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चूतो का समुंदर



आकाश के ऑफीस मे........

आकाश के कॅबिन मे आकाश , अंकित , सुजाता और उनका वकील बैठा हुआ था....

अंकित- तो डॅड...आप किस काम के लिए मुझे लाए है...

आकाश- बेटा वो...असल मे...

सुजाता(आकाश को घूर कर)- असल मे बेटा...तेरे डॅड ने ये डिसाइड किया है कि अपने सारे ऑफिसस बंद कर के एक नई कंपनी खोली जाए ...तो उसी के पेपर्स है...अब सब तुम्हारे नाम है तो तुम्हारे साइन तो लगेगे ही...

मैं- ह्म्म..पर इसकी ज़रूरत क्या है...हमारा काम तो मस्त चल रहा है...क्यो डॅड...

सुजाता(गुस्से को कंट्रोल कर के)- अरे बेटा...आज कल सब आगे ही बढ़ते है...हम क्यो नही...

मैं- हम..ह्म..

सुजाता- मतलब तुम और तुम्हारे डॅड...

मैं- ह्म्म..तो न्यू कंपनी क्या है...

सुजाता- असल मे बेटा...वो कोई कंपनी नही...तुम्हारे डॅड सब बेचकर मार्केट मे पैसा लगाना चाहते है...उसमे बड़ा फ़ायदा है...

मैं- ओह..मतलब कोई कंपनी नही...कोई ऑफीस नही ...कोई एंप्लायी नही...

सुजाता - हाँ..ठीक समझे...इससे खर्च भी नही होगा..और मार्केट से आने वाला सारा प्रॉफिट अपना...

मैं- अपना मतलब मेरा ना...क्यो...

सुजाता- ह्म..वही ...तो लो बेटा साइन करो...

मैं- नही....ये नही हो सकता...मुझे ये पसंद नही...

सुजाता- पर क्यो...

मैं- पहली बात ये..कि मेरे एंप्लायीस को मैं बेरोज़गार नही कर सकता ...और दूसरी बात...

और मैं चुप हो गया....

सुजाता- दूसरी बात क्या है...

मैं(खड़ा हो कर सुजाता को घूरते हुए)- दूसरी बात ये...कि आप मेरे फॅमिली मॅटर मे घुसने की कोसिस मत करना...आइन्दा याद रहे...चलिए आप बाहर वेट करो..मुझे डॅड से कुछ बात करनी है..अकेले मे...

सुजाता मेरा गुस्सा देख कर चुपचाप बाहर निकल गई और मैने वकील को भी निकाल दिया...और डॅड से बाते करने लगा.....

आकाश- बेटा...और कब तक....

मैं- बस डॅड...कुछ दिन और...थोड़ा और झेल लीजिए प्ल्ज़्ज़...ट्रस्ट मी...

आकाश- ह्म्म..तुझ पर तो अपने आप से ज़्यादा भरोशा है...पर इसका कुछ करो..जल्दी...

मैं- उसका काम हो जायगा...आप मेरी बात सुनिए....

और मैं डॅड से कुछ बातें करने लगा......

अकरम के घर...........

अकरम ने काफ़ी देर माथापच्ची कर के 4 अल्फाबेट सेलेक्ट किए और पास्वोर्ड की जगह फीड किए....

"" एएएएस""

अकरम- यस...काम हो गया..उउंम..सबाश अकरम....तू सीबीआइ ऑफीसर ज़रूर बनेगा...येस्स्स...

पासवर्ड मॅच होते ही फिर से रूम की लाइट ऑन हो गई और दीवार पर लगी पिक्स न्ड मॅप्स टाइप पेपर्स अकरम की आँखो मे चमकने लगे....

अकरम जल्दी से आगे बढ़ा और एक पिक पर उसकी नज़र अटक गई...वो एक पति-पत्नी की पिक थी और पिक के नीचे उनकी डीटेल लिखी थी...

डीटेल पढ़ते ही अकरम को लगभग चक्कर आ गया और वह धीरे से ज़मीन पर घुटनो पर बैठ गया...

अकरम- ये सब...क्या ये सच है...नही...ये सच नही हो सकता..नही हो सकताआआअ .......

अकरम अपनी आँखो से जो देख और पढ़ रहा था ...उसे उस पर यकीन नही आ रहा था...इसलिए उसने कई बार पिक की डीटेल पड़ी...

फिर भी उसका मन नही भरा और वो खड़ा हो कर पिक को करीब से देख कर पढ़ने लगा...

""मिस्टर & मिसेज़ ख़ान...""

अकरम- न्न्नाहहिईीई....ये सच नही हो सकता...कभी नही...इतना बढ़ा सच...हुउऊः...क्या..क्या करू मैं....क्या करुउुउउ....

अकरम जैसे पागल सा हो गया और अपने आप से ही बड़बड़ाता हुआ बार-बार उस डीटेल को पढ़ता हुआ गुस्से मे फूंकारने लगा....

अकरम- ओके..रिलॅक्स अकरम..रिलॅक्स ....ये तो शुरुआत है....अब समझ आया कि इस ख़ुफ़िया रूम की ज़रूरत क्यो पड़ी....ज़रूर इसमे बहुत कुछ छिपा हुआ है...जिससे मैं आज तक अंजान था....

अकरम ने अपने आप को शांत किया और दीवाल पर लगी दूसरी पिक को देखने लगा...हर पिक के नीचे उस पिक की डीटेल लिखी हुई थी....

""अली ख़ान""

""आमीन ख़ान""

""आमिर ख़ान""

""सरफ़राज़ ख़ान""

तो ये सच है...मेरे डॅड ही सरफ़राज़ है...ओह्ह...अंकित ने सही बोला था...बिल्कुल सही...सरफ़राज़ ख़ान ही अपना नाम छिपा कर दुनिया को वसीम ख़ान बनकर धोखा देते रहे ...

अली ख़ान और आमीन....ये भी सच है...ये वसीम के मोम-डॅड है...और आमिर...ये है वसीम का भाई...हुह...आप ये कौन...

""परवेज़ ख़ान""

""गुलनार ख़ान""

""जावेद ख़ान""

""परवीन ख़ान""

""सकील ख़ान""

""सादिया ख़ान""

""गुल ख़ान""

ये सब कौन है...मैं सिर्फ़ सादिया और गुल को जानता हूँ...पर बाकी सब कौन है...ये कौन बतायगा...

खैर...इनका जवाब कौन देगा ये मैं जानता हूँ...अभी मुझे और भी बहुत कुछ देखना है...

और अकरम ने पिक्स के नीचे बने मॅप जैसे पेपर को देखना सुरू कर दिया.....

उस पेपर मे डाइयग्रॅम की हेल्प से इन सारे नामो का लिंक दिखाया गया था...इससे सॉफ पता चल रहा था कि कौन किस से किस तरह लिंक है...

