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चूतो का समुंदर



रक्षा जाग चुकी थी और पढ़ रही थी...मुझे देखते ही वो शर्मा गई...

मैं- तुझे याद नही था कि कल पेपर है...??

रक्षा- पता था...

मैं- फिर भी तुमने....क्यो...??

रक्षा- क्योकि मैं आपके प्यार के लिए और वेट नही कर सकती थी.....

मैं- पर तुम्हारी पढ़ाई...और दर्द..

रक्षा- डोंट वरी भैया...मैने टॅबलेट खा ली है और पढ़ाई भी हो चुकी थी...थोड़ा अभी पढ़ लूगी...सब ओके है....

मैं- ओह..तू तो स्मार्ट है...

रक्षा- बेहन किसकी हूँ....असर तो होगा ही...

मैं- ओके मेरी गुड़िया...अब पढ़ाई कर...फिर रेस्ट करना ओके...और दर्द तो नही हो रहा...

रक्षा- आप दवा दे दो तो बिल्कुल नही होगा....

रक्षा की बात सुनकर मैं मुस्कुराने लगा...फिर मैं उसे किस कर के वापिस आ गया और पढ़ाई करने लगा.....

फिर रात मे कुछ खास नही हुआ...हम ने डिन्नर किया पढ़ाई की और सो गये.....

अनु को मैने रात को ना आने का बोल दिया था तो अब वो भी नही आती थी...हाँ थोड़ी देर तक मैं कुसुम और उसके पति के बारे मे सोचने लगा ...और फिर मुझे वो अननोन नंबर. वाली की बात याद आई...पर मुझे अभी उसके बारे मे कुछ याद नही आया था.....

ऐसे ही सोचते हुए मैं सो गया...सुबह हम ने एग्ज़ॅम दिया....अकरम से बात की...उसने मुझे 2 दिन बाद अपने घर बुलाया....बोला कि उसकी दीदी मुझे बुला रही थी....

इसके बाद मैने बाकी सब को घर ड्रॉप किया और वहाँ से सीधा कामिनी के घर चला गया....

कामिनी का घर आलीशान था...उसकी हवेली की तरह.....गार्ड ने कन्फर्म कर के मुझे अंदर जाने दिया...

अंदर हॉल मे कई लोग थे जिसमे मैं सिर्फ़ सुषमा, पायल, और काजल को जानता था....

उनसे थोड़ी बात की पर काजल ने मुझसे कोई बात नही की...बस मुझे अजीब तरह से देखती रही....

उन लोगो को बाद मे मिलने का बोल कर मैं कामिनी के रूम मे निकल गया....

कामिनी अपने रूम मे मेरा ही वेट कर रही थी....

कामिनी- आइए-आइए, आपका ही इंतज़ार था...

मैं- सच मे...आपको कैसे पता कि मैं आने वाला हूँ...??

कामिनी- वो तो मेरे गार्ड ने बता दिया था...

मैं- ओह्ह..तो ऐसा ...वेल कैसी है आप..??

कामिनी- मैं तो ठीक हूँ...मुझे क्या हुआ ..

मैं- मैने तो सुना था कि आपका आक्सिडेंट हुआ है...

कामिनी- तो आप मेरे आक्सिडेंट की खबर सुनकर आए है...चलो इसी बहाने हमारी याद तो आई...

मैं- नही, ऐसी कोई बात नही है...आप जब याद करेगी..हम हाजिर हो जायगे...

कामिनी- पक्का...या फिर हमें फिर से आक्सिडेंट करना होगा...हहहे...

मैं- नही...इसकी कोई ज़रूरत नही होगी...वैसे, कैसी है आप...कोई चोट तो नही आई..??

कामिनी- नही...अपनो के प्यार ने बचा लिया....और आप खड़े क्यो है...आइए, बैठिए ना...

मैं बेड के पास पड़ी चेयर पर बैठने लगा तो कामिनी ने मुझे बेड पर आने को कहा...और मैं कामिनी के साथ बेड पर बैठ गया...

मेरे बैठते ही कामिनी मेरे करीब आ गई...

कामिनी- बहुत इंतज़ार करवाया आपने...और आए भी तो तब..जब घर मे सब मौजूद है..

मैं- मतलब..आपको खुशी नही हुई..मेरे आने की...

कामिनी- अरे..मतलब ये कि अभी आपको खुल के प्यार भी नही कर सकती..

मैं(मुस्कुराते हुए)- कोई नही...प्यार करने के लिए तो जिंदगी पड़ी है....कर लेगे...

कामिनी- जिंदगी का क्या पता...कब ख़त्म हो जाए ..है ना..

मैं(मन मे)- जानता हूँ ...तू मेरी बात कर रही है...पर मैं तुझे ऐसा झटका दूगा कि तू जीते जी मर जायगी...

कामिनी- हेलो...अभी तो जिंदगी बाकी है...अभी सोच मे टाइम वेस्ट मत करो...

मैं- ओके...वैसे भी मैं लाइफ के बारे मे सोचता नही....जब तक लाइफ है, तब तक खुल के जिओ...यही मेरा मानना है...

कामिनी- गुड...तो इंतज़ार किस बात का...हुष्ण भी है...प्यास भी है...तो प्यास बुझा लो ना...

मैं- पर..घर मे कई लोग है...

कामिनी- डोंट वरी...थोड़ा सा प्यार तो कर सकते है ना...

मैं- ओके..बस थोडा सा...

इतना बोलते ही कामिनी ने अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिए और हम एक-दूसरे के होंठ चूसने लगे...

करीब 5-6 मिनट से हम होंठ चूस रहे थे कि तभी गेट पर किसी ने आवाज़ दी...

सेरवेंट- अयू हु...मेडम...

हम ने किस ख़त्म किया और कामिनी बोली...

कामिनी(गुस्से से)- बिना बुलाए क्यो आई...??

सेरवेंट- मेडम वो...

कामिनी- वो क्या...??

सेरवेंट- पोलीस आई है...आपको बुला रहे है...

कामिनी- ओके तू जा..और मुँह बंद रखना...यहाँ जो देखा वो किसी को पता ना चले..समझी...

सेरवेंट - जी मेडम...

सेरवेंट चली गई ....और थोड़ी देर बाद हम दोनो भी नीचे आ गये...

 
नीचे आते ही हम ने देखा कि इनस्पेक्टर आलोक आए हुए थे...जो दीपा का केस देख रहे थे....

कामिनी- हेलो इनस्पेक्टर...आप यहाँ..??

आलोक- जी मेम...असल मे जब मुझे पता चला कि आपका आक्सिडेंट हुआ है तो कुछ पूछने चला आया....

कामिनी- पर आक्सिडेंट से आपका क्या ताल्लुक...हम ने तो रिपोर्ट नही की....ये बस एक आक्सिडेंट था...

आलोक- सॉरी में...बट मुझे लगता है कि ये आक्सिडेंट करवाया गया है...और इसका संबंध दीपा के केस से लगता है....

मैं- ये आप कैसे कह सकते है..??

आलोक- आप...?? ओह अंकित...आप यहाँ भी...आप हर जगह मिल जाते है..ह्म्म..

मैं- मतलब...??

आलोक- मतलब ये कि दीपा और कामिनी...दोनो फ्रेंड्स है...और दोनो के साथ ही सेम थिंग हुई है...आइ मीन आक्सिडेंट..बस सिचुयेशन अलग-2 है...और आपका दोनो के साथ कुछ....

कामिनी(गुस्से से)- इनस्पेक्टर प्ल्ज़्ज़...अंकित मेरे गेस्ट है...परिवार के जैसे...इनके बारे मे कुछ कहने के पहले सोच लीजिए...

आलोक- सॉरी मेम...मैं बस पूछ रहा था ... वैसे क्या मैं जान सकता हूँ कि आपके साथ कल हुआ क्या था...सब बताइए...

कामिनी- पर किस लिए...बोला ना ये एक आक्सिडेंट था...

