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चूतो का समुंदर

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रिचा के घर.........

रफ़्तार रिचा को पोलीस स्टेशन से लेकर उसके घर पहुँचा और उसने लॅडीस पोलीस को वापिस भेज कर रिचा को अंदर बैठा दिया....

रिचा(खड़ी हो कर)- हहेही......मज़ा आ गया.....अब अंकित तो गया....हहहे....

रफ़्तार(गेट बंद कर के)- स्शहीए....पागल हो गई क्या.....किसी ने सुन लिया तो सब चौपट हो जायगा...शांत रहो.....

रिचा(पलट कर)- अरे यार...तू टेन्षन बहुत लेता है....ये...अब कुछ नही होगा...अपने सारे पत्ते सही जगह पड़े है...अब तो बस इंतज़ार है उस कमीने की मौत का....

रफ़्तार- ह्म्म...पर उससे क्या होगा...मेरा मतलब था कि आकाश के रहते हुए हमे कोई फ़ायदा नही....

रिचा(मुस्कुरा कर)- उसका भी इंतज़ाम हो गया है....एक तो वर्मा उसकी बजाने पर तुला है...और फिर हमारा एक साथी भी है...जो इस वक़्त आकाश को अपने इशारे पर नचा रहा है...तुम बस देखते जाओ....अंकित ख़त्म तो समझो सब ख़त्म....हहहे.....

रफ़्तार(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..बहुत शातिर है तू तो...मान गये...

रिचा(रफ़्तार को देख कर)- शातिर तो तू भी कम नही मेरी जान...क्या काम किता तूने...अंकित के तो तोते उड़ा दिए....

रफ़्तार(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..वो तो है...मुझे लगता है कि मुझे अब बड़ा इनाम मिलना चाहिए....

रिचा- मिलेगा...ज़रूर मिलेगा...पर उससे पहले मैं तुम्हे एक इनाम दूगी....

रफ़्तार- ओह हो...तो दो फिर...

रिचा- तो लो....

और इतना बोल कर रिचा ने एक-एक कर के अपने कपड़े निकाल दिए और नंगी खड़ी हो गई....

रफ़्तार(आँखे फाड़ कर)- वाउ....मस्त इनाम है....

रिचा(अपने बूब्स मसल्ते हुए)- आ जा फिर...ले ले अपना इनाम...और आज का इनाम है तेरी मर्ज़ी....समझा...

रफ़्तार- मतलब....

रिचा(आगे बढ़ते हुए)- मतलब ये मेरे राजा...कि आज तू जैसे चाहे मीट जिस्म को भोग...मैं उफ्फ भी नही कारूगी...बस इतना रगड़ मुझे की मेरा रोम-रोम थर्रा जाए....

रफ़्तार(कपड़े निकालते हुए)- तो फिर देख...आज मैं तेरा रोम-रोम कैसे खड़ा करता हूँ....आजा मेरी रंडी....

और इतना बोलकर रफ़्तार भी नंगा हो गया और दोनो चिपक कर किस करने लगे....और थोड़ी ही देर बाद रफ़्तार का लंड रिचा की गांद को ज़ोर-ज़ोर से भेदने लगा......

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रेणु के घर..........

रेणु अपने घर पर आराम कर रही थी कि तभी उसे एक कॉल आया...और फ़ोन पर न्यूज़ सुनते ही वो चौंक कर खड़ी हो गई....

रेणु(फ़ोन पर)- ये क्या बक रहे हो तुम....

सामने- मेडम...मैं सच बोल रहा हूँ....

रेणु- ओह नो....तुम...तुम फ़ोन रखो...

और फिर रेणु फ़ोन पटक कर बाथरूम मे घुस गई और थोड़ी ही देर मे रेडी हो कर बाहर जाने लगी....तभी रघु ने उसका रास्ता रोक लिया.....

रेणु(गुस्से से)- तुम...हटो मेरे सामने से.....

रघु- नही....तुम बाहर नही जा सकती.....

रेणु(रघु को घूर कर)- तेरी इतनी हिम्मत....मुझे रोकेगा तू...चल हट....

रघु(गेट लगा कर)- मैने कहा ना....तुम कही नही जाओगी ...

रेणु(रघु का हाथ पकड़ कर)- तू हट रहा है या फिर मैं तुझे तेरी औकात दिखाऊ....

तभी पीछे से मदन की आवाज़ आई....

मदन- रेणु....शांत हो जाओ....

रेणु(पलट कर)- डॅड...देखिए ना...ये मुझे जाने से रोक रहा है...मुझे....

मदन- शांत....तुम अंदर जाओ...

रेणु(हिरानी से)- क्या....मैं अंदर जाउ...मैं....आप इससे कहो कि मेरा रास्ता छोड़ दे...मुझे बाहर जाना है....

मदन- नही...तुम बाहर नही जा सकती....

मदन की बात सुन कर रेणु को झटका लगा और वो मदन को घूर्ने लगी....

रेणु- क्या कहा आपने...आप इसका साथ दे रहे है...इस नौकर का......

मदन- नही...ये तो वही करता है जो मैं इसे करने का बोलता हूँ....

रेणु- मतलब आप...आप मुझे मना कर रहे है...

मदन- हाँ...तुम कही नही जाओगी....ये हमारा फ़ैसला है...

रेणु(गुस्से से)- मैं तो जाउन्गा....

और इतना बोल कर रेणु गेट की तरफ बढ़ी कि तभी रघु ने उसका हाथ पकड़ कर पीछे धकेल दिया.......

रेणु(चिल्ला कर)- तेरी इतनी हिम्मत....कमीने...

रेणु आगे बढ़ती...उससे पहले ही मदन ने रेणु का हाथ पकड़ लिया....

रेणु- डॅड...मुझे जाने दीजिए प्ल्ज़....मुझे अर्जेंट काम है....

मदन- कौन सा काम...अंकित से मिलने का काम....पोलीस स्टेशन जाना है.....हाँ...

रेणु(हैरानी से)- क्या...इसका मतलब....आपको सब पता है....मतलब...इस सब मे आप भी....

