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चूतो का समुंदर

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यहा ज़िया भी लंड चूस्ते हुए अपनी चूत मसल रही थी...और उसकी चूत भी गरम हो चुकी थी...

सादिया- आअहह...ज़िया...अब चूसना छोड़....चूत मे ले जा ...अपने भाई को भी मज़ा दे दे....

ज़िया तो जैसे इसी इंतज़ार मे थी...ज़िया ने पलक झपकते ही अपनी पैंटी निकाली और मेरे लंड को चूत मे ले कर उछलने लगी....

मैं समझ गया कि ज़िया की चूत पूरी खुली है...पर फिर भी मस्त थी...

सादिया- वाह बेटा...भाई का लंड बहुत भा गया...एक बार मे ले गई...आजा दूध पी ले...और जोरदार चुदाई कर...

ज़िया ने आगे बढ़ कर सादिया के बूब को मूह मे भरा और तेज़ी से उछलने लगी. ..और मैं भी नीचे से धक्के मारने लगा....

सादिया- आहह…आहह…अहहह…ज्जूओर्र सीए….आहह....

ज़िया- उउउंम्म...आअहह..आहह...उउउंम्म..उउउंम..आअहह....आहहाहह

सादिया-आआहः..आह..अह्ह्ह्ह…अहहह…अहहहह…यईसस्स….यईसस्स….आहह...और तेज ज़िया....जड़ तक ले जा...अओउंम...

ज़िया- आअहह…हहहहा…आईयायाईए.उउउंम्म..उउंम....आअहह.....

ज़िया के उछलने से रूम.मे चुदाई की आवाज़े गूज़्ने लगी थी....

त्ततप्प्प….त्ततप्प्प…त्तप्प..आहह…उउउंम..हमम्म..आहः.

.त्तप्प…त्तप्प्प..आहहह..अहहहह...

थोड़ी देर की दमदार चुदाई से ज़िया झड़ने लगी और सादिया की चूत लंड खाने को तैयार हो गई....

ज़िया- आअहह ..भाई....मैं...ऊओह...आाऐयइ....एस्स..आअहह.....

ज़िया के झाड़ते ही सादिया ने उसे मेरे लंड से उतार दिया और खुद उसकी जगह लंड को चूत मे ले गई....

सादिया- आआहह....मज़ेदार....अब मुझे सवारी करवा दे....ईीस्स....

यहाँ सादिया ने उछलना सुरू किया और वहाँ ज़िया हमारी चुदाई देख कर अपनी चूत को फिर से मसल्ने लगी....

सादिया- आअहह...साली...मन नही भरा तेरा....

ज़िया- नही ...भाई का मस्त लगा....और लेना है...

सादिया- आअहह....बाद मे...आअहह...अभी मुझे...उउउंम्म...

ज़िया- ह्म्म...चल दूध पी ले....ले...

और सादिया ने भी ज़िया के बूब्स को चूस्ते हुए उछलना सुरू कर दिया...

सादिया- उउउंम..उउउंम्म..आअहह....उउउंम्म...ईीस्स...उउउम्म्म्म...

ज़िया- ले साली....पी जा...और भाई को मज़े दे...आअहह.....काट मत साली....आअहह...

मैं सादिया और ज़िया की बातें सुन कर हैरान भी था और गरम भी हो रहा था....दोनो एक-दूसरे को गाली देते हुए चुदाई एंजाय कर रही थी....

मैं- ओह आंटी....जंप....फास्ट...फास्ट...फास्ट....

सादिया- आअहह...हा बेटा....आअहह...आहह..आअहह...उउउंम्म...उउउंम्म...

ज़िया- आअहह..फाड़ दो भाई.....आअहह..ज़ोर से.....

मैं- यस ज़िया...ये ले...ये ले..ईएहह....ईएहह...

और मेरे तेज धक्को से सादिया फिर से झड़ने लगी....

सादिया- आआहह..आहह......गई...ररीईई...आअहह....

सादिया के झाड़ते ही मैने ज़िया को उपेर आने को बोला और उसको उछल कर उसे चोदने लगा...

सादिया उठ कर मेरे पीछे आ गई और अपने बूब्स मुझसे चुसवाने लगी...

सादिया- ले बेटा..दूध पी कर चोद इसे....बड़ी रंडी है साली...फाड़ दे...

ज़िया- आअहह...और तू....साली...आअहह...रंडी की माँ...आअहह....ज़ोर से भाई...ईसस्स....

मैं- उउउंम्म...ईएह...ईएहह....ईएह...उूउउंम्म...

सादिया- ऐसे ही मार बेटा...फाड़ दे...आअहह....

ज़िया- हाँ भाई...फाड़ दो....ज़ोर से भाई...ज़ोर से...आआहह....

मैं- हाँ दीदी....ये लो....आज तो तेरी फटी....यीहह. .यीहह...ईएहह....

कुछ देर की तेज तर्रार चुदाई मे ज़िया एक बार फिर से झाड़ गई...और सादिया की चूत फिर से तैयार हो गई....

ज़िया के झाड़ते ही मैने ज़िया को लिटा कर लंड उसके मूह मे पेल दिया....

मैं- ज़िया..मेरी बेहन....तुझसे चुसवाने मे मज़ा आता है...चूस ...आअहह...

ज़िया- उउउंम...आअहह...मुझे भी भाई...उउंम्म...उउउंम्म....

हम दोनो को देख कर सादिया और गरम होने लगी और अपनी गान्ड ज़िया के मूह पर कर दी...

सादिया- बेटा...लंड बाद मे चुस्वा लेना...मेरी चूत भर दे पहले...

मैं- हाँ आंटी...ज़िया चूस ले फिर भरता हूँ....ज़िया....चूस ...ज़ोर से....

ज़िया- उउउंम...उउउम्म्म्म...उूउउंम्म...उउउंम्म..उउउंम्म...उउउंम्म...

मैं- आअहह.....क्या बात है....वाअहह....एसस्स...एस्स....

सादिया- अब डाल दे बेटा....जल्दी...

मैने लंड को ज़िया के मूह से निकाल कर सादिया की चूत मे पेल दिया तो ज़िया ने जल्दी से मेरी बॉल्स को मूह मे भर लिया...

मैं- आहह...ज़िया...तुम सच मे कमाल हो....

सादिया- हाँ...पूरी रंडी है....

ज़िया- उउंम...आहह..चुप कर...मुझे चूसने दे अपने भाई को...तू चुप चाप चुदवा...उउउम्म्म्म...उउउम्म्म्म...

और फिर सादिया अपनी गान्ड हिला-हिला कर मुझसे चुदने लगी और ज़िया मेरी बॉल्स चूस्ते हुए अपनी चूत सहलाने लगी....

सादिया- आअहह..आअहह...आअहह....उउउंम्म..

ज़िया- उउउंम्म...उउउंम्म...उउउंम्म...उउउंम्म...

मैं- आअहह...मज़ा आ गया.....दोनो मस्त हो....ईएहह...

ज़िया- उउउंम्म...उउउंम्म...उउउंम्म...

सादिया- आअहह...आअहह...आहह...ईसस्स....ज़ोर से बेटा....धक्का मार....

 
अब मैं भी मूड मे आ गया था....मैने ज़िया को रोका और सादिया को पकड़ कर तेज़ी से चोदने लगा....

तो ज़िया ने सादिया की चूत का दाना चाटना सुरू कर दिया और अपनी चूत मे उंगली करने लगी....

सादिया- आऐईयईई....ये क्या साली...मार डाला....आअहह.....

ज़िया- सस्स्ररुउपप..सस्ररुउपप...सस्ररुउपप...सस्रररुउप्प्प...सस्स्ररुउप्प्प...

मैं- ओह्ह...एस्स...एस्स...एस्स...ईसस्स....

सादिया- आअहह...ज़ोर से....आअहह...

