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चूतो का समुंदर

अंकित के घर......

मैने रात को डिन्नर किया और रजनी आंटी को कॉल किया....

( कॉल पर )

मैं- हेलो आंटी...

रजनी- हाँ बेटा...बोलो...

मैं- आपको कुछ याद आया...

रजनी- क्या...वो फोटो के बारे मे क्या...??

मैं- जी..कुछ याद आया...

रजनी- बेटा...चेहरा तो देखा हुआ लगता है...पर एक-दो ही बार देखा होगा....तभी ठीक से याद नही आ रहा...पर मैं कोसिस कर रही हूँ...

मैं- ओके...आप ट्राइ करो...और हां...वो रफ़्तार की बीवी का..कुछ..

रजनी- आराम से बेटा....मैं जल्दी ही कुछ करूगी...असल मे, मैं कल उससे मिलने जा रही हूँ...कारूगी कुछ...ओके..

मैं- ओह..माइ स्वीट आंटी...अच्छा...कल बताना...और हाँ...फोटो का कुछ याद आए तो तुरंत फ़ोन करना...

रजनी- हाँ..बिल्कुल...चल अब सो जा...गुडनाइट

मैं- गुडनाइट आंटी...

कॉल कट होने के बाद....

रजनी(मन मे)- ये अचानक से इस फोटो के पीछे क्यो पड़ गया....आख़िर अलका ने इसके लिए ये फोटो रखी ही क्यो थी...पता करना होगा....

वहाँ आंटी सोच मे डूबी थी और यहाँ मैं...

मैं भी फोटो के बारे मे सोच रहा था..कि आख़िर मेरी मोम ने फोटो छोड़ी क्यो...क्या लेना देना है इससे मोम का...

पर अभी कोई भी जवाब नही सूझ रहा था..मेरी उम्मीद रजनी आंटी से लगी हुई थी कि वो ही कुछ बताएगी....वरना मुझे खुद ही सामना करना होगा इस सक्श का...

सोच मे डूबे हुए मुझे सोनम की मुलाक़ात याद आ गई और साथ मे याद आई वो सीडी ...

मैने जल्दी से सीडी ली और प्ले कर दी...

सीडी मे सोनू और सोनम का बनाया गया वीडियो था...जिसे देख-सुन कर मेरे रोंगटे खड़े हो गये....

जैसे -जैसे वीडियो आगे बढ़ता गया...वैसे-वैसे मेरे मन मे हलचल होने लगी....

मुझे डर..गुस्सा और प्यार का एक साथ अनुभव हो रहा था...

एक तरफ सोनू और सोनम की ईमानदारी ने मुझे उनका कायल कर दिया...और दूसरी तरफ काजल और रश्मि की गद्दारी ने मुझे गुस्से से भर दिया....

मैं(मन मे)- ओह..तो ये सब काजल करवा रही है...मुझे फसाने के लिए सोनम का सहारा ...

वैसे सोनम...मैं काजल की चाल पहले से जानता था...पर तुम्हारा यूज़ करेगी...ये पता नही था...

कोई बात नही...काजल को अपने तरीके से हॅंडल करूगा...आख़िर कामिनी की बेटी है..

और कामिनी मेरे डॅड की बहेन..तो बुआ की बेटी ही हुई ना...चलो...इसे देखते है...और सबक भी सिखाते है....

ह्म..और ये क्या...सोनू को मुझे मारने भेजा था...पर किसने...साला सोनू को ये भी नही पता....और ये रश्मि...ये भी...साली की जान ले लूँगा मैं...

मैने सोचा कि अभी सोनू और सोनम को कॉल करू पर मुझे उनकी बात याद आ गई कि उनके हर स्टेप को मॉनिटेर किया जा रहा है...

यहाँ तक कि उनके हिसाब से मेरा फ़ोन भी ट्रेस किया जा रहा था...

पर मैं जानता था..कि ये झूठ है...मेरे आदमियो मे से एक बंदा टेक्निकल एक्सपर्ट था...उसने मेरे फ़ोन मे ऐसा सॉफ़्टवेरे डाला था कि कोई उसे ट्रेस नही कर सकता ....

मैने सीडी देखने के बाद बैठे-बैठे एक प्लान बना डाला....

Quote

मैं(मन मे)- अब जल्दी ही काजल और रश्मि का गेम ख़त्म होगा...पर मेरे स्टाइल मे ...मज़े के साथ...हाहाहा...

फिर मैने सोनम को कॉल किया....

( कॉल पर )

मैं- हेलो सोनम...

सोनम- हाई...मुझे आपके ही कॉल का इंतज़ार था....

मैं- ह्म..तो फिर कल मिलो...

सोनम- हाँ बिल्कुल...बोलो कहाँ मिलना है....

मैं- ह्म...मैं अड्रेस सेंड कर दूँगा....ओके..

सोनम- ठीक..है...और कुछ...

मैं- हाँ...सोनू से बात कराओ...

सोनम- हाँ...एक मिनट...

फिर मैने सोनू से बात की और कॉल कट कर दिया...थोड़ी देर मे मैने सोनम को एक अड्रेस सेंड कर दिया...जो सहर के बाहर एक फार्महाउस का था...

काजल ने हमारी सारी बातें सुनी थी...इसलिए वो खुश थी...उसे यकीन हो गया था कि कल वो मुझे अपने जाल मे फसा लेगी...

और इस खुशी मे उसने ये बात भी माइंड नही की ...कि मैने सोनू से क्या और क्यों बात की...

मैने सोनू को बता दिया कि उसका सच मुझे पता चल गया है और अब मैं उसके डॅड को आज़ाद करने मे पूरी हेल्प करूगा...

पर मेरे प्लान को पूरा करने के लिए वहाँ कामिनी का होना भी ज़रूरी था...और कामिनी आ गई तो दामिनी खीची चली आयगी...

कल इस बात का फ़ैसला हो जायगा कि कामिनी का मेरे डॅड से क्या रिश्ता है...और इस रिश्ते मे कड़वाहट किस बात की है....

कामिनी को बुलाने का इंतज़ाम कल होगा...अभी के लिए गुड नाइट...

मैने अपने आप से कहा और सोने लगा...

सुबह जब मेरी आँख खुली तो मेघा ही मेरे गेट पर थी ...

हमने आज के दिन सिर्फ़ जिम किया और उसकी वजह थी पारूल....आज उसे भी जिम का शौक चढ़ गया था....

हालाकी मैं पारूल को समझा भी सकता था ..पर मेरा भी आज कोई खास मूड नही था मेघा के साथ कुछ हॉट करने का....

और इसकी वजह थी मेरा आज का प्लान...आज मैं कामिनी की असलियत जानने के लिए बेताब था....

हलकी कामिनी ने दीपा के भूत के सामने कबूल किया था कि कमल उसका भाई है....

और डॅड के कहने के हिसाब से कामिनी आज़ाद की बेटी है...बट डॅड को सिर्फ़ अंदाज़ा था...पक्का विश्वास नही...

पर मुझे अभी भी डाउट था...जितना मैने अपने दादाजी के बारे मे पढ़ा था या सुना था....

उस हिसाब से मेरे दादाजी अयाश तो थे...बट नाजायज़ औलाद पैदा कर दे...ऐसा नही हो सकता...

वेल...आज तो कामिनी हो या कमल...या फिर दामिनी...सब मुँह खोलेगे...और मुँह से सिर्फ़ सच ही निकलेगा....

मैने अपने आदमी को कॉल किया और उसे सब समझा दिया कि उसे क्या करना है....और रेडी हो कर निकल गया....

 
सोनम के घर........

दूसरी तरह सोनम और काजल भी मुझसे मिलने के लिए निकल रही थी...तभी उनके सामने सोनू आ गया...

सोनू- हे..हे...वेट...इतनी जल्दी मे कहाँ...??

काजल- अरे यार...थोड़ा काम है...चल रास्ता छोड़...

सोनू- हाँ पर...मैं तुम दोनो के लिए कोल्ड ड्रिंक लाया था...इसका क्या...

काजल- तो दे ना...हम जाते-जाते पी लेगे...

सोनू- अरे...यही पी लो ना...2 मिनट तो लगेगे....है ना...

सोनम- हाँ काजल ...2 मिनट ही लगेगे...चल पीले...लाओ मुझे कोक दो....

सोनू- हाँ...तेरी कॉक...और ये काजल की फेव , मॅंगो फ्लावेर...

फिर दोनो कोल्ड ड्रिंक पीने लगी और सोनू के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान उभर गई...

ड्रिंक ख़त्म कर के दोनो कार से निकल गई...

और उनके जाते ही सोनू ने अपना फ़ोन रूम मे फेका और अपनी गन ले कर बाहर निकाल गया.....

कामिनी के घर.........

कामिनी अपने रूम मे रेस्ट कर रही थी...तभी एक कॉल आया.....

( कॉल पर )

कामिनी- हेलो...कौन बोल रहा है...

सामने- एक सुभचिंतक...जिसे तुम्हारी फ़िक्र है..और तुम्हारी बेटी की भी....

कामिनी- अच्छा...पर मैं अपने सुभचिंतक का नाम जानना चाहुगी....

सामने- नाम छोड़ो...और मेरी बात ध्यान से सुनो....

कामिनी- क्या है...

सामने- अपनी बेटी से प्यार है...उसकी सलामती चाहती हो कि नही...

कामिनी- बकवास बंद करो...क्या है ये...

सामने- मैं तो आगाह कर रहा हूँ...अगर अपनी बेटी को जिंदा देखना है तो वो करो जो मैं कहता हूँ...

कामिनी- क्या...मेरी बेटी....वो सेफ है...तुम बकवास बंद करो...

मैं- ह्म..तो रूको 1 मिनट...अभी बताता हूँ.....

सामने वाले ने कॉल कट किया और थोड़ी देर मे 2 मेसेज कामिनी के सेल पर आ गये...

