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Guest
पता नही मैं उस अंजान इंसान के लिए क्यो रोने लगा था ....और मैं उसे हॉस्पिटल जाने को कहने लगा....पर वो मुझे बात सुनने को बोलने लगा ..
मैं- चलिए ना..प्ल्ज़्ज़
अननोन- बेटा...तुम ये की लो और ***** बॅंक मे जाना. .
मैं - आप चुप रहो ..कुछ नही होगा आपको..
अननोन- बेटा ...तुम्हारे दुश्मन बहुत ख़तरनाक है...वो नही चाहते कि तुम्हे कुछ पता चले...आअहह
मैं - की ले ली मैने...मैं जाउन्गा बॅंक मे पर आप अभी हॉस्पिटल चलिए प्ल्ज़
अननोन- नही बेटा मैं नही बचूँगा....तुम बॅंक लॉकर से सामान ले लेना...आअहह..उस से तुम्हे सब समझ आ जायगा....आअहह
मैं- हाँ ले लूँगा..पर आप..
अननोन- अब मेरा काम ख़त्म...जो मैं बताने वाला था..वो सब लॉकर मे है...आहह
मैं- ओके...पर अभी आपको बचना है...
मैने उसे उठना चाहा पर उसने फिर से मुझे बैठा दिया...
मैं- आप चलिए ना...
अननोन- बेटा मेरी बात सुनो...
मैं- हाँ बोलिए
अननोन- लॉकर की बात किसी को मत....आअहह बताना...तेरे बाप को भी नही.....
मैं- ठीक है..पर आप
अननोन- और मेरे बारे मे किसी को पता ना चले..
मैं - नही चलेगा ओके..
अननोन- सबसे सतर्क रहना बेटा.... मेरा काम पूरा...आअहह
इससे पहले की मैं कुछ कर पाता उस अननोन इंसान ने दम तोड़ दिया....और मैं कुछ नही कर पाया...
उसके मरने के बाद मुझे डर लगने लगा और मैं उसके हाथ से की लेकर वहाँ से उठ कर अपनी कार के पास आया और तेज़ी के साथ कार भगाते हुए अपने घर निकल आया.....
मैं कार को पूरी स्पीड से चलाते हुए घर आ रहा था….मेरी आँखो के सामने बस उस इंसान की खून से लत्फथ बॉडी ही नज़र आ रही थी…..
मुझे पता ही नही चला कि मैं कब घर पहुँच गया….
जैसे ही मैं घर पहुँचा तो कार से निकल कर सीधा रूम की तरफ भागने लगा…जैसे ही मैं हॉल से होकर निकल रहा था तो वहाँ सविता आई और रश्मि मुझे देख कर चौक गई जो कि वहाँ पहले से ही मौजूद थी …
जैसे ही उन दोनो ने मेरा चेहरा देखा तो दोनो डर गई…पता नही मेरे चेहरे का क्या हाल था…
सविता- क्या हुआ बेटा…कहाँ से आ रहा है…??
मैं- चुप रहा ..बस उन दोनो की तरफ देखने लगा..
सविता- क्या हुआ बेटा...ये क्या हाल बना रखा है...??
मैं- फिर से चुप रहा…मेरे मुँह से शब्द ही नही निकल रहे थे…
रश्मि- सर कुछ तो कहिए…कोई आक्सिडेंट हुआ क्या…??
मैं- आई माँ….आई माँ….
सविता- बोल ना बेटा क्या हुआ...
आज मैने सविता को आई माँ कह कर बोला था…जो मैं उन्हे चोदने के बाद कम ही कहता था….
मैं आई माँ कहकर चुप हो गया और मेरी आँखो से आँसू निकलने लगे…
सविता और रश्मि मुझे रोता हुआ देख कर ज़्यादा ही डर गई और सविता तो खुंद भी रोने लगी…
सविता- क्या हुआ बेटा…कुछ ग़लत हुआ क्या…बता मुझे…
रश्मि- हाँ सर…बोलिए….मैं बड़े सर को कॉल करती हूँ…
मैं- नही…नही कॉल मत करना ..किसी को….
सविता- ठीक है बेटा कोई कॉल नही करेगा...तू मुझे बता क्या हुआ....कुछ भी हुआ होगा ..मैं संभाल लूगी...
मैं उन दोनो की बात सुनकर थोड़ा रिलॅक्स ज़रूर हुआ , पर मेरे गले से कोई शब्द नही निकल रहे थे....और मैं अपने रूम मे भाग कर आ गया...