ज़िया- उउंम्म...आआहह...उउउम्म्म्म...सस्स्रररुउउउप्प्प.....उउउम्म्म्म...

मैं- एस्स...एसस्स...आअहह...यीहह...यीहह....

रूम मे चुदाई की आवाज़े गूज़ रही थी...और हम तीनो झड़ने के करीब थे...

और कुछ देर बाद ही हम तीनो साथ-साथ झड़ने लगे....

ज़िया ने सादिया की चूत से निकलता हुआ मेरा और सादिया का मिक्स रस पी लिया और फिर सादिया ने ज़िया की चूत चाट कर उसका रस पी लिया और फिर दोनो ने मेरा लंड चूस कर सॉफ कर दिया....

दमदार चुदाई के बाद हम तीनो उसी सोफे पर ढेर हो गये और रेस्ट करने लगे.....

कहीं दूर...किसी बंद कमरे मे.....

रूम मे बेड पर एक मरीज़ पड़ा था और डॉक्टर उसका चेक अप कर रहा था....

तभी मनु रूम मे एंटर हुई और मरीज़ को देख कर डॉक्टर से बोली.....

मनु- अब क्या कंडीशन है....

डॉक्टर- ये कोमा से बाहर है...पर याददाश्त....

मनु- याददाश्त का क्या....

डॉक्टर- कहना मुस्किल है....पता नही कितना याद है ..कितना नही....

मनु- तो पता करो ना....

डॉक्टर- ह्म्म..15-20 दिन लगेगे....

मनु- ओके...टेक युवर टाइम.....

फिर मनु बाहर आई और बोली....

मनु- लगता है अंकित को सच बताना ही होगा....वो सच जो शायद उसकी जिंदगी बदल दे....या फिर...जिंदगी मिटा दे.....पता नही क्या होगा...जब उसे हक़ीक़त पता चलेगी......?????????

अकरम के घर...........

मैं जूही के साथ अकरम के घर मे एंटर हुआ तो मेरे सामने सबसे पहले गुल आ गई....जिसे देख कर लग रहा था कि वो अभी -अभी कहीं से आ रही है....क्योकि उसकी बाजू पर ट्रॅकिंग बॅग अभी भी लटका हुआ था....

गुल की नज़र जब मेरी बाहों मे झूल रही जूही पर पड़ी तो वो लगभग चिल्लाते हुए जूही का नाम लेने लगी....

गुल- जूही दी.....ये सब..कैसे....

शायद गुल ने जूही का प्लास्टर देख लिया था...इसलिए वो कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से बोल पड़ी...

मैं या जूही जब तक गुल को समझाते...उससे पहले ही जूही की माँ सबनम किचन से निकल कर हॉल मे आ गई....

सबनम- क्या हुआ गुल...तुम जूही को....जूही....बेटा ये क्या हुआ....कैसे हुआ....

जैसे ही सबनम की नज़र मेरी तरफ पड़ी तो वो भी गुल की तरह ज़ोर से जूही के बारे मे पूछने लगी....

मैं- आंटी...रिलॅक्स.....

सबनम- अंकित...ये सब क्या है...ये जूही को...

मैं(आगे बढ़ते हुए)- रिलॅक्स आंटी....रिलॅक्स.....

फिर मैने साबधानी से जूही को सोफे पर लिटाया और सबनम को पकड़ कर उसे भी बैठा दिया....

सबमम(घबराई हुई)- बेटा...ये सब कैसे हुआ....

मैं- बताता हूँ आंटी...आप टेन्षन मत लो...पहले आराम से बैठो...सब बताता हूँ....

सबनम- हुह...

फिर मैने सबनम और गुल को जूही के आक्सिडेंट की कहानी सुना दी...जो पूरी तरह सच नही थी....ये सब सुनकर सबनम की आँखे नम हो गई और वो जूही को सहलाते हुए उसका हाल-चाल पूछने लगी....यही हाल गुल का था...बस गुल की आँखो मे पानी नही था...लेकिन दुख तो था....

फिर थोड़ी देर तक हम आपस मे आक्सिडेंट और जूही की बातें करते रहे....

हमारी बातें सुन कर सादिया और ज़िया भी नीचे आ गई...और आक्सिडेंट की वही कहानी सुन कर जूही से हमदर्दी दिखाने लगी...

सबसे लास्ट मे आया अकरम...वो भी तब...जब ज़िया उसे बुलाने गई....

अकरम आते ही जूही को देख कर घबरा सा गया...हालाकी वो रोया नही...पर उसकी आँखो मे दुख सॉफ नज़र आ रहा था....

अकरम ने जूही को देखने के बाद अपनी आँखे मेरी तरफ घुमाई....उसने मुझसे कुछ पूछा नही...पर उसकी आँखो ने बहुत कुछ पूछ लिया था....

मैने भी उसे आँखो से जवाब दे दिया...कि अभी शांत रहे...सब बताउन्गा....थोड़ा रुक...

तभी अचानक वसीम घर मे आ गया...जिसे देख कर उसकी पूरी फॅमिली हैरान थी....पर क्यो....ये नही पता...

फिर पता चला कि वसीम कल आने वाला था...पर आज आ गया तो सब हैरान हो गये....

पर हम सबसे ज़्यादा हैरान था अकरम....पता नही क्यो...पर वो वसीम को देख कर कुछ अजीब सा हो गया...उसकी आँखो मे वसीम के लिए बहुत कुछ था....पर मैं समझ नही पाया कि वो था क्या..और क्यो....????

वसीम- जूही..जूही मेरी बच्ची...तू ठीक है ना...ओह गॉड....कितनी चोट आ गई...सॉरी बेटा...सॉरी...

इस सॉरी वर्ड का मतलब शायद कोई समझा हो...पर मैं समझ चुका था...और ये भी समझ गया था कि वसीम आज ही क्यो आ टपका....

वसीम- बेटा...तू ठीक है ना...

जूही- जी डॅड...आइ म फाइन...अंकित टाइम पर आ गया था तो सब ठीक रहा...

वसीम(मुझे देख कर)- थॅंक्स अंकित...थॅंक्स...

मैं- अरे अंकल...ये क्या...ये तो मेरा फ़र्ज़ था...आख़िर मेरे फ्रेंड की बेहन है....इट्स ओके अंकल...

वसीम(जूही को देख कर)- थॅंक गॉड बेटा की तू ठीक है....तुझे पता है...मैं सारी रात परेशान था तेरे लिए...

सबनम- सारी रात....आपको रात को ही पता चल गया था क्या...पर कैसे...???

ये सवाल वसीम को अंदर तक हिला गया...एक्साइट्मेंट मे साला ये भी भूल गया था कि सबकी नज़रों मे वो आउट ऑफ सिटी गया था...तो जूही के बारे मे कैसे पता....

वसीम- म्म..मतलब...मैने रात को ख्वाब देखा था...तभी से....इसलिए तो चला आया...

सबनम- ओह्ह...अब आप सब बैठो...मैं कॉफी बना कर लाती हूँ...

फिर सबनम ने हम सबको कॉफी पिलाई...कॉफी पीने के बाद मैने और अकरम ने जूही को उसके रूम मे छोड़ दिया...और फिर मैं बाद मे आने का कह कर वहाँ से निकल आया....

 


आज मैने और अकरम ने आपस मे कोई बात नही की थी...हम दोनो ही बस आँखो ही आँखो मे बहुत कुछ बात कर चुके थे....हमने सोचा कि अभी महॉल ठीक नही...सारी बाते बाद मे करेंगे....

क्योकि बोलने को बहुत कुछ था....कुछ मेरे पास भी...और बहुत कुछ अकरम के पास....जिससे मैं अंजान था....

अकरम के घर से निकल कर मैने कार को संजू के घर मोड़ दिया....

क्योकि एक तो मुझे अनु को समझाना था...और दूसरी बात ये ...कि मुझे वो वजह पता करनी थी...कि आज संजू मेरे घर क्यो नही आया...जबकि उसकी सारी फॅमिली मेरे घर पर थी...बस संजू नही....क्यो....???????