अलीक- ऐसा आपको लगता है...पर मुझे लगता है कि आपके और दीपा के केस मे कुछ संबंध ज़रूर है...सो प्ल्ज़ को-ओपरेट...

कामिनी - ओके..

फिर कामिनी ने सब बता दिया ...पर उस इंसान से मिलने की बात छिपा ली...सब सुनने के बाद...

आलोक- ह्म्म..क्या मैं जान सकता हूँ कि आप होटल डेलिट क्यो गई थी..??

कामिनी- वो...मेरी एक फ्रेंड से मिलने..बस...

आलोक- क्या मैं उस फ्रेंड का नाम जान सकता हूँ..??

कामिनी- वो...हाँ ...संध्या(झूठ)

आलोक- ह्म्म...ओके में मैं चलता हूँ...ज़रूरत पड़ेगी तो फिर तकलीफ़ दूगा...

कामिनी- ओके...

आलोक(मेरी तरफ देख कर)- बाइ अंकित...सी यू सून...वाई दा वे...आपकी आँखे...ब्यूटिफुल...

मैं(असमंजस मे)- व्हाट...थॅंक्स वाई दा वे...बाइ..

आलोक वहाँ से चला गया और फिर मैं सुषमा,पायल,कामिनी,काजल और 2 लड़कियो के साथ बैठ कर लंच करने लगा....

तब कामिनी ने मेरा परिचय उन दोनो लड़कियों से करवाया...

कामिनी- अंकित, ये है दिव्या और दिया...दामिनी दीदी की बेटियाँ...और लड़कियों...ये है अंकित...मल्होत्रा अंपीएर के वारिश..

दिव्या- हेलो..

दिया- ही..

मैं- हेलो...

कामिनी- ये दोनो फॉरिन मे थी...कल ही आई है...अब यही कॉलेज मे पढ़ेगी...और हाँ...कुछ दिन बाद दिव्या की एंगगमेंट है....अभी से इन्वाइट कर रही हूँ...आना ज़रूर...

मैं- जी क्यो नही...ज़रूर आउगा...कॉंग्र्त्ज़ दिव्या...

दिव्या- थॅंक्स...

इसके बाद हम ने लंच किया और पूरे टाइम काजल मुझे प्यार से देखती रही..पर बोली कुछ नही...

लंच के बाद मैं सबको बाइ बोल कर निकलने लगा कि पायल बोली...

पायल- क्या तुम मुझे ड्रॉप कर दोगे...???

मैं- हाँ...हाँ क्यो नही...पर कहाँ..??

कामिनी- इसने यहीं घर ले लिया है...अपने सहर मे...

मैं- गुड...तो चलिए...

कामिनी- पर पायल ...बहनोई जी (पायल के पति) तो आए नही होंगे...तुम क्या करोगी अकेले...

पायल- वो..भाभी...वो आने वाले है...कॉल आया था ...तो जाना होगा....

कामिनी- ओके...फिर रोकूगी नही....जब वो आ जाय तो आना ओके..

पायल - ओके...

फिर मैं पायल को लेकर निकल आया...

(कार मे)

मैं- हाँ तो कहाँ छोड़ दूं तुम्हे..?

पायल- छोड़ना नही...चोदना है...

मैं(मुस्कुरा कर)- बेशरम...मैं तभी समझ गया था कि मेरे साथ क्यो आना था..

पायल- जब जानते हो तो पूछते क्यो हो....

मैं- ह्म्म...तो कहाँ चले...??

पायल- मेरे घर...वहाँ कोई नही....

मैं- ओके...पर तुम्हारे पति...आने वाला है ना...???

पायल- वो कल आयगे...बहुत टाइम है...

मैं- तो बोलो...कहाँ है तुम्हारा घर....

फिर पायल ने मुझे अपने घर का रास्ता बताया और हम पहुच गये...नये घर मे पायल को छोड़ कर उस घर का उद्घाटन करने....

पायल के घर पहुच कर वो मुझे जोरों से किस करने लगी....मैने उसे रोका और कॉफी बनाने कहा.....

पायल कॉफी बनाने गई और मैने अपने आदमी को कॉल किया....

 


उसने मुझे कुछ बताया तो मैने फिर विनोद अंकल को कॉल किया...

(कॉल पर)

मैं - हेलो अंकल...

विनोद- हाँ बेटा बोलो...

मैं- कोई न्यूज़ मेरे लिए...???

विनोद- हाँ...गुड न्यूज़ है...

मैं- गुड न्यूज़...और वो क्या है...??

विनोद- वो ये है कि अब तुम्हारे खिलाफ कोई न्यू चाल नही चली जा रही...अब तुम टेन्षन फ्री हो जाओ...

मैं- क्या...पर क्यो...क्या तुम्हारे बॉस का काम हो गया..और इन सबका क्या..इन्हे वो मिल गया जो ये चाहते थे...???

विनोद- नही..ऐसा कुछ नही हुआ...पर बॉस ने कुछ मंत तक सबको शांत रहने को कहा है...कोई भी तुम्हारे खिलाफ कुछ नही करेगा...

मैं- ये तो कमाल है...ज़रूर कुछ बात है इसके पीछे...

विनोद- वो किसी को नही पता...बस बॉस जानते होंगे...

मैं- तो पता करो...समझे...

विनोद- बॉस नही बताते...वो सब अपने मन मे रखते है...हम बस ऑर्डर्स मानते है...

मैं- ह्म्म..तो कितना टाइम चुप रहने का बोला है तुम्हारे बॉस ने....

विनोद- अभी तो समझ लो की 5-6 मंत...शायद कुछ प्लान हो...वो पता नही...

मैं- ह्म्म..तो अभी मैं फ्री हूँ..??

विनोद- हाँ ..बिल्कुल फ्री...वैसे रेणु ने नही बताया तुम्हे...??

मैं- तुम अपना काम करो...बाकी मत सोचो...और हाँ वो वजह पता करो कि ये बॉस इतना दिलदार कैसे हो गया...कुछ तो होगा...

विनोद- ये मुमकिन नही...वो तभी कॉल करेंगे..जब वो चाहते है...अगर कुछ पता चला तो बता दूगा....

मैं- ह्म्म ....नही बताया तो पता है ना कि क्या होगा...

विनोद- हाँ..ट्रस्ट मी...आइ विल ट्राइ माइ बेस्ट...

मैं- ओके..बाइ

विनोद- बाइ...

कॉल रखने के बाद मैं सोचने लगा कि अब ये क्या चक्कर है....ये लोग 5-6 मंत तक चुप क्यो रहने वाले है...ज़रूर कुछ बड़ा करना चाहते है...

और उस दिन आंटी भी फ़ोन पर कह रही थी कि टाइम आने दो...क्या इसी टाइम की बात हो रही थी....

वेल मेरे पास इतना टाइम तो है कि मैं कुछ पता कर सकूँ...आज से ही जुट जाता हूँ...और अब थोड़ा रिलॅक्स होकर काम कर पाउन्गा...

पर रेणु ने मुझे क्यो नही बोला...देखते है उसका कॉल आता है कि नही...

तभी पायल कॉफी ले कर आ गई..और मैने उसके मुस्कराते चेहरे को देख कर...अपनी टेन्षन साइड मे रख दी और हम कॉफी पीने लगे.....

कॉफी पीते हुए हम दोनो खामोश थे...बस चुप-चाप एक-दूसरे को देख रहे थे.....

मैने गौर किया कि पायल ने ड्रेस चेंज कर ली है और अब वो एक वेस्टर्न ड्रेस मे थी...

मैं उसे देख कर हैरान था..क्योकि पायल को आज तक मैने सिर्फ़ साड़ी मे देखा था...

पायल को देखते ही मेरा लंड तड़पने लगा और मैने पायल की जोरदार चुदाई के लिए एक आइडिया सोच लिया......

पायल ने एक शर्ट और एक बहुत ही छोटा सा पेंट पहना हुआ था...जो मुस्किल से उसकी गांद छिपा पा रहा था...