मदन(बीच मे)- हाँ....मैं भी....और अब तुम चुपचाप अंदर जाओ....

रेणु(गुस्से से)- नही...आप अंकित के साथ ऐसा नही कर सकते....भूलिए मत....ये मेरा प्लान है....मेरा....

मदन- नही....अब नही....

रेणु- अगर आपने अंकित को कुछ किया तो मैं आपका पूरा प्लान चौपट कर दूगी...समझे आप...समझे..एयाया....

इतना बोलते ही रेणु के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ पड़ा...जो मदन ने मारा था.....

मदन(चिल्ला कर)- नही....ये तेरा प्लान था....पर अब...ये मेरा प्लान है....और अब वही होगा जो हम चाहेगे.....समझी....(रघु से)- रघु...ले जा इसे और डाल दे कमरे मे....ज़्यादा नखरे करे तो ऐसा हाल करना की बेड से भी ना उठ पाए....जा ले जा....

मदन का ऑर्डर मिलते ही रघु ने रेणु को पकड़ा और लगभग घसीट ते हुए उसे रूम मे बंद कर के आ गया....

रघु(मदन से)- क्या सर...मैने सोचा नही था कि आप अपनी बेटी के साथ ऐसा....

मदन(बीच मे)- बेटी....किसकी बेटी....मेरे मक़सद को हासिल करने का ज़रिया थी वो...बस...और कुछ नही.....

रघु(हैरानी से)- मतलब....रेणु...

मदन(बीच मे)- उसे छोड़....तू पेग बना.....हमारे दोस्त आते ही होगे....आज आआज़ाद की नस्ल की बर्बादी का जश्न होगा....हाहहाहा.....

और फिर रूम मे मदन और रघु के ठहाके गूज़्ने लगे...और अंदर 2 रूम मे आँसुओ के साथ सिसकारियाँ उठने लगी.....

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अंकित के घर........

अंकित को जबसे पोलीस पकड़ कर ले गई थी....तभी से आकाश अपने रूम मे उदास सा बैठा था....

आकाश तो उसी वक़्त अंकित के पीछे स्टेशन जाना चाहता था...पर सुजाता ने उसे किसी तरह से रोक लिया....

सुजाता(रूम मे एंटर कर के)- अब कब तक यू उदास बैठे रहेगे....ह्म...

आकाश(सुजाता को देख कर)- जब तक अंकित वापिस नही आ जाता....

सुजाता- अरे आप भी ना....आप फ़िक्र मत कीजिए...उसे कुछ नही होगा....वो सब संभाल लेगा....

आकाश(हैरानी से)- क्या कहा....लगता है कि तुम अंकित को काफ़ी अच्छे से जानने लगी हो....

सुजाता(चौंक कर)- न..नही तो...ऐसा कुछ नही...पर इतना तो समझ ही गई कि वो बहुत होसियार है....और उपर से उसने कुछ किया भी नही...तो फिर टेन्षन की क्या बात है...

आकाश(खड़ा हो कर)- तुम क्या समझोगी कि औलाद का दर्द क्या होता है....क्या होता है जब अपने बच्चे पर कोई मुसीबत आती है....जानती हो तुम...हाँ...

सुजाता(सहम कर)- मेरा ऐसा मतलब नही था....मैं तो बस ये बोल रही थी कि मुझे अंकित पर भरोशा है...क्या आपको नही ...

आकाश(सुजाता को घूर कर)- भरोशा नही होता तो मैं यहा बैठा नही होता....समझी....

सुजाता(मुस्कुरा कर)- तभी तो बोल रही हूँ...आप रिलॅक्स हो जाइए...वो आता ही होगा...अच्छा चलिए कुछ पी लीजिए....दिल हल्का हो जायगा....

आकाश(कुछ सोच कर)- ह्म्म...यही सही होगा...हमे उसका इंतज़ार करना होगा....लाओ...कुछ पीने को लाओ....मुझे प्यास भी लग रही है...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- अभी लाई....

और इतना बोल कर सुजाता किचन की तरफ निकल गई....तभी उसका फ़ोन बजने लगा....

( कॉल पर )

सुजाता- हाँ पापा...बोलिए...

सम्राट- कैसी है मेरी बच्ची...

सुजाता- मैं तो ठीक हूँ...आप और भाई कैसे है...

सम्राट- सब ठीक है....अच्छा ये बता कि वहाँ सब कैसा चल रहा है....

सुजाता- यहाँ तो....सब ठीक ही है पापा...

सम्राट- ह्म्म....और वो डेड साना....अंकित....उसकी बॅंड बाज गई ना....

सुजाता- आपको पता है कि क्या हुआ....

सम्राट(हँसते हुए)- हा मेरी बच्ची....हमारी नज़रों से कुछ नही छिपता....

सुजाता(मन मे)- वो तो मैं जानती हूँ...कि आपकी नज़रों मे कितना दम है...

सम्राट- अच्छा...अब तो तेरा रास्ता क्लियर है ना...अब तू अपने पति के साथ ऐश कर...और जैसे ही अंकित ठिकाने लगता है...वैसे ही हम आकाश को ठिकाने लगवा देगे...ओके...

सुजाता(मन मे)- अब आपको क्या बताऊ...कि मैं तो आकाश के साथ ही ऐश करने का सोच रही हूँ....और रहा मेरा पति....वो जाए भाड़ मे....

सम्राट- बेटी...क्या हुआ...सुन रही है ना...

सुजाता- हुह..हाँ पापा....ऐसा ही होगा...

सम्राट- देखा बेटी...मैने कहा था ना कि मेरा प्लान तेरी जिंदगी बदल देगा...और हम सबकी भी....

सुजाता(मन मे)- आप सब का तो नही पता...पर मेरा प्लान मेरी जिंदगी ज़रूर बना देगा....

सम्राट- लगता है तू बिज़ी है...चल बाद मे बात करते है....तब तक शायद अंकित की मौत की खबर आ जाए...हाहाहा.....

सुजाता- जी पापा.....मैं रखती हूँ....

सम्राट- ह्म...खुस रहो...बाइ...

