोली- मेरी गांड से लंड निकालो!

लेकिन वो तो जैसे बहरा हो गया था, मेरी बात तो जैसे सुन ही नहीं रहा हो।

इतने में उसने फिर एक बार जोरदार झटका मारा, इस बार लंड पूरा गांड में घुस गया, मेरी तो जैसे जान निकल गई हो, मैं जोर-जोर से रोने लगी, बोल रही थी- प्लीज् छोड़ दो, नहीं तो मर जाऊँगी।

लेकिन उसने तो जैसे ना सुनने की कसम खाई हो, वो मुझे जोड़ से पकड़ कर लंड आगे पीछे करने लगा और मैं दर्द से कराह रही थीं और बोले जा रही थी- प्लीज छोड़ दो!

वो अपने धुन में मेरी गांड मारे जा रहा था।

करीब 10 मिनट तक वो आगे पीछे करता रहा, उसके बाद मुझे भी थोड़ा मजा आना शुरू हुआ, फिर मैं भी गांड उचका उचका कर अपनी गांड की सर्विसिंग करवाने लगी।

पता ही नहीं चला कब दर्द भरी चीख मादक स्वर में बदल गई और मैं ना जाने कैसे बोलने लगी- और तेज, और जोर से, फाड़ दो आज इस गांड को!

हालांकि दर्द अभी भी बहुत हो रहा थी लेकिन मैं पूरी तरह मदहोश हो गई थी, ऐसा लग रहा था कि मैं किसी और दुनिया में हूँ।

और संतोष तो मेरे से भी ज्यादा पागल हो गया था, वो तो नॉन स्टॉप मशीन की तरह मेरी गांड ठोके जा रहा था, मैं भी हर धक्के को एन्जॉय कर रही थी।

हम दोनों एक दूसरे में पूरी तरह खोये हुए थे, काफ़ी देर तक ऐसे ही जोरदार चुदाई चली, उसके बाद मेरा जोश शांत हो गया लेकिन संतोष अभी भी मूड में था, उसने मेरे झड़ने के कई मिनट बाद मेरे गांड में ही पूरा वीर्य भर दिया और बोला- मेरी रानी, लो आज मैंने तुम्हारी इस प्यारी गांड की अच्छे से सर्विसिंग करके फ्रेश मोबिल ऑयल डाल दिया, अब अच्छे से माइलेज देगी।

मैं बोली- अच्छा इतना ज्यादा मोबिल ऑयल डाला जाता है। ऐसा लग रहा है जैसे मेरी गांड में बाढ़ आ गई हो।

और हम हँसने लगे।

पूरा वीर्य मेरी जाँघों से रिसते हुए मेरी लोअर में जाकर गिर गया। मैं जैसे ही सीधी हुई, मुझे दर्द बहुत तेज होने लगा, अब मैं ठीक ढंग से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी तो मैं चलकर घर कैसे जा पाती।

यह मैं आपको अगली कहानी में बताऊँगी कि मैं घर कैसे पहुँची और मेरे साथ क्या क्या हुआ, कितने लोगों ने मेरी चुदाई की और कितने लोगों ने नयन सुख लिए।

आज के लिए इतना ही!

अब मैं आप लोगों से आग्रह करती हूँ कि मेरी चुची को छोड़ दें, अब मैं घर जाऊँगी।

यह क्या… आप लोगों को मैंने मना किया था ना कि कोई दांत से नहीं काटेगा। पर आप लोग मेरी एक बात भी नहीं मानते, मेरी पूरी चुची पर इतने दाँत के निशान दे दिए।

और मैं बोली थी कि मेरे बेटे को भी थोड़ा दूध पीने दीजियेगा पर आप लोग तो खुद ही सारा दूध पी गए। अब मैं अपने बेटे को क्या पिलाऊँगी और अपने पति को क्या बोलूंगी कि ये इतने सारे निशान कहाँ से आये?

