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बहादुर अब तीनो औरतो का सामूहिक चोदन करता रहा. गीता, चाचिजी और अपनी पत्नी तीनो को वो जम कर चोद्ता. उधर सूरज ने बहादुर की पत्नी की चुदाई चालू कर दी. दो आदमी और तीन औरते रोज़ रात दिन चोदने लगे. सूरज की नज़र अब बहादुर की दोनो बेटियो पेर थी. दोनो पति पत्नी जानते थे की अब दोनो बेटी चुदाई ने एक्सपर्ट हो कर रहेगी. मगर एक दिन यकायक निशा वापस घर चली आई. कालू अब कही मज़दूरी करने जाता था. निशा को घर मे घुसते ही पता चल गया की उसकी सास ने बहडूर की और उसके हरामी पति ने उसकी पत्नी की चुदाई शुरू कर दी है और सूरज की नज़र अब दो कुवारि चुतो पर है.
मगर निशा की कामुक नज़रो ने शिकार ढूँढ लिया. उसको लगा की इस से पहले की चाची छ्होटे बहादुर को चोदे उस से पहले ही उसे उसको अपनी गिरफ़्त मे लेना परेगा. निशा ने बच्चे की देखभाल के लिए छ्होटे बहादुर को अपने यहा बुला लिया. वो उसके सामने ही आराम से कपड़े बदल लेती और नहा कर नंगी ही बाहर आ जाती. एक दिन नहाते वक़्त उसने उसको अंडर बुलाया और अपनी पीठ रगर्ने को कहा. बहादुर नंगी निशा की पीठ रगर्ने लगा. वो अब पूरा जवान हो चक्का था. निशा ने उस से कहा,' बहादुर तुम्हारे कापरे गीले हो जाएगे इनको उतार दो,' बहादुर शरमाने लगा. निशा तुरंत खड़ी हुई और उसका शर्ट और निक्केर उतार दिया. वो चड्डी बनियान नही पहनता था. बहादुर का कुवरा चमरी वाला लंड एकद्ूम सीधा खरा था. इतना ताज़ा लंड देख कर निशा के मूह मे पानी आ गया. उसने अपने होटो से उसके चमरी को पीछे किया और उसका गुलाबी सुपरा लॉलीपोप की तरह चूसने लगी. इस से पहले की बहादुर कुछ समझता उसका जवान वीरया निशा के गले के ज़रिए उसके पेट मे उतार गया. अब कुछ भी बाक़ी नही था. एक कमरे मे निशा और छ्होटा बहादुर, दूसरे मे गीता, चाचिजी, बड़ा बहादुर, उसकी पत्नी और सूरज चोद्ते. पूरी रात भेंचोड़ मदर चोद और लंड चूत की टकराहतो की आवाज़े घर मे गूँजती.
छ्होटा बहादुर धीरे ढेरे चुदाई मे बड़ा बन गया. निशा ने उसको एक नंबर का चुड़क्कड़ बना दिया था. शुरू शुरू मे उसकी पिचकारी जल्दी छुट्टी थी मगर निशा ने उसको आँड खाली करने मे जल्दबाज़ी से बचना भी सीखा दिया. उधर एक दिन कालू निशा से मिलने आया, निशा बड़ी खुश हुई वो भी अपने बेटे को देख कर बड़ा खुश था. निशा ने उसके लड़के की लंगोट खोली और उसकी छ्होटी मगर काली नून्न्ी दिखा कर कहा देख ले एक्दुम बाप पेर गयी है इसकी नुन्नि, कालू हस्ने लगा. दोनो ने इस मुलाक़ात मे भी खूब जूम कर चुदाई की,' कालू अब तू तो आता नही मुझे कोई मस्त लंड खाने की इच्छा होती है तू ही ढूँढ ला,' निशा उससे बोली. कालू ने निशा से वादा किया.