अकरम- ओह माइ गॉड...इतना बढ़ा सच...ये तो मैं सोच भी नही सकता था....पर इसमे ज़िया, जूही और मेरा नाम क्यो नही है...और मेरी मोम का भी नही...क्या माजरा है...उफ़फ्फ़...ये वसीम ख़ान सच मे बड़ा खिलाड़ी निकला..दिमाग़ की धज्जियाँ उड़ा दी...

अकरम वो मॅप्स टाइप पेपर देखते हुए काफ़ी देर तक कुछ सोचता रहा....

अकरम- इसे बाद मे समझुगा....पहले बाकी सब तो देख लूँ...

फिर अकरम ने दूसरी दीवाल पर देखा...वहाँ अंकित की फॅमिली मंबेर्स की पिक्स लगी हुई थी...और उनके नीचे भी वैसा ही मॅप था...

उसी दीवार पर रिचा, कामिनी, दामिनी, रजनी , दीपा और सरद की फॅमिली पिक्स भी थी...उनकी डीटेल का भी एक माप था...

पर इस दीवाल की हर एक पिक के साथ एक छोटी सी पर्ची भी अत्तेच थी....अकरम ने ध्यान से वो पर्चिया निकाल कर जेब मे डाल ली और साथ मे सारे मॅप्स भी...

अब अकरम तीसरी दीवाल की तरफ मुड़ा तो चौंक गया....यहा अभी तक देखे हुए सारे पिक्स थे...और कुछ पिक्स पर क्रॉस का साइन बना हुआ था...

अकरम- अली..क्रॉस...अम्मीं...क्रॉस...ओह्ह..तो ये क्रॉस साइन उनके लिए है..जो अब दुनिया मे नही रहे....ह्म्म्म...

क्या बात है...वसीम ख़ान सच मे मझा हुआ खिलाड़ी है...हर एक सक्श को टारगेट करने का सोच रहा है...ह्म्म्मम...

अकरम- इस रूम मे सिर्फ़ ये पिक्स नही हो सकती...ऐसा कुछ और भी होगा जो वसीम की लाइफ से या उसके जानने वालो की लाइफ से जुदा होगा...ह्म्म..मेन रूम की एक -एक जगह तलास कर ही जाउन्गा....

अकरम ने पिक्स देखने के बाद रूम को अच्छी तरह खगाल्ना सुरू कर दिया....

पहले उसे एक रुमाल मिला...जिसमे लिखा था कि...""यस...मैं तैयार हू..""

अकरम- ये किसका हो सकता है...और ये किसके लिए लिखा है...देखेगे...अभी तलासी तो ले लूँ...यहा गर्मी ज़्यादा है...

और फिर अकरम को तलाशी लेते हुए टॅप रेकॉर्डर, कुछ काससेट्स और एक हंडी कॅम मिला...इसके अलावा उसे कुछ खत भी मिले...

अकरम ने सब चीज़े साथ ली और वहाँ से निकल आया....

अकरम- आहह..कितना गरम रूम था...एक बार और तलाशी लूँगा..बट बाद मे...अभी जो मिला...उसे देख तो लूँ...

अकरम ने सारा सामान बेड पर रखा ही था कि उसकी मोम ने गेट पीटना सुरू कर दिया...

सबनम- अकरम...बेटा तू अंदर है क्या...

अकरम- मर गये...अब ते सब..ओह गॉड...

अकरम ने जल्दी से सारे सामान को अलमारी मे डाला और दीवाल पर लगी पिक तो टेडा कर दिया...जिससे ख़ुफ़िया दरवाजा बंद हो गया...

फिर उसने अलमारी के उपेर रखी घड़ी को एक बार उठाया तो अलमारी फिर से सीधी हो गई और ख़ुफ़िया गेट छिप गया.....

सबनम- अकरम..कर क्या रहा है....

अकरम- हुह..हाँ मोम...

अकरम ने गेट खोल कर सबनम को ऐसा चेहरा दिखाया जैसे वह सो गया था...

सबमम- ओह..सो रहा था..चलो कोई नही...वो ड्राइवर आया है...कुछ काम है उसे...

अकरम ने एक बार अलमारी को देखा और सबनम के साथ निकल गया....

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अंकित के ऑफीस मे.........

अंकित ने अपने डॅड से बात की और उठकर दूसरे कॅबिन मे निकल गया....

अंकित के जाते ही बाहर खड़ी सुजाता गुस्से से भरी आकाश के कॅबिन मे आई और भड़क उठी...

सुजाता- तुम उसके बाप हो या वो तुम्हारा बाप...

आकाश- तुम ये क्या....क्या हुआ....

सुजाता- मैने पूछा...तुम उसके बाप हो या वो तुम्हारा बाप....

आकाश- अरे ..मैं ही उसका बाप हूँ...पर तुम गुस्से मे क्यो हो...

सुजाता- तो ये बताओ कि वो तुम्हारी सुनता क्यो नही...क्या उसे नही पता कि तुम उसके बाप हो...

आकाश- मैं क्या बोलू...वो ऐसा ही है...मन की करता है...

सुजाता- तो क्या बाप की भी नही सुनता..

आकाश- सुनता है...पर ..

सुजाता- पर क्या...तुम चुपचाप सुनते रहे और वो सब बोलता गया...उसने मुझे भी फटकार दिया...और तुम...

आकाश- सुजाता...भूलो मत कि आकाश अपने बेटे की हर बात मानता है...इसलिए मैं चुप रहा....

सुजाता- हुह...तुम सच मे उसके बाप बन गये...हाँ...पर याद रखो...ये भूल मत जाना कि तुम हो कौन..और किस काम के लिए आए हो यहाँ...

आकाश- नही..मुझे सब याद है...भरोशा रखो...

सुजाता- भरोशा...भाड़ मे जाओ तुम..तुम ना..किसी काम के नही....अब मुझे ही सब करना होगा...

आकाश- तुम..पर तुम क्या करोगी...वो तो तुम्हारी सुनेगा भी नही...

सुजाता- तुम चुपचाप तमाशा देखो...और मैं दिखाउन्गी की औरत चाहे तो कुछ भी करवा सकती है...बस देखते जाओ...

आकाश- पर मुझे तो बताओ कि तुम करने क्या वाली हो...

सुजाता- टाइम आने पर बता दूगी...अभी चुप बैठो..और ड्रिंक मग्वाओ..मेरा मूड सही करना है मुझे...तब जाकर कुछ सोच पाउन्गी....

और आकाश ने चुपचाप ड्रिंक का ऑर्डर दे दिया और सोच मे डूबी सुजाता को देख कर कुछ समझने की कोसिस करने लगा....

वहाँ दूसरे कॅबिन मे मैं अपनी ही सोच मे डूबा हुआ था...

