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चूतो का समुंदर



तभी थोड़ी देर मे वहाँ रफ़्तार आ गया...

उस टाइम आलोक कहीं निकल गये थे..और रफ़्तार मुझे देखते ही बोला...

रफ़्तार- ओह..तो तू यहाँ भी...साला जहाँ भी गड़बड़ हो...तू वही मिलेगा...हाँ..

मैं(गुस्से से)- क्या मतलब...

रफ़्तार- मतलब छोड़..तू क्या कर रहा है यहाँ...और डॉक्टर कहाँ है...हे कोई है...

रफ़्तार की आवाज़ सुन कर एक नर्स आ गई...उससे रफ़्तार को पता चल गया कि दामिनी मरी नही...

रफ़्तार ने तुरंत ही एक कॉल कर के सब बता दिया...और वहाँ से ऑर्डर मिलते ही मुझसे बोला...

रफ़्तार- ओये..अब तू निकल यहाँ दे...आगे हम संभाल लेगे...

मैं- नही..मैं कही नही जाने वाला...समझे...

रफ़्तार- तू साले...ऐसे नही मानेगा..आज दिखा ही देता हूँ कि मैं क्या चीज़ हूँ...

और रफ़्तार ने आगे बढ़ कर मेरा कॉलर पकड़ा....

रफ़्तार- क्या बोला..नही जायगा...सुन साले...निकल जा यहाँ से...

मैं- मुझे दामिनी से बात करनी है...फिर जाउन्गा...

रफ़्तार- उससे बात करनी है..मैं कराता हूँ बात..ओये..ज़रा इस हीरो की चर्बी तो निकालो...

रफ़्तार ने अपने साथ आए सिपाहियो से बोला और मुझे उनके पास धकेल दिया....

रफ़्तार- आज ऐसी हालत होगी तेरी कि बात करना तो दूर...सुन भी ना पायगा...ले जाओ साले को...

सिपाहियो ने मुझे जकड़ा ही था कि आलोक की आवाज़ गूँजी...

आलोक- रुक जाओ...कोई इसे हाथ भी मत लगाना...और रफ़्तार...तू क्या कर रहा है यहाँ...

रफ़्तार- सर...आप ...मैं तो यहाँ...वो आक्सिडेंट हुआ तो...

आलोक- मैं सब जानता हूँ..इसलिए यहाँ हूँ...तुम अंकित को छोड़ो और दफ़ा हो यहाँ से...

सिपाहियों ने मुझे छोड़ दिया...और एक बार फिर रफ़्तार अपनी हार होने पर मुझे घूरते हुए निकल गया....

रफ़्तार के आने से ही मुझे समझ मे आ गया था कि दुश्मनो तक ये बात पहुच चुकी है ...और इसकी लिंक ज़रूर रिचा ही होगी...

मैं(मन मे)- अब तो दामिनी की जान का ख़तरा बढ़ गया है....अगर इनके बॉस तक बात पहुच गई तो वो दामिनी को चुप कराने की कोसिस ज़रूर करेगा...

तभी आलोक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा...

आलोक- अंकित...आओ बैठो....और दामिनी की फ़िक्र मत करो...

और हम फिर से इंतज़ार करने लगे....

यहाँ रफ़्तार ने बाहर जाते ही रिचा को सब बता दिया....

फिर रिचा ने अपने बॉस को पूरी बात बताई और उसका ऑर्डर सुन लिया...और रफ़्तार को कॉल किया...

रिचा- सुन...उड़ा दे उसे...किसी भी कीमत पर उसकी बात अंकित से ना हो पाए...

रफ़्तार- पर कैसे करूँ...वहाँ इंस्पेक्टर आलोक बैठा है...मैं कुछ नही कर सकता...

रिचा- मुझे कुछ नही सुनना...जैसे भी कर...पर दामिनी जिंदा बाहर नही आनी चाहिए...

रफ़्तार- ठीक है...पर पैसे ज़्यादा खर्च होंगे....

रिचा- सब मिल जायगे....तू काम कर बस...

रफ़्तार- ह्म्म..जो काम वर्दी नही कर सकती...वो गुन्डे कर सकते है...अब फ़ोन रखो...जल्दी ही गुड न्यूज़ दूगा....

यहाँ मैं और आलोक शाम तक बैठे रहे ...और शाम को दामिनी को होश आ गया...

दामिनी के होश मे आने की न्यूज़ मेरे लिए गुड न्यूज़ थी...

मैं भाग कर दामिनी के पास पहुँचा...

मैं- दामिनी..आप ठीक हो...थॅंक गॉड...मुसीबत टल गई....अब आपको कुछ नही होने दूँगा...डोंट वरी...

दामिनी बेड पर लेटी हुई मुझे आँखे फाड़ कर देख रही थी...

मैं- अरे...कुछ तो बोलो...ओह सॉरी..अभी वीक्नेस्स होगी ना..आप आराम करो...मैं यही हूँ...जब बोलने का मन हो तो बताना....

दामिनी फिर भी कुछ नही बोली बस मुझे एक टक देखती रही...

फिर मैने दामिनी का हाथ छोड़ा और वापिस जाने को मुड़ा ही था कि दामिनी ने मेरा हाथ जकड लिया...

मैं- दामिनी...क्या हुआ..कुछ कहना चाहती हो...

दामिनी- त्त्त...तुम...तूमम...

मैं- हाँ दामिनी...बोलो..क्या हुआ...बोलो...

दामिनी- कौन हो तुम...?????????????????

दामिनी की बात सुनकर मेरा सिर घूम गया...मेरी समझ मे ही नही आया कि ये क्या बोल रही है...और क्यो...

मैं- क्या कहा..दामिनी..मैं अंकित...अंकित मल्होत्रा...

दामिनी- कौन अंकित....मैं तुम्हे नही जानती...कौन हो तुम.....????

मैं(मन मे)- इसकी माँ की...क्या बक रही है ये....कही ये नाटक तो नही...

दामिनी- बोलो...कौन हो तुम...और मेरे पास कैसे आए...

मैं- दामिनी...मैं अंकित हूँ....याद करो....आकाश का बेटा...तुम जानती हो मुझे...फिर भी...

दामिनी(ज़ोर से)- बोला ना...मैं तुम्हे नही जानती...कौन हो तुम...और यहाँ...कोई है...कोई है...

दामिनी की आवाज़ इतनी तेज थी कि बाहर से डॉक्टर, नर्स और इंस्पेक्टर आलोक भाग कर अंदर आ गये...

डॉक्टर- क्या हुआ इन्हे...ये चिल्लाई क्यो...

मैं- डॉक्टर...ये मुझे..

दामिनी(बीच मे)- कौन है ये...और आप लोग कौन है...