कोई दो दिन बाद कालू एक 60 साल के बूढ़े को लेकर आया,' बीबीजी ये साधुरम है मेरे दूर के रिश्ते मे ताऊ लगता है, आपसे मिलवाने लाया हू,' उसने कहा. उस बुड्ढे ने धोती पहनी हुई थी. मेला सा कुर्ता था. पाओ मे भी चप्पल थे. निशा ने उन दोनो को छाई पिलाई फिर उनको रवाना कर दिया. अगले दिन जुब कालू वापस मिलने आया तो निशा बोली,' साले भद्वे मैने तुझे कोई तगड़ा लंड ढूँढने को कहा और तू बुद्धा ले आया, ये तो चोद्ते चोद्ते मेरे उप्पेर ही मार जाएगा,' वो बोली. " ग़लत बीबीजी ऐसा लड पूरे कस्बे मे किसी का नही, खड़ा हो जाए तो ऐसे लगे जैसे कोई गढा हो, एकद्ूम क़ाला और बcचे की कलाई जितना मोटा,' कालू बोला.' मुझे तो विश्वास नही होता,' निशा बोली.' नही बीबीजी ये रोज़ मेरी गांद मारता है चोदना शुरू करता है तो मदारचोड़ का पानी ही नही निकलता,' कालू बोला.' तू तो पूरा मर्द है, तू कब से गांद मरवाने लग गया?" निशा ने असचर्या से पूछा. " बस इस दुनिया मे ऐसा ही है मेमसाहिब जिसके पास जितना बड़ा लंड उसके पास उतनी ही ताक़त, साधुरम का हथियार ज़्यादा मज़बूत है इसलिए मे हार गया,' कालू बोला. " ये मुझे संतुष्ट तो कर देगा?" निशा ने पूछा.' ये बुद्धा चुदाई की मशीन है, पूरी रात भर हम दोनो की मार देगा फिर भी खुद नही झदेगा,' कालू ने कहा. " ठीक है फिर कल रात को इसको ले आ मगर पहले इसको नहलाना धुलना, सफाई वगेरह करना,' निशा बोली.
अगले दिन रात को कालू और साधु आए. कालू उसको बाथरूम मे ले गया और पहले उसको रगर रगर कर साबुन से नहलाया फिर रेज़र से उसके आँड और लंड के पास के बॉल सॉफ किए. साधु अब खुश्बू मार रहा था. निशा ने उसके लिए नये धोती कुर्ते ला रखे थे. उधर कालू नेभी निशा की दी हुई नयी पॅंट और शर्ट पहनी. दोनो निशा के बेडरूम मे आए. गीता को सब पता था,' चाचिजी अब बहू की चुदास इतनी बढ़ गयी की बुद्धो के लंड भी लेने लग गयी,' वो बोली,' हूमे क्या वो जाने और उसकी चूत जाने तू तो अपनी चुदाई से मतलब रख,' चाचिजी बोली.
निशा बिस्तेर पेर लेटी थी डाई तरफ और साधु उसकी बाई तरफ आ गये. उसने सिर्फ़ ब्लॅक कलर की नाइटी पहनी थी, अंडर कुछ भी नही था. कालू ने धीरे धीरे उसका दया बूब दबाना शुरू किया, उधर बुद्धा निशा का दूसरा बूब मसल रहा था. दोनो ने उसकी नाइटी पेट तक नीचे खिसका दी थी, निशा के नरम और गोरे बूब्स पेर दो सख़्त और काले हाथ थे. दोनो ने अब उसके निपल्स को चूसना शुरू कर दिया. पहली बार कोई संभ्रांत महिला के नर्म और गोरे बूब्स इन भूखे ग़रीबो को मिले थे, भूखो की तरह वो उसके बूब्स को लगभग खाने लगे. निशा को दर्द हो रहा था मगर उसे मज़ा भी आ रहा था, जो चीज़ सूरज कीट ही उसे वो सड़कच्छप लोगो मे लूटा कर अच्छा महसूस कर रही थी. उसे लगता था उसके रूप यौवन की उसके पति ने बेइज़्ज़ती की इसलिए वो इसका बदला लेकर रहेगी.
