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चूतो का समुंदर



मैने रक्षा को बाहों मे भरा और उसके सॉफ्ट होंठो को अपने होंठो मे भर के चूसने लगा....और हाथ से उसके बूब्स दवाने लगा....

रक्षा भी कम नही थी...और वो मेरे लंड को पेंट के उपेर से सहलाने लगी...जो कि पहले से ही खड़ा था...

फिर मुझे एक ख़याल आया और मैने रक्षा को छोड़ा और बोला...

मैं- मेरी गुड़िया... लंड चुसेगी...??

रक्षा- आप पूछ क्यो रहे है...आप बस कहो...मैं हमेशा रेडी हूँ...

मैं- तो गेट बंद कर ...

रक्षा ने गेट लॉक किया और मैने लंड बाहर निकाल लिया...

मैं- आजा बेटा...जल्दी से चूस दे...

रक्षा ने जल्दी से मेरा लंड पकड़ा और थोड़ा सहलाया ...लंड फिर से पूरा कड़क हो गया...

रक्षा- भैया...ये तो पूरा तैयार है...और गीला भी...

मैं- तुझे देख कर खड़ा हो गया...और ये पानी...इसी से निकला होगा...अब तू बाते छोड़ और जल्दी से शांत कर दे इसे...

रक्षा ने लंड को मुँह मे भरा और बड़े प्यार से चूसने लगी....

मैं(मन मे)- क्या बात है...आज तो लंड की किस्मत मे दो-दो मुँह आ गये....पहले पूनम और अब रक्षा ..वाह...

रक्षा- सस्स्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प....उूउउम्म्म्म.....उूउउंम्म...उउउंम्म....

मैं- आहह ..ज़ोर से बेटा...जल्दी कर...और तेजज्ज़...आहह...

मैं जल्द से जल्द झड जाना चाहता था पर इससे पहले कि मैं झड़ता बाथरूम का गेट खुलने की आवाज़ आई...

रक्षा(लंड को मुँह से निकाल कर)- अनु आ रही है भैया...मर गये...

मैं- डर मत ..तू बाहर जा..इसे मैं देखता हूँ...

रक्षा- हमम्म..

और रक्षा जल्दी से रूम से निकल गई....

तभी बाथरूम का गेट खुला और अनु टवल मे मेरे सामने आ गई....

अनु मुझे देखते ही चौंक गई....और साथ मे उसकी आँखे भी फैल गई...

अनु- ये क्या...आप ऐसे...ये बाहर निकाल कर क्यो बैठे हो...

मैं- बस मेरी जान तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था....

अनु- पर आपको ऐसे किसी ने देख लिया तो...

मैं- गोली मारो दुनिया को...प्यार किया तो डरना क्या...

अनु(मुस्कुराते हुए)- आप डायलॉग कब से मारने लगे...ह्म्म्म

मैं- वो सब छोड़ो...अभी मुझे शांत करो...देखो मेरा लंड फुल फॉर्म मे है...

अनु(मुस्कुराते हुए)- हम्म...तो आओ फिर...आपको जन्नत का मज़ा देती हूँ...

मैने उठ कर अनु के पास पहुचा और अनु ने टवल निकाल दी और बाहें फैला कर मुझे बुलाने लगी....

मेरा भी मूड बना हुआ था...मैने अनु को अपनी बाहों मे कस लिया...

फिर हम एक दूसरे को चूमने लगे..

 


अनु का जिस्म अभी भी सूखा हुआ था...मतलब अभी तक उसने नहाया नही था...

मैं(किस छोड़ कर)- तुमने नहाया नही...

अनु- अरे शम्पू ख़त्म हो गया ...वही लेने आई थी..और आप मिल गये...

मैं- ह्म्म..तो एक काम कर अभी मेरा लंड चूस कर झडा दे....टाइम कम है...जल्दी...

अनु- ह्म्म..अभी करती हूँ...

अनु भी झुक कर मेरे लंड को चूसने लगी और मेरे लंड को तीसरा मुँह मिल गया....

मैं- आहह...जल्दी कर मेरी जान...

अनु(लंड मुँह से निकाल कर)-ये गीला क्यो है..

मैं- वो ...मैं थूक लगा कर हिला रहा था...तू चूस ना...

अनु ने फिर से लंड मुँह मे भर लिया और चूसने लगी...

तभी रक्षा अनु का नाम पुकारते हुए रूम की तरफ आ रही थी...

मैं(मन मे)- इसकी माँ का...ये वापिस क्यो आ गई...

अनु ने रक्षा की आवाज़ सुनी तो मुझे पीछे करके बाथरूम का गेट लगा लिया...

मैं अनु का डर समझ गया और मैं भी बेड पर जा कर बैठ गया.....

तभी रक्षा रूम मे आ गई और मुझे देख कर बोली...

रक्षा- आप जबसे ऐसे ही बैठे है...अनु ने नही देखा...

मैं- वो बाहर ही नही आई...हाँ ...वो शॅमपू माँग रही थी...तो मैने बोल दिया कि रक्षा आ रही है तो दे देगी...

रक्षा- ओह...मैं दे देती हूँ...

रक्षा , अनु को आवाज़ दे कर शम्पू देने लगी और मुझे रक्षा पर गुस्सा आने लगा...साली थोड़ा और रुक जाती तो मेरा काम हो ही जाता...

फिर रक्षा मेरे पास आई..और बोली...

रक्षा- चलो आपका काम पूरा कर दूं...पर पहले गेट लगा देती हूँ..