डॉक्टर( सिर पर हाथ रख कर)- ओह नो...जो डर था...वो हो ही गया...

मैं- क्या...क्या मतलब...क्या हुआ इसे...

डॉक्टर- आप मेरे साथ आइए प्लीज़....नर्स...इनको (दामिनी) को सम्भालो....

फिर डॉक्टर मुझे और आलोक को एक साइड ले गया....

मैं- बताइए डॉक्टर...क्या हुआ है आख़िर....

डॉक्टर- असल मे इनकी मेमोरी लॉस्ट हो गई है...या ये कहूँ कि अभी इन्हे कुछ भी याद नही...

मैं(चोंक कर)- क्या...ये कैसे हो सकता है...इनके तो सिर पर भी चोट नही लगी...

मेरी बात सुन कर आलोक और डॉक्टर मुझे ऐसे देखने लगे जैसे मैं कोई अजूबा हूँ...

मैं- अरे...मैने फ़िल्मो मे देखा है ...तो बोल दिया...

डॉक्टर- ह्म्म..पर यहा कुछ अलग हुआ है...असल मे ये शॉक्ड की वजह से हुआ है...शायद...

आलोक- शायद का क्या मतलब आपका....

डॉक्टर- आक्च्युयली हमे लग रहा था कि कही इनकी माइंड की नस चोक ना हो जाए...क्योकि गोली दिल के करीब लगी थी...

आलोक- दिल का दिमाग़ से क्या कनेक्षन...???

डॉक्टर- है...आक्च्युयली दिल हमारे माइंड से जुड़ा हुआ है...और जब कभी दिल को शॉक लगता है तो दिमाग़ की नसो मे प्राब्लम हो जाती है...जिससे मेमोरी लॉस्ट भी हो सकती है...

मैं- तो आप कहना चाह रहे है कि ये ऐसे ही रहेगी...कुछ भी याद नही होगा इन्हे...

डॉक्टर- नही...हो सकता है कि जल्दी ठीक हो जाए...और हो सकता है कि टाइम लग जाए...

मैं- क्या ये भी हो सकता है कि कभी ठीक ना हो...

डॉक्टर- शायद..पर मैं ट्रीटमेंट जारी रखुगा...शायद जल्दी ठीक हो जाए...

मैं- तो क्या ये यही रहेगी जब तक...

डॉक्टर- नही..नही...इन्हे आप कल तक ले जा सकते है...उसके बाद इनका ट्रीटमेंट घर पर ही चलेगा...

 


मैं- ओके...बट अभी क्या...

आलोक- अभी तुम इसके घरवालो को इनफॉर्म कर दो...मैं अभी जा रहा हूँ...बाद मे आउगा...

मैं- ओके...

फिर आलोक निकल गये और मैने भी कामिनी के घर कॉल कर के पूरी बात बता दी...

कुछ टाइम बाद कामिनी के घरवाले और बाकी पहचान वाले हॉस्पिटल आ पहुचे...और एक-एक कर के दामिनी से मिलने लगे...

मैं यही सोच रहा था कि हो ना दामिनी के जिंदा होने की खबर इनके बॉस को ज़रूरी आफॅक्ट करेगी..

और ये भी मुमकिन है कि वो दामिनी को मारने का सोचे....

इसके लिए मैने अपने आदमियों को लगाया हुआ था...हॉस्पिटल के आस-पास...

पर एक तरफ मुझे ये उम्मीद भी हो गई थी कि अब शायद हमला ना हो...क्योकि दामिनी की हालत की न्यूज़ बॉस को पक्का मिलेगी...

और दामिनी को कुछ याद नही तो फिर प्राब्लम क्या.....

यहाँ जैसे ही रिचा ने दामिनी का हाल जाना तो उसने चुपके से बॉस को खबर कर दी...और रफ़्तार को भी...जो हॉस्पिटल के पास किराय के गुन्डो के साथ तैनात था...

सब लोग दामिनी को देख कर परेशान थे कि अब क्या होगा...और मैं इसलिए परेशान था कि अब बॉस का नाम कैसे पता चलेगा....तभी मेरे आदमी का कॉल आ गया....

( कॉल पर )

मैं- हेलो...

स- इतना उदास होने की कोई ज़रूरत नही...

मैं- क्यो...उदास भी ना रहूं...

स- अरे यार...दामिनी नही तो क्या...अभी बहुत लोग है ...ये बॉस का नकाब तो निकल ही जायगा...

मैं- हाँ ..वो तो है...अभी साली रिचा तो है...शायद इससे कुछ पता चले...

स- ह्म्म्म..ये हुई ना बात...

मैं- और हन...मुझे नही लगता कि अब दामिनी की जान को ख़तरा होगा...

स- ह्म्म..यही मैं सोच रहा था...मैं आदमी वापिस बुला लेता हूँ...सिर्फ़ 2 रहेगे वही...जब तक दामिनी हॉस्पिटल मे होगी...

मैं- हाँ..और 2 बंदे उसके घर पहुचा दो....

स- ह्म्म...वैसे अब तुम फ्री हो...??

मैं- हाँ...क्यो कुछ खास बात..

स- भूल गये...तुमने किसी को टाइम दिया था...

मैं- टाइम...किसकी बात कर रहे हो...

स- सोनी....उसकी बीवी के बारे मे...

मैं- ओह हाँ...भूल ही गया था...बट आज मूड नही हो रहा...

स- पर मेरे हिसाब से तुम्हे जाना चाहिए....क्या है ना कि दवाब बना रहना चाहिए....

मैं- बात तो सही है ..पर मेरा मूड...ठीक है...जाउन्गा...

स- देखो...मूड नही तो कोई नही...कुछ करना मत..बस ज़रा सा प्रेशर देना...ज़रा बाते सुनना...और बाद मे आने का बोल देना...

मैं- ह्म्म्मम...तो 2 घंटे के बाद जाउन्गा...अभी मुझे रेस्ट करना है थोड़ा...

स- कोई नही..घर जाओ ..थोड़ा रेस्ट करो...फिर जाना...

मैं- ओके..तब तक आप यहा नज़र रखना...

स- ह्म्म..मैं देख लुगा...और तुम्हारे साथ बंदे पहुच जायगे...बाइ...

मैने कॉल कट की और संजू , सोनू को वहाँ का ख्याल रखने का बोल कर घर निकल आया....

 


हम से दूर एक अंजान जगह.....

एक बड़ा सा घर...जिसके चारो तरफ गार्ड्स खड़े हुए थे....और सभी गन के साथ...

उस घर के अंदर डाइनिंग टेबल पर रेणु और एक साथ खाने का लुफ्त उठा रहे थे....

और साथ मे खड़ा था सब गार्ड्स का मुखिया....रघु...

