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चूतो का समुंदर



यहाँ सहर मे कामिनी के घर...

रात के हादसे के बाद कामिनी बेहोश हो गई थी...

जब उसे सुबह होश आया तो वो रात का मंज़र याद कर के फिर से डर गई...

कामिनी ने नौकरानी को आवाज़ दी...और उसकी हेल्प से रेडी होने के बाद फिर से अपनी सारी फ्रेंड्स को अर्जेंट मीटिंग के लिए बुला लिया....

थोड़ी देर बाद कामिनी की सारी फ्रेंड्स उसके रूम मे बैठी हुई थी...

काजल और सुषमा अभी भी नही आई थी. ...वो सुषमा के घर रुकी हुई थी...

कामिनी ने रात की पूरी बात सब फ्रेंड्स को बता दी...जिसे सुन कर फिर से सब परेसान हो गई...

रजनी- कामिनी...ये सब क्या हो रहा है...और बार-2 ...चलो पोलीस को बताते है...

कामिनी- पोलीस...पर वो क्या करेगे...ये इंसान थोड़े ही ना...

रिचा(बीच मे)- बस यार...ये बकवास बंद भी कर...भूत जैसी कोई चीज़ नही होती...ये किसी इंसान का ही काम है ..

कामिनी- नही रिचा...कोई इंसान ऐसे कैसे कर सकता है...

रिचा- तो तेरा मतलब है कि तुझे भूत परेसान कर रहा है..हाँ...??

कामिनी(ज़ोर से)- हाँ...वो भूत ही है...

रिचा- मुझे तो विश्वास नही होता...तू आज के जमाने मे भी ऐसा सोचती है...

रजनी- हो सकता है..कामिनी सही हो...

रिचा- रजनी तू भी ..

रजनी- देख रिचा...हमारी बहस से कोई फ़ायदा नही होने वाला...हमे सच पता करना ही होगा...

कामिनी- हाँ...रजनी सही बोल रही है ...पता लगाना ही होगा कि वो दीपा है या उसका भूत...कुछ सोचो यार...

थोड़ी देर तक सब शांत रहे..फिर कुछ सोच कर रिचा बोली...

रिचा- मेरे पास एक आइडिया है...सच पता करने का...

कामिनी- क्या..??

रिचा- अगली बार वो दिखाई दे तो तू फाइयर कर देना ..

रजनी- फाइयर...??

रिचा- हाँ....गन से गोली चलाना यार...

रजनी-वो मैं जानती हूँ...उससे क्या होगा..

रिचा- क्या होगा...उससे पता चल जायगा कि वो भूत है..या भूत की शकल मे इंसान...

कामिनी- सही कहा रिचा...एक गोली लगेगी तो सब सामने आ जायगा...वाह..क्या आइडिया है...ले चाइ पी...

कामिनी की नौकरानी चाइ ले कर आ गई थी...

चाइ पीते हुए ही काजल भी घर आ गई..पर कामिनी ने उसे कुछ नही बताया...

थोड़ी देर बाद सब फ्रेंड्स कामिनी को प्लान समझा कर अपने घर निकल गई...

और कामिनी की नौकरानी ने कामिनी को दबा खिला कर आराम करने लिटा दिया...

यहाँ सम्राट सिंग के महल पर...

मैं, अकरम और संजू के कहने पर उनके साथ महल पहुच गया था...

हमारे पहुचते ही वहाँ काम करने वाले हमे पहचान गये और आने की वजह जानने के लिए सब इकट्ठे हो गये...

नौकर- सर..आप लोग..अब क्या हुआ...

अकरम- देख भाई..तुम सब जानते हो कि यहाँ क्या हुआ था..मेरे दोस्त को मारने की कोशिस की गई थी ..याद है ना..

नौकर- जी सर...हम कैसे भूल सकते है...पहली बार इस महल मे आने वाले के साथ इस तरह का हादसा हुआ है..

अकरम(चिल्ला कर)- ये कोई हादसा नही था...किसी की साज़िश थी...और हम वही पता करने आए है...

नौकर- पर यहाँ तो कोई भी ऐसा नही है सर...वो बाहर वाला ही था...

अकरम- हो सकता है वो तुम मे से किसी के साथ मिला हो...और तुम लोग उसे छिपा रहे हो..

नौकर- सर...आप ये क्या कह रहे है...हम भला ऐसा क्यो करेगे...

अकरम- क्या पता...शायद पैसो के लिए...

नौकर- नही सर..हम इतने लालची नही है..जो ग़लत काम करे..

अकरम- वो तो हम पता ही कर लेगे...हम खुद महल की तलाशी लेगे..

नौकर- पर सर...हम मालिक की पर्मिशन के बिना ये नही कर सकते..

अकरम- तो कॉल करो..और पूछो..

नौकर- जी..अभी पूछता हूँ...

नौकर कॉल करने लगा और अकरम बाकी के नौकरों से कल की बारदात के बारे मे पूछता रहा...तभी वो नौकर वापिस आ गया ...

नौकर- सर..वो मालिक का फ़ोन नही लग रहा है...

अकरम- तो मैं क्या करूँ...हम तो तलाशी ले कर जायगे...

नौकर- पर सर..

मैं(बीच मे)- ओये..या तो हमारा साथ दो..या फिर मैं पोलीस बुला कर इस जगह को सील करवाऊ...

नौकर- नही सर..पोलीस बुलाने से अच्छा है..आप तलासी ले लो..

मैं- गुड...अब चलो...पूरा महल दिखाओ...

और हम महल की तलासी लेने निकल गये.....

तलासी लेते हुए हम सबसे पहले उस सीक्रेट रास्ते से हो कर उस जगह पहुचे ..जहाँ पर हमला हुआ था...

पर उस जगह हमे कुछ भी नही मिला...यहाँ तक कि मेरे खून के निसान भी मिटा दिए गये थे...

एक-एक कर के हमने पूरे महल की तलासी ले ली...