मैं थोड़ी दूर आगे ही पहुँचा था की मेरा फ़ोन बज उठा...ये मेरे आदमी एस का कॉल था....जिसका मुझे कल रात से इंतज़ार था....

मैने कार साइड की और कॉल पिक की....

( कॉल पर )

मैं- कहाँ थे आप...कब्से वेट कर रहा हूँ...

स- अरे...तुम तो मुझ पर चिल्लाने भी लगे....ह्म्म...

मैं- ओह..सॉरी..सॉरी...मेरा ऐसा मतलब नही था...मैं वो एक्साइट्मेंट मे....

स(बीच मे)- डोंट वरी....मैं समझ सकता हूँ....तुम बिल्कुल अपनी....

स कुछ कहते-कहते रुक गया....और मैने भी ज़्यादा माइंड नही किया....क्योकि मैं किसी और बारे मे सोच रहा था....

मैं- बिल्कुल अपनी...क्या मतलब...

स- कुछ नही....तुम बताओ...क्या बोल रहे थे....

मैं- ये लो...कल रात से मैं वेट कर रहा हूँ और आप अब पूछ रहे हो....क्या हो गया आपको....ध्यान कहाँ है...

स- ओह...हाँ...वो मैने पता कर लिया...वही बताना था...पर सुबह से एक खास काम मे फँस गया था...सॉरी...

मैं- आप प्ल्ज़ सॉरी मत बोलो....वेल...क्या पता लगा...

स- हाँ..कल रात को रफ़्तार हॉस्पिटल मे आया था...उसी ने पूरे स्टाफ को भगा दिया था....

मैं(बीच मे)- क्या...रफ़्तार...साला ये रफ़्तार की तो...अब ये गया...मैं इसकी ऐसी हालत करूगा कि साले की रूह भी काँप जाएगी....

स- अरे सुनो तो ...

मैं- क्या सुनू...साले की हिम्मत कैसे हुई...और वो आया क्यो था...क्या वो जूही को....

स(बीच मे)- अंकित...अंकित....रूको....मेरी बात सुनो...ओके...

मैं- ह्म्म...बोलो...

स- मैं ये बोल रहा था कि रफ़्तार अकेला नही था...और वो तो जूही के रूम मे आस-पास भी नही गया....

मैं- मतलब...कौन था उसके साथ...

स- पता नही...वो नकाब मे था...किसी ने नही देखा उसे....

मैं- नकाब मे....पर कौन हो सकता है....

स- इसका जवाब तो रफ़्तार ही देगा....पर डॉक्टर ने उसकी एक झलक देखी थी....और उसके बाते अनुसार वो वसीम था....

मैं- वसीम...पर वो वहाँ क्यो...उसे क्या ज़रूरत पड़ गई इस सब की...वो तो सामने से आ सकता था...जूही बेटी है उसकी...

स- ये तुम पता करो...

मैं- ह्म्म...शायद वो सबको ये बताना चाहता है कि वो सहर मे था ही नही...

स- पर उसने ऐसा क्यो किया...

मैं- वो मैं आपको बाद मे बताउन्गा....लंबी कहानी है...अभी आप ये बताओ कि रफ़्तार ने और क्या बका...वो असल मे इस सब मे कितना शामिल है...

स- पता नही....ये पता करना होगा....खुद रफ़्तार ही बता पायगा ये तो...

मैं- तो देर किस बात की उठाओ साले को...सब बक देगा....

स- नही...ऐसा नही कर सकते...

मैं- क्यो...

स- क्योकि उसके सिर पर बड़े लोगो का हाथ है....एक तो तुम जानते ही हो....एमएलए ...याद है ना....वो उसे बचा लेगा...और उपेर से रफ़्तार मोटी चमड़ी का है...आसानी से नही बकेगा कुछ....

मैं- ह्म्म...ये तो है...तो पहले एमएलए को देखता हूँ....फिर साले रफ़्तार को...

स- ह्म्म...तो कोई प्लान है या ऐसे ही देखोगे...

मैं- प्लान है...पर उससे पहले मुझे वर्मा को निपटना है...क्योकि उसे मैने टाइम दिया था....

स- अच्छा....तो वर्मा के मामले मे कोई प्रोग्रेस हुई....

मैं- ह्म्म...आज हो जाएगी...आप बस रॉनी को भेज देना....फिर वर्मा को ऐसा जॅलील करूगा कि साला कभी सर भी नही उठा पायगा....

स- ओके..पर भेजना कहाँ है...

मैं- अड्रेस दे दूँगा....

स- चलो फिर...मैं चला काम पर...

मैं- ह्म्म...वैसे एक बात पुछु...आपका वो खास काम था क्या....

स(कुछ देर चुप रहने के बाद)- वक़्त आने पर बता दूँगा बेटा....जब तक तुम खुद सोचो....शायद कुछ याद आ जाए...ह्म्म...चलो बाइ...

कॉल कट हो गया ...पर स का कहा आख़िरी सेंटेन्स मेरे माइंड को चियर गया....

मैं(मन मे)- याद आ जाए...पर क्या....ऐसा क्या हो सकता है जो हम दोनो से रिलेटेड हो...ह्म्म...

थोड़ी देर बाद मैने डिसाइड किया कि ये बात स से ही पूछुगा...फिलहाल अनु और संजू को देखा जाए...और फिर उस वर्मा के बच्चे को भी तो देखना है....उसकी तो आज माँ छोड़ दूँगा....

और मैने कार को एक बार फिर से संजू के घर दौड़ा दिया......

संजू के घर.............

जब मैं संजू के घर मे एंटर हुआ तो सब लोग हॉल मे ही मिल गये...पर वो दोनो लोग ही गायब थे....जिनसे मुझे बात करनी थी....अनु और संजू.....

मुझे देखते ही सब खुश हो गये...सिर्फ़ विनोद को छोड़ कर....उसकी तो ऐसी सकल थी जैसे मैने उसकी गान्ड मार दी हो....

मैं- संजू कहाँ है...

रजनी- पता नही बेटा...वो कल रात से गायब है...कह रहा था कि किसी दोस्त के घर रुक रहा है...

मैं- दोस्त ...कौन सा दोस्त....

रजनी- ये तो पूछा ही नही....खैर उसे छोड़ो...पहले बैठो तो सही...मैं कॉफी लाती हू....

मैं- ह्म्म....

फिर मैं कॉफी पीते हुए संजू के दाद को आक्सिडेंट के बारे मे बताता रहा....पर मेरी आँखे अभी अनु को ही ढूढ़ रही थी....

अनु तो नही आई पर रक्षा की आँखे शरारत पर उतर आई...और उसने मौका देख कर मुझे उपर चलने को बोल दिया...स्टडी के लिए.....

मैं भी उपर जाना चाहता था ताकि अनु को मिल सकु....पर वहाँ भी निराशा हाथ लगी...जब रक्षा ने बताया कि अनु किसी फ्रेंड के घर गई....

अब मैं रक्षा के रूम मे था तो रक्षा को चोदे बिना कैसे आता...साली मानी ही नही....

मैने एक राउंड रक्षा की जोरदार चुदाई की और संजू को ढूढ़ने निकल गया....

काफ़ी पूछ-ताछ करने के बाद मुझे पता चल ही गया कि संजू किसी अमर नाम के लड़के के घर गया है....

पर जब मैं वहाँ पहुँचा तो मुझे अमर नही मिला...हाँ उसका घर खुला हुआ था और अंदर वाले रूम से कुछ आवाज़े आ रही थी...

जब मैने गौर किया तो उसमे संजू की आवाज़ भी थी...मैने तुरंत कीहोल से अंदर का नज़ारा देखा तो सामने संजू किसी औरत के साथ था.....जो संजू से लिपटी पड़ी थी...और दोनो नंगे थे....

