फिर मैने अकरम को सारी बात बता दी जो कि शबनम के साथ हुई थी...और ये भी बता दिया कि अब उसकी मोम ऐसा कुछ नही करेगी.....बस ये नही बताया कि उसका चक्कर किसके साथ था .....
मेरी बात ख़त्म होते ही अकरम ने मुझे गले लगा लिया और उसकी आँखो से आँसू बहने लगे ..मैं जानता था कि ये खुशी के आँसू है...
मैं- बस कर...और चुप हो जा...आज से तेरी टेन्षन ख़त्म...खुश हो जा...
अकरम- बहुत खुश हूँ भाई...बहुत ज़्यादा...
मैं- ह्म्म..
अकरम- भाई..तूने आज बहुत बड़ा अहसान किया है मेरी मोम को सुधार कर...मैं इसको कभी उतार नही पाउन्गा...थॅंक यू भाई...
मैने अकरम को अपने से अलग किया....
मैं- अहसान..थॅंक्स...ये सब क्या है...हमारी दोस्ती इतनी कमजोर है जो तू ये सब कह रहा है....
अकरम- नही भाई...ऐसा मतलब नही था...लेकिन शुक्रिया तो अदा करना ही चाहिए ना...
मैं- ह्म्म..तो कभी मेरा काम कर देना...शुक्रिया अदा हो जायगा...हाँ
अकरम- उपेरवाले ने चाहा तो ज़रूर तेरे काम आउगा....
मैं- ओह्ह..मैं तो यही चाहूगा कि हमारी दोस्ती ऐसे ही बनी रहे ...अच्छी और सच्ची....
अकरम- हाँ भाई...उपेरवाला देख रहा है...उसी की मौजूदगी मे कहता हूँ...कि अगर मेरे दिल मे तेरी सच्ची दोस्ती है तो देख लेना...एक दिन तुझ पर आने वाली मुसीबत ..तुझसे पहले मुझ पर आयगी...
( अकरम की बात सुनकर मैं सोचने लगा कि क्या मैं इसकी दोस्ती के लायक हूँ...
मैं अपने दोस्त की दीदी और मौसी को चोद चुका हूँ और उसकी दूसरी बेहन पर भी मेरी नज़र है...
और तो और ..उसकी गफ़ को अपने लंड का स्वाद चखा चुका हूँ....
पर फिर सोचा की इसमे मेरी क्या ग़लती...जो हुआ वो सब उन लोगो ने शुरू किया...तो मैं ग़लत नही...)
फिर मैने अपने आप को समझाया और अकरम की प्यारी बात सुनकर मैने उसे गले लगा लिया....
फिर हम दोनो खुशी-खुशी घर के अंदर आ गये....
थोड़ी देर बाद मैने अकरम को रूही के पास भेज दिया और मुझे मौका मिल गया शादिया के पास जाने का....
और मैं शादिया के रूम मे निकल गया उसकी गान्ड मारने के लिए.....
यहाँ सहर मैं सोनू कही जाने की तैयारी करने के बाद बेड पर बैठ हुआ था...
इस टाइम वो बहुत परेसान दिखाई दे रहा था....
तभी उसकी बेहन सोनन आ जाती है...जिसे देख कर सोनू अपनी हालत ठीक करता है और चेहरे पर झूठी मुस्कान लाता है....
सोनम- सोनू...क्या हो रहा है...(बेग को देख कर)...तू ..कहीं जा रहा है क्या...??
सोनू- वो...ओह हा..एक फ्रेंड के साथ जा रहा हूँ...उसके गाओं..शादी मे..
सोनम- ह्म्म..ठीक है...वैसे ये पूछने आई थी कि डॅड का फ़ोन लगा क्या.. ??
सोनू- नही...वो शायद नेटवर्क नही होगा ...जैसे ही बात होगी तो बता दूँगा...
सोनम- ह्म्म..आइ होप जल्दी लग जाए...काफ़ी दिन हो गये उन्हे गये हुए और एक भी कॉल नही आया उनका...
सोनू- तू टेन्षन मत ले...वो काम से गये है..जल्दी ही आ जायगे...
सोनम(उदास हो कर)- कम से कम एक कॉल कर देते....आज के पहले डॅड ने कभी ऐसा नही किया...पता नही क्यो मुझे टेन्षन हो रही है...लगता है वो दिन ही सही नही था जब डॅड ट्रिप पर गये थे.....