रेणु- अच्छा पापा...ये बताइए कि अब तक थे कहाँ...

शक्श- बस बेटी....अपने आप को छिपा रहा था...और हालत भी सुधार रहा था...

रेणु- पर छिप क्यो रहे थे....मुझे पता होता कि आप कहाँ है तो मैं कब की आपके पास आ जाती....

शक्श- क्या करू बेटी...मजबूर था...आक्सिडेंट के बाद मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी...कुछ भी ठीक से याद नही था...बड़ी मुस्किल से कुछ-कुछ याद आया...यहाँ तक कि मैं तुझे भी भूल गया था...

रेणु- ओह...चलो आपको याद तो आ गया...वरना पता नही आपके ये आदमी मेरा क्या हाल करते....

शक्श- ह्म्म..पर ये तो बता कि तू यहाँ पहुचि कैसे और किसे ढूड़ रही थी...

रेणु- मैने बताया था ना...मैं सम्राट सिंग को ढूँढने आई थी...

शक्श- हाँ...बताया था...पर क्यो...

रेणु- क्योकि सम्राट सिंग वो इंसान है जिसने अंकित को मारने की कोसिस की...

शक्श- हाँ...वो आकाश का बेटा...

रेणु- हाँ...इसलिए मैं पता करने आई थी कि उसकी क्या दुश्मनी है...क्योकि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है...

शक्श- ह्म्म..पर ये सम्राट...शायद मैने नाम सुना है...

रेणु- सच...बताइए ..कौन है वो...शायद हमारे काम आ जाए...

शक्श- पता नही...याद करता ही तो सिर फटने लगता है...इस आक्सिडेंट ने मेरे दिमाग़ को...

रेणु(बीच मे)- बस...बस कीजिए...आप टेन्षन ना लो....हम दूध लेगे उसे...मैं न्ही चाहती की मेरे पापा को कोई प्राब्लम हो...

शक्श(मुस्कुरा कर)- इतनी फ़िक्र है मेरी...

रेणु- और नही तो क्या....मुझे तो उम्मीद ही नही थी कि कभी आपको देखुगी...पर अब मिले हो तो आपको लो प्राब्लम नही होने दुगी...

शक्श- ठीक है...पर ये तो बता कि तूने मुझे पहचाना कैसे...

रेणु- आपकी फोटो है मेरे पास...

शक्श- ओके...अब तू ये बता कि आज़ाद का कुछ पता है...

रेणु- नही...बस वही नही मिल रहा...पर हमारे लोग लगे हुए है ढूँढने के लिए...

शक्श- ह्म्म...मैं भी इसी कोसिस मे लगा हुआ हूँ...

रेणु उठ कर उस सक्श के पास गई और उसका हाथ पकड़ कर बोली..

रेणु- डोंट वरी पापा...अब देखना...आज़ाद और आकाश को हर एक ज़ख़्म का हिसाब देना होगा...

तभी रेणु का फ़ोन बजा और सामने वाली की बात सुन कर रेणु चौंक गई...

रेणु(फ़ोन पर)- मैं आती हूँ...

शक्श- क्या हुआ बेटी...

रेणु- मुझे जाना होगा पापा...अर्जेंट है...

शक्श- ह्म्म...पर अब कॉल करते रहना....

रेणु- ओके...अब मैं चलूं..

फिर वो सक्श उठा और रेणु को गले लगा कर बोला...

शक्श- बहुत जल्द हम साथ मे रहेगे बेटी...

रेणु- जी पापा...बस वो वक़्त जल्दी ही आने वाला है...अब मैं और नही रूकूगी...चाहे कोई भी बीच मे आए...सबको मिटा दूगी....और आप सम्राट को ढूँढना...हो सके तो...

शक्श- हाँ बेटी..मैं जल्दी से पता करता हूँ...

और फिर रेणु वहाँ से घर की तरफ निकल आई.....

 


यहाँ अंकित के घर.....

मैं हॉस्पिटल से घर आया तो मेरे चेहरे पर थकान और परेसानि सॉफ-सॉफ दिख रही थी...जिसे पारूल ने देखते ही समझ लिया...

और मैं रूम मे पहुचा तो पीछे से ही पारूल आ गई...अपनी उंगलियों का जादू चलाने....

पारूल की तेल मालिश ने मेरे सिर को हल्का कर दिया और मैं सो गया...

फिर जागते ही रेडी हुआ और सोनी के घर निकल गया....

सोनी के घर पर मेरे बंदे पहले से ही तैनात थे....और मैं जा कर सीधा सोनी के सामने बैठ गया...स्मिता भी वही पास मे जी खड़ी थी ....

मैं- हाँ तो सोनी...क्या सोचा....???

सोनी- अंकित...वो...मुझे माफ़ कर दे प्लज़्ज़्ज़..

मैं(ज़ोर से)- बस...मैने कहा था ना कि अब कुछ नही...सिर्फ़ तेरा फ़ैसला...कौन सा ऑप्षन चुना तूने....

सोनी- अंकित...मेरी बात...

मैं(बीच मे)- नही...बस ये बता कि क्या सोचा...जैल या घर...???

सोनी की आँखे फिर से झुक गई और शायद आँसू भी आ गये थे...पर मैं रहम के मूड मे बिल्कुल नही था ...

तभी मेरे फ़ोन पर मेसेज आया...जिसे पढ़ कर मैं खुश हो गया...और स्मिता को देख कर स्माइल दे दी...बदले मे उसने भी स्माइल पास कर दी...

ये सब सोनी ने नही देखा था...वो तो सिर झुकाए बैठा हुआ था....

मैं(ज़ोर से)- जल्दी बोल सोनी...मेरे पास टाइम नही है...बोल...

सोनी- अंकित...मुझे थोड़ा...

मैं(बीच मे)- ओके...कल इसी टाइम तक आउन्गा....ये फाइनल टाइम है...या तो कल पोलीस तुझे ले जायगी...या तेरी बीवी मेरे पास आयगी....सोच ले...

और मैं गुस्से मे उठ कर निकल आया...

फिर मैने एक बार हॉस्पिटल जा कर वहाँ का जायज़ा लिया और दामिनी की सुरक्षा देखी और घर आ गया...

घर आ कर मैने ड्रिंक की और आज हुए पूरे घटनाक्रम को वापिस से सोचने लगा...

हर एक बात जो दामिनी ने कही...मैं सब बातों को बार-बार याद करता रहा...

तभी एक जगह आ कर मेरा माथा ठनका...

दामिनी ने बताया था कि वो तीन बहने थी...दामिनी, कामिनी और गुड्डी...और एक भाई...जो चंदू की औलाद है...कमाल...

