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चूतो का समुंदर

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थोड़ी देर बाद.......

शीला- उउउंम्म....आअहह...अब क्या चूस्ते ही रहोगे....

मैं- आहह...मैं तो तुम्हारा वेट कर रहा था कि कब तुम्हारी प्यास भुजे और कब मैं अपनी प्यास बुझाऊ...

शीला- मेरी प्यास इतनी आसानी से नही बुझेगी....बहुत टाइम से प्यासी हूँ...

मैं- ह्म..मैं हूँ ना....देखती जाओ...

फिर मैं शीला को गोद मे लिए ही उसके रूम मे ले गया और जाते ही मैने उसे खड़ा कर दिया...और दूर खड़ा हो गया....

शीला(हैरानी से)- क्या हुआ....

मैं- कुछ नही...बस देखना चाहता हू कि जिस ग्राउंड पर मुझे ड्रिलिंग करनी है...वो आख़िर दिखता कैसे है...ह्म..

शीला मेरा मतलब समझ गई...और शरमाते हुए नाइटी का बेल्ट खोलने लगी...और बेल्ट खोलते ही रुक गई....

शीला- उः हूँ....तुम आओ ना..मैं नही कर सकती....

मैं- अब शर्म आ रही है....ह्म्म..तुम सेक्सी नही बन सकती...

शीला से ये बात बोलना तो एक तीर के जैसा था...इसे सुनते ही शीला ने अपने हाथो से अपनी नाइटी निकाल फेकि और अपने हाथ खोल कर मेरे सामने खड़ी हो गई....

शीला- अब बोलो...मैं सेक्सी हूँ ना....

मैं(मुस्कुरा कर)- यू आर सो हॉट...बट सेक्सी....अभी कह नही सकते....

शीला(थोड़ा गुस्सा दिखा कर)- व्हाट...क्या मतलब कि कह नही सकते....

मैने शीला की बात का जवाब दिए बिना उसे घूर्णा सुरू कर दिया....वो साली नाइटी के अंदर बिल्कुल नंगी थी...ना ब्रा...ना पैंटी....

मुझे ऐसे घूरते हुए देख कर शीला फिर शर्मा गई और अपने बूब्स और चूत को अपने हाथो से छिपाने का नाकाम प्रयास करने लगी....

शीला(शरमाते हुए)- प्ल्ज़्ज़...ऐसे मत देखो...

मैं- शीला...यू आर सो हॉट...आइ वाना टेस्ट यू...नाउ....

और मैं उठ कर शीला के पास गया और उसके सामने घुटनो पर बैठ कर उसका हाथ चूत के उपेर से हटा दिया...

शीला- ओह..नो अंकित...नूऊओ.....उउउम्म्म्मम...

मैं- सस्स्स्र्र्ररुउुुुउउप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प.....(मैने शीला का हाथ हटा कर उसकी चूत पर अपनी जीभ फिरा दी...और शीला सिसक उठी.....)

मैं- यू आर सो टेस्टी...आज तो तुझे चवा डालूँगा......

शीला मुस्कुरा दी और मैने झुक कर अपनी जीभ निकाली...पर इससे पहले कि मैं शीला की चूत पर जीभ फिराता....किसी ने डोरबेल बजा दी और मैं रुक गया...और शीला घबरा गई......

 
अकरम के घर............

सोते -सोते रात हो गई...पर अकरम नही जगा...तब जूही उसे जगाने गई...और कुछ देर आवाज़ देने के बाद अकरम जाग गया ...

थोड़ी देर बाद अकरम फ्रेश हो कर बाहर आ गया और अपनी माँ-बेहन के साथ बैठ कर डिन्नर करने लगा....

खाना खाने का मन ना तो अकरम का था और ना ही सबनम का...पर फिर भी दोनो खाना खाते रहे..ताकि जूही और ज़िया को कोई शक ना हो....

अकरम और सबनम ने पूरे डिन्नर के दौरान एक बार भी एक-दूसरे को नही देखा...दोनो ही संकोच मे थे....

अकरम को ये लग रहा था कि क्या उसने अपनी माँ के साथ ऐसे बात कर के सही किया.....आज मोम को वो सच बोलने पर मजबूर किया जो उन्होने इतने सालो से छिपाया हुआ था....क्या ये सही किया मैने....वो भी ये जाने बिना की उन्होने आख़िर ऐसा क्यो किया ...क्यो..????

और दूसरी तरफ सबनम ये सोच रही थी कि असलियत जानने के बाद अकरम क्या सोचेगा, क्या करेगा....कितने ही सवाल उसके माइंड मे जाग गये होंगे....कैसे समझाउन्गी उसे.....

अकरम ने सबसे पहले डिन्नर ख़त्म किया और बिना किसी से बोले अपने रूम मे घुस गया......

सबनम उसका रबैईया देख कर थोड़ी सी घबरा गई....

सबनम(मन मे)- अकरम से बात करनी ही होगी...नही तो मेरा बच्चे का टेन्षन मे पता नही क्या हाल हो जायगा.....

फिर सबके रूम मे जाने के बाद सबनम चुपके से अकरम के रूम मे गई और रूम अंदर से लॉक कर दिया....

अकरम ने अपनी मोम को रूम मे खड़ा देखा तो चौंक गया...असल मे वो भी सबनम के रूम मे जाने की सोच रहा था ....पर सबनम खुद ही आ गई....

सबनम(अकरम के पास बेड पर बैठ कर)- बेटा...तुम ठीक हो ना....

अकरम- मोम....हाँ मोम...आइ एम फाइन.....

सबनम- मैं जानती हूँ बेटा...जो सच तुझे आज पता चला...वो तुम्हारे लिए कितना दर्दनाक है....और सही भी है...ऐसा सच वाकई मे किसी को भी परेशान कर सकता है....

अकरम- मोम...मैं ...मैं नही जानता कि आपने आज तक ये सच हमसे क्यो छिपाया....पर हाँ...अगर ये आप से पता चलता तो दर्द थोड़ा कम होता...पर....

इतना बोल कर अकरम चुप हो गया और दूसरी तरफ देख कर अपनी आँखो मे उभर आए आँसू छिपाने लगा.....

सबनम- बेटा...अपने आप को दर्द मत दो...मेरी बात सुनो...शायद पूरी बात सुन कर तुम्हारा दर्द कम हो जाए....

अकरम- मोम...मुझे भी पूरी बात जाननी है...पर सिर्फ़ आपके सच छिपाने की बात नही..बल्कि मुझे बहुत कुछ जानना है आपसे....

सबनम(चौंक कर)- क्या...और क्या बेटा....