पर हमे ना ही वो हमलाबर मिला और ना ही ऐसा कोई सबूत जिसके आधार पर हम कह सके कि वो हमलाबर महल का ही है...

अब सिर्फ़ महल का एक कमरा बचा था...पर वहाँ पर ताला लगा हुआ था...

हमे उम्मीद थी कि इस कमरे मे ज़रूर कुछ ना कुछ मिलेगा...

अकरम(नौकर से)- ये कमरा क्यो बंद है...??

नौकर- सर..ये तो मालिक का कमरा है...

अकरम- किसी का भी हो...खोलो इसे ...

नौकर- सर..हम मालिक की आग्या के बिना नही खोल सकते ..

अकरम- आग्या हो या ना हो...हम इस कमरे मे जा कर ही रहेगे...

नौकर- पर सिर..वो मालिक...

अकरम- सोच लो...या तो खुद ताला खोल दे या हम तोड़कर अंदर जाते है...

नौकर- नही सर..तोड़ना नही...मैं चाबी(की) ले कर आता हूँ...

नौकर चाबी लेने चला गया...

अकरम- अंकित...तुझे कुछ और याद है...ऐसा जो तूने देखा हो...या कुछ सुना हो...

मैं- नही यार...मुझे जो याद था वो बता चुका..मुझे नही लगता कि वो हमलाबर यहाँ का था...शायद किसी ने भेजा हो उसे...

अकरम- ह्म्म..हो सकता है...पर तेरी किसी से क्या दुश्मनी...हाँ...

अकरम की बात का मैने कोई जवाब नही दिया...बस उसे देख कर चुप रहा...पर शायद अकरम ने मेरी आँखो मे कुछ देख लिया था...

अकरम कुछ बोलने वाला था पर तभी नौकर की ले कर आ गया...

 


कमरे को खोल कर हम अंदर आए तो देखा कि वो एक आलिसान कमरा था...

सब आराम का सामान और अयाशी का भी सामान मौजूद था कमरे मे...

एक तरफ शराब की बॉटले रखी हुई थी..जो देखते ही पता चलती थी कि काफ़ी महगी बॉटल है...

नौकर ने हमे बताया कि यहाँ उनका मलिक कभी-2 आता है और अयाशी करता है..

हमे उसकी अयाशी से कोई लेना देना नही था...हम तो बस कमरा चेक करने लगे ...

अचानक मेरी नज़र कमरे की दीवाल पर लगी कुछ फोटोस पर पड़ी...

वो फोटोस इस महल के मालिक ...उसकी फॅमिली और दोस्तो की थी...(ऐसा नौकर ने बताया..)

उन फोटोस को देखते हुए एक फोटो पर मेरी नज़र अटक गई...

मैं उस फोटो को गौर से देख कर कन्फर्म करने लगा कि जो मैं सोच रहा हूँ क्या ये वही है...तभी..

अकरम- चल भाई...यहाँ भी कुछ नही मिला...

अकरम की आवाज़ जैसे मैने सुनी ही नही...मैं और करीब से उस फोटो को चेक करने लगा...

मैं(मन मे)- ये फोटो यहाँ कैसे...क्या इस महल का मालिक इन्हे जानता है...या फिर मैं ही ग़लत देख रहा हूँ...क्या ये फोटो उन्ही की है...

अकरम मुझे देखता रहा और फिर चिल्ला कर बोला..

अकरम- अंकित...

मैं(हड़बड़ा कर)- हाँ..क्या हुआ...कुछ मिला क्या...??

अकरम- नही..कुछ नही मिला...पर तू कहाँ खो गया...

मैं(आँखे चुराते हुए)- मैं..कहीं नही ..बस फोटोस देख रहा था...

अकरम(सवालिया नज़रों से)- इनमे से किसी को जानता है क्या..कोई मर्द या औरत...??

मैं- नही..नही...मैं कैसे जानुगा...नही जानता ...

अकरम- अच्छा...तो चल फिर..

मैं , अकरम और संजू कमरे से बाहर आ गये ..पर मेरा दिमाग़ अभी भी कमरे की उस फोटो के बारे मे सोच रहा था...और शायद मेरे दोस्त मेरी खामोशी को समझ रहे थे...

पर इस समय दोनो ने कुछ नही पूछा...बस महल से बाहर आकर अपनी कार से वापिस फार्महाउस की तरफ निकल आए.....

वहाँ किसी गाओं मे...

यहाँ सोनू(सुषमा का बेटा) स्निपर हाथ मे लिए एक सुनसान जगह पर खड़ा हुआ था...

सोनू के साथ उसके बॉस का एक आदमी भी खड़ा हुआ था ..जो सोनू की देख-भाल कर रहा था ....

उसके चारों तरफ दूर-2 तक कोई नही था...सिर्फ़ जंगल ही जंगल था...

उसके सामने एक पेड़ पर टारगेट बोर्ड लगा हुआ था...जिससे सोनू निशाना लगाने की कोशिस कर रहा था....

फाइयर...सोनू ने फाइयर किया जो ट्रॅगार के बीच मे ना लग कर थोड़ा साइड मे लगा...

सोनू(अपने आप से)- शिट...साला एक भी बार सही नही लगा...

आदमी- क्या हुआ भाई..तुम तो चॅंपियन हो...लगता है नाम के चॅंपियन हो...हाहाहा...

सोनू(गुस्से मे)- बकवास बंद करो...तुम तो इतना भी नही कर सकते...थोड़ा ही साइड मे लगा...समझा...

आदमी- ओह हीरो...हमे साइड मे नही चाहिए...सीधा बीचो-बीच मारना है...समझे...

सोनू- जानता हूँ...पर ये इतना आसान नही..थोड़ा आजू-बाजू हो गया तो चल सकता है...

आदमी- नही छोरे...एक इंच भी मिस किया तो वो मर जायगा..

सोनू- क्या मतलब तुम्हारा...??

