भाभी…तो क्या आज सारा डर ख़तम हो गया है जो ये सब कह रहा है….आपनी मम्मी को देखकर खड़ा कर रखा है….इस साँप को….
शास…आप कितनी अच्छी है…ये में बता नहीं सकता…में झूठ नहीं बोल रहा हूँ…ना जाने आपकी वो कैसी होगी…उसको देखने की बड़ी इच्छा होती है…
भाभी…तुम्हे क्या लगता है…वो कैसी होगी…
शास…मम्मी बुरा मत मानना…में तो हमेशा आपकी उसकी कल्पना करके ही इसे सहला कर पानी निकालता हूँ…कि वो गद्देदार…फूली हुई रसीली ऑर मस्त होगी….
भाभी…अच्छा…तो ये बात है…आज पता चला कि तुम अपनी मम्मी की उसको याद करके ….अपने इसे हिलाकर पानी भी निकालते हो….
………भाभी सोच रही थी कि इस बेचारे को क्या मालूम कि इसके इस भारी मोटे लंबे लंड को देख कर इसकी मम्मी की चूत आज सुबह से कितना पानी छोड़ चुकी है…ऑर अब भी चूत से पानी की धार बह रही है……
शास….क्या कहूँ मम्मी आपसे तो कह नहीं सकता था…
भाभी….क्या नहीं कह सकता था….सच सच बताओ…..
शास…यही कि मम्मी आप बड़ी सुंदर हो आपको देख कर मेरे इसमें कुछ होने लगता है….ये तो आपका दीवाना हो चुका है…ऑर ना जाने क्या क्या… बस अपने लंड को हिलाकर ही पानी निकाल लेता था….आख़िर शास की ज़ुबान पर पहली बार लंड का नाम आ ही गया था…..
भाभी….अच्छा…तो इसे लंड कहते है…भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा….इसका नाम लेने में कितनी देर लगा दी….
शास….आप तो इसका नाम पहले से ही जानती हो ना…..
भाभी…भला में पहले से ही कैसे जानती हूँ…मेने तो इसे आज पहली बार देखा है…..भाभी ने अंजान बनते हुए….कहा…
शास….मम्मी क्यों मेरा बेवकूफ़ बना रही हो आप पापा के साथ तो रोज ही करती होंगी…फिर आपको इसका नाम नहीं मालूम…..
भाभी…तुम्हारे पापा के पास तो ये जंगली साँप जिसे तुम लंड कह रहे हो है ही नहीं….वो तो इसका चौथाई है…बहुत ही छोटा है…फिर उसे लंड कैसे कह सकते है…लंड तो मेने आज ही देखा है…… …लंड तो मेने आज ही देखा है……..ऑर अभी देखा भी कहाँ है शिरफ़ महसूस ही किया है….ये तो अभी भी अंडरवेर के अंदर ही है….इसे बाहर निकालो तो में भी तो देखु कि मेरे बेटे के लंड का साइज़ क्या है…..
शास…मम्मी आप खुद ही निकल लो ना….मुझे अभी भी शर्म आ रही है….
भाभी ने सोचा कि इसके साथ घुमा फिरा कर बात करने से अब कोई लाभ नहीं होगा…ये शरमाता रहेगा….ऑर मेरी चूत फिर से प्यासी ही रह जाएगी….आज भाभी की चूत में जो खुजली मची हुई थी…वो भाभी को परेशान कर रही थी…ससुर जी के लंड के बाद में उनकी चूत को लंड मिला ही कहाँ….उनके पति का लंड तो बहुत छोटा है….उससे तो बस काम चलाया जा सकता है….चूत की प्यास नहीं बुझाई जा सकती है….
भाभी….ऑर तुम वो जो कुँवारी लड़कियों के सामने निकल कर खड़े हो जाते हो तब शर्म नहीं आती है….ना जाने अभी कितनी लड़कियों की चूत तुमने फाड़ डाली होंगी अपने इस मोटे लंड से….भाभी अब खुलकर चूत ऑर लंड जैसे शब्दों का पर्योग करने पर उतर आई थी…
शास…आपको पसंद है मम्मी मेरा लंड…..शास ने शरमाते हुए ही कहा…
भाभी-- इसे बाहर तो निकाल तभी तो कुछ कहूँ….
ऑर शास ने शरमाते हुए अपनी लंड को अंडरवेअर से बाहर निकाल दिया…..
भाभी के मुँह से आआअहह निकल गयी…वो आश्चर्य से शास के लंड को निहारती रह गयी..…ये तो उसके ससुर के लंड को भी मात दे रहा था…कितना लंबा,मोटा और जवान भारी लंड….वाउ….क्या लंड है….भाभी की चूत की खुजली बढ़ गयी….ऑर उनकी चूत खुलने बंद होने लगी….भाभी को गर्व हो रहा था….कि उसके बेटे का लंड किसी भी चूत को फाड़ सकता है…आआहह….क्या लंड पाया है मेरे बेटे ने…..
भाभी….बेटे तुम्हारा लंड तो बहुत ही भयंकर है ये तो किसी भी चूत को फाड़ कर ही अंदर जा सकता है….क्या खिलता-पिलाता है ऐसे……बिना चूत को फाड़ के तो अंदर जा ही नहीं सकता है…तुम्हारा ये साँप….बड़ा ही फूँकार रहा है….ना जाने किसको डसने का इरादा है इसका…..आज
शास….अभी तो आप ही है मम्मी इसके सामने….शास भी अब मुस्कुराते हुए बोला…वो भी अब अपनी मम्मी की खुली खुली बातें सुनकर खुलने लगा था…
भाभी…ना..बेटे ना….मुझे तो इससे बचाना…में तो इतना भारी शायद ही झेल पाऊ…..ऑर हंस दी….शास के लंड का गुलाबी सुपाडा साफ करते हुए बोली….
शास…आप ही तो कह रही थी मम्मी कि पापा का लंड तो बहुत छोटा है…क्या आप की इच्छा नहीं है…इसको लेने की….शास के लंड में सुरसुराहट हो रही थी…मम्मी की नाज़ुक उंगलियो के स्पर्श से लंड का सुपाडा ऑर फूल गया था….
ऑर भाभी बड़े ही प्यार से उसे सॉफ कर रही थी….
भाभी…इतने प्यारे लंड को पाने की इच्छा किस औरत को नहीं होगी…पर बेटे एक तो में तुम्हारी मम्मी हूँ…भला में इसे कैसे ले सकती हूँ…दूसरे ये तो मेरी छूट को फाड़ ही डालेगा…फिर क्या होगा…..
शास….मम्मी साँप कितना ही बड़ा मोटा ऑर लंबा क्यों ही ना हो…वो छोटे से छेद में भी अपनी जगह बना ही लेता है…ऑर चूत फैल कर उसे अपने अंदर समा ही लेती है….
भाभी को अपने ससुर की बातें याद आ गयी…शायद यही शब्द तो उन्होने भी पहली बार कहे थे…..
शास…क्या सोच रही हो मम्मी…में तुम्हारा बेटा हुआ तो क्या हुआ…हूँ तो एक मर्द ही ना ऑर आप एक औरत है…एक मर्द ऑर एक औरत का रिस्ता ऑर कुछ नहीं होता….बस चुदाई का ही होता है…लंड को आपके जैसी चूत ऑर छूट को मेरे इस लंड जैसा लंड ही तो चाहिए….फिर आपकी सेवा करना तो मेरा धर्म भी है ना मम्मी…..
भाभी…बस बेटे….अब ये सब बातें छोड़….बाकी बातें बाद में करेंगे…तेरे पापा नहा कर आने वाले है…तुम भी जल्दी कपड़े पहन कर आ जाओ…साथ साथ खाना खाते है….ये कह कर भाभी…शास के लंड को छोड़ कर किचन की ओर चली गयी…पर शास के दिल में तो एक आग जलाकर चली गयी थी…जो चिंगारी शास के मन में काफ़ी दिनो से भड़क रही थी…उसको तो आज भाभी ने शोला बना दिया था….खैर शास ने अपने लंड पर कई दफ़ा ठंडा पानी डाला ऑर टवल से शरीर पोछ कर कपड़े पहन लिए…ऑर धीरे धीरे उसका लंड तो शांत हो गया पर अंदर की चिंगारी सुलग चुकी थी……
तभी शास के पापा भी स्नान करके वापिस आ गये थे…फिर तीनो ने एक साथ बैठ कर खाना खाया….इस बीच शास चोरी चोरी से अपनी मम्मी को निहारता रहा …उसने महसूस किया कि उसकी ममी उन सभी लड़कियों से ज़्यादा सेक्सी है जिनकी आज तक शास ने चुदाई की है…..
खाना खाने के बाद शास के पापा घेर में चले गये….उन्हें दोपेहर में आराम करने की आदत थी…ऑर शास अपनी मम्मी से लिपट गया….मम्मी आप वाकई ही बहुत सुन्दर ऑर सेक्सी हैं…
भाभी…अब छोड़ शास…मुझे घर का बहुत काम करना है….
शास…सुबेह से तो काम ही कर रही है…अब थोड़ी देर आराम कर लो…बाद में काम निपटा लेना….
भाभी…नहीं बेटे में हमेशा काम निपटा कर ही आराम करती हूँ…पहले काम निपटा लेने दे…बाद में ही आराम करूँगी….
शास….मम्मी को बाहों में भींच कर…पर आज तो आराम कर लो…थक गई होंगी….बाद में काम कर लेना…ऑर धीरे से मम्मी की चुचियों पर हाथों का दबाव बना दिया…..
भाभी…क्या इरादा है तुम्हारा…मुझे कुछ ठीक नज़र नहीं आ रहा है…जाओ तुम आराम कर लो…मुझे काम करने दो….
शास…भला आप काम करो ऑर में आराम करूँ…ये कैसे हो सकता है…मम्मी…चलो में आपका हाथ बँटा देता हूँ…
भाभी…रहने दे में अपना काम अपने आप कर लूँगी….तू जा ऑर लेट जा…
शास….मम्मी प्लीज़…आज आप भी आराम कर लो ना काम बाद में कर लेना…या फिर में भी आपका काम निपटवाता हूँ…..