पर मेरा माइंड इसलिए घूमा कि अगर दामिनी ने सही बोला तो सोनू और सोनम का बाप कौन है......??????????

और इसे कामिनी ने अपना भाई क्यो बना रखा है....???????

इस बात ने मुझे थोड़ी देर के लिए कुछ ज़्यादा ही परेसान कर दिया कि सोनू के डॅड , कामिनी के भाई कैसे हुए....पर फिर अपने आप को समझा कर मैं नीद मे चला गया....

आकृति के घर...आज सुबह.....

सुबह-सुबह गेट पर नॉक होते ही आकृति ने गेट खोला तो सामने रेणु खड़ी थी....

जिसे देख कर आकृति बेहद खुश हो गई...और उसने ये भी गौर किया की रेणु भी बहुत खुश नज़र आ रही है...

आकृति- अरे बेटी...तुम आ गई...

रेणु(अंदर आते हुए)- हाँ मोम....जल्दी आना पड़ा....

आकृति(गेट लगा कर)- मतलब तेरा काम हो गया...हाँ...

रेणु- ह्म्म्मए...कुछ ऐसा ही समझो...

आकृति- तो क्या कहा सम्राट ने....वो है कौन..और अंकित से क्या दुश्मनी है उसकी...???

रेणु- मोम..मोम...एक साथ इतने सवाल....आराम से...

आकृति- ह्म्म..तो बता...क्या बोला सम्राट...

रेणु- असल मे सम्राट मिला ही नही...

आकृति- तो तू आ कैसे गई..मतलब...काम नही हुआ और तू आ गई...वो भी इतनी खुश...क्यो...??

रेणु- फिर से सवाल...ओके..मैं सब बताउन्गी...सम्राट की बात और अपनी खुशी का राज भी...पर पहले नाश्ता करते है...फिर...

आकृति- ह्म्म..तू फ्रेश हो जा...मैं नाश्ता बनाती हूँ...

थोड़ी देर बाद नाश्ते की टेबल पर...रेणु ने अपने पिता के मिलने की बात आकृति को बता दी...

आकृति(शॉक्ड)- ये...ये क्या कह रही है...ये हो ही नही सकता बेटा...

रेणु- क्या मतलब...?

आकृति- बेटा...मैं ये बोल रही हूँ कि तेरे पिता जिंदा नही हो सकते....

रेणु- अरे...मैने खुद उन्हे देखा है...और आप...

आकृति- पर बेटा..मैने भी खुद ही उनकी लाश देखी थी...तो ये कैसे मुमकिन है...

रेणु- ओह...तो सुनो...जो लाश आपने देखी थी...वो उनकी नही थी...किसी और की थी...वो बच गये थे...

आकृति- अच्छा...तो फिर सामने क्यो नही आए...क्यो छिपे है सबसे...

रेणु(मन मे)- ताकि आज़ाद को दूध कर मार सके...पर मैं आपको आज़ाद की बात नही बोल सकती...

आकृति(रेणु को हिला कर)- बोल ना...क्यो नही आते सामने...क्यो छिपे है...

रेणु- क्योकि ...क्योकि वो चाहते है कि आकाश ख़त्म होने तक ये ना जान पाए कि उसका सबसे बड़ा दुश्मन ज़िंदा है....

आकृति- और सम्राट...उसका क्या...

रेणु- वो मिल जायगा...डॅड ने कहा कि वो उसे देख लेगे...अभी मुझे उससे भी ज़्यादा ज़रूरी काम है...

आकृति- और वो क्या है...

रेणु- दामिनी से मिलना और रिचा.....ओके...अब मुझे खाने दो ...फिर मुझे जाना भी है...

और फिर रेणु , आकृति के साथ नाश्ता करते हुए आगे की सोचने लगी.........

 


अंकित के घर...........

सुबह जब मैं जगा तो पता चला कि 9 बज गये है....

पर मेघा तो सुबह 6 बजे आ जाती थी...आज वो आई नही...या आ कर चली गई....????

पर मेरे बिना वो जिम करेगी...नही-नही...शायद आई नही होगी....कही ऐसा तो नही की कल की हरक़त के लिए शर्मिंदा हो...शायद मूड बदल गया हो....चलो पूछ लेगे....

और मैं अपने आप से बात करते हुए बाथरूम चला गया....

जब फ्रेश हो कर नीचे आया तो देखा कि डॅड कुछ पेपर्स देख रहे थे...

मैं- मॉर्निंग डॅड....ये क्या ..सुबह-2 काम...

आकाश- नही..वो तो बस ऐसे ही...मॉर्निंग बेटा...

मैं- ओह...वैसे डॅड..इन्षुरेन्स वालो ने क्या बोला...

आकाश- कुछ खास नही...बोला कि इन्वेस्टिगेशन ख़त्म होते ही मनी ट्रान्स्फर हो जायगी...ओके...चल मैं आता हूँ...एक पार्टी से मिलना है...

फिर आकाश ने जल्दी से पेपर्स समेटे और बाहर निकल गया...आकाश की हड़बड़ाहट को वहाँ खड़ी सविता ने देख लिया था..जो कॉफी ले कर आई थी...

सविता- बेटा..ये सर को क्या हुआ...इतने हडबडाया क्यो है...

मैं- ओह...वो...आक्च्युयली वो लेट हो गये...कोई अर्जेंट काम था...आप कॉफी दो...

सविता कॉफी दे कर निकल गई...

मैं(मन मे)- एक बार ये पैसे आ जाए और शेर होल्डर्स को मिल जाय...फिर रफ़्तार की वॉट लगाउन्गा...

तभी मेरा फ़ोन बज उठा...और स्क्रीन देख कर ही मैं खुश हो गया...ये जूही का कॉल था....मैने कॉफी ली और घूमते हुए बाते करने लगा.....

( कॉल पर )

मैं- हाँ साहिबा...क्या हाल ...??

जूही- साहिबा...ये क्या है...

मैं- अरे ...साहब की साहिबा ही होती है....मैं साहिब तो तुम साहिबा....

जूही- हहहे ...अच्छा..वैसे मैं गुस्सा थी ...

मैं- हम से....??

जूही- हाँ...बहुत गुस्सा....

मैं- ह्म ....पर क्यो...

जूही- आप मुझसे मिलने जो नही आए...

मैं- ओह...सॉरी...मैं बिज़ी था...यू नो..मेरे डॅड का ओफ्फिस...

जूही(बीच मे)- हाँ..पता है...तभी तो कॉल किया ...वरना कॉल भी नही करती...

मैं- ओह ..थॅंक्स यार...मैं जल्दी मिलुगा...बस थोड़ा काम निपटा लूँ...

जूही- कल शाम को...और मुझे कोई बात नही सुननी...बाइ...