अगर आप लोगों को कहानी पसंद आई हो तो मुझे कमेन्ट करके जरूर बताएँ।
 
दोस्तो यह कहानी जब मैंने शुरू की थी तब मुझे लगा था कि इसे 10 या 12 अपडेट में ख़तम कर दूंगा पर अब यह मुमकिन नही यह कहानी और आगे तक जायेगी मेरी एडमिन से विनती है अगर हो सके तो इस कहानी को इस फोरम से हिंदी फोरम में शिफ्ट करे

.......आपका अपना सलील

 
एडमिन का बहोत बहोत धन्यवाद इस कहानी को इस फोरम में लाने के लिये दोस्तो कहानी का मजा लीजिये
 
आप सभी पाठकों को प्यार भरा नमस्कार! मैं मधु आप सभी पाठको का तहे दिल से स्वागत करती हूँ।

मैं आज बहुत खुश हूँ क्योंकि आप लोगों ने जो मेरी चूचियों को खूब मसला जिससे मैं काफी गर्म हो गई और उस रात अपने पति से भी जी भर के चुदाई करवाई।

लेकिन आपकी वजह से मेरे बेटे को डिब्बे वाला दूध पीना पड़ा, आज मैं आपको दूध पीने नहीं दूँगी, नहीं तो आज भी मेरा बेटा भूखा रह जाएगा।

अब मैं अपनी सच्ची आत्म कथा पर आती हूँ और अपनी आपबीती को आगे बढ़ाती हूँ।

पिछली कहानी में बताया था मैंने कि किस तरह मैंने अपने बॉयफ्रेंड से इंस्टीट्यूट के छत पर गांड मरवाई और मेरे बॉयफ्रेंड ने किस तरह मेरी गांड में वीर्य की बाढ़ ला दी और सारा वीर्य मेरी व्हाइट लोअर में जा गिरा।

जब मैं खड़ी हुई तो गांड तो दर्द से फटी जा रही थी, ठीक ढंग से खड़े भी नहीं हो पा रही थी तो घर कैसे जाती। मैं दर्द से कराह रही थी और संतोष ने मेरे गाल को चूमते हुए कहा- थैंक यू बेबी!

तुम्हारी गांड मार कर मजा आ गया।

तो मैं थोड़े गुस्से में बोली- तुम्हारे मजे के चक्कर में मेरी हाल ख़राब हो गई है, मैं अब ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही तो चल कर घर कैसे जाऊंगी। और तुमने सारा वीर्य मेरे लोअर में डाल दिया, अब मैं क्या पहन कर घर जाऊँगी।

संतोष ने मुझे अच्छे से लोअर पहनाया वीर्य सहित… मुझे बैठाया और बोला- तुम टेंशन मत लो, मैं अपने बाइक पर तुम्हें घर छोड़ दूँगा।

फिर मैं बोली- क्यों नहीं, चलो, मेरे घर मेरे मम्मी पापा तुम्हें मार कर निकाल देंगे। तुम्हें पता है मैं अपने घर वालों की नज़र में एकदम शरीफ और संस्कारी लड़की हूँ।

संतोष जोर से हँसा और बोला- संस्कारी और तुम? जो रोज कहीं भी चुद लेती हो।

मैं भी हँस कर बोली- अच्छा ये बात हैं, तो कल से चोदते रहना!

फिर संतोष बोला- चलो आज तुम्हारे घर चलता हूँ और तुम्हारे मम्मी पापा को बताता हूँ कि किस तरह उसकी बेटी की गांड में मैंने अपना माल डाला।

ऐसे ही हँसी मजाक करते-करते 5 बज गये, अब घर जाने का टाइम हो गया था, बारिश भी रुक गई थी और गांड के दर्द में भी आराम लग रहा था लेकिन चलने में अभी भी दिक्कत हो रही थी, लंगड़ा लंगड़ा कर चल रही थी।

संतोष मजाक करते हुए बोला- बेबी, अभी भी दर्द हो रहा है क्या?

मैं बोली- और नहीं तो क्या?