मैं(मन मे)- इस सुजाता से जल्दी से सब कुछ पता चल जाए ..तो सही है..वरना ये कुछ ना कुछ हाथ-पैर मारती ही रहेगी....बस एक बार ये कुछ बक दे...फिर इसका ऐसा हाल करूगा कि साली रंडी से भी बदतर हो जाएगी....

बहुत होसियार समझती है भैन की लौडी...आज रात को इसका कुछ करना ही होगा...

पर ये आसानी से कुछ नही बकेगी...इसके लिए कुछ अलग ही करना होगा...कुछ ख़तरनाक...

तभी कॅबिन के गेट पर नॉक हुई और मैं अपनी सोच से बाहर आ गया....

मैं- यस...कमिंग....

गेट खोल कर सोनी और उसकी बीवी स्मिता अंदर आ गये और मुझे देखते ही स्मिता ने सोनी से छिप कर एक प्यारी मुस्कान दे दी...

मैं- अरे ...तो तुम स्मिता को ले ही आए...हाँ...

सोनी- जी..वो आपने कहा था ना कि...

मैं(बीच मे)- पर मैने उस रात ये भी कहा था कि अब तुम्हे ऐसी सिचुयेशन कभी नही देखनी होगी...भूल गये...

सोनी- नही सर..पर आज आपने...

मैं(बीच मे)- ओह हो..मेरे मुँह से ग़लती से निकल गया...क्या करे ...आपको देख कर स्मिता की मदमस्त जवानी याद आ गई तो मुँह से अपने आप ही निकल गया...

सोनी- तो अब..क्या मैं जाउ...

मैं- ह्म्म...जाइए...पर एक मिनट...

फिर मैने एक फाइल निकाली और सोनी को उसे एक क्लाइंट के पास पहुँचने को बोला ...

सोनी- जी सर...मैं स्मिता को छोड़ कर निकल जाउन्गा...

मैं- अरे यार...स्मिता चली जाएगी...आप बाहर से टॅक्सी मे बैठा दो..और आप क्लाइंट के पास निकलो...ये फाइल जल्दी पहुँचानी है...ओके...

सोनी- जी सर..

सोनी ने स्मिता को टॅक्सी मे बैठाया और क्लाइंट के पास निकल गया....

सोनी के जाने के कुछ देर बाद ही स्मिता मेरे कॅबिन मे आ गई...

स्मिता- मे आइ कम इन..

मैं- अरे आओ जान...तुम कम इन हो सको इसलिए तो तुम्हारे पति को भेजा है..आओ...

स्मिता जल्दी से मेरे पास आई और मैने उसे अपनी गोद मे खीच लिया...

स्मिता- आहह ..आराम से जानू...

मैं- अब आराम कहाँ...उउंम्म...टेस्टी लिपस्टिक...पूरी तैयारी से आई हो...

स्मिता- ह्म्म्मँ...जब आपका हुकुम मिला तो तैयार हो कर ही आओगी ना...उउंम्म..

और हम दोनो एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे....

थोड़ी देर बाद स्मिता टेबल पर झुकी हुई गान्ड मे मेरा लंड ले रही थी...तभी उसका फ़ोन बज उठा...वो सोनी का फ़ोन था...

स्मिता- आहह..रूको...इनका फ़ोन आ गया...

मैं- तो डरती क्यो हो...लौडस्पीकर ऑन करो और बात करते हुए गान्ड मरवाओ...

स्मिता ने वैसा ही किया...

स्मिता- हह..हेलो...

सोनी- तुम घर पहुँच गई...

स्मिता- हह..हम्म..सही जगह पहुँच गई...आओउउंम...

सोनी- क्या हुआ..तुम्हारी आवाज़...

स्मिता- आऔउन्ण..कपड़े ...हाँ..कपड़े धो रही थी तो सान्नस्स....उउःम्म्म..

सोनी- ओह...देखा ...सर कितने अच्छे है...

स्मिता- ह्म्म्मच..बहुत...उपेर से नीचे तक....उउंम...

सोनी- ये आवाज़ का हो क्या रहा है...

स्मिता- क्क़..कुछ नही...आप बोलो..

सोनी- कुछ नही...तुम अपना काम करो..और सिर को थॅंक्स का मेसेज कर देना..वो खुस हो जाएँगे...

स्मिता- ह्म्म..मैं पूरा खुश कर दूगी...आप फ़ोन रखो..मैं उन्हे खुश करती हूँ..ओके..बाइ...

और स्मिता ने फ़ोन काट कर पीछे देखा और हँसने लगी...

स्मिता- उसने कहा कि आपको खुश कर दूं...

मैं- तो करो फिर...

स्मिता- आहह...पूरा काम कर के ही जाउन्गी...ज़ोर से...आअहह...

और फिर कुछ देर तक कॅबिन मे चुदाई की आवाज़े गूँजती रही...और लास्ट मे स्मिता मेरे सामने बैठ गई और मैने उसके मुँह मे लंडरस की पिचकारियाँ मारनी सुरू कर दी...

तभी मुझे लगा कि गेट किसी ने खिला है और हमे देख रहा है...पर मैं बिना उसकी परवाह किए तेज धार स्मिता के मुँह मे चोदता रहा......

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सहर मे ही...एक घर मे........

एक औरत हवा मे टांगे उठाए लेटी सिसक रही थी और संजू उसकी चूत मे लंड पेल रहा था ....

औरत- आअहह...और तेज बेटा...और तेज...आहह....आअहह...

संजू- हाँ आंटी...यीहह...ईएहह....

औरत- उफ़फ्फ़...क्या चोदता है रे...तभी मेरी बेटी...आहह...तुझसे चुदवाने लगी....

संजू- हाँ आंटी...पर आप तो उससे भी अच्छी हो...क्या मस्ती मे चुदवाती हो..ईएहह....

औरत- ह्म्म्मी...ऐसे ही...ज़ोर से....तेज मार ना...आहह...

संजू ताबड़तोड़ धक्के मारता रहता है और कुछ देर मैं दोनो झड जाते है...

थोड़ी देर बाद दोनो कपड़े पहन कर रूम से बाहर हॉल मे आ जाते है जहाँ एक लड़की और एक लड़का गेम खेल रहे थे...

लड़की ने संजू को देख तो स्माइल कर दी...

लड़की- तो...मोम...कर ली बातें...

औरत(मुस्कुरा कर)- ह्म्म्म ..खुल कर...मज़ेदार बातें करता है संजू...

लड़की(मुस्कुरा कर)- मैं जानती हूँ...

संजू- ओके..मैं चलता हूँ...कल मिलेगे...

औरत- ओके बेटा...पर याद रहे...मैने जो कहा था....

संजू- जी आंटी...ओके अमर बाइ...कल मिलता हूँ...

तभी गेम खेलते हुए उस लड़के ने संजू को बाइ बोला और फिर से गेम खेलने मे बिज़ी हो गया....