और जूही ने ऐसे फ़ोन कट कर दी , जैसे कर्ज़ा चुकाने की मोहलत दी और बात ख़त्म....

मैं जूही की बात पर मुस्कुराते हुए रूम मे ही जा रहा था कि एक बार फिर से फ़ोन बज उठा ...और एक बार फिर से मैं कॉलर का नाम देख कर खुश हो गया......ये अनु का कॉल था....

( कॉल पर )

मैं- हाई जान...

अनु- ह्म्म...जान बोलते हो और याद भी नही करते...

मैं- यार...तुम लोगो को यही शिकायत क्यो रहती है....

अनु- तुम लोगो को...और कौन आ गई...ह्म..

मैं(मन मे)- ये क्या बोल गया....फस गये...

अनु- बोलो..कितनी जान बना रखी है...

मैं- अर्रे...तुम भी ना...कोई नही है...मेरे लिए एक तुम ही हो...मेरी जान...

अनु- अच्छा...तो साबित करो...

मैं- क्या...मतलब...कैसे...

अनु- ठीक 20 मिनट मे मेरे रूम मे ...मेरे सामने मुझे जान बोलो...तब मानु....

मैं- अच्छा...तो अब मुझे अपनी जान को यकीन दिलाना होगा कि वो मेरी जान है...सो सॅड...

अनु- आप ना...अपनी ड्रामेबाजी बंद करो...अगर आप सच मे मुझे जान मानते हो तो 20 मिनट मे आप मेरे सामने होगे....आइ एम वेटिंग...

और अनु ने भी अपनी बात बोलकर , बिना मेरी बात सुने कॉल कट कर दी...

मैं- अजीब है ये लड़कियाँ भी...हर बात मे बस बात मनवाना है...हर बात साबित करो...उफ़फ्फ़..अब जाना ही होगा...वैसे भी मेघा का भी पता करना है...क्या हुआ उसको...

और मैने फ़ोन रखा और रेडी होने लगा....

 


रेडी हुआ ही था और फिर से फ़ोन बजना सुरू....और इस बार स्क्रीन पर रक्षा का नाम था....

मैं- आज साला गर्ल फ्रेंड डे है क्या....???

और मैने कॉल पिक की....

( कॉल पर )

मैं- हाँ जी...अब आपको क्या परेसानि है....

रक्षा- क्या...क्या कहा आपने...

मैं- वो..कुछ नही...बोल ना...कैसे याद किया...

रक्षा- बस यू ही...अभी नहा कर आई थी...

मैं- तो..क्या मैं तावीार करने आउ...

रक्षा- इउम्म्म...काश आ जाते..तो तावीार कौन होता फिर...

मैं- तो फिर क्या करती...

रक्षा- अगर आ जाते तो अपनी प्यास बुझा लेती...

मैं- तू तो बस...कितनी प्यासी है ...

रक्षा- बहुत...देखो मेरी चूत आपके नाम से ही फडक उठी...

मैं- अच्छा...चल बस भी कर....मैं आ गया ना तो खुद ही भाग जायगी...

रक्षा- भाग जाउन्गी...कभी नही...अरे आप आ कर तो देखिए...आपको अपने आप मे समा लूगी...

मैं- अच्छा...तो रुक..मैं आता हूँ...

और इस बार मैने बिना कुछ सुने फ़ोन रखा और संजू के घर निकल गया.....

जब मैं संजू के घर पहुचा तो पता चला कि संजू के पापा और पूनम , संजू की मौसी के घर गये है ..किसी फंक्षन मे...

और रजनी आंटी कामिनी के घर निकल गई...संजू के साथ...

तो मैं मेघा के रूम मे चला गया...वहाँ पता चला कि आज उन्हे फीवर आ गया....जिस वजह से वो आज नही आ पाई...

मैने उन्हे रेस्ट करते छोड़ा और अनु के रूम मे चला गया....मुझे लगा था कि रक्षा भी साथ होगी..बट वहाँ अनु अकेली मिली.....

मुझे सामने देख कर अनु की मारे खुशी की आँखे फटी रह गई...

उसे यकीन ही नही हो रहा था कि मैं सिर्फ़ 15 मिनट मे उसके सामने आ गया...

अनु को ऐसा खड़ा देख कर ..मैने गेट को अंदर से लॉक किया और उसके पास पहुच गया...

मेरे पास आते ही अनु की साँसे तेज हो गई...उसकी बॉडी मे कंपन सी होने लगी थी...

मैं- क्या हुआ जान...शॉक्ड...हां..

अनु- मैं..वो..आप...यहाँ...

मैने अनु के मुलायम गालों को अपने हाथो मे भरा ही था कि उसकी सिसकी निकल गई....

अनु की बॉडी की थरथराहट को मैं अपने हाथो से महसूस कर रहा था....

मैं- अनु...तुम ठीक हो..

अनु- उउंम..हाँ..पर आप..इतनी जल्दी...

मैं- अरे...मेरी जान ने आवाज़ दी और हम आ गये...

अनु- पर मैने तो बस...

मैं(बीच मे)-सस्शहीए...ये होंठ बहुत काँप रहे है...इन्हे ठीक कर दूं...

और मैने अनु के थरथराते होंठो पर अपने होंठ रख दिए...और होंठो का रस चूसने लगा...

फिर हम दोनो ही एक दूसरे के होंठो का रास्पान करते रहे...जब तक अनु का फ़ोन नही बजा...

फ़ोन की आवाज़ ने हमे वापिस होश मे लाया...

वो फ़ोन मेघा का था..जिसने अनु को नीचे बुला लिया....

अनु- वो..मोम की तवियत...आप..

मैं- ओके..ओके...रक्षा कहाँ है...??

अनु- वो पूनम दी के रूम मे होगी...मैं मोम के पास...

मैं(बीच मे)- जानता हूँ...तुम जाओ...और उनका ख्याल रखो...मैं रक्षा से मिल कर आता हूँ...फिर कॉफी साथ मे पिएगे...वैसे भी जिस काम से आया था..वो तो हो गया....

अनु कुछ नही बोली बस मेरी बात सुन कर शरमा गई और नीचे चली गई...और मैं पहुचा रक्षा से मिलने पूनम के रूम मे ....

मैं(नॉक कर के)- हेलो...

रक्षा- कौन...??

मैं- कौन की बच्ची....खोल ना....

रक्षा की तरफ से कोई आवाज़ नही आई...फिर थोड़ी देर मे मैने आवाज़ देनी चाही ..कि गेट खुल गया...और मेरे शब्द मेरे मूह मे रह गये....

मैं- रक़सस्शह.....वाउ...

रक्षा- कम तो मे माइ लव....