फिर मैं लंगड़ाते लंगड़ाते नीचे गई, तब एक लड़के की नज़र मुझपे पड़ी। वो शायद जब हम लोग चुद रहे थे, तब आया होगा।

वो मेरी लोअर को घूरे जा रहा था, मैं समझ गई कि यह वीर्य के निशान को घूर रहा है।

मेरी गांड घूरते हुए वह संतोष को धीरे से बोला- लगता है कि आज आपने मैडम की पिछले खजाने पर ही हमला बोला है?

फिर संतोष थोड़ा हँसा और बोला- क्या करूँ यार, मजबूरी इंसान से जो न करवाये।

और दोनों हंसने लगे।

तभी संतोष के घर से फ़ोन आया कि उसकी माँ की तबियत खराब हो गई है तो वह मुझे छोड़कर चला गया।

मैं भी अकेली घर जाने लगी, तभी अचानक वो लड़का बोला- मैडम आपको कोई ढूंढने आया था।

मैं बोली- कौन था?

वो बोला- पता नहीं, होगा कोई मेरे जैसा दीवाना!

मैं बोली- तुम मेरे दीवाने कब से हो?

तो वह बोला- आपका दीवाना तो सारा जमाना है।

मैं बोली- अच्छी तारीफ कर लेते हो।

तब वह लड़का बोला- मैं तो बहुत कुछ अच्छा कर लेता हूँ, आप कभी मौका तो दो?

तो मैं बोली- आज तो बहुत बोल रहे हो?

मैं भी मजे ले रही थी।

फिर वह लड़का बोला- मैडम, मेरी एक ख्वाहिश है, अगर आप चाहें तो आज मेरी ख्वाहिश पूरी हो सकती है।

मैं बोली- क्या है? बताओ?

तब वह बोला- बस एक बार मैं आपकी गांड को छूना चाहता हूँ!

मैं तो सुनकर अवाक रह गई कि यह क्या बोल रहा है।

मैं गुस्से में बोली- तुम पागल हो गए क्या? अभी तुम्हारी उम्र पढ़ने की है, ये करने की नहीं, अभी पढ़ाई में ध्यान दो।

फिर वो बोला- आपसे ध्यान हटेगा, तभी तो पढ़ाई पर ध्यान दूँगा।

मैं बोली- अभी तुम बच्चे हो। यह बड़ों का काम है।

वो बोला- एक बार मौका देकर देखो, संतोष भैया से ज्यादा खुश रखूँगा।

मैं तो ये सब बातें सुनकर ही दंग थी कि यह भी मेरे हुस्न का दीवाना है।

मैं बोली- अच्छा कैसे खुश रखोगे?

फिर वो अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए बोला- मुझे पता है कि आप कैसे खुश होती हो।

मैंने उसके पैंट के ऊपर देखा तो लंड एकदम भयानक रूप लिए था, मैंने सोचा कि यहाँ से निकल जाना अच्छा होगा, नहीं तो और दिक्कत हो जायेगी।

इसलिए मैं निकलने लगी।

तो वो लड़का गिड़गिड़ाने लगा- प्लीज मैडम, बस एक बार अपनी गांड दिखा दो।

मैं अनसुना करते हुए आगे निकल गई।

तभी वो फिर मेरे आगे आया और बोला- मैडम प्लीज एक बार सिर्फ अपनी गांड दिखा दो। इसके बाद मैं कभी नहीं कुछ मांगूंगा।

और वो गिड़गिड़ाने लगा।

फिर वो बोला- वैसे भी आप संतोष भैया से तो गांड मरवाई ही हो, मुझे सिर्फ एक बार दर्शन करवा दो।

मैं बोली- तुम्हें कैसे पता कि मैंने संतोष से गांड मरवाई?

आज के लिए इतना ही… इसके आगे की कहानी जल्दी ही आप लोगों को बताऊंगी। तब तक के लिए आप लोगों को प्यार भरा नमस्कार!