औरत- एक ये है...पूरा दिन बस गेम ही गेम...

लड़की- खेलने दो मोम..ये अपना गेम खेलता है ...तभी तो हम अपना गेम खेल पाते है...हाँ..

और फिर दोनो माँ-बेटी मुस्कुराते हुए अंदर चली गई....

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अकरम के घर...........

अकरम को जैसे ही मौका मिला उसने अपने रूम से बॅग लिया और वसीम के रूम मे अलमारी मे रखा हुआ सारा सामान अपने बॅग मे डाल दिया...जो समान वो ख़ुफ़िया रूम से लाया था...

फिर सबसे नज़रे बचाते हुए वो वापिस अपने रूम मे आया और बॅग को छिपा दिया....

अकरम- उफ़फ्फ़...थॅंक गॉड..किसी ने देखा नही...वरना हज़ारों सवाल पूछ लेता...

थोड़ी देर तक अकरम ये सोचता रहा कि अब उसे क्या करना चाहिए...क्या ये सब अंकित को बता दे या खुद ही सच की तलाश मे आगे बढ़े....

अकरम- बाकी सब तो सामान को देखने के बाद सोचुगा...पहले उस सवाल का जवाब तो ले लूँ...जिसका जवाब मेरी मोम ही दे सकती है...

और ये सोच कर अकरम परेशानी की हालत मे सबनम के रूम मे पहुँच गया....

सबनम- अरे अकरम..आओ बेटा...पर ये क्या...परेशान दिख रहे हो...

अकरम- कुछ नही मोम..बस ऐसे ही...मुझे आपसे कुछ पूछना था...

सबनम(मुस्कुरा कर)- तो पूछ ना...आ बैठ..और पूछ क्या पूछना है...

अकरम- जी...मैं..आपसे...एक सवाल...

अकरम एक सवाल पूछने के लिए बेस बनाने की कोसिस मे था..पर वो नाकाम हुआ..और उसके दिल मे चल रही कस्मकस सबनम को नज़र आ गई...

सबनम- बेटा...सब ठीक है ना...तू घबराया सा क्यो है..बात क्या है...ऐसा क्या स्वाल है तेरा...पूछ बेटा....

अकरम- ह्म..मोम...मेरे डॅड का नाम क्या है...

सबनम- क्या..ये क्या सवाल हुआ..हाँ..

अकरम- मोम...बताइए ना...मेरे डॅड का नाम क्या है....

सबनम(थोड़े गुस्से मे)- ये क्या मज़ाक है...डॅड का नाम नही पता..हाँ...

अकरम(घूरता हुआ...ज़ोर से)- मोम...मेरे डॅड का नाम क्या है...बताइए...

सबनम(गुस्से से)- पागल है क्या..तेरी हिम्मत...

अकरम(बीच मे, सबनम को गुस्से से घूरते हुए)- मोम...मेरे डॅड का नाम क्या है...बोलो....

सबनम , अकरम की आवाज़ सुनकर और उसकी दहक्ति आँखे देख कर सहम गई...

सबनम- व्व..वसीम ख़ान....

अकरम(सबनम की आँखो मे आँखे डाल कर)- क्या..??

सबनम - वसीम ख़ान..पर...

अकरम(बीच मे)- वसीम ख़ान...हाहाहा....

अकरम सीधा हो कर ठहाका मार उठा और फिर सबनम की आँखो मे देख कर बोला...

अकरम(चिल्ला कर)- मोम.... ये अनवर ख़ान कौन है...?????????????

अकरम की रौबदार आवाज़ सुनकर सबनम को ज़ोर का झटका लगा...पर अनवर का नाम सुन कर तो उसकी हिक्की बढ़ गई...

उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी...आँखे फटी की फटी रह गई और पूरे बदन मे सनसनी फैल गई....

अकरम गुस्से से अपनी मोम को घूर रहा था और सबनम तो जैसे कही और ही खो गई थी....

सबनम बिना पलके झपकाए अकरम का ये नया रूप देख रही थी...जो आज से पहले कभी सोचा भी नही था ...

दूसरी तरफ अकरम अपनी मोम का ये हाल देख कर समझ चुका था कि उसकी मोम ही वो सक्श है जो उसके सवालो के जवाब दे सकती है....

अकरम- मोम...मोम....

सबनम(जैसे नीद से जागी हो)- ह..हा...क्या हुआ...हाँ...

अकरम- मोम...अब बताओ...अनवर ख़ान कौन है...

सबनम- क्क़..कौन अनवर ख़ान...मैं नही जानती ....

अकरम- अच्छा...पर आपकी आँखे तो कुछ और ही बोल रही है....

सबनम- क्क़..क्या मतलब...मैं क्या झूट बोलूँगी...हाँ...

अकरम- हाँ...बिल्कुल झूठ...मैं जानता हूँ कि आप अनवर ख़ान को बहुत अच्छी तरह से जानती है...समझी आप...अब सच बोलो ...

सबनम- मैने कहा ना कि मैं किसी अनवर को नही जानती...कौन है ये...और तुझे क्या पड़ गई उसके बारे मे जानने की....

अकरम- तो आप ऐसे नही बोलेगी...ह्म्म ..लगता है आपको सब बताना ही होगा...फिर बोलोगि...

सबनम- क्क़..क्या बताना होगा..हा..तू क्या बताआयययययई.....

सन्नम ने बोलना सुरू ही किया था कि अकरम ने अपनी जेब से एक फोल्ड फोटो निकाल कर सबनम के सामने कर दी....फोटो के नीचे लिखा था...""मिस्टर & मिसेज़ ख़ान..""( मिस्टर.अनवर & मिसेज़.सबनम अनवर ख़ान)

अकरम- ये देखो...और अब बोलो....कौन है ये...अब बताओ...क्या अब भी यही कहोगी कि आप अनवर ख़ान को नही जानती...हाँ...

अकरम का गुस्सा उसकी आँखो मे आग बन कर उभर आया था...अब वो सिर्फ़ सच सुनना चाहता था ....और इसी लिए अपनी मोम को गुस्से से देखे जा रहा था.....

फोटो देखने के बाद तो सबनम की हालत और भी ज़्यादा खराब हो गई...उसकी आँखे पहले से ज़्यादा फट गई थी..और इस बार आँखो से आसू बह निकले थे......

 


अकरम ने जब अपनी मोम की आँखो से आसू बहते देखे तो उसे अपने आप मे थोड़ा बुरा लगा....

उसे लगने लगा कि शायद वो कुछ ज़्यादा ही गुस्से मे आ गया...कुछ भी हो..आख़िर वो मेरी मोम है..और एक माँ से बेटा इस तरीके से बात करे तो सही नही होता....

अकरम अपने आप से शर्मिंदा हो ही रहा था कि गेट पर नॉक हो गई...गेट पर जूही थी...जो शायद अकरम की तेज आवाज़ सुन कर आ गई थी...