भाभी…शास…मुझे आज तुम्हारी नियत कुछ ठीक नहीं लग रही है…आख़िर क्या बात है….रोज तो तुम्हें मम्मी की चिंता नहीं होती थी…
शास…चिंता तो रोज ही होती थी…पर आपसे खुलकर तो बात आज ही हुई है ना…पहले तो में डरता था…कि कहीं मम्मी बुरा ना मान जाए…ऑर ना जाने क्या क्या…..बस चुप छाप सह रहा था…
भाभी…ठीक है शास…पर एक बात ध्यान रखना…तुम कोई उल्टी सीधी हरकत नहीं करना… इसी शर्त पर में तुम्हारे साथ आराम करने के लिए चलती हूँ…
शास…ठीक है मम्मी…में आपकी मर्ज़ी की विरूध कोई काम नहीं करूँगा….
आप आप लोगो को क्या बताऊ दोस्तो….अंदर ही अंदर भाभी भी सुलग रही थी…पर वो सीधे सीधे कुछ नहीं कहना चाहती थी…उसे भी लंड का मज़ा लिए हुए मुद्दत गुजर गई थी…वो खुद चुदाई के लिए तैयार थी…बस अपनी तरफ से शुरुआत नहीं करना चाहती थी…..
भाभी शास के साथ बेडरूम में आ गयी…..ऑर दोनो बेड पर बैठ गये….
भाभी…मेरा कितना काम बाकी है…पर ना जाने तुझे आज क्या सूझी है…सारा काम छुड़वा दिया….
शास…मम्मी रोज तो काम ही काम करती हो कभी तो आराम भी कर लिया करो…चलो आप लेट जाओ…में आपके पैर दबा देता हूँ….
भाभी…रहने दे रहने दे…पहले ऊपर से दबा दिया…अब क्या नीचे से दबाने का इरादा है…..कुछ ही देर पहले शास ने उनकी चुचियों पर दबाव जो बनाया था…उसको दोहराते हुए बोली…..
शास….मम्मी….क्या करूँ आप है ही इतनी सुंदर….आपको देख कर तो किसी का भी दिल डोल सकता है…..आपका ये गठीला ऑर मांसल बदन….भारी भारी चुचियाँ ऑर गोलमटोल भारी उछलते हुए चूतड़….किसी देवता को भी मदहोश कर सकते है…..फिर में तो आपकी सुंदरता का ना जाने कब से दीवाना हूँ….
भाभी…बस रहने दे रहने दे चने के झाड़ पर मत चढ़ा…मुझे मालूम है में कितनी सुंदर हूँ…ज़्यादा मक्खन मत लगा…
शास…नहीं मम्मी में सच कह रहा हूँ…यक़ीन मानो…
भाभी….ठीक है..ठीक है…अब आराम कर ले…मुझे उठकर काम भी करना है…..
शास…मम्मी क्या में आपके पैर दबा दूं…
भाभी…क्यूँ…मेरे पैरों में दर्द थोड़े ही है….
शास…..इस बहाने मम्मी आपकी भारी भारी…मांसल जांघे दबाने को मिल जाएगी…इनको दबाने ऑर चूमने की हसरत ना जाने कब से है….
भाभी…अच्छा तो ये कहो ना…कि मेरे पैर नहीं ….जांघे दबाने ऑर चूमने का इरादा है…
शास….हाँ मम्मी यदि आपकी इजाज़त मिल जाए तो…
भाभी…नहीं बेटे ये ठीक नहीं होगा…ये पाप है…में तुम्हारी मम्मी हूँ…ऐसा सोचना भी पाप ही होगा….
शास…. मेने आपकी पहले भी बताया है मम्मी की हम मर्द ऑर औरत भी है…ऑर हमारी कुछ सेक्षुयल इच्छा भी होती है…ऑर मर्द ऑर औरत दोनो एक दूसरे के इसीलिए पूरक है….
भाभी…पर मेरी तो ऐसी कोई इच्छा नहीं है… में शादीशुदा हूँ ऑर इसके लिए तुम्हारे पापा है…
शास…मम्मी आपने ही बताया था…कि पापा का बहुत छोटा है…ऑर हर औरत की इच्छा होती है कि उसे बड़ा..मोटा…ऑर लंबा ताकतवर लंड मिले….क्या आपकी इच्छा नहीं होती मम्मी…
भाभी….बेटे ये तो अपना अपना नसीब होता है…कि किसको क्या मिला…
शास…क्यूँ अपने आप को झूठी दिलाषा दे रही हू मम्मी…में जानता हूँ कि पापा का छोटा लंड होने के करें आप शायद ही संतुष्ट होती होगी…
भाभी…इसमें में क्या कर सकती हूँ….उदास होकर….
शास….मम्मी में आपका हूँ…आपने मुझे पैदा किया है…मेरी हर चीज़ पर आपका अधिकार है….ऑर फिर में एक मर्द हूँ…ऑर आप एक औरत….मुझे आपकी ऑर आपको मेरी इच्छा पूरी करने का हक़ है….इसमें बुरा ही क्या है….
भाभी…हमारा रिश्ता बहुत ही नाज़ुक है बेटे अगर किसी को पता चल गया तो…ना जाने क्या हो जाएगा…..बस बातों तक ही ठीक है…इससे आगे नहीं बढ़ना चाहिए….में जानती हूँ कि तुम्हारा लंड वाकई बलिश्त है…ऐसे लंड को पाने की चाहत हर औरत की होती है…वो किसी भी औरत को पूर्ण संतुष्ट कर सकता है….पर हम जिस समाज में रहते है…वो इसकी इजाज़त नहीं देता है….
शास….मम्मी क्या समाज आपकी या मेरी ज़रूरतो को पूरा करता है…हम उस समाज की चिंता क्यूँ करे….जो हमें आपनी इच्छाओ को दमन करने को मजबूर करता है….ऑर फिर मम्मी किसी को पता भी कैसे चलेगा…..ये बात तो मेरे ऑर आपके बीच ही रहेगी…ऑर कोई तो घर में है नहीं…..जो हमारे संबंधो को जान सके…..
भाभी…पर बेटे फिर भी…
शास…फिर भी कुछ नहीं मम्मी…आप अपनी इच्छाओं को मत मारो…ओर मेरी इच्छा भी दबाने को मत मजबूर करो…प्लीज़…मम्मी…यक़ीन मानो मम्मी में आपको कहीं भी शर्मिंदा नहीं होने दूँगा….पूरी जिंदगी…आपका सेवक बन कर रहूँगा….ये कह कर शास ने अपनी मम्मी को फिर से बाहों में भर लिया….ऑर अपने गरम तपते हुए होंठ भाभी के रसीले…गुलाबी …नाज़ुक से होंठों पर रख दिए ऑर बेतहाशा चूमने लगा…..
शास…मम्मी के होंठ बेतहाशा चूस रहा था…ऑर बाहों में भिंचे हुए ही मम्मी को बेड पर गिरा दिया….अब शास मम्मी की भारी चुचियों को अपनी छाती पर महसूस कर रहा था….शास ने मम्मी के नीचे से अपने हाथ निकाले ऑर मम्मी की चुचियों पर रख दिए……एक पल के लिए जैसे ही शास रुका ….
भाभी…ये क्या कर रहा है बेटे…ये सब ठीक नहीं है…पर खुद को छुड़ाने का कोई भी प्रयास भाभी ने नहीं किया….
शास…कुछ नहीं मम्मी…आपकी सेवा कर रहा हूँ…जो चुदाई का सुख आपको पापा अपने छोटे से लंड से नहीं दे सके….वो सुख में आपको देना चाहता हूँ…….
भाभी…नहीं बेटे…नहीं…ये नहीं हो सकता…आख़िर में तुम्हारी मम्मी हूँ…तुम्हारे इस महा लंड को अपनी चूत में कैसे ले सकती हूँ…भाभी ने लंड चूत जैसे शब्दों का प्रयोग भी किया ऑर अपने को छुड़ाने का फिर भी कोई पर्यास नहीं किया……जिससे शास का लंड ऑर भड़क उठा था…
शास…मम्मी आपकी सेवा करना ऑर आपको हर प्रकार का सुख देना मेरा प्रेम कर्तव्य है….ये कहते हुए शास ने फिर से मम्मी के होंठ अपने मुँह में भर लिए….ऑर मस्ती मे चूस्ता रहा….इसी बीच मम्मी की जीब शास के मुँह में दाखिल हुई….मानो शास को मलाई की कुलफी मिल गयी हो….वो चूस्ता रहा…ऑर मम्मी की चुचियों को मसल मस्ल कर दबाता रहा…..फिर शास ने मम्मी के गालों ऑर कान पर भी चूमना ऑर चाटना शुरू कर दिया…भाभी भी मदहोश होने लगी…उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे उसके ससुर आज फिर उसे चोदने जा रहे हों…यही सोचकर भाभी की चूत मस्त होकर खुलने ऑर बंद होने लगी थी…ऑर उनकी चूत से गढ़ा…लिसलिसा पानी निकलने लगा था….
भाभी…अभी भी रुक जा बेटे नहीं तो फिर बहुत देर हो जाएगी….शायद फिर में अपने आप को ना रोक पाऊ….ऑर ये अनर्थ हो जाएगा….
शास…आप अपने आप को क्यूँ रोक रही है….मम्मी…कोई अनर्थ नहीं होगा….जिस लंड के लिए आप आज तक तडपी है…वो आज से तुम्हारा है…वो छोटा सा लंड आपको क्या मज़ा देता होगा….आज वो सारी प्यास पूरी कर लो मम्मी…आख़िर में आपका बेटा ही तो हूँ कोई गैर नहीं…आपकी ही संतान…जब आपने ये पेड़ लगाया है तो इसके फल खाने का अधिकार भी है तुम्हारा….आआहह मम्मी….आप कितनी सुंदर है…आपकी ये चुचियाँ ऑर ये कसा हुआ मुलायम बदन…आपकी रसीले होंठ….मदहोश हो जाने दो अपने बेटे को…आप भी आज मदहोश हो जाओ…..आज आपकी सुहागरात के बाद वास्तव में तो पहली चुदाई है….इतने प्यारे बदन को एक मस्त…मोटा…लंबा…ऑर जोरदार लंड ही चाहिए…जो आज आपकी सेवा में तैयार है….मम्मी….
ये कहते कहते हुए शास ने भाभी के ब्लाउस के हुक खाल दिए थे…..ऑर ब्लाउस को बाहों से बाहर करते हुए….आआहह क्या चुचियाँ है मम्मी…इनको उम्र भर भी चूस्ता रहूं तो भी मन नहीं भरेगा…..