एक मेसेज मे काजल की पिक थी..वो बेहोश पड़ी थी और उसके सिर पर गन तनी हुई थी...

और दूसरे मसेज मे एक अड्रेस लिखा हुआ था...

कामिनी फोटो देख कर घबरा गई...पर वो कुछ करती उसके पहले ही फिर से कॉल आ गया....

कामिनी- हेलो..हेलो...कौन हो तुम..और मेरी बेटी को क्यो...क्या चाहते हो..पैसे...जो भी कहो दे दुगी..पर मेरी बेटी...

सामने- रिलॅक्स...मुझे पैसे नही चाहिए...बस दामिनी और कमल का सच जानना है...और तुम्हारा भी...

कामिनी- पर क्यो...तुम कौन हो...

सामने- वो छोड़...बस तू दामिनी और कमल के बारे मे दुनिया को बता दे...उनका मक़सद...उनकी सच्चाई...फिर तुम और तुम्हारी बेटी आज़ाद...ओके...

कामिनी- हाँ..मैं सब बोलूँगी...दामिनी के बारे मे और कमल के बारे मे भी..पर मेरे पैर मे प्लास्टर है...मैं कैसे आ पाउन्गी...

सामने- डोंट वरी....तुम्हारे घर की नौकरानी वो इंतज़ाम कर देगी...मैने उसे बोल दिया है...तुम बस ऐसा कोई सबूत ले कर आना...जिससे तुम्हारी बात सच साबित हो सके...वरना भूल जाओ अपनी बेटी...

कामिनी- सबूत...पर कैसे...मैं...हेलो...हेलो...

सामने वेल ने कॉल कट कर दी...और कामिनी रोने लगी...

कामिनी को समझ नही आ रहा था कि अब वो सबूत कहाँ से लाए...फिर उसने कुछ सोचा और बैसाखी के सहारे दूसरे रूम मे गई और वहाँ कॉवर्द की तलाशी लेने लगी...

कामिनी ने धीरे -2 पूरे रूम की तलाशी ले ली...पर निराशा ही हाथ लगी...

तभी उसे एक बात याद आई....

दामिनी- कम्मो...कभी मैं ना रहूं तो माँ की फोटो को ध्यान से देखता....तुम्हारे बहुत से काम आसान हो जाएँगे...और कई छिपे राज़ भी जान जाओगी....""

पता नही कैसे पर कामिनी का दिमाग़ आज ज़्यादा ही चल निकला...उसने अपनी माँ की फोटो को दीवाल से उतारा और वापिस अपने रूम मे आ गई...

रूम मे आ कर वो कुछ देख ही रही थी कि उसकी नौकरानी आ गई...

नौकरानी- मेडम...जाने का टाइम हो गया...या अभी नही....??

कामिनी(उदासी से)- ह्म्म्मम...हो गया....इससे बेहतर टाइम तो मेरी जिंदगी मे कभी नही आया....आज आँखे पूरी तरह खुल गई...कोई शक नही रहा....दुनियाँ की सारी तस्वीरे सामने आ गई....

नौकरानी- क्या...

कामिनी(आँख सॉफ कर के)- कुछ नही....चलो...

थोड़ी देर बाद कामिनी अपनी नौकरानी के साथ निकल गई.....

इन सब से बेख़बर दामिनी और कमल अपनी ही मस्ती मे थे...और दोनो अपने रास्ते से कामिनी और उसकी बेटी को हटाने का प्लान बना रहे थे....

पर तभी एक काल आया और दोनो को हिला कर रख दिया....

( कॉल पर )

दामिनी- हेलो ..कौन

अननोन- सुभचिंतक...

दामिनी- अच्छा...तो सुभचिंतक ने कॉल करने का कष्ट कैसे किया...जान सकती हूँ....

अननोन- आज कामिनी दुनिया को सब सच बताने वाली है..कि कमल कौन है....दामिनी क्या चाहती है...और बाकी सब कुछ...

दामिनी- क्या बकते हो...

अननोन- फटी ना....यही सच है...यकीन ना हो तो ये सुनो...

फिर वो बंदा दामिनी को रेकॉर्डिंग सुनने लगा...जो कामिनी से हुई बात की रेकॉर्डिंग थी...

दामिनी- इस कामिनी की तो...मेरे खिलाफ जाएगी...पर तुम कौन हो...और ये सब...

अननोन- स्शहीए...सवाल नही...मैने तो बस उसकी बातें सुन ली तो तुम्हे कॉल किया...वो अभी किसी जगह जा रही है...मैं अड्रेस देता हूँ..तुम और कमल भी जाओ वहाँ...शायद तुम्हारे लिए अच्छा हो...

दामिनी- हाँ ..बोलो कहाँ गई वो...

अननोन- फ़ोन रखो..अड्रेस मिल जायगा...

कॉल कट होते ही मेसेज आ गया...और मेसेज पढ़ते हुए दामिनी , कमल से बोली...

दामिनी- कमल...चल..आज इन माँ- बेटी को रास्ते से हटा कर पूरी प्रॉपर्टी अपनी करते है...चल..और गन ले लेना...

फिर दामिनी और कमल पिस्टल ले कर उस अड्रेस पर निकल गये.....

सहर के बाहर एक फार्महाउस मे.......

एक रूम मे काजल बेहोश पड़ी हुई थी....

कामिनी अपनी नौकरानी के साथ वहाँ पहुचि तो घबराई हुई अपनी बेटी को ढूँढने लगी ...

कामिनी बैसाखियो के सहारे फार्महाउस के अंदर वाले रूम मे आई तो काजल को देखते ही रोने लगी...

जैसे -तैसे वो लंगड़ाते हुए बेड तक पहुचि जिस पर काजल पड़ी हुई थी...

कामिनी- बेटी. .बेटी...उठ बेटी...मैं आ गई हूँ...तुझे कुछ नही होगा...उठ जा बेटी....

कामिनी रोते हुए चिल्लाने लगी...

कामिनी- कौन हो...और मेरी बेटी को क्या किया...सामने आओ...बेटी.....

तभी रूम मे एक आवाज़ गूजी ....

वो ठीक है...बस बेहोश है....डोंट वरी..""

जब कामिनी ने आवाज़ की तरफ देखा तो उसे एक नकाबपोस दिखाई दिया....

कामिनी- सीसी..कौन हो तुम...और मेरी बेटी को क्या किया....

वो ठीक है...बोला ना...सिर्फ़ बेहोश है....फ़िक्र मत करो...""

कामिनी- पर तुमने इसे बेहोश क्यो किया...क्या चाहते हो....

मैं तो सिर्फ़ यही चाहता हूँ कि तुम्हारी बेटी इस सब से दूर रहे...""

कामिनी को ये बात सुन कर थोड़ी राहत मिली...और उसने अपने आसू पोछ लिए...

हाँ तो...अब बताओ...सच क्या है...?? ""

कामिनी- क्या...कैसा सच...

वो सच जिससे सब अंजान है...वो सच जो तुम्हे और आकाश को जोड़ता है...वो सच जिससे तुम आकाश से नफ़रत करती हो....बोलो...सच क्या है...""

कामिनी- सच....सच तो यही है कि आकाश से मुझे नफ़रत है...और उसकी वजह है आकाश के पिता...आज़ाद....

पर आज़ाद ने ऐसा क्या किया कि तुम्हे उससे नफ़रत हो गई..और इस सब मे आकाश की क्या ग़लती....""

कामिनी- आज़ाद ने क्या किया...अरे उसने हमारा हँसता-खेलता परिवार तवाह कर दिया...उसकी वजह से हमारा बचपन नरक के समान बन गया...

ह्म्म..और आकाश...उसने क्या किया....मुझे तो ये पता है कि उसने तुम्हारी हेल्प करनी चाही थी...फिर भी तुम..""

कामिनी(बीच मे)- हेल्प...कैसी हेल्प...वो हेल्प नही...पश्चाताप था..अपने बाप की करनी का....

अच्छा...पर आज़ाद ने किया क्या था...""

कामिनी- आज़ाद ने मेरी माँ को हासिल करने के लिए धोखे से मेरे पिता का सब कुछ छीन लिया...और वापिस करने के बदले मेरी माँ को अपने बिस्तर पर सुला लिया...फिर महीनो...सालो...मेरी माँ को रखेल बना के रखे रहा ...और फिर मेरी माँ को...मार डाला...

क्या बकती हो..आज़ाद क्यो मारेगा तेरी माँ को...?? ""

कामिनी- क्योकि मेरी माँ ने उसकी औलाद को जन्म दिया था..और उसका हक़ माँग रही थी....

क्या...औलाद...कौन औलाद..""

कामिनी- कमल...वो आज़ाद का ही बेटा है...और उसकी माँ मेरी माँ है...

तुम्हे यकीन है...?? ""

कामिनी - हाँ..यकीन था...आज तक यकीन था...पर अब नही....

आज तक...मतलब अब नही...पर कैसे.. ""

कामिनी- आज कुछ राज़ मेरे सामने आ गये...जिनसे मैं अब तक अंजान थी...पर अब मैं सब जान गई हूँ...सब कुछ....

तो अब क्या जानती हो....बोलो...""

कामिनी- यही कि सारी ग़लती मेरी माँ और मेरी बेहन दामिनी की है...और हाँ..कमल मेरी माँ की कोख से ही पैदा हुआ...और वो आज़ाद का ही बेटा है....""

नही..मैं नही मानता...सच बताओ.... कमल है कौन....किसका बेटा है...कौन है उसका बाप.....""

 
तभी रूम मे एक तीसरी आवाज़ आई...ये दामिनी की आवाज़ थी...

दामिनी- मैं बताती हूँ...कि कमल का बाप कौन है...

कामिनी(चौंक कर)- दीदी...तुम यहाँ...???

दामिनी- हाँ मेरी बेहन...या कहूँ की कमीनी बेहन...मैं यहाँ...

कामिनी- ये क्या बोल रही हो दी..