अकरम ने उठ कर अपनी सेल्फ़ से कुछ फोटोस निकाली और बेड पर रख दी...जिसे देख कर सबनम एक बार फिर से हिल गई...

सबनम- बेटाअ...ये सब...कहाँ से...कैसे ...

अकरम- मोम...मैं आपको सब बताउन्गा...सब कुछ...पर पहले आप बताइए...ये सब कौन है...और इनका क्या रिश्ता है आपसे...मुझसे....डॅड से, आइ मीन वसीम ख़ान से...

सबनम अभी भी अपने सामने पड़ी हुई फोटोस को देख कर शॉक्ड मे थी...अकरम अपनी मोम के करीब आया और उसे कंधे पकड़ कर हिला दिया...

सबनम- ह..हा...

अकरम- प्ल्ज़ मोम..बताइए मुझे...ये सब कौन है...प्ल्ज़ मोम...

सबनम(अपने चेहरे को पोछ कर)- हुह...बेटा...ये सब...ये सब तेरे अपने है...तेरे परिवार वाले और ननिहाल वाले ....

अकरम- क्या...मोम...प्ल्ज़ सब सॉफ-सॉफ बताइए...मुझे पूरी बात जाननी है....ये सब कौन है...कहाँ है...और मेरे डॅड..उनके साथ क्या हुआ...और आपने वसीम ख़ान से शादी क्यो की...प्ल्ज़ मोम...मुझे सब कुछ बताइए...प्लज़्ज़्ज़्ज़...

सबनम ने अकरम के परेशान चेहरे को हाथ मे लिया और फिर सिर सहला कर उसे बोला...

सबनम- बैठो बेटा...मैं सब बताती हूँ...सुरू से.....

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फ्लेश बेक.....................

जावेद ख़ान एक बहुत ही इज़्ज़तदार इंसान थे....दौलत, सोहरत सब था उनके पास.....सहर मे उनका बहुत रुतवा था.....

उनकी बीवी परवीन भी एक बहुत ही अच्छी औरत थी....सुलझी हुई...और अपने सोहर को भगवान मानने वाली औरत...

दोनो ही मिया-बीवी बहुत ही ख़ुसनसीब थे पर कहते है ना कि...हर किसी को मुकम्मल जहाँ नही मिलता, किसी को ज़मीन तो किसी को आसमान नही मिलता....ऐसा ही कुछ जावेद और परवीन के साथ था....

असल मे जावेद ख़ान को कोई औलाद नही थी...दिनो मियाँ-बीवी ने काफ़ी कोसिस की पर उन्हे औलाद नसीब नही हुई....

पर एक दिन उनके रिलेटिव अली ख़ान ने अपने बड़े बेटे को सहर मे जावेद के पास रख दिया...पढ़ने के लिए...जिसका नाम था सरफ़राज़....

सरफ़राज़ ने जल्दी ही जावेद और परवीन का दिल जीत लिया...और कुछ सालो बाद जावेद ने अली से कह कर सरफ़राज़ को गोद ले लिया....

अनवर ख़ान , जावेद के बड़े भाई का बेटा था....लेकिन एक आक्सिडेंट मे जावेद के भाई और भाभी की मौत हो गई और अनवर अनाथ हो गया ...तो जावेद ने उसे भी गोद ले लिया....

अनवर , सरफ़राज़ से बड़ा था...इसलिए जावेद ने अनवर को अपना बड़ा बेटा और सरफ़राज़ को अपना छोटा बेटा बना लिया...

अनवर भी बढ़ा ही सीधा लड़का था...वो जावेद और परवीन को अपने सगे माँ-बाप से ज़्यादा इज़्ज़त देता था और सरफ़राज़ को भी छोटे भाई की तरह प्यार करता था....और सरफ़राज़ भी अनवर को बड़ा भाई मानता था.....

पूरा परिवार खुशी-खुशी जीवन जी रहा था....

अनवर के साथ स्कूल मे एक लड़की पढ़ती थी....सबनम ख़ान...जो अनवर की दोस्त थी और उसको बहुत पसंद थी...

बड़े होते -होते दोनो की दोस्ती प्यार मे तब्दील हो गई और दोनो ने शादी करने का फ़ैसला किया....

सबनम के डॅड परवेज़ ख़ान भी एक खानदानी रहीस थे...उनकी बीवी गुलनार थी...और उनकी सिर्फ़ 2 बेटियाँ थी...सबनम और सादिया....

जब परवेज़ ख़ान के सामने सबमम और अनवर के रिश्ते की बात आई तो उन्होने खुशी-ख़ुसी इस शादी के लिया रज़ामंदी दे दी ...

सबनम की शादी अनवर से हो गई...और कुछ सालों मे सबनम की 3 औलादे भी हो गई...

सबनम की बेहन की शादी भी सकील ख़ान से हो गई....वो भी एक पैसेवाला बंदा था...दुबई मे बिज़्नेस करता था....और साल मे 2-3 बार ही घर आता था.....पर सादिया फिर भी खुश थी....

कुल मिला कर दोनो परिवारों के सब लोग खुशी से अपनी जिंदगी जी रहे थे...

पर एक दिन अचानक एक ऐसा झटका लगा...जिसने सबको हिला दिया...

उस दिन अन्वर ख़ान किसी बिज़्नेस मीटिंग के लिए घर से निकला तो लौट कर नही आया...सिर्फ़ उसके हॉस्पिटल मे होने की खबर आई...उसका आक्सिडेंट हो गया था....

जब सब लोग हॉस्पिटल पहुँचे तो अनवर ने सबनम का हाथ थाम कर उसे एक वादा याद दिलाया और दम तोड़ दिया....

अनवर की मौत के बाद सबनम से सबको उस वादे के बारे मे पता चला.....जो ये था कि अनवर की मौत के बाद सबनम दूसरी शादी कर ले...

पर सबनम तैयार नही थी...फिर भी अनवर की आख़िरी ख्वाहिस पूरी करने के लिए सबनम ने हाँ कर दी...

अब सवाल ये थे कि सबनम की शादी किससे की जाए..जिस से सबनम और अनवर के बच्चो के साथ बुरा सलूक ना हो....

तभी सरफ़राज़ आगे आया और अपने भाई के बच्चो के फ्यूचर के लिए सबनम का हाथ थाम लिया....

 


सबनम की शादी तो हो गई पर 2 महीने तक सरफ़राज़ और सबनम ने एक-दूसरे को टच भी नही किया.....

पर उसके बाद हालात नॉर्मल होने लगे और सबनम सरफ़राज़ के साथ नई जिंदगी सुरू करने लगी...