भाभी….अपने आप को अभी भी छुड़ाने का कोई भी प्रयास नहीं कर रही थी…फिर भी शास को लगातार यही कह रही थी….आआआअहह उूुुउउम्म्म्ममममाआईईईई सस्स्स्स्सिईईईई…..बेटे रुक जा….रुक जा….ये मुझे क्या कर दिया तुमने बेटे….ये पाप है…तुम अपनी मम्मी को बेश्या की तरह से इस्तेमाल कर रहे हो…इस लंड पर तुम्हारी बीवी का हक़ है इसे उसी के लिए संभाल कर रखो बेटे….
शास….हां मम्मी…आज से दुनिया के सामने तुम मेरी मम्मी ही हो पर वैसे आज से तुम मेरी बेवी भी हो….में तुम्हे….एक बेवी की ही तरह से चोदुन्गा मम्मी….ऑर शास ने भाभी की ब्रा का भी हुक खोलकर उसे भी भाभी के शरीर से अलग कर दिया…..गोरी चिट्टी भारी चुचियों को देखा कर चुचियों को चूसने का दीवाना शास उन पर टूट पड़ा….उन्हें…दबा दबा कर मसल मसल कर मदहोशी की हालत में चूसने लगा था…..पूरे रूम में मम्मी ऑर शास की सिसकारिया…गूज़्ने लगी थी….
उूुउउम्म्म्ममाआआऐयईईईइससस्सिईईई. वो मम्मी की चुचियाँ भी पी रहा था ऑर एक अनुभवी चोदु की तरह से उसके हाथ मम्मी के शरीर के हर भाग को टटोल रहे थे….अब शास मम्मी के पेट ऑर नाभि को भी छू लेता था…..कुछ ही पलों में शास के कलाकार हाथो ने भाभी के पेटिकोट का नाडा खोल दिया ऑर उसे थोड़ा नीचे खिसका दिया था….भाभी इतनी उत्तेजित हो चुकी थी कि उसे आभास भी नहीं हुआ कि उसकी चूत कब कपड़ों से बाहर होकर खुली हवा में पानी टपका रही थी……
शास ने धीरे धीरे मम्मी पर पूरा नियंत्रण कर लिया था…..भाभी उत्तेजना में सब कुछ भूल चुकी थी…अब उसने पूरी तरह से अपने को शास के हवाले कर दिया था…शास के हवाले तो वो पहले ही कर चुकी थी…पर अभी तक जो शब्दों से दिखावटी रुकावट डालने का दिखावा कर रही थी….अब उसको भी छोड़ कर चुदाई के हर भाग का आनंद लेने लगी थी…उनकी आँखें बंद हो चुकी थी…चूत लगातार….लंड पाने के लिए लार छोड़ रही थी…अनुभवी चोदु शास अब समझ चुका था….कि अब उसकी मम्मी पूरी तरह से चुदाई के लिए तैयार हो चुकी है….इसी बीच शास ने मम्मी के पैरों (टाँगों) को उपर नीचे करके मम्मी की धोती ऑर पेटिकोट शरीर से पूरी तरह से अलग कर दिया था….
शास…मम्मी तुम्हारा पूरा का पूरा शरीर ही इतना सुंदर ऑर रसीला है…जी करता है अंग अंग को चूस लूँ…ऑर चूस्ता ही रहूं…..हर समय..हर पेल उस समय तक….जब तक ये दुनिया रहे……
भाभी….आआआहह…त्त्त्तूऊ किसने रोका है बेटे….पी जाओ….चूस लो…पर मेरी भी प्यास भुजा दो….में भी बरसों की प्यासी हूँ बेटे….आज जी भर कर रस निकाल ले इस शरीर का…आज जी भर के चोद ले अपनी मम्मी को…आज जी भर के चोद डाल उस चूत को जिससे तू पैदा हुआ था…फाड़ डाल उसे….ऑर ना जाने क्या क्या…बड़बड़ाती रही भाभी…
आख़िर धीरे धीरे शास वहाँ पर पहुचने लगा था…जहाँ पर चुदाई का आखरी पड़ाव होता है…उसके होंठ भाभी के पूरे शरीर को चूम चाट रहे थे….ऑर अब शास भाभी की दोनो भारी मांसल जांघों को चूमने लगा था……ऑर भाभी की मादक सिसकियाँ बढ़ती ही जा रही थी…उनका शरीर इस तरह से कपकपा रहा था…जैसे आज उनकी पहली सुहागरात हो….लाखों हज़ारों बिजलियाँ उनके शरीर में दौड़ दौड़ कर तरंग पैदा कर रही थी…
शास….भाभी की चुचियों को मसल रहा था….उन्हें सहला रहा था…ऑर जाँघो को चाट रहा था….पर कुछ ही देर बाद शास….ने पोज़िशन बदल ली ओर 69 की मुद्रा में आ गया….भाभी की कल्पना फिर ससुर पर जा टिकी….वही पोज़िशन….वही भयंकर मोटा लंबा लंड उसके होंठों को छू रहा था…ऑर भाभी की जीब फिर से लंड के सुपाडे को चाटने लगी….लंड का सुपाडा इतना मोटा हो चुका था कि भाभी के मुँह में तो जा नहीं सकता था…..
उधर शास ने अब अपनी मम्मी की टाँगो तो चोडा किया….ऑर भाभी की चूत पर अपना मुँह रख दिया…..आआआआअहह के साथ भाभी की सिसकारी निकल गयी….शास की गरम गरम साँसे…चूत पर टकराकर उसे पिघला रही थी…ऑर चूत में जमा पानी पिघल कर टपकने लगा था….
शास मम्मी की चूत को मज़े ले लेकर चूसने चाटने लगा था…वो तो पहले से ही चूत का मज़ा लेने का आदि था….भला वो उस चूत का पानी पीए बगैर कैसे छोड़ सकता था….जो उसकी तम्माना रही हो….जो उसकी जननी हो….हल्की गंध से भरा हुआ पानी….शास की मस्ती को ऑर बढ़ा रहा था….मम्मी की चूत के पानी की गंध से शास ऑर ज़्यादा मदहोश होता जा रहा था….
शास ने अपनी जीब से मम्मी की चूत के क्लिट को चाट चाट कर खड़ा कर दिया था….ऑर मम्मी की सिसकारिया ऑर तेज हो चली थी….तभी शास ने अपनी जीब को मम्मी की चूत के अंदर पेल दिया….ऑर मम्मी की कामुक आआआहह…आआऐईईईइससस्स्स्स्स्सिईईईई…उूुउउम्म्म्ममाआअहह किस सिसकारी निकल गयी……
शास…मम्मी तुम्हारी चूत का पानी तो बहुत ही मजेदार है….
भाभी…आआअहह…बेटे आज तो तुमने…मुझे लगता है निचोड़ने की ही ठान ली है……आआहह…जीब को ऑर अंदर डाल दो…..आआआहह शास आज जी भर कर पी लो माँ की चूत का पानी…..फिर ना कहना….कि प्यासा ही रह गया….आआहह उूऊउईईईई सस्स्स्सिउउुउउम्म्म्म आआआअहह बेटे लगता है में तो जा रही हूँ….आआआअहह ज़रा ऑर अंदर…..जल्दी से आआआआअ उूुुउउम्म्म्म ऑर मम्मी का शरीर अकड़ने लगा था….उनकी आखें ऑर ज़ोर से बंद हो चली थी…..मम्मी के हाथ शास के चुतड़ों पर कस गये थी….ऑर लंड भाभी के गालों को सहलाने लगा था…..उूुुुुुुउउम्म्म्ममममममाआआआहह की धुन के साथ…….आआआहह लो बेटे….मैं…..तूऊ गगग्गगाआऐईईईईईई के साथ भाभी के चुतड़ों ने कई उछाल लिए ऑर पूरा शरीर नीचूड़ने लगा…भाभी…..उस सागर में गोते लगा रही थी…जिसकी कल्पना से ही चूत पानी छोड़ देती है…….
कुछ देर तक शरीर के अकडे रहने के बाद….एक लंबी शांति…..भाभी का शरीर ढीला पड़ने लगा….
भाभी की चूत में आए ज्वार भाटा ने शास के पूरे मुँह को भिगो दिया था…पर मम्मी की चूत के पानी के प्यासे शास ने सारे पानी को गटा-गट पी लिया…ऑर चूत को उस वक्त तक चाट्ता रहा जब तक उसमें से अंतिम बूँद भी बाहर ना आ गयी ……
शास ने अपनी मम्मी की चूत से निकले पानी की अंतिम बूँद तक चाट चाट कर सॉफ कर दी थी….ऑर उसका महा लंड मम्मी के गालों ऑर गर्दन की लगातार मालिश कर रहा हा….मानो वो मम्मी का चुम्मा ले रहा हो….अब भाभी के हाथों की शास के चुतड़ों पर पकड़ ढीली पड़ चुकी थी….
शास….मम्मी आप भी इस लंड को चुस्कर थोड़ा आनंद लो नाअ….
भाभी…भला ये तुम्हारा लंड है या घोड़े का मेरे मुँह में कहाँ आता है…..बस इसके सुपाडे को चाट भर सकती हूँ…..
शास…तो चाट ही लो ना मम्मी….शास के लंड का गुलाबी सुपाडा….मम्मी के गालों ऑर गर्दन पर झटके मार मार कर ऑर फूल कर कुप्पा हो गया था….भाभी ने जीब निकाली ऑर शास के लंड के सुपाडे को चाटने लगी….शास के लंड से निकलता प्रिगुं…भाभी को बड़ा ही मधुर टेस्ट दे रहा था…..
शास कुछ देर तक ओर मम्मी की चूत को चाट्ता रहा….मम्मी की चूत का दाने में फिर से फड़कन शुरू होने लगी थी….ऑर मम्मी ने शास के लंड को दोनो हाथों में पकड़ कर लंड के सुपाडे के छेद को चाटने लगी थी…ओर जीब को सुपाडे के बारीक छेद में डालने की कोशिस करने लगी….
शास…मम्मी भला कहीं आपकी जीब इस छेद में भी जा सकती है….
भाभी…बेटे कोशिस कर रही हूँ…कि इस छेद के माल का टेस्ट भी ले लूँ आज……
शास…फिर तो मम्मी आपको जीब के साथ साथ अपने नाज़ुक हाथों से भी ऐसे सहलाना पड़ेगा….तभी इसमें से कुछ निकल सकता है….