 
फिर वो बोला- वैसे भी आप संतोष भैया से तो गांड मरवाई ही हो, मुझे सिर्फ एक बार दर्शन करवा दो।मैं बोली- तुम्हें कैसे पता कि मैंने संतोष से गांड मरवाई?तो वो बोला- मैडम, आपकी लोअर आपकी कहानी बयां कर रही है।मैं जान बूझ कर इतराते हुए बोली- मतलब?तो वो बोला- मैडम, भैया के वीर्य का निशान अभी भी आपकी लोअर में है।मैं बोली- तुम अब शादी कर लो।और मैं जाने लगी।

लेकिन उसने मुझे फिर रोक लिया, बोला- प्लीज मैडम, सिर्फ एक बार देखने दो।वो बहुत ज्यादा गिड़गिड़ाने लगा तो मैंने सोचा कि चलो दिखा देती हूँ, वैसे भी 2 अनजान लोगों से चुद चुकी हूँ। यह तो सिर्फ देखना चाहता है।मैं थोड़ी से नखरा करते हुए बोली- अगर संतोष को यह बात पता चल गई तो जानते हो क्या होगा?तब वो बोला- कुछ नहीं होगा मैडम, वो तो रोज आपको चोद कर आता है और हम लोगों को पूरी सेक्सी स्टोरी बताता है।मैं बोली- मुझे बेवकूफ समझते हो क्या, संतोष ऐसा नहीं है।

फिर वो मुझे 2-3 बातें ऐसी बताई जिन्हें सुनकर मेरे होश उड़ गए क्योंकि वो बातें सर्फ मुझे और संतोष को ही पता थी।मुझे यह सुन कर काफी दुखः हुआ।मैंने सोचा कि जब यह सब कुछ जानता ही है तो दिखा ही देती हूँ।

फिर वह बोला- मैडम, सिर्फ एक बार दिखा दो।मैं मान गई और बोली- ठीक है लेकिन किसी को बताना नहीं!

यह बात सुनते ही जैसे उसकी लॉटरी निकल गई, वो बोला- मैडम, मैं आपके बॉयफ्रेंड जैसा नहीं हूँ।और मुझे बड़े ही आदर से अंदर चलने को बोला।मैं बोली- यहाँ नहीं बच्चे… ऊपर चलो।वो बोला- मैडम मेरा नाम राजीव है, बच्चा मत बोलो!

मैं बोली- अच्छा तो बच्चे नहीं हो?तो वह बोला- यह बच्चा 18 का हो चुका है, कभी इस बच्चे को एक मौका देकर देखो, अपने बॉयफ्रेंड को भूल जाओगी।मैं हँसती हुई बोली- अच्छा ऐसी बात है? तब तो एक बार ट्राई करना पड़ेगा इस बच्चे को!

वो बोला- एक मौका दो मैडम, पूरी तरह से खुश कर दूँगा।मैं बोली- ठीक है, सोचूँगी!तब तक हम लोग ऊपर के कमरे में पहुँच गए।

मैं बोली- इससे पहले भी किसी के साथ ये सब किया है?वो बोला- मैडम, 2 को चोद चुका हूँ।मैं बोली- क्या बात है! इतनी छोटी उम्र में 2 की ले ली?वो बोला- मैडम 2 की ले ली और तीसरी की तैयारी कर रहा हूँ।और हँसने लगा।

फिर बोला- मैडम, आप बुरा न मानें तो एक बात बोलूँ?मैं बोली- बिल्कुल बोलो?मुझे भी अब उससे बात करने में मजा आने लगा।‘आप अगर आज्ञा दें तो ये बच्चा आपके शरीर से 2 कपड़े हटाना चाहता है।

मैंने सोचा कि लोअर और पेंटी सोच रहा होगा तो मैंने भी 2 कपड़े खोलने की आज्ञा दे दी और बोली- जल्दी खोल के देख लो, मुझे देर हो रही है।और मैं बोली- मुझे मैडम मत बोलो, मेरा नाम मधु है।वो बोला- मैं आपसे छोटा हूँ, नाम से कैसे बुला सकता हूँ?मैं बोली- काम तो बड़े वाले कर रहे हो… और छोटे हो?फिर वो बोला- मैं आपको जानू बुलाऊँ?मैं बोली- काफी बड़े हो गए हो।मैं बोली- जो बोलना है बोलो लेकिन जल्दी करो।वो बोला- जो आज्ञा जानू!