मैं तो रक्षा को देख कर ही शॉक्ड था ...उपेर से आज उसकी हॉट अदा...और भी क़हर ढा रही थी...

रक्षा मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा-पैंटी मे खड़ी हुई थी...उपेर से उसकी इतराती हुई आँखे...खुले बाल...वाउ...सो हॉट...

उसका अंग-अंग मादकता से भरा हुआ लग रहा घ...चिकना बदन....गुलाबी जॉंठ....कसे हुए बूब्स...और पैंटी मे क़ैद खजाना....

साला..ना चाहते हुए भी मूड बन जाए....

रक्षा- कम ऑन डार्लिंग...कम टू मी...

और रक्षा ने मेरा हाथ पकड़ के मुझे अंदर खीच लिया....और गेट लॉक....

मैं- रक्षा...तुम..तुम तो आज...

रक्ष मेरे करीब आई और मेरे गले मे बाहें डाल कर बोली...

रक्षा- सब कुछ आपके लिए...

और रक्षा ने पंजो के बल उपेर उठ कर अपने गुलाबी होंठ मेरे होंठो से चिपका दिए....

मैं तो उसे देखते ही गरम हो रहा था ...और आप उसके होंठो की गर्मी ने मेरी भूख को जगा दिया...

मैने रक्षा को अपनी बाहो मे कसा और उपेर उठा कर उसके होंठ चूसने लगा...

रक्षा भी कम नही थी...वो भी उतनी ही मस्ती से मेरे होंठो पर क़ब्ज़ा जमाए हुए थी...

मैं- आओउउंम...सस्स्रररुउउउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प्प्प...उउउम्म्म्म....

रक्षा- उउंम्म....उूउउंम्म...उउउंम...

आज हम दोनो ही काफ़ी जोश मे किस कर रहे थे...और बहुत देर तक किस्सिंग करते रहे......

किस करते हुए मेरे हाथ रक्षा की बड़ी हो रही गान्ड पर चले गये...जो पहले से ज़्यादा भारी लग रही थी...

मैं पूरी स्पीड से रक्षा की गान्ड दबाते हुए किस करने लगा...आज रक्षा की हॉटनेस्स पहले से ज़्यादा ही लग रही थी...लग रहा था कि आज जूरदार चुदाई होने वाली है....

आख़िरकार हमारा किस ख़त्म हुआ और हम दोनो ही जोरो से साँसे लेने लगे....

मैं- आअहह...आज तो तू ज़्यादा ही हॉट है...

रक्षा- हाँ भैया...आज बहुत मन हो रहा है...

मैं- ह्म्म..अब तो मेरा भी मूड हो गया....दिखा तो सही..मेरे खजाने का क्या हाल है...

और मैने रक्षा की गान्ड पर चपत मार दी...

रक्षा ने कुछ नही बोला...बस बेड पर जा कर कुतिया बन गई...और अपनी गान्ड को मेरे सामने कर के अपनी पैंटी की पट्टी साइड कर दी....

अब मेरे सामने रक्षा के दोनो छेद उजागर थे...और इन्हे देखने के बाद तो मेरा रहा-सहा मूड भी चुदाई के लिए रेडी हो गया.....

 


मैने रक्षा की गान्ड पर हाथ फिराया और फिर दोनो फाको को फैला दिया....अब उसके गुलाबी छेद खुले हुए दिखने लगे...

मैं- रक्षा....आज तेरी गान्ड गई....

रक्षा- उउउंम..तो आओ ना भैया...देर मत करो...

और मैने अपनी उंगलियों से रक्षा के दोनो छेदों को कुरेदना शुरू कर दिया...जो रक्षा की सिसकी निकालने के लिए काफ़ी था...

रक्षा- आअहह......भैया....तड़पाओ मत प्लज़्ज़्ज़...

मैं- थोड़ा तड़प ले बेटा...इसी मे तो मज़ा है...

और मैने दोनो छेदों मे अपनी उंगलिया डाल दी...

रक्षा- उउउंम्म...आअहह..भैया...नही ...

मैने रक्षा की बात पर ध्यान ना देते हुए उंगलियों को आगे-पीछे करना जारी रखा...

थोड़ी ही देर मे रक्षा की चूत ने मेरी उंगली को गीला कर दिया ..और मैने उंगलिया निकाल कर रक्षा के मुँह मे डाल दी...

मैं- ले ...अपना रस भी चख ले...

रक्षा- उउउम्म्म्म...आअहह...मुझे आपका चखाओ....

मैं- तो आजा फिर...

और रक्षा पलट गई और मेरा पेंट खोल कर नीचे किया और लंड को आज़ाद करते ही मुँह मे भर लिया....

रक्षा- उूउउंम्म....आअहह...अब मज़ा आया ना....उूउउम्म्म्मम...

मैं- ओह्ह...यस बेटा....यस....

रक्षा ने मेरे लंड को ऐसे चूसना शुरू कर दिया...जैसे जन्मो की प्यासी हो....

रक्षा- सस्स्रररुउउउगग़गग...सस्स्रररूउउग़गग...उूुुउउम्म्म्ममम....

मैं- यस ....ज़ोर से...आअहह...

रक्षा- सस्स्र्र्ररुउउउगग़गग....सस्स्रररूउउगग़गग...सस्स्रररूउउगगगगग...सस्स्रररुउउउगग़गग....

मैं- ओह यस....फास्ट बेबी....फास्ट...आअहह....

आज रक्षा से लंड चुसवाने मे अलग ही आनंद आ रहा था....और रक्षा भी पूरी शिद्दत से लंड को चूस कर तैयार कर रही थी....

थोड़ी देर बाद ही मेरा लंड पूरे जोश मे आ गया...और मैने रक्षा को रोक दिया....

रक्षा ने तुरंत अपनी पैंटी निकाल दी और टांगे फैला कर चुदने के लिए रेडी हो गई...

रक्षा- अब डाल भी दो भैया...देर ना करो...

मैने पेंट को पैरो से निकाला और आगे बढ़ कर रक्षा की चूत पर लंड रगड़ने लगा...

रक्षा- आओउउंम्म...अब डाल भी दो ना...

मैने रक्षा की एक टाँग उपेर उठाई और लंड को चूत की जगह गान्ड ने डाल दिया....

रक्षा- आआहह...गान्ड ही मार दी पहले....उउउम्म्म्म...

मैं- तो क्या....मेरा मान...

और मैने दूसरे धक्के मे ही पूरा लंड गान्ड मे डाल दिया....

रक्षा- आाऐययईईईईई......मार दिया...आआहह....

मैं- बड़ी गर्मी थी ना...अब झेल...

और मैने गान्ड मारना शुरू कर दिया....रक्षा भी चीख रही थी...पर मज़े से गान्ड मरवा रही थी...