रक्षा गेट लगाने गई और मैने सोच लिया कि अब तो इसे सबक सीखा कर ही जाउन्गा...साली की वजह से मेरा लंड दर्द करने लगा...अब तो इसकी फाड़ के जाउन्गा...

रक्षा- लाइए भैया...आपको शांत कर दूं...

मैं- अब तो तेरी चूत चाहिए इसे...

रक्षा(मुस्कुरा कर)- पर अनु आ गई तो...

मैं- तो उसकी भी फाड़ दूँगा...चल पहले तेरी फाड़ने दे...

रक्षा- हहहे...ठीक है...आपका हुकुम सिर आँखो पर...अभी लो...

और रक्षा ने देखते ही देखते अपने कपड़े निकाल दिए...

रक्षा- अब जो चाहे करो...मुझे किसी का डर नही...

मैं रक्षा की दिलेरी देख कर थोड़ा शॉक्ड था...पर इस समय तो मुझे लंड को शांत करना था..इसलिए मैने सब भूल कर उसे चोदने का दिसाइड किया और उसको गोद मे खीच कर चूमने लगा.....

अब मैं सब भूल कर रक्षा की चुदाइ करना चाहता था....

थोड़ी देर तक मैं रक्षा को चूस्ता रहा...कभी उसके होंठ...कभी उसके बूब्स...और रक्षा भी मेरे लंड को हिलाती रही....

मैं- इउम्म..रक्षा...कहीं अनु आ गई तो...

रक्षा- वो नही आ सकती भैया...

मैं- क्यो मेरी जान...

रक्षा- एक तो उसे काफ़ी टाइम लगता है नहाने मे और फिर मैने बाथरूम को लॉक जो कर दिया...हहहे....

मैं- कमीनी....तो अब खोल दे अपनी चूत...

मैने रक्षा को बेड पर पटका और अपने कपड़े निकाल कर नंगा हो गया...

रक्षा ने उठ कर एक बार मेरे लंड को मुँह मे भर के चूसा और फिर कुतिया के पोज़ मे आ गई...

रक्षा- आओ भैया...

मैने भी जल्दी से लंड को उसकी चूत पर सेट किया और कमर पकड़ कर जोरदार धक्का मारा...

आधा लंड रक्षा की चूत मे घुस गया....उसकी चूत सुखी हुई थी इसलिए उसको थोड़ा दर्द हुआ....

रक्षा- आहह....भैयाअ...आराम से...

मैं- सस्शीईए.....धीरे....आवाज़ मत करना...

और फिर मैने दूसरे धक्के मे पूरा लंड चूत मे उतार दिया....

रक्षा- उूुउउम्म्म्म......आआहह...आअहह...

मैं- बस बेटा...अब मज़ा ले...

और मैने उसकी कमर पकड़ कर जोरदार चुदाई शुरू कर दी....

रक्षा- उउंम..उउंम...आआहह...आहह...आअझह...

मैं- यीह बेबी....एस्स...एस्स..आहह...

रक्षा- आहह...उउंम...उउंम्म..आआईइ....

थोड़ी देर तक रक्षा को चोदते हुए मेरी नज़र उसकी गान्ड पर टिक गई...और मैने लंड बाहर निकाल लिया...

रक्षा- क्या हुआ...

मैं- तेरी गान्ड मारनी है...

रक्षा- अभी..

मैं - हाँ ..अभी...

और मैने रक्षा को पलटा कर सीधा किया और पास मे खीच कर उसके दोनो पैरो को हवा मे उठा लिया..और लंड सेट करके एक हल्का धक्का मारा...

लंड का सुपाडा रक्षा की गान्ड मे घुस गया और वो तड़प उठी...

रक्षा- आआहह...भाइय्याअ...

मैं- बस बेटा...थोड़ा और...ये ले...

और दूसरे धक्के मे आधे से ज़्यादा लंड उसकी गान्ड मे चला गया....

मैने उतना लंड अंदर डाले ही रक्षा की गान्ड मारना शुरू कर दी...

रक्षा- आहह...आहह...आहह...भैयाअ...

मैं- बस बेटा...मज़ा ले...यह...यीह...

मैं थोड़ी देर तक आराम से गान्ड मारता रहा और फिर मैने स्पीड बढ़ा दी...

मैं- यस...बेटा...बस...थोड़ा और...हो ही गया...यीहह...

रक्षा की चूत भी अब झड़ने को बेताब हो रही थी...

रक्षा ने अपने हाथ से अपनी चूत मसलना शुरू कर दी..और मैं फुल स्पीड मे उसकी गान्ड मारने लगा...

थोड़ी देर की ठुकाइ के बाद रक्षा झड़ने लगी....

रक्षा- भैया...मेरा....हो गया...आअहह..आहह....आअहह...

रक्षा के झड़ने से साथ ही मैं भी झड़ने लगा....

मैं- मैं भी गया बेटा...एसस्स...एस्स..आअहह....ऊहह...आआहह......

मैने पूरा लंड रस रक्षा की गान्ड मे भर दिया और उसके साइड मे लेट गया...रक्षा भी टांगे पसार कर लेट गई...

थोड़ी देर बार हम नॉर्मल हुए और तभी अनु ने बाथरूम से आवाज़ दी...

हम ने जल्दी से कपड़े पहने और रक्षा ने बाथरूम का गेट खोल दिया...

फिर अनु रूम मे आ गई...अब वो कपड़े पहन कर आई थी...