आदमी- मतलब ये कि तुझे दिल के बाजू मे गोलू मारनी है...

सोनू(शोक्ड हो कर)- पर मुझसे तो कहा था कि सिर्फ़ गोली चलानी है...ये दिल के पास क्यो..??

आदमी- वो मुझे नही पता..बॉस ने बोला है कि गोली दिल के बाजू मे लगनी चाहिए...अब सुरू हो जाओ...निशाना ठीक करो..

सोनू(गन को पटक कर)- क्या बकवास है है...मैं नही करने वाला...

आदमी- सोच ले छोरे..

सोनू- तू सोच और तेरे बॉस से बोल..वो मार सकता है...

आदमी- तू उसकी चिंता छोड़...और अपने बाप की चिंता कर...

अपने डॅड की बात सुनकर सोनू बुरी तरह डर गया...और अपनी मजबूरी पर रोने लगा...

सोनू- हे भगवान...ये क्यो कर रहे हो मेरे साथ...प्लीज़...मुझे बचा लो...

सोनू घुटनो के बल बैठकर फुट-फुट के रोने लगा....

तभी सोनू का फ़ोन बजने लगा...ये रश्मि का कॉल था...

(कॉल पर)

सोनू- ह..हेलो..

रश्मि- क्या हुआ चॅंपियन ..रो रहा है क्या ..

सोनू(आसू पोछ कर)- तू काम की बात कर ..मेरी चिंता करने का नाटक छोड़...

रश्मि- ओह...इतनी गुससा..चल तेरी गुस्सा दूर करती हूँ...एक गुड न्यूज़ है...

सोनू- गुड न्यूज़...क्या...??

रश्मि- यही कि अब तुझे गोली नही मारनी...घर आजा...

सोनू तो रश्मि की बात सुनकर बहुत खुश हो गया पर अगले ही पल किसी सोच मे पड़ गया....

रश्मि- क्या हुआ...खुश नही है...

सोनू- खुश...तुम्हे कब से फ़िक्र होने लगी मेरी खुशी की...

रश्मि- अरे...फ़िक्र तो हमेशा से है..पर पहले अपनी खुशी ...अब ज़्यादा मत सोच...पॅकिंग कर और घर आजा...

सोनू- पर क्यो...और मेरे डॅड...

रश्मि- तुम्हारे डॅड जल्दी आ जायगे...और क्यो का जवाब अभी नही मेरे पास...जल्दी ही बताउन्गी..अभी आजा...चल बाइ...

रश्मि ने अपनी बात बोल कर कॉल कट कर दी...

सोनू आगे कुछ सोचता उसके पहले ही वहाँ खड़े आदमी के पास भी मेसेज आ गया और उसने सोनू को वापिस जाने को बोल दिया....

कुछ टाइम बाद सोनू अपनी कार से वापिस अपने घर की तरफ निकल गया...अपने दिमाग़ मे कई सवाल ले कर....

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यहाँ फार्महाउस वापिस आने के बाद..

मैं, अकरम और संजू महल पर चेकिंग करने के बाद फार्महाउस आ गये...

पूरे रास्ते हमने ज़्यादा बात नही की...खास कर कि मैं ज़्यादा ही चुप रहा...

मेरे दिमाग़ मे कुछ सवाल आ गये थे...जिनकी वजह थी महल के कमरे मे लगी एक फोटो...

मैं अपनी सोच मे ही पता करने की कोशिस मे लगा हुआ था कि आख़िर ये फोटो वहाँ होने की वजह क्या है...क्या रिश्ता है सम्राट सिंग का उस सक्श से..जिसे मैने उस फोटो मे देखा था....

मेरे सारे सवालो का जवाब मेरा आदमी ही पता कर सकता था...इसलिए मैं बस फार्महाउस पहुचने का वेट कर रहा था. .

जहाँ मैं अपनी ही सोच मे खोया हुआ था...वही अकरम भी किसी सोच मे डूबा हुआ था...

मुझे नही पता कि अकरम के मन मे क्या चल रहा है...

जबकि संजू हम दोनो से अलग गाने गुनगुनाते हुए ड्राइव कर रहा था....

फार्महाउस पहुच कर मैं रेस्ट करने का बोल कर अपने रूम मे आ गया...

अकरम भी चुपचाप अपने रूम मे चला गया..बट मुझे घूरता भी गया...

रूम मे आ कर मैने जल्दी से अपने आदमी को कॉल किया...

(कॉल पर)

मैं- हेलो...

स- हाँ अंकित...मैं तुम्हे ही कॉल करने वाला था...

मैं- अच्छा...ऐसा क्या काम था...

स- अरे वो थोड़ा कामिनी के बारे मे बात थी...

मैं- हाँ बोलो..

स- आज कुछ एक्सट्रा प्लॅनिंग करनी पड़ेगी..

मैं- मतलब...??

स- हमने सोचा था कि कामिनी जल्दी ही मूह खोल देगी बट ऐसा नही हुआ...अब हमे कुछ और करना होगा...

मैं- ह्म्म..तो आप करो ना...पूछ क्यो रहे हो...मुझे तो बस रिज़ल्ट चाहिए..

स- हाँ..पर आज के प्लान मे हमे कुछ नये बंदे लाने होगे और खर्च भी बहुत होगा...

मैं- आप खर्च की टेन्षन ना लो..बस काम होना चाहिए...

आ- ह्म्म..हो जायगा...आज दोपहर को सब सेट कर दिया है..रात को कामिनी सब बक देगी...

मैं - ओके..आप जैसा चाहे करो..खर्च मैं देख लुगा..ओके..

स- ओके..अब मुझे जाना होगा...थोड़ा सेटप देख लूँ..वैसे तुम्हे कुछ काम था क्या...कॉल क्यो किया था..??

मैं- अरे वो...

इससे पहले की मैं कुछ बोलता..मेरे रूम मे रूही की एंट्री हो गई..