भाभी की चूत में अब अंदर तक खुजली मचने लगी थी….अब उनकी इच्छा लंड को चूत में लेने की होने लगी थी…पर डर भी लग रहा था…कहीं उनकी चूत एक बार फिर ना फट जाए….पहली बार तब उनकी चूत से खून निकला था….जब वे शादी करके आई थी…ऑर उनके पति ने उसे पहली बार चोदा था….दूसरी बार तब उसकी चूत से खून निकला था…जब ससुर जी ने पहली बार चोदा था…ऑर उसकी चूत बुरी तरह से फट गयी थी….ऑर आज फिर वही कहानी दोहराई जाएगी अगर शास ने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया तो…चूत फटे बिना बिल्कुल नहीं रहेगी….इस चूत में बरसों से मोटा लंड नहीं गया था…इसलिए…..शायद ही शास के लंड को झेल पाए…..
शास…क्या सोच रही हो मम्मी…..
भाभी…कुछ नहीं बेटे….बस यूँ ही….
शास…बताओ ना मम्मी…क्या बात है….
भाभी…कुछ नहीं…सोच रही हूँ…तुम्हारा ये लंड तो मेरी चूत को फाड़ डालेगा….तुम्हारे पापा के लंड का साइज़ छोटा होने के कारण मेरी चूत का साइज़ भी छोटा है….अगर ये लंड मेरी चूत में जाने की कोशिस करेगा…तो वो निश्चित ही फट जाएगी…ऑर रात में तुम्हारे पापा ने चुदाई का मन बनाया तो में क्या करूँगी….
शास….हाँ ये बात तो है….फिर क्या करें मम्मी…मेरे लंड का तो बुरा हाल है….अगर ये अब चूत में जाकर खाली नही हुआ तो फट जाएगा…..
भाभी..बेटे मेरी चूत का भी अब बुरा हाल है…वो भी इस लंड के लिए मचल रही है…अंदर खुजली भी बहुत मची है…पर रात का डर है…ऑर फिर तो ये कई दिन बाद ही ठीक हो पाएगी……
शास…फिर क्या करूँ मम्मी…आपने तो अपने बेटे को मझदार में लाकर छोड़ दिया है….
भाभी…तुम मेरी मजबूरी समझा सकते हो…में ही अब क्या करूँ…हा जब तक में कोई तरीका निकालू…तब तक तो….
शास…अच्छा मम्मी में आपकी चुचियों में अपने लंड को दबा कर लंड को मसलता हूँ हो सकता है…इसका माल निकल जाए….ऑर कुछ शांति मिले….
भाभी….पर मेरी चूत का क्या होगा उसमें भी तो खुजली मची है….
शास….मम्मी आपकी चूत को में एक बार फिर चाट कर पानी निकाल दूँगा….बाकी बाद में जैसे आप सोचेंगी…वैसा ही होगा….
भाभी…मौस होकर…ठीक है बेटे…ऑर कोई तरीका भी तो नहीं है….
ऑर शास ने अपने लंड को भाभी की चुचियों के बीच फँसा दिया….ऑर दोनो चुचियों को लंड पर दबाकर झटके मारने लगा……कुछ देर तक मेहनत के बाद शास के लंड ने पानी छोड़ दिया….जो सीधे मम्मी के होंठों ओर मुँह पर गिरा….जिससे मम्मी का पूरा चेहरा….शास के लंड से निकले वीर्य से सन गया….ऑर भाभी…जितना उनसे हो सका…जीब बाहर निकाल कर चाटने लगी थी….
भाभी ने चेहरा अपनी जीब ऑर कुछ पोंछ कर साफ किया…..फिर शास की ऑर मुस्कुरा कर अब कैसा फील कर रहे हो बेटे…..
शास….बहुत अच्छा तो नहीं…पर लंड की अकड़न कुछ कम ज़रूर हो गयी…
भाभी….पर अब तो तुम्हारा माल निकल गया है….
शास….वो तुम्हारी चूत में थोड़े ही निकला है….
भाभी…मेरी चूत में निकालने से कुछ ऑर होता….
शास…हाँ मम्मी…बिल्कुल….ये लंड पहले बड़ी शान से तुम्हारी चूत का पानी पीता…फिर उसके साथ दो हाथ करता तब जाकर कहीं पानी छोड़ता तो मज़ा कुछ ऑर ही होता….ये तो बस लंड का पानी भर निकला है…इसकी संतुष्टि कहाँ हुई है……ये तो अभी भी तुम्हारी चूत के लिए तड़प रहा है….
भाभी….ऐसा मेरी चूत में क्या है…जो ये इतना परेशान है….
शास….मम्मी आपकी चूत में जो है…वो तुम क्या जानो….तुम्हारी चूत का पानी…समुंदर के पानी की तरह खारा पर टेस्टी है…ऑर लंड के लिए तो वो ताक़त का ड्रिंक्स है….उस पानी को पीकर अगर लंड का डूपिंग टेस्ट करो तो ये भी डूपिंग मामले में फँस जाए…..ऑर मुस्कुरा दिया…..
भाभी ….हंसकर अच्छा तो मेरी चूत का पानी तुम्हारे लंड के लिए एनर्जी फुड है….लेकिन अभी तो इसने मेरी चूत का पानी पिया नहीं फिर ये क्यूँ इतना बहादुर है….जो मेरी चूत को फाड़ने की उत्सुकता दिखा रहा है….
शास….एक बार चूत का पानी पिलाकर देखो इसे फिर तो ये फूलकर दुगना हो जाएगा…..
भाभी…फिर रहने दे शास…तुम्हारा लंड तो अभी भी किसी भी चूत को फाड़ सकता है…फिर इसके लिए चूत कहाँ से आएगी…तब तो ये गधि की चूत को भी फाड़ डालेगा…..ऑर दोनो ही मुस्कुरा दिए……
भाभी…अच्छा चल ज़रा एक किस दे दे….फिर में अपना काम निपटाती हूँ…तुम्हारे पापा भी आते ही होंगे……
शास ….ने भाभी के होंठ चूम लिए….
भाभी…आररी यहाँ नहीं बुद्धू….नीचे के होंठो पर….
ऑर शास ने मुस्कुरा कर भाभी की चूत में मुँह दे दिया ऑर ज़ोर ज़ोर से चूमने ऑर चाटने लगा….कुछ देर के बाद भाभी की चूत से एक बार फिर पानी का फ़ौवारा छूट पड़ा….ऑर शास पूरे पानी को पी गया….
भाभ…खड़ी होते हुए….क्यूँ बेटे मेरी चूत का पानी पीकर जब तुम्हारे लंड को एनर्जी मिलती है…तो तुम्हे भी तो मिली होगी…तुमने तो दो बार काफ़ी पानी पी लिया…है….अब कैसा महसूस कर रहे हू…क्या डूपिंग टेस्ट में फैल हो जाओगे……
शास….मम्मी वेकई तुम्हारी चूत के पानी का कमाल है….बड़ा ही टेस्टी ऑर शक्ति दायक है….अच्छा लग रहा है….कहते हुए शास भी कपड़े पहनने लगा था……
भाभी…इसी लिए तो तुम्हे दो बार पानी पिलाया है…कि रात में तुम्हे थकान ना हो…..आज तो दो…दो जवान लड़कियों चुदाई जो करनी है….तुम्हे…ऑर भाभी मुस्कुरा दी….
शास…क्या कह रही हो मम्मी…में कुछ समझा नहीं….
भाभी…अच्छा तो क्या मुझे बेवकूफ़ समझता है….रात की चुदाई के लिए संतोष ओर कुसुम जो तुम्हारा इंतजार कर रही है…पर ध्यान रखना…दोनो ही कुँवारी है…कहीं उनकी चूत को फाड़ कर हाथ में दे आओ….थोड़ा आराम से ध्यान रखते हुए ही चुदाई करना …ऑर हाँ…सारा माल वहीं मत उडेल आना…कुछ माल तो अपनी मम्मी के लिए भी बचा कर ले आना…..एक बार फिर दोनो हस्ते हुए कमरे से बाहर निकल आए………
शास….मम्मी आपको कैसे पता चला कि आज रात में वहाँ पर चुदाई प्रोग्राम होना है…..
भाभी….संतोष ऑर कुसुम आज सुबेह आई थी…ऑर तुम्हारे लंड के बारे में बात खुल गई…तभी तो मुझे पता चला कि तुम्हारा लंड नहीं मस्टंड है….
शास….क्या वो आपसे ऐसी बाते कर रही थी…मम्मी…
भाभी..तो क्या हुआ….जब तुम मर्द लोग औरतों के बारे में …उनकी चूत ऑर चुचियों के बारे में बात कर सकते हो तो क्या हम औरते मर्द के लंड के बारे में बात नहीं कर सकते हैं क्या….
शास…ये बात नहीं मम्मी…मेरा मतलब था…कि चुदाई की बातें….
भाभी…हाँ क्यों नहीं…अगर बातें नहीं करते तो मुझे कैसे पता चलता कि तुम्हारा लंड……इतना भयंकर है…..
शास…क्या मम्मी औरतों को बड़े लंड से डर नहीं लगता है…..
भाभी….नहीं बेटे….हर औरत की यही इच्छा होती है कि उसे मोटा..लंबा..ऑर मजबूत लंड मिले….
शास….उन्हें चूत के फटने का डर नहीं लगता है….
भाभी…नहीं बेटे…जब तक चूत को फाड़ने वाला लंड ना मिले तो चुदाई का मज़ा ही कहाँ है….
शास….पर दर्द तो बहुत होता है….ना…ऑर कई तो बेहोश हो जाती है….
भाभी….उसी दर्द के लिए तो चूत तड़पति रहती है….छोटी चूत वाली औरत अक्सर बेहोश हो जाती है पर मज़ा भी उतना ही आता है….ये दर्द बेहोशी तो कुछ देर की पर मज़ा तो उम्र भर का आता है….
क्या तुमने किसी को चुदाई में बेहोश भी किया है क्या बेटे….
शास…में तो ऐसे ही कह रहा था…
भाभी…में जानती हूँ….ज़रूर तुम्हारे साथ ऐसा हुआ होगा…पर वो औरत अब तुम्हे जिंदगी भर नहीं भूल पाएगी….
एक बात ऑर बेटे जो भी औरत तुम्हारे लंड को एक बार देखा लेगी…वो तो तुम्हारी दीवानी हो जाएगी….
शास…फिर तुम क्यूँ डर गयी मम्मी….