दामिनी- चुप कर...साली तू यहाँ वो सच बताने चली आई जिसको मैं सालो से छिपाए हुए हूँ...तू दुनिया को बताएगी कि कमल हमारी माँ की अयाशी का नतीजा है..हां...

कामिनी- जो सच है वो सच है...इसमे छुपाना क्या...

दामिनी- छुपाना है...जब तक की आज़ाद की प्रॉपर्टी कमल के नाम ना हो जाए और आज़ाद की फॅमिली मिट ना जाए...समझी...

कामिनी- पर दी...अगर ग़लती हमारी माँ की है तो आज़ाद से नफ़रत क्यो...क्या बिगाड़ा आज़ाद ने....

दामिनी- आज़ाद ने...अरे पगली...आज़ाद ने ही वो हालात पैदा किए...जिसकी वजह से हमारी माँ को ये बच्चा हुआ....उसी की वजह से हमारा बचपन खराब हुआ...हम अनाथ हो गये थे...और मैं..मैं तो रंडी ही बन गई थी...समझी...

नकाबपोस दोनो की बातें बड़ी देर से सुन रहा था ...पर अब नही रुक पाया...

खामोश....चुप रहो दोनो....मैने तुम्हे यहाँ आपस मे बहस करने नही बुलाया..."""

कामिनी- क्या...इसे तुमने बुलाया....

हाँ...क्योकि आज मे सारी सच्चाई जानना चाहता था....कि आख़िर ये कमल आया कहाँ से...और इस नफ़रत की शुरुआत कहाँ से हुई...""

दामिनी- पर क्यो...तुम होते कौन हो ये जानने वाले...हो कौन तुम..

मैं....मैं ही सब कुछ हूँ...ये देखो..""

नकाबपोस ने अपना नकाब हटाया तो उसे देख कर सबके मुँह खुले रह गये...

दामिनी- त्त्त..तुम...तुमने हम सब को यहाँ....

कामिनी- अंकित ..तुम हो इस सब के पीछे...

मैं- ह्म्म्मि..चोंको मत...ये जो भी हो रहा है या जो भी हुआ है....उस सबके पीछे मैं ही हूँ...चाहे कामिनी का आक्सिडेंट हो या दीपा का भूत ...सब के पीछे मैं ही था...और आज मैं ये लूका-छिपी का खेल ख़त्म करने आया हूँ...गेम ओवर...

दामिनी- नही बच्चे...खेल तो ख़त्म होगा...पर सिर्फ़ तुम्हारा...और इन माँ-बेटी का भी....

कामिनी- दीदी...आप हमे भी...

दामिनी- क्या दीदी...तू साली यहाँ हमारी पोल खोलने चली आई...हमे दुनिया के सामने नंगा करना चाहती थी ना...अब देख मैं तुझे और तेरी बेटी को दुनिया से ही उठा देती हूँ...और तू...अंकित...बड़ा स्मार्ट है ना...पर आज कोई स्मार्टनेस काम नही आयगी...तू भी इनके साथ उपेर जाएगा...

मैं- अच्छा...पर उससे पहले...

मैं आगे बोल ही नही पाया क्योकि कमल ने पिस्टल निकाल कर मुझ पर तान दी थी...

कमल- वही खड़ा रह..एक कदम भी बढ़ाया तो भेजा उड़ा दूँगा...

मैं- ओहक..मैं यही हूँ...

दामिनी- ह्म्म..तो अब बोल..क्या जानना है तुझे....मैं सब बताउन्गी...वो भी सच-सच...आख़िर मरने वाले की अंतिम इक्षा तो पूरी करनी ही होगी ना...

मैं- हाँ बिल्कुल...मैं भी सच जान कर ही मरना पसंद करूगा...कम से कम तसल्ली से तो मरूगा...

दामिनी- हहहे....सच मे ...आज़ाद का ही पोता है...मरने की कगार पर भी अकड़ कम नही हुई...हाँ..

मैं- अकड़ तो थी और मरने तक रहेगी...तू ये छोड़...और बता कि तू किस लिए ये सब कर रही थी...क्या मक़सद है तेरा और ये सब शुरू कहाँ से हुआ...मुझे सब जानना है...

दामिनी- ओह माँ..इतने सवाल...कोई नही...सुन कर ही मरना है तो ठीक....सब बताती हूँ...सुन...

मेरे घर मे 5 लोग थे...मेरे माँ-बाप और हम 3 बहने....

सबसे बड़ी मैं फिर कामिनी और सबसे छोटी गुड्डी....

हमारे डॅड का एक छोटा सा पर अच्छा -ख़ासा बिज़्नेस था...एक दुकान थी...और हमारे पास एक शानदार कोठी भी थी....जिसमे हम रहते थे....कुल मिला कर हम सबकी लाइफ मस्त चल रही थी...

पर एक दिन अचानक ...एक घटना ने हमारी लाइफ बदल के रख दी...

गुड्डी अचानक गिर कर बेहोश हो गई...और जब उसको हॉस्पिटल के गये तो डॉक्टर ने बताया कि उसका दिल इंफकटेड है....और काफ़ी कमजोर भी....

जब डॅड ने इलाज के बारे मे पूछा तो डॉक्टर ने काफ़ी मोटी रकम मागी...

दाद ने गुड्डी को बचाने के लिए अपनी दुकान को बेच दिया....और हमारी कोठी भी गिरबी रख दी....

गुड्डी का इलाज तो हो गया पर डॉक्टर ने हिदायत दी कि गुड्डी को कोई भी सदमा ना पहुचे...वरना जान भी जा सकती है...

दूसरी तरफ डॅड का बिज़्नेस भी नही रहा...तो हमारी लाइफ मे प्राब्लम शुरू हो गई...

तभी डॅड तुम्हारे दादाजी के पास गये...क्योकि वो दोनो पहचान के थे...इसलिए आज़ाद ने मेरे डॅड की मदद की...उन्हे नये बिज़्नेस के लिए पैसे दिए...और कोठी भी छुड़वा दी....

पर बदले मे हमारी कोठी खुद के पास गिरबी रख ली.....

डॅड ने नया बिज़्नेस शुरू किया...पर वो भी नही चला....

डॅड ने एक बार फिर से आज़ाद से हेल्प मागी...और आज़ाद ने की भी...पर बदले मे हमारी पुस्तैनि जयजाद भी गिरबी रख ली...मतलब हमारे खेत और बाग....

डॅड ने फिर से कोसिस की पर काम नही बना...और किस्मत ने उन्हे रास्ते पे ला खड़ा किया...अब हमारे पास कुछ भी अपना नही था....

डॅड की ये हालत मोम से देखी जा रही थी...इसलिए मोम आज़ाद से बात करने गई...

जब मोम ने आज़ाद से हेल्प की बात की तो उसने बदले मे कुछ देने को कहा...

मोम को पता था कि आज़ाद अयाश किस्म का इंसान है....ये बात खुद डॅड ने मोम को बताई थी...

आज़ाद ने मोम के सामने अपनी शर्त रख दी...वो मोम को रखेल बना कर रखना चाहता था...

मोम दिखने मे मस्त थी और इस वजह से वो आज़ाद को भा गई थी......

मोम ने भी अपने परिवार की खातिर आज़ाद की बात मान ली...

आज़ाद ने भी मोम की जवानी के बदले डॅड को काम दे दिया....और मोम की जवानी लूटने लगा...

ये सब मेरे डॅड से छुप कर ही होता था...क्योकि आज़ाद ने डॅड को दूसरे गाओं भेज दिया था...

डॅड वहाँ काम करते और आज़ाद मेरी मोम की जवानी लूट ता....

कामिनी को भी मोम ने अपनी भाई के घर भेज दिया था...आगे की पढ़ाई करने.....घर मैं सिर्फ़ मैं , मोम और गुड्डी ही रहते थे ज़्यादातर....

फिर एक दिन मेरी नज़र मे आज़ाद और डॅड का रिश्ता आ गया...मैने मोम से बात की तो मोम ने मुझे सारी बात बता दी...जो अब तक हम बहनो को पता ना थी...

मैने भी हालात को समझ कर चुप रहना ठीक समझा....

पर एक ग़लती कर दी...मैं डेली मोम और आज़ाद की चुदाई देखने लगी...छिप-छिप कर....

मुझे भी इन सब मे मज़ा आता था...मैं बड़ी हो रही थी और मेरा मन भी चुदाई के लिए करने लगा था...

एक दिन आज़ाद आए और मोम किसी काम से पड़ोस मे गई थी...

आज़ाद को देखते ही मुझे चुदाई याद आ गई और मेरा मन चुदाई को होने लगा.....

 


आज़ाद तो खेला हुआ बंदा था...वो ये समझ गया और अपने पास बुला कर मुझसे बात करने लगा...

बस...बाते करते हुए मैं उसकी गोद मैं बैठ गई और बिना कुछ बोले ही अपनी कमसिन जवानी उसके नाम कर दी..

उस दिन मोम के आने तक आज़ाद ने मुझे बच्ची से औरत बना दिया....

फिर तो जब भी मौका मिला आज़ाद ने मुझे जी भर कर चोदा...

एक दिन मोम ने हमे देख लिया पर कुछ नही कहा...कहती भी तो कैसे हम तो एक ही काम कर रहे थे....

फिर तो आज़ाद की लौटरी लग गई...उसने हम माँ-बेटी को रगड़ कर चोदा...

पर जब मेरी माँ के पेट मे आज़ाद का बच्चा आया तो आज़ाद भड़क गया ...उसने हमे जॅलील करने की धमकी दी....

हमारे पास चुप रहने के अलावा कोई रास्ता नही था...पर प्राब्लम थी माँ के पेट मे पल रहे बच्चे की...

मोम ने तय किया कि वो यहाँ से दूर जा कर बच्चे को जन्म देगी...क्योकि कोई भी औरत अपनी खोख को उजाड़ नही सकती....

पर जब तक वो बच्चा दुनिया मे आता उससे पहले ही हमारे डॅड की मौत हो गई....वो एक आक्सिडेंट का शिकार हो गये...