मैं- चलो बाद मे बात करता हूँ ..बाइ...

मैने कॉल कट कर दी..पर मैं अपने दिल की बात ना कर पाया...

मैने सोचा कि एक बार कामिनी निपट जाए फिर दूसरा काम देखते है..और फिर रूही भी आ गई थी....

मैं(कॉल कट कर के)- हाई रूही...तुम यहाँ..

रूही- मैने डिस्टर्ब किया क्या...???

मैं- नही तो...आओ..मैं फ्री ही हूँ..

रूही- तब तो सही टाइम पर आई...

और रूही ने जल्दी से गेट लॉक कर दिया और मेरे पास आ गई....

मैं- ये क्या कर रही हो...गेट क्यो बंद किया...

रूही(मुस्कुराती हुई)- ताकि हमे कोई डिस्टर्ब ना करे...

मैं- क्या मतलब..??

रूही मेरे पास आ गई और अपना हाथ मेरे सीने पर घुमाती हुई बोली...

रूही- अभी भी नही समझे..हां..

मैं(रूही का हाथ पकड़ कर)- तुम पागल हो गई हो क्या...अभी सब यही मौजूद है...और उपेर से मैं घायल हूँ..

रूही- सब जानती हूँ..इसलिए तो तुम्हारा मूड बनाने आ गई..

मैं- मेरा या तुम्हारा...

रूही(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..दोनो का...

मैं- चुप करो और गेट खोलो...

रूही- क्यो...तुम्हारा मन नही करता थोड़ा मस्ती करने का...ह्म्म

रूही का हाथ मेरे हाथ से छूट कर मेरे लंड पर पहुच गया...

मैं- रुक जा...मत कर...वरना मूड बन जायगा...

रूही- तब तो मैं मूड बना कर ही रहूगी..

मैं(रूही का हाथ हटा कर)- नही...अभी नही..

रूही- अब मैं पीछे नही हटने वाली...

और रूही ने पीछे हट कर अपनी टी-शर्ट निकाल दी...उसके तने हुए बूब्स ब्रा को फाड़ने को बेताब दिख रहे थे...

मैं- मत कर यार..गड़बड़ हो जायगी...

रूही ने जैसे मेरी बात सुनी ही नही और जल्दी से अपना लोवर निकालने लगी..

मैं- रुक यार..क्या कर...ओह्ह्ह..

रूही- अब मूड कैसा है...

रूही ब्रा-पैंटी मे मेरे सामने खड़ी हो गई और इतराते हुए मुझसे गरम करने लगी...

मैं- तू मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड है...नही तो..

रूही(अपने बूब्स को अपने हाथ से दवा कर)- तो क्या करते...

मैं- कुछ नही...अब कपड़े पहनो...सच मे कोई आ जायगा तो प्राब्लम हो जायगी...

रूही- अच्छा...और अब क्या होगा..ह्म्म..

और रूही ने अपनी ब्रा को निकाल कर बूब्स को आज़ाद कर दिया और मेरे लंड मे जान आनी सुरू हो गई ...

रूही- आओ ना..देखो..कैसे उछल रहे हो...हम्म...

मैं- तू मान जा...वरना..

रूही- वरना क्या...इसे चोट पहुचाओगे...ह्म्म

रूही अपने हाथ से अपनी पेंटी के उपर से चूत सहलाते हुए बोली..

मैं- अब बस कर यार...वरना मैं छोड़ुगा नही...

रूही- तो चाहता भी कौन है कि चोद दो..आओ ना..देखो तो..ये कितनी प्यासी है ..

रूही धीरे से अपनी पेंटी को नीचे करने लगी...और मेरा लंड फॉर्म मे आने लगा...

कि तभी गेट पर हाथ थपथपाने की आवाज़ के साथ अकरम की आवाज़ आई...

अकरम- अंकित..अंकित गेट खोल...

 
अकरम की आवाज़ सुनकर मेरा चेहरा सुर्ख पड़ने लगा और रूही की तो जैसे गान्ड ही फट गई...

अकरम- खोल ना...मुझे तुझसे अभी बात करनी है...खोल..

अकरम की आवाज़ मे गुस्सा छलक रहा था...मुझे लगा कि कही अकरम ने रूही को अंदर आते हुए तो नही देख लिया...

अकरम आवाज़ दे रहा था और रूही मुझे देख रही थी...

मुझे समझ नही आ रहा था कि क्या करे...

अकरम- अबे...सो गया क्या ...खोल ना..

मैने जल्दी से रूही को उसके कपड़े उठाने का इशारा किया और उसे बाथरूम मे पहुचा दिया...

फिर मैने अपने चेहरे को ठीक कर के गेट खोल दिया...सामने अकरम गुस्से मे खड़ा था...

मैं- क्या हुआ...तू गुस्से मे क्यों है..

अकरम- ये तुमने सही नही किया...

मैं- क्या..क्या सही नही किया...

अकरम- तू जानता है..बन मत..

मैं- मैं..मैं क्या जानता हूँ...तू बोल ना...

अकरम- मुझे तुझसे ऐसी उम्मीद नही थी...अपना खास दोस्त कहता है और फिर भी...

मैं(मन मे)- लगता है इसे सब पता चल गया....अब क्या होगा ..इसी बात का डर था मुझे....पर साली रूही है कि समझी ही नही...

अकरम- अब बोल...कोई अपने खास दोस्त के साथ ऐसा करता है...

मैं- वो ..अकरम...वो सब...पता नही कैसे...

अकरम- पता नही क्या...तुझे सब पता है...फिर भी मुझसे छिपा रहा है...

मैं- ऐसा नही है...मैं तुझसे बात करने वाला था पर कैसे करता ...तू ही बता...

अकरम- इसमे बताना क्या...जो तेरे दिल मे है वो बोल...

मैं(शोकेड)- क्या बोलू...