सामने का नज़ारा देख कर ...मैं ये तो समझ गया कि अंदर चल क्या रहा है...पर मेरा माइंड गरम हो गया...

ये सोच कर कि मेरा सबसे खास दोस्त मुझसे छिपा कर मज़े कर रहा है...पर क्यो...क्या मैं उसे रोकता..या उसका काम खराब करता...बिल्कुल नही...पर संजू ने मुझे क्यो नही बताया...क्यो...आख़िर क्यो...??

मैं अपने माइंड मे सवाल लिए वहाँ से निकल गया...पर वहाँ से निकलते हुए मुझे अमर ने देख लिया....और उसने अंदर जा कर सब संजू को बता दिया.....

संजू हड़बड़ी मे बाहर आया...मुझे आवाज़ दी...पर मैं वहाँ से कार दौड़ा चुका था....

मैने संजू को सुन कर भी अनसुना किया और कार दौड़ा दी...और संजू निराश हो कर खड़ा रहा....

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कार चलाते हुए मैं संजू के बारे मे ही सोच रहा था....कि आख़िर संजू ने ऐसा क्यो किया...मुझसे क्यो छिपाया...क्यो....

तभी मेरा फ़ोन बज उठा...ये कॉल मेरी रेणु दी का था.....

( कॉल पर )

मैं- हाई डार्लिंग...

रेणु- तुम ठीक हो ना...

मैं- तुम इतनी घबराई क्यो हो...हाँ..मैं ठीक हूँ...मुझे क्या हुआ ...

रेणु- ओह ..थॅंक गॉड...मेरी तो जान ही निकल गई थी...

मैं- जान...क्या कह रही हो...हुआ क्या...

रेणु(मन मे)- क्या बोलू...मुझे पता चला था कि तुम पर अटॅक हुआ है...

मैं- हेलो...क्या हुआ....

रेणु- क्क़...कुछ नही...वो ..मुझे पता चला कि तुम्हारा आक्सिडेंट हुआ था...

मैं- ओह..आक्सिडेंट...अरे वो तो डॅड की कार का हुआ था...मेरा नही...

रेणु(ज़ोर से)- क्या...मतलब मामा...

मैं(बीच मे)- कुछ भी सोचने से पहले पूरी बात सुनो...डॅड बिल्कुल ठीक है...उन्हे कुछ नही हुआ...ओके..

रेणु- ह्म्म...तो आक्सिडेंट...आख़िर हुआ क्या...

मैं- बताता हूँ...

फिर मैने रेणु को सब कुछ बता दिया....जिसे सुन कर रेणु को जूही के लिए दुख भी हुआ...पर वो खुश थी कि मैं और डॅड ठीक है..

मैं- अच्छा अब ये बताओ कि मिलने कब आ रही हो...

रेणु- बहुत जल्दी ....इस बार आओगी ना तो फिर तुम दुवारा मुझे बुला नही पाओगे...

मैं- अच्छा...वो क्यो...

रेणु- क्योकि...क्योकि मैं वापिस ही नही आउगि..ओके...

मैं- ह्म...ये सही है...

रेणु- अच्छा ये बता कि आज अनाथालय गया था कि नही....

अनाथालय का नाम सुनते ही मैने फुल ब्रेक मारा और कार थम्म से रुक गई...ब्रेक इतना तेज था कि टायर के रगड़ने की आवाज़ रेणु के कानो मे भी जा पहुँची थी....

रेणु- क्या हुआ...

मैं- कुछ नही....मैं..मैं बाद मे बात करता हूँ ..बाइ...

और मैने बिना कुछ कहे फ़ोन कट की और निकल गया एक लंबे सफ़र पर....

सहर से 10 किमी दूर एक छोटी सी बस्ती बसी हुई थी....जिसमे एक छोटा सा अनाथालय भी था.....""एंजल'स""

एंजल्ज़ सिर्फ़ अनाथ लड़कियों के लिए था...

जैसे ही मैं एंजल्ज़ के अंदर पहुँचा तो वहाँ की हेड में ने मुझे देखते ही गले लगा लिया...

में- ओह अंकित...कैसे हो बेटे....मुझे पता था कि तुम ज़रूर आओगे...मुझे सुबह से तुम्हारा इंतज़ार था....

मैं- ठीक हूँ में...आप कैसी हो ...और यहाँ सब कैसा है...

में- सब ठीक है बेटा...अब तू पहले उससे मिल ले...फिर बात करेंगे.....

फिर मैं एक रूम मे गया और अपने साथ लाया हुआ फूलो का गुलदस्ता सामने रखा और कुछ देर रुक कर वापिस आ गया ...और में से कुछ देर बात करने के बाद मैने उन्हे एक चेक दिया...

मेम- 2 लख्स...इतना क्यो बेटा...

मैं- रखिए मेम....और हाँ...कोई भी ज़रूरत हो...अपने बेटे को याद करना..ओके...

मेम- ह्म्म..गॉड ब्लेस्स यू...

और फिर मैं में की ब्लेस्सिंग ले कर अपने घर आ गया........

जैसे ही मैं घर मे एंटर हुआ तो मेरे सामने डॅड और सुजाता बैठे हुए थे....दोनो शायद मेरे बारे ही बात कर रहे थे....इसलिए मुझे देखते ही दोनो चुप हो गये.....

सुजाता- अर्रे...आ गये बेटा...आओ बैठो....

आकाश- अंकित...जूही अब कैसी है...और उसके घरवाले ....उन्होने क्या कहा...

मैं- कुछ नही डॅड...सब ठीक है....

सुजाता- ह्म्म...आओ ना बेटा...थोड़ा मेरे साथ भी बैठ लो....

मैं- मुझे नीद आ रही है...

और मैं सीधा जा कर अपने रूम मे लेट गया...और लेट कर अपने अतीत को याद करने लगा.....

अपनी यादो मे खोया हुआ मैं कब नीद की आगोश मे चला गया....ये मुझे पता ही नही चला....

 


जब मेरी नीद खुली तो रात हो चुकी थी...पूरे रूम मे अंधेरा था और साथ मे सिर्फ़ एक आवाज़ थी जो मुझसे सीकायत कर रही थी...

""तुमने ऐसा क्यो किया था अंकित...क्यो...????? ""

ये आवाज़ सुनते ही मेरी झपकी खुल गई...और तब मुझे पता चला कि असल मे , मैं अभी जगा हूँ....वो आवाज़ तो मैं ख्वाब मे सुन रहा था....

मैं जाग कर बेड पर बैठ गया और फिर से उस आवाज़ को याद करने लगा....

मैं- मैने कुछ ग़लत नही किया था...बस हालात ही ग़लत हो गये थे....सच मे....

मैने अपने आप से ये बोल कर अपने दिल को तसल्ली दी और एक बार फिर उन्ही यादो मे खोया हुआ सो गया......

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अकरम के घर..........

जूही के घर पर इस हालत मे आने के बाद सबके चेहरे पर परेसानी थी....पर इस बात से सब खुश भी थे कि अब वो ठीक है...और उसकी वजह अंकित है...

अंकित को अकरम के घर मे सब पसंद करते थे...और उस पर सब भरोसा भी करते थे....बस एक को छोड़ कर...वो था वसीम....

वसीम अपने रूम मे बैठ कर पिछली कुछ घटनाओ के बारे मे सोच रहा था...

उसकी एक ग़लती की वजह से आज जूही इस हालत मे थी...जो वसीम को परेशान कर रही थी...

उसकी परेसानी अब गुस्से मे बदलती जा रही थी...उसका गुस्सा उसकी आँखो मे सॉफ देखा जा सकता था....

वसीम किसी भी हालत मे नाकामी बर्दास्त नही करता था...उसने हमेशा कामयाबी चाहिए...किसी भी कीमत पर....

यही बात उसके माइंड मे इस वक़्त भी चल रही थी....उसे अब सिर्फ़ बदला चाहिए था...चाहे उसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े....