इस सब के बाद आज़ाद ने हमारे पास आना छोड़ दिया....पर जब मेरी मोम ने कमल को जन्म दिया तो आज़ाद आग बबुला हो गया...

उसने घर आकर मेरी मोम को मारा और बच्चे का पूछा...पर मोम ने मुँह नही खोला...उन्होने बच्चे को नौकर के साथ कही भेज दिया था...

आज़ाद ने मोम को बाँध दिया और मोम को तड़पाने के लिए उसके सामने ही मुझे रंडी की तरह चोदा....

आज़ाद ने ये भी बताया कि मेरे डॅड आक्सिडेंट मे नही मरे...उन्हे हमारे बारे मे सब पता चल गया था तो कार मे अट्क से आसानी से मरे....

मोम को ये सुन कर दुख हुआ पर मोम ने मुँह नही खोला...लेकिन ये सब मेरी गुड्डी ने देख लिया और वो वही पर गिर कर मर गई...

इस बात का पता हमे तब चला जब आज़ाद हमे धमका कर घर से निकल गया....

जब हमने गुड्डी को देखा तो वो हमे छोड़ कर जा चुकी थी...

एक तरफ डॅड की न्यूज़ और दूसरी तरफ गुड्डी की लाश...और वजह एक ही थी...हमारे नाजायज़ संबंध...

मैं इस सब को सह पाती कि मोम ने भी जहर पी लिया...वो खुद को गुनहगार मान रही थी...

और मोम मरते-मरते मुझे कमल और कामिनी की ज़िम्मेदारी दे गई...

कामिनी उस टाइम रिलेटिव के घर पर थी और कमल हमारे नौकर के पास...

मैने दोनो को लिया और आज़ाद से मिली...पर आज़ाद ने हमे पहचानने से मना कर दिया...

बाद मे अकेले मे आकर आज़ाद ने हमे हमारी प्रॉपर्टी दे दी ...पर कमल को अपना नाम नही दिया...

और हमे गाओं छोड़ने को बोल गया...

आज़ाद की पॉवेर के सामने मैं क्या करती...इसलिए वहाँ से दूसरे गाओं मे आ गई...जहाँ हमारी पुस्तैनि प्रॉपर्टी थी...

बाद मे मुझे पता चला कि ये सब प्रॉपर्टी आकाश के नाम है...हमारे नही...हमे तो बस यूज़ करने दी गई है...

तब मैने कसम खाई कि एक दिन कमल को उसका हक़ दिलाउन्गी और आज़ाद की फॅमिली को मिटा दूगी...जैसे मेरी फॅमिली मिट गई....

और तबसे ले कर आज तक मैं सिर्फ़ आज़ाद की फॅमिली को मिटाने के लिए ही जी रही हूँ....

दामिनी की कहानी ख़त्म होते ही कामिनी और दामिनी की आँखो से आँसू टपकने लगे...कमल भी गुस्से मे आ गया था और मुझे घूर कर दाँत पीस रहा था....

तभी मैने तालियाँ बजाना शुरू कर दिया....

दामिनी(गुस्से मे)- ये क्या हरक़त है...

मैं(ताली बजाते हुए)- सुपर्ब स्टोरी...कहानी को क्या मोड़ा है...बिल्कुल अपने हिसाब से...ह्म्म्म...

दामिनी- क्या मतलब...ये कोई स्टोरी नही...हक़ीक़त है...

मैं- ह्म्म्मा...हक़ीक़त...हाँ...है तो...पर झूठी है...सच नही...

दामिनी- तो तुम कहना चाहते हो कि ये सब झूठ है...मेरे माँ-बाप ..मेरी गुड्डी की मौत...सब झूठ है...

मैं- नही...मौत तो सही है...पर कहानी झूठी है...

दामिनी- तुम्हारे दादाजी का नाम है...इसलिए...सही है...तुम उनके खिलाफ कुछ ग़लत कैसे सुनोगे...

मैं- नही...ऐसा कुछ नही...मैं बस सच सुनना चाहता हूँ...

दामिनी- यही सच है..पूरा सच...

मैं- अओउंम....तो ...कमला...यही नाम था तेरी मोम का..हाँ...

कमला नाम सुनते ही दामिनी, कामिनी और कमल का मुँह खुला रह गया...

दामिनी- तुम्हे कैसे...मैने तो नाम बोला नही...

मैं(मुस्कुरा कर)- तुमने वही बोला जो तुम चाहती थी...पर मैं बताउन्गा की सच क्या है...बताऊ ...

दामिनी- क्क़..क्या मतलब...??

मैं- मतलब ये कि मैं कमला की कहानी पूरी तरह से जानता हूँ...

कामिनी मेरी बात सुन कर चोन्कि...

कामिनी- तो तुम कहना चाहते हो कि दीदी झूठ कह रही है...

मैं- मैं कुछ कहूँ उसके पहले तुम ये कहानी सुनो जो मैं सुना रहा हूँ.......खुद समझ जाओगी कि सच क्या है और झूठ क्या....

मेरी बात सुन कर कामिनी मेरा मुँह ताकते हुए मेरे कहने का इंतज़ार करने लगी..जबकि दामिनी की आँखो मे एक अजीब सी उलझन दिखाई देने लगी....

मैं- तो अब मैं बताता हूँ कि कमला कौन थी और उसके साथ क्या और कैसे हुआ...

अब सबको इंतज़ार था मेरी कहानी और मेरी ज़ुबानी का.....

मैने एक बार कामिनी को देखा और फिर आगे बढ़ कर दामिनी को घूर्ने लगा....

मेरे आगे बढ़ते ही कमल ने फिर से हरक़त की और पिस्टल दिखा कर मुझे चेताया कि कोई होशियारी नही...

मैने भी हाथ उपेर कर के बोल दिया कि नही...मैं कुछ नही करने वाला ....सिर्फ़ सच बोलने जा रहा हूँ....

मैने फिर से दामिनी की आँखो मे झाँका और बोलना शुरू किया.....

तुमने जो भी बोला उसमे काफ़ी कुछ सच था...जैसे तुम्हारी छोटी बेहन की बीमारी...तुम्हारे डॅड की शॉप बिकना...और तुम्हारी कोठी और सारी प्रॉपर्टी का मेरे दादाजी के पास गिरवी रखा जाना....

अब इसके आगे असल मे क्या हुआ था...ये मैं बताता हूँ....

जब तुम्हारे डॅड का बिज़्नेस दुबारा डूब गया तो वो फिर से मेरे दादाजी के पास आए...और पैसे माँगने के लिए....

दादाजी ने उन्हे पैसे तो नही दिए लेकिन अपनी फॅक्टरी मे काम पर लगा दिया...सिर्फ़ पहचान की वजह से...

और उनकी हालत देख कर ये भी बोल दिया कि उन्हे कोठी छोड़ने की ज़रूरत नही...आराम से पैसे जोड़ो और कर्ज़ा चुका देना...तब तक कोठी गिरवी ही रहेगी लेकिन उसमे रहोगे तुम ही...

तुम्हारे डॅड इस बात से बेहद खुश थे...पर वो ये भी जानते थे कि कर्ज़ा चुकाना बड़ा मुस्किल होगा...क्योकि कर्ज़ा बहुत हो गया था...

तुम्हारे डॅड की परेशानी तुम्हारी मोम के सामने थी...और इस वजह से वो भी परेशान रहने लगी...

क्योकि पैसे बचाने थे...तो खर्च कम करने थे....

इसी लिए तुम्हारे डॅड ने कामिनी को अपने रिलेटिव के घर भेज दिया..आगे पढ़ने....

पर इस तरह की लाइफ जीने की तुम्हारी मोम को आदत नही थी...उन्हे परेशानी होने लगी...

और तभी उन्हे पता चला कि आज़ाद एक अयाश किस्म के इंसान है...और औरत उनकी कमज़ोरी...

बस...फिर तुम्हारी माँ ने वो कदम उठाने का सोचा जो शायद कोई इज़्ज़तदार औरत को गवारा नही होता....

उन्होने सोचा कि इस कदम से उनके पति और बच्चो को आराम की लाइफ मिलेगी और साथ मे उनके पति की चिंताएँ भी दूर हो जाएगी...

यही सोच कर वो इस ग़लत रास्ते पर बड़ी...उन्होने खुद आज़ाद से जाकर उनको ऑफर दिया...

और आज़ाद तो ऐसे ऑफर की तलाश मे रहता ही था...उपेर से तुम्हारी मोम का गदराया जिस्म...जिसे देख कर कोई भी लट्तू हो जाए...

बस ..फिर क्या था...तुम्हारी मोम आज़ाद की फेव रखेल बन गई....और रोजाना चुदाई करवाने लगी....

सब अच्छा जा रहा था...सब खुश थे...पर एक प्राब्लम हो गई...

तुम्हारी मोम आज़ाद की चुदाई की कायल हो गई और बस उन्ही से चुदने की फिराक़ मे रहने लगी...यहाँ तक कि तुम्हारे डॅड की चुदाई भी उन्हे नही भाती थी....

नतीजा ये हुआ कि तुम्हारी मोम ने आज़ाद से बोल कर अपने पति को दूर किसी गाओं मे भिजवा दिया....

उसके बाद रास्ता सॉफ...दिन -रात , जब भी मूड हुआ...तुम्हारी मोम चुदाई के मज़े लेने लगी...

और फिर एक दिन तुमने उन्हे रंगे हाथो पकड़ लिया...तुमने अपनी मोम को धमकी भी दी...

पर तुम्हारी मोम ने तुम्हे समझा कर अपने साथ मिला लिया...और आज़ाद से सब कुछ वापिस करने के बदले तुम्हे दाव पर लगा दिया....

उसके बाद आज़ाद ने तुम दोनो को जी भर कर भोगा....और सब वापिस भी कर दिया...