अनु के आते ही रक्षा बहाना कर के निकल गई और मैं अनु से बातें करने लगा...

अनु मेरे दूर जाने से गुस्सा थी...पर मैने उसे प्यार से समझ दिया और उसे जल्दी नीचे आने का बोल कर मैं नीचे निकल आया.....

नीचे जाते हुए मैं बहुत खुश था और सोचा रहा था कि....

आज तो मज़ा आ गया...तीन लड़कियों ने बारी-बारी मेरे लंड को चूसा और फिर चूत और गान्ड भी चख ली....मज़ा आ गया....

अब मैं हल्का महसूस कर राजा था...और सोच रहा था कि अब सफ़र मे मज़ा आएगा....

यही सोच कर मैं नीचे आ गया....

नीचे पूनम और संजू रेडी थे...थोड़ी देर बाद अनु भी नीचे आ गई....

फिर हमने नाश्ता किया और अकरम के घर जाने लगे...तभी अकरम का कॉल आ गया...

(कॉल पर)

मैं- हाँ भाई...हम आ ही रहे थे...

अकरम- ओके...जल्दी आ...और हां..मेरी गर्लफ्रेंड को पिक करते आना..वो मार्केट मे *** की शॉप पर है...

मैं- पर तू खुद क्यो नही गया उसके पास और वो वहाँ क्या कर रही है...

अकरम- भाई मेरे...वो घर पर ये बोल के आ रही है कि वो अपने फरन्डस के साथ जा रही है...इसलिए वहाँ खड़ी है...और मैं थोड़ा बिज़ी हू इसलिए तुझसे बोला...

मैं- ओके..लाता हूँ तेरी अमानत...साले

आलराम- हजहा..ओके भाई ..जल्दी आ...

फिर फ़ोन रख कर.. हम सभी को बाइ बोल कर अकरम के घर निकल गये...

जब हम अकरम की गर्लफ्रेंड को पिक करने पहुचे तो वहाँ सिर्फ़ एक लड़की खड़ी थी...

मैं समझ गया कि ये वही होगी...

 


वो तो पटाका थी यार...मैं सोचने लगा कि ये अकरम से कैसे पट गई साली...

जैसे ही मैने कार रोकी तो वो मेरे पास आ गई...

मैं- तुम रूही हो...??

रूही- हां...और तुम अंकित

मैं- ह्म्म..अंदर आ जाओ...

रूही को पिक करके हम अकरम के घर पहुच गये.....

वहाँ पर सब लोग रेडी थे बस अकरम के मोम-डॅड और उनके फरन्ड की फॅमिली नही दिख रही थी ..और अकरम की मौसी भी नही आई थी...

हॉल मे अकरम, ज़िया , जूही और गुल खड़े हुए थे...

हमे देखते ही सब आपस मे मिले...जूही भी पूनम को देख कर खुश हो गई...दोनो पुरानी फरन्ड जो थी...

फिर हम यू ही गप्पे करते रहे ....तभी ज़िया ने मुझे उपेर चलने को कहा...

मैं ज़िया के साथ उपर निकल गया...पर ये बात शायद जूही को अच्छी नही लगी और वो मुझे घूर के देखने लगी...वही गुल उस समय मुस्कुरा रही थी...

उपेर जाते ही ज़िया मुझे अपने रूम मे ले गई...

मैं- यहाँ किस लिए लाई हो...

ज़िया- तुम्हे कुछ दिखाना था...और पूछना भी था...

मैं- अच्छा...तो बताओ फिर...

ज़िया- ह्म्म..पहले ये बताओ कि तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है...

मैं ज़िया के मुँह से ऐसी बात सुनकर थोड़ा चौंका...पर मुझे पता था कि ये काफ़ी मॉर्डन है..इसलिए उनकी बात को नॉर्मल ही लिया...

ज़िया- बोलो ना...

मैं- ह्म्म..गर्लफ्रेंड तो नही है...

ज़िया- अच्छा...तब तो तुम परेसान रहते होगे...गर्मी बढ़ती है ना...हहहे ..

मैं- अरे यार...

ज़िया- बताओ..फरन्ड समझ कर बात करो...

मैं- ऐसा है तो सुनो...मैं गर्मी मिटाने के लिए गर्लफ्रेंड बनाता हूँ...फिर गर्लफ्रेंड अपने रास्ते और मैं अपने रास्ते...

ज़िया- ओह हो...काफ़ी स्मार्ट हो...

मैं- आपसे ज़्यादा नही...

ज़िया- ह्म..तो एक काम करो इस टूर मे मेरे बाय्फ्रेंड बन जाओ..

मैं- ह्म..सोच लो...मैं गर्लफ्रेंड को बहुत परेसान करता हूँ ...

ज़िया- तभी तो गर्लफ्रेंड बनना है तुम्हारी...अब बोलो...

मैं- सच्ची..आप तो मुझसे भी आगे हो..

ज़िया- वो तो है...मैं लाइफ के मज़े लेने मे बिलिव करती हूँ...तो बोलो...बनॉगे मेरे बाय्फ्रेंड..??

मैं- आप जैसी लड़की को ना कौन कह सकता है...

ज़िया- ह्म्म तो मुझे आप मत बोलना...समझे ना...

मैं- अब तो तू बोलुगा...तू मेरी जो है..पूरे टूर मे तेरे पूरे मज़े लुगा...

ज़िया मेरे पास आई और मेरे होंठ पर हल्के से किस किया...