वसीम ने फिर ड्रिंक करना सुरू कर दिया और काफ़ी देर सोचने के बाद किसी को कॉल किया ....

( कॉल पर )

वसीम- कहाँ है तू...

सामने- मैं...मैं घर पर हूँ..बोलो...

वसीम- सुन मेरी बात ....आज मैं उसे ख़त्म कर दूँगा....

सामने- क्या...किसको...किसकी बात कर रहा है....

वसीम(ज़ोर से)- अंकित...और कौन...साला ...साँप का सपोला....आज मैं उसे मिटा डालूँगा...

सामने- नही ...बिल्कुल नही...तुम ऐसा कुछ नही करोगे...समझे....

वसीम(गुस्से मे)- मैने तेरी राय नही माँगी...ना ही तेरी पर्मिशन माँगी...समझा...सिर्फ़ बता रहा हूँ...

सामने- नही वसीम..एक मिनिट..मेरी बात तो सुन भाई...देख...अंकित को मार कर कोई फ़ायदा नही होने वाला...तो...

वसीम(बीच मे)- फ़ायदा...हां...तेरा फ़ायदा नही...पर मेरा है...वैसे भी मैं फ़ायदे के लिए नही मार रहा...मुझे सिर्फ़ उस खानदान को मिटाना है...और उसकी शुरुआत आज से होगी....अंकित की मौत से....समझा...

सामने- पर..पर हमारी डील...और तू बाकी सबको क्या कहेगा...हाँ...

वसीम- बाकी सब गये भाड़ मे...और तेरी डील भी गई जहन्नुम मे...अब मैं वो करूगा जो मेरी मर्ज़ी होगी....समझ ले...

सामने(अकड़ कर)- तू ग़लती कर रहा है वसीम...मेरे खिलाफ गया तो...

वसीम(बीच मे)- ओये...तू मुझे धमका रहा है...साले...अगर मेरा मूह खुल गया ना...तो दुनिया जान जाएगी कि शरद गुप्ता कौन है और उसने क्या किया था..समझा...और फिर मेरा जो भी हो...तेरा भी कुछ अच्छा नही होगा....समझा...

सामने(डरते हुए)- पर..मेरी बात तो सुन..वसीम...वसीम...

सामने वाला बोलता रहा पर वसीम ने बिना कुछ कहे-सुने कॉल काट कर दी.....

फ़ोन कट कर के वसीम ने अपने आदमियों को कॉल कर के कुछ काम बोला और फिर से ड्रिंक करने लगा....

दूसरी तरफ सरद फ़ोन कट होते ही परेशान हो उठा....वसीम ने उससे जो कुछ भी कहा...उसे सुन कर वो डर गया था....

सरद(मन मे)- अगर साले वसीम ने सच मे अंकित को मार दिया तो सारी दौलत हाथ से निकल जाएगी...और हमारा बरसो का प्लान चौपट हो जायगा....वसीम को रोकना ही होगा....

पर मैं उसे रोकू कैसे...साला बात ही नही सुन रहा....लगता है मुझे भाई से बात करनी ही होगी...एक वही है जो मुझे इस मुस्किल से निकाल सकते है....

तभी पीछे से सरद की बेटी आ गई...जो इस समय पूरी नंगी थी....

मोना- डॅड...क्या हुआ...मुझे गरम कर के यहाँ भाग आए...मुझसे मन भर गया क्या....

सरद- नही...पर अभी यहाँ से जाओ...मूड नही रहा अब....

मोना- डॅड...मुझे आग लगा कर बोल रहे हो मूड नही...क्या है ये...

सरद(गुस्से से)- बोला ना जा...साली रंडी...बस लंड चाहिए हमेशा...भाग यहाँ से....

मोना(गुस्से से)- रंडी...तो बनाया किसने...तूने...साला गन्दू...4 धक्को मे पस्त पड़ जाता है फिर भी मैं चुप रहती हूँ..और इतने नखरे...अब आना...छुने नही मिलेगा...ह्म्म...

और मोना एक घायल नागिन की तरह सरद को फुसकार कर निकल गई...और सरद गुस्से से बस उसे जाता देखता रहा...बोलने को कुछ था ही नही उसके पास....क्योकि इस हालत का ज़िम्मेदार वो खुद ही था.....

पर सरद ने तुरंत अपनी बेटी से माइंड डाइवर्ट किया और फिर से वसीम के बारे मे सोचने लगा...कि आख़िर उसे रोका कैसे जाए....क्या भाई को ही कॉल करना पड़ेगा....???

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रेणु के घर.........

रेणु किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी...

( कॉल पर )

रेणु- क्या...ये आप क्या कह रहे है...आप इसी सहर मे है...

सामने- हाँ...तुम्हारे पास ही हूँ...क्यो...तुम्हे खुशी नही हुई ...

रेणु- मैं तो बहुत खुश हूँ...पर आपको किसी ने देख लिया तो...

सामने- कोई नही देखेगा....डोंट वरी....

रेणु- ओके...लेकिन आप घर मत आना...हो सकता है आरती आपको पहचान जाए...

सामने- उसकी फ़िक्र मत करो...वो हमारे खिलाफ नही जाएगी...बेवकूफ़ ह्म साली...

रेणु(हँसते हुए)- हाँ..है तो बेवकूफ़....वो यही समझती है कि आकाश ने ही उसके पति को मारा था...और इसी वजह से वा मेरे साथ है....मेरा तो काम आसान कर दिया...

सामने-ह्म्म...पर अभी काम पूरा नही हुआ....उसको भनक नही पड़नी चाहिए....उसे इसी धोखे मे रहने दो....उसे तब बताना जब उसका परिवार मिट जाए....

रेणु- ह्म्म..ऐसा ही होगा....

सामने- अरे हाँ...उससे वो काम बोला कि नही...वो मान गई कि नही..

रेणु- ह्म्म्म ..मान गई...काफ़ी ना-नुकुर किया...बट मान गई...आख़िर उसे भी तो बदले की आग बुझानी है...और इसी बहाने उसके जिस्म की आग भी बुझ जाएगी...हहहे.....

सामने- बहुत खूब...मैं उस घर की हर औरत को रंडी बनाने के बाद ही उन सब को मिटाउंगा.....

रेणु- आप फ़िक्र ना करो..सब वैसा ही होगा जैसा हमने सोचा था....एक बार अंकित को घर तो आने दो...फिर देखना...कैसा गेम होगा उसके साथ...

रेणु अपनी मस्ती मे सब बोले जा रही थी...उसे पता ही नही चला कि आकृति पीछे आ कर खड़ी है और सब सुन रही है....आरती ने उसके सभी बुरे ख्यालों को को सुन लिया...और सुन कर उसकी आँखो से आँसू छलक पड़े....

आकृति- तो क्या...आकाश भाई ने सच कहा था कि वो बेगुनाह है...हाँ....

जैसे ही रेणु ने आकृति की आवाज़ सुनी तो वो चौंक गई और जल्दी से कॉल कट कर दी...

रेणु- आप ...यहाँ....मतलब...क्या हुआ...आप रो क्यो रही है...

आकृति- मेरी छोड़ो...ये बताओ कि अभी तुमने जो कहा...वो सच था क्या...

रेणु(अंजान बनते हुए)- मैने...क्या कहा मैने...कैसा सच...हाँ...

आकृति- वही..कि सुभाष की मौत आकाश के हाथो नही हुई...

रेणु- नही तो...मैने ऐसा कुछ नही कहा...मुझे कैसे पता कि सुभाष की मौत किसके हाथ से हुई...ये तो आपने ही बोला था उन्हे आकाश ने मारा..

आकृति- हाँ...क्योकि मैं यही समझती थी...पर आज पता चल गया कि मेरा भाई बेकसूर है...असली हत्यारा कोई और है.....