एक तरफ अकरम की मोम आसू बहा रही थी और दूसरी तरफ उसकी बेहन गेट नॉक कर रही थी...

अकरम(मन मे)- ओह गॉड...ये जूही कहाँ से आ गई...अगर इसने मोम को इस हाकत मे देख लिया तो लफडा हो जायगा...और उसके सवालो के जवाब कौन देगा...

अकरम ने कुछ सोचा और वो फोटो सबनम की गोद मे डाल कर रूम से निकल गया और जूही को बहाने से अपने साथ ले गया....

जूही ने आवाज़ आने की बात कही तो अकरम ने उसे जूही का भरम कह कर टाल दिया और कॉफी बनवाने के बहाने उसे रूम से दूर ले गया.....

यहाँ रूम मे अकरम के जाते ही सबनम ने फोटो उठाई और उस फोटो को सीने से लगा कर रो पड़ी...

सबनम- अनवर...

सबनम सिर्फ़ इतना ही बोल पाई और फुट-फुट कर रोते हुए अतीत की यादो मे खो गई.....

 
फ्लॅशबॅक...............

घर मे चारो तरफ चहल-पहल थी....घर के बड़े हॉल मे बैठे आज के दिन को खास बनाने की प्लॅनिंग कर रहे थे...

घर के बच्चे अपनी ही धुन मे घर मे चारो तरफ भाग दौड़ कर के धूम मचा रहे थे....

और एक कमरे मे सबनम आईने के सामने खड़ी हुई अपनी खूबसूरती को मेक-अप के ज़रिए और भी ज़्यादा खूबसूरत बना रही थी.....

अचानक एक मर्द रूम मे दवे पैर दाखिल हुआ और सबनम को पीछे से अपनी बाहों मे भर लिया........

सबनम- आहह...क्या करते हो अन्वर...कुछ तो शर्म करो....

अनवर(सबनम को पीछे से बाहों मे ले कर)- शर्म...वो क्यो....भाई अपनी बीवी को गले लगाने मे कैसी शर्म ...ह्म...

सबनम- ओह हो...पर ये तो सोचो कि घर मे हमारे अलावा भी और लोग है...और हमारे बच्चे भी तो है...वो देख लेगे तो क्या सोचोगे...

अनवर(सबनम के गले को किस कर के)- उउम्मह...यही सोचेगे कि उनके डॅड उनकी मोम को बहुत प्यार करते है...

सबनब- धत्त...तुम भी ना...कभी नही सुधरोगे....

अनवर- अच्छा....पहले तो हमारा प्यार करना बहुत भाता था..और अब...उूउउम्म्म्मम......

सबनम(अनवर को छेड़ते हुए)- उउंम...इसी प्यार की वजह से तो मैं ठीक से बड़ी नही हो पाई...जवान होते ही शादी हो गई...और मैं जवानी के मज़े नही ले पाई...

अनवर- ओह हो...तो मेरे साथ आपको जवानी के मज़े नही मिले...कोई दूसरा चाहिए क्या...

सबनम(गुस्से से)- हुह...क्या कहा...जाओ...मैं अब दूसरा ही ढूँढ लूगी...ऐसा ही समझते हो ना मुझे...

अनवर- अरे जान...गुस्सा नही होते...मैं तो बस...

सबमम(बीच मे)- जाओ ...अब मैं दूसरा ही ढूढ़ूँगी...तब देखना...

अनवर- ओह हो....इतना गुस्सा...कम से कम आज तो सिर्फ़ प्यार करो...आज हमारी शादी हुई थी...याद है ना...

सबनम- याद...मैं इतना सज -सवर कर खड़ी हूँ....तब भी पूछ रहे हो...और प्यार...तुम ही ये दूसरे की बात करने बैठ गये...हुह...

सबनम थोड़ा इतराने लगी तो अनवर ने अपने हाथो को उपर ला कर सबनम के बूब्स दबा दिए...सबनम सिहर उठी...

सबनम- ओह..अनवर...कोई आ जायगा...प्लीज़...मत करो..

अनवर- क्यो..अब जवानी के मज़े नही लेने....

सबनम- लेने है...पर बच्चे....आहह...

अनवर(बूब्स दबा कर)- वो नही आएँगे...तुम मज़े करो....

अनवर ने सबनम के कंधे और गालो को किस करते हुए उसके बूब्स दबाने चालू कर दिए...और सबनम भी मज़े मे सिसकने लगी....

तभी बाहर से आवाज़ आई...ये आवाज़ अनवर के डॅड और सबनम के ससुर की थी...मिस्टर.जावेद ख़ान....

( यहाँ आपको अनवर और सबनम के घरवालो की डीटेल बताता हूँ)

मिस्टर. जावेद ख़ान - अनवर के डॅड

मसेज. परवीन जावेद ख़ान - अनवर की मोम

मिस्टर. परवेज़ ख़ान - सबनम के डॅड

मिसेज़. गुलनार परवेज़ ख़ान - सबनम की मोम

मिसेज़. सादिया ख़ान - सबनम की सिस्टर

मिस्टर. सकील ख़ान - सादिया का पति

और

सरफ़राज़ ख़ान - जावेद ख़ान का दूसरा बेटा और अनवर ख़ान का छोटा भाई....

जावेद- अरे सबनम बेटी...कहाँ हो...देखो तुम्हारे अम्मी-अब्बू आए है...और हां...तुम्हारी बेहन और बहनोई भी आए है...बाहर आओ बेटी...

अनवर और सबनम ने जावेद की आवाज़ सुनी तो तुरंत अलग हो गये और अपने आप को ठीक कर के बाहर आ गये...

परवीन- लो...आ गई मेरी बच्ची...आओ बेटी...

सबनम बाहर आई और सबको सलाम करने लगी...और अनवर भी सबसे मिलने लगा....

सब लोगो ने अनवर और सबनम को शादी की मुबारकबाद दी और फिर सब बैठ कर चाइ-नाश्ता करने लगे....बच्चे भी वही आ गये थे...

लेकिन सरफ़राज़ का किसी को कुछ पता नही था....उसका फ़ोन भी नही लग रहा था.....

अनवर- अब्बू...सरफ़राज़ कहाँ है...

जावेद- पता नही बेटा...आज-कल उसका कोई पता ही नही रहता...कुछ दिनो से उसका बर्ताब बदला हुआ सा है...

अनवर- ह्म....मैं बात करूगा...

फिर सबने नाश्ता ख़त्म किया और घूमने के लिए निकल गये....

माल मे घूमते हुए अनवर सीडीयों पर फिसला तो सबकी जान निकल गई...पर थॅंक गॉड...उसे कुछ नही हुआ....उसने अपने आपको संभाल लिया....