अकरम- यही कि तूने महल की फोटोस मे किसकी फोटो देखी जो तू खामिश रह गया और तब से उसी के बारे मे सोच रहा है...

मैं(मन मे)- ओह्ह..तो ये बात है...मतलब मैं फालतू मे डर रहा था...इसे रूही के बारे मे कुछ पता नही ...ये तो फोटो की बात कर रहा है....

अकरम- अब भी चुप...मुझ पर भरोशा नही तो बोल दे..मैं कुछ नही पूछुगा...

अकरम गुस्सा हो कर वापिस जाने को मुड़ा...तो मैने उसका हाथ पकड़ लिया...

मैं- रुक..तुझ पर पूरा भरोशा है...बोल क्या जानना चाहता है...

अकरम- तूने उस फोटो मे किसे देखा...जिसे देख कर तेरा माइंड घूम गया...और तू सोच मे डूबा है...

मैं- पर तू क्यो जानना चाहता है ये सब...

अकरम- क्योकि मुझे लगता है कि तेरे उपेर जो अटॅक हुआ है...उसका इस फोटो से कुछ लेना-देना ज़रूर है...

मैं- नही...ऐसा कुछ नही...वो सब एक हादसा है...

अकरम- झूट मत बोल...नही बताना तो रहने दे...मैं चलता हूँ..और हाँ...भरोसा नही तो दोस्त भी मत बोलना...

एक बार फिर से अकरम जाने को हुआ और मैने चिल्ला कर कहा ...

वो मेरे दादाजी की फोटो थी.......

अकरम मेरी बात सुनकर शॉक्ड हो गया...और बोला...

अकरम- तेरे दादाजी की पिक...वो भी उस महल मे...कुछ समझ नही आया...

मैं- ये समझने के लिए तुझे बहुत कुछ जानना होगा...

अकरम- तो बता ना...देख..मुझे दोस्त समझता है तो बोल...यकीन मान...तेरे लिए अपनी जान भी दे दूँगा...बोल ना ..

मैं-जानता हूँ यार..... तू मेरे साथ गार्डन मे चल...वही बात करते है...

अकरम - चल..

मैं- 1 मिनट..बाथरूम जा कर आता हूँ...

फिर मैं बाथरूम मे गया और वहाँ छिपी रूही को सब समझा कर अकरम के साथ गार्डन मे निकल गया.....

फिर मैं अकरम के साथ गार्डन मे चला गया...

कुछ देर बात करने के बाद अकरम का चेहरा परेशानियों से भर गया...

अकरम(शोक्ड हो कर)- इतनी बड़ी प्राब्लम ....और तूने मुझे कुछ भी नही बताया...

मैं- यार...मैं भी श्योर नही हूँ...तो तुझे क्या बता देता....

अकरम- पर अब तो श्योर है ना...तेरे दादाजी और उस सम्राट सिंग को ज़रूर कुछ लेना -देना है...शायद खानदानी दुश्मनी...

मैं- मुझे भी यही लगता है...पर समझ नही आता कि पता कैसे करूँ...

अकरम- क्या मतलब पता कैसे करूँ...अपने दादाजी से मिल और बात कर....

मैं- ये नही हो सकता...

अकरम- ओह...तो..तो अपने डॅड से बात कर...उन्हे ज़रूर कुछ पता होगा....

मैं- नही यार...मैं डॅड को टेन्षन नही देना चाहता....

अकरम(गुस्से से)- तो साले तू चाहता क्या है...तू कोई हीरो है जो सबकुछ अकेला संभाल लेगा....

मैं- नही..मैं कोई हीरो नही...लेकिन मैं इस मेटर को बिना डॅड को बताए सॉल्व करना चाहता हूँ...

अकरम- क्या...तू अकेला सॉल्व करेगा...हाहाहा...देख अपने आपको...मरते-2 बचा है...और..

मैं(चिल्ला कर)- तो और क्या...मर ही जाता ना....पर मैं अपने डॅड को टेन्षन नही दे सकता....बिल्कुल नही...

 


अकरम- पर क्यो...वो तेरी हेल्प ही करेगे...

मैं- नही...वो टूट जायगे...बड़ी मुस्किल से संभाला है उन्होने अपने आप को...और अब मैं उन्हे उस सब मे वापिस नही ला सकता जिस से बाहर आने मे उन्होने बहुत कुछ खो दिया...

( मैं जल्दी मे वो बोल गया जो शायद नही बोलना चाहिए था....मेरे डॅड का पास्ट बहुत भयानक था..और मैं उन्हे वापिस उस महॉल मे नही ले जाना चाहता था)

अकरम(सोचते हुए)- तू किस बारे मे बात कर रहा है...क्या हुआ था तेरे डॅड को...

मैं- वो सब छोड़...अभी टाइम नही...

अकरम- तुझे मुझ पर सच मे भरोसा नही क्या...??

मैं- प्लीज़ यार...सही टाइम आने दे ..तुझे वो भी बता दूँगा...अभी जो सामने है उसे देखना है..

अकरम ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा...

अकरम- ह्म्म..ठीक है...तो हम दोनो मिलकर सब देख लेगे...सामने जो भी ही...मैं तेरे साथ हूँ...ह्म्म

मैं- इसका तो मुझे पूरा यकीन है...

और मैने अकरम को गले लगा लिया...

मैं- अब चल...कल इस सम्राट की कुंडली देखनी है...

अकरम- ह्म्म..कल इसके गाओं मे राउंड मार कर आते है...

मैं- ह्म्म..पर याद से..ये बात...

अकरम(बीच मे)- जान भी चली जायगी तब भी किसी को नही बोलुगा...चल..

हम दोनो अंदर आए और फिर डिन्नर कर के अपने -2 रूम मे चले गये ...

रूम मे आते ही मैने अपने आदमी को कॉल किया ...उसके 3 कॉल आ चुके थे इसलिए...

(कॉल पर)

मैं- हाँ..अब बोलिए...