ज़िया- जो चाहे करना...पर ध्यान से...हम अकेले नही वहाँ...

मैं- ह्म्म..सही कहा...अब ये बताओ कि और क्या बताना है...

ज़िया- हाँ...ये देखो...इनमे से कौन सी ड्रेस पहनु...

मैं- ह्म..ये ...स्कर्ट वाली...मुझे मेरी गर्लफ्रेंड की गोरी जाघे देखने मिलेगी...हाहाहा...

ज़िया- ह्म्म..ठीक है..यहीं पहनती हूँ...

 
तभी गुल ने गेट पर नॉक किया...

गुल- आप दोनो जल्दी आइए सब आ चुके है...

ज़िया- ओके..तुम चलो..मैं चेंज करके आती हूँ...

फिर मैं गुल के साथ नीचे आ गया...वहाँ अकरम के मोम-डॅड और उनके फ्रेंड की फॅमिली आ चुकी थी...

मेरे आते ही अकरम के डॅड ने मुझे उनके फरन्ड की फॅमिली से मिलवाया ...

(अकरम की फॅमिली और उनके फरन्ड की फॅमिली का इंट्रो....आगे के कुछ दिन ..मुझे इनके साथ ही रहना है...)

अकरम की फॅमिली:

अकरम:-

वसीम ख़ान:- अकरम के पापा

सबनम:- अकरम की माँ

ज़िया:- अकरम की बड़ी बहेन

जूही:- अकरम की छोटी बहेन

शादिया:- अकरम की मौसी

वसीम ख़ान के दोस्त की फॅमिली.....

सरद गुप्ता:- वसीम का फरन्ड

मोना गुप्ता:- सरद की बीवी

मोहिनी गुप्ता:- सरद की बेटी

इनके अलाव भी 3 माल और हमारे साथ जा रहे थे.....

पूनम दीदी-संजू की दीदी

गुल- अकरम की कज़िन

रूही- अकरम की गर्लफ्रेंड

फिर हम सब अकरम की मौसी का वेट करने लगे...तभी जूही ने मुझे साइड मे बुलाया...

मैं- हाँ जी..क्या बात है...

जूही- ये बताने की आज तो हीरो दिख रहे हो...

मैं- अच्छा...पर तुमसे कम..तुम तो क़हर ढा रही हो..

जूही- अच्छा ....तो बोला क्यो नही...मेरे बोलते ही तारीफ करने लगे...

मैं- ऐसा कुछ नही....बस टाइम ही नही मिला...

जूही- हाँ...टाइम कैसे मिलगा...दीदी के साथ तो निकल गये थे...

मुझे जूही की आँखो मे जलन दिख रही थी..बट मैने इग्नोर किया...

जूही- वैसे...क्यो गये थे दीदी के साथ...

मैं- वो..बस ऐसे ही...वो अपनी ड्रेस दिखा रही थी...

जूही(घूरते हुए )- सच मे...सिर्फ़ ड्रेस ही दिखाई या....

तभी अकरम की आवाज़ आई...

अकरम- ये लो...मौसी आ गई...

अकरम की मौसी के आने का सुनकर हम भी आगे बढ़े...

लेकिन अकरम की मौसी को देख कर मैं सुन्न पड़ गया...और मुझे देख कर अकरम की मौसी भी सन्न रह गई...और हम एक दूसरे को देखते हुए खड़े रहे.....

अकरम की मौसी को देख कर मेरा माइंड घूम गया पर दिल खुश हो गया....

ये तो वही थी ..जिनको मैने मसाज दिया था उस रात...और साथ मे जी भर कर चोदा भी था....

मैं और अकरम की मौसी थोड़ी देर तक एक-दूसरे को देखते रहे...तभी अकरम बोला...

अकरम- मौसी...ये मेरा फरन्ड है अंकित...और अंकित...ये है मेरी मौसी...शादिया....

मैं- हेलो मौसी जी...

शादिया- ह...हेलो बेटा...

फिर से एक बार सब बातों मे बिज़ी हो गये पर शादिया चोरी-चोरी मुझे देखती रही...

मैं जानता था कि उनके दिमाग़ मे मेरे लिए कई सवाल खड़े हो गये होगे...

जैसे कि..मैं पार्लर मे क्यों था...मैने मसाज क्यो की..एट्सेटरा..

मैने सोच लिया कि इस टूर पर इनसे बात करके सब समझा दूँगा...और इनके मज़े भी ले लूँगा....

फिर मैं शादिया के बारे मे सोच कर हमारे साथ जाने वाले माल को देखने लगा...

मेरे साथ टोटल 9 चूत वाली जा रही थी...उनमे से 2 शादी शुदा थी और बाकी 7 कुवारि...

शादिया की भी शादी नही हुई थी...पर मुझे पता था कि वो काफ़ी समय से चुदाई करवा रही है...

इतने मालो को देख-देख कर मेरी भूख बढ़ने लगी थी...सब कमाल दिख रही थी...और उनकी बॉडी मुझे अपनी तरफ खीच रही थी...

जैसे कह रही हो कि आओ और मज़े मार लो....

 


आइए आपको दिखाता हूँ कि वो किस तरह की लग रही थी...