वह मेरे पास आ गया और मेरा टॉप खोलने लगा।मैं बोली- यह क्या कर रहे हो? गांड देखने को कहा था ना, तो टॉप क्यूँ खोलने की कोशिश कर रहे हो?राजीव बोला- जानू, मैंने बोला था ना, 2 कपड़े खोलूँगा और तुमने आज्ञा भी दी थी, मुझे उतारने दो।मैं बोली- ठीक है लेकिन सर्फ 2 कपड़े… अगर ये उतारने के बाद गांड नहीं दिखी तो फिर मैं नहीं दिखाऊंगी।फिर वो बोला- मेरी जान, तुम मुझे 2 कपड़े उतारने तो दो।

मैं आज्ञा देकर तो फंस गई थी क्योंकि मैंने तो कुछ और समझ कर हाँ कर दी थी। उसे क्या पता मेरे तन पर सिर्फ 2 ही कपड़े थे। लेकिन शायद वो पहले से जानता था कि मैं सिर्फ लोअर और टॉप ही पहने हूँ। तभी उसने मेरे से ऐसी रिक्वेस्ट की।खैर अब सोचने का क्या फायदा… जो बोलना था वो तो बोल दिया, अब तो सिर्फ होना बाकी था।वो बोला- अब मैं उतार लूँ आपके 2 कपड़े?

मैंने सर हिला कर सहमति दे दी।

फिर उसने मेरी टॉप को नीचे से पकड़ा, एक झटके में उतार दिया और मेरी दोनों जख्मी और रसभरी चूचियाँ उछल कर बाहर आ गई जिन्हें देखकर उसकी आँखें चौन्धिया गई और वो मसलने के लिए आगे बढ़ा।मैंने उसे रोका, बोली- नहीं… छूने की बात नहीं हुई थी, सिर्फ नयन सुख लो।वो भी अपना मन ममोस कर रह गया- कोई बात नहीं, मेरे लिए यही बहुत है कि मैं अपनी ड्रीम गर्ल को इस रूप में देख रहा हूँ।

फिर वो नीचे बैठ गया और मेरी लोअर खोल कर नीचे करने लगा।मैं बोली- रहने दो, गांड तो नंगी हो गई।फिर वो बोला- मैं 2 कपड़े बोला हूँ, मुझे 2 कपड़े पूरी तरह से खोलने दो।मैं कुछ नहीं बोली।

फिर वो बोला- देखा जानू, 2 कपड़े ही उतार कर मैंने तुम्हें पूरी नंगी देख लिया।यह बोलने के साथ ही उसने मेरे लोअर को मेरे पैरों से निकाल दिया।

मैं बोली- तुम जानते थे कि मैं ब्रा पेंटी नहीं पहने हूँ।तो वो बोला- बिल्कुल जानता थाजानू… मैं तुम्हें रोज देखता हूँ और तुम कभी कभी ही ब्रा पेंटी पहनकर आती हो।

अब मैं ऐसे इंसान के सामने एकदम नंगी खड़ी थी जिसे मैं 1 घंटे पहले तक जानती भी नहीं थी… वो मुझे खा जाने वाली नज़र से घूरे जा रहा था।मैं बोली- यार, मुझे तो तुमने नंगी कर के मेरी चुची, चुत, गांड सब देख लिए। अब जरा अपना भी तो लंड दिखाओ। मैं भी तो देखूँ कि मैं जिसके लिए नंगी हुई, उसकी बन्दूक में जान है या नहीं?