रेणु- नही..आकाश ने ही सबको मारा था...और उसे भी अब मारना होगा...और उसके बेटे को भी ....

आकृति- क्या...ये क्या बोल रही बेटा....तुम सच जानने के बाद भी ...और अंकित...उसने क्या किया...तुम तो उससे प्यार करती हो..है ना...

रेणु- प्यार...कैसा प्यार..वो सब एक नाटक था....और वैसा ही नाटक तेरे साथ भी किया....समझी...

आकृति- नाटक...मतलब तू मुझसे भी प्यार नही करती...

रेणु- नही...मैं सिर्फ़ तेरा सहारा ले कर आकाश से अपना बदला ले रही थी...अपने माँ-बाप का...मेरी माँ की मौत का...समझी.....

अचानक आकृति ने अपने गुस्से को बाहर निकाला और रेणु को धक्का मार कर बोली....

आकृति- हाँ कमीनी...मैने सब सुन लिया...तू मुझे अंकित के साथ इसलिए सुलाना चाहती है ना कि मेरे परिवार मे रंडीपन छा जाए...हाँ...

रेणु- ओह्ह..तो तूने सब सुन लिया...खैर...सुन लिया तो ठीक...सोना तो तुझे है ही...इसी बहाने मज़े भी मार ले...

आकृति- छी...मैं ऐसा कभी नही करूगी...मैं तो बदले की बात से अंधी हो गई थी जो तेरी हाँ मे हाँ मिला दी...पर अब सच मेरे सामने है...मैं ऐसा कुछ नही करने वाले...और ना ही तुझे कुछ करने दुगी..समझी...

रेणु(गुस्से मे)- तू रोकेगी मुझे...हहहे....बताओ तो कैसे...

आकृति- मैं अभी अंकित को कॉल कर के सब बता दूगी...फिर देखना...वो तेरा क्या हाल करता है...

आकृति पलट कर फ़ोन करने जाने लगी...तभी मेन गेट खुला और तीन लीग अंदर आ गये...

एक आदमी सिर पर गोल कॅप और लोंग कोट पहने हुए था..हाथ मे सहारे के लिए चढ़ि थी और मूह मे धुआँ उगलता सिगार...

दूसरा आदमी घनी दाढ़ी-मूच्छे रखे हुए था...देखने मे ही खूखार दिख रहा था...और वो एक लड़के को अपनी गिरफ़्त मे लिए हुए था...और दूसरे हाथ से खंजर को उस लड़के के गले पर लगाए हुए था....

तीसरा सक्श वो लड़का था...जो उस आदमी की गिरफ़्त मे था....मजबूर...और आखो मे ख़ौफ़ छाया हुआ था उसके....उसके सिर से डर की वजह से पसीना निकल रहा था और आँखो मे आँसू भी भरे हुए थे....

उनको देखते ही आकृति अपनी जगह पर जाम हो गई....

आकृति- बेटा..बेटा ये तुम्हे...कौन हो तुम...और मेरे बेटे को...

तभी सिगार पीने वाले आदमी ने हाथ से इशारा कर के आकृति को चुप रहने को कहा और फिर धुआ छोड़ते हुए बोला...

आदमी- अगर अपने बेटे की ज़रा भी फ़िक्र है तो वही करो जो रेणु कह रही है..बिना कोई सवाल किए...वरना...तू इतनी समझदार तो है ना....ह्म...

आकृति- नही...मैं नही करूगि....कभी नही...

आदमी- तो अपने बेटे को आख़िरी बार देख लो....रघु..काट डालो...

उसके बोलते ही बाजू मे खड़े आदमी ने लड़के की गर्दन पर खंजर दबाया और लड़का चीख पड़ा...

लड़का- माआ.....माँ...बचाओ...

आकृति- नही...रुक जाओ...छोड़ दो मेरे बेटे को...

आदमी- ह्म्म...तो हमारा काम कर दो....तुम्हारा बेटा सही-सलामत तुम्हे मिल जायगा...प्रोमिस...

आकृति(रोते हुए)- ठीक है....मैं सब करूगी...जो भी तुम चाहो...

आदमी- शाबाश......रघु, लड़के को अंदर ले जाओ और कुछ खिलाओ इसे...भूखा होगा बेचारा...

रघु- जी सर...चल बेटा....

आकृति चुपचाप अपने बेटे को अंदर जाते देखती रही पर बेबसी मे कुछ कर नही पाई...फिर जैसे ही वो पलटी तो सामने खड़े आदमी को देख कर चौंक गई....जिसने अब अपना कॅप निकाल लिया था....

आकृति- तूमम्म...तुम ज़िंदा हो...

आदमी- हाँ...और ज़िंदा ही रहुगा...मरेगा तो आकाश...और उसका बेटा...और बाप भी...हाहाहा....

उस आदमी के ठहाको के साथ रेणु भी हँसने लगी और आरती बेबस खड़ी हुई उन दोनो को देखती रही और अपनी बेबसी पर आँसू बहाने लगी.....

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सहर मे एक आलीशान क्लब के वीआइपी रूम मे.......

पूरे रूम मे हल्की-हल्की रोशनी छाइ हुई थी...चारो तरफ शराब और सिगरेट की स्मेल फैली हुई थी....

कबाब और शराब के साथ रूम मे शबाब का भी इंतज़ाम था....

एक बड़े से सोफे पर सफेद ड्रेस पहने हुए एक अधेड़ एज वाला आदमी बैठा हुआ था...जो अपनी जाँघ पर छोटे कपड़े पहने हुए रंडी टाइप की लड़की को बैठाए हुए उसकी गान्ड सहला रहा था.....

ये आदमी सहर का एमएलए था......

उस आदमी के राइट साइड पड़े सोफे पर एक दूसरा आदमी भी एक लड़की को अपनी गोद मे बैठाए शराब का मज़ा ले रहा था....

ये आदमी था मिस्टर.वर्मा.....आकाश का बिज़्नेस पार्ट्नर.....

उसके ठीक सामने के सोफे पर एक आदमी पोलीस की वर्दी मे बैठा हुआ था...

ये वर्दी वाला तो 2-2 लड़कियो को अपनी दोनो जाघो पर बैठाए हुए था...

एक लड़की उसे चिकन खिलाती और दूसरी पेग पिलाती....

ये तीसरा कमीना था रफ़्तार सिंग....

तीनो ही मर्द अपनी बेटी की एज की लड़कियों के साथ रात रंगीन कर रहे थे....

एमएलए(गोद मे बैठी लड़की की गान्ड दबा कर)- तो वर्मा....तेरा काम हो जायगा ना...

वर्मा- जी सर...आकाश को दिया टाइम ख़त्म ही होने वाला है...समझो काम हो गया ...

एमएलए- ह्म्म..हो गया तो ही ठीक होगा...वरना तू मुझे जानता है...

वर्मा- अरे सर...मैं बोल रहा हूँ ना...आकाश सड़क पर आने ही वाला है...फिर निकाल देना साले की हेकड़ी....

एमएलए(लड़की को साइड कर के खड़ा हो गया)- ह्म्म...हेकड़ी तो निकालनी ही होगी...तभी दिल को चैन मिलेगा....

रफ़्तार- ओह..अरे...रूको तो...हाँ तो एमएलए साब...एक बात पूछनी थी...पुच्छू क्या....

एमएलए(गुस्से से)- रफ़्तार....कुत्ते सवाल नही करते...सिर्फ़ हुकुम मानते है...समझा कुत्ते...

वर्मा- अरे एमएलए सर...पूछ लेने दो ना बेचारे को....अपना ही है...पूछ बेटा...क्या पूछना है...

रफ़्तार- बस यही कि एमएलए साब की आकाश से ऐसी क्या दुश्मनी है कि वो उसे हर हाल मे बर्बाद करने पर तुले है....

एमएलए- बता वर्मा...तू ही बता इसे...