रात को डिन्नर कर के सब सोने आ गये...और अनवर भी सबनम के साथ रात एंजाय करने लगा...

अनवर ने सबनम को एक बार चोदा और फिर दोनो बातें करने लगे...

अनवर- सब्बो...आज कुछ पल के लिए मुझे लगा था कि मैं सीडीयों से गिरा तो बच नही पाउन्गा...

सबनम- चुप..ऐसा नही सोचते...आपको कुछ हो गया तो मैं जीते जी मर जाउन्गी...

अनवर ने सबनम की आँखो मे झाँका और उसको अपने उपेर कर के किस करने लगा...

अनवर- उउंम्म...कितनी गरम हो तुम...फिर से तैयार हो गई...

सबनम- ह्म्म्म...और मैं हमेशा ऐसे ही रहूगी..हॉट...और रगड़ के चुदवाउन्गी...उउउंम..

अनवर- उउंम...पर कभी मैं ना रहूं तो...

सबनम- बस भी करो...उउउंम्म...

अनवर- उउंम..अच्छा..मेरा गिफ्ट कहाँ है...

सबनम- आपकी बाहों मे...

अनवर- ये तो मेरा ही है..पर आज के खास दिन पर मुझे गिफ्ट नही दोगि...

सबनम- ह्म्म..पहले तुम दो...फिर मैं दूगी...

अनवर- ह्म्म...तुम्हारा गिफ्ट कल मिल जायगा...एक डायमंड नक्लेशस..ऑर्डर दिया था...टाइम पर मिला नही....

सबनम- रियली...उउउम्म्म्मम...थॅंक यू जानू...

अनवर- अब मेरा गिफ्ट...

सबनम- आप बोलो..क्या चाहिए...

अनवर- एक वादा...

सबनम- दिया...

अनवर(अपना हाथ दिखा कर)- पक्का...

सबनम(हाथ मे हाथ रख कर)- आपकी कसम...जो भी कहो...मेरी हाँ होगी...वैसे क्या वादा चाहिए...

अनवर- अगर मुझे कुछ हुआ तो तुम दूसरी शादी करोगी...पक्का...

सबनम(गुस्से से)- ये सब क्या है...कैसी बातें कर रहे हो...

अनवर- यू लव मी ना....तो वादा रहा..

अनवर ने सीरीयस हो कर बोला..सबनम उसकी आँखे देख कर इमोशनल हो गई और सुबकने लगी...

सबनम- क्यो...

अनवर- क्योकि मैं चाहता हूँ कि मेरी जान सारी जिंदगी मज़े से गुज़ारे....मैं नही रहा तो वो जीना ना छोड़े...ब्कोज़..मैं तुम्हे हमेशा खुश देखना चाहता हूँ...बोलो वादा ना...

सबनम(रोते हुए)- वादा....आइ लूव यू...लव यू...मैं सारी जिंदगी तुम्हारे साथ ही मज़े से गुज़ारुँगी...अल्लाह हमारे प्यार को बरकत दे...उउंम..उउंम..उउंम..

और सबनम ने अनवर को कस कर गले लगा लिया और रोने लगी...थोड़ी देर बाद...

अनवर- अब रोती ही रहोगी जान...मेरा ख्याल नही करोगी...देखो मेरा हथ्यार तुम्हारी फूली हुई गान्ड को देख रहा है...

सबनम(आँख सॉफ कर के )- ह्म्म..मेरी गान्ड भी इसको आगोश मे लेने तड़प रही है...उउउंम्म...

और फिर अनवर और सबनम गान्ड चुदाई करने लगे......

रात भर अनवर ने सबनम की जोरदार चुदाई की और फिर दोनो एक-दूसरे की बाहों मे चिपक कर सो गये......

नेक्स्ट मॉर्निंग.....अनवर रेडी हुआ और सबको बाइ बोल कर किसी मीटिंग के लिए सहर के बाहर चला गया.......और वापिस......

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अकरम-मूओंम्म्मममममम

यहाँ अकरम ने जूही को उसके रूम मे छोड़ा और भाग कर सबनम के रूम मे आ गया और गेट लॉक कर के बोला...

अकरम- मोम...मोममम्मम..

अकरम की आवाज़ सुन कर सबनम यादो से निकल कर प्रेज़ेंट मे आ गई...

सबनम(फोटो को सीने से लगाए हुए)- हह..हां...

अकरम- अब तो सब क्लियर है कि आप अनवर को जानती है...जो मैने देखा...वो भी सच है...पर अब मुझे सच आपके मुँह से सुनना है....

सबनम- क्क़...कैसा सच...

अकरम- यही कि ये साला अनवर ख़ान है कौन...साला माद...

सबनम(गुस्से से)- अकरम..एक भी ग़लत लब्ज अपने मुँह से मत निकालना उनके बारे मे....

अकरम(हँसते हुए)- ओह...तो इतना प्यार है उस कमीने...

सबमम(ज़ोर से)- अकरम...बोला ना...एक भी ग़लत लब्ज नही...

अकरम(गुस्से से)- क्यो..क्यो नही...आपका खास होगा...पर मेरा नही..मैं तो बोलूँगा..बेह्न्चोद हरामी, मदर......

छ्चाताअक्ककककककक.......

सबमम ने खड़े होकर एक जोरदार थप्पड़ अकरम को जड़ दिया...और रोने लगी...

अकरम अपना गाल पकड़ के घूमा और अपनी माँ को घूर्ने लगा...

अकरम- मुझे थप्पड़...आख़िर कौन है ये कमीना...

चात्ताअक्कककककक.....

सबनम(गुस्से मे चिल्ला कर)-चुप कर....तेरा बाप है वो.....हाँ...अनवर ख़ान तेरा बाप है....

और सबनम फुट-फुट कर रोने लगी.......

एक तरफ सबनम रोए जा रही थी तो दूसरी तरफ सच सुनके अकरम का बुरा हाल हो गया था......

अकरम सच सुन कर जड़ हो गया....उसका सिर घूम गया और वह किसी कटे पेड़ की तरह गिर कर उसी बेड पर बैठ गया जिस पर सबनम बैठ कर रो रही थी...

अकरम को ये लग रहा था कि उसकी माँ ने सिर्फ़ अपनी शादी का सच छिपा कर रखा था...पर यहाँ तो कहानी ही अलग निकली....

जिस अनवर ख़ान को वो सिर्फ़ अपनी माँ का पति समझ रहा था...वो तो उसका बाप निकला....मतलब ये सॉफ हो गया की वसीम ख़ान, अकरम का बाप नही....

अब सवाल ये था कि वसीम असल मे है कौन...क्या वसीम वही सरफ़राज़ है जो अनवर का भाई था...या फिर कोई बाहरूपिया ...जो सरफ़राज़ की जगह ले कर बैठा है....