1- सबनम (अकरम की मोम)

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2- शादिया (अकरम की मौसी)

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3- ज़िया (अकरम की बड़ी दीदी)

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4- जूही (अकरम की छोटी दीदी)

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5- गुल (अकरम की कज़िन)

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6- रूही (अकरम की गर्लफ्रेंड)

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7- मोना गुप्ता ( सरद की बीवी )

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8- मोहिनी गुप्ता (सरद की बेटी )

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9- पूनम दी ( संजू की दीदी )

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इन सब मालो को देख कर मेरा दिल और लंड दोनो खुश थे....अब बस इंतज़ार इस बात का था कि इनमे से कितनी मिल पाती है....

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मुझे मेरे सपनो की दुनिया से अकरम के डॅड की आवाज़ ने निकाला....

वसीम- चलो सब रेडी है ना...

अकरम- यस डॅड...ऑल सेट...

वसीम- ह्म..तो अपना सामान बाहर खड़ी बस मे रखवा दो...

वसीम के कहते ही सब खुस्फुसाने लगे...क्योकि अभी तक हम सब यही सोच रहे थे कि हम कार्स से जाने वाले है...

अकरम- बट डॅड..बस से क्यों...कार से चलते ना..

वसीम- देखो बेटा...बस मे सब साथ मे रहेगे...और फिर सफ़र लंबा भी तो है...

अकरम- लंबा...6-7 घंटे का तो है डॅड...

वसीम- अरे नही...हम दूसरी जगह जा रहे है...मेरे पुस्तैनि गाओं मे...और वो यहाँ से 19-20 घंटे का रास्ता है...

वसीम की बात सुन कर मुझे झटका लगा ..क्योकि अकरम ने मुझे पास वाले गाओं का बोला था...

मैं- क्या...इतनी दूर...पर अकरम तूने तो कहा था...कि...

अकरम(बीच मे )- सॉरी यार..मुझे भी कहाँ पता था...

वसीम- अरे बेटा...टेन्षन क्यो ले रहे हो...ये भी ज़्यादा दूर नही ...और ये गाओं तुम्हे पसंद भी आएगा...

ज़िया- हाँ यार...टेन्षन छोड़ो...और मज़े करने को तैयार हो जाओ...हहहे...

रिया का मतलब मेरे अलावा कोई नही समझा और मैने भी मुस्कुरा कर हाँ बोल दिया...मेरे हाँ बोलते ही संजू और पूनम ने भी हाँ कर दी....

फिर क्या था...सबने सामान रखवाया...और बस मे सवार होने लगे...

हमारे साथ 1 ड्राइवर और एक नौकरानी भी जा रही थी...

हमे निकलते हुए दोपहर हो चुकी थी...और रास्ता 20 घंटे का था....तो ये तय हुआ कि रात मे कहीं स्टे करेंगे...जिससे सफ़र मे थकान कम होगी....

सब लोग बस मे चढ़ने लगे...तभी मैने अकरम और संजू को अपने पास बुलाया...

मैं- कमीनो...अपना सामान रख लिया कि नही...

अकरम- हाँ साले...सब सेट है...तू चल तो सही...

बस बहुत ही बड़ी थी...और जैसे ही मैं बस मे चढ़ा तो देखा कि ये एक लग्षुरी बस थी...

बस को इस तरह डिज़ाइन किया गया था कि जिसमे सफ़र आरामदायक हो और लोगो की प्राईवेसी भी बनी रहे...

बस मे छोटे-2 कॅबिन बनाए गये थे...हर कॅबिन मे 2 बड़ी शीट्स थी जो आमने-सामने बैठने के लिए...और उन्हे फोल्ड करने पर वो बेड का काम करती थी...

ऐसे ही बस मे 6 कॅबिन थे...3 -3 दोनो तरफ....और कॅबिन्स के उपेर भी सोने का इंतज़ाम था.( लाइक स्लिपर )

उसके अलावा ड्राइवर के साइड मे एक लोंग शीट थी...और कॅबिन्स के आगे दोनो तरफ 2-2 शीट थी...उसके बाद कॅबिन थे...

पूनम , जूही, मोहिनी और रूही एक तरफ की शीट्स पर बैठ गई...

दूसरी तरफ की शीट्स पर गुल ,शादिया, मोना और सबनम ने क़ब्ज़ा कर लिया....

अब बच गया मैं, और ज़िया , अकरम और संजू...और वो नौकरानी...

मैं कुछ सोचता उसके पहले ही ज़िया मुझे ले कर एक कॅबिन मे चली आई...और अकरम और संजू दूसरे कॅबिन मे पहुच गये...

मैं- ज़िया..यहाँ क्यो लाई...

ज़िया- अरे यार नये - नये बाय्फ्रेंड बने हो...थोड़ा अकेले मे टाइम स्पेंड तो कर लो....

मैं- ओके...बट अभी तो सफ़र शुरू हुआ है...आराम से करेंगे ना...

ज़िया- आगे का किसे पता...कौन किसे पकड़ ले..हाँ...

मैं - मतलब...

ज़िया- मुझे सब पता है...सबको घूर के देख रहे थे ना...सबको सेट करने का इरादा है क्या...

मैं सोचने लगा कि ज़िया तो बहुत ही ओपन है...खुद ही अपनी माँ-बेहन के बारे मे ऐसी बात कर रही है...तो मैं क्यो पीछे रहूं....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..अभी तो सिर्फ़ अपनी न्यू गर्लफ्रेंड के मज़े लेना है..बाकी को बाद मे देखेंगे...

फिर मैने ज़िया को किस करने के लिए उसे आगे खीचा कि तभी जूही की आवाज़ आई..

जूही- अरे अंकित...यहाँ आओ ना..कहाँ छिप कर बैठ गये...