पर एक तरफ हालात ठीक हुए ही थे कि तभी एक दिन दोनो परिवारों को एक और बड़ा झटका लगा....

एक दिन जावेद, परवीन, परवेज़, गुलनार और सकील कार से किसी के घर शादी मे गये हुए थे....

वहाँ से वापिस आते वक़्त कुछ लुटेरों ने उन्हे लूटने की कोसिस की....उन्होने जब विरोध किया तो लुटेरे सबको मार कर भाग गये....

एक साथ 5 मौतें...और वो भी सहर के नामी परिवारों से....इस खबर से पूरा सहर दहल उठा...बहुत खोज-बीन हुई...पर कुछ हाथ नही लगा....

इन मौतों ने एक बार फिर से सबनम, सफ़राज़ और सादिया को हिला कर रख दिया....उनकी जिंदगी जैसे रुक सी गई थी...

फिर सरफ़राज़ ने सबनम और सादिया को संभाला और उस सहर मे दोनो परिवारों की सारी प्रॉपर्टी बेच कर इस सहर मे आ गये....ताकि जिंदगी नये सिरे से सुरू कर सके.....

प्रेज़ेंट मे...............

पूरी बात बोलते-बोलते सबनम की आँखो से आँसू बहने लगे थे...और अकरम की आँखे भी नम हो गई थी....

सबनम(आसू पोछ कर)-आहह...तो ये था पूरा सच....इसके आगे का तो तुम जानते ही हो....

अकरम(नम आँखो से)- मोम...

अकरम सिर्फ़ इतना ही बोल पाता है और सबनम को कस के गले लगा कर रो पड़ता है....

सबनम भी अपने बेटे से लिपट कर अपने आप को रोक नही पाती और दोनो रोने लगते है...

थोड़ी देर बाद जब दोनो के दिल का दर्द कुछ कम हुआ तो अकरम अपनी मोम से अलग होता है और उसके आँसू पोछ देता है....

अकरम- मोम...नही...आप रोओ मत....मैं जान चुका हूँ कि आपने कुछ ग़लत नही किया...आपने जो भी फैशला लिया वो आपका नही बल्कि मेरे डॅड का था...प्ल्ज़ मों...चुप हो जाइए....

सबनम- नही बेटा...आज मुझे रो लेने दे...कब्से अंदर ही अंदर घुट रही थी...यही सोच कर कि मेरे बच्चो को सच कैसे बताऊ....

अकरम- बस कीजिए मों..चुप हो जाइए प्ल्ज़...

थोड़ी देर तक अकरम ने अपनी मोम को चुप करवाया और फिर दोनो फ्रेश हो कर बातें कर ने लगे....

सबनम- बेटा...अब मुझे ये तो बता कि तुझे ये सारी फोटोस कहाँ से मिली....

अकरम- वो...वो मोम...ये तो वसीम ख़ान के कवर्ड से मिली...

सबनम- बेटा...उनका नाम मत लो....अब वो तुम्हारे डॅड है...समझे...

अकरम- ओके मोम...डॅड बोलूँगा...पर एक बात और बताइए....

सबनम- हाँ बोलो...

अकरम- अगर डॅड का नाम ..आइ मीन दूसरे डॅड का नाम सरफ़राज़ था..तो ये वसीम ख़ान....

सबनम- ह्म्म...मुझे पता था तू ये ज़रूर पूछेगा....असल मे बेटा...इस सहर मे आने के बाद हमने न्यू लाइफ सुरू की...इसी के चलते सरफ़राज़ ने अपना नाम वसीम रख लिया...क्योकि उनका कहना था कि सरफ़राज़ नाम सुनते ही उनके जख्म हरे हो जाते है....इसलिए यहाँ उन्हे सब वसीम ख़ान के नाम से जानने लगे....

अकरम- ओह...तो ये बात है....अच्छा मोम...एक बात और बताओगी...

सबनम- जो भी पूछना है बेझिझक पूछ बेटा....

अकरम- क्या आप वसीम ख़ान की रियल फॅमिली के बारे मे कुछ जानती है...कुछ भी..आइ मीन...वो कहाँ है...कैसे है...

सबनम- हाँ...उनकी रियल फॅमिली के बारे मे बताया तो था....वो किसी गाँव मे रहते थे...और शायद किसी हादसे मे उनकी मौत हो गई यही...

अकरम- ओह्ह...ओके मोम....अब आप सो जाइए...

सबनम- बेटा....और भी कुछ पूछना हो तो ज़रूर पूछना...मैं सारे सवालो के जवाब दुगी....

अकरम- ह्म्म...कोई सवाल होगा तो ज़रूर पूछुगा मोम...अभी आप सो जाइए....

सबनम- ह्म्म..तो चल..तू भी सो जा..मैं आज अपने बेटे को खुद सुलाउन्गी...

फिर सबनम ने अकरम अपने साथ लिटा लिया और उसका सिर सहलाते हुए नीद की आगोश मे चली गई....अकरम अभी भी जाग रहा था.....

अकरम(मन मे)- मोम...अभी तो मुझे कई सवालो के जवाब चाहिए आपसे....पर अभी आप रेस्ट करो....बाकी सवाल सुबह पूछुगा.....

और अकरम अपनी मों की बताई गई बातों के बारे मे सोचता हुआ सो गया........

 
शीला के घर पर.........

डोर बेल बजते ही मैं और शीला चौंक गये....शीला तो घबरा ही गई थी....उसने जल्दी से अपनी नाइटी पहनी और मेरे साथ बाहर हॉल मे आ गई....

शीला- क्क़..कौन है....

वर्मा- मैं और कौन...खोल जल्दी..

शीला(मुझसे , धीरे से)- ओह माइ गॉड...मेरा पति आ गया...अब क्या होगा...

मैं- अरे...रिलॅक्स..कुछ नही होगा.... एक काम करो..गेट तब खोलना जब मैं छिप जाउ...और तेरे पति को अंदर आते ही बेडरूम मे ले जाना...तब तक मैं निकल जाउन्गा...ओके....

शीला- ऊ..ओके...

वर्मा- क्या हुआ...खोल ना...किसके साथ बिज़ी है...हाँ...

मैं- तुम गेट खोलो...मैं छिपता हूँ...

फिर मैं छिप गया और शीला ने गेट खोल दिया....

गेट खोलते ही वर्मा नशे मे लड़खड़ाता अंदर आया...उसे ड्राइवर पकड़े हुए था....

वर्मा- किसके साथ सो रही थी ...हाँ...

