S
StoryPublisher
Guest
मैं बुत बना सामने खड़े मेरे सर्प्राइज़ को देख रहा था ..और रजनी आंटी मेरी ऐसी हालत देख कर मुस्कुरा रही थी.....
रजनी- अब देखता ही रहेगा कि अंदर भी आएगा ..
मैं(चौंक कर)- हूँ...हां...क्या कहा....
रजनी(मुस्कुरा कर)- अब ये तेरे हवाले है...चल पास से देखना....
रजनी की बात सुन कर मेरे चेहरे पर खुशी चमक गई...और सामने खड़ी औरत शरमा गई...
रजनी- देख...मैने अपना काम कर दिया...तुझे तेरा इनाम दे रही हूँ...कैसा लगा...
मैं- इसकी मुझे बहुत ज़रूरत थी...अब तो खेल खेलने मे सही मज़ा आएगा....
रजनी- तो खेल ले इसके साथ...मगर प्यार से...बहुत शर्मीली है...
मैं- डोंट वरी आंटी..बेशरम हम बना देगे ...
रजनी- हहहे...जानती हूँ...तू इससे बात कर..मैं सबके लिए कॉफी लाती हूँ...
मैं- वैसे...गर्मी तो इसे देख कर ही बढ़ गई...फिर भी कॉफी ले आइए...जितनी गर्मी बढ़ेगी...मज़ा उतना ज़्यादा आएगा.....
रजनी- ओके..तू बात कर...और कुसुम..अब शरमाना छोड़ और लाइफ के मज़े ले...हां..
और रजनी हम दोनो को अकेला छोड़ कर कॉफी बनाने चली गई....और साथ मे गेट को बाहर से लॉक कर दिया...
जी हाँ...रजनी आंटी ने सर्प्राइज़ मे एक खूबसूरत औरत को पेश किया था....वो थी कुसुम...रफ़्तार की बीवी....
रजनी के जाने के बाद मैने सामने खड़ी कुसुम पर नज़रे घुमाई...जो इस वक़्त शर्म और डर से भरी हुई थी...
मैने देखा कि कुसुम एक खूबसूरत चेहरे के अलावा एक मदमस्त जिस्म की मालकिन है...
उसके बड़े-बड़े बूब्स साड़ी और ब्लाउस से धक्के होने के बावजूद अपने बड़े होने का अहसास दिला रहे थे...
स्लेवलेस्स ब्लाउस से उसके मासल बाजू...पतली साड़ी के अंदर चिकना पेट और उसमे से झाँकती हुई बड़ी नाभि...किसी का भी मन मोह सकती थी...
कुल मिलकर कुसुम को देख कर कोई भी उसे पाने के लिए ललचा सकता था...और आज वो मुझे अपना सब कुछ देने के लिए खड़ी थी...
मैं धीरे-2 कुसुम की तरफ गया और उसका हाथ पकड़ा...
मेरे हाथ लगते ही कुसुम सिहर उठी...उसकी आँखे बंद हो गई...
मैं समझ गया कि वो थोड़ा घबराई हुई है...
मैने कुसुम को अपने साथ बेड पर बैठा लिया...और बात करनी शुरू की...
मैं- एक बात बताओ ..तुम ये सब मर्ज़ी से करने आई हो या फिर किसी दबाब मे...
कुसुम ने मुझे आँख उठा कर देखा और शरमा गई...
मैं- मैने कुछ पूछा है...जवाब दो...
कुसुम- मर्ज़ी से...
मैं- तो फिर डरना छोड़ो...हाँ...शरमा सकती हो...वो मैं दूर कर दूँगा...
मेरी बात सुनकर कुसुम फिर से शरमा गई...
मैं कुछ देर तक कुसुम से उसके बारे मे और उसके परिवार के बारे मे बातें करता रहा...जिससे कुसुम थोड़ा नॉर्मल हो गई...असल मे मुझे इंतज़ार था कॉफी का...
हमारी बातें चल ही रही थी कि रजनी कॉफी ले आई ..फिर हम सबने कॉफी पी और मैने रजनी को बाहर देखने का बोल कर भेज दिया...अब फिर से रूम मे कुसुम और मैं अकेले थे...
मैं(मन मे)- इसको नॉर्मल करने के लिए मुझे ही आगे बढ़ाना होगा...क्योकि ये तो आगे आयगी नही...
तभी कुसुम खड़ी हुई और मैने उसका हाथ पकड़ लिया...कुसुम कुछ ना बोली बस चुपचाप खड़ी रही...
मैने उसके हाथ पर किस किया तो कुसुम शरमा गई और मैने खड़े होकर कुसुम की पीछे से अपनी बाहों मे भर लिया...
मेरे हाथो की गिरफ़्त मे आते ही कुसुम मचल उठी और मुँह से सिसकी निकल गई...
मैने आगे बढ़ कर कुसुम के मुलायम गालो पर एक किस किया...जिससे कुसुम और ज़्यादा मचल गई..
कुसुम- उउंम्म..
मैं- कुसुम...मेरी बात सुनो...
कुसुम- ह्म..
मौन- अगर तुम दिल से रेडी हो तो ठीक...वरना तुम जा सकती हो...
और इतना कह कर मैने अपनी बाहों से कुसुम को आज़ाद कर दिया...
थोड़ी देर तक हम बुत बने खड़े रहे और फिर कुसुम ने मेरे हाथो को पकड़ के अपने आप को मेरी बाहों मे पहले की तरह क़ैद कर लिया...
मैं- तो तुम तैयार हो...