ज़िया- उफ़फ्फ़ हो...ये जूही की बच्ची...चलो ..नही तो वो यही आ जायगी..

मैं- गुस्सा नही यार...बहुत टाइम है अभी...आओ चले...

फिर हम दोनो बाहर आ कर बैठ गये...

सब लोग 2 की शीट पर 3 को अड्जस्ट कर के बैठे थे...

मैं- हाँ तो...अब क्या करना है...

जूही- अंताक्षरी खेलते है...( इंडिया मे सफ़र के दौरान खेला जाने वाला फेमस गेम)

मैं- ओके...

फिर हम थोड़ी देर तक अंताक्षरी खेलते रहे...पर 1 घंटे मे ही सबको आलस आने लगा और सब धीरे-धीरे कॅबिन मे सोने जाने लगे....

शादिया, सबनम और मोना 1 कॅबिन मे...

जूही, पूनम, मोहिनी और रूही एक कॅबिन मे...

ज़िया , गुल और नौकरानी एक कॅबिन मे...और हम तीनो लड़के एक कॅबिन मे....

इस तरह हम सब तीन कॅबिन मे फिट हो गये....सरद और वसीम अभी भी ड्राइवर के साथ वाली शीट पर थे...रास्ता बताने के लिए...

 


कॅबिन मे आते ही संजू ने ड्रिंक निकाली...और हम ने 2-2 पेग लिए...फिर सब रेस्ट करने लगे...

थोड़ी देर बाद ज़िया ने मुझे बुलाया और अपने साथ पीछे वाले कॅबिन मे ले आई...

मुझे ड्रिंक का थोड़ा सुरूर चढ़ ही गया था...तो मैने खुद ज़िया को बाहों मे भर के किस करना शुरू कर दिया...ज़िया भी पूरी मस्ती मे मुझे किस कर रही थी...

फिर मैने ज़िया को अपनी गोद मे बैठाया और किस करते हुए उसके बूब्स से खेलने लगा...

फिर मैने अपने हाथ ज़िया की स्कर्ट मे डाला और जागे सहलाते हुए उसकी चूत तक पहुच गया...

उसकी चूत पैंटी मे कसी हुई थी...पर पानी छोड़ चुकी थी...

मैने एक उंगली पैंटी के साथ ही चूत मे दबा दी...

ज़िया- उउउंम्म...उउंम्म..

मैने धीरे-धीरे ज़िया की चूत सहलाना चालू किया और ज़िया तेज़ी से मेरे होंठो को चूसने लगी...

करीब 10-15 मिनिट की मस्ती के बाद मैं बोला...

मैं- आअहह...अब कॉंट्रोल नही होता...अंदर का खजाना दिखा दो जल्दी से...

ज़िया- स्शही...अभी नही...यहाँ कोई भी आ सकता है...ऐसे ही मज़े करो...थोड़ा अंधेरा हो जाए ...फिर करेंगे...

मैं- अरे कोई नही आएगा...और आ भी गया तो पता नही चलेगा....

ज़िया- मतलब...

मैं तुम खड़ी हो...मैं बताता हूँ...

ज़िया खड़ी हुई तो मैने उसके स्कर्ट मे हाथ डाल कर उसकी पैंटी खिसका दी...और पैरो से अलग कर ली...

ज़िया- पर इससे क्या होगा...तुम्हारे कपड़े भी तो है...

मैं- अरे मैने लोवर पहना है...ये तो तुरंत चढ़ा लुगा...

ज़िया- ह्म्म..स्मार्ट बॉय..हाँ..

मैं- अब जल्दी करो..आओ मेरी गोद मे...

ज़िया मेरी गोद मे स्कर्ट उठा कर बैठी ...अब आगे से सब ढका हुआ था और नीचे वो नंगी थी...

ज़िया- पर कोई आ गया तो...

मैं- ये कंबल कब काम आएगा...सर्दी का मौसम है ही...ओढ़ के बैठ जाओ...किसी को पता नही चलेगा कि कहाँ बैठी हो...

ज़िया- फिर भी यार...थोड़ा रुक जाओ...कोई आ गया और मुझे तुम्हारी गोद मे बैठा देखा तो शक हो जायगा....

मुझे भी ज़िया की बात सही लगी...और मैं भी यहाँ मज़ा करना चाहता था...फँसना नही....

इसलिए मैं मान गया और चुदाई का प्रोग्राम बाद के लिए छोड़ दिया...

मैने ज़िया को साइड मे बैठाया...अब वो खिड़की की तरफ थी ...

मैने उसके स्कर्ट मे हाथ डाला और उसकी चूत को सहलाना चालू रखा...

ज़िया भी मस्ती मे मेरा लंड कपड़े के उपर से सहलाने लगी....

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अकरम और संजू साथ बैठे हुए थे....संजू जाग चुका था और सिर्फ़ पूनम के बारे मे सोच रहा था....

उसके आने का मक़सद ही यही था कि वो पूनम के साथ ज़्यादा से ज़्यादा मज़े कर सके....

पर इस समय तो पूनम अपनी फरन्ड के साथ बिज़ी थी और संजू अकेलेपन से पागल हो रहा था....

अकरम भी सपनो मे रूही को देख रहा था...पर उसकी गर्लफ्रेंड भी अपने बाय्फ्रेंड की दीदी के साथ गप्पे मार रही थी....

सरद और वसीम अपनी बातों मे मस्त थे...सबनम और मोना आराम फर्मा रही थी....