शीला- किसी के साथ नही...चलिए अंदर...कितनी पी रखी है...चलिए...

फिर शीला ने ड्राइवर को जाने को कहा और अपने पति को सहारा दे कर बेडरूम मे ले गई...

मैं भी मौका मिलते ही वहाँ से निकला और कार ले कर घर आ गया ....

मैं(मन मे)- बहन्चोद वर्मा...साले अभी ही आना था....भोसड़ी के कुछ देर बाद आता तो क्या बिगड़ जाता...

साला चूत मुँह ताल आ कर भी मुँह ना लगी....हॅट भैन्चोद....

मैं वर्मा को गालियाँ देते हुए घर पहुँच गया...

मैने सोचा कि किसी को डिस्टर्ब ना करू...इसलिए ड्यूप्लिकेट की (जो मेरे पास रहती थी) से गेट खोला और आराम से अंदर आ गया....

पर हॉल मे आते ही मुझे सुजाता के रूम की लाइट ऑन दिखी...

मैं(मन मे)- देखु तो...साली रंडी रूम मे कर क्या रही है...

मैं चुपके से गेट के पास गया और झुक कर कीहोल से देखने लगा...

सामने सुजाता लेटी हुई किसी से बातें कर रही थी...मैने कान लगा कर सुनना सुरू ही किया कि पहली लाइन सुन कर मेरा माथा ठनक गया......

सुजाता- बस भैया....कुछ दिन और...फिर आकाश भी ख़त्म और आज़ाद भी....दोनो मेरी मुट्ठी मे है....

सामने- $$$$$$$$$$$$$

सुजाता- हाँ भैया...ऐसा ही होगा....नही तो मैं भी सम्राट सिंग की बेटी नही.....

मैं- सुजाता...सम्राट सिंग की बेटी.....अब ये क्या चक्कर है.....??????

सुजाता की बात सुन कर तो मेरा दिमाग़ ही सुन्न पड़ गया.....

अब तक तो मैं ये सोच रहा था कि सुजाता सिर्फ़ दौलत के लिए हमारे पीछे पड़ी हुई है....पर यहा तो बात ही कुछ और है....

सुजाता तो सम्राट सिंग की बेटी है....मतलब सॉफ है...यहाँ कोई बड़ी गड़बड़ है....

क्योकि हो ना हो...सम्राट सिंग की दुश्मनी तो पैसो के लिए हो नही सकती....उसका तो खुद का महल है और साथ मे उसका शानदार घर....और फिर उसके गाँव मे उसका दव्दबा भी बहुत है...मतलब वो है तो रहीस इंसान....

तो अगर सम्राट हमारे पैसे के पीछे नही तो वजह क्या होगी....क्यो उसकी बेटी हमारे घर मे शादी कर के आई....क्या वजह हो सकती है....

मैं अपने माइंड मे सोचते-सोचते सुजाता के रूम से दूर आ कर सोफे पर बैठ गया था.....

एक मिनिट...क्या मेरे घरवालो को ये पता है कि उनके घर की बहू सम्राट की बेटी है....पहले ये बात पता करनी होगी....

मैने तुरंत फ़ोन निकाला और अपने आदमी से बात की....

( कॉल पर )

मैं- हेलो...आप कहाँ हो...

स- अभी तो घर पर हूँ...बोलो क्या हुआ...कुछ काम था....

मैं- घर पर हो...ओह...नही -नही..कोई काम नही था...बस मैने सोचा कि आप सीक्रेट हाउस पर होंगे....

स- सीक्रेट हाउस पर कुछ काम था क्या...

मैं- ह्म....नही ...कोई खास काम नही...कल सुबह मिलते है...फिर बात करेंगे...ओके...गुड'नाइट....

स- ओके...गुड'नाइट

जैसे ही मैने कॉल कट किया वैसे ही सुजाता के रूम का गेट खुल गया...और मैं उसके देखने के पहले उठ कर आगे जाने लगा....

सुजाता- अरे..अंकित बेटा...क्या कर रहे हो....सोए नही अभी तक....

मैं- नही आंटी...आक्च्युयली मैं संजू के घर गया था...बस अभी आया हूँ...

सुजाता- अभी आए...पर मुझे तो कोई आवाज़ नही आई...मतलब गेट किसने खोला....

मैं- किसी ने नही..मतलब मेरे पास एक की रहती है...तो बिना किसी को डिस्टर्ब किए आ गया....

सुजाता(मन मे)- थॅंक गॉड....आगे से ध्यान रखना होगा....कभी कुछ गड़बड़ भी हो सकती है...

मैं- वैसे आंटी आप क्यो जाग रही है अब तक...

सुजाता- म्म्मग..मैं...मैं तो बस...पता नही...मुझे नीद नही आ रही....

मैं- ओह..क्यो...कोई प्राब्लम...

सुजाता(मन मे)- यही सही मौका है...रात का वक़्त किसी को हुश्न के जाल मे फसाना आसान होता है...

मैं- क्या हुआ आंटी...कोई प्राब्लम है तो बोलो...

सुजाता- हाँ बेटा...प्राब्लम तो है...

मैं- बोलिए क्या प्राब्लम है...मैं सॉल्व करता हूँ...

सुजाता- ह्म्म..असल मे आज दिन मे मैने एक फिल्म देखी....मतलब उसका 1 सीन...

मैं- हाँ तो...सीन से क्या....

सुजाता- अरे बेटा...उस सीन को देखने के बाद ही से तो हालत खराब है मेरी...

मैं- ओह्ह...ऐसा क्या देख लिया ...मुझे बताइए...शायद मैं कुछ कर सकूँ....

सुजाता- हाँ बेटा....कर तो तू ही सकता है....और कोई नही...

मैं(मन मे)- ओह...शायद यही है जो कॅबिन मे स्मिता की चुदाई देख रही थी...देखता हूँ कि क्या बकती है....

सुजाता- क्यो बेटा करोगे ना...

मैं- मतलब...ऐसा क्या देख लिया आपने...बताओ तो सही...फिर मुझसे जो बन पड़ेगा वो करूगा....

सुजाता-ह्म्म...आओ रूम मे चल कर बात करते है....

मैं- रूम मे...हाँ क्यो नही...चलिए...पर मेरे रूम मे चलते है...

सुजाता - ह्म्म..चलो...

और फिर मैं सुजाता को साथ ले कर अपने रूम मे आ गया....

रूम मे आते ही हम बेड पर बैठ गये ....सुजाता आज फिर मुझसे चिपक कर बैठी थी....उसकी गान्ड मेरे जिश्म को छु कर हलचल मचा रही थी...