भाभी…में डरी कहाँ हूँ…ये तो मेरे बेटे का प्यारा लंड है कभी भी ले लूँगी….पर अगर आज चूत को फडवा डालती तो तुम्हारे पापा को निश्चित ही पता चल जाता…..फिर तो बहुत ग़लत हो जाता…..
शास…पर मम्मी मेरे लंड में तो तुम्हारी चूत में जाने के लिए…कुछ कुछ हो रहा है…वास्तव में तुम्हारी चूत बहुत ही लव्ली है…..
भाभी…..सभी चूत तो एक जैसी ही होती है…..
शास….नहीं मम्मी सभी चूत एक जैसी नहीं होती…तुम्हारी चूत…ज़्यादा…उभरी हुई ऑर रसीली है…..सभी की चूत ऐसी नहीं होती है….
भाभी…हमें तो सभी चूत एक जैसी ही लगती है…..
शास…..मम्मी सभी मर्दों के पास लंड होता है…क्या सभी का लंड एक जैसा ही होता है…..
भाभी…नहीं सभी का लंड एक जैसा नहीं होता है….लंड तो छोटे..बड़े…मोटे…लंबे…छोटे …पतले होते है……
शास….तो बस इसी तरह से सभी चूत एक जैसी नहीं होती है….इसकी पहचान तो लंड को होती है…तुम्हारी चूत तो एक दम से पाव रोटी की तरह से फूली हुई ऑर रसीली है… मजेदार है….इसे देख कर तो कोई भी मर मिटने के लिए तैयार हो जाए….
भाभी…अच्छा…अच्छा…बस अब रहने दे…किसी दिन चोद लेना…पर हाँ आज अपने लंड का सारा माल वहीं पर ना उडेल आना….याद रखना कि तुम्हारी मम्मी को भी तुम्हारे लंड का इंतजार है…..
शास…में ऑर मेरे लंड दोनो ही आपकी अमानत है…कहो तो आज जाऊ ही नहीं….
भाभी….नहीं चले तो जाओ पर उनकी चूत में ज़्यादा इंटेरेस्ट मत लेना….चाहे तो चुदाई भी मत करना…….
शास…मम्मी अब ये कैसे हो सकता है….भला वो दोनो अगर इस लंड को परेशान करने लगी तो इसको खाली तो करना ही पड़ेगा…नहीं तो ये फट नहीं जाएगा……फिर आपकी चूत का क्या होगा….
भाभी…ठीक है…ठीक है….कर लेना पर काम करना…ये ध्यान रखना कि तुम्हारी मम्मी आज ना जाने क्या क्या सोच कर सो नहीं पाएगी…..तुम्हारी मम्मी को तुम्हारे लंड का इंतजार रहेगा…..
ऑर इसी तरह की बातों में…दिन ढलने लगा था….ऑर भाभी ने शास को मलाई ऑर देशी घी डालकर दूध पिला दिया था…जिससे उसके बेटे को थकान महसूस ना हो…..
शास…मम्मी अब ये कैसे हो सकता है….भला वो दोनो अगर इस लंड को परेशान करने लगी तो इसको खाली तो करना ही पड़ेगा…नहीं तो ये फट नहीं जाएगा……फिर आपकी चूत का क्या होगा….
भाभी…ठीक है…ठीक है….कर लेना पर काम करना…ये ध्यान रखना कि तुम्हारी मम्मी आज ना जाने क्या क्या सोच कर सो नहीं पाएगी…..तुम्हारी मम्मी को तुम्हारे लंड का इंतजार रहेगा…..
ऑर इसी तरह की बातों में…दिन ढलने लगा था….ऑर भाभी ने शास को मलाई ऑर देशी घी डालकर दूध पिला दिया था…जिससे उसके बेटे को थकान महसूस ना हो…..
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आख़िर दिन ढल गया ऑर शास….अपने पापा की एज़ाज्त् से संतोष बुआ के घर चला गया….जहाँ पर दो खूबसूरत परी उसका इंतजार कर रही थी….ऑर शास का लंड उन तितलियों की चूत का पानी पीने के लिए पूरी तरह से तयार था…….
शाम ढलने के बाद थोड़ा थोड़ा ही अंधेरा हुआ था….ऑर शास ने संतोष बुआ के घर का दरवाज़ खटखटाया……
कौन…अंदर से आवाज़ आई…..
में हूँ शास बुआ…दरवाज़ खोलो….
संतोष….दरवाजा खोलते हुए…आज तुमने कितनी देर लगा दी शास कब से तुम्हारा इंतजार कर रही है…..
शास…वो पापा कुछ देर से आए…फिर खाना खाकर आने में कुछ देर हो गयी….पर इतनी भी देर नहीं हुई है बुआ….
संतोष….तुम क्या जानो शास कि इंतजार का एक एक पाल कितनी मुश्किल से कटता है…..
शास…इसमें इंतजार की क्या बात है….
बुआ…तुम्हें नहीं होगी….हमें तो इंतजार था ना….
शास…पर क्यूँ बुआ…क्या ज़्यादा देर हो गयी है….
बुआ….नहीं तुम्हे तो ज़्यादा देर नहीं हुई है….पर हमारे लिए तो देर है…हम तो आज सुबह से इंतजार मे है…
शास…आश्चर्य से…सुबह से….
बुआ…हाँ सुबह से…भाभी ने तुम्हे बताया नहीं कि हम सुबह तुम्हारे घर तुम्हे बुलाने ही तो गये थे…..
शास….हाँ ये तो मालूम है…कि आप सुबह मुझे बुलाने गयी थी….पर रात को सोने के लिए ही ना….
बुआ….बुध्धु…कहीं का…
शास….क्या हुआ बुआ…जो हमे बुध्धु बता रही हैं…
बुआ…अरे तो ऑर क्या कहूँ…जब तुम समझने की कोशिस ही नहीं कर रहे हो…
शास…क्या कोशिस नहीं कर रहा हूँ बुआ….आपने रात में सोने के लिए बुलाया था…सो में सोने के लिए आ गया हूँ…शास ने पूरी तरह से अंजान बनते हुए कहा…..
बुआ…बेवकूफ़….अरे शास कहीं रात सोने के लिए होती है…
शास…फिर अंजान बनते हुए…क्या….रात सोने के लिए नहीं तो ऑर किस बात के लिए होती है….में तो रोज रात में आराम से सोता हूँ….
बुआ…शास…जब मर्द के पास औरत या लड़कियाँ हो तो वो भला कहीं सोता है…क्यों कुसुम में ठीक कह रही हूँ ना….
कुसुम…हां दीदी …ना वो खुद सोता है ऑर ना लड़कियों को सोने देता है….
शास…में तो समझा नहीं बुआ आप क्या कह रही हैं…मुझे तो बड़ी नींद आ रही है…अब ये बताओ…कि कहाँ सोना है…
बुआ…शास तुम इतने बुध्धु तो हो नहीं….जितना जता रहे हो…सुबह तो कुसुम को घूर घूर कर देख रहे थे….
कुसुम…हाँ दीदी…मुझे तो बड़ी शरम आ रही थी…इन्होने तो पलक भी नहीं झपकी…बस एक टक मुझे ही देख रहे थे….
शास…तो देखने से क्या हुआ…देखते तो हम सभी को हैं…तो क्या सोना छोड़ दे…..
बुआ…कुसुम का मतलब है…सेक्सी निगाहों से….
शास…वो कैसी होती हैं बुआ…ये तो मुझे मालूम नहीं…हां ये मुझे अच्छी लग रही थी…इस लिए देख लिया था…
बुआ…इसका तुम्हे क्या अच्छा लगा…अब ज़रा ये बताओ तो ज़रा…
शास…बस अच्छी लगी देखने में…ऑर क्या
कुसुम…दीदी ये हमारा उल्लू बना रहा है….में तो सुबह ही जान गयी थी…कि ये बहुत ही तेज है…
शास…क्या किसी को देखना पाप है…इसमें मेने क्या बुरा किया…
बुआ…पर किसी लड़की को इस तरह से देखने का मतलब कुछ ऑर होता है…
शास…क्या मतलब…
बुआ…याद है एक दिन हम दोनो खेत में गये थे…ऑर वहाँ पर खूब मज़े लिए थे…सुंदर लड़की को देखने का मतलब वही होता है….
शास…आपको अभी तक याद है…वो बात बुआ…में तो भूल ही गया था…
कुसुम…इतना सब होने के बाद भी भूल गये…क्या तुम्हे संतोष की याद नहीं आई…या फिर से वही मज़ा लेने को मन नहीं किया….
बुआ…हाँ शास…मेने इसको भी बता दिया था… कि मेरा शास बहुत ही अच्छा है…ऑर बुआ को खूब मज़े दिए हैं….ऑर हंस दी…
शास….मुस्कुराते हुए…चुप हो गया….
कुसुम… बुआ का बड़ा ध्यान रखते हो शास….
शास…हाँ वो मेरी बुआ है…ये जो भी कहेंगी…वो मानना तो मेरा फ़र्ज़ है….फिर उस खेल में तो मुझे भी मज़ा आया था…शास ने फिर मासूमियत से कहा…जैसे उसके बाद वो सब भूल गया हो….
कुसुम…में भी तो तुम्हारी बुआ ही लगती हूँ…मेरा कहना मानना भी तो तुम्हारा फर्ज़ है….या नहीं….
शास… तो मेने कब मना किया है…बताओ क्या करना है….
ऑर तीनो एक साथ हंस पड़े….फिर कुछ सोच कर कुसुम खुद ही अपने ऊपर झेप गयी……ऑर सिर झुका लिया…..
संतोष…हाइ शास तुम्हे कभी फिर हमारी याद नहीं आई….
शास…भला बुआ आप कैसी बात करती हैं…भला आपने जो मज़ा मुझे मेरी जिंदगी का पहला मज़ा दिया था उसे में कैसे भूल सकता हूँ….
संतोष…फिर कभी तुमने हमसे मिलने की कोशिस क्यूँ नहीं की…क्या फिर मज़ा लेने की इच्छा नहीं हुई थी….
शास….नहीं बुआ आप मुझे बहुत याद आती रही…पर समय ही नहीं मिला…भला क्या कभी में आप को भी भूल सकता हूँ….
संतोष….क्यूँ मुझे क्यूँ नहीं भूल सकते हो क्या कोई खास बात है मुझ मे….