पायल भी फुल मूड मे थी...और जैसे ही हमारी कॉफी ख़त्म हुई तो पायल उठ कर मेरे पास आ गई और झुक कर मुझे किस करने लगी....

मैं भी मूड मे था...और मैने किस करते करते उसकी शर्ट के बटन खोल दिए....

अब पायल के बूब्स मेरे सामने थे...सिर्फ़ ब्रा उसके बूब्स को छिपा रही थी....

किस ख़त्म होने के बाद पायल आपने बूब्स को मेरे मुँह पर घिसने लगी...

मैने भी उसके एक बूब्स को ब्रा के साथ मुँह मे भर लिया और दूसरे को हाथ से मसल्ने लगा....

पायल फुल मस्ती मे सिसकने लगी...जैसे कब्से वेट कर रही थी कि मैं आउ और उसके बूब्स चूस लूँ....

मैं बारी-2 उसके बूब्स को मुँह मे भरता और दूसरे को हाथ से मसलता...

पायल भी अब सिसकते हुए अपनी मस्ती का इज़हार करने लगी....

मैं-उउंम्म….उउउंम्म…उउउंम्म..मम्मूउहमम्म

पायल-आअहह..अहहह..आह…उउउंम…ऊहह

मैं-सस्स्ररुउपप…सस्स्ररुउपप….सस्ररुउपप..

पायल-उउंम..आअहह…आहह..ऊहह…ऐसे….हहिी…आहह

मैं कुछ देर पायल के बूब्स को बारी-बारी चूस्ता ऑर मसलता रहा…ऑर पायल पूरी गरम हो गई…मैने बूब्स को छोड़ा ऑर बोला

मैं-पायल…सच मे मस्त बूब्स है तुम्हारे….इन्हे तो बस चूस्ता ही रहूं….

पायल-सच मे…तो चूस लो ना…इसी लिए तो तुम्हे लाई हूँ…

मैं-हाँ..चूसूगा..पर प्यार से..धीरे-धीरे….पहले ये कपड़े निकालो …

पायल जल्दी से कपड़े निकाल के नंगी हो गई...और जैसे ही मैने दुबारा बूब्स मुँह मे भरा ही था कि मेरा फ़ोन बजने लगा...

पायल- ओह हो...कौन है...??

मैने फ़ोन देखा...ये संजू का कॉल था...

मैं- अरे ये संजू का कॉल है...एक मिनट बस...

मैने कॉल पिक की और संजू को बोल दिया कि मैं शाम तक आउन्गा...काम है कुछ...और कॉल कट कर दी...

तब तक पायल किचन मे कप्स ले कर निकल गई थी...तो मैं भी जल्दी से किचन मे चला गया....

जैसे ही मैं किचन मे गया तो पायल पूरी नंगी...किचन बसे पर कप्स जमा रही थी...

पायल की गांद मुझे अपनी तरफ खीच रही थी....मैं जल्दी से पायल के पास गया और उसे पीछे से बाहों मे कस लिया...

पायल- अऔच..आराम से...जल्दी क्या है...

मैं- हाँ मेरी जान आराम भी कर लेगे...आख़िर इतना अच्छा घर जो लिया है...आराम तो बनता है ना...

पायल- ह्म्म..तो घर नही देखोगे...

मैं- देखुगा भी और उद्घाटन भी करूगा...पर अपने तरीके से...

पायल- तो पहले घर देखोगे या मेरी चुदाई करोगे...

मैं- ह्म्म..दोनो साथ मे...

पायल- मतलब ..मैं समझी नही..

मैं- आज तुम्हे तुम्हारे घर मे हर जगह चोदुन्गा...ओके..

पायल- सच...बहुत मज़ेदार...तो शुरू कहाँ से करे...

मैं- ऑलरेडी शुरू हो चुका हूँ...

और मैने अपनी गांद को धक्का दिया...जिससे मेरा लंड पेंट के उपेर से पायल की गांद मे चुभ गया...और साथ मे मैने पायल के निप्पल को उंगलियों मे पकड़ के मरोड़ दिया...

पायल- उउउइईईईई...माआ...आअहह

मैं- आज ऐसे -2 चोदुगा कि तू वैसे कभी नही चुदि होगी...

और फिर से उसके निप्पल मरोड़ दिए....

मैं पायल के निप्पल और बूब्स को दबाते हुए अपने दांतो से उसके गले , कान और गाल को काटने लगा...कभी जीभ से उसके जिस्म को चाट भी लेता....

पायल- आअहह...क्या कर रहे हो..उम्म्म...

मैं- तू बस आज मज़े ले..अपनी अनोखी चुदाई का...घर का हर कोना हमारी चुदाई का गवाह बनेगा....अब तू शुरू हो जा...

मेरे कहते ही पायल मतलब समझ गई और घूम कर घुटनो पर बैठ गई...और मेरे पेंट से मेरे लंड को आज़ाद कर दिया....

पायल ने लंड को पहले किस किया...

फिर जीभ फिराते हुए पूरे लंड को चाटने लगी...थोड़ी देर चाटने के बाद उसने लंड का सुपाडा मुँह मे भर के चूसना शुरू किया...

मैं- उम्म...पहले से अच्छा कर रही हो...ऐसे ही मेरी जान...

पायल ने फिर लंड को मुँह मे भर लिया और मुँह आगे-पीछे करते हुए लंड को चूसने लगी...

मैं-ईीस…एस्स..बाबे…एसस्स…ज़ोर से…आहह

पायल-उउउंम…सस्रसरररुउउप्प्प…सस्रररुउुुुउउ……उउउम्म्म्म….क्क्हूंम्म्मम

पायल मस्ती मे लंड को पूरा गले मे भर के चूस्ति रही....

पायल-क्क्हू…..सस्स्र्र्ररुउुउउप्प…..सस्स्स्ररुउउप्प….उउउंम्म

मैं-आहह…मज़ा आ गया….

पायल ने लंड को चूस कर अपनी लार से पूरा गीला कर दिया...और अब मेरा लंड चूत मे जाने को तडफने लगा...

 
मैने जल्दी से अपनी टी-. और पैर मे फसा पेंट अलग किया और पायल को रोक कर उसे खड़ा किया...

फिर पायल को घूमाकर मैने उसकी एक टाँग हाथ मे उठाई और उसकी चूत पर एक बार हाथ फेरा...फिर लंड को चूत पर सेट कर के एक जोरदार धक्का मारा...

पायल- आहह...धीरे...कई दिन बाद ये लंड खा रही हूँ...आराआंम्म्मम..

पायल की बात ख़त्म होती..उसके पहले ही मैने दूसरा जोरदार धक्का मारा एर पूरा लंड पायल की चूत मे समा गया....

मैं- कैसा लगा ....

पायल- ओह्ह्ह..वैसा ही...ओह्ह..दमदार...

मैने फिर तेज़ी से चुदाई शुरू कर दी....

मैं-ईीस्स..बेबी….यीह….बेबी

पायल-आहह..अहहह..अहहह….ईीस्स…तीएजज….आअहह..तेजज

मैं-एसस्स…ये.लो…ईएह..ईएह

पायल-ज़ूओरर…सससी…आहहह…आऐईइईसीए…हहिी…आहहह….ज़्ज़ूऊररर…ससी...

करीब 5-6 मिनट मैं तेज़ी से पायल को चोदता रहा फिर मैने पायल की टाँग को छोड़ कर उसे घुमा दिया और झुका कर उसे चोदने लगा…..

पायल-आहह…मज़ा…एयेए…गग्गेययय्या…आहह…..आहह..आह

मैं-ऐसे ही मज़े…हह..करवाउन्गा….देखती जा…

पायल-आहह..आह..तेज..तेजज्ज़..तेजज…..ऊहह…….म्मा

मैं 10 मिनट से पायल को पूरी तेज़ी से चोद रहा था….पायल चुदाई की मस्ती मे झड़ने लगी…

पायल-आहह...म्मायन्न्न...आइी...ऊहह...एसस्स...एस्स..आहह

ऑर पायल झड़ने लगी ऑर चुदाई की आवाज़े बदलने लगी

आअहह…आह..यईीसस…..उउंम…फ़फफुऊूउक्च..फ्फक्च…फ्फूककच्छ……ईएहह..ईएहह..आअहह..ऊहह…आहह..आह…

.फ्फक्च्छ..फ़्फुूककच्छ..आहह..अहहह….आअहह

ऐसी आवाज़ो के साथ पायल झड रही थी ओर मैं पायल को चोदे जा रहा था……

जब पायल पूरी झड गई तो मैने अपना लंड पायल की चूत से निकाल लिया...