पाँच मिनिट तक किसी औरत के बूब्स से दो मर्द एक साथ खेले तो उसकी चूत तो गीली होगी ही और वो उत्तेजित भी हो जाएगी. निशा पहले तो दोनो के बॉल सहला रही थी फिर उसके हाथ उनके गुप्तांगो पेर चले गये. एक हाथ से उसने कालू के लंड को दबाना शुरू किया दूसरे से साधु का औज़ार नापने लगी. निशा के हाथ से साधु का लंड बार बार फिसल रहा था. उसको लगने लगा की कालू झूट नही बोल रहा था. कालू ने अपने सारे पपड़े खोले और निशा की नाइटी भी उतार दी. वो खड़ा हुआ और निशा के मूह के पास अपना लंड लाया. निशा ने पहले तो उसके सुपरे को किस किया फिर उसके पूरे लंड और आंदियो को चूमने लगी. कालू का लंड फंफनाने लगा. निशा ने कालू के लंड की चमरी पीछे की और उसके मोटे सुपरे पेर जीभ फेरने लगी. कालू का सुपरा लहू के प्रवाह से फटा जर आहा था. साधु ने पहली बार किसी औरत को लंड चूस्ते हुए देखा था. उसकी भी इच्छा हो आई की वो भी अपना लंड निशा के मूह मे दे.' उधर निशा ने कालू के लंड को उसके पेट से सटा दिया और वो आइस्क्रीम की तरह उसको चाटने लगी उसकी जीभ अंडकोष से शुरू कर लंड की टिप तक जाती. थोड़ी देर बाद निशा ने उसका लंड लगभग आधा मूह मे लिया और उसको चूसने चाटने लगी. उसका एक हाथ कालू की गोटियो को धीरे धीरे मसल रहा था ताकि उसो दर्द भी ना हो और मज़ा भी ना आए,' कालू तेरी इन गोलियो को मे बहुत प्यार करती हू क्यूकी यही से मेरा बेटा आया है,' ये कह की ब उसने उसकी एक गोली मूह मे ली और कॅंडी की तरह चूसने लगे. बारी बारी से वो उसकी गोलिया चुस्ती रही, कालू इतना उत्तेजित हो गया की उसका लावा फूटने को आया,' ओह भेंचोड़ मेरा पानी च्छुतने को है, इसको गटक मदारचोड़ नही तो तेरी गांद मार दूँगा रंडी,'' कालू बोला. " हा मेरे राजा तेरा वीरया तो मेरा अमृत है भर दे मेरे पेट को इसकी बूँदो से,' निहा ये कह कर उसके आँड थोड़ा ज़ोर से मसालने लगी. कालू ज़ोर से चीखा और निशा के गले मे झाड़ गया. उसकी गांद कपने लगी.
साधु ने अपनी धोती उतार फेंकी और कालू जैसे ही हटा वो अपना औज़ार लेकर निशा के मूह के सामने आ गया. निशा ने अपनी अब तक की ज़िंदगी मे ऐसी चीज़ नही देखी थी. उसके पास इंची टेप तो नही था मगर कोई एक फुट बड़ा तो उसका हथियार था ही. खाली सुपरा किसी चीकू के आकर का था. साधु के क्लुंड की मोटाई इतनी थी उसके हाथ के घेरे मे शायद वो आधा ही नही सीमतेगा,' कालू ये क्या है?" निशा विस्मित हो कर बोली,' बीबीजी लंड है और क्या असली लंड,' कालू बोला.' मगर ये आदमी का लंड तो नही ऐसा लगता है किसी राक्षस का लंड है या किसी गधे का,' वो बोली. निशा की नज़र अब उस विकराल लंड के नीचे के ठेले पेर पड़ी. उसे लगा जैसे वाहा दो बड़े बड़े चिकू लटक रहे हो,' पूरी दुनिया का वीरया इसने अपने आंदियो मे ही भर लिया क्या?" निशा ने पूछा. मगर उतेज़ित साधु ने अपना मोटा सुपरा निशा के होटो पेर लगा दिया,' चूस रंडी इसको चूस,' उसने कहा. निशा आग्या मानते हुए उस महके लंड को चूसने चूमने चाटने लगी. उसकी चूत का पानी बह कर उसकी पूरी गंद को भिगो चक्का था. कालू ने उसकी चूत के फेक फैलाई और अपनी जीभ अंडर घुसा दी. साधु निशा का मूह चोद रहा था और कालू अपनी जीभ से निशा की चूत चोद रहा था.