स- सब सेट हो गया..हम आगे बढ़ रहे है...

मैं- कोई प्राब्लम तो नही होगी ना...उसकी बेटी ..

स(बीच मे)- डोंट वरी...हमने आज दिन मे सब सोच लिया था ....सब अपनी जगह सेट है ...बस कामिनी के सोने का इंतज़ार है...

मैं- ह्म्म..तो फिर मैं गुड न्यूज़ का इंतज़ार करता हूँ ....

स- ह्म्म..रात को गुड न्यूज़ मिल जयगी...अब चलता हूँ..काम पर ...

मैं- ओके...बेस्ट ऑफ लक...

स- ह्म्म..बाइ..

बात हो गई..कॉल कट गया...अब बस गुड न्यूज़ का इंतज़ार है....तब तक क्या करे...???

चलो जब तक सारे रूम्स को चेक कर लेता हूँ ...कौन क्या कर रहा है...

अपने आप से बात करने के बाद मैने लॅपटॉप ऑन किया...और गुडनूज़ का इंतज़ार करते हुए लॅपटॉप से सबके रूम्स का जायज़ा लेने लगा ......

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यहाँ सहर मे.....

मेरा आदमी अपने साथियों को इनट्रेक्षन दे रहा था....

स- देखो...आज हमे ये काम पूरा करना ही है...चाहे जो भी हो...

फिर उसने 2 बन्दो को देख कर कहा...

स- तुम दोनो जाओ और कामिनी के घर पर नज़र रखो...

तुम दोनो का एक ही काम है...गार्ड को हॅंडल करना और हाँ...कोई भी घर मे आए या जाए...ये भी देखना है...समझे ....अब जाओ...

फिर वो अपनी नज़रे दूसरे सक्श पर करता है....

स- तुम्हे तो समझाने की ज़रूरत नही है...और ना ही पूछने की....रेडी...???

सामने वाले ने सिर हिलाते हुए थम्प्सुप करके बता दिया कि रेडी है....

स- तो अपनी उंगलियों का जादू दिखाने को तैयार हो जाओ...अपनी जगह पर पहुचो...

फिर उसने वहाँ खड़े तीसरे सक्श की तरफ नज़रे घमाई....

स- अब सब तुम पर डिपेंड करता है...आज कामयाबी मिली तो हमारा काम पूरा हो जायगा..जाओ..और काम पूरा कर के ही आना.....

सबको काम समझा कर पहुचने के बाद वो भी निकल गया....

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कामिनी के घर...आधी रात के करीब...

कामिनी अपने रूम मे निसचिंत हो कर सो रही थी....तभी उसके घर के बाहर धुआ उठा और गार्ड बेहोश हो गया....

आज फिर पिछली बार जैसा ही महॉल था...

पहले तेज हवा के चलने का शोर...फिर चारों तरफ धुआ छाना...और फिर कामिनी के रूम मे धुए की एंट्री...

कामिनी के रूम मे जैसे ही आवाज़ें बड़ी तो कामिनी की आँख खुल गई...

लेकिन आज कामिनी पहले से सतर्क थी...आवाज़ आते ही उसने अपने तकिये के नीचे रखी पिस्टल को हाथ मे ले लिया...पर डर आज भी उस भर हावी था...

कामिनी-क्क..कॉन..है...सामने आओ...

सामने से एक आवाज़ के साथ धुआ उठा और उसके बीच से दीपा ख़तनाक हसी हँसते हुए सामने आ गई...

"मैं आ गई कामिनी"

आज दीपा की आवाज़ मे एक साथ 2 आवाज़े निकल कर आ रही थी.....

कामिनी- त्त..तुम...क्यो आई हो...जाओ यहाँ से...

"आज नही...आज तो सब जान कर ही जाउन्गी...वरना...हहेहहे"

कामिनी- वरना..क्या वरना...

दीपा का चेहरा फिर गुस्से से लाल होने लगा...

"वरना...तेरी बेटी गई...हहहे..."

कामिनी- उससे पहले तू जायगी...

और कामिनी ने बेड पर बैठ कर पिस्टल दीपा की तरफ तान दी...

"तू पागल है क्या....इससे इंसान मरते है...मरे हुए नही...हहहे...."

कामिनी- जानती हूँ..और तू भी इंसान है...ये भी जानती हूँ...

"हहहे....ग़लतफहमी है तेरी...."

कामिनी- तो वो अभी दूर कर देती हूँ...

फाइयर...फाइयर...हहेहहे...फाइयर..फाइयर...हहेहहे...

फिर रूम मे गोलिया चलने और ख़तरनाक हसी की आवाज़ आती रही...

कामिनी ने पूरी पिस्टल खाली कर दी पर उसके सामने खड़ी दीपा हँसती रही...उसे कोई फ़र्क नही पड़ा...

ये देख कर कामिनी की फटी की फटी रह गई...अब उसे यकीन हो गया कि सामने कोई इंसान नही...बल्कि भूत खड़ा है....

ये सोचते ही कामिनी बुरी तरह से डर गई...तभी दीपा गुस्से से बोली...

"तूने जो करना था कर लिया...अब देख...मैं क्या करती हूँ..."

और फिर धुआ फिर से बढ़ा और दीपा गायब हो गई...

कामिनी(डरते हुए)- द्द्द...दीपा...मुझे माफ़ कर दे...प्लीज़...दीएप्प्पाअ....प्पल्लज़्ज़्ज़...

थोड़ी देर तक कामिनी हाथ जोड़ कर मिन्नते करती रही ...

थोड़ी देर बाद फिर से धुआ छाँटा और दीपा सामने आ गई...

कामिनी- दीपा...मुझे माफ़ कर दे...जाओ यहाँ से ..प्लीज़...

"मुझे बस वो वजह बता...जिसके लिए तू अंकित की फॅमिली की दुश्मन है..."

कामिनी- तुझे उससे क्या...

"तू ऐसे नही मानेगी..तो ये देख.."