तुम दोनो माँ-बेटी की मस्ती जारी रही...पर एक दिन तुम दोनो की दमदार चुदाई के वक़्त गुड्डी वहाँ आ गई...उसने तुम दोनो को चीखते देखा और डर गई...

क्योकि उसका दिल कमजोर था...तो उसे तभी अटॅक आ गया...बेचारी कुछ बोल नही पाई और मर गई...

जब आज़ाद को इस सच्चाई का पता चला तो आज़ाद ने तुम लोगो से दूरी बना ली...वो खुद को इस मौत के लिए कही ना कही गुनहगार समझते थे...

सब कुछ ख़त्म हो गया था....पर एक दिन...

तुम्हारी मोम प्रेगञेन्ट हुई...और उन्होने उस बच्चे को आज़ाद का बच्चा बताया.....

पर आज़ाद नही माने...वो जानते थे कि उन्होने हमेशा साबधानी रखी तो बच्चा कैसे हुआ...

इस बात पर आज़ाद और तुम्हारी मोम की काफ़ी बहस हुई...

और जिस समय ये बहस हो रही थी...उसी समय तुम्हारे डॅड वहाँ पहुच गये और सब सुन लिया...

वो तो अपनी बीवी की खुशख़बरी सुन कर मिलने आए थे...पर असलियत सामने आते ही वो टूट गये....

और तुम्हारे डॅड एक लेटर छोड़ कर घर से निकल गये....

वो इज़्ज़तदार आदमी थे...और ये सब बर्दास्त नही कर पाए...

और उन्होने अपनी गाड़ी एक ट्रक से भिड़ा दी..और अपने आप को मार दिया...

तुम्हारे डॅड का वो लेटर तुम्हारी मोम ने तब पढ़ा...जब कमल जन्म ले चुका था....

और उसे पढ़ते ही तुम्हारी मोम ने खुद को मार लिया....क्योकि उसी दिन तुम्हारी मोम को ये पता चला कि उनके पति और उनकी गुड्डी की मौत की ज़िम्मेदार खुद वही है....

कामिनी...तुम सोच रही होगी कि गुड्डी की मौत तो काफ़ी पहले हो चुकी थी..और तुम्हारे डॅड की मौत भी....तो तुम्हारी मोम ने इतना वेट क्यो किया....क्या सिर्फ़ बच्चे को जन्म देने के लिए...

तो जवाब है नही...असल मे गुड्डी की मौत के वक़्त सबसे पहले दामिनी ने उसे देखा...

उस जगह गुड्डी को देखते ही दामिनी सब समझ गई कि गुड्डी क्या देख कर मरी है...

दामिनी ने अपनी मोम से छिपा कर गुड्डी को रूम मे डाल दिया...क्योकि दामिनी जानती थी कि असलियत जान कर उसकी मोम टूट जाएगी...

इससे तुम्हारी मोम ने गुड्डी की मौत को स्वाभाविक समझा...और टूटी नही...

अब रही लेटर की बात ..तो वो भी दामिनी के हत्थे चढ़ गया था ...उसे पता था कि डॅड की मौत की वजह जान कर मोम मार जाएगी...

पर दामिनी चाहती थी कि उसकी माँ बच्चे को पैदा करे जिससे उसे आज़ाद की प्रॉपर्टी मिल जाए....

इसलिए दामिनी ने इंतज़ार किया और कमल के जन्म के बाद अपनी मोम को आराम से सब बता दिया ...

 
दामिनी ने सोचा था कि बच्चे की वजह से उसकी मोम संभाल जाएगी...पर दामिनी ग़लत थी...उसकी मोम ने सच जान कर अपने आप को मिटा दिया ....

फिर दामिनी ने मेरे दादाजी से कमल का हक़ माँगा...पर दादाजी माने ही नही कि कमल उनका बेटा है...और उन्होने दामिनी को जाने को कहा...और हाँ...उसकी सारी प्रॉपर्टी भी वापिस दे दी...

दामिनी भी मान गई...उसे सब वापिस मिल गया था...

पर कुछ दिन बाद ही दादाजी को एक आदमी खेत मे पड़ा मिला ..जो मर ही रहा था...किसी ने उसको चाकू से मारा था...

उस आदमी ने बताया कि कमल आज़ाद का बेटा नही...बल्कि उसका बेटा है...

वो आदमी था दामिनी का नौकर चंदू.....

अब चंदू कहाँ से आया...ये भी सुन लो...

जब गुड्डी की मौत हुई तो आज़ाद ने तुम्हारे घर आना बंद कर दिया...तुम्हारी मोम ने बहुत कोसिस की पर आज़ाद नही माने ...

पर तुम्हारी मोम को चुदाई की लत लग गई थी...और दामिनी को भी...

और इन दोनो ने अपने नौकर के रूप मे अपनी हवस मिटाने का रास्ता ढूँढ लिया...

पर तुम्हारी मोम आज़ाद से गुस्सा थी...और उन्होने एक ख़तरनाक प्लान बना लिया...जिससे आज़ाद को वापिस हासिल कर सके और साथ मे उसकी दौलत को भी...

तो फ़ैसला ये हुआ कि चंदू तुम्हारी माँ को प्रेगञेन्ट करेगा और उसका बाप आज़ाद को कहा जायगा ....

चंदू ने तो काम कर दिया...पर वो अंजान था तुम दोनो के मंसूबो से...उसे तो पता ही नही था कि ये उसका बेटा है....

फिर जब तुम्हारी मोम ख़त्म हो गई और दामिनी कमल के साथ अकेली थी...तब दामिनी ने नशे मे धुत चुदाई करते वक़्त चंदू को सच बोल दिया...

चंदू भी सबकी तरह आज़ाद को मानता था...उसलिए उसने आज़ाद को सच बताना ठीक समझा...

पर इस बात की दामिनी को भनक लग गई और उसने कुछ आदमियों को पैसे देकर चंदू को मारने भेज दिया...

आदमी चंदू को मार ही रहे थे कि आज़ाद वहाँ दिख गया...तो आदमी भाग निकले...

यहाँ चंदू ने मरते हुए आज़ाद को सच बताया..और वहाँ दामिनी के आदमियों ने दामिनी को बोल दिया कि शायद आज़ाद को सब सच पता चल चुका है...

आज़ाद गुस्से मे दामिनी की कोठी पहुचा...पर उसके पहले ही दामिनी कमल को ले कर निकल गई थी...

और वहाँ से भाग कर अपने पुस्तैनि गाओं आ गई...और कामिनी को भी बुला लिया...और शान के साथ रहने लगी...

आज़ाद ने भी दामिनी का पीछा नही किया...उन्होने सोचा कि चलो...जाने दो...बच्ची से क्या दुश्मनी...

पर दामिनी ने मन मे तय कर लिया की आज़ाद की फॅमिली को बर्बाद कर देगी...जैसे उसकी फैमिली बर्बाद हुई...और कमल के सहारे आज़ाद का सब कुछ हासिल कर लेगी...

कमल के सहारे इसलिए ..क्योकि दामिनी ने गाओं मे खबर फैलवा दी थी कि आज़ाद का एक बेटा कमला की कोख से पैदा हुआ है...इसलिए कमल का साथ ज़रूरी था...

तो ये थी पूरी कहानी....सच...सच...और पूरा सच....अब क्या बोलती हो दामिनी...

मेरी बात ख़त्म होते ही दामिनी और कमल एक -दूसरे को ऐसे देखने लगे जैसे दोनो को बिजली का झटका लगा हो...

पर कुछ ही पल मे दामिनी उसी तरह से तालियाँ बजाने लगी जैसे कुछ देर पहले मैने बजाई थी...

दामिनी- मान गये...इतनी सी उमर मे इतना दिमाग़...क्या सोच है....तुम्हे तो कहानीकार होना चाहिए...क्या कहानी बनाई ...अपने दादाजी को तो मासूम ही बना दिया...हा...

मैं(मुस्कुरा कर)- मुझे ऐसी ही उम्मीद थी तुमसे...पर अफ़सोस ...ये कहानी नही...सच्चाई है...कहानी तो तुमने सुनाई थी...

दामिनी- अच्छा....मेरा सच कहानी और तुम्हारी कहानी सच...वा बेटा...बड़े होशियार हो...

मैं- ह्म्म..कोई भी सच...सच तभी माना जाता है...जब कोई सबूत हो...तो बताओ...तुम्हारे पास क्या सबूत है...

मेरी बात सुन कर दामिनी की आँखो मे एक बार फिर से परेशानी के भाव आ गये...

दामिनी- सबूत...कैसा सबूत...ये कमल...ये है जीता जागता सबूत ...और मेरी गुड्डी की मौत..मेरे माँ-बाप की मौत...

मैं(बीच मे)- उन सब मौतो की ज़िम्मेदार तुम्हारी माँ और तुम हो...और हाँ...कमल...ये सच मे सबसे बड़ा सबूत है...पर ये सबूत तुम्हे ग़लत साबित करेगा....समझी...

दामिनी- मातब...तो तुम्हारे पास सबूत है...दिखाओ तो...या ये भी एक कहानी ही है...ह्म्म..

मैं- नही...बिना सबूत के मैं कुछ नही बोलता...अगर ऐसा नही होता तो तुम दोनो बहनो का मक़सद जानने के बाद मैं रुकता नही...कब का ठोक देता...पर मैं सबूत ढूँढ रहा था..जिससे मुझे सच्चाई पता चले....और आज भी मैं जो कुछ बोल रहा हूँ वो सच जानने के बाद ही बोला...सबूत के साथ...

दामिनी- बकवास बंद कर...

कमल- साले ..चुप रह वरना अभी ठोक दूँगा...

 
friends update kal se

 
कमल ने फिर से मुझे गन दिखाते हुए धमकाया...

कामिनी(बीच मे)- चुप रहो..दीदी...मुझे बात करने दो...अंकित...क्या सबूत है तुम्हारे पास..जो तुम्हारी बात को सच साबित करे...

दामिनी- कम्मो ये बकवास...