लेकिन शादिया को चैन नही था...ना ही वो रेस्ट कर पा रही थी और ना ही किसी से बात करके अपना मूड ठीक कर पा रही थी....

शादिया के दिमाग़ मे सिर्फ़ मैं घूम रहा था....

शादिया को हैरानी भी थी और डर भी...

हैरानी इस बात की थी...कि एक पार्लर मे मसाज देने वाला अकरम का दोस्त निकला....

और जब उसे मेरे बारे मे पूरा सच पता चला तो उसकी हैरानी और बढ़ गई...कि आख़िर इतने पैसे वाला पार्लीर मे क्या कर रहा था....

दूसरी तरफ उसे डर भी बहुत लग रहा था...वो यही सोच कर डर रही थी की अगर मैने किसी को बता दिया कि पार्लर मे क्या हुआ था..तो उसका क्या होगा....

शादिया ने अपनी कस्मकस से बाहर निकल कर एक फैशला किया कि अब वो मुझसे बात कर के रहेगी...

और कोसिस करेगी कि ये बात यही ख़त्म हो जाए.....

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यहाँ मैं और ज़िया मज़ा करते हुए ये भी ध्यान रखे थे कि कोई आए तो उसे कुछ पता ना चले....

लेकिन थोड़ी देर मे हमारी सेक्स की भूख सब कुछ भूल गई....

मैने ज़िया की चूत मे उंगली डाल दी और ज़िया ने बिना आगे की सोचे मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और हिलाना चालू कर दिया....

ज़िया काफ़ी देर से गरम थी और मेरे उंगली डालते ही वो मदमस्त हो गई....

ज़िया- आअहह..आहब...आअहह...ज़ोर से...उउउंम...माआअ...आअहह...

मैं भी उसके होंठो को चूस्ते हुए और बूब्स को एक हाथ से दबाते हुए दूसरे हाथ से उसकी चूत को चोदे जा रहा था...

मैं- सस्स्ररुउउउप्प...उउंम...उउउंम...उउंम..आअहह...उउंम्म...उउंम...

ज़िया- ओह्ह्ह..ओह्ह...माऐन्न..आअहह....आऐईइ...आअहह...ऊहह..ऊहह...एस्स. एसस्स..आअहह...

एक लंबी सिसकारी के साथ ज़िया झड गई और फिर ज़ोरो से मेरा लंड हिलाने लगी...

ज़िया- आअहह....मज़ा आ गया....

मैं- अभी तो बस उंगली डाली...

ज़िया- ह्म्म्मब...ये डालोगे तो मेरी फट जायगी...(मेरे लंड को देख कर)

मैं- अरे तुम तो खेली-खाई लगती हो...पहले ही फटी होगी...

ज़िया- ह्म्म्म ..पर ये बड़ा है थोड़ा...

मैं- अच्छा...तो इसे शांत तो करो...

ज़िया- ह्म..करती हूँ...

ज़िया ने झुक कर मेरे लंड को किस किया...फिर अपनी जीभ को मेरे सुपाडे पर फिराने लगी....उसकी हरकते बता रही थी की वो खेली हुई लड़की है....

हमारी मस्ती अपनी अपनी जगह चल रही थी....चलो बाकी सबका हाल भी देख लेते है....

ज़िया मेरे सुपाडे को खाल से निकालती ..उस पर जीभ फिर खाल उपर करती और थूक देती....

ज़िया अपनी हरकते करके मुझे ज़्यादा गरम कर रही थी...

 


मेरा कॉंट्रोल ख़त्म हो रहा था...तो मैने ज़िया का सिर पकड़ कर अपने लंड पर दबा दिया...

मैं- आहह..तडपा मत ...जल्दी से चूस इसे...

ज़िया- ह्म...

और फिर ज़िया ने आधे लंड को मुँह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया....

मैं- आअहह...ज़ोर से ...ज़ोर से....आअहह..

ज़िया- सस्ररुउप्प्प...सस्स्ररुउउप्प...उउंम..उउंम..उउंम..उउंम..उउंम.

मैं ज़िया के सिर को सहलाते हुए अपना लंड चुस्वाए जा रहा था और ज़िया भी पूरी मस्ती मे लंड चूस रही थी....पर कोई था जो हमारी मस्ती देख कर गरम भी हो रहा था और शॉक्ड भी था...

मैं- हाँ...बस...हो ही गया...तेजज...एस...एस्स..येस्स...यहह...आअहह...हमम्म..

मैं ज़िया के मुँह मे झड गया और उनका सिर लंड पर दवाए रखा...ताकि वो लंड बाहर ना निकाल दे...

फिर ज़िया को मजबूरी मे पूरा लंड रस पीना पड़ा...और जब मैं झड चुका तो ज़िया खाँसती हुई उठ गई....

मैं- आअहह...मज़ा आ गया...

ज़िया- खो-खो...तुमने तो...खो...जान ले ली...

मैं- अभी कहाँ...जान तो तब जायगी जब ये गान्ड मेरे लंड का स्वाद चखेगी....

ज़िया कुछ बोल पाती उसके पहले ही बस की ब्रेक लगी...और हमने जल्दी से अपने आप को ठीक किया...

तभी मुझे लगा कि कोई ह्यूम देख कर निकल गया....पर बोला कुछ नही........

कौन हो सकता है ये....??????

ब्रेक लगते ही वसीम ने सबको आवाज़ दी...