शास…हाँ बुआ….एक तो आप मुझे बहुत प्यार करती हो…दूसरे आप तो मेरी स्वर्ग में सैर कराने वाली गुरु हो…आपने ही तो वो स्वर्ग का द्वार दिखाया था…फिर में आपको कैसे भूल सकता हूँ…यक़ीन मानो बुआ….में आपको इस जीवन में कभी भी नहीं भूल सकता हूँ…..
संतोष…सच कह रहे हो शास….तुम भी मुझे इतना ही प्यार करते हो जितना में तुम्हे करती हूँ….
शास…उसे भी ज़्यादा बुआ…मेरा यक़ीन करो….
ऑर इस पर संतोष ने आगे बढ़कर शास को अपनी बाहों में भर लिया…ऑर उसके गुलाबी सुंदर होंठ चूम लिए….बुआ की गठीलि भारी ठोस चुचियाँ शास की छाती में चुभ रही थी…जिससे शास के लंड ने एक ज़ोर दार सलामी मार ही दी…ऑर बुआ की उभरी हुई चूत पर पहली थपकी दे दी…….बुआ ने शास को बाहों में लिए हुए ही…उसके गालों ऑर होंठो पर कई किस कर दिए…शास की छाती पर बुआ की चुचियों का दबाव ऑर गर्माहट से शास के लंड ने दूसरी जोरदार सलामी देकर एक ऑर थाप बुआ की चूत पर मार दी….
संतोष….शास तुम्हारा वो तो मेरी उस पर थपकी मार रहा है….क्या इरादा है…लगता है तुम्हारा वो तो बड़ा ही उतावला हो रहा है….
शास…ये तो तुम्हारे प्यार का कमाल है बुआ…वो स्वर्ग का रास्ता ढूँढ रहा होगा…..
संतोष…अच्छा…बड़े बदमाश हो गये हो…तुम्हारा वो गले लगते ही स्वर्ग का रास्ता ढूढ़ने लगता है….
शास…आपने जो स्वर्ग का रास्ता दिखाया है वो बड़ा ही मजेदार है बुआ…भला उसके लिए कोन देर करेगा….
संतोष…लगता हैइसे उस दिन के बाद स्वर्ग का मज़ा नहीं मिला है…
शास….हाँ बुआ ऑर किसी ने हमें वो रास्ता दिखाने की कोशिस ही नहीं की है….
कुसुम…अरे शास…उस स्वर्ग के रास्ते को देखने के लिए लड़कियों को पटाया जाता है…खुद कोई नहीं दिखाता है….
शास…पर संतोष बुआ ने तो खुद ही दिखा दिया था…
कुसुम…वो तुम्हे बहुत प्यार करती है ना….इसलिए….
शास…. आप भी तो मेरी बुआ ही है…क्या आप भी मुझे प्यार करती है….
कुसुम…हाँ क्यूँ नहीं. में भी तुम्हे उतना ही प्यार करती हूँ जितना…संतोष दीदी करती है….
शास…तब तो आप भी हमें अपना वो स्वर्ग का रास्ता ज़रूर दिखाएगी….
इस पर संतोष हंस पड़ी ऑर कुसुम थोड़ा झेप्ते हुए मुस्कुरा दी….
संतोष…हाँ..हां..क्यूँ नहीं…शास…जब ये तुम्हे मेरे जितना प्यार करती है तो क्यूँ नहीं दिखाएगी…अपना वो स्वर्ग का रास्ता….क्यूँ कुसुम..दिखायेगी ना….
इस पर संतोष हंस पड़ी ऑर कुसुम थोड़ा झेप्ते हुए मुस्कुरा दी….
संतोष…हाँ..हां..क्यूँ नहीं…शास…जब ये तुम्हे मेरे जितना प्यार करती है तो क्यूँ नहीं दिखाएगी…अपना वो स्वर्ग का रास्ता….क्यूँ कुसुम..दिखायेगी ना….
पर कुसुम ने कोई जबाब नहीं दिया…उसके गालों पर सुर्खी आ गयी थी…ऑर बड़ी बड़ी आँखों में लाल डोरे तैर रहे थे…जिससे पता चल रहा था…कि वो शर्मा ऑर उत्तेजना के कारण नहीं बोल पाई थी…पर उसकी मुस्कुराहट सॉफ बता रही थी…कि संतोष ऑर शास…के इस मिलन को देखकर उसकी चूत भी गीली हो चुकी थी….
शास…क्या हुआ कुसुम बुआ बताओ ना क्या आप भी हमें अपना वो स्वर्ग का रास्ता दिखाएगी या नहीं….संतोष बुआ का स्वर्ग का रास्ता तो बहुत ही खुसबूदार ऑर रसीला है…आपका कैसा है….
कुसुम….शरमाते हुए …नहीं नहीं..मुझे नहीं दिखाना कुछ भी…ऑर अपने दोनो हाथों से अपना मुँह छुपा लिया….
शास…क्यों क्या हुआ…कुसुम बुआ …क्या आप हमें संतोष बुआ की तरह से प्यार नहीं करती है….
कुसुम…लजाते हुए…करती तो हूँ पर ….वो स्वर्ग का रास्ता…वो वो मुझे तो शर्म आ रही है….
संतोष…शास…चिंता मत करो….में ऑर कुसुम दोनो ही तुम्हे एक बार फिर अपना अपना स्वर्ग का रास्ता दिखाएगी…फिर तुम ही बताना कि किसका रास्ता तुम्हे ज़्यादा पसंद आया……ऑर एक बार फिर शास की गुलाबी होठ चूम लिए….
शास…संतोष बुआ…कुसुम बुआ तो इतना शरमा रही है…फिर ये हमें प्यार कैसे करेंगी…..
संतोष….थोड़ा सबर कर शास…तुम्हारी ये कुसुम बुआ तो तुम्हे…मुझ से भी ज़्यादा प्यार करेगी…बस थोड़ा इंतजार कर…..
शास…कुसुम की ओर देखते हुए…क्यूँ कुसुम बुआ…ऑर कुसुम की ओर लगातार देखता रहा…क्या हसीन चेहरा था…कुसुम का बड़ी बड़ी आँखें…गोल गोल गुलाबी गलाइयाँ..ऑर गुलाबी…मुलायम रसीले होंठ….चुचियाँ तो मानो ठोस रसीले अनार छुपाए हुए हो….गोरा चिटा रंग…मानो फुलो के बगीचे में ताज़ा गुलाब खिलने की लिए तयार हो…ऑर उसकी खुसबू से सारा बगीचा महक रहा हो….कुसुम के शरीर में हल्की हल्की सी कसमसाहट…आआआअहह धरती की जन्नत आसमान से उतर आई हो…
.शास…आज सुबह से ही…कुसुम के ख्यालों मे ही डूबा हुआ ना जाने क्या क्या अरमान सज़ा चुका था…उसके मुलायम गुलाबी होंठ…आआअहह क्या रसीले है….उसकी चुचियाँ आआहह क्या कसी हुई है…कितनी उत्तेजक है….उसका गोरा पेट…आआआहह तो उसकी चूत भी कितनी रसीली ऑर गुलाबी…भरी भरी होगी….आआआआअहह
कुसुम….शास को एक टक अपनी ओर देखता हुआ पाकर ….क्या देख रहे हो शास……किन ख्यालों में खो गये….
शास….आआआहह भगवान ने तुम्हे…कितने आराम से तराशा होगा…एक एक अंग को बड़ी ही मेहनत से तराशा होगा….आप बहुत सुंदर है…कुसुम बुआ……में तो क्या कोई भी आपको तो देखता ही रह जाएगा….
कुसुम…बस बस रहने दो अब शास…ज़्यादा तारीफ मत कर…
शास…नहीं कुसुम बुआ आप वास्तव में ही सुंदर है…ओर आपका स्वर्ग का रास्ता तो बहुत ही सुंदर ओर रसीला होगा…शास ने मुस्कुराते हुए कहा…
संतोष…तो देख ले मना किसने किया है…क्यूँ कुसुम???
कुसुम…नहीं नहीं दीदी पहले आप दिखाना …में तो बाद में दिखाउन्गी….
संतोष….मेरा स्वर्ग का रास्ता तो शास पहले ही खेत में देख चुका है…
कुसुम…नहीं दीदी…पहले आप ही दिखाओ…मुझे तो शर्म आती है…में तो बाद में ही सोचूँगी….कि मुझे क्या करना चाहिए…
शास…इसमें सोचने की क्या बात है…आप भी मेरी संतोष बुआ की तरह से ही है ऑर आप भी मुझे संतोष बुआ की तरह से ही प्यार भी करती है…कुसुम के गालों का रंग शर्म से ऑर ज़्यादा गुलाबी हो चुका था…उस पर नज़र जमाते हुए शास ने कहा……….
कुसुम…समझने की कोशिस करो….तुम्हारी बात ठीक है मगर फिर भी…
संतोष…चलो छोड़ो…ये बाद में देख लेंगे….क्या लोगे शास…चाय या दूध……पहले चाय पीते है…उसके बाद बात करेंगे….
कुसुम…दीदी शास के लिए दूध बना दो ऑर अपने ऑर मेरे लिए…चाय बना लो…..
संतोष…ओह तो ये बात है….पूरी तैयारी है…दूध पिला कर….
ऑर फिर तीनो एक साथ हंस पड़े…………………..
संतोष ऑर कुसुम किचन में चली गयी…ऑर शास भी उनके पीछ पीछ किचन में ही चला गया…..
संतोष…शास तुम अंदर बैठो….हम आते है….
शास…बुआ आप तो पीछे से ऑर भी सुंदर ऑर सेक्सी हो…ये तो मेने आज ही देखा है….आपके भारी भारी चूतड़ जो चलते हुए हिलते है…..तो क्यामत ही आ जाती है….
कुसुम…क्यामत तो तुम्हारे आने से ही आ चुकी है….बस अब तो गजब ढाने का इंतजार है….
शास…में कुछ समझा नहीं…कुसुम बुआ….
संतोष….थोड़ी देर में वो भी समझ जाओगे….
शास…साफ साफ बताओ ना बुआ क्या हुआ……
संतोष…अभी कुछ नहीं हुआ…पर जो होगा वो इस डॉक्टेरनी बुआ के लिए यादगार होगा….जैसे तुम स्वर्ग के रास्ते के बारे में बोल रहे थे…वैसे ही कुसुम तुम्हारे…उसके बारे में बोल रही है…जो इसने अभी तक नहीं देखा है…..
शास…मेरे उसके बारे में…किसके बारे में बुआ…
संतोष…अब ज़्यादा बदमाश ना बनो…तुम्हे मालूम है में किसके बारे में बोल रही हूँ….