कामिनी- मैने कहा ना ....चुप रहो....अंकित...तुम बोलो..क्या सबूत है...

दामिनी(मेरी तरफ बढ़ कर)- हाँ ..बोल तो..क्या सबूत है तेरे पास...हाँ..

मैं- एक नाम...नही..असल मे दो नाम...और उनमे से एक है बहादुर...क्यो याद आया....

दामिनी(सकपका कर)- मुझे....नही तो..मुझे कुछ नही पता...कौन है ये...

मैं- क्या तुम भी...इतने बार मेरे दादाजी के साथ चुदाई की और बहादुर को नही जानती....

कामिनी- कौन है ये बहादुर....

मैं- ये वो इंसान है जो दादाजी के साथ हमेशा रहता था....तब भी जब वो तुम्हारे घर रासलीला मनाने जाते थे....वो ड्राइवर कम बॉडी था दादाजी का....पूछो दामिनी से...ये जानती है उसे. ..और बहादुर भी इसे अच्छे से जानता है ...क्योकि ये सारी बातें उसने ही बताई है मुझे...

कामिनी- दीदी...क्या अंकित सही बोल रहा है...आप बहादुर को...

दामिनी(गुस्से मे)- हाँ...मैं जानती हूँ उसे...पर वो तो अपने मालिक के साइड ही बोलेगा ना...साला झूठ बोल रहा है...समझा.....

मैं- ओके..मान लिया बहादुर झूठा है...पर एक और नाम भी है मेरे पास...जिसे दम कर तुम्हारी फट जायगी...बताऊ...हाँ...

दामिनी- मेरी फट जायगी...अबे फटेगी तो तेरी...जब कमल तुझे मरेगा...1 गोली और सब ख़त्म...पर मैं सुनना ज़रूर चाहुगी...क्या है वो नाम...

मैं- छोटा सा नाम है...पर है असरदार....चंदू....हां...याद आया ना...

दामिनी- चंदू...वो नौकर...हाँ याद है...पर उसको क्यो याद कर रहा है...वो तो गया...

दामिनी मुस्कुराने लगी...और साथ मे कमाल भी...

मैं- ओह...वैसे कमाल...एक गुड न्यूज़ है तुम्हारे लिए...तुम्हारा असली बाप जिंदा है....

कमाल- क्या..

मैं- हाँ...चंदू जिंदा है...और वो ही मेरा आख़िरी सबूत है तुम दोनो को झुटलाने ले लिए...

दामिनी- पर चंदू तो...

मैं(बीच मे)- वो मरने वाला ही था...पर मेरे दादाजी ने ठीक टाइम पर उसे हॉस्पिटल भेज दिया...तब से वो उन्ही के साथ है....उसने सब सच बोल दिया था..पर मेरे दादाजी ने तुम्हे बच्ची समझ कर छोड़ दिया...और ये बात तभी ख़त्म हो गई...

सुना कमाल ...तेरा बाप जिंदा है...

मेरी बात दम कर दामिनी की शीटी पिट्टी गुम हो गई...उसका झूठ सबके सामने आ ही गया था...अब दामिनी को डर इस बात का था कि कामिनी को सच पता चला तो अब वो क्या करेगी......

मैं- दामिनी जी...अब भी मुझे झूठा कहोगी या अपना झूठ कबूल करोगी...

बताओ अपनी बेहन को कि मैने जो कहा वही सच है...मेरा एक- एक लब्ज सच है...बोलो...

दामिनी- हाँ..हाँ...हाँ...सब सच है...मेरी माँ की ही ग़लती थी...पर मैं...मैं आज़ाद को नही छोड़ूँगी....साले ने इतना मज़ा लिया और अब...मैं उसे नही छोड़ूँगी...और उसकी सारी दौलत कमल के सहारे हासिल करूगि...

मैं- ह्म्म...तो अब ये भी बता दो..कि मैं और मेरे डॅड इस सब मे कैसे आए...तुम्हे तो सब वापिस मिल गया था ना...और मेरे डॅड तो कब का उनसे दूर आ गये थे...तो फिर क्यो...

दामिनी- क्योकि..हमारी सारी प्रॉपर्टी आकाश के नाम है...और उसे कुछ हुआ तो वो तेरी होगी...

मैं- ह्म्‍म्म..अब सच बोला ना...सुना कामिनी...ये है पूरा सच...और ये कैसे हुआ...ये भी बता दो...

कामिनी- हाँ दीदी...जब हमे सब वापिस मिल गया था तो फिर ये आकाश के नाम कैसे....

दामिनी- वो इसलिए कि जब आज़ाद को पता चला कि कमल के सहारे हम उसकी दौलत हथियाना चाहते है तो वो गुस्सा हो गया और प्रॉपर्टी के पेपर वापिस मागने लगा...पर मोम ने वापिस नही किए...आज़ाद ने भी फिर माँगना छोड़ दिया...

पर चंदू के मिलने के बाद जब मैं वहाँ से भागी तो आज़ाद को कोठी से सारे पेपर मिल गये..जो अब तक उसके ही नाम थे....

आज़ाद ने वो प्रॉपर्टी हम से छीनी तो नही पर हिफ़ाज़त के लिए सब अपने बेटे के नाम कर दी...ताकि अगर मैं कुछ कदम उठाऊ तो वो सब छीन ले...इसी वजह से मैं चुप थी और आकाश को मारने का सोचने लगी..क्योकि आज़ाद का तो पता भी नही ..बस आकाश था जो बीच मे था...और उसका बेटा...ये अंकित...

कामिनी- पर आकाश ने तो मेरी हेल्प भी करना चाही थी..उसने तो कुछ नही माँगा...

मैं- और हाँ..डॅड ने तो एक कंपनी के 30% शेयर भी कामिनी के नाम किए है...और वो सब जानते थे...पर कभी वापिस नही माँगा...

दामिनी- पर माँग लेता तो...और ये सिर्फ़ प्रॉपर्टी की बात नही थी...मेरी फॅमिली तबाह हुई थी आज़ाद की वजह से तो मैं भी उसकी फॅमिली को मिटाना चाहती थी...

मैं- पर इसमे ग़लती किसकी थी...तुम्हारे पिता की...माँ की या खुद तुम्हारी...

दामिनी- आज़ाद की ग़लती थी...

कामिनी- नही दीदी...इसमे आज़ाद की क्या ग़लती....जो कुछ हुआ उसमे ग़लती तो बस माँ की ही थी..और साथ मे आपकी भी...

दामिनी- ये तू कह रही है...तू दुश्मन का साथ दे रही है...अरे तू नही जानती कि ये किस कमीने का खून है...

कामिनी- जानती हूँ...पर जो भी हुआ...वो माँ और तुम्हारी वजह से ...हाँ दी...आज़ाद की कोई ग़लती न्ही...

मैं- हाँ..सही कह रही है कामिनी...और कमीनेपन की बात तुम मत करो दामिनी...तुमने तो कमीनेपन की हद पार कर दी है...

दामिनी- क्या मतलब तुम्हारा...

मैं- तुमने किसी को बताया कि तुम्हारा पति कहाँ है...

कामिनी- हाँ...जीजू तो दुबई मे है...है ना दी...

मैं- नही कामिनी...ये तो सबको बताया गया है ..असल मे दामिनी को ही सच पता है...तो दामिनी...बताओ..कहाँ है तुम्हारा पति...जिंदा है या...हां...बताओ....

दामिनी की हालत ऐसी हो गई कि काटो तो खून नही...उसे कुछ समझ नही आ रहा था...बस बुत बनी खड़ी थी...

कामिनी- बोलो दी...कहाँ है जीजू...

मैं- कामिनी...मैं बताता हूँ...तुम्हारे जीजू मर गये...और उनका कातिल हमारे बीच ही है....

दामिनी- त्त्त...तुम्हे...कैसे....

मैं- वो भी बताउन्गा...पहले ये तो बताओ अपनी बहेन को कि तुम्हारे पति कैसे मारे गये....

दामिनी मेरी बात सुन कर कुछ नही बोल पाई बस किसी पत्थर की तरह खड़ी रही...उसकी आँखो मे दर्द और डर के मिले -जुले भाव उमड़ आए थे....

कामिनी भी अब शॉक्ड थी...और ये जानने के लिए बेताब थी कि आख़िर दामिनी के पति को हुआ क्या....

मैं- तो तुम नही बोलॉगी दामिनी...ठीक है...मैं ही बताता हूँ...तो सुनो कामिनी...

ये तो तुम जानती ही हो कि तुम्हारी दीदी दामिनी सेक्स के मामले मे कितनी हद तक जा सकती है...

इसी का नतीजा ये हुआ कि दामिनी , कमल के साथ भी सेक्स के मज़े लेने लगी थी...और अब तक ले रही है...

पर एक दिन इनकी अयाशी इसके पति ने देख ली...उसे तो यकीन नही हुआ कि दामिनी किसी गैर मर्द के साथ ये सब कर सकती है...

पर बेचारा अपनी बदनामी के डर से चुप रहा ...यहाँ तक कि दामिनी को भनक भी नही लगने दी कि उसने कुछ देखा....

पर जब देखते-देखते उसका सब्र टूट गया तो वो दोनो के सामने आ गया और दोनो को धमकाने लगा...

और उसी दौरान उसकी मौत हो गई...क्योकि किसी ने गुस्से मे आ कर उसका सिर दीवाल से मार दिया था....

और फिर उसकी लाश को ये दोनो ही दूर दफ़ना आए थे....

कामिनी(रोते हुए)- क्या...जीजू के साथ ...पर ये सब किया किसने....

मैं- वो और कोई नही..बल्कि तुम्हारा ये भाई है...कमल...इसी ने मारा उनको...

कमल(गुस्से मे)- हाँ साले...मैने मारा...बड़ा मूह चला रहा था..कि सबको बोल देगा कि मैं नौकर की औलाद हूँ...चंदू की नही...

मैं- उसे कैसे पता...