कुसुम - ह्म्म्मर...
और कुसुम का इतना कहना मेरे लिए काफ़ी था...
रजनी- अब देखता ही रहेगा कि अंदर भी आएगा ..
मैं(चौंक कर)- हूँ...हां...क्या कहा....
रजनी(मुस्कुरा कर)- अब ये तेरे हवाले है...चल पास से देखना....
रजनी की बात सुन कर मेरे चेहरे पर खुशी चमक गई...और सामने खड़ी औरत शरमा गई...
रजनी- देख...मैने अपना काम कर दिया...तुझे तेरा इनाम दे रही हूँ...कैसा लगा...
मैं- इसकी मुझे बहुत ज़रूरत थी...अब तो खेल खेलने मे सही मज़ा आएगा....
रजनी- तो खेल ले इसके साथ...मगर प्यार से...बहुत शर्मीली है...
मैं- डोंट वरी आंटी..बेशरम हम बना देगे ...
रजनी- हहहे...जानती हूँ...तू इससे बात कर..मैं सबके लिए कॉफी लाती हूँ...
मैं- वैसे...गर्मी तो इसे देख कर ही बढ़ गई...फिर भी कॉफी ले आइए...जितनी गर्मी बढ़ेगी...मज़ा उतना ज़्यादा आएगा.....
रजनी- ओके..तू बात कर...और कुसुम..अब शरमाना छोड़ और लाइफ के मज़े ले...हां..
और रजनी हम दोनो को अकेला छोड़ कर कॉफी बनाने चली गई....और साथ मे गेट को बाहर से लॉक कर दिया...
जी हाँ...रजनी आंटी ने सर्प्राइज़ मे एक खूबसूरत औरत को पेश किया था....वो थी कुसुम...रफ़्तार की बीवी....
रजनी के जाने के बाद मैने सामने खड़ी कुसुम पर नज़रे घुमाई...जो इस वक़्त शर्म और डर से भरी हुई थी...
मैने देखा कि कुसुम एक खूबसूरत चेहरे के अलावा एक मदमस्त जिस्म की मालकिन है...
उसके बड़े-बड़े बूब्स साड़ी और ब्लाउस से धक्के होने के बावजूद अपने बड़े होने का अहसास दिला रहे थे...
स्लेवलेस्स ब्लाउस से उसके मासल बाजू...पतली साड़ी के अंदर चिकना पेट और उसमे से झाँकती हुई बड़ी नाभि...किसी का भी मन मोह सकती थी...
कुल मिलकर कुसुम को देख कर कोई भी उसे पाने के लिए ललचा सकता था...और आज वो मुझे अपना सब कुछ देने के लिए खड़ी थी...
मैं धीरे-2 कुसुम की तरफ गया और उसका हाथ पकड़ा...
मेरे हाथ लगते ही कुसुम सिहर उठी...उसकी आँखे बंद हो गई...
मैं समझ गया कि वो थोड़ा घबराई हुई है...
मैने कुसुम को अपने साथ बेड पर बैठा लिया...और बात करनी शुरू की...
मैं- एक बात बताओ ..तुम ये सब मर्ज़ी से करने आई हो या फिर किसी दबाब मे...
कुसुम ने मुझे आँख उठा कर देखा और शरमा गई...
मैं- मैने कुछ पूछा है...जवाब दो...
कुसुम- मर्ज़ी से...
मैं- तो फिर डरना छोड़ो...हाँ...शरमा सकती हो...वो मैं दूर कर दूँगा...
मेरी बात सुनकर कुसुम फिर से शरमा गई...
मैं कुछ देर तक कुसुम से उसके बारे मे और उसके परिवार के बारे मे बातें करता रहा...जिससे कुसुम थोड़ा नॉर्मल हो गई...असल मे मुझे इंतज़ार था कॉफी का...
हमारी बातें चल ही रही थी कि रजनी कॉफी ले आई ..फिर हम सबने कॉफी पी और मैने रजनी को बाहर देखने का बोल कर भेज दिया...अब फिर से रूम मे कुसुम और मैं अकेले थे...
मैं(मन मे)- इसको नॉर्मल करने के लिए मुझे ही आगे बढ़ाना होगा...क्योकि ये तो आगे आयगी नही...
तभी कुसुम खड़ी हुई और मैने उसका हाथ पकड़ लिया...कुसुम कुछ ना बोली बस चुपचाप खड़ी रही...
मैने उसके हाथ पर किस किया तो कुसुम शरमा गई और मैने खड़े होकर कुसुम की पीछे से अपनी बाहों मे भर लिया...
मेरे हाथो की गिरफ़्त मे आते ही कुसुम मचल उठी और मुँह से सिसकी निकल गई...
मैने आगे बढ़ कर कुसुम के मुलायम गालो पर एक किस किया...जिससे कुसुम और ज़्यादा मचल गई..
कुसुम- उउंम्म..
मैं- कुसुम...मेरी बात सुनो...
कुसुम- ह्म..
मौन- अगर तुम दिल से रेडी हो तो ठीक...वरना तुम जा सकती हो...
और इतना कह कर मैने अपनी बाहों से कुसुम को आज़ाद कर दिया...
थोड़ी देर तक हम बुत बने खड़े रहे और फिर कुसुम ने मेरे हाथो को पकड़ के अपने आप को मेरी बाहों मे पहले की तरह क़ैद कर लिया...
मैं- तो तुम तैयार हो...
कुसुम - ह्म्म्मर...
और कुसुम का इतना कहना मेरे लिए काफ़ी था...