मैं- मज़ा आया मेरी जान..

पायल- इतनी जल्दी मेरी प्यास नही बुझने वाली...

मैं- बोला ना कि आज तुझे घुमा-घुमा के चोदुन्गा.....

और मैने पायल को बसे पर झुका दिया और उसकी गान्ड चाटने लगा...

मैं- स्रररुउउप्प्प...इसे भी फाड़ दूँगा...

पायल- उफफफ्फ़...फाड़ दो ना....

और पायल ने अपनी टाँग उठा कर बेस पर रख दी और मेरे सिर को अपनी गान्ड पर दबा दिया...मैने भी उसकी गान्ड पर जीभ फिराने लगा....

मैं-सस्स्रर्र्ररुउउउप्प्प्प….आहह..सस्स्स्र्र्ररुउउप्प्प

पायल-ऊहह…न्न्नूओ…आअहह…..म्म्मााज़्ज़्ज़ाअ….आआ..गगगययया……ऊओह..

मैं-सस्स्स्र्र्ररुउउप्प….सस्स्र्र्ररुउउउप्प

पायल-उूउउम्म्म्ममम….खा जाओ…..इतना..आहह…मज़ा……आअहह...खा जाओ...

मैं- सस्रररुउउप्प्प......सस्स्रररुउउप्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प....

पायल मस्ती मे अपनी गान्ड चटवा रही थी और फिर से उसकी चूत लंड खाने को रेडी हो रही थी....मैं उससे अलग हुआ और बोला....

मैं- अब क्या यही सब करवाओगी...चलो घर दिखाओ...

पायल- हाँ क्यो नही...चलो...

पायल ने मेरा लंड पकड़ा और मुझे हॉल मे ले आई....

पायल- ये है हमारा हॉल...अब इसका उद्घाटन करो....

मैं- ह्म्म..करता हू मेरी जान...इसलिए तो आया हूँ....

और पायल ने मुझे वहाँ पड़े रॉयल सोफे पर बैठा दिया और गप्प से मेरा लंड मुँह मे भर लिया...

थोड़ी देर लंड चूसने के बाद पायल ने मेरे लंड को अपने बूब्स मे फसाया और बूब्स पकड़ कर उपेर नीचे करने लगी...

मैं- आहह...मस्त...लंड को अच्छी मालिश मिल रही है...

पायल- यस...मज़ा आया ना...ये लो...

पायल पूरी मस्ती मे लंड को बूब्स से मालिश करती रही और बीच- बीच मे लंड को चूस कर गीला भी करती रही...

मैं- अब हो गई मालिश..अब इस हाल का उद्घाटन हो जाए...

पायल- ह्म्म..करो ना...

मैं फिर नीचे कार्पेट पर लेट गया और पायल को उपेर बुलाया...पायल दोनो पैर साइड मे करके बैठ गई...

उसने अपनी चूत लंड पर सेट की...बट मैने लंड पकड़ कर उसकी गान्ड पर लगाया और पायल कुछ कहती उसके पहले ही उसे पकड़ के नीचे से धक्का मारा...

फिर क्या पूरा लंड पायल की गान्ड मे...

पायल- उईइ..आहह...उउउइइ...माँ...फाड़..दी...आशह

मैं- बोला था ना कि आज दबा के चोदुन्गा...अब शुरू हो जा..

पायल- हा..हाय..माँ...फाड़ दी...उउउफ्फ..

फिर पायल ने अपने आपको अड्जस्ट किया और हाथ के सहारे अपनी गान्ड को मेरे लंड पर पटकते हुए गान्ड मरवाने लगी....

पायल-उूुुउउइइ…म्म्म्मऔमाआ…..फफफफफ़ाआद्दद्ड…द्ददडिईई…

.आहह…हमम्म्म…उूउउम्म्म्मम…म्म्म्म्माआररर्र्ररर…द्द्ददडाालल्ल्ल्ल्ल्लाअ..आहह…हहुउऊम्म्म्ममम्म्म

पायल की आखो से आसू आ गये....

मैं थोड़ा रुक गया ऑर पायल की चूत को हाथ से सहलाने लगा…जिससे पायल को आराम मिला…

मैं-पायल…ठीक हो ना…????

पायल-हाँ…ऊहह….इतने दिनो बाद गान्ड मे लिया ना तो...आअहह...

मैने थोड़ी देर तक पायल की गान्ड मे धीरे-धीरे धक्के मारता रह…जब पायल का दर्द ख़त्म हो गया तो वो खुद उछल-उछल कर गान्ड मरवाने का मज़ा लेने लगी.....

पायल-आहह…आब्ब्ब….ज्जूओर्र..सीए…..द्दाल्ल्ल…ऊऊ..आहह

मैं-यस बेबी…मज़ा आया…

पायल-आअहह…हाा…ऐसे…हिी…ऊहह..…ज़ोर से…आअहह..ऊहह..ऊहह..

मैं-यस…...यस…क्या गान्ड है…..ईएह

पायल-आअहह….मार..ज़ोर्स…से…मारूऊ,…आहह..अहह

आअहह..आ..त्ततप्प्प..त्ततप्प..त्तप्प..आहह..ईएसस..ऊहह..ज्जूओर्र…ससी..म्म्मा誻अररर…आअहह…त्तप्प…त्तप्प…ऊहह…

यईीसस…अहहह..ज्जूऊर्ररसस्सीए…ऊहह

 


ऐसी ही आवाज़ो के साथ पायल अपनी गान्ड मरवाती रही और मैं साथ मे उसकी चूत को मसलता रहा....

थोड़ी देर बाद ही पायल फिर से झड़ने लगी....

मैं-यस..यस..यस…बेबी…यीह..बेबी…एससह

पायल-आअहह….आअहह……मारूऊ…ज़ूर..से..….ऊहह….म्म्म्मा ऐईयइ..आऐईयइ….ऊहह..ऊहह…ऊहह..ह....

जब पायल झड चुकी तो वो मेरे लंड पर ही बैठ गई...मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था....और पायल का चूत रस मेरे लंड से होते हुए मेरी जांघे गीली करने लगा....

पायल- ओह्ह..माँ..फाड़ ही दी...फिर से...

मैं- अभी तो और भी फाडुन्गा...देखती जाओ...

पायल- ह्म्म..चलो फिर..अब उपेर भी देख लो...

मैं- क्यो नही ..चलो...

फिर हम दोनो उठकर सीडीयाँ चढ़ने लगे...जब हम उपेर वाली सीडी पर पहुचे तो पायल ने मुझे रोक दिया...

मैं- क्या हुआ...??

पायल- अरे सीडीयों का उद्घाटन भी होना चाहिए ना...

मैं- हाँ क्यो नही...

पायल जल्दी से नीचे बैठ गई और मेरी बॉल्स को मुँह मे भरकर चूसने लगी...

मैं- आहह...तू तो एक्सपर्ट हो गई...आहह..

पायल- उउंम...उउंम्म..उउंम्म...

मैं- आहह..मेरी जान ..चूस ले...

पायल- उउउंम...उउंम..उउंम..आअहह...

थोड़ी देर तक मेरी बॉल्स चूसने के बाद पायल ने मेरा लंड फिर से गले तक भर लिया और लंड गीला कर दिया...

फिर पायल ने लंड को मुँह से निकाला और लंड पकड़ कर मुझे उपेर ले गई...अपना बचा हुआ घर दिखाने के लिए....