सुजाता(फ़ोन कट कर के, मन मे)- अगर अब आकाश , अंकित से मिलने पोलीस स्टेशन चले गये तो डॅड समझ जाएँगे कि ये मेरा पति नही...आकाश है...नही...मैं ऐसा नही होने दुगी...मैं आकाश को कहीं नही जाने दुगी....

और इतना सोच कर सुजाता ने आकाश के लिए खाने-पीने की ट्रे सजाई और आकाश के रूम मे चली गई......

वो सब खाते-पीते ही थोड़ी ही देर मे आकाश नीद की आगोश मे चला गया....

सुजाता(आकाश को सही से लिटा कर)- माफ़ करना आकाश....पर मैं अपना प्लान बरबाद नही होने दूगी....भले ही अंकित जिए या मरे....उउंम्म...

और सुजाता आकाश को किस कर के नीचे निकल गई........

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पोलीस स्टेशन मे.............

जैसे ही रिचा और रफ़्तार स्टेशन से अपने घर की तरफ निकले....वैसे ही पोलीस ऑफीसर मेरे पास आ गया.....

पोलीस(मुस्कुरा कर)- लीजिए मिस्टर.अंकित ...आपका फ़ोन....

मैं(फ़ोन ले कर)- ह्म...वेल ऑफीसर....कमाल की आक्टिंग की आप ने....मान गये....

और इतना बोल कर मेरे साथ-साथ वहाँ खड़े सारे पोलीसवाले ठहाका मार कर हँसने लगे....

मैं- वेल...आलोक सर कहाँ है...

तभी आलोक अंदर के कॅबिन से निकल कर आए और मेरे कंधे पर पीछे से हाथ रखा....

आलोक- तो...कैसा लगा मुजरिम की तरह पोलीस स्टेशन आना....

मैं(पलट कर)- ओह...तो यहाँ है आप...वेल...कुछ खास नही..आक्च्युयली मज़ा आया....

आलोक- तो अब क्या इरादा है...यही बैठना है या फिर...

मैं- अरे नही....अब काम करने का टाइम है....मेरी बॅंड बजाने वालो को मज़ा तो चखाना ही होगा ना....

आलोक- ह्म...तो फिर तुम चलो....हम अपना काम करते है....पर एक बात तो बताओ...

मैं- जी पूछिए...

आलोक- इस मासूम लड़की को मारा किसने....

मैं- ये आपको शाम तक पता चल जायगा.....और आप देखना...जिसने कत्ल किया है...वो खुद ही सच बोलेगा...ट्रस्ट मी....

आलोक- ह्म...चलो...तुम अपना काम करो...यहाँ हम संभाल लेगे.....

फिर मैं जैसे ही पोलीसस्टेशन से निकला तो मुझे वर्मा का कॉल आ गया....

मैं(स्क्रीन देख कर)- अब इसे क्या हुआ...साले की गांद मे बबासीर है....

मैं(फ़ोन पर)- हाँ बोल कमीने....

वर्मा(हँसते हुए)- क्या हुआ बच्चे....जैल की हवा कैसी लग रही है....

मैं- ओह..तो तुझे न्यूज़ मिल गई....

वर्मा- ह्म...वो क्या है ना...आइ लव ब्रेकिंग न्यूज़...हाहाहा.....

मैं- ज़्यादा मत हँस...वरना बहुत रोएगा......

वर्मा- अरे रोएगा तो तेरा बाप....और तू...तू तो मरेगा...हाहाहा....और फिर....मैं तेरे घर पर और उसमे रहने वालो पर अपनी हुकूमत चलाउन्गा....समझा....

मैं- ओये....ज़्यादा सपने मत देख...टूटेगे तो सह नही पायगा....समझा...

वर्मा(हँसते हुए)- समझना तो तुझे है....अरे...पर तू तो मरने वाला है...फिर क्या...उउउंम्म..फिर..फिर मैं तेरे घर की औरतों पर....

मैं(ज़ोर से)- वर्मा...औकात मे रह....

वर्मा- श्ह्ह्ह ....अभी तो पूरी बात सुनी भी नही तूने....सुन...मैने सुना है कि तेरी वो मुँह बोली बहन....उउंम...बड़ी मस्त है....

मैं(गुस्से से)- वर्मा....बस...अब तुझे माफ़ करने की 1% उम्मीद भी ख़त्म हो गई....अब तू सिर्फ़ और सिर्फ़ सज़ा का हक़दार है...समझा....

वर्मा- हाहहाहा.....सज़ा...हाहहाहा....

मैं- जितना हसना है हंस ले....ये तेरे हँसने का आख़िरी दिन है...आख़िरी....

और इतना बोल कर मैने कॉल कट की और दूसरा कॉल लगाने लगा...तभी रॉनी का कॉल आ गया.....

( कॉल पर )

मैं- क्या बात है...मैं तुझे ही कॉल कर रहा था.....

रॉनी- बॉस...आपको पोलीस क्यो ले गई...क्या हुआ....

मैं- तुझे कैसे पता....

रॉनी- आपके आदमियों ने बताया....पर हुआ क्या....मॅटर तो बताओ....

मैं- वो सब बाद मे...अभी मेरी बात सुन......

रॉनी- हुकुम करो बॉस....

मैं- टाइम आ गया....

रॉनी- ओह्ह...समझ गया.....मैं तैयारी करता हूँ....

मैं- सुन...तुझे न्यूज़ पसंद है....??

रॉनी- हाँ बिल्कुल....और न्यूज़ ब्रेकिंग हो तो मज़ा ही अलग होता है.....

मैं- गुड....तो फिर ऐसी ब्रेकिंग न्यूज़ देना...कि जिसे देख कर लोगो की आँखे फटी की फटी रह जाए....समझ गया....

रॉनी- समझो हो गया बॉस....

मैं- तो लग जा काम पर ...बाइ....

फिर मैने कॉल कट की और टॅक्सी पकड़ कर वहाँ से निकल गया......

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रिचा के घर.........शाम के वक़्त.......

रिचा के घर का महॉल अभी भी रंगीन था...और चुदाई की आवाज़ो से गूँज रहा था.....