वर्मा- ह्म्म...सुन रफ़्तार...एक अड्वाइज़ देता हूँ...चुपचाप हड्डी खा और हुकुम बजा...फालतू मत सोच...कुत्ता है तो कुत्ता बना रह...समझा....

और फिर वर्मा हँसने लगा और एमएलए भी साथ देने लगा...बेचारा रफ़्तार...ना चाहते हुए भी मुस्कुरा कर रह गया...

एमएलए(हँसते हुए)- अच्छा वर्मा...ये बताओ कि उस सक्सेना को अपनी मुट्ठी मे कैसे किया...वो तो आकाश का भरोसेमंद पार्ट्नर था ना....

वर्मा- ह्म..था तो...पर अब अपना कुत्ता है...और उसकी वजह ये रही....

वर्मा ने इतना बोला और एक आवाज़ दी...तो रूम मे दो मस्त औरतें एंटर हुई...जिन्हे देख कर एमएलए के साथ-साथ रफ़्तार की आँखे भी फैल गई....

रफ़्तार- तुम...मतलब...आप यहाँ...और ये कौन है...

वर्मा- चौंक मत रफ़्तार....ये मेरी रखेल है अब...सविता....और ये मेरी दूसरी रखेल...सक्सेना की बीवी...जो आज रात हम सबको खुश करेगी...है ना मेरी जान...हाहाहा....

फिर रूम मे सभी के ठहाके गूँज उठे सिर्फ़ सक्सेना की बीवी को छोड़ कर...वो बेचारी सिर झुखाए आँसू बहाने लगी...और बाकी सब उसकी मजबूरी देख कर और ज़ोर से हँसने लगे.....

अंकित के घर........

मैं अपने रूम मे लगभग रात तक सोता रहा....मेरी आँख तब खुली जब मुझे किसी की आवाज़ सुनाई दी...ये आवाज़ सुजाता की थी....

सुजाता- उठो बेटा...कब तक सोते रहोगे....

मैने आँख खोल कर उसे देखा...पर अभी मुझे ठीक से कुछ समझ नही आया...

मैं- सविता ताई...टाइम क्या हुआ...

सुजाता- टाइम तो रात के खाने का हो चुका है...और हाँ...मैं तुम्हारी सविता आई नही हूँ...आंटी हूँ...

मैं(आँखे मल कर)- ओह...मुझे लगा सविता है...वो ही मेरा ख्याल रखती है ना...इसलिए मुझे लगा कि...

सुजाता(बीच मे)- कोई बात नही...आज मैं तुम्हारा ख्याल रख लेती हूँ...ह्म...वो क्या है कि तुम्हारी सविता आई किसी काम से बाहर गई हुई है ना...

मैं- ओह...थॅंक्स आंटी...पर आपको मेरे लिए परेशान होने की ज़रूरत नही...आप सो जाइए ..मैं खाना ले लूँगा...

सुजाता- अरे...ऐसे-कैसे...आंटी भी कहते हो और परेसानी की बात भी करते हो..हाँ...

मैं- अरे..मेरा मतलब वो..

सुजाता(बीच मे)- मतलब छोड़ो...तुम जल्दी से फ्रेश हो जाओ...मैं खाना लगाती हूँ...ह्म

और फिर सुजाता बिना कुछ सुने अपनी गान्ड मटकाती हुई रूम से निकल गई ...और मैं बाथरूम मे....

थोड़ी देर बाद जब मैं वापिस आया तो देखा कि सुजाता खाने की प्लेट के साथ मेरा इंतज़ार कर रही है....

कमाल की बात ये थी कि अब वो शॉर्ट नाइटी पहन कर आई थी...जबकि कुछ देर पहले वो फुल मॅक्सी मे थी...

मैं- अरे...आप खाना क्यो ले कर आ गई...मैं आ ही रहा था...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- इसमे क्या हुआ...वैसे भी बाकी सब खा चुले है...सिर्फ़ तुम ही रह गये...तो सोचा कि यही ले आउ...

मैं- ओह...डॅड कहाँ है वैसे...

सुजाता- वो..वो तो सो रहे है....अब बातें छोड़ो और खाना खा लो जल्दी से...आओ बैठो...

मैने भी आगे कुछ नही कहा बस चुपचाप खाने बैठ गया....

पूरे खाने के दौरान सुजाता अपनी अदाए दिखाती रही...कभी झुक कर बूब्स दिखना...कभी अंगड़ाई के बहाने बूब्स का आकार दिखना...कभी अपने पैर पर पैर चढ़ा कर चिकनी जाघे दिखाना...तो कभी अपनी जीभ को अपने गुलाबी होंठो पर फिरना...

मैने उसकी हरक़ते देखते हुए अपना खाना ख़त्म किया और हाथ सॉफ कर के वापिस बेड पर बैठ गया...

मैं- ह्म्म..हो गया खाना....अब आप भी सो जाइए आंटी...

सुजाता- मैं..हाँ..सो जाउन्गी...इतनी जल्दी भी क्या है....तुझे तो नीद नही आ रही ना...

मैं- क्या आंटी...अभी तो जगा हूँ...अभी कहाँ नीद आने वाली..

सुजाता- तो फिर मुझे क्यो भगा रहा है...

मैं- अरे नही...मैं तो बस कह रहा था कि रात हो गई...

सुजाता(बीच मे)- तो क्या रात सिर्फ़ सोने के लिए होती है...ह्म्म...

सुजाता ने थोड़ा आगे झुक कर एक मुस्कान फैला कर ये बात बोली...

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..शायद...

सुजाता- शायद ...मतलब...

मैं- उम्म...मतलब ये..कि ये डिपंड करता है कि रात किस लिए होती है....

सुजाता(मुस्कुरा कर)- अच्छा..तो ये बताओ कि आज क्या डिपंड कर रहा है...यहा मैं हूँ...तुम हो..रात जवान है...प्यारा समा है...ह्म..

मैं(मन मे)- लगता है साली आज फुल मूड मे है...चुद कर ही जाएगी...

सुजाता(मेरे सीने पर हाथ फिराते हुए)- अब क्या सोचने लगा बेटा....

मैं(आगे झुक कर सुजाता के कान मे)- यही कि गेट खुला है...पहले बंद तो करो...फिर रात को जवान करते है...

 


सुजाता मेरी बात सुन कर सकपकाई और फिर उठ कर गेट लॉक किया और पलट कर मुस्कुराने लगी....

मैं- आंटी...इस जवान रात मे इस कपड़ो की क्या ज़रूरत..हाँ...क्यो अपने नाज़ुक जिस्म पर इस नाइटी का बोझ डाले हो...

सुजाता मेरी बात सुन कर मुस्कुरा दी और अपनी नाइटी को उपेर उठाने लगी...फिर अचानक रुक गई...

सुजाता- तुम ऐसे मत देखो...मुझे शरम आती है...

मैं- आंटी..मैं इस मामले मे बेशरम औरत को ही पसंद करता हूँ...शरम करनी है तो फिर...

मैने इतना ही बोला की सुजाता ने एक झटके मे अपनी नाइटी निकाल फेकि....अब वो सिर्फ़ एक पैंटी मे खड़ी थी...ब्रा भी नही पहनी थी उसने....

उसके बड़े-बड़े बूब्स और उन पर पिंक निप्पल लाइट मे दिखने लगे....उसका थोड़ा मोटा सा पेट और गहरी नाभि मुझे आकर्षित करने लगी...और उसकी सुड़ोले मोटी जाघे...उफ्फ...क्या कमाल लग रही थी....

मैं सुजाता को एक टक देख रहा था और वो शर्मा रही थी....उसने शरम से अपने हाथो से अपने बूब्स छिपा लिए ....

सुजाता- प्ल्ज़ अंकित...ऐसे मत देख...

मैं- आंटी...तुम जैसी माल हो तो आँखो का क्या दोष....

सुजाता(शरमाते हुए)- अंकित्तत्त...