----------------------------------------------------

फिर पायल मुझे अपने स्टडी रूम मे ले गई...

पायल- ये है मेरे पति का वर्किंग रूम...

मैं- ओह्ह..गुड...तब तो यहाँ उनकी वाइफ पर वर्क करना ही होगा...

पायल- ह्म्म..क्यो नही...और ये है वो टेबल...जिस पर मेरे पति इम्पोर्टेंट फाइल्स को साइन करते है....

मैं- आज मैं भी तुम्हारे पति की इम्पोर्टेंट फाइल पर अपने लंड से साइन करूगा...

पायल- अच्छा...कौन सी फाइल...??

मैं- तुम ही उसकी सबसे इम्पोर्टेंट फाइल हो...

पायल(मेरे लंड को सहला कर)- तो लगा दो इसकी मोहर...मेरे पति की प्राइवेट फाइल पर...हहहे...

मैने पायल को किस किया और उठाकर उसे टेबल पर लिटा दिया...

पायल ने तुरंत अपनी टांगे खोल दी...

पायल- फाइल रेडी है मेरे राजा...ठोक दो साइन...

मैने जल्दी से लंड पायल की चूत पर सेट किया और एक ही धक्के मे लंड को चूत मे उतार दिया.....

पायल- आहह...अब ऐसे साइन करो कि जिंदगी भर याद रहे...

मैं- ये लो मेरी जान...

और मैं तेज़ी से पायल को चोदने लगा....

पायल-आहह….तेजज्ज़…त्तेज्ज

मैने अपने धक्को की स्पीड बढ़ा दी ओर सतसट पायल को चोदने लगा…

मैं-यीह….टेक इट बेबी….

पायल-आहह..आहह..आहह…यईसस्स

मैं पायल की टांगे हाथ से पकड़ कर उठा ली ऑर तेज़ी से उसे चोदने लगा…

मैं-ईीस्स..बेबी….यीह….बेबी

पायल-आहह..अहहह..अहहह….ईीस्स…तीएजज….आअहह..तेजज

मैं-एसस्स…ये.लो…ईएह..ईएह

पायल-ज़ूओरर…सससी…आहहह…आऐईइईसीए…हहिी…आहहह….ज़्ज़ूऊररर…ससी....

कारेब 5-6 मिनट मैं तेज़ी से पायल को चोदता रहा...

पायल- आहह...ऐसे ही मेरे राजा...ज़ोर से...

मैं- हाँ मेरी रानी...पर अब फाइल का पन्ना पलट दूं...

पायल- क्या..??

मैं- बताता हूँ...

फिर मैने पायल की टाँगो को छोड़ कर उसे घुमा दिया ऑर दोनो पैर एक तरफ कर दिए...

पायल की टांगे उसके पेट की तरफ मूड गये...जिससे उसकी गान्ड उभर आई और मैं उसकी गान्ड को थपथपाते हुए उसे तेज़ी से चोदने लगा…

पायल-आहह…मज़ा…एयेए…गग्गेययय्या…आहह…..आहह..आह

मैं-ऐसे ही मज़े…हह..करवाउन्गा….ये लो..…

पायल-आहह..आह..तेज..तेजज्ज़..तेजज…..ऊहह…….म्मा

मैं 10 मिनट से पायल को पूरी तेज़ी से चोद रहा था….पायल चुदाई की मस्ती मे फिर से झड़ने लगी…

पायल-आहह...म्मायन्न्न...आइी...ऊहह...एसस्स...एस्स..आहह

ओर पायल झड़ने लगी ओर चुदाई की आवाज़े बदलने लगी

आअहह…आह..यईीसस…..उउंम…फ़फफुऊूउक्च..फ्फक्च…फ्फूककच्छ……ईएहह..ईएहह..आअहह..ऊहह…आहह..आह

….फ्फक्च्छ..फ़्फुूककच्छ..आहह..अहहह….आअहह

ऐसी आवाज़ो के साथ पायल झड रही थी ऑर मैं पायल को चोदे जा रहा था……

जब पायल पूरी झड गई तो मैने अपना लंड पायल की चूत से निकाल लिया ऑर साइड मे पड़ी चेयर पर बैठ गया....

पायल(लेटे हुए)- ओह्ह माँ...ऐसा साइन किया है कि फाइल फट ही गई...

मैं- ह्म्म..पर ऐसे साइन की ही ज़रूरत है इस फाइल को...है ना...

पायल- हाँ मेरे राजा...पर ये बताओ कि ये पेन(लंड) स्याही कब छोड़ेगा...

मैं- जब ये फाइल पूरी फट जायगी....अब चलो...घर दिखाओ...

पायल- अब रूफ आंड बेडरूम बाकी है....तो बेड रूम चले...

मैं- नही...पहले रूफ..फिर बेडरूम..

पायल- तो कपड़े पहन लूँ...

मैं- कपड़े क्यो...??

पायल- अरे..कोई देख लेगा तो...

मैं- कुछ नही...आज मैं हर जगह तुम्हारे साथ मज़े करूगा...

पायल- ह्म्म..पर देख के...ह्म्म..

मैं- ओके..चलो अब...

फिर हम दोनो रूफ पर चले गये...वहाँ गेट पर खड़ा होकर मैं देखने लगा को कोई पायल को नंगा तो नही देख ले..

रूफ के चारो तरफ से वॉल खड़ी थी...पीछे मस्त तालाब था..और लोग घूम रहे थे...

मैं पट्टी के एक साइड खड़ा हो गया और पायल को आने का बोला...

पायल कुतिया की तरह हाथो के सहारे मेरे पास आ गई...

पायल के आते ही मैने अपना लंड उसके सामने कर दिया और पायल ने जल्दी से हाथो का सहारा लिया और लंड को मुँह मे भरके चूसने लगी...

थोड़ी देर तो पायल लंड चूस्ति रही...पर रूफ गर्म थी इस वजह से उसके हाथ गरम होने लगे...

मुझे भी पायल की हालत समझ आ गई तो मैने उसे अंदर आने का बोला...

पायल अंदर भाग के आ गई और मैं भी पीछे-2 आ गया और हम अंदर आ गये....

 
अंदर आते ही मैने पायल को नीचे बैठाया और उसके मुँह मे लंड डाल दिया...पायल ने जल्दी से फुल स्पीड मे लंड चूसना शुरू कर दिया.....

मैं-आहह…पायल….खुश कर दिया,…आअहह

पायल-सस्ररुउपप….सस्स्ररुउउप्प…

मैं-ओह्ह…पायल…ज़ोर से...बस होने वाला है...

पायल..सस्स्ररुउपप….सस्रररुउपप...सस्स्रररुउउप्प्प....

मैं- ओह...पायल...तेजज...मैं आ रहा हूँ....

पायल-उउंम्म..उउंम्म…..सस्स्स्ररुउउप्प….उउउंम्म

मैं-आहह…मैं आया...आहह...

मैने तेज़ी से पायल के मुँह मे झड़ने लगा और पायल मेरा सारा काम रस पी गई....पर फिर भी थोड़ा उसके मुँह से बह कर सीने पर बह गया...

फिर वो मेरे लंड को मुँह से निकाल के चाटने लगी...

मैं- मन भर गया...

पायल- मुउहह...मज़ा आ गया...

मैं- ह्म्म्मय..अब क्या इरादा है...

पायल- अभी तो बेडरूम बचा है उद्घाटन के लिए...

मैं- करते है मेरी जान...पहले कॉफी पिलाओ...

तभी मुझे अपना फ़ोन याद आया और मैं नीचे आ गया...पायल भी सीधा किचन मे आ गई कॉफी बनाने...

मैने फ़ोन देखा तो उसमे मेरे आदमी के 4 कॉल पड़े थे...

मैने जल्दी से उसे कॉल किया...

(कॉल पर)

मैं- हाँ बोलो...

स- सर आप कहाँ थे...कब्से कॉल कर रहा हू...

मैं- बिज़ी था...बोलो क्या हुआ...

स- सर कुछ खास हाथ लगा है..

मैं- बोलो...