मगर निशा की कामुक नज़रो ने शिकार ढूँढ लिया. उसको लगा की इस से पहले की चाची छ्होटे बहादुर को चोदे उस से पहले ही उसे उसको अपनी गिरफ़्त मे लेना परेगा. निशा ने बच्चे की देखभाल के लिए छ्होटे बहादुर को अपने यहा बुला लिया. वो उसके सामने ही आराम से कपड़े बदल लेती और नहा कर नंगी ही बाहर आ जाती. एक दिन नहाते वक़्त उसने उसको अंडर बुलाया और अपनी पीठ रगर्ने को कहा. बहादुर नंगी निशा की पीठ रगर्ने लगा. वो अब पूरा जवान हो चक्का था. निशा ने उस से कहा,' बहादुर तुम्हारे कापरे गीले हो जाएगे इनको उतार दो,' बहादुर शरमाने लगा. निशा तुरंत खड़ी हुई और उसका शर्ट और निक्केर उतार दिया. वो चड्डी बनियान नही पहनता था. बहादुर का कुवरा चमरी वाला लंड एकद्ूम सीधा खरा था. इतना ताज़ा लंड देख कर निशा के मूह मे पानी आ गया. उसने अपने होटो से उसके चमरी को पीछे किया और उसका गुलाबी सुपरा लॉलीपोप की तरह चूसने लगी. इस से पहले की बहादुर कुछ समझता उसका जवान वीरया निशा के गले के ज़रिए उसके पेट मे उतार गया. अब कुछ भी बाक़ी नही था. एक कमरे मे निशा और छ्होटा बहादुर, दूसरे मे गीता, चाचिजी, बड़ा बहादुर, उसकी पत्नी और सूरज चोद्ते. पूरी रात भेंचोड़ मदर चोद और लंड चूत की टकराहतो की आवाज़े घर मे गूँजती.
छ्होटा बहादुर धीरे ढेरे चुदाई मे बड़ा बन गया. निशा ने उसको एक नंबर का चुड़क्कड़ बना दिया था. शुरू शुरू मे उसकी पिचकारी जल्दी छुट्टी थी मगर निशा ने उसको आँड खाली करने मे जल्दबाज़ी से बचना भी सीखा दिया. उधर एक दिन कालू निशा से मिलने आया, निशा बड़ी खुश हुई वो भी अपने बेटे को देख कर बड़ा खुश था. निशा ने उसके लड़के की लंगोट खोली और उसकी छ्होटी मगर काली नून्न्ी दिखा कर कहा देख ले एक्दुम बाप पेर गयी है इसकी नुन्नि, कालू हस्ने लगा. दोनो ने इस मुलाक़ात मे भी खूब जूम कर चुदाई की,' कालू अब तू तो आता नही मुझे कोई मस्त लंड खाने की इच्छा होती है तू ही ढूँढ ला,' निशा उससे बोली. कालू ने निशा से वादा किया.