मेरे इतना बोलते ही वो तुरन्त पूरी तरह से नंगा हो गया, उसका लंड वाकयी में उसकी उम्र से बहुत बड़ा था, एकदम संतोष की तरह था 7-8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा!मैं तो देखती ही रह गई।

 
मैं बोली- तुम जानते थे कि मैं ब्रा पेंटी नहीं पहने हूँ।तो वो बोला- बिल्कुल जानता थाजानू… मैं तुम्हें रोज देखता हूँ और तुम कभी कभी ही ब्रा पेंटी पहनकर आती हो।

अब मैं ऐसे इंसान के सामने एकदम नंगी खड़ी थी जिसे मैं 1 घंटे पहले तक जानती भी नहीं थी… वो मुझे खा जाने वाली नज़र से घूरे जा रहा था।मैं बोली- यार, मुझे तो तुमने नंगी कर के मेरी चुची, चुत, गांड सब देख लिए। अब जरा अपना भी तो लंड दिखाओ। मैं भी तो देखूँ कि मैं जिसके लिए नंगी हुई, उसकी बन्दूक में जान है या नहीं?

मेरे इतना बोलते ही वो तुरन्त पूरी तरह से नंगा हो गया, उसका लंड वाकयी में उसकी उम्र से बहुत बड़ा था, एकदम संतोष की तरह था 7-8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा!मैं तो देखती ही रह गई।

वो बोला- क्या हुआ जानू, भूल गई न अपने बॉयफ्रेंड का लंड? एक बार अगर तुम मौका दो तो ऐसे चोदूँगा कि उस संतोष की याद कभी नहीं आने दूँगा।मैं भी अंदर से मचल रही थी पर मैं अपने आपको कंट्रोल करके बोली- अब हो गया, अब जाऊं?तो वो बोला- सिर्फ 10 मिनट और… मैं तुम्हारे हुस्न की खुशबू लेना चाहता हूँ। टच नहीं करूँगा।

मुझे भी मजा आ रहा था, मैं बोली- जल्दी करो जो भी करना है।वो नीचे बैठ गया, मेरे पैरों को सूंघने लगा और धीरे धीरे ऊपर आने लगा।जैसे ही जांघ को सूंघने के लिये आया, मैं मदहोश होने लगी क्योंकि वो गरमागरम साँसें छोड़ रहा था।

फिर वह चुत पर आया और तेज साँसें छोड़ने लगा। मेरी तो आँखें बंद हो गई… ऐसा आज तक किसी ने नहीं किया था।वो बोला- क्या मदहोश करने वाली खुशबू है।और सूँघते-सूँघते गांड पर चला गया, बोला- अभी भी वीर्य की खुशबू है।फिर वो पीठ से होते हुए मेरी चूचियों पर आ गया और मुझे गर्माने लगा था।

मैं तो एकदम पागल हो गई थी, अब मुझे बस एक ही फीलिंग आ रही थी कि बस यह मेरी जोरदार चुदाई कर दे। अब वो सूँघते सूँघते मेरी गर्दन से होते हुए मेरे लबों पर आ गया।मुझे अब अपने आप पर कॉन्ट्रल नहीं हो रहा था, मेरी आँखें बंद थी।

फिर वो मेरे कान के पास गया और धीरे से बोला- मजा आया मेरी जान?मैंने सुनते ही आँख खोली और एक्टिंग करते हुए बोली- मुझे या तुम्हें?वो बोला- मैं तो स्वर्ग की सैर कर रहा था।मैं कैसे बताऊँ कि मैं उससे ज्यादा एन्जॉय कर रही थी।

फिर वह बोला- अगर तुम आर्डर दो तो एक बार तुम्हारे गले लगाना चाहता हूँ।मैं भी पूरे मूड में आ चुकी थी तो हाँ कर दी।

मेरे हाँ करते ही वो मेरे से फेविकॉल की तरह चिपक गया और उसका लंड इतना कड़क हो गया था कि बार बार मेरी चुत में ठोकर मार रहा था।वो गले लगते ही मेरी चुची, बूब्स, पीठ, गांड सब मसलने लगा, गर्दन पर गरमागरम साँस छोड़ रहा था तो मैं एकदम मदहोश हो गई थी।