सोनू- अरे यार...टेन्षन मत ले.....ऐसा कुछ मत सोच...ओके...
सोनम- ठीक है...तू ट्राइ करते रहना..मैं भी करती हूँ...ओके..
इसके बाद सोनम निकल जाती है और सोनू बेड पर बैठ कर रोने जैसा हो जाता है....
सोनू(मन मे)- तुझे क्या बताऊ कि कौन सा दिन मनहूस था....मनहूस दिन वो नही था जिस दिन डॅड गये...दिन तो वो मनहूस था जब वो काल आया था मुझे.....
फिर सोनू उस दिन को याद करने लगा.....
फ्लॅशबॅक ( कुछ दिन पहले)
सोनू मार्केट मे घूम रहा था तभी उसके फ़ोन पर एक अननोन कॉल आया....
( कॉल पर )
सोनू- हेलो...कौन ??
अननोन- हेलो सोनू....कैसे हो...
सोनू- मैं ठीक हूँ...आप कौन बोल रहे है...??
अननोन- मैं कोई भी हूँ..पर इस समय तुम्हारे लिए बहुत ख़ास हूँ...
फिर दोनो मार्केट से बाहर सोनू की कार तक आते है....तभी अचानक अंकित, सोनू के पास आ जाता है जिसे देख कर वो लेडी छिप गई....
सोनू जैसे-तैसे नॉर्मल रह कर अंकित को वहाँ से चलता करता है और फिर उस लेडी के साथ निकल जाता है...
कार मे......
सोनू- कौन हो तुम..और अंकित को कैसे धोखा दे रही हो....
लेडी- मेरा नाम रश्मि है..मैं अंकित के घर मे काम करती हूँ..और वही रहती हूँ...अपने भैया-भाभी के साथ...और मैं अंकित को क्या धोखा दे रही हूँ...ये जानने की तुम्हे कोई ज़रूरत नही....ओके..
सोनू- पर क्यो...अंकित ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा...
रश्मि(मुस्कुरा कर)- कुछ नही बिगाड़ा...ये तो सिर्फ़ पैसो के लिए...बहुत सारे पैसो के लिए...हहहे...
सोनू(गुस्से से)- ठीक है..भाड़ मे जाओ..बस मेरे डॅड को कुछ नही होना चाहिए...
रश्मि- कुछ नही होगा...बस मेहमान बना कर रखेगे...जब तक हमारा काम ना हो जाए..ओके...
सोनू- पर कब तक...???
रश्मि- टाइम आने दो..सब जान जाओगे...अभी मुझे यही छोड़ दो..और अगले कॉल का वेट करो...
शादिया-ओह माइ गॉड...कहाँ थे तुम..आअहह..इतना मज़ा दोगे..आहह...सोचा ना था....आअहह....हहाअयययी....म्मार्र ज्जाोऊऊगगिइइ....आआब्ब्ब......ब्ब्ब्बसस्स...उूउउफफफफफ्फ़......आअहह...
थोड़ी देर की चूत चुसाइ के बाद शादिया झड़ने लगी......
मोना- मुझे आपसे ये पूछना था कि आप अंकित को पहले से जानती है क्या...???
मोहिनी(चौंक कर)- नही...नही तो...मैं कैसे जान सकती हूँ...मैं तो पहली बार मिली उससे....
मोना- हाँ मोम...पर मुझे ऐसा लगता है कि आप उसे ना सिर्फ़ पहले से जानती है बल्कि काफ़ी कुछ जानती है...
मोहिनी- मतलब...मैं झूट बोलूँगी क्या...मुझ पर भरोसा नही तुझे...
मोना- भरोसा...ये शब्द तो आप बोला मत करो...
मोहिनी- ऐसा क्यो बोल रही हो...???
मोना- याद करो...जब मुझसे झूट बोलकर वसीम अंकल से चुदवाती थी....और मैने शक किया था....तब भी यही बोला था ना कि भरोसा करो...मैं कुछ ग़लत नही करती...और फिर सच क्या निकला...भरोसा तोड़ा था ना..
मोहिनी- वो बात अलग थी...वो मैं अपनी ग़लती छिपा रही थी...पर अंकित को जानती होती तो इससे मुझे क्या फ़ायदा या नुकसान होता...तो सोच..मैं झूट क्यो बोलूँगी...