रफ़्तार दनादन रिचा की गांद मार रहा था और रिचा दर्द भरी सिसकारियाँ ले रही थी......

रिचा- आअहह....कमीने....गांद मे सुरंग ही बना देगा क्या....आआओउुुऊउक्ककच......

रफ़्तार- हाँ साली....और फिर इसमे से ट्रेन निकालुगा....समझी....

रिचा- आअहह...साले ....बस कर....3 घंटे से तो बजा रहा है...अब तो रुक जा...आआईयईई.....

रफ़्तार- साली....आज पूरी कसर निकालनी है....बस थोड़ा और बाकी है...ये ले.....

रिचा- साला क्या खा कर....आअहह...आया है....3 बार झड चुका फिर भी....उउई...माआ.....आआहह...

रफ़्तार- ये ले...लास्ट बार आया...आआअहह...यययययईए....ययईएहह...

रिचा- आअहह....मेरा भी निकाल दिया ...आआईयईई...उूउउंम..आअहह...आहह.....

और फिर दोनो बेड पर पस्त पड़ गये.....और थोड़ी देर तक रेस्ट करने के बाद रिचा बोली....

रिचा- आहह....चल अब रेडी हो जा ....पोलीस लाश लेकर आती ही होगी....

रफ़्तार- तो तू रेडी हो जा....नाटक तुझे करना है...मुझे क्या...मुझे तो बस खड़ा रहना है....

रिचा- सही कहा....अपनी नकली बेटी की मौत पर रोना आसान काम नही...

रफ़्तार- ह्म्म...चल फिर...रेडी हो जा....जल्दी से ये ड्रामा ख़त्म करते है...फिर रात भर पेलुगा तुझे......

रिचा(मुस्कुरा कर)- साला कुत्ता....तू नही सुधरेगा...ठीक है....इसे जला देते है...फिर रात भर तेरी...ओके....

और इतना बोलकर रिचा बाथरूम मे घुस गई...और रफ़्तार ने किसी को कॉल लगा लिया.....

करीब 30 मिनट बाद पोलीस रिया की बॉडी ले कर रिचा के घर पहुँच गई....और उसके बाद उस घर मे रोना-धोना शुरू हो गया......

करीब रात के 8 बजे तक ये सब चला और फिर बॉडी को एलेक्ट्रॉनिक चिता के सहारे जला दिया गया......

करीब रात को 9 बजे तक सब लोग रिचा के घर से जा चुके थे...सिर्फ़ रिचा और रफ़्तार बाकी थे....

रिचा(हँसते हुए)- आज तो मज़ा आ गया....अंकित भी गया...और मेरी बेटी की तरफ से मैं निश्चिंत हो भी हो गई...हहहे.....

रफ़्तार- ह्म्म...सच मे...कमाल का नाटक किया तूने...और बॉडी का मेक-अप भी कितना मस्त करवाया...किसी को शक़ भी नही हुआ कि ये असली नही...नकली रिया है....गुड....

रिचा- वो तो है ही...आइ म दा बेस्ट.....

तभी डोरबेल बजी और दोनो चौंक गये....फिर रिचा ने जल्दी से अपना मूड रोने जैसा बनाया और गेट खोला....

पर गेट खुलने के साथ ही रिचा की आँख खुली रह गई.....सामने अंकित जो खड़ा था....अपने आदमियों के साथ....

रिचा- तुम...तुम यहाँ...पर तुम्हे तो जैल मे होना चाहिए....तुम यहाँ कैसे....

मैं- अरे यार....इतने सवाल...अरे पहले मेहमान को अंदर तो बुलाओ...कुछ खातिर तो करो...फिर सवाल करो.....

रिचा(गुस्से से)- दफ़ा हो जाओ यहाँ से....मैं अभी पोलीस बुलाती हूँ...

मैं- अरे..अरे...सुनो तो...देखो...पोलीस को बुलाने की ज़रूरत नही...वो आने वाले है....और रफ़्तार तो यहाँ है ही....

रिचा- पर तुम यहाँ आए क्यो...मेरी बेटी को मार कर चैन नही मिला क्या हत्यारे....

मैं(आँखे घुमा कर)- ओह्ह...बेटी...हाँ...बेटी से याद आया कि मैं तुम्हारे लिए तुम्हारी बेटी को लाया हूँ....

मेरी बात सुन कर रिचा का मुँह खुला रह गया....

रिचा- बब्ब...बेटी.....उसे तो तूने मार डाला....

मैं- ओह्ह हाँ.....मार डाला...फिर भी...देख तो लो...

और फिर मैने आवाज़ देकर अपने आदमियों को बुलाया ...जो एक बड़ा सा बॉक्स रिचा के सामने रख गये....

मैं(बॉक्स खोल कर)- ये रही तुम्हारी बेटी.....

और बॉक्स खुलते ही रिचा घुटनो के बल ज़मीन पर बैठ गई....

रिचा- रिया....यहाँ...तो फिर....वो....वो....

मैं(रिचा को देख कर)- आक्च्युयली...मैं भी चौंक गया था...तभी तो तुम्हे दिखाने लाया....दिखती है ना ये रिया की तरह....

रिचा- रिया की तरह...मतलब......

मैं- अरे...रिया तो मर कर जल गई...अब वो कहाँ से आयगी....मतलब सॉफ है...ये रिया नही है....

रिचा(मुझे देख कर)- त्त..तुम्हे कैसे पता....

मैं- अभी बताता हूँ...

और मैने बॉक्स मे पड़ी लाश का मास्क निकाल दिया...जिसे देख कर रिचा रोती हुई लगभाड़ गिर ही पड़ी.....

रिचा- नही....ये...ये कैसे....

मैं- क्या हुआ....बोला था ना...ये रिया नही...रिया तो जल गई....है ना....

रिचा(रोते हुए)- नही....ये नही हो सकता....ये कैसे.....जलना तो....नही...ये नही हो सकता.....इसे तो...

मैं(बीच मे)- हाँ...इसे तो जलना था....पर जली नही....जिसे तुमने जलाया है...वही असली रिया थी...तुम्हारी बेटी.....अब हँसो...ज़ोर से हँसो...हाहहहाहा.........