स- सर आप यहाँ आ सकते है...कोई है जो आपसे मिलना चाहता है...

मैं- कौन ..??

स- मैं नही जानता...बस बोल रहा था कि आपकी फॅमिली को जानता है तो मैं ले आया...

मैं- ओके...उसने कुछ बताया...??

स- नही...बोल रहा है कि सिर्फ़ आपके डॅड से बात करनी है...

मैं- ओके..मैं अभी आया...बाइ...

मैने कॉल कट किया और पीछे से पायल आ गई कॉफी ले कर..

पायल- कहाँ जाने की बात कर रहे हो...तुम आज कहीं नही जा सकते...

मैं- सॉरी..पर जाना होगा...ज़रूरी है...

पायल- पर अभी पूरा घर नही देखा...और मेरा क्या...??

मैं- ज़रूरी काम है यार...जाना होगा...और बाकी का घर बाद मे देखुगा..

पायल- अरे यार...ये सही नही है...

मैं- ह्म्म..पर जाना होगा...मेरे कपड़े लाओ..

मैने जल्दी से कॉफी ख़त्म की और कपड़े पहने...

पायल- कब आओगे...

मैं- बहुत जल्द...मुउहह..

मैने पायल को किस किया और कार दौड़ा दी अपने सीक्रेट हाउस की तरफ....

जब मैं वहाँ पहुचा तो मैने अपने आदमी से बोला....

मैं- हाँ..तो कौन है वो..???

मेरे सामने एक अधेड़ उम्र के आदमी को लाया गया....

मैं- ये तुम्हे मिला कहाँ...??

स- ये आपके घर के बाहर कॉलोनी मे आपके डॅड को पूछ रहा था...और हम ने आपके घर के आस-पास जो आदमी तैनात किए है...उन लोगो ने इसके मुँह से आपके डॅड का नाम सुना तो मैने इसे यहाँ ले आने का कहा ...

मैं- ओके...तो बाबा...बताना शुरू करो..

 
वो इंसान मुझे देख कर भावुक सा हो गया था...और बस मुझे देखे जा रहा था...साथ मे उसकी आँखो मे खुशी के आँसू निकल रहे थे...

मैं- क्या हुआ बाबा...रो क्यो रहे हो...कौन हो आप...???

बाबा- ये तो खुशी के आँसू है बेटा...तुझे देख कर आँखो से छलक आए...

मैं- बाबा..आप है कौन...??

बाबा(आँसू पोंछ कर)- मेरा नाम बहादुर है बेटा..और आज से कई साल पहले मैं तुम्हते दादाजी का नौकर था...

अपने दादाजी का नाम सुनते ही मेरी आँखो मे खुशी तैर गई...

मैं- क्या..आप जानते हो मेरे दादाजी को...वो कहाँ है...कैसे है...और..और...मेरे बाकी के घरवाले...कहाँ है वो सब...??

बहादुर- वो मुझे नही पता मालिक...उन्होने मुझे काफ़ी सालो पहले अपने से दूर कर दिया था..तब आप भी पैदा नही हुए थे....हम आपके पापा के साथ गाओं छोड़ कर आ गये थे...

मैं- पर मैने तो आपको कभी डॅड के साथ नही देखा .....

बहादुर- गाओं से निकलते ही उन्होने मुझे अपने से दूर कर दिया था...और मैं अपने परिवार के साथ एक नये गाओं मे बस गया था...

मैं- पर दूर क्यो किया था...??

बहादुर- क्योकि तुम्हारे पापा अपने साथ कोई भी पुरानी याद नही रखना चाहते थे...

मैं- ओह...तो आप अब किस लिए आए है...

बहादुर- बताता हूँ बेटा...कुछ दिन पहले मेरे पास एक आदमी आया और उसने तुम्हारे दादाजी का संदेश दिया..

मैं- दादाजी को आपका पता था कि आप कहाँ रहते है...???

बहादुर- नही...शायद पता लगा लिया होगा...

मैं- ह्म्म..तो आपको पता चल गया कि दादाजी कहाँ है...??

बहादुर- नही बेटा...उसने ये नही बताया...बोला कि पूछ के बताउन्गा....

मैं- ह्म्म..तो संदेश क्या था...

बहादुर- संदेश ये था कि आख़िरी बार आपके दादाजी अपने बेटे यानी कि आपके पापा से मिलना चाहते है....

मैं- आख़िरी बार मतलब..दादाजी को क्या हुआ...???

बहादुर- हुआ तो कुछ नही बेटा...पर उमर हो गई है...इसलिए अपने बेटे से मिलना चाहते है...

मैं- तो दादाजी को ये पता नही कि हम यहा रहते है...

बहादुर- नही...मुझे भी मालूम नही था...इसलिए मे सहर-सहर घूम रहा था...और यहाँ किसी ने उनके बारे मे बता दिया...

मैं- ह्म्म....आपको मैं उनसे मिला दूगा...पर पहले मुझे ये बताओ कि दादा जी कहाँ है...उस आदमी ने आपको बताया कि नही...

बहादुर- वो बताता..उससे पहले उसकी आक्सिडेंट मे मौत हो गई...

मैं- ठीक है...आप आराम करे...मैं आपको अपने डॅड से मिलवाउन्गा...पर उन्हे ये मत कहना कि मैं आपसे मिल चुका हूँ...

बहादुर- जी मालिक..

मैं- आप मुझे मालिक मत बोलो...बेटा ही बोलो...

बहादुर- जैसा कहो बेटा...

मैं(अपने आदमी से)- जब तक डॅड नही आते..तुम इनका पूरा ख़याल रखना ओके...

स- ओके

मैं- सुनो बाबा...

बहादुर- हाँ बेटा...

मैं- आपने मुझे कभी देखा नही तो कैसे मान लिया कि मैं आकाश का बेटा हूँ...

बहादुर(मुस्कुरा कर)- बेटा तुम अपने पापा की तरह ही दिखते हो इसलिए पहचान गया...और तुम्हारी आँखे...

मैं- मेरी आँखे....मतलब..??

बहादुर- तुम्हारी आँखे तुम्हारी माँ के जैसी है...

बहादुर मेरे आदमी के साथ अंदर चला गया और मैं बहादुर की बातें से सोच मे पड़ गया कि अब ये क्या पहेली है...

फिर मैने डिसाइड किया कि डॅड के आते ही इसे उनसे मिलवाउन्गा..फिर आगे पता करूगा...उम्मीद है बहादुर से बहुत कुछ पता चलेगा...जिससे मैं अपनी फॅमिली के करीब पहुच सकुगा.....

बहादुर के अंदर जाने के बाद मेरे दिमाग़ मे एक नई सोच पैदा हो गई...कई सवाल मेरे सामने आ गये....

मैं(मन मे)- ये बहादुर मेरी फॅमिली के बारे मे जानता है तो उस वजह को भी जानता होगा जिसकी वजह से मेरे डॅड अपनी फॅमिली से दूर हुए है....

इसने खुद बोला था कि मेरे दाद अपनी पुरानी यादों को भूल जाना चाहते थे..इसलिए उन्होने बहादुर को भी दूर भेज दिया था...क्या वजह होगी इसकी...???

मेरे डॅड मेरी फॅमिली से दूर क्यो हुए...ऐसा क्या हुआ होगा...???

डॅड ने आज तक मुझे अपनी फॅमिली के बारे मे कुछ नही कहा....पर क्यो..???

सयद बहादुर सब जानता होगा...पर क्या वो मुझे बतायगा...?? पूछता हूँ....

मैं अंदर बहादुर के पास पहुच गया...

मैं- बाबा...एक बात बताओगे...

बहादुर- हाँ बेटा...पूछो...

मैं- ऐसा क्या हुआ था कि मेरे डॅड को अपना परिवार छोड़ना पड़ा...और तो और वो उन्हे याद भी नही रखना चाहते....???

बहादुर- बेटा...वो...ये सब बताने का मुझे हक़ भी नही और मैं मजबूर भी हूँ...मैं कुछ नही बोल सकता इस बारे मे...