मोना- मतलब आप उसके बारे मे कुछ नही जानती...??
मोहिनी- नही बेटा...बोला तो...
मोना-ओके...और रजनी को जानती है...???
मोहिनी(हस्ती हुई)- रजनी...कौन रजनी....मैं किसी रजनी को नही जानती....
मोना- अच्छा...तो फिर आपको कैसे पता कि अंकित रजनी को चोदता है...ह्म
मोना की बात सुनकर मोहिनी बुरी तरह चौंक गई...पर अपने आप को संभाल कर बोली...
मोहिनी- मुझे क्या पता...मैने कब कहा...
मोना- अच्छा...उस दिन जब वसीम अंकल का गान्ड मे ले रही थी तब तो बड़ा उछल-उछल कर बोल रही थी...कि "साला अंकित तो रजनी को जोरदार चोदता है...पूरा कॉंट्रोल मे है रजनी के ..." ...वो क्या था फिर....
अब मोहिनी के माथे पर पसीना आ गया...उसकी चोरी पकड़ी गई थी...
मोना- अब सच बताएँगी या फिर मैं वसीम अंकल से पूछने जाउ...
मोहिनी (चुप रही)
मोना- ठीक है...आप बैठो...मैं आज पूछ कर ही रहूगि...
और मोना उठ कर कपड़े पहनने लगी ...पर मोहिनी ने उसे रोक लिया और पास बैठा कर बोला...
मोना- अगर सच बताना हो तो ही रोको वरना....
मोहिनी- हाँ..सब सच बताउन्गी...पर पहले ये बता कि तुझे क्या ज़रूरत पड़ गई ये जानने की....
मोना- आप सच बताइए....मैं भी आपको सब सच बता दूगी....
मोहिनी- तो कहाँ से शुरू करूँ...???
मोना- पहले तो मुझे ये बता दो कि आप रजनी को कैसे जानती है...और ये भी की आपको कैसे पता कि रजनी और अंकित का सेक्स रीलेशन है....
मोहिनी- ह्म्म...रजनी और अंकित के सेक्स रीलेशन के बारे मे मुझे उसकी फ्रेंड कामिनी ने बताया था....
मोना- ये कामिनी कौन है अब....???
मोहिनी- मैं तुझे शुरू से बताती हूँ....
फिर मोहिनी ने मोना को बताना शुरू किया ....
रजनी, कामिनी, दीपा और रिचा...ये चारों फ्रेंड है....और इनमे एक बात कॉमन है....
और वो है अंकित के परिवार से दुश्मनी....
सबकी दुश्मनी की अपनी-अपनी वजह है...पर दुश्मन एक ही है...अंकित का परिवार.....
मोना- पर आपको ये कैसे पता...
मोहिनी- पूरी बात सुन लो पहले.....
तो इन चारों के अलावा भी कुछ लोग है जो अंकित की फॅमिली के खिलाफ है....
पता नही कैसे पर अब ये सब लोग एक साथ हो चुके है...और इंतज़ार कर रहे है अंकित की फॅमिली को मिटाने का....
मोना- ओके...ये तो उन सब के और अंकित की फॅमिली के बीच की बात है...आप कहाँ हो इसमे....
मोहिनी- मुझे भी इन लोगो ने अपने साथ मिलाने के लिए बुलाया था....
मोना- पर क्यो...??
मोहिनी- क्योकि....मैं भी उसकी फॅमिली की एक दुश्मन हूँ...
मोना(मुँह फाड़ कर)- क्या....आप भी...पर क्यो...???
मोहिनी- ये बात मेरी मौसी से रिलेटेड है...उनकी मौत के बाद ही मैं अंकित के परिवार से नफ़रत करने लगी....
मोना- पर ऐसा क्या हुआ था...और कौन थी आपकी मौसी...और आपकी मौसी का क्या लेना-देना था अंकित से...
मोहिनी- मेरी मौसी की जिंदगी अंकित के फॅमिली मेंबर्ज़ ने ही तबाह की थी...और उनकी मौत का ज़िम्मेदार भी उसकी फॅमिली का मेंबर है....
मोना- इसका मतलब...आप उसकी फॅमिली को अच्छी तरह जानती है....