मैं- हाँ तो आंटी...अब बोलिए...क्या देखा आपने जिसने आपकी नीद उड़ा दी...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- आज मैने वो जाना...जिससे अंजान थी...असल मे ऐसा सोचा नही था कि ये इतना जानदार होगा...

मैं- क्या...मैं कुछ समझा नही...आप किस बारे मे बोल रही है...ज़रा खुल कर बताइए....

सुजाता- ह्म्म...बेटा ...वो आज ऑफीस मे...वो ऑफीस मे....

मैं- आप हिचकिचाईए मत...खुल कर बोलिए ....तभी तो मैं कुछ कर पाउन्गा....

सुजाता- ह्म्म..असल मे आज मैने तुम्हारे कॅबिन मे कुछ.....मैं वो..तुझसे मिलने आ रही थी कि...

सुजाता फिर खामोश हो गई ...मुझे बात समझ आ चुकी थी...पर मैं उसके मुँह से सब निकलवाना चाहता था....

मैं- मेरे कॅबिन मे क्या...और आप मुझसे मिलने कब आई...मुझे तो याद नही...

सुजाता- आई थी...पर अंदर आती उसके पहले ही कुछ देख कर वापिस चली गई...

मैं- वापिस क्यो....और क्या देख कर वापिस चली गई ...खुल कर बताइए ना....

सुजाता- कैसे कहूँ...वो तुम उस औरत से बात कर रहे थे ना...तो मैं ...

मैं(बीच मे)- ओह्ह...तो आप तब आई थी...असल मे वो औरत मेरी फ्रेंड है...एक काम से आई थी....

सुजाता(आँखे मटका कर)- हाँ...मैने देखा था...अच्छा काम किया उसका...

मैं(डरने का नाटक कर के)- क्क़..क्या मतलब...आपने क्या देखा....

सुजाता(मन मे)- ये तो घबरा रहा है...चलो...अब इसे डरा कर ही काम निकलवाती हूँ...

मैं- बोलिए आंटी..आपने क्या देखा....

सुजाता(कमीनी मुस्कान दे कर)- अब जो भी देखा ....वो तुम्हारे डॅड को बता दूगी...ओके...

मैं- ड्ड..डॅड को...पर देखा क्या...बोलिए तो...

सुजाता- अब भी नही समझे...अरे बच्चू...मैने सब देख लिया कि तू कौन सा काम कर रहा था उस औरत के साथ...मैं सब तेरे डॅड को बताउन्गी...

मैं(सिर झुका कर)- ओह नो...मतलब आपने सब देख लिया...

सुजाता- ह्म्म..और अब एक-एक बात तेरे डॅड को बोलुगी...

मैं(सुजाता के हाथ पकड़ कर)- नही आंटी...प्ल्ज़...डॅड से कुछ मत कहना...वो..वो मुझे मार डालेगे ..प्ल्ज़ आंटी...

सुजाता(हाथ झटक कर)- छोड़ मुझे ...और सुन..मैं तेरे डॅड को सब बता दूगी...कि तू कैसे काम करता है...हुह...

मैं- आंटी प्ल्ज़...ऐसा मत करना...मैं बर्बाद हो जाउन्गा...प्ल्ज़ आंटी...

सुजाता- अच्छा...चल नही बताती...पर तुझे मेरी बात माननी पड़ेगी...

मैं- आप जो बोलो आंटी...पर प्ल्ज़ ...डॅड को नही बताना...प्ल्ज़ ..

सुजाता(मन मे)- अब आया ना काबू मे...अब देख मैं क्या करती हूँ...अपने जिश्म की भूख भी मिटाउंगी और तुझे अपनी उंगलियों पर भी नचाउन्गी...

मैं- बोलो ना आंटी...क्या सोचने लगी..आप डॅड को नही बोलेगी ना...

सुजाता- ह्म्म..नही बोलुगी...पर तुझे मेरा कहा मानना पड़ेगा...

मैं- हाँ आंटी...मैने बोला ना कि मैं हर बात मानूँगा....आप बस हुकुम करो....

सुजाता- अच्छा...तो चल..रूम का गेट लॉक करके आ...फिर बताती हूँ...

मैं किसी नौकर की तरह उसकी आग्या का पालन करने लगा.....

 


सुजाता(मन मे)- अच्छा फसा बच्चू....सोचा नही था कि इतना आसान होगा...ये तो फत्तु निकला....आकाश की औलाद और फत्तु...लगता नही था...

मैं(मन मे)- आज तू जो करना चाहे कर ले....और आज तू सिर्फ़ मेरी आक्टिंग देख...बाद मे तुझे बताउन्गा कि मैं क्या चीज़ हू...

मैं गेट लॉक कर के आया तो देखा कि सुजाता बेड के सिरहाने से टिक कर आधी लेटी हुई थी...

सुजाता- हाँ...चल मेरे लिए एक पेग तो बना...गला सूख रहा है...

मैने तुरंत एक पेग बना कर दे दिया...

सुजाता(पेग लगाते हुए)- अब आजा...मेरे पैर दबा...बहुत थकान हो रही है...

मैं- जी आंटी ..अभी दबाता हूँ...

फिर सुजाता पेग लगाती रही और मैं उसके पैर दबाता रहा....

मेरे हाथ सुजाता के घुटनो से होते हुए उसकी नरम जाघो तक पहुँच गये थे....

मैने उसकी नरम जाघे दबाता और सुजाता सिसक पड़ती....थोड़ी देर बाद ही मैं और सुजाता दोनो गरम होने लगे...

मेरा लंड तो जल्दी ही तन गया था क्योकि मैं शीला के घर से बिना शांत हुए आया था...

सुजाता(मन मे)- अब इससे अपनी प्यास भुजवाती हूँ...और इसे तड़पाना भी तो है...

सुजाता ना मुझे रोक कर अपनी नाइटी निकाल दी और लेट कर मुझे अपने नंगे जिश्म के दीदार करवाने लगी...

सुजाता- उउंम...अब तू मेरी प्यास बुझा दे...

मैं- ओके..मैं कपड़े निकाल देता हूँ...

सुजाता- नही...ऐसे ही बैठा रह....तू बस मेरी चूत चाट...और कुछ नही...समझा...

मैं- जी आंटी...

सुजाता मेरा घबराया हुआ चेहरा देख कर खुश हो रही थी...और मैं अपने गुस्से को काबू किए हुए आक्टिंग किए जा रहा था....