इतना कहते ही दीपा के बाजू मे कामिनी की बेटी काजल आ गई...जो सोई हुई थी...

कामिनी- क्क्क..क्काजल...नही...दीपा...इसे छोड़ दे..प्लीज़....

"तो बता..वरना..."

कामिनी- प्लीज़...दीपा..छोड़ दे इसे...

"तू ऐसे नही मानेगी...तो फिर देख.."

और दीपा के बोलते ही अचानक से काजल के गले से खून निकलना सुरू हो गया...

कामिनी(रोते हुए)- प्लीज़..दीपा...मेरी बेटी को छोड़ दे...प्लीज़...

"तो बता फिर...नही तो.."

कामिनी- म्म..मैं सब बताती हूँ...मेरी बेटी को छोड़ दो..पल्लज़्ज़्ज़...

फिर दीपा ने काजल की तरफ देखा तो उसके गले से खून निकलना बंद हो गया...

"अब बोल..."

कामिनी- मैं और मेरी बेहन सिर्फ़ प्रॉपर्टी के लिए कर रही है ..

"इससे अंकित का क्या लेना देना.."

कामिनी- सब बताती हूँ...मेरी और मेरे भाई-बेहन की सारी प्रॉपर्टी असल मे अंकित के डॅड के नाम है...

"कैसे...???"

कामिनी- क्योकि ..हमारी प्रॉपर्टी अंकित के दादाजी के पास गिरबी रखी थी ....फिर क़र्ज़ ना देने की वजह से वो उनके नाम हो गई...और उन्होने आकाश के नाम कर दी ...

"तो इसमे अंकित कहाँ से आया...तू उसके पीछे क्यो है.."

कामिनी- क्योकि आकाश ने सब अंकित के नाम किया है...अगर आकाश को कुछ हुआ तो सब अंकित के नाम होगा...और अंकित ही नही रहेगा तो कोई नही पूछने वाला...

 


फिर थोड़ी देर तक रूम मे शांति रही...फिर दीपा की आवाज़ आई...

"प्रॉपर्टी के लिए तो आकाश से बात भी कर सकती थी...मारने की क्या ज़रूरत...सच बता..

कामिनी- यही सच है..और कुछ नही...

"लगता है तू ऐसे नही मानेगी...तेरी बेटी को.."

कामिनी(बीच मे)- नही..नही...बताती हूँ...

ये इसलिए ताकि आकाश की प्रॉपर्टी भी हमे मिल जाए...जो बहुत ज़्यादा है...

"हहहे...पागल है क्या...ये कैसे हो सकता है...झूट मत बोल.."

कामिनी- सच बोल रही हूँ...आकाश के मरने के बाद सब कुछ कमल का हो जायगा..

"कौन कमल...?? तेरा नौकर..."

कामिनी- हाँ...वही...

"नौकर के लिए इतना प्यार...साली झूठी...अब काजल को..."

कामिनी- वो नौकर नही...मेरा भाई है.....

"तेरा भाई...??"

कामिनी(रोते हुए)- हाँ..मेरा भाई...

"तो उसका क्या"

कामिनी- उसका...अरे आकाश और अंकित के मरते ही सारी प्रॉपर्टी कमल की हो जायगी...

"फिर झूट...सच बोल..."

कामिनी- यही सच है...वो पूरी प्रॉपर्टी कमल को मिलेगी...

"हहहे....साली..ये हो ही नही सकता..."

कामिनी- सच मे...यही सच है...

"लगता है तू नही मानेगी...अब तेरी बेटी गई...."

और फिर से तेज हवा के चलने की आवाज़ सुरू हुई और रूम मे धुआ बढ़ने लगा...पर तभी कामिनी चिल्ला कर बोली...

कामिनी- दीपा...प्लीज़...यही सच है...आकाश के मरते ही सब कमल का हो जायगा...

"अच्छा...और क्यो होगा ऐसा..."

कामिनी(चिल्ला कर)- क्योकि कमल आज़ाद का बेटा है....आकाश का भाई.......

कामिनी के बोलते ही रूम मे शांति छा गई...और कामिनी सिर झुका कर रोने लगी.....

कामिनी थोड़ी देर तक रोती रही और फिर से एक बार दीपा की गरजती हुई आवाज़ ने कामिनी को होश मे लाया....

"तेरा भाई..आकाश का भाई...कैसे..."

कामिनी- मैं और कुछ नही जानती...

"झूट....तू सच बोल..वरना..."

कामिनी- मैं अपनी बेटी की कसम खाती हूँ...मुझे सिर्फ़ इतना ही पता है....

"और तुझे ये सब बोला किसने..???"

कामिनी- दामिनी दीदी ने...

"ह्म्म...और कमल की माँ कौन है...??"

कामिनी- मुझे नही पता....दामिनी ने कहा था कि ये आज़ाद का बेटा है...इसके ज़रिए हम आज़ाद की प्रॉपर्टी हासिल करेगे. ..

" तो तूने उसे भाई की तरह क्यो नही रखा...नौकर क्यो बनाए रखा.."

कामिनी- मैने वही किया जो दामिनी ने कहा था...ये सब उनका ही प्लान है...मुझे कुछ नही मालूम...

"तो दामिनी कहाँ है...बुला उसे..."

कामिनी- नही पता...मुझे कुछ नही पता...अब मेरा पीछा छोड़ दो..प्लीज़....

"ये बात और किसी को पता ना चले ...समझी.."

कामिनी ने हाथ जोड़े और सिर नीचे किए हुए ही बोला...

कामिनी- नही चलेगा...मैं किसी को नही बोलूँगी...बस मुझे छोड़ दो...प्लीज़....

फिर से रूम मे सन्नाटा छा गया..सिर्फ़ कामिनी के रोने की आवाज़ गूँज रही थी....

थोड़ी देर बाद अचानक से रूम मे धुआ बढ़ गया...और जब धुआ छटा तो कामिनी के सामने कोई नही था...दीपा जा चुकी थी ....