रूम मे आते ही मैं बेड पर लेट गया और फिर से उस आक्सिडेंट के बारे मे सोचने लगा....कि अचानक ये कैसे हो गया..वो इंसान कौन था...उसके दुस्मन कौन थे...क्या ये एक आक्सिडेंट ही था या एक प्लॅंड मर्डर...
वहाँ नीचे मेरी ऐसी हालत देखने के बाद और मेरे भाग कर आने के बाद सविता और रश्मि बाते करने लगी…
रश्मि- सविता आई…ये क्या हुआ सर को…
सविता- पता नही रश्मि…पर कुछ तो बुरा हुआ है…मेरा बेटा..
रश्मि- उनकी हालत ठीक नही है…
सविता- लगता है कुछ बड़ी बात हुई है..वरना मेरा बेटे की ऐसी हालत नही होती..
रश्मि- अब हम क्या करे ..बड़े सर को बताए क्या…???
सविता- नही-नही…उसने मना किया है ना…
रश्मि- पर हमे बड़े सर को बताना होगा....कही कुछ बड़ी बात हो गई तो बड़े सर तो हमे ही कहेगे ना कि हमने उनको क्यो नही बताया...
सविता- बोला ना नही...मैं पहले उससे बात कर लूँ..फिर देखेगे कि बड़े सर को कहें कि नही...
रश्मि- ठीक है जैसा आप कहो..पर अभी क्या करे..
सविता- मैं उपेर अंकित बाबा के पास जाती हूँ...तू एक काम कर कॉफी बना के ले आ जल्दी..
रश्मि- ठीक है..आप जाओ..मैं कॉफी लाती हूँ….
यहाँ रूम मे , मैं उस इंसान की बातो को सोच रहा था कि उसने ये क्यों कहा कि मैं किसी को कुछ ना बताऊ यहाँ तक की डॅड को भी….क्या चाहता था वो…और उस लोकर मे ऐसा क्या है…???
तभी सविता मेरे रूम मे आ गई…अब तक मैने रोना बंद कर दिया था फिर भी मेरे चेहरे का हाल बुरा दिख रहा था…
सविता- बेटा क्या हुआ…???
मैं(मन मे)- ये मैने क्या किया ..इनके सामने ऐसे कैसे टूट गया…ये डॅड को ना बता दे…इन्हे सच तो बता नही सकता…कुछ तो बताना होगा …
सविता- बोलो ना बेटा ..मुझे तो बताओ..ऐसा क्या हुआ..???
मैं(बड़ी मुस्किल से शब्द ढूंड कर बोला)- वो आई माँ…वो…मैने…
सविता- हाँ बेटा बोल ना...
मैं- वो ..आई माँ..मैने एक आक्सिडेंट..
सविता मेरी बात सुनकर मेरे बेड पर आ गई और मुझे गले लगा लिया..
सविता- तुझसे आक्सिडेंट हो गया बेटा….
मैं- नही आई माँ…मैने बस आक्सिडेंट देख लिया…
सविता- हे भगवान तेरा लाख-लाख धन्याबाद....मुझे लगा कि तूने आक्सिडेंट कर दिया है...
मैं- नही आई माँ...मैने...एक आक्सिडेंट देखा है...
सविता-किसका बेटा...*??
मैं- पता नही कौन था...मैं नही जानता...
सविता- भूल जा बेटा...भूल जा...तू उसके बारे मे मत सोच...
मैं- आई माँ…मुझे डर लग रहा है…
सविता- डर मत बेटा ..मैं हूँ ना...तू बिल्कुल मत डर...
सविता मुझे अपने सीने से लगाए हुए थी..और मेरा मुँह उसके बड़े-बड़े बूब्स पर था पर आज मेरे मन मे कोई भी ग़लत भावना नही आ रही थी..आज मुझे सविता के अंदर वही पुरानी आई माँ दिख रही थी...
सविता- भूल जा मेरे बच्चे...तू रोना मत ओके...
मैं- ह्म्म आई माँ मुझे नीद आ रही है…
सविता – सो जा बेटा..सो जा…थोड़ी देर मे सब ठीक हो जायगा…
ऐसे ही सविता के सीने से लगे हुए मैं सो गया ..मुझे पता ही नही चला…फिर करीप 40-45 बाद मेरी आँख खुली तो मैं वैसे ही सविता के सीने पर सिर रख कर पड़ा था और सविता मेरा सिर सहला रही थी….