रिचा( चिल्ला कर)- न्न्न्न हिईीईईईईई........

और एक जोरदार चीख के साथ रिचा बेहोश हो कर ज़मीन पर गिर गई.......

जैसे ही रिचा ने देखा की उसके सामने पड़ी लाश उसी लड़की की है...जिसे वो रिया की लाश दिखाना चाहती थी .....

तभी वो समझ गई कि उसने अंजाने मे असली रिया को ही खो दिया है और इसी सदमे की वजह से वो रोते-रोते बेहोश हो गई......

मैं(रिचा को देख कर)- ह्म्म...इसका काम तो हो गया.....(रफ़्तार को देख कर)- अब तुम क्यो शांत बैठे हो ....कुछ बोलॉगे नही ....

रफ़्तार(मुस्कुरा कर)- क्या...मैं क्या बोलू....सब ठीक ही गया....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म...तो मज़े मार लिए कि नही.....

रफ़्तार मेरी बात सुन कर मुस्कुराने लगा .....

मैं(कड़क आवाज़ मे)- अब हँसना छोड़....संभाल इसे.....अरे रूको....इसे बेहोश ही रहने दो ....तब तक थोड़ा रेस्ट ही कर लेता हू.....काफ़ी थक गया आज तो ....वैसे....दारू है ...तो ला दे....

फिर रफ़्तार ने मुझे ड्रिंक सर्व की और हम बैठ कर पेग गटकते हुए रिचा के होश मे आने का वेट करने लगे......

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अंकित के घर.............

जैसे ही आकाश नीद की आगोश से बाहर आया....वो अपने आपको बेड पर देख कर चौंक गया......

आकाश(हैरानी से)- मैं...मैं यहाँ कैसे....मैं तो कॉफी पी रहा था....तो यहाँ....ओह्ह...कही कॉफी मे...नही....

आकाश को अहसास हो गया कि ज़रूर वो किसी नशे की वजह से बेसूध था ...तभी उसे अंकित की याद आई और वो झटपटा कर बैठ गया....

आकाश- अंकित....वो अभी तक नही आया...नो...मुझे देखना पड़ेगा....ज़रूर कुछ गड़बड़ हुई है ..मैं अभी जाता हूँ....हाँ. .

फिर आकाश झटके से उठा और फ्रेश हो कर रेडी होने लगा ......तभी रूम मे सुजाता आ गई.....और आकाश को यू देख कर सहम गई ... .

सुजाता- आप...आप जाग गये....

आकाश(गुस्से से)- हाँ...जाग गया...वैसे तुमने तो पूरा इंतज़ाम कर दिया था मुझे लंबी नीद मे सुलाने का...क्यो...

सुजाता(सकपका कर)- म्म्म....मैने....ये...ये आप क्या कह रहे है ...मैं कुछ समझी नही....

आकाश(गुस्से से)- बकबास बंद करो....तुम अच्छी तरह से जानती हो कि मैं क्या बोल रहा हूँ....

सुजाता- नही...सच मे....मैं कुछ....

आकाश(बीच मे)- चुप....बिल्कुल चुप....

फिर आकाश रेडी होने लगा और सुजाता दिल ही दिल मे डरने लगी कि अब वो आकाश को क्या कहे...उसे अंकित से मिलने से कैसे रोके.....

थोड़ी ही देर बाद आकाश जैसे ही गेट की तरफ जाने लगा तो सुजाता बोल पड़ी ....

सुजाता- पर आप जा कहाँ रहे है....

आकाश(गुस्से मे)- अंकित के पास...और कहा....

सुजाता- पर अंकित तो...अंकित...

आकाश(पलट कर)- अंकित क्या....क्या हुआ उसे....

सुजाता- वो तो घर आ चुका है....

आकाश(खुश हो कर)- क्या....वो आ गया....अंकित.....

और आकाश अपने बेटे को पुकारते हुए रूम से बाहर जाने लगा ....तभी सुजाता तेज़ी से आगे बढ़ी और आकाश को रोक लिया.....

आकाश- ये क्या कर रही हो....

सुजाता(हड़बड़ाते हुए)- वो मैं...वो....अंकित...वो...अंकित घर पर नही है.....

आकाश(ज़ोर से)- क्या....घर पर नही...तो कहाँ गया ....

सुजाता- वो ...हाँ...किसी फरन्ड के घर....वो उसका कोई दोस्त है ना......उफ्फ...नाम याद नही आ रहा....

आकाश- ओह दोस्त.....तो ऐसा बोलो ना...कब्से ये, वो बोले जा रही हो....रूको...मैं उसे कॉल करता हूँ.....

और आकाश ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला ही था कि सुजाता ने आकाश का हाथ थाम लिया......

आकाश- ये क्या....छोड़ो मेरा हाथ....

सुजाता- वो मैं क्या बोल रही थी कि अंकित को कॉल करने की कोई ज़रूरत नही.....

आकाश(हैरानी से)- क्या....कॉल ना करूँ...पर क्यो.....

सुजाता(मुस्कुरा कर)- क्योकि आपका बेटा बोल कर गया है कि उसे डिस्टर्ब ना करे.....

आकाश- क्या....अंकित ने ऐसा बोला....पर क्यो.....

सुजाता(मुस्कुरा कर)- अरे आप भी ना....कुछ समझते ही नही....अरे इतना सुहाना मौसम है .....

आकाश(बीच मे)- इसमे मौसम कहाँ से आ गया......

सुजाता- मतलब....सुहाने मौसम मे लोग मज़े करते है....वो भी अपने दोस्त के साथ मज़े कर रहा होगा.....

आकाश(घूर कर)- तुम सच बोल रही हो या....

सुजाता(बीच मे)- सच मे.....मैं अपने पति की कसम खा कर कहती हूँ....सब सच है....

आकाश- क्या....तुमने अपने पति की कसम खा ली....

सुजाता(आकाश का हाथ पकड़ कर)- आपको यकीन जो दिलाना था....

आकाश- ओह हो...हमारे लिए इतना कुछ....