रक्षा- आअहह....करो भैया करो...आअहह..आअहह..आअहह...

मैंन- यस बेटा....ले...ईएह..ईएह...

रक्षा ने अपने हाथ से अपनी चूत को मसलना शुरू कर दिया और गान्ड को हिला कर गान्ड मरवाने लगी...

रक्षा- श भैयाअ....फाड़ दो ...आहह..ज़ोर से...आआअहह....

मैं- हाँ बेटा....तू मज़ा कर...ये ले...एस्स..एस्स...

कुछ देर तक रूम मे सिर्फ़ चुदाई की आवाज़े गूँजती रही और रक्षा की सिसकारियाँ तेज होती गई....

रक्षा- आअहह...भैया...अब मैं गई...आअहह...आअहह...

और रक्षा झड़ने लगी....रक्षा के झाड़ते ही मैने स्पीड थोड़ी कम कर दी....

और लंड को गान्ड से निकाल कर रक्षा को इशारा किया....रक्षा ने जल्दी से उठ कर लंड को गले तक भर लिया और चूसने लगी....

आज रक्षा हार्ड चुदाई के मूड मे थी ..और मैं उसे वही दे रहा था...

थोड़ी देर तक लंड चुसवाने के बाद मैने रक्षा को कुतिया बना दिया और उसके उपेर आ कर गान्ड मे लंड पेल दिया...

इस बार मैने एक ही झटके मे पूरा लंड गान्ड मे डाल दिया...

 


इस बार रक्षा को दर्द हुआ और आँसू भी निकले पर वो रुकी नही...बल्कि और जोश मे बोली.....

रक्षा- आआहह.....भैय्ाआअ....अब रुकना मत..करो...

और मैने रक्षा की कमर पकड़ कर उसे तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया....

रक्षा- आअहह....करो भैया करो...आअहह..आअहह..आअहह...

मैंन- येस बेटा....ले...ईएह..ईएह...

रक्षा- ऊहह…आअहह…डालो…ज़ोर से…आहह….आहह..

मैं-यस….बेबी…टेक इट..टेक इट…

रक्षा-आहह…जल्दी करो…मेरआई चूत...आअहह...

मैं- तेरी चूत भी मारता हूँ रुक ज़रा.....

रक्षा- आअहह....तेज ...आअहह…आअहह….ज़ोर से,…

मैं रक्षा को पीछे से धक्का मारता और रक्षा अपनी गान्ड को पीछे धकेल्ति…ओर उसकी गान्ड मेरी जाघो पर टकरा कर थप-थप की आवाज़ करती....

थोड़ी देर बाद मैने लंड को गान्ड से निकाला और चूत मे डाल दिया....

और अब फुल स्पीड मे चूत की धज्जियाँ उड़ाने लगा....

रक्षा- आआहह…मज़ा…एयेए…ग्ग्ग...

ययय्या…आहह…..आहह..आह...

मैं-ऐसे ही मज़े…लो…यीहह….टेक इट……

रक्षा-आहह..आह..तेज..तेजज्ज़..तेजज…..ऊहह…….म्मा....

मैं-यस..बेबी….यस….टेक इट....फ़ील्ल..इट…बेबी

रक्षा-आआअहह….फास्ट..फास्ट,,,उउंम..आअहह….फास्ट,….ईीस…यईसस्स…ऊओ...भाय्याअ....

मैं 6-7 मिनिट से रक्षा को पूरी तेज़ी से चोद रहा था….रक्षा फिर से चुदाई की मस्ती मे झड़ने लगी…

रक्षा-आहह...म्मायन्न्न...आइी...ऊहह...येस्स्स...एस्स..आहह....

रक्षा के झाड़ते ही मैने उसे बेड पर लिटा दिया और लंड को उसके मुँह मे डाल के मुँह चोदने लगा....

मैं- अभी मेरा नही हुआ....अब होगा....ईएहह...यीहह...

रक्षा- उउउंम्म...उउउंम्म..उउउंम..उउंम...

मैं- ईएह...एस्स...टेक इट...यीएस्स्स्स...

रक्षा- उउंम्म...क्क्हूओंम्म..क्क्हुऊंम्म..क्क्हुउऊंम्म...

रक्षा के मुँह से एक भी शब्द नही निकल रहा था...सिर्फ़ थूक लंड के साथ बाहर आ रहा था...

मैने रक्षा के बूब्स को हाथो मे लिया और स्पीड बढ़ा दी...

करीब 5 मिनट की मुँह चुदाई के बाद मैने पूरा लंड रस रक्षा के गले मे उतार दिया...

और लंड निकलते ही रक्षा खांसने लगी और उसके मुँह से मेरा लंड रस और उसकी लार बाहर निकल आई...

थोड़ी देर बाद रक्षा नॉर्मल हुई और मुझे देख कर मुस्कुरा दी...

रक्षा- आअहह...आज तो रंडी की तरह चोद डाला...

मैं- तू तो मेरी छोटी रंडी ही है...सिर्फ़ बेड पर...समझी...

रक्षा- ह्म्म्मे..मुझे भी यही पसंद आया...

मैं- अब तू रेस्ट कर..मैं निकलता हूँ...अनु कॉफी के लिए वेट कर रही होगी...

और फिर रक्षा की दमदार चुदाई कर के मैं फ्रेश हुआ और नीचे आ गया...

नीचे अनु मेरा ही वेट कर रही थी...उसने मुझे कॉफी पिलाई और कुछ प्यार भारी बाते भी...

फिर मैं अनु को जल्दी मिलने का बोलकर घर निकल आया....

मैं घर की तरफ आ ही रहा था कि फिर से मेरा फ़ोन बज उठा....इस बार रूही का कॉल था...

मैं- ये अकरम की गर्लफ्रेंड को क्या हुआ....साला आज तो इन लड़कियों ने हद कर दी...अब इसे भी आग लगी है क्या...

 


और मैं गुस्से मे काल अट्टंड करते ही बोला....

मैं- अब तुझे क्यो आग लग गई...

पर सामने वाले की आवाज़ सुन कर मैं शॉक्ड हो गया और कार को ब्रेक मार दी...

मैं- अकरम...तू...पर ये नंबर तो...

अकरम- हाँ..ये रूही का नंबर है...आक्च्युयली मेरा बॅलेन्स ख़त्म हो गया..

मैं- ओह...बोल...क्या हुआ...

अकरम- मैने कुछ देखा...तो सोचा तुझे बता दूं...क्योकि ये बात तुझसे जुड़ी हुई है...

मैं- अच्छा....किस बारे मे बोल रहा है...

अकरम- यार...वो मैने अभी यहाँ रश्मि को देखा...वो तेरे घर मे काम करने वाली...