अकरम को अब बहुत कुछ जानने की इक्षा जाग गई...उसे अब सारे सवालो के जवाब चाहिए थे...उसके डॅड के बारे मे...दादा-दादी, नाना-नानी एट्सेटरा...सबके बारे मे जानना था उसे...

अकरम ने सोच लिया कि वो आज सब जान कर रहेगा...उसके बाप को क्या हुआ..बाकी फॅमिली कहा है..और सबसे बड़ी बात...वसीम और सरफ़राज़ नाम का सच......क्योकि अब अकरम थोड़ा सा कन्फ्यूज़ था कि क्या वाकई मे वसीम और सरफ़राज़ एक ही सक्श है या फिर वसीम ने सरफ़राज़ की जगह ले ली....

पर इस समय सबनम की हालत देख कर उसने चुप रहना ही बेहतर समझा....उसने सोचा कि सबनम को रो कर अपने दर्द को निकाल लेने दो...फिर बात करूगा ...

कुछ देर तक अकरम ने वेट किया पर कोई फ़ायदा नही हुआ...सबनम अभी भी सूबक रही थी...

अकरम- मोम...मोम...

सबनम(अकरम को देखा भी नही...बस सुबक्ती रही)

अकरम- मोम..प्ल्ज़ मेरी बात सुनिए....ये बहुत ज़रूरी है....

सबनम(अकरम को देख कर)- हुह...

अकरम- मोम...आप ठीक हो ना....मोम..

अकरम ने प्यार से सबनम के कंधे पर हाथ रखा....

सबनम- अकरम...मुझे अकेला छोड़ दे ...

अकरम- मोम...मुझे आपसे कुछ बात करनी है...

सबनम- अभी मुझे अकेला छोड़ दो अकरम....

अकरम- मोम..पर मेरे लिए ये ज़रूरी है...मेरा दिमाग़ बहुत से सवालो से फट रहा है....

सबनम(आसू पोछ कर)- अकरम....प्लीज़ अभी मुझे अकेला छोड़ दे...फिर मैं खुद तेरे हर सवाल का जवाब दुगी...प्ल्ज़ बेटा....

अकरम ने अपनी मोम की आँखो मे एक दर्द छलक्ता देखा और वो मान गया....

और फिर अकरम ने सबनम को रोने दिया और अपने रूम मे आ कर दिमाग़ मे चल रहे सवालो के बारे मे सोचते हुए लेट गया......

अकरम(मन मे)- सच कहते है...जिंदगी के कई रंग है...और हर एक पल जिंदगी मे एक नया रंग दिखता है....

किसी ने ये भी सच कहा है कि जीवन का हर एक पल खास होता है...और हर एक पल अपने साथ कुछ नया ले कर आता है...

आज ये अहसास हुआ कि जिंदगी कितनी टेडी चाल चलती है ..ये हमे पल भर मे कहाँ से कहाँ ले जा सकती है....

कुछ टाइम पहले तक जो मेरे लिए सबसे खास था...वो अब अंजाना हो गया...और एक ऐसा सक्श...जिसका मैने नाम भी नही सुना था...उससे मेरा वो रिश्ता निकला जो इंसान की जिंदगी का पहला रिस्ता होता है ..

हा ..माँ-बाप से ही इंसान की जिंदगी का पहला रिश्ता बनता है.....वही रिश्ता मेरा अनवर ख़ान से निकला.....

ऐसे ही ख्यालो मे खोया अकरम कब सो गया उसे पता ही नही चला....

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अंकित के घर.............

ऑफीस मे स्मिता की दमदार चुदाई करने के बाद मैं कुछ देर तक ऑफीस मे रहा और फिर घर आ कर पारूल के साथ हसी-मज़ाक करते हुए सो गया....

मेरी नीद तब खुली जब शाम को शीला का कॉल आया....

( कॉल पर )

मैं- हुह ...

शीला- हुह क्या....सो रहे हो....

मैं- हुह...पर तुम सोने कहाँ देती हो...

शीला- अच्छा...मैने कब डिस्टर्ब किया...हाँ,...

मैं- तुमने तो नही....पर तुम्हारी यादो ने सोने ही नही दिया....

शीला- अच्छा....ह्म्म...वैसे क्या याद किया...आइ मीन मुझे याद कर के क्या सोच रहे थे...

मैं- कुछ खास....

शीला- खास...पर क्या...मैं भी तो सुनू...

मैं- ह्म्म...जैसे की तुम्हारे साथ बिताया हर पल...और खास कर तुम्हारे साथ किया गया डॅन्स...उउउंम्म...बहुत याद आता है...

शीला(मन मे)- जानती थी...पूरे डॅन्स मे मेरी गान्ड ही सहला रहे थे...याद तो आनी ही थी...

मैं- सच मे..तुम्हारे साथ बिताया हर पल याद आता है....

शीला- ओह्ह..तो याद क्या करना....मिलने आ जाओ...आज फिर डॅन्स करेंगे...हूँ...

मैं(मन मे)- जानता था कि तू डॅन्स ज़रूर करेगी....कल जो मेरे हाथो ने तुझे गरम किया था...वो कैसे भूल सकती है तू....

शीला- अब जल्दी से रेडी हो और आ जाओ...मैं इंतज़ार कर रही हूँ....और हाँ..मेरे घर आना...आज मेरी कार खराब है...

मैं- ओके...मैं बस 30 मिनट मे आया....

और फिर कॉल कट कर के मैं रेडी हुआ और शीला के घर निकल गया....

मैं जैसे ही उसके घर के सामने कार से निकला तो फिर से मेरी नज़र नाम प्लेट पर पड़ी.....""अम्त 12""

फिर मैं अंदर आया तो शीला मुझे नाइटी पहने हुए दिखी...

मैं- अरे यार...तुम तो रेडी भी नही हुई...

शीला- रेडी ....वो किसलिए....

मैं- कमाल है...तुमने खुद बोला कि क्लब साथ ने चलते है...और अब...क्या हुआ....

शीला- ह्म्म..पर मैने बोला था की आज फिर डॅन्स करेंगे...याद करो..

मैं- हाँ...पर डॅन्स क्लब मे ही होगा ना...

शीला- क्या यहाँ डॅन्स नही हो सकता....

मैं- यहाँ....पर यहाँ कैसे...और डॅन्स जैसा महॉल भी नही...क्या बोल रही हो....

शीला- ह्म्म...ओके...अगर महॉल वैसा हो तो...??

मैं- महॉल...वैसे तुम साथ मे हो तो महॉल कहीं भी बन जायगा....

शीला(मुस्कुरा कर)- आओ मेरे साथ...

और फिर शीला मेरा हाथ पकड़ कर मुझे एक हॉल मे ले गई...

मैं उस जगह को देख कर खुश हो गया...वो जगह तो बिल्कुल क्लब की कॉपी लग रही थी....