सुजाता(मुस्कुरा कर)- आपको क्या पता...आप हमारे लिए कितने खास है....

आकाश- सच मे....

सुजाता(आकाश के करीब आ कर)- सच मे....यकीन मानिए....

आकाश(मुस्कुरा कर)- तो यकीन दिलाओ....

सुजाता(मुस्कुरा कर)- तो थोड़ा सा टाइम दीजिए.....अभी यकीन दिलाते है....

और इतना बोलकर सुजाता ने गेट लॉक कर दिया और अपने जिस्म पर फासी नाइटी निकाल फेकि और आकाश के सामने ब्रा-पैंटी मे आ गई....जिसे देख कर आकाश की आँखे बड़ी हो गई....

आकाश- ये...ये क्या....क्या कर रही हो तुम....

सुजाता- क्यो...क्या आपको हम पसंद नही आए....

आकाश- मेरा वो मतलब नही..पर ये सब.....नही...फिर तुम्हारा तो पति भी है....

सुजाता(आगे बढ़ कर)- उसको अभी भूल जाओ....अभी इस सुहाने मौसम मे इस गरम जिस्म का लुफ्त उठाइए.....

आकाश- नही....ये ठीक नही....ये ग़लत है....

सुजाता(आकाश का हाथ पकड़ कर)- आप भी तो औरत की गर्मी को महसूस करना चाहते होंगे....है ना....

आकाश इससे पहले कुछ बोलता....कि सुजाता ने आकाश का हाथ अपने बूब पर चिपका दिया.....

सुजाता- आहह....आपके हाथ की गर्मी ....पूरा जिस्म तो क़हर ढा देगा....

आकाश- देखो...सुजाता....ये...ये सही नही....

सुजाता(बूब मसलवा कर)- उउउम्म्म्म ....आज सही-ग़लत भूल जाओ ना...बस जिस्म से जिस्म को बात करने दो...मुँह बंद ....

और इतना बोल कर सुजाता ने आकाश का दूसरा हाथ भी अपने बूब पर चिपका दिया.....

थोड़ी ही देर मे आकाश ना चाहते हुए भी सुजाता से जिस्म की गर्मी से गरम हो गया और ज़ोर-ज़ोर से उसके बूब्स मसल्ने लगा. ....

फिर आकाश ने सुजाता की ब्रा को निकाल फेका और पालक झपकते ही उसके बूब्स को मुँह मे दबा-दबा कर चूसने लगा और सुजाता मस्ती मे सिसकारियाँ भरने लगी. .....

देखते ही देखते दोनो के जिस्म की गर्मी इतनी बढ़ गई कि दोनो जीशम नंगे हो कर एक दूसरे के जिस्म को चूसने-चाटने मे लग गये.......

आकाश अब पूरा गरम हो गया था....उसने सुजाता को उपर से ले कर नीचे तक चाटना शुरू कर दिया और चाट ता हुआ उसकी चूत पर पहुँच गया .....

सुजाता- उूउउम्म्म्म....चूसो इसे ....आअहह....बहुत तड़प रही है ये....

आकाश ने एक बार सुजाता को सिर उठा कर देखा और फिर अपनी जीभ निकाल कर सुजाता की दहक्ति चूत मे डाल दी....जिससे सुजाता उछल पड़ी.....

सुजाता- आआअहह.....मज़ा आ गया....ऐसे ही....उूउउंम्म.....

आकाश- सस्स्स्स्र्र्ररुउुुुउउप्प्प......उउउंम...उउउम्म्म्म...उउउम्म्म्मम...उूउउम्म्म्मम....

सुजाता- उउउंम्म...ऐसे ही....और तेज...और तेज.....

और सुजाता गांद उछाल कर चूत चुसवाने लगी.....और आकाश उसकी चूत की गहराइयों मे डूबता चला गया......

आकाश- उउंम..उउंम..उउंम..उउंम्म...

सुजाता- ओह...ओह...एस...एस्स...सक इट...एस...एस्स...

आकाः- उउंम..उउंम..उउंम..उऊँ..उउंम..

सुजाता- अंदर तक...यस...डीपर...सक..इट..एस्स..

और सुजाता की चूत आकाश की जीभ के हमलो से झड्ने लगी....

सुजाता- ऊहह...एस्स...कोँमिंग..ओह्ह..ऊ...ओह्ह..आआहह....आआओउउउंम्म....

आकाश ने चूत को मुँह मे भर लिया और चूत रस पीने लगा...

आकाश- उउंम..उउंम..सस्ररूउगग...सस्ररूउगग...

सुजाता- एस्स...आअहह...आअहह.....ओह्ह..ऊहह..एस्स..

आकाश- उम्म्म...मज़ा आ गया....बड़े दिनो बाद....

सुजाता- आअहह...अभी तो आपको जन्नत का मज़ा मिलेगा....

और इतना बोल कर सुजाता ने उठ कर आकाश का लंड मुँह मे भर लिया.....

आकाश- आआअहह ......

सुजाता(मन मे)- उउंम्म...दोनो भाइयों के लंड एक जैसे ही है....मज़ा आयगा.....

और फिर सुजाता ने लंड चुसाइ शुरू कर दी.....

सुजाता- सस्स्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प्प.....सस्स्स्रररुउप्प्प...सस्र्र्ररुउउप्प्प्प....

आकाः- आअहह.....पूरा मुँह मे लो....आअहह......

सुजाता ने बिना कुछ बोले पूरा लंड मुँह मे भर लिया और चूसना शुरू कर दिया....

सुजाता मस्ती मे लंड चूसने लगी और आकाश हाथ बढ़ा कर उसकी गांद सहलाने लगा.....

सुजाता-सस्ररुउउप्प्प….सस्स्रररुउउप्प्प…ऊओंम्म्मममह…सस्स्रररुउउप्प्प...

आकाश-आअहह…ज़ोर से....

सुजाता-सस्स्ररुउउप्प्प….सस्रररुउउप्प्प्प…उउउम्म्म्म....उूुउउम्म्म्मम.....

आकाश- हाँ...ऐसे ही...उूउउम्म्म्मम....