मैं- अच्छा...कहाँ पर...

अकरम- माल मे ..आइ मीन...माल की पार्किंग मे...

मैं- ह्म्म..तो क्या देख लिया तूने...

अकरम- आक्च्युयली वहाँ रश्मि किसी लड़की के साथ थी...

मैं(बीच मे)- लड़की या औरत....??

अकरम- भाई लड़की ही थी...पर कौन थी ये नही पता....उसने चेहरा छिपा रखा था...

मैं- तो होगी कोई फ्रेंड...इसमे खास क्या है...

अकरम- पूरी बात सुनेगा ...या नही...

मैं- अच्छा बोल..

अकरम- खास बात ये थी...कि पहले उस लड़की ने एक बड़ी सी गड्डी रश्मि को दी....

मैं(बीच मे)- पैसो की ...???

अकरम- फिर बोला...पूरी बात सुन पहले...और गड्डी पैसो की ही थी...

मैं- हाँ बोल...पूरी बात बोल...

अकरम- तो ...पहले उस लड़की ने रश्मि को पैसो की गड्डी दी...फिर वहाँ कुछ गुंडड़े टाइप के दो लोग आए..तो उन्हे रश्मि और उस लड़की ने कुछ समझाया और फिर रश्मि ने कुछ पैसे उन गुंडड़ो को दे दिए....और बाकी खुद ले गई...

मैं- क्या...तुझे यकीन है कि ऐसा ही हुआ था...और वो रश्मि थी...??

अकरम- 100% रश्मि थी...

मैं- ओके..तू उस लड़की का पीछा कर सकता है...??

अकरम- वो तो...वो निकल गई...पर मैं देखता हूँ...

मैं- ओके..तू उसे देख...मैं रश्मि को देख लूँगा...

अकरम से बात करने के बाद मैने सोच लिया कि अब रश्मि का गेम ख़त्म करने की बारी आ गई...

अब तक मैं सिर्फ़ इसलिए रुका था कि सोनम के डॅड का पता चल जाए...फिर रश्मि की बॅंड बजाउन्गा...बट अब दोनो काम जल्दी करने होंगे....पर अभी दामिनी का हाल देख लेता हूँ...

और मैने कार दामिनी के घर दौड़ा दी...

जब मैं दामिनी को देखने पहुचा तो वहाँ रजनी और रिचा मौजूद थी...

मैं वहाँ शाम तक बैठा रहा...बातें होती रही...और मैं दामिनी की आँखो मे झाँकता रहा...पता नही क्यो...पर मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था..जैसे दामिनी मुझसे कुछ बोलने ही वाली है...शायद मेरे दिल की चाह यही थी..इसलिए...

मैं कामिनी से भी उसके भाई के बारे मे पूछ नही पाया....क्योकि कामिनी भी सबसे घिरी हुई थी...

रात को जब सब चले गये तो सिर्फ़ मैं और रिचा ही दामिनी के पास थे...

रिचा ने मुझे भी चलने को बोला और उठ कर जाने लगी...

मैं भी उठा..पर तभी लगा कि मेरा हाथ पीछे खीचा गया.....पर जैसे ही मैं मुड़ने को हुआ..तभी गेट के अंदर 2 नौकरानी आ गई...और मेरा ध्यान उन पर चला गया...

फिर मैने मूड कर देखा तो दामिनी की आँखे बंद थी...और उसके हाथ के नीचे मेरा रुमाल था..जो मैने हाथ मे पकड़ रखा था...

मैं(मन मे)- ह्म्म..ये मुझे कैसे रोकेगी....ये बेचारी तो अपने आप को भी नही जानती...

और मैं अपने आप पर मुस्कुराते हुए घर आ गया...

घर आकर मैने देखा कि रश्मि अपने काम मे बिज़ी थी...उसे देखते ही मुझे अकरम की बात याद आ गई...

मैने अकरम को कॉल करके पूछा कि क्या उस लड़की के बारे मे पता चला...पर उसे निराशा ही हाथ लगी...

फ़ोन रख कर मैने सोचा कि अभी रहने देते है...रश्मि को बाद मे देखेगे...आज रात सोनी को निपटा दूं....

फिर मैं रेडी हो गया....सोनी के घर जाने को....आज स्मिता के साथ मेरी रात हसीन होगी...या फिर सोनी की जिंदगी गूंगीं होगी....??????????

जैसे ही सोनी ने गेट खोला तो मुझे सामने देख कर वो और ज़्यादा परेशान हो गया. .क्योकि परेशान तो वो पहले से ही था. ..

मैं- गुड'ईव्निंग मिस्टर.सोनी....

सोनी- गुड....ईव्निंग अंकित...आओ...

मैं- ह्म्म..लगता है की फ़ैसला ले लिया...हां...

और मैं अंदर चला आया ..और सोनी बिना कुछ बोले गेट लॉक कर के मेरे पीछे आ गया...

मैं(सोफे पर बैठ कर)- तो बोलो...कौन सा रास्ता चुना....

सोनी- अंकित...ये बात ..सिर्फ़ हमारे बीच ही ...

सोनी कहते हुए रुक गया बट मैं समझ चुका था कि ये क्या बोलना चाहता था...

मैं- हाँ..बिल्कुल....ये बात हम 3 के बीच रहेगी...हमेशा....मैं किसी औरत को जॅलील नही करता....ओके..

सोनी- थॅंक यू...

मैं- बट मेरी भी एक शर्त है...

सोनी(चौंक कर)- स..शर्त...क्या....??

मैं- आज इस घर मे जो भी होगा...वो तुम्हारी आँखो के सामने होगा...

सोनी(खीज कर)- ये क्या बोल रहे हो..मैं अपनी बीवी को किसी और के साथ...

मैं(बीच मे)- देखना पड़ेगा....यही तेरी सज़ा है...

सोनी- नही...ये नही हो सकता..

मैं(खड़े हो कर)- तो ठीक है...इंतज़ार करो...पोलीस का....

सोनी- नही...अंकित प्लीज़...इतना सितम मत करो....

मैं- नही सोनी...होगा तो यही...मंजूर हो तो ठीक ...वरना...

मेरी बात सुनकर सोनी कुछ नही बोला...बस सिर झुकाए कुछ सोचने लगा....

मैं- चलो फिर...ऐज यू विश...मैं चलता हूँ...

मैं जाने को हुआ ही था कि सोनी बोल पड़ा....

सोनी- सिर्फ़ एक बार...

मैं- ह्म्म..ठीक है...बाकी मैं अकेले मे ही करूगा...अब बुलाओ उसे ...मेरे पास टाइम नही फालतू का....

सोनी- वो तैयार है...बुलाता हूँ...

 
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