मैं- पर क्यों...??

बहादुर- मैने मेरे बच्चो की कसम खाई थी कि मैं मर जाउन्गा पर इस बारे मे किसी को कुछ नही कहुगा...

मैं- पर मुझे जानना है..कि मेरी फॅमिली कहाँ है...और आज मैं अकेला , उन सब से दूर क्यो हूँ...???

बहादुर(रोते हुए)- माफ़ करना बेटा पर मैं मजबूर हूँ...मैं कुछ नही बता सकता ...

मैं- ओके ..आप रोओ मत...आप रेस्ट करो...मैं खुद पता कर लूँगा...और मैं जानता हूँ कि मुझे कौन बता सकता है...

फिर मैं बाहर निकल आया...बाहर आते ही मुझे मेरा आदमी मिल गया...वो मेरा ही वेट कर रहा था...

स- अरे अंकित...इस सब मे याद ही नही रहा कि आप कुछ बताने वाले थे...क्या बात थी...

मैं- बात तो कुछ खास है और अजीब भी...???

स- ऐसा क्या पता चला...???

मैं- बताता हूँ पहले ड्रिंक पिलाओ...इस बाबा से मिलकर सिर घूम गया....

उसने जल्दी से दूसरे आदमी से कह कर हमारे लिए ड्रिंक मगवाए...

हम ने ड्रिंक लिया और बातें शुरू हुई...

स- अब बताओ..क्या पता चला..???

मैं- बात कुछ ऐसी है कि अब मेरे दुश्मन कुछ दिन तक रेस्ट करने वाले है...

स- मतलब...

मैं- मतलब ये कि अभी कुछ महीनो तक वो मेरे खिलाफ कुछ ऐक्शन नही लेगे...

स- पर ऐसा क्यो...कुछ बात तो होगी...

मैं- वो तो पता नही...बस ये पता चला कि उन सब का बॉस किसी खास टाइम का वेट कर रहा है....

स- पर क्या...ऐसा क्या चाहता है वो...जिसके लिए वेट करना पड़ रहा है...

मैं- बस यही बात तो मुझे परेसान कर रही है कि जिसने मेरे और मेरी फॅमिली के खिलाफ इतने लोगो को एक साथ खड़ा कर दिया...उसने अचानक सब बंद करने का फ़ैसला कर लिया...

स- शायद ये सब इसलिए हुआ हो कि पहले दीपा और फिर कामिनी ..दोनो के साथ आक्सिडेंट हुआ है...

मैं- मुझे नही लगता कि उसे किसी के जाने से फ़र्क पड़ेगा...इसके पीछे कुछ और ही बात है...

स- तब तो हमे पता लगाना होगा...

मैं- हाँ...और अब टाइम भी है...सब चुप रहने वाले है तो हम अपना काम आराम से कर सकते है...तुम उससे भी पूछ लो...शायद कुछ पता हो उसे...ओके

स- हाँ..पर अब तुम क्या करोगे...??

मैं- सबसे पहले मुझे अपनी फॅमिली के बारे मे पता करना है...डॅड के आते ही बहादुर को उनके पास भेजुगा...फिर देखता हूँ कुछ पता चलता है कि नही...

स- ओके..तो अब मैं भी अपने काम पर ध्यान देता हूँ...अपने आदमियों को भेजता हूँ...कुछ पता चला तो अच्छा...

मैं- ह्म्म..एक पेग और हो जाए...??

स- नही यार...तुम पियो...मुझे जॉब भी देखनी है अपनी...हाहाहा...

मैं- हाँ सही है...तुम निकलो...मैं भी निकलता हूँ...

फिर मैने एक पेग लिया और हम दोनो अपने-2 रास्ते निकल आए...

मैं कार चलाते हुए भी बहादुर की बातों के बारे मे सोच रहा था...यही सब सोचते हुए मैं अपने घर पहुच गया...

घर पहुचते ही मुझे देख कर सब खुश हो गये...खास कर पारूल...

पारूल आकर मेरे गले लग गई...और मैने भी प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा...

मैं- कैसी ही मेरी गुड़िया...??

पारूल- बहुत अच्छी भैया..

मैं- कोई परेसानि तो नही ना...??

पारूल- नही भैया...यहाँ सब मेरा बहुत ख्याल रखते है...सविता आंटी, रेखा दीदी, रश्मि दीदी ...सब और हाँ सोनू भैया मुझे पढ़ने को किताबे देते है...

मैं- अरे वाह...सोनू तो समझदार हो गया ...अच्छा ये बता कि सोनू है कहाँ...

पारूल- वो हमारे लिए पाब भाजी लेने गये है...

मैं- ओह हो..पाब भाजी खाई जा रही है...

पातुल- हम ने तो बहुत कुछ खाया...कल पिज़्ज़ा भी खाया था...

मैं- ओह..अच्छा..कैसा लगा...

पारूल- बहुत अच्छा भैया...

मैं- और बता यहाँ आ कर क्या किया...क्या पसंद आया...??

पारूल एक्शिटेड होकर सब बताने लगी...उसने क्या खाया, उसके कपड़े...घर का महॉल..और मैं उसे प्यार से देख रहा था...

 
पता नही क्यो पारूल को खुश देख कर मेरा मन खुश हो जाता था...और उसे उदास देख कर मैं उदास हो जाता..

कभी- कभी लगता है कि कुछ तो है हमारे बीच ...पर पता नही क्या...

पारूल सब बताते- बताते मेरे गले लग गई और सुबकने लगी...

मैं- अरे...क्या हुआ...??

पारूल- थॅंक यू भैया...ये जो सब आपने मेरे लिए किया...कोई नही कर सकता था...

मैं- अरे पगली...भैया भी बोलती है और थॅंक यू भी...मैं बात नही करूगा ...

पारूल- सॉरी-सॉरी...अब नही बोलूँगी..

फिर पारूल ने अलग हो कर आसू पोछ लिए...

पारूल- ऑर भैया...मैने इंग्लीश बोलनी सीख ली...कुछ- कुछ...जैसे सॉरी, थॅंक यू, और वेलकम ...और...

मैं- बस- बस..मेरी गुड़िया....तू तो बहुत होसियार है...बस तू स्कूल जाने लगेगी तो सब सीख जायगी...और भी ज़्यादा...

पारूल- पर कब जाउन्गी...???

मैं- ह्म्म..बस 3 दिन मे...खुश...??

पारूल- बहुत खुश..

तभी सविता कॉफी ले आई और सोनू भी पाब भाजी ले कर आ गया....

हम ने बैठ कर खाया-पिया और मैं 2 दिन बाद आने का बोल कर संजू के घर निकल आया......

संजू के घर आते हुए मुझे सुषमा का बेटा सोनू दिखाई दिया...वो अपनी कार साइड मे पार्क किए हुए खड़ा था...

सोनू को देख कर हमें अपनी पुरानी बातें याद आ गई...जो उसकी मोम को चोदने के बारे मे हुई थी...

पर जब से हम कामिनी के घर की शादी से वाइस आए थे...तबसे सिर्फ़ एक बार ही हमारी बात हुई थी...

और तब सोनू ने कहा था कि उसकी मोम की दिलवाने के लिए मैं उसकी हेल्प करने उसके घर आउ...

मैने कार साइड की और सोनू के पास गया...

मैं- हाई सोनू...

सोनू(सकपका गया)- त्त..तुम...ह्ही..

मैं- अबे कोई भूत देख लिया क्या...??..ऐसे क्यो बोल रहा है...??

सोनू- नही..कुछ नही...कैसे हो...

मैं- मस्त...तू बता ..कहाँ गायब था...??

सोनू- कहीं नही...क्यो..??

मैं- क्यो मतलब क्या...भूल गया तू अपनी माँ के साथ...ह्म्म

सोनू- हाँ भाई...वो तो अभी भी चाहता हूँ...बस कुछ काम से अपने गाओं गया था....कल ही वापिस आया..

मैं- तो फिर क्या सोचा...मोम का...