शास…नहीं बुआ में सच में नहीं समझा…शास ने अंजान बनते हुए कहा…..
संतोष…तो क्या उसका नाम भी मुझ से ही बुलवाओगे…शास तुम तो बड़े ही बेशर्म हो गये हो….पहले तो ऐसे नहीं थे….बड़े ही शर्मीले थे….
शास…इसमें मेने कोन्सि बात कह दी…बस में समझा न्ही था…इसी लिए पूछ लिया…..ऑर फिर जो भी सिखाया है आपने ही तो सिखाया है…..बुआ…वर्ना में क्या जानता था….
संतोष…अच्छा तो में आपकी गुरु हूँ ना…तो बताओ गुरु दक्षिणा में आज क्या दोगे…..
शास….में सारा का सारा आपका आप जो चाहे ले लो…ऊपर से नीचे तक…
तब तक चाय ऑर दूध बन चुके थे…कुसुम ओर संतोष ने चाय ली ऑर शास के हाथ में दूध का गिलास थमा दिया……ऑर कमरे की ओर जाने लगे…..
शास…आपने तो मुझे ये दूध थमा दिया आज तो में वही दूध पीना चाहता था बुआ जो आपने खेत में पिलाया था….
संतोष…बेचैन क्यूँ होता है शास …वो भी पी लेना बल्कि एक का नहीं आज तो दो दो का पीना…पर पहले उसके लिए ये दूध पीकर तैयार तो हो जा…उस दिन में अकेली थी…पर आज दो है…क्या झेल पाएगा….
शास…बुआ आपका दूध पीकर तो में कुछ भी…ऑर भी दो को झेल सकता हूँ……
कुसुम…बस बस रहने दे….एक ही औरत कैसे ही मर्द की हेकड़ी निकाल देती है….फिर हम तो दो है…ज़्यादा मर्द ना बनो….
शास…आपने कितने मर्द देखे है कुसुम बुआ….
कुसुम…मेने नहीं देखे तो क्या हुआ…आपस में बाते तो की है….सभी औरते कहती है…कि मरद का क्या थोड़ी देर में ही ढेर हो जाता है….
संतोष…नहीं नहीं…कुसुम मेने देखा है…शास की तुलना….उन मर्दों से मत करो….ये तो अंतिम बूँद तक निकाल कर ही दम लेता है….
शास…संतोष बुआ आप रहने दो…..कुछ ही देर की तो बात रही है…ये खुद ही हमें ढेर कर देंगी….बस आप हमें उठाकर संभाल लेना….लगता है…इनकी चूत तो कुछ ज़्यादा ही प्यासी है….
शास ने अब पहली बार चूत शब्द का प्रयोग कर बातों को नयी दिशा देनी शुरू कर दी थी…..
कुसुम…लजा कर देखो तो दीदी…ये क्या बोल रहा है….
संतोष…इसमें बुरा क्या है…चूत को चूत नहीं तो क्या कहेंगे….
कुसुम…स्वर्ग का द्वार…ऑर हंस दी….फिर तीनो हंस पड़े….
संतोष…हाई शास ये तो तुमने सच ही कहा है…हम दोनो की चूत ही बहुत प्यासी है…इस डॉक्टरनी ने तो लंड को देखा तक नहीं है…..आज तुम अपने लंड से हम दोनो की चूत की प्यास बुझा दो……अब संतोष भी खुलकर सामने आ चुकी थी……
फिर तीनो बेड पर बैठ गये ऑर कुसुम ऑर संतोष ने चाय पी कर कप एक ओर रख दिया….ऑर शास ने भी गिलास रख दिया…..
संतोष…अब बताओ शास…पहले किसका दूध पीओगे…कुसुम का या मेरा….
शास…अब तो बुआ नींद आने लगी है…आपने दूध ही इतना पीला दिया है…कि बस सोने को जी चाह रहा है…..
संतोष…हम दोनो को बीच मजधार में छोड़ कर तुम सो जाओगे….
कुसुम…मेने कहा नहीं था…कि मर्दों का क्याआ…दो मिनट में ही ढेर हो जाते है…ये तो पहले ही ढेर होने की तैयारी में है…..
शास…हाय कुसुम बुआ आपने ना जाने कितने मर्द देखे है…कुछ तो आपकी चूत पर लंड रखते ही ढेर हो गये होंगे…क्या करें बेचारे….आप है ही इतनी सुंदर और कोमल कि बस सोच सोच कर ही लंड पानी छोड़ देता है….
कुसुम…फिर से लजा कर….नहीं मेने ऐसा तो नहीं कहा था….फिर मेने तो आज तक किसी मर्द की कल्पना भी नहीं की…वो तो मेरी फ्रेंड्स बताती है…..
संतोष….तुम्हारी हालत देखकर तो यही लग रहा है शास….कि तुम्हारा लंड तो पहले ही पानी छोड़ने वाला है…..
शास…हाँ ये तो है बुआ…..वास्तव में आप दोनो है ही इतनी सुंदर कि कल्पना से ही लंड पानी छोड़ देता है….इसमें मैं क्या करू….
संतोष…पर अब हमारी जनम-जन्मान्तर की प्यासी चुतो का अब क्या होगा…शास….हमने तो ना जाने कितने सपने बुन रखे है दिन भर….
कुसुम…लो दीदी तुम ही शास की पूरे दिन से बधाई कर रही थी…इसका तो पहले ही बुरा हाल है….हाई रामम्म अब मेरी पानी छोड़ती हुई इस चूत का क्या होगा…….
शास…अच्छा पहले ये बताओ बुआ कि अपनी चुचि का दूध पिलाना ही या नही…नहीं तो में सो जाता हूँ…..
कुसुम…बस आप ही पिला दो दीदी…बस चुचि पिलाकर ही आज काम चला लो…चुदाई तो इसके बस की बात नहीं है….
संतोष…एक लंबी शंस लेकर आआअहह भरते हुए…..ठीक है कुसुम…अब कुछ तो करना ही पड़ेगा….
शास….चलो में आपकी मदद करता हूँ…बुआ…ऑर संतोष का कुर्ता संतोष के बदन से अलग कर दिया…..शास…ने अंदर ही अंदर आआअहह भरी….वो क्या भरी हुई सुडोल चुचियाँ है बुआ की आहह आज तो मज़ा ही आ जाएगा…..ऑर फिर शास ने बुआ की चुचियों को आधी अधूरी छुपाए हुए ब्रा को भी हुक खोल कर संतोष के शरीर से अलग कर दिया….ऑर उसकी लंबी गरम साँस निकल गयी…..शास ने संतोष बुआ की दोनो चुचियों को हाथों में लिया ऑर संतोष को बेड पर लिटा दिया….फिर बुआ के ऊपर आकर बुआ की दोनों चुचियों को दबा दबा कर मस्त होकर पीने लगा….वो चुचियों में इस कदर खो गया मानो बुआ की चुचियों से मीठा शहद टपक रहा हो…..आआआअहह……उूुुुुुउउम्म्म्ममम उूुुुुउउईईईईआआआईयईईईईईइससस्स्स्स्सिईईई की धून गूज़्ने लगी….
शास का लंड बार बार फूँकार मारता…झटके खाता सलामी देता…पर शास बड़ी मजबूती से उस पर नियंत्रण करता रहा…..शास….संतोष बुआ की चुचियों के साथ साथ अब बुआ के नाज़ुक मुलायम होंठों को भी चूम रहा था….शास अब तक चुदाई का एक मझा हुआ खिलाड़ी बन चुका था….हर पैंतरे से वो वाकिफ़ हो चुका था…..संतोष बुआ को चूमता रहा चाट्ता रहा…होंठ पीता रहा…ऑर उसके हाथ अपने स्पर्श के जादू से बुआ को ऑर ज़्यादा उत्तेजित करते रहे….आआआहहुउऊउउईईईआआहहुउऊउईईईईीसस्स्स्स्सिईइ की धून के बीच शास का खेल…..लगता था…कि कामदेव स्वयं आज संतोष को वासना की आग मे झोंक रहा है….ऑर रति….वासना की गर्मी में पीघल पीघल कर फैलती जा रही है….
संतोष बुआ अपनी पूरी जवानी पर थी….ऑर आप तो जानते ही ही दोस्तों….एक तो रूप हो…ऑर जिस्म भी कमाल का हो…सुंदर हो…कमसिन हो….तो जवानी के यौवन में चार चाँद लग जाते है….इस यौवन पर तो देवता का भी नियंत्रण ना रहे तो फिर शास तो साधारण सा मानव ही था…..बुआ के यौवन पर शास का नियंत्रण भी अब टूटने लगा था….उसका लंड अब उसके काबू से बाहर…एक फूला…मोटा बेलन…बनता जा रहा था…लंड का कड़ा पन ऑर जोश…अब शा स…पर भी भारी पड़ने लगा था…….
अब शास ने बुआ की सलवार का नाडा खोल कर उसको संतोष के पैरों से अलग फेंक दिया था….ऑर चूत से बह रहे पानी को सोख कर गीली हो चुकी पैंटी को भी नीचे कर एक ही झटके में संतोष की टाँगों से अलग कर दिया….छोटे छोटे बालों वाली चूत खुलकर सामने आ गयी…चिपचिपाती हुई गीली चूत….को देखकर शास अपने ऊपर से नियंत्रण खोने लगा था….ऑर शास ने बुआ की चूत पर हाथ रख दिया ऑर धीरे धीरे से सहलाना शुरू कर दिया था….
कुसुम….जो अभी तक बैठी सब कुछ देख रही थी…कामदेव..की गिरफ़्त में पूरी तरह से खोने लगी थी…उसके शरीर में मानो आग निकल रही हो…शास की हर हरकत पर उसके शरीर में झुर्झुराहट हो जाती थी और अब दीदी की खुली चिपचिपाती चूत ऑर उस पर शास का सहलाता हुआ हाथ….आग में घी डालने का काम कर रहा था…..ना जाने कुसुम के अपने ही हाथ अपनी चुचियों पर और चूत के ऊपर जा चुके थे….ऑर आवाज़ के साथ चलती तेज साँसें…गरम ऑर गुलाबी चेहरा….पानी छोड़ती हुई चूत….आआअहह….अब क्या करे…मस्ती में खोती कुसुम एक अजीब सा अनुभव जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी….ऑर अब????