वसीम- चलो सब...थोड़ा चाइ-नाश्ता कर लेते है...बैठे हुए बोर हो गये होगे....

वसीम की आवाज़ आते ही मैं जाने को खड़ा हुआ तो ज़िया ने अपनी पैंटी का पूछा...

मैने ज़िया को बिना पैंटी के रहने का बोला...और चलने को कहा...

ज़िया ने भी ज़्यादा नही सोचा...और मेरे साथ निकल आई...

हम ने और सब को भी उठाया और सब बाहर आ गये...

बाहर आ कर मैं सबको देख कर अब्ज़र्व करने लगा....कि शायद किसी का फेस देख कर ये पता चल जाए कि वो हमे देख रहा था....

पर इसका कोई फ़ायदा नही हुआ...सब अपने आप मे मस्त थे...

हम सब एक ढाबे पर रुके थे....पहले हम सब फ्रेश हुए और फिर टेबल पर बैठ गये...

मेरे साथ टेबल पर ज़िया, गुल, अकरम और मोहिनी बैठी थी...

ज़िया मेरे सामने ही बैठी थी...और वो भी बिना पैंटी पहने हुए....

चाइ पीते हुए मैं अकरम से बाते कर रहा था कि तभी एक पैर मेरे पैर पर दस्तक देने लगा....

मैं समझ गया कि ये ज़िया ही होगी...उसकी चूत मे कुछ ज़्यादा ही खुजली है....

मैं आराम से चाइ पिता रहा और वो पैर अपना काम करता रहा....

अब मुझे भी मस्ती चढ़ रही थी तो मैने भी अपने पैर को ले जाकर रिया की जाघो के बीच डाल दिया...

मैने पैर थोड़ा सा आगे बढ़ाया और मेरा अंगूठा ज़िया की चूत मे टच हो गया...

मेरी हरक़त से ज़िया का मुँह खुल गया...पर उसने अपने आपको संभाला और खुद आगे सरक आई...जिससे मेरा अगुठा आराम से उसकी चूत पर घूमने लगा...

मैं जिया के साथ मस्ती करते हुए अकरम से बात कर रहा था...और वो पैर अभी भी मेरे एक पैर को रगड़े जा रहा था.....

तभी मुझे ऐसा लगा कि शादिया बार-2 मुझे घूर रही है...इससे मुझे लगने लगा कि यही तो नही थी..जिसका अहसास मुझे बस मे हुआ था...

पर मे बेफ़िक्र था...अगर शादिया ने मुझे और ज़िया को देखा भी होगा तो मेरा घंटा नही उखाड़ सकती...

थोड़ी देर बाद हम फिर से बस मे आ गये और सफ़र शुरू हो गया...

अब वसीम ने अकरम और संजू को ड्राइवर के साथ बैठा दिया और खुद अपनी बीवियो के साथ कॅबिन मे चले गये...

शादिया ने ज़िया और गुल को अपने साथ बैठा लिया....जूही ने पूनम, और मोहनी को अपने साथ बुला लिया...

और मैं भी अकेला एक कॅबिन मे आ गया...और शीट्स को फोल्ड करके बेड बनाया और लेटने की सोचने लगा...

लेकिन तभी रूही भी पीछे से आ गई...

रूही , अकरम की गर्लफ्रेंड थी ..इसलिए मैने उसकी तरफ ज़्यादा ध्यान नही दिया था...

पर इस तरह अकेले मे साथ होने से मैं शॉक्ड हो गया...

रूही- क्या मैं...यहाँ...

मैं- हाँ..क्यो नही...आओ ना...

रूही- थॅंक्स...

और रूही मेरे सामने बैठ गई...

हम दोनो पैरो को सामने पसार कर टिके हुए बैठे थे...

रूही ने एक टाइट कॅप्री और स्लीबलेशस टॉप पहना हुआ था...उसका गला भी थोड़ा बड़ा था..जिससे उसके बूब्स के थोड़े दर्शन हो रहे थे....

रूही को देख कर मेरे फ़ीमाग़ मे उसके लिए भूख जागने लगी थी...पर उसे पटाना इतना ईज़ी भी नही था...आख़िर दोस्त की गर्लफ्रेंड थी...

रूही- वैसे आप कहाँ रहते है...

मैं- सबसे पहले तो मुझे आप मत बोलो...और हाँ मेरा घर ****** मे है...

रूही- ओके...तुम..ह्म..तो तुम अकरम को कब्से जानते हो...

मैं- बचपन से...हम साथ मे पढ़े है 1स्ट क्लास से...

रूही- ह्म..तो उसकी फॅमिली से भी अच्छे से जान-पहचान होगी...

मैं- ह्म..आक्च्युयली उसकी फॅमिली से कुछ दिन पहले ही मिला...पहले सिर्फ़ जानता था...पर हम बाहर ही मिलते थे तो...

रूही(बीच मे)- तब तो बहुत फास्ट हो...

मैं(चौंक कर)- एक्सक्यूस मी...क्या मतलब...??

रूही- मतलब...मतलब ये कि बहुत जल्दी ...बहुत आगे पहुच गये....

मैं- सॉरी...मैं अभी भी नही समझ...ज़रा खुल के बताओगी...

रूही- ह्म..लगता है सब खोल कर ही बताना होगा...

और रूही ने अपनी टांगे खोल दी...और एक पैर को उठाकर मेरे पैर पर चढ़ा दिया..

मैं- ये..ये..क्या...इसका क्या मतलब..हटो..

 
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