एक तरफ बार काउंटर...एक तरफ बड़े-2 साउंड....पूरे हॉल मे ब्लिंक करती हुई झूमर और हल्की नीली रोशनी से भरा हुआ पूरा हॉल...

सच मे ...ये जगह तो क्लब ही लग रही थी....

शीला- तो...अब क्या कहते हो...

मैं- सुपर्ब यार...क्या जगह है...बिल्कुल क्लब जैसी...

शीला- ह्म्म..तो अब बोलो...यहा डॅन्स हो सकता है ना...

मैं- बिल्कुल...जब तुम साथ हो तो फिर क्या टेन्षन....आज यही डॅन्स होगा....

शीला(मेरे पास आ कर अपने हाथ मेरे कंधे पर रख कर)- तो सुरू करे...

मैं- ह्म्म..पर थोड़ी सी कमी है अभी...

शीला- क्या...??

मैं- म्यूज़िक न्ड ड्रिंक...तुम म्यूज़िक स्टार्ट करो...मैं ड्रिंक बनाता हूँ...फिर मज़े से डॅन्स करेंगे...

फिर शीला मुस्कुरा दी और म्यूज़िक लगाने चली गई...यहाँ मैं ड्रिंक बनाने लगा...जब तक एक रोमॅंटिक सॉंग बजने लगा.....

हम दोनो ने ड्रिंक किया और म्यूज़िक सुनते हुए हसीन महॉल मे खोने लगे....

4-5 पेग के बाद मैं उठा और शीला को लेकर डॅन्स करने के लिए रेडी हो गया...शीला ने भी झट से अपनी बाहें मेरे गले मे डाल दी और मैं उसकी कमर पकड़ कर डॅन्स करने लगा....

शीला- उम्म..अब क्या कहते हो.....

मैं- यू आर सो स्मार्ट....

शीला- ह्म्म..पर तुमसे कम...

मैं- अच्छा....क्या मतलब....

शीला- तुम जानते हो मेरा मतलब....

मैं- नही जानता...और इस टाइम जानना भी नही चाहता...मुझे इस हसीन शाम का मज़ा लेने दो....

शीला- और मैं...मुझे मज़ा नही दोगे....

मैं- क्यो नही...इसी लिए तो आया हूँ...

और इतना कह कर मैने शीला को आगे खीच लिया और डॅन्स जारी रखा....

अब शीला के बूब्स मेरे सीने पर चुभने लगे थे...और उसका चेहरा भी मेरे चेहरे के करीब था...

शीला इस टाइम सिर्फ़ नाइटी मे थी...उसकी नाइटी कमर पकड़ने की वजह से थोड़ा उपेर आ गई थी और उसकी जाघे दिखने लगी थी....उसके बूब्स भी बिना ब्रा के थे...और नाइटी मे से उनकी गहराई सॉफ नज़र आ रही थी...

इतना सीन ही मुझे गरम करने के लिए काफ़ी था...

और मैने अपने हाथ आगे कर के शीला की गान्ड पर रखे और उसे अपने पास खीच लिया अब उसके बूब्स पूरी तरह से मेरे सीने से दव गये थे..और उसकी मुलायम गान्ड मेरे हाथो मे थी..जिसे मैं सहला रहा था और शीला मन ही मन सिसकते हुए एंजाय कर रही थी......

मैं- उउंम्म...क्या खुसबु है....(मैने शीला के कान के पास सास ले कर बोला)

शीला(मुस्कुरा कर )- यू लाइक इट....

मैं- येस...वेरी नाइस...उूउउम्म्म्म....

शीला- ह्म्म...बहुत तेज हो...सच मे...

मैं- पता नही ....

और मैने अपने हाथो की पकड़ शीला की गान्ड पर बढ़ा दी...अब मेरी उंगलियाँ उसकी गान्ड की दरार पर चुभ रही थी....और शीला भी इस अहसास से सिसक उठी...

शीला- आआहह...

मैं- क्या हुआ....कुछ हुआ क्या...

शीला ने मुस्कुरा कर ना मे गर्दन हिला दी...

अब मैं समझ गया कि शीला ज़्यादा देर तक दूर नही रह पायगी...पिघल जाएगी....

और मैने अपनी उंगलियों को शीला की गान्ड की दरार मे घुसाना सुरू कर दिया....

शीला- उउंम्म...

और शीला ने अपने हाथो की पकड़ मेरी गर्दन पर बढ़ा दी और मुझसे और ज़्यादा चिपक गई....अब उसके होंठ मेरे होंठो के बिल्कुल करीब थे...और उसके कड़क हो चुके निप्पल तो मेरे सीने को छेड़ने के लिए तैयार खड़े थे....

हम इसी पोज़िशन मे कुछ देर तक डॅन्स करते रहे...तभी नेक्स्ट सॉंग स्टार्ट हो गया...और उसे सुनते ही शीला की आँखो मे शरम आ गई....

""भीगे होठ तेरे.....प्यासा है दिल मेरा.......""

ये सॉंग बजते ही मैं मुस्कुरा दिया और शीला की आँखो मे देखने लगा...शीला शर्मा गई और आँखे बंद कर ली...

थोड़ी देर बाद ही शीला ने अपने रसीले होंठो को खोल दिया...उसकी आँखे अभी भी बंद थी....

मैं- शीला...आल्ल...आल्लोव..अल्लोव मी...

शीला(आँखे खोल कर)- ओह हो...तुम बहुत बात करते हो...और काम कम...उूउउम्म्म्मममम.....

और शीला ने अपने रसीले होंठ मेरे होंठो पर रख दिए.....और मैने भी पूरा साथ दिया और दोनो एक-दूसरे के होंठो का रास्पान करने लगे....

शीला- उउउंम्म..अओउउंम्म...उउउम्म्म्म...उउउंम्म.....

मैं- आआओउउउंम्म..उउउंम्म...उूउउम्म्म्म...उउउंम्म...

शीला- उउउंम्म...आहह...यू लाइक इट ना...उूउउंम्म...उउउम्म्म्म...

मैं- उउउम्म्म्म..आहह...एस डियर...सो मच....उूुउउम्म्म्मम...

मैने शीला की गान्ड को पकड़ कर उसे उपेर उठा लिया और शीला ने भी अपनी तागे मेरी कमर मे लपेट ली और जोश के साथ मेरे होंठ चूसने लगी...

मेरा हाथ अब शीला की गान्ड को खुल कर दबा रहा था...मेरी उंगलियाँ उसकी गान्ड के छेद तक पहुँच चुकी थी...मैने नाइटी के उपेर से ही उसके छेदों को उंगली से कुरेदना चालू कर दिया और शीला मस्त हो कर मेरे होंठो को चवाने लगी.....

सॉंग अपनी मस्ती मे बज रहा था और हम दोनो अपनी मस्ती मे एक-दूसरे के होंठो को चूस कर अपनी प्यास भुजा रहे थे .......

 
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