शास ने संतोष बुआ की चूत पर अपना मुँह रख दिया था….कुसुम की तो मानो जान ही निकल गयी थी…मानो कोई उसके शरीर को निचोड़ रहा हो….देख देख कर ही उसका शरीर अब अजीब से समुंदर में डूबता जा रहा था….अपनी चूत ऑर चुचियों पर अब अपने हाथ ही उसे शास के हाथ महसूस होने लगे थे…..उत्तेजना अपने चर्म को छूने चली थी…इस अजीब अनुभव का आज पहला दिन…पहली बार…
उसका शरीर अकड़ने लगा…शास…संतोष बुआ की चूत को जिस मस्ती सा चाट रहा था….कुसुम की निगाहें नहीं हट पा रही थी….उसे लग रहा था मानो शास की जीब उसकी चूत में अंदर तक जा रही थी…आआआहह……..एक मदहोशी में….अंजाने में है….सब भूल चुकी थी अब कुसुम….उसने पहले कई बार फ्रेंड्स से सुना था….पर आज तो मानो उस पर से अपना नियंत्रण पूरी तरह से हट चुका था….जवानी की डगर…छलकता सबाब..अंग अंग मदहोश होता हुआ….आआअहह….सब कुछ उसके नियंत्रण से बाहर जाता हुआ .
जिस कुसुम ने आज तक किसी लड़के से बात करना भी गंवारा नहीं किया था….आज वो खुद…वासना की कश्ती मे सवार सभी मर्यादाओं को तोड़ कर खुद अपने कपड़े उतारने लगी थी….उसे आज ये भी परवाह नहीं थी…कि शास…उसके सामने ही उसकिे बड़ी दीदी की चूत को चाट चाट कर चूत के टपकते हुए पानी का आनंद ले रहा है वो उसे रोक दे या खुद वहाँ से चली जाए बल्कि…उसने खुद पैंटी ऑर ब्रा को छोड़ कर खुद ही अपने कपड़े उतार दिए थे…
.शास की नज़र उस पर पड़ी .….मानो सामने मेनका बैठ कर उसे ही देख रही हो….आआअहह…कामुकता का जहर अब उस रूम में पूरी तरह से घुल चुका था….संतोष की चुचियों को दबा दबा कर उसकी चूत को अंदर तक चाट्ता ऑर चूस्ता शास….अकड़ते हुए शरीर…आता हुआ तूफान….उछलता हुआ समुंदर….आआआआआआवउुुुुुुुुुुुउउम्म्म्मममममममाआआऐईईईइससस्स्स्स्सिईईईईईईईईईईईईईईईईईईय्ाआआआ
दो चुतो ने एक साथ पानी छोड़ दिया….उनके शरीर अकडे हुए थे साँसे नियंत्रण से बाहर थी…आँखें बंद…..बँधे हाथ….कुसुम ने ज़ोर से मुठियाँ भींच ली थी…ऑर संतोष ने शास के सर को इतनी ज़ोर से अपनी चूत पर दबाया कि मानो आज वो शास को सिर समेत अंदर लेने का प्रयास कर रही हो…ऑर शास का पूरा चेहरा….सन गया था…चूत के पानी से….और कुसुम की पैंटी से चूत के पानी की टपकती हुई बूंदे….आआआआहह….लिखते लिखते…मेरा खुद का लंड पानी छोड़ने आमादा है…शायद अभी मुझे खुद को भी…खाली करना पड़ेगा…आप सोच सकते है दोस्तों वो पल…चारों ओर गरम साँसे…लंबी लंबी…ऑर नीचुड़ते हुए दो शरीर…आआआआअहहुउऊुउउईईईईईईईईईुुुुउउईईईइससस्स्सिईईईईएंमम की धुन…ऑर काँपते बदन….शिरफ़…सिसकारियों की धुन ऑर अपनी लंबाई में ऐनठे हुए शरीर….चुतो से बहता हुआ पानी….कि तभी अचानक शास का एक हाथ बढ़ा ऑर कुसुम की सॉलिड…ठोस…घायल करती हुई…चुचि पर जा ठहरा…..था……ऑर एक ऑर ज़ोर की सिसकरिी…..उूुुुउउईईईआआाअहहस्स्स्सिईई
शास…..अभी भी संतोष की दोनो टाँगों को ऊपर उठाकर उसकी चूत को मस्ती में चाट रहा था…संतोष बुआ की चूत ऐसे लग रही थी जैसे किसी अधखिले गुलाब की गुलाबी पंखुड़ियाँ खुली हुई हों…उसे अब टपकता पानी स्वादिष्ट ओस की बूँदों की तरह से चमक रहा था…संतोष की चूत अभी भी खुल- बंद होकर अपनी चूत की अंतिम बूँद को बाहर निकालने का प्रयास कर रही थी…शास ने एक बार फिर चूत को देखा….वाह क्या गुलाबी चूत थी…ऑर एक बार फिर अपनी जीब संतोष की चूत में घुसा दी…बुआ एक बार फिर सिसक पड़ी….शास की जीब बुआ की चूत में अंदर बाहर होकर उसकी चूत को चोद रही थी…ऑर बुआ भी सातवे आसमान में स्वर्ग की सैर कर रही थी….बुआ की चूत अभी भी टाइट ऑर कुँवारी चूत जैसी ही महसूस हो रही थी….इसी लिए उसकी सुगंध ऑर टेस्टी पानी ने शास को भी मदहोश कर दिया था….
कुछ देर के बाद संतोष बुआ का शरीर ढीला हुआ…और शास की ओर देखा जो उसकी चूत में दन दना दन जीब घुमा रहा था… ऑर शास का पूरा मुँह उसकी चूत के पानी से अभी तक सना हुआ था….बुआ मुस्कुरा दी…तभी बुआ को शास के लंड का ख़याल आया…उसे याद था कि पहली बार शास ने अंजान होते हुए भी उसकी चूत की जो मस्त चुदाई की थी जिसे वो आज तक नहीं भूली थी….
संतोष ने अपना हाथ बढ़ाकर शास के लंड को पाजामे के ऊपर से ही पकड़ लिया….एक बार तो उसके पैरों के नीचे की मानो ज़मीन ही खिसक गयी हो…हहााया राम….इतना बड़ा…लंड….पर उसने सोचा कि शायद कपड़े होने की वजह से उसे कुछ ज़्यादा ही बड़ा नज़र आ रहा है….
संतोष….शास…अब ज़रा अपने लंड के भी तो दर्शन करा दो…बहुत दिन हो गये है….उसके दर्शन किए हुए……
कुसुम…दीदी वो तो बेचारा अपने ही पानी में नहाया हुआ सोया पड़ा होगा…
शास…हाँ बुआ क्यूँ नहीं…ये लंड तो सबसे पहली बार आपने ही देखा था…आपने ही इसका इस्तेमाल बतया था…ऑर पहली बार आपकी चूत में ही घुसा था….इस पर पहला हक़ भी तो आपका ही है….आप जब चाहे…जैसे चाहे देख ले….या जब चाहे इस्तेमाल कर लें
कुसुम…क्या कपड़ो से बाहर निकालने में शर्म आ रही है…लाओ में निकाल देती हूँ दीदी इसे तो शर्म आ रही है….ऑर इसका लंड भी कहीं दूबका पड़ा होगा…..ये कहते कहते कुसुम ने शास का पाजामा नीचे खिसका दिया…..
पर पाजामे के नीचे होते ही कुसुम के होश उड़ गये…उसने देखा कि शास का लंड उसके अंडरवेर में से बाहर झाँक रहा है…उसकी उम्मीदों से कहीं ज़्यादा लगभत 4 गुना ज़्यादा बड़ा ऑर मोटा ऑर लंबा लंड…..उसने तो सोचा था कि -4-5 इंच का होगा….ऊऊफफफफ्फ़ पर ये क्या….ये लंड है या कोई भयंकर हथियार…..उसके तो होश ही उड़ गये….भला इस लंड को कॉन औरत अपनी चूत में डलवाकर उसका सत्यानाश करेगी…..कुसुम के चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही थी…..उसकी साँसे जहाँ की तहाँ रुक गयी…..
संतोष…क्या हुआ कुसुम…तुम्हारा चेहरा क्यूँ उतर गया…क्या शास का लंड वाकई में ही सोया पड़ा है….
कुसुम….हड़बड़ाकार…नहीं दीदी….ये लंड कहाँ…ये तो गधे घोड़े से भी बड़ा है इसे लंड कहूँ या लन्डाअ….बाप रे बाप भला इस लंड को कॉन औरत ले पाएगी….दीदी ये शास अभी तक हमें बेवकूफ़ बना रहा था…
शास…क्यूँ….संतोष बुआ क्या मेने अभी तक कुछ कहा था…ये खुद ही ना जाने क्या क्या बोल रही थी…मेने तो अभी तक कुछ भी नहीं बोला था…
संतोष..एक साथ उठ बैठी…उसकी आँखें भी शास के लंड को देखकर फटी की फटी रह गयी….अभी कुछ दिनो पहले ही तो वो शास से चुदि थी…तब तो ये इतना ख़तरनाक नहीं था….फिर कुछ ही दिनो में ये कई गुना बड़ा कैसे हो गया है….
शास….क्या हुआ बुआ…आपने तो पहले भी देखा है…आप क्यों ऐसे देख रही है…..जैसे पहली बार देख रही हो…..
संतोष…हाँ शास इस लंड को तो आज पहली बार ही देख रही हूँ…जो लंड उस दिन मेने देखा था…वो तो इससे आधा ही था इसे क्या हुआ शास ….
यक़ीन मानिए दोस्तों आज संतोष ऑर कुसुम दोनो के चेहरे पर ना जाने कितने विचार आ जा रहे थे…संतोष खुद भी हैरान थी…कुछ ही दिन पहले ही उसने खुद इस लंड को खड़ा किया था….खुद अपने हाथो से अपनी चूत में घुस्साया था…पर आज तो ये लंड उस दिन से दुगना हो चुका है….
हर औरत की तमन्ना होती है कि उसे एक मोटा मस्टंड लंड चोदे…पर आज संतोष ऑर कुसुम की पानी छोड़ती हुए चूत ही शांत हो गयी थी…
शास…क्यूँ घबरा रही है बुआ…इसको आपने पहले भी अपनी चूत में डाला है….ऑर आज भी कोई परेशानी नहीं होगी….ये कहकर शास ने फिर से संतोष बुआ को अपनी ओर खींच कर अपनी बाहों में भर लिया…ऑर बेतहाशा चूमने लगा…..