सुजाता- उउउंम...उउउंम्म....उउउंम..सस्स्रररूउउग़गग...सस्स्रररुउउउगग़गग....उूुुउउम्म्म्मम...

आकाश- आआहह.....ओह्ह्ह..येस्स..ईससस्स....

अब आकाश का लंड पूरा तैयार हो चुका था...इसलिए उसने सुजाता को रोक दिया...और उसे लिटा कर जल्दी से दो धक्को मे पूरा लंड सुजाता की चूत मे उतार दिया.....

सुजाता(मन मे)- साला ये भी अपने भाई की तरह ही उतावला है....

और यहाँ आकाश ने अपनी ही धुन मे सुजाता की जोरदार चुदाई शुरू कर दी.....

सुजाता- आ..आअहह..आहह…आहह..आहह…अहह...

आकाश-ययईएह….ययईईहह…यी…ल्ल्लीए..

सुजाता-ऊहह….म्म्माकआ…आआहह….अहहाा..उउंम्म...

आकाश-ओह्ह्ह...ईसस्स....उउउंम...यईहह......

और रूम दो जिस्मों की जोरदार चुदाई की आवाज़ो से गूज़्ने लगा......

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रिचा के घर...............

रिचा के बेहोश होने के करीब 30-40 मिनट बाद उसे होश आया...और होश मे आते ही वो झटके से बैठ गई और फिर से रोने लगी.....

मैं- ये ..रोना-धोना बाद मे.....चल पानी पी ले....दे रफ़्तार....इसे पानी दे.....

रफ़्तार ने तुरंत रिचा को पानी पिलाया और वापिस अपनी जगह बैठ गया.....

रिचा(रफ़्तार को घूरते हुए)- तुम...

मैं(सीप मार कर)- आहह...ऐसे मत देख....ये मेरे साथ है...या यू कहूँ कि मेरे साथ ही था....

रिचा(रफ़्तार को गुस्से से देख कर)- कब्से....

मैं- कब्से, कैसे, क्यो....ये सब छोड़...बस ये समझ ले कि रफ़्तार ही वो मोहरा है...जिसने तेरे प्लान की धज्जियाँ उड़ा दी...और मेरे प्लान को कामयाब कर दिया....

मेरी बात सुन कर रिचा मुझे हैरानी से देखने लगी...जबकि मैं अपना पेग लगाता रहा....

मैं(पेग ख़त्म कर के)- उउंम...ज़्यादा हैरान होने की ज़रूरत नही....मैं हूँ ना...मैं तुझे सब बताता हूँ...सब ...ओके....

और फिर रिचा की आँखे मुझ पर गढ़ गई और वो मेरे बोलने का इंतज़ार करने लगी.....

मैं- तो सुन...असल मे रफ़्तार को जैल से निकालने वाला मैं ही था....और उसके बाद इसे तेरे पास भेजने वाला भी मैं ही था....

इसके बाद का तो तुझे पता ही है...फिर भी बताता हूँ....

जब तूने अपने बॉस के साथ मिल कर अपनी ही बेटी की झूठी किडनेपिंग और मौत का प्लान बनाया तो रफ़्तार ने मुझे सारी बात बता दी....

तभी मैने तेरे प्लान के जवाब मे एक दूसरा प्लान बना डाला....जिसका अंजाम तेरे लिए बहुत बुरा हुआ....है ना....

जहा तूने पोलीस से सेट्टिंग कर के मुझे मर्डर के इल्ज़ाम मे अंदर करने का प्लान किया....वही मैने भी पोलीस को सेट कर के एक रियल मर्डर को झूठा साबित कर दिया....

रिचा(चौंक कर)- झूठा मर्डर....

मैं- चौंक मत...झूठा मर्डर तो तेरे सामने है....ये लाश...जो मुर्दाघर से लाई गई थी और इसे रिया का मास्क पहनाया गया था....

असल मे...मैने पोलीस को ये बताया कि जो लाश जली है...वो ही नकली है....जबकि असलियत ये है कि जलने वाली लाश नकली नही थी...नकली लाश तो तेरे सामने पड़ी है....आइ मीन नकली रिया की लाश....

रिचा(सुबक्ते हुए)- तो क्या....रिया..मेरी बेटी....वो...वो कहाँ है....

मैं(रिचा को घूर कर)- वो तो जल चुकी है....(चिल्ला कर)- हाँ....वो लाश असली रिया की थी....असली रिया की ......हाहहाहा......

रिचा- न्नहिी....ये नही हो सकता...मेरी बेटी...वो नही मर सकती...तुम झूठ बोल रहे हो...झूट....

मैं(चिल्ला कर)- नही...यही सच है....जब मैने तेरा प्लान सुना तो तभी मैने तुझे सबक सिखाने का सोच लिया था....और उसका नतीजा ये निकला कि रफ़्तार ने रिया को मार डाला और उसे नकली रिया बता कर तेरे पास ले आया....

रिचा( बदहवास हो कर) - नही...ये नही हो सकता...रिया...रिया नही मर सकती...मेरी बेटी नही मर सकती...

मैं(खड़ा हो कर, गुस्से से)- वो मर चुकी है....और उसकी मौत की ज़िम्मेदार तू है...तुउुुउउ.....

रिचा(चीख कर)- न्न्नहिईीईईई.....ये नही हो सकता...कभी नही हो सकता....कभी नही.....

मैं(ज़ोर से)- हाँ...और चिल्ला....ज़ोर से चिल्ला....पर तेरे चिल्लाने से क्या होगा....तेरी बेटी वापिस भी आयगी....वो तो मर गई....गई वो....हमेशा के लिए....समझी....

रिचा पलक झपकते ही उठी और मेरे उपर झपट पड़ी और मेरी कॉलर पकड़ जर चीखने लगी.....

रिचा- कमीने....मैं तेरी जान ले लूगी....नही छोड़ुगी तुझे....नही छोड़ुगी.....

मैं(रिचा को धक्का मार कर)- चल हट....मर गये मुझे मारने वाले....तू क्या मारेगी मुझे...साली रंडी....ये रफ़्तार....पेग बना....फिर इस रंडी का मज़ा लेते है...बना एक हार्ड पेग....