मैं जैसे ही सुजाता के पैरों के पास आया तो उसके अपनी टांगे खोल कर अपनी चूत दिखा दी और मुझे आगे बढ़ने का इशारा कर दिया...मैने भी देर नही की और अपना मुँह चूत पर लगा दिया....

मैं- सस्स्स्रर्र्ररुउुुउउप्प्प्प्प्प्प....सस्स्र्र्ररुउुुउउप्प्प्प्प्प्प......

सुजाता- आआहह....बस ऐसे ही चाट...आअहह....

मैं- सस्स्स्र्र्ररुउुउउप्प्प्प.....सस्स्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प्प.....

सुजाता- उउउम्म्म्म....अच्छा चाट ता है तू....करते रहो....आअहह....

मैं(मन मे)- साली की चूत तो मस्त है....अभी टाइट लगती है...भोसड़ा नही बना इसका....खैर...मैं इसका भोसड़ा बना कर छोड़ूँगा....

सुजाता- आअहह....अब चाट ता ही रहेगा क्या....जीभ को चूत मे डाल और अंदर तक चाट...

मैने तुरंत जीभ को नुकीला कर के सुजाता की चूत मे डाल दिया और जीभ से चोदने लगा....

मैं- उउउंम्म...य्यी...य्यी...यययी....

सुजाता- आआहह...और अंदर...हाँ...ऐसे ही....पूरी जीभ घुसेड दे साले....आअहह....

मैं- यययी...य्यी...यययी...उूउउंम्म...

सुजाता- ओह माँ....क्या मस्त करता है कमीने....करता रह...ज़ोर से....

थोड़ी देर बाद सुजाता ने मेरा सिर चूत पर दबा दिया और उसकी पूरी चूत मेरे मुँह मे भर गई और मैं चूसने लगा....

मैं- उउउंम्म...उउउम्म्म्म....उउउम्म्म्म...उूउउम्म्म्म....

सुजाता- आआहह....चूस कमीने चूस....चूस कर निकाल ले पूरा रस...आअहह...ज़ोर से....उूउउम्म्म्म.....

मैं- उूउउम्म्म्म....उूउउंम्म....उूउउम्म्म्मम....उउउम्म्म्म....

सुजाता- आआहह....थोड़ा और....बस...ऐसे ही....आआहह....क्या चूस्ता है...उूउउम्म्म्ममम....

थोड़ी देर की चूत चुसाइ के बाद सुजाता ने अपना चूत रस मेरे मुँह मे छोड़ दिया...और मेरे सिर को और ज़ोर से चूत पर दबा दिया......

सुजाता- आआहह....निकल गया रे....आआओउउउम्म्म्म...पी ले साले.....पी ले....

सुजाता ने अपना चूत रस निकाल पिला कर मुझे अलग किया और लंबी-लंबी साँसे लेने लगी.....

सुजाता- ओह्ह्ह...क्या चूस्ता है तू...आअहह...मज़ा आ गया....बरसो बाद इतना झड़ी हूँ....आअहह...

मेरा लंड भी अब फुल फॉर्म मे आ चुका था...पर मैं चुप चाप बैठा रहा....

सुजाता- अब ऐसे ही मेरी बात मानते रहना...वरना....तू समझ गया ना...

मैं- जी आंटी...पर आंटी...मेरा भी मूड हो गया....तो...

सुजाता- तो जा बाथरूम मे और हिला ले...ये तो सोचना ही मत कि मैं तेरे नीचे आउगि...हुह...मैं चली सोने...तू हिलाता रह...और हाँ..मेरी बात याद रखना...समझा...

फिर सुजाता उठी और नाइटी पहन कर रूम से निकल गई....

मैने भी उसके जाते ही एक कॉल किया और फिर अपने आप से बातें करने लगा......

मैं(अपने आप से)- सॉरी अंकित...इतना जॅलील होने के लिए....पर क्या करू...दुश्मन को सामने लाने के लिए एक पुरानी तरकीब अपना रहा हूँ...सॉरी...

वो कहते है ना कि आप कमजोर पड़ जाओ तो दुश्मन अपने को होसियार समझ लेता है और होशियारी मे वो बेफ़िक्र हो कर बाहर आ जाता है फिर उसे मिटाना आसान हो जाता है....बस ..मैने भी वही किया...

सुजाता अपनी मस्ती मे कोई ग़लती ज़रूर करेगी...उसके पीछे छिपा मास्टरमाइंड बाहर ज़रूर आएगा....क्योकि सुजाता अकेले तो कुछ कर ही नही सकती....और एक बार मुझे वो मास्टरमाइंड हाथ लगेगा ना..फिर हिसाब चुकता करूगा....सूद समेत....

तभी मेरे रूम मे सविता एंटर हुई....

सविता- क्या हुआ बेटा...इतनी रात को क्यो बुलाया...सब ठीक है ना...

मैं- मुझे भूख लगी है....और तुम उसे मिटाओगी....

सविता(मुस्कुरा कर)- ओह...तो देर किस बात की...तुम्हारी भूख मिटाने तो मैं हमेशा तैयार रहती हूँ....

फिर क्या था..थोड़ी ही देर मे हम दोनो नंगे थे और सविता मेरे लंड को चूस रही थी....

सविता- उउउम्म्म्म...उउउंम्म...

मैं- चूस...और तेज...आज तेरी फाड़ कर रख दूँगा....

सविता अपना काम करती रही और मैं सुजाता का गुस्सा सविता पर निकालने को तैयार था....

मैने सविता को कुतिया बनाया और ताबड़तोड़ गान्ड मारने लगा....

मैने 2 घंटे तक सविता को चोदता रहा और जब मेरा गुस्सा उतर गया तो उसे भेज कर सो गया.....

 


अकरम के घर..............

रात भर अकरम अपनी मोम की आगोश मे सोता रहा....और जब जगा तो उसका दिमाग़ हल्का हो चुका था ...

शायद ये मोम के प्यार का असर था....पर जागते ही अकरम ने अपने आपको ऐसी कंडीशन मे पाया कि वो सकपका गया....

सबनम उसे अपने सीने से चिपकाए हुए सो गई थी...और अकरम के जागने पर सबनम का भरा हुआ सीना उसके मुँह के सामने था...या यू कहे कि अकरम का मुँह अपनी मोम के सीने मे दबा हुआ था....

अकरम की आँखो के सामने उसकी मोम के बड़े बूब्स का कुछ हिस्सा सॉफ दिख रहा था....

क्योकि सबनम ने एक ढीली सी नाइटी पहनी हुई थी...जिसमे उसके बूब्स का कुछ हिस्सा और उनके बीच की गहराई अकरम की आँखो के सामने आ गई थी...

