मैं भी उसकी हालत समझ रहा था...नई-नई चूत खुली है तो गर्मी कुछ ज़्यादा थी....थोड़ी देर बाद मैने उसे रोका....
मैं- बस कर यार...क्या हुआ...काम की बात कर...टाइम कम है...
रक्षा- ह्म्म..तो आज रात को मैं और रूबी आपके साथ...
मैं- पागल है क्या...घर मे अकेले नही है हम...नही-नही..
रक्षा- प्ल्ज़्ज़ भैया...कुछ करो ना...बहुत खुजली हो रही है....
मैं(मुस्कुरा कर)- सच मे...ठीक है ..कुछ सोचता हूँ...फिर बताउन्गा...ओके
रक्षा- थॅंक यू भैया...
मैं- पर ..कल पेपर है यार...
रक्षा- हिन्दी का है...रेडी है सब...आप बस मेरा काम कर दो...
मैं- ओके..बताता हूँ...अब चल..डिन्नर कर ले फिर कुछ सोचते है...
फिर हम नीचे आ गये और थोड़ी देर मे डिन्नर की टेबल पर...
टेबल पर मेरे सामने पूनम, रजनी आंटी, मेघा आंटी थी और मेरे आजू- बाजू...रक्षा और रूबी ......
हम आराम से डिन्नर कर रहे थे तभी मुझे लगा कि कोई मेरे पैर पर पैर रगड़ रहा है...
मैने सामने देखा तो किसी के चेहरे से समझ नही आया कि कौन है...मैने सोचा कि ज़रूर आंटी या पूनम होगी..मेघा आंटी नही हो सकती....
मैने डिसाइड किया कि जो चल रहा है चलने दो...और खाने मे बिज़ी हो गया ..
पर तुरंत ही मुझे झटका लगा...ये झटका रक्षा ने दिया था...
रक्षा मेरे लंड पर अपना हाथ फिराने लगी...
मैने एक बार उसकी तरफ देखा पर वो नोर्मलि खाना खाती रही....
मैं सोचने लगा कि सच मे इसकी चूत जल रही है लंड खाने को...इसका कुछ करना ही होगा.....
पर यहाँ इसकी ये हरकते .....साली इसकी चूत की आग कहीं मरवा ना दे....मैं नही चाहता था कि किसी को मेरे और रक्षा के बारे मे पता चले...
मैं भी चुप-चाप रहा और रक्षा को उसका काम करने दिया...
थोड़ी देर तक मेरे पैर पर किसी के पैर की रगड़ और रक्षा के लंड सहलाने से मेरा लंड कड़क होने लगा पर मैं चुप-चाप खाना ख़ाता रहा...
जैसे तैसे कंट्रोल कर के मैने खाना निपटा लिया ....
डिन्नर के बाद सब अपने -2 रूम मे चले गये सिर्फ़ मैं और संजू टीवी देखने लगे....
थोड़ी देर बाद संजू भी उपेर चला गया और जाते हुए मुझे अपनी बात याद दिला गया...
मैं परेसान बैठा था....एक तरफ संजू अपनी माँ को चोदने के लिए मरा जा रहा था और दूसरी तरफ रक्षा की चूत मेरा लंड खाने को मर रही थी.....
मैने रक्षा को मेसेज करके पूछा कि उसे आज ही करना है, कल नही हो सकता...??
तो रक्षा ने रिप्लाइ कर दिया कि रूबी कल उसके साथ नही होगी और वो रूबी के साथ ही करेगी...आज ही...
मैने कुछ सोचकर डिसाइड किया कि आज रात रक्षा और रूबी के नाम...संजू को आंटी कल मिलेगी...और मैं उपेर निकल गया....
उपेर आते ही मैने संजू को जैसे तैसे समझा दिया और संजू भी कल के लिए मान गया...
पर प्राब्लम अभी भी थी...रक्षा और रूबी की.....मैं उनके बारे मे सोच रहा था कि संजू बोला...
संजू- यार मैं गेस्ट रूम मे जा रहा हूँ...वही पढ़ुगा और वही सो जाउन्गा...
मैं- ओके...
मैं तो खुश था क्योकि अब मैं रक्षा और रूबी को खुल कर चोद सकता था.....
संजू चला गया और मैने रक्षा को मेसेज कर के बोल दिया कि 1घंटे मे मेरे रूम मे आ जाना...
मैं फिर रिलॅक्स हुआ ही था कि आंटी का कॉल आ गया...
(कॉल पर)
आंटी- हेलो बेटा..क्या कर रहे हो...
मैं- आंटी मैं तो पढ़ाई...पर आप इतने धीरे क्यो बोल रही हो...??
आंटी- वो अंकल है ना...सोए नही...
मैं- ह्म्म..बोलो क्या हुआ...
आंटी- वो बेटा...मेघा का रही थी कि...
मैं(बात काट कर)- आंटी , उसको फ़ुर्सत मे चोदुगा...बोला तो था...
आंटी- ओके...मैने भी उसे बोल दिया था...अब मेरी बात करूँ...
मैं- अब आपका क्या...
आंटी- बेटा..खुजली बढ़ गई है..आज...
मैं- आज नही आंटी...कल पेपर है...समझो ना...
आंटी- ओह हाँ...ओके...बाद मे...बाइ...
आंटी ने कॉल कट कर दी और मैने सोचने लगा कि साली अब विनोद को बुलाएगी...एक नंबर की चुद्दकद है...बिना लंड खाए सोयगी नही....
करीब 40 मिनट तक मैं थोड़ा पढ़ता रहा और फिर रक्षा , रूबी के साथ रूम मे आ गई...
मैं- तुम दोनो...इतनी जल्दी...यार अनु को तो सो जाने दो...
रक्षा- भैया वो सो गई...तभी हम आए...
मैं- ओके...तो बोलो..क्या काम है...???
रक्षा( मुँह बना कर)- भैया...आप भी...
मैं- अरे...बोल ना....
रक्षा- ह्म्म..अब आप जल्दी करो...सोना भी है...
और रक्षा आ कर मेरे पास बैठ गई..और मुझे किस करने लगी...वहाँ रूबी भी मेरे साइड मे बैठ गई और मेरी जाँघ सहलाने लगी....