कमल- उस दिन मैं और दामिनी यही बाते कर रहे थे जो उसने सुन ली...और साला चुदाई रोकने नही आया था...वो तो हमे दुनिया के सामने नंगा करने आया था...तो टपका डाला साले को ...और अब तू भी जायगा...और ये कामिनी भी..

कामिनी- क्या..तू मुझे मारेगा...अपनी बेहन को..

कमाल- चुप कर बेहन की बच्ची...काहे की बेहन...मैने तुझे अपनी रखेल माना है हमेशा...समझी...

दामिनी तो अपने पति की बात सुन कर धोके मे थी...और कमल की बातों पर ध्यान ना दे कर मुझसे बोली...

दामिनी(सुबक्ते हुए)- तुम्हे कैसे पता...बोलो अंकित...

मैं- मुझे सिर्फ़ ये पता था कि तुम्हारे पति को तुम्हारी असलियत पता चली थी...पर ये एक अंदाज़ा था कि वो मर चुका...बट अब सब सॉफ है...

दामिनी- तुम्हे कैसे पता...प्लीज़ बताओ.....

मैं- उनकी डाइयरी ...जो तुम्हारी बेटी को मिल गई थी...उसमे पढ़ा...

दामिनी(चोंक कर)- मेरी बेटी...

मैं- हाँ...उस पर नज़र थी मेरी...और अभी वो मेरी निगरानी मे ही है.....क्या करूँ तुम्हारे करमो की सज़ा मिल रही उसे...बस उसी के पास डाइयरी मिल गई...

दामिनी- पर मेरी बेटी क्यो...

मैं- ताकि तुम कुछ बुरा ना कर पाओ मेरा....समझी...दुश्मन की कमज़ोरी को हाथ मे रखना ही पड़ता है ना...ह्म्म्म...

दामिनी- नही...उसे कुछ मत करना..मैं ..मैं कुछ नही करूगी...

मैं- ह्म्म..तो फिर ये कमल....ये तो जैल जायगा...तेरे पति को इसी ने मारा ना..हाँ..और तुम गवाह हो...क्यो...

दामिनी कुछ बोलती उसके पहले कमल ने दामिनी को धक्का दे कर हमारे साइड कर दिया...जहा मैं और कामिनी थे...

अब एक साइड मैं फिर दामिनी और फिर कामिनी खड़ी थी और दूसरी तरफ हम पर गन ताने कमाल....

काजल हमारे पीछे बेड पर बेसूध पड़ी हुई थी....

दामिनी- कमल..ये क्या...क्या कर रहे हो...

कमाल- चुप...एक दम चुप...अब तुम तीनो मरोगे...तीनो...हाँ...

दामिनी- नही कमल..हम तुम्हारी बहने है...और अंकित...उसने क्या बिगाड़ा तुम्हारा....

कमल- चुप...सब चुप...मैने तुम्हे बेहन माना ही कब...मैं तो इसलिए साथ दे रहा था कि मुझे आज़ाद की प्रॉपर्टी मिल जाए...और फिर मैं तुम दोनो को छोड़ देता...पर अब..अब तो तुम दोनो पीछे हट रही हो..तो मेरे किस काम की...तो अब मरो....

मैं- एक मिनट...अभी भी सोच लो...इस सब से कोई फ़ायदा नही...

कामिनी- हाँ कमल...बुरे काम का नतीजा बुरा ही होता है...

कमल- तू तो चुप ही रह...सब तेरी और तेरी बेटी की वजह से हुआ है...सबसे पहले तू ही मर...ये ले...

कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही...धाय-धाय की आवाज़ के साथ दो गोलिया चली....

दोनो गोलियाँ चली तो कामिनी पर था पर रुकी दामिनी के सीने मे जा कर...

हाँ..दामिनी ने कामिनी के सामने आ कर अपनी बेहन को बचा लिया था...

कामिनी- दीदी...न्न्ंहिईीई....

मैं(चिल्ला कर)- साले...ये क्या किया...

कमल- अब तू भी..

मैं(बीच मे)- अभी...

और तभी एक गोली चली ...और गोली की आवाज़ के साथ कमल नीचे गिर गया.....

 
गोली कमल की हथेली पर लगी और कमल की गन हाथ से निकल कर नीचे जा गिरी..

यहाँ दामिनी नीचे गिरने लगी तो मैने उसे सहारा दिया...और वहाँ गेट से इंस्पेक्टर आलोक की एंट्री हुई...और उन्होने कमल को दबोच लिया...

मैं- दामिनी...आराम से....

कामिनी(रोते हुए)- दीदी...ये क्या....आपने मेरे लिए...दीदी....

दामिनी को मैने गोद मे लिटा लिया और कामिनी भी बैसाखी छोड़ कर नीचे आ गई और दामिनी का हाथ पकड़े रोने लगी...

कामिनी- दीदी..ये सब...नही दीदी...आपको कुछ नही होगा...

दामिनी- क..कम्मो...रो मत...आहह...मैने आज ...आहह..पहली बार...अच्छा...अच्छा काम किया...

कामिनी - नही दीदी...आप बहुत अच्छी है...

दामिनी- बुरे का नतीजा...आहह..बुरा ही होता है...अब मेरा...आहह...टाइम...

मैं- शांत रहो दामिनी...तुम्हे कुछ नही होगा...

आलोक- हाँ...आंब्युलेन्स आ रही है...कॉल कर दिया है..

दामिनी- अंकित...मेरी बेटी..आआहह...वो मासूम है...उसको कुछ....आहह..

मैं- नही...उसे कुछ नही होगा...मैं वादा करता हूँ...

दामिनी- त्थ्ह..थॅंक यू....

तभी आलोक भी हमारे पास आ गये और दामिनी की नब्ज़ देख कर मुझे देखा और...ना मे गर्दन हिला दी...

मैं- दामिनी...एक बात बताओगी..

दामिनी- क्क्क..कहो..

मैं- मैं ये जानता हूँ कि कामिनी तो तुम्हारे कहने पर काम कर रही थी..पर तुम उसे जानती होगी जो ये सब करवा रहा है..है ना...वो बॉस...तुम जानती हो ना उसे...

दामिनी- आ...हाँ..

मैं- तो बोलो...कौन है..कौन है वो कमीना...जिसकी वजह से ये नौवत आई...बोलो दामिनी बोलो...

दामिनी- वउूओ..वू..वो..

मैं- हाँ दामिनी बोलो...

दामिनक़- सस्स..सस्साआ...

मैं- सा ..सा क्या दामिनी...बोलो..

दामिनी- सस्स्स्स्साआस.........

और दामिनी हमेशा के लिए चुप हो गई....दामिनी के खामोश होते ही मैं उसे हिलाने लगा और कामिनी ज़ोर से रोने लगी...

मैं दामिनी को हिलाते हुए नाम पूछ रहा था...तभी इंस्पेक्टर आलोक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा.....

आलोक- नही अंकित...शी ईज़ नो मोर....

मेरा तो दिमाग़ हिल गया...क्या सोचा था और क्या हुआ...

मैने सोचा था कि आज दामिनी को डरा कर बॉस का नाम पता कर लुगा..पर इस कमल की वजह से...

मुझे कमल पर गुस्सा आ गया और मैने दामिनी को छोड़ा और कमल को लाते मारने लगा...

मैं- साले...तेरी वजह से मरी वो..मैं तुझे...ये ले साले...

इंस्पेक्टर आलोक ने मुझे आ कर रोक लिया......

मैं- इंस्पेक्टर , ले जाओ इसे..और साले को फाँसी पर लटका दो..

इंस्पेक्टर आलोक ने अपने सिपाहियो को इशारा किया और वो उसे ले कर निकल गये...

मैं भी कामिनी को संभालने लगा...और तभी सोनम भी आ गई...जिसे मैने छिप कर रहने को कहा था...

कुछ देर बाद आंब्युलेन्स आई और दामिनी को ले गई...

मैने सोनम के साथ कामिनी को भी घर पहुचा दिया...

जाने के पहले कामिनी ने काजल के बारे मे कहा तो मैने उसे बिश्वास दिलाया की काजल सही सलामत पहुच जायगी...अभी उसे नीद की गोलिया दी है तो सोने दो...

मैं उसे होश मे आते ही ले आउगा...और जब तक दामिनी का पोस्टमार्टम करके पोलीस बॉडी भी ले आयगी...

मैने उसे ये भी बता दिया कि दामिनी की बेटी भी जल्दी ही पहुच जायगी...

कामिनी , सोनम के साथ निकल गई और मैं काजल के बाजू मे बैठ गया...

तभी मेरे सामने एक नकाब पोस आया...

उसे देख कर मैने उसे थॅंक्स कहा और जाने का बोल दिया...वो निकल गया...

और फिर मैं आज हुई सारी घटना के बारे मे सोचने लगा...

मैं(मन मे)- आज फिर बॉस ना नाम नही जान पाया...सब बरवाद गया...

और जो मैं नही चाहता था वो हो गया..

दामिनी मर गई...अब उसकी बेटी को क्या सम्झाउन्गा....कैसे बताउन्गा की अब वो अनाथ हो गई..

और ये काजल...इसे तो पता भी नही कि इसके पास क्या-क्या हो गया...इसे भी तो समझाना पड़ेगा...

वेल...ये होश मे आ जाए फिर देखते है...

फिर मैने रजनी आंटी को कॉल करके उन्हे कामिनी के घर भेज दिया...साथ मे संजू को भी भेज दिया...दामिनी की अंतिम यात्रा की तैयारी करने...

मेरी दुश्मनी तो जब तक थी तब तक वो जिंदा थी..मरने के बाद कोई दुश्मन नही होता...

मैं वादा करता हूँ दामिनी...तुम्हारे किए पापो का असर तुम्हारी बेटी पर नही होने दूँगा...वादा...

अब मेरे मन मे एक ही सवाल था...कि जो हुआ वो सही हुआ या ग़लत.....??????????