कोई दो दिन बाद कालू एक 60 साल के बूढ़े को लेकर आया,' बीबीजी ये साधुरम है मेरे दूर के रिश्ते मे ताऊ लगता है, आपसे मिलवाने लाया हू,' उसने कहा. उस बुड्ढे ने धोती पहनी हुई थी. मेला सा कुर्ता था. पाओ मे भी चप्पल थे. निशा ने उन दोनो को छाई पिलाई फिर उनको रवाना कर दिया. अगले दिन जुब कालू वापस मिलने आया तो निशा बोली,' साले भद्वे मैने तुझे कोई तगड़ा लंड ढूँढने को कहा और तू बुद्धा ले आया, ये तो चोद्ते चोद्ते मेरे उप्पेर ही मार जाएगा,' वो बोली. " ग़लत बीबीजी ऐसा लड पूरे कस्बे मे किसी का नही, खड़ा हो जाए तो ऐसे लगे जैसे कोई गढा हो, एकद्ूम क़ाला और बcचे की कलाई जितना मोटा,' कालू बोला.' मुझे तो विश्वास नही होता,' निशा बोली.' नही बीबीजी ये रोज़ मेरी गांद मारता है चोदना शुरू करता है तो मदारचोड़ का पानी ही नही निकलता,' कालू बोला.' तू तो पूरा मर्द है, तू कब से गांद मरवाने लग गया?" निशा ने असचर्या से पूछा. " बस इस दुनिया मे ऐसा ही है मेमसाहिब जिसके पास जितना बड़ा लंड उसके पास उतनी ही ताक़त, साधुरम का हथियार ज़्यादा मज़बूत है इसलिए मे हार गया,' कालू बोला. " ये मुझे संतुष्ट तो कर देगा?" निशा ने पूछा.' ये बुद्धा चुदाई की मशीन है, पूरी रात भर हम दोनो की मार देगा फिर भी खुद नही झदेगा,' कालू ने कहा. " ठीक है फिर कल रात को इसको ले आ मगर पहले इसको नहलाना धुलना, सफाई वगेरह करना,' निशा बोली.
अगले दिन रात को कालू और साधु आए. कालू उसको बाथरूम मे ले गया और पहले उसको रगर रगर कर साबुन से नहलाया फिर रेज़र से उसके आँड और लंड के पास के बॉल सॉफ किए. साधु अब खुश्बू मार रहा था. निशा ने उसके लिए नये धोती कुर्ते ला रखे थे. उधर कालू नेभी निशा की दी हुई नयी पॅंट और शर्ट पहनी. दोनो निशा के बेडरूम मे आए. गीता को सब पता था,' चाचिजी अब बहू की चुदास इतनी बढ़ गयी की बुद्धो के लंड भी लेने लग गयी,' वो बोली,' हूमे क्या वो जाने और उसकी चूत जाने तू तो अपनी चुदाई से मतलब रख,' चाचिजी बोली.
निशा बिस्तेर पेर लेटी थी डाई तरफ और साधु उसकी बाई तरफ आ गये. उसने सिर्फ़ ब्लॅक कलर की नाइटी पहनी थी, अंडर कुछ भी नही था. कालू ने धीरे धीरे उसका दया बूब दबाना शुरू किया, उधर बुद्धा निशा का दूसरा बूब मसल रहा था. दोनो ने उसकी नाइटी पेट तक नीचे खिसका दी थी, निशा के नरम और गोरे बूब्स पेर दो सख़्त और काले हाथ थे. दोनो ने अब उसके निपल्स को चूसना शुरू कर दिया. पहली बार कोई संभ्रांत महिला के नर्म और गोरे बूब्स इन भूखे ग़रीबो को मिले थे, भूखो की तरह वो उसके बूब्स को लगभग खाने लगे. निशा को दर्द हो रहा था मगर उसे मज़ा भी आ रहा था, जो चीज़ सूरज कीट ही उसे वो सड़कच्छप लोगो मे लूटा कर अच्छा महसूस कर रही थी. उसे लगता था उसके रूप यौवन की उसके पति ने बेइज़्ज़ती की इसलिए वो इसका बदला लेकर रहेगी.