सोनू- मैं तुम्हे कॉल करके बुलाउन्गा तो आ जाना...तभी बात करेंगे मोम के बारे मे...

मैं- ओके पर ये बता कि आज तो तुम्हारी माँ कामिनी जी के घर पर थी...वहाँ तुम दोनो भाई-बेहन नही दिखे...

सोनू-अरे हाँ..वो हम घर पर थे...कल मिल आए थे कामिनी आंटी से..

मुझे पता नही क्यो...ऐसा लग रहा था कि सोनू बहुत घबराया हुआ है...शायद वो किसी बात से डरा हुआ था...पर मैं उससे डाइरेक्ट पुच्छू तो कैसे...

मैं- क्या हुआ सोनू...तू ठीक तो है ना..??

सोनू- हाँ...हाँ ठीक हूँ...मुझे क्या हुआ...

मैं- तू जबसे यहाँ-वहाँ देख रहा है...किसी का वेट कर रहा था क्या...??

सोनू- हाँ..वो सोनम सामने शॉप पर गई है...उसी का...

मैं- क्या..सोनम...

सोनम का नाम आते ही मेरे दिल मे दबे ज़ज्बात बाहर आने लगे...

मैं सोचने लगा उस दिन के बारे मे...जब मैने सोनम को प्रपोज किया था...

इस समय मुझे सोनम अपने सामने खड़ी हुई दिखाई दे रही थी...मैं बस यही सोच रहा था कि सोनम एक बार मुझे आन्सर दे दे...

मैं भी सोनू के साथ सोनम का वेट करने लगा...

काफ़ी देर तक हम बाते करते रहे पर सोनम नही आई...

लेकिन मेरे फ़ोन मे अनु का मेसेज आ गया..."भैया जल्दी घर आओ...अर्जेंट है"

अनु का मेसेज आते ही मैं सोचने लगा कि अब क्या करूँ...फिर सोचा कि अनु के पास जाता हूँ...वो तो मेरी हो चुकी...सोनम से बाद मे निपट लुगा...

मैने सोनू को कॉल करने का बोला और निकल आया...मुझे ऐसा लगा जैसे सोनू मेरे जाने की बात सुनकर खुश हो गया और चैने की साँस ले ली....

यहाँ मैं कार से संजू के घर निकला और वहाँ सोनू के सामने एक लेडी आ गई...

सोनू- तुम..तुमसे कहा था कि मुझे मत फासाओ इस सब मे...आज अगर वो तुम्हे देख लेता तो क्या सोचता मेरे बारे मे...

लेडी- हे..बस..टेन्षन मत ले...तुझे कुछ नही होगा...और मुँह खोला तो तेरी...

सोनू- नही-नही..मैं चुप रहुगा...कुछ मत करना...

लेडी- ह्म्म..वैसे मैने उसे देख लिया था...इसलिए छिप गई थी...

सोनू- ह्म्म..पर तुम मुझे कब छोड़ोगी...मुझे इस सब से बाहर रखो...

लेडी- कुछ महीने और...पर टेन्षन मत ले..बॉस ने चुप रहने का बोला है...तेरा काम सिर्फ़ इतना है कि मुँह बंद रखो...

सोनू- तो अब कहाँ चलना है...

लेडी- मुझे मेरे घर छोड़ दे और तू अपने घर निकल जाना ..और हाँ...अपनी माँ को चोदने अंकित को जल्दी बुलाना..हहहे...

सोनू- अभी जल्दी चलो...मुझे घर जाना है...

फिर वो लेडी के साथ सोनू निकल गया.....

यहाँ मैं कार मे था....तभी मुझे कुछ याद आते ही एक झटका सा लगा ...

मौने कार साइड मे रोक दी और कुछ याद करने लगा.....

मैं बहादुर की बातों के बारे मे सोच रहा था ...

बहादुर ने कहा था कि वो मेरे परिवार मे नौकर था...

मेरे डॅड के साथ गाओं से बाहर आ गया था...

डॅड ने उसको अपने से दूर भेज दिया...

बहादुर किसी नये गाओं मे बस गया ...

अचानक मेरे दादाजी का संदेश बहादुर को मिला....

संदेश भेजने वाला आक्सिडेंट मे मारा गया...

बहादुर का मेरे डॅड से मिलने यहाँ आना...

मुझे सारी बाते ठीक से हजम नही हो रही थी....फिर मुझे विनोद अंकल की बात याद आई कि अभी 5-6 महीने तक मेरे दुश्मन चुप रहेगे...

मैं सोचने लगा कि बहादुर का आना और मेरे दुश्मनो का चुप हो जाना....क्या ये दोनो बाते आपस मे लिंक है...

क्या बहादुर ग़लत इरादे से आया है...??

ऐसा तो नही की दुश्मन बहादुर के ज़रिए मेरे डॅड को....नही-नही...

मैं ऐसा नही होने दे सकता...बहादुर मेरे क़ब्ज़े मे है...और जब भी डॅड आयगे तो मैं उसे डॅड से अपनी निगरानी मे मिलवाउन्गा...

तब पता चल जाएगा कि बहादुर सच्चा है या झूठा.....

और मैं सब प्लान कर के संजू के घर निकल गया....

संजू के घर आते ही मैं सीधा उपर अनु के रूम मे निकल गया...

वैसे भी नीचे हॉल मे इस वक़्त कोई नही था...

अनु के रूम मे जाते ही...

मैं- अनु...क्या हुआ...अर्जेंट मे क्यो बुलाया.....??

रक्षा- रिलॅक्स भैया...साँस तो ले लो...

रक्षा की आवाज़ सुनकर मैने गौर किया कि अनु के साथ रक्षा और रूबी भी रूम मे है और मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी....

मैं- अब तुम लोगो को क्या हुआ...??

रक्षा- कुछ नही...हम तो बस इसलिए हँस रही है कि आपको अनु की कितनी फ़िक्र है...काश हमारी भी ऐसी फ़िक्र करते...

मैं- चुप रहो...मैं तुम्हारी फ़िक्र भी करता हूँ और तुम ये जानती हो....

मेरी बात सुनकर रक्षा चुप हो गई और शरमा गई...पर अनु मुझे घूरे जा रही थी...

मुझे लगा कि कही रक्षा और रूबी ने हमारी चुदाई के बारे मे तो नही बता दिया....

मैं- बोलो अनु...ऐसे घूर क्या रही हो...क्यो बुलाया..??

अनु- वो..मैने कुछ नही किया...ये सब रक्षा ने किया...मेरे फ़ोन से मेसेज कर दिया और मुझे बाद मे बताया...

मैं- ह्म्म(मन मे- चलो इन दोनो ने अनु से चुदाई के बारे मे कुछ नही कहा...)

रक्षा- अरे भैया..अनु की कोई ग़लती नही ...असल मे हमें आपसे काम था...

मैं- ह्म्म..काम...ओके..तो मैं फ्रेश होने जा रहा हूँ...जो भी काम है वो बाद मे बताना...ओके

रक्षा(आँखो से इशारा किया की बाहर मिलो)- जी भैया...

मैं संजू के रूम मे आया..फ्रेश हो कर चेंज किया और बेड पर लेट गया...

संजू- भाई...आज कुछ होगा कि नही..???

मैं- क्या..किस बारे मे बोल रहा है...

संजू- मोम...

मैं - ओह हाँ...मैं बात करता हूँ...फिर बताउन्गा...

संजू- भाई जल्दी कर...आज और कल रात ही है..कैसे भी करवा ही दे..

मैं- हाँ यार...अभी बात करता हूँ ओके...

संजू वापिस से पढ़ने लगा और थोड़ी देर मे ही रक्षा रूम के गेट पर आ कर खड़ी हो गई...

रक्षा ने इशारे से मुझे उपेर छत पर आने को कहा और निकल गई....

मैं भी जल्दी से उपेर आ गया...और मेरे आते ही रक्षा ने मुझे कस के गले लगा लिया और किस्सस की बौछार कर दी...

 
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