अकरम इस कंडीशन मे अपने आपको असहज महसूस कर रहा था....पर फिर भी बार-बार उसकी आँखे बूब्स की गहराई मे अटक जा रही थी....

अकरम बड़े पसोपेश मे था...ना तो वो झटका देकर अपनी मोम की नीद खराब करना चाहता था..और ना ही वो अपनी मोम को इस हालत मे देखना चाहता था....पर करे तो करे क्या...वो जानता था कि उसके सिर हटते ही उसकी मोम की नीद टूट जाएगी...

कुछ देर तक अकरम यू ही पड़ा रहा...और सामने का नज़ारा देख कर तेज साँसे लेने लगा....

उसकी साँसे अब गरम हो चुकी थी और तेज़ी की वजह से सबनम के बूब्स पर टकरा रही थी....

कुछ देर बाद सासो ने अपना असर दिखा ही दिया और सबनम कसमसा कर उठ गई....

सबनम के जागते ही अकरम ने आँखे मूंद ली और सोने का नाटक करने लगा....वो अभी अपनी मोम का सामना नही करना चाहता था....

सबनम इस सब से बेख़बर उठ गई और अपने बेटे को सोता छोड़ कर रूम से निकल गई....

अकरम- उउउफफफफ्फ़.....अच्छा हुआ मोम जाग गई....

थोड़ी देर बाद सबने फ्रेश हो कर नाश्ता किया और फिर अकरम अपने रूम मे आ कर उस खुपिया रूम मे मिली चीज़ो को देखने लगा.....

सबसे पहले उसने वो पर्चे पड़े जो फोटोस के साथ अटेच थे....उनमे कुछ खास नही था...बस उस फोटो की फुल डीटेल थी....

लेकिन उनमे से एक पर्चे की डीटेल पढ़ कर अकरम को झटका लगा और उसने कुछ सोच कर उस पर्चे को अलग रख लिया...

फिर अकरम ने मॅप्स टाइप के पेपर्स देखना सुरू किया....

पहला पेपर अली की फॅमिली से रिलेटेड था...जिसे देखने पर पता चलता था कि अली की फॅमिली को आज़ाद ने ख़त्म किया है....

अकरम- ह्म्म...तो यहा से शुरुआत हुई है...अंकित ने सच बोला था...पर क्या सच यही है जो दिख रहा है...या फिर सच कही छिपा हुआ है...

फिर अकरम ने जावेद और परवेज़ की फॅमिली का माप देखा....दोनो मे वो सब मेंबर थे जो सबनम ने बताए....

पर मॅप्स के हिसाब से दोनो के अंत मे सरफ़राज़ का नाम लिखा था...पर और कोई डीटेल नही थी...

अकरम- इसका क्या मतलब...क्या ये कि इन फॅमिलीस मे इकलौता मर्द सफ़राज़ बचा है....या कुछ और....ह्म्म...पता करना होगा...

अकरम ने सब सामान धीरे-धीरे चेक कर लिया....पर उसे कोई ऐसा सबूत नही मिला जो साबित करे कि सरफ़राज़ उर्फ वसीम ने ही अंकित की फॅमिली के खिलाफ सब साज़िश रची है....

अकरम- अंकित ने बताया था कि रिचा , वसीम ख़ान से मिली हुई है...पर यहा रिचा का नाम तक नही...क्या अंकित सही है...क्या रिचा ने उसे सच बोला....उउउहह...कैसे पता लगेगा....

अकरम ने सब समान चेक कर के रख दिया और कुछ याद कर के वापिस ख़ुफ़िया रूम मे निकल गया....

अकरम सबकी नज़रों से बच कर ख़ुफ़िया रूम मे दुबारा आ गया...और एक बार फिर से तलासी लेने लगा ...

इस बार अकरम ने एक-एक-दीवाल को ठोक-ठोक कर चेक करना सुरू कर दिया...

ठोकते हुए उसे एक दीवाल के एक हिस्से पर कुछ महसूस हुआ...

अकरम- यस...अंदाज़ा सही निकला...यहाँ दीवार पोली है...यहा ज़रूर कुछ मिलेगा....

अकरम ने फिर उस हिस्से को ध्यान से चेक करना सुरू किया...जैसे कुछ ढूढ़ रहा हो...

आख़िरकार उसकी तलाश पूरी हुई...उसे एक उंगली फसाने की जगह मिल गई...और जैसे ही उसने उंगली फसा कर खीचा तो दीवाल के बीच मे एक अलमारी सी खुल गई...

अकरम- ह्म्म..अब देखु तो..कि ये ख़ुफ़िया अलमारी क्यो बना रखी है...

उस अलमारी को चेक करने पर अकरम को कई पेपर्स और 1 मोबाइल मिला...

अकरम ने जल्दी से सब समेटा और अलमारी बंद कर के रूम से निकल गया....

इससे पहले की अकरम कुछ चेक करता...उसकी बेहन ज़िया उसे बुलाने आ गई...

अकरम- ओह्ह्ह...अब इसे क्या काम है...

अकरम ने पूरा सामान सावधानी से छिपाया और ज़िया के पास आ गया...

ज़िया अकरम को अपने साथ मार्केट ले गई...अकरम जाना नही चाहता था पर मजबूर था....असल मे उनकी सभी कार रुटीन चेकप के लिए गॅरेज गई थी...सिर्फ़ अकरम की बाइक थी...तो उसे ज़िया को साथ ले कर जाना पड़ा.....

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अंकित के घर ......

जब मैं सुबह सो कर उठा तो मेघा मेरा इंतज़ार कर रही थी....

मेघा को देखते ही मुझे उसकी की गई बदतमीज़ी याद आ गई...और मुझे गुस्सा आ गया.....

मैं- तुम जिम मे जाओ...मैं आता हूँ...

थोड़ी देर बाद मैं जिम मे पहुँचा तो मेघा वॉर्म-अप कर रही थी....

आज मैं इसे सबक सिखाना चाहता था...इसलिए मैने आते ही गेट को अंदर से लॉक कर दिया....और मेघा के पास पहुँचा....

मैं- ह्म्म...तो अब क्या यही करती रहोगी...कुछ और नही करना...

मेघा- वो...तुम बताओ तो करूगी ना...

मैं- ह्म्म...तो जाओ...कपड़े निकाल कर आओ...

मेघा(सकपका कर)- मतलब...

मैं- मतलब ये कि जाओ...और नंगी हो कर आओ...जाओ...

मेघा(हैरानी से)- अंकित...ये क्या कह रहे हो...क्या हो गया तुम्हे....