पाँच मिनिट तक किसी औरत के बूब्स से दो मर्द एक साथ खेले तो उसकी चूत तो गीली होगी ही और वो उत्तेजित भी हो जाएगी. निशा पहले तो दोनो के बॉल सहला रही थी फिर उसके हाथ उनके गुप्तांगो पेर चले गये. एक हाथ से उसने कालू के लंड को दबाना शुरू किया दूसरे से साधु का औज़ार नापने लगी. निशा के हाथ से साधु का लंड बार बार फिसल रहा था. उसको लगने लगा की कालू झूट नही बोल रहा था. कालू ने अपने सारे पपड़े खोले और निशा की नाइटी भी उतार दी. वो खड़ा हुआ और निशा के मूह के पास अपना लंड लाया. निशा ने पहले तो उसके सुपरे को किस किया फिर उसके पूरे लंड और आंदियो को चूमने लगी. कालू का लंड फंफनाने लगा. निशा ने कालू के लंड की चमरी पीछे की और उसके मोटे सुपरे पेर जीभ फेरने लगी. कालू का सुपरा लहू के प्रवाह से फटा जर आहा था. साधु ने पहली बार किसी औरत को लंड चूस्ते हुए देखा था. उसकी भी इच्छा हो आई की वो भी अपना लंड निशा के मूह मे दे.' उधर निशा ने कालू के लंड को उसके पेट से सटा दिया और वो आइस्क्रीम की तरह उसको चाटने लगी उसकी जीभ अंडकोष से शुरू कर लंड की टिप तक जाती. थोड़ी देर बाद निशा ने उसका लंड लगभग आधा मूह मे लिया और उसको चूसने चाटने लगी. उसका एक हाथ कालू की गोटियो को धीरे धीरे मसल रहा था ताकि उसो दर्द भी ना हो और मज़ा भी ना आए,' कालू तेरी इन गोलियो को मे बहुत प्यार करती हू क्यूकी यही से मेरा बेटा आया है,' ये कह की ब उसने उसकी एक गोली मूह मे ली और कॅंडी की तरह चूसने लगे. बारी बारी से वो उसकी गोलिया चुस्ती रही, कालू इतना उत्तेजित हो गया की उसका लावा फूटने को आया,' ओह भेंचोड़ मेरा पानी च्छुतने को है, इसको गटक मदारचोड़ नही तो तेरी गांद मार दूँगा रंडी,'' कालू बोला. " हा मेरे राजा तेरा वीरया तो मेरा अमृत है भर दे मेरे पेट को इसकी बूँदो से,' निहा ये कह कर उसके आँड थोड़ा ज़ोर से मसालने लगी. कालू ज़ोर से चीखा और निशा के गले मे झाड़ गया. उसकी गांद कपने लगी.
साधु ने अपनी धोती उतार फेंकी और कालू जैसे ही हटा वो अपना औज़ार लेकर निशा के मूह के सामने आ गया. निशा ने अपनी अब तक की ज़िंदगी मे ऐसी चीज़ नही देखी थी. उसके पास इंची टेप तो नही था मगर कोई एक फुट बड़ा तो उसका हथियार था ही. खाली सुपरा किसी चीकू के आकर का था. साधु के क्लुंड की मोटाई इतनी थी उसके हाथ के घेरे मे शायद वो आधा ही नही सीमतेगा,' कालू ये क्या है?" निशा विस्मित हो कर बोली,' बीबीजी लंड है और क्या असली लंड,' कालू बोला.' मगर ये आदमी का लंड तो नही ऐसा लगता है किसी राक्षस का लंड है या किसी गधे का,' वो बोली. निशा की नज़र अब उस विकराल लंड के नीचे के ठेले पेर पड़ी. उसे लगा जैसे वाहा दो बड़े बड़े चिकू लटक रहे हो,' पूरी दुनिया का वीरया इसने अपने आंदियो मे ही भर लिया क्या?" निशा ने पूछा. मगर उतेज़ित साधु ने अपना मोटा सुपरा निशा के होटो पेर लगा दिया,' चूस रंडी इसको चूस,' उसने कहा. निशा आग्या मानते हुए उस महके लंड को चूसने चूमने चाटने लगी. उसकी चूत का पानी बह कर उसकी पूरी गंद को भिगो चक्का था. कालू ने उसकी चूत के फेक फैलाई और अपनी जीभ अंडर घुसा दी. साधु निशा का मूह चोद रहा था और कालू अपनी जीभ से निशा की चूत चोद रहा था.