मैं- अब आ भी जाओ आंटी...आज की इस जवान रात मे आपकी मदमस्त जवानी को चखने तो दो...आओ मेरी रानी...

सुजाता मेरे मुँह से रानी सुन कर खुश हो गई और मटकते हुए बेड के पास आ गई....

मैं उठ कर बेड के किनारे गया और सुजाता के हाथो को पकड़ कर बोला...

मैं- आंटी...आज खाने के बाद कुछ मीठा नही खाया था...पर अब आपके जिस्म से मुँह मीठा हो जायगा...

सुजाता- अंकित...खा जाओ मुझे...मैं नही रोकूगी...

मैं( मन मे)- मैं जानता हूँ साली...तू रुकवाने नही...ठुकवाने आई है...

मैने सुजाता के दोनो हाथो को हटा कर उसके बूब्स पर अपनी जीभ फिरा दी तो सुजाता सिसक पड़ी...

आंटी- उउंम्म...अंकित....

मैं- सस्स्र्र्ररुउउप्प्प्प.....आअहह....टेस्टी...सस्स्रररुउउप्प्प्प.....सस्ररुउप्प्प.....

और फिर मैने सुजाता के बूब्स को बारी-बारी चाटना सुरू कर दिया और सुजाता मेरी जीभ के स्पर्श से मस्ती मे झूमते हुए सिसकने लगी.....

थोड़ी देर बाद ही सुजाता की सिसकिया और भी ज़्यादा हो गई...जब मैने सुजाता के निप्पल को होंठो मे दबाकर चूसना सुरू किया....

आंटी- ओह्ह्ह..बेटा....आहह...ऐसा तो...आअहह...बएटाा.....

मैं- उउउम्म्म्ममम.....उूुउउम्म्म्मम....उूउउंम्म...उूउउम्म्म्म...उूुउउम्म्म्म...

आंटी- ओह्ह बेटा....चूसो...और ज़ोर से...आअहह....ऐसे ही...आअहह....आअहह.....

मैं- उउउंम्म...आअहह...मेरी टेस्टी आंटी....उूउउम्म्म्मम....उूउउम्म्म्मम....उूुउउम्म्म्ममम...उूउउंम्म....

मैने सुजाता के पिंक निप्पल को चूस -चूस कर लाल कर दिया...और उसके बड़े-बड़े बूब्स को मुँह की लार से तर कर दिया...सुजाता अब पूरी मस्ती मे आ गई थी...वो मेरा सिर अपने सीने पर दबाते हुए मस्ती मे उड़ रही थी......

थोड़ी देर बाद मैने सुजाता को बेड पर लिटाया और उसके उपेर आ कर उसके होंठो को चूसने लगा...सुजाता भी किसी भूकि कुतिया की तरह मेरे होंठो को चूसने लगी...हम दोनो एक दूसरे के होंठो का रस्पान करते हुए एक-दूसरे के जिस्म को जकड़ने लगे.....दोनो ही मस्ती के सागर मे गोता लगा रहे थे...

धीरे -धीरे मैं सुजाता के होंठो से उसके सीने से होता हुआ उसकी नाभि तक पहुँच गया और अपनी जीब उसकी गहरी नाभि मे डाल दी....

आंटी- उउफ़फ्फ़....बेटा....आआहह...तुम जादूँगर हो...इतना मज़ा....आअहह....

मैने थोड़ी देर तक सुजाता की नाभि को चाटा और फिर नीचे की तरफ बढ़ कर उसकी पैंटी को दांतो से दबा लिया...

और फिर दांतो से खीच कर पैंटी को नीचे खिसकाया....सुजाता ने भी गान्ड उठा कर अपनी पैंटी को नीचे हो जाने दिया....

पैंटी थोड़ी ही नीचे हुई तो सुजाता की बिना बालो वाली चूत का कुछ हिस्सा चमक उठा...

मैं(मन मे)- साली पूरी तैयारी से आई थी....एक दम चिकनी चूत कर के आई आई है...मज़ा आएगा...

फिर मैने हाथो से पैंटी पकड़ी और सुजाता ने गान्ड उठा कर अपने पैर हवा मे उठा लिए...पलक झपकते ही उसकी पैंटी जिस्म से अलग हो गई...

मैने तुरंत सुजाता के पैर फैला कर उसकी चूत पर मुँह लगा दिया और जीभ फिरते ही सुजाता कसमसा कर सिसक उठी....

आंटी- आअहह...मेरे राजा...आज ऐसा मज़ा दो की मज़े को भी मज़ा आ जाए...

मैं- हाँ मेरी रानी...आज की रात तुझे जन्नत दिखाउन्गा....सस्स्स्र्र्ररुउुउउप्प्प्प....

और फिर मैने चूत चुसाइ चालू कर दी.....

मैं- सस्स्रररुउउउप्प्प्प्प......सस्स्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प्प्प....सस्स्स्रररुउउप्प्प्प्प......सस्स्रररुउउप्प्प्प्प....

आंटी-आहह..आह..आ..ऊहह..म्माआ.आआहह..बेटा…आअहह.....

मैं-उउंम..सस्ररुउपप,उउंम्म..उउम्मह.....

आंटी-आहह..अंदर चूस आहह....बेटा…आहह…उउउम्म्म्म....

मैं-उम्म्म…उउंम..उउंम्म.....उूउउंम्म....

आंटी-आअहह..मैइयैईंन…आइईइ..अहहह….ओह्ह..आऐ…बेटा…आअहह....आआहह.....

आंटी मेरे मुँह को चूत मे दबा कर झड़ने लगी और मैने आंटी का चूत रस पीने लगा….जब मैने आंटी की चूत खाली कर दी तो आंटी को चोद दिया और आंटी भी मेरा सिर छोड़ कर तेज साँसे लेने लगी..…

मैं- बस...इतनी जल्दी...

आंटी- आअहह...बहुत दिनो बाद कोई मर्द मिला ना...इसलिए...

मैं- ह्म्म..तो रात का क्या होगा अब....

आंटी- रात तो रंगीन ही होगी...

मैं- अच्छा...कैसे....

आंटी- रुक...बताती हूँ...

और फिर सुजाता ने मुझे लिटाया और मेरे बॉक्सर को निकाल कर मेरे आधे खड़े लंड को आज़ाद कर दिया.....

लंड देखते ही सुजाता की आँखो मे चमक आ गई और वो तुरंत लंड को हिलाने लगी...

मैं- आंटी...हिलाने से काम नही होगा...ये प्यार माँगता है...प्यार करो...

आंटी- ह्म्म...अभी लो बेटा...ये है ही प्यार करने के लिए...सस्स्रररुउउप्प्प्प्प...

और सुजाता ने अपनी जीभ लंड के टोपे पर फिरा दी...और फिर सुपाड़ा मुँह मे भर कर चूसने लगी....

मैं- आअहह...ऐसे ही...ये ठीक है...ऐसे ही प्यार करो...

आंटी- उूुउउम्म्म्मम....उूउउंम्म....उउउम्म्म्म...उउउम्म्म्म....

मैं- यस आंटी...कम ऑन...एसस्स......

आंटी-सस्स्स्सुउउउप्प्प…ऊओंम्म….उउउंम्म….सस्स्रर्र्र्र्रप्प्प्प

मैं-आआहह…ऑंटी….क्कक्या चूस्ति हो….ओर तेज,…हहाअ …ऐसे ही

आंटी-सस्स्स्र्र्ररुउउप्प्प…..ऊओंम्म….उउउंम्म…सस्स्रररुउउप्प

मैं-आअहह…..ऐसे ही….ओर तेज…मेरी रानी…आअहह…

आंटी-सस्रररुउुउउप्प्प्प्प्प….सस्स्स्र्र्ररुउुउउप्प्प…..उूुउउम्म्म्ममनममम….सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प......

मैं-आंटी …मज़ा आ गया…आअहह...

 
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