मैं अपने ख़यालो मे खोया हुआ दामिनी के बारे मे सोच रहा था...

मुझे ऐसा लग रहा था कि दामिनी की मौत का ज़िम्मेदार मैं हूँ...क्योकि आज यहाँ सबको मैने ही आने पर मजबूर किया....

मैने जो सोचा था वो हो गया...मुझे और कामिनी को सारी सच्चाई पता चल गई...

पर इसकी कीमत दामिनी की मौत तो नही रखी थी मैने...

मैं तो सिर्फ़ उसको सही रास्ते पर लाना चाहता था...पर रास्ता दिखाते-दिखाते खाई मे ले गया...

नही...ये ठीक नही हुआ....दामिनी की मौत को उसकी बेटी कैसे झेल पायगी...क्या वो मुझे इस सब का कसूरवार समझेगी...शायद हाँ...

माना कि दामिनी ने कई ग़लतियाँ की...कई लोगो की जिंदगी खराब की...पर इस सब मे उसकी बेटियों की क्या ग़लती...

अगर उसकी बेटी को ये सब पता चला...और उसने मुझसे पूछा कि क्या उसकी माँ का मारना ही ज़रूरी था तो....

तो क्या बोलुगा उसे...नही...मैं तो उससे नज़रे भी नही मिला पाउन्गा....

मैं ऐसा इंसान नही हूँ जो किसी को मारने का सोचे...मैं तो सिर्फ़ अपनी फॅमिली को सुरक्षित रखना चाहता था....

दामिनी की मौत मेरा मक़सद नही थी...वो तो कमल ने....पर मैं उसे रोक भी सकता था....दामिनी को गोली लगने के पहले ही मैं कमल की गन को गिरा सकता था...

पर ना जाने मैं क्या सोच रहा था...मुझे उम्मीद नही थी कि कमल फाइयर कर देगा....

पर अब सोच के क्या फ़ायदा....मैं अयाश तो था ही...आज किसी की मौत की वजह भी बन गया....

मैं अपने ख़यालो से होश तब आया जब मेरा फ़ोन रिंग हुआ...

( कॉल पर )

आलोक- हेलो...अंकित...तुम जल्दी से हॉस्पिटल पहुचो...

मैं- क्यो...क्या हुआ ...

आलोक- पहले आओ तो..सब बताता हूँ ..

इससे पहले की मैं कुछ बोलता फ़ोन कट गया...

फ़ोन कट होते ही मैने टाइम देखा तो पता चला कि मैं लगभग 1 घंटे से अकेला बैठा सोच रहा था...

फिर मुझे आलोक की बात याद आई...जल्दी से हॉस्पिटल पहुचो...

पर मैं काजल को अकेले कैसे छोड़ सकता था...अब क्या करूँ...हाँ...

मैने जल्दी से सोनू को कॉल किया और उसे सब समझा कर हॉस्पिटल निकल गया...

यहाँ फार्महाउस पर सोनू ने जैसे-तैसे कर के काजल को होश मे लाया....

काजल(आँखे मलते हुए)- मैं..हूँ..सोनू...तुम...और मैं यहाँ ...कैसे ..कब...

सोनू- स्शहीए...रिलॅक्स...तुम बिल्कुल ठीक हो...और अभी हम घर जा रहे है....

काजल- पर सोनम...वो कहाँ है...

सोनू- वो तुम्हारे घर पर ही है..डोंट वरी...

काजल अब खड़ी हो गई थी और अपने कपड़े ठीक करने लगी....

काजल- पर मैं यहाँ आई कैसे..मैं तो सोनम के साथ थी...

सोनू- सब पता चल जायगा...पहले तुम फ्रेश हो जाओ ..और घर चलो...

फिर काजल फ्रेश हुई और सोनू के साथ घर निकल आई...

 
दूसरी तरफ मेरे आदमी ने भी अपने चम्चो को बोल कर दामिनी की बेटी को घर पहुचाने के लिए बोल दिया था...

थोड़ी देर बाद ही काजल , सोनू और दामिनी की बेटी..कामिनी के घर पहुच गये....

कामिनी के घर पर रजनी भी थी और उसके साथ रिचा और मनु भी आ गई थी...उन्हे रजनी ने बता दिया था...

कामिनी के घर के अंदर गम का महॉल था...सब लोग दामिनी की मौत से शॉक्ड मे थे...पर पूरी बात किसी को नही बताई गई थी...

सबसे यही बोला गया था कि दामिनी एक आक्सिडेंट का शिकार हो गई......

रिचा ने जब ये बात सुनी तो उसने सबसे नज़रें बचा कर बॉस को कॉल किया....

( कॉल पर )

बॉस- हाँ बोलो..क्या हुआ...

रिचा- बॉस...एक न्यूज़ है...बहुत खास...

बॉस- अच्छा...कैसी न्यूज़...अच्छी या बुरी..

रिचा- बुरी...

बॉस- तो जल्दी बोल ना रंडी...

रिचा(भड़क कर)- दामिनी मर गई...

बॉस(शॉक्ड)- कैसे....किसने मारा...

रिचा- किसी ने नही...अपने आप मर गई...

बॉस- अरे..साली ये तो बता कि क्या हुआ था...

रिचा- वो उसका आक्सिडेंट हो गया ..

बॉस- ओह्ह्ह..तो मिस्टर गई ना...अंतिम यात्रा निकली कि नही..

रिचा- अभी कहा...अभी तो वो हॉस्पिटल मे है...

बॉस- क्या...जिंदा है क्या....और हॉस्पिटल कौन ले गया....

रिचा- नही..पर ले गये पीएम करने शायद...और साथ मे कौन है...रूको बताती हूँ...

रिचा ने फ़ोन होल्ड पर रखा और सोनम से पूछ लिया...

सोनम ने भी रिचा को अंकित का नाम बता दिया..क्योकि वो तो रिचा के मंसूबो से अंजान थी..उसे अच्छा समझती थी...

रिचा- हाँ बॉस...वो अंकित है साथ मे...

बॉस- ओह नो..कही दामिनी जिंदा ना हो..और अंकित को कुछ बक दिया तो...नूओ..ये नही होना चाहिए...

रिचा- क्या..किससे बोल रहे हो...और दामिनी तो मर गई..क्या बोलेगी...

बॉस- अरे बेवकूफ़....कन्फर्म कर कि वो मर गई..नही तो मेरी लग जायगी...

रिचा- क्या मतलब...मान लो कि जिंदा भी हो तो क्या बिगाड़ लेगी...वो भी तो अंकित की दुश्मन ही है...

बॉस- पर अगर मरते वक़्त उसका ज़मीर जाग गया तो...कही मेरा नाम ले लिया तो...पता कर...

रिचा- आप फालतू मे डर रहे हो...

बॉस- चुप साली...दामिनी वो जानती है जो और कोई नही जानता...इसलिए उससे ज़्यादा ख़तरा है...पता कर कि वो मरी या नही...और मरी भी तो क्या कुछ बोली अंकित से या नही...

रिचा- हाँ..करती हूँ...मैं अभी पता लगाती हूँ...

बॉस- तू उस भडवे रफ़्तार को भेज वहाँ..अभी...और मुझे पूरी रिपोर्ट दे...समझी..

और कॉल कट हो गई...

कॉल कट होते ही रिचा ने रफ़्तार को कॉल किया...रफ़्तार ने 30-40 मिनट मे वहाँ पहुच जाने का बोला और कॉल कट हो गई..

फिर रिचा सोचने लगी कि दामिनी को ऐसा क्या खास पता है जिससे बॉस इतने घवराये है...खैर जो भी हो...दामिनी तो मर ही गई...बॉस फालतू मे डरे हुए है...रफ़्तार भी यही बतायगा...ह्म्म..

हॉस्पिटल मे.......

सोनू काजल का ख़याल रखने आ गया और मैं पहुचा हॉस्पिटल..

मैं- हाँ सर...क्या हुआ...

आलोक- वेल...मेरे पास 2 न्यूज़ है...1 बॅड न्यूज़ न्ड 1 गुड न्यूज़...

मैं- ह्म...

आलोक- ह्म्म क्या...पहले क्या सुनना चाहोगे...

मैं- आज मेरे साथ बॅड ही बाद हुआ है...तो मैं गुड न्यूज़ सुनना पसंद करूगा...

आलोक- तो गुड न्यूज़ ये है कि दामिनी मरी नही...जिंदा है...

मैं(चौंक कर)- क्या...कैसे...आइ मीन वो तो...उसकी नाड़ी तो...अरे आपने ही तो...

आलोक(बीच मे)- रिलॅक्स- रिलॅक्स...सब बता दूँगा...फिलहाल खबर ये है कि वो जिंदा है...और उसके जिस्म से गोली भी निकाल ली गई है....

मैं(हाथ जोड़ कर)- थॅंक गॉड....बच गई...अब उसकी मौत का कर्ज़ नही चढ़ेगा मुझ पर....

आलोक- पर एक बॅड न्यूज़ भी है...

मैं- बॅड न्यूज़...वो क्या है...

आलोक- उसे जानने को थोड़ा रुकना पड़ेगा...अभी क्लियर होना बाकी है...ओके..

मैं- ह्म..कब तक रुकना होगा...

आलोक- ह्म..दामिनी के होश मे आने तक...

मैं- ओके...पर वो बच तो गई है ना...

आलोक- हाँ...शी ईज़ सेफ नाउ...

मैं- तो मैं उसकी अंतिम यात्रा की बात को मना कर देता हूँ....

आलोक- हाँ..कर दो...उसकी अंतिम.यात्रा अभी नही होगी...

मैने तुरंत संजू को कॉल कर के सब समझा दिया....और बोल दिया कि सबको बता दे कि दामिनी जिंदा है...बट अभी किसी को हॉस्पिटल मत आने देना...जब तक होश ना आ जाए....

फिर मैं इंस्पेक्टर आलोक के साथ वही बैठ कर दामिनी के होश मे आने का वेट करने लगा....

 
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