मैं- क्या हो गया...हैरान हो...हाँ...

मेघा- ह..हाँ...तुम..तुम तो ऐसे नही थे...अचानक..

मैं(बीच मे)- तो क्या...मेरी सराफ़त के बदले मुझे क्या मिला....बस जॅलील हो गया..हाा...

मेघा- जॅलील ....किसने किया जॅलील...तुम क्या कह रहे हो...

मैं(गुस्से से)- बस...ये बता कि कपड़े निकालती है कि नही...वरना जा यहाँ से...

मेरी बात सुनकर मेघा की आँखो मे आसू आ गये...

मेघा- क्या हो गया तुम्हे...तुम किसी औरत की बेज़्जती तो नही करते थे...

मैं(बीच मे)- सही कहा....मैं औरतों की रेस्पेक्ट करता हू...किसी क्व साथ जबर्जस्ति नही करता...पर इसका मतलब ये नही कि कोई भी औरत मुझे जॅलील करे और मैं चुप रहूं....

मेघा- पर...पर मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा जो तुम मुझसे ऐसे...

मैं(बीच मे)- क्या बिगाड़ा...भूल गई....एक दिन तो खुद मेरी बाहों मे आ गई और फिर दूसरे दिन मुझे धूतकार दिया...हाँ...

मेघा- वो..वो तो मैं...

मैं(बीच मे)- चुप...एक बात बता..मैने तुझे मजबूर किया था क्या कि मेरी बाहों मे आ जा...तू खुद आई थी ना...अपने मन से किस किया था ना...बोल...

मेघा- हाँ..मैं अपनी मर्ज़ी से आई थी...

मैं(बीच मे)- तो फिर...फिर क्या हुआ..दूसरे दिन मुझे फटकार लगा दी...मुझे बदतमीज़ बोल दिया...

मेघा- वो तो मैं ...

मैं(बीच मे)- तूने मुझे समझ क्या रखा है...जब मन चाहा बाहों मे ले लिया और जब मन चाहा धूतकार दिया....

मेघा- नही..मैने ऐसा कभी नही सोचा...

मैं- तो फिर क्यो किया मुझे जॅलील...हाँ...

मेघा- क्योकि मैं मजबूर थी...

मैं- मजबूर ...हाहाहा...क्या मज़ाक है...अरे सच तो ये है कि तू मर्दो को क्या समझती है....जब जो मन किया तो कर दिया..हाँ...पर मेघा मेडम...हम उनमे से नही...हम औरत के पीछे नही जाते..वो खुद अपने नीचे आती है...समझी....और तुझ जैसी औरत...मैं थूकता हूँ...तूओ....

मेघा- बस...बस करो...पहले पूरी बात सुन लो ..फिर चाहे तो मुझे मार डालना...पर प्ल्ज़ ...मेरी बात सुन लो...

मेघा ने ये बात ज़ोर से बोली...जिस से मैं चौंक गया...मैने सोचा कि चलो सुन तो लूँ कि ये क्या बोल रही है...

मैं- ओके...बोल...क्या बोलना है...

मेघा- अंकित...मैं कोई सड़क छाप औरत नही...जो जिश्म की भूख मिटाने मर्द ढूड़ती फिरू....सच ये है कि जबसे मैने तुम्हारे बारे मे सुना...मैं तुम्हे पसंद कर ने लगी थी...तुम सेक्स मे एक्सपर्ट हो ..मैं जानती हूँ...पर तुम ग़लत इंसान नही...किसी को फोर्स नही करते...फ़ायदा नही उठाते...तुम औरत की मर्ज़ी से उसे भोगते हो...यही सब सुन कर मैं तुम्हारे करीब आई....दूसरी वजह ये थी कि मेरे पति की कमर के दर्द की वजह से वो ठीक से सेक्स सुख नही दे पाते थे...उपेर से कुछ दिनो से उन्होने मुझे हाथ लगाना भी बंद कर दिया....तो मेरी भूख भड़क उठी और उसे मिटाने का सबसे अच्छा रास्ता तुम थे...ये बात मुझसे भाभी(रजनी) ने कही थी...कि तुम भरोसेमंद हो...और सेक्स मे भी अच्छे हो....

मैं- ये सब ठीक है...पॉइंट पर आओ...तुमने उस दिन मुझे धूतकारा क्यो...जबकि उसके पहले तुम मेरी बाहों मे आ गई थी....

मेघा- उसकी वजह है एक कैमरा...जो शायद मेरे पति ने रूम मे लगाया है ताकि मुझ पर नज़र रख सके...

मैं- व्हाट...तुम्हारे पति ने कैमरा लगाया...पर क्यो...

मेघा- नही पता...शायद मुझ पर शक हो...इसी लिए मैने सिर्फ़ उन्हे दिखाने को तुम्हे रूम से निकाल दिया था....

मैं- अच्छा...पर कैमरे का पता तुम्हे कैसे चला....

मेघा- वो एक दिन उनको अड्जस्ट करते देख लिया था...

मैं- ओह माइ...तो ये बात थी...और मैं...

मेघा(सुबक्ते हुए)- हाँ..और तुम्हे तो मुझे...

मेघा रोने लगी और मैने आगे बढ़कर उसे गले से लगा लिया...

मैं- सॉरी..आइ एम सॉरी मेघा....मैने बिना जाने ही तुम्हे क्या-क्या सुना दिया...पर तुमने मुझे बोला क्यो नही...

मेघा- कैसे बोलती...मौका ही नही मिला...और आज बोलना था कि उसके पहले ही तुम भड़क उठे...

मैं- ओह...सॉरी यार...सो सॉरी...

मैं मेघा को बिल्कुल अपनी गर्लफ्रेंड की तरह मना रहा था और देखते ही देखते मैं उसे किस करने लगा...मेघा ने भी रेस्पोन्स देते हुए मुझे किस करना सुरू कर दिया....

पर तभी गेट पर सुजाता की आवाज़ सुनाई दी और मैने मेघा को अलग कर के गेट ओपन किया..

सुजाता- चल...तुझसे काम है...

मैं- जी आंटी...अभी आया...

सुजाता- आया नही...आजा...अभी..

मैं- ओके...

फिर मैने मेघा को कसरत करने का बोला और सुजाता के पीछे चल पड़ा...

मैं(मन मे)- ये साला मेघा का पति भी ...बड़ा स्मार्ट बनता है...इसे सबक सिखाना होगा...पर उसके पहले इस सुजाता की बच्ची को लाइन पर लाना है.....

और कुछ देर बाद मैं सुजाता के साथ घर से ऑफीस निकल गया......

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