जब कामिनी को लगा कि अब कोई आवाज़ नही आ रही तो उसने सिर उठा कर देखा ..तो रूम खाली था...वहाँ कोई नही था...ना धुआ और ना दीपा ..

कामिनी को फिर काजल का ख़याल आया और वो सहारा ले कर काजल के कमरे तक गई...

काजल के रूम का गेट लॉक नही था....कामिनी ने गेट खोल कर देखा तो काजल आराम से सो रही थी...

काजल को देख कर कामिनी को राहत मिली और उसने रोते हुए उपर वाले का धन्यवाद किया और वापिस रूम मे आ गई....

और थोड़ी देर तक सब कुछ सोचते हुए उसकी आँख लग गई.....

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यहाँ फार्महाउस मे.....

मैं अपने रूम मे बैठ हुआ लॅपटॉप पर सब रूम्स को चेक कर रहा था...

आज कुछ खास देखने को नही मिला था...

सरद और वसीम कही नही दिख रहे थे...शायद कही बाहर बैठ कर दारू पी रहे होंगे...

बाकी सब अपने बेड पर लेट कर सोने की तैयारी मे था...

मैने लॅपटॉप बंद किया और लेट गया...

मैं लेटा हुआ अपने आदमी के कॉल का वेट कर रहा था....

पता नही क्यों...आज मुझसे इंतज़ार बर्दास्त नही हो रहा था...

मैं जल्द से जल्द जानना चाहता था कि आख़िर कामिनी क्या राज छिपाए हुए है....

इसी टेन्षन मे मैने दूसरो के रूम मे भी ज़यादा नही देखा...और चंदा को भी गेट से लौटा दिया था...

आख़िर कार मेरे इंतज़ार की घड़ियाँ ख़त्म हुई और मेरा फ़ोन बजने लगा...

मैने एक ही रिंग मे फ़ोन पिक कर लिया...

(कॉल पर)

मैं- हाँ..क्या बताया उसने...??

स- अरे....इतनी बेताबी...रिंग बजते ही कॉल ले लिया...और हाई ना हेलो..डाइरेक्ट क्वेस्चन...

मैं- आप तो अच्छे से जानते है कि मैं क्यो बेताब हूँ..

स- ह्म..जानता हूँ...मैं भी तुम्हे बताने के लिए ही वेट कर रहा था...

मैं- अच्छा...तो बोलो..क्या बोला उसने...

स- एक काम करो...मेरे बताने से अच्छा है तुम खुद सुन लो...

मैं- क्या मतलब...मैं कैसे...ओह्ह...तो रेकॉर्ड कर लिया...

स- हाहाहा...ठीक समझे...अब तुम खुद ही सुनो...लो सुनो...

और फिर मैं कॉल पर ही वो रेकॉर्डिंग सुनने लगा...जिसमे दीपा और कामिनी के बीच हुई सारी बातें थी...

रेकॉर्डिंग आगे बढ़ती जा रही थी और उसे सुन-सुन कर मेरा माइंड भी गरम होता जा रहा था....

जैसे ही मैने कमल की असलियत सुनी तो मेरा सिर घूम गया...

मुझे यकीन ही नही हुआ कि कमल मेरे दादाजी का बेटा है...

पर मैं पूरी रेकॉर्डिंग ख़त्म होने तक सुनता रहा ...

रेकॉर्डिंग ख़त्म होते ही मेरे आदमी ने बोला...

स- ह्म्म..तो सुन लिया...कामिनी का राज..

मैं- हाँ..सुन लिया ..पर कमल की बात मुझे झूट लगी...ये कैसे हो सकता है..

स- ह्म्म..मुझे नही लगता कि कामिनी झूट बोलेगी...

मैं- हो सकता है सच हो...फिर भी कन्फर्म किए बिना मैं नही मान सकता....

स- इस बात को दो लोग ही कन्फर्म कर सकते है...एक तो तुम्हारे दादाजी और दूसरी है दामिनी....

मैं- तो देर किस बात की उस दामिनी को दबोच लो...

स- कहाँ से दबोच लूँ...उसका कुछ आता-पता ही नही...किसी को भी नही पता कि वो कहाँ है अभी...

मैं- उसका नंबर ट्रेस...

स(बीच मे)- तुम्हारे कहने से पहले ही कर लिया बट कोई फ़ायदा नही...वो नंबर बंद है...

मैं- शिट....तो अब कैसे पता करे...

स- मेरे हिसाब से थोड़ा वेट कर लेना चाहिए...

मैं- वो क्यो...??

स- वो इसलिए की अगर कामिनी ने कुछ भी छिपाया है तो वो कुछ ना कुछ हरकत ज़रूर करेगी...और उसकी हर हरकत पर हमारी नज़र है...

मैं(बीच मे)- और हो सकता है कि दामिनी को कॉंटॅक्ट करे...

स- बिल्कुल सही...इसलिए थोड़ा देखते है...तब तक तुम भी आ जाओ....

मैं- ह्म्म..मुझे कल कुछ काम है...वो निपटा कर आता हूँ..

स- ओके...तो अभी सो जाओ...ज़्यादा टेन्षन मत लेना...सच का पता जल्दी चल जायगा...हम सब देख लेगे...

मैं- आपके साथ रहते मुझे क्या टेन्षन...चलिए गुड नाइट...

स- गुड नाइट...

मैने कॉल कट कर दी....मैने अपने आदमी से तो बोल दिया कि टेन्षन नही लुगा...

पर असल मे मेरे माइंड मे टेन्षन बढ़ चुकी थी....

पहले सम्राट का पिक्चर मे आना ...फिर अकरम के साथ बात करना और अब ये बड़ा झटका कि कमल मेरे दादाजी का बेटा है...पर कैसे...???

मैं इसी सवाल के बारे मे सोचते हुए नीद की आगोश मे चला गया.....

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