पता नहीं वो कब मेरे गालों पर चुम्मी करने लगा। अब वो मुझे बुरी तरह मसलने लगा, मैंने भी उसका लंड पकड़ लिया और जोर से मसलने लगी।वो अब मेरे लबों को चूसने लगा, वो बार बार मेरी चुत में लंड से धक्का मार रहा था। लेकिन मैं अपने चुत को बचा रही थी।

करीब 10-15 मिनट तक ऐसे ही चलता रहा, हम दोनों पूरी मदहोशी में खोये हुए थे, तभी मुझे अचानक महसूस हुआ कि मैं यह क्या कर रही हूँ और मैं जबर्दस्ती उससे अलग हुई तो देखा कि उसका लंड एकदम लाल किला बना हुआ है।मैं लंड देखकर चुदने के मूड में आ गई थी लेकिन अपने आप को सम्भाला और बोली- तुम यह क्या कर रहे थे?तो राजीव बोला- सॉरी… पता ही नहीं चला कब यहाँ पहुँच गए। प्लीज माफ़ कर दो।

मैंने सोचा कि यह माफ़ी मांग रहा है, यही बहुत है, नहीं तो कोई और होता तो अभी तक तो मेरी चुदाई कर चुका होता। इसलिए मैं बोली- इट्स ओके… अब जल्दी चलो।तो राजीव अपने लंड की ओर इशारा करते हुए बोला- मैडम, मैं इसका क्या करूँ।मैं हँसती हुई बोली- काट दो!

फिर वो बोला- मैडम, एक बात बोलूँ?मैं बोली- बोलो?तो वो बोला- जब इतना हो ही गया है तो इस लंड को भी शांत कर दो।मैं बोली- यह मुमकिन नहीं है, मैं जा रही हूँ।तो वो बोला- मैडम, मेरी पूरी बात तो सुन लो। मैं चुत या गांड में बिना आपके परमिशन के नहीं डालूँगा। मैं तो बस कह रहा हूँ कि आप अपने हाथों से हिलाकर झार देती तो इस बालक का भला हो जाता।मैं बोली- छी… मेरे हाथ में वीर्य लग जाएगा।और मैं बोली- तुम बालक हो? अगर तुम्हारा बस चलता तो अभी तुम मुझे अपने बच्चे की माँ बना देते!तो वो बोला- प्लीज मैम!

फिर वो बोला- मेरे पास एक और आईडिया है।मैं बोली- क्या?वो बोला- आपकी चुची को चोद कर ठंडा हो जाता हूँ।मैं बोली- चुची को कैसे?तो वो बोला- आप घुटनों पर बैठ जाओ और दोनों हाथों से चुची को चिपकाओ।

मैं मान गई, उसने अपना गरमागरम लंड मेरी दोनों चूचियों के बीच घुसा दीया और आगे पीछे करने लगा और अपने मुंह से आवाज़ निकालने लगा- उम्म्ह… अहह… हय… याह…और तेजी से मेरी चुची की चुदाई करने लगा।मैं ऐसे पहली बार चुद रही थी इसलिए यह पहला अनुभव था और बहुत सुखदाई अनुभव था। मैं भी अपनी चुची की चुदाई को पूरी तरीके से एन्जॉय कर रही थी। चुची पर लंड की चुदाई से मैंफिर से गर्म होने लगी थी। वो भी मेरी चुची को चुत समझकर चोदे जा रहा था और अलग-अलग आवाजें निकाल रहा था।मैं भी वासना में खोती जा रही थी।

तभी उसके लंड से जोरदार पिचकारी निकली और मेरी गर्दन पर वीर्य की बरसात कर दी। मैं अभी पूरी तरीके से गरमाई ही थी कि वो खल्लास हो गया और उसका सारा वीर्य मेरी गर्दन, चुची और पेट पर बिखर गया, मेरे नाक में वीर्य की मादक खुशबू जाने लगी जिससे मैं और मदहोश हो रही थी.

 
Back
Top