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प्रमोद-ऐसे रोने से क्या होगा...हमे कुछ करना होगा...अंकित को खबरदार तो कर ही देते है..
रजनी- मैने कॉल लगाया पर लग नही रहा...
प्रमोद- तुम पागल हो क्या...संजू को कॉल कर देती..या पूनम को..
रजनी- हाँ..पर मैं नही चाहती कि ये बात संजू तक पहुचे या पूनम तक..
प्रमोद- अभी ये ज़रूरी नही...ज़रूरी ये है कि अंकित सेफ रहे...
रजनी- आप ठीक कहते हो...मैं अभी बात करती हूँ...
रजनी ने संजू और पूनम ..दोनो को कॉल किया..पर किसी ने कॉल नही उठाया...
रजनी- ये दोनो भी कॉल नही ले रहे...अब क्या करूँ...
प्रमोद- देखो ...घबडाओ मत...घर जाओ..और कॉल करती रहो..शायद बिज़ी होगे वो...जब बात हो तो आराम से बात करना और अंकित को ही बताना और किसी को नही....
रजनी- ह्म्म..अब मैं जाती हूँ...
रजनी तो घर निकल गई..पर प्रमोद को टेन्षन दे गई....
प्रमोद- हे भगवान ...अंकित के बडो के करमो की सज़ा उस बच्चे को ना देना....अब आप ही हमारे वादे की लाज़ रखना ..जो हमने अलका से किया था....
( प्रमोद और रजनी ने अलका से वादा किया था कि उसका ख्याल रखेगे)
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वापिस फार्महाउस मे
सब लोग पैदल चलते रहे और थोड़ी देर बाद हम सब एक बड़ी सी बिल्डिंग के पास खड़े हुए थे...
जो कि एक फॅक्टरी थी...जिसे बनवाया तो किसी और ने था...पर अब ये वसीम ने खरीद ली थी...
वाहा से कुछ दूरी पर रेलवे स्टेशन बना हुआ था...और एक रेल भी खड़ी हुई थी...शायद सामान लाने- ले जाने के लिए होगी...
वसीम ने बताया कि पास मे ही खदान है...पर वहाँ बाद मे जायगे...
वसीम ने सबको बिल्डिंग मे आने को कहा...उसी बिल्डिंग मे हमारे खाने का भी इंतज़ाम होना था...जिसके लिए पहले से 2 नोकर तैनात थे....
सब लोग बिल्डिंग देखने मे बिज़ी हो गये ...पर मुझे तो जूही से बात करनी थी..पर जूही मुझसे कन्नी काट कर पूनम के साथ निकल गई...
मैं भी उसके पीछे चला पर तभी सबनम आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया...
सबनम- मेरे साथ चलो...
मैं- आंटी ...कहाँ..क्या हुआ...??
सबनम- चलो तो सही...
सबनम आंटी मुझे साथ ले कर बिल्डिंग से बाहर निकल आई और थोड़ी आगे गार्डन मे ले आई...जिस गार्डन से गुज़रते हुए हम आए थे....
मैं- आप यहाँ क्यो लाई मुझे...??
सबनम-मुझे तुमसे बात करनी थी...
मैं- बात तो वहाँ भी हो सकती थी ना...
सबनम- नही...मुझे अकेले मे बात करनी थी....
मैने सबनम को ऊपर से नीचे तक देखा...आज वो वेस्टर्न ड्रेस मे कमाल दिख रही थी. ..
मैं- ह्म्म...तो कहिए ..
सबनम- मुझे तुमको थॅंक्स बोलना था...
मैं- थॅंक्स....किस लिए...??
सबनम- तुमने मुझे सही रास्ता दिखाया...मुझे अपने बच्चो के सामने शर्मिंदा होने से बचाया ..इसलिए....
मैं- देखिए आंटी...मैं पहले ही कह चुका हूँ की मैने ये सब कुछ अपने दोस्त के लिए किया था...तो थॅंक्स की बात ही नही है...
सबनम- माना...पर मुझे तो थॅंक्स बोलना ही है...
मैं- ओके..अब बोल दिया ना...अब चले...
सबनम(गर्दन हिला कर)- अभी नही...अभी तो थॅंक्स बोला ही नही...
मैं- मतलब...??
मैं आगे कुछ कहता उसके पहले ही आंटी ने मेरा मूह पकड़ कर अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए...
मैने उन्हे मना करना चाहा पर उनका जोश देख कर रुक गया और फिर उनके होंठो की गर्मी ने मुझे भी गरम कर दिया और मैं भी उन्हे किस करने लगा....
यहाँ सबनम को आंटी लिखा गया है......
मैं- सस्स्ररुउउउप्प्प...उउंम...आंटी...ये क्या...उउंम्म
आंटी- उउंम्म....सुक्रिया अदा कर रही हू...उउउंम्म...
मैं- पर ऐसे क्यो...आआअहह...
आंटी ने अपने हाथ मेरा लंड मसल दिया ...
आंटी- जबसे इसे देखा..तबसे मैं गरम हूँ बेटा....सस्स्रररुउउउप्प्प....सस्स्ररतुउउउप्प्प्प...
मैं- उउउंम्म..पर ये सही नही...उूउउंम्म...
आंटी- सस्स्रररुउउप्प्प्प....सही है..उूउउंम्म....
आख़िर मैने आंटी को अलग कर दिया...
मैं- आंटी ...मैने आपको इसी काम के लिए मना किया और आप...
आंटी- बेटा...मैं तेरे साथ ग़लत रास्ते पर नही जा सकती...नही तो आज नही तो कल मैं फिर से ग़लती कर जाउन्गी..
मैं- पर अकरम मेरा दोस्त है...
आंटी- तो दोस्त की माँ की प्यास भुझा दे...नही तो मैं फिर कोई ग़लती...
मैं(बीच मे)- ओके...पर आदत मत डालना...
आंटी- हाँ..पर कभी-2 ...??
मैं- ह्म्म..ओहक...
आंटी फिर से मेरे होंटो को चूसने लगी...