मेरे बोलते ही रफ़्तार ने पेग बना दिया और मैने पेग गटक कर रिचा को उठाया और उसके गालो पर 3-4 थप्पड़ खीच दिए.....

मैं- अब बोल रंडी...क्या बक रही थी...मुझे मारेगी...मुझे.....

रिचा(रोते हुए)- मेरी बच्ची....आआ....मेरी बच्ची.....

मैं(रिचा को छोड़ कर)- क्या रोना लगा रखा है...चल आजा...और लंड का मज़ा ले ....यही पसंद है ना तुझे...चल आजा....आज तेरी बेटी के गम मे तेरी गान्ड फाड़ता हूँ...आजा....

मेरी बात सुन कर रिचा सिर झुका कर ज़ोर से रोने लगी.....

मैं- हाहाहा....तू सच मे दुखी है या ये भी एक ड्रामा है...हाँ....

रफ़्तार- अंकित....वो सच मे दुखी है...

मैं- अरे रफ़्तार....इसके आँसुओ पर मत जाओ....ये साली इतनी बड़ी रंडी है कि...कि इसने चुदवाने के बाद नंगे ही बैठे हुए....अपने...अपने बाप को गोली मार दी थी....

मेरी बात से रफ़्तार चौंक गया....पर रिचा रोती ही रही....

मैं- और...और तो और....इस रंडी ने अपने यार के लंड पर बैठ कर अपने...अपने पति को मारा था.....हाँ....इतनी बड़ी रंडी है ये....समझा.....

इस बात पर रफ़्तार के साथ-साथ रिचा मुझे घूर कर देखने लगी.....

मैं(रिचा को देख कर)- एयेए...क्या हुआ....यही सोच रही है ना कि मुझे कैसे पता.....तो सुन...दीपा....दीपा याद है ना....ये उसी ने बताया....समझी.....

रफ़्तार- सच मे....ये तो बड़ी रंडी है....

मैं- अरे इतना भी कम है...इसका बस चलता तो ये तेरा लंड गांद मे लिए हुए अपनी बेटी को भी मार देती....

मेरा इतना बोलना था कि रिचा मुझ पर फिर से झपट पड़ी...पर मैं तैयार था...इसलिए मैने उसे वापिस धक्का दे दिया....

मैं- हॅट साली ....सच बोला तो गांद मे कीड़े उठने लगे...हाँ....

रिचा- बस....बस करो....और नही...

मैं- अभी बस कैसे...अभी तो बहुत कुछ बाकी है...तेरी बेटी की आत्मा ये सुन कर खुश हो जाएगी.....है ना....

रिचा(चिल्ला कर)- बस करो.....आअहह...सच...सच जानना चाहते हो ना....चाहते हो ना....तो सुनो....और सुन कर तुम ही फ़ैसला करना की सही कौन और ग़लत कौन.....

रिचा की बात सुन कर मैं शांत हो गया और रिचा के बोलने का इंतज़ार करने लगा.......

रिचा(अपने आपको संभाल कर)- तो तुम मेरे बारे मे जानना चाहते हो...सच सुनना चाहते हो...है ना....

मैं(बैठ कर)- ह्म्म...सही सुना....मैं बेताब हूँ तुम्हारी सच्ची कहानी सुनने के लिए....

रिचा(मुझे घूर कर)- वैसे तो तुम मेरे बारे मे काफ़ी कुछ जानते हो...पर क्या तुमने कभी ये सोचा कि जो तुम जानते हो ...वो सच है या झूठ....

मैं(गुस्से से)- आँखो देखा तो झूठ नही हो सकता ना.....क्यो...??

रिचा- कभी..कभी आँखो देखा भी झूठ हो सकता है....क्योकि आँखे जो देखती है...उसी को सच मान लेती है...और कुछ सोचती ही नही.....

मैं- क्या बकवास है....तुम कहना चाहती हो कि वो वीडियो....तुम्हारा रंडी जैसा रूप....ये सब झूठ है...हाँ...

रिचा- नही...ये सब सच है...पर हर एक बात की कोई ना कोई वजह होती है....और एक वजह ही इंसान से कोई काम करती है...अच्छा भी और बुरा भी.....

मैं(पैर पर पैर चढ़ा कर)- ह्म...तेरी बात मे दम तो है...तो...बताओ फिर....तुम्हारे इन कारनामो के पीछे क्या वजह थी...ह्म....

रिचा(गुस्से से)- सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारा खानदान ....तेरा दादा, तेरा बाप, तेरी बुआ....और अब तू....

मैं(गुस्से से)- अच्छा....मेरे परिवार ने तुमसे कहा था कि तू रंडी बन जा...तू अपने बाप और पति को मार दे ...और अपनी बेटी को भी....हाँ...हम ने बोला था....

रिचा- कुछ काम बोलने से नही होते....हालात से मजबूर हो कर भी हो जाते है....

मैं- तो हालात की ग़लती हुई ना....मेरे परिवार की कहाँ से हो गई...

रिचा(ज़ोर से)- वो हालात उनलोगो ने ही पैदा किए थे...समझे.....

मैं(रिलॅक्स हो कर)- तो फिर बताओ....क्या हालात थे वो...जिसने तुझे इस नरक मे ला कर खड़ा कर दिया....

रिचा(तुनक कर)- सुनोगे ना...तो दिमाग़ हिल जायगा....और अपने परिवार से भी नफ़रत हो जाएगी....

मैं- ओह्ह..ऐसा क्या...फिर तो मैं ज़रूर जानना चाहूगा...आख़िर मुझे भी तो पता चले कि मेरे अपनो ने ऐसा क्या कर दिया जो तुम इस घटिया रास्ते पर चल पड़ी...ह्म्म...चलो बकवास बंद करो और सच्चाई बयान करो....शुरू हो जाओ....

और फिर थोड़ी देर खामोश रहने के बाद रिचा ने अपनी कहानी बताना शुरू कर दी......
 
shubhs wrote: ↑ 14 Aug 2017 11:01
देखो कय्या सच है क्या झूट
 
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